तेज रफ्तार वाहन ने 2 साइकिल सवारों मारी टक्कर:बुजुर्ग की मौत; युवक की हालत गंभीर, ग्रामीणों में आक्रोश

सिवनी जिले के घंसौर थाना क्षेत्र में मंगलवार सुबह एक सड़क हादसे में 64 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई। इस दुर्घटना में एक युवक गंभीर रूप से घायल हुआ है, जिसे जबलपुर रेफर किया गया है। पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, ग्राम बरोदा माल निवासी अक्तू लाल कन्हेरिया (64) मंगलवार सुबह करीब 8 बजे रविंद्र कुलस्ते नामक युवक के साथ साइकिल से अपने घर लौट रहे थे। बरोदा पटरी ग्राम के समीप एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों साइकिल सवार सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण और परिजन मौके पर पहुंचे। गंभीर हालत में रेफर तत्काल 108 एम्बुलेंस की मदद से दोनों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घंसौर ले जाया गया। वहां प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने अक्तू लाल कन्हेरिया को मृत घोषित कर दिया। रविंद्र कुलस्ते की गंभीर हालत को देखते हुए उसे बेहतर उपचार के लिए जबलपुर रेफर किया गया है, जहां उसका इलाज जारी है। हादसे की वजह रफ्तार बताया जा रहा है कि यह हादसा वाहन चालक की लापरवाही और तेज गति के कारण हुआ। घटना के बाद आरोपी चालक वाहन सहित मौके से फरार हो गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है और फरार वाहन चालक की तलाश कर रही है। इस घटना से ग्रामीणों में आक्रोश देखा जा रहा है। उनका कहना है कि इस मार्ग पर अक्सर तेज रफ्तार वाहन चलते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सड़क पर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ाने की मांग की है। घंसौर थाना प्रभारी लक्ष्मण झारिया ने बताया कि सड़क हादसे में एक वृद्ध की मौत और एक के गंभीर घायल होने की सूचना मिली थी। मर्ग कायम कर जांच की जा रही है और फरार वाहन व चालक की तलाश जारी है।
खरगोन में किसानों ने रास्ता खोलने की मांग की:खुदाई से वाहन नहीं जाने के कारण खेत में फंसी फसल, अधिकारियों ने दिया आश्वासन

खरगोन के ओझरा गांव के किसानों ने एक पुराने रास्ते को बंद किए जाने की शिकायत की है। किसानों का कहना है कि रास्ता संकरा होने के कारण खेतों में खड़ी तैयार फसल को बाहर निकालना मुश्किल हो गया है। किसानों के अनुसार, रास्ते के एक तरफ पत्थरों का ढेर लगा दिया गया है, जबकि दूसरी तरफ खुदाई कर दी गई है। इस वजह से रास्ता इतना संकरा हो गया है कि मिनी ट्रक और हार्वेस्टर जैसे बड़े वाहन खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। पहले इस रास्ते का उपयोग बड़े वाहनों के लिए आसानी से होता था, लेकिन अब केवल बैलगाड़ी ही निकल पाती है। किसानों ने कसरावद तहसीलदार को इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है और शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। उन्हें अधिकारियों द्वारा मौके का निरीक्षण कर अतिक्रमण हटाने का आश्वासन दिया गया है। किसान रुपेश पटेल ने बताया कि उनकी फसल खेतों में तैयार खड़ी है, लेकिन वाहनों की पहुंच न होने के कारण वे उपज को बाहर नहीं ला पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह रास्ता पीढ़ियों से इस्तेमाल किया जा रहा है। एक किसान ने मेड़ की तरफ पत्थर की पाल खड़ी कर दी है, जबकि एक अन्य किसान ने मेड़ किनारे 3 फीट चौड़ी और 2 फीट गहरी खुदाई कर दी है, जिससे रास्ता अवरुद्ध हो गया है। इस दौरान राजेश पटेल, विक्रम पटेल, राकेश पटेल, दिनेश पटेल, राहुल पटेल, निर्मल पटेल, हेमंत पटेल सहित कई अन्य किसान मौजूद थे। सभी किसानों ने इस समस्या के समाधान की मांग का समर्थन किया।
वृंदावन में मोहन भागवत ने संत के पैर छुए:संत मलूक दास के जयंती उत्सव में शामिल हुए, रामदेव ने समाधि के दर्शन किए

संत मलूक दास की आज 452वीं जयंती है। वृंदावन के मलूक पीठ में उनका जन्मोत्सव कार्यक्रम मनाया जा रहा है। इसमें RSS प्रमुख मोहन भागवत पहुंचे हैं। मंच पर संत रसिक माधव दास ने मोहन भागवत को शाल ओढ़ाकर स्वागत किया। भागवत ने हाथ जोड़कर अभिवादन स्वीकार किया और पैर छूकर आशीर्वाद लिया। योग गुरु बाबा रामदेव भी संत मलूक दास की जयंती में पहुंचे। उन्होंने संत की समाधि के दर्शन-पूजन किए। सीएम योगी दोपहर ढाई बजे पहुंचेंगे। हालांकि, उनकी मोहन भागवत से मुलाकात नहीं होगी, क्योंकि तब तक संघ प्रमुख कार्यक्रम से जा चुके होंगे। कृष्ण भक्त संत मलूक दास का जन्म कौशांबी में खत्री परिवार में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपनी साधना स्थली वृंदावन को बनाया। यहां उन्होंने यमुना किनारे वंशीवट पर अपनी कुटिया बनाई, जिसे मलूक पीठ के नाम से जाना जाता है। संत का गोलोक गमन (मृत्यु) वृंदावन में हुआ, जहां उनकी समाधि बनी हुई है। संत मलूक दास का अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम, दास मलूका कह गए, सबके दाता राम दोहा सबसे मशहूर हुआ। इसका अर्थ है कि अजगर किसी की नौकरी नहीं करता, पक्षी काम नहीं करता, लेकिन भगवान पर विश्वास हो तो राम जी सबका भला करते हैं। तस्वीरें देखिए- संत मलूक दास की जयंती पर कार्यक्रम से जुड़े अपडेट के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…
