Tuesday, 15 Sep 2026 | 08:07 AM

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40 प्लस लोगों की डेटिंग एप पर बढ़ रही सक्रियता:भारत के 2027 तक दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा डेटिंग सर्विस मार्केट बनने की उम्मीद

40 प्लस लोगों की डेटिंग एप पर बढ़ रही सक्रियता:भारत के 2027 तक दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा डेटिंग सर्विस मार्केट बनने की उम्मीद

देश में डेटिंग एप की लोकप्रियता बढ़ रही है। भारत दुनिया में तेजी से बढ़ते डेटिंग एप मार्केट में से एक है। इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक देश में डेटिंग एप्स के करीब 10 करोड़ से ज्यादा उपयोगकर्ता हैं। निवेश प्लेटफॉर्म स्मॉलकेस की रिसर्च के अनुसार, भारत के 2027 तक दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा डेटिंग सर्विस मार्केट बनने की उम्मीद है। खास बात ये है कि इन डेटिंग एप पर युवाओं के साथ ही 40 साल से अधिक उम्र के लोगों की सक्रियता बढ़ रही है। एडल्टरी को अपराध के दायरे से बाहर करने के बाद विवाहेत्तर संबंधों के लिए भी लोग डेटिंग एप पर जा रहे हैं। ग्लीडेन जैसे विवाहेत्तर संबंधों पर केंद्रित डेटिंग एप के भी देश में 40 लाख से ज्यादा यूजर हैं। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक इस एप पर महिलाओं की संख्या बीते कुछ वर्षों में ढाई गुना तक बढ़ गई है। ये सिर्फ ट्रेंड नहीं, बदलते सामाजिक मानदंडों का भी प्रतीक है। त्वरित और अक्सर आभासी संतुष्टि के लिए लोग सामाजिक वर्जनाएं तोड़ने से भी नहीं हिचक रहे हैं। गहरे सामाजिक परिवर्तन का संकेत फोर्ब्स इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 40 प्लस लोगों की डेटिंग एप पर सक्रियता केवल ‘अफेयर’ या ‘कैजुअल डेटिंग’ तक सीमित नहीं है। यह एक गहरे सामाजिक परिवर्तन का संकेत है। समाजशास्त्री कहते हैं, विवाह अब भी महत्वपूर्ण संस्था है, लेकिन उसके भीतर और बाहर रिश्तों की परिभाषा बदल रही है। कॉर्पोरेट लाइफ की भाग-दौड़ और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच आपस में भावनात्मक जुड़ाव की कमी लोगों को डिजिटल दुनिया की ओर धकेलती है। इप्सोस के एक सर्वे के मुताबिक लोग अफेयर करने के लिए हमेशा गलत कारण नहीं रखते। कुछ लोग डिजिटल दुनिया में छोटा सा थ्रिल या रोमांच ढूंढते हैं। 40+ पुरुषों और महिलाओं के लिए डेटिंग के लक्ष्य अलग 40 प्लस में रोमांस के प्रति पुरुष और महिलाओं का नजरिया बिल्कुल अलग हो सकता है। डेटिंग एप क्वैकक्वैक की एक रिपोर्ट के मुताबिक 40 वर्ष की आयु के बाद महिलाएं, ऐसा प्यार तलाशती हैं जो भावनात्मक सुरक्षा प्रदान करे। जो खुले विचारों वाले हों, अपने आप को अभिव्यक्त कर सकें। इन महिलाओं के लिए भावनात्मक उपस्थिति आवश्यक है। दूसरी ओर, पुरुष आमतौर पर ऐसे संबंधों की ओर अधिक आकर्षित होते हैं जो भरोसेमंद और प्रबंधनीय हों। पुरुष भावनात्मक शांति को प्राथमिकता देते हैं। एप के फाउंडर रवि मित्तल कहते हैं, ‘भारत में डेटिंग के मामले में उम्र अब बड़ी बाधा नहीं रह गई है। अलग-अलग पीढ़ी के बीच प्राथमिकता अलग-अलग हैं।’ रिश्तों से जुड़े अपराधों में हो रही बढ़ोतरी – देश में पिछले कुछ समय से शादी, डेटिंग या लिव‑इन जैसे अंतरंग रिश्तों में हिंसा के मामले बढ़ रहे हैं। राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की सितंबर 2025 में जारी रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में महिलाओं के खिलाफ 4.48 लाख अपराध दर्ज हुए, जो 10 साल में सबसे ज्यादा हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराधों में यूपी, महाराष्ट्र, प. बंगाल और राजस्थान सबसे आगे हैं। एक सर्वे के मुताबिक करीब 59% शादियां पार्टनर की बेवफाई की वजह से टूट रही हैं। – चाइल्डलाइट ग्लोबल चाइल्ड सेफ्टी इंस्टीट्यूट की स्वाइप रॉन्ग’ नामक रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों के खिलाफ अपराध करने वाले पुरुषों द्वारा डेटिंग साइटों का उपयोग करने की संभावना गैर-अपराधियों की तुलना में करीब चार गुना अधिक होती है। रिपोर्ट कहती है, बैंकिंग और गेमिंग में इस्तेमाल होने वाले मजबूत उपयोगकर्ता पहचान तरीकों को डेटिंग एप प्लेटफॉर्म द्वारा भी अपनाया जाना चाहिए। पहचान छिपाने की आसानी, क्षणिक आनंद इसकी वजह क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. काकोली राय कहती हैं, समाज में बड़ा बदलाव आ रहा है। वैवाहिक संबंधों में तनाव के मामले पिछले कुछ वर्षों में डेढ़ गुना तक बढ़ गए हैं। इसके पीछे डेटिंग एप भी बड़ी वजह हैं। पहले सामाजिक ताना-बाना बहुत मजबूत होता था, संयुक्त परिवार और समाज का डर लोगों को बंधनों से बाहर जाने से रोकता था। डेटिंग एप पर लोग क्षणिक और अस्थायी आनंद के लिए जाते हैं। इनमें अपनी पहचान छिपाने की आसानी होती है और अक्सर एप पर बने रिश्तों में कोई उत्तरदायित्व नहीं होता। जीवन के दूसरे पड़ाव में साथी मिलने में आसानी के कारण भी इन एप पर जा रहे हैं। कुछ लोग वैवाहिक जीवन की नीरसता के बीच डिजिटल दुनिया में रोमांच ढूंढने की कोशिश में सामाजिक नियम तोड़ रहे हैं। डिजिटल कनेक्टिविटी में आसानी होने से लोगों के बीच ऐसे एप का उपयोग बढ़ रहा है। अधिकतर लोग शुरुआत में भावनात्मक अकेलापन दूर करने के लिए डेटिंग एप पर जाते हैं लेकिन जब इनको इसमें अनूठापन मिलता है और रोमांच पैदा होता है तो फिर वे बार-बार इसमें जाते हैं। उन्हें इसमें आत्मसंतुष्टि मिलती है। समाज और कानून का डर नहीं रहता।’ – डॉ. ओपी रायचंदानी, वरिष्ठ मनोचिकित्सक

