हिंदू-मुस्लिम की सोच से बाहर आइए:कंगना रनोट ने शर्मिता टैगोर पर साधा निशाना, वंदे मातरम् पर सीनियर एक्ट्रेस के बयान पर भड़कीं

दिग्गज एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर की वंदे मातरम् पर टिप्पणी के बाद कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया दी है। शर्मिला टैगोर ने कहा था कि वंदे मातरम् के कुछ हिस्से एक ईश्वर को मानने वाले लोगों की आस्था से मेल नहीं खा सकते। उन्होंने कहा कि गीत में कई देवताओं का जिक्र है। कंगना बोलीं- हैरान हूं कि आपकी सोच इतनी छोटी है कंगना ने शर्मिला टैगोर के इंटरव्यू का वीडियो अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर शेयर किया। उन्होंने लिखा, “मैं खुश हूं कि शर्मिला जी ने वंदे मातरम् को लेकर अपनी आपत्ति के बारे में बात की। लेकिन एक कलाकार के तौर पर मैं हैरान हूं कि कला और कविता को लेकर उनकी सोच इतनी छोटी और बनावटी कैसे हो सकती है।” कंगना ने आगे लिखा, “किसी भी कविता या गीत में शब्द रूपक होते हैं। कवि या कलाकार मनचाहा असर पैदा करने के लिए हर तरह की कल्पना करता है और असंभव लगने वाली समानताएं खींचता है। विवेकानंद ने मशहूर तौर पर कहा था कि मुझे ऐसे युवा चाहिए, जो लोहे जैसे बने हों, जिनकी हड्डियां फौलाद की हों और जिनकी नसों में बिजली दौड़ती हो।” उन्होंने कहा, “विवेकानंद मौसम का अनुमान नहीं बता रहे थे। वह केवल शक्ति को जगाने की मांग कर रहे थे। कृपया हिंदू-मुस्लिम सोच से बाहर आइए।” आखिर में कंगना ने लिखा, “भले ही हम एक ईश्वर में विश्वास करते हों, डॉक्टर भी ताकत को शक्ति कहते हैं। आइए, एक-दूसरे को अपनों की तरह अपनाएं। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं और उस जोरदार गले मिलने से भी मुझे परेशानी नहीं है, जैसा आप हमेशा देती हैं।” शर्मिला बोलीं- एक ईश्वर को मानने वालों के लिए कहना मुश्किल शर्मिला टैगोर ने आईएएनएस से अपनी बात समझाते हुए कहा, “मेरी राय यह है कि बहुत से धार्मिक लोग एक ही ईश्वर में विश्वास करते हैं, कई ईश्वरों में नहीं। वंदे मातरम् में एक अंतरा है, जिसमें कई देवताओं का जिक्र किया गया है।” उन्होंने आगे कहा, “जो लोग एक धर्म में विश्वास करते हैं, उनके लिए ‘वंदे काली, वंदे दुर्गा’ कहना मुश्किल है। इसलिए, अगर हम भारत के सभी धार्मिक लोगों को साथ लेकर चलें, तो इसके पहले दो अंतरे बहुत अच्छे हैं।” शर्मिला टैगोर ने अब तक कंगना रनौत की टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। बयानों से चर्चा में हैं कंगना रनोट GenZ को कहा गटरछाप- जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में पहुंचे स्टूडेंट पर कंगना ने कहा था, ‘मैंने अपनी जिंदगी में कभी एक जगह पर इतनी बदसूरती नहीं देखी। Gen Z के विरोध प्रदर्शनों की ये रील्स उल्टी लाने वाली हैं। जिस तरह से वे बात करते हैं और जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं। मैंने अपनी जिंदगी में कभी भी हर एक फ्रेम में सब कुछ इतना खटकने वाला और इतना भद्दा एक साथ नहीं देखा। मैं उन्हें जेनरेशन गटर कहती हूं। उनमें से कुछ के पास सिस्टम को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई-लिखाई में अच्छे नहीं हैं।’ बयान पर विवाद बढ़ने के बाद कंगना ने कहा कि पूरे देश के युवाओं को ‘गटरछाप’ नहीं कहा था। उनका बयान जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में मौजूद एक खास नस्ल को लेकर था। बाबा रामदेव से कहा- मेरी जवानी के सपने न देखें- योग गुरू बाबा रामदेव ने कंगना की आलोचना की है। टीवी 9 भारतवर्ष के साथ बातचीत में बाबा रामदेव ने जेन Z को लेकर कंगना की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “उनका क्वालिफिकेशन क्या है? उनका बचपन कैसा रहा है? उनकी जवानी कैसी रही है? उनके पहले के कारनामे कैसे रहे हैं? मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता। ऐसे किसी भी देश के जवान को, जेन Z को गटर-पटर बोलना, ये बिगड़े हुए दिमाग की निशानी है। गलत बात है। इसके ऊपर जो है, उनके पार्टी के लोगों को संज्ञान लेना चाहिए।” कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए बाबा रामदेव पर पलटवार करते हुए लिखा, “बाबा जी, मेरी जवानी या बेडरूम के बारे में डे-ड्रीम मत कीजिए। कोई सिर्फ अफवाहों और गॉसिप के आधार पर ही ऐसा सोच सकता है। कम से कम मुझे कभी सुप्रीम कोर्ट से झूठे या फर्जी मेडिकल दावों को लेकर फटकार नहीं लगी। इसलिए मुझे चरित्र का पाठ मत पढ़ाइए। आपका चरित्र जैसा भी है, मेरा उससे कहीं बेहतर है। यहां