Wednesday, 08 Jul 2026 | 02:22 PM

Trending :

EXCLUSIVE

सट्टेबाजी का दबाव खिलाड़ियों को तोड़ रहा:टारगेट पूरे करने के लिए एथलीट्स को परिजनों की हत्या की धमकी; अपशब्दों की बौछार

सट्टेबाजी का दबाव खिलाड़ियों को तोड़ रहा:टारगेट पूरे करने के लिए एथलीट्स को परिजनों की हत्या की धमकी; अपशब्दों की बौछार

एक कॉलेज बास्केटबॉल खिलाड़ी मैच शुरू होने से पहले अपना मोबाइल खोलता है। स्क्रीन पर अजनबी का संदेश दिखता है,‘सुनो, यह मजाक नहीं है। अगर तुमने आज 22 पॉइंट्स व 12 बाउंड्स नहीं बनाए, तो तुम्हारे सभी करीबी मार दिए जाएंगे।’ यह डरावना संदेश किसी फिल्म की पटकथा नहीं, बल्कि 2024 के एनसीएए (नेशनल कॉलेजिएट एथलेटिक एसोसिएशन) की स्टडी का हिस्सा है। उस खिलाड़ी ने अभी कोर्ट पर कदम भी नहीं रखा था, न ही कोई शॉट मिस किया था। उसका कसूर सिर्फ इतना था कि सट्टेबाजी की दुनिया में उसकी काबिलियत पर ‘दांव’ लगा था। हालांकि वह मैदान में उतरा और स्वाभाविक खेलने की कोशिश भी की। एक्सपर्ट कहते हैं,हम इस समय ‘मार्च मैडनेस’ के बीच में हैं- जो अमेरिकी खेलों में सबसे अधिक सट्टेबाजी वाला आयोजन है। अनुमान है कि अकेले इस साल के टूर्नामेंट पर 25 हजार करोड़ रुपए दांव पर लगे हैं। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल की प्रोफेसर और मनोवैज्ञानिक एमी कडी कहती हैं,‘आज के एथलीट सिर्फ शारीरिक थकान से नहीं, बल्कि नए मनोवैज्ञानिक खतरे से जूझ रहे हैं, जिसे ‘सोशल-इवैल्यूएटिव थ्रेट’ (सामाजिक परख का खतरा) कहते हैं। यह वह तनाव है जो दूसरों द्वारा नकारात्मक निर्णय लिए जाने या अपमानित होने के डर से पैदा होता है। 1995 में एक खिलाड़ी को सिर्फ स्टेडियम में मौजूद दर्शकों की हूटिंग सुनाई देती थी। लेकिन आज, एक खिलाड़ी नाश्ते से पहले ही सोशल मीडिया पर सैकड़ों नफरत भरे संदेश पढ़ चुका होता है। 2025 की स्टडी के अनुसार, 51% बास्केटबॉल खिलाड़ियों को प्रदर्शन के आधार पर और 46% को सीधे तौर पर सट्टेबाजों से धमकी भरे संदेश मिलते हैं। ख्यात मनोवैज्ञानिक एमी कहती हैं,‘खेल जगत अब तक नींद, पोषण व रिकवरी पर ध्यान देता आया है, लेकिन अब इसे ‘जजमेंट रिकवरी’ की जरूरत है। इसे ‘लोड मैनेजमेंट’ की तरह देखना होगा। जिस तरह खिलाड़ी मैच के बाद मांसपेशियों को आराम देते हैं, वैसी ही ‘रिकवरी’ उन्हें सोशल मीडिया और बाहरी आलोचनाओं से भी करनी जरूरी है।’ तनाव इतना ज्यादा कि जान का जोखिम तक हो सकता है मनोवैज्ञानिक सैली डिकरसन कहती हैं, ‘यह खतरा शरीर में कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर इतना बढ़ा देता है कि शरीर इसे ‘जान के जोखिम’ की तरह लेने लगता है। सामान्य तनाव समय के साथ कम हो जाता है, पर ‘दूसरों के जजमेंट’ का डर हर बार शरीर पर ऐसा प्रभाव डालता है, जैसे पहली बार मिला हो। टेनिस स्टार इगा स्विएतेक और जेसिका पेगुला जैसे खिलाड़ी इसे ‘मानसिक स्वास्थ्य’ की नहीं, बल्कि ‘प्रदर्शन’ की समस्या मान रहे हैं। जब अरमांडो बैकॉट जैसे खिलाड़ी जीत दिलाकर लौटते हैं, तब भी उनके इनबॉक्स में अपशब्द होते हैं क्योंकि उन्होंने सट्टेबाजों का निजी लक्ष्य पूरा नहीं किया होता।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
पाकिस्तान ने टी-20 वर्ल्डकप का गुस्सा वनडे टीम पर उतारा:बाबर और सईम बांग्लादेश सीरीज से बाहर, 6 अनकैप्ड प्लेयर्स को मौका