हिसार में शादी करने जा रहा फर्जी मेजर अरेस्ट:पुलवामा का रहने वाला, हिंदू बनकर शादी डॉट कॉम पर फंसाया; चंडीगढ़ से खरीदी ड्रेस

हिसार में शादी करने जा रहा फर्जी मेजर अरेस्ट:पुलवामा का रहने वाला, हिंदू बनकर शादी डॉट कॉम पर फंसाया; चंडीगढ़ से खरीदी ड्रेस

हरियाणा के कैथल पुलिस ने शादी के नाम पर ठगी करने वाले फर्जी आर्मी मेजर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी युवक मुस्लिम है और जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले का रहने वाला है। उसके पास से आर्मी की वर्दी भी बरामद हुई है, जो चढ़ीगढ़ से खरीदी थी। वह मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर खुद को आर्मी मेजर बताकर हिंदू युवतियों को फंसाता था। गिरफ्तारी के वक्त वह हिसार की युवती से मिलने जा रहा था, जिससे वह शादी करने वाला था। कैथल पुलिस ने मामला हिसार से जुड़ा होने के कारण उसे वहां की पुलिस के हवाले कर दिया। हिसार पुलिस ने जब उसकी कुंडली खंगाली तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आई। पता चला कि अब तक वह 10 से ज्यादा युवतियों से मेजर बनकर ठगी कर चुका है। हिसार की रहने वाली युवती से 30 हजार रुपए भी ठग चुका था। इस मामले में रिपोर्ट भी दर्ज हुई है। फिलहाल, पुलिस उसे पूछताछ कर रही है। पता किया जा रहा है कि उसके अलावा इस अपराध में कौन-कौन शामिल है। उसका बैकग्राउंड क्या है और उसके परिवार में कौन है। इसके अलावा सबसे खास बात यह है कि कहीं ऐसा तो नहीं है कि टारगेटेड बेस क्राइम से जुड़ा हो। कौन है फर्जी मेजर और कैसे पकड़ा गया, सिलसिलेवार पढ़ें… नाम मेहराजुद्दीन, पुलवामा का रहने वाला: कैथल पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए आरोपी की पहचान मेहराजुद्दीन आजम निवासी गांव अवनीपुरा, जिला पुलवामा, जम्मू-कश्मीर के रूप में हुई है। कैथल में तितराम चौक पर पुलिस ने जांच के लिए के लिए एक ओला कैब को रोका। कैब में सवार युवक से पूछताछ की तो उसने अपना नाम निशांत सहारण बताया। आर्मी की वर्दी दिखाई तो पुलिस को शक हुआ: पुलिस के मुताबिक, जब युवक से पूछा गया कि वह क्या करता है तो उसने बैग से सेना की वर्दी दिखाते हुए कहा कि वह आर्मी में मेजर है। उसकी इसी बात पर पुलिसकर्मियों को शक हुआ। क्योंकि उसने बैग खोलकर वर्दी पहले दिखाई, पेशा बाद में बताया। सख्ती से पूछताछ में खुद का नाम आजम बताया : इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उसे कैब से बाहर बुलाकर उसकी पोस्टिंग, रेजिमेंट और कागजात आदि के बारे में पूछताछ की तो वह कोई जवाब नहीं दे सका। पेशे से जुड़े कोई कागजात भी नहीं दिखा सका। सख्ती से पूछताछ की गई तो उसने अपना नाम मेहराजुद्दीन आजम बताया। हिसार में युवती से मिलने की बात की तो खुली पोल : पुलिस ने यहां आने का कारण पूछा तो बताया कि वह हिसार में एक हिंदू लड़की से मिलने जा रहा था। उससे उसकी शादी की बात चल रही थी। युवती के स्वजन अपनी बेटी से युवक से शादी करवाने की तैयारी भी कर रहे थे। पुलिस ने युवती के परिवार से संपर्क किया तो उन्होंने भी निशांत से कॉन्टेक्ट होने की बात बताई, ना कि मेराजुद्दीन से। इसके बाद कैथल पुलिस ने उसे हिसार पुलिस को सौंप दिया। यहां जानिए कैसे करता था मेहराजुद्दीन ठगी…. निशांत सहारण नाम से बनाई फर्जी प्रोफाइल : हिसार पुलिस की पूछताछ में मेहराजुद्दीन ने बताया कि उसने शादी डॉट कॉम पर फर्जी आईडी बना रखी है। इसमें उसने खुद का नाम निशांत सहारण और पेशा आर्मी मेजर बताया हुआ है। वर्दी में कुछ फोटो भी लगा रखे थे। इसी वेबसाइट पर वह हिंदू लड़कियों को फंसाता था। हिसार सहित कई जगह की युवतियों को ठग चुका : पुलिस के मुताबिक, मेहराजुद्दीन ने बताया कि हिसार की युवती को भी उसने शादी डॉट कॉम पर ही कॉन्टेक्ट किया था। खुद को मेजर बताकर उसे विश्वास में लिया और करीब 30 हजार रुपए ठग लिए। इसके अलावा वह करीब दस से ज्यादा युवतियों को भी ऐसे ही ठग चुका है। खरड़ में वेटर, चंडीगढ़ से खरीदी वर्दी : मेहराजुद्दीन ने बताया कि वह 2021 में मोहाली के खरड़ में वेटर का काम करता था। दो साल तक यहां काम करने के बाद वह गांव लौट गया। इसके बाद 2025 में फिर से खरड़ आया। इस बार उसे काम नहीं मिला तो उसने शादी डॉट कॉम पर फर्जी आईडी बनाकर खुद को सेना का अधिकारी बताया। चंडीगढ़ से ही उसने आर्मी की वर्दी भी खरीदी थी। खरड़ से ही वह कैब करके हिसार आ रहा था। युवती के परिवार ने भी दर्ज कराई शिकायत उधर, मामला सामने आने के बाद हिसार की युवती ने भी मेहराजुद्दीन के खिलाफ थाना आजाद नगर में ठगी मामला दर्ज कराया है। इसमें धर्म बदलकर और शादी का झांसा देकर रुपए ठगने का आरोप लगाया गया है। फिलहाल, हिसार पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। मेहराजुद्दीन से पूछताछ भी की जा रही है। पता किया जा रहा है कि किन लड़कियों से वह ठगी कर चुका है। ठगी से बचने के लिए पुलिस की आमजन से अपील ​हिसार पुलिस प्रवक्ता दीपक कुमार ने इसकी पुष्टि करते हुए आमजन से अपील की कि ऑनलाइन वैवाहिक साइटों पर मिलने वाले किसी भी व्यक्ति पर बिना पूर्ण सत्यापन के विश्वास न करें। अपनी निजी जानकारी और धनराशि साझा करने से पहले सामने वाले व्यक्ति की पहचान की अच्छी तरह जांच अवश्य करें।

