महाकुंभ वाले IITian बाबा ने शादी की:इंजीनियर पत्नी कर्नाटक की, दोनों हिमाचल में रह रहे; झज्जर में परिवार से मिलने पहुंचे

प्रयागराज महाकुंभ मेले में फेमस हुए IITian बाबा अभय सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। लंबे समय बाद सोमवार को वह झज्जर में स्पॉट हुए। वो भी अकेले नहीं पत्नी के साथ। उन्होंने खुलासा किया कि दोनों ने 15 फरवरी को शिवरात्रि के मौके पर हिमाचल के अघंजर मंदिर में शादी कर ली। उसके बाद 19 फरवरी को कोर्ट मैरिज भी की। भगवा कपड़े पहने अभय सिंह एडवोकेट पिता के चैंबर में आए। यहां दैनिक भास्कर एप की टीम से बातचीत में उन्होंने कहा- “हम दोनों अपनी जिंदगी से खुश हैं। फिलहाल सादगी से रह रहे हैं। अध्यात्म की तरफ रुझान होने से पहले कभी मैं भी इस चैंबर में बैठकर पिता की एप्लीकेशन चेक कर लेता था। पत्नी मूलरूप से कर्नाटक की हैं। वह भी इंजीनियर हैं। हम हिमाचल के धर्मशाला में रह रहे हैं।” अभय सिंह मूलरूप से झज्जर के सासरौली गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता कर्ण सिंह वकील हैं और झज्जर बार एसोसिएशन के प्रधान भी रह चुके हैं। बॉम्बे IIT से एयरो स्पेस इंजीनियरिंग करने वाले अभय सिंह प्रयागराज महाकुंभ में संन्यासी वेश में नजर आने के बाद देश-विदेश में चर्चा में आए। जानिए IITian बाबा और उनकी पत्नी ने शादी को लेकर क्या बताया…. चैंबर में केस स्टडी करने आता था अभय सिंह ने कहा- आज पिताजी के चैंबर में आकर अच्छा लगा। मैं पहले भी यहां आकर एप्लीकेशन चेक करता था। मुझे अध्यात्मिकता का सच समझ में आ गया था, लेकिन ये नहीं था कि आगे क्या करना है। जब घर पर अकेला होता था तो सोचता था कि चैंबर में जाकर कुछ कर लेता हूं। यहां आकर मैं स्टडी करता रहता था कि कौन सा केस कैसे लगता है। 15 फरवरी को मंदिर, 19 को कोर्ट मैरिज की शादी को लेकर अभय सिंह ने कहा कि ऐसे छिपाने वाली कोई बात नहीं थी। 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर हिमाचल के अघंजर महादेव मंदिर में जाकर शादी की। इसके बाद 19 फरवरी को कोर्ट मैरिज की। पत्नी ही आज मुझे यहां लेकर आई हैं। बैंक में KYC भी करानी थी। पत्नी बोलीं- सनातन यूनिवर्सिटी बनाएंगे अभय की पत्नी प्रतीका ने कहा- अभय काफी सरल नेचर के हैं। वो बेहद ईमानदार और सच्चे इंसान हैं। मैं कर्नाटक से हूं और इनसे एक साल पहले मिलीं थी। मैंने इंजीनियरिंग कर रखी है। अब हम सनातन को आगे बढ़ाने में काम करेंगे। हम विचार कर रहे हैं कि आगे चलकर सनातन यूनिवर्सिटी बनाए। यहां अध्यात्म से जुड़े गुरु, साधक एक जगह पर यूनाइट करने की कोशिश है। हम झज्जर में सास-ससुर और परिवार वालों से मिलने आए हैं। अब अभय सिंह के इंजीनियर से संन्यासी बनने की कहानी जानिए… कोचिंग के लिए कोटा की जगह दिल्ली गए अभय सिंह का जन्म झज्जर के सासरौली गांव में हुआ। वह ग्रेवाल गोत्र के जाट परिवार में जन्मे। अभय ने शुरुआती पढ़ाई झज्जर जिले से की। पढ़ाई में वह बहुत होनहार थे। इसके बाद परिवार उन्हें IIT की कोचिंग के लिए कोटा भेजना चाहता था। मगर, अभय ने दिल्ली में कोचिंग लेने की बात कही। IIT बॉम्बे में पढ़ाई, कनाडा में काम किया कोचिंग के बाद अभय ने IIT का एग्जाम क्रैक कर लिया। जिसके बाद उन्हें IIT बॉम्बे में एडमिशन मिल गया। अभय ने वहां से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री ली। इसके बाद डिजाइनिंग में मास्टर डिग्री की। अभय की छोटी बहन कनाडा में रहती है। पढ़ाई पूरी करने के बाद परिवार ने उन्हें अच्छे फ्यूचर के लिए कनाडा भेज दिया। कनाडा में अभय ने कुछ समय एरोप्लेन बनाने वाली कंपनी में काम भी किया। जहां उन्हें 3 लाख सेलरी मिलती थी। लॉकडाउन की वजह से कनाडा में फंसे 2021 में कनाडा में लॉकडाउन लग गया। जिस वजह से अभय भी कनाडा में ही फंस गए। जब लॉकडाउन हटा तो अभय भारत लौट आए। यहां आने के बाद वह अचानक फोटोग्राफी करने लगे। अभय सिंह को घूमने का भी शौक रहा, इसलिए वह केरल गए। उज्जैन कुंभ में भी गए थे। 2024 में अभय सबके संपर्क से बाहर हो गए। परिवार ने बहुत कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो पाई। परिवार का नंबर तक ब्लॉक कर दिया। इसके बाद 2025 में वह महाकुंभ से चर्चा में आए।
