'फिल्मों के किरदार से मुझे जज मत करो':Gen Z विवाद पर कंगना रनोट का पलटवार, बोलीं- रील और रियल लाइफ में फर्क समझिए

Gen Z को लेकर दिए गए बयान पर घिरीं कंगना रनोट ने अब ट्रोलर्स को करारा जवाब दिया है। सोशल मीडिया पर उनकी फिल्मों के किरदारों की क्लिप्स शेयर कर उन्हें निशाने पर लेने वालों पर कंगना ने पलटवार करते हुए कहा कि फिल्मों में निभाए गए किरदार और असल जिंदगी के विचारों की तुलना करना गलत है। उन्होंने लोगों से रील और रियल लाइफ का फर्क समझने की अपील की। Gen Z को लेकर हाल ही में दिए गए बयान के बाद कंगना रनोट लगातार सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। उनके बयान के विरोध में कई ट्रोल पेजों और सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी फिल्मों के अलग-अलग किरदारों की तस्वीरें और वीडियो शेयर किए। इन पोस्ट्स के जरिए यह सवाल उठाया गया कि अगर कंगना फिल्मों में ऐसे किरदार निभा सकती हैं तो फिर वह Gen Z की सोच और व्यवहार पर सवाल कैसे उठा सकती हैं। अब इस पूरे विवाद पर कंगना ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर संसद में दिए गए अपने एक पुराने भाषण का वीडियो साझा करते हुए आलोचकों को जवाब दिया। कंगना ने कहा कि फिल्मों में निभाया गया किरदार किसी अभिनेता की निजी सोच या जीवन का प्रतिबिंब नहीं होता। अभिनय एक पेशा है और कलाकार अलग-अलग तरह के किरदार निभाते हैं, इसलिए उन्हें उनकी फिल्मों के आधार पर जज करना गलत है। कंगना ने अपने बयान में कहा कि कुछ लोग जानबूझकर युवाओं को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक, फिल्मी किरदारों और किसी अभिनेता के वास्तविक विचारों को एक जैसा बताना न सिर्फ गलत है, बल्कि यह दर्शकों के बीच भ्रम भी पैदा करता है। उन्होंने कहा कि फिल्मों का मकसद मनोरंजन करना होता है, न कि लोगों को वही व्यवहार अपनाने की सीख देना। किसी कलाकार ने पर्दे पर जो किरदार निभाया है, उसका मतलब यह नहीं कि वह असल जिंदगी में भी वैसा ही सोचता या व्यवहार करता है। कंगना ने लोगों से अपील की कि वे मनोरंजन और वास्तविक जीवन के बीच का फर्क समझें। कंगना का यह बयान ऐसे समय आया है जब सोशल मीडिया पर उनके पुराने फिल्मी किरदारों की क्लिप्स तेजी से वायरल हो रही हैं। कई यूजर्स का कहना था कि कंगना के ऑन-स्क्रीन किरदार और उनके हालिया बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। इसी आलोचना के जवाब में उन्होंने अपना पक्ष सार्वजनिक किया। कंगना ने यह भी संकेत दिया कि सोशल मीडिया पर किसी मुद्दे को आधी-अधूरी जानकारी के साथ पेश करना युवाओं के बीच गलत संदेश पहुंचा सकता है। उनका कहना है कि किसी अभिनेता के निजी विचारों पर बहस की जा सकती है, लेकिन उसके फिल्मी किरदारों को उससे जोड़ना उचित नहीं है। कंगना के इस जवाब के बाद सोशल मीडिया पर बहस और तेज हो गई है। एक तरफ उनके समर्थक उनकी बात का समर्थन कर रहे हैं और अभिनय व निजी जीवन को अलग मानने की दलील दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आलोचक अब भी उनके हालिया बयान पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में Gen Z को लेकर शुरू हुआ यह विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा।
गाजा से इजराइली सेना हटाने पर क्यों फंसे नेतन्याहू:इजराइली PM पर ट्रम्प को खुश करने के साथ चुनाव जीतने की चुनौती

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 30 जुलाई को दावा किया कि गाजा को लेकर ऐतिहासिक समझौता हो गया है। हमास हथियार छोड़ने के लिए तैयार हो गया है। इसके साथ ही इजराइली सेना भी गाजा से पीछे हट जाएगी। ट्रम्प के ऐलान के बाद से सवाल पूछे जाने लगे हैं कि क्या इजराइल सच में गाजा से अपनी सेना हटा लेगा? यही शर्त अब इजराइल की राजनीति में सबसे बड़े विवाद की वजह बन गई है। इजराइल में कई नेता और वहां का मीडिया इस समझौते को लेकर नाराज हैं। एक तरफ ट्रम्प दावा कर रहे हैं कि इजराइल इस समझौते से बेहद खुश है। दूसरी तरफ इजराइल ने अब तक इसे लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक इजराइली सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि जब तक हमास के पूरी तरह हथियार छोड़ने का पक्का भरोसा नहीं हो जाता, तब तक गाजा से सेना हटाने का सवाल ही नहीं उठता। गाजा से सेना हटाने का इजराइल में इतना विरोध क्यों? 