Gut Health news: डेस्क पर खाना, बैठे रहना, ऑफिस हर साल छीन रहा आपकी उम्र में से 11 दिन!

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शहरी जीवन की तेज रफ्तार के बीच भारत में खान-पान की आदतों में एक गहरा बदलाव आया है. सुबह का नाश्ता अक्सर मोबाइल स्क्रीन स्क्रॉल करते हुए लोग खाते हैं. दोपहर का खाना ऑफिस की मीटिंग्स के बीच डेस्क पर ही बैठे-बैठे खा लिया जाता है. रात का भोजन देर रात ऐप से मंगाकर जल्दबाजी में निपटा दिया जाता है, और फिर हम अपने काम, दफ्तर, मीटिंग में जुट जाते हैं. यह सब देखने में तो सुविधा जैसा लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यही ऑफिस का रूटीन और आपाधापी का भोजन हमें खा रहा है. लंबे काम के घंटे, व्यस्त दिनचर्या और फूड डिलीवरी ऐप्स की आसान उपलब्धता ने खाने को एक जरूरत से ज्यादा सुलभ और तेज प्रतिक्रिया बना दिया है. अब लोग यह नहीं सोचते कि क्या खा रहे हैं, बल्कि यह सोचते हैं कि कितनी जल्दी खा सकते हैं. हालांकि डॉक्टरों की मानें तो समस्या कभी-कभार के गलत खाने की नहीं, बल्कि रोजमर्रा की इस आदत की है, जो शरीर को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है. पैसिफिक वन हेल्थ में प्रिवेंटिव वेलनेस एवं मेटाबॉलिक डिजीज एक्सपर्ट डॉक्टर ऐजाज इल्मी कहते हैं कि अक्सर लोग आंतों की सेहत को केवल पाचन से जोड़ते हैं, जबकि इसका प्रभाव इससे कहीं अधिक व्यापक है. माइक्रोबायोम में असंतुलन इम्यूनिटी, नींद और हृदय स्वास्थ्य तक को प्रभावित कर सकता है. आज जो स्थिति हम देख रहे हैं, वह रोजमर्रा के छोटे-छोटे खान-पान के फैसलों का नतीजा है, जो शरीर की प्राकृतिक जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं.’ आंतों की हेल्थ है बड़ा मुद्दा डॉ. कहते हैं कि मानव शरीर में आंतों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. लगभग 70 से 80 प्रतिशत प्रतिरक्षा तंत्र आंतों में मौजूद होता है, जिसे माइक्रोबायोम नामक सूक्ष्मजीवों का जटिल तंत्र संचालित करता है. यह तंत्र न केवल पाचन को प्रभावित करता है, बल्कि इम्यूनिटी, सूजन, हार्मोन संतुलन और मानसिक स्वास्थ्य तक में भूमिका निभाता है. स्टडी में हुआ खुलासा वर्ष 2025 में शहरी कामकाजी लोगों पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 39 प्रतिशत लोग कम फाइबर वाला आहार लेते हैं, 36 प्रतिशत से अधिक लोग अधिक चीनी वाले खान-पान का पालन करते हैं, और 28 प्रतिशत से ज्यादा लोग नियमित रूप से मीठे पेय पदार्थों का सेवन करते हैं. यह आदतें अब कभी-कभार नहीं, बल्कि रोजमर्रा का हिस्सा बन चुकी हैं. ऐसा आहार आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीवों की विविधता को कम करता है, जिससे शरीर में सूजन बढ़ती है, इम्यून सिस्टम अधिक संवेदनशील हो जाता है और मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है. नए शोधों में यह भी सामने आया है कि खराब आंत स्वास्थ्य धमनियों में प्लाक बनने और वसा के असंतुलित मेटाबॉलिज्म से भी जुड़ा हो सकता है. हर साल छिन रहे आपके 11 दिन इसका असर केवल शरीर तक सीमित नहीं है. आंतें शरीर में सेरोटोनिन के उत्पादन में अहम भूमिका निभाती हैं, जो नींद और मानसिक स्थिति को नियंत्रित करता है. भारत के वर्कप्लेस वेलबीइंग रिपोर्ट 2025 के अनुसार, खराब नींद के कारण हर कर्मचारी औसतन 11.3 कार्यदिवस प्रति वर्ष खो देता है. ये हैं लक्षण पेट फूलना दोपहर के समय थकान रात में बेचैनी आमतौर पर ये समस्याएं अक्सर सामान्य मान ली जाती हैं, जबकि विशेषज्ञ इन्हें आंतों की खराब होती सेहत के संकेत मानते हैं, जिन्हें तत्काल सुधार की जरूरत होती है. डॉ. एजाज कहते हैं कि आंतों की सेहत को सुधारना मुश्किल नहीं है, बशर्ते कुछ चीजों को कड़ाई से फॉलो किया जाए. क्या करना चाहिए? दिन में कम से कम एक बार बिना किसी स्क्रीन के शांति से भोजन करना आहार में दाल, फल और मेवों जैसे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करना मीठे पेय पदार्थों को कम करना रात के भोजन और सोने के बीच कम से कम दो घंटे का अंतर रखना डॉक्टर कहते हैं कि तेज और सुविधाजनक जीवनशैली के इस दौर में सबसे जरूरी है जागरूकता. शरीर को परफेक्शन नहीं, बल्कि थोड़ी समझ और संतुलन की जरूरत है. रोज के छोटे-छोटे फैसले ही तय करते हैं कि हम स्वस्थ रहेंगे या धीरे-धीरे बीमार पड़ते जाएंगे.

