बीजेपी ने खड़गे की ‘जहरीले सांप’ वाली टिप्पणी की निंदा की, कांग्रेस पर RSS के खिलाफ ‘मुसलमानों को भड़काने’ का आरोप लगाया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:07 अप्रैल, 2026, 08:18 IST पूनावाला ने लिखा कि कांग्रेस “भारतीय जिहादी कांग्रेस” की तरह व्यवहार कर रही है और दावा किया कि ये टिप्पणियां राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ उकसाने वाली हैं। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे. (एक्स/पीटीआई) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की उस टिप्पणी की कड़ी आलोचना की, जिसमें उन्होंने आरएसएस और भाजपा की तुलना “जहरीले सांप” से की थी। पार्टी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। खड़गे ने कहा, ”कुरान में लिखा है कि प्रार्थना के समय भी, यदि आप देखते हैं जहरीला सांप, तुम्हें इसे मारना ही होगा. आरएसएस/बीजेपी बिल्कुल वही सांप है… यदि आप उन्हें नहीं मारेंगे, तो आप जीवित नहीं बचेंगे।” बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए, पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस ने “नया निचला स्तर” पार कर लिया है और आरोप लगाया कि पार्टी खुलेआम मुसलमानों को भाजपा और आरएसएस के सदस्यों के खिलाफ भड़का रही है। एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि कांग्रेस “भारतीय जिहादी कांग्रेस” की तरह व्यवहार कर रही है और दावा किया कि ये टिप्पणियां राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ उकसाने वाली हैं। यह INCइंडियन नेशनल कांग्रेस नहीं है, यह भारतीय जिहादी कांग्रेस है कांग्रेस खुलेआम मुसलमानों को भाजपा/आरएसएस सदस्यों को मारने के लिए उकसा रही है खड़गे जी: कुरान में लिखा है नमाज के वक्त भी अगर जहरीला सांप दिखे तो उसे मार दो। आरएसएस/बीजेपी वही सांप है…आप उन्हें नहीं मारोगे तो बचोगे… pic.twitter.com/6HNBm65vk1 – शहजाद जय हिंद (कांग्रेस पारिस्थितिकी तंत्र के अनुसार चौकीदार) (@Shehzad_Ind) 6 अप्रैल 2026 खड़गे के बयान का हवाला देते हुए, पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस नेता ने प्रार्थना के दौरान भी एक जहरीले सांप को मारने के बारे में एक पंक्ति का उल्लेख किया था और इसकी तुलना भाजपा और आरएसएस से करते हुए आरोप लगाया था कि इस तरह की बयानबाजी खतरनाक और अलोकतांत्रिक है। पूनावाला ने अपने पोस्ट में कहा, “यह कांग्रेस के लिए सबसे निचला स्तर है। यह सबसे अलोकतांत्रिक, आपातकालीन मानसिकता वाला बयान है। शर्मनाक! चुनाव आयोग को अब कार्रवाई करनी चाहिए।” इससे पहले, खड़गे की “गुजरात के अनपढ़ लोग” टिप्पणी की मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल सहित भाजपा नेताओं ने व्यापक निंदा की, जिन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल के डीएनए में गुजरात विरोधी “जहर” बहता है और माफी की मांग की।
पंजाबी सिंगर ने फैन के पेट पर दिया ऑटोग्राफ:बोला-मैं इसे शीशे में जड़वाकर रखूंगा, आपको फोटो भी भेजूंगा

पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री के मशहूर सिंगर प्रेम ढिल्लों अक्सर अपने गानों और स्टाइल के कारण चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस बार वह अपने एक प्रशंसक (फैन) के प्रति अनोखे प्रेम को लेकर सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें प्रेम ढिल्लों अपने प्रशंसक के पेट पर ऑटोग्राफ देते नजर आ रहे हैं। यह पूरा वाकया उस समय चर्चा में आया जब दिलप्रीत ने खुद अपने आधिकारिक स्नैपचैट अकाउंट पर यह वीडियो साझा की। वीडियो में देखा जा सकता है कि एक करीब 17-18 साल का सिख नौजवान, जिसने संतरी रंग की टी शर्ट पहनी हुई है, सिंगर से मिलने उनके घर पहुंचा था। प्रशंसक की दीवानगी ऐसी थी कि उसने अपनी टी शर्ट पर सिंगर से अपने पेट पर ही ऑटोग्राफ देने की जिद कर दी। मजाकिया अंदाज में हुई बातचीत वीडियो में प्रेम ढिल्लों काफी खुशनुमा मूड में नजर आ रहे हैं। ऑटोग्राफ देते हुए उन्होंने मजाकिया लहजे में प्रशंसक से पूछा, यहां साइन कर दूं