कोई फ्रॉड नहीं मिला है।” महिलाओं को लिखा- यौन संबंधों को अपनी आजादी बताती हैं कंगना ने पोस्ट में लिखा कि पश्चिमी सोच से प्रभावित भारतीय महिलाओं की एक नई पीढ़ी सामने आई है, जिसे वह ‘गटर जेनरेशन’ कहती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इनमें से कुछ के पास समाज को देने के लिए कुछ नहीं है। साथ ही, उन्होंने उनकी सोच और मानसिकता पर भी सवाल उठाए और कहा कि वे अच्छी गृहिणी बनने के लिए भी सक्षम नहीं हैं। इसके बावजूद वे अपनी आजादी का दिखावा करती हैं। नशा, शराब और अनगिनत यौन संबंधों को अपनी आजादी बताती हैं। बेशर्मी से अपने माता-पिता की कमाई पर पलती हैं बेशर्मी से अपने माता-पिता की कमाई पर पलती हैं। लगातार स्वतंत्र जीवन जीने की बातें करती हैं, जबकि वास्तव में वे आत्मनिर्भर होती ही नहीं। एक छोटी-सी बात याद दिला दूं, आजाद जीवन में कमाना पड़ता है। अगर बिना जिम्मेदारी उठाए स्वतंत्र बनने की कोशिश करोगे, तो तुम सिर्फ एक विकृत मानसिकता वाले इंसान हो, ‘गटर छाप’।’ बता दें कि कंगना भाजपा सांसद हैं। वह अक्सर अपने बयानों से चर्चा में रहती हैं। राजनैतिक करियर के साथ-साथ कंगना फिल्मों में भी काम कर रही हैं। जल्द ही वो तनु वेड्स मनु 3 और सीता द इन्कार्नेशन में नजर आएंगी।
पेरू में 6.7 तीव्रता का भूकंप आया:झटके कई इलाकों में महसूस हुए, नुकसान की खबर नहीं

पेरू के दक्षिणी हिस्से में गुरुवार को 6.7 तीव्रता का भूकंप आया। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के मुताबिक, भूकंप से नुकसान की तुरंत कोई खबर नहीं मिली। यूएसजीएस ने बताया कि भूकंप स्थानीय समय के अनुसार दोपहर 1 बजे (भारतीय समयानुसार रात 11:30 बजे) आया। इसका केंद्र आयाकूचो क्षेत्र के पैरिनाकोचास प्रांत में उपाहुआचो शहर से 38 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था। भूकंप का केंद्र 66 किमी अंदर था, कई इलाकों में झटके भूकंप की गहराई 66.7 किलोमीटर थी। दक्षिणी पेरू के कई इलाकों में इसके झटके महसूस किए गए, जिनमें इका और अरेकिपा भी शामिल हैं। पेरू में अक्सर आते हैं भूकंप पेरू प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर का हिस्सा है। यह इलाका भूकंपीय गतिविधियों के लिए जाना जाता है, इसलिए यहां अक्सर भूकंप आते हैं। साल 2007 में इका क्षेत्र के एक प्रांत में 7.9 तीव्रता का भूकंप आया था। इसमें करीब 600 लोगों की मौत हुई थी।
इमरान खान को अस्पताल ले जाने की तैयारी:इस्लामाबाद के शिफा अस्पताल में भारी सुरक्षा; सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इलाज

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को रावलपिंडी की अडियाला जेल से इलाज के लिए इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाने की तैयारी शुरू हो गई है। CNN-न्यूज18 को मिली जानकारी के मुताबिक, उन्हें कुछ ही देर में कड़ी सुरक्षा के बीच अस्पताल शिफ्ट किया जा सकता है। यह कदम पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उठाया जा रहा है। उनके परिवार और वकीलों ने उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई थी और अपनी पसंद के डॉक्टरों से इलाज के लिए उन्हें निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की थी। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
होर्मुज में अमेरिका पर ईरान भारी पड़ रहा:ट्रम्प की धमकी के बावजूद जहाज ईरानी रास्ते से जा रहे, सिर्फ 3 ने ओमानी रास्ता चुना

होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले ज्यादातर जहाज अपनी पहचान या रास्ता छिपा रहे हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 से 19 अगस्त के बीच 236 जहाज यहां से गुजरे, लेकिन 148 जहाजों की राह साफ तौर पर पता नहीं चल सकी। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ट्रम्प की धमकियों के बावजूद कई जहाज ईरानी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे यह सवाल उठता है कि होर्मुज स्ट्रेट में इस समय अमेरिका का दबदबा ज्यादा है या ईरान का। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का दावा है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले समुद्री यातायात पर अमेरिकी सेना का नियंत्रण है। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि अमेरिका इस इलाके की जिम्मेदारी अपने हाथ में लेने की कोशिश कर सकता है। वहीं, ईरान का कहना है कि तेहरान की मंजूरी के बिना कोई जहाज होर्मुज स्ट्रेट से नहीं गुजर सकता। ऐसे में दोनों देशों के दावों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि वास्तव में इस रणनीतिक जलमार्ग पर किसका नियंत्रण है। जहाजों की आवाजाही के आंकड़े इस सवाल का अहम संकेत देते हैं। ईरान और अमेरिका के अलग-अलग दावे ट्रम्प ने ओमान पर बमबारी की धमकी भी दी है। ओमान अमेरिका का सहयोगी है और होर्मुज स्ट्रेट के दूसरी तरफ ईरान के सामने स्थित है। स्ट्रेट का समुद्री इलाका ईरान और ओमान दोनों के अधिकार क्षेत्र में आता है। ट्रम्प की धमकी का मकसद मस्कट को तेहरान के साथ होर्मुज स्ट्रेट का संयुक्त संचालन करने के समझौते से रोकना बताया गया है। युद्ध के बाद दो रास्तों में बंटा होर्मुज युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज को एक ही समुद्री रास्ता माना जाता था। जहाज तय रास्ते से गुजरते थे। उनका रास्ता बंदरगाह, जहाज के समझौते और सुरक्षा को देखकर तय होता था। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद यहां दो अलग रास्तों की बात होने लगी। ईरानी रास्ता: यह होर्मुज के उत्तरी हिस्से में ईरान के तट के पास है। यह लारक और किश्म द्वीपों के करीब से गुजरता है और ईरान के बंदरगाहों और तेल टर्मिनलों तक जाता है। ओमानी रास्ता: यह होर्मुज के दक्षिणी हिस्से में ओमान के करीब है और ईरान के तट से दूर है। अमेरिका इसी रास्ते से जहाजों को गुजरने पर जोर देता है। अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा में चलने वाले कई वाणिज्यिक जहाज भी इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। 80% से ज्यादा जहाजों का रास्ता पता नहीं समुद्री खुफिया कंपनी केप्लर के मुताबिक, 1 से 19 अगस्त के बीच 112 तेल, एलपीजी और एलएनजी ले जाने वाले जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे। इनमें से 21 जहाज खुले तौर पर ईरानी रास्ते से गए, जबकि सिर्फ 2 जहाजों ने ओमानी रास्ते का इस्तेमाल किया। बाकी 89 जहाजों का रास्ता साफ नहीं था। यानी इस दौरान होर्मुज से गुजरने वाले 80% से ज्यादा तेल और गैस वाले जहाजों की आवाजाही पूरी तरह ट्रैक नहीं हो सकी। ऐसा तब होता है जब जहाज अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) बंद कर देते हैं। कई बार जहाज का AIS डेटा केप्लर के तय ईरानी या ओमानी रास्तों से मेल भी नहीं खाता। ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि जहाज वास्तव में किस रास्ते से गुजरा। सभी तरह के जहाजों में भी ईरानी रास्ता आगे 1 से 19 अगस्त के बीच कुल 236 जहाज स्ट्रेट से गुजरे। इनमें तेल और गैस के अलावा सूखा माल और रसायन ले जाने वाले जहाज भी शामिल थे। यानी हर 10 में से 6 से ज्यादा जहाज किस रास्ते से गुजरे, यह साफ तौर पर पता नहीं चल सका। जहाज AIS क्यों बंद कर रहे हैं? युद्ध शुरू होने के बाद ईरान और अमेरिका दोनों ने अपने बताए समुद्री रास्तों या नियमों का पालन नहीं करने वाले जहाजों को चेतावनी दी। कुछ मामलों में जहाजों पर हमले भी हुए। इसी वजह से कई जहाज अपना ट्रांसपोंडर बंद कर रहे हैं। इससे उनकी सही स्थिति और वे किस रास्ते से जा रहे हैं, इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। ब्रिटेन के थिंक टैंक चैथम हाउस के एसोसिएट फेलो नील क्विलियम ने अल जजीरा से कहा कि ट्रांसपोंडर बंद करने से जहाज की आवाजाही कम दिखाई देती है। हालांकि, इससे समुद्री सुरक्षा का खतरा भी बढ़ जाता है। उनके मुताबिक, कुछ जहाज संचालकों को लगता है कि मौजूदा हालात में व्यापार जारी रखने का फायदा इन सुरक्षा जोखिमों से ज्यादा है। रास्ते में जहाजों के बीच सामान भी बदला जा रहा ट्रांसपोंडर बंद करने की एक वजह समुद्र में दो जहाजों के बीच सामान का ट्रांसफर भी है। एनर्जी एक्सपर्ट मार्क अयूब ने अल जजीरा से कहा कि सऊदी अरब, इराक और कुवैत समेत कुछ खाड़ी देशों ने ओमानी रास्ते से कुछ खेप भेजीं। इसके लिए कुछ जहाजों की ट्रैकिंग बंद की गई और रास्ते में दूसरे जहाजों को माल सौंपा गया। उनके मुताबिक, कुछ ईरानी जहाज भी ओमानी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका मकसद प्रतिबंधों और अमेरिकी नाकाबंदी से बचना है। क्या आंकड़े ईरान के दबदबे की ओर इशारा कर रहे हैं? 