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छोड़िए चाय-कॉफी! घर पर बनाएं सफेद फूलों की हर्बल टी, सेहत सुधरेगी और तेजी से घटेगा वजन

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Last Updated:April 12, 2026, 13:35 IST Health News: पारिजात की चाय बनाना बहुत आसान है. इसके लिए 5-6 ताजे गिरे हुए फूल लें और उन्हें धोकर हल्के गर्म पानी में 9 से 10 मिनट तक उबाल लें. जब पानी का रंग बदल जाए, तो इसे छानकर कप में निकाल लें. सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र की वादियों में पाया जाने वाला पारिजात, जिसे हरसिंगार, सेहरुआ या रातरानी के नाम से भी जाना जाता है, इन दिनों अपनी औषधीय खूबियों के चलते चर्चा में है. अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर यह फूल अब सेहत के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं माना जा रहा. खासकर इसकी चाय को प्राकृतिक इलाज के रूप में अपनाया जा रहा है. आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में पारिजात को औषधीय गुणों का खजाना बताया गया है. आज जब लोग छोटी-छोटी बीमारियों के लिए दवाइयों पर निर्भर हो गए हैं, ऐसे में पारिजात की चाय एक सस्ता, सरल और असरदार विकल्प बनकर सामने आई है. यह फूल सफेद रंग का होता है, जिसकी डंडी नारंगी होती है. इसकी खासियत यह है कि यह रात में खिलता है और सुबह जमीन पर गिर जाता है, जिसे ग्रामीण लोग एकत्र कर उपयोग में लाते हैं. सीधी के आयुष अधिकारी डॉ नरेंद्र पटेल ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि पारिजात के फूलों से बनी चाय में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं. रोज सुबह खाली पेट इस चाय का सेवन करने से शरीर डिटॉक्स होता है और दिनभर ऊर्जा बनी रहती है. खास बात यह है कि इसमें दूध की जरूरत नहीं होती, जिससे यह लैक्टोज इन्टॉलरेंट लोगों के लिए भी बेहतर विकल्प बन जाती है. माइग्रेन से मिलेगी राहतपारिजात के फूलों की चाय कई सामान्य बीमारियों में भी कारगर मानी जा रही है. एसिडिटी, सर्दी-जुकाम, जोड़ों का दर्द, सिरदर्द और माइग्रेन जैसी समस्याओं में इससे राहत मिलती है. साथ ही यह मानसिक तनाव को कम करने और नींद की गुणवत्ता बेहतर करने में भी सहायक है. यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इसे प्राकृतिक टॉनिक के रूप में देखा जा रहा है और लोग इसे अपनी दिनचर्या में शामिल कर रहे हैं. पारिजात की चाय बनाना आसानपारिजात की चाय बनाना भी बेहद आसान है. इसके लिए 5-6 ताजे गिरे हुए फूल लें और उन्हें हल्के गर्म पानी में 9 से 10 मिनट तक उबालें. जब पानी का रंग बदल जाए, तो इसे छानकर कप में निकाल लें. स्वाद के लिए इसमें शहद या नींबू की कुछ बूंदें मिलाई जा सकती हैं लेकिन दूध और चीनी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए ताकि इसके औषधीय गुण बरकरार रहें. डॉक्टर या आयुर्वेदाचार्य से सलाहडॉ नरेंद्र पटेल ने कहा कि इस चाय का सेवन सुबह खाली पेट करना सबसे अधिक फायदेमंद होता है. हालांकि किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज या गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेदाचार्य से सलाह जरूर लेनी चाहिए. बदलती जीवनशैली के बीच पारिजात की चाय एक प्राकृतिक, सुरक्षित और प्रभावी विकल्प के रूप में उभर रही है, जो शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने में मददगार साबित हो सकती है. About the Author Rahul Singh राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sidhi,Madhya Pradesh First Published : April 12, 2026, 13:35 IST

उमरिया में मधुमक्खियों ने किसान पर किया हमला, मौत:खेत में गेहूं काटने के लिए गए थे बुजुर्ग, बोझा बांधते समय हादसा

उमरिया में मधुमक्खियों ने किसान पर किया हमला, मौत:खेत में गेहूं काटने के लिए गए थे बुजुर्ग, बोझा बांधते समय हादसा