क्या इस पर फैन ने बेहद उत्साह के साथ जवाब दिया, बिल्कुल-बिल्कुल, मैं इसे संभाल कर रखूंगा और इसे शीशे के फ्रेम में जड़वाकर आपको फोटो भी भेजूंगा। प्रेम ने भी हंसते हुए प्रतिक्रिया दी और कहा- यह हुई न बात, पुश्तें भी देखेंगी कि ये साइन दिलप्रीत ढिल्लों ने किए थे। ऑटोग्राफ देने के साथ-साथ दिलप्रीत वीडियो में रील (Reel) बनाते हुए भी दिखाई दे रहे हैं। रोजाना उमड़ती है प्रशंसकों की भीड़ बताया जा रहा है कि यह वीडियो सुबह के वक्त का है। सिंगर के करीबियों का कहना है कि दिलप्रीत के घर पर रोजाना हजारों की संख्या में प्रशंसक उनसे मिलने पहुंचते हैं। लेकिन इस ‘मोटे’ और क्यूट फैन की इस अनोखी मांग ने सिंगर का दिल जीत लिया। सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को खूब शेयर कर रहे हैं और सिंगर के जमीन से जुड़े स्वभाव की तारीफ कर रहे हैं। पंजाबी गायक प्रेम ढिल्लों पूरा नाम: प्रेमजीत सिंह ढिल्लों पिता का नाम: कुलदीप सिंह ढिल्लों माता का नाम: भगवंत कौर जन्म तिथि:4 जनवरी, 1995 शिक्षा: उन्होंने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से BCA की पढ़ाई की है। कहां के रहने वाले हैं: प्रेम ढिल्लों का जन्म और पालन-पोषण अमृतसर, पंजाब में हुआ था। सिंगिंग करियर की शुरुआत प्रेम ढिल्लों ने आधिकारिक तौर पर साल 2018 में पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री में कदम रखा। पहला गाना: उनका पहला सिंगल ट्रैक Chan Milondi (मार्च 2018) था। पहचान कैसे मिली: उन्हें असली पहचान 2019 में आए गाने Bootcut से मिली, जिसे सिद्धू मूसेवाला ने अपने चैनल पर रिलीज किया था। इसके बाद Old Skool गाने ने उन्हें ग्लोबल लेवल पर मशहूर कर दिया।
राघव चड्ढा विवाद- इससे पहले 30 नेता AAP छोड़ चुके:सबसे ज्यादा 15 पंजाब के, इनमें सांसद-MLA भी; 3 का न इस्तीफा, न निकाला

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का अपनी ही आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच टकराव चल रहा है। AAP ने उन्हें राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाने के बाद पार्टी कोटे से बोलने का टाइम न देने तक के लिए कह दिया। अब उनके AAP छोड़कर दूसरी पार्टी में जाने के कयास भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि राघव चड्ढा अकेले ऐसे नेता नहीं हैं, जो अपनी ही पार्टी के निशाने पर हों। AAP की स्थापना से लेकर अब तक 30 बड़े नेता पार्टी से किनारा कर चुके हैं। जिसमें सबसे ज्यादा 15 नेता पंजाब से हैं। पंजाब से पार्टी को अलविदा करने वाले नेताओं में सुच्चा सिंह छोटेपुर, एडवोकेट एचएस फूलका और गुरप्रीत घुग्गी जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं। यही नहीं हाल ही में राज्य सभा के डिप्टी लीडर पद से हटाए गए राघव चड्ढा भी पंजाब कोटे से ही हैं। आप ने पंजाब के सिटिंग सांसदों धर्मवीर गांधी व हरजीत सिंह खालसा को भी पार्टी से निष्काषित कर दिया था। धर्मवीर गांधी कांग्रेस में शामिल होकर दोबारा सांसद चुने गए। यही नहीं आम आदमी पार्टी ने पंजाब में सिटिंग एमएलए को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया या विधायकों ने खुद पार्टी छोड़ दी। सुखपाल सिंह खैहरा पार्टी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे जब उन्हें पार्टी से निकाल दिया था। वहीं एडवोकेट एचएस फूलका ने भी LOP रहते हुए पार्टी छोड़ दी थी। कुछ दिन पहले वह BJP में शामिल हो गए। 26 नवंबर 2012 को पार्टी के गठन से लेकर 2026 तक नेताओं को आम आदमी पार्टी से क्यों निकाला गया या फिर नेताओं ने पार्टी से दूरी क्यों बनाई, इसके बारे में जानने के लिए पढ़ें पूरी रिपोर्ट… 1. शाजिया इल्मी पद: संस्थापक सदस्य, राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख नेता, 2014 लोकसभा उम्मीदवार। कारण: शाजिया इल्मी ने मई 2014 में आंतरिक लोकतंत्र की कमी, कुछ लोगों द्वारा पार्टी चलाने और मूल मूल्यों से भटकना का आरोप पार्टी नेताओं पर लगाया। उसके बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़ दी। 2. कैप्टन जी.