जापान में 5.9 तीव्रता का भूकंप, 37 लोग घायल:ट्रेन सेवाओं पर असर; सुनामी का खतरा नहीं

जापान में रविवार को 5.9 तीव्रता का भूकंप आया। इससे पूर्वी जापान और टोक्यो इलाके में कम से कम 37 लोग घायल हुए, जिनमें ज्यादातर को हल्की चोटें आईं। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के मुताबिक, भूकंप की शुरुआती तीव्रता 5.9 थी। इसका केंद्र दक्षिणी इबाराकी प्रांत में जमीन से 70 किलोमीटर नीचे था। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण ने इसकी तीव्रता 5.8 दर्ज की। भूकंप के कारण टोक्यो और नारिता एयरपोर्ट जाने वाली एक्सप्रेस ट्रेनों में देरी हुई।सुनामी का कोई खतरा नहीं बताया गया। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
पाकिस्तान में 12-12 घंटे बिजली कटौती:लोग सड़कों पर उतरे, रास्ता रोका; लगातार कटौती से पानी सप्लाई ठप

पाकिस्तान में कराची के कई इलाकों में लंबे समय से हो रही बिजली कटौती के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने बड़े रास्ते रोके और बिजली सप्लाई बहाल करने की मांग को लेकर टायर जलाए। प्रदर्शन पाकिस्तान की कराची के पाक कॉलोनी, लियाकताबाद, गरीबाबाद, निश्तर रोड, भीमपुरा और रैंचोर लाइन में हुए। इससे शहर के कई प्रमुख हिस्सों में ट्रैफिक पर असर पड़ा। लियाकताबाद में प्रदर्शनकारियों ने बड़े चौराहे और रास्ते रोक दिए। स्थानीय न्यूज आउटलेट डॉन के मुताबिक, निश्तर रोड पर बिजली कटौती को लेकर कारोबारियों और के-इलेक्ट्रिक (केई) कर्मचारियों के बीच विवाद बढ़ गया, जिसके बाद टायर जलाए गए। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
पाकिस्तान में 12-12 घंटे बिजली कटौती:लोग सड़कों पर उतरे, रास्ता जाम किया; लगातार कटौती से पानी सप्लाई ठप

पाकिस्तान के कराची में लंबे समय से जारी बिजली कटौती के खिलाफ शनिवार को कई इलाकों में लोगों ने प्रदर्शन किया। लोगों ने कई घंटे तक सड़कें जाम रखीं बिजली तुरंत बहाल करने की मांग की। इससे शहर के कई हिस्सों में ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया और हजारों लोग जाम में फंस गए। डॉन के मुताबिक, लोगों ने बताया कि उन्हें रोज 12 घंटे या उससे ज्यादा बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि कई बार कटौती की जानकारी भी पहले नहीं दी जाती। बिजली नहीं होने पर पानी के पंपिंग स्टेशन बंद रहते हैं। इससे पानी की सप्लाई भी रुक रही है और लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है। कराची में व्यापारी भी प्रदर्शन में उतरे कराची के निश्तर रोड पर बिजली लंबे समय तक बंद रहने को लेकर व्यापारियों और के-इलेक्ट्रिक (KE) के कर्मचारियों के बीच विवाद भी हुआ। इसके बाद प्रदर्शन तेज हो गया और कई जगह टायर जलाए गए। भिमपुरा और रैंचोर लाइन में दुकानदार भी प्रदर्शन में शामिल हुए। उनका कहना था कि बिजली की अनियमित सप्लाई से कारोबार को काफी नुकसान हो रहा है। सड़कें बंद होने से साउथ जिले और आसपास के इलाकों में भी ट्रैफिक जाम फैल गया। गुलशन-ए-इकबाल की एक महिला ने बताया कि उनकी मां को बुखार था और सदर में डॉक्टर से अपॉइंटमेंट था। वे मां को जांच के लिए क्लिनिक ले जा रहे थे, लेकिन उनकी एंबुलेंस सिविक सेंटर के पास करीब 2 घंटे तक जाम में फंसी रही। गरीबाबाद के रहने वाले इमरान ने कहा कि वे समय पर बिजली का बिल भरते हैं, फिर भी 12 घंटे तक बिजली कटती है। उन्होंने कहा, “आज तो हम घर तक नहीं पहुंच पाए। जुलूस और इन प्रदर्शनों की वजह से पूरा शहर जाम है।” खबर लगातार अपडेट हो रही है…
कंगना रनोट के बयान पर भड़के रामदेव:बोले- ओछे लोगों पर टिप्पणी नहीं; एक्ट्रेस ने कहा था- मेरी जवानी के बारे में सपने मत देखो

