Wednesday, 26 Aug 2026 | 07:52 AM

Trending :

EXCLUSIVE

Babita Singh Reporting | Nimisha Sajayan Weight Gain & Story Statement

Babita Singh Reporting | Nimisha Sajayan Weight Gain & Story Statement

2 घंटे पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र

  • कॉपी लिंक

फिल्म ‘बबीता सिंह रिपोर्टिंग’ एक महिला पुलिस अधिकारी की जिंदगी और संघर्षों पर आधारित है। दैनिक भास्कर से बातचीत में डायरेक्टर अंबिका पंडित और एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर सुदीप शर्मा ने फिल्म पर बात की। अंबिका ने बताया कि उन्हें बबीता का आवाज पहचानने का सफर खास लगा।

वहीं सुदीप ने कहा कि क्राइम से ज्यादा महिला नजरिया और रोजमर्रा की जिंदगी की सच्चाई ने उन्हें आकर्षित किया। दोनों ने निमिषा सजयन के किरदार की तैयारी, शूटिंग के दौरान तालमेल, कानून की पढ़ाई और कहानी को बड़े पर्दे पर लाने की संभावनाओं पर बात की।

अंबिका पंडित ने बताया कि बबीता के सफर में हर उस महिला की कहानी दिखी, जो जिम्मेदारियों के बीच अपनी आवाज तलाशती है।

अंबिका पंडित ने बताया कि बबीता के सफर में हर उस महिला की कहानी दिखी, जो जिम्मेदारियों के बीच अपनी आवाज तलाशती है।

सवाल: कहानी पढ़कर ऐसा क्या खास लगा कि इसे आपको ही डायरेक्ट करना चाहिए?

जवाब/अंबिका पंडित: मुझे बबीता का किरदार बहुत खूबसूरत लगा। वह पुलिस अधिकारी बनने की कोशिश कर रही है और इसी दौरान कई चीजों से जूझ रही है। उसकी घरेलू जिम्मेदारियां हैं। वह बहू और बेटी है और इन सबके बीच अच्छा काम करने की कोशिश कर रही है। लेकिन कई बार उसे छुट्टी लेकर घर जाना पड़ता है। बबीता का यह सफर, जहां से वह शुरू करती है और फिर अपनी आवाज सुनना और उसे पहचानना सीखती है, मुझे स्क्रिप्ट में सबसे ज्यादा पसंद आया।

सवाल: बबीता के किरदार के लिए निमिषा सजयन को चुनने का फैसला कैसे हुआ?

जवाब/अंबिका पंडित: यह फैसला मिलकर लिया गया था। हम सभी को निमिषा का काम बहुत पसंद था। वह बहुत अच्छी एक्टर हैं। उनके चेहरे और व्यवहार में वह ईमानदारी और सादगी है, जो हमें बबीता के किरदार में चाहिए थी। इसलिए हमें लगा कि निमिषा इस भूमिका के लिए सही रहेंगी।

सवाल: इस फिल्म में क्राइम के अलावा ऐसी कौन-सी चीज थी, जिसने आपको सबसे ज्यादा आकर्षित किया?

जवाब/सुदीप शर्मा: मेरे लिए फिल्म का महिला नजरिया सबसे ज्यादा आकर्षक था। यह बारीकी और ईमानदारी से लिखा गया है। इसमें बनावटीपन नहीं है। ऐसा लगता है कि यह कहानी किसी की असली जिंदगी से आई है। मुझे लगा कि पर्दे पर इसे देखकर बहुत से लोग इससे जुड़ पाएंगे, क्योंकि यह हमारे घरों और आसपास की जिंदगी की कहानी है।

क्राइम तो बाद में आता है। अगर फिल्म में क्राइम नहीं भी होता और कहानी किसी दूसरी चीज के बारे में होती, तब भी यह उतनी ही दिलचस्प होती, क्योंकि इसका नजरिया बहुत अलग है।

सवाल: आपके पिछले कामों में भी क्राइम के साथ समाज का अलग पहलू देखने को मिलता है। इस फिल्म में इसे अलग दिखाना कितना चुनौतीपूर्ण था?

