‘अस्वीकार्य’: ‘हिटलर से प्रेरणा’ वाले बयान पर विवाद के बाद कांग्रेस ने रेवंत रेड्डी की आलोचना की | भारत समाचार

आखरी अपडेट:10 जून, 2026, 11:43 IST विवाद तब खड़ा हुआ जब बेंगलुरु में एक कॉन्क्लेव में बोलते हुए रेवंत रेड्डी ने दावा किया कि हाइड्रा का नाम और अवधारणा हिटलर के “हाइड्रा” शब्द के शौक से प्रेरित थी। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी (पीटीआई/फ़ाइल) कांग्रेस ने हैदराबाद आपदा प्रतिक्रिया और संपत्ति संरक्षण एजेंसी (HYDRAA) को जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर से जोड़ने वाली विवादास्पद टिप्पणी पर तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को फटकार लगाई है, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इस बयान को पार्टी लोकाचार और विचारधारा के खिलाफ बताया है। कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि टिप्पणियाँ “बिल्कुल स्वीकार्य नहीं” थीं। उन्होंने आगे कहा कि पार्टी आलाकमान ने रेड्डी को अपनी अस्वीकृति से अवगत करा दिया है और उन्हें अपने सार्वजनिक बयानों में अधिक अनुशासन बरतने की सलाह दी है। विवाद तब शुरू हुआ जब बेंगलुरु में एक कॉन्क्लेव में बोलते हुए रेवंत रेड्डी ने दावा किया कि हाइड्रा का नाम और अवधारणा हिटलर के “हाइड्रा” शब्द के शौक से प्रेरित थी। रेड्डी ने कहा, “हाइड्रा, यह शब्द हिटलर का पसंदीदा शब्द है। उनकी कोर टीम को हाइड्रा कहा जाता था, जो किसी की भी हत्या कर सकती थी। इसलिए, मैंने हिटलर से प्रेरणा ली है और इसका नाम हाइड्रा रखा है।” तेलंगाना के मुख्यमंत्री हैदराबाद में अतिक्रमण हटाने और झीलों और सरकारी भूमि की सुरक्षा में हाइड्रा की भूमिका का बचाव कर रहे थे। उन्होंने तर्क दिया कि पर्यावरणीय चुनौतियों, बाढ़ और अवैध अतिक्रमणों से निपटने के लिए अन्य प्रमुख शहरों में भी इसी तरह की एजेंसियां स्थापित की जानी चाहिए। इस टिप्पणी की भाजपा, भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) और वामपंथी नेताओं सहित विपक्षी दलों ने तीखी आलोचना की। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने रेड्डी पर ”तानाशाही मानसिकता” प्रदर्शित करने का आरोप लगाया और सवाल किया कि क्या कांग्रेस नेता राहुल गांधी उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। केंद्रीय मंत्री और सिकंदराबाद के सांसद जी. किशन रेड्डी ने भी बयान की निंदा की और आरोप लगाया कि यह कांग्रेस पार्टी की “आपातकालीन मानसिकता” को दर्शाता है और बिना शर्त माफी की मांग करता है। सीपीएम ने भी तेलंगाना के मुख्यमंत्री की आलोचना की. सीपीएम महासचिव एमए बेबी ने कहा कि टिप्पणी संघ परिवार से जुड़ी वैचारिक प्रवृत्तियों की प्रतिध्वनि है, जबकि सीपीआई (एमएल) लिबरेशन नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने हिटलर के आह्वान को शासन का प्रतीक “चिंताजनक” बताया। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में शोभित गुप्ता शोभित गुप्ता News18.com में उप-संपादक हैं और भारत और अंतर्राष्ट्रीय समाचारों को कवर करते हैं। वह भारत के रोजमर्रा के राजनीतिक मामलों और भू-राजनीति में रुचि रखते हैं। उन्होंने बीए पत्रकारिता (ऑनर्स) की डिग्री हासिल की…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘अस्वीकार्य’: ‘हिटलर से प्रेरणा’ वाली टिप्पणी पर विवाद के बाद कांग्रेस ने रेवंत रेड्डी की आलोचना की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)रेवंत रेड्डी हिटलर की टिप्पणी(टी)तेलंगाना के मुख्यमंत्री(टी)हाइड्रा विवाद(टी)कांग्रेस ने रेवंत को फटकार लगाई(टी)हैदराबाद आपदा एजेंसी(टी)हिटलर तुलना पंक्ति(टी)बीजेपी की आलोचना तेलंगाना(टी)आपातकालीन मानसिकता का आरोप
पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक की:11 बच्चों समेत 13 की मौत, 14 महिलाएं घायल; तालिबान ने एयरस्पेस उल्लंघन का आरोप लगाया

पाकिस्तान ने मंगलवार रात अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक की। तालिबान के मुताबिक, इन हमलों में 13 लोगों की मौत हुई है। मरने वालों में 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग शामिल हैं। 14 महिलाएं घायल हुई हैं। तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के एयरस्पेस का उल्लंघन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना ने कुनार, खोस्त और पक्तिका प्रांतों में आम घरों को निशाना बनाकर बमबारी की। मुजाहिद ने घायलों की फोटोज भी शेयर कीं। तालिबान ने हमले में मारे गए बच्चों की तस्वीरें शेयर कीं… पाकिस्तान के हमले से मार्च में 400 लोगों की जान गई थी तालिबान सरकार के अनुसार पिछले एक साल में पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाइयों में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। मार्च 2026 में अफगानिस्तान पर एक बड़ा हवाई हमला किया था। अफगान अधिकारियों के मुताबिक, काबुल में एक नशा मुक्ति केंद्र पर हुई बमबारी में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। तालिबान ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हमले में 269 मौतों की पुष्टि हुई थी। अफगानिस्तान का दावा था कि पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने राजधानी काबुल के कई इलाकों को निशाना बनाया था। हालांकि पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। पाकिस्तान का दावा था कि कार्रवाई में एक गोला-बारूद डिपो को टारगेट किया गया था। मार्च की उस घटना के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया। सीमा पार हमलों, एयरस्ट्राइक और सैन्य झड़पों को लेकर दोनों देश लगातार एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं। पाकिस्तान-अफगानिस्तान में 4 महीने से संघर्ष जारी पाकिस्तान और अफगानिस्तान में संघर्ष की शुरुआत 22 फरवरी को हुई थी। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की थी। पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने दावा किया था कि सीमावर्ती इलाकों में TTP के ठिकानों पर कार्रवाई में कम से कम 70 लड़ाके मारे गए। बाद में पाकिस्तानी अखबार डॉन ने यह संख्या 80 तक पहुंचने का दावा किया था। इसके जवाब में अफगानिस्तान ने 27 फरवरी को पाकिस्तान पर हमला किया। पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर दबाव बनाता रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी संगठन को न करने दे। इस्लामाबाद का आरोप है कि TTP अफगानिस्तान से ऑपरेट हो रहा है, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही है। पाकिस्तान और TTP में लड़ाई क्यों? 2001 में अमेरिका के अफगानिस्तान पर हमले के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया। इससे TTP नाराज हो गया, वह इसे इस्लाम के खिलाफ मानता था। TTP का मानना है कि पाकिस्तान सरकार सच्चा इस्लाम नहीं मानती है, इसलिए वो उसके खिलाफ हमला करता है। TTP का अफगान तालिबान के साथ गहरा जुड़ाव है। दोनों समूह एक-दूसरे को समर्थन देते हैं। 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान ने TTP को निशाना बनाकर अफगानिस्तान में हमले किए।
एल्विश यादव ने खरगोश जनता पार्टी बनाई:लिखा- सबका विकास गाजर के साथ, कॉकरोच पार्टी वालों से बहस नहीं करता

