बड़ी म्यूजिक कंपनियां क्षेत्रीय गानों पर दांव लगा रहीं:5,900 करोड़ का हुआ घरेलू म्यूजिक बाजार, स्ट्रीमिंग की घटती कमाई से बदली रणनीति

म्यूजिक इंडस्ट्री में अब बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं, जिसका सीधा फायदा क्षेत्रीय कलाकारों और संगीत प्रेमियों को होगा। टाइम्स म्यूजिक, वार्नर म्यूजिक और सारेगामा जैसी बड़ी कंपनियां अब स्थानीय गानों के कैटलॉग खरीदने पर भारी निवेश कर रही हैं। दरअसल, हिंदी फिल्म म्यूजिक की बढ़ती लागत और स्ट्रीमिंग से घटती कमाई ने कंपनियों को छोटे लेकिन मजबूत क्षेत्रीय बाजारों की ओर मोड़ा है। इस कन्सॉलिडेशनं से क्षेत्रीय संगीत कंपनियों की पहुंच ग्लोबल प्लेटफॉर्म और बेहतर तकनीक तक होगी। इससे न केवल गानों की क्वालिटी सुधरेगी, बल्कि डिजिटल वितरण प्रणाली भी पारदर्शी बनेगी। फिक्की-ईवाई की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में भारतीय म्यूजिक सेगमेंट का रेवेन्यू 10% बढ़कर 5,900 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। अब म्यूजिक कंपनियां नए कंटेंट पर पैसा लगाने के बजाय स्थापित क्षेत्रीय कैटलॉग के जरिए अपना रिस्क कम कर रही हैं। बड़ी कंपनियों के आने से क्षेत्रीय स्तर पर रॉयल्टी और अधिकारों का प्रबंधन काफी सरल और व्यवस्थित हो जाएगा। अब तक जिन गानों का सही डिजिटल हिसाब नहीं मिल पाता था, वे भी मुख्यधारा की स्ट्रीमिंग का हिस्सा बनेंगे। इससे छोटे और मध्यम स्तर के म्यूजिक लेबल्स को वैश्विक बुनियादी ढांचे और पूंजी तक पहुंच मिलेगी। साझा मार्केटिंग और डेटा-संचालित रणनीतियों से गानों को सही दर्शकों तक पहुंचाना आसान होगा। म्यूजिक लेबल वर्तमान समय में अपनी कमाई के पुराने तरीकों को बदलने के लिए मजबूर हैं। पिछले एक साल में ऑडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने प्रति स्ट्रीम भुगतान की दरों को करीब आधा कर दिया है। इसकी मुख्य वजह यूट्यूब पर दर्शकों का रुझान संगीत से हटकर स्टैंड-अप कॉमेडी और पॉडकास्ट की ओर बढ़ना है। इसके बावजूद फिल्म निर्माता अपने म्यूजिक राइट्स महंगे बेच रहे हैं, जिससे कंपनियों के लिए रिकवरी करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। साल 2025 का ट्रेंड बताता है कि कंपनियां अब केवल गानों के ट्रांजेक्शन के बजाय आईपी (बौद्धिक संपदा) पर नियंत्रण चाहती हैं। वे ऐसे निवेश पर ध्यान दे रही हैं जहां कंटेंट का फ्लो तय हो और वैश्विक स्तर पर कमाई की जा सके। छोटी लेकिन प्रासंगिक क्षेत्रीय कंपनियों का अधिग्रहण जोखिम कम करने का सबसे बेहतर तरीका बन गया है। इससे क्षेत्रीय संगीत की दुनिया में प्रोफेशनल वर्क कल्चर का विस्तार होगा। अगले 3 साल में 50% बढ़ेगी क्षेत्रीय गानों की पहुंच, कलाकारों की मांग बढ़ेगी बड़े कंपनियों के उतरने से कलाकारों के भुगतान में अस्थायी रूप से उछाल आ सकता है। अगले दो-तीन वर्षों में क्षेत्रीय भाषाओं के गानों की पहुंच 50% तक बढ़ने की उम्मीद है। जब ग्लोबल मंच पर भोजपुरी, पंजाबी या मराठी गाने बजेंगे, तो इससे न केवल सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि जमीनी स्तर पर छिपे हुए हुनर को भी अपनी पहचान बनाने के लिए बड़े शहरों का मोहताज नहीं होना पड़ेगा।
फ्लाइट में ई-सिगरेट पीते दिखे युजवेंद्र चहल:वीडियो सोशल मीडिया में पोस्ट हुआ, रियान पराग पर जुर्माना लगा था

पंजाब किंग्स के लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल फ्लाइट में ई-सिगरेट पीते दिखे हैं। इस पर विवाद हो गया है। दरअसल, पंजाब किंग्स ने टीम के सफर का वीडियो पोस्ट किया। इसमें युजवेंद्र चहल ई-सिगरेट पीते दिख रहे हैं। विवाद होने के बाद पंजाब ने यह वीडियो डिलीट कर दिया है। चहल से पहले 28 अप्रैल को न्यू चंडीगढ़ के मुल्लांपुर स्टेडियम में राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग भी ड्रेसिंग रूम में वेप का इस्तेमाल करते पाए गए थे। इसके बाद BCCI ने उन पर मैच फीस का 