ज्यादा न खाएं एसिडिटी की गोलियां, किडनी हो जाएगी डैमेज, खोखला हो जाएगा शरीर, डॉक्टर ने दी चेतावनी

Last Updated:March 08, 2026, 15:21 IST Hidden Dangers of Acidity Pills: अधिकतर लोग एसिडिटी की दवाओं का खूब इस्तेमाल करते हैं. एक्सपर्ट्स की मानें तो बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक इन गोलियों को लेने से किडनी डैमेज, हड्डियों का खोखला होना, विटामिन B12 की कमी और डिमेंशिया का खतरा बढ़ जाता है. इन दवाओं का ओवरयूज आपके लिए घातक हो सकता है. एंटासिड का सेवन 8 सप्ताह से ज्यादा नहीं करना चाहिए. Side Effects of Antacid Overuse: गैस और एसिडिटी सबसे कॉमन समस्याएं हैं. लगभग सभी लोग कभी न कभी इन दिक्कतों का सामना करते हैं. ये समस्याएं कई बार अपने आप ठीक हो जाती हैं, जबकि कुछ लोग इससे निजात पाने के लिए गोलियां लेना शुरू कर देते हैं. लोग बिना सोचे-समझे गैस की टैबलेट निगल लेते हैं, लेकिन यह छोटी सी दिखने वाली आदत गंभीर समस्या पैदा कर सकती है. आपको जानकर हैरानी होगी कि बिना डॉक्टर की सलाह के एंटासिड दवाएं लेने से किडनी के लिए खतरा पैदा हो सकता है. इतना ही नहीं, इन गोलियों से पेट की लाइनिंग पर भी बुरा असर पड़ सकता है. हैदराबाद के अपोलो अस्पताल के फेमस न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार ने चेतावनी दी है कि एसिडिटी की गोलियां लंबे समय तक लेने से शरीर अंदर से खोखला हो सकता है. खासकर प्रोटॉन पंप इनहिबिटर (PPIs) का लंबे समय तक सेवन बेहद नुकसानदायक है. भारत में ये दवाएं बिना प्रिस्क्रिप्शन के आसानी से उपलब्ध हैं, जिससे इनका दुरुपयोग बढ़ गया है. पीपीआई (PPIs) दुनिया भर में सबसे ज्यादा लिखी जाने वाली और सबसे ज्यादा गलत तरीके से इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं में से हैं. आमतौर पर ये दवाएं अल्सर या गंभीर एसिड रिफ्लक्स (GERD) के मामलों में केवल 4 से 8 सप्ताह के लिए दी जाती हैं. हालांकि लाखों लोग मामूली अपच या गैस से बचने के लिए सालों-साल इनका सेवन कर रहे हैं. 🧵 The “Acidity Pill” Trap: A Silent Health Crisis?That daily antacid you pop for “gas” or heartburn might be doing more than just stopping the burn. As a neurologist, I see the long-term fallout of over-the-counter (OTC) drug misuse every day. Let’s talk about the hidden risks…
‘लोग टीएमसी सरकार को गिरा देंगे’: महिला दिवस पर पीएम मोदी ने बंगाल में राष्ट्रपति के ‘अपमान’ की निंदा की | भारत समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 08, 2026, 14:36 IST केंद्र और पश्चिम बंगाल के बीच तनाव बढ़ने के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति मुर्मू की राज्य यात्रा के दौरान सुरक्षा चूक पर ममता सरकार से रिपोर्ट मांगी है। महिला दिवस पर पीएम ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के ‘अपमान’ की निंदा की. (छवि: पीटीआई) अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि देश महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मना रहा है, लेकिन कल की घटना पर चिंता व्यक्त की, जब संथाल समुदाय से आने वाली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कथित तौर पर अपमान किया गया था। पीएम मोदी ने कहा कि इस टिप्पणी से संथाल समुदाय को भी ठेस पहुंची है. जनता को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “मैं इस मंच से घोषणा कर रहा हूं कि बहुत जल्द लोग टीएमसी सरकार को बदल देंगे। हमें अपनी विरासत पर गर्व होना चाहिए।” केंद्र ने राष्ट्रपति मुर्मू के दौरे पर पश्चिम बंगाल से रिपोर्ट मांगी सूत्रों ने बताया कि केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच तनाव बढ़ने पर केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती से रविवार शाम पांच बजे तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। केंद्र ने राज्य सरकार से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यात्रा के दौरान प्रोटोकॉल, आयोजन स्थल की व्यवस्था और काफिले के मार्गों में कथित खामियों पर जवाब देने को कहा है। अपने पत्र में, केंद्रीय गृह सचिव ने ‘ब्लू बुक’ में उल्लिखित नियमों के संभावित उल्लंघन के लिए स्पष्टीकरण का अनुरोध किया। ब्लू बुक एक गोपनीय दस्तावेज है जिसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधान मंत्री और उनके परिवारों के लिए सुरक्षा और प्रोटोकॉल प्रक्रियाओं का विवरण दिया गया है। सूत्रों ने कहा कि केंद्र विशेष रूप से राष्ट्रपति के राज्य में आगमन पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक की अनुपस्थिति को लेकर चिंतित है, जिसे एक गंभीर उल्लंघन के रूप में देखा जाता है। जिन अतिरिक्त मुद्दों पर प्रकाश डाला गया उनमें राष्ट्रपति के लिए व्यवस्थित शौचालय शामिल है, जिसमें कथित तौर पर पानी नहीं था, और राष्ट्रपति के काफिले का मार्ग, जिसके बारे में सूत्रों ने कहा कि वह कचरे से भरा हुआ था। केंद्र ने पश्चिम बंगाल सरकार से इन खामियों पर पूरा स्पष्टीकरण देने को कहा है। जगह : दिल्ली, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 08, 2026, 14:10 IST न्यूज़ इंडिया ‘लोग टीएमसी सरकार को गिरा देंगे’: महिला दिवस पर पीएम मोदी ने बंगाल में राष्ट्रपति के ‘अपमान’ की निंदा की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग अनुवाद करने के लिए)पीएम मोदी(टी)ममता बनर्जी(टी)द्रौपदी मुर्मू(टी)ममता मोदी द्रौपदी(टी)बंगाल में राष्ट्रपति(टी)संथाल(टी)द्रौपदी मुर्मू बंगाल(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)बंगाल चुनाव
खामेनेई की मौत पर अमेरिका में लगा था सट्टा:498 करोड़ का खेला था दांव; अब साइट ने भुगतान रोका, नियमों को लेकर विवाद

ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई को लेकर अमेरिकी प्रेडिक्शन मार्केट साइट काल्शी पर 498 करोड़ रु. का दांव लगाया गया। यह न्यूयॉर्क स्थित कंपनी है, जहां लोग चुनाव, युद्ध और वैश्विक घटनाओं के नतीजों पर पैसे लगाते हैं। खामेनेई की मौत के बाद कई यूजर्स ने खुद को विजेता मान लिया। एक कारोबारी ने 3.19 लाख रुपए लगाए थे और उसे 58 लाख रुपए मिलने की उम्मीद थी, लेकिन कुछ ही मिनट बाद साइट ने ट्रेड रोक दिया। कंपनी ने कहा कि उसके नियम किसी व्यक्ति की मौत से जुड़े दांव पर भुगतान की अनुमति नहीं देते। विवाद बढ़ने पर काल्शी ने दांव लगाने वालों को पैसा और फीस लौटाने का फैसला किया है। ट्रम्प पहले अमेरिकी राष्ट्रपति, जिन्होंने बिना जनसमर्थन युद्ध शुरू किया डोनाल्ड ट्रम्प ऐसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बन गए हैं जिन्होंने स्पष्ट जनसमर्थन के बिना युद्ध शुरू किया। आम तौर पर जब कोई अमेरिकी राष्ट्रपति युद्ध शुरू करता है तो शुरुआती दौर में जनता उसके पीछे खड़ी (रैली अराउंड द प्रेसिडेंट) हो जाती है। ताजा सर्वे के मुताबिक ईरान पर हमले को सीमित समर्थन मिला है। रॉयटर्स-इप्सोस सर्वे में केवल 27% अमेरिकियों ने कार्रवाई का समर्थन किया, जबकि 43% इसके विरोध में रहे। सीएनएन के सर्वे में समर्थन करीब 41% रहा। अमेरिका में लगभग 8 माह बाद मध्यावधि चुनाव होने हैं। जॉर्ज डब्ल्यू. बुश- अफगानिस्तान युद्ध (2001), समर्थन 90% , 9/11 हमला जॉर्ज HW बुश- खाड़ी युद्ध- कुवैत (1991), समर्थन : 83%, इराकी हमला रोनाल्ड रीगन- ग्रेनेडा हस्तक्षेप (1983), समर्थन : 53% , नागरिक सुरक्षा बिल क्लिंटन- कोसोवो संघर्ष (1999), समर्थन : 51% , बाल्कन संकट बराक ओबामा- लीबिया युद्ध (2011), समर्थन : 47% , नरसंहार रोकना डोनाल्ड ट्रम्प- ईरान युद्ध (2026) , समर्थन : 27% , कारण साफ नहीं