तमिल इलेक्शन में नंबर गेम या 69 प्रतिशत नट? किसी दल ने भी क्यों नहीं निकाला ब्राह्मण प्रत्याशी, जानें वजह

तमिल की सूची में इस बार बड़ा उल्टेफेर देखने को मिल रहा है। आगामी चुनाव के मद्देनजर ना सिर्फ डीएमके और कांग्रेस बल्कि एआईएडीएमके और बीजेपी तक ने किसी भी ब्राह्मण को अपना हित नहीं बनाया है। करीब साढ़े तीन दशक में पहली बार ऐसा हुआ जब अन्नाद्रमुक ने किसी ब्राह्मण को टिकट नहीं दिया। द्रविड़ आंदोलन का कितना प्रभावद्रविड़ आंदोलन के दक्षिण के इस राज्य में ब्राह्मण राजनीति ना सिर्फ हाशिए पर चली गई है बल्कि इस बार चुनावों में प्रमुख आश्रमों ने ब्राह्मणों को टिकटें बांटने से भी मना कर दिया है और ब्राह्मणों का समर्थन हासिल करने वाली बीजेपी ने भी पार्टी बना ली है। बीजेपी ने अपने कोटे की 27 विधानसभा सीटों में से किसी भी सीट पर ब्राह्मणों की प्रतिष्ठा घोषित नहीं की है। ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं कि ये सब तमिलनाडु में ये घटिया प्रतिभाएं का नतीजा है या फिर मजबूरी है। बता दें कि तमिल के 234 विधानमंडलों में भारतीय गठबंधन में डीएमके 164 और कांग्रेस 28 के प्राइमरी चुनावों में लड़ाई जारी है, लेकिन दोनों में से किसी ने भी ब्राह्मण को टिकट नहीं दिया। इसके अलावा उनके सहयोगी लेफ्ट, वीसीके और मुस्लिम लीग ने भी किसी ब्राह्मण पर भरोसा नहीं किया। विपक्षी गठबंधन में अन्नाद्रमुक 178 रिपब्लिकन उम्मीदवार 27 और अन्य 18 रिपब्लिकन उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं, लेकिन एक भी सीट पर ब्राह्मण उम्मीदवार को नहीं उतारा गया है। बिजनेसमैन की पार्टी ने भी बनाई दूरीदिलचस्प बात यह है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज से जुड़े हुए हैं, लेकिन उनके निधन के करीब 10 साल बाद भी उनकी पार्टी ने किसी भी ब्राह्मण को मैदान में नहीं उतारा। एआईएडीएमके ने 2021 में ब्राह्मण समाज से आने वाले पूर्व पुलिस गोदाम और नटराज को उम्मीदवार बनाया था, इस बार भी टिकट नहीं दिया गया। ब्राह्मणों ने टिकटें निकालींअभिनेता से नेता बने थलपति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्रि कजगम (टीवीके) ने 2 ब्राह्मण दावेदारों को मैदान में उतारा। इसके अलावा तमिल राष्ट्रवादी नेता सीमान की पार्टी के नाम तमिलर दास ने 6 ब्राह्मणों के टिकट दिए हैं। इन दोनों ने ही मायलापुर और श्रीरंगम जैसे इलाक़ों को चुना है, जहाँ ब्राह्मण चर्च की संख्या सबसे ज़्यादा है। एनईटीके द्वारा 6 ब्राह्मणों को मैदान में पीछे के सिद्धांतों का कहना है कि सरटेन ने तमिलनाडु में पेरियार-विरोधी रुख अपनाया है। आरएसएस से जुड़े एक कार्यक्रम में भाग लेते हुए उन्होंने कहा कि वो द्रविड़ दीवार को गिराने का काम करेंगे। वे अपने राजनीतिक अनुसंधान में भी जाति और पहचान का फ्रैंक का उपयोग करते हैं। क्या कहते हैं राजनीतिक पंडितटाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, राजनीतिक अरुण जेटली का कहना है कि अन्नाद्रमुक ने कई दशकों तक ब्राह्मण समाज का समर्थन किया, लेकिन हाल ही में इसमें बदलाव आया है। व्यापारियों के निधन के बाद ब्राह्मण