बेंगलुरु पॉइंट्स टेबल में नंबर-1 पर पहुंचा:कोलकाता की प्लेऑफ राह मुश्किल हुई, पंजाब के लिए आज जीत जरूरी; IPL में प्लेऑफ का गणित

IPL 2026 के लीग स्टेज में अब 13 मैच बाकी हैं। मुंबई इंडियंस और लखनऊ सुपर जायंट्स प्लेऑफ से बाहर हो चुकी हैं, जबकि बाकी 8 टीमें टॉप-4 की रेस में बनी हुई हैं। कोलकाता को हराकर बेंगलुरु पॉइंट्स टेबल के टॉप पर पहुंच गई हैं। गुजरात और बेंगलुरु दोनों के 16-16 पॉइंट्स हैं, लेकिन बेहतर रनरेट की वजह से बेंगलुरु पहले स्थान पर है। बुधवार की हार के बाद कोलकाता की राह मुश्किल हो गई है। टीम को अब बचे सभी मैच जीतने होंगे। पॉइंट्स टेबल की मौजूदा सिचुएशन… बेंगलुरु-गुजरात का प्लेऑफ लगभग पक्का बेंगलुरु और गुजरात को प्लेऑफ पक्का करने के लिए बचे 2 में से एक मैच जीतना होगा। दोनों टीमों के 16-16 पॉइंट्स हैं। बेंगलुरु का नेट रनरेट (+1.053) लीग में सबसे बेहतर है। बेंगलुरु का मुकाबला पंजाब और हैदराबाद से है, जबकि गुजरात को कोलकाता और चेन्नई से खेलना है। कोलकाता 8वें पायदान पर कोलकाता नाइट राइडर्स की स्थिति कठिन हो गई है। टीम को 4 मैच बाद हार मिली। टीम के 11 मैचों में 9 पॉइंट्स हैं और 3 मैच बाकी हैं। कोलकाता को प्लेऑफ की उम्मीद बनाए रखने के लिए सभी मुकाबले जीतने होंगे। टीम का अगला मैच गुजरात, मुंबई और दिल्ली से है। पंजाब को मुंबई को हराना ही होगा पंजाब किंग्स लगातार 4 मैच हारकर चौथे स्थान पर खिसक गई है। टीम के 13 पॉइंट्स हैं और हर मैच अहम हो गया है। पंजाब का मुकाबला आज मुंबई से होगा, जहां उसे जीत चाहिए। इसके बाद टीम बेंगलुरु और लखनऊ से खेलेगी। अगर टीम 2 मैच जीतती है तो प्लेऑफ में पहुंचना पक्का हो जाएगा। हैदराबाद के 2 मैच बाकी सनराइजर्स हैदराबाद के 14 पॉइंट्स हैं। गुजरात ने पिछले मैच में टीम को 82 रन से हराकर मुश्किल में डाल दिया। उसका नेट रनरेट +0.331 है। हैदराबाद को प्लेऑफ में पहुंचने के लिए अब चेन्नई और बेंगलुरु को हराना होगा। चेन्नई पांचवें स्थान पर कायम चेन्नई सुपर किंग्स ने खराब शुरुआत के बाद वापसी की है। टीम लगातार 3 मैच जीत चुकी है और 12 पॉइंट्स के साथ पांचवें स्थान पर है। CSK को प्लेऑफ में पहुंचने के लिए तीनों मैच जीतने होंगे। उसके मुकाबले लखनऊ, हैदराबाद और गुजरात से हैं। राजस्थान भी रेस में, दिल्ली की उम्मीदें कमजोर राजस्थान रॉयल्स 12 पॉइंट्स के साथ रेस में बनी हुई है, लेकिन टीम ने पिछले 7 में से 5 मैच गंवाए हैं। राजस्थान को दिल्ली, लखनऊ और मुंबई से खेलना है। वहीं दिल्ली कैपिटल्स की उम्मीदें कमजोर हैं। टीम के 12 मैचों में 10 पॉइंट्स हैं और नेट रनरेट (-0.993) सबसे खराब है। दिल्ली को अपने दोनों मैच बड़े अंतर से जीतने होंगे। साथ ही दूसरी टीमों के नतीजों पर भी निर्भर रहना पड़ेगा। टूर्नामेंट के टॉप प्लेयर्स… कोहली ऑरेंज कैप की रेस में तीसरे नंबर पर पहुंचे विराट कोहली IPL 2026 में ऑरेंज कैप की रेस में तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। कोलकाता के खिलाफ शतक लगाने के बाद उनके 12 मैचों में 484 रन हो गए। सनराइजर्स हैदराबाद के हेनरिक क्लासन 508 रन के साथ पहले स्थान पर बने हुए हैं, जबकि गुजरात टाइटंस के साई सुदर्शन 501 रन के साथ दूसरे नंबर पर हैं। भुवनेश्वर 22 विकेट के साथ पर्पल कैप होल्डर बेंगलुरु के तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार IPL 2026 में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने हुए हैं। उनके 12 मैचों में 22 विकेट हो गए। गुजरात के कगिसो रबाडा 21 विकेट के साथ दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। चेन्नई के अंशुल कम्बोज 19 विकेट के साथ तीसरे नंबर पर हैं।
भरवा शिमला मिर्च रेसिपी: घर पर ठेठ होटल स्टाइल गैलरी भरवाँ शिमला मिर्च, बनाना भी है आसान; शेफ भी कीटेंगे रेसिपी

भरवाँ काली मिर्च बनाने की सामग्री: 4 बड़ी मीठी मिर्च, 3 छोटे टमाटर, 1 तरबूज़ कटे टमाटर, 2 हरी मिर्च, 1 छोटा गाजर-लहसुन पेस्ट, 1/2 छोटा टमाटर हल्दी, 1/2 छोटा टमाटर छवि: फ्रीपिक 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 2 बड़ा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 2 बड़ा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 2 बड़ा चम्मच हरा धनिया पाउडर छवि: फ्रीपिक सबसे पहले काली मिर्च को अच्छे से धो लें। अब ऊपर का भाग दृश्य उसके अंदर के बीज रहित। ध्यान रखें कि काली मिर्च नहीं। इसके बाद एक बाउल में आलू मैश कर लें। छवि: फ्रीपिक अब इसमें प्याज, टमाटर, हरी मिर्च और सभी मठवासी अच्छी तरह से मिला लें। यही स्वादिष्ट स्टफिंग तैयार होगी। छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: एक-एक करके पूरी जानकारी, मिर्च में तैयार मसाला भर दें। अब गैस पर पकाए गए बर्तन और तेल को