गुरुग्राम के रहने वाले बिग बॉस OTT सीजन-2 के विनर एल्विश यादव ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जवाब में खरगोश जनता पार्टी (KJP) का पोस्टर जारी किया है। बुधवार को उन्होंने अपने X हैंडल पर CJP पर तंज कसते हुए KJP का पोस्टर और मैनिफेस्टो शेयर किया। इसमें लिखा था- “गाजर हमारा हक, स्पीड हमारी पहचान, खरगोश एकता जिंदाबाद, तेज दिमाग, लंबे कान, सबका विकास गाजर के साथ।” पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। CJP समर्थकों ने एल्विश की आलोचना शुरू कर दी, जिसके बाद उन्होंने लाइव आकर सफाई दी। कुछ ही घंटों में यह पोस्ट X पर 20 लाख से ज्यादा लोगों तक पहुंच गई। वहीं यूजर्स ने ट्रोल करते हुए लिखा- “नीट पेपर लीक पर साइलेंट, बांग्लादेशी हिंदुओं के मामले में साइलेंट, सिलेंडर मैटर पर साइलेंट, अब CJP कंट्रोवर्सी के बीच अपने सॉन्ग प्रमोशन का तरीका है।” X पर एल्विश ने ये पोस्टर शेयर किया पोस्ट में लिखा- बहस से बेहतर पेस्ट कंट्रोल इस घोषणापत्र को पोस्ट करने के कुछ ही देर बाद एल्विश यादव ने एक और पोस्ट की। उन्होंने लिखा- “मैं अब कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्यों से बहस नहीं करता, बहस करने से बेहतर पेस्ट कंट्रोल काम करता है।” विवाद यहीं नहीं रुका। इसके बाद एल्विश ने अपने सोशल मीडिया पर एक और पोस्टर जारी कर दिया। इस बार उन्होंने तंज कसते हुए लिखा- “सारे भाई जंतर-मंतर पहुंच जाओ, सभी को मुफ्त गाजर।” एल्विश यादव की तरफ से जारी दूसरा पोस्टर बोले- ‘बोलने की आजादी, मैं तो बोलूंगा’ लगातार आ रही पोस्ट्स के बाद जब इंटरनेट पर ट्रोलर्स और यूजर्स ने सवाल उठाने शुरू किए, तो एल्विश यादव ने एक वीडियो जारी कर जवाब दिया। उन्होंने कहा- “मुझे बोलने की पूरी आजादी है और मैं अपनी बात बोल रहा हूं।”
हरियाणवी डांसर सपना चौधरी ने मारपीट के बाद ससुराल छोड़ा:कोर्ट ने पति वीर साहू के मिलने पर रोक लगाई; 2020 में लव मैरिज की थी

हरियाणवी डांसर और सिंगर सपना चौधरी की निजी जिंदगी एक बार फिर सुर्खियों में है। सपना ने अपने पति वीर साहू के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज कराते हुए दिल्ली की द्वारका महिला कोर्ट में याचिका दाखिल की है। मंगलवार को कोर्ट ने शुरुआती सुनवाई में सपना को अंतरिम राहत देते हुए वीर साहू को अगली सुनवाई तक उनके संपर्क में आने, घर या कार्यस्थल पर जाने और किसी भी तरह से परेशान करने से रोक दिया है। सपना की ओर से कोर्ट में वीडियो, ऑडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी पेश किए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 25 जुलाई को होगी। विवाद के बाद सपना ससुराल छोड़ चुकी हैं। फिलहाल वह दिल्ली के नजफगढ़ स्थित अपने मायके में रह रही हैं। अब जानिए सपना-वीर विवाद की पूरी कहानी सपना ने घरेलू हिंसा का आरोप लगाकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया विवाद तब सार्वजनिक हुआ, जब सपना चौधरी ने दिल्ली की द्वारका महिला कोर्ट में घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत याचिका दायर की। उन्होंने आरोप लगाया कि वैवाहिक जीवन के दौरान उनके साथ कई बार मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया। सपना का कहना है कि हालात इतने बिगड़ गए थे कि उन्हें अपना ससुराल छोड़ना पड़ा। फिल्म ‘मोमाकू’ के प्रीमियर से पहले बढ़ी चिंता सपना की ओर से एडवोकेट प्रीति सिंह ने कोर्ट में दलील दी कि उनकी फिल्म ‘मोमाकू’ जल्द रिलीज होने वाली है और उसका प्रीमियर भी होने वाला है। ऐसे में सपना को सुरक्षा की जरूरत है। वीर साहू किसी सार्वजनिक कार्यक्रम या