जवाब/सुदीप शर्मा: मेरे लिए यह चुनौती नहीं थी, क्योंकि अंबिका की राइटिंग पहले से ही अलग थी। स्क्रिप्ट पढ़कर मुझे यह सिर्फ एक और पुलिस या मर्डर मिस्ट्री नहीं लगी। इस फिल्म का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बबीता का सफर है। उसकी जिंदगी, रिश्ते और घर की कहानी ज्यादा अहम है। क्राइम यहां सिर्फ जरिया है, जिसके जरिए अलग कहानी कही गई है। मुझे यही बात सबसे ज्यादा स्मार्ट लगी।

‘बबीता सिंह रिपोर्टिंग’ 28 अगस्त 2026 को प्राइम वीडियो पर रिलीज होगी।

‘बबीता सिंह रिपोर्टिंग’ 28 अगस्त 2026 को प्राइम वीडियो पर रिलीज होगी।

सवाल:निमिषा को बबीता के किरदार में ढालना कितना चुनौतीपूर्ण रहा?

जवाब/अंबिका पंडित: मेरे लिए यह आसान था। असली चुनौती निमिषा के लिए थी। उन्हें इस किरदार के लिए 14 किलो वजन बढ़ाना था। उन्होंने यह पूरी जर्नी तय की और मैंने इसे करीब से देखा। यह उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण था। हालांकि किरदार को उनसे निकालना आसान था, क्योंकि निमिषा बहुत ही भावनात्मक रूप से समझदार एक्टर हैं।

इस दौरान हम दोनों अच्छे दोस्त भी बन गए। हम दोनों औरतें हैं, इसलिए इस कहानी को समझना मुश्किल नहीं था। यह हमें किसी और की कहानी नहीं, बल्कि अपनी ही जिंदगी का हिस्सा लगी।

सवाल: शूटिंग के दौरान ऐसा कोई मौका आया, जब आपकी और अंबिका की राय अलग हो गई हो?

जवाब/सुदीप शर्मा: ऐसा कुछ खास नहीं हुआ। जब आप खुद फिल्ममेकर हैं और किसी दूसरे फिल्ममेकर की फिल्म प्रोड्यूस कर रहे हैं, तो आपको अपना नजरिया पीछे रखना पड़ता है। इस प्रोजेक्ट में मेरा काम अंबिका को सपोर्ट करना था। उनके विजन के लिए जरूरी संसाधन या मदद देना मेरी जिम्मेदारी थी। हमारा पूरा प्रोसेस सहयोग वाला रहा। स्क्रिप्ट भी साफ थी, इसलिए राय के मतभेद की ज्यादा गुंजाइश नहीं थी।

सवाल: शूटिंग के दौरान ऐसा कुछ बदला, जो स्क्रिप्ट में नहीं था और बाद में ज्यादा बेहतर लगा?

जवाब/अंबिका पंडित: यह कहना मुश्किल है कि जो चीज बदली, वह स्क्रिप्ट से बेहतर थी या नहीं। जब कोई फिल्ममेकर स्क्रिप्ट पर काम करता है तो उसकी अपनी व्याख्या होती है। अंबिका ने लिखा, मैंने फिल्म बनाई और सुदीप शर्मा एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर हैं। हम तीनों की सोच अलग है।

हमारी संवेदनाएं एक-दूसरे से मिलती हैं, इसलिए हम साथ काम कर रहे हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि हम तीनों फिल्म बनाएं तो बिल्कुल एक जैसी फिल्म बने। इसलिए स्क्रिप्ट और स्क्रीन पर दिखाई देने वाली चीज में थोड़ा फर्क आना स्वाभाविक है।

सवाल: आपकी लॉ की पढ़ाई ने फिल्ममेकिंग में किस तरह मदद की?

जवाब/अंबिका पंडित: लॉ की पढ़ाई मेरी जिंदगी में हमेशा काम आती है। फिल्ममेकिंग में भी इसका फायदा मिलता है। कानून ने मुझे सही और गलत के साथ-साथ न्याय और अन्याय का फर्क समझाया। लॉ पढ़ने से दुनिया और समाज को देखने का नजरिया मिला। मेरे लिए फिल्ममेकर के तौर पर नजरिया सबसे जरूरी चीज है। लॉ में भी इंसानों के बीच होने वाले संघर्ष को समझना पड़ता है और फिल्ममेकिंग में भी इंसानों और उनके संघर्षों को समझना जरूरी है।

सुदीप शर्मा ने कहा कि क्राइम कहानी का सिर्फ जरिया है, असली कहानी बबीता की जिंदगी और उसका नजरिया है।

सुदीप शर्मा ने कहा कि क्राइम कहानी का सिर्फ जरिया है, असली कहानी बबीता की जिंदगी और उसका नजरिया है।

सवाल: क्राइम पर कई फिल्में और सीरीज बन चुकी हैं। इस फिल्म को अलग दिखाना कितना चुनौतीपूर्ण था?

