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दुनिया का नक्शा बदलने की तैयारी, UN में आज वोटिंग:अफ्रीका को फायदा, यूरोप, रूस और कनाडा का साइज छोटा होगा

दुनिया का नक्शा बदलने की तैयारी, UN में आज वोटिंग:अफ्रीका को फायदा, यूरोप, रूस और कनाडा का साइज छोटा होगा

क्या आपको पता है कि दुनिया का जो नक्शा हम बचपन से देखते आए हैं, उसमें देशों का आकार असल में वैसा नहीं दिखता जैसा जमीन पर है? अगर संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश प्रस्ताव पास हो जाता है, तो दुनिया का नक्शा काफी अलग नजर आ सकता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा शुक्रवार को एक प्रस्ताव पर मतदान करेगी। इसमें दुनिया का ऐसा नक्शा अपनाने की बात है, जिसमें देशों और महाद्वीपों का आकार उनकी वास्तविक जमीन के हिसाब से ज्यादा सही दिखे। इस मुहिम की अगुआई अफ्रीकी देश कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा नक्शे ने सदियों से अफ्रीका और दुनिया के दूसरे हिस्सों को उनके वास्तविक आकार से छोटा दिखाया है। मौजूदा नक्शे में क्या गड़बड़ी है? आज दुनिया के बहुत से नक्शे मर्केटर प्रोजेक्शन पर आधारित हैं। इसे यूरोपीय नक्शानवीस जेरार्डस मर्केटर ने 1569 में बनाया था। यह नक्शा समुद्री यात्रा और नेविगेशन के लिए काफी उपयोगी है। इसकी वजह यह है कि इसमें उत्तर-दक्षिण की दिशा वाली रेखाएं भूमध्य रेखा के मुकाबले सही दिशा बनाए रखती हैं। लेकिन पूरी दुनिया को एक साथ दिखाने के लिए इसमें एक बड़ी समस्या है—देशों का आकार वास्तविकता से अलग दिखाई देता है। जैसे-जैसे कोई जगह भूमध्य रेखा से दूर होती जाती है, नक्शे पर उसका आकार जरूरत से ज्यादा बड़ा दिखने लगता है। इसका सबसे चर्चित उदाहरण ग्रीनलैंड है। मर्केटर नक्शे में ग्रीनलैंड दक्षिण अमेरिका से भी बड़ा दिखाई देता है और उसका आकार अफ्रीका के आसपास नजर आता है। लेकिन हकीकत बिल्कुल अलग है। ग्रीनलैंड लगभग कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य जितना बड़ा है, जबकि अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है। यानी नक्शे को देखकर किसी को लग सकता है कि ग्रीनलैंड और अफ्रीका लगभग एक ही आकार के हैं, जबकि जमीन पर दोनों के क्षेत्रफल में बहुत बड़ा अंतर है। अफ्रीकी देशों ने उठाया सवाल अफ्रीकी देशों का कहना है कि यह सिर्फ नक्शे की तकनीकी समस्या नहीं है। इसका असर इस बात पर भी पड़ता है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों को लोग किस नजर से देखते हैं। संयुक्त राष्ट्र के सामने रखे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि मौजूदा नक्शे में अफ्रीका का छोटा दिखाई देना लोगों की सामूहिक सोच में भी उसके महत्व और आकार को कम कर सकता है। प्रस्ताव में इस विकृति को ‘सांकेतिक रूप से छोटा दिखाना’ बताया गया है। इसके अलावा प्रस्ताव में कहा गया है कि नक्शे की यह असमानता अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया के आकार को लोगों की नजर में कम कर सकती है। इससे इन क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, बुनियादी ढांचे की जरूरत, विकास की क्षमता और समृद्धि को लेकर भी दुनिया की समझ प्रभावित हो सकती है। अफ्रीकी देशों का यह भी मानना है कि ऐसी धारणाएं पर्यावरण, भू-राजनीति और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर पूर्वाग्रह को बढ़ावा दे सकती हैं। खबर अपडेट हो रही है…

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दुनिया का नक्शा बदलने की तैयारी, UN में आज वोटिंग:अफ्रीका को फायदा, यूरोप, रूस और कनाडा का साइज छोटा होगा

दुनिया का नक्शा बदलने की तैयारी, UN में आज वोटिंग:अफ्रीका को फायदा, यूरोप, रूस और कनाडा का साइज छोटा होगा

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