उमरिया के इंदवार थाना क्षेत्र के पनपथा गांव में मधुमक्खियों के हमले से एक बुजुर्ग किसान की मौत हो गई। वे खेत में गेहूं कटाई का काम कर रहा था। मृतक की पहचान गोविंद जायसवाल (65) के रूप में हुई है। वे अपने घर से कुछ दूरी पर स्थित सोसायटी के पास खेत में गेहूं कटाई के बाद बोझा बांध रहे थे। मधुमक्खियों के हमले से किसान की हुई मौत इसी दौरान खेत के पास एक बरगद के पेड़ पर लगे मधुमक्खियों के बड़े छत्ते से अचानक झुंड बाहर निकला और गोविंद जायसवाल पर हमला कर दिया। मधुमक्खियों ने उनके पूरे शरीर को घेर लिया। मधुमक्खियों के लगातार डंक मारने से उनकी हालत बिगड़ गई और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना की जानकारी मिलने पर परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। ग्राम पंचायत पनपथा के सरपंच मूलचंद ने बताया कि यह हादसा गेहूं कटाई के बाद बोझा बांधते समय हुआ।

एफ-1 टीम मर्सिडीज के बॉस का फलसफा:प्यार करने के लिए कोई अपना हो, कोई सार्थक काम हो और पूरा करने के लिए सपना हो

एफ-1 टीम मर्सिडीज के बॉस का फलसफा:प्यार करने के लिए कोई अपना हो, कोई सार्थक काम हो और पूरा करने के लिए सपना हो

फॉर्मूला-1 की दुनिया में मर्सिडीज टीम के बॉस और सीईओ टोटो वोल्फ की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। 2014 से 2020 तक लगातार सात ड्राइवर्स चैम्पियनशिप जीतने वाली उनकी टीम 2026 में फिर टॉप पर है। सफलता के शिखर पर बैठे वोल्फ मानते हैं कि एक खुशहाल और संतुष्ट जीवन के लिए तीन चीजें सबसे ज्यादा जरूरी हैं- प्यार करने के लिए कोई अपना हो, करने के लिए कोई सार्थक काम हो और पूरा करने के लिए कोई सपना हो। खाली बैठना इंसान को नकारात्मकता की ओर ले जाता है और बिना सपनों के इंसान कितनी भी बड़ी कामयाबी हासिल कर ले, वह डिप्रेशन का शिकार हो सकता है। छह बिलियन डॉलर (लगभग 55 हजार करोड़ रुपए) का साम्राज्य चलाने वाले वोल्फ का मानना है कि फॉर्मूला वन सिर्फ मशीनों और डेटा का खेल नहीं है, बल्कि यह इंसानी जज्बातों से गहराई से जुड़ा है। उनका तर्क है कि फैसले डेटा नहीं, बल्कि इंसान लेते हैं। उनकी इस गहरी मानवीय सोच और मजबूत लीडरशिप के पीछे बचपन का कड़ा संघर्ष है। पिता की गंभीर बीमारी के बाद 8-9 साल की उम्र में ही उन पर छोटी बहन की जिम्मेदारी आ गई। आर्थिक तंगी के बावजूद परिवार ने उन्हें एक प्राइवेट स्कूल में भेजा था, लेकिन फीस न भर पाने के कारण अक्सर उन्हें और बहन को क्लास से बाहर कर दिया जाता था। उस दर्दनाक अपमान ने उनके अंदर खुद को साबित करने की एक जिद पैदा की। इसी संघर्ष ने उन्हें सिखाया कि अपने कर्मचारियों व परिवार को एक सुरक्षित माहौल कैसे देना है। वोल्फ खुद को माइक्रोमैनेजर कहते हैं, लेकिन उनका तरीका कर्मचारियों पर दबाव बनाने का नहीं है। माइक्रोमैनेजमेंट का मतलब हर काम खुद करना नहीं, बल्कि यह जानना है कि कंपनी के हर हिस्से में क्या चल रहा है। वे टीम को फैसले लेने की पूरी आजादी और गलतियों से सीखने का मौका देते हैं। वे उम्मीदवारों को उनकी तकनीकी काबलियत से ज्यादा ईमानदारी और विनम्रता के आधार पर चुनते हैं। हालांकि, वे ऑफिस पॉलिटिक्स बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करते। टीम के ड्राइवर्स को संभालने में भी वोल्फ काफी व्यावहारिक हैं। वे मानते हैं कि ड्राइवर्स पर बचपन से ही रेस जीतने का भारी दबाव होता है। जब अन्य टीमें युवा ड्राइवर्स को कुछ गलतियां करने पर ही बाहर का रास्ता दिखा देती हैं, तब वोल्फ ने 18 साल के किमी एंटोनेली पर भरोसा जताया। किमी इस साल नंबर-1 पर हैं। वोल्फ सख्त फैसले लेने से भी नहीं हिचकिचाते। वे कहते हैं कि ट्रैक पर जी-जान से रेस करो, लेकिन अपनी ही टीम के साथी की कार से मत टकराओ। 2016 में जब मर्सिडीज के लुईस हैमिल्टन और निको रोसबर्ग आपस में टकरा गए थे, तो वोल्फ ने उन्हें सस्पेंड करने का ईमेल भेज दिया था। उन्होंने दोनों को फटकार लगाते हुए कहा कि फैक्ट्री में काम करने वाले 2500 कर्मचारी का भविष्य तुम्हारे प्रदर्शन पर टिका है। ड्राइवर्स की आपसी दुश्मनी का खामियाजा कर्मचारी नहीं भुगत सकते। इस सख्त चेतावनी ने टीम का माहौल हमेशा के लिए बदल दिया।

