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विधानसभा चुनाव 2026: केरल में सत्ता परिवर्तन के संकेत! एक और प्री पोल सर्वे में एलडीएफ पिछड़ गया, यूडीएफ को बढ़त, एनडीए लगभग साफ?

विधानसभा चुनाव 2026: केरल में सत्ता परिवर्तन के संकेत! एक और प्री पोल सर्वे में एलडीएफ पिछड़ गया, यूडीएफ को बढ़त, एनडीए लगभग साफ?

केरल की राजनीति में बड़ा उलटफेर होता दिख रहा है। कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) विधानसभा चुनाव में प्रचंड की जीत पर भारी नजर है। पोल मंत्रा साइंटिफिक रिपोर्ट के ताजा सर्वेक्षण के अनुसार, 140 के बड़े पैमाने पर आंकड़े यूडीएफ को 88-92 मंजिल मिल सकते हैं, यानी 70 के बहुमत आंकड़े आराम से पार करने की स्थिति में हैं। यह सिर्फ जीत का अनुमान नहीं है, बल्कि सत्ता परिवर्तन का साफ संकेत हैपोल मंत्रा एजेंसी रिपोर्ट के अनुसार, सचिवालय लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) को 42-46 मताधिकार का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह गिरावट उनके पारंपरिक गढ़ों में भी दिखाई दे रही है। वहीं एनडीए की स्थिति और कमजोर दिख रही है, जिसमें सिर्फ 0-2 दर्शकों की मुलाकात का अनुमान है। सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि, यह “एकतरफा वोट परिणाम” हो सकता है, जो कि एलजीबीटी का खेल नहीं बल्कि “वोटर शिफ्ट” का परिणाम है। साफ है कि इस बार वर्कशॉप हवा बदल गई है और इसकी सबसे बड़ी वजह एंटी-इंकंबेंसी कानून जारी है। 10 साल की छूटेगी सरकार!पोल मंत्रा साइंटिफिक रिपोर्ट के सर्वे के अनुसार अगर पुस्तकालय के मूड को स्वीकारा जाए तो तस्वीर और साफ हो जाती है। “परिवर्तन की इच्छा” 22.8% के साथ सबसे बड़ा अवतार उभर कर सामने आया है। इसके बाद कल्याण सूची (17.6%), अलगाव (16.2%) और नेतृत्व (14.6%) आते हैं। यानी जनता अब सिर्फ परिभाषा से नहीं, बल्कि बदलाव और बेहतर नेतृत्व की तलाश में है। मत प्रतिशत के आंकड़े भी इसी कहानी को मजबूत बनाते हैं। यूडीएफ को 41.5% वोट शेयर के साथ 8% से ज्यादा बढ़त दिख रही है, जबकि एलडीएफ को 33.4% वोट मिले हैं। एनडीए को 17.2% और अन्य को 2.3% वोट मिलने का अनुमान है। केवल 5.6% कलाकार ही अभी अनिर्णित हैं—जो एक स्थिर और स्पष्ट जनमत की ओर इशारा करते हैं। कौन बनेगा मुख्यमंत्रीमुख्यमंत्री की बात करें तो वीडियो देखें मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन 21.3% के साथ आगे हैं, जबकि स्थिर मुख्यमंत्री पिनाराई विजय 18.5% पर हैं। रमेश चेन्निथला (17.2%) और केसी वेणुगोपाल (15.1%) भी दौड़ में बने हुए हैं। इस चुनाव में असली मुद्दे भी साफ हैं. बैक्टीरिया और जीवनयापन की लागत 24.5% के साथ सबसे बड़ी लागत है। नौकरीपेशा और बेरोजगारों का पलायन 20.2% है। यानी करीब 45% मतदाता सीधे आर्थिक दबाव से प्रभावित हैं। लाभ, स्वास्थ्य सेवाएँ और क़ानून-व्यवस्था भी अहम मुद्दे बने हुए हैं। अगर रीजनल तौर पर देखें तो यूडीएफ हर इलाके में बढ़त बनाए हुए है। मालाबार के 60 में से यूडीएफ में 41-43 में बढ़त हो सकती है, जबकि एलडीएफ में 15-17 में बढ़त हो सकती है। मध्य केरल के 41 में यूडीएफ को 25-26 और एलडीएफ को 12-13 में प्रवेश का अनुमान है। ट्रैवेनकोर में मुकाबला थोड़ा कठिन जरूर है, लेकिन यहां भी यूडीएफ 22-23 के साथ आगे बढ़ रहा है।

