Sunday, 03 May 2026 | 08:07 PM

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भोपाल नगर निगम घोटाला- अपर आयुक्त सेवतकर को हटाया:लोकायुक्त ने की थी FIR; बजट से पहले कमिश्नर ने हटाकर दूसरे को सौंपा वित्त विभाग

भोपाल नगर निगम घोटाला- अपर आयुक्त सेवतकर को हटाया:लोकायुक्त ने की थी FIR; बजट से पहले कमिश्नर ने हटाकर दूसरे को सौंपा वित्त विभाग

भोपाल नगर निगम की वित्त एवं लेखा शाखा में अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर को कमिश्नर संस्कृति जैन ने हटा दिया। लोकायुक्त ने उन पर एफआईआर दर्ज की थी। उनकी जगह अपर आयुक्त मुकेश शर्मा को प्रभार सौंपा गया है। कुछ दिनों में नगर निगम का बजट पेश होना है। जिसे बनाने का जिम्मा सेवतकर के पास ही था। बता दें कि नगर निगम में बिना काम कराए फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपए निकालने के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की थी। टीम ने निगम के डाटा सेंटर समेत कई शाखाओं में छापेमारी कर पिछले करीब 10 साल के दस्तावेज और सर्वर डाटा जब्त कर लिया था। इस मामले में सेवतकर समेत अन्य पर विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया था। एफआईआर के बाद शनिवार को कमिश्नर जैन ने सेवतकर को हटाने की कार्रवाई की। कोर्ट से सर्च वारंट लेकर की थी छापेमारी निगम में फर्जी भुगतान की शिकायत नवंबर 2025 में लोकायुक्त को मिली थी। प्रारंभिक जांच में तथ्य सही पाए जाने पर 9 मार्च को आयुक्त गुणवंत सेवतकर के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी की धाराओं में FIR दर्ज की गई है। इसके बाद कोर्ट से सर्च वारंट लेकर छापेमारी की गई थी। ये गड़बड़ी आई थी सामने आरोप है कि नगर निगम के जलकार्य, सामान्य प्रशासन और केंद्रीय वर्कशॉप जैसे विभागों के नाम पर वाहनों की मरम्मत, पेंटिंग और अन्य काम दिखाए गए। कई मामलों में वास्तव में काम हुआ ही नहीं, लेकिन सिस्टम में ई-बिल तैयार कर दिए गए। कुछ मामलों में जिस विभाग के नाम से बिल बनाए गए, उन्हें ही इसकी जानकारी नहीं थी। इन जगहों पर हुई थी छापेमारी लोकायुक्त पुलिस ने निगम के लेखा शाखा, कंप्यूटर शाखा, डाटा सेंटर, लिंक रोड-2 स्थित मुख्य कार्यालय और फतेहगढ़ स्थित पुराने कार्यालय में एक साथ छापेमारी की। लोकायुक्त का कहना है कि डिजिटल डाटा और दस्तावेजों की जांच के बाद मामले में अन्य कर्मचारियों और फर्मों की भूमिका भी सामने आ सकती है। SAP सॉफ्टवेयर का डाटा जब्त किया प्रारंभिक जांच में मोटर वर्क शाखा, जल कार्य विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग से जुड़े कुछ कार्यों में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। जांच टीम ने भुगतान से जुड़े SAP सॉफ्टवेयर का डिजिटल डाटा भी कब्जे में लिया है। अब इसकी जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि किन-किन कार्यों के नाम पर भुगतान किया गया और वास्तव में काम हुआ भी था या नहीं। इस मामले में अपर आयुक्त ने कहा- कमिश्नर से चर्चा के बाद भुगतान इस मामले में अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर ने कहा था कि लेखा शाखा में बिल सीधे तैयार या पास नहीं किए जाते। बिल संबंधित विभागों से सत्यापन के बाद आते हैं और फंड की उपलब्धता के अनुसार नगर निगम आयुक्त से चर्चा के बाद भुगतान किया जाता है।

ब्लैक कॉफी से लेकर नारियल पानी तक, डॉक्टर ने बताई ड्रिंक्स की असली रैंकिंग, ये वाली खतरनाक!