गर्म करें। तेल गर्म होने के बाद सारी भरी हुई मीठी मिर्च को धीरे-धीरे-धीरे-धीरे सुखाते रहें। छवि: एआई आस्थगित अनैच्छिक परोक्षांश। बीच-बीच में पलटते रहें ताकि हर तरफ से काली मिर्च अच्छी तरह पक जाए। करीब 15 से 20 मिनट में सबसे बढ़िया काली मिर्च और स्वाद सुनहरी होगी। छवि: एआई ऊपर से हरा धनिया और गरमा-गरम सर्व करें। अगर आप यात्रा करते हैं तो स्टफिंग में पनीर भी मिला सकते हैं। छोटी सौरी कस मेथी से होटल जैसा स्वाद आता है। छवि: एआई इसे टेवे पर अनौपचारिक रूप से पकाने से स्वाद और भी बढ़ जाता है। वहीं एक्जीक्यूटिव आलू की स्टफिंग का स्वाद कई गुणा बढ़ा हुआ है। छवि: फ्रीपिक भरवाँ मिर्च स्वाद के साथ-साथ भी होता है। काली मिर्च में विटामिन-सी और गाजर की प्रचुर मात्रा पाई जाती है, जिसे शरीर के लिए हानिकारक माना जाता है। छवि: एआई अगर आप भी कुछ नया और टेस्टी खाना चाहते हैं तो इस आसान रेसिपी को जरूर आजमाएं। छवि: फ्रीपिक
दूध के बढ़ते दाम से हैं परेशान, मिल्क की कमी ये 5 चीजें कर सकती हैं पूरी, कीमत भी ज्यादा नहीं !

Last Updated:May 13, 2026, 20:26 IST Healthy Alternatives to Milk: दूध की बढ़ती कीमतों के बीच दही, चना, सोया, मूंगफली, तिल और रागी जैसी चीजें शरीर को जरूरी पोषण देने में मदद कर सकती हैं. एक्सपर्ट्स के अनुसार संतुलित आहार अपनाकर कम बजट में भी कैल्शियम और प्रोटीन की जरूरत काफी हद तक पूरी की जा सकती है. दूध की जगह आप हरी सब्जियां और चना खा सकते हैं. Best Milk Substitutes for Health: दूध को पुराने समय से कैल्शियम, प्रोटीन और कई जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा सोर्स माना जाता है. पहले के जमाने में अधिकतर लोग गाय-भैंस रखते हैं और दूध की किल्लत नहीं होती थी. आजकल शहरों में दूध सिर्फ पैकेट्स में मिलता है. बुधवार को मदर डेयरी और अमूल ने दूध की कीमतों में 2 रुपये की बढ़ोतरी का ऐलान किया है. पिछले कुछ समय में दूध की बढ़ती कीमतों ने कई परिवारों का बजट प्रभावित किया है. ऐसे में लोग ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं, जो सस्ते भी हों और शरीर को जरूरी पोषण भी दे सकें. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार सेहत के लिए दूध जरूरी होता है, लेकिन कुछ अन्य चीजें भी कैल्शियम और प्रोटीन की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकती हैं. दूध की कमी ये चीजें कर सकती हैं पूरी दही : दही को दूध का सबसे आसान और किफायती विकल्प माना जाता है. इसमें कैल्शियम, प्रोटीन और प्रोबायोटिक्स पाए जाते हैं, जो पाचन के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं. कई बार दही की कीमत दूध के मुकाबले कम पड़ सकती है और इसे रोजाना खाने में आसानी से शामिल किया जा सकता है. सोया और चना : हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार सोया उत्पाद और चना प्रोटीन के अच्छे स्रोत माने जाते हैं. सोया चंक्स, भुना चना या अंकुरित चना शरीर को जरूरी पोषण देने में मदद कर सकते हैं. खासकर शाकाहारी लोगों के लिए ये अच्छे विकल्प माने जाते हैं. मूंगफली : मूंगफली को गरीबों का बादाम भी कहा जाता है. इसमें प्रोटीन और हेल्दी फैट्स पाए जाते हैं. कम कीमत में मिलने वाली मूंगफली स्नैक के तौर पर या चटनी और सलाद में इस्तेमाल की जा सकती है. यह शरीर को ऊर्जा देने में भी मदद कर सकती है. तिल और रागी : कैल्शियम की बात करें तो तिल और रागी को भी काफी फायदेमंद माना जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि रागी में अच्छी मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है और इसे रोटी, दलिया या ड्रिंक के रूप में लिया जा सकता है. वहीं तिल को लड्डू, चटनी या सलाद में शामिल किया जा सकता है. हरी पत्तेदार सब्जियां : पालक, मेथी और सरसों जैसी हरी सब्जियों में भी कई जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं. हालांकि इनमें दूध जितना कैल्शियम नहीं होता, लेकिन संतुलित डाइट में इन्हें शामिल करना शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है. अगर कोई व्यक्ति दूध कम पी रहा है, तो उसे अपनी डाइट में अलग-अलग पोषक तत्वों वाले खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
कटहल आम का मिक्स अचार रेसिपी: गरमा गरम किचन में देखने पर क्या आता है आलस? घर में कटहल-आम का मिक्स अचार, सब्जी खाना जायेंगे भूल