घर पर ऐसे बनाएं पुदीना की चटनी, सेहत के साथ-साथ स्वाद में भी लाजवाब! – News18 हिंदी

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X घर पर ऐसे बनाएं पुदीना की चटनी, सेहत के साथ-साथ स्वाद में भी लाजवाब!   पुदीना चटनी रेसिपी (Pudina Chutney Recipe): विंध्य क्षेत्र के पारंपरिक व्यंजनों में पुदीने की चटनी का अपना एक अलग स्थान है. यह चटनी खासतौर पर गर्मी के मौसम में खाई जाती है, क्योंकि यह शरीर को ठंडक और भरपूर ऊर्जा देती है. सादा खाना भी इस चटनी के साथ और ज्यादा खास बन जाता है. आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह ने लोकल 18 को बताया कि पुदीने की चटनी स्वादिष्ट होने के साथ-साथ कई स्वास्थ्य लाभ भी देती है. गर्मी के दिनों में यह शरीर को ठंडक पहुंचाने का काम करती है. इसलिए लोग इसे अपने रोजमर्रा के भोजन में शामिल करते हैं. उन्होंने बताया कि चटनी को मिक्सर में आसानी से बनाया जा सकता है, लेकिन अगर इसे पारंपरिक तरीके से सिलबट्टे पर पीसा जाए तो इसका स्वाद और भी ज्यादा बढ़ जाता है. पुदीना पाचन तंत्र को मजबूत करता है और गैस, अपच, एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है. इसके अलावा यह मुंह की बदबू दूर करने, तनाव कम करने और त्वचा संबंधी दिक्कतों को कम करने में भी सहायक है.

क्या पहाड़ों पर घूमने से टेंशन दूर हो जाती है? मेंटल हेल्थ सुधारने के लिए क्या करें, एक्सपर्ट से जानिए टिप्स

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Last Updated:April 07, 2026, 12:55 IST Benefits of Mountain Travel: पहाड़ों पर घूमना और ट्रेकिंग मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद हैं. प्राकृतिक वातावरण, ठंडी हवा, हरियाली और शारीरिक गतिविधि से तनाव कम होता है, मूड बेहतर होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है. साथ ही योग, ध्यान और सामाजिक जुड़ाव भी मानसिक स्वास्थ्य सुधारने में मदद करते हैं. नेचर के साथ वक्त बिताने से तनाव कम हो सकता है. How Hills Improve Mental Health: आज के जमाने में स्ट्रेस की समस्या हर किसी को परेशान कर रही है. बच्चों पर पढ़ाई का दबाव है, युवाओं पर नौकरी का दबाव है, मिडिल एज के लोगों पर जिम्मेदारियों का बोझ है और बुजुर्ग सेहत से जुड़ी समस्याओं से परेशान हैं. प्रोफेशनल लाइफ से लेकर पर्सनल लाइफ में लोगों को अत्यधिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है. लगातार तनाव न केवल हमारी इमोशनल हेल्थ को प्रभावित करता है, बल्कि शरीर पर भी बुरा असर पड़ता है. ऐसे में तनाव कम करने और मेंटल हेल्थ सुधारने के लिए लोग पहाड़ों पर जा रहे हैं. एक्सपर्ट भी ऐसी जगहों पर जाने की सलाह देते हैं. नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की साइकेट्री डिपार्टमेंट की प्रोफेसर डॉ. प्रेरणा कुकरेती ने News18 को बताया कि पहाड़ों पर यात्रा करना या ट्रेकिंग करना मेंटल हेल्थ के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. ठंडी हवा, हरियाली, शांत वातावरण और प्राकृतिक दृश्यों को देखकर ब्रेन में सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे हैप्पी हार्मोन बढ़ जाते हैं. इससे मन को सुकून मिलता है और तनाव कम होता है. पहाड़ों में समय बिताने से डिप्रेशन और एंजायटी के लक्षण भी घट सकते हैं. पहाड़ों में लंबी सैर, झरनों के पास समय बिताना या सिर्फ शांत जगह पर बैठना मन को वर्तमान में रहने की कला सिखाता है. इसे माइंडफुलनेस कहा जाता है. जब हम प्रकृति के साथ वक्त बिताते हैं, तो हमारी नेगेटिव सोच कम होती है और मेंटल क्लैरिटी बढ़ती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. साइकेट्रिस्ट ने बताया कि ट्रेकिंग, हाइकिंग या पहाड़ों पर चलना सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है. यह शरीर में एंडॉर्फिन रिलीज करता है, जो प्राकृतिक रूप से दर्द और तनाव को कम करता है. नियमित शारीरिक गतिविधियां नींद सुधारने, मूड बेहतर करने और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करती हैं. अपने जीवन में छोटे छोटे कदम उठाएं, प्रकृति के करीब रहें और मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाएं. हालांकि पहाड़ों पर जाना हर किसी के लिए हर समय संभव नहीं होता, इसलिए मानसिक स्वास्थ्य सुधारने के कुछ अन्य तरीके भी हैं, जिन्हें आप रोज फॉलो कर सकते हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक अगर आप बाहर घूमने नहीं जा पा रहे हैं, तो स्ट्रेस कम करने के लिए रोज योग और प्राणायाम का अभ्यास करें. डीप ब्रीदिंग टेक्निक तनाव कम करने में बेहद असरदार है. रोज 10 से 20 मिनट मेडिटेशन करने से मेंटल स्टेबिलिटी बढ़ती है. पसंदीदा म्यूजिक सुनने या क्रिएटिव एक्टिविटी से ब्रेन को सुकून मिलता है और स्ट्रेस कम होता है. परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने से भी तनाव कम होता है. इसके अलावा पर्याप्त नींद, अच्छी लाइफस्टाइल और हेल्दी खान-पान से भी स्ट्रेस कम हो सकता है. अगर तमाम कोशिशों के बाद भी अत्यधिक तनाव से परेशान हैं, तो डॉक्टर से मिलकर कंसल्ट करें. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 07, 2026, 12:55 IST

