स्ट्रीट डॉग की मौत पर रो पड़ीं मंजरी फडनिस:एक्ट्रेस ने कुत्ते की पीट-पीटकर हत्या का दावा किया, न्याय की मांग की

एक्ट्रेस मंजरी फडनिस ने एक स्ट्रीट कुत्ते की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या किए जाने के मामले पर गहरा दुख जताया है। माइकी की देखभाल मंजरी और उनकी सोसायटी के अन्य निवासी पिछले सात सालों से कर रहे थे। मंजरी ने सोशल मीडिया पर एक इमोशनल वीडियो शेयर कर बताया कि माइकी नाम का लंबे बालों वाला स्ट्रीट कुत्ता था, जिसे उसके परिवार ने छोड़ दिया था। वह 2019-20 से सोसायटी में रह रहा था। कुछ समय पहले उसके अचानक लापता होने के बाद निवासी उसकी तलाश में जुट गए थे। उन्होंने बताया कि माइकी को खोजने के लिए पोस्टर लगाए गए, सुरक्षा गार्डों और स्टाफ से पूछताछ की गई, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। मंजरी ने दावा किया- माइकी पर हमला हुआ मंजरी के अनुसार, बाद में एक व्यक्ति ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि माइकी पर उस समय हमला किया गया जब वह बिल्डिंग के बेसमेंट क्षेत्र के पास सो रहा था। एक्ट्रेस ने आरोप लगाया कि उसके सिर पर किसी बड़े डंडे या लोहे की रॉड से वार किया गया, जिसके बाद उसे सीढ़ियों के पास घसीटकर और मारा गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि घायल कुत्ते को बाद में एक बोरे में डालकर बिल्डिंग के पीछे स्थित खाड़ी क्षेत्र में फेंक दिया गया। मंजरी ने कहा कि फिलहाल उसके शव की तलाश की जा रही है। मंजरी ने माइकी के लिए न्याय मांगा वीडियो में इमोशनल होते हुए मंजरी ने स्ट्रीट एनिमल की सुरक्षा पर सवाल उठाए और इस मामले में न्याय की मांग की। उन्होंने कहा कि माइकी बेहद शांत स्वभाव का कुत्ता था और सोसायटी के लोग उसकी देखभाल करते थे। वे उसे घर ले जाकर नहलाते, ग्रूमिंग करते और उसके बाल सुलझाते थे। कई फिल्मों में भी बना चुकी हैं पहचान मंजरी फडनिस पशु प्रेमी हैं और सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी पोस्ट शेयर करती हैं। करियर की बात करें तो उन्हें इमरान खान और जेनेलिया डिसूजा के साथ फिल्म ‘जाने तू… या जाने ना’ से पहचान मिली। वह ‘ग्रैंड मस्ती’, ‘वार्निंग’, ‘किस किसको प्यार करूं’, ‘होटल मिलन’ समेत हिंदी और क्षेत्रीय सिनेमा के कई प्रोजेक्ट्स में काम कर चुकी हैं।
स्ट्रीट डॉग की मौत पर रो पड़ीं मंजरी फडनिस:एक्ट्रेस ने कुत्ते की पीट-पीटकर हत्या का दावा किया, न्याय की मांग की

एक्ट्रेस मंजरी फडनिस ने एक स्ट्रीट कुत्ते की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या किए जाने के मामले पर गहरा दुख जताया है। माइकी की देखभाल मंजरी और उनकी सोसायटी के अन्य निवासी पिछले सात सालों से कर रहे थे। मंजरी ने सोशल मीडिया पर एक इमोशनल वीडियो शेयर कर बताया कि माइकी नाम का लंबे बालों वाला स्ट्रीट कुत्ता था, जिसे उसके परिवार ने छोड़ दिया था। वह 2019-20 से सोसायटी में रह रहा था। कुछ समय पहले उसके अचानक लापता होने के बाद निवासी उसकी तलाश में जुट गए थे। उन्होंने बताया कि माइकी को खोजने के लिए पोस्टर लगाए गए, सुरक्षा गार्डों और स्टाफ से पूछताछ की गई, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। मंजरी ने दावा किया- माइकी पर हमला हुआ मंजरी के अनुसार, बाद में एक व्यक्ति ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि माइकी पर उस समय हमला किया गया जब वह बिल्डिंग के बेसमेंट क्षेत्र के पास सो रहा था। एक्ट्रेस ने आरोप लगाया कि उसके सिर पर किसी बड़े डंडे या लोहे की रॉड से वार किया गया, जिसके बाद उसे सीढ़ियों के पास घसीटकर और मारा गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि घायल कुत्ते को बाद में एक बोरे में डालकर बिल्डिंग के पीछे स्थित खाड़ी क्षेत्र में फेंक दिया गया। मंजरी ने कहा कि फिलहाल उसके शव की तलाश की जा रही है। मंजरी ने माइकी के लिए न्याय मांगा वीडियो में इमोशनल होते हुए मंजरी ने स्ट्रीट एनिमल की सुरक्षा पर सवाल उठाए और इस मामले में न्याय की मांग की। उन्होंने कहा कि माइकी बेहद शांत स्वभाव का कुत्ता था और सोसायटी के लोग उसकी देखभाल करते थे। वे उसे घर ले जाकर नहलाते, ग्रूमिंग करते और उसके बाल सुलझाते थे। कई फिल्मों में भी बना चुकी हैं पहचान मंजरी फडनिस पशु प्रेमी हैं और सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी पोस्ट शेयर करती हैं। करियर की बात करें तो उन्हें इमरान खान और जेनेलिया डिसूजा के साथ फिल्म ‘जाने तू… या जाने ना’ से पहचान मिली। वह ‘ग्रैंड मस्ती’, ‘वार्निंग’, ‘किस किसको प्यार करूं’, ‘होटल मिलन’ समेत हिंदी और क्षेत्रीय सिनेमा के कई प्रोजेक्ट्स में काम कर चुकी हैं।