आर. गोपीनाथ पद: संस्थापक सदस्य, प्रमुख राष्ट्रीय नेता। कारण: कैप्टन जीआर गोपीनाथ ने मई 2014 में आम आदमी पार्टी से किनारा कर दिया। उन्होंने पार्टी नेताओं पर आरोप लगाया कि पार्टी की रणनीति और कोर लीडरशिप द्वारा अनदेखी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया। 3. योगेंद्र यादव पद: संस्थापक सदस्य, पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी (PAC) सदस्य, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य। कारण: योगेंद्र यादव को आम आदमी पार्टी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण 21 अप्रैल 2015 को पार्टी से निष्काषित कर दिया। योगेंद्र यादव ने अनुशासन भंग, केजरीवाल की तानाशाही और टिकट वितरण में अनियमितताओं का आरोप लगाया। जिसकी वजह से उन्हें पार्टी से निकाला गया। 4.प्रशांत भूषण पद: संस्थापक सदस्य, PAC सदस्य, वरिष्ठ वकील। कारण: प्रशांत भूषण को भी योगेंद्र यादव के साथ ही पार्टी से बाहर निकाला गया। प्रशांत भूषण ने भी तानाशाही और टिकट वितरण में भ्रष्टाचार का आरोप पार्टी नेताओं पर लगाया था। अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें भी अप्रैल 2015 में बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। 5. आनंद कुमार पद: राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, संस्थापक सदस्य। कारण: पार्टी विरोधी गतिविधियां चलाने के आरोप में पार्टी ने योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण के साथ आनंद कुमार को भी बाहर का रास्ता दिखा। आनंद कुमार ने भी खुलकर AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की खिलाफत की थी। 6. अजीत झा पद: राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य। कारण: अप्रैल 2015 में इन्हें भी पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखाया। इन्होंने भी पार्टी में चल रही तानाशाही का विरोध किया था और कहा था कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक रही है। 7. मयंक गांधी पद: संस्थापक सदस्य, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, महाराष्ट्र यूनिट प्रमुख। कारण: मयंक गांधी को महाराष्ट्र यूनिट का प्रमुख नियुक्त किया गया था। 2015 में केजरीवाल ने महाराष्ट्र यूनिट भंग की। जिससे नाराज होकर मयंक गांधी ने पार्टी छोड़ दी। 8. अंजलि दामनिया पद: महाराष्ट्र यूनिट प्रमुख, राष्ट्रीय स्तर की नेता। कारण: अंजलि दामनिया के केजरीवाल से मतभेद हो गए थे। उन्होंने केजरीवाल पर हॉर्स ट्रेडिंग यानि कांग्रेस विधायकों को अपने साथ मिलाने के आरोप लगाए। जिसके बाद उनके केजरीवाल से मतभेद बढ़ गए और मार्च 2015 में में उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। 9. कपिल मिश्रा पद: दिल्ली की AAP सरकार में मंत्री , करावल नगर से MLA, राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित नेता। कारण: कपिल मिश्रा के सत्येंद्र जैन के साथ मदभेद हो गए थे जिसके बाद केजरीवाल ने उन्हें कैबिनेट से हटा दिया। उन्होंने केजरीवाल व सत्येंद्र जैन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए और पार्टी ने उन्हें निष्काषित कर दिया। 10. अलका लांबा पद: चांदनी चौक से MLA (2015 दिल्ली चुनाव), दिल्ली यूनिट की प्रमुख महिला नेता। कारण: अलका लांबा ने पार्टी की कार्यशैली पर असहमति, राजीव गांधी पर AAP के प्रस्ताव का विरोध और “खास आदमी पार्टी” बनने का आरोप लगाया। पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप लगे। उन्होंने सितंबर 2019 में पार्टी से इस्तीफा दे दिया और कांग्रेस जॉइन कर ली। 11. आशुतोष पद: प्रमुख प्रवक्ता, पत्रकार-से-राजनेता, केजरीवाल के करीबी। कारण: आशुतोष राज्यसभा जाना चाहते थे लेकिन पार्टी ने उन्हें राज्यसभा नहीं भेजा। जिसके बाद 2018 में उन्होंने पार्टी छोड़ दी। इसमें उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया। हालांकि बाद में उन्होंने पार्टी लीडरशिप से मतभेद होने की बात भी कही। 