‘गोलमाल 5’ में बड़ा सरप्राइज! अजय देवगन संग अक्षय कुमार मचाएंगे धमाल

Last Updated:March 14, 2026, 23:53 IST आजकल लोग हेल्दी रहने के लिए कई तरह की ड्रिंक्स पीते हैं, लेकिन हर ड्रिंक शरीर के लिए फायदेमंद नहीं होती. एक डॉक्टर ने पॉपुलर ड्रिंक्स को रेट करके बताया कि कौन-सी ड्रिंक्स इंफ्लेमेशन कम करती हैं और कौन-सी इसे बढ़ा सकती हैं. हैरानी की बात यह रही कि ब्लैक कॉफी और पैक्ड नारियल पानी को इस लिस्ट में कम स्कोर मिला. आजकल लोग हेल्थ को लेकर पहले से ज्यादा सजग हो गए हैं. डाइट, एक्सरसाइज और लाइफस्टाइल के साथ-साथ यह भी मायने रखता है कि हम रोज क्या पीते हैं. कई ड्रिंक्स ऐसी होती हैं जिन्हें लोग हेल्दी समझकर पीते हैं, लेकिन असल में वे शरीर में सूजन यानी इंफ्लेमेशन बढ़ा सकती हैं. हाल ही में एक ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. एथन केलम ने कुछ पॉपुलर ड्रिंक्स को उनके हेल्थ इफेक्ट के आधार पर रेट किया और बताया कि कौन-सी ड्रिंक शरीर के लिए बेहतर है और कौन-सी नुकसान कर सकती है. इंफ्लेमेशन शरीर की एक नेचुरल प्रक्रिया है, जो चोट या इंफेक्शन के समय शरीर को ठीक करने में मदद करती है. लेकिन अगर यह लंबे समय तक बनी रहे तो यह कई गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती है. इसलिए यह जानना जरूरी है कि रोज पी जाने वाली ड्रिंक्स शरीर पर किस तरह असर डालती हैं. ग्रीन टी को मिला सबसे ज्यादा स्कोरडॉक्टर के अनुसार अगर इंफ्लेमेशन कम करने की बात करें तो ग्रीन टी सबसे बेहतर ड्रिंक मानी गई. इसे 10 में से 10 अंक दिए गए. ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं, खासकर कैटेचिन नाम का कंपाउंड, जो शरीर में सूजन कम करने में मदद करता है. इसके अलावा इसमें कैलोरी और शुगर भी बहुत कम होती है, इसलिए इसे रोज पीना सेफ माना जाता है. View this post on Instagram

कनाडा में पंजाबी युवक की गोली मारकर हत्या:किडनैपर से बचकर भागी महिला उसकी टैक्सी में बैठी, बदमाशों ने घेर कर की फायरिंग

कनाडा में पंजाबी युवक की गोली मारकर हत्या:किडनैपर से बचकर भागी महिला उसकी टैक्सी में बैठी, बदमाशों ने घेर कर की फायरिंग

कनाडा में मोगा जिले के एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। वह वहां टैक्सी चलाता था। उसकी टैक्सी में बैठी महिला का कुछ बदमाश पीछा कर रहे थे। उन्होंने टैक्सी पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी जिससे युवक की मौके पर मौत हो गई। मृतक गांव दौलतपुरा नीवां निवासी दविंदर सिंह चार साल पहले कमाने के लिए कनाडा गया था। उसकी मौत की सूचना से गांव में शोक का माहौल है। कनाडा पुलिस ने घटना स्थल पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है। अपहर्ताओं की चंगुल से बचकर निकली महिला बैठी थी टैक्सी में जानकारी के अनुसार, दविंदर सिंह अपनी टैक्सी में ड्यूटी पर था। इसी दौरान एक महिला उसकी गाड़ी में आकर बैठ गई। बताया जा रहा है कि इस महिला को कुछ लोगों ने पहले अगवा किया था और वह उनके चंगुल से भागकर टैक्सी में आई थी। वह उसको लेकर चला था। दविंदर की हत्या के बाद महिला को अपने साथ ले गए आरोपी कुछ ही देर बाद, महिला का पीछा कर रहे हथियारबंद व्यक्ति मौके पर पहुंच गए। उन्होंने टैक्सी पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं, जिससे टैक्सी चालक दविंदर सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर महिला को अपने साथ लेकर फरार हो गए। दविंदर सिंह की मौत की खबर मिलते ही उसके पैतृक गांव दौलतपुरा नीवां में मातम छा गया है। ग्रामीणों के अनुसार, दविंदर सिंह काफी समय से विदेश में रहकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहा था। परिवार के सदस्यों और गांव के लोगों ने सरकार से मामले की गहन जांच कर आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने और कड़ी सजा देने की मांग की है।