क्या आप प्लास्टिक वाली अरहर दाल खा रहे हैं? घर पर 2 मिनट में करें वॉटर टेस्ट, तुरंत पकड़ी जाएगी मिलावट

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Last Updated:April 12, 2026, 12:02 IST Is Your Arhar Dal Safe: बाजार में मिलने वाली अरहर दाल में खतरनाक मिलावट हो रही है. दाल का रंग चटक करने के लिए इसमें मेटानिल येलो नामक केमिकल मिलाया जाता है, जो सेहत के लिए खतरनाक होता है. हालांकि घर पर पानी टेस्ट के जरिए मिलावट को आसानी से पहचान सकते हैं. इससे आपको पता लग जाएगा कि दाल में रंग मिलाया गया है या नहीं. अरहर दाल की मिलावट वॉटर टेस्ट से चेक की जा सकती है. How to Identify Fake Arhar Dal At Home: आजकल बाजार में मिलने वाली अधिकतर चीजों में भयंकर मिलावट हो रही है. दूध, दही, पनीर, फल, सब्जी से लेकर दालों में खतरनाक केमिकल्स मिलाए जा रहे हैं, जो सेहत के लिए जानलेवा हो सकता है. दालों में खतरनाक केमिकल्स और रंगों की मिलावट पाई जाती है. कई जगह आपने प्लास्टिक जैसी चमकदार अरहर दाल बिकते हुए देखी होगी, जो नेचुरल से काफी ज्यादा पीली होती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो जिस केमिकल से यह दाल पीली की जाती है, वह खाने लायक नहीं होता है और उसका इस्तेमाल कपड़ों और चमड़े की चीजों में किया जाता है. ऐसी दाल को खाने से पहले एक बार वॉटर टेस्ट जरूर करना चाहिए, ताकि पता चल सके कि दाल में मिलावट है या नहीं. अरहर दाल में कौन सा रंग मिलाया जाता है? एक्सपर्ट्स की मानें तो अरहर दाल को प्लास्टिक जैसा चमकदार बनाने के लिए इसमें मेटानिल येलो (Metanil Yellow) नामक सिंथेटिक केमिकल मिलाया जाता है. इसका उपयोग आमतौर पर कपड़ा और चमड़ा इंडस्ट्री में किया जाता है. यह केमिकल खाने लायक नहीं होता है, लेकिन फिर भी इसे दाल, हल्दी और अन्य खाद्य पदार्थों में चमक बढ़ाने के लिए मिलाया जाता है. यह शरीर के लिए बेहद हानिकारक हो सकता है और लंबे समय तक सेवन करने पर लिवर, किडनी और पाचन तंत्र पर बुरा असर डाल सकता है. इसका ज्यादा सेवन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को भी बढ़ा सकता है. दाल में रंग की मिलावट कैसे पहचानें? दाल में मिलावट पहचानने का सबसे आसान तरीका वॉटर टेस्ट है. आप घर पर इस आसान तरीके से दाल में रंग की मिलावट पहचान सकते हैं. इसके लिए एक गिलास पानी लें और उसमें कुछ मिनट के लिए अरहर दाल डालें. अगर दाल में कोई कृत्रिम रंग मिला होगा, तो पानी का रंग पीला या हल्का बदरंग हो जाएगा. असली और बिना मिलावट वाली दाल पानी में सामान्य रहेगी और उसका रंग नहीं छोड़ेगी. यह आसान टेस्ट घर पर ही 2 मिनट में मिलावट पकड़ने में मदद कर सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. मिलावटी दाल खाने से क्या नुकसान हैं? मिलावटी दाल का नियमित सेवन शरीर के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है. इससे पेट दर्द, उल्टी, गैस और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं. लंबे समय तक मेटानिल येलो जैसे केमिकल्स का सेवन लवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है. बच्चों और बुजुर्गों में इसका असर और भी गंभीर हो सकता है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है. यह मिलावट आम लोगों की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ है. दाल खरीदते वक्त जरूर बरतें ये सावधानी दाल खरीदते समय हमेशा भरोसेमंद दुकान से ही खरीदें. बहुत ज्यादा चमकदार या असामान्य रूप से पीली दाल से बचें. पैकेज्ड दाल पर FSSAI मार्क जरूर देखें. साथ ही, घर पर पानी परीक्षण जैसे सरल तरीकों से समय-समय पर मिलावट की जांच करते रहें. थोड़ी सावधानी आपकी सेहत को बड़े खतरे से बचा सकती है. खाने-पीने की चीजों में मिलावट एक गंभीर समस्या है, जो हमारी सेहत को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकती है. चमकदार दाल दिखने में भले ही अच्छी लगे, लेकिन इसके पीछे छिपे खतरनाक केमिकल्स शरीर के लिए हानिकारक हो सकते हैं. इसलिए जागरुक रहें और सतर्क रहें. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 12, 2026, 12:02 IST