जवाब/सुदीप शर्मा: हमारे लिए यह सवाल ही नहीं था कि इसे बाकी क्राइम कहानियों से कैसे अलग करें, क्योंकि अंबिका की कहानी पहले से अलग थी। यह सामान्य मर्डर मिस्ट्री नहीं है। असल कहानी बबीता के सफर और जिंदगी की है। क्राइम सिर्फ माध्यम है, जिसके जरिए उसकी कहानी कही जाती है। यही इस फिल्म की खासियत है।

सवाल: आप काफी यात्रा करते हैं और अलग-अलग कहानियों पर काम करते हैं। क्या असल जिंदगी में आपको बबीता जैसे किरदार मिलते हैं?

जवाब/सुदीप शर्मा: बिल्कुल। ऐसे किरदार हमें आसपास देखने को मिलते हैं। फिल्ममेकर होने का यह फायदा है कि आपको ऐसे लोगों से मिलने और उन्हें समझने का मौका मिलता है, जिनसे शायद निजी जिंदगी में आपकी मुलाकात न हो। मुझे फिल्ममेकिंग का यह हिस्सा पसंद है। इससे हमें दुनिया को नए नजरिए से देखने और खुद को बेहतर समझने का मौका मिलता है।

सवाल: ‘पाताल लोक’ और ‘कोहरा’ जैसे सफल प्रोजेक्ट्स से जुड़ने के बाद आगे बेहतर काम करने का दबाव रहता है?

जवाब/सुदीप शर्मा: अच्छी नींद आती है। मेरे लिए पहले से ज्यादा सफल काम करने का दबाव नहीं है, क्योंकि सफलता पूरी तरह हमारे हाथ में नहीं होती। हां, अच्छा काम करने का दबाव हमेशा रहता है। चाहे आप पहली फिल्म बना रहे हों या 100वीं, जिम्मेदारी होनी चाहिए कि जो भी बनाएं, वह आपको खुद अच्छा लगे। दो साल बाद अपना काम देखें तो ऐसा न लगे कि मैंने यह क्या बना दिया था। फिल्ममेकिंग में हम अपनी सोच और नजरिया दुनिया के सामने रखते हैं। अगर लोगों को वह पसंद नहीं आता तो बुरा लगता है। एक छोटा सा जोक सुनाकर कोई न हंसे, तब भी बुरा लगता है। फिल्म बनाने में कई साल की मेहनत लगती है। इसलिए लोगों को वह पसंद नहीं आती तो दुख होता है। लेकिन यह काम हमने खुद चुना है, इसलिए इसकी शिकायत नहीं कर सकते।

सवाल: आप राइटर, प्रोड्यूसर और डायरेक्टर तीनों रहे हैं। सबसे ज्यादा आजादी और चुनौती किसमें महसूस होती है?

जवाब/सुदीप शर्मा: आजादी तो संन्यासी बनने में है। फिल्ममेकिंग में पूरी आजादी कहीं नहीं होती। आपको हमेशा किसी न किसी के प्रति जवाबदेह रहना पड़ता है। हालांकि पिछले कुछ सालों में फिल्ममेकिंग में आजादी बढ़ी है। पहले सफलता का एक ही पैमाना बॉक्स ऑफिस माना जाता था, लेकिन अब फिल्म को अच्छी सराहना मिलने की भी अपनी वैल्यू है। यह बदलाव अच्छी बात है।

सवाल: क्या ‘बबीता सिंह रिपोर्टिंग’ को बड़े पर्दे के लिए भी बनाया जा सकता था?

जवाब/सुदीप शर्मा: बिल्कुल। मुझे यह बात समझ नहीं आती कि कौन-सी कहानी बड़े पर्दे के लिए है और कौन-सी ओटीटी के लिए। कुछ साल पहले हम ऐसी ही कहानियां बड़े पर्दे पर बना रहे थे। फिर लोगों ने मान लिया कि अब ये कहानियां सिनेमाघरों में नहीं चलेंगी। लेकिन कहानी अच्छी हो, उसे अच्छे तरीके से बनाया और मार्केट किया जाए और सही सपोर्ट मिले, तो ऐसी कहानियां आज भी बड़े पर्दे पर चल सकती हैं।

अंबिका पंडित और सुदीप शर्मा ने बताया कि कहानी की सच्चाई और महिला नजरिए ने फिल्म को बाकी क्राइम स्टोरीज से अलग बनाया।

अंबिका पंडित और सुदीप शर्मा ने बताया कि कहानी की सच्चाई और महिला नजरिए ने फिल्म को बाकी क्राइम स्टोरीज से अलग बनाया।

सवाल: अंबिका के डायरेक्शन को आप किस तरह देखते हैं?