शाहिद कपूर ने शुरू की ‘फर्जी 2’ की शूटिंग:एक्टर ने पहले दिन के शूट की फोटो शेयर कर अपना लुक दिखाया

शाहिद कपूर की वेब सीरीज ‘फर्जी’ के दूसरे सीजन की शूटिंग शुरू हो गई है। एक्टर ने शनिवार को इंस्टाग्राम स्टोरी पर पहले दिन की शूटिंग की तस्वीर शेयर की। इसके साथ उन्होंने अपने किरदार के लुक को भी दिखाया। शाहिद ने लिखा, “फर्जी 2 का पहला दिन… वापस शुरू!” बता दें कि फरवरी में शाहिद कपूर ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की थी कि ‘फर्जी’ का दूसरा सीजन बन रहा है। उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर सीरीज के क्रिएटर्स राज निदिमोरू और कृष्णा डी.के. के साथ एक तस्वीर शेयर की थी और लिखा था, “नकली काम करने वाले फिर से लौट आए हैं।” सीरीज के क्रिएटर्स ने भी दी जानकारी राज और डी.के. ने भी अपने इंस्टाग्राम पर नोटों की गड्डियों की तस्वीर शेयर की थी। इसके साथ कैप्शन लिखा, “राउंड 2 चल रहा है,” जिससे सीरीज की वापसी का संकेत मिला था। इससे पहले शाहिद कपूर ने बताया था कि ‘फर्जी’ सीजन 2 को आने में समय लगेगा। उनका कहना था कि शो की शूटिंग और पोस्ट-प्रोडक्शन में काफी समय लगता है और इसे कई भाषाओं में डब कर 200 देशों में रिलीज किया जाता है। वेब सीरीज ‘फर्जी’ में शाहिद कपूर के साथ विजय सेतुपति, राशि खन्ना, के के मेनन, भुवन अरोड़ा, रेजिना कैसेंड्रा और अमोल पालेकर अहम भूमिकाओं में नजर आए थे। ‘फ़र्ज़ी’ का पहला सीजन 10 फरवरी 2023 को अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज किया गया था। सीरीज की कहानी में सनी (शाहिद कपूर) एक जबरदस्त कलाकार होता है, जो हूबहू पेंटिंग्स बना सकता है। लेकिन जब उसके नानाजी का अखबार ‘क्रांति’ और उनका प्रिंटिंग प्रेस कर्ज के कारण बंद होने की कगार पर पहुंच जाता है, तो वह अपनी कला का इस्तेमाल नकली नोट बनाने के लिए करता है। जो बाद में एक बड़े जाल में फंस जाता है। वहीं विजय सेतुपति ने एक टास्क फोर्स अधिकारी की भूमिका निभाई है।
क्या सभी लोगों के लिए अमृत समान है ताम्रजल? अगर आप कर रहे हैं सेवन, तो इन 5 तथ्यों को न करें नजरअंदाज

Last Updated:March 08, 2026, 14:13 IST Copper Water Health Benefits: तांबे के बर्तन में रखा पानी सेहत के लिए अमृत समान माना जाता है, लेकिन ताम्रजल हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होता है. तांबे की प्रकृति गर्म और तीक्ष्ण होती है, जो शरीर में पित्त दोष बढ़ा सकती है. लिवर, किडनी की बीमारी और डायबिटीज के मरीजों को इसका सेवन सावधानी के साथ करना चाहिए. ताम्रजल का सेवन किडनी और लिवर के मरीजों को सावधानी से करना चाहिए. Copper Water Benefits & Risks: जिस तरह हमें जिंदा रहने के लिए हवा की जरूरत होती है, ठीक उसी तरह पानी की भी जरूरत होती है. यही वजह है कि जल को जीवन माना जाता है. पानी तो सभी लोग पीते हैं, लेकिन यह भी जरूरी है कि पानी सही बर्तन में पिया जाए. कई लोग पानी पीने के लिए कांच के बर्तन इस्तेमाल करते हैं, तो कुछ लोग प्लास्टिक के बर्तन यूज करते हैं. पिछले कुछ समय से ताम्रजल यानी तांबे के बर्तन में रखे पानी का चलन तेजी से बढ़ा है. इसे एक जादुई नुस्खा मानकर हर कोई अपना रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आयुर्वेद के अनुसार तांबे का पानी हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होता है. तांबा एक सक्रिय धातु है जो पानी के गुणों को पूरी तरह बदल देती है. आयुर्वेद का सिद्धांत है कि कोई भी औषधि हर व्यक्ति पर एक जैसा प्रभाव नहीं डालती है. जो एक के लिए दवा है, वह दूसरे के लिए जहर भी हो सकती है. आयुर्वेद के अनुसार तांबे की प्रकृति गर्म और तीक्ष्ण होती है. यह शरीर में अग्नि तत्व को बढ़ाता है, जिससे पाचन तो सुधरता है, लेकिन पित्त दोष को भी बढ़ा जेता