15 किसानों को 40 लाख की चपत लगाकर व्यापारी फरार:MSP से ज्यादा दाम का लालच; 1 महीने की उधारी पर गेहूं-चना खरीदकर परिवार समेत भागा

15 किसानों को 40 लाख की चपत लगाकर व्यापारी फरार:MSP से ज्यादा दाम का लालच; 1 महीने की उधारी पर गेहूं-चना खरीदकर परिवार समेत भागा

पिपलोद थाना क्षेत्र के ग्राम जलकुआं (सिंगोट) में 15 किसानों को सरकारी खरीदी से ज्यादा भाव का लालच देकर 40 लाख रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। गांव का ही व्यापारी एक महीने की उधारी में किसानों से गेहूं और चना खरीदकर अपने परिवार समेत फरार हो गया है। वर्तमान में किसान दौलतसिंह राजपूत सहित अन्य किसानों की शिकायत पर पिपलोद पुलिस ने आरोपी व्यापारी शंकर बलाही के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और पिछले 21 दिनों से गायब आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। 40 लाख की उपज खरीदी, पिकअप-गाड़ियां लेकर फरार जलकुआं निवासी किसान दौलतसिंह ने बताया कि उन्होंने 80 क्विंटल चना और 90 क्विंटल गेहूं मंडी में बेचने की बजाय व्यापारी शंकर को बेचा था। शंकर ने सरकारी खरीदी से भी ज्यादा भाव लगाते हुए गेहूं 2700 रुपए और चना 6500 रुपए प्रति क्विंटल में खरीदा था। उपज का पैसा एक महीने के भीतर देने की बात तय हुई थी। दौलतसिंह के अलावा गांव के 15 अन्य किसानों ने भी शंकर को ही अपनी उपज बेची थी। सभी किसानों का कुल हिसाब-किताब करीब 40 लाख रुपए का है। उपज खरीदने के बाद आरोपी अपनी पिकअप गाड़ियां और परिवार लेकर गांव से गायब हो गया है। 3 साल से कर रहा था खरीदी, भरोसा जीतकर दिया धोखा किसानों ने बताया कि शंकर गांव का ही रहने वाला है, इसलिए उन्होंने उस पर भरोसा किया। गांव में शंकर की किराना व साड़ी की दुकान है और उसके पास पिकअप गाड़ियां हैं। वह पिछले 3 सालों से अनाज खरीदी का काम करता आ रहा था। पहले वह किसानों से एक महीने का वक्त लेता था और तय समय पर पूरा पैसा चुकता कर देता था, जिससे उस पर किसानों का भरोसा बढ़ गया था। इसी भरोसे का फायदा उठाते हुए उसने इस बार धोखा दिया। पिछले 21 दिनों से किसान शंकर की तलाश में जुटे थे, लेकिन कोई सुराग न मिलने पर अब उन्होंने पुलिस की शरण ली है।