जवाब/सुदीप शर्मा: उन्होंने बहुत अच्छा काम किया है। वह बहुत अच्छी डायरेक्टर हैं। अगर मैं यह फिल्म बनाता तो शायद इसे उतना अच्छा नहीं बना पाता, जितना अंबिका ने बनाया है। इसी तरह अगर मैं इसे लिखता तो अंबिका जितना अच्छा नहीं लिख पाता। मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि मुझे इतने अच्छे टैलेंट के साथ काम करने का मौका मिला। उन्होंने पूरे दिल से यह फिल्म बनाई है। उम्मीद है कि दर्शकों को भी यह उतनी ही पसंद आएगी।

सवाल: लॉ की पढ़ाई के बाद फिल्ममेकिंग में करियर बनाने का फैसला कब लिया?

जवाब/अंबिका पंडित: लॉ में जब दो लोगों के बीच विवाद होता है, तब सही और गलत समझने की कोशिश की जाती है। फिल्ममेकिंग में भी संघर्ष अहम है। इंसानों के बीच क्या हो रहा है, हम एक-दूसरे के साथ क्यों नहीं बन पाते, हम जिंदगी कैसे जीते हैं-ये सभी चीजें कहानी का हिस्सा हैं। इसलिए लॉ और फिल्ममेकिंग के बीच मुझे कनेक्शन हमेशा महसूस हुआ। मुझे लॉ बहुत पसंद था, लेकिन मेरे अंदर एक क्रिएटिव पक्ष था, जो पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो रहा था। फिल्ममेकिंग में आने के बाद मुझे लगा कि यह उस क्रिएटिव हिस्से को पूरा करने का स्वाभाविक रास्ता है।

सवाल: अगर आपको अपने किसी शो के एक किरदार के साथ एक दिन बिताने का मौका मिले, तो किसे चुनेंगे?

जवाब/सुदीप शर्मा: यह मुश्किल सवाल है। जब आप किसी किरदार को दिल से लिखते हैं तो कहीं न कहीं उसकी जर्नी का हिस्सा खुद भी बन जाते हैं। अगर मुझे किसी एक किरदार के साथ एक दिन बिताना हो तो मैं ‘पाताल लोक’ के हाथीराम चौधरी को चुनूंगी। मैंने उनके साथ बहुत समय बिताया है।

उन्हें लिखने में सालों लगे और फिर उसे बनाने में भी काफी वक्त लगा। वह मेरी जिंदगी के पिछले करीब 10 साल का हिस्सा रहे हैं। इसलिए किसी एक किरदार के साथ समय बिताना हो तो हाथीराम चौधरी का नाम ही लूंगा।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
संजय मिश्रा, विक्रम प्रताप ने महाकालेश्वर में किए दर्शन:अभिनेता संजय मिश्रा ने पारिवारिक शादी सकुशल होने पर जताया आभार

April 21, 2026/
10:34 pm

अभिनेता संजय मिश्रा और विक्रम प्रताप ने मंगलवार देर शाम उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर के दर्शन किए। उन्होंने विधि-विधान से...

यूपी के प्रयागराज, महाराष्ट्र के अमरावती में तापमान 44°C पार:ओडिशा के 4 जिलों में स्कूल बंद; राजस्थान में मनरेगा मजदूरों के काम का समय बदला

April 24, 2026/
5:08 am

देश के कई हिस्सों में लू का असर तेज होता जा रहा है। यूपी, राजस्थान और महाराष्ट्र के 4 शहरों...

चांदी आज ₹2,924 सस्ती, ₹2.19 लाख पर आई:सोना ₹1,848 गिरकर ₹1.42 लाख पर आया; चांदी ऑल टाइम हाई से ₹1.67 लाख सस्ती हुई

July 24, 2026/
1:00 pm

सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 24 जुलाई को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक...