है. जिन लोगों का शरीर पहले से ही गर्म प्रकृति का है या जिन्हें गर्मी से जुड़ी समस्याएं रहती हैं, उनके लिए ताम्रजल फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकता है. आयुर्वेद स्पष्ट करता है कि किसी भी द्रव्य का सेवन व्यक्ति की प्रकृति, अवस्था और वर्तमान ऋतु को देखकर ही किया जाना चाहिए. जिन लोगों की शारीरिक प्रकृति पित्त प्रधान है, उन्हें तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से बचना चाहिए. पित्त के बढ़ने से शरीर में अत्यधिक गर्मी, एसिडिटी, हाथ-पैरों में जलन और त्वचा पर चकत्ते जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अगर आप पहले से ही नकसीर फूटने या भारी ब्लीडिंग जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो ताम्रजल आपकी मुश्किलों को बढ़ा सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. आधुनिक विज्ञान और आयुर्वेद दोनों इस बात पर सहमत हैं कि लिवर और किडनी के रोगियों को ताम्रजल के सेवन में बेहद सावधानी बरतनी चाहिए. तांबा शरीर में संचित होने वाली धातु है. अगर लिवर या किडनी सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं, तो शरीर अतिरिक्त कॉपर को बाहर नहीं निकाल पाता है. इससे अंगों पर फिल्टर करने का दबाव बढ़ जाता है और कॉपर टॉक्सिसिटी का खतरा पैदा हो जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर स्थिति हो सकती है. इसके अलावा डायबिटीज के मरीजों के लिए भी तांबे का जल हमेशा लाभकारी नहीं होता. कई मामलों में डायबिटीज के रोगियों की शारीरिक प्रवृत्ति पित्त की ओर झुकी होती है. रीर में कॉपर की अधिकता ब्लड शुगर के स्तर को असंतुलित कर सकती है. साथ ही, यह रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे ब्लड प्रेशर से जुड़ी जटिलताएं बढ़ सकती हैं. छोटे बच्चों की पाचन अग्नि यानी डाइजेस्टिव फायर वयस्कों जितनी मजबूत नहीं होती. सुबह खाली पेट ताम्रजल पीना शरीर के लिए काफी भारी होता है और इसे पचाने में तंत्र को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है. बच्चों के कोमल अंगों के लिए कॉपर की सांद्रता को संभालना मुश्किल हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों को प्राकृतिक रूप से शुद्ध और सामान्य तापमान वाला जल देना ही सबसे सुरक्षित और लाभकारी रहता है. अगर आप स्वस्थ हैं और ताम्रजल पीना चाहते हैं, तो इसके नियमों का पालन करना अनिवार्य है. पानी को तांबे के बर्तन में कम से कम 8 घंटे तक रखा जाना चाहिए, लेकिन इसे कभी भी 12 घंटे से अधिक न रखें. लगातार इसे पीने के बजाय 3 महीने के सेवन के बाद 1 महीने का गैप जरूर दें. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.) About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : March 08, 2026, 14:13 IST
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत ने राजनीति में रखा कदम, जदयू में हुए शामिल | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 08, 2026, 13:54 IST नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद उपमुख्यमंत्री बनने की अटकलों के बीच निशांत कुमार जदयू में शामिल हो गए। नीतीश कुमार के बेटे निशांत आज पटना में जेडीयू में शामिल हो गए। (फोटो: पीटीआई) नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार रविवार को आधिकारिक तौर पर जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हो गए। वह पटना में पार्टी कार्यालय पहुंचे और अपने स्वागत के लिए एकत्र हुए पार्टी कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया। औपचारिक घोषणा से पहले निशांत कुमार ने समर्थकों से संक्षिप्त बातचीत भी की। पटना में बोलते हुए, निशांत कुमार ने कहा कि उच्च सदन में जाने के उनके पिता के फैसले का सम्मान किया जाता है। उन्होंने