घर में घुसकर महिला से छेड़छाड़, विरोध पर स्तन काटा:आरोपी भाजपा मंडल अध्यक्ष का भतीजा; 6 दिन बाद भी नहीं हुई FIR

खंडवा में एक युवक महिला के घर में जबरन घुस गया और उससे जबरन छेड़छाड़ करने लगा। महिला ने जब इसका विरोध किया तो आरोपी ने चाकू से एक स्तन काट दिया। पसलियों में चाकू मार दिया। इतने में महिला का पति पहुंच गया, उसको देख आरोपी मौके से भाग गया। आरोपी भाजपा मंडल अध्यक्ष का भतीजा बताया जा रहा है। मामला पंधाना थाना क्षेत्र के ग्राम शाहपुरा का है। 6 दिन से महिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती है। उसकी हालत गंभीर है, डॉक्टरों ने इंदौर रेफर करने की बात कही है। इलाज के लिए महिला का पति अब रिश्तेदारों से कर्ज लेने की जुगाड़ कर रहा है। इधर, घटना के बाद से अब तक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है। महिला के पति ने बताया कि, अस्पताल चौकी पुलिस और तहसीलदार ने भी बयान दर्ज किए हैं। अभी तक केस रजिस्टर्ड नहीं हुआ। मामले की शिकायत एसपी से भी की है। पति बोला- दुष्कर्म की कोशिश कर रहा था महिला के पति ने बताया कि, घटना 11 अप्रैल की रात 12 बजे की हैं। उस दिन वह ड्राइवरी के लिए टैक्सी लेकर बुरहानपुर गया था। रात के समय घर आया तो आकाश पटेल मेरी पत्नी से झगड़ा कर रहा था, उसके हाथ में चाकू था। मेरे आने तक वह पत्नी को चाकू से घायल कर चुका था। मैं आकाश को पकड़ने लगा इतने में वह भाग गया। पत्नी ने बताया कि स्तन में चाकू घोंप दिया। मैं उसे लेकर अस्पताल के लिए निकल पड़ा। रास्ते में पत्नी ने बताया कि, आकाश ने उसके साथ रेप करने की कोशिश की। वह पिछले एक हफ्ते से बार-बार घर की तरफ आता था और 5 अप्रैल को भी वह घर में घुस आया था। उस दिन वह शराब के नशे में था और पत्नी को धमकी देकर गया था कि तेरे साथ रेप करूंगा। 5 दिन बाद 11 अप्रैल को पत्नी घर में सो रही थी। इस दौरान वह घर के पीछे खेत तरफ से आया और खिड़की में लगी जाली तोड़ दी। खिड़की से घर में घुसा और पत्नी के साथ रेप का प्रयास किया। आरोपी भाजपा मंडल अध्यक्ष का भतीजा पीड़िता के पति का कहना है कि, घटना के बाद हम लोग बोरगांव बुजुर्ग स्थित पुलिस चौकी गए थे। लेकिन वहां से कहा गया कि आप पहले अस्पताल जाइए, अस्पताल की पुलिस से हम रिपोर्ट मंगा लेंगे। आज 6 दिन हो गए हैं, अस्पताल वाले बयान लेकर चार दिन पहले ही डायरी बोरगांव चौकी पुलिस को दें चुके हैं। यहां तक कि खंडवा तहसीलदार ने खुद आकर बयान भी रिकॉर्ड कर लिए, लेकिन पुलिस ने इस गंभीर केस में भी एफआईआर नहीं की। आरोपी को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त हैं। क्योंकि उसका सगा काका जितेंद्र पटेल भाजपा बोरगांव मंडल का अध्यक्ष हैं। शायद इसीलिए पुलिस ने एफआईआर नहीं की। हमारे साथ बहुत अन्याय हुआ हैं। पुलिस और प्रशासन को हमारी मदद करना थी लेकिन हमें ही परेशान किया जा रहा है। आरोपी खुलेआम घूम रहा हैं। व्हाट्सएप स्टेट्स से पता लगा कि पति घर नहीं महिला के पति के अनुसार, आकाश पटेल पिकअप गाड़ी चलाता है। यानी वह भी मेरी तरह ड्राइवर हैं, इस कारण हम लोग एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। मैंने घटना वाले दिन