148 जहाजों का रास्ता साफ नहीं होने की वजह से यह तय करना मुश्किल है कि वास्तव में कितने जहाज ईरानी या ओमानी रास्ते से गुजरे। फिर भी उपलब्ध आंकड़ों से एक बात सामने आती है। अमेरिकी नाकाबंदी और ट्रम्प की धमकियों के बावजूद हर पांच में से एक जहाज खुले तौर पर ईरानी रास्ते से गुजरा। सभी तरह के जहाजों को मिलाकर देखें तो 35% जहाजों ने सार्वजनिक रूप से ईरानी रास्ते का इस्तेमाल किया। इसके मुकाबले ओमानी या पुराने रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या बहुत कम रही। इससे संकेत मिलता है कि कई जहाज अमेरिकी धमकियों के बावजूद ईरानी रास्ते का इस्तेमाल करने को तैयार हैं। यानी मौजूदा हालात में ईरान को नाराज करने का डर ट्रम्प की धमकियों से ज्यादा असरदार दिखाई दे रहा है। होर्मुज दुनिया के लिए इतना अहम क्यों है अमेरिका-इजराइल का ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के तेल और एलएनजी की करीब एक-पांचवीं सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती थी। तब हर दिन करीब 130 जहाज यहां से गुजरते थे। इसके मुकाबले अगस्त के 19 दिनों में कुल 236
जब लाश बना दिए जाओ, तो रोना मत:कंगना ने नीले ड्रम की तस्वीर शेयर कर मॉडर्न डेटिंग पर उठाए सवाल, कहा- रिश्ते बॉडी काउंट तक सिमट गए हैं

बैंग्लोर में रहनेवाली एक महिला ने बॉयफ्रेंड संग मिलकर पति और 5 साल के बेटे की हत्या कर दी। कंगना रनोट ने कड़े शब्दों में इस केस की निंदा की और साथ ही नीले ड्रम की तस्वीर शेयर की है। उनका कहना है कि मॉडर्न डेटिंग अब सिर्फ बॉडी काउंट तक सिमट गई है। कंगना ने कहा है कि जो दूसरे परिवारों के साथ हो रहा है वो जल्द ही आपके परिवार के साथ भी हो सकता है। कंगना ने केस पर लिखा है, ‘हर दूसरे दिन ऐसी खबरें पढ़ने को मिलती हैं कि महिलाएं, आदमियों को पहाड़ से फेंक रही हैं या आदमी महिलाओं को नीले ड्रमों में पैक कर रहे हैं। पश्चिमीकरण करना आसान है, लेकिन पश्चिम में लोग एक-दूसरे को खत्म नहीं कर रहे हैं। अरेंज्ड मैरिज या रूढ़िवादी संस्कृति के सामाजिक दबाव में रहना तब तक बहुत अच्छा लगता है, जब तक वह आपका अपना बच्चा पैदा करने तक न पहुंच जाए।’ आगे कंगना ने लिखा, ‘जाग जाइए। बेंचिंग, घोस्टिंग, क्रम्बिंग और बॉडी काउंट जैसी इस संस्कृति को आपको असंवेदनशील न बनाने दें। एक बार जब आप इसे सामान्य मानने लगते हैं, तो इंसानों के साथ आपके रिश्ते महज ‘बॉडी काउंट’ तक सिमट जाते हैं। फिर जब आपको भी एक लाश में बदल दिया जाएगा, तो रोइए मत। इंसानी रिश्तों को सिर्फ ‘बॉडी काउंट’ मानने वाली पश्चिमी संस्कृति को ना कहिए। मुझे ट्रोल करने के लिए तैयार हो जाइए, लेकिन याद रखिए, यहां आसपास एक नीला ड्रम भी है। हा हा। बाय, आपका दिन शुभ हो।’ कंगना ने आगे एक नीले ड्रम की तस्वीर शेयर कर कहा, उन सभी दोस्तों के लिए, जो सोचते हैं कि इंसानी रिश्तों को ‘बॉडी काउंट’ कहना और इंसानों को सिर्फ शरीर बना देना ठीक है। मैंने तो कुछ कहा ही नहीं। आगे कंगना ने लिखा, आज आप दूसरों के परिवार के लिए इसे आम बना रहे हैं, कल आपके परिवार के साथ ऐसा होगा। क्या है बैंग्लोर मर्डर केस बयानों से चर्चा में हैं कंगना रनोट GenZ को कहा गटरछाप- जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में पहुंचे स्टूडेंट पर कंगना ने कहा था, ‘मैंने अपनी जिंदगी में कभी एक जगह पर इतनी बदसूरती नहीं देखी। Gen Z के विरोध प्रदर्शनों की ये रील्स उल्टी लाने वाली हैं। जिस तरह से वे बात करते हैं और जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं। मैंने अपनी जिंदगी में कभी भी हर एक फ्रेम में सब कुछ इतना खटकने वाला और इतना भद्दा एक साथ नहीं देखा। मैं उन्हें जेनरेशन गटर कहती हूं। उनमें से कुछ के पास सिस्टम को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई-लिखाई में अच्छे नहीं हैं।’ बयान पर विवाद बढ़ने के बाद कंगना ने कहा कि पूरे देश के युवाओं को ‘गटरछाप’ नहीं कहा था। उनका बयान जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में मौजूद एक खास नस्ल को लेकर था। बाबा रामदेव से कहा- मेरी जवानी के सपने न देखें- योग गुरू बाबा रामदेव ने कंगना की आलोचना की है। टीवी 9 भारतवर्ष के साथ बातचीत में बाबा रामदेव ने जेन Z को लेकर कंगना की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “उनका क्वालिफिकेशन क्या है? उनका बचपन कैसा रहा है? उनकी जवानी कैसी रही है? उनके पहले के कारनामे कैसे रहे हैं? मैं ऐसे लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता। ऐसे किसी भी देश के जवान को, जेन Z को गटर-पटर बोलना, ये बिगड़े हुए दिमाग की निशानी है। गलत बात है। इसके ऊपर जो है, उनके पार्टी के लोगों को संज्ञान लेना चाहिए।” कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए बाबा रामदेव पर पलटवार करते हुए लिखा, “बाबा जी, मेरी जवानी या बेडरूम के बारे में डे-ड्रीम मत कीजिए। कोई सिर्फ अफवाहों और गॉसिप के आधार पर ही ऐसा सोच सकता है। कम से कम मुझे कभी सुप्रीम कोर्ट से झूठे या फर्जी मेडिकल दावों को लेकर फटकार नहीं लगी। इसलिए मुझे चरित्र का पाठ मत पढ़ाइए। आपका चरित्र जैसा भी है, मेरा उससे कहीं बेहतर है। यहां कोई फ्रॉड नहीं मिला है।”