March 5, 2026/
8:11 am

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने टी-20 वर्ल्ड कप में अपनी टीम के खराब प्रदर्शन का गुस्सा वनडे टीम पर उतारा।...

IPL की प्रैक्टिस छोड़, वैभव सूर्यवंशी ने थामा कैमरा:हेलमेट उतारकर कहा-अपने हीरो को देख लो, थोड़ी देर शूटिंग की, फिर बोले- क्रिकेट ही ठीक है

March 22, 2026/
1:09 pm

IPL 2026 की तैयारियों को लेकर राजस्थान रॉयल्स टीम की ट्रेनिंग चल रही है। ट्रेनिंग सेशल के दौरान का वैभव...

योगी बोले- नमाज पढ़नी है तो शिफ्ट में पढ़िए:सड़क पर नहीं पढ़ी जाएगी; प्यार से मानेंगे तो ठीक, नहीं तो दूसरा तरीका अपनाएंगे

May 18, 2026/
2:41 pm

यूपी में बकरीद से पहले सड़कों पर नमाज को लेकर सीएम योगी ने चेतावनी दी है। लखनऊ में सोमवार को...

ट्रम्प आज चीनी राष्ट्रपति से मिलेंगे:₹9 लाख करोड़ की बोइंग विमान डील संभव; जिनपिंग अमेरिकी उद्योगपतियों के साथ बैठक करेंगे

May 14, 2026/
6:28 am

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आज बीजिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं की यह...

खरगे-दिग्विजय से रवनीत सिंह बिट्टू तक, ये 24 न्यूनतम बहुमत से होगा लाभ, जानिए कैसे बदलेगा गणित

May 22, 2026/
1:25 pm

10 राज्यों के 24 क्षितिज दर्शन जून-जुलाई में खाली हो रहे हैं। चुनाव आयोग ने शुक्रवार (22 मई) को इन...

विपक्ष के मंथन के बीच कांग्रेस एनसीपी (एसपी) के विलय की पेशकश कर रही है, सुप्रिया सुले प्रतिबद्ध नहीं: सूत्र | न्यूज18

June 11, 2026/
9:28 pm

सूत्र कह रहे हैं कि कांग्रेस विपक्षी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर राजनीतिक मंथन के बीच एनसीपी (एसपी) को पार्टी...

सोनम बाजवा की फिल्म ‘पिट्ट सियापा’ पर संकट:चंडीगढ़ कोर्ट ने रिलीज पर लगाई फिलहाल रोक; कॉपीराइट विवाद के चलते हुई कार्रवाई

April 21, 2026/
2:51 pm

चंडीगढ़ में अभिनेत्री सोनम बाजवा की आगामी फिल्म ‘पिट सियापा’ को लेकर कानूनी विवाद सामने आया है। कॉपीराइट विवाद के...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

सट्टेबाजी का दबाव खिलाड़ियों को तोड़ रहा:टारगेट पूरे करने के लिए एथलीट्स को परिजनों की हत्या की धमकी; अपशब्दों की बौछार

सट्टेबाजी का दबाव खिलाड़ियों को तोड़ रहा:टारगेट पूरे करने के लिए एथलीट्स को परिजनों की हत्या की धमकी; अपशब्दों की बौछार