हिमाचल प्रदेश से बीजेपी सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनोट के ‘जेनरेशन गटर’ वाले बयान पर शुरू हुआ विवाद अब फिर चर्चा में है। योग गुरु बाबा रामदेव की टिप्पणी के बाद कंगना ने पलटवार करते हुए कहा था, “बाबा जी, मेरी जवानी या बेडरूम के बारे में डे-ड्रीम मत कीजिए।” अब कंगना के इस पलटवार पर रामदेव ने जवाब दिया है। रविवार को हरिद्वार में रामदेव ने कहा कि वह इस विवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहते। उन्होंने कहा, “स्वामी रामदेव क्या है, ये देश जानता है। रामदेव का योगदान क्या है, ये भी देश जानता है। इसलिए मैं ओछे लोगों के बारे में टिप्पणी नहीं करना चाहता।” दरअसल, रामदेव ने कंगना के ‘जेनरेशन गटर’ वाले बयान पर कहा था कि जेन-Z को गटर-पटर कहना बिगड़े हुए दिमाग की निशानी है। उन्होंने कंगना की योग्यता, बचपन, जवानी और पुराने कारनामों को लेकर भी टिप्पणी की थी। इसके बाद कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए रामदेव पर पलटवार किया था। अब समझिए आखिर ये पूरा विवाद शुरू कहां से हुआ.. दरअसल, हाल ही में कंगना ने एक इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा था, “सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात युवा हिंदू महिलाओं का व्यवहार है। वे स्वतंत्र और करियर बनाने वाली महिलाओं की जिंदगी की नकल करना चाहती हैं, लेकिन उस आजादी को कमाना नहीं चाहतीं। जो महिलाएं वास्तव में स्वतंत्र होती हैं, वे विद्रोही फैसले लेती हैं, बेबाक राय रखती हैं, परंपराओं से हटकर करियर चुनती हैं और अपने हर फैसले की जिम्मेदारी भी खुद उठाती हैं, क्योंकि वे अपने दम पर जीवन जीती हैं। वे यह सब अपने माता-पिता या परिवार की कीमत पर नहीं करतीं। यह तथाकथित पश्चिमी सोच वाली भारतीय महिलाओं की नई पीढ़ी है, जिन्हें मैं ‘जनरेशन गटर’ कहती हूं।” Gen-Z पर दिए बयान पर भड़के रामदेव कंगना के इस पोस्ट के बाद ही बाबा रामदेव की इस पूरे विवाद में एंट्री हुई। दरअसल एक हिंदी न्यूज चैनल के साथ बातचीत में बाबा रामदेव ने जेन Z को लेकर कंगना की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, “उनका क्वालिफिकेशन क्या है? उनका बचपन कैसा रहा है? उनकी जवानी कैसी रही है? उनके पहले के कारनामे कैसे रहे हैं? मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता। ऐसे किसी भी देश के जवान को, जेन Z को गटर-पटर बोलना, ये बिगड़े हुए दिमाग की निशानी है। गलत बात है। इसके ऊपर जो है, उनके पार्टी के लोगों को संज्ञान लेना चाहिए।” जब सवाल पूछा गया था कि वो आपके योग की प्रशंसक रही हैं तो बाबा रामदेव ने कहा कि “मेरी प्रशंसा करें, योग की प्रशंसा करें तो मैं उनके गुनाहों पर यहां लीपापोती कर दूं?” बाबा रामदेव ने यह भी कहा था कि युवा की कोई जाति नहीं है। युवा में सब हैं। उसमें ब्राह्मणों के भी बालक हैं, क्षत्रियों के भी, वैश्यों के भी, दलित के भी, आदिवासी-वनवासी के, SC-ST के, सबके बालक हैं। आज युवा अपने आप में एक बहुत बड़ी ताकत है, उसको कोई नकार नहीं सकता। बाबा के पलटवार के बाद चुन नहीं बैठी कंगना बाबा रामदेव कंगना को बिगड़े दिमाग की निशानी कहा तो कंगना भड़क गईं फिर उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए बाबा रामदेव पर पलटवार करते हुए लिखा, “बाबा जी, मेरी जवानी या बेडरूम के बारे में डे-ड्रीम मत कीजिए। कोई सिर्फ अफवाहों और गॉसिप के आधार पर ही ऐसा सोच सकता है। कम से कम मुझे कभी सुप्रीम कोर्ट से झूठे या फर्जी मेडिकल दावों को लेकर फटकार नहीं लगी। इसलिए मुझे चरित्र का पाठ मत पढ़ाइए। आपका चरित्र जैसा भी है, मेरा उससे कहीं बेहतर है। यहां कोई फ्रॉड नहीं मिला है।” अब रामदेव ने कंगना के इसी बयान का जवाब देते हुए कहा है कि देश जनता है कि रामदेव बाबा का देश के लिए क्या योगदान रहा। ——————- ये खबर भी पढ़ें… ब्रिटेन-अमेरिका से आगे पतंजलि का हर्बल आर्ट म्यूजियम:65 हजार वनस्पति कलाकृतियां संरक्षित, 300 साल तक सुरक्षित रखने का दावा पतंजलि अनुसंधान फाउंडेशन में तैयार हुआ हर्बल आर्ट म्यूजियम भारत की आयुर्वेदिक और वनस्पति विरासत को दुनिया के सामने नई पहचान दे रहा है। यहां 65 हजार से ज्यादा वनस्पति कलाकृतियां एक ही छत के नीचे संरक्षित हैं। (पढ़ें पूरी खबर)