पन्ना- पालधरा गांव में 9वीं के छात्र की संदिग्ध मौत:माता-पिता के साथ महुआ बीनने गया था, उसी पेड़ पर लटकी मिली लाश

पन्ना- पालधरा गांव में 9वीं के छात्र की संदिग्ध मौत:माता-पिता के साथ महुआ बीनने गया था, उसी पेड़ पर लटकी मिली लाश

पन्ना जिले के पालधरा गांव में एक 15 वर्षीय छात्र का शव संदिग्ध परिस्थितियों में पेड़ से लटका मिला। मृतक की पहचान दीपेश आदिवासी (पिता किशोर सिंह) के रूप में हुई है, जो पन्ना के सर्वोदय विद्यालय में कक्षा 9वीं का छात्र था। जानकारी के अनुसार, 5 अप्रैल को सुबह दीपेश अपने माता-पिता के साथ महुआ बीनने गया था। वहां से लौटने के बाद वह बकरियां चराने निकल गया। परिजनों ने बताया कि दोपहर में उन्होंने दीपेश को खाना खाने के लिए कहा था, लेकिन उसने मना कर दिया। इसके बाद करीब 1 बजे वह दोबारा खेत की ओर चला गया। जब शाम तक दीपेश घर नहीं लौटा, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। तलाश के दौरान, मृतक के चाचा लील सिंह खेत की तरफ लकड़ी लेने पहुंचे। उन्होंने देखा कि दीपेश का शव महुआ के ही एक पेड़ पर फांसी के फंदे से लटका हुआ था। ग्रामीण और परिजन मौके पर पहुंचे और तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही बृजपुर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को फंदे से नीचे उतारा। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव का पंचनामा तैयार किया और पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। पुलिस फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयानों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।

‘मातृभाषा का अपमान’ बनाम ‘तुष्टिकरण की साजिश’, बंगाल में पीएम मोदी का टीएमसी के पलटवार पर बयान, ‘इश्तेहार’ पर सुझाव

'मातृभाषा का अपमान' बनाम 'तुष्टिकरण की साजिश', बंगाल में पीएम मोदी का टीएमसी के पलटवार पर बयान, 'इश्तेहार' पर सुझाव