25% जुर्माना लगाया गया था। पूरा वीडियो देखिए… फ्लाइट सुरक्षा और कड़े नियमों का उल्लंघन फ्लाइट में धूम्रपान या ई-सिगरेट का उपयोग करना सख्त वर्जित है। विमान के संवेदनशील वातावरण में ऐसी लापरवाही आग लगने का कारण बन सकती है, जिससे सैकड़ों यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती है। उन्हें ‘नो फ्लाई लिस्ट’ में डालने या कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है। भारत में 2019 से ई-सिगरेट पूरी तरह बैन है भारत सरकार ने ‘ई-सिगरेट निषेध अधिनियम (PECA) 2019’ के तहत वेप्स और ई-सिगरेट के उत्पादन, बिक्री, आयात और विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाया है। उल्लंघन पर जुर्माने और जेल की सजा का प्रावधान है। ऐसे में एलीट एथलीट का सार्वजनिक मंच पर इसका इस्तेमाल कानून और खेल की मर्यादा का उल्लंघन माना गया। ———————————————————— IPL से जुड़ी यह खबर देखिए IPL- ईशान ने लगातार 3 छक्कों से फिफ्टी पूरी की; यानसन ने 4 ओवर में 61 दिए सनराइजर्स हैदराबाद ने IPL में बुधवार को पंजाब को 33 रन से हराया। हैदराबाद ने 20 ओवर में 3 विकेट पर 235 रन बनाए। जवाब में पंजाब की टीम 7 विकेट पर 202 रन ही बना सकी। पढ़ें पूरी खबर
फ्लाइट में ई-सिगरेट पीते दिखे युजवेंद्र चहल:वीडियो सामने आया, रियान पराग पर जुर्माना लगा था

पंजाब किंग्स के अनुभवी लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल एक नए विवाद में घिर गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि हैदराबाद की यात्रा के दौरान वे फ्लाइट के अंदर ई-सिगरेट (वेप) का इस्तेमाल कर रहे थे। वीडियो में चहल को इसे छिपाने की कोशिश करते देखा गया है। हालांकि, इस वीडियो की प्रामाणिकता की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कुछ रिपोर्ट्स में लिखा गया है कि पंजाब किंग्स ने टीम के सफर का वीडियो पोस्ट किया। सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद पंजाब ने यह वीडियो डिलीट कर दिया है। IPL के मौजूदा सीजन में यह ई-सिगरेट से जुड़ा दूसरा विवाद है। चहल से पहले 28 अप्रैल को राजस्थान रॉयल्स के कप्तान रियान पराग पंजाब के खिलाफ मैच के दौरान मुल्लांपुर स्टेडियम के ड्रेसिंग रूम में वेपिंग करते पाए गए थे। पूरा वीडियो देखिए… BCCI ने रियान पराग पर 25% जुर्माना लगाया था ड्रेसिंग रूप में ई-सिगरेट पीने का वीडियो सामने आने के बाद BCCI ने रियान पराग पर मैच फीस का 25% का जुर्माना लगाया गया था। उन्हें IPL के कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन का दोषी पाया गया है। मैच रेफरी ने उन पर कड़ा एक्शन लेते हुए जुर्माना और पेनल्टी पॉइंट लगाया है। नो फ्लाई लिस्ट में डाल सकते हैं चहल फ्लाइट में धूम्रपान या ई-सिगरेट का उपयोग करना सख्त वर्जित है। ऐसी लापरवाही फ्लाइट में आग लगने का कारण बन सकती है, जिससे सैकड़ों यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती है। उन्हें ‘नो फ्लाई लिस्ट’ में डालने या कानूनी कार्रवाई का सामना भी करना पड़ सकता है। IPL से पहले कहा था- मैंने शराब छोड़ दी IPL 2026 से पहले चहल ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने पिछले 6 महीनों से पूरी तरह शराब छोड़ दी है ताकि वे युवाओं के लिए एक उदाहरण बन सकें और अपना 150% योगदान दे सकें। इस वीडियो के सामने आने के बाद उनके इन दावों पर सवाल उठ रहे हैं। बता दें कि इससे पहले भी चहल का कार चलाते समय सिगरेट पीने का एक वीडियो वायरल हो चुका है। भारत में 2019 से ई-सिगरेट पूरी तरह बैन है भारत सरकार ने ‘ई-सिगरेट निषेध अधिनियम (PECA) 2019’ के तहत वेप्स और ई-सिगरेट के उत्पादन, बिक्री, आयात और विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाया है। उल्लंघन पर जुर्माने और जेल की सजा का प्रावधान है। ऐसे में एलीट एथलीट का सार्वजनिक मंच पर इसका इस्तेमाल कानून और खेल की मर्यादा का उल्लंघन माना गया। ———————————————————— IPL से जुड़ी यह खबर देखिए IPL- ईशान ने लगातार 3 छक्कों से फिफ्टी पूरी की; यानसन ने 4 ओवर में 61 दिए सनराइजर्स हैदराबाद ने IPL में बुधवार को पंजाब को 33 रन से हराया। हैदराबाद ने 20 ओवर में 3 विकेट पर 235 रन बनाए। जवाब में पंजाब की टीम 7 विकेट पर 202 रन ही बना सकी। पढ़ें पूरी खबर