ईरान बोला- न युद्ध से पीछे हटेंगे, न बातचीत से:धमकियों के आगे नहीं झुकेंगे, अपने लोगों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा है कि उनके देश की सबसे बड़ी प्राथमिकता राष्ट्रीय सुरक्षा और लोगों की शांति है। सोशल मीडिया पर जारी बयान में उन्होंने कहा कि ईरान अपने अधिकारों की रक्षा मजबूती से करेगा और किसी भी धमकी के सामने पीछे नहीं हटेगा। पजशकियान ने कहा कि देश की ताकत सिर्फ रक्षा में नहीं, बल्कि बातचीत में भी है। उनके मुताबिक, ईरान ने न तो अपनी रक्षा की तैयारी छोड़ी है और न ही बातचीत का रास्ता बंद किया है। इससे पहले ईरान ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इजराइल अपनी कार्रवाई जारी रखता है या दक्षिणी लेबनान में फिर हमले करता है, तो उसे पहले से कहीं ज्यादा सख्त जवाब दिया जाएगा। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर की गेंद पर CM सैनी ने जड़ा छक्का,VIDEO:ओवर में 2 सिक्स हिट किए; क्लार्क बोले- अब गेंदबाजी छोड़नी पड़ेगी

हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर माइकल क्लार्क के बीच देर रात क्रिकेट मैच खेला गया। सीएम सैनी ने क्लार्क की स्पिन गेंदबाजी पर 2 सिक्स लगाए। क्लार्क ने उन्हें एक ओवर गेंदबाजी की, इस दौरान सीएम ने 2 हिटिंग सिक्स के साथ 4 बॉल डिफेंड की। सीएम के सिक्स लगाते ही माइकल क्लार्क ने कहा- मुझे लगता है, अब गेंदबाजी बंद कर देनी चाहिए। इसके बाद दोनों के बीच प्रदेश में क्रिकेट की स्थिति को लेकर काफी बातचीत हुई। क्लार्क न्यू चंडीगढ़ में हुए भारत और अफगानिस्तान टेस्ट मैच में कमेंट्री करने आए थे। इस दौरान सोमवार रात चंडीगढ़ स्थित सीएम आवास में फ्रैंडली मैच का आयोजन हुआ। मैच के दौरान क्लार्क ने उन्हें अपने ऑटोग्राफ कर एक बैट भी गिफ्ट किया। पहले जानिए माइकल क्लार्क की अहम बातें…. CM हाउस में क्या एक्टिविटी हुई…. टेस्ट मैच के बाद सोमवार देर शाम माइकल क्लार्क सीएम हाउस पहुंचे। यहां सीएम ने उन्हें एक क्रिकेट बैट गिफ्ट किया। इसके बाद क्लार्क ने भी एक बैट पर अपने ऑटोग्राफ किए और सीएम को ये बेट दिया। दोनों बल्लों पर सीएम सैनी और क्लार्क के फोटो भी छपे थे। इसके बाद ग्राउंड में पेड़ का विकेट बनाकर क्लार्क ने उन्हें एक ओवर गेंदबाजी की। इस दौरान सीएम सैनी ने इस ओवर में 2 सिक्स लगाए। इसके बाद दोनों के बीच हरियाणा में क्रिकेट को लेकर लंबी बातचीत हुई। कौन हैं क्लार्क, सीएम हाउस कैसे पहुंचे न्यू चंडीगढ़ (मुल्लांपुर) में 6 से 8 जून तक भारत और अफगानिस्तान के बीच टेस्ट क्रिकेट मैच खेला गया। ऑस्ट्रेलियाई पूर्व क्रिकेटर माइकल क्लार्क इस मैच में कमेंट्री करने आए थे। सोमवार को मैच खत्म होने के बाद क्लार्क सीएम से मिलने उनके आवास पहुंचे। जहां क्रिकेट की बाचतीच के बाद मैच खेला गया। माइकल क्लार्क ने 2011 से 2015 तक ऑस्ट्रेलियाई टीम की कप्तानी की और उनकी अगुआई में ऑस्ट्रेलिया ने 2015 क्रिकेट वर्ल्क कप का खिताब जीता था। विश्व कप फाइनल में क्लार्क ने 74 रन की अहम पारी खेली थी। वर्ल्ड कप जीतने के बाद ही क्लार्क ने संयास की घोषणा की थी।
सपना टूट चुका था, तभी मिला बड़ा ब्रेक:चेतना पांडे पर विक्रम भट्ट ने भरोसा जताया, मिमोह बोले- फिल्म मिली, पापा गर्व से मुस्कुराए

फिल्म हॉन्टेड 3डी: इकोस ऑफ द पास्ट के कलाकार मिमोह चक्रवर्ती और चेतना पांडे ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपने संघर्ष, फिल्म और निजी अनुभव साझा किए। चेतना ने बताया कि वह एक्टिंग का सपना लगभग छोड़ चुकी थीं, लेकिन विक्रम भट्ट के एक फोन ने उनकी जिंदगी बदल दी। मिमोह ने फिल्म की कहानी को इसकी सबसे बड़ी ताकत बताया। दोनों कलाकारों ने शूटिंग के किस्से, हॉरर फिल्मों के अनुभव, मिथुन चक्रवर्ती से मिली सीख और फिल्म की खासियतों पर बात की। सवाल: ‘हॉन्टेड 3डी: इकोस ऑफ द पास्ट’ तक पहुंचने का आपका सफर कैसा रहा? जवाब/चेतना पांडे: इस फिल्म से मेरा जुड़ाव किस्मत जैसा है। मुंबई आए मुझे काफी समय हो गया है और मेरी संघर्षभरी यात्रा रही है। आउटसाइडर होने पर बहुत मेहनत और ऑडिशन देने के बाद भी कई बार लगता है कि बड़े सपने पूरे नहीं होंगे। मैं नैनीताल से हूं। इंडस्ट्री में आने के बाद समझ आया कि यहां जगह बनाना आसान नहीं है। मैंने छोटे-छोटे रोल किए, जैसे शाहरुख खान की फिल्म दिलवाले में काम किया। कई बार लगा कि अब वह मौका नहीं मिलेगा, जिसका मैं इंतजार कर रही हूं। लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। करीब तीन साल पहले मेरी मुलाकात विक्रम भट्ट सर से हुई थी। उस समय मैं लगभग अपने सपने छोड़ चुकी थी। मैंने उनसे कहा था कि मैंने बहुत मेहनत की है, लेकिन अब लगता है कि मुझे वह मौका नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि मैं टैलेंटेड हूं और एक दिन बड़ा काम करूंगी। फिर करीब एक साल तक हमारी बात नहीं हुई। मैं खतरों के खिलाड़ी सीजन 12 कर रही थी, तभी उनका फोन आया। उन्होंने कहा कि मुझसे मिलो, मेरे पास तुम्हारे लिए कुछ है। उस समय हॉन्टेड 3डी: इकोस ऑफ द पास्ट की शूटिंग शुरू हो चुकी थी और दूसरी अभिनेत्री फिल्म कर रही थी। विक्रम सर ने मेरी तस्वीर देखी और उन्हें लगा कि उन्हें उनकी ‘सुनहरी’ मिल गई है। अगले दिन उन्होंने मुझे बुलाया और मेरा कॉन्ट्रैक्ट साइन हो गया। दूसरे दिन से मैंने शूटिंग शुरू कर दी। पहले दिन के बाद सर ने मेरी तारीफ की। तभी मुझे लगा कि यह फिल्म मुझे ही करनी थी। सवाल: मिमोह, आप पहले भी हॉन्टेड का हिस्सा रह चुके हैं। इस फिल्म की कौन-सी बात आपको सबसे खास लगी? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: सबसे खास इसकी कहानी लगी। ‘हॉन्टेड 3डी’ 15 साल पहले आई थी और भारत की पहली स्टीरियोस्कोपिक 3डी फिल्म थी। उसके गाने और कहानी दर्शकों को पसंद आए थे। जब विक्रम सर ने मुझे इसके सीक्वल की कहानी सुनाई तो मुझे तुरंत समझ आ गया कि दर्शकों को यह फिल्म पसंद आएगी। इसमें हॉरर, शानदार गाने और मजबूत कहानी है। मुझे लगता है कि इस फिल्म का असली हीरो इसकी कहानी है। हमने कलाकारों के तौर पर अपना सौ प्रतिशत देने की कोशिश की है, लेकिन दर्शकों को सबसे ज्यादा इसकी कहानी पसंद आएगी। इसी वजह से मैंने तुरंत फिल्म के लिए हां कर दी। सवाल: चेतना को फिल्म में लेने से पहले तीन दिन की शूटिंग किसी और अभिनेत्री के साथ हो चुकी थी। फिर सब कुछ दोबारा शूट करना पड़ा। उस समय क्या महसूस हुआ? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: विक्रम सर इस फिल्म को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहते थे। हॉन्टेड के प्रशंसकों की उम्मीदें बड़ी हैं। लोग आज भी पूछते हैं कि क्या यह पहली फिल्म जैसी होगी, इसके गाने कैसे होंगे और प्रेम कहानी कैसी होगी। विक्रम सर के दिमाग में ‘सुनहरी’ का किरदार पूरी तरह साफ था। जब चेतना ने पहला सीन किया, तब हम सभी को लगा कि हमें हमारी सुनहरी मिल गई है। सवाल: चेतना, फिल्म का सबसे मुश्किल सीन कौन-सा था? जवाब/चेतना पांडे: वह सीन टीजर में भी दिखाया गया है। उसमें मेरी पहली मुलाकात देव से होती है। उस सीन में मुझे बिना कुछ बोले आंखों और एक्सप्रेशंस से बताना था कि क्या हो रहा है और सामने वाले को कैसे व्यवहार करना है, क्योंकि वहां एक भूत मौजूद होता है। यह मेरे लिए चुनौतीपूर्ण सीन था। सवाल: शूटिंग के दौरान कौन-सा सीन सबसे डरावना था और किस सीन में सबसे ज्यादा हंसी आई? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: हंसी वाला किस्सा एक गाने की शूटिंग के दौरान हुआ था। एक सीन में मुझे चेतना को देखते हुए बाहर निकलना था और कैमरे से नजर नहीं हटानी थी। मैं सीन में इतना डूबा था कि दीवार पर ध्यान नहीं गया। बाहर निकलते ही सीधे दीवार से टकरा गया और सिर लग गया। चेतना ने यह देखा तो जोर-जोर से हंसने लगीं। फिर पूरे सेट पर हंसी का माहौल बन गया। पूरे दिन हम लोग हंसते रहे। मजेदार बात यह थी कि हम हॉरर फिल्म शूट कर रहे थे, लेकिन उस दिन कॉमेडी ज्यादा हो गई। जहां तक डरावने सीन की बात है, हमारी फिल्म सिर्फ जंप स्केयर पर निर्भर नहीं करती। इसमें डर का एहसास माहौल और कहानी से आता है। फिल्म देखते समय दर्शकों को लगातार लगेगा कि कुछ बुरा होने वाला है और यही इसकी खासियत है। सवाल: चेतना, आपके लिए ‘सुनहरी’ का किरदार कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब/चेतना पांडे: मेरे लिए इस फिल्म का हर सीन चुनौतीपूर्ण था। मुझे नहीं लगता कि जिंदगी में फिर कभी इतना मुश्किल और परतदार किरदार मिलेगा। असल जिंदगी में मैं बहुत बातूनी और चंचल हूं, लेकिन सुनहरी बिल्कुल अलग है। वह शांत है, कम बोलती है और उसकी भावनाएं चेहरे और आंखों में नजर आती हैं। मैंने विक्रम सर से कई बार पूछा कि उन्होंने मुझमें ऐसा क्या देखा। उन्होंने कहा कि मेरे अंदर जो है, शायद मैं खुद भी नहीं जानती, लेकिन वह उसे देख सकते हैं। यह बात मेरे लिए बहुत खास थी। सवाल: क्या आप भूत-प्रेत या अलौकिक शक्तियों पर विश्वास करती हैं? जवाब/चेतना पांडे: पहले मैं इन चीजों पर ज्यादा विश्वास नहीं करती थी, लेकिन मेरे पिता ने अपने कुछ अनुभव बताए। उन्होंने कहा कि एक बार उनके साथ ऐसी घटना हुई थी, जिसमें उन्हें कुछ समय तक याद नहीं रहा कि क्या हुआ था। पहाड़ों में ऐसी कई कहानियां सुनने को मिलती हैं। मैंने आसपास भी कुछ घटनाएं देखी हैं, इसलिए अब मैं इन चीजों पर विश्वास करती हूं। हालांकि मेरे साथ अभी
सपना टूट चुका था, तभी मिला बड़ा ब्रेक:चेतना पांडे पर विक्रम भट्ट ने भरोसा जताया, मिमोह बोले- फिल्म मिली, पापा गर्व से मुस्कुराए

फिल्म हॉन्टेड 3डी: इकोस ऑफ द पास्ट के कलाकार मिमोह चक्रवर्ती और चेतना पांडे ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपने संघर्ष, फिल्म और निजी अनुभव साझा किए। चेतना ने बताया कि वह एक्टिंग का सपना लगभग छोड़ चुकी थीं, लेकिन विक्रम भट्ट के एक फोन ने उनकी जिंदगी बदल दी। मिमोह ने फिल्म की कहानी को इसकी सबसे बड़ी ताकत बताया। दोनों कलाकारों ने शूटिंग के किस्से, हॉरर फिल्मों के अनुभव, मिथुन चक्रवर्ती से मिली सीख और फिल्म की खासियतों पर बात की। सवाल: ‘हॉन्टेड 3डी: इकोस ऑफ द पास्ट’ तक पहुंचने का आपका सफर कैसा रहा? जवाब/चेतना पांडे: इस फिल्म से मेरा जुड़ाव किस्मत जैसा है। मुंबई आए मुझे काफी समय हो गया है और मेरी संघर्षभरी यात्रा रही है। आउटसाइडर होने पर बहुत मेहनत और ऑडिशन देने के बाद भी कई बार लगता है कि बड़े सपने पूरे नहीं होंगे। मैं नैनीताल से