12. अशोक अग्रवाल पद: राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य। कारण: अशोक अग्रवाल पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। 2014 में उन्होंने पार्टी नेतृत्व की मनमानी पर सवाल उठाए और आम आदमी पार्टी को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का दर्जा दे दिया। जिसके बाद उन्होंने खुद पार्टी से इस्तीफा दे दिया। 13. इलियास आजमी पद: संस्थापक सदस्य, पूर्व सांसद। कारण: इलियास आजमी ने पार्टी में केजरीवाल की तानाशाही और आंतरिक लोकतंत्र की कमी पर सवाल खड़े किए। वो बार-बार कहते रहे कि पार्टी अपने सिद्धांतों से भटक रही हे। जिसके बाद उन्होंने 2016 में इस्तीफा दे दिया। 14. स्वाति मालीवाल पद: राज्यसभा सांसद (AAP कोटे से), दिल्ली महिला आयोग पूर्व अध्यक्ष, राष्ट्रीय स्तर की नेता। कारण: स्वाति मालीवाल ने अभी तक पार्टी नहीं छोड़ी है और न ही उसे पार्टी से निष्काषित किया गया है। लेकिन वो आम आदमी पार्टी के खिलाफ जमकर बोलती हैं। 2024
जीतेंद्र@84, कभी हीरोइन के स्टंट किए, फिर बने स्टार:रेखा को टाइमपास कहा, सरेआम फूट-फूटकर रोईं, महमूद ने हंसाने के लिए उतारी पेंट, जानिए किस्से

हिंदी सिनेमा के जंपिंग जैक कहे जाने वाले जीतेंद्र आज 84 साल के हो गए हैं। कभी मुंबई की चॉल में 10×12 की खोली में रहने वाले जीतेंद्र आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। मिडिल क्लास परिवार में जन्में जीतेंद्र आर्टिफिशियल जूलरी सप्लाई करने में पिता का हाथ बंटाते थे। एक रोज वो सेट पर जूलरी पहुंचाने गए, जहां उन्हें जूनियर आर्टिस्ट का काम मिला। तनख्वाह थी 100 रुपए महीना। उस दिन जीतेंद्र का फिल्मों से ऐसा रिश्ता जुड़ा कि उन्होंने पहले जूनियर आर्टिस्ट से बतौर लीड हीरो काम किया और फिर हिंदी सिनेमा के स्टार बने। ये रिश्ता 200 से ज्यादा फिल्मों और 5 लाइफटाइम अचीवमेंट्स अवॉर्ड्स के साथ आज भी कायम है। आज जीतेंद्र के 84वें जन्मदिन के खास मौके पर जानिए उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ मजेदार और अनसुने किस्से- खोली में पंखा लगा, तो पूरा चॉल देखने पहुंचा जीतेंद्र का जन्म 7 अप्रैल 1942 में अमृतसर के एक पंजाबी परिवार में हुआ। जन्म के समय उनका नाम रवि कपूर रखा गया, जो बाद में फिल्मों में आकर जीतेंद्र हुआ। जीतेंद्र कुछ महीनों के ही थे, जब परिवार मुंबई आकर बस गया और गिरगांव की श्याम सदन चॉल में रहने लगा। 8 लोगों का पूरा परिवार 10 बाय 12 की खोली में रहता था, जिसका भाड़ा था 6 रुपए। उनके पिता अमरनाथ फिल्मों के सेट में आर्टिफिशियल जूलरी सप्लाई करने का काम करते थे। समय के साथ जब घर की आर्थिक स्थिति सुधरने लगी तो उनके घर में ट्यूबलाइट और पंखा लगा। चॉल में गरीबी का वो आलम था कि पूरे चॉल के लोग उनके घर वो पंखा और ट्यूबलाइट देखने पहुंचे थे। जिंदगी के 20 साल जीतेंद्र ने उसी चॉल में गुजारे। पंजाबी परिवार से होने के बावजूद आसपास के माहौल में घुल-मिलकर उन्होंने फर्राटेदार मराठी बोलना सीख लिया। सेट पर जूलरी सप्लाई करते हुए बने जूनियर आर्टिस्ट जीतेंद्र न पढ़ाई में अच्छे थे न उनके पास कोई खास टैलेंट या रुचि थी। शुरुआती पढ़ाई जैसे-तैसे पूरी की, तो पिता ने अपने आर्टिफिशियल जूलरी के बिजनेस में लगा दिया। काम था फिल्मों के सेट पर जूलरी पहुंचाना। साल 1959 में जीतेंद्र को वी.शांताराम की फिल्म नवरंग के सेट पर जूलरी पहुंचाने का काम मिला। वो रोज बस में धक्के खाते हुए सेट पर पहुंचते थे। उम्र करीब 17 साल थी। एक रोज चकाचौंध देखकर जीतेंद्र को भी फिल्म देखने का मन किया। उन्होंने वहां खड़े लोगों से पूछा तो उन्हें साफ इनकार कर दिया गया। सबने कहा कि वी.शांताराम किसी को शूटिंग देखने की इजाजत नहीं देते। जीतेंद्र मुंह लटकाए घर पहुंचे और चाचा से शिकायत की। अगले दिन चाचा उन्हें लेकर फिर सेट पर पहुंचे और असिस्टेंट से कहा कि मेरे भतीजे को शूटिंग देखनी है। उन्होंने जवाब दिया, ‘शूटिंग देखना है, तो काम भी करना पड़ेगा।’ उन्होंने जीतेंद्र को देखा और कहा- ‘हम तुम्हें प्रिंस का रोल देंगे।’ जीतेंद्र की खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा। रोज बस से जाने वाले जीतेंद्र अगले दिन टैक्सी में सेट पर पहुंचे। वहां पहुंचते ही उन्हें प्रिंस के कपड़े पहनाए गए, लेकिन जैसे ही वो सेट पर पहुंचे उन्हें जोरदार धक्का लगा। सेट पर वो अकेले प्रिंस नहीं थे, बल्कि वहां 200 प्रिंस बने लड़के बैठे थे। उन्हें फिल्म नवरंग के गाने तू छुपी है कहां में हीरोइन के पीछे खड़े होने वाले जूनियर आर्टिस्ट का काम मिला था। वी.शांताराम से मांगा काम, बना दिया गया हीरोइन का बॉडी डबल नवरंग की शूटिंग के दौरान जीतेंद्र ने खुद भी फिल्मों में काम करने का मन बना लिया। जब उन्हें 1963 में फिल्म सेहरा के सेट पर जूलरी पहुंचाने का काम मिला, तो एक दिन उन्होंने मौका पाते ही डायरेक्टर वी.शांताराम से मराठी में कहा- मुझे फिल्मों में काम करना है। वी.शांताराम ने उनकी बात से ज्यादा इस बात पर गौर किया कि एक पंजाबी कपूर साहब का लड़का इतनी अच्छी मराठी कैसे बोल रहा है। इस तरह बात चल निकली। उन्होंने जाते हुए कहा, मैं गारंटी नहीं देता, लेकिन तुम ट्राय करते रहो। इस एक बात की बदौलत जीतेंद्र को फिल्म सेहरा में ही एक्स्ट्रा का काम मिल गया। उन्हें बस सेट पर मौजूद रहना होता था, जिससे अगर कोई जूनियर आर्टिस्ट न आए, तो वो उनकी जगह खड़े हो सकें। इस काम के लिए जीतेंद्र को महीने के 100 रुपए तनख्वाह मिली। एक दिन फिल्म के एक सीन के लिए एक्ट्रेस संध्या को आग के ऊपर से कूदता दिखाना था। एक्ट्रेस संध्या, डायरेक्टर वी.शांताराम की पत्नी थी। उस दौर में आम तौर पर खतरनाक सीन करने के लिए एक्टर-एक्ट्रेसेस के बॉडी डबल रखे जाते थे, जो उन्हीं की तरह तैयार होकर खतरनाक स्टंट करते थे। उस दिन भी सेट पर एक बॉडी डबल बुलाई गई थी, लेकिन आग देखकर उसने सीन करने से इनकार कर दिया। इसके लिए एक्ट्रेस की बॉडी डबल बनने के लिए एक लड़की बुलाई गई थी। आग की लपटें देख वो लड़की डर गई और वहां से चली गई। सेट पर मौजूद जब कोई लड़की वो सीन करने के लिए राजी नहीं हुई तो वी.शांताराम ने जीतेंद्र को ही ये काम दे दिया। जीतेंद्र को एक्ट्रेस संध्या की तरह तैयार किया गया, जिसके बाद उन्होंने हीरोइन बनकर सीन किया। पहला डायलॉग ही नहीं बोल पाए जीतेंद्र, चिढ़ गए फिल्म के डायरेक्टर इस एक रोल से जीतेंद्र ने वी.शांताराम के दिल में घर लिया। उन्हें इस फिल्म में एक डायलॉग भी दिया गया। उन्होंने कहना था, सरदार, दुश्मनों का दल टिड्डियों की तरह आगे बढ़ रहा है। 25 रीटेक के बावजूद जीतेंद्र डायलॉग ठीक तरह नहीं बोल पाए। खिजियाकर वी.शांताराम ने वो गलत डायलॉग ही फिल्म में फाइनल कर लिया। वो वी.शांताराम ही थे, जिन्होंने जीतेंद्र का हुनर परखा और उन्हें फिल्म गीत गाया पत्थरों ने में लीड रोल दिया। पहली फिल्म देखने पेरेंट्स के साथ पहुंचे, खाली पड़ा था थिएटर जीतेंद्र की बतौर हीरो पहली फिल्म गीत गाया पत्थरों ने साल 1964 में रिलीज हुई। चॉल में रहने वाले जीतेंद्र के लिए ये खास दिन था। उन्होंने चॉल के पास स्थित एक थिएटर में पिता अमरनाथ और मां कृष्णा को फिल्म दिखाने के लिए तीन टिकटें खरीदीं। थिएटर पहुंचते ही उन्होंने टिकट देखने के लिए गेट पर खड़े शख्स से
जीतेंद्र@84, कभी हीरोइन के स्टंट किए, फिर बने स्टार:रेखा को टाइमपास कहा, सरेआम फूट-फूटकर रोईं, महमूद ने हंसाने के लिए उतारी पेंट, जानिए किस्से

हिंदी सिनेमा के जंपिंग जैक कहे जाने वाले जीतेंद्र आज 84 साल के हो गए हैं। कभी मुंबई की चॉल में 10×12 की खोली में रहने वाले जीतेंद्र आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। मिडिल क्लास परिवार में जन्में जीतेंद्र आर्टिफिशियल जूलरी सप्लाई करने में पिता का हाथ बंटाते थे। एक रोज वो सेट पर जूलरी पहुंचाने गए, जहां उन्हें जूनियर आर्टिस्ट का काम मिला। तनख्वाह थी 100 रुपए महीना। उस दिन जीतेंद्र का फिल्मों से ऐसा रिश्ता जुड़ा कि उन्होंने पहले जूनियर आर्टिस्ट से बतौर लीड हीरो काम किया और फिर हिंदी सिनेमा के स्टार बने। ये रिश्ता 200 से ज्यादा फिल्मों और 5 लाइफटाइम अचीवमेंट्स अवॉर्ड्स के साथ आज भी कायम है। आज जीतेंद्र के 84वें जन्मदिन के खास मौके पर जानिए उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ मजेदार और अनसुने किस्से- खोली में पंखा लगा, तो पूरा चॉल देखने पहुंचा जीतेंद्र का जन्म 7 अप्रैल 1942 में अमृतसर के एक पंजाबी परिवार में हुआ। जन्म के समय उनका नाम रवि कपूर रखा गया, जो बाद में फिल्मों में आकर जीतेंद्र हुआ। जीतेंद्र कुछ महीनों के ही थे, जब परिवार मुंबई आकर बस गया और गिरगांव की श्याम सदन चॉल में रहने लगा। 