ईसाइयों का गुट भाजपा के पक्ष में हुआ। इसके चलते एआईएडीएमके ने ही ब्राह्मणों से दूरी बना ली है, लेकिन बीजेपी के संयोजक बनने की वजह से लोग जरूर चिंतित हैं। ब्राह्मणों की सूचीतमिल की कुल सूची में ब्राह्मणों की दुकान मात्र 3 प्रतिशत है। वेबसाइटों की संख्या अधिक है। मुथुरैयर, थेवर, वन्नियार और गौंडर। कम संख्या में ब्राह्मणों को वोट बैंक के रूप में देखा नहीं गया। इसके अलावा राज्य में 69 प्रतिशत शून्य लागू है। विचारधारा ने अपनी राजनीति को ओबीसी और विचारधारा के उद्घोषणा के साथ जोड़ा- गिरफ़्तार है। द्रविड़ राजनीति में ब्राह्मणों को आर्य या बाहरी माना जाता है, जबकि गैर-ब्राह्मणों को मूल द्रविड़ माना जाता है। यही कारण है कि किसी भी ब्राह्मण नेता के लिए खुद को तमिल हितों की रक्षा साबित करना आपके लिए एक बड़ी चुनौती है। ये भी पढ़ें पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: ‘बंगाल के लोगों को भूख लगती है मोदी सरकार’, केंद्र पर अभिषेक बनर्जी ने कहा- झूठ बोला तो दो मुझे जेल भेज दिया (टैग्सटूट्रांसलेट)बीजेपी(टी)तमिलनाडु चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)टीएन चुनाव 2026(टी)डीएमके(टी)कांग्रेस(टी)ब्राह्मण उम्मीदवार(टी)कांग्रेस(टी)बीजेपी(टी) डीएमके(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)ब्राह्मण(टी)प्रत्याशी(टी)द्रविड़
छिंदवाड़ा में मर्सी हॉस्पिटल में लगा ताला:मरीज शिफ्ट, सुधार के बाद ही खुलेगा अस्पताल, CMHO ने जारी किया है पत्र

छिंदवाड़ा: शहर में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए खजरी रोड स्थित मर्सी हॉस्पिटल (अम्मा अस्पताल) का संचालन तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है। यह सख्त कदम मरीज स्वर्गीय श्रीमती साक्षी शर्मा के उपचार में लापरवाही की शिकायत की विस्तृत जांच के बाद उठाया गया है। आज सोमवार को अस्पताल को पूरी तरह बंद कर दिया गया और वहां भर्ती सभी मरीजों को अन्य अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया। शिकायत के बाद बनी जांच टीम मामले में विशाल शर्मा द्वारा सीएम हेल्पलाइन पोर्टल और ई-मेल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग ने दो सदस्यीय जांच दल गठित किया। इस दल में जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अधिकारी डॉ. धीरज दवंडे और जिला चिकित्सालय की स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. श्वेता पाठक को शामिल किया गया। जांच में सामने आई गंभीर स्थिति जांच के दौरान सामने आया कि 25 वर्षीय साक्षी शर्मा गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से पीड़ित थीं और 8 दिसंबर 2025 से उनका उपचार चल रहा था। अल्ट्रासाउंड में पॉलीहाइड्रामिनियोस की स्थिति पाई गई थी, जिससे गर्भावस्था पहले से ही हाई रिस्क मानी जा रही थी। 15 दिसंबर को मरीज का ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ गया, भ्रूण की हलचल कम हो गई और लीकिंग की समस्या सामने आई, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। इसके बाद 17 दिसंबर की रात को मरीज की हालत बिगड़ने पर इमरजेंसी सीजेरियन ऑपरेशन किया गया, जिसमें बच्चे का जन्म हुआ। ऑपरेशन के बाद मरीज को ब्लड चढ़ाने की सलाह दी गई थी। इलाज में भारी लापरवाही उजागर जांच रिपोर्ट में अस्पताल प्रबंधन की कई गंभीर खामियां सामने आईं। सबसे अहम बात यह रही कि अस्पताल में मरीज की निगरानी के लिए कोई भी RMO (रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर) या इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर मौजूद नहीं था। पूरी जिम्मेदारी नर्सिंग स्टाफ के भरोसे थी। तड़के