व्हाट्सएप स्टेट्स डाला कि आज बुरहानपुर जा रहा हूं, कोई सवारी हो तो संपर्क करें। यह स्टेट्स आकाश ने भी सीन किया और उसे लग गया कि मेरी पत्नी घर पर अकेली हैं। वह घर पहुंचा और रेप का प्रयास कर चाकूबाजी की। इतनी देर में मैं खुद चले गया, क्योंकि आते वक्त मेरे पास सवारी नहीं थी, इस कारण मैं सीधे घर पहुंचा था। पुलिस बोली- कोई रिपोर्ट लिखाने नहीं आया इधर, मामले में एफआईआर ना लिखने को लेकर चौकी प्रभारी अविनाश भोपले का कहना है कि ऐसा कोई भी प्रकरण चौकी पर नहीं आया था। अस्पताल से मामले की सूचना जरूर मिली थी। लेकिन एमएलसी में बताया गया कि पति-पत्नी के बीच का आपसी विवाद है और इसी विवाद में महिला को चोट आई। फिलहाल चौकी पर कोई रिपोर्ट लिखाने नहीं पहुंचा।
लेंसकार्ट के ड्रेस कोड पर विवाद:बिंदी-तिलक पर रोक और हिजाब को मंजूरी देने वाला लेटर वायरल, CEO पीयूष बंसल बोले- यह पुरानी गाइडलाइन

लेंसकार्ट अपने ऑफिस और स्टोर्स के ड्रेस कोड को लेकर विवादों में घिर गई है। सोशल मीडिया पर कंपनी का एक कथित पॉलिसी डॉक्यूमेंट वायरल हुआ है, जिसमें कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और कलावा पहनने से मना किया गया है, जबकि हिजाब और पगड़ी को शर्तों के साथ मंजूरी दी गई है। यह विवाद तब और बढ़ गया जब यूजर लेखिका और एक्टिविस्ट शेफाली वैद्य ने X पर स्क्रीनशॉट साझा किया और आरोप लगाया कि कंपनी की नीति धार्मिक प्रतीकों के साथ असमान व्यवहार करती है। लेखक शेफाली वैद्य ने पीयूष बंसल से पूछा सवाल लेखिका और एक्टिविस्ट शेफाली वैद्य ने इस विवादित पॉलिसी को लेकर पीयूष बंसल को टैग किया। उन्होंने X पर लिखा, “पीयूष बंसल, क्या आप स्पष्ट कर सकते हैं कि लेंसकार्ट में हिजाब ठीक है लेकिन बिंदी और कलावा क्यों नहीं?” इस पोस्ट के बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर लेंसकार्ट को ट्रोल करना शुरू कर दिया और कंपनी की नीति पर सवाल उठाए। CEO पीयूष बंसल ने दी सफाई मामला बढ़ने पर लेंसकार्ट के को-फाउंडर और CEO पीयूष बंसल ने सफाई दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि वायरल हो रहा डॉक्यूमेंट पुराना और गलत है। यह कंपनी की मौजूदा गाइडलाइन को नहीं दर्शाता। कंपनी सभी धर्मों का सम्मान करती है। उन्होंने कहा भारत भर में हमारे हजारों टीम मेंबर्स हैं जो हर दिन हमारे स्टोर्स पर अपने विश्वास और संस्कृति को गर्व के साथ पहनते हैं। ” वायरल डॉक्यूमेंट में क्या लिखा है? सोशल मीडिया पर शेयर किए गए इस ‘ग्रूमिंग गाइड’ के मुताबिक, महिला कर्मचारियों को स्टोर में बिंदी या क्लचर लगाने की अनुमति नहीं है। साथ ही, हाथ में पहने जाने वाले धार्मिक धागे (कलावा) या रिस्ट बैंड को भी हटाने का निर्देश दिया गया है। वहीं, इसी डॉक्यूमेंट में लिखा है कि अगर कोई कर्मचारी हिजाब या पगड़ी पहनता है, तो वह काले रंग का होना चाहिए। हिजाब की लंबाई ऐसी हो कि वह कंपनी का लोगो न छुपाए। हालांकि, बुर्का पहनकर स्टोर में काम करने की मनाही की गई है। IPO की तैयारी में है कंपनी, वैल्यूएशन 50 हजार करोड़ यह विवाद ऐसे समय में आया है जब लेंसकार्ट शेयर बाजार में लिस्ट होने (IPO) की तैयारी कर रही है। 2019 में यूनिकॉर्न बनने वाली इस कंपनी की मौजूदा वैल्यूएशन करीब 50 हजार करोड़ रुपए आंकी गई है। हाल ही में कंपनी के शेयरों में भी तेजी देखी गई थी।