अश्लील गाने के विवाद में नोरा की मुश्किल बढ़ी:पेश न होने पर महिला आयोग भड़का, संजय दत्त को भी 8 अप्रैल को पेश होने का समन

अश्लील गाने के विवाद में नोरा की मुश्किल बढ़ी:पेश न होने पर महिला आयोग भड़का, संजय दत्त को भी 8 अप्रैल को पेश होने का समन

केडी: द डेविल के गाने ‘सरके चुनर तेरी’ विवाद में सफाई के बावजूद नोरा फतेही की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। 6 अप्रैल को राष्ट्रीय महिला आयोग की सुनवाई में वह पेश नहीं हुईं, जिस पर आयोग ने नाराज होकर उन्हें आखिरी मौका दिया। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, 6 अप्रैल को राष्ट्रीय महिला आयोग की सुनवाई में सरके चुनरिया तेरी के लिरिसिस्ट रकीब आलम, फिल्म केडीःद डेविल के डायरेक्टर प्रेम और केवीएन प्रोडक्शन के रीप्रेसेंटेटिव गौतम के.एम और सुप्रिथ पेश हुए थे। इस सुनवाई की अध्यक्षता आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने की थी। समन में नोरा फतेही को भी पेश होने के लिए कहा गया था, हालांकि वो खुद नहीं आईं और सफाई देने के लिए वकील को भेजा। सुनवाई में विजया रहाटकर ने चिंता जताते हुए कहा कि गाने के बोल महिलाओं की गरिमा के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि क्रिएटिविटी के नाम पर महिलाओं की गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता। सुनवाई के दौरान मौजूद सभी ने ये स्वीकार किया कि गाना आपत्तिजनक था, जिसका नाकारात्मक प्रभाव पड़ा और सभी ने इसके लिए लिखित माफी भी दी। इसके अलावा सभी ने तीन महीनों तक महिला सशक्तिकरण के लिए काम करने और महिला आयोग को इसकी रिपोर्ट देने का आश्वासन दिया है। अश्लील गाने के विवाद पर संजय दत्त को भी समन आयोग ने संजय दत्त को भी समन भेजकर 8 अप्रैल को होने वाली सुनवाई में पेश होने का आदेश दिया है। उनके अलावा नोरा फतेही की गैरमौजूदगी पर भड़कर आयोग ने उन्हें 27 अप्रैल को पेश होने का आखिरी मौका दिया है। नोरा फतेही दे चुकी हैं सफाई अश्लील गाने पर विवाद बढ़ने के बाद एक्ट्रेस ने बयान जारी कर सफाई दी थी। उन्होंने कहा है कि उनसे कन्नड़ में गलत ट्रांसलेशन बताकर पूरा गाना शूट करवाया गया और फिर बिना अप्रूवल या परमिशन गाने को हिंदी में बना लिया। उन्होंने कहा कि मेकर्स ने लिरिकल गाने को बिना इजाजत लिए उनकी AI इमेज के साथ रिलीज किया। एक्ट्रेस ने ये भी माना कि गाना वाकई अनुचित है, लेकिन इसकी जानकारी उन्हें सॉन्ग लॉन्च इवेंट में पहुंचकर मिलीं। हिंदी गाना देखकर एक्ट्रेस खुद शॉक में थीं। पैन इंडिया फिल्म केडीः द डेविल, 30 अप्रैल 2026 को रिलीज होने वाली है। 14 मार्च को इस फिल्म का गाना सरके चुनर तेरी कई भाषाओं में रिलीज हुआ। ये गाना नोरा फतेही और संजय दत्त पर फिल्माया गया था। यूट्यूब पर गाना जारी होते ही सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा, जिसका कारण था, गाने के अश्लील और डबल मीनिंग बोल। इसके अलावा गाने में दिखाए गए डांस स्टेप्स और पिक्चराइजेशन भी काफी आपत्तिजनक थे। सोशल मीडिया पर गाने की जमकर आलोचना हुई, जिसके बाद इसके खिलाफ कई शिकायतें दर्ज हो रही हैं। “सरके चुनर तेरी”, जो आने वाली कन्नड़ फिल्म “KD: द डेविल” का हिस्सा है, अपने अश्लील बोलों के कारण यूट्यूब पर रिलीज के बाद बड़े विवाद का कारण बना। इसके बाद इस वीडियो को प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है। “KD: द डेविल”, जिसका निर्देशन प्रेम ने किया है और जिसमें ध्रुव सरजा मुख्य भूमिका में हैं, 30 अप्रैल को रिलीज होगी।