हूं। इंडस्ट्री में आने के बाद समझ आया कि यहां जगह बनाना आसान नहीं है। मैंने छोटे-छोटे रोल किए, जैसे शाहरुख खान की फिल्म दिलवाले में काम किया। कई बार लगा कि अब वह मौका नहीं मिलेगा, जिसका मैं इंतजार कर रही हूं। लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। करीब तीन साल पहले मेरी मुलाकात विक्रम भट्ट सर से हुई थी। उस समय मैं लगभग अपने सपने छोड़ चुकी थी। मैंने उनसे कहा था कि मैंने बहुत मेहनत की है, लेकिन अब लगता है कि मुझे वह मौका नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि मैं टैलेंटेड हूं और एक दिन बड़ा काम करूंगी। फिर करीब एक साल तक हमारी बात नहीं हुई। मैं खतरों के खिलाड़ी सीजन 12 कर रही थी, तभी उनका फोन आया। उन्होंने कहा कि मुझसे मिलो, मेरे पास तुम्हारे लिए कुछ है। उस समय हॉन्टेड 3डी: इकोस ऑफ द पास्ट की शूटिंग शुरू हो चुकी थी और दूसरी अभिनेत्री फिल्म कर रही थी। विक्रम सर ने मेरी तस्वीर देखी और उन्हें लगा कि उन्हें उनकी ‘सुनहरी’ मिल गई है। अगले दिन उन्होंने मुझे बुलाया और मेरा कॉन्ट्रैक्ट साइन हो गया। दूसरे दिन से मैंने शूटिंग शुरू कर दी। पहले दिन के बाद सर ने मेरी तारीफ की। तभी मुझे लगा कि यह फिल्म मुझे ही करनी थी। सवाल: मिमोह, आप पहले भी हॉन्टेड का हिस्सा रह चुके हैं। इस फिल्म की कौन-सी बात आपको सबसे खास लगी? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: सबसे खास इसकी कहानी लगी। ‘हॉन्टेड 3डी’ 15 साल पहले आई थी और भारत की पहली स्टीरियोस्कोपिक 3डी फिल्म थी। उसके गाने और कहानी दर्शकों को पसंद आए थे। जब विक्रम सर ने मुझे इसके सीक्वल की कहानी सुनाई तो मुझे तुरंत समझ आ गया कि दर्शकों को यह फिल्म पसंद आएगी। इसमें हॉरर, शानदार गाने और मजबूत कहानी है। मुझे लगता है कि इस फिल्म का असली हीरो इसकी कहानी है। हमने कलाकारों के तौर पर अपना सौ प्रतिशत देने की कोशिश की है, लेकिन दर्शकों को सबसे ज्यादा इसकी कहानी पसंद आएगी। इसी वजह से मैंने तुरंत फिल्म के लिए हां कर दी। सवाल: चेतना को फिल्म में लेने से पहले तीन दिन की शूटिंग किसी और अभिनेत्री के साथ हो चुकी थी। फिर सब कुछ दोबारा शूट करना पड़ा। उस समय क्या महसूस हुआ? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: विक्रम सर इस फिल्म को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहते थे। हॉन्टेड के प्रशंसकों की उम्मीदें बड़ी हैं। लोग आज भी पूछते हैं कि क्या यह पहली फिल्म जैसी होगी, इसके गाने कैसे होंगे और प्रेम कहानी कैसी होगी। विक्रम सर के दिमाग में ‘सुनहरी’ का किरदार पूरी तरह साफ था। जब चेतना ने पहला सीन किया, तब हम सभी को लगा कि हमें हमारी सुनहरी मिल गई है। सवाल: चेतना, फिल्म का सबसे मुश्किल सीन कौन-सा था? जवाब/चेतना पांडे: वह सीन टीजर में भी दिखाया गया है। उसमें मेरी पहली मुलाकात देव से होती है। उस सीन में मुझे बिना कुछ बोले आंखों और एक्सप्रेशंस से बताना था कि क्या हो रहा है और सामने वाले को कैसे व्यवहार करना है, क्योंकि वहां एक भूत मौजूद होता है। यह मेरे लिए चुनौतीपूर्ण सीन था। सवाल: शूटिंग के दौरान कौन-सा सीन सबसे डरावना था और किस सीन में सबसे ज्यादा हंसी आई? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: हंसी वाला किस्सा एक गाने की शूटिंग के दौरान हुआ था। एक सीन में मुझे चेतना को देखते हुए बाहर निकलना था और कैमरे से नजर नहीं हटानी थी। मैं सीन में इतना डूबा था कि दीवार पर ध्यान नहीं गया। बाहर निकलते ही सीधे दीवार से टकरा गया और सिर लग गया। चेतना ने यह देखा तो जोर-जोर से हंसने लगीं। फिर पूरे सेट पर हंसी का माहौल बन गया। पूरे दिन हम लोग हंसते रहे। मजेदार बात यह थी कि हम हॉरर फिल्म शूट कर रहे थे, लेकिन उस दिन कॉमेडी ज्यादा हो गई। जहां तक डरावने सीन की बात है, हमारी फिल्म सिर्फ जंप स्केयर पर निर्भर नहीं करती। इसमें डर का एहसास माहौल और कहानी से आता है। फिल्म देखते समय दर्शकों को लगातार लगेगा कि कुछ बुरा होने वाला है और यही इसकी खासियत है। सवाल: चेतना, आपके लिए ‘सुनहरी’ का किरदार कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब/चेतना पांडे: मेरे लिए इस फिल्म का हर सीन चुनौतीपूर्ण था। मुझे नहीं लगता कि जिंदगी में फिर कभी इतना मुश्किल और परतदार किरदार मिलेगा। असल जिंदगी में मैं बहुत बातूनी और चंचल हूं, लेकिन सुनहरी बिल्कुल अलग है। वह शांत है, कम बोलती है और उसकी भावनाएं चेहरे और आंखों में नजर आती हैं। मैंने विक्रम सर से कई बार पूछा कि उन्होंने मुझमें ऐसा क्या देखा। उन्होंने कहा कि मेरे अंदर जो है, शायद मैं खुद भी नहीं जानती, लेकिन वह उसे देख सकते हैं। यह बात मेरे लिए बहुत खास थी। सवाल: क्या आप भूत-प्रेत या अलौकिक शक्तियों पर विश्वास करती हैं? जवाब/चेतना पांडे: पहले मैं इन चीजों पर ज्यादा विश्वास नहीं करती थी, लेकिन मेरे पिता ने अपने कुछ अनुभव बताए। उन्होंने कहा कि एक बार उनके साथ ऐसी घटना हुई थी, जिसमें उन्हें कुछ समय तक याद नहीं रहा कि क्या हुआ था। पहाड़ों में ऐसी कई कहानियां सुनने को मिलती हैं। मैंने आसपास भी कुछ घटनाएं देखी हैं, इसलिए अब मैं इन चीजों पर विश्वास करती हूं। हालांकि मेरे साथ अभी