यूट्यूब एप से पूरी तरह हटा सकेंगे 'शॉर्ट्स':टाइम मैनेजमेंट में नया 0 मिनट का ऑप्शन मिला; रील की लत छुड़ाने में मदद मिलेगी

यूट्यूब ने ‘टाइम मैनेजमेंट’ का नया फीचर जारी किया है। इसके जरिए अब आप एप पर शॉर्ट्स देखने की समय सीमा को ‘जीरो’ पर सेट कर सकते हैं। इससे शॉर्ट्स फीड पूरी तरह से हट जाएगी। इसका मकसद स्क्रीन टाइम को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद करना है। यूट्यूब ने पिछले साल अक्टूबर में शॉर्ट्स के लिए टाइमर फीचर पेश किया था, जिसमें न्यूनतम समय सीमा 15 मिनट थी। जनवरी में इस फीचर का विस्तार करते हुए माता-पिता को बच्चों के स्क्रीन टाइम पर कंट्रोल देने के लिए ‘जीरो मिनट’ का विकल्प लाने की घोषणा की गई थी। सभी अकाउंट के लिए फीचर रोलआउट यूट्यूब की प्रवक्ता मैकेंजी स्पिलर के मुताबिक, अब यह विकल्प सभी पैरेंट्स के लिए लाइव हो चुका है और धीरे-धीरे सामान्य एडल्ट अकाउंट्स के लिए भी रोल आउट किया जा रहा है। होम स्क्रीन से भी शॉर्ट्स के सुझाव हट जाएंगे जैसे ही आप ‘जीरो मिनिट’ की लिमिट चुनेंगे, शॉर्ट्स टैब पर कोई वीडियो नहीं दिखेगा। वहां केवल एक नोटिफिकेशन दिखाई देगा कि आपने अपनी ‘शॉर्ट्स फीड लिमिट’ पूरी कर ली है। लिमिट सेट करने के बाद होम स्क्रीन से भी शॉर्ट्स के सुझाव हट जाएंगे। बिंज वॉचिंग और रील की लत छुड़ाने में मदद मिलेगी भारत में यूट्यूब के करोड़ों यूजर्स हैं और शॉर्ट्स का क्रेज बहुत ज्यादा है। ऐसे में यह फीचर उन लोगों के लिए काफी मददगार साबित होगा जो डूम स्क्रॉलिंग यानी अनचाहे स्क्रॉलिंग की आदत छोड़ना चाहते हैं। डिजिटल वेलबीइंग की दिशा में यह यूट्यूब का एक बड़ा कदम माना जा रहा है। फीचर ऑन करने लिए 3 स्टेप्स फॉलो करें नॉलेज पार्ट: क्या है डूमस्क्रॉलिंग लगातार छोटे वीडियो स्क्रॉल करते रहने की आदत को डूमस्क्रॉलिंग कहते हैं। इससे न सिर्फ समय की बर्बादी होती है, बल्कि मानसिक तनाव और नींद न आने जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
मुरैना में बिना रजिस्ट्रेशन वाहनों को नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल-सीएनजी:प्रभारी कलेक्टर बोले- क्राइम रोकने लिया फैसला, फ्यूल देने पर संचालक पर होगी कार्रवाई

अब मुरैना में बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों को पेट्रोल,डीजल,सीएनजी नहीं मिलेगा। ऐसा करना पेट्रोल पंप संचालकों के लिए अपराध होगा। इस तरह का आदेश बुधवार देर शाम जिले भर के समस्त पेट्रोल पंप संचालकों को जिला प्रशासन द्वारा भेजा गया है। बिना रजिस्ट्रेशन के वाहनों बाइक, ट्रैक्टर, डंपर, कार सहित अन्य वाहनों से हो रहे क्राइम को रोकने के लिए यह पहल जिला प्रशासन की ओर से उठाई गई है। जिला प्रशासन का मानना है कि गाड़ी पर रजिस्ट्रेशन ना होने से क्राइम के बाद जांच प्रभावित होती है। बिना रजिस्ट्रेशन फ्यूल नहीं मुरैना के प्रभारी कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ कमलेश कुमार भार्गव के द्वारा जिले के समस्त पेट्रोल पंप संचालकों को निर्देशित किया है कि वह अब बिना रजिस्ट्रेशन के वाहनों को पेट्रोल, डीजल, सीएनजी नहीं देंगे।