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इजराइल ने गाजा में बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया। तब से अब तक 73 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं और गाजा का बड़ा हिस्सा तबाह हो चुका है। इसके बावजूद इजराइल में बड़ी संख्या में लोग अब भी गाजा के खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई के पक्ष में हैं। जाहिर है कि गाजा से सेना हटाने और वहां दोबारा फिलिस्तीनी सरकार बहाल करने का विचार इजराइल में कई लोगों को पसंद नहीं है। उन्हें डर है कि अगर सेना हट गई तो हमास फिर से मजबूत होकर 7 अक्टूबर जैसा हमला कर सकता है। यही वजह है कि सरकार के कई मंत्री गाजा में भी वेस्ट बैंक की तरह यहूदी बस्तियां बसाने की वकालत कर चुके हैं। ऐसे में गाजा से सेना की वापसी और पुनर्निर्माण की योजना का विरोध होना स्वाभाविक माना जा रहा है। किन नेताओं ने सबसे ज्यादा विरोध किया? बेजलेल स्मोट्रिच: वित्त मंत्री नेतन्याहू सरकार में वित्त मंत्री रहे स्मोट्रिच ने कहा कि गाजा से इजराइली सेना नहीं हटनी चाहिए। हमास के लोगों से हथियार छीनना ही पहली शर्त है। आखिरकार इजराइल पूरे गाजा पर नियंत्रण करेगा और वहां फिर से यहूदी बस्तियां बसाई जाएंगी। इतमार बेन ग्विर: राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री बेन ग्विर ट्रम्प के प्लान को बुरा बताते हुए कहा कि अगर हमास के लड़ाकों को निशाना बनाना बंद कर दिया गया, तो उन्हें अगला हमला करने का मौका मिल जाएगा। गाजा में सैन्य कार्रवाई जारी रहनी चाहिए और वहां से लोगों के पलायन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। गादी आइजनकोट: पूर्व आर्मी चीफ ट्रम्प के ऐलान का विरोध सिर्फ कट्टर दक्षिणपंथी नेता ही नहीं कर रहे। पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट भी इसके खिलाफ माने जा रहे हैं। इस साल अक्टूबर में होने वाले चुनाव में गादी को नेतन्याहू का सबसे बड़ा विरोधी माना जा रहा है। गादी ने कहा कि अगर हमास की सैन्य और राजनीतिक ताकत पूरी तरह खत्म नहीं होती, तो यह इजराइल की बड़ी नाकामी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि हमास पहले जितना ही मजबूत हो चुका है। नेतन्याहू सबसे मुश्किल स्थिति में क्यों हैं? प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अभी तक इस समझौते पर सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शायद उनकी चुप्पी ही बताती है कि वे कितनी मुश्किल स्थिति में हैं। एक तरफ ट्रम्प हैं, जो इस समझौते को अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत मान रहे हैं। दूसरी तरफ नेतन्याहू के अपने कट्टर दक्षिणपंथी सहयोगी हैं, जो गाजा से सेना हटाने के सख्त खिलाफ हैं। अगर नेतन्याहू गाजा से सेना हटाने पर सहमत होते हैं, तो चुनाव से पहले उनके कट्टर दक्षिणपंथी सहयोगी और वोटर उनसे दूर हो सकते हैं। दूसरी तरफ अगर वे समझौते को पूरी तरह ठुकरा देते हैं, तो ट्रम्प और अमेरिका नाराज हो सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि नेतन्याहू शायद बीच का रास्ता अपनाएं। यानी कुछ इलाकों से सेना पीछे हटाने का दिखावा करें, लेकिन गाजा से पूरी तरह न निकलें। ट्रम्प को नाराज करना नेतन्याहू के लिए बहुत मुश्किल नेतन्याहू पर दबाव सिर्फ इजराइल के भीतर से नहीं, बल्कि अमेरिका से भी है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डोव वैक्समैन के मुताबिक, चुनाव से ठीक पहले नेतन्याहू ट्रम्प से रिश्ते खराब करने का जोखिम नहीं उठाना चाहेंगे। हाल के समय में इजराइल में यह चर्चा बढ़ी है कि ट्रम्प सरकार का रुख पहले