सामग्री: 250 कच्ची ग्राम कटहल, 2 बड़ी काली मिर्च, 1 बड़ा काली मिर्च पाउडर, 1 छोटी काली मिर्च पाउडर, 2 बड़ी काली मिर्च पाउडर, 1 बड़ी काली मिर्च पाउडर, 1 छोटी चम्मच मेथी दाना, 1 छोटी काली मिर्च कलौंजी छवि: फ्रीपिक 1 छोटा चम्मच तेल, आधा छोटा चम्मच तेल, 1 कप छोटा चम्मच तेल। बता दें कि यह अचार लंबे समय तक खराब नहीं होता और दाल-चावल, पराठे या साधारण रोटी के साथ भी खाने का मजा डबल कर देता है। छवि: फ्रीपिक अचार बनाने की आसान विधि: सबसे पहले कटहल को छोटी-छोटी कसरत में काट लें। अब कच्चे आम को भी ढोकर छोटे टुकड़ों में काट लें। ध्यान रखें कि दोनों में पानी बिल्कुल न रहे, बाकी अचार जल्दी खराब हो सकते हैं। छवि: एआई अब कटहल में एक बड़ा पोज़िशन और आम मिलाप। नमक और हल्दी करीब 2 से 3 घंटे के लिए रखें। इससे कटहल लिटिल नर हो जाएगा और आम का पानी भी निकल जाएगा। छवि: फ्रीपिक इसके बाद एक पैन में सौंफ, मेथी, राई और को एक पैन सा भून लें। ठंडा होने पर उदाहरण दारारा पीस लें। अब कटहल और आम में लाल मिर्च, भुने हुए टुकड़े और हिंग मॉड्यूल अच्छी तरह से मिक्स करें। छवि: एआई ऊपर से जैतून का तेल गर्म करके ठंडा करें और अचार में मिलायें। अब इस आचार्य को साफ और आकर्षक कांच के जार में भर दें। 3 से 4 दिन तक धूप। बीच-बीच में मछली से शौकीन रहना। छवि: एआई कुछ ही दिनों में स्वादिष्ट कटहल-आम का मिक्स अचार तैयार हो जाएगा। अचार में बिल्कुल भी पानी नहीं डालना चाहिए। हमेशा मछली और सासा का उपयोग करें। छवि: एआई सरसों का तेल अच्छी तरह गर्म करके ठंडा करने के बाद ही डालें। धूप से अचार का स्वाद और भी बढ़ जाता है। छवि: फ्रीपिक कटहल-आम का यह मिक्स अचार इतना टेस्टी लगता है कि लोग बार-बार मांगकर खाएंगे। अगर गर्म में रोज-रोज सब्जी बनाने का मन नहीं है, तो यह अचार आपकी थाली का स्वाद आसानी से बढ़ा सकता है. छवि: एआई
पालक की पूरी रेसिपी: सिर्फ 5 मिनट में हलवाई जैसी खस्ता पालक पूरी, एक खास ट्रिक से फूलेगी पूरी जैसी, आसान विधि

13 मई 2026 को 19:03 IST पर अपडेट किया गया पलक की पूरी रेसिपी: अगर आप भी अपने नामांकन में कुछ नया और अलग करना चाहते हैं, तो पालक पूरी तरह से सर्वश्रेष्ठ पद पर आसीन हो सकता है। यह सिर्फ सेहत के लिए ही नहीं बल्कि घर में बच्चों से लेकर बड़े सबको बहुत पसंद करना है। ये पू डांस चाय के साथ बहुत खूबसूरत लगती हैं। पालक, अदरक और हरी मिर्च के पत्तेपन के साथ यह रेसिपी झटपट तैयार हो जाती है। आइए, इसकी क्विक रेसिपी आपको बताएंगे। अनुसरण करना : सबसे पहले 250 ग्राम धुले हुए पालक को 2-3 मिनट ब्लांच कर लें। ठंडा होने पर अदरक और हरी मिर्च के साथ मिक्सचर पेस्ट बनाएं। छवि: फ्रीपिक एक पोर में 2 कप आटे का आटा गूंथने के लिए लें। इसमें पालक का पेस्ट, जीरा, अजमायन, नमक और 2 मसाले के तेल का मोयन डाला गया। छवि: फ्रीपिक सभी अनीचों को अच्छे से पुराने कड़वे- कड़वे गूंथे आटे लें. चाहिए हो तो ही पानी थोड़ा-थोड़ा करके 15 मिनट के लिए छोड़ दें। छवि: फ्रीपिक एसोसिएट्स के छोटे लो डिस्प्ले और उन पर डिस्प्ले ऑयल प्लग गोल आकार की पुरियां बेलना कर देना शुरू कर देते हैं। छवि: फ्रीपिक गर्म तेल में पूरियों को नापसंद किया गया। कलछी से प्रकाश दबाते हुए दोनों तरफ से सुन्दर और फूलने तक तल लें। छवि: फ्रीपिक इन कुरकुरी पूरियों को आलू की सब्जी या रायते के साथ बनाएं। अधिक मात्रा में कुरकुरेपन के लिए आटे में आधी सूजी भी मिला सकते हैं। छवि: फ्रीपिक द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 13 मई 2026 19:03 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)पालक पूरी(टी)पालक पूरी रेसिपी(टी)झटपट नाश्ता(टी)स्वस्थ हिंदी रेसिपी(टी)क्रिस्पी पुरी टिप्स(टी)भारतीय स्नैक्स(टी)पालक की पूरी कैसे बनाएं
'बच्चे के डायपर से ज्यादा पेपर लीक हो जाता है':NEET पेपर लीक पर बोले खान सर, सोशल मीडिया पर फनी मीम्स की बाढ़

NTA ने 3 मई को हए NEET UG 2026 का एग्जाम को रद्द कर दिया। NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह के मुताबिक, 7-10 दिन में रि-एग्जाम के लिए शेड्यूल जारी किया जाएगा। किसी भी कैंडिडेट को इसके लिए वापस से रजिस्टर या एग्जाम फीस नहीं देना होगा। दोबारा से सभी के लिए एडमिट कार्ड जारी होंगा। कैंडिडेट्स को पिछले सेंटर ही एलॉट होंगे। NTA के इस फैसले पर कई टीचर्स और पॉलिटिशियंस के रिएक्शंस सामने आए हैं। खान सर बोले- NTA मतलब ‘नेवर ट्रस्टेबल एजेंसी’ मशहूर एजुकेटर और यूट्यूबर खान सर ने कहा, ‘2024 में भी ऐसी घटना हुई, CBI जांच हुआ पर कोई नतीजा नहीं निकला। उनका मनोबल बढ़ गया और ये फिर हुआ। सबसे हास्यास्पद है कि पेपर लीक की जानकारी खुद बच्चों ने सरकार को दी, जबकि सरकारी एजेंसियों को पहले पता चलना चाहिए था।’ उन्होंने कहा, ‘समझ नहीं आता NTA को ये जिम्मेदारी पेपर कराने की दी गई है या पेपर लीक कराने के लिए। NTA का नाम होना चाहिए ‘नेवर ट्रस्टेबल एजेंसी’।’ ‘CBI इज लाइक अ नोकिया मोबाइल’ खान सर ने आगे कहा कि अगर CBI को जांच की जिम्मेदारी दी है, तो बच्चों का MBBS कंप्लीट होने तक इनकी जांच ही चलती रहेगी। CBI इज लाइक अ नोकिया मोबाइल। 