फिल्म बंदर का टीजर रिलीज:रेट्रो लुक में दिखे बॉबी देओल, असल घटना पर आधारित, अनुराग कश्यप ने की डायरेक्ट; 5 जून को आएगी

बॉबी देओल की अपकमिंग फिल्म बंदर का टीजर जारी हो चुका है। 1 मिनट 29 सेकंड के टीजर में बॉबी देओल समर नाम के पहचान खो रहे एक्टर के किरदार में नजर आ रहे हैं, जिसकी जिंदगी एक केस से हमेशा के लिए बदल जाती है। कैसा है फिल्म का टीजर टीजर की शुरुआत 70 के दशक के डिस्को अवतार से रिमैजिन रेट्रो स्टाइल सॉन्ग ‘कम ऑन बेबी, दिल किसको देगी’ से होती है। इसके बाद बॉबी देओल के किरदार का परिचय होता है। बॉबी ने समर नाम के एक ऐसे एक्टर का किरदार निभाया है, जो किसी जमाने में स्टार था और अब पहचान बनाए रखने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। बदलते दौर में अब समर शादियों में परफॉर्म करता है, जिसके बाद एक-एक कर फिल्म के दूसरें किरदारों का परिचय होता है। सबा आजाद ने फिल्म में बॉबी देओल की डेट का रोल निभाया है। सपना पब्बी उनकी एक्स के रोल में है। टीजर में ट्विस्ट तब आता है जब एक रोज अचानक समर की गिरफ्तारी होती है। टीजर में कुछ जेल सीन और कोर्ट के सीन भी शामिल किए गए हैं। फिल्म की कहानी समर के इर्द-गिर्द है, जो संगीन आरोप लगने के बाद खुद को बेगुनाह साबित करने की मशक्कत करता है। यहां से जो सामने आता है, वो उस कहानी की झलक है जो शुरुआत में दिखने वाली चीजों से कहीं ज्यादा बड़ी और उलझी हुई है। इस फिल्म को देव डी, ब्लैक फ्राइडे, अगली और गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्में बना चुके अनुराग कश्यप ने डायरेक्ट किया है। ये बॉबी और अनुराग की पहली फिल्म है। फिल्म में बॉबी देओल, सपना पब्बी, सबा आजाद के अलावा सान्या मल्होत्रा, राज बी शेट्टी और रिद्धी सेन जैसे एक्टर्स भी हैं। असल घटना पर आधारित है फिल्म बंदर फिल्म बंदर भारत में हुई एक असल घटना पर आधारित है। फिल्म का लेखन सुदीप शर्मा और अभिषेक बनर्जी ने मिलकर किया है, जो पाताल लोक, कोहरा और उड़ता पंजाब जैसी बेहतरीन कहानियों के पीछे की मशहूर जोड़ी है। अनुराग कश्यप के डायरेक्शन और निखिल द्विवेदी की ‘सैफरन मैजिकवर्क्स’ के प्रोडक्शन में बनी यह फिल्म जी स्टूडियोज के सपोर्ट के साथ 5 जून 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
फिल्म बंदर का टीजर रिलीज:रेट्रो लुक में दिखे बॉबी देओल, असल घटना पर आधारित, अनुराग कश्यप ने की डायरेक्ट; 5 जून को आएगी

बॉबी देओल की अपकमिंग फिल्म बंदर का टीजर जारी हो चुका है। 1 मिनट 29 सेकंड के टीजर में बॉबी देओल समर नाम के पहचान खो रहे एक्टर के किरदार में नजर आ रहे हैं, जिसकी जिंदगी एक केस से हमेशा के लिए बदल जाती है। कैसा है फिल्म का टीजर टीजर की शुरुआत 70 के दशक के डिस्को अवतार से रिमैजिन रेट्रो स्टाइल सॉन्ग ‘कम ऑन बेबी, दिल किसको देगी’ से होती है। इसके बाद बॉबी देओल के किरदार का परिचय होता है। बॉबी ने समर नाम के एक ऐसे एक्टर का किरदार निभाया है, जो किसी जमाने में स्टार था और अब पहचान बनाए रखने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। बदलते दौर में अब समर शादियों में परफॉर्म करता है, जिसके बाद एक-एक कर फिल्म के दूसरें किरदारों का परिचय होता है। सबा आजाद ने फिल्म में बॉबी देओल की डेट का रोल निभाया है। सपना पब्बी उनकी एक्स के रोल में है। टीजर में ट्विस्ट तब आता है जब एक रोज अचानक समर की गिरफ्तारी होती है। टीजर में कुछ जेल सीन और कोर्ट के सीन भी शामिल किए गए हैं। फिल्म की कहानी समर के इर्द-गिर्द है, जो संगीन आरोप लगने के बाद खुद को बेगुनाह साबित करने की मशक्कत करता