बैतूल में सरकारी खरीदी में देरी पर कांग्रेस का प्रदर्शन:9 अप्रैल को शिवाजी ऑडिटोरियम में किसान देंगे धरना; बोले- खाद की भी कमी

बैतूल में सरकारी खरीदी में देरी पर कांग्रेस का प्रदर्शन:9 अप्रैल को शिवाजी ऑडिटोरियम में किसान देंगे धरना; बोले- खाद की भी कमी

बैतूल में सरकारी गेहूं खरीदी में देरी, ओलावृष्टि से फसल बर्बादी और अन्य समस्याओं से परेशान किसानों के समर्थन में कांग्रेस 9 अप्रैल को जिला मुख्यालय स्थित शिवाजी ऑडिटोरियम में सुबह 11 बजे से धरना-प्रदर्शन करेगी। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर हो रहे इस आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान और कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल होकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे। वर्तमान में खरीदी शुरू न होने से किसान अपनी उपज मंडियों में 2000 से 2200 रुपए प्रति क्विंटल के कम दाम पर बेचने को मजबूर हैं और 31 मार्च की समय सीमा बीतने के बाद जिले के लगभग आधे किसान सहकारी ऋण में डिफाल्टर हो गए हैं। 15 अप्रैल तक बढ़ी खरीदी की तारीख, राजस्थान में खरीदी शुरू कांग्रेस का आरोप है कि हाल ही में हुई ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं, जिससे वे पहले से ही आर्थिक संकट में हैं। गेहूं खरीदी की तारीखों में बार-बार बदलाव ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। पहले 23 मार्च, फिर 1 अप्रैल, 10 अप्रैल और अब 15 अप्रैल तक तारीख बढ़ने से किसानों में भारी असंतोष है। कांग्रेस ने इस बात पर भी जोर दिया कि पड़ोसी राज्य राजस्थान में खरीदी पहले ही शुरू हो चुकी है, जबकि मध्य प्रदेश में देरी हो रही है। कुप्रबंधन का आरोप- डिफाल्टर हुए किसान, खाद की भी कमी कांग्रेस ने सरकार पर कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि सहकारी ऋण की अंतिम तिथि 31 मार्च होने से लगभग आधे किसान डिफाल्टर हो गए हैं। इसके अतिरिक्त, खाद की कमी, मनमाने बिजली बिल, बिजली चोरी के कथित झूठे मामले और नरवाई जलाने पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई जैसे मुद्दों ने भी किसानों की समस्याओं को बढ़ाया है। संगठन महामंत्री ने की ज्यादा से ज्यादा लोगों के शामिल होने की अपील जिला संगठन महामंत्री बृजभूषण पांडे ने बताया कि यह धरना-प्रदर्शन प्रदेश स्तर पर हो रहे विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा है। उन्होंने सभी पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक किसानों को इस आंदोलन में शामिल करें, ताकि उनकी समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाया जा सके।

केरल चुनाव 2026: कांग्रेस दक्षिण में बढ़त के लिए तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर क्यों भरोसा कर रही है | हैदराबाद-न्यूज़ न्यूज़