8 लोगों का पूरा परिवार 10 बाय 12 की खोली में रहता था, जिसका भाड़ा था 6 रुपए। उनके पिता अमरनाथ फिल्मों के सेट में आर्टिफिशियल जूलरी सप्लाई करने का काम करते थे। समय के साथ जब घर की आर्थिक स्थिति सुधरने लगी तो उनके घर में ट्यूबलाइट और पंखा लगा। चॉल में गरीबी का वो आलम था कि पूरे चॉल के लोग उनके घर वो पंखा और ट्यूबलाइट देखने पहुंचे थे। जिंदगी के 20 साल जीतेंद्र ने उसी चॉल में गुजारे। पंजाबी परिवार से होने के बावजूद आसपास के माहौल में घुल-मिलकर उन्होंने फर्राटेदार मराठी बोलना सीख लिया। सेट पर जूलरी सप्लाई करते हुए बने जूनियर आर्टिस्ट जीतेंद्र न पढ़ाई में अच्छे थे न उनके पास कोई खास टैलेंट या रुचि थी। शुरुआती पढ़ाई जैसे-तैसे पूरी की, तो पिता ने अपने आर्टिफिशियल जूलरी के बिजनेस में लगा दिया। काम था फिल्मों के सेट पर जूलरी पहुंचाना। साल 1959 में जीतेंद्र को वी.शांताराम की फिल्म नवरंग के सेट पर जूलरी पहुंचाने का काम मिला। वो रोज बस में धक्के खाते हुए सेट पर पहुंचते थे। उम्र करीब 17 साल थी। एक रोज चकाचौंध देखकर जीतेंद्र को भी फिल्म देखने का मन किया। उन्होंने वहां खड़े लोगों से पूछा तो उन्हें साफ इनकार कर दिया गया। सबने कहा कि वी.शांताराम किसी को शूटिंग देखने की इजाजत नहीं देते। जीतेंद्र मुंह लटकाए घर पहुंचे और चाचा से शिकायत की। अगले दिन चाचा उन्हें लेकर फिर सेट पर पहुंचे और असिस्टेंट से कहा कि मेरे भतीजे को शूटिंग देखनी है। उन्होंने जवाब दिया, ‘शूटिंग देखना है, तो काम भी करना पड़ेगा।’ उन्होंने जीतेंद्र को देखा और कहा- ‘हम तुम्हें प्रिंस का रोल देंगे।’ जीतेंद्र की खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा। रोज बस से जाने वाले जीतेंद्र अगले दिन टैक्सी में सेट पर पहुंचे। वहां पहुंचते ही उन्हें प्रिंस के कपड़े पहनाए गए, लेकिन जैसे ही वो सेट पर पहुंचे उन्हें जोरदार धक्का लगा। सेट पर वो अकेले प्रिंस नहीं थे, बल्कि वहां 200 प्रिंस बने लड़के बैठे थे। उन्हें फिल्म नवरंग के गाने तू छुपी है कहां में हीरोइन के पीछे खड़े होने वाले जूनियर आर्टिस्ट का काम मिला था। वी.शांताराम से मांगा काम, बना दिया गया हीरोइन का बॉडी डबल नवरंग की शूटिंग के दौरान जीतेंद्र ने खुद भी फिल्मों में काम करने का मन बना लिया। जब उन्हें 1963 में फिल्म सेहरा के सेट पर जूलरी पहुंचाने का काम मिला, तो एक दिन उन्होंने मौका पाते ही डायरेक्टर वी.शांताराम से मराठी में कहा- मुझे फिल्मों में काम करना है। वी.शांताराम ने उनकी बात से ज्यादा इस बात पर गौर किया कि एक पंजाबी कपूर साहब का लड़का इतनी अच्छी मराठी कैसे बोल रहा है। इस तरह बात चल निकली। उन्होंने जाते हुए कहा, मैं गारंटी नहीं देता, लेकिन तुम ट्राय करते रहो। इस एक बात की बदौलत जीतेंद्र को फिल्म सेहरा में ही एक्स्ट्रा का काम मिल गया। उन्हें बस सेट पर मौजूद रहना होता था, जिससे अगर कोई जूनियर आर्टिस्ट न आए, तो वो उनकी जगह खड़े हो सकें। इस काम के लिए जीतेंद्र को महीने के 100 रुपए तनख्वाह मिली। एक दिन फिल्म के एक सीन के लिए एक्ट्रेस संध्या को आग के ऊपर से कूदता दिखाना था। एक्ट्रेस संध्या, डायरेक्टर वी.शांताराम की पत्नी थी। उस दौर में आम तौर पर खतरनाक सीन करने के लिए एक्टर-एक्ट्रेसेस के बॉडी डबल रखे जाते थे, जो उन्हीं की तरह तैयार होकर खतरनाक स्टंट करते थे। उस दिन भी सेट पर एक बॉडी डबल बुलाई गई थी, लेकिन आग देखकर उसने सीन करने से इनकार कर दिया। इसके लिए एक्ट्रेस की बॉडी डबल बनने के लिए एक लड़की बुलाई गई थी। आग की लपटें देख वो लड़की डर गई और वहां से चली गई। सेट पर मौजूद जब कोई लड़की वो सीन करने के लिए राजी नहीं हुई तो वी.