कहा, ”मेरे पिता ने राज्यसभा जाने का फैसला किया, हम उनके फैसले का सम्मान करते हैं, उनके मार्गदर्शन में काम करते रहेंगे।” निशांत इन अटकलों के बीच जदयू में शामिल हुए कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद वह उपमुख्यमंत्री बन सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, निशांत कुमार इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हैं। निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री को लेकर पिछले दो साल से अधिक समय से अटकलें जारी हैं. दिसंबर 2025 में, जद (यू) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने निशांत कुमार की उपस्थिति में कहा कि पार्टी के सदस्य और समर्थक चाहते थे कि वह पार्टी के लिए काम करें। नीतीश कुमार ने राज्यसभा नामांकन दाखिल किया 75 वर्षीय नीतीश कुमार ने 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया है। बिहार में उनकी विकास पहल के कारण उन्हें “सुशासन बाबू” नाम मिला, जिसका अर्थ है सुशासन आदमी। उनके जल्द ही मुख्यमंत्री पद छोड़ने की संभावना है. उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में विधानसभा सचिव ख्याति सिंह के कार्यालय में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को मतदान होगा। पहले प्रकाशित: मार्च 08, 2026, 13:36 IST समाचार राजनीति बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत ने रखा राजनीति में कदम, जदयू में हुए शामिल अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)नीतीश कुमार के बेटे निशांत(टी)निशांत कुमार(टी)निशांत कुमार जेडीयू में शामिल हुए(टी)जेडीयू(टी)जनता दल यूनाइटेड(टी)पटना(टी)बिहार(टी)बिहार की राजनीति
दो जांबाज ईरानी महिलाओं ने साझा किया दमन का दौर:न झुकीं, न डरीं; ईरान में अपने हक के लिए महिलाओं की जंग 47 साल से जारी है

ईरानी महिला अधिकार एक्टिविस्ट मसीह अलीनेजाद कहती हैं- ईरान में जारी युद्ध और संघर्ष पर हमें दर्द भी है और उम्मीद भी। मैं नहीं चाहती कि किसी निर्दोष नागरिक को नुकसान पहुंचे। ईरानी लोगों का संदेश है कि हमें इस घायल और खूंखार शासन के भरोसे अकेला न छोड़ें। इस काम को पूरा करें (शासन परिवर्तन), वरना ये लोग निहत्थे मासूमों से बदला लेंगे। यह ईरान के लिए ‘बर्लिन की दीवार’ गिरने जैसा पल है। ईरान की ‘मॉरैलिटी पुलिस’ के डीएनए में ही महिलाओं को पीटना शामिल है। अनिवार्य हिजाब सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि महिलाओं के दमन का प्रतीक है। अगर हम इस दीवार को गिरा देते हैं, तो यह कट्टरपंथी शासन खत्म हो जाएगा। मैं हिजाब के खिलाफ नहीं हूं, बल्कि ‘जबरदस्ती’ के खिलाफ हूं। महिलाओं को चुनने का हक होना चाहिए। निडर हैं ईरानी महिलाएं मुझे 1994 में 18 की उम्र में सरकार विरोधी पर्चे बांटने पर गिरफ्तार किया गया था। 2007 में देश छोड़ना पड़ा। 2014 में मैंने ‘माई स्टेल्थी फ्रीडम’ नाम से फेसबुक पेज शुरू किया, जहां ईरानी महिलाएं बिना हिजाब और अपने संघर्ष की तस्वीरें निडर होकर साझा करती हैं। 80% ईरानी बदलाव चाहते हैं। इस्लामी गणराज्य ने हमसे सब कुछ छीन लिया है, सिवाय उम्मीद के। संसद की 299 सीटों में से 9 पर ही महिलाएं हैं और वे भी शासन की समर्थक हैं, न कि महिलाओं की रक्षक। इस बार शासन के खिलाफ प्रदर्शनों में मध्यम वर्ग और छात्र शामिल हैं। वर्तमान बदलाव उम्मीद जगाता है। सिर्फ मैं ही नहीं, ज्यादातर ईरानी खुश हैं। इस शासन ने मेरे लोगों को मारा और फांसी पर लटकाया है। ईरान में लोग खुशी से नाच रहे थे और उन प्रियजनों की कब्रों पर गए, जिन्हें शासन ने मार दिया था। मेरी दो बहनें, जिन्हें शासन ने अंधा कर दिया था, वे भी सड़कों पर खुशी से झूम उठीं। मैं और मेरी जैसी लाखों महिलाएं न झुकीं और न ही डरीं। संघर्ष जारी है और रहेगा। पहले दिन से विरोध ईरानी एक्टिविस्ट और आर्टिस्ट फरीबा नजेमी कहती हैं- ईरान में इस्लामी क्रांति के पहले महिलाएं स्वतंत्र थीं। 