पश्चिम बंगाल की राजनीति में भाषा, पहचान और इतिहास को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिहार में दिए गए बयान के बाद टीएमसी ने तीखा पलटवार किया है। खोज है-‘इश्तेहार’, लेकिन इसके साथ ही अब बंगाल की अस्मिता पर गहरी राजनीतिक लड़ाई खत्म हो गई है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार भूखा विकास या रोजगार नहीं, बल्कि एक शब्द बन गया है- ‘इश्तेहार’। यह शब्द अब सिर्फ घोषणापत्र का पर्याय नहीं है, बल्कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन गया है। बीजेपी ने सीधे तौर पर 1905 के बंगाल के इतिहास से लेकर अब तक के कलाकारों में से किसी को भी शामिल करना शुरू कर दिया है. “पीएम मातृभाषा का सम्मान नहीं पता” – कुणाल घोष का हमलाबेलेघाटा सीट से टीएमसी उम्मीदवार उम्मीदवार घोष ने प्रधानमंत्री पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मातृभाषा में भाषण नहीं देते हैं। अगर वे हिंदी में भाषण नहीं देते हैं, तो उनकी बात का कोई महत्व नहीं है। वह बंगाल का अपमान कर रहे हैं। वह पूरी तरह से बांग्ला भाषा का अपमान कर रहे हैं। यह सही नहीं है। वह पार कर रहे हैं।” पीएम मोदी का आरोप- ”बंगाल की पहचान के लिए तुष्टीकरण के खेल”बिहार की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीएमसी के घोषणापत्र पर सवाल उठाते हुए बड़ा आरोप लगाया. उन्होंने कहा- “इस खेल में बंगाल की महान पहचान बनाई जा रही है। आपने देखा होगा कि टीएमसी ने अभी अपना घोषणापत्र जारी किया है, लेकिन उसे बंगाली भाषा का नाम नहीं दिया गया, बल्कि ‘इश्तेहार’ कहा जा रहा है। जरा सोचिए, कैसे बंगाल की पहचान बदल रही है।” प्रधानमंत्री ने ‘इश्तेहार’ शब्द को इतिहास से खारिज कर दिया और भी गंभीर आरोप लगाया- “1905 में बंगाल में धार्मिक सेनाओं ने ‘रेड इश्तेहार’ जारी किया था, जिसके बाद आदिवासियों का नरसंहार हुआ। टीएमसी हमें वही याद दिलाना चाहती है… ऐसा घिनौना तुष्टिकरण का खेल, बंगाल के सम्मान और संस्कृति को परंपरा की साजिश है।” उन्होंने जनता से अपील की कि अब ”बहुत कुछ चुकाया” जाएगा और बंगाल को अपनी पहचान दिलाने के लिए फैसला लिया जाएगा। ‘इश्तेहार’ पर एंटोनियो-विपक्ष का पलटवारप्रधानमंत्री के इस कथन के बाद नामांकन ने इसे “भ्रामक और गैर-जरूरी” बताया। टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने सोशल मीडिया पर लिखा- “यह पीएम मोदी का पूरी तरह से बेतुका बयान है। ‘इश्तेहार’ सिर्फ ‘मेनिफेस्टो’ का नाम है। एक सामान्य शब्द जो कई समुद्रों में इस्तेमाल होता है। यह राजनीति नहीं है – यह असंतुलन और अज्ञानता का प्रदर्शन है। यह मूर्खतापूर्ण, खतरनाक और अनोखा करने वाला है।” वहीं, कीर्ति आज़ाद ने भी इसी मुद्दे पर घेरा डाला और कहा- “मैं आपको ‘सपना सपना’ पेश करता हूं। पीएम मोदी का एक अशिक्षित और बेतुका बयान है। यह राजनीति नहीं है। यह बेवकूफी और अज्ञानता का प्रदर्शन है। यह मूर्खतापूर्ण, खतरनाक और भ्रामक करने वाला है।” बीजेपी का वार- “शब्द नहीं, संकेत है”बीजेपी नेता सुधाशंशु ने इस अंक में कहा कि ‘इश्तेहार’ का इस्तेमाल अभी तक नहीं किया गया है. उनका कहना है यह शब्द इतिहास की एक भावनात्मक घटना की याद दिलाता है। उन्होंने सवाल किया, “टीएमसी को साफ करना चाहिए कि उसने अपने घोषित पत्र के लिए ‘इश्तेहार’ शब्द क्यों चुना? यह डॉकलेट का मूल शब्द क्या है? यह तो फ़्रज़ी से आया हुआ शब्द है, जिसका इस्तेमाल सबसे ज़्यादा उर्दू में होता है।” बीजेपी ने दावा किया कि 1905 में ढाका के नवाब के दौर में इसी शब्द का इस्तेमाल ऐसे पर्चों के लिए किया गया था, कि अलग मकसद समाज को बाँटना और एक समुदाय के खिलाफ़ तानाशाही बनाना था. 1905 का प्रसंग—इतिहास से वर्तमान तकअगर इतिहास पर नजर डाली जाए तो 1905 से 1907 के बीच का बंगाल का दौरा बेहद उकेरा-सा था। लॉर्ड कर्ज़ेन के बंगाल डिवीजन के बाद ‘स्वदेशी आंदोलन’ और ‘वंदे मातरम’ की लहर तेज़ हो गई थी। इसी समय ‘लाल इश्तेहार’ नाम की एक किताब सामने आई, जिसे इब्राहिम खान ने लिखा था। यह दस्तावेज़ ढाके के नवाब के प्रभाव वाले महासागर में मनाया गया था। इतिहासकारों का कहना है, इस मत का मकसद मुस्लिम समाज को स्वदेशी आंदोलन और विचारधारा के खिलाफ लामबंद करना था। भाजपा अब इसी ऐतिहासिक संदर्भ को आज की राजनीति से जोड़ रही है। भाषा बनाम राजनीति, चुनाव से पहले बढ़िया गर्मीबंगाल विधानसभा चुनाव से पहले यह विवादित शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया। ‘इश्तेहार’ को लेकर घटिया बहस अब भाषा, इतिहास और पहचान की राजनीति बदल गई है। एक तरफ बीजेपी इसे “बंगाली अस्मिता और भाषा के सम्मान” से बढ़ावा दे रही है, तो दूसरी तरफ टीएमसी इसे “बांग्ला अस्मिता और भाषा के सम्मान” से बढ़ावा दे रही है।

एफसीआरए पर पीएम मोदी के बयान से भड़के केसी वेणुगोपाल, कहा- ‘पूरे समुदाय का अपमान’ सरकार पर लगाया साज़िश का आरोप

एफसीआरए पर पीएम मोदी के बयान से भड़के केसी वेणुगोपाल, कहा- 'पूरे समुदाय का अपमान' सरकार पर लगाया साज़िश का आरोप