2 रुपये की यह गोली किडनी कर सकती है खराब ! ऐसे मरीज भूलकर भी न करें गलती, रिसर्च में बड़ा खुलासा

Last Updated:April 07, 2026, 10:16 IST Statins and Kidney Health: कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने के लिए डॉक्टर्स आमतौर पर स्टैटिन्स दवाएं देते हैं. ये दवाएं खून में जमा बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करती हैं. इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम हो जाता है. कुछ रिसर्च बताती हैं कि ये दवाएं किडनी के लिए भी फायदेमंद होती हैं. हालांकि लंबे समय तक स्टैटिन यूज करने से किडनी डिजीज का रिस्क भी बढ़ सकता है. कोलेस्ट्रॉल की दवा स्टैटिन्स का लंबे समय तक इस्तेमाल किडनी डिजीज का रिस्क बढ़ा सकता है. Do Statins Affect Your Kidneys: आजकल हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या तेजी से बढ़ रही है. बड़ी संख्या में युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं. जब कोलेस्ट्रॉल बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तब डॉक्टर्स मरीजों को रोज स्टैटिन दवा लेने की सलाह देते हैं. स्टैटिन्स दवाओं का इस्तेमाल खून में जमा कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए किया जाता है. ये दवाएं कोलेस्ट्रॉल कम करने और हार्ट डिजीज से बचाने में बेहद असरदार मानी जाती हैं. खास बात यह है कि स्टैटिन्स की कीमत काफी कम होती है. इन दवाओं की पूरी स्ट्रिप आपको 20-25 रुपये में मिल जाती है. ये दवाएं लिवर में जाकर उस एंजाइम को रोकती हैं, जो कोलेस्ट्रॉल बनाने में जिम्मेदार होता है. इसलिए हाई कोलेस्ट्रॉल और हार्ट डिजीज के हाई रिस्क मरीजों को अक्सर स्टैटिन्स लिखी जाती हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार कोलेस्ट्रॉल घटाने के अलावा स्टैटिन्स शरीर को कई अन्य तरीकों से फायदा पहुंचाती हैं. इनमें से एक किडनी की सुरक्षा है. एक रिसर्च में पता चला है कि जिन लोगों में जिनको पहले से किडनी की समस्या है, उन्हें स्टैटिन्स लेने से किडनी के कामकाज को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है. कई स्टडी बताती हैं कि स्टैटिन्स का उपयोग किडनी डिजीज की प्रोग्रेस को धीमा कर सकता है और एक्यूट किडनी इंजरी (AKI) जैसी घटनाओं के जोखिम को कम कर सकता है. अधिकतर रिसर्च और क्लीनिकल ट्रायल स्टैटिन्स को सुरक्षित और फायदेमंद बताते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक एक स्टडी में दावा किया गया कि कई सालों तक स्टैटिन्स लेने से किडनी की समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है. इस अध्ययन में 40,000 से अधिक मरीजों का 8.4 साल तक अध्ययन किया गया और तुलना की गई कि कौन स्टैटिन्स ले रहा था और कौन नहीं. अध्ययन में यह पाया गया कि स्टैटिन्स लेने वालों में तीन प्रकार की किडनी की समस्याएं ज्यादा थीं. इनमें एक्यूट किडनी इंजरी का खतरा 30% ज्यादा पाया गया. क्रोनिक किडनी डिजीज का रिस्क 36% ज्यादा देखने को मिला और नेफ्राइटिस या रीनल स्क्लेरोसिस का जोखिम 35% अधिक पाया गया. यह जोखिम केवल बीमारियों वाले मरीजों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ लोगों में भी क्रोनिक किडनी डिजीज का संबंध पाया गया. स्टैटिन्स के फायदे कई रिसर्च में साबित हो चुके हैं, जबकि कुछ स्टडी में इसे लॉन्ग टर्म के लिए रिस्की भी माना गया है. क्लीनिकल ट्रायल आमतौर पर केवल कुछ सालों के लिए होते हैं और इनमें स्टैटिन्स के शॉर्ट टर्म फायदे दिखाई देते हैं. जब लोग इन दवाइयों को दस साल या उससे अधिक समय तक रोजमर्रा की ज़िंदगी में लेते हैं, तो किडनी पर दीर्घकालिक प्रभाव अलग हो सकता है. इसका मतलब यह नहीं कि स्टैटिन्स सीधे किडनी डिजीज का कारण हैं, बल्कि इससे कनेक्शन जुड़ा हुआ है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 07, 2026, 10:16 IST
