भूत बंगला में अक्षय के प्रैंक से कर्जदार बनीं वामिका-मिथिला:सेट पर गेम्स, बॉन्डिंग और डिसिप्लिन ने दिया यादगार एक्सपीरियंस

हॉरर-कॉमेडी फिल्म ‘भूत बंगला’ की स्टार कास्ट में शामिल वामिका गब्बी और मिथिला पालकर ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अपने शूटिंग अनुभव साझा किए हैं। दोनों ने बताया कि सेट पर जहां एक तरफ प्रोफेशनल डिसिप्लिन था, वहीं दूसरी तरफ मस्ती और हल्के-फुल्के माहौल की कोई कमी नहीं थी। अक्षय कुमार के मजेदार प्रैंक्स और पूरी टीम की बॉन्डिंग ने शूट को यादगार बना दिया। साथ ही, दोनों अभिनेत्रियों ने अपनी जर्नी, शुरुआती संघर्ष और इंडस्ट्री में अपने अनुभवों पर भी खुलकर बात की है। फिल्म की शूटिंग के दौरान सेट का माहौल कैसा था? वामिका गब्बी- बिल्कुल, बाहर से देखने पर यही लगता है कि सब कुछ मस्ती-मजाक में हुआ होगा। लेकिन असल में सेट पर बहुत सीरियस काम भी चल रहा था। हां, मस्ती बहुत होती थी और वही माहौल हमें और सहज बना देता था। मेरे लिए तो ये एक फैमिली जैसा एक्सपीरियंस बन गया था। आपका किरदार कैसा है? क्या ये एक टिपिकल बहन है या उसमें कोई ट्विस्ट भी देखने को मिलेगा? मिथिला पलकर- मैं ज्यादा कुछ बताना नहीं चाहूंगी, वो तो आपको फिल्म देखकर ही पता चलेगा। लेकिन हां, ये एक ऐसी बहन है जिसकी कोई भी जिद हो, उसका भाई उसे जरूर पूरा करता है उनके रिश्ते में वही खूबसूरती है। इतने बड़े कलाकारों के साथ काम करना जैसे अक्षय कुमार, परेश रावल और निर्देशक प्रियदर्शन कैसा अनुभव रहा? वामिका गब्बी- शुरुआत में थोड़ा इंटिमिडेशन था क्योंकि मैंने उन्हें हमेशा स्क्रीन पर देखा है। लेकिन सेट पर उन्होंने माहौल इतना आसान और कम्फर्टेबल बना दिया कि कभी ऐसा नहीं लगा कि मैं इतने बड़े लोगों के साथ काम कर रही हूं। हर कोई बहुत सपोर्टिव था। इतने टैलेंटेड लोगों के बीच रहना ही अपने आप में एक सीख है। उनकी एनर्जी, उनका काम करने का तरीका सब कुछ बहुत इंस्पायरिंग था। अपने किरदार की तैयारी के दौरान कोई चैलेंज आया? मिथिला पलकर- नहीं, क्योंकि प्रियदर्शन सर ने सब कुछ बहुत आसान बना दिया। उन्होंने मुझे हर चीज में गाइड किया, जैसे हैंड-होल्डिंग करते हुए। मेरा सिर्फ एक ही डर था इतने बड़े कलाकारों के सामने परफॉर्म करना, लेकिन उन्होंने वो भी आसान कर दिया। इतने बड़े स्टार कास्ट के साथ काम करने का अनुभव और आपकी पर्सनल जर्नी यूट्यूब से फिल्मों तक,आप इसे कैसे देखती हैं? मिथिला पलकर- सच कहूं तो विश्वास ही नहीं होता है। इतने लेजेंड्स के साथ काम करना एक सपना जैसा है। शुरुआत में थोड़ा डर था, लेकिन सभी ने बहुत प्यार से अपनाया। जहां तक मेरी जर्नी की बात है, मेरा हमेशा से एक ही गोल था एक अच्छा एक्टर बनना। इंटरनेट ने मुझे बहुत कुछ दिया है और उसी की वजह से मुझे ये मौका भी मिला। मैं बस अच्छा काम करना चाहती हूं, चाहे वो किसी भी भाषा या प्लेटफॉर्म पर हो। सेट पर अक्षय कुमार के मशहूर प्रैंक्स का अनुभव कैसा रहा? क्या आप भी कभी उनका शिकार बनीं? वामिका गब्बी- एक सीन था जहां मुझे टेबल पर जंप करना था। मैं पूरी तैयारी के साथ शॉट दे रही थी, तभी अक्षय सर ने मुझे हल्का सा पुश कर दिया और मैं पूरी तरह चौंक गई! सब लोग हंसने लगे और मुझे तब समझ आया कि ये एक प्रैंक था। इसके अलावा हम सब सेट पर कार्ड्स, लूडो और अलग-अलग गेम्स खेलते थे। एक लेजर गेम भी खेलते थे, जिसमें ऊपर लगे बॉक्स पर निशाना लगाना होता था। उसमें तो मैं हारते-हारते करीब 12,000 रुपये की ‘कर्जदार’ हो गई थी! मिथिला पलकर- नहीं, मेरे साथ उन्होंने कोई प्रैंक नहीं किया। शायद वो एक प्रोटेक्टिव भाई की तरह थे। लेकिन हम सेट पर बहुत गेम्स खेलते थे जैसे लूडो। उसमें मैंने काफी पैसे हार दिए थे! लेकिन आखिरी दिन अक्षय सर के साथ खेलते-खेलते मैंने सब जीत लिए और मेरा ‘कर्ज’ उतर गया।
भूत बंगला में अक्षय के प्रैंक से कर्जदार बनीं वामिका-मिथिला:सेट पर गेम्स, बॉन्डिंग और डिसिप्लिन ने दिया यादगार एक्सपीरियंस

हॉरर-कॉमेडी फिल्म ‘भूत बंगला’ की स्टार कास्ट में शामिल वामिका गब्बी और मिथिला पालकर ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अपने शूटिंग अनुभव साझा किए हैं। दोनों ने बताया कि सेट पर जहां एक तरफ प्रोफेशनल डिसिप्लिन था, वहीं दूसरी तरफ मस्ती और हल्के-फुल्के माहौल की कोई कमी नहीं थी। अक्षय कुमार के मजेदार प्रैंक्स और पूरी टीम की बॉन्डिंग ने शूट को यादगार बना दिया। साथ ही, दोनों अभिनेत्रियों ने अपनी जर्नी, शुरुआती संघर्ष और इंडस्ट्री में अपने अनुभवों पर भी खुलकर बात की है। फिल्म की शूटिंग के दौरान सेट का माहौल कैसा था? वामिका गब्बी- बिल्कुल, बाहर से देखने पर यही लगता है कि सब कुछ मस्ती-मजाक में हुआ होगा। लेकिन असल में सेट पर बहुत सीरियस काम भी चल रहा था। हां, मस्ती बहुत होती थी और वही माहौल हमें और सहज बना देता था। मेरे लिए तो ये एक फैमिली जैसा एक्सपीरियंस बन गया था। आपका किरदार कैसा है? क्या ये एक टिपिकल बहन है या उसमें कोई ट्विस्ट भी देखने को मिलेगा? मिथिला पलकर- मैं ज्यादा कुछ बताना नहीं चाहूंगी, वो तो आपको फिल्म देखकर ही पता चलेगा। लेकिन हां, ये एक ऐसी बहन है जिसकी कोई भी जिद हो, उसका भाई उसे जरूर पूरा करता है उनके रिश्ते में वही खूबसूरती है। इतने बड़े कलाकारों के साथ काम करना जैसे अक्षय कुमार, परेश रावल और निर्देशक प्रियदर्शन कैसा अनुभव रहा? वामिका गब्बी- शुरुआत में थोड़ा इंटिमिडेशन था क्योंकि मैंने