अमीषा पटेल@51, जन्म पर देखने पहुंचीं इंदिरा गांधी:दादा के नाम पर रोड, कभी झगड़े में ममता कुलकर्णी ने कहा- तुम्हारी औकात क्या है, जानिए करियर स्टोरी

9 जून 1975 अमीषा पटेल का जन्म गुजरात के रईस बिजनेसमैन अमित पटेल और पंजाबी NRI मां आशा के घर हुआ। मां और पिता का नाम जोड़कर उन्हें अमीषा नाम दिया गया। 5 की उम्र में उन्हें भरतनाट्यम की ट्रेनिंग दिलवाई गई। उनके दादाजी रजनी पटेल मशहूर बैरिस्टर और कांग्रेस के बड़े राजनेता थे। उनके नाम पर 1986 में मुंबई की रोड का नाम बैरिस्टर रजनी पटेल मार्ग रखा गया है। मनीष पॉल के पॉडकास्ट में अमीषा ने बताया था कि उनके दादाजी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तक बनने वाले थे। वो इंदिरा गांधी के करीबी थे। इंदिरा गांधी, अमीषा पटेल के पेरेंट्स की शादी में भी पहुंची थीं। उन्होंने खुद शादी ऐसी डेट पर रखी, जिस दिन वो काम में व्यस्त न हों और शादी अटेंड कर सकें। यहां तक की जब अमीषा का जन्म हुआ, इंदिरा गांधी वो पहली शख्स थीं, जो अस्पताल पहुंची थीं। 16 साल की उम्र में अमीषा अपने पिता के साथ सहेली के संगीत में पहुंची थीं। वहां पिता के साथ बोर्डिंग स्कूल में पढ़ चुके बचपन के दोस्त राकेश रोशन भी पहुंचे थे। जब अमीषा ने बिंदास अंदाज में डांस करना शुरू किया तो राकेश रोशन की उन पर नजर पड़ गई। वो सीधे उनके पिता के पास पहुंचे और पूछा- ये कौन है। गर्लफ्रेंड? जवाब मिला- नहीं राकेश, ये मेरी बेटी है अमीषा। अभी अभी बोस्टन से पढ़ाई कर लौटी है। राकेश ने उनसे कहा- जब मैं अपने बेटे ऋतिक को लॉन्च करूंगा, तो तुम्हारी बेटी को हीरोइन बनाऊंगा। पिता ने कहा- नहीं, वो तो पढ़ाई के लिए बॉस्टन जा रही है। फिल्मों में काम करने का तो सवाल ही नहीं उठता। शुरुआती पढ़ाई के बाद अमीषा ने बोस्टन की TUFT यूनिवर्सिटी से बायो जेनेटिक इंजीनियरिंग की और बाद में इकॉनोमिक्स की पढ़ाई की। अमीषा के पिता अमित पटेल का अक्सर फिल्मी दुनिया के लोगों के साथ उठना-बैठना होता था। एक दिन उन्होंने बॉस्टन में रह रहीं अमीषा को कॉल कर बताया कि विनोद अंकल (विनोद खन्ना) चाहते हैं कि तुम उनके बेटे अक्षय खन्ना की डेब्यू फिल्म हिमालय पुत्र से फिल्मों में डेब्यू करो, लेकिन हमने इनकार कर दिया। हम नहीं चाहते कि तुम्हारी पढ़ाई पर असर पड़े। अमीषा ने इस बात कर ध्यान नहीं दिया, क्योंकि फिल्मों में आने का उन्होंने खुद भी कभी सोचा नहीं था। कुछ दिन बीते, तो पिता ने फिर बताया फिरोज खान ने भी उन्हें बेटे फरदीन खान की फिल्म प्रेम अगन ऑफर की है, लेकिन इस बार भी उन्होंने इनकार कर दिया। जब वो फाइनल ईयर में बॉम्बे लौटीं, तो एक दिन राकेश रोशन ने उन्हें लंच पर इनवाइट किया। अमीषा पिता-मां के साथ गईं। वहां राकेश के बेटे ऋतिक भी मौजूद थे। उन्होंने पढ़ाई की खूब बातें कीं, अमीषा ने अपना सीवी और अमेरिका के मॉर्गन स्टेनली बैंक से मिली जॉब का लेटर भी दिखाया। कुछ देर बाद जब अमीषा वॉशरूम गईं तो राकेश रोशन ने बेटे ऋतिक से पूछा कि क्या उन्हें अपकमिंग फिल्म कहो न प्यार है में कास्ट करना चाहिए। ऋतिक की हामी मिलने पर राकेश ने अमीषा के आते ही उन्हें फिल्म ऑफर कर दी। दरअसल, उस समय राकेश रोशन ने बेटे ऋतिक रोशन और करीना कपूर के साथ फिल्म कहो न प्यार है शुरू की थी, लेकिन करीना ने राकेश रोशन और मां बबीता की अनबन होने पर फिल्म छोड़ दी थी। ऑफर मिलने पर अमीषा ने पूछा- आपकी फिल्म में तो हीरोइन फाइनल हो चुकी है। इस पर राकेश ने कहा- नहीं, मैं तुम्हें हीरोइन बनाना चाहता हूं। ये सुनकर अमीषा ने हामी भर दी। उन्होंने सोचा कि अगर पहली फिल्म फ्लॉप हुई, तो वो इकोनॉमिक्स में नौकरी शुरू कर देंगी, लेकिन खुशकिस्मती से फिल्म सुपरहिट रही और अमीषा पटेल एक स्टार बन गईं और आज भी फिल्मों से जुड़ी हुई हैं। आज अमीषा पटेल 51 साल की हो चुकी है। उनके बर्थडे के खास मौके पर जानिए, उनकी जिंदगी से जुड़ी रोचक कहानी, कुछ मजेदार किस्सों के साथ- कहो न प्यार है करते हुए मिली गदर, 12 घंटों तक दिया स्क्रीनटेस्ट अमीषा पटेल ने कुछ दिनों की एक्टिंग ट्रेनिंग लेने के बाद कहो न प्यार है की शूटिंग शुरू की। इसी समय उन्हें अनिल शर्मा की फिल्म गदर के ऑडिशन की जानकारी मिली। वो ऑडिशन के लिए गईं, जिसके लिए पहले ही 500 लड़कियां ऑडिशन दे चुकी थीं। 