है। यहां से जो सामने आता है, वो उस कहानी की झलक है जो शुरुआत में दिखने वाली चीजों से कहीं ज्यादा बड़ी और उलझी हुई है। इस फिल्म को देव डी, ब्लैक फ्राइडे, अगली और गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्में बना चुके अनुराग कश्यप ने डायरेक्ट किया है। ये बॉबी और अनुराग की पहली फिल्म है। फिल्म में बॉबी देओल, सपना पब्बी, सबा आजाद के अलावा सान्या मल्होत्रा, राज बी शेट्टी और रिद्धी सेन जैसे एक्टर्स भी हैं। असल घटना पर आधारित है फिल्म बंदर फिल्म बंदर भारत में हुई एक असल घटना पर आधारित है। फिल्म का लेखन सुदीप शर्मा और अभिषेक बनर्जी ने मिलकर किया है, जो पाताल लोक, कोहरा और उड़ता पंजाब जैसी बेहतरीन कहानियों के पीछे की मशहूर जोड़ी है। अनुराग कश्यप के डायरेक्शन और निखिल द्विवेदी की ‘सैफरन मैजिकवर्क्स’ के प्रोडक्शन में बनी यह फिल्म जी स्टूडियोज के सपोर्ट के साथ 5 जून 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
लव-कुश, ईबीसी और नीतीश कुमार की छाप: कैसे नया बिहार मंत्रिमंडल जातिगत अंकगणित पर काम कर रहा है | भारत समाचार

आखरी अपडेट:07 मई, 2026, 14:06 IST नई एनडीए कैबिनेट चुनाव के बाद भी जारी रहने वाले सोशल-इंजीनियरिंग फॉर्मूले का पर्याप्त संकेत देती है, जहां विभिन्न ईबीसी-ओबीसी-दलित-फॉरवर्ड जाति संयोजन एक साथ आ रहे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक समारोह में कैबिनेट का विस्तार किया जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा प्रमुख नितिन नबीन सहित अन्य लोग शामिल हुए। (एक्स) गुरुवार को निशांत कुमार ने आखिरकार अपनी अनिच्छा छोड़ दी और बिहार कैबिनेट में शामिल हो गए. गुरुवार को नीतीश कुमार के बेटे सम्राट चौधरी कैबिनेट में शपथ ली, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही सभी अटकलों पर विराम लग गया. नए प्रवेशी के अलावा, सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल पर उस जाति संयोजन पर भी करीब से नजर रखी जा रही है जिसे नए मुख्यमंत्री आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। लव-कुश मॉडल कैबिनेट विस्तार में लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) आधार का मजबूत होना स्पष्ट है. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कुर्मी थे, जबकि चौधरी कोइरी-कुशवाहा हैं। मुख्यमंत्री के अलावा एनडीए सहयोगियों में कैबिनेट में चार कुर्मी-कोइरी मंत्री हैं- निशांत कुमार, श्रवण कुमार, जेडी (यू) से भगवान सिंह खुशवाहा और आरएलएम से दीपक प्रकाश। हालाँकि, चौधरी सरकार ने भी नीतीश कुमार की तरह ही ईबीसी प्रतिनिधित्व पर अपना ध्यान केंद्रित रखा है। केदार गुप्ता (कानू), रामा निषाद (मल्लाह), दिलीप जयसवाल और शीला मंडल (धानुक) जैसे नामों के साथ, कैबिनेट का लक्ष्य “मूक मतदाताओं” की आकांक्षाओं को पूरा करना है जो बिहार की आबादी का लगभग 36 प्रतिशत हैं। दलित-फॉरवर्ड संतुलन अधिनियम एनडीए 2.0 में जातिगत गतिशीलता को ठीक करते समय महादलित और पासवान वोट बैंक दोनों को ध्यान में रखा गया है। कैबिनेट में अशोक चौधरी, रत्नेश सदा और संतोष मांझी (HAM) जैसे प्रमुख चेहरों का लक्ष्य दलितों के व्यापक स्पेक्ट्रम का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। लखेंद्र पासवान और संजय पासवान (एलजेपी-आर) जैसे नेताओं को लाकर पासवान फैक्टर का भी हिसाब लगाया गया है। लेकिन भाजपा के पारंपरिक वोट आधार-अगड़ी जातियों-को भी ध्यान में रखा गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई “प्रतिक्रिया” न हो जैसा कि यूजीसी अधिसूचना के बाद देखा गया था। विजय कुमार सिन्हा और नीतीश मिश्रा भूमियार और ब्राह्मणों के पारंपरिक भाजपा कोर का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि संजय टाइगर और श्रेयसी सिंह का समावेश राजपूत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करता है। अल्पसंख्यक चेहरा जेडीयू कोटे से