सामने महिलाएं, मस्जिद की घोषणाएं और खराब सीसीटीवी कैमरे: एनआईए ने मालदा की साजिश रची | विशेष | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:07 अप्रैल, 2026, 09:48 IST रिपोर्ट में दिन के दौरान लक्षित बाधा का विवरण दिया गया है, जिसमें सड़क अवरोधों के कारण एक महिला न्यायिक अधिकारी को लगभग आठ घंटे तक गैरकानूनी तरीके से रोका जाना भी शामिल है। एजेंसी ने बताया कि स्थिति स्वतःस्फूर्त अशांति से भी आगे बढ़ गई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मालदा न्यायिक घेराव को “समन्वित वृद्धि” द्वारा चिह्नित किया गया था, जिसमें बताया गया था कि कैसे विरोध प्रदर्शन न्यायिक अधिकारियों पर लक्षित हमले में बदल गया। ये दलीलें तब आईं जब शीर्ष अदालत ने घटना के दौरान हुई चूक को लेकर पश्चिम बंगाल के शीर्ष नौकरशाह की खिंचाई की। 72 घंटे की जांच के आधार पर और अदालत में पेश की गई अपनी प्रारंभिक स्थिति रिपोर्ट में, एनआईए ने बताया कि 1 अप्रैल को कालियाचक-द्वितीय में हिंसा कैसे हुई। एजेंसी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में किए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बाद, लगभग 1,500 लोगों की भीड़ ने सात न्यायिक अधिकारियों को 13 घंटे से अधिक समय तक बीडीओ कार्यालय के अंदर कैद रखा। एजेंसी ने बताया कि स्थिति स्वतःस्फूर्त अशांति से भी आगे बढ़ गई है। इसने भीड़ इकट्ठा करने के लिए ई-रिक्शा और एक स्थानीय मस्जिद से की गई घोषणाओं के साथ संगठित लामबंदी की ओर इशारा किया। इसने सांकेतिक पैटर्न का भी उल्लेख किया, जैसे कि महिलाओं को आगे रखा गया जबकि पुरुष पीछे रहे, योजना के तत्वों का सुझाव दिया गया, यहां तक कि एक बड़ी साजिश की जांच की जा रही है। रिपोर्ट में दिन के दौरान लक्षित बाधा का विवरण दिया गया है, जिसमें सड़क अवरोधों के कारण एक महिला न्यायिक अधिकारी को लगभग आठ घंटे तक गैरकानूनी तरीके से रोका जाना भी शामिल है। अदालत के समक्ष रखे गए एनआईए के विवरण के अनुसार, निकासी चरण के दौरान हिंसा और बढ़ गई। आधी रात के आसपास पुलिस और केंद्रीय बलों द्वारा न्यायिक अधिकारियों को बाहर ले जाने के बाद, काफिले पर कई स्थानों पर समन्वित पथराव हुआ। ऐसे ही एक हमले में, एक एस्कॉर्ट वाहन पलट गया, जिसके ड्राइवर को ईंट से सिर में गंभीर चोट लगी। सुरक्षा चूक भी एजेंसी के निष्कर्षों का एक प्रमुख हिस्सा थी। बीडीओ कार्यालय में स्थापित 16 सीसीटीवी कैमरों में से नौ गैर-कार्यात्मक थे, जिनमें मुख्य प्रवेश द्वार को कवर करने वाले महत्वपूर्ण कैमरे भी शामिल थे। जबकि एनआईए की प्रस्तुतियाँ सुनवाई का मूल थीं, सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य प्रशासन की प्रतिक्रिया पर उदासीन रुख अपनाया। पीठ ने संकट के दौरान कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का फोन नहीं उठाने के लिए मुख्य सचिव को फटकार लगाते हुए इसे अस्वीकार्य बताया और उन्हें माफी मांगने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी देखा कि घटना की प्रकृति ने गंभीर चिंताएं पैदा कीं, संकेत के साथ कि घेराव केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं था, बल्कि पूर्व-योजनाबद्ध भी हो सकता है, जो एनआईए के प्रारंभिक निष्कर्षों में बताई गई चिंताओं को प्रतिबिंबित करता है। भारतीय न्याय संहिता के तहत तीन एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिसमें गैरकानूनी सभा, हत्या का प्रयास और लोक सेवकों के काम में बाधा डालने सहित आरोप लगाए गए हैं। अब तक 100 से अधिक व्यक्तियों को नामित किया गया है और गिरफ्तारियां जारी हैं। अपने प्रस्तुतीकरण में, एनआईए ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि मामले को पूर्ण पैमाने पर जांच के लिए एजेंसी को स्थानांतरित करने पर विचार किया जाए, जिससे उसे एफआईआर को फिर से दर्ज करने और लामबंदी और हमलों के पीछे एक व्यापक साजिश की संभावना की जांच करने की अनुमति मिल सके। जगह : मालदह, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 07 अप्रैल, 2026, 09:48 IST समाचार चुनाव सामने महिलाएं, मस्जिद की घोषणाएं और खराब सीसीटीवी कैमरे: एनआईए ने मालदा की साजिश रची | अनन्य अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट) मालदा न्यायिक घेराव(टी)एनआईए जांच(टी)सुप्रीम कोर्ट भारत(टी)पश्चिम बंगाल हिंसा(टी)कालियाचक-द्वितीय घटना(टी)न्यायिक अधिकारियों पर हमला(टी)चुनावी रोल विरोध(टी)सुरक्षा चूक सीसीटीवी
बीजेपी ने खड़गे की ‘जहरीले सांप’ वाली टिप्पणी की निंदा की, कांग्रेस पर RSS के खिलाफ ‘मुसलमानों को भड़काने’ का आरोप लगाया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:07 अप्रैल, 2026, 08:18 IST पूनावाला ने लिखा कि कांग्रेस “भारतीय जिहादी कांग्रेस” की तरह व्यवहार कर रही है और दावा किया कि ये टिप्पणियां राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ उकसाने वाली हैं। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे. (एक्स/पीटीआई) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की उस टिप्पणी की कड़ी आलोचना की, जिसमें उन्होंने आरएसएस और भाजपा की तुलना “जहरीले सांप” से की थी। पार्टी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। खड़गे ने कहा, ”कुरान में लिखा है कि प्रार्थना के समय भी, यदि आप देखते हैं जहरीला सांप, तुम्हें इसे मारना ही होगा. आरएसएस/बीजेपी बिल्कुल वही सांप है… यदि आप उन्हें नहीं मारेंगे, तो आप जीवित नहीं बचेंगे।” बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस ने “नया निचला स्तर” पार कर लिया है और आरोप लगाया कि पार्टी खुलेआम मुसलमानों को भाजपा और आरएसएस के सदस्यों के खिलाफ भड़का रही है। एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि कांग्रेस “भारतीय जिहादी कांग्रेस” की तरह व्यवहार कर रही है और दावा किया कि ये टिप्पणियां राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ उकसाने वाली हैं। यह INCइंडियन नेशनल कांग्रेस नहीं है, यह भारतीय जिहादी कांग्रेस है कांग्रेस खुलेआम मुसलमानों को भाजपा/आरएसएस सदस्यों को मारने के लिए उकसा रही है खड़गे जी: कुरान में लिखा है नमाज के वक्त भी अगर जहरीला सांप दिखे तो उसे मार दो। आरएसएस/बीजेपी वही सांप है…आप उन्हें नहीं मारोगे तो बचोगे… pic.twitter.com/6HNBm65vk1 – शहजाद जय हिंद (कांग्रेस पारिस्थितिकी तंत्र के अनुसार चौकीदार) (@Shehzad_Ind) 6 अप्रैल 2026 खड़गे के बयान का हवाला देते हुए, पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस नेता ने प्रार्थना के दौरान भी एक जहरीले सांप को मारने के बारे में एक पंक्ति का उल्लेख किया था और इसकी तुलना भाजपा और आरएसएस से करते हुए आरोप लगाया था कि इस तरह की बयानबाजी खतरनाक और अलोकतांत्रिक है। पूनावाला ने अपने पोस्ट में कहा, “यह कांग्रेस के लिए सबसे निचला स्तर है। यह सबसे अलोकतांत्रिक, आपातकालीन मानसिकता वाला बयान है। शर्मनाक! चुनाव आयोग को अब कार्रवाई करनी चाहिए।” इससे पहले, खड़गे की “गुजरात के अनपढ़ लोग” टिप्पणी की मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल सहित भाजपा नेताओं ने व्यापक निंदा की, जिन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल के डीएनए में गुजरात विरोधी “जहर” बहता है और माफी की मांग की।
पंजाबी सिंगर ने फैन के पेट पर दिया ऑटोग्राफ:बोला-मैं इसे शीशे में जड़वाकर रखूंगा, आपको फोटो भी भेजूंगा

पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री के मशहूर सिंगर प्रेम ढिल्लों अक्सर अपने गानों और स्टाइल के कारण चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस बार वह अपने एक प्रशंसक (फैन) के प्रति अनोखे प्रेम को लेकर सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें प्रेम ढिल्लों अपने प्रशंसक के पेट पर ऑटोग्राफ देते नजर आ रहे हैं। यह पूरा वाकया उस समय चर्चा में आया जब दिलप्रीत ने खुद अपने आधिकारिक स्नैपचैट अकाउंट पर यह वीडियो साझा की। वीडियो में देखा जा सकता है कि एक करीब 17-18 साल का सिख नौजवान, जिसने संतरी रंग की टी शर्ट पहनी हुई है, सिंगर से मिलने उनके घर पहुंचा था। प्रशंसक की दीवानगी ऐसी थी कि उसने अपनी टी शर्ट पर सिंगर से अपने पेट पर ही ऑटोग्राफ देने की जिद कर दी। मजाकिया अंदाज में हुई बातचीत वीडियो में प्रेम ढिल्लों काफी खुशनुमा मूड में नजर आ रहे हैं। ऑटोग्राफ देते हुए उन्होंने मजाकिया लहजे में प्रशंसक से पूछा, यहां साइन कर दूं क्या इस पर फैन ने बेहद उत्साह के साथ जवाब दिया, बिल्कुल-बिल्कुल, मैं इसे संभाल कर रखूंगा और इसे शीशे के फ्रेम में जड़वाकर आपको फोटो भी भेजूंगा। प्रेम ने भी हंसते हुए प्रतिक्रिया दी और कहा- यह हुई न बात, पुश्तें भी देखेंगी कि ये साइन दिलप्रीत ढिल्लों ने किए थे। ऑटोग्राफ देने के साथ-साथ दिलप्रीत वीडियो में रील (Reel) बनाते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। रोजाना उमड़ती है प्रशंसकों की भीड़ बताया जा रहा है कि यह वीडियो सुबह के वक्त का है। सिंगर के करीबियों का कहना है कि दिलप्रीत के घर पर रोजाना हजारों की संख्या में प्रशंसक उनसे मिलने पहुंचते हैं। लेकिन इस ‘मोटे’ और क्यूट फैन की इस अनोखी मांग ने सिंगर का दिल जीत लिया। सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को खूब शेयर कर रहे हैं और सिंगर के जमीन से जुड़े स्वभाव की तारीफ कर रहे हैं। पंजाबी गायक प्रेम ढिल्लों पूरा नाम: प्रेमजीत सिंह ढिल्लों पिता का नाम: कुलदीप सिंह ढिल्लों माता का नाम: भगवंत कौर जन्म तिथि:4 जनवरी, 1995 शिक्षा: उन्होंने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से BCA की पढ़ाई की है। कहां के रहने वाले हैं: प्रेम ढिल्लों का जन्म और पालन-पोषण अमृतसर, पंजाब में हुआ था। सिंगिंग करियर की शुरुआत प्रेम ढिल्लों ने आधिकारिक तौर पर साल 2018 में पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री में कदम रखा। पहला गाना: उनका पहला सिंगल ट्रैक Chan Milondi (मार्च 2018) था। पहचान कैसे मिली: उन्हें असली पहचान 2019 में आए गाने Bootcut से मिली, जिसे सिद्धू मूसेवाला ने अपने चैनल पर रिलीज किया था। इसके बाद Old Skool गाने ने उन्हें ग्लोबल लेवल पर मशहूर कर दिया।
राघव चड्ढा विवाद- इससे पहले 30 नेता AAP छोड़ चुके:सबसे ज्यादा 15 पंजाब के, इनमें सांसद-MLA भी; 3 का न इस्तीफा, न निकाला