दृ​ष्टिहीनों के साथ भारत घूमने वाले जर्नलिस्ट के अनुभव:नजारे नहीं, एहसास… देखने वालों के लिए सफर ‘फिल्म’ है, पर अंधेरों के लिए ‘खुलती किताब’

दृ​ष्टिहीनों के साथ भारत घूमने वाले जर्नलिस्ट के अनुभव:नजारे नहीं, एहसास... देखने वालों के लिए सफर ‘फिल्म’ है, पर अंधेरों के लिए ‘खुलती किताब’

‘हम में से ज्यादातर लोगों के लिए यात्रा का मतलब ‘नजारे देखना’ होता है। हम दर्शनीय स्थलों पर जाते हैं, तस्वीरें खींचते हैं और ऐसे होटल ढूंढ़ते हैं जहा‍ं से बाहर की खूबसूरती दिखे। लेकिन आपने कभी सोचा है कि दृष्टिहीन यात्री के लिए दुनिया कैसी होगी? इसी का जवाब खोजने के लिए मैं उत्तर भारत के ‘गोल्डन ट्रायंगल’ की 10 दिनों की यात्रा पर निकला। यह मौका ब्रिटिश कंपनी ट्रैवलआइज ने दिया था, जो सामान्य लोगों को दृ​​​ष्टिहीनों के साथ सफर की पहल करती है। सूर्योदय के समय मैं ल्यूक के साथ ताजमहल में था। उसका हाथ मेरी बांह पर था और सफेद छड़ी से वह जमीन को टटोल रहा था। जैसे ही आगे बढ़े, पैरों के नीचे का अहसास बदल गया- खुरदरे बलुआ पत्थर से ठंडे, चिकने संगमरमर तक। मैंने उसका हाथ दीवारों पर रखा, जहां उसकी अंगुलियां नक्काशी व कीमती पत्थरों को महसूस कर रही थीं। ल्यूक ने 18 साल की उम्र में बीमारी के कारण दृष्टि खो दी थी। उसने मुस्कुराते हुए कहा,‘मुझे कुछ बहुत भव्य और शानदार होने का अहसास हो रहा है।’ गुंबद के नीचे पर्यटकों की आवाजें मधुर गूंज में बदल गईं। ल्यूक ने सिर ऊपर उठाकर कहा,‘जैसे हम किसी बड़े स्पीकर के अंदर खड़े हों।’ उस पल मैंने भी आंखें बंद कीं और पहली बार उस शांति व गूंज को सुना, जिसे मैं अक्सर अनदेखा कर देता था। इस यात्रा का उद्देश्य दृश्य देखना नहीं, बल्कि ‘अनुभूति’ था। पुरानी दिल्ली की तंग गलियों में मेरा साथ डेनियल ने दिया। मसालों, डीजल की तेज गंध के बीच डेनियल ने बताया कि दृष्टिहीन आवाजों व हवा के बहाव से दुनिया का नक्शा बुनते हैं। जब एक इंद्रिय कम होती है, तो बाकी इंद्रियां उसकी भरपाई और तीव्रता से करने लगती हैं। यह अनुभव अद्भुत था, जहां अभाव ही दृष्टि बन गया। छोटी-छोटी चीजें शब्दों के जरिए स्मृति में बसने लगीं… सफर में मेरी अगली साथी सिएटल की कैंडी थीं। उन्हें नजारों से ज्यादा भारत को समझना पसंद था। मैंने उन्हें बताया कि सड़क किनारे नाई कैसे काम करते हैं, लोग फुटपाथ पर कैसे सोते हैं और दुकानों पर स्नैक्स कैसे सजे रहते हैं। इस दौरान मेरी अवलोकन क्षमता भी बढ़ी। मैंने घड़ी की दिशा से उन्हें थाली में रखे खाने की स्थिति समझाई। छोटी-छोटी चीजें अब शब्दों के जरिए स्मृति में बसने लगीं। रणथंभौर में बाघ नहीं दिखा, लेकिन कैंडी के लिए जंगल का अनुभव ही काफी था। बूंदी में आंखें बंद कर ऑटो की सवारी ने एहसास बदल दिया। इस पहल की शुरुआत अमर लतीफ ने की, जिन्होंने बताया- दृष्टिहीनों के लिए सफर किताब, और देखने वालों के लिए फिल्म जैसा होता है।

दिल्ली-यूपी में एक दिन बाद 40°C के पार जाएगा तापमान:हिमाचल के मनाली में बर्फबारी, पारा -3 डिग्री पहुंचा; जम्मू में बवंडर, लोगों में दहशत फैली