केरल की रेटिंग में एफसीआरए संशोधन को लेकर घमासन तेजी से हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे पत्र लिखकर कड़े विरोध की निंदा की है। उन्होंने “पूरे समुदाय का अपमान” पर बयान देते हुए कहा कि गहरे असंतोष की नींव है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 अप्रैल को केरल में एनडीए की रैली के दौरान यूडीएफ पर एफसीआरए और यूनिफॉर्म सिविल कोड लेकर “झूठ फैलाने” का आरोप लगाया। इसी बयान पर अब कांग्रेस ने पलटवार करते हुए इसे राजनीतिक और शिक्षण सामग्री बनाया है। “घरे दुख और ढांचे के साथ लिख रहा हूं…”केसी वेणुगोपाल ने अपने पत्र में बेहद सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने लिखा- “मैं गहरा दुख और बिखराव के साथ लिख रहा हूं। केरल में आपका बयान, जिसमें आपने यूडीएफ पर एफसीआरए को लेकर राजनीतिक लाभ के लिए झूठ फैलाने का आरोप लगाया था, बेहद समस्याग्रस्त और पूरे समुदाय के लिए विचारधारा थी। पवित्र दिन पर ऐसा बयान देना विशेष रूप से अलगाव वाला और टाला जा सकने वाला था।” वेणुगोपाल ने यह भी साफ किया कि एफसीआरए में प्रस्तावित बदलावों के “दूरगामी और खतरनाक परिणाम” हैं, जिनमें किसी भी शर्त को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। सरकार का पक्ष- ”ईमानदार एनजीओ को डरने की जरूरत नहीं”इस पूरे विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने कहा, “ईसाई समुदाय को बिल्कुल भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। प्रस्तावित एफसीआरए बिल अच्छे एनजीओ की मदद के लिए सुझाव देता है और केवल गैर-अवैध तत्वों को सीमित रखता है जो भारत के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं। अच्छे अनुयायियों को कोई नुकसान नहीं होगा, विशेष रूप से ईसाई धर्म को। मैं उन्हें पूरा समर्थन देना चाहता हूं कि यह बिल वास्तविक सिद्धांतों को नुकसान नहीं पहुंचाएगा।” उन्होंने यह भी बताया कि किस तरह से सरकारी बिल रोका गया है और इस पर आगे चर्चा होगी। खड़गे का हमला- “यह सुधार नहीं, हमला है” कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्ज खुंडगे ने भी इस मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा. उन्होंने कहा, “यह सुधार नहीं है। यह हमला है, सिर्फ ईसाई अनुयायियों पर नहीं, बल्कि नागरिक समाज, एनजीओ और गरीबों की मदद करने वाली बातों पर भी।” खड़गे ने इसे ”चुनिंदा शकिंग” करार देते हुए कहा कि जैसे वक्फ कानून में बदलाव से मुस्लिम समुदाय में जन्म हुआ, वैसे ही एफसीआरए संशोधन से ईसाई समुदाय में गंभीर चिंता है। प्रभावोत्पादक और संक्षेपण संदेशकेरल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एफसीआरए की समाप्ति राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हो गई है। कांग्रेस इसे गठबंधन की सुरक्षा और अधिकारिता से बड़ा पोर्टफोलियो बना रही है, जबकि भाजपा इसे सहयोगी और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबद्धता बना रही है। इस पूरे विवाद में साफ किया गया है कि एफसीआरए संशोधन अब सिर्फ एक कानूनी या आवेदक नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे-सीधे राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक चर्चा का केंद्र बन गया है।

ईरान की ग्लोबल सप्लाई रोकने की धमकी, कच्चा-तेल $110 पार:भारत के आयात बिल पर ₹16,000 करोड़ का बोझ बढ़ेगा, बढ़ सकती है महंगाई

ईरान की ग्लोबल सप्लाई रोकने की धमकी, कच्चा-तेल $110 पार:भारत के आयात बिल पर ₹16,000 करोड़ का बोझ बढ़ेगा, बढ़ सकती है महंगाई

अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें आज फिर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ईरान को नर्क बनाने धमकी देने के बाद ईरान ने ग्लोबल सप्लाई ठप करने की बात कही है। इससे आज एक बैरल ब्रेंट क्रूड की कीमत $1.71 की बढ़कर $110.74 पर पहुंच गई है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यह तनाव इसी तरह जारी रहा, तो कच्चे तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल पहुंच सकती हैं। इसके अलावा, अगर कच्चे तेल की कीमत में $1 की बढ़ोतरी सालभर बनी रहती है, तो भारत का सालाना आयात बिल करीब ₹16,000 करोड़ बढ़ जाएगा। 38 दिन में इंडियन बास्केट 71% महंगा भारत की चिंता: महंगाई और रुपए पर सीधा असर पड़ेगा भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए यह स्थिति चिंताजनक है। ईरान ने होर्मुज रूट को लगभग बंद कर दिया है। दुनिया का करीब 20% तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। इसके बंद होने से न सिर्फ कच्चा तेल, बल्कि एल्युमीनियम, फर्टिलाइजर और प्लास्टिक की कीमतों में भी भारी तेजी आने लगी है। तेल की कीमतें 10 डॉलर बढ़ने से 0.60% बढ़ेगी महंगाई रेटिंग एजेंसी केयरएज ग्लोबल के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ोतरी से भारत में रिटेल महंगाई 60 बेसिस पॉइंट्स (0.60%) तक बढ़ सकती है। भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए काफी हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है, ऐसे में वहां के हालात बिगड़ने से भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट, GDP ग्रोथ और रुपए की वैल्यू पर भी दबाव बढ़ेगा। ट्रम्प का अल्टीमेटम- मंगलवार रात 8 बजे तक का समय ट्रम्प ने ईरान को बास्टर्ड कहते हुए होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोलने पर बड़ा हमला करने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने होर्मुज नहीं खोला तो वो उसे नरक बना देंगे। इसके साथ ही उन्होंने ईरान में पावर प्लांट और पुलों पर हमला करने की बात कही। ट्रम्प ने रविवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान में मंगलवार को पावर प्लांट डे और ब्रिज डे एक साथ होगा यानी हमला होगा। ईरान होर्मुज स्ट्रेट खोले दे, नहीं तो नरक जैसे हालात में पहुंच जाएगा। ईरान का पलटवार: पूरा क्षेत्र युद्ध की आग में जल जाएगा ट्रम्प के बयान के बाद ईरान ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल के हमले बढ़े तो वह ग्लोबल सप्लाई चेन को ठप कर देगा। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने कहा है कि वह होर्मुज के अलावा दूसरे समुद्री रास्तों को भी निशाना बना सकता है। ईरानी सुप्रीम लीडर के सलाहकार अली अकबर वेलायती ने कहा कि किसी भी बड़ी कार्रवाई का जवाब सिर्फ सैन्य स्तर पर नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा और व्यापार पर असर डालकर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सिर्फ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ही नहीं, बल्कि बाब-अल-मंदेब जैसे अहम समुद्री रास्ते भी खतरे में आ सकते हैं। OPEC+ ने लिया उत्पादन बढ़ाने का फैसला बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए सऊदी अरब और रूस सहित आठ OPEC+ देशों ने रविवार को एक वर्चुअल मीटिंग की। इसमें फैसला लिया गया कि मई 2026 से तेल उत्पादन में रोजाना 2.06 लाख बैरल की बढ़ोतरी की जाएगी। यह कदम पिछले साल घोषित की गई अतिरिक्त कटौती में बदलाव के तहत उठाया गया है। संगठन का कहना है कि वे बाजार की स्थितियों पर करीबी नजर रख रहे हैं और जरूरत पड़ने पर उत्पादन में और बदलाव किए जा सकते हैं।