करीब 5 बजे जब मरीज की हालत ज्यादा बिगड़ी, तब एनेस्थीसिया विशेषज्ञ को बुलाया गया और इसके बाद मरीज को हायर सेंटर रेफर किया गया। इसके अलावा अस्पताल में ICU सुविधा का अभाव और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी भी पाई गई, जिसे गंभीर लापरवाही माना गया। नियमों का उल्लंघन, तत्काल बंद करने के आदेश जांच में पाई गई कमियों को मध्यप्रदेश उपचर्यागृह एवं रुजोपचार संबंधी स्थापना अधिनियम 1973 एवं संशोधित नियम 2021 का उल्लंघन माना गया। इसके आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल का संचालन तत्काल प्रभाव से बंद करने के आदेश जारी कर दिए। मरीजों को शिफ्ट, नई भर्ती पर रोक विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अस्पताल में नए मरीजों की भर्ती पूरी तरह बंद रहेगी। साथ ही पहले से भर्ती मरीजों को 3 दिनों के भीतर अन्य अस्पतालों या जिला चिकित्सालय में शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए थे। अपडेट के अनुसार, सोमवार को सभी मरीजों को सुरक्षित अन्य अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया है। सुधार कार्य में जुटा अस्पताल प्रबंधन सीएमएचओ द्वारा जारी नोटिस में जिन कमियों का उल्लेख किया गया है, उन्हें दूर करने के लिए अस्पताल प्रबंधन अब सुधार कार्य में जुट गया है। स्वास्थ्य विभाग ने साफ कर दिया है कि सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद ही अस्पताल को दोबारा संचालन की अनुमति दी जाएगी। चेतावनी: नियम तोड़े तो होगी सख्त कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि औचक निरीक्षण के दौरान अस्पताल संचालित पाया गया, तो प्रबंधन के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
असम विधानसभा चुनाव 2026: ‘महिलाओं को मिलेगा ‘नियत’, सरकार ने बुलाया संसद का विशेष सत्र, असम से पीएम मोदी ने किया बड़ा ऐलान

असम के बारापेटा में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि असम में शांति के लिए कई बलिदान दिए गए हैं, ऐसे में शांति बनाए रखने के लिए कांग्रेस को दूर रखना होगा। मोदी ने कहा कि कांग्रेस की जमीन पर जज़बे समाज को धोखा था। हमारी सरकार ज्यूबियन क्षेत्र का विकास कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि हमारी सरकार सत्यनिष्ठा से परम शांति ला पाई है। 16 अप्रैल से सरकार ने संसद का सत्र बुलाया-प्रधानमंत्री मोदीमहिला नटखट को लेकर मोदी ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि नारी वंदन अधिनियम पारित किया गया है। 2029 के आम चुनाव में महिलाओं को नामांकन मिलना चाहिए। इसके लिए 16 अप्रैल से सरकार ने संसद का सत्र बुलाया है। कुछ लोग प्रकरण लेकर भम्र फैलाए हुए हैं। इस बिल से किसी राज्य को कोई नुकसान नहीं होगा. पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत में महिलाओं की पूरी भूमिका होनी चाहिए। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया है कि दक्षिण के राज्य से इस महिला शीर्षक संशोधन बिल को किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं होगा, क्योंकि दक्षिण से आने वाले पैनल को इस बात का खतरा था कि कहीं ऐसा न हो कि वहां की सदस्यता में कोई कमी हो जाए। मोदी ने कांग्रेस पर ज़ोरदार संरचनात्मक ढांचा तैयार कियाकांग्रेस पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार किसानों के हक का पैसा बिचौलियों को लूटा करती थी, लेकिन भाजपा सरकार किसानों के हित में निर्णय लेती है। उन्होंने आगे कहा कि देश के लिए सिर्फ एक दूसरे की सरकार कांग्रेस की सरकार है। जनता कांग्रेस के पास रिपोर्ट कार्ड लेकर नहीं आती, जबकि बीजेपी की सरकार