1946 में अंग्रेजों ने मुद्दों को दबाने के लिए CBI बनाया था। सरकार भी वही कर रही। प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट को भी इसमें इन्वॉल्व होना चाहिए और गुनाहगारों को कड़ी से कड़ी सजा दिलानी चाहिए। इससे राष्ट्रीय छवि खराब होती है। बच्चों का मनोबल भी टूटता है। NTA वाले करोड़पति हैं, लेकिन बच्चे कर्ज लेकर एग्जाम देने पहुंचते हैं। ऐसे में फीस नहीं लेंगे कह देना आसान है। अलख पांडे बोले- ‘कोचिंग वाला शामिल हो तो फांसी पर चढ़ाएं’ NEET 2026 के कैंसिलेशन पर एजुकेटर और ‘फिजिक्स वाला’ के को-फाउंडर अलख पांडे बोले, ‘इससे अच्छा तो स्कूल का एग्जाम होता है। मैंने नहीं सुना स्कूल का कोई एग्जाम इतनी आसानी से लीक होते।’ ‘एग्जाम से 2-3 दिन पहले NTA ने स्टेटमेंट जारी कर कहा था कि ये कोई स्कूल का एग्जाम नहीं है। ये नेशनल लेवल का एग्जाम है। आप चैन से सो जाओ। हम इसे संभाल लेंगे। फूल-प्रूफ सिस्टम है।’ ‘ऐसा बार-बार होने से बच्चों का पूरे सिस्टम से भरोसा उठता है। अगर पहले से पेपर लीक का अंदेशा हो गया था तो पेपर क्यों नहीं बदला गया?’ ‘ढीले कपड़े पहनो, पजामा पहनो, जूता-घड़ी नहीं पहनो। जैकेट नहीं पहनो, जेब नहीं होनी चाहिए, प्लास्टिक की बोतल होनी चाहिए। सारी चेकिंग, सारी पोलिसिंग बच्चों पर कर रहे थे, और इनके सिस्टम के अंदर बैठकर जो पेपर लीक कर रहा था, वो इनको पता नहीं चल रहा था।’ ‘ये नेशनल लेवल पर बहुत बड़ा लीक है और इसमें सिस्टम के लोग इसमें शामिल हैं। जिन अमीरों ने पेपर खरीदा, उन अमीरों को सजा मिले। ये कौन अमीर लोग थे जो अपने बच्चों के लिए पेपर खरीदकर लाए थे, गरीब बच्चों के साथ अन्याय कर रहे थे। कोई कोचिंग वाला शामिल है तो उसे फांसी पर चढ़ाएं।’ सचिन पायलट बोले- ‘जांच के नाम पर मामले को टालना चाहते हैं’ कांग्रेस लीडर और राजस्थान के फॉर्मर डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने कहा, ‘केंद्र सरकार ने CBI के नाम पर एक बार फिर खुद को बचाने की कोशिश की है। जांच के नाम पर मामले को टालना चाहते हैं। दो साल पहले भी जांच बिठाई थी, उसकी रिपोर्ट कहां है? किसको सजा हुई? जांच के नाम पर पल्ला झाड़ दें, ये नाकाफी है।’ उन्होंने कहा कि लगभग 9-10 दिन बाद परीक्षा को रद्द किया। सोशल मीडिया पर पूरा खुलासा होने के बाद मजबूरन सरकार को परीक्षा को रद्द करना पड़ा है। उन्होंने सवाल किया, ‘कब तक जांच बिठाकर बात को दरी के नीचे डालते रहेंगे?’ ‘CBI को जांच सौंपी है। CBI को फुरसत कहां है? CBI को तो विपक्षी नेताओं की जांच करना है, उनके यहां छापे डालने हैं, उनका मुंह बंद करना है।’ सचिन पायलट ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग ने इसको अपने हाल पर छोड़ रखा है वरना इतने व्यापक स्तर पर पेपर लीक नहीं हो सकता। उन्होंने आगे कहा, ‘NTA बनाई गई थी ताकि पेपर लीक को बंद कर सकें। एक एयर टाइट मेकेनिज्म हो ताकि व्यवस्था को नियंत्रित कर सकें। अब वो एजेंसी कोलैप्स कर गई है, इसके लिए जिम्मेदार कौन है?’ इसमें एक ज्युडिशियल प्रोब हो जो सरकार के दायरे के बाहर हो। साथ ही टाइम बाउंड हो। राहुल गांधी बोले- ‘पीएम का अमृतकाल, देश के लिए विषकाल बना’ कांग्रेस लीडर राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री का तथाकथित अमृतकाल, देश के लिए विषकाल बन गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि हर बार पेपर माफिया बच निकलते हैं और ईमानदार छात्रों को इसकी सजा भुगतनी पड़ती है। उन्होंने कहा, ‘अब लाखों छात्र फिर से वही मानसिक तनाव, आर्थिक बोझ और अनिश्चितता झेलेंगे। अगर अपनी तकदीर मेहनत से नहीं, पैसे और पहुंच से तय होगी, तो फिर शिक्षा का मतलब क्या रह जाएगा?’ ‘जेन-Z , ऐसे ही चलेगा या कुछ करना है?’- केजरीवाल AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘2017, 2021, 2024 में पेपर लीक हुए थे। उस समय CBI को जांच सौंप दी गई। क्या CBI ने कुछ किया? इस बार भी CBI को जांच सौंपी गई है। क्या CBI कुछ करेगी?’ उन्होंने कहा, ‘2024 में तो हद हो गई। पेपर लीक के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया। 90 दिन के अंदर चार्जशीट फाइल होनी थी, पर नहीं किया। तथाकथित मास्टरमाइंड को बेल मिल गई।’ आगे बताया, ‘आपको लगता है CBI ने इतनी इनएफिशिएंट है? तो CBI इनएफिशिएंट नहीं है, उसमें बहुत अच्छे लोग हैं। CBI उन्हीं लोगों को रिपोर्ट करती है जो पेपर लीक करवा रहे हैं। CBI इसमें किसी को सजा दिलवा ही नहीं सकती।’ देश के जेन-Z से पूछना है, ऐसे ही चलेगा या कुछ करना है? अगर नेपाल-बांग्लादेश का जेन-Z सड़कों पर उतरकर अपने देश की सरकारों को बदल सकता है, तो हमारे देश का जेन-Z, पेपर लीक करने वालों को जेल नहीं भेज सकता? भेज सकता है। मुझे अपने देश के जेन-Z पर पूरा भरोसा है। ये देश आपका है। इस देश के नेताओं को इस देश में कोई इंट्रस्ट नहीं है। नेताओं के बच्चे