उन्हें हमेशा स्क्रीन पर देखा है। लेकिन सेट पर उन्होंने माहौल इतना आसान और कम्फर्टेबल बना दिया कि कभी ऐसा नहीं लगा कि मैं इतने बड़े लोगों के साथ काम कर रही हूं। हर कोई बहुत सपोर्टिव था। इतने टैलेंटेड लोगों के बीच रहना ही अपने आप में एक सीख है। उनकी एनर्जी, उनका काम करने का तरीका सब कुछ बहुत इंस्पायरिंग था। अपने किरदार की तैयारी के दौरान कोई चैलेंज आया? मिथिला पलकर- नहीं, क्योंकि प्रियदर्शन सर ने सब कुछ बहुत आसान बना दिया। उन्होंने मुझे हर चीज में गाइड किया, जैसे हैंड-होल्डिंग करते हुए। मेरा सिर्फ एक ही डर था इतने बड़े कलाकारों के सामने परफॉर्म करना, लेकिन उन्होंने वो भी आसान कर दिया। इतने बड़े स्टार कास्ट के साथ काम करने का अनुभव और आपकी पर्सनल जर्नी यूट्यूब से फिल्मों तक,आप इसे कैसे देखती हैं? मिथिला पलकर- सच कहूं तो विश्वास ही नहीं होता है। इतने लेजेंड्स के साथ काम करना एक सपना जैसा है। शुरुआत में थोड़ा डर था, लेकिन सभी ने बहुत प्यार से अपनाया। जहां तक मेरी जर्नी की बात है, मेरा हमेशा से एक ही गोल था एक अच्छा एक्टर बनना। इंटरनेट ने मुझे बहुत कुछ दिया है और उसी की वजह से मुझे ये मौका भी मिला। मैं बस अच्छा काम करना चाहती हूं, चाहे वो किसी भी भाषा या प्लेटफॉर्म पर हो। सेट पर अक्षय कुमार के मशहूर प्रैंक्स का अनुभव कैसा रहा? क्या आप भी कभी उनका शिकार बनीं? वामिका गब्बी- एक सीन था जहां मुझे टेबल पर जंप करना था। मैं पूरी तैयारी के साथ शॉट दे रही थी, तभी अक्षय सर ने मुझे हल्का सा पुश कर दिया और मैं पूरी तरह चौंक गई! सब लोग हंसने लगे और मुझे तब समझ आया कि ये एक प्रैंक था। इसके अलावा हम सब सेट पर कार्ड्स, लूडो और अलग-अलग गेम्स खेलते थे। एक लेजर गेम भी खेलते थे, जिसमें ऊपर लगे बॉक्स पर निशाना लगाना होता था। उसमें तो मैं हारते-हारते करीब 12,000 रुपये की ‘कर्जदार’ हो गई थी! मिथिला पलकर- नहीं, मेरे साथ उन्होंने कोई प्रैंक नहीं किया। शायद वो एक प्रोटेक्टिव भाई की तरह थे। लेकिन हम सेट पर बहुत गेम्स खेलते थे जैसे लूडो। उसमें मैंने काफी पैसे हार दिए थे! लेकिन आखिरी दिन अक्षय सर के साथ खेलते-खेलते मैंने सब जीत लिए और मेरा ‘कर्ज’ उतर गया।
चंडीगढ़ BJP दफ्तर ब्लास्ट, 9 आरोपी प्रोडक्शन वारंट पर लाए:क्राइम सीन रिक्रिएशन किया, ₹2 लाख में टास्क, सोशल मीडिया के जरिए हुई मुलाकात

चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित पंजाब बीजेपी मुख्यालय के बाहर ब्लास्ट के मामले में चंडीगढ़ पुलिस 9 आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आई, जिन्हें कोर्ट में पेश कर 2 दिन का पुलिस रिमांड लिया गया। इस दौरान क्राइम सीन रिक्रिएशन करवाया गया और पूरे घटनाक्रम की वीडियोग्राफी भी की गई। इस दौरान डीएसपी धीरज कुमार और थाना 39 प्रभारी इंस्पेक्टर राजीव कुमार मौजूद रहे। वारदात को अंजाम देने के बाद मुख्य आरोपी गुरतेज और अमनप्रीत बीजेपी ऑफिस के सामने सेक्टर-24 वाली साइड, जहां से उन्होंने बस स्टॉपेज से बस पकड़ी थी, वहां पूरे घटनाक्रम का फिर से क्राइम सीन रिक्रिएशन किया गया। पहले कैसे रेकी की, कहां-कहां गए, कितने दिन रेकी की इन सभी पहलुओं को लेकर आरोपियों से पूछताछ की गई। गौरतलब है कि बुधवार (1 अप्रैल) की शाम को ब्लास्ट किया गया था। इससे मौके पर खड़ी कई कारों के शीशे टूट गए और आसपास की दीवार पर छर्रों के निशान बन गए। घटना के 2 वीडियो वायरल हुए, जिसमें से एक में व्यक्ति ग्रेनेड बम फेंकता दिखा, जबकि दूसरे वीडियो में बाइक पर जाते दो लोग दिखे। वहीं, सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी वायरल हुई थी, जिसमें इस हमले की जिम्मेदारी खालिस्तानी संगठन ने ली। चंडीगढ़ पुलिस से पहले SSOC ने पकड़े चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित पंजाब बीजेपी मुख्यालय के बाहर ब्लास्ट के बाद आरोपियों को पकड़ने के लिए चंडीगढ़ पुलिस की सभी जांच एजेंसियां, पंजाब पुलिस की स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (SSOC) और AGTF समेत अन्य एजेंसियां छापेमारी कर रही थीं। इस दौरान चंडीगढ़ पुलिस से पहले मोहाली की स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल यानी SSOC ने मुख्य दो आरोपियों को हरियाणा के रेवाड़ी से गिरफ्तार किया। इनमें रतनगढ़ मोरिंडा के रहने वाले अमनप्रीत सिंह और गुरतेज सिंह शामिल हैं। इन पर आरोप है कि अमनप्रीत सिंह ने बम फेंका था, जबकि गुरतेज सिंह ने इसका वीडियो बनाया था। उनके पास से एक पिस्टल भी बरामद हुई है। हालांकि इससे पहले SSOC पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी थी, जिनमें बलविंदर लाल उर्फ शम्मी, जसवीर सिंह उर्फ जस्सी, चरणजीत सिंह उर्फ चन्नी, रूबल चौहान और मनदीप उर्फ अभिजोत शर्मा शामिल हैं। इसके बाद पंजाब DGP गौरव यादव ने कहा था कि इनकी 6 महीने पहले मुलाकात सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। इसमें अटैक का 28 मार्च को गुरतेज को टास्क मिला था, जिसके लिए इन्हें 2 लाख रुपए देने की बात कही गई थी। इस पूरी साजिश के तार पुर्तगाल और जर्मनी में बैठे हैंडलर्स से जुड़े हैं, जिनकी पहचान कर ली गई है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI की पंजाब में अफरातफरी फैलाने की कोशिश थी। उसके बाद पुलिस ने दो और आरोपी नवदीप और हरजन सिंह को गिरफ्तार किया। इन दोनों पर आरोप है कि उन्होंने पाकिस्तान से ग्रेनेड और हथियार मंगवाने में मदद की थी। डीजीपी ने ये बड़ी बातें कहीं थी… सोशल मीडिया पर दोनों की मुलाकात हुई: डीजीपी ने बताया कि आरोपियों को हरियाणा एसटीएफ की मदद से गिरफ्तार किया है। यह ऑपरेशन चंडीगढ़ पुलिस के साथ संयुक्त रूप से चलाया गया। दोनों आरोपियों को रेवाड़ी से काबू किया गया। करीब 6 महीने पहले इनकी मुलाकात सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। 