छतरपुर में 12 एकड़ फ्रूट फॉरेस्ट का निरीक्षण:कलेक्टर ने फलदार पौधों के बीच इंटरक्रॉपिंग और डेयरी गतिविधियां बढ़ाने के दिए निर्देश

छतरपुर में 12 एकड़ फ्रूट फॉरेस्ट का निरीक्षण:कलेक्टर ने फलदार पौधों के बीच इंटरक्रॉपिंग और डेयरी गतिविधियां बढ़ाने के दिए निर्देश

छतरपुर के प्रभारी कलेक्टर एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी नमः शिवाय अरजरिया ने देरी रोड स्थित 12 एकड़ में विकसित फ्रूट फॉरेस्ट का शनिवार को निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने इसके संचालन और रख-रखाव की समीक्षा की, साथ ही अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। यह फ्रूट फॉरेस्ट शासकीय बंजर भूमि के सदुपयोग के उद्देश्य से विकसित किए जा रहे हैं। देरी रोड पर स्थित यह विशेष फ्रूट फॉरेस्ट खनिज विभाग द्वारा तैयार किया गया है। लगभग 12 एकड़ क्षेत्र में फैले इस वन में 12 हजार फलदार पौधे लगाए गए हैं, जिनमें आम, अमरूद, जामुन, आंवला, चीकू, अनार और करोंदा जैसी प्रजातियां शामिल हैं। इनमें से कई पौधे अब फल देने की स्थिति में आ गए हैं। निरीक्षण के दौरान, प्रभारी कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फ्रूट फॉरेस्ट को स्व-सहायता समूहों से जोड़ा जाए। इसका उद्देश्य सब्जियों और अन्य इंटरक्रॉपिंग फसलों का उत्पादन बढ़ाना है। उन्होंने स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर सृजित करने के लिए डेयरी गतिविधियां शुरू करने के भी निर्देश दिए। इस अवसर पर जिला खनिज अधिकारी अमित मिश्रा और जिला परियोजना प्रबंधक आजीविका मिशन श्याम गौतम सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

धुरंधर एक्टर रणवीर को विक्की कौशल ने किया रिप्लेस:साउथ सुपरस्टार धनुष के ड्रीम प्रोजेक्ट में नई एंट्री, एस शंकर करेंगे फिल्म का निर्देशन

धुरंधर एक्टर रणवीर को विक्की कौशल ने किया रिप्लेस:साउथ सुपरस्टार धनुष के ड्रीम प्रोजेक्ट में नई एंट्री, एस शंकर करेंगे फिल्म का निर्देशन

साउथ सिनेमा के दिग्गज निर्देशक एस. शंकर के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘वेलपरी’ को लेकर नया अपडेट सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मेगा बजट फिल्म में अब रणवीर सिंह की जगह विक्की कौशल नजर आ सकते हैं। फिल्म में साउथ सुपरस्टार धनुष पहले से ही अहम भूमिका में बताए जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘वेलपरी’ में दूसरे लीड रोल के लिए पहले रणवीर सिंह का नाम चर्चा में था। हालांकि अब वलाई पेचु की एक रिपोर्ट के अनुसार मेकर्स इस किरदार के लिए विक्की कौशल से बातचीत कर रहे हैं और उन्हें कास्ट करने की योजना बना रहे हैं। हालांकि फिल्म की स्टारकास्ट को लेकर अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि फिल्म की कहानी प्रसिद्ध तमिल उपन्यास ‘वीर युग नायकन वेल परी’ पर आधारित है, जिसे लेखक सु. वेंकटेशन ने लिखा है। यह कहानी प्राचीन तमिलनाडु के प्रसिद्ध और उदार शासक वेलपरी के जीवन पर आधारित मानी जाती है। फिल्म को बड़े स्तर पर ऐतिहासिक ड्रामा के रूप में बनाने की तैयारी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, निर्देशक शंकर इस प्रोजेक्ट को लंबे समय से बनाना चाहते थे और इसे अपना ड्रीम प्रोजेक्ट मानते हैं। खबर यह भी है कि फिल्म के लिए धनुष से लंबी डेट्स मांगी गई हैं क्योंकि इसे बड़े पैमाने पर शूट करने की योजना है। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार होता है, तो दर्शकों को पहली बार बड़े पर्दे पर धनुष और विक्की कौशल की नई जोड़ी देखने को मिल सकती है। वहीं रणवीर सिंह का नाम फिलहाल इस प्रोजेक्ट से बाहर बताया जा रहा है। वर्कफ्रंट की बात करें तो धनुष आने वाले समय में कई बड़े प्रोजेक्ट्स में नजर आने वाले हैं। वहीं विक्की कौशल भी कई फिल्मों में व्यस्त हैं और उनकी परफॉर्मेंस को लेकर इंडस्ट्री में काफी चर्चा रहती है। फिलहाल ‘वेलपरी’ को लेकर मेकर्स की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। अगर विक्की कौशल इस फिल्म में शामिल होते हैं तो यह बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के बीच एक और बड़ी कोलैबोरेशन मानी जाएगी।