शांताराम ने जीतेंद्र को ही ये काम दे दिया। जीतेंद्र को एक्ट्रेस संध्या की तरह तैयार किया गया, जिसके बाद उन्होंने हीरोइन बनकर सीन किया। पहला डायलॉग ही नहीं बोल पाए जीतेंद्र, चिढ़ गए फिल्म के डायरेक्टर इस एक रोल से जीतेंद्र ने वी.शांताराम के दिल में घर लिया। उन्हें इस फिल्म में एक डायलॉग भी दिया गया। उन्होंने कहना था, सरदार, दुश्मनों का दल टिड्डियों की तरह आगे बढ़ रहा है। 25 रीटेक के बावजूद जीतेंद्र डायलॉग ठीक तरह नहीं बोल पाए। खिजियाकर वी.शांताराम ने वो गलत डायलॉग ही फिल्म में फाइनल कर लिया। वो वी.शांताराम ही थे, जिन्होंने जीतेंद्र का हुनर परखा और उन्हें फिल्म गीत गाया पत्थरों ने में लीड रोल दिया। पहली फिल्म देखने पेरेंट्स के साथ पहुंचे, खाली पड़ा था थिएटर जीतेंद्र की बतौर हीरो पहली फिल्म गीत गाया पत्थरों ने साल 1964 में रिलीज हुई। चॉल में रहने वाले जीतेंद्र के लिए ये खास दिन था। उन्होंने चॉल के पास स्थित एक थिएटर में पिता अमरनाथ और मां कृष्णा को फिल्म दिखाने के लिए तीन टिकटें खरीदीं। थिएटर पहुंचते ही उन्होंने टिकट देखने के लिए गेट पर खड़े शख्स से
असम पुलिस की कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर छापेमारी:खेड़ा ने आरोप लगाया था- CM हिमंता की पत्नी के पास 3 पासपोर्ट

असम पुलिस की टीम कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के दिल्ली आवास पर पहुंची है। सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी की FIR के बाद यह कार्रवाई की गई है। पवन घर पर नहीं है। असम पुलिस उनसे पूछताछ के लिए इंतजार कर रही है। दिल्ली पुलिस भी साथ में मौजूद है। दरअसल दो दिन पहले पवन ने असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा पर मिस्र, एंटीगा-बरबूडा और UAE के पासपोर्ट हैं। हिमंता और उनकी पत्नी ने आरोपों को गलत बताया था। दिल्ली में छापेमारी पर सीएम सरमा ने आज कहा कि वह कल गुवाहाटी से भाग गए। मुझे मीडिया के जरिए पता चला है कि पुलिस दिल्ली में उनके घर गई थी, लेकिन वह हैदराबाद भाग गए हैं। कानून अपना काम करेगा। हिमंता की पत्नी ने सोमवार को FIR भी कराई थी। असम में 9 अप्रैल को वोटिंग होगी। आज शाम 5 बजे प्रचार थम जाएगा। 5 राज्यों में हो रही चुनावी हलचल से जुड़े अपडेट्स के लिए ब्लॉग से गुजर जाइए…
भोपाल में आसिफ रजा ने आशीष पांडे बनकर किया रेप:गर्भवती पीड़िता ने थाने पहुंचकर दर्ज कराई FIR, पुलिस ने शुरू की जांच

भोपाल के अशोका गार्डन क्षेत्र में एक छात्रा के साथ पहचान छिपाकर यौन शोषण का मामला सामने आया है। पीड़िता प्राइवेट यूनिवर्सिटी की छात्रा बताई जा रही है। उसने आरोप लगाया कि आसिफ रज़ा नामक युवक ने खुद को आशीष पांडे बताकर उससे दोस्ती की और बाद में प्रेम संबंध बनाकर करीब डेढ़ साल तक शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता के अनुसार, इस दौरान युवक के दो अन्य दोस्त भी उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करते रहे। जब वह गर्भवती हुई तो आरोपियों ने उस पर गर्भपात का दबाव बनाया। मना करने पर युवक ने अपनी असली पहचान उजागर की और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने लगा। पीड़िता का कहना है कि उसे लगातार धमकाया गया। मामले की शिकायत पीड़िता ने लगभग एक माह पहले महिला थाने में दर्ज कराई थी। सोमवार को पीड़िता सामने आई। लेकिन अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कहा है कि शिकायत के आधार पर आरोपियों की तलाश जारी है। मुख्य आरोपी आसिफ रज़ा बिहार का निवासी बताया जा रहा है। वह फिलहाल फरार है।
दावा- एअर इंडिया CEO कैंपबेल विल्सन ने इस्तीफा दिया:सितंबर 2027 तक कार्यकाल था; अहमदाबाद प्लेन क्रैश की जांच रिपोर्ट आने के बाद नए CEO की नियुक्ति