धार में कांग्रेस नेता गोपाल पाल पर केस दर्ज:आपत्तिजनक पोस्ट करने पर पुलिस की कार्रवाई; नेता प्रतिपक्ष के करीबी हैं

धार में कांग्रेस नेता गोपाल पाल पर केस दर्ज:आपत्तिजनक पोस्ट करने पर पुलिस की कार्रवाई; नेता प्रतिपक्ष के करीबी हैं

धार शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र में सोशल मीडिया पर देवी-देवताओं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में पुलिस ने कांग्रेस नेता गोपाल पाल पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1) और 299 के तहत केस दर्ज किया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के करीबी माने जाने वाले गोपाल पाल के खिलाफ सर्व ब्राह्मण समाज और आरएसएस से जुड़े दिनेश सोनवनिया व फरियादी चेतन शर्मा की शिकायत के आधार पर रविवार को यह कार्रवाई की गई। फिलहाल, पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक जांच की जा रही है। ब्राह्मण समाज ने सौंपा था ज्ञापन जानकारी के अनुसार, कुछ दिनों पहले सर्व ब्राह्मण समाज के लोगों ने कोतवाली थाने पहुंचकर थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपा था। समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया था कि गोपाल पाल ने सोशल मीडिया पर देवी-देवताओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की है, जिससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। RSS की आपत्तिजनक फोटो पोस्ट करने का आरोप इसी मामले में दिनेश सोनवनिया ने रविवार को कोतवाली थाने में एक अलग लिखित आवेदन दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि गोपाल पाल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ी एक आपत्तिजनक फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की है। सोनवनिया ने बताया कि वे स्वयं आरएसएस से जुड़े हैं और इस प्रकार की पोस्ट संगठन की छवि को नुकसान पहुंचाती है। दोनों आवेदनों के आधार पर दर्ज हुआ केस ब्राह्मण समाज और दिनेश सोनवनिया के दोनों आवेदनों व फरियादी चेतन शर्मा की शिकायत को आधार बनाते हुए कोतवाली थाना पुलिस ने आरोपी गोपाल पाल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1) और 299 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पोस्ट की जांच जारी है।

फल और सब्जियों पर लगे पेस्टिसाइड को कैसे हटाएं? जानिए 5 आसान क्लीनिंग ट्रिक्स, मिनटों में होगी सफाई