धुरंधर एक्टर रणवीर को विक्की कौशल ने किया रिप्लेस:साउथ सुपरस्टार धनुष के ड्रीम प्रोजेक्ट में नई एंट्री, एस शंकर करेंगे फिल्म का निर्देशन

धुरंधर एक्टर रणवीर को विक्की कौशल ने किया रिप्लेस:साउथ सुपरस्टार धनुष के ड्रीम प्रोजेक्ट में नई एंट्री, एस शंकर करेंगे फिल्म का निर्देशन

साउथ सिनेमा के दिग्गज निर्देशक एस. शंकर के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘वेलपरी’ को लेकर नया अपडेट सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मेगा बजट फिल्म में अब रणवीर सिंह की जगह विक्की कौशल नजर आ सकते हैं। फिल्म में साउथ सुपरस्टार धनुष पहले से ही अहम भूमिका में बताए जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘वेलपरी’ में दूसरे लीड रोल के लिए पहले रणवीर सिंह का नाम चर्चा में था। हालांकि अब वलाई पेचु की एक रिपोर्ट के अनुसार मेकर्स इस किरदार के लिए विक्की कौशल से बातचीत कर रहे हैं और उन्हें कास्ट करने की योजना बना रहे हैं। हालांकि फिल्म की स्टारकास्ट को लेकर अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि फिल्म की कहानी प्रसिद्ध तमिल उपन्यास ‘वीर युग नायकन वेल परी’ पर आधारित है, जिसे लेखक सु. वेंकटेशन ने लिखा है। यह कहानी प्राचीन तमिलनाडु के प्रसिद्ध और उदार शासक वेलपरी के जीवन पर आधारित मानी जाती है। फिल्म को बड़े स्तर पर ऐतिहासिक ड्रामा के रूप में बनाने की तैयारी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, निर्देशक शंकर इस प्रोजेक्ट को लंबे समय से बनाना चाहते थे और इसे अपना ड्रीम प्रोजेक्ट मानते हैं। खबर यह भी है कि फिल्म के लिए धनुष से लंबी डेट्स मांगी गई हैं क्योंकि इसे बड़े पैमाने पर शूट करने की योजना है। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार होता है, तो दर्शकों को पहली बार बड़े पर्दे पर धनुष और विक्की कौशल की नई जोड़ी देखने को मिल सकती है। वहीं रणवीर सिंह का नाम फिलहाल इस प्रोजेक्ट से बाहर बताया जा रहा है। वर्कफ्रंट की बात करें तो धनुष आने वाले समय में कई बड़े प्रोजेक्ट्स में नजर आने वाले हैं। वहीं विक्की कौशल भी कई फिल्मों में व्यस्त हैं और उनकी परफॉर्मेंस को लेकर इंडस्ट्री में काफी चर्चा रहती है। फिलहाल ‘वेलपरी’ को लेकर मेकर्स की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। अगर विक्की कौशल इस फिल्म में शामिल होते हैं तो यह बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के बीच एक और बड़ी कोलैबोरेशन मानी जाएगी।

मेरे फॉर्मूले से परे: समाजवादी पार्टी ने 2027 यूपी चुनाव नजदीक आते ही ब्राह्मणों तक पहुंच का संकेत दिया | राजनीति समाचार

Kuldeep Yadav's wedding is expected to be a star-studded affair. (Picture Credit: IG/kuldeep_18)