अपना रिपोर्ट कार्ड बताती है। बीजेपी जो कहती है वो करके जाना है. असम में बीजेपी और सरकार की हैट्रिक-मोदीपीएम मोदी ने कहा कि पिछले 10 वर्षों से असम में शांति है और असम की पहचान अब दुनिया में कायम हो रही है। उन्होंने आगे कहा कि हमारा संकल्प देश को विकसित करना है। हिंदुस्तान को आत्मनिर्भर बनाना है। कांग्रेस के शाही परिवार के नामदार जो दिल्ली में बैठे हैं, उनके हार का सेंचुरी असम के लोग स्थापित होंगे। पीएम मोदी ने कहा कि असम बीजेपी और सरकारी नौकरी की हैट्रिक। ये भी पढ़ें ईरान ने अमेरिका की दुखती नस को खलासी, स्याह की लड़की वाली खतरनाक पर वीडियो शेयर कर याद करें ऑपरेशन ईगल क्लॉक (टैग्सटूट्रांसलेट)असम(टी)असम विधानसभा चुनाव(टी)असम चुनाव 2026(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)पीएम मोदी(टी)असम(टी)बारापेटा(टी) पीएम मोदी(टी)कांग्रेस(टी)विधानसभा चुनाव(टी)महिला नताशा(टी)संसद
भाजपा नेता से मारपीट का कांग्रेस ने किया विरोध:एसपी कार्यालय के सामने धरना, आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग

नरसिंहपुर जिले में भाजपा नेता पवन पटेल से मारपीट के मामले में कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया है। आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुनीता पटेल सोमवार दोपहर 12 बजे एसपी कार्यालय पहुंचीं और धरने पर बैठ गईं। जानकारी के अनुसार, सुनीता पटेल ने शनिवार को एसपी को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस से संतोषजनक जवाब न मिलने के बाद उन्होंने यह कदम उठाया। धरने के दौरान सुनीता पटेल ने आरोप लगाया कि पवन पटेल को बुरी तरह पीटा गया, लेकिन अभी तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने प्रेस नोट जारी किया, पर उनके पत्र का कोई जवाब नहीं दिया। पटेल ने क्षेत्र में अवैध उत्खनन और डंपरों की आवाजाही को भी गंभीर समस्या बताया। उन्होंने कहा कि गाडरवारा में लगातार हादसे हो रहे हैं, जैसे हाल ही में गांधी गांव में एक ट्रक घर में घुस गया, जिससे एक युवक की मौत हो गई थी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वह दिसंबर में भी पत्र लिखकर डंपरों के संचालन का समय निर्धारित करने की मांग कर चुकी हैं। सुनीता पटेल ने स्पष्ट किया कि जब तक उन्हें लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, वे धरना समाप्त नहीं करेंगी। दूसरी ओर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया ने मामले पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह घटना 1 तारीख की दरमियानी रात पलोहा थाना क्षेत्र में हुई थी। पुलिस ने आरोपियों की पहचान कर ली है और दो-तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। शेष आरोपियों की भी जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। भूरिया ने बताया कि कुछ आरोपी स्थानीय हैं, जबकि कुछ बाहर के हैं। मामले की विस्तृत जानकारी एसडीओपी द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी जा रही है। पुलिस का कहना है कि त्वरित कार्रवाई की जा रही है और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।
क्या वेट लॉस की दवा लेने से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं? ब्रिटेन के डॉक्टर ने किया सनसनीखेज दावा