दिल्ली-यूपी में एक दिन बाद 40°C के पार जाएगा तापमान:हिमाचल के मनाली में बर्फबारी, पारा -3 डिग्री पहुंचा; जम्मू में बवंडर, लोगों में दहशत फैली

देशभर में गर्मी बढ़ रही है। मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान 6 से 8 डिग्री तक बढ़ सकता है। हालांकि, शनिवार शाम को अटल टनल और मनाली के आसपास के इलाकों में हल्की बर्फबारी हुई। शनिवार रात मनाली में तापमान -7 डिग्री तक गिर गया। वहीं, उत्तर प्रदेश में लखनऊ सहित कई जगहों पर रविवार को तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है। दिल्ली में शनिवार को अधिकतम तापमान 34.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले दिन से ज्यादा था। 15 अप्रैल को मध्य प्रदेश में नया सिस्टम एक्टिव होगा जिससे राज्य में गर्मी बढ़ेगी। शनिवार को राजधानी भोपाल में तापमान 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। राजस्थान के सीकर समेत शेखावाटी इलाके में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के असर से तापमान में गिरावट देखी जा रही थी, लेकिन रविवार के बाद से तापमान बढ़ने लगेगा। शनिवार शाम को जम्मू के अखनूर एक बवंडर देखा गया। अगले दो दिन के मौसम का हाल 13 अप्रैल: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल में तापमान बढ़ेगा। बिहार में भी गर्मी बढ़ी रहेगी, जबकि छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में हीटवेव चलने की संभावना है। ज्यादातर हिस्सों में मौसम साफ और गर्म रहेगा। 14 अप्रैलः उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत (जैसे दिल्ली और मध्य प्रदेश) में भीषण गर्मी रहेगी, तापमान 38° से 42° तक जा सकता है। वहीं, पूर्वोत्तर राज्यों और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश और तूफान की संभावना है।

100 की स्पीड में बस ने पिकअप को उड़ाया,13 मौतें:कटिहार में सड़क पर बिखरीं लाशें; बाइक सवार को रौंदकर भाग रहा था बस ड्राइवर

100 की स्पीड में बस ने पिकअप को उड़ाया,13 मौतें:कटिहार में सड़क पर बिखरीं लाशें; बाइक सवार को रौंदकर भाग रहा था बस ड्राइवर