आखरी अपडेट:मार्च 14, 2026, 16:27 IST समाजवादी पार्टी का ब्राह्मण मुद्दों पर नए सिरे से ध्यान उस समय आया है जब वह हाल के चुनावों से अपने राजनीतिक लाभ को मजबूत करने की कोशिश कर रही है अखिलेश यादव 2022 के चुनाव के बाद से पार्टी के केंद्रीय राजनीतिक मुद्दे के रूप में पीडीए फॉर्मूले – पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्याक (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) की वकालत कर रहे हैं। (पीटीआई) क्या समाजवादी पार्टी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले ब्राह्मणों को लुभाने के लिए अपने पारंपरिक MY (मुस्लिम-यादव) फॉर्मूले से आगे बढ़ रही है? 9 मार्च को अयोध्या में एक कार्यक्रम के दौरान विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडे द्वारा ब्राह्मण समुदाय से की गई अपील के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में यह सवाल गूंजने लगा है। पांडे ने एक टिप्पणी में कहा, “ब्राह्मण सरकार के तानाशाही रवैये से डरे हुए हैं। उन्हें एकजुट होना चाहिए और 2027 में अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना चाहिए ताकि उनका खोया हुआ सम्मान वापस मिल सके।” हालाँकि, यह पहली बार नहीं था कि इस आउटरीच के संकेत किसी राजनीतिक मंच पर दिखाई दिए। उत्तर प्रदेश विधानसभा में सपा विधायक कमाल अख्तर ने भगवान परशुराम की जयंती 19 अप्रैल को फिर से सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग करते हुए कहा कि सपा सरकार के दौरान ऐसा अवकाश था लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया गया था. इस मांग को ब्राह्मण समुदाय के सम्मान के मुद्दे के रूप में तैयार किया गया था, और यह एक व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है जहां एसपी नेताओं ने विधायी बहस के साथ-साथ जिलों में सार्वजनिक बैठकों के दौरान ब्राह्मण-संबंधित चिंताओं को उठाना शुरू कर दिया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना ​​है कि दो घटनाओं ने इस उभरती कहानी को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पहला विवाद इस साल की शुरुआत में माघ मेले के दौरान हुआ था जब पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को अनुष्ठान स्नान के लिए संगम की ओर जाने से रोक दिया था। इस घटना के बाद शिष्यों और पुलिस कर्मियों के बीच विरोध प्रदर्शन और झड़पें शुरू हो गईं और तस्वीरें व्यापक रूप से प्रसारित हुईं, जिसमें हाथापाई के दौरान एक युवा शिष्य को उसके बालों के गुच्छे से घसीटते हुए दिखाया गया। इस प्रकरण ने ब्राह्मण समुदाय के वर्गों में नाराजगी पैदा की और जल्द ही एक राजनीतिक मुद्दा बन गया, विपक्षी नेताओं ने सरकार पर धार्मिक हस्तियों का अनादर करने का आरोप लगाया। दूसरा मुद्दा उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा अधिसूचित नए दिशानिर्देशों से संबंधित है। कुछ उच्च जाति के छात्र समूहों ने नियमों की आलोचना करते हुए तर्क दिया कि वे यह धारणा बना सकते हैं कि सामान्य श्रेणी के छात्र स्वाभाविक रूप से भेदभावपूर्ण हैं। समाजवादी पार्टी का ब्राह्मण मुद्दों पर नए सिरे से ध्यान ऐसे समय में आया है जब वह हाल के चुनावों से अपने राजनीतिक लाभ को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी महज 47 सीटों पर सिमट गई थी. हालाँकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में, सपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 125 सीटें हासिल कीं और राज्य में प्रमुख विपक्ष के रूप में उभरा। इसका वोट शेयर भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ गया, जो 2017 में लगभग 21.8 प्रतिशत की तुलना में लगभग 32 प्रतिशत तक पहुंच गया। इस वृद्धि का अधिकांश हिस्सा ओबीसी, मुस्लिम और दलित मतदाताओं के बीच एकीकरण के कारण था। अखिलेश यादव 2022 के चुनाव के बाद से पार्टी के केंद्रीय राजनीतिक मुद्दे के रूप में पीडीए फॉर्मूले – पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्याक (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) की वकालत कर रहे हैं। हालाँकि, ब्राह्मण चिंताओं पर वर्तमान जोर से संकेत मिलता है कि पार्टी अपने पारंपरिक समर्थन आधार को बनाए रखते हुए अपने गठबंधन को व्यापक बनाने का प्रयास कर सकती है। माघ मेला विवाद के बाद, अखिलेश यादव ने कथित तौर पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से बात की, जबकि कई सपा सांसद और विधायक इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठा रहे हैं और योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक शशिकांत पांडे, जो लखनऊ के डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग के प्रमुख हैं, का मानना ​​है कि समाजवादी पार्टी अपने मूल सूत्र को छोड़ने के बजाय रणनीतिक विस्तार का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, “सपा का एमवाई आधार बरकरार है और उसकी राजनीति का केंद्र है। हालांकि, पार्टी समझती है कि भाजपा को बड़े पैमाने पर चुनौती देने के लिए, उसे अपने सामाजिक गठबंधन का विस्तार करना होगा। ब्राह्मणों तक पहुंचना उस प्रयास का हिस्सा है। हालिया विवादों ने विपक्ष को उच्च जाति के मतदाताओं के वर्गों के भीतर शिकायतों को उजागर करने का एक राजनीतिक अवसर प्रदान किया है।” इस पहुंच के बावजूद, चुनावी इतिहास बताता है कि ब्राह्मण मतदाताओं ने शायद ही कभी बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी का समर्थन किया हो। यह समुदाय, जो उत्तर प्रदेश की आबादी का लगभग 10-12 प्रतिशत है, भाजपा की ओर निर्णायक रूप से स्थानांतरित होने से पहले 2000 के दशक के अंत तक बड़े पैमाने पर कांग्रेस के साथ जुड़ा रहा। चुनाव डेटा इस प्रवृत्ति को उजागर करता है: 2017 के विधानसभा चुनाव में, भाजपा को लगभग 83 प्रतिशत ब्राह्मण वोट मिले, और 2019 के लोकसभा और 2022 के विधानसभा चुनावों में, यह आंकड़ा 89 प्रतिशत के करीब था। यहां तक ​​कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भी सपा के 37 विजयी उम्मीदवारों में से केवल एक ब्राह्मण सांसद चुना गया था. इसलिए, समाजवादी पार्टी के लिए चुनौती अपने पारंपरिक मुस्लिम-यादव आधार को बनाए रखने के साथ-साथ ब्राह्मण मतदाताओं को यह समझाने की है कि पार्टी उनके हितों का भी प्रतिनिधित्व कर सकती है। पार्टी नेता अक्सर पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की विरासत का हवाला देते हैं, जिन्होंने जनेश्वर मिश्रा जैसे प्रमुख ब्राह्मण नेताओं के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखा, यह तर्क देने के लिए कि पार्टी में हमेशा उच्च जाति के नेतृत्व के लिए जगह रही है। मौजूदा पहुंच चुनावी लाभ में तब्दील होगी या नहीं, यह अनिश्चित बना हुआ है, लेकिन जैसे-जैसे 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा

‘कांग्रेस देश के भीतर दहशत पैदा कर रही है’: पश्चिम एशिया युद्ध के बीच पीएम मोदी ने असम में पार्टी की आलोचना की | राजनीति समाचार

Kuldeep Yadav's wedding is expected to be a star-studded affair. (Picture Credit: IG/kuldeep_18)

आखरी अपडेट:मार्च 14, 2026, 15:00 IST पीएम मोदी ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने भारत के पूर्वोत्तर की उपेक्षा की, स्वतंत्रता और विभाजन के दौरान सीमाओं का निर्धारण करते समय बराक घाटी को समुद्र तक पहुंच की अनुमति दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के सिलचर में विभिन्न विकास कार्यों के शिलान्यास और अनावरण समारोह के दौरान एक सभा को संबोधित किया। (पीटीआई) प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि “युद्ध जैसी स्थिति” उभरी है, उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी सरकार इसे प्रभावी ढंग से संभाल रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस देश में दहशत पैदा करने की कोशिश करके “गैरजिम्मेदाराना” तरीके से काम कर रही है। पीएम मोदी ने असम के सिलकाहर में एक रैली में कहा, ”युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई है और हमारी सरकार इसे संभाल रही है, लेकिन कांग्रेस देश में दहशत पैदा करने की हर कोशिश कर रही है।” प्रधान मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने भारत के पूर्वोत्तर की उपेक्षा की, स्वतंत्रता और विभाजन के दौरान सीमाओं का निर्धारण करते समय बराक घाटी को समुद्र तक पहुंच की अनुमति दी। उन्होंने दावा किया, ”उनके पास असम या देश के लिए कोई दृष्टिकोण नहीं है, बल्कि वे केवल मोदी को गाली देना, अफवाहें फैलाना और लोगों को गुमराह करने के लिए झूठ बोलना जानते हैं।” क्षेत्रीय विकास पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि असम और बराक घाटी दोनों लगातार प्रगति कर रहे हैं। उन्होंने बराक घाटी को भाषा, साहित्य और संस्कृति से समृद्ध क्षेत्र बताया और कहा कि यह विकास के एक नए केंद्र के रूप में उभरने के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया, “जिस तरह कांग्रेस ने उत्तर-पूर्व को अपने हाल पर छोड़ दिया, उसी तरह उसने बराक घाटी को कमजोर करने में प्रमुख भूमिका निभाई। जब भारत स्वतंत्र हुआ, तो कांग्रेस ने एक सीमा खींचने की अनुमति दी जिससे बराक घाटी की समुद्र तक पहुंच कट गई।” उन्होंने कहा, “बराक घाटी, जिसे कभी औद्योगिक केंद्र के रूप में जाना जाता था, उसकी ताकत छीन ली गई। आजादी के बाद दशकों तक कांग्रेस सरकारें सत्ता में रहीं, फिर भी इस क्षेत्र में बहुत कम विकास हुआ। आज, भाजपा सरकार इसे बदलने के लिए काम कर रही है।” पीएम मोदी ने कांग्रेस पर असम के युवाओं को हिंसा और आतंकवाद के लिए गुमराह करने का आरोप लगाया और दावा किया कि भाजपा ने राज्य को उनके लिए “अवसरों के सागर” में बदलने का काम किया है। उन्होंने कहा, ”जहां कांग्रेस सोचना बंद कर देती है, हम काम करना शुरू कर देते हैं।” उन्होंने कहा कि भाजपा का ध्यान विकास में पीछे रह गए लोगों को प्राथमिकता देने पर है। प्रधानमंत्री ने विधानसभा चुनाव से पहले असम के अपने दो दिवसीय दौरे के अंतिम चरण में सिलचर में 23,550 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया। जगह : असम, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 14, 2026, 15:00 IST समाचार राजनीति ‘कांग्रेस देश के भीतर दहशत पैदा कर रही है’: पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया युद्ध के बीच असम में पार्टी की आलोचना की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)नरेंद्र मोदी(टी)प्रधानमंत्री(टी)कांग्रेस(टी)असम(टी)बराक घाटी(टी)क्षेत्रीय विकास(टी)बीजेपी सरकार(टी)विधानसभा चुनाव