28 मार्च को गुरतेज को टास्क मिला था: उन्होंने कहा कि 28 मार्च को गुरतेज को टास्क दिया गया था कि वह बलाचौर से ग्रेनेड और हथियार लेकर आए। इसके बाद वह रूबल और मंदीप शर्मा को साथ लेकर जसबीर जस्सी से मिला, जहां उन्हें दो ग्रेनेड, एक पिस्टल और 10 कारतूस दिए गए। बलजोत सिंह ने गुरतेज को रेकी करने और टारगेट की पहचान की जिम्मेदारी दी थी। वहीं, अमनप्रीत की भर्ती भी गुरतेज ने ही की थी। पूरे ऑपरेशन में विदेश में बैठे हैंडलर का अहम रोल: डीजीपी के मुताबिक, दोनों मुख्य आरोपी रैपिडो में काम करते थे। घटना वाले दिन जब अमनप्रीत ने ग्रेनेड फेंका, तो गुरतेज ने उसकी वीडियो बनाई थी। पूरे ऑपरेशन में विदेश में बैठे हैंडलर का अहम रोल था, जो इनसे वीडियो बनवाकर एक तरह का माहौल (परसेप्शन) तैयार करना चाहता था। उसने इन्हें ऑनलाइन ही निर्देश दिए और यह भी बताया कि ग्रेनेड को कैसे एक्टिव करना है। आरोपियों को 2 लाख रुपए देने की बात हुई: इस काम के लिए आरोपियों को 2 लाख रुपए देने की बात हुई थी, लेकिन यह रकम पूरी नहीं दी गई थी। पूरा ऑपरेशन तकनीकी माध्यमों और दूर बैठे हैंडलर के निर्देशों के आधार पर चलाया गया। पाकिस्तान-ISI से जुड़े मॉड्यूल का खुलासा DGP के अनुसार, शुरुआती जांच में सामने आया कि यह पूरा मॉड्यूल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़ा हुआ था। इस नेटवर्क को विदेश में बैठे हैंडलर्स चला रहे थे, जिनकी लोकेशन पुर्तगाल और जर्मनी में बताई जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा थे, जिसमें अलग-अलग स्तर पर कई लोग जुड़े हुए थे और सभी को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपियों के पास हैंड ग्रेनेड, हथियार और कारतूसों की खेप पहुंचाई गई थी। यह खेप कई लोगों के जरिए आगे बढ़ाई गई और आखिर में हमले को अंजाम देने वालों तक पहुंचाई गई। बताया जा रहा है कि पुर्तगाल में बैठे हैंडलर बलजोत सिंह उर्फ जोत के निर्देश पर पूरे हमले की साजिश रची गई और उसे अंजाम दिया गया। पाकिस्तानी ग्रेनेड के यूज होने का दावा इससे पहले इस मामले में सूत्रों से पता चला था कि हमले में GHD2P हैंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया गया था। यह ग्रेनेड पाकिस्तान में बनाया जाता है। विस्फोट के बाद यह करीब 5 से 10 मीटर के दायरे में बेहद घातक साबित हो सकता है। वहीं, इसके टुकड़े 20 से 25 मीटर तक फैल सकते हैं, जिससे आसपास मौजूद लोगों के गंभीर रूप से घायल होने का खतरा रहता है। हमले के बाद 2 नए वीडियो भी सामने आए थे। हमले से कुछ मिनट पहले वीडियो में BJP ऑफिस के पास स्थित एक अन्य दफ्तर के बाहर 2 संदिग्ध खड़े दिखाई दिए। वहीं, दूसरे वीडियो में हमले के बाद दोनों संदिग्ध सड़क के दूसरी ओर भागते हुए कैद हुए हैं।
भरे मंच पर भाजपा विधायक की कुटाई:मंत्री का छात्रा से लैपटॉप का वादा, कांग्रेस नेता दिला लाए; अपनी ही सरकार से खफा विधायक

मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। भाजपा विधायक को मिला ‘तगड़ा आशीर्वाद’ दतिया के सेवड़ा से भाजपा विधायक प्रदीप अग्रवाल को भरे मंच पर अनोखे अंदाज में ‘तगड़ा आशीर्वाद’ मिला। कथावाचक महाराज ने उनकी जमकर कुटाई कर दी। मुक्के मारे, धक्का दिया और पहनाई गई माला उतारकर फेंक दी। इस दौरान विधायक हाथ जोड़कर बैठे रहे। यह वाकया विधायक के विधानसभा क्षेत्र सेवड़ा के बेरछा में चल रही भागवत कथा के दौरान का है, जहां प्रदीप अग्रवाल कथा कर रहे महंत सीताराम महाराज से आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। लेकिन उनके साथ कुछ ऐसा हुआ, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। बाबा का यह व्यवहार देखकर हर कोई हैरान रह गया। हालांकि उनके अनुयायी इसे ‘विशेष आशीर्वाद’ की शैली बता रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीताराम महाराज अक्सर इसी तरह के तेज और आक्रामक अंदाज में आशीर्वाद देते हैं। उनके भक्तों के बीच यह धारणा है कि बाबा जब तक गुस्से या कठोर व्यवहार के साथ आशीर्वाद नहीं देते, तब तक उसे प्रभावी नहीं माना जाता। इस घटना के बाद लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कोई इसे आस्था और परंपरा से जोड़कर देख रहा है, तो कुछ लोग इसे सार्वजनिक मंच पर अनुचित व्यवहार बता रहे हैं। फिलहाल, विधायक की ओर से इस मामले में कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। 