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आखरी अपडेट:07 अप्रैल, 2026, 12:09 IST राजनीतिक विश्लेषक इस अभियान को दक्षिणी राज्यों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कांग्रेस की व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में देखते हैं। नेताओं का मानना ​​है कि रेड्डी कैडर को सक्रिय करने में मदद कर सकते हैं तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस कदम का स्वागत किया है, इसे पार्टी की बढ़ती राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा का संकेत माना जा रहा है। (पीटीआई फाइल फोटो) तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने केरल में अपना अभियान शुरू कर दिया है, जो राज्य में कांग्रेस के चुनावी अभियान में एक महत्वपूर्ण क्षण है। वह पूरे दिन तीन निर्वाचन क्षेत्रों – कोवलम, मवेलिककारा और पथनापुरम में रोड शो करेंगे। अभियान सुबह 8.30 बजे कोवलम में शुरू हुआ, उसके बाद सुबह 10.30 बजे मावेलिककारा में शुरू हुआ और दोपहर 2 बजे पथानापुरम में समाप्त होगा। अपनी ऊर्जावान और भीड़ खींचने वाली प्रचार शैली के लिए जाने जाने वाले रेवंत रेड्डी की यात्रा ने केरल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह पैदा किया है। प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में हाई-स्टेक रोड शो अपने समुद्र तटों के लिए मशहूर पर्यटन केंद्र कोवलम में भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है क्योंकि लोग तेलंगाना के मुख्यमंत्री को देखने के लिए इकट्ठा होंगे। रोड शो के दौरान, रेवंत रेड्डी द्वारा स्थानीय मुद्दों को संबोधित करने और विकास प्राथमिकताओं की रूपरेखा तैयार करने की संभावना है, जिसका उद्देश्य कांग्रेस उम्मीदवारों के लिए समर्थन बढ़ाना है। राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र मावेलिककारा में भी उत्साह बढ़ा हुआ देखा जा रहा है। पार्टी नेताओं का मानना ​​है कि रेवंत रेड्डी की प्रचार शैली, तेलंगाना में उनके शासन रिकॉर्ड के साथ मिलकर, मतदाताओं को पसंद आ सकती है। अभियान के दौरान स्थानीय कांग्रेस नेताओं के उनके साथ शामिल होने की उम्मीद है। दौरे के अंतिम चरण में पथानापुरम में भी भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है, केरल कांग्रेस के नेता भव्य स्वागत की तैयारी कर रहे हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह दौरा चुनाव अभियान में नई ऊर्जा का संचार कर सकता है। कांग्रेस की निगाहें दक्षिणी मोर्चे पर राजनीतिक पर्यवेक्षक इस अभियान को दक्षिणी राज्यों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कांग्रेस की व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में देखते हैं। नेताओं का मानना ​​है कि रेवंत रेड्डी जैसे हाई-प्रोफाइल प्रचारक कैडर को सक्रिय करने और मतदाता भावना को प्रभावित करने में मदद कर सकते हैं। केरल में एक कांग्रेस नेता ने कहा, “इस यात्रा से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा। लोगों से जुड़ने की उनकी क्षमता चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।” यह यात्रा केरल से परे भी ध्यान खींच रही है। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस कदम का स्वागत किया है, इसे पार्टी की बढ़ती राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा का संकेत माना जा रहा है। रेवंत रेड्डी की पहुंच के प्रभाव को लेकर हैदराबाद में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह अभियान दक्षिणी राज्यों में राजनीतिक संबंधों को मजबूत कर सकता है और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस पार्टी की स्थिति को बढ़ा सकता है। प्रमुख मुद्दों पर ध्यान दें अपने अभियान के दौरान, रेड्डी से विकास, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा जैसे मुद्दों को उजागर करने की उम्मीद है, जो केरल में मतदाताओं के बीच गूंजने की संभावना है। इस यात्रा को आगामी चुनावों के लिए शुरुआती जमीनी कार्य के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें कांग्रेस का लक्ष्य क्षेत्र में गति बनाना है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना ​​है कि अब मजबूत प्रचार अभियान आने वाले महीनों में चुनावी नतीजों को आकार दे सकता है। कुल मिलाकर, रेवंत रेड्डी का केरल अभियान कांग्रेस की दक्षिणी रणनीति में एक महत्वपूर्ण क्षण है, क्योंकि वह अपने पदचिह्न का विस्तार करना और राजनीतिक जमीन हासिल करना चाहती है। पहले प्रकाशित: 07 अप्रैल, 2026, 12:09 IST समाचार शहर हैदराबाद-समाचार केरल चुनाव 2026: दक्षिणी बढ़त के लिए कांग्रेस तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर क्यों भरोसा कर रही है? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। अभियान सुबह 8.30 बजे कोवलम में शुरू हुआ, उसके बाद सुबह 10.30 बजे मावेलिककारा में शुरू हुआ और दोपहर 2 बजे पथानापुरम में समाप्त होगा। अपनी ऊर्जावान और भीड़ खींचने वाली प्रचार शैली के लिए जाने जाने वाले रेवंत रेड्डी की यात्रा ने केरल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह पैदा किया है। प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में हाई-स्टेक रोड शो अपने समुद्र तटों के लिए मशहूर पर्यटन केंद्र कोवलम में भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है क्योंकि लोग तेलंगाना के मुख्यमंत्री को देखने के लिए इकट्ठा होंगे। रोड शो के दौरान, रेवंत रेड्डी द्वारा स्थानीय मुद्दों को संबोधित करने और विकास प्राथमिकताओं की रूपरेखा तैयार करने की संभावना है, जिसका उद्देश्य कांग्रेस उम्मीदवारों के लिए समर्थन बढ़ाना है। राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र मावेलिककारा में भी उत्साह बढ़ा हुआ देखा जा रहा है। पार्टी नेताओं का मानना ​​है कि रेवंत रेड्डी की प्रचार शैली, तेलंगाना में उनके शासन रिकॉर्ड के साथ मिलकर, मतदाताओं को पसंद आ सकती है। अभियान के दौरान स्थानीय कांग्रेस नेताओं के उनके साथ शामिल होने की उम्मीद है। दौरे के अंतिम चरण में पथानापुरम में भी भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है, केरल कांग्रेस के नेता भव्य स्वागत की तैयारी कर रहे हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह दौरा चुनाव अभियान में नई ऊर्जा का संचार कर सकता है। कांग्रेस की निगाहें दक्षिणी मोर्चे पर राजनीतिक पर्यवेक्षक इस अभियान को दक्षिणी राज्यों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कांग्रेस की व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में देखते हैं। नेताओं का मानना ​​है कि रेवंत रेड्डी जैसे हाई-प्रोफाइल प्रचारक कैडर को सक्रिय करने और मतदाता भावना को प्रभावित करने में मदद कर सकते हैं। केरल में एक कांग्रेस नेता ने कहा, “इस यात्रा से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा। लोगों से जुड़ने की उनकी क्षमता चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।” यह यात्रा केरल से परे भी ध्यान खींच रही है। तेलंगाना और आंध्र