जैसा नहीं रहा। लेकिन इस पर लगभग सभी की राय एक है कि अमेरिका का सैन्य और सुरक्षा समर्थन इजराइल के लिए जरूरी है। इसीलिए विपक्ष नेतन्याहू को लगातार चेतावनी देता रहा है कि अगर अमेरिका के साथ रिश्ते बिगड़े, तो इसका राजनीतिक नुकसान उन्हें ही उठाना पड़ेगा। इसके अलावा भ्रष्टाचार के मामलों से जूझ रहे नेतन्याहू को ट्रम्प से राजनीतिक और नैतिक समर्थन की उम्मीद है। नेतन्याहू यह भी चाहते होंगे कि ट्रम्प चुनावी माहौल में उनके लिए कोई बड़ा कूटनीतिक या राजनीतिक फायदा दिला सकते हैं। इसमें सऊदी अरब और इजराइल के बीच संबंध सामान्य कराने जैसा बड़ा समझौता या उनके खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों पर समर्थन जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं। क्या सच में इजराइल गाजा से निकल जाएगा? इस सवाल का जवाब फिलहाल ‘नहीं’ मिलता दिख रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि गाजा से इजराइली सेना की पूरी वापसी की संभावना लगभग नामुमकिन है। नेतन्याहू ट्रम्प को यह दिखा सकते हैं कि समझौता आगे बढ़ रहा है। इसके लिए वे समझौते की घोषणा, हस्ताक्षर समारोह या कुछ और करने का नाटक कर सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इजराइल गाजा से सेना हटा लेगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, गाजा से सेना न हटाना सिर्फ चुनावी या राजनीतिक मजबूरी नहीं है। यह नेतन्याहू की सुरक्षा नीति का भी अहम हिस्सा है। उनका हमेशा से मानना रहा है कि खतरों को रोकने के लिए इजराइल को अपनी सीमाओं के बाहर भी सैन्य मौजूदगी बनाए रखनी चाहिए। ऐसे में चुनाव नजदीक आने के साथ नेतन्याहू गाजा से पीछे हटने के बजाय और सख्त रुख अपना सकते हैं।
एथेनॉल से पेट्रोल पर ₹30 प्रति लीटर की बचत हुई:सरकार का दावा- ब्लेंडिंग न होती तो दिल्ली में ₹125 लीटर मिलता, अभी ₹102 में मिल रहा

क्रूड ऑयल की कीमतें जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में 135 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई थीं, तब अगर तेल कंपनियों ने पेट्रोल में एथेनॉल की ब्लेंडिंग न की होती, तो दिल्ली में पेट्रोल का भाव लगभग 125 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया होता। शुक्रवार को पेट्रोलियम मंत्रालय ने एथेनॉल प्रोग्राम की लागत, खाद्य सुरक्षा पर असर और टैक्सपेयर्स की सब्सिडी से जुड़े दावों का जवाब देते हुए यह बात कही। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि संकट के समय पर इस प्रोग्राम की वजह से पेट्रोल पर प्रति लीटर लगभग 30 रुपए की बचत हुई। दिल्ली में अभी 102 रुपए लीटर है E20 पेट्रोल पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, वैश्विक बाजार में क्रूड की कीमतें बढ़ने के बावजूद देश में उपभोक्ताओं को पेट्रोल 94.77 रुपए प्रति लीटर के भाव पर मिला। इसका कारण यह था कि पूर्व-निर्धारित कीमतों पर घरेलू स्तर पर खरीदे गए एथेनॉल की हर एक लीटर पेट्रोल में 20% हिस्सेदारी थी। इसी वजह से रिटेल कीमतें क्रूड के तेज उछाल से बची रहीं। 28 फरवरी को पश्चिमी एशिया में तनाव और संघर्ष शुरू होने के बाद, सरकार ने करीब 75 दिनों तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखा था। इसके बाद मई में दामों में 7.5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। दिल्ली में फिलहाल मानक E20 पेट्रोल (91-ऑक्टेन) की कीमत 102.12 रुपए प्रति लीटर है, जबकि 100-ऑक्टेन वाला पेट्रोल 169 रुपए प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है। गरीबों का अनाज या FCI का चावल डायवर्ट नहीं हुआ पेट्रोलियम मंत्रालय ने उन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि गरीबों के हक का खाद्यान्न एथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट किया जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस प्रोग्राम को चलाने या सपोर्ट देने के लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) के