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Last Updated:April 06, 2026, 11:02 IST Fruits and Vegetables Cleaning Tips: सब्जियों और फलों पर लगे कीटनाशक सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक होते हैं. ऐसे में बाजार से खरीदकर लाने के बाद फल-सब्जियों को अच्छी तरह साफ करना जरूरी होता है. नमक का पानी, बेकिंग सोडा, सिरका और साफ पानी से धोने जैसे आसान घरेलू उपायों से इन केमिकल्स को काफी हद तक हटाया जा सकता है. सही सफाई न केवल बीमारियों से बचाती है, बल्कि शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में भी मदद करती है. फल-सब्जियां साफ करने के लिए बेकिंग सोडा और सिरका भी इस्तेमाल कर सकते हैं. Simple Ways to Clean Fruits and Veggies: आजकल खेती में पेस्टिसाइड यानी कीटनाशक का इस्तेमाल बहुत ज्यादा किया जा रहा है. ये कीटनाशक फसलों को बीमारियों और कीड़ों से बचाते हैं. हालांकि ये पेस्टिसाइड कई खतरनाक केमिकल्स से बने होते हैं और फसल पर भी लग जाते हैं. इन केमिकल्स के अवशेष अक्सर सब्जियों और फलों की सतह पर रह जाते हैं, जो सीधे हमारे शरीर में पहुंचकर धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकते हैं. लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से हार्मोनल असंतुलन, एलर्जी और कैंसर जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए सब्जियों को सही तरीके से साफ करना बेहद जरूरी है. फल-सब्जियां साफ करने के 5 तरीके बहते पानी से अच्छी तरह धोएं : फल-सब्जियों को बाजार से लाने के बाद बहते पानी में अच्छे से धोना चाहिए. कई लोग सिर्फ हल्का-सा पानी डालकर काम चला लेते हैं, लेकिन ऐसा करना पर्याप्त नहीं है. फल-सब्जियों को कम से कम 2-3 मिनट तक हाथों से रगड़ते हुए धोना चाहिए, ताकि उनकी सतह पर चिपके पेस्टिसाइड, धूल और बैक्टीरिया हट सकें. पत्तेदार सब्जियों जैसे पालक या धनिया को एक-एक पत्ती अलग करके धोना ज्यादा असरदार होता है. यह तरीका केमिकल्स हटा देता है. नमक वाले पानी में भिगोएं : नमक का पानी पेस्टिसाइड हटाने में काफी मददगार माना जाता है. एक बड़े बर्तन में पानी लेकर उसमें 1-2 चम्मच नमक मिलाएं और फल-सब्जियों को 10-15 मिनट के लिए उसमें भिगोकर रखें. नमक का घोल फल-सब्जियों की सतह पर मौजूद केमिकल्स को ढीला करता है, जिससे वे आसानी से निकल जाते हैं. खासकर बैंगन, भिंडी और गोभी जैसी सब्जियों के लिए यह तरीका ज्यादा प्रभावी होता है. भिगोने के बाद इन्हें साफ पानी से दोबारा धोना न भूलें. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. बेकिंग सोडा करें इस्तेमाल : बेकिंग सोडा एक वैज्ञानिक रूप से प्रभावी तरीका माना जाता है. एक लीटर पानी में आधा चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर उसमें फल-सब्जियों को 10-15 मिनट तक रखें. रिसर्च में पाया गया है कि बेकिंग सोडा पेस्टिसाइड के केमिकल स्ट्रक्चर को तोड़ने में मदद करता है, जिससे उनका असर कम हो जाता है. यह तरीका खासतौर पर सेब, टमाटर और शिमला मिर्च जैसी सब्जियों और फलों के लिए उपयोगी है. बाद में इन्हें साफ पानी से अच्छी तरह धोना जरूरी है. सिरका से करें सफाई : सिरका एक नेचुरल क्लीनिंग एजेंट है, जो बैक्टीरिया और कुछ हद तक पेस्टिसाइड हटाने में मदद करता है. एक बर्तन में पानी लें और उसमें 1-2 चम्मच सिरका मिलाएं, फिर फल-सब्जियों को 10 मिनट तक इसमें डुबोकर रखें. यह तरीका खासकर उन सब्जियों के लिए अच्छा है जिनकी सतह चिकनी होती है, जैसे टमाटर या खीरा. सिरके का ज्यादा इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे स्वाद और गंध प्रभावित हो सकती है. उपयोग के बाद साफ पानी से धोना जरूरी है. सही तरीके से छीलें और पकाएं : कुछ सब्जियों और फलों का छिलका हटाने से पेस्टिसाइड का बड़ा हिस्सा निकल जाता है, क्योंकि अधिकांश केमिकल्स बाहरी परत पर ही रहते हैं. आलू, गाजर, खीरा और लौकी जैसी चीजों को छीलकर इस्तेमाल करना सुरक्षित विकल्प हो सकता है. इसके अलावा सब्जियों को अच्छी तरह पकाने से भी कुछ हानिकारक तत्व कम हो जाते हैं. ध्यान रखें कि ज्यादा पकाने से पोषक तत्व नष्ट हो सकते हैं, इसलिए मध्यम आंच पर सही समय तक पकाना बेहतर होता है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 06, 2026, 11:02 IST

जाकिर खान बोले- धुरंधर से सबकी जली:बॉलीवुड पर कसा तंज; कहा- बम ल्यारी में फूटे, पर धुआं बांद्रा से जुहू में उड़ा

जाकिर खान बोले- धुरंधर से सबकी जली:बॉलीवुड पर कसा तंज; कहा- बम ल्यारी में फूटे, पर धुआं बांद्रा से जुहू में उड़ा

19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज हुई ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ बॉक्स ऑफिस पर लगातार रिकॉर्ड ब्रेक कर रही है। इस बीच कॉमेडियन जाकिर खान ने फिल्म की सफलता को लेकर बॉलीवुड पर चुटकी ली है। जाकिर खान ने एक अवॉर्ड शो के दौरान कहा कि इंडस्ट्री के लोग आदित्य धर की इस फिल्म से अंदर ही अंदर जल रहे हैं। जाकिर ने कहा, “कितने ही बधाई पोस्ट आप डाल दें, कितनी ही स्टोरी शेयर कर दें या इंटरव्यू में इसे अपनी पसंदीदा फिल्म बता दें, मगर सच तो ये है कि धुरंधर से सबकी जली तो है।” ल्यारी वाले सीन पर ली चुटकी जाकिर ने फिल्म के एक्शन सीन्स का जिक्र करते हुए बांद्रा और जुहू (जहां बॉलीवुड स्टार्स रहते हैं) पर निशाना साधा। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “बम फिल्म में ल्यारी (कराची) में फूटे, पर धुआं बांद्रा से जुहू में उड़ा है।” उनका इशारा उन सेलेब्स की तरफ था जो फिल्म की ब्लॉकबस्टर ओपनिंग के समय चुप थे, लेकिन अब रिकॉर्ड टूटने पर इसकी तारीफ कर रहे हैं। साउथ के सितारों ने पहले की थी तारीफ ‘धुरंधर 2’ में रणवीर सिंह, आर माधवन, अर्जुन रामपाल, राकेश बेदी और सारा अर्जुन जैसे कलाकार मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म की रिलीज के बाद सबसे पहले महेश बाबू, अल्लू अर्जुन और एसएस राजामौली जैसे साउथ के दिग्गजों ने इसकी सराहना की थी। इसके काफी समय बाद बॉलीवुड से आलिया भट्ट, करण जौहर और विक्की कौशल ने फिल्म के कलाकारों के काम की तारीफ की। मधुर भंडारकर जैसे कई लोगों का मानना है कि फिल्म को बॉलीवुड से उतना सपोर्ट नहीं मिल जितना मिलन चाहिए था। जाकिर ने बताई ब्रेक लेने की असली वजह इसी बीच, जाकिर खान ने अपने लाइव टूर से ब्रेक लेने की खबरों पर भी सफाई दी है। उन्होंने बताया कि इंटरनेट पर उनकी सेहत को लेकर चल रही खबरें गलत हैं। जाकिर ने कहा, “ब्रेक की असली कहानी ये है कि मेरे पास बहुत सारा लिखने का काम पेंडिंग था, जिसे मैं पिछले छह साल से नहीं कर पाया था। मेरी सेहत बहुत खराब नहीं है। जो कुछ भी आप पढ़ रहे हैं वो अनावश्यक बकवास है।”