एक कॉलेज बास्केटबॉल खिलाड़ी मैच शुरू होने से पहले अपना मोबाइल खोलता है। स्क्रीन पर अजनबी का संदेश दिखता है,‘सुनो, यह मजाक नहीं है। अगर तुमने आज 22 पॉइंट्स व 12 बाउंड्स नहीं बनाए, तो तुम्हारे सभी करीबी मार दिए जाएंगे।’ यह डरावना संदेश किसी फिल्म की पटकथा नहीं, बल्कि 2024 के एनसीएए (नेशनल कॉलेजिएट एथलेटिक एसोसिएशन) की स्टडी का हिस्सा है। उस खिलाड़ी ने अभी कोर्ट पर कदम भी नहीं रखा था, न ही कोई शॉट मिस किया था। उसका कसूर सिर्फ इतना था कि सट्टेबाजी की दुनिया में उसकी काबिलियत पर ‘दांव’ लगा था। हालांकि वह मैदान में उतरा और स्वाभाविक खेलने की कोशिश भी की। एक्सपर्ट कहते हैं,हम इस समय ‘मार्च मैडनेस’ के बीच में हैं- जो अमेरिकी खेलों में सबसे अधिक सट्टेबाजी वाला आयोजन है। अनुमान है कि अकेले इस साल के टूर्नामेंट पर 25 हजार करोड़ रुपए दांव पर लगे हैं। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल की प्रोफेसर और मनोवैज्ञानिक एमी कडी कहती हैं,‘आज के एथलीट सिर्फ शारीरिक थकान से नहीं, बल्कि नए मनोवैज्ञानिक खतरे से जूझ रहे हैं, जिसे ‘सोशल-इवैल्यूएटिव थ्रेट’ (सामाजिक परख का खतरा) कहते हैं। यह वह तनाव है जो दूसरों द्वारा नकारात्मक निर्णय लिए जाने या अपमानित होने के डर से पैदा होता है। 1995 में एक खिलाड़ी को सिर्फ स्टेडियम में मौजूद दर्शकों की हूटिंग सुनाई देती थी। लेकिन आज, एक खिलाड़ी नाश्ते से पहले ही सोशल मीडिया पर सैकड़ों नफरत भरे संदेश पढ़ चुका होता है। 2025 की स्टडी के अनुसार, 51% बास्केटबॉल खिलाड़ियों को प्रदर्शन के आधार पर और 46% को सीधे तौर पर सट्टेबाजों से धमकी भरे संदेश मिलते हैं। ख्यात मनोवैज्ञानिक एमी कहती हैं,‘खेल जगत अब तक नींद, पोषण व रिकवरी पर ध्यान देता आया है, लेकिन अब इसे ‘जजमेंट रिकवरी’ की जरूरत है। इसे ‘लोड मैनेजमेंट’ की तरह देखना होगा। जिस तरह खिलाड़ी मैच के बाद मांसपेशियों को आराम देते हैं, वैसी ही ‘रिकवरी’ उन्हें सोशल मीडिया और बाहरी आलोचनाओं से भी करनी जरूरी है।’ तनाव इतना ज्यादा कि जान का जोखिम तक हो सकता है मनोवैज्ञानिक सैली डिकरसन कहती हैं, ‘यह खतरा शरीर में कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का स्तर इतना बढ़ा देता है कि शरीर इसे ‘जान के जोखिम’ की तरह लेने लगता है। सामान्य तनाव समय के साथ कम हो जाता है, पर ‘दूसरों के जजमेंट’ का डर हर बार शरीर पर ऐसा प्रभाव डालता है, जैसे पहली बार मिला हो। टेनिस स्टार इगा स्विएतेक और जेसिका पेगुला जैसे खिलाड़ी इसे ‘मानसिक स्वास्थ्य’ की नहीं, बल्कि ‘प्रदर्शन’ की समस्या मान रहे हैं। जब अरमांडो बैकॉट जैसे खिलाड़ी जीत दिलाकर लौटते हैं, तब भी उनके इनबॉक्स में अपशब्द होते हैं क्योंकि उन्होंने सट्टेबाजों का निजी लक्ष्य पूरा नहीं किया होता।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.