सब्सिडी वाले चावल का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। माइलेज पर कितना असर: 2 से 6% तक घट सकती है एफिशिएंसी सड़क परिवहन मंत्रालय ने ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के एक अध्ययन का हवाला दिया। गुरुवार को लोकसभा में जानकारी देते हुए मंत्रालय ने बताया कि E10 ईंधन के लिए डिजाइन की गई BS-III, BS-IV और BS-VI गाड़ियां जब E20 पर चलाई जाती हैं, तो उनकी कैपेसिटी और उम्र के हिसाब से माइलेज (फ्यूल एफिशिएंसी) में 2 से 6% तक की गिरावट आ सकती है। इससे पहले 20 जुलाई को तेल मंत्रालय ने राज्यसभा में बताया था कि ऐसी गाड़ियों में माइलेज की यह कमी लगभग 3-5% तक ही सीमित रहती है। वैज्ञानिक जांच के बाद लागू हुआ E20 दोनों मंत्रालयों ने जोर देकर कहा कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम को पूरी तरह से वैज्ञानिक रूप से जांचे-परखे और चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है। जैसे-जैसे देश में उत्पादन क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होता गया, ब्लेंडिंग के स्तर को भी धीरे-धीरे बढ़ाया गया। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में बताया कि E20 पर शिफ्ट होने का फैसला फ्यूल सिस्टम, इंजन की मजबूती, ड्राइवैबिलिटी, मटीरियल कम्पैटिबिलिटी और एमिशन परफॉर्मेंस की पूरी जांच और वैलिडेशन के बाद ही लिया गया है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान वाहन निर्माताओं, तेल विपणन कंपनियों (OMCs) और चीनी व अनाज उद्योग से लगातार सलाह-मशविरा किया गया। 23 करोड़ से ज्यादा गाड़ियों पर कोई असर नहीं सरकार ने लैब स्टडीज और रियल-वर्ल्ड डेटा का हवाला देते हुए बताया कि E20 फ्यूल के इस्तेमाल से गाड़ियों की ओवरऑल परफॉर्मेंस पर कोई विपरीत या प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है। सड़कों पर चल रही 20 करोड़ से ज्यादा टू-व्हीलर्स और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें इन एथेनॉल-मिश्रित ईंधनों पर चल रही हैं। एथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह से इंजन खराब होने का कोई भी प्रामाणिक या सत्यापित मामला सामने नहीं आया है।
ट्रम्प बोले- ईरान पर भरोसा खत्म हो रहा:वे झूठ बोलते हैं, लेकिन बातचीत जारी है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें ईरान पर भरोसा नहीं रहा। कैंप डेविड में कैबिनेट बैठक के दौरान उन्होंने कहा, ‘वे झूठ बोलते हैं, गलत जानकारी देते हैं। हमेशा बातचीत करना चाहते हैं, लेकिन अपना वादा बार-बार तोड़ देते हैं।’ हालांकि, ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अभी भी जारी है। उन्होंने बताया कि अमेरिका की ओर से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर बातचीत में शामिल हैं। ट्रम्प ने कहा कि बातचीत के दौरान ही उन्हें खबर मिली कि जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर पांच मिसाइलें दागी गईं। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में सतर्क रहना जरूरी है और भविष्य में हमलों की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ईरान की सैन्य ताकत पर ट्रम्प ने कहा कि फिलहाल वह आक्रामक दिख सकता है, लेकिन समय के साथ उसकी क्षमता कमजोर पड़ जाएगी।
चांदी आज ₹370 सस्ती, इस हफ्ते ₹4,426 गिरी:सोना ₹524 घटकर ₹1.43 पर आया; जानें अपने शहर के दाम

सोने-चांदी की कीमतों में 31 जुलाई को गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 370 रुपए घटकर 2,18,295 रुपए पर आ गई है, जो गुरुवार को 2,18,665 रुपए पर थी। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 524 रुपए घटकर 1,42,860 लाख रुपए आ गया। इससे पहले 30 जुलाई को यह 1,43,384 लाख पर था। सोना इस हफ्ते 921 रुपए सस्ता हुआ है, जबकि चांदी की कीमत 4,426 रुपए गिरी है। 25 जुलाई को सोना ₹1.44 लाख/10 ग्राम और चांदी ₹2.23 लाख/किलो थी। देश के बड़े शहरों में सोने की कीमत अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग होने की 4 वजहें ऑल टाइम हाई से 1.68 लाख रुपए गिरी चांदी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 33,261 रुपए सस्ता हो चुका है। वहीं, चांदी के कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी। तब से अब तक 162 दिन में चांदी 1.68 लाख रुपए सस्ती हो गई है। इस साल अब तक सोने-चांदी की चाल