Last Updated:April 06, 2026, 13:03 IST Weight Loss and Bone Health:वेट लॉस के लिए इस्तेमाल की जा रही GLP-1 दवाएं वजन घटाने में मदद करती हैं, लेकिन इससे बोन डेंसिटी कम हो सकती है. यूके के डॉक्टर करन राजन के अनुसार हड्डियों के घनत्व में कमी दवा के कारण नहीं, बल्कि मसल्स और शरीर के वजन घटने की वजह से होती है. हड्डियों की सुरक्षा के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और पर्याप्त प्रोटीन जरूरी होता है. डॉक्टर के अनुसार तेजी से वजन घटाने से हड्डियों की डेंसिटी कम हो सकती है. How GLP-1 Impact Bone Density: दुनिया भर में इस वक्त वेट लॉस की दवाएं लोकप्रिय हो रही हैं. मोटापा और डायबिटीज से जूझ रहे तमाम लोग इन दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं. डॉक्टर्स की मानें तो GLP-1 इंजेक्शन तेजी से वजन कम करने और बॉडी मैनेजमेंट का पसंदीदा विकल्प बन चुके हैं. सेलेब्स से लेकर आम लोग तक सभी इन दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं. अब तक माना जा रहा है कि ये दवाएं डायबिटीज और मोटापे से जूझ रहे लोगों के लिए वरदान साबित हो सकती हैं. हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स ने इन दवाओं से हड्डियां कमजोर होने की आशंका जताई है. सवाल उठ रहा है कि क्या GLP-1 दवाओं के कारण हड्डियों की मजबूती घट सकती है? इस बारे में यूके के डॉक्टर करन राजन ने हकीकत बताई है. HT की रिपोर्ट के मुताबिक यूके बेस्ड सर्जन और हेल्थ कंटेंट क्रिएटर डॉक्टर करन राजन ने अपने इंस्टाग्राम पर GLP-1 दवाओं और बोन डेंसिटी के बीच कनेक्शन को लेकर कई अहम बातें बताई हैं. उन्होंने बताया कि GLP-1 दवाओं से हड्डियों की कमजोरी सीधे तौर पर नहीं होती है. वजन कम होने से बोन मिनरल डेंसिटी में कमी आ सकती है, लेकिन यह किसी भी वजन घटाने की प्रक्रिया में देखा जाता है. इन दवाओं का हड्डियों को तोड़ने वाले या बनाने वाले सेल्स पर कोई सीधा बायोलॉजिकल असर नहीं पड़ता है. सिर्फ वेट लॉस ड्रग्स को हड्डियों की कमजोरी से जोड़ना ठीक नहीं है. View this post on Instagram
धर्मेंद्र को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड, भावुक हुए बॉबी:बोले- पापा ने आप सबके दिलों को छुआ; उनके कारण ही हमे इतना प्यार मिलता है

दिवंगत बॉलीवुड एक्टर अभिनेता धर्मेंद्र को हाल ही में स्क्रीन अवॉर्ड्स फंक्शन में मरणोपरांत लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। पिता की जगह यह अवॉर्ड लेने जब बॉबी देओल मंच पर पहुंचे, तो वे अपने आंसू नहीं रोक पाए। स्पीच देते समय बॉबी काफी भावुक हो गए। उन्होंने धर्मेंद्र के योगदान और सोशल मीडिया के प्रति उनके आखिरी दिनों के लगाव को याद किया। पिता को याद कर मंच पर भावुक हुए बॉबी अवॉर्ड लेते समय बॉबी देओल की आंखें तुरंत नम हो गईं। उन्होंने भारी मन से अपने पिता को धन्यवाद दिया। बॉबी ने स्पीच में कहा, “मुझे आप सभी की आंखों में अपने पापा के लिए जो प्यार दिखाई देता है, वही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है। मुझे अब भी ऐसा महसूस होता है कि मैं घर जाऊंगा और उन्हें बताऊंगा कि मैंने यह पुरस्कार उनके लिए जीता है। मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि भगवान ने मुझे उनका बेटा बनाया।” इंस्टाग्राम रील्स के जारिए याद करते हैं लोग बॉबी ने कहा, “मेरे पापा ने आप सभी को व्यक्तिगत रूप से जाने बिना ही अपने काम और इंस्टाग्राम रील्स के जरिए आप सभी के दिलों को छुआ है। इंस्टाग्राम पर रील्स बनाना उनका नया शौक बन गया था। वह हमेशा चाहते थे कि हर कोई खुश रहे। वह मानते थे कि अगर हम अपने टैलेंट पर विश्वास करें, तो जीवन में कुछ भी हासिल कर सकते हैं।” ‘पापा की वजह से ही हमें मिलता है इतना प्यार’ धर्मेंद्र के दोनों बेटों सनी देओल और बॉबी देओल को इंडस्ट्री में जो सम्मान मिलता है, उसका श्रेय बॉबी ने अपने पिता को ही दिया। उन्होंने कहा, “मैं जहां भी जाता हूं, मुझे बहुत प्यार मिलता है क्योंकि मेरे पापा और भाई के लिए सबके दिलों के ताले खुले