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Gut Health news: डेस्क पर खाना, बैठे रहना, ऑफिस हर साल छीन रहा आपकी उम्र में से 11 दिन!

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शहरी जीवन की तेज रफ्तार के बीच भारत में खान-पान की आदतों में एक गहरा बदलाव आया है. सुबह का नाश्ता अक्सर मोबाइल स्क्रीन स्क्रॉल करते हुए लोग खाते हैं. दोपहर का खाना ऑफिस की मीटिंग्स के बीच डेस्क पर ही बैठे-बैठे खा लिया जाता है. रात का भोजन देर रात ऐप से मंगाकर जल्दबाजी में निपटा दिया जाता है, और फिर हम अपने काम, दफ्तर, मीटिंग में जुट जाते हैं. यह सब देखने में तो सुविधा जैसा लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यही ऑफिस का रूटीन और आपाधापी का भोजन हमें खा रहा है.

लंबे काम के घंटे, व्यस्त दिनचर्या और फूड डिलीवरी ऐप्स की आसान उपलब्धता ने खाने को एक जरूरत से ज्यादा सुलभ और तेज प्रतिक्रिया बना दिया है. अब लोग यह नहीं सोचते कि क्या खा रहे हैं, बल्कि यह सोचते हैं कि कितनी जल्दी खा सकते हैं. हालांकि डॉक्टरों की मानें तो समस्या कभी-कभार के गलत खाने की नहीं, बल्कि रोजमर्रा की इस आदत की है, जो शरीर को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है.

पैसिफिक वन हेल्थ में प्रिवेंटिव वेलनेस एवं मेटाबॉलिक डिजीज एक्सपर्ट डॉक्टर ऐजाज इल्मी कहते हैं कि अक्सर लोग आंतों की सेहत को केवल पाचन से जोड़ते हैं, जबकि इसका प्रभाव इससे कहीं अधिक व्यापक है. माइक्रोबायोम में असंतुलन इम्यूनिटी, नींद और हृदय स्वास्थ्य तक को प्रभावित कर सकता है. आज जो स्थिति हम देख रहे हैं, वह रोजमर्रा के छोटे-छोटे खान-पान के फैसलों का नतीजा है, जो शरीर की प्राकृतिक जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं.’

आंतों की हेल्थ है बड़ा मुद्दा
डॉ. कहते हैं कि मानव शरीर में आंतों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. लगभग 70 से 80 प्रतिशत प्रतिरक्षा तंत्र आंतों में मौजूद होता है, जिसे माइक्रोबायोम नामक सूक्ष्मजीवों का जटिल तंत्र संचालित करता है. यह तंत्र न केवल पाचन को प्रभावित करता है, बल्कि इम्यूनिटी, सूजन, हार्मोन संतुलन और मानसिक स्वास्थ्य तक में भूमिका निभाता है.

स्टडी में हुआ खुलासा
वर्ष 2025 में शहरी कामकाजी लोगों पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 39 प्रतिशत लोग कम फाइबर वाला आहार लेते हैं, 36 प्रतिशत से अधिक लोग अधिक चीनी वाले खान-पान का पालन करते हैं, और 28 प्रतिशत से ज्यादा लोग नियमित रूप से मीठे पेय पदार्थों का सेवन करते हैं.

यह आदतें अब कभी-कभार नहीं, बल्कि रोजमर्रा का हिस्सा बन चुकी हैं. ऐसा आहार आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीवों की विविधता को कम करता है, जिससे शरीर में सूजन बढ़ती है, इम्यून सिस्टम अधिक संवेदनशील हो जाता है और मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है. नए शोधों में यह भी सामने आया है कि खराब आंत स्वास्थ्य धमनियों में प्लाक बनने और वसा के असंतुलित मेटाबॉलिज्म से भी जुड़ा हो सकता है.

हर साल छिन रहे आपके 11 दिन
इसका असर केवल शरीर तक सीमित नहीं है. आंतें शरीर में सेरोटोनिन के उत्पादन में अहम भूमिका निभाती हैं, जो नींद और मानसिक स्थिति को नियंत्रित करता है. भारत के वर्कप्लेस वेलबीइंग रिपोर्ट 2025 के अनुसार, खराब नींद के कारण हर कर्मचारी औसतन 11.3 कार्यदिवस प्रति वर्ष खो देता है.