पाकिस्तान में गैंगस्टर उजैर बलोच के भाई पर हमला:ल्यारी में अज्ञात हमलावरों ने घर के बाहर गोली मारी, हालत गंभीर

पाकिस्तान के कराची में जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर उजैर बलोच के भाई जुबैर बलोच पर गुरुवार शाम जानलेवा हमला हुआ। कराची के लियारी इलाके में उनके घर के बाहर बाइक सवार अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। हमले में 40 साल जुबैर गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि गोलीबारी की चपेट में आए दो राहगीर भी जख्मी हुए हैं। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जुबैर के सीने और पेट में गोलियां लगी हैं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक, हमलावर वारदात को अंजाम देने के बाद मौके से फरार हो गए। घायलों को तुरंत कराची के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां जुबैर की सर्जरी की गई। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, घायल राहगीरों में से एक की हालत भी गंभीर है। गैंगवार और पुरानी रंजिश की जांच साउथ के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) सैयद असद रजा ने बताया कि पुलिस हमले की हर पहलू से जांच कर रही है। शुरुआती जांच में गैंगवार, पुरानी दुश्मनी और अन्य संभावित कारणों को ध्यान में रखा गया है। फिलहाल किसी एक वजह की पुष्टि नहीं की गई है। पुलिस के अनुसार, जुबैर बलोच 2012 में सात आपराधिक मामलों में गिरफ्तार हुआ था। वह इसी साल जनवरी 2025 में जेल से रिहा होकर बाहर आया था। अधिकारियों का कहना है कि हमले के पीछे उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि भी जांच के दायरे में है। इलाके में गैंगवार फिर से शुरू होने की चर्चा इस घटना के बाद लियारी में एक बार फिर गैंगवार की आशंकाएं तेज हो गई हैं। इलाके के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जुबैर ने हाल ही में एक राजनीतिक पार्टी जॉइन की थी और कुछ महीने पहले इलाके में पार्टी के झंडे भी लगाए थे। उनका दावा है कि कराची ऑपरेशन के दौरान दुबई और ईरान भागे कई गैंगस्टरों के दोबारा लौटने की चर्चाएं हैं, जिससे स्थानीय लोगों में गैंगवार फिर शुरू होने का डर बढ़ गया है। उजैर बलोच पर कई गंभीर मामले दर्ज उजैर बलोच कभी कराची के सबसे ताकतवर गैंग लीडरों में गिना जाता था। उसे लियारी का कुख्यात गैंगस्टर अब्दुल रहमान उर्फ रहमान डकैत का दाहिना हाथ माना जाता था। पुलिस मुठभेड़ में रहमान डकैत के मारे जाने के बाद उजैर ने लियारी के अपराध जगत की कमान संभाल ली और धीरे-धीरे इलाके का सबसे प्रभावशाली गैंगस्टर बन गया। फिलहाल उजैर बलोच पाकिस्तान की जेल में बंद है। इसी साल मार्च में आतंकवाद विरोधी अदालत ने हत्या, पुलिस पर हमले और विस्फोटक रखने समेत सात मामलों में उसकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। उस पर 2012 में कलाकोट थाना क्षेत्र में सुरक्षा बलों पर हथियारों और विस्फोटकों से हमला करने का भी आरोप है। इससे पहले अप्रैल 2020 में एक सैन्य अदालत ने उसे जासूसी का दोषी ठहराते हुए 12 साल की सजा सुनाई थी। हाल के दिनों में उजैर बलोच का नाम भारतीय स्पाई-थ्रिलर फिल्म ‘धुरंधर’ की वजह से भी चर्चा में रहा है। फिल्म में उसके किरदार को अभिनेता दानिश पंडोर ने निभाया है।
इंपैक्ट फीचर:वित्तीय लेनदेन और निवेश में लालच से बचें, सही समय पर सही निवेश ही सुरक्षित भविष्य की गारंटी