अगर ऐसा करेंगे तो वह जिला प्रशासन के आदेश का उल्लंघन माना जाएगा। उस पंप संचालक पर धारा 223 व अन्य प्रासंगिक धाराओं में कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश 15 अप्रैल से 14 जून तक प्रभावी रहेगा। बढ़ते अपराधों पर लगाम की कोशिश जिला प्रशासन का मानना है कि जिले में बड़ रहे अपराधों के वाहनों पर रजिस्ट्रेशन नहीं पाए जाते जैसे ट्रैक्टर, बाइक, डंपर, कार आदि जिससे क्राइम केस की जांच प्रभावित होती है। ज्यादातर ट्रैक्टर ट्रॉलियां और लोडिंग वाहनों पर रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं डाले जाते, जिससे हादसे के बाद उस तक पहुंचा मुश्किल होता है। इस कारण जिला प्रशासन ने यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता धारा 163 के अंतर्गत एक पक्षीय रूप से पारित किया गया है।
‘राज्यों का आनुपातिक प्रतिनिधित्व नहीं बदलेगा’: किरण रिजिजू ने परिसीमन पर दी सफाई | भारत समाचार

आखरी अपडेट:16 अप्रैल, 2026, 11:19 IST रिजिजू ने विपक्ष पर मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया और इस बात पर जोर दिया कि परिसीमन के बाद दक्षिणी राज्यों की आनुपातिक ताकत अपरिवर्तित रहेगी। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू. (पीटीआई/फ़ाइल छवि) परिसीमन प्रक्रिया पर चिंताओं के बीच केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा है कि परिसीमन और महिला आरक्षण पर सरकार के विधेयक संसद में पारित होने के बाद भी सभी राज्यों का आनुपातिक प्रतिनिधित्व समान रहेगा। तीन दिवसीय विशेष संसदीय सत्र में, केंद्र महिला आरक्षण विधेयक को क्रियान्वित करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है, जिससे 2029 से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण मिलेगा। यह संविधान (131 वां संशोधन) विधेयक, 2026 भी पारित करना चाहता है, जो लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव करता है, और परिसीमन विधेयक, 2026जो केंद्र को नवीनतम जनगणना आंकड़ों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्र की सीमाओं को फिर से निर्धारित करने के लिए एक आयोग बनाने की अनुमति देगा। हालाँकि, दक्षिणी राज्यों ने इस आशंका के बीच परिसीमन के कदम का विरोध किया है कि कम जनसंख्या के कारण उनकी सीट हिस्सेदारी काफी कम हो सकती है, जबकि उत्तरी राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ सकती है। दक्षिणी नेताओं को डर है कि अगर कुछ उत्तरी राज्य अपने दम पर बहुमत बना लेते हैं तो प्रधानमंत्री चुनने या राष्ट्रीय कानून पारित करने में उनकी भूमिका कम हो जाएगी। यह भी पढ़ें: परिसीमन विवाद: केंद्र आज संसद में लोकसभा सीटों का राज्यवार आवंटन बता सकता है परिसीमन पर किरण रिजिजू के साथ एक साक्षात्कार में हिंदुस्तान टाइम्सरिजिजू ने विपक्ष पर मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया और कहा कि महिला आरक्षण को किसी भी प्रकार के राजनीतिक एजेंडे के साथ नहीं जोड़ा जा सकता है या राजनीतिक लाभ के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “आनुपातिक