ये हैं लक्षण

  1. पेट फूलना
  2. दोपहर के समय थकान
  3. रात में बेचैनी

आमतौर पर ये समस्याएं अक्सर सामान्य मान ली जाती हैं, जबकि विशेषज्ञ इन्हें आंतों की खराब होती सेहत के संकेत मानते हैं, जिन्हें तत्काल सुधार की जरूरत होती है. डॉ. एजाज कहते हैं कि आंतों की सेहत को सुधारना मुश्किल नहीं है, बशर्ते कुछ चीजों को कड़ाई से फॉलो किया जाए.

क्या करना चाहिए?

  • दिन में कम से कम एक बार बिना किसी स्क्रीन के शांति से भोजन करना
  • आहार में दाल, फल और मेवों जैसे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करना
  • मीठे पेय पदार्थों को कम करना
  • रात के भोजन और सोने के बीच कम से कम दो घंटे का अंतर रखना

डॉक्टर कहते हैं कि तेज और सुविधाजनक जीवनशैली के इस दौर में सबसे जरूरी है जागरूकता. शरीर को परफेक्शन नहीं, बल्कि थोड़ी समझ और संतुलन की जरूरत है. रोज के छोटे-छोटे फैसले ही तय करते हैं कि हम स्वस्थ रहेंगे या धीरे-धीरे बीमार पड़ते जाएंगे.

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लंबे काम के घंटे, व्यस्त दिनचर्या और फूड डिलीवरी ऐप्स की आसान उपलब्धता ने खाने को एक जरूरत से ज्यादा सुलभ और तेज प्रतिक्रिया बना दिया है. अब लोग यह नहीं सोचते कि क्या खा रहे हैं, बल्कि यह सोचते हैं कि कितनी जल्दी खा सकते हैं. हालांकि डॉक्टरों की मानें तो समस्या कभी-कभार के गलत खाने की नहीं, बल्कि रोजमर्रा की इस आदत की है, जो शरीर को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है.

पैसिफिक वन हेल्थ में प्रिवेंटिव वेलनेस एवं मेटाबॉलिक डिजीज एक्सपर्ट डॉक्टर ऐजाज इल्मी कहते हैं कि अक्सर लोग आंतों की सेहत को केवल पाचन से जोड़ते हैं, जबकि इसका प्रभाव इससे कहीं अधिक व्यापक है. माइक्रोबायोम में असंतुलन इम्यूनिटी, नींद और हृदय स्वास्थ्य तक को प्रभावित कर सकता है. आज जो स्थिति हम देख रहे हैं, वह रोजमर्रा के छोटे-छोटे खान-पान के फैसलों का नतीजा है, जो शरीर की प्राकृतिक जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं.’

आंतों की हेल्थ है बड़ा मुद्दा
डॉ. कहते हैं कि मानव शरीर में आंतों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. लगभग 70 से 80 प्रतिशत प्रतिरक्षा तंत्र आंतों में मौजूद होता है, जिसे माइक्रोबायोम नामक सूक्ष्मजीवों का जटिल तंत्र संचालित करता है. यह तंत्र न केवल पाचन को प्रभावित करता है, बल्कि इम्यूनिटी, सूजन, हार्मोन संतुलन और मानसिक स्वास्थ्य तक में भूमिका निभाता है.

स्टडी में हुआ खुलासा
वर्ष 2025 में शहरी कामकाजी लोगों पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 39 प्रतिशत लोग कम फाइबर वाला आहार लेते हैं, 36 प्रतिशत से अधिक लोग अधिक चीनी वाले खान-पान का पालन करते हैं, और 28 प्रतिशत से ज्यादा लोग नियमित रूप से मीठे पेय पदार्थों का सेवन करते हैं.

यह आदतें अब कभी-कभार नहीं, बल्कि रोजमर्रा का हिस्सा बन चुकी हैं. ऐसा आहार आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीवों की विविधता को कम करता है, जिससे शरीर में सूजन बढ़ती है, इम्यून सिस्टम अधिक संवेदनशील हो जाता है और मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है. नए शोधों में यह भी सामने आया है कि खराब आंत स्वास्थ्य धमनियों में प्लाक बनने और वसा के असंतुलित मेटाबॉलिज्म से भी जुड़ा हो सकता है.

हर साल छिन रहे आपके 11 दिन
इसका असर केवल शरीर तक सीमित नहीं है. आंतें शरीर में सेरोटोनिन के उत्पादन में अहम भूमिका निभाती हैं, जो नींद और मानसिक स्थिति को नियंत्रित करता है. भारत के वर्कप्लेस वेलबीइंग रिपोर्ट 2025 के अनुसार, खराब नींद के कारण हर कर्मचारी औसतन 11.3 कार्यदिवस प्रति वर्ष खो देता है.

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