तापसी पन्नू के बयान पर कंगना रनोट भड़कीं:बोलीं- B-ग्रेड फिल्म के लिए 'सस्ती कॉपी' ने सारी हदें पार कर दीं

तापसी पन्नू के कंगना रनोट से मतभेदों पर दिए बयान के बाद कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर प्रतिक्रिया दी। तापसी ने कहा था कि वह विवाद से पहले या बाद में कभी कंगना से नहीं मिलीं। जिसके बाद कंगना ने तापसी पर अपनी परवरिश और माता-पिता का मजाक उड़ाने का आरोप लगाते हुए उन्हें सस्ती कॉपी कहा। दरअसल, हाल ही में इंडिया टुडे से बातचीत में तापसी से पूछा गया कि क्या उन्होंने और कंगना ने अपने मतभेद सुलझा लिए हैं। तापसी ने कहा कि वह कंगना से कभी नहीं मिलीं और कथित विवाद शुरू होने से पहले भी उनकी मुलाकात नहीं हुई थी। तापसी ने आगे कहा कि मेरी उनके बारे में राय मेरी परवरिश, मेरे बात करने के तरीके और चीजों को देखने के नजरिए को दिखाती है। वह अपने नजरिए पर कायम हैं। तापसी के इस बयान के सामने आने के बाद कंगना ने शनिवार शाम बिना नाम लिए एक पोस्ट शेयर की। उन्होंने लिखा, “एक सस्ती कॉपी अपनी आने वाली B-ग्रेड फिल्म को लेकर भी हमेशा की तरह मीडिया में सिर्फ हेडलाइन बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन आज उन्होंने सारी हदें पार कर दीं। उन्होंने मेरी परवरिश और मेरे माता-पिता का बेहद बेशर्मी से मजाक उड़ाया।” एक्ट्रेस ने आगे लिखा, “मुझे लगता है कि सभी माता-पिता अपने बच्चों के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ करते हैं। मैं कभी किसी बहस में माता-पिता को नहीं लाती, लेकिन आज मैं उनके माता-पिता से भी पूछना चाहती हूं कि वे मेरे माता-पिता की तरह कोई ओरिजिनल इंसान क्यों नहीं पैदा कर सके? इतनी सस्ती कॉपी क्यों? आपकी कोशिशों के लिए मुझे अफसोस है।” कंगना ने कहा- वो प्रतिष्ठित परिवार से आती हैं इसके बाद कंगना ने तापसी की टिप्पणी वाली एक खबर शेयर की और कहा कि कई लोग उनकी परवरिश और माता-पिता पर सवाल उठाते हैं। कंगना ने बताया कि उनका परिवार एक प्रतिष्ठित राजपूत जमींदार परिवार से आता है और उनके माता-पिता पढ़े-लिखे हैं। कंगना ने कहा कि यह उनकी निजी पसंद थी कि वह अपने करियर की शुरुआत बिल्कुल शुरुआत से करें। इसके लिए उनके माता-पिता पर सवाल क्यों उठाए जाते हैं? कंगना ने ये पोस्ट शनिवार शाम अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर की थीं। हालांकि, रविवार सुबह तक उन्होंने दोनों स्टोरी डिलीट कर दी थीं। तापसी-कंगना का विवाद कई साल पुराना है गौरतलब है कि अभिनेत्री तापसी पन्नू और कंगना रनोट के बीच विवाद काफी पुराना है। विवाद की शुरुआत 2018-19 के आसपास हुई। तापसी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि कंगना को अपनी बात कहने के लिए फिल्टर की जरूरत है। इसके बाद 2019 में तापसी ने कंगना की फिल्म ‘जजमेंटल है क्या’ के ट्रेलर की तारीफ की, लेकिन कंगना का नाम नहीं लिया। इस पर कंगना की बहन रंगोली चंदेल ने तापसी को ‘सस्ती कॉपी’ कह दिया था। इसके बाद 2020 में सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर बहस तेज हुई। इसी दौरान कंगना ने तापसी और स्वरा भास्कर को ‘बी-ग्रेड एक्ट्रेस’ कहा था। कंगना ने कहा था कि दोनों आउटसाइडर होने के बावजूद नेपोटिज्म का समर्थन करती हैं। तापसी ने इस पर कहा था कि आउटसाइडर्स को आपस में नहीं लड़ना चाहिए।