हुए हैं। लोग मेरे पापा से इतना प्यार करते हैं कि वे बिना सोचे-समझे मुझे और मेरे भाई को अपना लेते हैं। बॉबी ने यह भी कहा कि उनके पिता ने इंडस्ट्री में अच्छे और बुरे दोनों दिन देखे, लेकिन कभी हार नहीं मानी। स्क्रीन अवॉर्ड्स 2026 में ‘धुरंधर’ का दबदबा आदित्य धर की स्पाई थ्रिलर फिल्म ‘धुरंधर’ इस साल अवॉर्ड नाइट की सबसे बड़ी विनर बनकर उभरी है, जिसने कुल 14 अवॉर्ड्स अपने नाम किए। फिल्म के लिए रणवीर सिंह को बेस्ट एक्टर और आदित्य धर को बेस्ट डायरेक्टर का अवॉर्ड मिला, वहीं अक्षय खन्ना ने बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर (मेल) की ट्रॉफी जीती। दूसरी तरफ, जाह्नवी कपूर और ईशान खट्टर स्टारर फिल्म ‘होमबाउंड’ ने ‘धुरंधर’ और ‘छावा’ जैसी फिल्मों को पीछे छोड़ते हुए ‘बेस्ट फिल्म’ का खिताब अपने नाम किया।
दो भाई और एआई ने बनाई 15,000 करोड़ की कंपनी:ऑल्टमैन की भविष्यवाणी सच, कहा था- एआई की बदौलत अकेला इंसान 1 अरब डॉलर की कंपनी खड़ी करेगा

मैथ्यू गैलेगर (41) लॉस एंजिलिस के एक घर से जो कर दिखाया, वो दुनिया के बड़े-बड़े उद्यमियों को हैरत में डाल रहा है। न कोई बड़ी टीम और न चमचमाता दफ्तर- बस एक लैपटॉप, कुछ एआई टूल्स और गजब का जुनून। नतीजा- महज दो महीने और 20,000 डॉलर (अभी के हिसाब से 18.5 लाख रुपए) के निवेश से एक ऐसी कंपनी खड़ी हो गई, जो इस साल 16,700 करोड़ रुपए का कारोबार करने की राह पर है। गैलेगर की कंपनी मेडवी टेलीहेल्थ प्लेटफॉर्म चलाती है, जो वजन घटाने वाली जीएलपी-1 दवाएं ऑनलाइन बेचता है। सितंबर 2024 में जब मेडवी शुरू हुई, तो पहले ही महीने 300 ग्राहक जुड़ गए। दूसरे महीने यह संख्या 1,000 और बढ़ गई। 2025 में कंपनी के पहले पूरे कारोबारी साल में मेडवी ने 40.1 करोड़ डॉलर (3,700 करोड़ रुपए) की बिक्री की। इस पर 16.2% यानी करीब 600 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ, जो इस सेक्टर की दिग्गज कंपनी हिम्स के 5.5% मुनाफे से कई गुना ज्यादा है। तेज निर्णय मेडवी की सबसे बड़ी ताकत है – गैलेगर ओपन एआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने 2024 में कहा था कि एआई की बदौलत जल्द एक अकेला इंसान 1 अरब डॉलर की कंपनी खड़ी कर सकेगा। मेडवी की कहानी सुनकर ऑल्टमैन ने कहा कि उन्होंने तकनीकी दोस्तों से एक दांव लगाया था और शायद वो जीत गए। गैलेगर ने कहा, ‘मैं तेजी से फैसले करता हूं। यही मेडवी की सबसे बड़ी ताकत है।’ 12 से ज्यादा एआई टूल्स संभाल रहे मेडवी का पूरा बिजनेस गैलेगर ने कंपनी बनाने में दर्जनभर एआई टूल्स की मदद ली। चैटजीपीटी, क्लॉड, ग्रोक से कोडिंग करवाई। ‘मिडजर्नी’ और ‘रनवे’ से विज्ञापन के लिए तस्वीरें और वीडियो बनाए। इलेवनलैब्स से ग्राहक सेवा के लिए एआई वॉइस सिस्टम तैयार किया। अपनी आवाज का एआई क्लोन भी बनाया, ताकि व्यक्तिगत अपॉइंटमेंट लेने जैसे काम एआई संभाल सकें। दवा डिलीवरी, डॉक्टरों का नेटवर्क और कंप्लायंस जैसे काम केयरवैलिडेट, ओपनलूप हेल्थ जैसे प्लेटफॉर्म्स कर रहे हैं। एकमात्र कर्मचारी, वो भी संस्थापक का अपना ही भाई काम बढ़ा तो गैलेगर ने छोटे भाई एलियट को रखा। ये कंपनी के इकलौते कर्मचारी हैं। एलियट का काम है भाई तक आने वाले फालतू संदेश, कॉल्स फिल्टर करना, ताकि वो असली काम पर ध्यान दे सकें। इससे पहले गैलेगर ने 60 कर्मियों वाली ‘वॉच गैंग’ कंपनी चलाई थी। वो मुनाफे में नहीं आ पाई। इससे उन्होंने सीखा- ज्यादा लोग मतलब ज्यादा खर्च और धीमे फैसले। रोजाना 28 करोड़ रुपए कमाई, इससे बेघर युवाओं की मदद गैलेगर अब हर रोज 30 लाख डॉलर (28 करोड़ रुपए) से ज्यादा की कमाई कर रहे हैं। लेकिन पूरी कमाई वो खुद नहीं रखते। मुनाफे के एक बड़े हिस्से से बेघर युवाओं और पशु कल्याण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं/लोगों की मदद करते हैं। गैलेगर का बिजनेस मॉडल अब प्रेरणा का रोचक स्रोत है। बेघर बचपन से शुरू हुई यह यात्रा आज एक मिसाल बन गई है- इस बात की कि एआई के मौजूदा दौर में कल्पना और हुनर हो, तो कुछ भी असंभव नहीं है।