सलमान की याचिका पर हटवाया गया काला हिरण का टीजर:प्रोड्यूसर ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जानिए क्या है विवाद

फिल्म निर्माता अमित जानी ने अपनी फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लिगेसी’ का टीजर हटाने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। हाईकोर्ट ने सलमान खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए टीजर और इससे जुड़ी प्रचार सामग्री हटाने का निर्देश दिया था। यह फिल्म बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान से जुड़े 1998 के चर्चित काले हिरण के शिकार मामले से प्रेरित बताई जा रही है। सलमान की शिकायत के बाद हाईकोर्ट ने उनके व्यक्तित्व अधिकारों के कथित उल्लंघन का हवाला देते हुए प्रचार सामग्री हटाने का आदेश दिया था। जानी ने अपनी अपील में कहा है कि यह आदेश अनुचित सेंसरशिप है और उनके अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार को सीमित करता है। उनका कहना है कि सार्वजनिक रिकॉर्ड और ऐतिहासिक कानूनी मामलों पर किसी का एकाधिकार नहीं हो सकता। जानी ने हाईकोर्ट के आदेश को जल्दबाजी बताया कानूनी विवाद के बीच फिल्म निर्माता की सुरक्षा को लेकर भी चिंता सामने आई है। जानी का दावा है कि संगठित आपराधिक समूहों ने उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां दी हैं। इन समूहों ने उनसे फिल्म प्रोजेक्ट छोड़ने की मांग की है। जानी ने अपील में कहा कि हाईकोर्ट ने उनकी कानूनी टीम को अपना पक्ष रखने का उचित मौका दिए बिना ही रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया। सलमान की याचिका पर टीजर और इंटरव्यू हटाने का आदेश यह घटनाक्रम उस आदेश के बाद सामने आया है, जो हाईकोर्ट ने सलमान खान की व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया था। 27 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ के टीजर को सोशल मीडिया से हटाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर प्रोड्यूसर 24 घंटे के अंदर टीजर के लिंक नहीं हटाते हैं, तो एक्स (ट्विटर) और यूट्यूब जैसी इंटरनेट कंपनियों को इसे हटाने के आदेश दिए जाएंगे। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस ज्योति सिंह ने फिल्म के प्रोड्यूसर अमित जानी के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि आरोपी हर दिन अपनी सीमाएं पार कर रहा है और खुद को कानून से ऊपर समझ रहा है। जज ने टिप्पणी की कि किसी सामान्य नागरिक के साथ भी ऐसा बर्ताव नहीं किया जा सकता। साख बनाने में बहुत मेहनत लगती है और एक बार छवि खराब होने के बाद उसे वापस पाना आसान नहीं होता। अदालत ने फिल्म निर्माता अमित जानी के दिए इंटरव्यू भी हटाने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा की सुरक्षा जरूरी है। कोर्ट ने फिल्म में अभिनेता के संदर्भ दिखाई देने पर चिंता भी जताई थी। अदालत ने संकेत दिया था कि वह बाद में ज्यादा कड़ी टिप्पणियों वाला विस्तृत आदेश जारी करेगी। सलमान ने लगाए ये आरोप लमान खान के पक्ष के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि टीजर में एक किरदार को सलमान जैसी शक्ल और उनका मशहूर ब्रेसलेट पहनाकर दिखाया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि फिल्म सलमान खान और 1998 के काला हिरण केस पर आधारित है। सलमान की ओर से बताया गया कि उन्होंने पहले प्रोड्यूसर को लीगल नोटिस भेजा था, लेकिन अमित जानी ने एक इंटरव्यू में उस नोटिस को फाड़ दिया और इंटरनेट पर धमकियां मिलने का दावा करने लगे। याचिका में यह भी कहा गया है कि एक पोस्टर में किरदार राइफल पकड़े दिखाया गया है। सलमान ने दावा किया है कि इस तरह के चित्रण से लोग भ्रमित हो सकते हैं। याचिका में आगे कहा गया है कि यह बात खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि 1998 के मामले से जुड़ी आर्म्स एक्ट की कार्यवाही में सलमान खान बरी हो चुके हैं। प्रोड्यूसर की दलील- किसी का नाम इस्तेमाल नहीं हुआ सुनवाई के दौरान प्रोड्यूसर अमित जानी के वकील ने पक्ष रखते हुए कहा कि फिल्म में सलमान खान का नाम कहीं इस्तेमाल नहीं हुआ है। टीजर में किसी एआई (AI) या डीपफेक तकनीक का प्रयोग भी नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक टीजर है और सार्वजनिक घटनाओं पर फिल्म बनाने से किसी के पर्सनल राइट्स का हनन नहीं होता। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि मामला अदालत में लंबित रहने के दौरान ऐसी चीजें सार्वजनिक करना अवमानना के दायरे में आता है।