22 लड़कियों को स्क्रीनटेस्ट के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था, जिनमें अमीषा भी शामिल हुईं। उनका स्क्रीनटेस्ट 12 घंटे तक चला। आखिरकार अनिल शर्मा ने उन्हें गदर में कास्ट कर लिया। सिलेक्शन के बाद अमीषा पटेल को गदर साइन करने पर ताने मिले। सभी का मानना था कि करियर की शुरुआत में अमीषा को मां का रोल नहीं करना चाहिए, लेकिन वो ये रोल करने पर अड़ी थीं। अमीषा ने एक साथ कहो न प्यार है और गदर की शूटिंग की। एक फिल्म में वो चुलबुली लड़की थीं और दूसरी में एक भारत-पाकिस्तान के बीच हुए दंगों की सर्वाइवर। सबसे पहले उनकी फिल्म कहो न प्यार है रिलीज हुई। हर किसी ने राकेश रोशन को सलाह दी कि वो न्यूकमर ऋतिक और अमीषा की इस फिल्म को शाहरुख खान की फिल्म फिर भी दिल है हिंदुस्तानी और आमिर खान की फिल्म मेला के आसपास रिलीज न करें। कहो न प्यार है 14 जनवरी 2000 में रिलीज हुई, जबकि मेला 7 जनवरी 2000 और फिर भी दिल है हिंदुस्तानी 21 जनवरी 2000 को रिलीज हुई। बड़े क्लैश के बावजूद कहो न प्यार है ब्लॉकबस्टर रही और उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी। इसके बाद रिलीज हुई अमीषा पटेल की फिल्म गदर भी ब्लॉकबस्टर रही और उनकी गिनती टॉप एक्ट्रेस में होने लगी। गदर में अमीषा ने पाकिस्तानी सकीना का किरदार निभाया, जिसमें सनी देओल ने तारा सिंह का किरदार निभाया था। दोनों की जोड़ी काफी पसंद की गई थी। कुछ सालों बाद अमीषा पटेल को सनी देओल के भाई बॉबी देओल के साथ हमराज फिल्म मिली। फिल्म के क्लाइमैक्स सीन में अमीषा को अक्षय खन्ना को गोली मारकर, बॉबी से गले लगना था। फिल्म की शूटिंग जयपुर के किले में हुई, जहां शूटिंग देखने के लिए भारी भीड़ जमा थी। जैसे ही अमीषा ने बॉबी
अमीषा पटेल@51, जन्म पर देखने पहुंचीं इंदिरा गांधी:दादा के नाम पर रोड, कभी झगड़े में ममता कुलकर्णी ने कहा- तुम्हारी औकात क्या है, जानिए करियर स्टोरी

9 जून 1975 अमीषा पटेल का जन्म गुजरात के रईस बिजनेसमैन अमित पटेल और पंजाबी NRI मां आशा के घर हुआ। मां और पिता का नाम जोड़कर उन्हें अमीषा नाम दिया गया। 5 की उम्र में उन्हें भरतनाट्यम की ट्रेनिंग दिलवाई गई। उनके दादाजी रजनी पटेल मशहूर बैरिस्टर और कांग्रेस के बड़े राजनेता थे। उनके नाम पर 1986 में मुंबई की रोड का नाम बैरिस्टर रजनी पटेल मार्ग रखा गया है। मनीष पॉल के पॉडकास्ट में अमीषा ने बताया था कि उनके दादाजी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तक बनने वाले थे। वो इंदिरा गांधी के करीबी थे। इंदिरा गांधी, अमीषा पटेल के पेरेंट्स की शादी में भी पहुंची थीं। उन्होंने खुद शादी ऐसी डेट पर रखी, जिस दिन वो काम में व्यस्त न हों और शादी अटेंड कर सकें। यहां तक की जब अमीषा का जन्म हुआ, इंदिरा गांधी वो पहली शख्स थीं, जो अस्पताल पहुंची थीं। 16 साल की उम्र में अमीषा अपने पिता के साथ सहेली के संगीत में पहुंची थीं। वहां पिता के साथ बोर्डिंग स्कूल में पढ़ चुके बचपन के दोस्त राकेश रोशन भी पहुंचे थे। जब अमीषा ने बिंदास अंदाज में डांस करना शुरू किया तो राकेश रोशन की उन पर नजर पड़ गई। वो सीधे उनके पिता के पास पहुंचे और पूछा- ये कौन है। गर्लफ्रेंड? जवाब मिला- नहीं राकेश, ये मेरी बेटी है अमीषा। अभी अभी बोस्टन से पढ़ाई कर लौटी है। राकेश ने उनसे कहा- जब मैं अपने बेटे ऋतिक को लॉन्च करूंगा, तो तुम्हारी बेटी को हीरोइन बनाऊंगा। पिता ने कहा- नहीं, वो तो पढ़ाई के लिए बॉस्टन जा रही है। फिल्मों में काम करने का तो सवाल ही नहीं उठता। शुरुआती पढ़ाई के बाद अमीषा ने बोस्टन की TUFT यूनिवर्सिटी से बायो जेनेटिक इंजीनियरिंग की और बाद में इकॉनोमिक्स की पढ़ाई की। अमीषा के पिता अमित पटेल का अक्सर फिल्मी दुनिया के लोगों के साथ उठना-बैठना होता था। एक दिन उन्होंने बॉस्टन में रह रहीं अमीषा को कॉल कर बताया कि विनोद अंकल (विनोद खन्ना) चाहते हैं कि तुम उनके बेटे अक्षय खन्ना की डेब्यू फिल्म हिमालय पुत्र से फिल्मों में डेब्यू करो, लेकिन हमने इनकार कर दिया। हम नहीं चाहते कि तुम्हारी पढ़ाई पर असर पड़े। अमीषा ने इस बात कर ध्यान नहीं दिया, क्योंकि फिल्मों में आने का उन्होंने खुद भी कभी सोचा नहीं था। कुछ दिन बीते, तो पिता ने फिर बताया फिरोज खान ने भी उन्हें बेटे फरदीन खान की फिल्म प्रेम अगन ऑफर की है, लेकिन इस बार भी उन्होंने इनकार कर दिया। जब वो फाइनल ईयर में बॉम्बे लौटीं, तो एक दिन राकेश रोशन ने उन्हें लंच पर इनवाइट किया। अमीषा पिता-मां के साथ गईं। वहां राकेश के बेटे ऋतिक भी मौजूद थे। उन्होंने पढ़ाई की खूब बातें कीं, अमीषा ने अपना सीवी और अमेरिका के मॉर्गन स्टेनली बैंक से मिली जॉब का लेटर भी दिखाया। कुछ देर बाद जब अमीषा वॉशरूम गईं तो राकेश रोशन ने बेटे ऋतिक से पूछा कि क्या उन्हें अपकमिंग फिल्म कहो न प्यार है में कास्ट करना चाहिए। ऋतिक की हामी मिलने पर राकेश ने अमीषा के आते ही उन्हें फिल्म ऑफर कर दी। दरअसल, उस समय राकेश रोशन ने बेटे ऋतिक रोशन और करीना कपूर के साथ फिल्म कहो न प्यार है शुरू की थी, लेकिन करीना ने राकेश रोशन और मां बबीता की अनबन होने पर फिल्म छोड़ दी थी। ऑफर मिलने पर अमीषा ने पूछा- आपकी फिल्म में तो हीरोइन फाइनल हो चुकी है। इस पर राकेश ने कहा- नहीं, मैं तुम्हें हीरोइन बनाना चाहता हूं। ये सुनकर अमीषा ने हामी भर दी। उन्होंने सोचा कि अगर पहली फिल्म फ्लॉप हुई, तो वो इकोनॉमिक्स में नौकरी शुरू कर देंगी, लेकिन खुशकिस्मती से फिल्म सुपरहिट रही और अमीषा पटेल एक स्टार बन गईं और आज भी फिल्मों से जुड़ी हुई हैं। आज अमीषा पटेल 51 साल की हो चुकी है। उनके बर्थडे के खास मौके पर जानिए, उनकी जिंदगी से जुड़ी रोचक कहानी, कुछ मजेदार किस्सों के साथ- कहो न प्यार है करते हुए मिली गदर, 12 घंटों तक दिया स्क्रीनटेस्ट अमीषा पटेल ने कुछ दिनों की एक्टिंग ट्रेनिंग लेने के बाद कहो न प्यार है की शूटिंग शुरू की। इसी समय उन्हें अनिल शर्मा की फिल्म गदर के ऑडिशन की जानकारी मिली। वो ऑडिशन के लिए गईं, जिसके लिए पहले ही 500 लड़कियां ऑडिशन दे चुकी थीं। 