पाकिस्तान ने पत्रकार को आतंकी सूची में डाला:PoK प्रदर्शन कवर करने वाले दानिश इरशाद पर बिना मुकदमे कार्रवाई, बैंक-यात्रा पर रोक

पाकिस्तान ने PoK में चल रहे विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार और शोधकर्ता डेनिश इरशाद का नाम आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची यानी फोर्थ शेड्यूल में डाल दिया है। खास बात यह है कि उनके खिलाफ किसी खास आतंकवादी गतिविधि का आरोप या अदालत का कोई फैसला सामने नहीं आया है। इरशाद पिछले करीब 10 साल से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान की राजनीति और वहां के हालात पर रिपोर्टिंग कर रहे हैं। हाल के महीनों में उन्होंने PoK में हुए प्रदर्शनों, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और प्रभावित परिवारों की स्थिति को प्रमुखता से कवर किया था। अब उनका नाम उस सूची में डाला गया है, जिसमें सरकार उन लोगों को रखती है, जिन्हें वह आतंकवाद या प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ा मानती है। इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर डेनिश इरशाद ने ऐसा क्या किया, जिसके आधार पर उन्हें फोर्थ शेड्यूल में डाला गया? उपलब्ध आदेश में इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलता। डेनिश इरशाद कौन हैं? डेनिश इरशाद रावलपिंडी में रहने वाले पत्रकार और शोधकर्ता हैं। उन्होंने 2015 में इस्लामाबाद से पत्रकारिता शुरू की थी। इसके बाद से वे लगातार PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान की राजनीति, इतिहास और वहां के सामाजिक-राजनीतिक हालात पर काम कर रहे हैं। वे लाहौर स्थित नियो न्यूज के साथ काम करते हैं और जम्मू से प्रकाशित कश्मीर टाइम्स में कॉलम भी लिखते हैं। वे 1947 के बाद जम्मू-कश्मीर के इतिहास पर एक किताब भी लिख चुके हैं। बीबीसी उर्दू के पत्रकार रोहान अहमद ने उन्हें पेशेवर पत्रकार और शोधकर्ता बताया है। उनके मुताबिक, इरशाद उन लोगों की आवाज सामने लाने की कोशिश करते रहे हैं, जिन्हें अपनी बात रखने के लिए मदद की जरूरत होती है। इरशाद ने ऐसा क्या किया? पाकिस्तान के जिस आदेश के आधार पर डेनिश इरशाद का नाम फोर्थ शेड्यूल में डाला गया है, उसमें उनके खिलाफ कोई खास आरोप नहीं बताया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि उन्होंने ऐसा कौन सा काम किया, जिसे आतंकवाद से जोड़कर देखा गया। कश्मीर टाइम्स के मुताबिक, इरशाद का नाम PoK के 24 लोगों की सूची में 12वें नंबर पर है। आदेश में जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी यानी जेके-जेएएसी से जुड़े कार्यकर्ताओं का भी जिक्र है। पाकिस्तान सरकार ने जेएएसी को जून में प्रतिबंधित कर दिया था। हाल के महीनों में इरशाद ने PoK में चल रहे विरोध प्रदर्शनों की लगातार रिपोर्टिंग की। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मांगों और वहां की स्थिति को कवर करने के साथ उन परिवारों से भी बातचीत की, जिनके बच्चों के पाकिस्तान की सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे जाने का आरोप है। यानी उनकी रिपोर्टिंग में आंदोलनकारियों और प्रभावित परिवारों का पक्ष भी सामने आया। हालांकि, सरकार के आदेश में यह नहीं बताया गया कि उनकी ऐसी कौन सी रिपोर्टिंग या गतिविधि फोर्थ शेड्यूल में नाम डालने का आधार बनी। इरशाद के मुताबिक, उन्हें न तो किसी मामले में अदालत में पेश किया गया और न ही किसी अपराध में दोषी ठहराया गया। उन्हें सरकार की तरफ से सीधे यह जानकारी भी नहीं दी गई कि उनका नाम सूची में क्यों डाला गया। उन्हें 18 अगस्त को सोशल मीडिया के जरिए इस कार्रवाई का पता चला। इसके बाद उन्होंने PoK के गृह विभाग के एक सूत्र से इसकी पुष्टि की। फोर्थ शेड्यूल क्या है? पाकिस्तान में फोर्थ शेड्यूल आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची है। इसमें उन लोगों को रखा जा सकता है, जिन्हें सरकार आतंकवाद या प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ा मानती है। इस सूची में नाम आने के बाद संबंधित व्यक्ति पर कई तरह की पाबंदियां लग सकती हैं। इनमें विदेश यात्रा पर रोक, पासपोर्ट से जुड़ी पाबंदियां, बैंक खातों पर कार्रवाई, कर्ज या क्रेडिट कार्ड लेने में परेशानी और हथियार का लाइसेंस लेने पर रोक जैसी पाबंदियां शामिल हो सकती हैं। इसके अलावा सरकारी निगरानी भी बढ़ सकती है। इसलिए किसी पत्रकार का नाम इस सूची में डाला जाना सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई नहीं मानी जाती। इससे उस व्यक्ति की आवाजाही, आर्थिक गतिविधियों और सार्वजनिक कामकाज पर गंभीर असर पड़ सकता है। PoK में क्या चल रहा है? डेनिश इरशाद के खिलाफ यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब PoK में लंबे समय से विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। इन प्रदर्शनों का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी कर रही है। प्रदर्शनकारी राजनीतिक प्रतिनिधित्व, सब्सिडी और शासन व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दे उठा रहे हैं। उनकी मांगों में PoK विधानसभा में पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करना भी शामिल है। पाकिस्तान सरकार ने 5 जून को जेएएसी पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव बढ़ गया। इस दौरान इंटरनेट बंद करने और मीडिया पर पाबंदियां लगाने जैसी कार्रवाई भी हुई। जेएएसी का दावा है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 80 से ज्यादा नागरिक मारे गए हैं। यह आंकड़ा संगठन का दावा है। इसी दौरान डेनिश इरशाद लगातार PoK के हालात की रिपोर्टिंग कर रहे थे। उन्होंने प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के अलावा प्रभावित परिवारों से भी बात की। यही वजह है कि उनके खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के बीच सवाल उठ रहे हैं कि क्या उनकी रिपोर्टिंग और आंदोलन को कवर करने की वजह से उन्हें निशाना बनाया गया। पाकिस्तानी पत्रकारों ने क्या कहा? डेनिश इरशाद को फोर्थ शेड्यूल में डाले जाने की पाकिस्तान के कुछ पत्रकारों और कार्यकर्ताओं ने भी आलोचना की है। पाकिस्तानी पत्रकार सालेह सफीर अब्बासी ने इसे प्रेस की आजादी पर सीधा हमला बताया। उन्होंने कहा कि असहमति रखना अपराध नहीं, बल्कि एक अधिकार है। ब्रिटेन में रहने वाले पाकिस्तानी कार्यकर्ता अजहर अहमद ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि किसी पत्रकार के खिलाफ आतंकवाद रोधी कानून का इस्तेमाल बेहद चिंताजनक है। इससे उन पत्रकारों में डर पैदा हो सकता है, जो विरोध प्रदर्शनों, सरकारी कार्रवाई और मानवाधिकारों की स्थिति पर रिपोर्टिंग करते हैं। न्यूयॉर्क की पाकिस्तानी खोजी पत्रकार अरीबा फातिमा ने भी सवाल उठाया कि इरशाद के खिलाफ न कोई मुकदमा है और न अदालत का आदेश, फिर उन्हें आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची में किस आधार पर डाला गया? सिर्फ
अमेरिका ने कनाडा पर 50% टैरिफ लगाया:तीन दिन की बातचीत के बाद समझौता नहीं हुआ

अमेरिका ने कनाडा से आने वाले 20 अरब डॉलर से ज्यादा के सामान पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। यह कदम दोनों देशों के ट्रेड बातचीत के बाद समझौता नहीं होने के बाद उठाया गया। अमेरिका और कनाडा के अधिकारियों ने वॉशिंगटन डीसी में तीन दिन की बातचीत की थी, लेकिन व्यापार समझौता फाइनल नहीं हो सका। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तय समय सीमा शनिवार को खत्म हो गई है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि उनका देश इन नए टैरिफ का जवाब “डॉलर फॉर डॉलर” देगा। यानी कनाडा भी अमेरिका के सामान पर उतने ही मूल्य का टैरिफ लगाएगा। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