सलमान की याचिका पर हटवाया गया काला हिरण का टीजर:प्रोड्यूसर ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जानिए क्या है विवाद

फिल्म निर्माता अमित जानी ने अपनी फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लिगेसी’ का टीजर हटाने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। हाईकोर्ट ने सलमान खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए टीजर और इससे जुड़ी प्रचार सामग्री हटाने का निर्देश दिया था। यह फिल्म बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान से जुड़े 1998 के चर्चित काले हिरण के शिकार मामले से प्रेरित बताई जा रही है। सलमान की शिकायत के बाद हाईकोर्ट ने उनके व्यक्तित्व अधिकारों के कथित उल्लंघन का हवाला देते हुए प्रचार सामग्री हटाने का आदेश दिया था। जानी ने अपनी अपील में कहा है कि यह आदेश अनुचित सेंसरशिप है और उनके अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार को सीमित करता है। उनका कहना है कि सार्वजनिक रिकॉर्ड और ऐतिहासिक कानूनी मामलों पर किसी का एकाधिकार नहीं हो सकता। जानी ने हाईकोर्ट के आदेश को जल्दबाजी बताया कानूनी विवाद के बीच फिल्म निर्माता की सुरक्षा को लेकर भी चिंता सामने आई है। जानी का दावा है कि संगठित आपराधिक समूहों ने उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां दी हैं। इन समूहों ने उनसे फिल्म प्रोजेक्ट छोड़ने की मांग की है। जानी ने अपील में कहा कि हाईकोर्ट ने उनकी कानूनी टीम को अपना पक्ष रखने का उचित मौका दिए बिना ही रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया। सलमान की याचिका पर टीजर और इंटरव्यू हटाने का आदेश यह घटनाक्रम उस आदेश के बाद सामने आया है, जो हाईकोर्ट ने सलमान खान की व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया था। 27 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ के टीजर को सोशल मीडिया से हटाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर प्रोड्यूसर 24 घंटे के अंदर टीजर के लिंक नहीं हटाते हैं, तो एक्स (ट्विटर) और यूट्यूब जैसी इंटरनेट कंपनियों को इसे हटाने के आदेश दिए जाएंगे। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस ज्योति सिंह ने फिल्म के प्रोड्यूसर अमित जानी के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि आरोपी हर दिन अपनी सीमाएं पार कर रहा है और खुद को कानून से ऊपर समझ रहा है। जज ने टिप्पणी की कि किसी सामान्य नागरिक के साथ भी ऐसा बर्ताव नहीं किया जा सकता। साख बनाने में बहुत मेहनत लगती है और एक बार छवि खराब होने के बाद उसे वापस पाना आसान नहीं होता। अदालत ने फिल्म निर्माता अमित जानी के दिए इंटरव्यू भी हटाने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा की सुरक्षा जरूरी है। कोर्ट ने फिल्म में अभिनेता के संदर्भ दिखाई देने पर चिंता भी जताई थी। अदालत ने संकेत दिया था कि वह बाद में ज्यादा कड़ी टिप्पणियों वाला विस्तृत आदेश जारी करेगी। सलमान ने लगाए ये आरोप लमान खान के पक्ष के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि टीजर में एक किरदार को सलमान जैसी शक्ल और उनका मशहूर ब्रेसलेट पहनाकर दिखाया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि फिल्म सलमान खान और 1998 के काला हिरण केस पर आधारित है। सलमान की ओर से बताया गया कि उन्होंने पहले प्रोड्यूसर को लीगल नोटिस भेजा था, लेकिन अमित जानी ने एक इंटरव्यू में उस नोटिस को फाड़ दिया और इंटरनेट पर धमकियां मिलने का दावा करने लगे। याचिका में यह भी कहा गया है कि एक पोस्टर में किरदार राइफल पकड़े दिखाया गया है। सलमान ने दावा किया है कि इस तरह के चित्रण से लोग भ्रमित हो सकते हैं। याचिका में आगे कहा गया है कि यह बात खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि 1998 के मामले से जुड़ी आर्म्स एक्ट की कार्यवाही में सलमान खान बरी हो चुके हैं। प्रोड्यूसर की दलील- किसी का नाम इस्तेमाल नहीं हुआ सुनवाई के दौरान प्रोड्यूसर अमित जानी के वकील ने पक्ष रखते हुए कहा कि फिल्म में सलमान खान का नाम कहीं इस्तेमाल नहीं हुआ है। टीजर में किसी एआई (AI) या डीपफेक तकनीक का प्रयोग भी नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक टीजर है और सार्वजनिक घटनाओं पर फिल्म बनाने से किसी के पर्सनल राइट्स का हनन नहीं होता। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि मामला अदालत में लंबित रहने के दौरान ऐसी चीजें सार्वजनिक करना अवमानना के दायरे में आता है।
अमेरिका से 5200 भारतीय डिपोर्ट; इनमें प्रोफेशनल्स-छात्र भी:हर तीसरे सप्ताह में 1 डिपोर्टेशन फ्लाइट, कनाडा में 1500 भारतीय छात्रों पर डिपोर्टेशन का खतरा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दूसरे साल मिशन डिपोर्टेशन तेज कर दिया है। इस अगस्त के पहले 15 दिन में ही 5200 से अधिक भारतीयों को डिपोर्ट किया जा चुका है।इस बार की डिपोर्टेशन लिस्ट में एच-1 बी, ओ-1 और स्टूडेंट वीसा पर अमेरिका गए भारतीय भी शामिल हैं। इन प्रोफेशनल्स की भी अच्छी खासी संख्या है। इस साल हर तीसरे हफ्ते में एक डिपोर्टेशन फ्लाइट रवाना की गई। वहीं, कनाडा के अल्बर्टा प्रांतीय सरकार ने पोस्ट ग्रेजुएशन वर्क परमिट (पीजीडब्ल्यूपी) रद्द कर दिया। अब वहां पर पढ़ाई कर रहे लगभग 1500 भारतीय छात्रों पर डिपोटेंशन का खतरा बढ़ गया है। 2025 में डिपोर्ट किए गए भारतीयों की संख्या 16 साल में सबसे ज्यादा इमिग्रेशन एजेंसी (आईस) के एक अधिकारी के अनुसार अवैध प्रवासियों के खिलाफ इनकी धरपकड़ और डिपोर्टेशन दोनों की संख्या बढ़ी है। साल के अंत तक डिपोर्ट किए जाने वाले अवैध प्रवासियों की रिकॉर्ड संख्या होने वाली है। जबकि, पिछले साल डिपोर्ट किए गए 3567 भारतीयों में सभी ऐसे थे, जो अवैध रूप से अमेरिका में आए थे। आईएस ने जून में ही 801 भारतीयों को रिमूवल ऑर्डर (वापसी आदेश) जारी किया। हालांकि, इस रिमूवल ऑर्डर से तुरंत डिपोर्टेशन नहीं होता है। इसके खिलाफ कोर्ट में अपील की जा सकती है या फिर संबंधित व्यक्ति अपनी इच्छा से अमेरिका को छोड़ सकता है। 2025 में डिपोर्ट किए गए भारतीयों की संख्या 16 साल में सर्वाधिक स्तर पर थी। ट्रैफिक लाइट पार करने या सोशल मीडिया पोस्ट पर भी कार्रवाई ट्रैफिक लाइट पार करने या सोशल मीडिया पोस्ट पर भी कार्रवाई, तुरंत डिपोर्ट कर रहे वैध वीसा पर आए प्रोफेशनल्स को किसी भी उल्लंघन का आरोप लगा डिपोर्ट किया जा रहा है। अमेरिका के किसी शहर में ट्रैफिक लाइट पार करने पर छात्रों को डिपोर्ट करने के मामले सामने आए हैं। कुछ छात्रों द्वारा सोशल मीडिया जैसे एक्स, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर ट्रम्प सरकार की आलोचना का दोषी मानकर डिपोर्ट कर दिया गया। टेक्सास में एच-1बी वीसा होल्डर की जॉब चली गई। उसके पास 60 दिन तक अमेरिका में रहकर नई जॉब सर्च करने का अधिकार था। इस बीच, एक रेस्तरां में पार्ट टाइम जॉब करते समय आईस ने रेड डाली। वीसा होल्डर को पकड़ लिया गया। उसे आईस ने वीसा उल्लंघन का दोषी माना और भारत डिपोर्ट कर दिया। कनाडा में 1500 भारतीय छात्रों पर डिपोर्टेशन का खतरा, वर्क परमिट रद्द कनाडा की अल्बर्टा प्रांतीय सरकार की ओर से पोस्ट ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) रद्द किए जाने से वहां पढ़ाई कर रहे करीब 1,500 भारतीय छात्रों पर डिपोर्टेशन का खतरा बढ़ गया है। कनाडा में वर्क परमिट होने से ये सभी छात्र स्टडी-जॉब प्रोग्राम में शामिल थे। यानी ये सभी स्टडी के बाद जॉब भी कर रहे थे। अल्बर्टा के इन छात्रों ने धरना-प्रदर्शन किया। फिलहाल कनाडा इमिग्रेशन का कहना है कि कुछ समय तक ये छात्र जॉब कर सकते हैं। लेकिन, इन छात्रों का कहना है कि कनाडा सरकार की ओर से जॉब गारंटी को बढ़ाया जाना चाहिए। इसके लिए नए कानून बनाए जाएं। पीएम बोले- बिना वैध वीजा-वर्क परमिट वाले छात्रों को जाना होगा उधर, कनाडा के पीएम मार्क कार्नी का कहना है कि जिन छात्रों के पास यहां रहने का वैध वीसा या फिर वर्क परमिट नहीं है, उन्हें जाना ही पड़ेगा। अल्बर्टा के प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने और भी सख्त रवैया अपनाया है। उन्होंने कहा, स्टडी वीसा अस्थायी दस्तावेज है। विदेशी छात्र इस आधार पर कनाडा में हमेशा के लिए नहीं रह सकते हैं। हमारे कॉलेज पहले अल्बर्टा के टैक्सपेयर्स के लिए हैं। यहां पढ़ने वाले छात्रों को स्टडी पूरी करने के बाद अपने देश लौटना ही पड़ेगा। जहां तक नियमों की बात है, कनाडा आने वाले हरेक विदेशी छात्र को इन्हें मानना ही होगा। टेक्सास के हालिंग से 20 घंटे की फ्लाइट से नई दिल्ली भेजा जा रहा ह्यूमन राइट्स फर्स्ट संगठन के अनुसार भारतीयों को ओमानी एयरवेज से डिपोर्ट कर रहे हैं। टेक्सास के हालिंग से 20 घंटे की फ्लाइट से नई दिल्ली भेजा जा रहा है। इस साल डिपोर्टेशन उड़ानों का इस्तेमाल किया जा रहा है। पिछले साल अमेरिका ने सैन्य विमान हरक्यूलिस से डिपोर्ट किया था। 2025 में 3,567 भारतीय अमेरिका से डिपोर्ट हुए थे 2025 में अमेरिका ने 3,567 भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया था। यह जानकारी भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने जून 2026 में दी थी। विदेश मंत्रालय ने बताया कि 2026 में जून तक 1,076 भारतीयों को डिपोर्ट किया गया है। 5 फरवरी 2025 को अमेरिका ने पहली बार सैन्य विमान से 104 भारतीयों को अमृतसर भेजा था। इस दौरान कई लोगों को हथकड़ी और पैरों में बेड़ियां लगी थीं। इसकी तस्वीरें सामने आने के बाद देशभर में विवाद हुआ। संसद में भी हंगामा हुआ था। ———— ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में 15 हजार भारतीयों की छंटनी, नई जॉब नहीं:H-1B पर गए थे, ट्रम्प के सख्त नियम से अब डिपोर्ट का खतरा अमेरिका में 15 हजार भारतीय टेक कर्मियों की नौकरी जाने के बाद उनके सामने संकट खड़ा हो गया है। पूरी खबर पढ़ें…
ट्रम्प का ईरान पर सबसे बड़े आर्थिक प्रतिबंधों का ऐलान:बोले- जो देश मदद करेगा उस पर भी एक्शन लेंगे, तेल तस्करी नेटवर्क निशाने पर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने समझौते का मौका गंवा दिया, इसलिए अब उसे आर्थिक तौर पर अलग-थलग किया जाएगा। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि ईरान की मदद करने वाले देशों और संस्थाओं पर भी कार्रवाई होगी। इसमें बैंक, कंपनियां, एयरपोर्ट और सरकारी संस्थाएं शामिल हैं। उन्होंने तेल तस्करी, कैश ट्रांसफर, करेंसी एक्सचेंज, जहाजों के रजिस्ट्रेशन और फर्जी कंपनियों के जरिए ईरान तक पहुंचने वाली आर्थिक मदद को रोकने की बात कही। खबर अपडेट हो रही है…
ट्रम्प का ईरान पर सबसे बड़े आर्थिक प्रतिबंधों का ऐलान:बोले- जो देश मदद करेंगे, उन पर भी एक्शन लेंगे; तेल तस्करी नेटवर्क निशाने पर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने समझौते का मौका गंवा दिया, इसलिए अब उसे आर्थिक तौर पर अलग-थलग किया जाएगा। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि ईरान की मदद करने वाले देशों और संस्थाओं पर भी कार्रवाई होगी। इसमें बैंक, कंपनियां, एयरपोर्ट और सरकारी संस्थाएं शामिल हैं। उन्होंने तेल तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई करने और कैश ट्रांसफर, करेंसी एक्सचेंज, जहाजों के रजिस्ट्रेशन और फर्जी कंपनियों के जरिए ईरान तक पहुंचने वाली आर्थिक मदद को रोकने की बात कही। ट्रम्प का दावा- ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायुसेना को बड़ा नुकसान हुआ है और उसके कई सैन्य कारखाने तबाह हो गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की मुद्रा की हालत बहुत खराब है और देश आर्थिक संकट में है। ट्रम्प ने अमेरिका की नई आर्थिक कार्रवाई को ‘इकोनॉमिक डी-डे’ बताया। आसान भाषा में इसका मतलब है कि अमेरिका ईरान पर बहुत बड़ा आर्थिक दबाव बनाने जा रहा है। उन्होंने दूसरे देशों से भी ईरान की मदद बंद करने और अमेरिका के साथ इस अभियान में शामिल होने की अपील की। अमेरिकी प्रतिबंधों का ईरान पर क्या असर पड़ेगा? अमेरिका की नई कार्रवाई का सबसे बड़ा असर ईरान के तेल कारोबार और पैसे के लेनदेन पर पड़ सकता है। ईरान की कमाई का बड़ा हिस्सा तेल बेचने से आता है। अगर दूसरे देश, बैंक और कंपनियां अमेरिकी कार्रवाई के डर से ईरान के साथ कारोबार कम करते हैं, तो ईरान के लिए तेल बेचना और विदेशों से पैसा लेना मुश्किल हो सकता है। तेल की तस्करी और फर्जी कंपनियों पर कार्रवाई होने से ईरान के लिए छिपकर कारोबार करना और अमेरिकी कार्रवाई से बचना भी मुश्किल होगा। ट्रम्प का कहना है कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर ईरान को दुनिया से आर्थिक तौर पर अलग करने की कोशिश करेगा। ईरान का तेल तस्करी नेटवर्क कैसे काम करता है तेल बेचकर कमाई, पहचान छिपाकर सप्लाई तेल के बाद पैसे की बारी अमेरिका पूरी चेन तोड़ना चाहता है —————————- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- 2020 चुनाव में 24,000 गैर-नागरिकों ने वोट डाले:चुनाव में मेरी जीत हुई थी, धांधली रोकने के लिए कानून बनाऊंगा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर दावा किया है कि 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में धांधली हुई थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि मतदाता और नागरिकता रिकॉर्ड की जांच में 24 हजार से ज्यादा गैर-अमेरिकी नागरिकों के वोट डालने का पता चला है। पूरी खबर यहां पढ़ें…