बिहार के कटिहार में शनिवार देर शाम बस और पिकअप की टक्कर में 13 लोगों की मौत हो गई। इसमें एक ही परिवार के 5 लोग शामिल हैं। मृतकों में 10 महिलाएं, 2 पुरुष और एक बच्ची है। इसमें 11 मृतक पूर्णिया जिले के रहने वाले थे, जबकि दो कटिहार के हैं। हादसे में 32 से ज्यादा घायल हैं। इनमें 8 की हालत गंभीर बनी हुई है। हादसा कटिहार के कोढ़ा ब्लॉक में NH-31 पर हुआ। बस से टक्कर के बाद लोगों के शव सड़क पर बिखर गए। चश्मदीद ने बताया कि हादसे के वक्त ड्राइवर ने शराब पी रखी थी। गाड़ी की स्पीड भी 100 से ज्यादा थी। बस ड्राइवर ने पहले एक बाइक को उड़ाया इसके बाद पिकअप से टक्कर हुई। पिकअप सवार सभी झारखंड से मेला देखकर लौट रहे थे। हादसे के बाद CM ने मृतकों के परिवार को 2-2 लाख और घायलों को 50-50 हजार की मदद का ऐलान किया है। अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए पूरा घटनाक्रम… अब हादसे की 5 तस्वीरें देखिए… पहले बाइक को उड़ाया फिर पिकअप से टक्कर हुई प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, ‘शनिवार देर शाम हम कटिहार के आसपास थे। अचानक से तेज आवाज आई, जैसे बम फटा हो। कुछ भी समझ नहीं आया। सड़क पर लाशें बिछ गईं। हमारे पिकअप का ड्राइवर स्टीयरिंग में फंस गया। लोगों ने रॉड से स्टीयरिंग सीधी कर उसके शव को बाहर निकाला। बस की स्पीड 100 से ज्यादा थी। उसने पहले 2 बाइक सवारों को टक्कर मारी। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद अनियंत्रित होकर हमारी पिकअप से टकरा गया। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक इलाज के बाद गंभीर घायलों को बेहतर इलाज के लिए पूर्णिया जीएमसी रेफर किया गया, जहां कई की हालत नाजुक बनी हुई है। सूचना मिलते ही कोढ़ा थाना पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचा। रेस्क्यू शुरू किया गया। क्रेन से गाड़ियों को हटाकर सड़क पर जाम खत्म कराया गया।’ अब चश्मदीदों से जानिए हादसा कैसे हुआ शादी के लिए लड़की देखने आए थे दोनों हादसे के वक्त मौके पर मौजूद इतबारी बासुकी ने बताया, ‘बाइक सवार सदानन अपने बेटे के लिए लड़की देखने गए थे। वो पूर्णिया के बड़हरा कोठी से लौट रहे थे। इसी दौरान ये हादसा हो गया। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। बस ने उन्हें बहुत बुरी तरह से कुचला। दोनों को कुचलने के बाद ड्राइवर ने पिकअप में टक्कर मार दी। टक्कर होते ही लाशें सड़क पर बिछ गईं।’ तेज आवाज हुई और सभी लोग एक दूसरे पर चढ़ गए हादसे में घायल ताला हांसदा ने बताया, ‘हमलोग झारखंड से धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होकर पूर्णिया अपने घर लौट रहे थे। साथ में बेटा, बहू और पोता-पोती भी थे। कुछ देर में ही हमलोग घर पहुंचने वाले थे। इसी दौरान गेड़ाबारी के पास अचानक तेज आवाज हुई। सभी लोग एक दूसरे पर चढ़ गए। पिकअप पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। सामने देखा कि बस ने जोरदार टक्कर मारी है। हादसे में मेरे बेटे और बहू की मौत हो गई। मुझे सिर में चोट लगी है। मैं ही सभी लोगों लेकर गया था।’ 40 से 50 सेकेंड में सब हो गया स्थानीय लोगों ने बताया कि पिकअप में करीब 22 से 25 लोग सवार थे। ये लोग झारखंड से कठिया मेला धाम घूम कर लौट रहे थे। कुछ लोग बाइक से बरहरा कोठी से लौट रहे थे। इसी दौरान बस की चपेट में आने से बाइक सवार सदानंद मुर्मू उर्फ राजेश (40) की मौके पर मौत हो गई। इसके बाद बस का ड्राइवर भागने लगा। उसने स्पीड और बढ़ा ली। सामने से पिकअप आ रही थी। बस ने उसमें टक्कर मार दी। 40 से 50 सेकेंड में ये सब हो गया। इसके पहले वहां सब शांत था। हादसे के बाद लोगों की चीख गूंजने लगी। अब समझिए मौके के हालात कैसे थे टक्कर के बाद बस के नीचे दब गए लोग सड़क के बीचों-बीच बस और पिकअप दोनों गाड़ियां इस तरह टकराई थीं कि पहचानना मुश्किल हो रहा था कि कौन सा हिस्सा किस गाड़ी का है। चारों तरफ चीख-पुकार मची थी। कुछ लोग सड़क पर पड़े तड़प रहे थे, तो कुछ गाड़ियों के बीच फंसे हुए थे। एक व्यक्ति का हाथ बस के नीचे दबा हुआ था, तो किसी का पैर बुरी तरह कुचल गया था। कई लोग खून से लथपथ सड़क पर पड़े मदद के लिए कराह रहे थे। बस का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया था। शीशे के टुकड़े, लोहे के मुड़े हुए हिस्से और टूटे सामान सड़क पर बिखरे पड़े थे। पिकअप तो पूरी तरह मलबे में बदल गया था। उसके अंदर फंसे लोगों को निकालने के लिए स्थानीय लोग और पुलिस मिलकर कोशिश कर रहे थे। कुछ शव गाड़ियों के बीच बुरी तरह फंसे थे, जिन्हें निकालना बेहद मुश्किल हो रहा था। पिकअप की बॉडी काटकर लोगों को बाहर निकाला गया। वहीं, बस ड्राइवर भी अगले हिस्से में दब गया था, जिसे रॉड की मदद से निकाला गया। मौके पर मौजूद लोग घायलों को बाहर खींच रहे थे। बस और पिकअप के लोग अपने परिजनों को पहचानने की कोशिश में रो रहे थे। जिस बस से हादसा, वह 5 साल से अनफिट जिस बस (BR34G0110) की टक्कर से ये हादसा हुआ, वह बस अनफिट थी। बस का रजिस्ट्रेशन खगड़िया जिला से है, जिसे बंगाल में चलाने की अनुमति है। यह 36 सीटर बस (अशोक लीलैंड) पिछले कई सालों से पूरी तरह अवैध रूप से सड़कों पर दौड़ रही थी। यात्री बस का फिटनेस सर्टिफिकेट 19 जून 2021 को ही समाप्त हो चुका है, यानी ये बस सड़क पर चलने के लायक ही नहीं थी। इसके अलावा, बस का इंश्योरेंस 31 जनवरी 2022 और प्रदूषण प्रमाणपत्र 3 सितंबर 2021 से एक्सपायर है। हादसे में इन लोगों की मौत हुई है SP बोले- एक्सीडेंटल FIR दर्ज होगी