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का अपनी ही आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच टकराव चल रहा है। AAP ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाने के बाद पार्टी कोटे से बोलने का टाइम न देने तक के लिए कह दिया। अब उनके AAP छोड़कर दूसरी पार्टी में जाने के कयास भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि राघव चड्ढा अकेले ऐसे नेता नहीं हैं, जो अपनी ही पार्टी के निशाने पर हों। AAP की स्थापना से लेकर अब तक 30 बड़े नेता पार्टी से किनारा कर चुके हैं। जिसमें सबसे ज्यादा 15 नेता पंजाब से हैं। पंजाब से पार्टी को अलविदा करने वाले नेताओं में सुच्चा सिंह छोटेपुर, एडवोकेट एचएस फूलका और गुरप्रीत घुग्गी जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं। यही नहीं हाल ही में राज्य सभा के डिप्टी लीडर पद से हटाए गए राघव चड्ढा भी पंजाब कोटे से ही हैं। आप ने पंजाब के सिटिंग सांसदों धर्मवीर गांधी व हरजीत सिंह खालसा को भी पार्टी से निष्काषित कर दिया था। धर्मवीर गांधी कांग्रेस में शामिल होकर दोबारा सांसद चुने गए। यही नहीं आम आदमी पार्टी ने पंजाब में सिटिंग एमएलए को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया या विधायकों ने खुद पार्टी छोड़ दी। सुखपाल सिंह खैहरा पार्टी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे जब उन्हें पार्टी से निकाल दिया था। वहीं एडवोकेट एचएस फूलका ने भी LOP रहते हुए पार्टी छोड़ दी थी। कुछ दिन पहले वह BJP में शामिल हो गए। 26 नवंबर 2012 को पार्टी के गठन से लेकर 2026 तक नेताओं को आम आदमी पार्टी से क्यों निकाला गया या फिर नेताओं ने पार्टी से दूरी क्यों बनाई, इसके बारे में जानने के लिए पढ़ें पूरी रिपोर्ट… 1. शाजिया इल्मी पद: संस्थापक सदस्य, राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख नेता, 2014 लोकसभा उम्मीदवार। कारण: शाजिया इल्मी ने मई 2014 में आंतरिक लोकतंत्र की कमी, कुछ लोगों द्वारा पार्टी चलाने और मूल मूल्यों से भटकना का आरोप पार्टी नेताओं पर लगाया। उसके बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़ दी। 2. कैप्टन जी.आर. गोपीनाथ पद: संस्थापक सदस्य, प्रमुख राष्ट्रीय नेता। कारण: कैप्टन जीआर गोपीनाथ ने मई 2014 में आम आदमी पार्टी से किनारा कर दिया। उन्होंने पार्टी नेताओं पर आरोप लगाया कि पार्टी की रणनीति और कोर लीडरशिप द्वारा अनदेखी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया। 3. योगेंद्र यादव पद: संस्थापक सदस्य, पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी (PAC) सदस्य, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य। कारण: योगेंद्र यादव को आम आदमी पार्टी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण 21 अप्रैल 2015 को पार्टी से निष्काषित कर दिया। योगेंद्र यादव ने अनुशासन भंग, केजरीवाल की तानाशाही और टिकट वितरण में अनियमितताओं का आरोप लगाया। जिसकी वजह से उन्हें पार्टी से निकाला गया। 4.प्रशांत भूषण पद: संस्थापक सदस्य, PAC सदस्य, वरिष्ठ वकील। कारण: प्रशांत भूषण को भी योगेंद्र यादव के साथ ही पार्टी से बाहर निकाला गया। प्रशांत भूषण ने भी तानाशाही और टिकट वितरण में भ्रष्टाचार का आरोप पार्टी नेताओं पर लगाया था। अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें भी अप्रैल 2015 में बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। 5. आनंद कुमार पद: राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, संस्थापक सदस्य। कारण: पार्टी विरोधी गतिविधियां चलाने के आरोप में पार्टी ने योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण के साथ आनंद कुमार को भी बाहर का रास्ता दिखा। आनंद कुमार ने भी खुलकर AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की खिलाफत की थी। 6. अजीत झा पद: राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य। कारण: अप्रैल 2015 में इन्हें भी पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखाया। इन्होंने भी पार्टी में चल रही तानाशाही का विरोध किया था और कहा था कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक रही है। 7. मयंक गांधी पद: संस्थापक सदस्य, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, महाराष्ट्र यूनिट प्रमुख। कारण: मयंक गांधी को महाराष्ट्र यूनिट का प्रमुख नियुक्त किया गया था। 2015 में केजरीवाल ने महाराष्ट्र यूनिट भंग की। जिससे नाराज होकर मयंक गांधी ने पार्टी छोड़ दी। 8. अंजलि दामनिया पद: महाराष्ट्र यूनिट प्रमुख, राष्ट्रीय स्तर की नेता। कारण: अंजलि दामनिया के केजरीवाल से मतभेद हो गए थे। उन्होंने केजरीवाल पर हॉर्स ट्रेडिंग यानि कांग्रेस विधायकों को अपने साथ मिलाने के आरोप लगाए। जिसके बाद उनके केजरीवाल से मतभेद बढ़ गए और मार्च 2015 में में उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। 