आदित्य बिरला सन लाइफ म्यूचुअल फंड और दैनिक भास्कर की संयुक्त पहल ‘शिक्षित निवेशक, विकसित भारत एवं सुरक्षित भविष्य’ के तहत पटना में आयोजित निवेश जागरूकता कार्यशाला में विशेषज्ञों ने निवेशकों को वित्तीय अनुशासन, साइबर सुरक्षा और दीर्घकालिक निवेश के महत्व से अवगत कराया। निवेश केवल धन बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव है। इसी उद्देश्य के साथ आदित्य बिरला सन लाइफ म्यूचुअल फंड और दैनिक भास्कर की संयुक्त पहल ‘शिक्षित निवेशक, विकसित भारत एवं सुरक्षित भविष्य’ के अंतर्गत पटना में निवेश जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वित्तीय विशेषज्ञों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश, वित्तीय अनुशासन और डिजिटल फ्रॉड से बचाव के महत्वपूर्ण उपाय बताए। पैसे की बचत करना पर्याप्त नहीं मुख्य वक्ता मोहम्मद आमिर सुलेमान ने कहा कि केवल पैसे की बचत करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही समय पर सही जगह निवेश करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपनी आय का बजट बनाकर नियमित बचत करनी चाहिए और दीर्घकालिक लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए निवेश की योजना बनानी चाहिए। उन्होंने निवेशकों को लालच में आकर अवास्तविक रिटर्न के वादों पर भरोसा न करने की सलाह दी। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बचत और निवेश के बीच का अंतर भी विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि बचत केवल धन को सुरक्षित रखने का माध्यम है, जबकि निवेश उस धन को समय के साथ बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। सही वित्तीय योजना और अनुशासित निवेश से ही आर्थिक रूप से सुरक्षित भविष्य का निर्माण संभव है। धोखाधड़ी का संदेह हो तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें साइबर सुरक्षा सत्र में डिजिटल वित्तीय लेनदेन से जुड़े बढ़ते जोखिमों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने निवेशकों को सलाह दी कि किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या मैसेज पर अपनी बैंकिंग अथवा निवेश संबंधी जानकारी साझा न करें। यदि किसी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी का संदेह हो तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही, साइबर क्राइम पोर्टल और संबंधित बैंक को भी तत्काल सूचित करने की सलाह दी गई, ताकि वित्तीय नुकसान को कम किया जा सके। नियमित निवेश और विश्वसनीय वित्तीय साधन चुनें कार्यक्रम के दौरान निवेशकों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए गए, जहां म्यूचुअल फंड, दीर्घकालिक निवेश, जोखिम प्रबंधन और वित्तीय योजना से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी साझा की। वक्ताओं ने कहा कि निवेश करते समय धैर्य बनाए रखना, नियमित निवेश करना और विश्वसनीय वित्तीय साधनों का चयन करना ही बेहतर रिटर्न और सुरक्षित भविष्य की कुंजी है। इस कार्यशाला का उद्देश्य लोगों में वित्तीय साक्षरता बढ़ाना और उन्हें जागरूक, जिम्मेदार एवं आत्मविश्वास के साथ निवेश करने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में निवेशकों ने भाग लिया और विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त किया।
इंपैक्ट फीचर:वित्तीय लेनदेन और निवेश में लालच से बचें, सही समय पर सही निवेश ही सुरक्षित भविष्य की गारंटी

आदित्य बिरला सन लाइफ म्यूचुअल फंड और दैनिक भास्कर की संयुक्त पहल ‘शिक्षित निवेशक, विकसित भारत एवं सुरक्षित भविष्य’ के तहत पटना में आयोजित निवेश जागरूकता कार्यशाला में विशेषज्ञों ने निवेशकों को वित्तीय अनुशासन, साइबर सुरक्षा और दीर्घकालिक निवेश के महत्व से अवगत कराया। निवेश केवल धन बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव है। इसी उद्देश्य के साथ आदित्य बिरला सन लाइफ म्यूचुअल फंड और दैनिक भास्कर की संयुक्त पहल ‘शिक्षित निवेशक, विकसित भारत एवं सुरक्षित भविष्य’ के अंतर्गत पटना में निवेश जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वित्तीय विशेषज्ञों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश, वित्तीय