10वीं की टॉपर को लैपटॉप दिलाने की ‘रेस’ हमारे देश में हर मुद्दे पर राजनीति हो जाती है। भोपाल में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जहां 10वीं की टॉपर को लेकर सियासत शुरू हो गई। इस मामले में कांग्रेस ने भाजपा के ‘नहले पर दहला’ मारते हुए बाजी मार ली। दरअसल, भोपाल की हिमांशी धाकड़ ने कड़ी मेहनत से 10वीं में 99.4 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रदेश की मेरिट लिस्ट में तीसरा स्थान पाया। हिमांशी की इस उपलब्धि के बाद नेताओं का उसके घर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। सबसे पहले मंत्री विश्वास सारंग पहुंचे। उन्होंने हिमांशी को बधाई दी, मिठाई खिलाई और उज्ज्वल भविष्य के लिए हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। हिमांशी के पास लैपटॉप नहीं होने पर मंत्री ने उसे लैपटॉप दिलाने का वादा किया और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। इसके बाद कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला भी हिमांशी के घर पहुंचे। उन्होंने भी उसे बधाई दी और मिठाई खिलाई। बातचीत के दौरान जब हिमांशी ने लैपटॉप नहीं होने की बात कही, तो उन्होंने तुरंत उसे कहा कि चलो लैपटॉप लेकर आते हैं। वे हिमांशी को उसी समय अपने साथ बाजार ले गए और वहां से एक लैपटॉप और मोबाइल दिला दिया। अब कांग्रेस, मंत्री सारंग और मनोज शुक्ला के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर तंज कस रही है। पार्टी का कहना है कि भाजपा के पास सिर्फ वादे हैं, जबकि कांग्रेस के पास उन्हें पूरा करने का इरादा। अपनी ही सरकार के तंत्र से खफा विधायक एमपी में भाजपा की डबल इंजन वाली सरकार में राजगढ़ से सत्ताधारी दल के विधायक अमर सिंह यादव अपनी ही सरकार के सिस्टम से नाराज हो गए हैं। उन्होंने तय किया है कि वे अब किसी भी सरकारी कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। दरअसल, हाल ही में राजगढ़ के जिला अस्पताल में मंत्री गौतम टेटवाल ने एक कार्य का लोकार्पण किया था, जिसमें स्थानीय भाजपा विधायक अमर सिंह यादव को आमंत्रित ही नहीं किया गया। इस पर उन्होंने अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई और इसकी शिकायत सीएम हाउस से लेकर पार्टी संगठन तक कर दी। विधायक ने चेतावनी दी है कि जब तक इस मामले में उनकी अनदेखी करने वाले संबंधित अधिकारियों को हटाया नहीं जाता, वे किसी भी सरकारी कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। इससे पहले भी विधायक इस मुद्दे पर मंत्री गौतम टेटवाल को लेकर नाराजगी जता चुके हैं। उनका कहना है कि जिला अस्पताल के कार्यक्रम से ठीक पहले वे मंत्री के साथ एक अन्य कार्यक्रम के मंच पर मौजूद थे, लेकिन मंत्री ने उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं दी और सीधे जिला अस्पताल के लोकार्पण कार्यक्रम में चले गए। अब कुछ लोग इसे पार्टी की गुटबाजी से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि प्रशासन जनप्रतिनिधियों पर हावी होता जा रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब भाजपा की सरकार में ही उसके जनप्रतिनिधियों को तवज्जो नहीं मिल रही, तो आम जनता की स्थिति क्या होगी। भाजपा विधायक ने अपने बेटे से पल्ला झाड़ा शिवपुरी के पिछोर में भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के बेटे दिनेश लोधी ने अपनी थार कार से पांच लोगों को टक्कर मार दी, जिससे वे घायल हो गए। इस मामले में विधायक पुत्र घायलों की ही गलती बताते नजर आए। उन्होंने कैमरे पर कहा- जब मैं सायरन और हॉर्न दे रहा था, तो गाड़ी क्यों लहरा रहे थे? बाइक पर तीन-तीन लोग बैठकर गाड़ी लहरा रहे थे। इसके बाद सवाल पूछे जाने पर विधायक पुत्र ने धमकाने के अंदाज में कैमरा बंद करा दिया। इस पूरे मामले में रोचक बात यह रही कि विधायक प्रीतम लोधी ने खुद ट्वीट किया। उन्होंने लिखा- विधायक के लिए पुत्र-परिवार बड़ा नहीं होता, जनता सर्वोपरि है। पुलिस प्रशासन से उम्मीद है कि करेरा के पीड़ितों को न्याय दिलाया जाए। इधर, पुलिस ने विधायक के बेटे के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। इनपुट सहयोग – राधावल्लभ मिश्रा (दतिया), मनीष सोनी (राजगढ़), कपिल मिश्रा (शिवपुरी) ये भी पढ़ें – पूर्व मंत्री ने तरबूज काटकर मनाया जन्मदिन: भाजपा विधायक की बेइज्जती, डिप्टी सीएम ने नहीं पहनी माला जन्मदिन पर अक्सर लोगों को आपने केक काटते देखा होगा, लेकिन मंदसौर में पूर्व मंत्री कैलाश चावला ने कुछ अलग किया। उन्होंने केक की जगह तरबूज काटा और उसी से खुद का व अन्य लोगों का मुंह मीठा कराया। तरबूज खाने के बाद नेता जी ‘वाह-वाह’ करते नजर आए। पूरी खबर पढ़ें
महिला आरक्षण-परिसीमन पर शाह आज लोकसभा में जवाब देंगे:प्रियंका का आरोप- असम की तरह देश की सीटों की काट-छांट होगी; शाम 4 बजे वोटिंग

महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन बिलों पर आज लोकसभा में दूसरे दिन चर्चा होगी। अमित शाह इस पर जवाब देंगे। गुरुवार को उन्होंने कहा था कि परिसीमन को लेकर विपक्ष के जितने भी सवाल हैं। वे केजी के बच्चों की तरह उन्हें समझाएंगे। शाम 4 बजे तीनों बिल पर वोटिंग कराई जाएगी। लोकसभा स्पीकर ने बिलों पर चर्चा के लिए 15 घंटे का समय तय किया। गुरुवार को करीब 12 घंटे तक पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने अपनी बात रखी। कांग्रेस की तरफ से प्रियंका गांधी, गौरव गोगोई, वेणुगोपाल ने बिल के विरोध में अपनी बातें कहीं। प्रियंका ने कहा कि असम की तरह देशभर की सीटों की काट-छांट की जाएगी। पीएम ने भी करीब 35 मिनट का भाषण दिया। उन्होंने कहा कि परिसीमन में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। यह मोदी की गारंटी है और वादा है। विपक्ष इसका क्रेडिट ले सकता है। 