9. कपिल मिश्रा पद: दिल्ली की AAP सरकार में मंत्री , करावल नगर से MLA, राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित नेता। कारण: कपिल मिश्रा के सत्येंद्र जैन के साथ मदभेद हो गए थे जिसके बाद केजरीवाल ने उन्हें कैबिनेट से हटा दिया। उन्होंने केजरीवाल व सत्येंद्र जैन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए और पार्टी ने उन्हें निष्काषित कर दिया। 10. अलका लांबा पद: चांदनी चौक से MLA (2015 दिल्ली चुनाव), दिल्ली यूनिट की प्रमुख महिला नेता। कारण: अलका लांबा ने पार्टी की कार्यशैली पर असहमति, राजीव गांधी पर AAP के प्रस्ताव का विरोध और “खास आदमी पार्टी” बनने का आरोप लगाया। पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप लगे। उन्होंने सितंबर 2019 में पार्टी से इस्तीफा दे दिया और कांग्रेस जॉइन कर ली। 11. आशुतोष पद: प्रमुख प्रवक्ता, पत्रकार-से-राजनेता, केजरीवाल के करीबी। कारण: आशुतोष राज्यसभा जाना चाहते थे लेकिन पार्टी ने उन्हें राज्यसभा नहीं भेजा। जिसके बाद 2018 में उन्होंने पार्टी छोड़ दी। इसमें उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया। हालांकि बाद में उन्होंने पार्टी लीडरशिप से मतभेद होने की बात भी कही। 12. अशोक अग्रवाल पद: राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य। कारण: अशोक अग्रवाल पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। 2014 में उन्होंने पार्टी नेतृत्व की मनमानी पर सवाल उठाए और आम आदमी पार्टी को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का दर्जा दे दिया। जिसके बाद उन्होंने खुद पार्टी से इस्तीफा दे दिया। 13. इलियास आजमी पद: संस्थापक सदस्य, पूर्व सांसद। कारण: इलियास आजमी ने पार्टी में केजरीवाल की तानाशाही और आंतरिक लोकतंत्र की कमी पर सवाल खड़े किए। वो बार-बार कहते रहे कि पार्टी अपने सिद्धांतों से भटक रही हे। जिसके बाद उन्होंने 2016 में इस्तीफा दे दिया। 14. स्वाति मालीवाल पद: राज्यसभा सांसद (AAP कोटे से), दिल्ली महिला आयोग पूर्व अध्यक्ष, राष्ट्रीय स्तर की नेता। कारण: स्वाति मालीवाल ने अभी तक पार्टी नहीं छोड़ी है और न ही उसे पार्टी से निष्काषित किया गया है। लेकिन वो आम आदमी पार्टी के खिलाफ जमकर बोलती हैं। 2024
जीतेंद्र@84, कभी हीरोइन के स्टंट किए, फिर बने स्टार:रेखा को टाइमपास कहा, सरेआम फूट-फूटकर रोईं, महमूद ने हंसाने के लिए उतारी पेंट, जानिए किस्से

हिंदी सिनेमा के जंपिंग जैक कहे जाने वाले जीतेंद्र आज 84 साल के हो गए हैं। कभी मुंबई की चॉल में 10×12 की खोली में रहने वाले जीतेंद्र आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। मिडिल क्लास परिवार में जन्में जीतेंद्र आर्टिफिशियल जूलरी सप्लाई करने में पिता का हाथ बंटाते थे। एक रोज वो सेट पर जूलरी पहुंचाने गए, जहां उन्हें जूनियर आर्टिस्ट का काम मिला। तनख्वाह थी 100 रुपए महीना। उस दिन जीतेंद्र का फिल्मों से ऐसा रिश्ता जुड़ा कि उन्होंने पहले जूनियर आर्टिस्ट से बतौर लीड हीरो काम किया और फिर हिंदी सिनेमा के स्टार बने। ये रिश्ता 200 से ज्यादा फिल्मों और 5 लाइफटाइम अचीवमेंट्स अवॉर्ड्स के साथ आज भी कायम है। आज जीतेंद्र के 84वें जन्मदिन के खास मौके पर जानिए उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ मजेदार और अनसुने किस्से- खोली में पंखा लगा, तो पूरा चॉल देखने पहुंचा जीतेंद्र का जन्म 7 अप्रैल 1942 में अमृतसर के एक पंजाबी परिवार में हुआ। जन्म के समय उनका नाम रवि कपूर रखा गया, जो बाद में फिल्मों में आकर जीतेंद्र हुआ। जीतेंद्र कुछ महीनों के ही थे, जब परिवार मुंबई आकर बस गया और गिरगांव की श्याम सदन चॉल में रहने लगा। 8 लोगों का पूरा परिवार 10 बाय 12 की खोली में रहता था, जिसका भाड़ा था 6 रुपए। उनके पिता अमरनाथ फिल्मों के सेट में आर्टिफिशियल जूलरी सप्लाई करने का काम करते थे। समय के साथ जब घर की आर्थिक स्थिति सुधरने लगी तो उनके घर में ट्यूबलाइट और पंखा लगा। चॉल में गरीबी का वो आलम था कि पूरे चॉल के लोग उनके घर वो पंखा और ट्यूबलाइट देखने पहुंचे थे। जिंदगी के 20 साल जीतेंद्र ने उसी चॉल में गुजारे। पंजाबी परिवार से होने के बावजूद आसपास के माहौल में घुल-मिलकर उन्होंने फर्राटेदार मराठी बोलना सीख लिया। सेट पर जूलरी सप्लाई करते हुए बने जूनियर आर्टिस्ट जीतेंद्र न पढ़ाई में अच्छे थे न उनके पास कोई खास टैलेंट या रुचि थी। शुरुआती पढ़ाई जैसे-तैसे पूरी की, तो पिता ने अपने आर्टिफिशियल जूलरी के बिजनेस में लगा दिया। काम था फिल्मों के सेट पर जूलरी पहुंचाना। साल 1959 में जीतेंद्र को वी.शांताराम की फिल्म नवरंग के सेट पर जूलरी पहुंचाने का काम मिला। वो रोज बस में धक्के खाते हुए सेट पर पहुंचते थे। उम्र करीब 17 साल थी। एक रोज चकाचौंध देखकर जीतेंद्र को भी फिल्म देखने का मन किया। उन्होंने वहां खड़े लोगों से पूछा तो उन्हें साफ इनकार कर दिया गया। सबने कहा कि वी.