लाइव कॉन्सर्ट में रो पड़ीं सुनिधि चौहान:गले में खराश की वजह से आवाज खराब हुई, फैंस से मांगी माफी; कहा- 100% देना चाहती थी

March 10, 2026/
10:14 am

भारत की मशहूर सिंगर सुनिधि चौहान इन दिनों अपने इंडिया म्यूजिकल टूर पर हैं। इसी दौरान लखनऊ में हुए एक...

Bangladesh Vs Pakistan 2nd Test Day 3 Live Updates (AP)

May 18, 2026/
8:56 am

आखरी अपडेट:18 मई, 2026, 08:56 IST News18 से विशेष रूप से बात करते हुए, थोल थिरुमावलवन ने पुष्टि की कि...

खेत की झोपड़ी में लगी आग, मजदूर जिंदा जला:कांटी गांव में अस्पताल ले जाते समय तोड़ा दम; झोपड़ी में सो रहा था

April 19, 2026/
10:46 pm

दमोह जिले के कांटी गांव में रविवार शाम खेत में बनी एक झोपड़ी में आग लगने से 42 वर्षीय मजदूर...

Mumbai Indians vs Kolkata Knight Riders Live Score: IPL 2026 Match Today Updates From Wankhede Stadium. (Picture Credit: AP)

March 29, 2026/
8:44 pm

आखरी अपडेट:मार्च 29, 2026, 20:44 IST एक्स पर अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए, सस्मित पात्रा ने कहा कि वह...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

Babita Singh Reporting | Nimisha Sajayan Weight Gain & Story Statement

Babita Singh Reporting | Nimisha Sajayan Weight Gain & Story Statement

2 घंटे पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र

  • कॉपी लिंक

फिल्म ‘बबीता सिंह रिपोर्टिंग’ एक महिला पुलिस अधिकारी की जिंदगी और संघर्षों पर आधारित है। दैनिक भास्कर से बातचीत में डायरेक्टर अंबिका पंडित और एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर सुदीप शर्मा ने फिल्म पर बात की। अंबिका ने बताया कि उन्हें बबीता का आवाज पहचानने का सफर खास लगा।

वहीं सुदीप ने कहा कि क्राइम से ज्यादा महिला नजरिया और रोजमर्रा की जिंदगी की सच्चाई ने उन्हें आकर्षित किया। दोनों ने निमिषा सजयन के किरदार की तैयारी, शूटिंग के दौरान तालमेल, कानून की पढ़ाई और कहानी को बड़े पर्दे पर लाने की संभावनाओं पर बात की।

अंबिका पंडित ने बताया कि बबीता के सफर में हर उस महिला की कहानी दिखी, जो जिम्मेदारियों के बीच अपनी आवाज तलाशती है।

अंबिका पंडित ने बताया कि बबीता के सफर में हर उस महिला की कहानी दिखी, जो जिम्मेदारियों के बीच अपनी आवाज तलाशती है।

सवाल: कहानी पढ़कर ऐसा क्या खास लगा कि इसे आपको ही डायरेक्ट करना चाहिए?

जवाब/अंबिका पंडित: मुझे बबीता का किरदार बहुत खूबसूरत लगा। वह पुलिस अधिकारी बनने की कोशिश कर रही है और इसी दौरान कई चीजों से जूझ रही है। उसकी घरेलू जिम्मेदारियां हैं। वह बहू और बेटी है और इन सबके बीच अच्छा काम करने की कोशिश कर रही है। लेकिन कई बार उसे छुट्टी लेकर घर जाना पड़ता है। बबीता का यह सफर, जहां से वह शुरू करती है और फिर अपनी आवाज सुनना और उसे पहचानना सीखती है, मुझे स्क्रिप्ट में सबसे ज्यादा पसंद आया।

सवाल: बबीता के किरदार के लिए निमिषा सजयन को चुनने का फैसला कैसे हुआ?

जवाब/अंबिका पंडित: यह फैसला मिलकर लिया गया था। हम सभी को निमिषा का काम बहुत पसंद था। वह बहुत अच्छी एक्टर हैं। उनके चेहरे और व्यवहार में वह ईमानदारी और सादगी है, जो हमें बबीता के किरदार में चाहिए थी। इसलिए हमें लगा कि निमिषा इस भूमिका के लिए सही रहेंगी।

सवाल: इस फिल्म में क्राइम के अलावा ऐसी कौन-सी चीज थी, जिसने आपको सबसे ज्यादा आकर्षित किया?