वर्ल्ड अपडेट्स:अमेरिका में भारतीय मूल के डॉक्टर पर हेल्थकेयर फ्रॉड का आरोप, 130 करोड़ रुपए में समझौता

वर्ल्ड अपडेट्स:अमेरिका में भारतीय मूल के डॉक्टर पर हेल्थकेयर फ्रॉड का आरोप, 130 करोड़ रुपए में समझौता

अमेरिका में भारतीय मूल के डॉक्टर जितेंद्र पटेल और उनकी अटलांटा स्थित क्लिनिक ने हेल्थकेयर फ्रॉड के आरोपों को लेकर 14 मिलियन डॉलर (करीब 130 करोड़ रुपए) में सिविल समझौता किया है। अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट की जांच में सामने आया कि क्लिनिक ने मरीजों पर जरूरत से ज्यादा और कॉम्पलेक्स मेडिकल प्रोसीजर किए। साथ ही कई मामलों में ऐसे टेस्ट और सर्जरी के बिल भी बनाए गए जो या तो जरूरी नहीं थे या किए ही नहीं गए। इन दावों के आधार पर मेडिकेयर, मेडिकेड और अन्य सरकारी हेल्थ प्रोग्राम से भुगतान लिया गया। मामले की शिकायत क्लिनिक के ही पूर्व कर्मचारी और एक डॉक्टर ने की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि क्लिनिक का फोकस मरीजों के इलाज के बजाय रेवेन्यू बढ़ाने पर था। समझौते के तहत क्लिनिक और डॉक्टर ने किसी भी आरोप को स्वीकार नहीं किया है, लेकिन 130 करोड़ रुपए देकर मामला सुलझा लिया गया है। वहीं शिकायत करने वाले दोनों को इस राशि में से करीब 27 करोड़ रुपए मिलेंगे।

सट्टेबाजी का दबाव खिलाड़ियों को तोड़ रहा:टारगेट पूरे करने के लिए एथलीट्स को परिजनों की हत्या की धमकी; अपशब्दों की बौछार