फिल्म के प्रीमियर में पहुंचकर हंगामा कर सकते हैं। इससे सपना की सुरक्षा और उनके काम पर असर पड़ सकता है। मजिस्ट्रेट ने संपर्क न करने के आदेश दिए न्यायिक मजिस्ट्रेट निधि सिंह ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक वीर साहू किसी भी माध्यम से सपना चौधरी से संपर्क नहीं करेंगे। उन्हें सपना के घर, कार्यस्थल या उनके आसपास जाने से भी रोका गया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रतिवादी किसी भी प्रकार की घरेलू हिंसा या उत्पीड़न नहीं करेंगे। कोर्ट ने संबंधित प्रोटेक्शन ऑफिसर और स्थानीय थाना प्रभारी (SHO) को आदेश दिया है कि वे अदालत के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें। अब सपना चौधरी के बारे में जानिए… देसी क्वीन के नाम से मशहूर सपना चौधरी हरियाणा की मशहूर डांसर, सिंगर, अभिनेत्री और मॉडल हैं, जिन्हें “देसी क्वीन” के नाम से जाना जाता है। उनका जन्म 25 सितंबर 1990 को दिल्ली में हुआ था। पिता के निधन के बाद उन्होंने कम उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारी संभाली और 12 साल की उम्र से स्टेज परफॉर्मेंस शुरू कर दी। 20 से ज्यादा गानों में आवाज दे चुकीं रागनी कार्यक्रमों और हरियाणवी स्टेज शो के जरिए उन्होंने पहचान बनाई और धीरे-धीरे हरियाणा, राजस्थान, पंजाब तथा यूपी में लोकप्रिय हो गईं। कई हिट गानों पर डांस करने के साथ उन्होंने 20 से अधिक गानों को अपनी आवाज भी दी। 2020 में वीर साहू से शादी की थी 2017 में बिग बॉस-11 में हिस्सा लेने के बाद उन्हें राष्ट्रीय पहचान मिली। 2018 में फिल्म ‘वीरे की वेडिंग’ के गाने ‘हट जा ताऊ’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया और कई फिल्मों में अभिनय भी किया। सपना ने जनवरी 2020 में हिसार में मदनहेड़ी गांव के रहने वाले हरियाणवी सिंगर और अभिनेता वीर साहू से लव मैरिज की थी। दंपती के दो बेटे हैं।
पहले वनडे में बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को 86 रन हराया:21 साल बाद कंगारू टीम पर मिली दूसरी जीत; नालेद राणा ने झटके 4 विकेट

बांग्लादेश ने मीरपुर में खेले गए पहले वनडे मैच में ऑस्ट्रेलिया को डकवर्थ-लुईस (DLS) नियम के तहत 86 रन से हरा दिया। बांग्लादेश की ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे इतिहास में यह केवल दूसरी जीत है। इससे पहले साल 2005 में बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को पहली बार किसी वनडे मैच में मात दी थी। इस मुकाबले में करीब चार साल बाद वनडे क्रिकेट में वापसी कर रहे मोसाद्देक हुसैन ने पहले बल्लेबाजी में नाबाद 86 रनों की पारी खेली और बाद में गेंदबाजी में भी 2 विकेट चटकाए। वहीं, नावेद राणा ने 4 विकेट लिए। ऑस्ट्रेलिया की टीम पिछले हफ्ते पाकिस्तान से वनडे सीरीज 2-1 से हारने के बाद यहां पहुंची है, जहां उसे पहले ही मैच में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। खराब रोशनी और बारिश के कारण रुका मैच टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए बांग्लादेश की टीम ने निर्धारित 50 ओवरों में 8 विकेट पर 284 रन बनाए थे। जवाब में 285 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम 42.2 ओवरों में 9 विकेट खोकर केवल 191 रन ही बना सकी थी कि तभी मैदान पर तेज बिजली कड़कने और बारिश के कारण खेल को रोकना पड़ा। खेल दोबारा शुरू न होने की स्थिति में डकवर्थ-लुईस नियम के तहत बांग्लादेश को 86 रनों से विजेता घोषित कर दिया गया। ऑस्ट्रेलिया की ओर से कैमरून ग्रीन 52 रन बनाकर नाबाद रहे। मोसाद्देक हुसैन की शानदार वापसी, शांतो और तंजीद के भी अर्धशतक चार साल बाद टीम में लौटे मोसाद्देक हुसैन बांग्लादेश की जीत के सबसे बड़े हीरो रहे। उन्होंने महज 70 गेंदों में 7 चौकों और 3 छक्कों की मदद से नाबाद 86 रन कूट डाले। हालांकि, इस दौरान ऑस्ट्रेलियाई फील्डर्स ने उन्हें तीन जीवनदान भी दिए। कूपर कॉनोली, ओलिवर पीक और एडम जम्पा ने उनके कैच छोड़े, जिसका मोसाद्देक ने पूरा फायदा उठाया। उनके अलावा कप्तान नजमुल हुसैन शांतो ने 67 और ओपनर तंजीद हसन ने 54 रनों की महत्वपूर्ण पारियां खेलीं। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से नाथन एलिस सबसे सफल गेंदबाज रहे, जिन्होंने 38 रन देकर 3 विकेट लिए। खिलाड़ियों की कसी फील्डिंग ऑस्ट्रेलियाई टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और पारी की पहली ही गेंद पर ओपनर मैथ्यू शॉट को तस्कीन अहमद ने बोल्ड कर दिया। खराब फॉर्म से जूझ रहे मार्नस लाबुशेन भी सिर्फ 1 रन बनाकर मुस्तफिजुर रहमान का शिकार बने। पाकिस्तान के खिलाफ पिछली सीरीज में 0, 5 और 19 रन बनाने वाले लाबुशेन का फ्लॉप शो यहां भी जारी रहा। मिडिल ऑर्डर में कूपर कॉनोली (35) ने कप्तान जोश इंग्लिस (19) और एलेक्स कैरी (47) के साथ छोटी साझेदारियां कर पारी को संभालने की कोशिश की, लेकिन वे टीम को संकट से नहीं निकाल सके। नाहिद राणा की 140 किमी/घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी बांग्लादेश के युवा तेज गेंदबाज नाहिद राणा ने अपनी रफ्तार से ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को खूब परेशान किया। लगातार 140 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की स्पीड से गेंदबाजी करते हुए राणा ने 41 रन देकर 4 विकेट चटकाए। उन्होंने अपने दूसरे स्पेल में घातक गेंदबाजी करते हुए तीन ओवरों में तीन विकेट निकालकर ऑस्ट्रेलिया की कमर तोड़ दी। मोसाद्देक हुसैन ने भी कसी हुई गेंदबाजी की और अपने 10 ओवर के कोटे में सिर्फ 37 रन देकर 2 जरूरी विकेट निकाले। 15 साल बाद दोनों देशों के बीच बाइलेटरल सीरीज ऑस्ट्रेलिया की टीम पूरे 15 साल बाद बांग्लादेश के दौरे पर कोई बाइलेटरल वनडे सीरीज खेल रही है। सीरीज का पहला मैच जीतकर बांग्लादेश ने 1-0 की बढ़त बना ली है। सीरीज के बाकी बचे दोनों मैच भी मीरपुर के इसी मैदान पर गुरुवार और रविवार को खेले जाएंगे।
अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले किए:हेलिकॉप्टर गिराने के बदले में अटैक; तेहरान बोला- हर हमले का जवाब देंगे

अमेरिकी सेना ने मंगलवार रात ईरान पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि सेना ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की है। सेंटकॉम के मुताबिक, यह हमला होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी सेना के अपाचे हेलिकॉप्टर को गिराए जाने के जवाब में किया गया। इससे पहले ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर गश्त कर रहे अमेरिकी AH-64 अपाचे हेलिकॉप्टर को ईरान ने मार गिराया। हालांकि उन्होंने कहा कि हेलिकॉप्टर में सवार दोनों पायलट सुरक्षित हैं और उन्हें कोई चोट नहीं आई। ट्रम्प ने लिखा था, “अमेरिका को इस हमले का जवाब देना ही होगा।” उधर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी कार्रवाई पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “ईरानी सेना किसी भी हमले या धमकी को बिना जवाब नहीं छोड़ेंगे।” अराघची ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा, “अगर सुरक्षित रहना चाहते हैं तो हमारा क्षेत्र छोड़ दें। फारस की खाड़ी का इतिहास बाहरी ताकतों के बुरे अंजामों से भरा है।” हेलिकॉप्टर हादसे को लेकर अलग-अलग रिपोर्टें सामने आई हैं। एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, अपाचे हेलिकॉप्टर एक ईरानी ड्रोन से टकराने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। फिलहाल यह साफ नहीं है कि यह टक्कर जानबूझकर कराई गई थी या हादसा थी। मामले की जांच जारी है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