शांताराम किसी को शूटिंग देखने की इजाजत नहीं देते। जीतेंद्र मुंह लटकाए घर पहुंचे और चाचा से शिकायत की। अगले दिन चाचा उन्हें लेकर फिर सेट पर पहुंचे और असिस्टेंट से कहा कि मेरे भतीजे को शूटिंग देखनी है। उन्होंने जवाब दिया, ‘शूटिंग देखना है, तो काम भी करना पड़ेगा।’ उन्होंने जीतेंद्र को देखा और कहा- ‘हम तुम्हें प्रिंस का रोल देंगे।’ जीतेंद्र की खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा। रोज बस से जाने वाले जीतेंद्र अगले दिन टैक्सी में सेट पर पहुंचे। वहां पहुंचते ही उन्हें प्रिंस के कपड़े पहनाए गए, लेकिन जैसे ही वो सेट पर पहुंचे उन्हें जोरदार धक्का लगा। सेट पर वो अकेले प्रिंस नहीं थे, बल्कि वहां 200 प्रिंस बने लड़के बैठे थे। उन्हें फिल्म नवरंग के गाने तू छुपी है कहां में हीरोइन के पीछे खड़े होने वाले जूनियर आर्टिस्ट का काम मिला था। वी.शांताराम से मांगा काम, बना दिया गया हीरोइन का बॉडी डबल नवरंग की शूटिंग के दौरान जीतेंद्र ने खुद भी फिल्मों में काम करने का मन बना लिया। जब उन्हें 1963 में फिल्म सेहरा के सेट पर जूलरी पहुंचाने का काम मिला, तो एक दिन उन्होंने मौका पाते ही डायरेक्टर वी.शांताराम से मराठी में कहा- मुझे फिल्मों में काम करना है। वी.शांताराम ने उनकी बात से ज्यादा इस बात पर गौर किया कि एक पंजाबी कपूर साहब का लड़का इतनी अच्छी मराठी कैसे बोल रहा है। इस तरह बात चल निकली। उन्होंने जाते हुए कहा, मैं गारंटी नहीं देता, लेकिन तुम ट्राय करते रहो। इस एक बात की बदौलत जीतेंद्र को फिल्म सेहरा में ही एक्स्ट्रा का काम मिल गया। उन्हें बस सेट पर मौजूद रहना होता था, जिससे अगर कोई जूनियर आर्टिस्ट न आए, तो वो उनकी जगह खड़े हो सकें। इस काम के लिए जीतेंद्र को महीने के 100 रुपए तनख्वाह मिली। एक दिन फिल्म के एक सीन के लिए एक्ट्रेस संध्या को आग के ऊपर से कूदता दिखाना था। एक्ट्रेस संध्या, डायरेक्टर वी.शांताराम की पत्नी थी। उस दौर में आम तौर पर खतरनाक सीन करने के लिए एक्टर-एक्ट्रेसेस के बॉडी डबल रखे जाते थे, जो उन्हीं की तरह तैयार होकर खतरनाक स्टंट करते थे। उस दिन भी सेट पर एक बॉडी डबल बुलाई गई थी, लेकिन आग देखकर उसने सीन करने से इनकार कर दिया। इसके लिए एक्ट्रेस की बॉडी डबल बनने के लिए एक लड़की बुलाई गई थी। आग की लपटें देख वो लड़की डर गई और वहां से चली गई। सेट पर मौजूद जब कोई लड़की वो सीन करने के लिए राजी नहीं हुई तो वी.शांताराम ने जीतेंद्र को ही ये काम दे दिया। जीतेंद्र को एक्ट्रेस संध्या की तरह तैयार किया गया, जिसके बाद उन्होंने हीरोइन बनकर सीन किया। पहला डायलॉग ही नहीं बोल पाए जीतेंद्र, चिढ़ गए फिल्म के डायरेक्टर इस एक रोल से जीतेंद्र ने वी.शांताराम के दिल में घर लिया। उन्हें इस फिल्म में एक डायलॉग भी दिया गया। उन्होंने कहना था, सरदार, दुश्मनों का दल टिड्डियों की तरह आगे बढ़ रहा है। 25 रीटेक के बावजूद जीतेंद्र डायलॉग ठीक तरह नहीं बोल पाए। खिजियाकर वी.शांताराम ने वो गलत डायलॉग ही फिल्म में फाइनल कर लिया। वो वी.शांताराम ही थे, जिन्होंने जीतेंद्र का हुनर परखा और उन्हें फिल्म गीत गाया पत्थरों ने में लीड रोल दिया। पहली फिल्म देखने पेरेंट्स के साथ पहुंचे, खाली पड़ा था थिएटर जीतेंद्र की बतौर हीरो पहली फिल्म गीत गाया पत्थरों ने साल 1964 में रिलीज हुई। चॉल में रहने वाले जीतेंद्र के लिए ये खास दिन था। उन्होंने चॉल के पास स्थित एक थिएटर में पिता अमरनाथ और मां कृष्णा को फिल्म दिखाने के लिए तीन टिकटें खरीदीं। थिएटर पहुंचते ही उन्होंने टिकट देखने के लिए गेट पर खड़े शख्स से
जीतेंद्र@84, कभी हीरोइन के स्टंट किए, फिर बने स्टार:रेखा को टाइमपास कहा, सरेआम फूट-फूटकर रोईं, महमूद ने हंसाने के लिए उतारी पेंट, जानिए किस्से

हिंदी सिनेमा के जंपिंग जैक कहे जाने वाले जीतेंद्र आज 84 साल के हो गए हैं। कभी मुंबई की चॉल में 10×12 की खोली में रहने वाले जीतेंद्र आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। मिडिल क्लास परिवार में जन्में जीतेंद्र आर्टिफिशियल जूलरी सप्लाई करने में पिता का हाथ बंटाते थे। एक रोज वो सेट पर जूलरी पहुंचाने गए, जहां उन्हें जूनियर आर्टिस्ट का काम मिला। तनख्वाह थी 100 रुपए महीना। उस दिन जीतेंद्र का फिल्मों से ऐसा रिश्ता जुड़ा कि उन्होंने पहले जूनियर आर्टिस्ट से बतौर लीड हीरो काम किया और फिर हिंदी सिनेमा के स्टार बने। ये रिश्ता 200 से ज्यादा फिल्मों और 5 लाइफटाइम अचीवमेंट्स अवॉर्ड्स के साथ आज भी कायम है। आज जीतेंद्र के 84वें जन्मदिन के खास मौके पर जानिए उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ मजेदार और अनसुने किस्से- खोली में पंखा लगा, तो पूरा चॉल देखने पहुंचा जीतेंद्र का जन्म 7 अप्रैल 1942 में अमृतसर के एक पंजाबी परिवार में हुआ। जन्म के समय उनका नाम रवि कपूर रखा गया, जो बाद में फिल्मों में आकर जीतेंद्र हुआ। जीतेंद्र कुछ महीनों के ही थे, जब परिवार मुंबई आकर बस गया और गिरगांव की श्याम सदन चॉल में रहने लगा। 