‘अपने भाग्य का अनुमान लगाने में विफल’: विजय द्वारा ज्योतिषी की नियुक्ति रद्द करने पर अन्नाद्रमुक ने चुटकी ली | भारत समाचार

आखरी अपडेट:13 मई, 2026, 17:42 IST निर्णय को रद्द करने का निर्णय वेट्रिवेल को मुख्यमंत्री विभाग में ओएसडी के रूप में पदोन्नत किए जाने के बाद आया। राधन पंडित तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के ज्योतिषी हैं। तस्वीर/एएनआई. (एएनआई छवियां) टीवीके के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने फैसले पर विपक्ष के साथ-साथ सहयोगियों के भारी विरोध के बाद बुधवार को विजय के ज्योतिषी राधन पंडित वेट्रिवेल की तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के विशेष कर्तव्य अधिकारी (राजनीतिक) के रूप में नियुक्ति वापस ले ली। फैसले के बाद, अन्नाद्रमुक ने पार्टी नेता आईएस इंबादुरई पर तंज कसते हुए कहा कि टीवीके की जीत की भविष्यवाणी करने वाले ज्योतिषी अपने भाग्य का अनुमान लगाने में विफल रहे। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “ज्योतिषी अपने भाग्य की भविष्यवाणी करने में विफल रहे। विजय सरकार के बुरे दिन शुरू हो गए हैं।” निर्णय को रद्द करने का निर्णय वेट्रिवेल को मुख्यमंत्री विभाग में ओएसडी के रूप में पदोन्नत किए जाने के बाद आया। ज्योतिषी होने के अलावा, वह टीवीके के प्रवक्ता भी थे और पिछले चुनाव अभियान के दौरान नेतृत्व के करीबी सहयोगी के रूप में काम किया था। 4 मई को, वोटों की गिनती के बीच, जब टीवीके ने आगे बढ़ना शुरू कर दिया था, राधन पंडित विजय से मिलने वाले पहले व्यक्ति थे। इस कदम ने तमिलनाडु के राजनीतिक हलकों में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया क्योंकि टीवीके सरकार को अपना समर्थन देने वाली विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके), सीपीआईएम और सीपीआई जैसी पार्टियों ने खुले तौर पर इस कदम की आलोचना की। डीएमडीके ने विजय के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लिए गए फैसले पर भी सवाल उठाया। पार्टी ने ज्योतिषी की भूमिका और साख पर स्पष्टता की मांग की, जिन्हें अब मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष कर्तव्य अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है। पार्टी ने कहा, ”ज्योतिषी की नियुक्ति से युवाओं में गलत संदेश जाता है।” विधानसभा में शक्ति परीक्षण से पहले, वीसीके विधायक वाणी अरसू ने सरकार से वैज्ञानिक और तर्कसंगत सोच पर ध्यान केंद्रित करने और उन चीजों पर ध्यान न देने का आग्रह किया, जिन्हें बड़े पैमाने पर अंधविश्वास माना जाता है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार को ज्योतिष को नहीं बल्कि वैज्ञानिक सोच को महत्व देना चाहिए।” बढ़ती आलोचना के बीच विजय ने संकेत दिया था कि ज्योतिषी की नियुक्ति रद्द की जा सकती है. फ्लोर टेस्ट के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि कई राजनीतिक दलों की आपत्तियों को देखते हुए फैसले की समीक्षा की जाएगी। उनकी टिप्पणी के तुरंत बाद, वेट्रिवेल की नियुक्ति रद्द कर दी गई। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘अपने भाग्य का अनुमान लगाने में विफल’: विजय द्वारा ज्योतिषी की नियुक्ति रद्द करने पर अन्नाद्रमुक ने चुटकी ली अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)विजय ज्योतिषी नियुक्ति विवाद(टी)तमिलनाडु की राजनीति(टी)टीवीके सरकार(टी)विशेष कर्तव्य अधिकारी(टी)राधन पंडित वेट्रिवेल(टी)विजय सरकार की प्रतिक्रिया(टी)ज्योतिषी नियुक्ति रद्द(टी)वीसीके सीपीआई आलोचना
विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में फोर्ट सेंट जॉर्ज पर धावा बोल दिया है, लेकिन इसे बनाए रखना कठिन होगा | भारत समाचार

आखरी अपडेट:13 मई, 2026, 17:24 IST विजय की राजनीतिक छवि से जुड़ी भारी उम्मीदों को पूरा करते हुए सत्ता पर बने रहना कहीं अधिक कठिन साबित हो सकता है तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) ने भले ही सेलिब्रिटी की ताकत, जनता के गुस्से और सत्ता-विरोधी भावना को शानदार चुनावी जीत में बदलकर राज्य की राजनीतिक पटकथा बदल दी हो, लेकिन असली लड़ाई अब शुरू होती है। तमिलनाडु का प्रशासनिक केंद्र, फोर्ट सेंट जॉर्ज, जहां विधान सभा, फोर्ट संग्रहालय और सेंट मैरी चर्च हैं, को जीतना एक चुनौती थी। विजय की राजनीतिक छवि से जुड़ी भारी उम्मीदों को पूरा करते हुए सत्ता पर बने रहना कहीं अधिक कठिन साबित हो सकता है। जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार के लिए, पहले छह महीने केवल शासन के बारे में नहीं होंगे – वे वैधता के बारे में होंगे। विजय की तात्कालिक चुनौती कैबिनेट को मजबूत