जमा खान को शामिल करने का मकसद नीतीश कुमार के धर्मनिरपेक्ष चेहरे को जिंदा रखना है. जेडीयू ने कहा है कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने का मतलब यह नहीं होगा कि बिहार की राजनीति में उनकी भूमिका खत्म हो जाएगी। भाजपा के मुख्यमंत्री के मंत्रिमंडल में एक दुर्लभ मुस्लिम चेहरे को सुनिश्चित करना उस संदेश को रेखांकित करना है। कुल मिलाकर, नई एनडीए कैबिनेट चुनाव के बाद जारी रहने वाले सामाजिक-इंजीनियरिंग फॉर्मूले का पर्याप्त संकेत देती है, जहां विभिन्न ईबीसी-ओबीसी-दलित-अगड़ी जाति के संयोजन का एक साथ आना राजद के मुस्लिम-यादव (एमवाई) संयोजन के लिए सीधी चुनौती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया लव-कुश, ईबीसी और नीतीश कुमार की छाप: कैसे नया बिहार मंत्रिमंडल जातिगत अंकगणित पर काम कर रहा है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)बिहार कैबिनेट जाति की राजनीति(टी)बिहार एनडीए सरकार(टी)सम्राट चौधरी कैबिनेट(टी)निशांत कुमार शपथ(टी)लव-कुश मॉडल(टी)ईबीसी प्रतिनिधित्व बिहार(टी)दलित वोट बैंक(टी)पासवान समुदाय की राजनीति
टाटा संस की लिस्टिंग पर टाटा ट्रस्ट्स में मतभेद:नोएल टाटा IPO के खिलाफ, दो ट्रस्टी लिस्टिंग के पक्ष में; 8 मई को हो सकता है फैसला

टाटा ग्रुप की पेरेंट कंपनी ‘टाटा संस’ को शेयर बाजार में लिस्ट करने के मुद्दे पर ग्रुप के टॉप मैनेजमेंट में मतभेद गहरे हो गए हैं। टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा इस लिस्टिंग के खिलाफ हैं, जबकि ट्रस्ट के दो बड़े सदस्य आरबीआई के नियमों का हवाला देते हुए आईपीओ लाने के पक्ष में हैं। इस पूरे विवाद और इसके असर को समझने के लिए पढ़ें यह QA: 1. टाटा ग्रुप में विवाद की मुख्य वजह क्या है? टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की दो-तिहाई हिस्सेदारी है। विवाद की जड़ ‘टाटा संस’ का IPO है। टाटा ट्रस्ट्स के दो ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह चाहते हैं कि टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाए। उनका मानना है कि इससे कंपनी में पारदर्शिता आएगी। वहीं, नोएल टाटा अभी भी टाटा संस को ‘क्लोजली हेल्ड’ यानी निजी कंपनी ही बनाए रखना चाहते हैं। 2. लिस्टिंग को लेकर RBI का नया नियम क्या कहता है? RBI के नए नियमों के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 से टाटा संस को एक ‘सिस्टमैटिकली इम्पोर्टेन्ट’ शैडो बैंक (NBFC) माना जाएगा। नियम यह है कि अगर किसी शैडो बैंक की एसेट साइज 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है, तो उसे शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है। टाटा संस इस दायरे में आती है। 3. क्या टाटा ग्रुप ने पहले भी लिस्टिंग से बचने की कोशिश की है? हां, यह पहली बार नहीं है। 2022 में भी RBI ने टाटा संस को ‘अपर-लेयर’ NBFC की श्रेणी में रखा था और तीन साल का समय दिया था। तब ग्रुप ने अपना कर्ज रीस्ट्रक्चर करके और खुद को ‘नॉन-सिस्टमैटिक’ बताकर लिस्टिंग टाल दी थी। लेकिन अब RBI ने वे रास्ते बंद कर दिए हैं। 4. 8 मई की बोर्ड मीटिंग में क्या होने की उम्मीद है? 8 मई को टाटा ट्रस्ट्स की एक अहम मीटिंग होने वाली है। सूत्रों के मुताबिक, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह इस मीटिंग में आधिकारिक तौर पर लिस्टिंग की तैयारी शुरू करने का प्रस्ताव रख सकते हैं। इसके अलावा, टाटा संस के बोर्ड में नए ट्रस्टी नॉमिनी चुनने पर भी चर्चा होगी। 5. नोएल टाटा लिस्टिंग का विरोध क्यों कर रहे हैं? टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की दो-तिहाई हिस्सेदारी है। नोएल टाटा को डर है कि लिस्टिंग होने से ग्रुप की कंपनियों पर टाटा ट्रस्ट्स का कंट्रोल कम हो सकता है। वह चाहते हैं कि टाटा संस पर ट्रस्ट की पकड़ पहले जैसी ही मजबूत बनी रहे। फरवरी में ऐसी खबरें भी आई थीं कि उन्होंने टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन से इस बात की गारंटी मांगी थी कि कंपनी लिस्ट नहीं होगी। 6. चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का इस पर क्या स्टैंड है? रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन से लिस्टिंग न होने की गारंटी मांगी, तो उन्होंने ऐसा वादा करने से इनकार कर दिया। उनका तर्क था कि यह रेगुलेटरी मामला है। इसी वजह से चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल के री-अपॉइंटमेंट पर वोटिंग भी टल गई थी। 7. क्या RBI टाटा ग्रुप को कोई खास छूट दे सकता है? इसकी संभावना बहुत कम है। RBI ने अनौपचारिक रूप से संकेत दिए हैं कि वह टाटा ग्रुप के लिए नियमों में कोई अपवाद नहीं बनाएगा। रेगुलेटर का मानना है कि अगर टाटा को छूट दी गई, तो दूसरी कंपनियां भी ऐसी ही मांग करेंगी, जिससे बैंकिंग नियम कमजोर पड़ेंगे। 8. अगर टाटा संस का IPO आता है, तो सबसे ज्यादा फायदा किसे होगा? इसका सबसे बड़ा फायदा ‘शापूरजी पालोनजी (SP) ग्रुप’ को होगा। मिस्त्री परिवार के पास टाटा संस की 18.4% हिस्सेदारी है। शापूरजी पालोनजी ग्रुप भारी कर्ज में है और उन्होंने अपनी यह हिस्सेदारी गिरवी रखी है। लिस्टिंग होने से उनके हिस्से की वैल्यू अनलॉक होगी और वे अपना कर्ज चुका पाएंगे। 9. शापूर मिस्त्री परिवार की नेटवर्थ पर इसका क्या असर पड़ेगा? ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक, SP ग्रूप को चलाने वाले शापूर मिस्त्री की नेटवर्थ करीब 32 अरब डॉलर है। खास बात यह है कि उनकी इस दौलत का 75% हिस्सा टाटा संस की हिस्सेदारी में फंसा हुआ है, जिसे वे अभी बेच नहीं सकते। लिस्टिंग उनके लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगी। 10. आगे क्या होने वाला है? अगले दो महीनों में तस्वीर साफ हो जाएगी। टाटा संस फिलहाल रेगुलेटर से अनौपचारिक सलाह ले रहा है और समय सीमा बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। अगर 8 मई की मीटिंग में ट्रस्टी हावी रहते हैं, तो भारत के कॉरपोरेट इतिहास का सबसे बड़ा IPO देखने को मिल सकता है। नॉलेज पार्ट:
टाटा संस की लिस्टिंग पर टाटा ट्रस्ट्स में मतभेद:नोएल टाटा IPO के खिलाफ, दो ट्रस्टी लिस्टिंग के पक्ष में; 8 मई को हो सकता है फैसला

टाटा ग्रुप की पेरेंट कंपनी ‘टाटा संस’ को शेयर बाजार में लिस्ट करने के मुद्दे पर ग्रुप के टॉप मैनेजमेंट में मतभेद गहरे हो गए हैं। टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा इस लिस्टिंग के खिलाफ हैं, जबकि ट्रस्ट के दो बड़े सदस्य आरबीआई के नियमों का हवाला देते हुए आईपीओ लाने के पक्ष में हैं। इस पूरे विवाद और इसके असर को समझने के लिए पढ़ें यह QA: 1. टाटा ग्रुप में विवाद की मुख्य वजह क्या है? टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की दो-तिहाई हिस्सेदारी है। विवाद की जड़ ‘टाटा संस’ का IPO है। टाटा ट्रस्ट्स के दो ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह चाहते हैं कि टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाए। उनका मानना है कि इससे कंपनी में पारदर्शिता आएगी। वहीं, नोएल टाटा अभी भी टाटा संस को ‘क्लोजली हेल्ड’ यानी निजी कंपनी ही बनाए रखना चाहते हैं। 2. लिस्टिंग को लेकर RBI का नया नियम क्या कहता है? RBI के नए नियमों के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 से टाटा संस को एक ‘सिस्टमैटिकली इम्पोर्टेन्ट’ शैडो बैंक (NBFC) माना जाएगा। नियम यह है कि अगर किसी शैडो बैंक की एसेट साइज 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है, तो उसे शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है। टाटा संस इस दायरे में आती है। 3. क्या टाटा ग्रुप ने पहले भी लिस्टिंग से बचने की कोशिश की है? हां, यह पहली बार नहीं है। 2022 में भी RBI ने टाटा संस को ‘अपर-लेयर’ NBFC की श्रेणी में रखा था और तीन साल का समय दिया था। तब ग्रुप ने अपना कर्ज रीस्ट्रक्चर करके और खुद को ‘नॉन-सिस्टमैटिक’ बताकर लिस्टिंग टाल दी थी। लेकिन अब RBI ने वे रास्ते बंद कर दिए हैं। 