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एफ-1 टीम मर्सिडीज के बॉस का फलसफा:प्यार करने के लिए कोई अपना हो, कोई सार्थक काम हो और पूरा करने के लिए सपना हो

एफ-1 टीम मर्सिडीज के बॉस का फलसफा:प्यार करने के लिए कोई अपना हो, कोई सार्थक काम हो और पूरा करने के लिए सपना हो

फॉर्मूला-1 की दुनिया में मर्सिडीज टीम के बॉस और सीईओ टोटो वोल्फ की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। 2014 से 2020 तक लगातार सात ड्राइवर्स चैम्पियनशिप जीतने वाली उनकी टीम 2026 में फिर टॉप पर है। सफलता के शिखर पर बैठे वोल्फ मानते हैं कि एक खुशहाल और संतुष्ट जीवन के लिए तीन चीजें सबसे ज्यादा जरूरी हैं- प्यार करने के लिए कोई अपना हो, करने के लिए कोई सार्थक काम हो और पूरा करने के लिए कोई सपना हो। खाली बैठना इंसान को नकारात्मकता की ओर ले जाता है और बिना सपनों के इंसान कितनी भी बड़ी कामयाबी हासिल कर ले, वह डिप्रेशन का शिकार हो सकता है। छह बिलियन डॉलर (लगभग 55 हजार करोड़ रुपए) का साम्राज्य चलाने वाले वोल्फ का मानना है कि फॉर्मूला वन सिर्फ मशीनों और डेटा का खेल नहीं है, बल्कि यह इंसानी जज्बातों से गहराई से जुड़ा है। उनका तर्क है कि फैसले डेटा नहीं, बल्कि इंसान लेते हैं। उनकी इस गहरी मानवीय सोच और मजबूत लीडरशिप के पीछे बचपन का कड़ा संघर्ष है। पिता की गंभीर बीमारी के बाद 8-9 साल की उम्र में ही उन पर छोटी बहन की जिम्मेदारी आ गई। आर्थिक तंगी के बावजूद परिवार ने उन्हें एक प्राइवेट स्कूल में भेजा था, लेकिन फीस न भर पाने के कारण अक्सर उन्हें और बहन को क्लास से बाहर कर दिया जाता था। उस दर्दनाक अपमान ने उनके अंदर खुद को साबित करने की एक जिद पैदा की। इसी संघर्ष ने उन्हें सिखाया कि अपने कर्मचारियों व परिवार को एक सुरक्षित माहौल कैसे देना है। वोल्फ खुद को माइक्रोमैनेजर कहते हैं, लेकिन उनका तरीका कर्मचारियों पर दबाव बनाने का नहीं है। माइक्रोमैनेजमेंट का मतलब हर काम खुद करना नहीं, बल्कि यह जानना है कि कंपनी के हर हिस्से में क्या चल रहा है। वे टीम को फैसले लेने की पूरी आजादी और गलतियों से सीखने का मौका देते हैं। वे उम्मीदवारों को उनकी तकनीकी काबलियत से ज्यादा ईमानदारी और विनम्रता के आधार पर चुनते हैं। हालांकि, वे ऑफिस पॉलिटिक्स बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करते। टीम के ड्राइवर्स को संभालने में भी वोल्फ काफी व्यावहारिक हैं। वे मानते हैं कि ड्राइवर्स पर बचपन से ही रेस जीतने का भारी दबाव होता है। जब अन्य टीमें युवा ड्राइवर्स को कुछ गलतियां करने पर ही बाहर का रास्ता दिखा देती हैं, तब वोल्फ ने 18 साल के किमी एंटोनेली पर भरोसा जताया। किमी इस साल नंबर-1 पर हैं। वोल्फ सख्त फैसले लेने से भी नहीं हिचकिचाते। वे कहते हैं कि ट्रैक पर जी-जान से रेस करो, लेकिन अपनी ही टीम के साथी की कार से मत टकराओ। 2016 में जब मर्सिडीज के लुईस हैमिल्टन और निको रोसबर्ग आपस में टकरा गए थे, तो वोल्फ ने उन्हें सस्पेंड करने का ईमेल भेज दिया था। उन्होंने दोनों को फटकार लगाते हुए कहा कि फैक्ट्री में काम करने वाले 2500 कर्मचारी का भविष्य तुम्हारे प्रदर्शन पर टिका है। ड्राइवर्स की आपसी दुश्मनी का खामियाजा कर्मचारी नहीं भुगत सकते। इस सख्त चेतावनी ने टीम का माहौल हमेशा के लिए बदल दिया।

