Saturday, 10 Oct 2026 | 03:53 PM

Trending :

EXCLUSIVE

तमिल इलेक्शन में नंबर गेम या 69 प्रतिशत नट? किसी दल ने भी क्यों नहीं निकाला ब्राह्मण प्रत्याशी, जानें वजह

तमिल इलेक्शन में नंबर गेम या 69 प्रतिशत नट? किसी दल ने भी क्यों नहीं निकाला ब्राह्मण प्रत्याशी, जानें वजह

तमिल की सूची में इस बार बड़ा उल्टेफेर देखने को मिल रहा है। आगामी चुनाव के मद्देनजर ना सिर्फ डीएमके और कांग्रेस बल्कि एआईएडीएमके और बीजेपी तक ने किसी भी ब्राह्मण को अपना हित नहीं बनाया है। करीब साढ़े तीन दशक में पहली बार ऐसा हुआ जब अन्नाद्रमुक ने किसी ब्राह्मण को टिकट नहीं दिया।

द्रविड़ आंदोलन का कितना प्रभाव
द्रविड़ आंदोलन के दक्षिण के इस राज्य में ब्राह्मण राजनीति ना सिर्फ हाशिए पर चली गई है बल्कि इस बार चुनावों में प्रमुख आश्रमों ने ब्राह्मणों को टिकटें बांटने से भी मना कर दिया है और ब्राह्मणों का समर्थन हासिल करने वाली बीजेपी ने भी पार्टी बना ली है। बीजेपी ने अपने कोटे की 27 विधानसभा सीटों में से किसी भी सीट पर ब्राह्मणों की प्रतिष्ठा घोषित नहीं की है।

ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं कि ये सब तमिलनाडु में ये घटिया प्रतिभाएं का नतीजा है या फिर मजबूरी है। बता दें कि तमिल के 234 विधानमंडलों में भारतीय गठबंधन में डीएमके 164 और कांग्रेस 28 के प्राइमरी चुनावों में लड़ाई जारी है, लेकिन दोनों में से किसी ने भी ब्राह्मण को टिकट नहीं दिया। इसके अलावा उनके सहयोगी लेफ्ट, वीसीके और मुस्लिम लीग ने भी किसी ब्राह्मण पर भरोसा नहीं किया।

विपक्षी गठबंधन में अन्नाद्रमुक 178 रिपब्लिकन उम्मीदवार 27 और अन्य 18 रिपब्लिकन उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं, लेकिन एक भी सीट पर ब्राह्मण उम्मीदवार को नहीं उतारा गया है।

बिजनेसमैन की पार्टी ने भी बनाई दूरी
दिलचस्प बात यह है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज से जुड़े हुए हैं, लेकिन उनके निधन के करीब 10 साल बाद भी उनकी पार्टी ने किसी भी ब्राह्मण को मैदान में नहीं उतारा। एआईएडीएमके ने 2021 में ब्राह्मण समाज से आने वाले पूर्व पुलिस गोदाम और नटराज को उम्मीदवार बनाया था, इस बार भी टिकट नहीं दिया गया।

ब्राह्मणों ने टिकटें निकालीं
अभिनेता से नेता बने थलपति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्रि कजगम (टीवीके) ने 2 ब्राह्मण दावेदारों को मैदान में उतारा। इसके अलावा तमिल राष्ट्रवादी नेता सीमान की पार्टी के नाम तमिलर दास ने 6 ब्राह्मणों के टिकट दिए हैं। इन दोनों ने ही मायलापुर और श्रीरंगम जैसे इलाक़ों को चुना है, जहाँ ब्राह्मण चर्च की संख्या सबसे ज़्यादा है। एनईटीके द्वारा 6 ब्राह्मणों को मैदान में पीछे के सिद्धांतों का कहना है कि सरटेन ने तमिलनाडु में पेरियार-विरोधी रुख अपनाया है। आरएसएस से जुड़े एक कार्यक्रम में भाग लेते हुए उन्होंने कहा कि वो द्रविड़ दीवार को गिराने का काम करेंगे। वे अपने राजनीतिक अनुसंधान में भी जाति और पहचान का फ्रैंक का उपयोग करते हैं।

क्या कहते हैं राजनीतिक पंडित
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, राजनीतिक अरुण जेटली का कहना है कि अन्नाद्रमुक ने कई दशकों तक ब्राह्मण समाज का समर्थन किया, लेकिन हाल ही में इसमें बदलाव आया है। व्यापारियों के निधन के बाद ब्राह्मण ईसाइयों का गुट भाजपा के पक्ष में हुआ। इसके चलते एआईएडीएमके ने ही ब्राह्मणों से दूरी बना ली है, लेकिन बीजेपी के संयोजक बनने की वजह से लोग जरूर चिंतित हैं।