1979 से ही अनिवार्य हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गया था। 2017 में एक महिला ने सफेद दुपट्टा लहराकर विरोध दर्ज किया तो 2022 में ‘वुमन लाइफ फ्रीडम’ में महिलाएं सड़कों उतरीं। हकों की यह लड़ाई जारी रहेगी। क्रांति से पहले ईरान की पहचान धर्म के आधार पर तय नहीं होती थी। अधिकतर लोग खुद को सबसे पहले मुसलमान के रूप में पेश नहीं करते थे। समाज खुला था और जीवन शैली में विविधता थी, लेकिन 47 साल पहले 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद समाज पर शरीयत कानून लागू कर दिया गया। उस समय मैं बहुत युवा थी और कट्टरपंथियों के उभार से खुश नहीं थी, हालांकि समाज के एक हिस्से ने नई व्यवस्था को स्वीकार भी कर लिया था। सबसे अधिक असर महिलाओं पर पड़ा है। एक समय ऐसा था जब विश्वविद्यालयों में लगभग 66% छात्राएं थीं, लेकिन धीरे-धीरे अवसर कम हो गए। रोजगार में भी रुकावटें आईं। अब तो अगर किसी महिला के सिर पर डाले गए दुपट्टे से बाल का एक हिस्सा भी दिख जाए तो उसे परेशान किया जाता है या हिरासत में ले लिया जाता है। महिलाओं को रोका जाता है, धक्का दिया जाता है, पीटा जाता है या जबरन वैन में बैठाकर ले जाया जाता है। गश्त-ए-इरशाद जैसे संगठन सड़कों पर गश्त करते हैं और ड्रेस कोड के उल्लंघन पर महिलाओं को गिरफ्तार कर सकते हैं। हिरासत में लेते समय सुरक्षा गार्ड महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करते हैं, युवा लड़कियों को ही निशाना बनाया जाता है। कानून महिलाओं की निजी जिंदगी पर भी पाबंदियां लगाता है। कानून इस तरह बनाए गए हैं कि वे महिलाओं को तलाक लेने से हतोत्साहित करते हैं। विदेश यात्रा के लिए भी महिलाओं को पति की अनुमति चाहिए होती है। अब यह हालात बदलने चाहिए।
शाहरुख खान ने फिल्म सूबेदार की तारीफ की:अनिल कपूर की एक्टिंग को लेकर कहा-वे हर किरदार में अपना पूरा दम लगा देते हैं

बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान ने शनिवार को अनिल कपूर स्टारर फिल्म ‘सूबेदार’ को लेकर प्रतिक्रिया दी। फिल्म की तारीफ करते हुए उन्होंने अनिल कपूर के अभिनय को प्रभावी बताया। बता दें कि ‘सूबेदार’ 5 मार्च को अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई है। शाहरुख खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “सूबेदार पूरी तरह से एंजॉय की। पर हमेशा भरोसा किया जा सकता है कि वे हर रोल में अपना पूरा दम लगा देते हैं। उनका शांत लेकिन प्रभावी अभिनय प्रेरणादायक है और एक्शन भी बहुत शानदार है। आदित्य रावल, सौरभ शुक्ला, मोना सिंह, फैजल मलिक, राधिका मदान, हर किरदार को अलग-अलग स्टाइल में बनाया गया है और आप सभी ने शानदार काम किया है। सुरेश त्रिवेणी और पूरी टीम को बहुत-बहुत बधाई और ढेर सारा प्यार।” फिल्म को लेकर इंडस्ट्री के अन्य लोगों ने भी प्रतिक्रिया दी है। फिल्ममेकर अनुराग कश्यप ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हुए लिखा कि ‘सूबेदार’ को सिनेमाघरों में रिलीज होना चाहिए था। उनके अनुसार फिल्म को बड़े पर्दे के लिए अनामॉर्फिक फॉर्मेट में शूट किया गया है। उन्होंने यह भी लिखा कि डायरेक्टर सुरेश त्रिवेणी ने बुंदेलखंड और चंबल के माहौल को दिखाया है, जहां पितृसत्ता और सामाजिक ढांचे की झलक मिलती है। ‘सूबेदार’ की कहानी रिटायर्ड सैनिक अर्जुन मौर्य (अनिल कपूर) के इर्द-गिर्द घूमती है। मध्य प्रदेश की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म में दिखाया गया है कि घर लौटने के बाद वह सामान्य जीवन में ढलने की कोशिश करता है। साथ ही वह अपने इलाके में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई भी लड़ता है। फिल्म में अर्जुन मौर्य की बेटी श्यामा का किरदार राधिका मदान ने निभाया है। कहानी में अर्जुन अपनी मिलिट्री ट्रेनिंग का उपयोग कर परिवार की रक्षा करता है। अनिल कपूर और राधिका मदान के अलावा फिल्म में खुशबू सुंदर, सौरभ शुक्ला, आदित्य रावल, मोना सिंह और फैसल मलिक भी अहम भूमिकाओं में हैं।