ग्वालियर में युवक पर जानलेवा हमला, हालत गंभीर:दोस्तों ने विवाद के बाद मारा चाकू, लिवर में फंसा, जयपुर रेफर

ग्वालियर में युवक पर जानलेवा हमला, हालत गंभीर:दोस्तों ने विवाद के बाद मारा चाकू, लिवर में फंसा, जयपुर रेफर

ग्वालियर में एक युवक पर उसके ही दोस्तों ने चाकू से कातिलाना हमला कर दिया। तीनों दोस्त साथ बैठे थे, तभी किसी बात को लेकर मुंहवाद हो गया और विवाद बढ़ने पर दो दोस्तों ने मिलकर युवक पर चाकू से हमला कर दिया। चाकू युवक के लिवर में जा फंसा, जिससे उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। घटना माधौगंज थाना क्षेत्र के लक्कड़खाना इलाके की है। जानकारी के अनुसार लक्कड़खाना निवासी आशीष खटीक अपने दोस्तों अंशु शाक्य और रमन वाल्मीकि के साथ शनिवार को बैठा था। इसी दौरान पुराने विवाद को लेकर कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते अंशु और रमन ने चाकू निकालकर आशीष पर हमला कर दिया। चाकू सीने और पेट के बीच में लगते हुए लिवर में जा फंसा। हमले के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए, जबकि आशीष वहीं घायल होकर गिर पड़ा। स्थानीय लोगों की मदद से परिजन घायल को अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन हालत गंभीर होने पर उसे जयपुर के एक निजी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। परिजन एंबुलेंस से उसे इलाज के लिए जयपुर ले गए हैं। घटना की सूचना मिलते ही माधौगंज थाना प्रभारी दिव्या तिवारी ने जांच शुरू कर दी है। घायल और परिजन के शहर से बाहर होने के कारण फिलहाल मामला दर्ज नहीं हो सका है। पुलिस का कहना है कि परिजनों के लौटते ही बयान लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ग्वालियर में युवक पर जानलेवा हमला, हालत गंभीर:दोस्तों ने विवाद के बाद मारा चाकू, लिवर में फंसा, जयपुर रेफर

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ग्वालियर में एक युवक पर उसके ही दोस्तों ने चाकू से कातिलाना हमला कर दिया। तीनों दोस्त साथ बैठे थे, तभी किसी बात को लेकर मुंहवाद हो गया और विवाद बढ़ने पर दो दोस्तों ने मिलकर युवक पर चाकू से हमला कर दिया। चाकू युवक के लिवर में जा फंसा, जिससे उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। घटना माधौगंज थाना क्षेत्र के लक्कड़खाना इलाके की है। जानकारी के अनुसार लक्कड़खाना निवासी आशीष खटीक अपने दोस्तों अंशु शाक्य और रमन वाल्मीकि के साथ शनिवार को बैठा था। इसी दौरान पुराने विवाद को लेकर कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते अंशु और रमन ने चाकू निकालकर आशीष पर हमला कर दिया। चाकू सीने और पेट के बीच में लगते हुए लिवर में जा फंसा। हमले के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए, जबकि आशीष वहीं घायल होकर गिर पड़ा। स्थानीय लोगों की मदद से परिजन घायल को अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन हालत गंभीर होने पर उसे जयपुर के एक निजी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। परिजन एंबुलेंस से उसे इलाज के लिए जयपुर ले गए हैं। घटना की सूचना मिलते ही माधौगंज थाना प्रभारी दिव्या तिवारी ने जांच शुरू कर दी है। घायल और परिजन के शहर से बाहर होने के कारण फिलहाल मामला दर्ज नहीं हो सका है। पुलिस का कहना है कि परिजनों के लौटते ही बयान लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।