करना, आंतरिक हितों को संतुलित करना, विश्वसनीय नौकरशाहों की नियुक्ति, प्रतीकात्मक वादे पूरे करना और प्रशासनिक अधिकार स्थापित करना होगा। तमिलनाडु का राजनीतिक वर्ग – द्रमुक से लेकर अन्नाद्रमुक तक – किसी भी संकेत पर करीब से नजर रखेगा कि टीवीके चुनावी रूप से विघटनकारी लेकिन प्रशासनिक रूप से कमजोर हो सकता है। विजय का राजनीतिक बाहरी व्यक्ति से प्रशासक बनने का परिवर्तन यहीं से शुरू होता है। जनता की उम्मीदों को प्रबंधित करना जल्द ही टीवीके का पहला प्रमुख राजनीतिक क्षेत्र बन सकता है। विजय का उदय असाधारण सार्वजनिक उत्साह, युवाओं के समर्थन और व्यक्तिगत विश्वसनीयता से हुआ, लेकिन अगर डिलीवरी लड़खड़ाती है तो वही भावनात्मक निवेश अस्थिर हो सकता है। मतदाता तत्काल कार्रवाई की उम्मीद करेंगे – अभियान के वादे पूरे होंगे, शासन में दृश्य परिवर्तन, तेजी से कल्याण वितरण, नौकरियां, मूल्य नियंत्रण और मजबूत प्रशासन। पारंपरिक पार्टियों के विपरीत, जो अक्सर मध्यम उम्मीदों के साथ शासन करती हैं, टीवीके आशा की राजनीति का बोझ लेकर कार्यालय में प्रवेश करती है, जहां छोटी देरी को भी विश्वासघात के रूप में देखा जा सकता है। पहला कदम सही है विजय को इसका श्रेय जाता है कि उनकी पहली प्रमुख कार्रवाइयां स्पष्ट रूप से गति, कल्याण और दृश्यमान सुधार की सरकार पेश करने के लिए डिज़ाइन की गई थीं। सभी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 200 यूनिट मुफ्त बिजली की मंजूरी एक प्रत्यक्ष लोकलुभावन कल्याण संकेत था जिसका उद्देश्य तत्काल घरेलू राहत प्रदान करना था। विजय ने लैंगिक सुरक्षा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एक विशेष महिला सुरक्षा बल और एक समर्पित हेल्पलाइन की भी घोषणा की। प्रत्येक शहर और जिले में नशीली दवाओं के खिलाफ टास्क फोर्स का निर्माण नशीले पदार्थों पर राज्यव्यापी कार्रवाई के रूप में किया गया था। तमिलनाडु के वित्त और ऋण बोझ पर एक श्वेत पत्र के लिए उनका आह्वान पारदर्शिता और उनकी सरकार को विरासत में मिली राजकोषीय विरासत को रेखांकित करने के राजनीतिक रणनीतिक प्रयास दोनों का संकेत देता है। स्कूलों और धार्मिक संस्थानों के पास 717 TASMAC दुकानों को बंद करने से एक और शक्तिशाली प्रतीकात्मक कदम जुड़ गया, जिसमें विनियमन के साथ सामाजिक प्रकाशिकी का सम्मिश्रण किया गया। इन शुरुआती निर्णयों से पता चला कि विजय चाहते थे कि टीवीके पहले दिन से ही कल्याण-संचालित, सुधारवादी और कार्य-उन्मुख दिखे। फिर भी इससे पहले कि ये कदम उनके प्रशासन को पूरी तरह से परिभाषित कर पाते, सरकार उन विवादों में फंस गई, जिन्हें टाला जा सकता था, जिससे पता चला कि प्रतीकवाद कितनी जल्दी राजनीतिक क्षति बन सकता है। विवाद सबसे पहले मुख्यमंत्री के विशेष कर्तव्य अधिकारी (राजनीतिक) के रूप में ज्योतिषी रिकी राधन पंडित वेट्रिवेल की नियुक्ति हुई। राजनीतिक संकेत के रूप में जो इरादा किया गया था वह जल्द ही टीवीके की शुरुआती शर्मिंदगी में से एक बन गया। प्रतिक्रिया तत्काल थी, न केवल विपक्षी दलों से बल्कि वीसीके और वामपंथियों जैसे सहयोगियों से भी। इस नियुक्ति को मद्रास उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि एक ज्योतिषी को मुख्य सलाहकार भूमिका में पदोन्नत करना वैज्ञानिक स्वभाव के संवैधानिक सिद्धांत का उल्लंघन है। फ्लोर टेस्ट जीतने के कुछ ही घंटों बाद, सरकार को जल्दबाजी में पीछे हटना पड़ा और नियुक्ति रद्द कर दी गई। इस प्रकरण ने फैसले पर बड़े सवाल खड़े कर दिए। वेट्रिवेल की प्रमुखता काफी हद तक विजय की राजनीतिक “सुनामी” की उनकी भविष्यवाणी से आई, और पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के ज्योतिषी के रूप में उनके अतीत की जांच केवल तेज हुई, विशेष रूप से उनके आय से अधिक संपत्ति के मामले में उनके आश्वासन के बाद विनाशकारी रूप से गलत साबित होने के बाद। यदि वेट्रिवेल विवाद ने फैसले पर सवाल उठाए, तो विजय के शपथ ग्रहण समारोह ने राजनीतिक रूप से और भी अधिक विस्फोटक चीज को जन्म दिया – तमिल पहचान। जिस दिन विजय ने शपथ ली, उस दिन वंदे मातरम और जन गण मन के बाद तीसरा तमिल थाई वज़्थु गाए जाने पर विवाद खड़ा हो गया। तमिलनाडु में, इसे कभी भी एक प्रक्रियात्मक मुद्दे के रूप में खारिज नहीं किया जाएगा। दशकों से, तमिल थाई वाज़्थु ने पारंपरिक रूप से राज्य समारोहों की शुरुआत की है, जिसमें प्रतीकात्मक रूप से तमिल पहचान को पहले स्थान पर रखा गया है, जबकि राष्ट्रगान के साथ कार्यवाही समाप्त होती है। विजय के शपथ ग्रहण में, उस आदेश को बाधित कर दिया गया, जिससे उस राज्य में तुरंत प्रतिक्रिया शुरू हो गई जहां भाषा और क्षेत्रीय पहचान गहरी राजनीतिक है। आलोचना तीव्र और राजनीतिक रूप से असुविधाजनक थी क्योंकि यह न केवल द्रमुक की ओर से बल्कि टीवीके का समर्थन करने वाली पार्टियों की ओर से भी आई थी। सीपीआई के एम. वीरपांडियन ने कड़ी आपत्ति जताई, वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने इस कदम की निंदा की, पीएमके के संस्थापक एस. रामदास ने प्रोटोकॉल बहाल करने की मांग की, और डीएमके ने विजय पर भाजपा के प्रति वैचारिक झुकाव का आरोप लगाने के लिए विवाद का आक्रामक रूप से इस्तेमाल किया। टीवीके तुरंत क्षति नियंत्रण में चला गया, आधव अर्जुन ने सरकार को बदले हुए अनुक्रम से दूर कर दिया और इसके लिए राजभवन को केंद्र सरकार के परिपत्र के तहत कार्य करने के लिए जिम्मेदार ठहराया। लेकिन राजनीतिक तौर पर नुकसान पहले ही हो