ब्राह्मणों की सूची
तमिल की कुल सूची में ब्राह्मणों की दुकान मात्र 3 प्रतिशत है। वेबसाइटों की संख्या अधिक है। मुथुरैयर, थेवर, वन्नियार और गौंडर। कम संख्या में ब्राह्मणों को वोट बैंक के रूप में देखा नहीं गया। इसके अलावा राज्य में 69 प्रतिशत शून्य लागू है। विचारधारा ने अपनी राजनीति को ओबीसी और विचारधारा के उद्घोषणा के साथ जोड़ा- गिरफ़्तार है।

द्रविड़ राजनीति में ब्राह्मणों को आर्य या बाहरी माना जाता है, जबकि गैर-ब्राह्मणों को मूल द्रविड़ माना जाता है। यही कारण है कि किसी भी ब्राह्मण नेता के लिए खुद को तमिल हितों की रक्षा साबित करना आपके लिए एक बड़ी चुनौती है।

ये भी पढ़ें

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: ‘बंगाल के लोगों को भूख लगती है मोदी सरकार’, केंद्र पर अभिषेक बनर्जी ने कहा- झूठ बोला तो दो मुझे जेल भेज दिया

(टैग्सटूट्रांसलेट)बीजेपी(टी)तमिलनाडु चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)टीएन चुनाव 2026(टी)डीएमके(टी)कांग्रेस(टी)ब्राह्मण उम्मीदवार(टी)कांग्रेस(टी)बीजेपी(टी) डीएमके(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)ब्राह्मण(टी)प्रत्याशी(टी)द्रविड़

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
टी-20 वर्ल्डकप को 50 करोड़ से ज्यादा लोगों ने देखा:जियो-हॉटस्टार पर लाइव स्ट्रीमिंग को एक समय में सबसे ज्यादा 6.05 करोड़ दर्शकों ने एक साथ देखा

March 4, 2026/
4:06 pm

भारत और श्रीलंका की मेजबानी में खेले जा रहे टी-20 वर्ल्ड कप को विभिन्न माध्यमों से 50 करोड़ लोगों ने...

सेलिना जेटली ने पति पीटर हाग के खिलाफ FIR दर्ज:2 दिन पहले एक्ट्रेस ने बेटे की कब्र पर जाकर रोने का वीडियो शेयर किया था

May 9, 2026/
11:24 am

मुंबई पुलिस ने एक्ट्रेस सेलिना जेटली के पति पीटर हाग के खिलाफ FIR दर्ज की है। एक्ट्रेस ने उन पर...

INS तारागिरी आज नेवी में शामिल होगा:यह ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम से लैस

April 3, 2026/
9:48 am

INS तारगिरी आज विशाखापत्तनम में इंडियन नेवी में शामिल होगा। डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह इस सेरेमनी में मौजूद रहेंगे। तारागिरी...

Sensex Soars 941 Pts to 77,959

May 7, 2026/
5:29 am

नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर सोने-चांदी और शेयर बाजार से जुड़ी रही। कल 10 ग्राम...

Gold Silver Prices Drop ₹15,508 & ₹1,963 Amid Iran War Fears

March 16, 2026/
12:48 pm

नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक सोने-चांदी में आज लगातार दूसरे कारोबारी दिन गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

तमिल इलेक्शन में नंबर गेम या 69 प्रतिशत नट? किसी दल ने भी क्यों नहीं निकाला ब्राह्मण प्रत्याशी, जानें वजह

तमिल इलेक्शन में नंबर गेम या 69 प्रतिशत नट? किसी दल ने भी क्यों नहीं निकाला ब्राह्मण प्रत्याशी, जानें वजह

तमिल की सूची में इस बार बड़ा उल्टेफेर देखने को मिल रहा है। आगामी चुनाव के मद्देनजर ना सिर्फ डीएमके और कांग्रेस बल्कि एआईएडीएमके और बीजेपी तक ने किसी भी ब्राह्मण को अपना हित नहीं बनाया है। करीब साढ़े तीन दशक में पहली बार ऐसा हुआ जब अन्नाद्रमुक ने किसी ब्राह्मण को टिकट नहीं दिया।

द्रविड़ आंदोलन का कितना प्रभाव
द्रविड़ आंदोलन के दक्षिण के इस राज्य में ब्राह्मण राजनीति ना सिर्फ हाशिए पर चली गई है बल्कि इस बार चुनावों में प्रमुख आश्रमों ने ब्राह्मणों को टिकटें बांटने से भी मना कर दिया है और ब्राह्मणों का समर्थन हासिल करने वाली बीजेपी ने भी पार्टी बना ली है। बीजेपी ने अपने कोटे की 27 विधानसभा सीटों में से किसी भी सीट पर ब्राह्मणों की प्रतिष्ठा घोषित नहीं की है।

ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं कि ये सब तमिलनाडु में ये घटिया प्रतिभाएं का नतीजा है या फिर मजबूरी है। बता दें कि तमिल के 234 विधानमंडलों में भारतीय गठबंधन में डीएमके 164 और कांग्रेस 28 के प्राइमरी चुनावों में लड़ाई जारी है, लेकिन दोनों में से किसी ने भी ब्राह्मण को टिकट नहीं दिया। इसके अलावा उनके सहयोगी लेफ्ट, वीसीके और मुस्लिम लीग ने भी किसी ब्राह्मण पर भरोसा नहीं किया।

विपक्षी गठबंधन में अन्नाद्रमुक 178 रिपब्लिकन उम्मीदवार 27 और अन्य 18 रिपब्लिकन उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं, लेकिन एक भी सीट पर ब्राह्मण उम्मीदवार को नहीं उतारा गया है।

बिजनेसमैन की पार्टी ने भी बनाई दूरी
दिलचस्प बात यह है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज से जुड़े हुए हैं, लेकिन उनके निधन के करीब 10 साल बाद भी उनकी पार्टी ने किसी भी ब्राह्मण को मैदान में नहीं उतारा। एआईएडीएमके ने 2021 में ब्राह्मण समाज से आने वाले पूर्व पुलिस गोदाम और नटराज को उम्मीदवार बनाया था, इस बार भी टिकट नहीं दिया गया।

ब्राह्मणों ने टिकटें निकालीं
अभिनेता से नेता बने थलपति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्रि कजगम (टीवीके) ने 2 ब्राह्मण दावेदारों को मैदान में उतारा। इसके अलावा तमिल राष्ट्रवादी नेता सीमान की पार्टी के नाम तमिलर दास ने 6 ब्राह्मणों के टिकट दिए हैं। इन दोनों ने ही मायलापुर और श्रीरंगम जैसे इलाक़ों को चुना है, जहाँ ब्राह्मण चर्च की संख्या सबसे ज़्यादा है। एनईटीके द्वारा 6 ब्राह्मणों को मैदान में पीछे के सिद्धांतों का कहना है कि सरटेन ने तमिलनाडु में पेरियार-विरोधी रुख अपनाया है। आरएसएस से जुड़े एक कार्यक्रम में भाग लेते हुए उन्होंने कहा कि वो द्रविड़ दीवार को गिराने का काम करेंगे। वे अपने राजनीतिक अनुसंधान में भी जाति और पहचान का फ्रैंक का उपयोग करते हैं।

क्या कहते हैं राजनीतिक पंडित
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, राजनीतिक अरुण जेटली का कहना है कि अन्नाद्रमुक ने कई दशकों तक ब्राह्मण समाज का समर्थन किया, लेकिन हाल ही में इसमें बदलाव आया है। व्यापारियों के निधन के बाद ब्राह्मण ईसाइयों का गुट भाजपा के पक्ष में हुआ। इसके चलते एआईएडीएमके ने ही ब्राह्मणों से दूरी बना ली है, लेकिन बीजेपी के संयोजक बनने की वजह से लोग जरूर चिंतित हैं।

ब्राह्मणों की सूची
तमिल की कुल सूची में ब्राह्मणों की दुकान मात्र 3 प्रतिशत है। वेबसाइटों की संख्या अधिक है। मुथुरैयर, थेवर, वन्नियार और गौंडर। कम संख्या में ब्राह्मणों को वोट बैंक के रूप में देखा नहीं गया। इसके अलावा राज्य में 69 प्रतिशत शून्य लागू है। विचारधारा ने अपनी राजनीति को ओबीसी और विचारधारा के उद्घोषणा के साथ जोड़ा- गिरफ़्तार है।

द्रविड़ राजनीति में ब्राह्मणों को आर्य या बाहरी माना जाता है, जबकि गैर-ब्राह्मणों को मूल द्रविड़ माना जाता है। यही कारण है कि किसी भी ब्राह्मण नेता के लिए खुद को तमिल हितों की रक्षा साबित करना आपके लिए एक बड़ी चुनौती है।

ये भी पढ़ें

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: ‘बंगाल के लोगों को भूख लगती है मोदी सरकार’, केंद्र पर अभिषेक बनर्जी ने कहा- झूठ बोला तो दो मुझे जेल भेज दिया

(टैग्सटूट्रांसलेट)बीजेपी(टी)तमिलनाडु चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)टीएन चुनाव 2026(टी)डीएमके(टी)कांग्रेस(टी)ब्राह्मण उम्मीदवार(टी)कांग्रेस(टी)बीजेपी(टी) डीएमके(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)ब्राह्मण(टी)प्रत्याशी(टी)द्रविड़

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.