हिमाचल में प्रवासी बच्ची पीटने वाले फौजी ने मांगी माफी:बोला-आइंदा ऐसी गलती नहीं होगी, दिमाग ने काम नहीं किया, CWC और पुलिस करेगी पूछताछ

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला के बहडाला में 6 साल की प्रवासी बच्ची को बांधकर पीटने देने के मामले में आरोपी पूर्व सैनिक विजय कुमार ने माफी मांगी है। आरोपी मान रहा है कि उसने बच्ची को बांधा था और आइंदा ऐसी गलती नहीं होगी। वह कहता है कि घटना के वक्त दिमाग ने काम नहीं किया, लेट काम किया। वहीं ऊना पुलिस आरोपी विजय कुमार से पूछताछ कर रही है। बीती कल भी आरोपी को हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ की गई। आज फिर से थाने बुलाया है। कुछ देर में आरोपी को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के समक्ष भी पेश होना है। CWC भी आरोपी से पूछताछ करेगी, क्योंकि बच्ची नाबालिग है। घर की रैलिंग में बांधकर की थी पिटाई बता दें कि पूर्व सैनिक ने अमरूद चुराने के आरोपों के बाद बच्ची को घर की रैलिंग में बांधकर पीटा था। इससे जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद पुलिस हरकत में आई और आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की। कैप्टन को देखकर बोली बच्ची – ‘अंकल बचा लो’ वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि बच्ची चीखती-चिल्लाती रही, लेकिन आरोपी ने उसे नहीं छोड़ा। इस बीच मर्चेंट नेवी के कैप्टन रोहित जसवाल को बच्ची के चिल्लाने की आवाज आई, तो वह मौके पर पहुंचे और उन्होंने बच्ची को छुड़वाया। कैप्टन को देख बच्ची कहती है, ‘अंकल बचा लो, अंकल बचा लो’। यह घटना 5 अप्रैल की है। बच्ची पर आरोप है कि उसने रिटायर्ड फौजी के घर के बाहर अमरूद तोड़ा। बच्ची को अमरूद तोड़ते हुए फौजी ने देख लिया। इसके बाद उसने बच्ची के हाथ-पांव सीढ़ियों की रेलिंग से बांध दिए। वहीं एसपी ऊना सचिन हिरेमठ ने बताया कि पुलिस कानून के मुताबिक कार्रवाई कर रही है। आरोपी के खिलाफ BNS और JJ एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। बच्ची का ऊना के अस्पताल में मेडिकल करवा दिया गया है।
पोहरी बस स्टैंड के पीछे 7 फीट का मगरमच्छ:वन विभाग ने सफलतापूर्वक किया रेस्क्यू; राहगीर भयभीत होकर दूर से निकले

शिवपुरी शहर के पोहरी बस स्टैंड के पीछे स्थित तालाब के पास सोमवार सुबह करीब 9 बजे एक विशाल मगरमच्छ देखा गया। पुलिया के समीप बैठे इस मगरमच्छ को देखकर स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया और राहगीर भयभीत होकर दूर से निकलने लगे। स्थानीय निवासी मुकेश कुशवाह के अनुसार, मगरमच्छ की लंबाई लगभग 7 फीट थी और उसका पेट फूला हुआ दिख रहा था। आशंका जताई जा रही है कि उसने किसी जानवर, जैसे सूअर या कुत्ते का शिकार किया था, जिसके कारण वह अधिक हिल-डुल नहीं पा रहा था। घटना की सूचना तत्काल वन विभाग को दी गई। जानकारी मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और लगभग 30 मिनट के सावधानीपूर्वक अभियान के बाद मगरमच्छ को पकड़ लिया। इसके उपरांत उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। रेस्क्यू अभियान के दौरान मौके पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे। हालांकि, टीम ने स्थिति को नियंत्रित रखते हुए सफलतापूर्वक मगरमच्छ को पकड़ने का कार्य पूरा किया।