एक-पार्टी के प्रभुत्व से 24/7 डिजिटल विच्छेदन तक: पीएम मोदी ने ‘अलग भारत’ में पीएम नेहरू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:10 जून, 2026, 01:58 IST प्रधान मंत्री मोदी के शासन काल को अविश्वसनीय रूप से जटिल, हाइपर-कनेक्टेड राजनीतिक पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा परिभाषित किया गया है जैसा कि भारत ने नेतृत्व की दीर्घायु में इस ऐतिहासिक परिवर्तन को चिह्नित किया है, मील का पत्थर कार्यालय में बिताए गए दिनों की संख्या से कहीं अधिक दर्शाता है; यह राजनीतिक सर्वसम्मति-निर्माण की प्रकृति में एक गहरे बदलाव को रेखांकित करता है। फ़ाइल छवि/एएफपी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 जून को एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है, आधिकारिक तौर पर जवाहरलाल नेहरू को पीछे छोड़ते हुए भारत के सबसे लंबे समय तक लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित, लगातार सरकार के प्रमुख के रूप में चुने गए हैं। यह ऐतिहासिक उपलब्धि देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया मानदंड स्थापित करते हुए आधुनिक राजनीतिक दीर्घायु के मापदंडों को फिर से परिभाषित करती है। हालाँकि, जबकि दोनों नेता भारतीय मतदाताओं से स्थायी जनादेश हासिल करने में कामयाब रहे, उनके संबंधित कार्यकाल के संरचनात्मक परिदृश्य अधिक विशिष्ट नहीं हो सके। प्रधान मंत्री मोदी के शासन काल को एक अविश्वसनीय रूप से जटिल, हाइपर-कनेक्टेड राजनीतिक पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा परिभाषित किया गया है, जो कि स्वतंत्रता के बाद के शुरुआती दशक के निर्विवाद एकल-दल प्रभुत्व के साथ बिल्कुल विपरीत है। विभिन्न युगों का संस्थागत ताना-बाना इस मील के पत्थर की भयावहता को समझने के लिए, राजनीतिक विश्लेषक बीसवीं सदी के मध्य और समकालीन युग के बीच विशाल प्रणालीगत अंतर पर प्रकाश डालते हैं। आज़ादी के बाद शुरुआती दशकों के दौरान, सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी ने उस व्यवस्था के तहत काम किया जिसे समाजशास्त्री ऐतिहासिक रूप से “एकदलीय प्रभुत्व प्रणाली” कहते हैं। जवाहरलाल नेहरू के तहत, केंद्र सरकार भारी संस्थागत अधिकार के साथ काम कर रही थी, और उसे ऐसे विरोध का सामना करना पड़ रहा था, जिसमें बौद्धिक रूप से जीवंत होने के बावजूद, संघीय ढांचे के लिए प्रणालीगत खतरा पैदा करने के लिए संख्यात्मक ताकत, क्षेत्रीय मशीनरी और वित्तीय समर्थन का अभाव था। राजनीतिक केंद्रीकरण उस युग का स्वाभाविक उपोत्पाद था जब गणतंत्र के मूलभूत स्तंभ अभी भी मजबूत हो रहे थे। इसके बिल्कुल विपरीत, प्रधानमंत्री मोदी अभूतपूर्व राजनीतिक विखंडन और गहन जांच के युग में निरंतर कार्यकाल की कमान संभाल रहे हैं। वर्तमान प्रशासन अत्यधिक प्रतिस्पर्धी परिदृश्य में काम करता है जहां मजबूत क्षेत्रीय गठबंधन, मुखर राज्य सरकारें और संरचित विपक्षी गठबंधन लगातार संघीय नीतियों का विरोध करते हैं। सत्ता अब एक ही बोर्डरूम में केंद्रित नहीं है; इसके बजाय, इसमें गहराई से स्थापित क्षेत्रीय हितों के विविध स्पेक्ट्रम पर बातचीत की जाती है, जिसमें विधायी, वित्तीय और संघीय मामलों पर केंद्र को चुनौती देने की संस्थागत क्षमता होती है। डिजिटल पुनर्जागरण और