तलाक विवाद पर थलापति विजय का पहला रिएक्शन:कहा- जो दिक्कत है, उसकी चिंता मत करिए, मैं इसे संभाल लूंगा, आप ये बोझ न लें

साउथ एक्टर और राजनेता थलापति विजय इन दिनों तलाक के चलते विवादों में हैं। उनकी पत्नी ने एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का आरोप लगाते हुए तलाक की अर्जी दी है और अब एलीमनी की भी चर्चा है। इसी बीच एक्टर ने पहली बार इस पूरे विवाद पर पब्लिकली बात की है। उन्होंने फैंस से कहा है कि उनकी निजी जिंदगी में चल रहीं समस्याएं वो खुद हल कर लेंगे, इसमें समय बर्बाद करने की जरुरत नहीं है। थलापति विजय हाल ही में चेन्नई में अपनी पॉलिटिकल पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम के महिला दिवस इवेंट में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद सभी फैंस को संबोधित करते हुए तलाक के विवाद पर कहा, “हाल ही में मेरे आसपास जो समस्याएं चल रही हैं, प्लीज उनकी चिंता मत कीजिए। वे बातें आपके समय के लायक नहीं हैं। मैं उन्हें खुद संभाल लूंगा।” आगे एक्टर ने कहा, “मुझे सबसे ज्यादा दुख तब होता है जब मैं देखता हूं कि मेरी वजह से आप उदास या परेशान हो जाते हैं। कृपया मेरी समस्याओं का बोझ अपने ऊपर मत लीजिए।” शादी के 26 साल बाद पत्नी ने मांगा तलाक थलापति विजय की पत्नी संगीता सोरनालिंगम ने हाल ही में तलाक की अर्जी दी है। उन्होंने आरोप लगाए हैं कि विजय का एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर चल रहा है, जो उनके तलाक की वजह है। तलाक की खबरों के बीच रूमर्ड गर्लफ्रेंड के साथ दिखे एक्टर थलापति विजय का नाम लंबे समय से साउथ एक्ट्रेस त्रिषा के साथ जोड़ा जा रहा है। तलाक की खबरें सामने आने के बाद विजय, त्रिषा के साथ एक शादी में पहुंचे। दोनों ने साथ एंट्री लीं और साथ तस्वीरें क्लिक करवाईं, जिससे उनके रिलेशनशिप की खबरें और बढ़ चुकी हैं।
‘भाजपा देश की सर्वोच्च कुर्सी का दुरुपयोग कर रही है’: राष्ट्रपति विवाद को लेकर ममता बनर्जी ने केंद्र पर हमला बोला | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 08, 2026, 10:58 IST राष्ट्रपति मुर्मू ने सवाल किया था कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनका स्वागत क्यों नहीं किया और कार्यक्रम स्थल में बदलाव और कार्यक्रम में कम भीड़ की ओर भी इशारा किया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (छवि: पीटीआई) द्रौपदी मुर्मू द्वारा सिलीगुड़ी दौरे के दौरान व्यवस्थाओं पर चिंता जताए जाने के बाद राज्य विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र और भारतीय जनता पार्टी पर देश के सर्वोच्च पद का अपमान करने और राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। राष्ट्रपति ने सवाल किया था कि मुख्यमंत्री ने उनका स्वागत क्यों नहीं किया और कार्यक्रम स्थल में बदलाव और कार्यक्रम में कम भीड़ की ओर भी इशारा किया। ममता ने क्या कहा? एक सोशल मीडिया पोस्ट में, सीएम बनर्जी ने कहा कि जिला प्रशासन ने पहले ही कार्यक्रम के लिए चुने गए स्थल की व्यवस्थाओं पर चिंता व्यक्त कर दी थी। सिलीगुड़ी में 9वें अंतरराष्ट्रीय आदिवासी संताल सम्मेलन के लिए निजी संस्था इंटरनेशनल संताल काउंसिल की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. बनर्जी ने कहा कि उन्नत सुरक्षा संपर्क के बाद, जिला प्रशासन ने राष्ट्रपति सचिवालय को लिखित रूप में सूचित किया कि आयोजक अपर्याप्त रूप से तैयार दिखाई दे रहा है। फोन पर भी चिंता से अवगत कराया गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति सचिवालय की अग्रिम टीम ने 5 मार्च, 2026 को दौरा किया और उन्हें व्यवस्थाओं की कमी के बारे में बताया गया, लेकिन कार्यक्रम निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहा। मुख्यमंत्री कहते हैं, ‘कोई प्रोटोकॉल चूक नहीं।’ ममता बनर्जी ने कहा कि राष्ट्रपति के सचिवालय द्वारा साझा किए गए अनुमोदित लाइनअप के अनुसार सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर, दार्जिलिंग के जिला मजिस्ट्रेट और सिलीगुड़ी पुलिस आयुक्त ने राष्ट्रपति का स्वागत किया और उन्हें विदा किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री लाइनअप या मंच योजना का हिस्सा नहीं थीं और उन्होंने जोर देकर कहा कि जिला प्रशासन द्वारा प्रोटोकॉल में कोई चूक नहीं हुई थी। उन्होंने कहा, “भाजपा अपनी पार्टी के एजेंडे के लिए देश की सर्वोच्च कुर्सी का अपमान और दुरुपयोग कर रही है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।” राष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति पर उठाए सवाल इससे पहले राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि आम तौर पर किसी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों को राष्ट्रपति के स्वागत के लिए मौजूद रहना चाहिए. उन्होंने कहा, “आम तौर पर जब राष्ट्रपति आ रहे हों तो मुख्यमंत्री को स्वागत करना चाहिए और अन्य मंत्रियों को भी मौजूद रहना चाहिए। लेकिन वह नहीं आईं। राज्यपाल बदल गए हैं और नहीं आ सके। लेकिन तारीख तय हो गई थी इसलिए मैं आई हूं।” राष्ट्रपति ने आयोजन स्थल के चयन पर भी सवाल उठाया और कहा कि यह ऐसी जगह पर स्थित है जहां लोगों का पहुंचना मुश्किल है। उन्होंने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि क्या राज्य सरकार ने आदिवासी समुदायों को कार्यक्रम में भाग लेने से रोका था। मुर्मू ने कहा कि ममता बनर्जी उनकी छोटी बहन की तरह हैं और वह खुद भी बंगाल की बेटी हैं। प्रधानमंत्री ने घटना को बताया ‘शर्मनाक’ प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने घटनाक्रम को “शर्मनाक और अभूतपूर्व” बताया। एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि जो लोग लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में विश्वास करते हैं वे बेहद निराश हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं और राष्ट्रपति के अपमान के लिए उसका प्रशासन जिम्मेदार है। मोदी ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और इसकी पवित्रता का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए। राजनीतिक आदान-प्रदान बढ़ता है यह आदान-प्रदान तब हुआ है जब आने वाले महीनों में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने की उम्मीद है, जिसमें तृणमूल कांग्रेस और भाजपा ने राजनीतिक हमले तेज कर दिए हैं। प्रधानमंत्री को जवाब देते हुए, तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने एक्स पर लिखा, “पश्चिम बंगाल के लोग बनाम बीजेपी + ईसीआई + ईडी + आईटी + सीबीआई + एनआईए + सीएपीएफ + राज्यपाल + 20 केंद्रीय मंत्री + 10 सीएम + प्रधान मंत्री + आदरणीय राष्ट्रपति जी + गोदी मीडिया। जब पूरा प्रतिष्ठान बंगाल के खिलाफ खड़ा होता है, तो बंगाल मजबूत खड़ा होता है। आगे बढ़ें।” पहले प्रकाशित: मार्च 08, 2026, 10:58 IST समाचार राजनीति ‘बीजेपी देश की सर्वोच्च कुर्सी का दुरुपयोग कर रही है’: ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति विवाद पर केंद्र पर हमला किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)ममता बनर्जी(टी)ममता(टी)ममता बनर्जी ने केंद्र(टी)अध्यक्ष द्रौपदी मुर्मू(टी)द्रौपदी मुर्मू(टी)द्रौपदी मुर्मू सिलीगुड़ी पर हमला किया।संथाल दिवस