जवाब/सुदीप शर्मा: मेरे लिए फिल्म का महिला नजरिया सबसे ज्यादा आकर्षक था। यह बारीकी और ईमानदारी से लिखा गया है। इसमें बनावटीपन नहीं है। ऐसा लगता है कि यह कहानी किसी की असली जिंदगी से आई है। मुझे लगा कि पर्दे पर इसे देखकर बहुत से लोग इससे जुड़ पाएंगे, क्योंकि यह हमारे घरों और आसपास की जिंदगी की कहानी है।

क्राइम तो बाद में आता है। अगर फिल्म में क्राइम नहीं भी होता और कहानी किसी दूसरी चीज के बारे में होती, तब भी यह उतनी ही दिलचस्प होती, क्योंकि इसका नजरिया बहुत अलग है।

सवाल: आपके पिछले कामों में भी क्राइम के साथ समाज का अलग पहलू देखने को मिलता है। इस फिल्म में इसे अलग दिखाना कितना चुनौतीपूर्ण था?

जवाब/सुदीप शर्मा: मेरे लिए यह चुनौती नहीं थी, क्योंकि अंबिका की राइटिंग पहले से ही अलग थी। स्क्रिप्ट पढ़कर मुझे यह सिर्फ एक और पुलिस या मर्डर मिस्ट्री नहीं लगी। इस फिल्म का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बबीता का सफर है। उसकी जिंदगी, रिश्ते और घर की कहानी ज्यादा अहम है। क्राइम यहां सिर्फ जरिया है, जिसके जरिए अलग कहानी कही गई है। मुझे यही बात सबसे ज्यादा स्मार्ट लगी।

‘बबीता सिंह रिपोर्टिंग’ 28 अगस्त 2026 को प्राइम वीडियो पर रिलीज होगी।

‘बबीता सिंह रिपोर्टिंग’ 28 अगस्त 2026 को प्राइम वीडियो पर रिलीज होगी।

सवाल:निमिषा को बबीता के किरदार में ढालना कितना चुनौतीपूर्ण रहा?

जवाब/अंबिका पंडित: मेरे लिए यह आसान था। असली चुनौती निमिषा के लिए थी। उन्हें इस किरदार के लिए 14 किलो वजन बढ़ाना था। उन्होंने यह पूरी जर्नी तय की और मैंने इसे करीब से देखा। यह उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण था। हालांकि किरदार को उनसे निकालना आसान था, क्योंकि निमिषा बहुत ही भावनात्मक रूप से समझदार एक्टर हैं।

इस दौरान हम दोनों अच्छे दोस्त भी बन गए। हम दोनों औरतें हैं, इसलिए इस कहानी को समझना मुश्किल नहीं था। यह हमें किसी और की कहानी नहीं, बल्कि अपनी ही जिंदगी का हिस्सा लगी।

सवाल: शूटिंग के दौरान ऐसा कोई मौका आया, जब आपकी और अंबिका की राय अलग हो गई हो?

जवाब/सुदीप शर्मा: ऐसा कुछ खास नहीं हुआ। जब आप खुद फिल्ममेकर हैं और किसी दूसरे फिल्ममेकर की फिल्म प्रोड्यूस कर रहे हैं, तो आपको अपना नजरिया पीछे रखना पड़ता है। इस प्रोजेक्ट में मेरा काम अंबिका को सपोर्ट करना था। उनके विजन के लिए जरूरी संसाधन या मदद देना मेरी जिम्मेदारी थी। हमारा पूरा प्रोसेस सहयोग वाला रहा। स्क्रिप्ट भी साफ थी, इसलिए राय के मतभेद की ज्यादा गुंजाइश नहीं थी।

सवाल: शूटिंग के दौरान ऐसा कुछ बदला, जो स्क्रिप्ट में नहीं था और बाद में ज्यादा बेहतर लगा?

जवाब/अंबिका पंडित: यह कहना मुश्किल है कि जो चीज बदली, वह स्क्रिप्ट से बेहतर थी या नहीं। जब कोई फिल्ममेकर स्क्रिप्ट पर काम करता है तो उसकी अपनी व्याख्या होती है। अंबिका ने लिखा, मैंने फिल्म बनाई और सुदीप शर्मा एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर हैं। हम तीनों की सोच अलग है।

हमारी संवेदनाएं एक-दूसरे से मिलती हैं, इसलिए हम साथ काम कर रहे हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि हम तीनों फिल्म बनाएं तो बिल्कुल एक जैसी फिल्म बने। इसलिए स्क्रिप्ट और स्क्रीन पर दिखाई देने वाली चीज में थोड़ा फर्क आना स्वाभाविक है।

सवाल: आपकी लॉ की पढ़ाई ने फिल्ममेकिंग में किस तरह मदद की?