22 लड़कियों को स्क्रीनटेस्ट के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था, जिनमें अमीषा भी शामिल हुईं। उनका स्क्रीनटेस्ट 12 घंटे तक चला। आखिरकार अनिल शर्मा ने उन्हें गदर में कास्ट कर लिया। सिलेक्शन के बाद अमीषा पटेल को गदर साइन करने पर ताने मिले। सभी का मानना था कि करियर की शुरुआत में अमीषा को मां का रोल नहीं करना चाहिए, लेकिन वो ये रोल करने पर अड़ी थीं। अमीषा ने एक साथ कहो न प्यार है और गदर की शूटिंग की। एक फिल्म में वो चुलबुली लड़की थीं और दूसरी में एक भारत-पाकिस्तान के बीच हुए दंगों की सर्वाइवर। सबसे पहले उनकी फिल्म कहो न प्यार है रिलीज हुई। हर किसी ने राकेश रोशन को सलाह दी कि वो न्यूकमर ऋतिक और अमीषा की इस फिल्म को शाहरुख खान की फिल्म फिर भी दिल है हिंदुस्तानी और आमिर खान की फिल्म मेला के आसपास रिलीज न करें। कहो न प्यार है 14 जनवरी 2000 में रिलीज हुई, जबकि मेला 7 जनवरी 2000 और फिर भी दिल है हिंदुस्तानी 21 जनवरी 2000 को रिलीज हुई। बड़े क्लैश के बावजूद कहो न प्यार है ब्लॉकबस्टर रही और उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी। इसके बाद रिलीज हुई अमीषा पटेल की फिल्म गदर भी ब्लॉकबस्टर रही और उनकी गिनती टॉप एक्ट्रेस में होने लगी। गदर में अमीषा ने पाकिस्तानी सकीना का किरदार निभाया, जिसमें सनी देओल ने तारा सिंह का किरदार निभाया था। दोनों की जोड़ी काफी पसंद की गई थी। कुछ सालों बाद अमीषा पटेल को सनी देओल के भाई बॉबी देओल के साथ हमराज फिल्म मिली। फिल्म के क्लाइमैक्स सीन में अमीषा को अक्षय खन्ना को गोली मारकर, बॉबी से गले लगना था। फिल्म की शूटिंग जयपुर के किले में हुई, जहां शूटिंग देखने के लिए भारी भीड़ जमा थी। जैसे ही अमीषा ने बॉबी
पंजाब में योग्यता आधारित भर्ती 67,000 के पार, मुख्यमंत्री मान ने 355 युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे | भारत समाचार

आखरी अपडेट:08 जून, 2026, 22:26 IST भगवंत सिंह मान ने 355 नियुक्ति पत्र सौंपे, कहा कि आप ने बिना पेपर लीक के 67,037 योग्यता आधारित नौकरियां दी हैं, 65,000 संविदा कर्मचारियों को नियमित करने के लिए कानून की योजना बना रहे हैं; आईटीआई का विस्तार करें मिशन रोज़गार जारी रखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान कहते हैं, “पंजाब में सरकारी नौकरियों के लिए केवल योग्यता ही आधार है” पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोमवार को चंडीगढ़ में कई सरकारी विभागों में 355 उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र वितरित किए, जिससे 2022 में सत्ता संभालने के बाद से आम आदमी पार्टी सरकार की कुल योग्यता-आधारित भर्ती संख्या 67,037 हो गई। मान ने कहा कि उनमें से हर एक नियुक्ति राजनीतिक सिफारिशों, रिश्वतखोरी या पक्षपात के बिना की गई थी, और आप सरकार के सत्ता संभालने के बाद से पंजाब में एक भी परीक्षा पेपर लीक दर्ज नहीं किया गया है। नियुक्तियों में तकनीकी शिक्षा, सहयोग, स्थानीय सरकार, जल आपूर्ति और स्वच्छता, पशुपालन, लोक निर्माण, आवास और शहरी विकास और अन्य विभागों में चयनित उम्मीदवार शामिल थे। सभा को संबोधित करते हुए, मान ने राष्ट्रीय परीक्षा परिदृश्य के साथ सीधा अंतर बताया। उन्होंने कहा, “2017 के बाद से, देश भर में लगभग 93 परीक्षाओं के पेपर कथित तौर पर लीक हो गए हैं। एनईईटी समेत प्रमुख परीक्षाओं से जुड़ी घटनाओं ने लाखों युवाओं को निराश और हतोत्साहित किया है। 2022 में हमारी सरकार के सत्ता संभालने के बाद, पंजाब में एक भी पेपर लीक की घटना सामने नहीं आई है।” मान ने कार्यक्रम के बाद एक्स पर पोस्ट किया: “आज, 355 और युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे गए, जिससे अब तक प्रदान की गई सरकारी नौकरियों की कुल संख्या 67,037 हो गई है। ये सभी नौकरियां पूरी तरह से योग्यता और पारदर्शिता के आधार पर दी गई हैं। ऐसे समय में जब देश भर में एनईईटी जैसे पेपर लीक हो रहे हैं, पंजाब ने ईमानदार भर्ती सुनिश्चित करके और शिक्षा के क्षेत्र में देश में शीर्ष स्थान हासिल करके एक उदाहरण स्थापित किया है।” 