सट्टेबाजी का दबाव खिलाड़ियों को तोड़ रहा:टारगेट पूरे करने के लिए एथलीट्स को परिजनों की हत्या की धमकी; अपशब्दों की बौछार

एक कॉलेज बास्केटबॉल खिलाड़ी मैच शुरू होने से पहले अपना मोबाइल खोलता है। स्क्रीन पर अजनबी का संदेश दिखता है,‘सुनो, यह मजाक नहीं है। अगर तुमने आज 22 पॉइंट्स व 12 बाउंड्स नहीं बनाए, तो तुम्हारे सभी करीबी मार दिए जाएंगे।’ यह डरावना संदेश किसी फिल्म की पटकथा नहीं, बल्कि 2024 के एनसीएए (नेशनल कॉलेजिएट एथलेटिक एसोसिएशन) की स्टडी का हिस्सा है। उस खिलाड़ी ने अभी कोर्ट पर कदम भी नहीं रखा था, न ही कोई शॉट मिस किया था। उसका कसूर सिर्फ इतना था कि सट्टेबाजी की दुनिया में उसकी काबिलियत पर ‘दांव’ लगा था। हालांकि वह मैदान में उतरा और स्वाभाविक खेलने की कोशिश भी की। एक्सपर्ट कहते हैं,हम इस समय ‘मार्च मैडनेस’ के बीच में हैं- जो अमेरिकी खेलों में सबसे अधिक सट्टेबाजी वाला आयोजन है। अनुमान है कि अकेले इस साल के टूर्नामेंट पर 25 हजार करोड़ रुपए दांव पर लगे हैं। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल की प्रोफेसर और मनोवैज्ञानिक एमी कडी कहती हैं,‘आज के एथलीट सिर्फ शारीरिक थकान से नहीं, बल्कि नए मनोवैज्ञानिक खतरे से जूझ रहे हैं, जिसे ‘सोशल-इवैल्यूएटिव थ्रेट’ (सामाजिक परख का खतरा) कहते हैं। यह वह तनाव है जो दूसरों द्वारा नकारात्मक निर्णय लिए जाने या अपमानित होने के डर से पैदा होता है। 1995 में एक खिलाड़ी को सिर्फ स्टेडियम में मौजूद दर्शकों की हूटिंग सुनाई देती थी। लेकिन आज, एक खिलाड़ी नाश्ते से पहले ही सोशल मीडिया पर सैकड़ों नफरत भरे संदेश पढ़ चुका होता है। 2025 की स्टडी के अनुसार, 51% बास्केटबॉल खिलाड़ियों को प्रदर्शन के आधार पर और 46% को सीधे तौर पर सट्टेबाजों से धमकी भरे संदेश मिलते हैं। ख्यात मनोवैज्ञानिक एमी कहती हैं,‘खेल जगत अब तक नींद, पोषण व रिकवरी पर ध्यान देता आया है, लेकिन अब इसे ‘जजमेंट रिकवरी’ की जरूरत है। इसे ‘लोड मैनेजमेंट’ की तरह देखना होगा। जिस तरह खिलाड़ी मैच के बाद मांसपेशियों को आराम देते हैं, वैसी ही ‘रिकवरी’ उन्हें सोशल मीडिया और बाहरी आलोचनाओं से भी करनी जरूरी है।’ तनाव इतना ज्यादा कि जान का जोखिम तक हो सकता है मनोवैज्ञानिक सैली डिकरसन कहती हैं, ‘यह खतरा शरीर में कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर इतना बढ़ा देता है कि शरीर इसे ‘जान के जोखिम’ की तरह लेने लगता है। सामान्य तनाव समय के साथ कम हो जाता है, पर ‘दूसरों के जजमेंट’ का डर हर बार शरीर पर ऐसा प्रभाव डालता है, जैसे पहली बार मिला हो। टेनिस स्टार इगा स्विएतेक और जेसिका पेगुला जैसे खिलाड़ी इसे ‘मानसिक स्वास्थ्य’ की नहीं, बल्कि ‘प्रदर्शन’ की समस्या मान रहे हैं। जब अरमांडो बैकॉट जैसे खिलाड़ी जीत दिलाकर लौटते हैं, तब भी उनके इनबॉक्स में अपशब्द होते हैं क्योंकि उन्होंने सट्टेबाजों का निजी लक्ष्य पूरा नहीं किया होता।

वृंदावन में मोहन भागवत ने संत के पैर छुए:संत मलूक दास के जयंती उत्सव में शामिल हुए, रामदेव ने समाधि के दर्शन किए