सार्वजनिक जांच दलगत राजनीति से परे, संचार परिदृश्य में आमूल-चूल परिवर्तन आया है, जिसने मौलिक रूप से बदल दिया है कि एक आधुनिक प्रधान मंत्री एक विस्तारित अवधि में जनता का विश्वास कैसे बनाए रखता है। नेहरू युग की विशेषता नवजात, बड़े पैमाने पर राज्य-सहयोगी या पारंपरिक प्रिंट मीडिया थी, जो कम साक्षरता दर वाले समाज में काम कर रहा था, जहां जन संचार धीमा और अत्यधिक औपचारिक था। शासन काफी हद तक त्वरित, प्रतिक्रियाशील सार्वजनिक प्रतिक्रिया से अछूता था, जिससे नीतियों को सार्वजनिक चकाचौंध से दूर एक व्यापक अवधि की अनुमति मिल गई। आज, लोकतांत्रिक विमर्श एक अतिसक्रिय डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में सामने आता है। स्मार्टफोन प्रौद्योगिकी, सर्वव्यापी हाई-स्पीड इंटरनेट और स्वतंत्र डिजिटल पत्रकारिता प्लेटफार्मों के प्रसार का मतलब है कि संघीय निर्णयों की घोषणा के कुछ ही सेकंड के भीतर विच्छेदन, आलोचना और विरोध किया जाता है। एक्टिविस्ट नेटवर्क, नागरिक समाज समूह और विविध मीडिया गुट शक्तिशाली ऑनलाइन आर्किटेक्चर पर नियंत्रण रखते हैं जो रातों-रात कथा परिवर्तन को आकार देने में सक्षम हैं। लोकतांत्रिक बहुमत को बनाए रखना और इस अथक, 24-घंटे की स्पॉटलाइट के तहत प्रशासनिक गति बनाए रखना सार्वजनिक प्रबंधन में एक पूरी तरह से अद्वितीय परिचालन विजय का प्रतिनिधित्व करता है। लोकतांत्रिक दीर्घायु का एक नया प्रतिमान जैसा कि भारत ने नेतृत्व की दीर्घायु में इस ऐतिहासिक परिवर्तन को चिह्नित किया है, मील का पत्थर कार्यालय में बिताए गए दिनों की संख्या से कहीं अधिक दर्शाता है; यह राजनीतिक सर्वसम्मति-निर्माण की प्रकृति में एक गहरे बदलाव को रेखांकित करता है। आधुनिक युग में निरंतरता हासिल करने के लिए एक ऐसे मतदाता वर्ग को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है जो अत्यधिक आकांक्षी, डिजिटल रूप से सशक्त और अलग-अलग क्षेत्रीय रेखाओं के साथ खंडित हो। स्वतंत्र भारत के संस्थापक प्रधान मंत्री के निरंतर शासन रिकॉर्ड को पार करके, वर्तमान नेतृत्व ने एक तरल, अत्यधिक प्रतिस्पर्धी राजनीतिक वास्तविकता को अनुकूलित करने की असाधारण क्षमता का प्रदर्शन किया है, एक मिसाल कायम की है जो आने वाले दशकों के लिए देश की लोकतांत्रिक वास्तुकला को आकार देगी। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में न्यूज़ डेस्क न्यूज़ डेस्क उत्साही संपादकों और लेखकों की एक टीम है जो भारत और विदेशों में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण और विश्लेषण करती है। लाइव अपडेट से लेकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से लेकर गहन व्याख्याताओं तक…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया एक-दलीय प्रभुत्व से 24/7 डिजिटल विच्छेदन तक: पीएम मोदी ने ‘अलग भारत’ में पीएम नेहरू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
PoK रावलकोट में खून-खराबा: क्या पाकिस्तान ने नियंत्रण खो दिया है? | आसिम मुनीर | सही स्टैंड | न्यूज18

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मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द; कांग्रेस ने कहा ‘असंवैधानिक’ | भारत समाचार