रूप से, राज्यों का प्रतिनिधित्व वही रहेगा। विधेयक पेश होने पर यह स्पष्ट रूप से बताया जाएगा। आनुपातिक बात राज्य के भीतर जनसंख्या पर आधारित है।” “एक बार जब संसद द्वारा यह निर्णय लिया जाता है कि प्रतिनिधित्व मौजूदा अनुपात और प्रतिशत के समानुपाती होगा और वृद्धि 50% है, तो यह लोकसभा और विधानसभा सीटों के लिए लागू होती है।” विधेयक पर विपक्ष की प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर रिजिजू ने कहा, “वे इसका विरोध नहीं कर पाएंगे, अन्यथा उन्हें आरक्षण को अवरुद्ध करने के काले धब्बे के साथ रहना होगा। यह विश्वास का सवाल नहीं है। यह प्रतिबद्धता का सवाल है। यह एक राष्ट्रीय प्रतिबद्धता है।” यह भी पढ़ें: 33% महिलाएं, 850 सीटें और 100% लाभ: कैसे 50% परिसीमन फॉर्मूला वास्तव में दक्षिण को अधिक सीटें दे सकता है उन्होंने आगे कहा कि दक्षिणी राज्यों को खुश होना चाहिए क्योंकि वे कोई सीट नहीं खो रहे हैं. “जनसंख्या कम करने के लिए उन्हें दंडित नहीं किया गया है, बल्कि इसे बरकरार रखा गया है. कुल सीटों में बढ़ोतरी का अनुपात और उनकी हिस्सेदारी का प्रतिशत वही रहेगा.” सरकार ने पहले स्पष्ट किया था कि परिसीमन प्रक्रिया से दक्षिणी राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा। शीर्षक संख्या 50% बढ़कर 850 हो जाएगी और प्रत्येक राज्य के लिए यह संख्या भी 50% बढ़ जाएगी। हालाँकि, इंडिया ब्लॉक ने तर्क दिया है कि यह प्रक्रिया लोकसभा में दक्षिणी और उत्तर-पूर्वी राज्यों के प्रतिनिधित्व को कमजोर करती है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 16 अप्रैल, 2026, 11:19 IST न्यूज़ इंडिया ‘राज्यों का आनुपातिक प्रतिनिधित्व नहीं बदलेगा’: किरण रिजिजू ने परिसीमन पर दी सफाई अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
अवनीत कौर ने प्लास्टिक सर्जरी की अफवाहों पर चुप्पी तोड़ी:एक्ट्रेस ने कहा- उम्र के साथ लुक में नैचुरल बदलाव हुआ है

एक्ट्रेस अवनीत कौर ने हाल ही में उनके लुक्स को लेकर चल रही प्लास्टिक सर्जरी और बोटॉक्स की अफवाहों पर रिएक्ट किया। उन्होंने साफ किया कि उनके लुक में बदलाव उम्र के साथ नैचुरली हुआ है। गौरतलब है कि अवनीत कौर सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर अपनी फोटो शेयर करती रहती हैं। समय के साथ उनके लुक में आए बदलाव को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा बोटॉक्स या प्लास्टिक सर्जरी कराने के दावे किए जाते हैं। बचपन और अब की फोटो की तुलना करने की सलाह दी हाल ही में पिंकविला को दिए एक इंटरव्यू में अवनीत ने इन दावों को लेकर कहा कि वह ऐसे कमेंट्स पर ध्यान नहीं देतीं, लेकिन अगर लोग ऐसा सोच रहे हैं तो उन्हें अपने बचपन और वर्तमान की तस्वीरों की तुलना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे इंसान बड़ा होता है, उसके फीचर्स में बदलाव आना एक नार्मल प्रोसेस है। उन्होंने कहा कि हर कोई उम्र के साथ बदलता है और यह पूरी तरह नेचुरल है। एक्ट्रेस ने यह भी कहा कि उनकी नाक, आंखें और बाकी फीचर्स पहले जैसे ही हैं। उन्होंने अपने ब्यूटी मोल (तिल) का जिक्र करते हुए कहा कि वह आज भी वैसा ही है। अवनीत ने अपनी ब्यूटी का श्रेय अपनी मां को दिया और कहा कि जो भी है, वह उन्हें नेचुरली मिला है। वर्क फ्रंट की बात करें तो अवनीत आखिरी बार शांतनु माहेश्वरी के साथ फिल्म लव इन वियतनाम में नजर आई थीं। राहत शाह काजमी द्वारा निर्देशित यह फिल्म 12 सितंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, जिसमें अवनीत ने सिमी की भूमिका निभाई थी।