ट्रम्प ने कनाडा पर 50% टैरिफ लगाया:तीन दिन की बातचीत बेनतीजा; पीएम कार्नी बोले- US ने आखिरी समय शर्तें बदली

अमेरिका और कनाडा के बीच 3 दिन तक चली ट्रेड डील की बातचीत नाकाम रही। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार आधी रात से कनाडा के 20 अरब डॉलर के सामान पर 50% टैरिफ लागू कर दिया। यह कनाडा के अमेरिका को सालाना निर्यात का 5% है। अमेरिका और कनाडा के अधिकारियों ने वॉशिंगटन डीसी में तीन दिन की बातचीत की थी, लेकिन व्यापार समझौता फाइनल नहीं हो सका। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि अमेरिका जितना टैरिफ लगाएगा, कनाडा भी उतना ही जवाब देगा। उन्होंने कहा कि, पिछले कुछ हफ्तों में बातचीत में अच्छी प्रगति हुई थी, लेकिन वह कनाडा के हितों को पूरा करने के लिए काफी नहीं थी। आखिरी समय में अमेरिका ने डील की शर्तें बदल दीं। इससे किसी भी समझौते पर भरोसा करना मुश्किल हो गया। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
श्वेता तिवारी को मराठी यूजर्स ने दीं भद्दी गालियां:एक्ट्रेस ने राज ठाकरे से पूछा- क्या आपके सपोर्टर्स ऐसे हैं, क्या ये जायज; जानिए पूरा विवाद

एक्ट्रेस श्वेता तिवारी सोशल मीडिया पर मिल रहीं भद्दी गालियों पर भड़क गई हैं। उन्होंने गाली देने वाले यूजर्स की प्रोफाइल और उनके परिवार की तस्वीरें शेयर की हैं। साथ ही एक्ट्रेस ने राज ठाकरे से पूछा है कि क्या उनके सपोर्टर्स ऐसे हैं, जो खुद को मराठी कहते हैं और महिलाओं को घटिया गालियां देते हैं। श्वेता तिवारी ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम से कुछ ऐसी प्रोफाइल भी शेयर कीं, जिनमें ट्रोलर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के चीफ राज ठाकरे की पार्टी से जुड़ा नजर आ रहा था। श्वेता ने इसके साथ लिखा, आज मैं ऐसी एक बात करना चाहती हूं जो बहुत गहरी चिंता का विषय है और दुर्भाग्य से सोशल मीडिया पर बहुत आम हो चुकी है, किसी भी महिला को गंदी गाली देना। किसी भी महिला को। किसी भी उम्र की। किसी भी पेशे से जुड़ी हुई। कोई भी पुरुष, किसी भी बैकग्राउंड से, ऑनलाइन आकर किसी भी महिला को आपत्तिजनक शब्द कह सकता है। आगे श्वेता ने लिखा, ‘और जो बात मुझे सबसे ज्यादा झकझोरती है, वह यह है कि ये पुरुष जरूरी नहीं कि अनपढ़ हों या किसी खराब माहौल से आते हों। इनमें से बहुत से लोग पढ़े-लिखे हैं, देखने में सम्मानित परिवारों से आते हैं, उनकी पत्नियां हैं, बेटियां हैं, मां हैं और बहनें हैं और फिर भी वे किसी दूसरी महिला के लिए सबसे अपमानजनक शब्द इस्तेमाल करने में बिल्कुल सहज महसूस करते हैं।’ श्वेता तिवारी ने कुछ गाली देने वाले यूजर्स की प्रोफाइल भी शेयर की और साथ ही उनके परिवार की तस्वीरें भी शेयर कीं। राज ठाकरे से पूछा- क्या ऐसा व्यवहार जायज है श्वेता ने एक ऐसी प्रोफाइल दिखाई, जिस पर राज ठाकरे के समर्थन से जुड़ी चीजें पोस्ट की गई थीं। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “एक शख्स राज ठाकरे और उनकी पार्टी का सपोर्टर है। यह बात मेरे लिए थोड़ी पर्सनल हो गई, क्योंकि मैं अपनी पूरी जिंदगी महाराष्ट्र में रही हूं।” उन्होंने आगे लिखा, “मेरे पिता मुंबई में पले-बढ़े। मेरा भी यहीं जन्म हुआ और इसी शहर में मैं बड़ी हुई। पूरी जिंदगी मैंने मराठी माणुस से जुड़े गर्व और सम्मान को महसूस किया है। मैंने मराठी महिलाओं को गर्व से कहते सुना है कि वे मराठी मुलगी हैं।” श्वेता ने कहा, “मुझे लगता है कि मराठी संस्कृति महिलाओं के सम्मान, उनकी ताकत और गरिमा का ख्याल रखती है। लेकिन जब कोई मराठी माणुस किसी महिला को