4. 8 मई की बोर्ड मीटिंग में क्या होने की उम्मीद है? 8 मई को टाटा ट्रस्ट्स की एक अहम मीटिंग होने वाली है। सूत्रों के मुताबिक, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह इस मीटिंग में आधिकारिक तौर पर लिस्टिंग की तैयारी शुरू करने का प्रस्ताव रख सकते हैं। इसके अलावा, टाटा संस के बोर्ड में नए ट्रस्टी नॉमिनी चुनने पर भी चर्चा होगी। 5. नोएल टाटा लिस्टिंग का विरोध क्यों कर रहे हैं? टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की दो-तिहाई हिस्सेदारी है। नोएल टाटा को डर है कि लिस्टिंग होने से ग्रुप की कंपनियों पर टाटा ट्रस्ट्स का कंट्रोल कम हो सकता है। वह चाहते हैं कि टाटा संस पर ट्रस्ट की पकड़ पहले जैसी ही मजबूत बनी रहे। फरवरी में ऐसी खबरें भी आई थीं कि उन्होंने टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन से इस बात की गारंटी मांगी थी कि कंपनी लिस्ट नहीं होगी। 6. चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का इस पर क्या स्टैंड है? रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन से लिस्टिंग न होने की गारंटी मांगी, तो उन्होंने ऐसा वादा करने से इनकार कर दिया। उनका तर्क था कि यह रेगुलेटरी मामला है। इसी वजह से चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल के री-अपॉइंटमेंट पर वोटिंग भी टल गई थी। 7. क्या RBI टाटा ग्रुप को कोई खास छूट दे सकता है? इसकी संभावना बहुत कम है। RBI ने अनौपचारिक रूप से संकेत दिए हैं कि वह टाटा ग्रुप के लिए नियमों में कोई अपवाद नहीं बनाएगा। रेगुलेटर का मानना है कि अगर टाटा को छूट दी गई, तो दूसरी कंपनियां भी ऐसी ही मांग करेंगी, जिससे बैंकिंग नियम कमजोर पड़ेंगे। 8. अगर टाटा संस का IPO आता है, तो सबसे ज्यादा फायदा किसे होगा? इसका सबसे बड़ा फायदा ‘शापूरजी पालोनजी (SP) ग्रुप’ को होगा। मिस्त्री परिवार के पास टाटा संस की 18.4% हिस्सेदारी है। शापूरजी पालोनजी ग्रुप भारी कर्ज में है और उन्होंने अपनी यह हिस्सेदारी गिरवी रखी है। लिस्टिंग होने से उनके हिस्से की वैल्यू अनलॉक होगी और वे अपना कर्ज चुका पाएंगे। 9. शापूर मिस्त्री परिवार की नेटवर्थ पर इसका क्या असर पड़ेगा? ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक, SP ग्रूप को चलाने वाले शापूर मिस्त्री की नेटवर्थ करीब 32 अरब डॉलर है। खास बात यह है कि उनकी इस दौलत का 75% हिस्सा टाटा संस की हिस्सेदारी में फंसा हुआ है, जिसे वे अभी बेच नहीं सकते। लिस्टिंग उनके लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगी। 10. आगे क्या होने वाला है? अगले दो महीनों में तस्वीर साफ हो जाएगी। टाटा संस फिलहाल रेगुलेटर से अनौपचारिक सलाह ले रहा है और समय सीमा बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। अगर 8 मई की मीटिंग में ट्रस्टी हावी रहते हैं, तो भारत के कॉरपोरेट इतिहास का सबसे बड़ा IPO देखने को मिल सकता है। नॉलेज पार्ट:
भूत बंगला के मेकर्स पर नॉन पेमेंट के आरोप:दावा- वेंडर्स के 48 लाख रुपए बकाया, बालाजी टेलीफिल्म्स ने आरोपों को किया खारिज

कुछ वेंडर्स ने अक्षय कुमार स्टारर फिल्म भूत बंगला के मेकर्स पर पेमेंट न करने का आरोप लगाया है। दावा है कि वेंडर्स के फिल्म की प्रोडक्शन कंपनी बालाजी टेलीफिल्म्स पर 48 लाख रुपए बकाया हैं। ये दावे तब सामने आए हैं, जब एकता कपूर फिल्म की सक्सेस का जश्न मनाते हुए खुशी जाहिर कर रही हैं। मिड डे की रिपोर्ट के अनुसार, भूत बंगला में काम करने वाले वेंडर्स ने कहा है कि पेमेंट कई महीनों से फंसी हुई हैं। एक बार जब फिल्म रिलीज हो जाती हो तो पैसे मिलना मुश्किल होता है। 