8 लोगों का पूरा परिवार 10 बाय 12 की खोली में रहता था, जिसका भाड़ा था 6 रुपए। उनके पिता अमरनाथ फिल्मों के सेट में आर्टिफिशियल जूलरी सप्लाई करने का काम करते थे। समय के साथ जब घर की आर्थिक स्थिति सुधरने लगी तो उनके घर में ट्यूबलाइट और पंखा लगा। चॉल में गरीबी का वो आलम था कि पूरे चॉल के लोग उनके घर वो पंखा और ट्यूबलाइट देखने पहुंचे थे। जिंदगी के 20 साल जीतेंद्र ने उसी चॉल में गुजारे। पंजाबी परिवार से होने के बावजूद आसपास के माहौल में घुल-मिलकर उन्होंने फर्राटेदार मराठी बोलना सीख लिया। सेट पर जूलरी सप्लाई करते हुए बने जूनियर आर्टिस्ट जीतेंद्र न पढ़ाई में अच्छे थे न उनके पास कोई खास टैलेंट या रुचि थी। शुरुआती पढ़ाई जैसे-तैसे पूरी की, तो पिता ने अपने आर्टिफिशियल जूलरी के बिजनेस में लगा दिया। काम था फिल्मों के सेट पर जूलरी पहुंचाना। साल 1959 में जीतेंद्र को वी.शांताराम की फिल्म नवरंग के सेट पर जूलरी पहुंचाने का काम मिला। वो रोज बस में धक्के खाते हुए सेट पर पहुंचते थे। उम्र करीब 17 साल थी। एक रोज चकाचौंध देखकर जीतेंद्र को भी फिल्म देखने का मन किया। उन्होंने वहां खड़े लोगों से पूछा तो उन्हें साफ इनकार कर दिया गया। सबने कहा कि वी.शांताराम किसी को शूटिंग देखने की इजाजत नहीं देते। जीतेंद्र मुंह लटकाए घर पहुंचे और चाचा से शिकायत की। अगले दिन चाचा उन्हें लेकर फिर सेट पर पहुंचे और असिस्टेंट से कहा कि मेरे भतीजे को शूटिंग देखनी है। उन्होंने जवाब दिया, ‘शूटिंग देखना है, तो काम भी करना पड़ेगा।’ उन्होंने जीतेंद्र को देखा और कहा- ‘हम तुम्हें प्रिंस का रोल देंगे।’ जीतेंद्र की खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा। रोज बस से जाने वाले जीतेंद्र अगले दिन टैक्सी में सेट पर पहुंचे। वहां पहुंचते ही उन्हें प्रिंस के कपड़े पहनाए गए, लेकिन जैसे ही वो सेट पर पहुंचे उन्हें जोरदार धक्का लगा। सेट पर वो अकेले प्रिंस नहीं थे, बल्कि वहां 200 प्रिंस बने लड़के बैठे थे। उन्हें फिल्म नवरंग के गाने तू छुपी है कहां में हीरोइन के पीछे खड़े होने वाले जूनियर आर्टिस्ट का काम मिला था। वी.शांताराम से मांगा काम, बना दिया गया हीरोइन का बॉडी डबल नवरंग की शूटिंग के दौरान जीतेंद्र ने खुद भी फिल्मों में काम करने का मन बना लिया। जब उन्हें 1963 में फिल्म सेहरा के सेट पर जूलरी पहुंचाने का काम मिला, तो एक दिन उन्होंने मौका पाते ही डायरेक्टर वी.शांताराम से मराठी में कहा- मुझे फिल्मों में काम करना है। वी.शांताराम ने उनकी बात से ज्यादा इस बात पर गौर किया कि एक पंजाबी कपूर साहब का लड़का इतनी अच्छी मराठी कैसे बोल रहा है। इस तरह बात चल निकली। उन्होंने जाते हुए कहा, मैं गारंटी नहीं देता, लेकिन तुम ट्राय करते रहो। इस एक बात की बदौलत जीतेंद्र को फिल्म सेहरा में ही एक्स्ट्रा का काम मिल गया। उन्हें बस सेट पर मौजूद रहना होता था, जिससे अगर कोई जूनियर आर्टिस्ट न आए, तो वो उनकी जगह खड़े हो सकें। इस काम के लिए जीतेंद्र को महीने के 100 रुपए तनख्वाह मिली। एक दिन फिल्म के एक सीन के लिए एक्ट्रेस संध्या को आग के ऊपर से कूदता दिखाना था। एक्ट्रेस संध्या, डायरेक्टर वी.शांताराम की पत्नी थी। उस दौर में आम तौर पर खतरनाक सीन करने के लिए एक्टर-एक्ट्रेसेस के बॉडी डबल रखे जाते थे, जो उन्हीं की तरह तैयार होकर खतरनाक स्टंट करते थे। उस दिन भी सेट पर एक बॉडी डबल बुलाई गई थी, लेकिन आग देखकर उसने सीन करने से इनकार कर दिया। इसके लिए एक्ट्रेस की बॉडी डबल बनने के लिए एक लड़की बुलाई गई थी। आग की लपटें देख वो लड़की डर गई और वहां से चली गई। सेट पर मौजूद जब कोई लड़की वो सीन करने के लिए राजी नहीं हुई तो वी.शांताराम ने जीतेंद्र को ही ये काम दे दिया। जीतेंद्र को एक्ट्रेस संध्या की तरह तैयार किया गया, जिसके बाद उन्होंने हीरोइन बनकर सीन किया। पहला डायलॉग ही नहीं बोल पाए जीतेंद्र, चिढ़ गए फिल्म के डायरेक्टर इस एक रोल से जीतेंद्र ने वी.शांताराम के दिल में घर लिया। उन्हें इस फिल्म में एक डायलॉग भी दिया गया। उन्होंने कहना था, सरदार, दुश्मनों का दल टिड्डियों की तरह आगे बढ़ रहा है। 25 रीटेक के बावजूद जीतेंद्र डायलॉग ठीक तरह नहीं बोल पाए। खिजियाकर वी.शांताराम ने वो गलत डायलॉग ही फिल्म में फाइनल कर लिया। वो वी.शांताराम ही थे, जिन्होंने जीतेंद्र का हुनर परखा और उन्हें फिल्म गीत गाया पत्थरों ने में लीड रोल दिया। पहली फिल्म देखने पेरेंट्स के साथ पहुंचे, खाली पड़ा था थिएटर जीतेंद्र की बतौर हीरो पहली फिल्म गीत गाया पत्थरों ने साल 1964 में रिलीज हुई। चॉल में रहने वाले जीतेंद्र के लिए ये खास दिन था। उन्होंने चॉल के पास स्थित एक थिएटर में पिता अमरनाथ और मां कृष्णा को फिल्म दिखाने के लिए तीन टिकटें खरीदीं। थिएटर पहुंचते ही उन्होंने टिकट देखने के लिए गेट पर खड़े शख्स से