एअर इंडिया के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) कैंपबेल विल्सन ने इस्तीफा दे दिया है। न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से इसकी जानकारी दी है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में भी कहा गया है कि एयरलाइन नए CEO की तलाश कर रही है। सूत्रों के अनुसार, अहमदाबाद प्लेन क्रैश की फाइनल जांच रिपोर्ट आने के बाद नए CEO की नियुक्ति की जाएगी। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने 12 जुलाई 2025 को प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की थी। अंतिम रिपोर्ट जून 2026 में आ सकती है। इसके बाद सितंबर में विल्सन अपना पद छोड़ सकते हैं। पिछले हफ्ते हुई कंपनी की बोर्ड बैठक में उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। कैंपबेल विल्सन का पांच साल का कार्यकाल अगले साल सितंबर तक था, लेकिन उससे पहले ही उनका इस्तीफा सामने आया है। यह खबर लगातार अपडेट की जा रही है…
ग्वालियर में तेज रफ्तार कार ने बाइक सवारों को रौंदा:2 दिन चले उपचार के बाद एक की मौत; हादसे के वक्त सैलरी लेकर लौट रहा था घर

ग्वालियर में दोस्तों के साथ सैलरी लेकर घर लौट रहे बाइक सवारों को तेज रफ्तार कार ने रौंद दिया। घटना मुरार थाना क्षेत्र के त्यागी नगर पुलिया के पास शुक्रवार रात 9 बजे की है। घटना का पता चलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच के बाद घायलों को उपचार के लिए पहुंचाया। जहां पर एक युवक ने सोमवार को उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। जबकि दो की हालत स्थिर बनी हुई है। पुलिस ने आरोपी चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। प्राइवेट जॉब करता था अंशु काल्पीब्रिज कॉलोनी निवासी 22 वर्षीय अंशु राजे पिता महावीर राजौरिया प्राइवेट जॉब करता था। शुक्रवार शाम वह अपने दोस्तों पवन व सूरज के साथ जॉब से सैलरी लेने के बाद वापस आ रहा था, अभी वह त्यागी नगर पुलिया के पास पहुंचा ही था कि सामने से आ रही बलेनो कार (एमपी 04 सीयू 9284) के चालक ने उनकी बाइक में टक्कर मार दी। कार की टक्कर इतनी तेज थी कि बाइक पर सवार अंशु, पवन व सूरज हवा में उछले और सड़क पर गिरे। जिससे अंशु को गंभीर चोट लगी और सूूरज व पवन को कुछ कम चोट आई। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को उपचार के लिए पहुंचा दिया। दो दिन लड़ी जिंदगी की जंग अंशु को बचाने के लिए 2 दिन डॉक्टरों की टीम लगी रही और दो दिन जिंदगी से जंग लड़ने के बाद सोमवार सुबह अंशु ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। उसकी मौत का पता चलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और उसके शव को पीएम हाउस पहुंचा कर आरोपी चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। अभी पवन और सूरज का उपचार चल रहा है।
भोपाल में रिटायर्ड कर्नल के बंगले में घुसा नकाबपोश:पढ़ाई कर रहे बेटे ने पकड़ा, मारपीट कर भागा आरोपी; पुलिस जांच में जुटी

भोपाल के हबीबगंज थाना क्षेत्र के ई-4 अरेरा कॉलोनी में सोमवार तड़के पांच बजे एक नकाबपोश रिटायर्ड कर्नल के बंगले में दाखिल हो गया। वह चोरी का प्रयास कर रहा था। तभी अपने रूम में पढ़ाई कर रहे कर्नल के बेटे की नजर आरोपी पर पड़ी। बेटे ने आरोपी को पकड़ लिया, हालांकि आरोपी ने मारपीट की और मौके से भाग निकला। हमले में कर्नल के बेटे के सिर पर चोट आई है। पुलिस ने अज्ञात बदमाश के खिलाफ चोरी की नियत से बंगले में घुसने और मारपीट की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक, ई-4 अरेरा कॉलोनी निवासी कान्हा समर्थ बोधिसत्व पुत्र मुकेश कुमार (29) प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनके पिता मुकेश कुमार सेना से रिटायर्ड कर्नल हैं। भारी चीज से सिर में वार किया मुकेश ने पुलिस को बताया कि सोमवार सुबह वह अपने कमरे में पढ़ाई कर रहा था। सुबह करीब चार बजे आहट हुई। बाहर देखा तो बंगले में एक नकाबपोश दबे पैर चलता हुआ नजर आया। लिहाजा कान्हा समर्थ ने नकाबपोश को पकड़ लिया और शोर मचाने लगा। पकड़ ढीली होते ही भाग निकला बदमाश इसी बीच छूटने के प्रयास में आरोपी ने कान्हा समर्थ के साथ मारपीट की और उसके सिर पर पास ही पड़ा सामान उठाकर मार दिया। मुंह पर चोट लगने के कारण कान्हा की पकड़ ढीली हो गई। लिहाजा आरोपी छूटकर भाग निकला। पुलिस हुलिया के आधार पर आरोपी की तलाश कर रही है।