पर्सनल मैसेज करके गाली देता है, तो मुझे हैरानी होती है।” उन्होंने पूछा, “क्या मराठी माणुस का यही मतलब होता है? राज ठाकरे, मैं जानना चाहती हूं कि अगर ऐसे लोग आपके समर्थक हैं, तो क्या आप मानते हैं कि ऐसा व्यवहार जायज है?” एक्ट्रेस ने लिखा, “खुद को मराठी माणुस कहना ही काफी नहीं होता। महिलाओं का सम्मान करना भी मराठी माणुस की पहचान होती है।” श्वेता के मुताबिक, ट्रोल्स इस कदर बेशर्म हो चुके हैं कि उनके 8 साल के बेटे और बेटी पलक को लेकर भी भद्दी बातें बोलते हैं। ऑनलाइन डिलीवरी में कॉकरोच निकलने पर तुकाराम मुंढे को किया टैग श्वेता तिवारी ने गुरुवार को ऑनलाइन एनर्जी ड्रिंक ऑर्डर की थी। जब ऑर्डर खोला गया, तो उसमें कॉकरोच मिलने से एक्ट्रेस घबरा गईं। एक्ट्रेस ने वीडियो जारी कर महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी कार्रवाई से चर्चा में बने हुए FDA ऑफिसर तुकाराम मुंढे से सवाल किया है। ऑफिशियल इंस्टाग्राम से शेयर किए गए वीडियो में श्वेता तिवारी ने कहा, ‘हमने इंस्टामार्ट से रेडबुल मंगवाया। लेकिन इंस्टामार्ट से हमारे घर में ये (कॉकरोच) भी आया। कॉकरोच पूरे घर में भाग रहा है।’ दूसरे वीडियो में श्वेता ने कॉकरोच दिखाया और कहा, ‘क्या हमें तुकाराम मुंढे जी को टैग करना चाहिए। मुंढे जी ये हमारे घर में इंस्टामार्ट से कॉकरोच आ रहे हैं। आप कहां हैं, ध्यान दीजिए।’ द ट्रेटर में नजर आईं श्वेता तिवारी कसौटी जिंदगी की शो से देशभर में पहचान हासिल करने वालीं श्वेता तिवारी इन दिनों अमेजन प्राइम के शो द ट्रेटर्स सीजन 2 में नजर आ रही हैं। इससे पहले श्वेता रियलिटी शो बिग बॉस की विजेता रह चुकी हैं। श्वेता तिवारी अपनी निजी जिंदगी के चलते भी चर्चा में रह चुकी हैं।
हिंदू-मुस्लिम की सोच से बाहर आइए:कंगना रनोट ने शर्मिता टैगोर पर साधा निशाना, वंदे मातरम् पर सीनियर एक्ट्रेस के बयान पर भड़कीं

दिग्गज एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर की वंदे मातरम् पर टिप्पणी के बाद कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया दी है। शर्मिला टैगोर ने कहा था कि वंदे मातरम् के कुछ हिस्से एक ईश्वर को मानने वाले लोगों की आस्था से मेल नहीं खा सकते। उन्होंने कहा कि गीत में कई देवताओं का जिक्र है। कंगना बोलीं- हैरान हूं कि आपकी सोच इतनी छोटी है कंगना ने शर्मिला टैगोर के इंटरव्यू का वीडियो अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर शेयर किया। उन्होंने लिखा, “मैं खुश हूं कि शर्मिला जी ने वंदे मातरम् को लेकर अपनी आपत्ति के बारे में बात की। लेकिन एक कलाकार के तौर पर मैं हैरान हूं कि कला और कविता को लेकर उनकी सोच इतनी छोटी और बनावटी कैसे हो सकती है।” कंगना ने आगे लिखा, “किसी भी कविता या गीत में शब्द रूपक होते हैं। कवि या कलाकार मनचाहा असर पैदा करने के लिए हर तरह की कल्पना करता है और असंभव लगने वाली समानताएं खींचता है। विवेकानंद ने मशहूर तौर पर कहा था कि मुझे ऐसे युवा चाहिए, जो लोहे जैसे बने हों, जिनकी हड्डियां फौलाद की हों और जिनकी नसों में बिजली दौड़ती हो।” उन्होंने कहा, “विवेकानंद मौसम का अनुमान नहीं बता रहे थे। वह केवल शक्ति को जगाने की मांग कर रहे थे। कृपया हिंदू-मुस्लिम सोच से बाहर आइए।” आखिर में कंगना ने लिखा, “भले ही हम एक ईश्वर में विश्वास करते हों, डॉक्टर भी ताकत को शक्ति कहते हैं। आइए, एक-दूसरे को अपनों की तरह अपनाएं। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं और उस जोरदार गले मिलने से भी मुझे परेशानी नहीं है, जैसा आप हमेशा देती हैं।” शर्मिला बोलीं- एक ईश्वर को मानने वालों के लिए कहना मुश्किल शर्मिला टैगोर ने आईएएनएस से अपनी बात समझाते हुए कहा, “मेरी राय यह है कि बहुत से धार्मिक लोग एक ही ईश्वर में विश्वास करते हैं, कई ईश्वरों में नहीं। वंदे मातरम् में एक अंतरा है, जिसमें कई देवताओं का जिक्र किया गया है।” उन्होंने आगे कहा, “जो लोग एक धर्म में विश्वास करते हैं, उनके लिए ‘वंदे काली, वंदे दुर्गा’ कहना मुश्किल है। इसलिए, अगर हम भारत के सभी धार्मिक लोगों को साथ लेकर चलें, तो इसके पहले दो अंतरे बहुत अच्छे हैं।” शर्मिला टैगोर ने अब तक कंगना रनौत की टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। बयानों से चर्चा में हैं कंगना रनोट GenZ को कहा गटरछाप- जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में पहुंचे स्टूडेंट पर कंगना ने कहा था, ‘मैंने अपनी जिंदगी में कभी एक जगह पर इतनी बदसूरती नहीं देखी। Gen Z के विरोध प्रदर्शनों की ये रील्स उल्टी लाने वाली हैं। जिस तरह से वे बात करते हैं और जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं। मैंने अपनी जिंदगी में कभी भी हर एक फ्रेम में सब कुछ इतना खटकने वाला और इतना भद्दा एक साथ नहीं देखा। मैं उन्हें जेनरेशन गटर कहती हूं। उनमें से कुछ के पास सिस्टम को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई-लिखाई में अच्छे नहीं हैं।’ बयान पर विवाद बढ़ने के बाद कंगना ने कहा कि पूरे देश के युवाओं को ‘गटरछाप’ नहीं कहा था। उनका बयान जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में मौजूद एक खास नस्ल को लेकर था। बाबा रामदेव से कहा- मेरी जवानी के सपने न देखें- योग गुरू बाबा रामदेव ने कंगना की आलोचना की है। टीवी 9 भारतवर्ष के साथ बातचीत में बाबा रामदेव ने जेन Z को लेकर कंगना की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “उनका क्वालिफिकेशन क्या है? उनका बचपन कैसा रहा है? उनकी जवानी कैसी रही है? उनके पहले के कारनामे कैसे रहे हैं? मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता। ऐसे किसी भी देश के जवान को, जेन Z को गटर-पटर बोलना, ये बिगड़े हुए दिमाग की निशानी है। गलत बात है। इसके ऊपर जो है, उनके पार्टी के लोगों को संज्ञान लेना चाहिए।” कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए बाबा रामदेव पर पलटवार करते हुए लिखा, “बाबा जी, मेरी जवानी या बेडरूम के बारे में डे-ड्रीम मत कीजिए। कोई सिर्फ अफवाहों और गॉसिप के आधार पर ही ऐसा सोच सकता है। कम से कम मुझे कभी सुप्रीम कोर्ट से झूठे या फर्जी मेडिकल दावों को लेकर फटकार नहीं लगी। इसलिए मुझे चरित्र का पाठ मत पढ़ाइए। आपका चरित्र जैसा भी है, मेरा उससे कहीं बेहतर है। यहां कोई फ्रॉड नहीं मिला है।” महिलाओं को लिखा- यौन संबंधों को अपनी आजादी बताती हैं कंगना ने पोस्ट में लिखा कि पश्चिमी सोच से प्रभावित भारतीय महिलाओं की एक नई पीढ़ी सामने आई है, जिसे वह ‘गटर जेनरेशन’ कहती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इनमें से कुछ के पास समाज को देने के लिए कुछ नहीं है। साथ ही, उन्होंने उनकी सोच और मानसिकता पर भी सवाल उठाए और कहा कि वे अच्छी गृहिणी बनने के लिए भी सक्षम नहीं हैं। इसके बावजूद वे अपनी आजादी का दिखावा करती हैं। नशा, शराब और अनगिनत यौन संबंधों को अपनी आजादी बताती हैं। बेशर्मी से अपने माता-पिता की कमाई पर पलती हैं बेशर्मी से अपने माता-पिता की कमाई पर पलती हैं। लगातार स्वतंत्र जीवन जीने की बातें करती हैं, जबकि वास्तव में वे आत्मनिर्भर होती ही नहीं। एक छोटी-सी बात याद दिला दूं, आजाद जीवन में कमाना पड़ता है। अगर बिना जिम्मेदारी उठाए स्वतंत्र बनने की कोशिश करोगे, तो तुम सिर्फ एक विकृत मानसिकता वाले इंसान हो, ‘गटर छाप’।’ बता दें कि कंगना भाजपा सांसद हैं। वह अक्सर अपने बयानों से चर्चा में रहती हैं। राजनैतिक करियर के साथ-साथ कंगना फिल्मों में भी काम कर रही हैं। जल्द ही वो तनु वेड्स मनु 3 और सीता द इन्कार्नेशन में नजर आएंगी।