अनुशासन और डिजिटल फ्रॉड से बचाव के महत्वपूर्ण उपाय बताए। पैसे की बचत करना पर्याप्त नहीं मुख्य वक्ता मोहम्मद आमिर सुलेमान ने कहा कि केवल पैसे की बचत करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही समय पर सही जगह निवेश करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपनी आय का बजट बनाकर नियमित बचत करनी चाहिए और दीर्घकालिक लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए निवेश की योजना बनानी चाहिए। उन्होंने निवेशकों को लालच में आकर अवास्तविक रिटर्न के वादों पर भरोसा न करने की सलाह दी। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बचत और निवेश के बीच का अंतर भी विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि बचत केवल धन को सुरक्षित रखने का माध्यम है, जबकि निवेश उस धन को समय के साथ बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। सही वित्तीय योजना और अनुशासित निवेश से ही आर्थिक रूप से सुरक्षित भविष्य का निर्माण संभव है। धोखाधड़ी का संदेह हो तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें साइबर सुरक्षा सत्र में डिजिटल वित्तीय लेनदेन से जुड़े बढ़ते जोखिमों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने निवेशकों को सलाह दी कि किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या मैसेज पर अपनी बैंकिंग अथवा निवेश संबंधी जानकारी साझा न करें। यदि किसी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी का संदेह हो तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही, साइबर क्राइम पोर्टल और संबंधित बैंक को भी तत्काल सूचित करने की सलाह दी गई, ताकि वित्तीय नुकसान को कम किया जा सके। नियमित निवेश और विश्वसनीय वित्तीय साधन चुनें कार्यक्रम के दौरान निवेशकों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए गए, जहां म्यूचुअल फंड, दीर्घकालिक निवेश, जोखिम प्रबंधन और वित्तीय योजना से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी साझा की। वक्ताओं ने कहा कि निवेश करते समय धैर्य बनाए रखना, नियमित निवेश करना और विश्वसनीय वित्तीय साधनों का चयन करना ही बेहतर रिटर्न और सुरक्षित भविष्य की कुंजी है। इस कार्यशाला का उद्देश्य लोगों में वित्तीय साक्षरता बढ़ाना और उन्हें जागरूक, जिम्मेदार एवं आत्मविश्वास के साथ निवेश करने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में निवेशकों ने भाग लिया और विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त किया।
सेंसेक्स 50 अंक चढ़कर 78,050 पर खुला:निफ्टी में भी 30 अंक की तेजी, यह 24,350 पर कारोबार कर रहा

शेयर बाजार में आज यानी 31 जुलाई को तेजी है। सेंसेक्स 50 अंक चढ़कर 78,050 के स्तर पर खुला। निफ्टी में भी 30 अंक की बढ़त रही, ये 24,350 के स्तर पर कारोबार कर रहा। एशियाई बाजारों में भी तेजी 30 जुलाई को अमेरिकी बाजार में तेजी रही 7 दिन में विदेशी निवेशकों ने ₹5,673 करोड़ के शेयर खरीदे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल बाजार में रही थी तेजी शेयर बाजार में 30 जुलाई को बढ़त रही। सेंसेक्स 274 अंक चढ़कर 77,928 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 67 अंक की बढ़त रही, ये 24,317 पर बंद हुआ।
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शेयर बाजार में आज यानी 31 जुलाई को तेजी है। सेंसेक्स 50 अंक चढ़कर 78,050 के स्तर पर खुला। निफ्टी में भी 30 अंक की बढ़त रही, ये 24,350 के स्तर पर कारोबार कर रहा। एशियाई बाजारों में भी तेजी 30 जुलाई को अमेरिकी बाजार में तेजी रही 7 दिन में विदेशी निवेशकों ने ₹5,673 करोड़ के शेयर खरीदे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल बाजार में रही थी तेजी शेयर बाजार में 30 जुलाई को बढ़त रही। सेंसेक्स 274 अंक चढ़कर 77,928 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 67 अंक की बढ़त रही, ये 24,317 पर बंद हुआ।