गलतियों पर खुद को न कोसें, तनाव हंसी में उड़ाएं:मनोवैज्ञानिक का दावा- खुद की गलतियों पर हंसना लोगों को आपसे मानवीय रूप से जोड़ता है; इससे आत्मविश्वास मजबूत होगा

गलतियों पर खुद को न कोसें, तनाव हंसी में उड़ाएं:मनोवैज्ञानिक का दावा- खुद की गलतियों पर हंसना लोगों को आपसे मानवीय रूप से जोड़ता है; इससे आत्मविश्वास मजबूत होगा

अक्सर सार्वजनिक जगहों पर छोटी गलतियों पर भी हम शर्मिंदा हो जाते हैं। चाहे कांच के दरवाजे से टकराना हो या योग क्लास में अचानक फिसलना, हमारा पहला रिएक्शन खुद को छिपाना होता है। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर ओवुल सेजर की रिसर्च ये सोच बदल रही हैै। शोध के मुताबिक ऐसे पलों में शर्मिंदा होने के बजाय खुद पर हंसें। यह आपको दूसरों की नजर में अधिक मिलनसार, सक्षम और सच्चा बनाता है। अपनी गलती पर मुस्कुराना माहौल को ‘जजमेंट’ से हटाकर ‘सहजता’ की ओर मोड़ देता है। यह आत्म-स्वीकृति का संकेत है और दुनिया अपनी कमियों को मुस्कुराकर अपनाने वालों को पसंद करती है। गलतियों को सहजता से स्वीकार करना ही असली आत्मविश्वास है रिसर्च के मुताबिक जो लोग अपनी गलतियों पर मुस्कुराते हैं, वे दुनिया की नजर में अधिक खुशमिजाज और काबिल दिखते हैं। वहीं, दूसरी ओर जरूरत से ज्यादा शर्मिंदगी आपकी असुरक्षा और ‘लोग क्या सोचेंगे’ वाले डर को उजागर करती है। रिसर्च ये भी कहती है कि खुद का मजाक उड़ाना दरअसल दूसरों के लिए आपसे जुड़ने का निमंत्रण है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, यह हंसी न केवल माहौल का तनाव कम करती है, बल्कि आसपास के लोगों को भी आपको सहज महसूस कराने की औपचारिकता से मुक्त कर देती है। खुद को कसूरवार समझना छोड़ें, दुनिया को आपकी कोई परवाह नहीं अक्सर हम ‘स्पॉटलाइट इफेक्ट’ के भ्रम में जीते हैं, जहां हमें लगता है कि दुनिया की नजरें सिर्फ हमारी गलतियों पर टिकी हैं। इसकी हकीकत कुछ और है। दरअसल, लोग अपनी उलझनों में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें आपकी छोटी भूलों की उतनी परवाह नहीं होती, जितनी आप मान बैठते हैं। प्रोफेसर सेजर की सलाह है कि अगली बार किसी सामाजिक चूक पर खुद को कोसने के बजाय बस यह पूछें ‘क्या इससे किसी का नुकसान हुआ?’ यदि जवाब ‘नहीं’ है, तो ग्लानि छोड़िए और बस मुस्कुरा दीजिए। यह सहज बदलाव न केवल आपके आत्मविश्वास को मजबूत करेगा, बल्कि आपको दूसरों की नजर में और भी अधिक सरल और खास बना देगा। हंसी तभी अच्छी लगती है जब तक उससे किसी को ठेस न पहुंचे खुद पर हंसने की कला में अहम है ‘इमोशनल कैलिब्रेशन’ यानी सही भावना का चुनाव। शोधकर्ता आगाह करते हैं कि हंसी तभी तक गरिमापूर्ण है, जब तक वह किसी को ‘ठेस’ न पहुंचाए। यदि आपकी गलती से किसी को शारीरिक चोट पहुंची है या कोई नुकसान हुआ है, तो वहां हंसना आपको संवेदनहीन और अनैतिक साबित कर सकता है। ऐसे वक्त में हंसी नहीं, बल्कि खेद और शर्मिंदगी ही सही मानवीय आचरण है। याद रहे, आत्मविश्वास मुस्कुराने में है, लेकिन बड़प्पन यह पहचानने में है कि कब माफी मांगनी है।