16 अप्रैल: संसद के विशेष सत्र का पहला दिन; किसने क्या कहा पीएम मोदी बोले- मैं क्रेडिट का ब्लैंक चेक दे रहा हूं यहां कुछ लोगों को लगता है, इसमें कहीं न कहीं मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है। इसका अगर विरोध करेंगे तो स्वभाविक है कि राजनीतिक लाभ मुझे होगा। अगर साथ चलेंगे तो किसी को भी नहीं होगा। फिर अलग पहलू हो जाता है। हमें क्रेडिट नहीं चाहिए जैसे ही पारित हो जाए तो मैं एड देकर सबको धन्यवाद देने तैयार हूं। सबकी फोटो छपवा देंगे। ले लो जी क्रेडिट। सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं। प्रियंका बोलीं- महिलाएं बार-बार बहकाने वाले पुरुषों को पहचान लेती प्रियंका गांधी ने कहा, पीएम के खोखले आश्वासनों के बावजूद संसद में राज्यों की मौजूदगी बदल जाएगी। जिस तरह असम में उन्होंने मनचाही सीटों को काटा, नई सीमाएं बनाएं उसी तरह यह देश में करेंगे। मौजूदा सरकार जनता की आंखों में धूल झोंक रही है। ये ओबीसी वर्ग का हक छीन रहे हैं, ताकि कुछ प्रदेशों की ताकत को कम किया जा सके। शाह जी हंस रहे हैं, पूरी प्लानिंग बना रखी है। चाणक्य आज जिंदा होते तो वो भी चौंक जाते। अखिलेश बोले- हम चाहते हैं कि पहले जनगणना हो अखिलेश ने कहा- ये लोग पिछड़े वर्ग की 33 प्रतिशत महिलाओं को उनका हक नहीं देना चाहते हैं। जब परिसीमन की बारी आई तो इन लोगों ने पूरी रणनीति बनाई, कि कैसे क्षेत्र बनाए जाएं कि इसका फायदा इन लोगों को ही मिले। इसलिए हम चहते हैं कि पहले जनगणना हो, जब आंकड़े आ जाएं तभी परिसीमन हो। इसलिए हमारी मांग है कि आधी आबादी में पिछड़ी और मुस्लिम महिलाओं को जोड़कर भी जनगणना हो। कंगना रनोट बोलीं- कुछ अच्छा होता है, तो कांग्रेस के पेट में चूहे दौड़ने लगते हैं बीजेपी सांसद कंगना रनोट ने लोकसभा में कहा कि जब भी कुछ अच्छा होने लगता है तो कांग्रेस के पेट में चूहे दौड़ने लगते है। एक तरफ प्रधानमंत्री जी की नीति है, तो दूसरे तरफ विपक्ष के लोग। मुलायम सिंह यादव जी ने कहा था कि अगर ये बिल आएगा तो सिर्फ शहरी महिलाएं ही सदन में आएगी। ये है विपक्ष की सोच। अब जानिए संसद में किन तीन बिलों पर चर्चा हो रही है परिसीमन में क्या होगा: सरकार कानून बनाकर तय करेगी अभी तक सीटों का आधार 1971 की जनगणना थी, जो 2026 तक के लिए मान्य थी। परिसीमन कब होगा और किस जनगणना (जैसे 2011 या 2027) के आधार पर होगा, यह संविधान की जगह संसद एक साधारण कानून बनाकर तय कर सकेगी। सरकार इसमें बदलाव कर रही है। इसके लिए जनसंख्या (आबादी) की परिभाषा को बदला जाएगा है। इससे संसद को यह तय करने का अधिकार मिलता है कि सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए किस डेटा को आधार बनाया जाए। इसके लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात कही गई है। संविधान में संशोधन कर सरकार परिसीमन आयोग बनाएगी। अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व जज होंगे। आयोग सभी निर्वाचन क्षेत्र (लोकसभा सीटें) दोबारा तय करेगा। आयोग का निर्णय अंतिम होगा। इसके फैसले को कोर्ट में चुनौती नहीं दे सकते। क्या सरकार लोकसभा में बिल पास करा पाएगी संविधान संशोधन पारित कराने के लिए सरकार को बैक-चैनल बातचीत करनी होगी। भारतीय संविधान के ऑर्टिकल 368 के तहत, संविधान में संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत जरूरी होता है। कुल सदस्यों का बहुमत (50% से अधिक) और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत। लोकसभा की वर्तमान संख्या 540 (कुल 543 में से) है। 3 सीटें खाली हैं। यदि सभी सांसद उपस्थित होकर मतदान करते हैं, तो कम से कम 360 सांसदों (दो तिहाई) को इसके पक्ष में वोट देना होगा। वर्तमान में, भाजपा-नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के पास 292 सांसद हैं, जबकि INDIA (विपक्ष) के पास 233 सांसद हैं। 15 सांसद किसी गठबंधन के साथ नहीं हैं। तीन दशक से पेंडिंग था महिला आरक्षण बिल संसद में महिलाओं के आरक्षण का प्रस्ताव करीब 3 दशक से पेंडिंग है। यह मुद्दा पहली बार 1974 में महिलाओं की स्थिति का आकलन करने वाली समिति ने उठाया था। 2010 में मनमोहन सरकार ने राज्यसभा में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण बिल को बहुमत से पारित करा लिया था। तब सपा और राजद ने बिल का विरोध करते हुए तत्कालीन UPA सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी दी थी। इसके बाद बिल को लोकसभा में पेश नहीं किया गया। तभी से महिला आरक्षण बिल पेंडिंग है। 2023 में मोदी सरकार ने महिला आरक्षण बिल को पास कराया। यह कानून बना, अब इसमें संसोधन के जरिए बदलाव किया जा रहा है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… PM ने दोस्त कहा तो अखिलेश ने हाथ जोड़ लिए; संसद के टॉप-8 मोमेंट्स केंद्र सरकार ने गुरुवार को संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल से जुड़े संशोधन बिल पेश किए। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी स्पीच के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को अपना दोस्त कहा। इस पर अखिलेश ने हंसते हुए हाथ जोड़ लिए। प्रियंका गांधी ने शाह को देखते हुए कहा- अगर चाणक्य जिंदा होते तो आपको देखकर चौंक जाते। शाह मुस्कुराने लगे। पूरी खबर पढ़े…
PMO के फर्जी सिफारिशी पत्र से नौकरी का मामला:सबूतों के अभाव में आरोपी बरी; पुलिस जांच पर उठे सवाल