जवाब/अंबिका पंडित: लॉ की पढ़ाई मेरी जिंदगी में हमेशा काम आती है। फिल्ममेकिंग में भी इसका फायदा मिलता है। कानून ने मुझे सही और गलत के साथ-साथ न्याय और अन्याय का फर्क समझाया। लॉ पढ़ने से दुनिया और समाज को देखने का नजरिया मिला। मेरे लिए फिल्ममेकर के तौर पर नजरिया सबसे जरूरी चीज है। लॉ में भी इंसानों के बीच होने वाले संघर्ष को समझना पड़ता है और फिल्ममेकिंग में भी इंसानों और उनके संघर्षों को समझना जरूरी है।

सुदीप शर्मा ने कहा कि क्राइम कहानी का सिर्फ जरिया है, असली कहानी बबीता की जिंदगी और उसका नजरिया है।

सुदीप शर्मा ने कहा कि क्राइम कहानी का सिर्फ जरिया है, असली कहानी बबीता की जिंदगी और उसका नजरिया है।

सवाल: क्राइम पर कई फिल्में और सीरीज बन चुकी हैं। इस फिल्म को अलग दिखाना कितना चुनौतीपूर्ण था?

जवाब/सुदीप शर्मा: हमारे लिए यह सवाल ही नहीं था कि इसे बाकी क्राइम कहानियों से कैसे अलग करें, क्योंकि अंबिका की कहानी पहले से अलग थी। यह सामान्य मर्डर मिस्ट्री नहीं है। असल कहानी बबीता के सफर और जिंदगी की है। क्राइम सिर्फ माध्यम है, जिसके जरिए उसकी कहानी कही जाती है। यही इस फिल्म की खासियत है।

सवाल: आप काफी यात्रा करते हैं और अलग-अलग कहानियों पर काम करते हैं। क्या असल जिंदगी में आपको बबीता जैसे किरदार मिलते हैं?

जवाब/सुदीप शर्मा: बिल्कुल। ऐसे किरदार हमें आसपास देखने को मिलते हैं। फिल्ममेकर होने का यह फायदा है कि आपको ऐसे लोगों से मिलने और उन्हें समझने का मौका मिलता है, जिनसे शायद निजी जिंदगी में आपकी मुलाकात न हो। मुझे फिल्ममेकिंग का यह हिस्सा पसंद है। इससे हमें दुनिया को नए नजरिए से देखने और खुद को बेहतर समझने का मौका मिलता है।

सवाल: ‘पाताल लोक’ और ‘कोहरा’ जैसे सफल प्रोजेक्ट्स से जुड़ने के बाद आगे बेहतर काम करने का दबाव रहता है?

जवाब/सुदीप शर्मा: अच्छी नींद आती है। मेरे लिए पहले से ज्यादा सफल काम करने का दबाव नहीं है, क्योंकि सफलता पूरी तरह हमारे हाथ में नहीं होती। हां, अच्छा काम करने का दबाव हमेशा रहता है। चाहे आप पहली फिल्म बना रहे हों या 100वीं, जिम्मेदारी होनी चाहिए कि जो भी बनाएं, वह आपको खुद अच्छा लगे। दो साल बाद अपना काम देखें तो ऐसा न लगे कि मैंने यह क्या बना दिया था। फिल्ममेकिंग में हम अपनी सोच और नजरिया दुनिया के सामने रखते हैं। अगर लोगों को वह पसंद नहीं आता तो बुरा लगता है। एक छोटा सा जोक सुनाकर कोई न हंसे, तब भी बुरा लगता है। फिल्म बनाने में कई साल की मेहनत लगती है। इसलिए लोगों को वह पसंद नहीं आती तो दुख होता है। लेकिन यह काम हमने खुद चुना है, इसलिए इसकी शिकायत नहीं कर सकते।

सवाल: आप राइटर, प्रोड्यूसर और डायरेक्टर तीनों रहे हैं। सबसे ज्यादा आजादी और चुनौती किसमें महसूस होती है?