वृंदावन में मोहन भागवत ने संत के पैर छुए:संत मलूक दास के जयंती उत्सव में शामिल हुए, रामदेव ने समाधि के दर्शन किए

संत मलूक दास की आज 452वीं जयंती है। वृंदावन के मलूक पीठ में उनका जन्मोत्सव कार्यक्रम मनाया जा रहा है। इसमें RSS प्रमुख मोहन भागवत पहुंचे हैं। मंच पर संत रसिक माधव दास ने मोहन भागवत को शाल ओढ़ाकर स्वागत किया। भागवत ने हाथ जोड़कर अभिवादन स्वीकार किया और पैर छूकर आशीर्वाद लिया। योग गुरु बाबा रामदेव भी संत मलूक दास की जयंती में पहुंचे। उन्होंने संत की समाधि के दर्शन-पूजन किए। सीएम योगी दोपहर ढाई बजे पहुंचेंगे। हालांकि, उनकी मोहन भागवत से मुलाकात नहीं होगी, क्योंकि तब तक संघ प्रमुख कार्यक्रम से जा चुके होंगे। कृष्ण भक्त संत मलूक दास का जन्म कौशांबी में खत्री परिवार में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपनी साधना स्थली वृंदावन को बनाया। यहां उन्होंने यमुना किनारे वंशीवट पर अपनी कुटिया बनाई, जिसे मलूक पीठ के नाम से जाना जाता है। संत का गोलोक गमन (मृत्यु) वृंदावन में हुआ, जहां उनकी समाधि बनी हुई है। संत मलूक दास का अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम, दास मलूका कह गए, सबके दाता राम दोहा सबसे मशहूर हुआ। इसका अर्थ है कि अजगर किसी की नौकरी नहीं करता, पक्षी काम नहीं करता, लेकिन भगवान पर विश्वास हो तो राम जी सबका भला करते हैं। तस्वीरें देखिए- संत मलूक दास की जयंती पर कार्यक्रम से जुड़े अपडेट के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…

हाथठेला पर पोहा-जलेबी बेचने पहुंची पूर्व CM उमा भारती:अपने बंगले के सामने लगाई दुकान, प्रशासन से बोलीं- गरीबों की रोजी-रोटी मत छीनों

हाथठेला पर पोहा-जलेबी बेचने पहुंची पूर्व CM उमा भारती:अपने बंगले के सामने लगाई दुकान, प्रशासन से बोलीं- गरीबों की रोजी-रोटी मत छीनों

टीकमगढ़ में मंगलवार सुबह पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने सड़क किनारे हाथठेला लगाकर पोहा-जलेबी बेची। उन्होंने एक दिन पहले नगर पालिका द्वारा हटाए गए छोटे दुकानदारों को वापस ठेले लगाने के लिए बुलाया। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि गरीबों की रोजी-रोटी नहीं छीनी जाए। दरअसल, सोमवार को नगर पालिका, एसडीएम और तहसीलदार की टीम ने सिविल लाइन रोड पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया था। इस दौरान जेसीबी मशीन से कई छोटी दुकानें और हाथठेले हटा दिए गए थे। उमा भारती ने इस कार्रवाई का विरोध किया था और छोटे दुकानदारों को हटाने को गलत बताया था। इसी के मद्देनजर, मंगलवार सुबह वह अपने सिविल लाइन रोड स्थित बंगले से निकलकर हाथठेले पर पहुंचीं और खुद पोहा-जलेबी बेचकर दुकानदारों का समर्थन किया। उन्होंने हाथठेला वालों से दोबारा सड़क किनारे अपने ठेले लगाने कहा। पहले जगह उपलब्ध कराए प्रशासन उमा भारती का कहना था कि पार्षदों ने इसके लिए पहले स्थान चिह्नित करने को कहा था। तीन चार स्थान भी बताए थे। प्रशासन पहले इन्हें दुकानों लगाने के स्थान दे, बाद में हटाया जाए। उमा भारती ने हटाए गए दुकानदारों से अपील की है कि वह वापस आए और यही पर अपनी दुकानें लगाए, मैं उनके साथ हूं। उनके ठेलो को यहां से नहीं हटने दिया जाएगा। उमा भारती से पूछा गया कि क्या उन्होंने इस मामले में प्रशासन से बात की है तो उनका कहना था कि मुझे अभी इसकी जानकारी हुई है। मै अभी प्रशासन से बात करूंगी, सभी के ठेले वापस यहां लगाए जाएंगे।