आखरी अपडेट:09 जून, 2026, 19:59 IST यह बर्खास्तगी तीसरी राज्यसभा सीट से चुनाव लड़ रहे भाजपा उम्मीदवार महेश केवट द्वारा रिटर्निंग ऑफिसर को सौंपी गई शिकायत पर हुई। मीनाक्षी नटराजन मध्य प्रदेश में तीन राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले आगामी चुनाव में मंगलवार को उस समय नाटकीय मोड़ आ गया, जब हलफनामे में एक मामले की जानकारी छिपाने के आरोप में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया गया। एमपी विधानसभा के एक अधिकारी ने पीटीआई-भाषा को बताया, ”रिटर्निंग ऑफिसर ने एक मामले की जानकारी छिपाने के आधार पर नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया है।” तीसरी राज्यसभा सीट से चुनाव लड़ रहे भाजपा उम्मीदवार महेश केवट ने रिटर्निंग ऑफिसर को एक शिकायत सौंपी थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि नटराजन ने जानबूझकर उनके खिलाफ तेलंगाना में दर्ज एक मामले की जानकारी छिपाई है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में -सौरभ वर्मावरिष्ठ उपसंपादक सौरभ वर्मा मुख्य उप-संपादक के रूप में News18.com के लिए सामान्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दैनिक समाचारों को कवर करते हैं। वह राजनीति पर गहरी नजर रखते हैं। आप उन्हें ट्विटर –twitter.com/saurbhkverma19 पर फ़ॉलो कर सकते हैं जगह : भोपाल, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द; कांग्रेस ने कहा ‘असंवैधानिक’ अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)राज्यसभा चुनाव मध्य प्रदेश(टी)मीनाक्षी नटराजन का नामांकन(टी)नामांकन खारिज मामला(टी)कांग्रेस उम्मीदवार का हलफनामा(टी)भाजपा उम्मीदवार महेश केवट(टी)रिटर्निंग अधिकारी की शिकायत(टी)तेलंगाना मामला छिपाना(टी)मध्य प्रदेश की राजनीति
टीएमसी संकट के बीच भारत में गुटबाजी के बाद ममता बनर्जी ने सोनिया गांधी से मुलाकात की | भारत समाचार

आखरी अपडेट:09 जून, 2026, 16:18 IST सोनिया गांधी और अन्य भारतीय ब्लॉक नेताओं ने दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक में ममता बनर्जी के समर्थन में रैली की, क्योंकि टीएमसी अपने सबसे बड़े आंतरिक संकट का सामना कर रही है। दिल्ली में इंडिया ब्लॉक की बैठक में टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के साथ कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी। (पीटीआई छवि) पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कल इंडिया ब्लॉक की बैठक के बाद मंगलवार को कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी से मुलाकात की, क्योंकि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) बंगाल विधानसभा और संसद में हाई-प्रोफाइल इस्तीफों और विद्रोहों के साथ अपने सबसे बड़े आंतरिक संकट से जूझ रही है। एक दिन पहले, चुनावी असफलताओं की एक श्रृंखला के बाद इंडिया ब्लॉक के नेता राष्ट्रीय राजधानी में एकत्र हुए। बैठक की शुरुआत ममता बनर्जी के जोरदार बचाव के साथ हुई क्योंकि विपक्षी नेता तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो के पीछे लामबंद हो गए, जिनकी पार्टी अब लोकसभा में एक बड़े विद्रोह का सामना कर रही है। यह एक विकासशील प्रति है. अधिक विवरण जोड़े जाने हैं. चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में अवीक बनर्जी अवीक बनर्जी News18 में वरिष्ठ उप संपादक हैं। ग्लोबल स्टडीज में मास्टर की डिग्री के साथ नोएडा में रहने वाले अवीक के पास डिजिटल मीडिया और न्यूज क्यूरेशन में तीन साल से अधिक का अनुभव है, जो कि अंतर्राष्ट्रीय विषयों में विशेषज्ञता रखते हैं…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया टीएमसी संकट के बीच इंडिया ब्लॉक हडल के बाद ममता बनर्जी ने सोनिया गांधी से मुलाकात की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)ममता बनर्जी सोनिया गांधी की बैठक(टी)ममता बनर्जी(टी)सोनिया गांधी(टी)इंडिया ब्लॉक(टी)तृणमूल कांग्रेस संकट(टी)टीएमसी विद्रोह(टी)बंगाल राजनीति(टी)भारत विपक्षी गठबंधन