उज्जैन में सिंहस्थ के निर्माण काम में मजदूर की मौत:सड़क चौड़ीकरण के दौरान लगा करंट; परिजनों ने किया चक्काजाम, ठेकेदार पर FIR की मांग

उज्जैन में सिंहस्थ के निर्माण काम में मजदूर की मौत:सड़क चौड़ीकरण के दौरान लगा करंट; परिजनों ने किया चक्काजाम, ठेकेदार पर FIR की मांग

उज्जैन में सिंहस्थ से जुड़े निर्माण काम के दौरान करंट लगने से एक श्रमिक की मौत के बाद शनिवार सुबह चरक अस्पताल के सामने हंगामा हो गया। मृतक के परिजनों और समाज के लोगों ने आगर रोड पर चक्काजाम कर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई और आर्थिक सहायता की मांग की। मृतक की पहचान राकेश सूर्यवंशी (42) पिता रामचंद्र सूर्यवंशी, निवासी ग्राम खड़ोतिया के रूप में हुई है। शुक्रवार शाम कोयला फाटक से निजातपुरा मार्ग पर चल रहे सड़क चौड़ीकरण कार्य के दौरान वह इलेक्ट्रिक का काम कर रहे थे। पाइप रिपेयरिंग के दौरान ग्राइंडर मशीन चलाते समय वे करंट की चपेट में आ गए। साथी मजदूर उन्हें तुरंत चरक अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल के पीएम रूम में रखवाया गया। परिजनों और संगठनों ने किया सड़क जाम शनिवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद परिजन, शिवसेना और भीम आर्मी के पदाधिकारी और सूर्यवंशी समाज के लोग चरक अस्पताल के सामने इकट्‌ठा हुए। उन्होंने आगर रोड पर चक्काजाम कर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। करीब एक घंटे तक पीएम रूम परिसर के बाहर हंगामा चलता रहा। प्रदर्शनकारियों ने ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, परिवार को आर्थिक सहायता देने और मृतक के बेटे को नगर निगम में आउटसोर्स के माध्यम से नौकरी देने की मांग की। परिवार ने घटना की सूचना देर से मिलने का लगाया आरोप बेटे अभिषेक सूर्यवंशी ने बताया कि वह पेट्रोल पंप पर काम करता है। उसे एक मित्र के फोन से घटना की जानकारी मिली। जब वह अस्पताल पहुंचा तो पिता का शव पोस्टमार्टम रूम में रखा मिला। परिजनों का आरोप है कि उन्हें घटना की जानकारी समय पर नहीं दी गई। एसडीएम ने जांच और राहत का दिया आश्वासन मामले में एसडीएम ने कहा कि परिजनों की मांगों को सुना गया है और थाना प्रभारी को जांच के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि नियमानुसार मिलने वाली राहत राशि पीड़ित परिवार को दिलाई जाएगी।