जवाब/सुदीप शर्मा: आजादी तो संन्यासी बनने में है। फिल्ममेकिंग में पूरी आजादी कहीं नहीं होती। आपको हमेशा किसी न किसी के प्रति जवाबदेह रहना पड़ता है। हालांकि पिछले कुछ सालों में फिल्ममेकिंग में आजादी बढ़ी है। पहले सफलता का एक ही पैमाना बॉक्स ऑफिस माना जाता था, लेकिन अब फिल्म को अच्छी सराहना मिलने की भी अपनी वैल्यू है। यह बदलाव अच्छी बात है।

सवाल: क्या ‘बबीता सिंह रिपोर्टिंग’ को बड़े पर्दे के लिए भी बनाया जा सकता था?

जवाब/सुदीप शर्मा: बिल्कुल। मुझे यह बात समझ नहीं आती कि कौन-सी कहानी बड़े पर्दे के लिए है और कौन-सी ओटीटी के लिए। कुछ साल पहले हम ऐसी ही कहानियां बड़े पर्दे पर बना रहे थे। फिर लोगों ने मान लिया कि अब ये कहानियां सिनेमाघरों में नहीं चलेंगी। लेकिन कहानी अच्छी हो, उसे अच्छे तरीके से बनाया और मार्केट किया जाए और सही सपोर्ट मिले, तो ऐसी कहानियां आज भी बड़े पर्दे पर चल सकती हैं।

अंबिका पंडित और सुदीप शर्मा ने बताया कि कहानी की सच्चाई और महिला नजरिए ने फिल्म को बाकी क्राइम स्टोरीज से अलग बनाया।

अंबिका पंडित और सुदीप शर्मा ने बताया कि कहानी की सच्चाई और महिला नजरिए ने फिल्म को बाकी क्राइम स्टोरीज से अलग बनाया।

सवाल: अंबिका के डायरेक्शन को आप किस तरह देखते हैं?

जवाब/सुदीप शर्मा: उन्होंने बहुत अच्छा काम किया है। वह बहुत अच्छी डायरेक्टर हैं। अगर मैं यह फिल्म बनाता तो शायद इसे उतना अच्छा नहीं बना पाता, जितना अंबिका ने बनाया है। इसी तरह अगर मैं इसे लिखता तो अंबिका जितना अच्छा नहीं लिख पाता। मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि मुझे इतने अच्छे टैलेंट के साथ काम करने का मौका मिला। उन्होंने पूरे दिल से यह फिल्म बनाई है। उम्मीद है कि दर्शकों को भी यह उतनी ही पसंद आएगी।

सवाल: लॉ की पढ़ाई के बाद फिल्ममेकिंग में करियर बनाने का फैसला कब लिया?

जवाब/अंबिका पंडित: लॉ में जब दो लोगों के बीच विवाद होता है, तब सही और गलत समझने की कोशिश की जाती है। फिल्ममेकिंग में भी संघर्ष अहम है। इंसानों के बीच क्या हो रहा है, हम एक-दूसरे के साथ क्यों नहीं बन पाते, हम जिंदगी कैसे जीते हैं-ये सभी चीजें कहानी का हिस्सा हैं। इसलिए लॉ और फिल्ममेकिंग के बीच मुझे कनेक्शन हमेशा महसूस हुआ। मुझे लॉ बहुत पसंद था, लेकिन मेरे अंदर एक क्रिएटिव पक्ष था, जो पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो रहा था। फिल्ममेकिंग में आने के बाद मुझे लगा कि यह उस क्रिएटिव हिस्से को पूरा करने का स्वाभाविक रास्ता है।

सवाल: अगर आपको अपने किसी शो के एक किरदार के साथ एक दिन बिताने का मौका मिले, तो किसे चुनेंगे?

जवाब/सुदीप शर्मा: यह मुश्किल सवाल है। जब आप किसी किरदार को दिल से लिखते हैं तो कहीं न कहीं उसकी जर्नी का हिस्सा खुद भी बन जाते हैं। अगर मुझे किसी एक किरदार के साथ एक दिन बिताना हो तो मैं ‘पाताल लोक’ के हाथीराम चौधरी को चुनूंगी। मैंने उनके साथ बहुत समय बिताया है।

उन्हें लिखने में सालों लगे और फिर उसे बनाने में भी काफी वक्त लगा। वह मेरी जिंदगी के पिछले करीब 10 साल का हिस्सा रहे हैं। इसलिए किसी एक किरदार के साथ समय बिताना हो तो हाथीराम चौधरी का नाम ही लूंगा।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.