अवनीत कौर ने प्लास्टिक सर्जरी की अफवाहों पर चुप्पी तोड़ी:एक्ट्रेस ने कहा- उम्र के साथ लुक में नैचुरल बदलाव हुआ है

एक्ट्रेस अवनीत कौर ने हाल ही में उनके लुक्स को लेकर चल रही प्लास्टिक सर्जरी और बोटॉक्स की अफवाहों पर रिएक्ट किया। उन्होंने साफ किया कि उनके लुक में बदलाव उम्र के साथ नैचुरली हुआ है। गौरतलब है कि अवनीत कौर सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर अपनी फोटो शेयर करती रहती हैं। समय के साथ उनके लुक में आए बदलाव को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा बोटॉक्स या प्लास्टिक सर्जरी कराने के दावे किए जाते हैं। बचपन और अब की फोटो की तुलना करने की सलाह दी हाल ही में पिंकविला को दिए एक इंटरव्यू में अवनीत ने इन दावों को लेकर कहा कि वह ऐसे कमेंट्स पर ध्यान नहीं देतीं, लेकिन अगर लोग ऐसा सोच रहे हैं तो उन्हें अपने बचपन और वर्तमान की तस्वीरों की तुलना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे इंसान बड़ा होता है, उसके फीचर्स में बदलाव आना एक नार्मल प्रोसेस है। उन्होंने कहा कि हर कोई उम्र के साथ बदलता है और यह पूरी तरह नेचुरल है। एक्ट्रेस ने यह भी कहा कि उनकी नाक, आंखें और बाकी फीचर्स पहले जैसे ही हैं। उन्होंने अपने ब्यूटी मोल (तिल) का जिक्र करते हुए कहा कि वह आज भी वैसा ही है। अवनीत ने अपनी ब्यूटी का श्रेय अपनी मां को दिया और कहा कि जो भी है, वह उन्हें नेचुरली मिला है। वर्क फ्रंट की बात करें तो अवनीत आखिरी बार शांतनु माहेश्वरी के साथ फिल्म लव इन वियतनाम में नजर आई थीं। राहत शाह काजमी द्वारा निर्देशित यह फिल्म 12 सितंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, जिसमें अवनीत ने सिमी की भूमिका निभाई थी।
जबलपुर में गर्मी का प्रकोप:पारा 40 डिग्री के पार, लू जैसे हालात; अगले तीन दिन भी राहत नहीं

जबलपुर में इन दिनों तेज गर्मी का असर बना हुआ है। पिछले तीन दिनों से तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है और आने वाले दिनों में भी लोगों को राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर ही बना रहेगा। शहर में बीते तीन दिनों से मौसम पूरी तरह साफ और शुष्क बना हुआ है। इस दौरान अधिकतम तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 26 से 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण दिन के समय लू जैसे हालात महसूस किए जा रहे हैं। मौसम साफ रहने का अनुमान गुरुवार (16 अप्रैल) को भी मौसम साफ रहने का अनुमान है। अधिकतम तापमान 41 से 42 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। बारिश के कोई संकेत नहीं हैं और कम आर्द्रता के कारण गर्मी का असर और अधिक तीखा महसूस होगा। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले तीन दिनों तक तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा। प्रदेश सहित उत्तर भारत में गर्मी और लू की स्थिति बनने लगी है, जिससे तापमान में और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अप्रैल के मध्य में इस तरह की गर्मी सामान्य से अधिक है। दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और तेज धूप से बचाव के उपाय अपनाएं। फिलहाल जबलपुर में गर्मी से राहत के कोई संकेत नहीं हैं, ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
सेंसेक्स 550 अंक चढ़कर 78,600 पर कारोबार कर रहा:निफ्टी भी 150 बढ़कर 24,400 पर पहुंचा; आईटी, रियल्टी और फार्मा शेयरों में खरीदारी

आज यानी गुरुवार, 16 अप्रैल को सेंसेक्स 550 अंक (1.64%) की तेजी के साथ 78,600 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 150 अंकों (1.63%) की तेजी है, ये 24,400 के स्तर पर आ गया है। आज के कारोबार में आईटी, रियल्टी और फार्मा सेक्टर के शेयरों में खरीदारी है। एशियन मार्केट में तेजी 15 अप्रैल को अमेरिकी मार्केट में मिलाजुला कारोबार रहा सपोर्ट और रेजिस्टेंस सपोर्ट जोन: 23,940 | 23,850 | 23,462 | 23,330 | 22,857 सपोर्ट यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को नीचे गिरने से सहारा मिलता है। यहां खरीदारी बढ़ने से कीमत आसानी से नीचे नहीं जाती। यहां खरीदारी का मौका हो सकता है। रेजिस्टेंस जोन: 24,143 | 24,387 | 24,450 | 24,538 | 24,650 | 25,002 रेजिस्टेंस यानी, वह स्तर जहां शेयर या इंडेक्स को ऊपर जाने में रुकावट आती है। ऐसा बिकवाली बढ़ने से होता है। रजिस्टेंस जोन पार करने पर तेजी की उम्मीद रहती है। नोट: सपोर्ट और रेजिस्टेंस के लेवल्स वेल्थ व्यू एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार है। बुधवार को सेंसेक्स 1264 अंक चढ़कर बंद हुआ था शेयर बाजार में 15 अप्रैल को तेजी रही। सेंसेक्स 1264 अंक (1.64%) चढ़कर 78,111 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी भी 388 अंक (1.63%) बढ़कर 24,231 पर आ गया। कारोबार में ऑटो, आईटी, मेटल और रियल्टी के शेयरों में ज्यादा खरीदारी रही।
एमपी में मकान बनाना 35% तक महंगा:सीमेंट-ईंट, टाइल्स-सेनेटरी आइटम्स के रेट बढ़े, 1 हजार वर्गफीट पर मकान बनाने की लागत अब 16 लाख रुपए

ईरान-इजराइल और अमेरिका युद्ध का असर अब आम आदमी की रसोई तक सीमित नहीं रहा। यह घर के सपने पर भी भारी पड़ रहा है। युद्ध की वजह से मकान निर्माण सामग्री की कीमतों में आई तेजी ने मध्यम वर्ग की चिंता बढ़ा दी है। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि पेंट, टाइल्स, वायरिंग, बाथरूम फिटिंग, पाइप फिटिंग, सीमेंट और सरिया के दाम बढ़ चुके हैं। इससे एक हजार स्क्वायर फीट पर मकान बनाने की लागत औसतन 30 से 35 फीसदी बढ़ गई है। एक्सपर्ट के मुताबिक इसमें आगे भी बढ़ोतरी की आशंका है। इस केस स्टडी से समझिए मकान बनाने की लागत कैसे बढ़ी है… 1 हजार स्क्वायर फीट पर लागत 3.5 लाख रुपए बढ़ी इंदौर की एक निजी कंपनी के कर्मचारी रमेश कुमार ने पिछले साल 1000 वर्गफीट का घर बनाने की योजना बनाई थी। उस समय अनुमानित लागत 12.5 लाख रुपए थी। लेकिन निर्माण के आखिरी चरण तक पहुंचते-पहुंचते यह लागत बढ़कर 16 लाख रुपए से अधिक हो गई। यानी करीब 3.5 लाख रुपए का अतिरिक्त बोझ उन पर आ गया। अब जानिए किस सेक्टर पर क्या असर पड़ा 1.