90 दिनों में पेमेंट क्लियर होना, अब पुरानी बात हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, बालाजी टेलीफिल्म्स ने दो वेंडर्स की पेमेंट नहीं की है। प्रोडक्शन हाउस को एक वेंडर को 30 लाख और दूसरे वेंडर को 18 लाख रुपए देने हैं। कई महीनों से अपने 18 लाख का इंतजार कर रहे एक वेंडर ने नाराजगी जाहिर कर कहा है कि ऐसी बड़ी बजट की फिल्मों में ऐसा होना स्थिति के और खराब होने का संकेत है। राइटर ने भी लगाए नॉन पेमेंट के आरोप वेंडर्स के अलावा फिल्म के राइटर प्रांजल कृपलानी ने भी प्रोड्यूसर आलोक कुमार चौबे और संजय गुप्ता को 50 हजार रुपए की पेमेंट रोकने पर लीगल नोटिस भेजा था। पोर्टल से बात करते हुए एक क्रू मेंबर ने ये भी कहा है कि जनवरी में भोपाल में हुई शूटिंग के समय प्रोड्यूसर के पास फंड कम पड़ गया था। तब उन्हें जिन होटलों में ठहराया गया था, वहां की भी पेमेंट लंबे समय तक नहीं हो सकी, जिससे क्रू को पेमेंट पूरी होने तक वहीं रोककर रखा गया था। रिपोर्ट में बालाजी टेलीफिल्म्स के हवाले से वेंडर्स के इन दावों को खारिज किया गया है। प्रोडक्शन टीम का कहना है कि सिर्फ भूत बंगला ही नहीं बल्कि प्रोडक्शन के सभी प्रोजेक्ट्स से जुड़े लोगों की कॉन्ट्रैक्ट में लिखी गई पेमेंट क्लियर हो चुकी है। बॉक्स ऑफिस पर भूत बंगला ने कमाए 232 करोड़ अक्षय कुमार स्टारर फिल्म भूत बंगला 17 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। इस फिल्म ने अब तक वर्ल्डवाइड 232 करोड़ का कलेक्शन कर लिया है। हाल ही में फिल्म की प्रोड्यूसर एकता कपूर ने अक्षय कुमार और प्रियदर्शन के साथ तस्वीरें शेयर कर उन्हें इस प्रोजेक्ट की सक्सेस का श्रेय देते हुए धन्यवाद कहा है।
भूत बंगला के मेकर्स पर नॉन पेमेंट के आरोप:दावा- वेंडर्स के 48 लाख रुपए बकाया, बालाजी टेलीफिल्म्स ने आरोपों को किया खारिज

कुछ वेंडर्स ने अक्षय कुमार स्टारर फिल्म भूत बंगला के मेकर्स पर पेमेंट न करने का आरोप लगाया है। दावा है कि वेंडर्स के फिल्म की प्रोडक्शन कंपनी बालाजी टेलीफिल्म्स पर 48 लाख रुपए बकाया हैं। ये दावे तब सामने आए हैं, जब एकता कपूर फिल्म की सक्सेस का जश्न मनाते हुए खुशी जाहिर कर रही हैं। मिड डे की रिपोर्ट के अनुसार, भूत बंगला में काम करने वाले वेंडर्स ने कहा है कि पेमेंट कई महीनों से फंसी हुई हैं। एक बार जब फिल्म रिलीज हो जाती हो तो पैसे मिलना मुश्किल होता है। 90 दिनों में पेमेंट क्लियर होना, अब पुरानी बात हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, बालाजी टेलीफिल्म्स ने दो वेंडर्स की पेमेंट नहीं की है। प्रोडक्शन हाउस को एक वेंडर को 30 लाख और दूसरे वेंडर को 18 लाख रुपए देने हैं। कई महीनों से अपने 18 लाख का इंतजार कर रहे एक वेंडर ने नाराजगी जाहिर कर कहा है कि ऐसी बड़ी बजट की फिल्मों में ऐसा होना स्थिति के और खराब होने का संकेत है। राइटर ने भी लगाए नॉन पेमेंट के आरोप वेंडर्स के अलावा फिल्म के राइटर प्रांजल कृपलानी ने भी प्रोड्यूसर आलोक कुमार चौबे और संजय गुप्ता को 50 हजार रुपए की पेमेंट रोकने पर लीगल नोटिस भेजा था। पोर्टल से बात करते हुए एक क्रू मेंबर ने ये भी कहा है कि जनवरी में भोपाल में हुई शूटिंग के समय प्रोड्यूसर के पास फंड कम पड़ गया था। तब उन्हें जिन होटलों में ठहराया गया था, वहां की भी पेमेंट लंबे समय तक नहीं हो सकी, जिससे क्रू को पेमेंट पूरी होने तक वहीं रोककर रखा गया था। रिपोर्ट में बालाजी टेलीफिल्म्स के हवाले से वेंडर्स के इन दावों को खारिज किया गया है। प्रोडक्शन टीम का कहना है कि सिर्फ भूत बंगला ही नहीं बल्कि प्रोडक्शन के सभी प्रोजेक्ट्स से जुड़े लोगों की कॉन्ट्रैक्ट में लिखी गई पेमेंट क्लियर हो चुकी है। बॉक्स ऑफिस पर भूत बंगला ने कमाए 232 करोड़ अक्षय कुमार स्टारर फिल्म भूत बंगला 17 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। इस फिल्म ने अब तक वर्ल्डवाइड 232 करोड़ का कलेक्शन कर लिया है। हाल ही में फिल्म की प्रोड्यूसर एकता कपूर ने अक्षय कुमार और प्रियदर्शन के साथ तस्वीरें शेयर कर उन्हें इस प्रोजेक्ट की सक्सेस का श्रेय देते हुए धन्यवाद कहा है।