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एफ-1 टीम मर्सिडीज के बॉस का फलसफा:प्यार करने के लिए कोई अपना हो, कोई सार्थक काम हो और पूरा करने के लिए सपना हो

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फॉर्मूला-1 की दुनिया में मर्सिडीज टीम के बॉस और सीईओ टोटो वोल्फ की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। 2014 से 2020 तक लगातार सात ड्राइवर्स चैम्पियनशिप जीतने वाली उनकी टीम 2026 में फिर टॉप पर है। सफलता के शिखर पर बैठे वोल्फ मानते हैं कि एक खुशहाल और संतुष्ट जीवन के लिए तीन चीजें सबसे ज्यादा जरूरी हैं- प्यार करने के लिए कोई अपना हो, करने के लिए कोई सार्थक काम हो और पूरा करने के लिए कोई सपना हो। खाली बैठना इंसान को नकारात्मकता की ओर ले जाता है और बिना सपनों के इंसान कितनी भी बड़ी कामयाबी हासिल कर ले, वह डिप्रेशन का शिकार हो सकता है। छह बिलियन डॉलर (लगभग 55 हजार करोड़ रुपए) का साम्राज्य चलाने वाले वोल्फ का मानना है कि फॉर्मूला वन सिर्फ मशीनों और डेटा का खेल नहीं है, बल्कि यह इंसानी जज्बातों से गहराई से जुड़ा है। उनका तर्क है कि फैसले डेटा नहीं, बल्कि इंसान लेते हैं। उनकी इस गहरी मानवीय सोच और मजबूत लीडरशिप के पीछे बचपन का कड़ा संघर्ष है। पिता की गंभीर बीमारी के बाद 8-9 साल की उम्र में ही उन पर छोटी बहन की जिम्मेदारी आ गई। आर्थिक तंगी के बावजूद परिवार ने उन्हें एक प्राइवेट स्कूल में भेजा था, लेकिन फीस न भर पाने के कारण अक्सर उन्हें और बहन को क्लास से बाहर कर दिया जाता था। उस दर्दनाक अपमान ने उनके अंदर खुद को साबित करने की एक जिद पैदा की। इसी संघर्ष ने उन्हें सिखाया कि अपने कर्मचारियों व परिवार को एक सुरक्षित माहौल कैसे देना है। वोल्फ खुद को माइक्रोमैनेजर कहते हैं, लेकिन उनका तरीका कर्मचारियों पर दबाव बनाने का नहीं है। माइक्रोमैनेजमेंट का मतलब हर काम खुद करना नहीं, बल्कि यह जानना है कि कंपनी के हर हिस्से में क्या चल रहा है। वे टीम को फैसले लेने की पूरी आजादी और गलतियों से सीखने का मौका देते हैं। वे उम्मीदवारों को उनकी तकनीकी काबलियत से ज्यादा ईमानदारी और विनम्रता के आधार पर चुनते हैं। हालांकि, वे ऑफिस पॉलिटिक्स बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करते। टीम के ड्राइवर्स को संभालने में भी वोल्फ काफी व्यावहारिक हैं। वे मानते हैं कि ड्राइवर्स पर बचपन से ही रेस जीतने का भारी दबाव होता है। जब अन्य टीमें युवा ड्राइवर्स को कुछ गलतियां करने पर ही बाहर का रास्ता दिखा देती हैं, तब वोल्फ ने 18 साल के किमी एंटोनेली पर भरोसा जताया। किमी इस साल नंबर-1 पर हैं। वोल्फ सख्त फैसले लेने से भी नहीं हिचकिचाते। वे कहते हैं कि ट्रैक पर जी-जान से रेस करो, लेकिन अपनी ही टीम के साथी की कार से मत टकराओ। 2016 में जब मर्सिडीज के लुईस हैमिल्टन और निको रोसबर्ग आपस में टकरा गए थे, तो वोल्फ ने उन्हें सस्पेंड करने का ईमेल भेज दिया था। उन्होंने दोनों को फटकार लगाते हुए कहा कि फैक्ट्री में काम करने वाले 2500 कर्मचारी का भविष्य तुम्हारे प्रदर्शन पर टिका है। ड्राइवर्स की आपसी दुश्मनी का खामियाजा कर्मचारी नहीं भुगत सकते। इस सख्त चेतावनी ने टीम का माहौल हमेशा के लिए बदल दिया।

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