टाइल्स और सेनेटरी : मोरबी के प्लांट बंद, सप्लाई चेन टूटी देश की 80% टाइल्स सप्लाई करने वाले मोरबी (गुजरात) के लगभग 90% प्लांट बंद होने की कगार पर हैं। कच्चे माल की कमी और गैस की बढ़ती कीमतों ने उत्पादन ठप कर दिया है। इसका असर यह हुआ कि 2×4 साइज की टाइल्स, जो 32 रुपए में मिलती थी, अब 45 रुपए तक पहुंच गई है। टाइल्स एंड सेनेटरी वेयर व्यापारी एसोसिएशन के सचिव प्रेम माहेश्वरी के अनुसार यदि युद्ध जारी रहा तो अगले 15 दिनों में कीमतों में 20-30 पर्सेंट का और उछाल आ सकता है। ग्राहक को उपलब्ध स्टॉक में से ही चुनाव करना पड़ रहा है। 2. इलेक्ट्रिकल फिटिंग – कॉपर और एल्युमिनियम के दाम 35% बढ़े महारानी रोड ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र रामनानी के अनुसार कच्चे माल के संकट ने बिजली के सामान को 35% तक महंगा कर दिया है। एक एमएम वायर का बंडल 990 रुपए से बढ़कर 1560 रुपए हो गया है। पंखे, एलईडी और स्विच प्लेट्स की कीमतों में औसतन 400 से 500 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। रामनानी के मुताबिक जो काम पहले 10 लाख में हो रहा था, अब 15 लाख में हो रहा है। कॉपर और एल्युमिनियम में तेजी है। बाजार में कैश फ्लो की कमी है। आने वाले दिनों में दाम और बढ़ेंगे। 3. प्लंबरिंग और बाथरूम फिटिंग पर क्रूड ऑयल और ब्रास का असर पीवीसी का सीधा संबंध क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) से है। तेल महंगा होने से पाइप भी महंगा हुआ है। 350 रुपए वाला सीपीवीसी पाइप अब 490 रुपए में मिल रहा है। आयात रुकने से नल और डायवर्टर के दाम 25 से 40% बढ़ गए हैं। सेनेटरी एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सुनील गोयल के अनुसार बाथरूम फिटिंग ब्रास से बनती है और इसका कच्चा माल देश में सीमित है। युद्ध की वजह से ब्रास आयटमों में करीब 25 परसेंट रेट बढ़े हैं। पीवीसी पाइप-फिटिंग के रेट भी बढ़ गए हैं। 4. रंग रोगन करवाना भी हुआ महंगा इंदौर सियागंज के पेंट्स कारोबारी गुलाम अली के अनुसार कच्चे माल के रेट रोज बढ़ रहे हैं। कंपनी लेवल पर प्रीमियम सेगमेंट के प्रोडक्ट के रेट में करीब 50 रुपए प्रति लीटर बढ़ोतरी हुई है। रेट बढ़ने के साथ सप्लाई भी शॉर्ट है। सप्लाई पूरी नहीं हो पा रही है। आम आदमी की जेब पर ‘दोहरी मार’ सीमेंट पर जीएसटी का गणित भी ग्राहकों को परेशान कर रहा है। व्यापारियों के अनुसार जीएसटी 28% से घटकर 18% होने के बावजूद कीमतें फिर वहीं आ गई हैं। यानी टैक्स कम होने का लाभ महंगाई ने निगल लिया है। मकान बना रहे हैं तो 30 पर्सेंट का बफर लेकर चलें इंदौर के बाजारों में इस समय ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति है। बाजार में कैश फ्लो की कमी से व्यापारी परेशान हैं, और ग्राहक का होम लोन व बजट छोटे पड़ रहे हैं। मकान बनाने की योजना बना रहे लोग बजट में 30 पर्सेंट का ‘बफर’ लेकर चलें, वरना फिनिशिंग के वक्त काम रोकना पड़ सकता है।