67,000 से अधिक नौकरियाँ, और कुछ उम्मीदवारों ने एक से अधिक नौकरियां एकत्र कीं सोमवार को पत्र प्राप्त करने वालों में वे उम्मीदवार भी शामिल थे जिन्होंने विभिन्न भर्ती चक्रों में कई विभागों में प्लेसमेंट हासिल करते हुए एक से अधिक बार प्रतिस्पर्धी सरकारी परीक्षाएं उत्तीर्ण की थीं। मान ने इसे सबूत के तौर पर उद्धृत किया कि प्रक्रिया में वास्तविक विश्वसनीयता थी। नियुक्त किए गए लोगों में से एक, एक चौकीदार का बेटा, को केवल योग्यता के आधार पर चौथी सरकारी नौकरी का प्रस्ताव मिला। उन्होंने सभा को बताया कि पारदर्शी प्रक्रिया ने उनके कई एनआरआई दोस्तों को पंजाब लौटने और सरकारी पदों के लिए आवेदन करने पर विचार करने के लिए प्रेरित किया है। धूरी, पटियाला, अमृतसर और मोहाली के नवनियुक्त उम्मीदवारों ने कार्यक्रम में दर्शकों को बताया कि उन्होंने किसी को भुगतान किए बिना या किसी राजनीतिक संपर्क को बुलाए बिना प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है। अमृतसर की मनप्रीत कौर ने कहा कि वर्षों की तैयारी के बाद आखिरकार उनकी कड़ी मेहनत का फल मिला। मोहाली की परमीत कौर ने कहा कि वह अपने परिवार में सरकारी नौकरी पाने वाली पहली महिला बन गई हैं। पटियाला के गांव बूटा सिंह वाला के सेवानिवृत्त सैनिक काला सिंह ने कहा कि उनकी भर्ती में हेरफेर की कोई गुंजाइश नहीं है। 65,000 संविदा कर्मचारी नियमितीकरण की कतार में मान ने यह भी घोषणा की कि पंजाब सरकार वर्तमान में राज्य के विभागों और संस्थाओं में निजी ठेकेदारों के माध्यम से लगे 65,000 से अधिक संविदा कर्मचारियों के लिए स्थायी रोजगार का मार्ग बनाने के लिए दो नए कानून लाने की योजना बना रही है। प्रस्तावित ढांचे के तहत, पांच साल की आउटसोर्स सेवा पूरी करने वाले श्रमिकों को सीधे राज्य रोजगार के तहत लाया जाएगा। दस साल की संविदा सेवा के बाद, वे नियमित स्वीकृत पदों पर अवशोषण के लिए पात्र हो जाते हैं। मान ने कहा, “इन कर्मचारियों ने राज्य के लिए अथक परिश्रम किया है। आगे चलकर, उनके और राज्य सरकार के बीच कोई ठेकेदार खड़ा नहीं होगा।” 25 नए आईटीआई, सिंगापुर और फिनलैंड में शिक्षक प्रशिक्षण कौशल विकास के मोर्चे पर, मान ने कहा कि वर्तमान में पंजाब भर में 25 नए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का निर्माण चल रहा है, जबकि 13 मौजूदा आईटीआई को अपग्रेड किया जा रहा है। सरकार ने सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजों के आधुनिकीकरण पर 20 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, और अलग से 23 करोड़ रुपये नंगल में कैप्टन अमोल कालिया उत्कृष्टता केंद्र की ओर जा रहे हैं, जिसे मान ने उन्नत कौशल विकास और उद्योग-उन्मुख प्रशिक्षण के लिए एक केंद्र के रूप में वर्णित किया है। छात्रों को स्नातक होने से पहले सीधे उद्योग का अनुभव देने के लिए राज्य के सभी 91 पॉलिटेक्निक कॉलेजों में एक सेमेस्टर इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू किया गया है। मान ने सिख क्रांति के तहत सरकार के शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम की ओर भी इशारा किया। पंजाब के प्रिंसिपलों और शिक्षा अधिकारियों ने सिंगापुर में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। प्रमुख शिक्षकों ने आईआईएम अहमदाबाद में उन्नत कार्यक्रमों में भाग लिया। प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों को फ़िनलैंड के तुर्कू विश्वविद्यालय भेजा गया। मान ने कहा कि सरकार ने इन सरकारी संस्थानों में निजी स्कूल के छात्रों के प्रवेश का हवाला देते हुए राज्य भर में 118 स्कूल ऑफ एमिनेंस की स्थापना की है, जो यह दर्शाता है कि राज्य की स्कूली शिक्षा के बारे में धारणा कैसे बदल गई है। उन्होंने कहा कि जब 2022 में AAP ने नीति आयोग की रैंकिंग का हवाला देते हुए केरल को पछाड़कर पहले स्थान पर कब्जा कर लिया, तो पंजाब स्कूली शिक्षा में राष्ट्रीय स्तर पर 27वें स्थान से आगे बढ़ गया था। मान कहते हैं, ”रिवर्स माइग्रेशन शुरू हो गया है।” मान ने कहा कि युवा पंजाबी जो विदेश चले गए थे, अब घर में रोजगार की संभावनाओं के कारण वापस लौट रहे हैं। उन्होंने यह दावा पहले भी किया है और इसे सरकार की नौकरियों और शिक्षा प्रोत्साहन के इच्छित परिणामों में से एक बताया है। उन्होंने कहा, “आप सरकार युवाओं के विदेश प्रवास को रोकने और उन्हें पंजाब में ही प्रगति के अवसर और
सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे से टीएमसी में उथल-पुथल गहरा गई, 20 सांसदों ने कथित तौर पर एनडीए से आगे बढ़ने की मांग की | पश्चिम बंगाल

पूर्व टीएमसी दिग्गज सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफा देने के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर राजनीतिक उथल-पुथल तेज हो गई है, जिससे पार्टी के अंदर विद्रोह के नए दावे शुरू हो गए हैं। रिपोर्टों से पता चलता है कि लगभग 20 लोकसभा सांसद भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे ममता बनर्जी के नेतृत्व और टीएमसी के भविष्य पर बड़े सवाल उठ रहे हैं। नाटकीय घटनाक्रम बंगाल की राजनीति को नया आकार दे सकता है और संभावित रूप से संसद में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है। जैसे-जैसे संभावित विभाजन की अटकलें बढ़ती जा रही हैं, सभी की निगाहें अब ममता बनर्जी के अगले कदम पर हैं और क्या तृणमूल कांग्रेस आंतरिक संकट को नियंत्रित कर पाएगी। -हार्ड-फैक्ट्स n18oc_india n18oc_politics न्यूज18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube