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के कथित फर्जी सिफारिशी पत्र के जरिए नौकरी हासिल करने के मामले में आरोपी को साक्ष्य प्रमाणित नहीं होने पर कोर्ट से राहत मिल गई। अपर सत्र न्यायाधीश विवेक कुमार चंदेल की कोर्ट ने आरोप सिद्ध न होने पर आरोपी दीपक अवस्थी को दोषमुक्त कर दिया। इस फैसले के बाद केस में पुलिस की जांच पर सवाल उठे हैं। घटना 13 अक्टूबर 2023 की है। फरियादी राहुल पिस्तौर ने क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई थी कि विजय नगर स्थित अवंतिका गैस एजेंसी के कार्यालय में असिस्टेंट मैनेजर (प्रोजेक्ट) पद पर नियुक्ति के लिए आरोपी दीपक अवस्थी (निवासी झांसी, उत्तर प्रदेश) ने प्रधानमंत्री कार्यालय, नई दिल्ली के कथित डायरेक्टर के नाम से जारी एक सिफारिशी पत्र प्रस्तुत किया है। शिकायत के अनुसार, आरोपी पुलिस की वर्दी पहनकर स्वयं को पुलिसकर्मी बताते हुए गैस कंपनी के कार्यालय में उक्त पत्र लेकर पहुंचा था। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपी ने पीएमओ से जारी एक प्रशंसा पत्र को कथित रूप से एडिट कर उसे नौकरी की सिफारिश के रूप में प्रस्तुत किया। धोखाधड़ी का केस, हुई थी गिरफ्तारी मामला फर्जी पाए जाने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था। जांच में मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज जब्त किए गए थे। कोर्ट में सुनवाई के दौरान जब्ती प्रक्रिया, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अन्य तथ्यों को लेकर विरोधाभासी बिंदु सामने आए। अभियोजन पक्ष आरोपों को सिद्ध नहीं कर पाया। कोर्ट ने पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में आरोपी दीपक अवस्थी को बरी कर दिया। इस फैसले के बाद केस में पुलिस विवेचना पर सवाल खड़े हुए हैं।
‘2023 महिला आरक्षण अधिनियम 16 अप्रैल से प्रभावी’: संसद में संशोधनों पर बहस के दौरान केंद्र | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:17 अप्रैल, 2026, 00:02 IST केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 को पारित होने के तीन साल बाद 16 अप्रैल, 2026 से लागू करने की अधिसूचना जारी की। केंद्र ने महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 को ऐसे समय में अधिसूचित किया है जब संसद कानून में संशोधन पर विचार कर रही है। (छवि: पीटीआई/फ़ाइल) महिला आरक्षण कानून में बदलाव के लिए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पर संसद के विशेष सत्र के दौरान तीखी बहस के बीच, केंद्र ने गुरुवार को 2023 अधिनियम को अधिसूचित किया और कहा कि यह 16 अप्रैल, 2026 से प्रभावी है। केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 को 16 अप्रैल, 2026 से लागू करने की अधिसूचना जारी की – इसके पारित होने के तीन साल बाद – लेकिन संसद इस मामले पर देर रात तक बहस कर रही है और कल प्रस्तावित बदलावों पर मतदान करेगी। कानून मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, अधिनियम विधायिकाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत कोटा देता है और 16 अप्रैल, 2026 से लागू हो गया है। हालाँकि, यह तुरंत ज्ञात नहीं है कि इसे क्यों अधिसूचित किया गया है जब संसद 2029 में इसके कार्यान्वयन के लिए इसमें संशोधन करने पर बहस कर रही है। अधिसूचना में कहा गया है: “संविधान (एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 1 की उप-धारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार 16 अप्रैल, 2026 को उस तारीख के रूप में नियुक्त करती है जिस दिन उक्त अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे।” सितंबर 2023 में, संसद ने विधायी निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया, जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण अधिनियम के रूप में जाना जाता है। इस अधिनियम में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया। इसके तहत, आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं होगा, क्योंकि यह 2027 की जनगणना के बाद परिसीमन अभ्यास के पूरा होने से जुड़ा था। वर्तमान में लोकसभा में जिन तीन विधेयकों पर बहस हो रही है, वे सरकार द्वारा लाए गए थे ताकि 2029 में महिला कोटा लागू किया जा सके। इस बीच, अधिकारियों ने कहा कि हालांकि अधिनियम लागू हो गया है, लेकिन आरक्षण को वर्तमान सदन में लागू नहीं किया जा सकता है क्योंकि इसे अगली जनगणना के आधार पर परिसीमन अभ्यास करने के बाद लागू किया जा सकता है। हालाँकि, घटनाओं के इस विचित्र मोड़ पर किसी का ध्यान नहीं गया और कांग्रेस ने तुरंत इस पर सवाल उठाए। पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर गजट अधिसूचना की एक प्रति साझा की और अधिसूचना के समय को “बिल्कुल विचित्र” बताया। ये बिल्कुल विचित्र है. सितंबर 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम आज लागू हो गया है जबकि इसमें संशोधनों पर बहस चल रही है और कल मतदान होगा। पूरी तरह से हैरान. pic.twitter.com/8d9y2bAGmV-जयराम रमेश (@जयराम_रमेश) 16 अप्रैल 2026 हालांकि सरकार ने कानून को अधिसूचित कर दिया है, लेकिन एक महत्वपूर्ण बाधा बनी हुई है: इसका कार्यान्वयन वर्तमान में अगली जनगणना और परिसीमन अभ्यास पर निर्भर है, जो इसे भविष्य में प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा रहा है। इसलिए, सरकार अब 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए आरक्षण को समय पर लागू करना सुनिश्चित करने के लिए इस संबंध को खत्म करना चाह रही है। (एजेंसी इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 16 अप्रैल, 2026, 23:30 IST समाचार राजनीति ‘2023 महिला आरक्षण अधिनियम 16 अप्रैल से प्रभावी’: संसद में संशोधनों पर बहस के बीच केंद्र अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)महिला आरक्षण अधिनियम 2023(टी)महिला आरक्षण कानून(टी)131वां संशोधन विधेयक(टी)भारतीय संसद बहस(टी)संवैधानिक संशोधन भारत(टी)महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व(टी)महिलाओं के लिए आरक्षण(टी)2023 अधिनियम अधिसूचना
केमिकल से पकाए जा रहे फलों पर सख्ती, FSSAI का बड़ा कदम

Last Updated:April 16, 2026, 21:58 IST FSSAI ने साफ कहा है कि कैल्शियम कार्बाइड जैसे खतरनाक केमिकल का इस्तेमाल पूरी तरह बैन है. संस्था का कहना है कि फलों को पकाने के लिए केवल एथिलीन गैस का इस्तेमाल ही मान्य है, वो भी तय नियमों और सुरक्षित तरीके से. इसको नहीं मानने वालों पर तुरंत जांच और छापेमारी की जाएगी. ख़बरें फटाफट अगर आप रोजाना फल खाते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने फलों को केमिकल से पकाने के मामले पर सख्त रुख अपनाया है. अब ऐसे किसी भी तरीके को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, जो लोगों की सेहत के लिए खतरा बन सकता है. 16 अप्रैल 2026 को जारी निर्देश में FSSAI ने साफ कहा है कि कैल्शियम कार्बाइड जैसे खतरनाक केमिकल का इस्तेमाल पूरी तरह बैन है. कुछ व्यापारी आम, केला और पपीता जैसे फलों को जल्दी पकाने के लिए इस केमिकल का उपयोग करते हैं, लेकिन यह शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक है. इसके कारण उल्टी, त्वचा संबंधी समस्याएं और खाना निगलने में दिक्कत जैसी परेशानियां हो सकती हैं. इतना ही नहीं, कुछ जगहों पर एथिफॉन नाम के केमिकल घोल में फल डुबोकर उन्हें जल्दी पकाने की कोशिश की जा रही है. FSSAI ने इस पर भी सख्त रोक लगा दी है. संस्था का कहना है कि फलों को पकाने के लिए केवल एथिलीन गैस का इस्तेमाल ही मान्य है, वह भी तय नियमों और सुरक्षित तरीके से. FSSAI ने सभी राज्यों के फूड सेफ्टी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे मंडियों, गोदामों और थोक बाजारों में कड़ी निगरानी रखें. जहां भी शक हो, वहां तुरंत जांच और छापेमारी की जाए. अगर किसी के पास प्रतिबंधित केमिकल मिलता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. जांच प्रक्रिया को और मजबूत बनाने के लिए अब खास तरह के टेस्ट पेपर का इस्तेमाल किया जाएगा. इनकी मदद से यह पता लगाया जा सकेगा कि फल प्राकृतिक रूप से पके हैं या केमिकल का इस्तेमाल किया गया है. इस पूरे कदम का मुख्य उद्देश्य यही है कि बाजार में बिकने वाले फल सुरक्षित हों और लोगों की सेहत को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे. FSSAI का यह फैसला उपभोक्ताओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि लोग बिना डर के स्वस्थ और ताजे फल खा सकें. इसलिए अगली बार जब आप फल खरीदें, तो उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा पर जरूर ध्यान दें. स्वस्थ रहने के लिए सुरक्षित भोजन चुनना बहुत जरूरी है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 16, 2026, 21:58 IST
टीकमगढ़ में अवैध मुरम खनन पर खनिज विभाग का छापा:कांटी खास गांव में सड़क पर मुरम फैलाकर भागे चालक; एक जेसीबी जब्त

टीकमगढ़ जिले के कांटी खास गांव में गुरुवार शाम खनिज विभाग ने अवैध मुरम खनन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। मुखबिर की सूचना पर पहुंची टीम ने मौके पर अवैध उत्खनन कर रही एक जेसीबी मशीन को जब्त कर लिया है। कार्रवाई के दौरान खनिज माफिया अपने डंपर और ट्रैक्टर लेकर भागने में सफल रहे, जिनका टीम ने काफी दूर तक पीछा भी किया। टीम को देख सड़क पर मुरम फैलाकर भागे चालक दोपहर करीब 3:30 बजे जब टीम मौके पर पहुंची, तब जेसीबी से ट्रैक्टरों और डंपरों में मुरम भरी जा रही थी। अधिकारियों को देखते ही चालक वाहनों को तेज रफ्तार में भगा ले गए और रास्ते में मुरम फैला दी ताकि पीछा न किया जा सके। जिला खनिज अधिकारी विपुल रावत के अनुसार, स्टाफ की कमी की वजह से भागते हुए वाहनों को रोकना संभव नहीं हो सका। 40 लोगों की भीड़ ने जेसीबी छुड़ाने का किया प्रयास कार्रवाई के दौरान करीब 30-40 ग्रामीण और खनन से जुड़े लोग जेसीबी मशीन को छुड़ाने के लिए मौके पर एकत्र हो गए। स्थिति बिगड़ती देख देहात थाने से पुलिस बल बुलाया गया। पुलिस की मौजूदगी में शाम करीब 6 बजे मशीन को जब्त कर थाने लाया गया। अधिकारियों के अनुसार, जब्त जेसीबी उत्तर प्रदेश के किसी व्यक्ति की है। अज्ञात आरोपियों पर केस खनिज विभाग ने अवैध उत्खनन और सरकारी कार्य में बाधा डालने की संभावनाओं को देखते हुए अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस और खनिज विभाग अब फरार डंपर और ट्रैक्टरों की पहचान कर आरोपियों की तलाश में जुट गए हैं। मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