डिजिटल सनबर्न क्या है, ब्लू लाइट से त्वचा पर कैसे पड़ता है असर

Last Updated:May 13, 2026, 17:21 IST क्या घंटों मोबाइल और लैपटॉप इस्तेमाल करने से आपकी त्वचा समय से पहले बूढ़ी हो सकती है? आजकल एक्सपर्ट्स “डिजिटल सनबर्न” नाम की एक नई समस्या को लेकर चेतावनी दे रहे हैं, जो स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट के कारण होती है. माना जा रहा है कि लगातार स्क्रीन के संपर्क में रहने से त्वचा पर झुर्रियां, पिगमेंटेशन और डलनेस जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं. ख़बरें फटाफट रात में फोन यूज करने के नुकसान. आज के समय में मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं. सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक लोग घंटों स्क्रीन के सामने समय बिताते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि लगातार स्क्रीन देखने की आदत आपकी त्वचा को तेजी से बूढ़ा बना सकती है? इसी समस्या को अब “डिजिटल सनबर्न” कहा जा रहा है. यह एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट के त्वचा पर पड़ने वाले प्रभाव को समझाने के लिए किया जाता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लंबे समय तक डिजिटल डिवाइसेज के संपर्क में रहने से स्किन पर समय से पहले एजिंग, पिगमेंटेशन और डलनेस जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. डिजिटल सनबर्न का मुख्य कारण स्क्रीन से निकलने वाली हाई एनर्जी विजिबल लाइट यानी ब्लू लाइट मानी जाती है. हेल्थलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, यह वही रोशनी है जो मोबाइल, लैपटॉप, टीवी और टैबलेट से निकलती है. माना जाता है कि यह रोशनी त्वचा की गहराई तक पहुंचकर कोलेजन को प्रभावित कर सकती है. कोलेजन वह प्रोटीन होता है जो त्वचा को टाइट और जवान बनाए रखने में मदद करता है. जब कोलेजन कमजोर होने लगता है, तो चेहरे पर झुर्रियां, फाइन लाइन्स और ढीलापन नजर आने लगता है. स्क्रीन के सामने ज्यादा समय बिताने से सिर्फ एजिंग ही नहीं, बल्कि त्वचा की रंगत पर भी असर पड़ सकता है. कई लोगों में चेहरे पर हल्के काले धब्बे, uneven skin tone और पिगमेंटेशन जैसी दिक्कतें बढ़ने लगती हैं. खासकर जो लोग देर रात तक फोन इस्तेमाल करते हैं या लगातार लैपटॉप पर काम करते हैं, उनमें यह समस्या ज्यादा देखी जा सकती है. इसके अलावा, स्क्रीन की रोशनी त्वचा को डिहाइड्रेट भी कर सकती है, जिससे चेहरा थका हुआ और बेजान दिखने लगता है. डिजिटल सनबर्न का असर सिर्फ त्वचा तक सीमित नहीं माना जाता. लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में जलन, सिरदर्द और नींद की समस्या भी बढ़ सकती है. यही वजह है कि अब स्किन एक्सपर्ट्स और हेल्थ एक्सपर्ट्स दोनों डिजिटल डिवाइसेज के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं. हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि आपको पूरी तरह फोन या लैपटॉप छोड़ देना चाहिए, लेकिन कुछ आसान आदतें अपनाकर इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है. जैसे स्क्रीन टाइम को सीमित करना, हर 20-30 मिनट बाद ब्रेक लेना और रात में डार्क मोड या ब्लू लाइट फिल्टर का इस्तेमाल करना. इसके अलावा, त्वचा को हाइड्रेट रखना और सनस्क्रीन लगाना भी जरूरी माना जाता है, क्योंकि कई स्किन केयर एक्सपर्ट्स अब इंडोर स्क्रीन एक्सपोजर के दौरान भी स्किन प्रोटेक्शन की सलाह देते हैं. एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर डाइट, पर्याप्त पानी और अच्छी नींद भी त्वचा को हेल्दी बनाए रखने में मदद कर सकती है. विटामिन C और E जैसे पोषक तत्व त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद करते हैं, जो समय से पहले एजिंग का कारण बन सकते हैं. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
केरल के मुख्यमंत्री के बीच गतिरोध चरम पर है कांग्रेस – राजस्थान, कर्नाटक और एमपी से पूछें | भारत समाचार

आखरी अपडेट:13 मई, 2026, 16:25 IST इतिहास बताता है कि केरल कोई अलग मामला नहीं है; कांग्रेस के पास राज्य नेतृत्व के लिए लंबे समय से ‘प्रतीक्षा करो और देखो’ की रणनीति है देरी इसलिए होती है क्योंकि आलाकमान इस समय का उपयोग प्रतिस्पर्धी क्षेत्रीय और गुटीय हितों को संतुलित करने के लिए करता है। फ़ाइल तस्वीर/एपी मई 2026 के केरल विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) की ऐतिहासिक जीत, जहां उसने 102 सीटों का “चक्रवात-शक्ति” जनादेश हासिल किया, निर्णायक जीत का क्षण होने की उम्मीद थी। इसके बजाय, यह एक सप्ताह तक चलने वाले नेतृत्व गतिरोध में बदल गया है जो ग्रैंड ओल्ड पार्टी की जीत के जश्न की पहचान बन गया है। जहां एक दशक तक सत्ता में रहने के बाद लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) का सफाया हो गया है, वहीं केरल में कांग्रेस वीडी सतीसन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के बीच रस्साकशी के कारण खुद को पंगु पाती जा रही है। ‘हाईकमान’ अंतिम फैसले में देरी क्यों करता है? कांग्रेस पारिस्थितिकी तंत्र में, विधायी जीत के बाद तत्काल राज्याभिषेक शायद ही कभी होता है। पार्टी एक कर्मकांडीय परंपरा का पालन करती है जहां नवनिर्वाचित विधायक एक पंक्ति का प्रस्ताव पारित कर “आलाकमान” – कांग्रेस अध्यक्ष और गांधी परिवार – को अपना नेता चुनने के लिए अधिकृत करते हैं। इस प्रक्रिया में सभी 63 कांग्रेस विधायकों के साथ “एक-पर-एक” गुप्त मतदान बैठकें आयोजित करने के लिए अजय माकन और मुकुल वासनिक जैसे एआईसीसी पर्यवेक्षकों को भेजना शामिल है। देरी इसलिए होती है क्योंकि आलाकमान इस समय का उपयोग प्रतिस्पर्धी क्षेत्रीय और गुटीय हितों को संतुलित करने के लिए करता है। केरल में, सतीसन (विपक्ष के निवर्तमान नेता) जमीनी स्तर के अभियान का श्रेय लेते हैं, जबकि वेणुगोपाल (एआईसीसी महासचिव) केंद्रीय नेतृत्व के साथ अपनी निकटता का दावा करते हैं। दिल्ली में नेतृत्व अक्सर हारने वाले गुट से “सचिन पायलट-शैली” विद्रोह शुरू होने के डर से तुरंत विजेता चुनने में संकोच करता है। क्या यह अन्य राज्यों में आवर्ती पैटर्न है? इतिहास बताता है कि केरल कोई अलग मामला नहीं है; कांग्रेस के पास राज्य नेतृत्व के लिए लंबे समय से “प्रतीक्षा करो और देखो” की रणनीति है। कर्नाटक (2023): भारी जीत के बाद, पार्टी ने सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच गतिरोध में लगभग पांच दिन बिताए, अंततः एक बारी-बारी से मुख्यमंत्री पद के साथ “साझा शक्ति” के फॉर्मूले पर समझौता किया, हालांकि खींचतान अभी भी जारी है। हिमाचल प्रदेश (2022): दिवंगत वीरभद्र सिंह की विरासत की जगह सुखविंदर सिंह सुक्खू को चुनने में कई दिन लग गए और शिमला के एक होटल में विधायकों की अराजक बैठक हुई, जिसका प्रतिनिधित्व उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह कर रही थीं। राजस्थान और मध्य प्रदेश (2018): शायद सबसे बदनाम देरी तब हुई जब पार्टी ने “ओल्ड गार्ड” (अशोक गहलोत और कमल नाथ) और “यंग तुर्क” (सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया) के बीच निर्णय लेने में लगभग एक सप्ताह बिताया। इन देरी ने भविष्य में अस्थिरता के बीज बोए, जिससे अंततः 2020 में मध्य प्रदेश सरकार का पतन हो गया। क्या गठबंधन कारक चुनाव को जटिल बनाता है? एकल-दलीय बहुमत के विपरीत, यूडीएफ हितों का मिश्रण है। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) और केरल कांग्रेस (जोसेफ) जैसे सहयोगियों के पास महत्वपूर्ण लाभ है। कथित तौर पर इन साझेदारों ने कांग्रेस से अनावश्यक उप-चुनावों से बचने के लिए एक “मौजूदा विधायक” चुनने का आग्रह किया है – जो केसी वेणुगोपाल के खिलाफ एक सूक्ष्म संकेत है, जो वर्तमान में अलाप्पुझा से सांसद हैं। आलाकमान को यह सुनिश्चित करना होगा कि चुना गया मुख्यमंत्री न केवल कांग्रेस विधायकों को बल्कि पूरे 102 सदस्यीय गठबंधन को स्वीकार्य हो ताकि कैबिनेट में “घूमने वाले दरवाजे” को रोका जा सके। आख़िर केरल को अपना मुख्यमंत्री कब मिलेगा? कथित तौर पर पार्टी ने नाम को अंतिम रूप देने के लिए 23 मई की समय सीमा तय की है, हालांकि बढ़ती सार्वजनिक अशांति को शांत करने के लिए जल्द ही एक घोषणा की उम्मीद है। देरी ने पहले ही कार्यवाहक मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन को विजेताओं की “आंतरिक अराजकता” का मज़ाक उड़ाने की अनुमति दे दी है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया केरल के मुख्यमंत्री के बीच गतिरोध कांग्रेस में चरम पर है- राजस्थान, कर्नाटक और मध्य प्रदेश से पूछें अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल चुनाव(टी)कांग्रेस(टी)मुख्यमंत्री(टी)केरल चुनाव(टी)चुनाव(टी)केसी वेणुगोपाल(टी)विधानसभा चुनाव(टी)वीडी सतीसन(टी)वाम(टी)मुख्यमंत्री(टी)पिनाराई विजयन