‘अगर यह पारित हो गया तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा’: महिला कोटा विधेयक में ओबीसी के साथ ‘अन्याय’ पर प्रियंका गांधी | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:16 अप्रैल, 2026, 21:47 IST इससे पहले महिला कोटा बिल पर पीएम नरेंद्र मोदी के संबोधन का जवाब देते हुए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि वास्तव में इस कानून का महिलाओं से कोई लेना-देना नहीं है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा 16 अप्रैल, 2026 को नई दिल्ली में संसद के विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में बोलती हैं। (छवि: संसद टीवी/पीटीआई) कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी ने गुरुवार को कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि कांग्रेस महिला आरक्षण के साथ खड़ी है, लेकिन अगर मौजूदा विधेयक, जैसा कि अभी पेश किया गया है, पारित हो जाता है तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। का स्पष्ट रूप से उत्तर देना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन इससे पहले महिला आरक्षण बिल पर प्रियंका गांधी ने कहा था कि असल में इस कानून का महिलाओं से कोई लेना-देना नहीं है. इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि कांग्रेस महिला आरक्षण के साथ खड़ी है। गांधी ने संसद में विशेष सत्र के दौरान कहा, वास्तविकता यह है कि यह महिला विधेयक के बारे में नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र इन विधेयकों को लाकर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अधिकारों को छीनना चाहता है। उन्होंने कहा, “सरकार जाति जनगणना न कराकर और 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर अड़े रहकर ओबीसी के अधिकारों को छीनना चाहती है। अगर यह विधेयक पारित हो गया तो देश में लोकतंत्र खत्म हो जाएगा।” केंद्रीय गृह मंत्री की ओर इशारा करते हुए अमित शाह का अपने भाषण पर प्रसन्नतापूर्वक प्रतिक्रिया देते हुए, गांधी ने अपनी बात कहने के लिए तीखा हमला किया कि कैसे केंद्र “परिसीमन का अनुचित लाभ” उठा रहा है। “अचानक चुनाव के दौरान, आप सर्वदलीय बैठक के बिना एक सत्र बुलाते हैं। वे (सत्ता पक्ष) एक कथा बनाएंगे और फिर विपक्ष को इसमें डाल देंगे। धर्म संकट (नैतिक दुविधा). हम पीएम (नरेंद्र मोदी) से ज्यादा उम्मीद नहीं कर सकते क्योंकि वह दुनिया के दबाव में हैं।’ काला टीका भी काम आ जाएगा,” उसने कहा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विपक्ष “आपके तीन विधेयकों का पुरजोर विरोध करता है”, और यदि प्रधान मंत्री मोदी वास्तव में महिलाओं की परवाह करते हैं, तो वह उनका राजनीतिक उपयोग नहीं करेंगे। महिला कोटा कानून में संशोधन और परिसीमन आयोग के गठन के लिए पेश किए गए तीन विधेयकों पर लोकसभा में बहस जारी है। ‘महिलाएं उन लोगों को आसानी से पहचान लेती हैं जो उन्हें गुमराह करने की कोशिश करते हैं’ गांधी ने पूछा कि केंद्र सरकार लोकसभा की 543 सीटों पर महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण क्यों नहीं दे सकती. उन्होंने कहा कि विधेयक लोकसभा सीटों की संख्या 850 तक बढ़ाने की बात करता है – जो 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन आयोग द्वारा किया जाएगा। बारीकी से पढ़ने पर पता चलता है कि परिसीमन आयोग के तीन सदस्य राज्यों के भाग्य और संसद में उनके प्रतिनिधित्व का फैसला करेंगे। कांग्रेस सांसद ने विधायी निकायों में महिला आरक्षण के मुद्दे की पृष्ठभूमि भी बताई। उन्होंने कहा, “यह मुद्दा हर महिला के दिल के करीब है। इस मुद्दे की एक पृष्ठभूमि है। प्रधान मंत्री ने कहा कि यह मुद्दा 30 वर्षों से अवरुद्ध था। इसे नेहरू नामक व्यक्ति ने शुरू किया था। वह नेहरू नहीं जिनसे वे इतना बचते हैं, बल्कि मोतीलाल नेहरू हैं, जिन्होंने एक समिति के अध्यक्ष के रूप में 19 अधिकारों की एक सूची तैयार की थी, जिन्हें कांग्रेस के कराची सत्र में एक प्रस्ताव के रूप में पारित किया गया और भारतीय राजनीति में महिलाओं को समान अधिकार देने का आधार बनाया गया।” उन्होंने कहा कि वह राजीव गांधी ही थे, जो प्रधानमंत्री के रूप में पंचायतों में महिलाओं के आरक्षण के लिए विधेयक लाए थे नगरपालिका और आखिरकार कांग्रेस की पीवी नरसिम्हा राव सरकार के दौरान इसके लिए बिल पास हो गया. उन्होंने कहा, “यूपीए के तहत, इसे राज्यसभा में पारित किया गया था लेकिन लोकसभा में आम सहमति नहीं बन सकी। 2018 में, राहुल गांधी ने महिला आरक्षण की मांग करते हुए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा।” मोदी पर निशाना साधते हुए गांधी ने आगे कहा कि मोदी के संबोधन से ऐसा लगता है कि सत्तारूढ़ भाजपा महिला आरक्षण की चैंपियन है। “कोई भी महिला आपको बताएगी कि महिलाएं उन लोगों को आसानी से पहचान लेती हैं जो उन्हें गुमराह करने की कोशिश करते हैं,” उन्होंने कहा और भाजपा से सावधान रहने का आग्रह किया। महिला कोटा कानून में बदलाव के लिए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक मत विभाजन के बाद लोकसभा में पेश किया गया। केंद्र शासित प्रदेशों दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर में प्रस्तावित संशोधित महिला कोटा कानून को लागू करने के लिए दो सामान्य विधेयक – परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक भी सदन में पेश किए गए। (एजेंसी इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 16 अप्रैल, 2026, 18:24 IST समाचार राजनीति ‘अगर यह पारित हो गया तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा’: महिला कोटा विधेयक में ओबीसी के साथ ‘अन्याय’ पर प्रियंका गांधी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)महिला आरक्षण बिल(टी)प्रियंका गांधी(टी)कांग्रेस पार्टी(टी)नरेंद्र मोदी(टी)ओबीसी अधिकार(टी)जाति जनगणना भारत(टी)भारतीय संसद विशेष सत्र(टी)महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व








