Tuesday, 15 Sep 2026 | 11:26 AM

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दतिया में महिला से दहेज के लिए मारपीट का आरोप:लोको पायलट पति, सास और ससुर पर केस दर्ज

दतिया में महिला से दहेज के लिए मारपीट का आरोप:लोको पायलट पति, सास और ससुर पर केस दर्ज

दतिया में महोनाजाट गांव की रहने वाली 32 वर्षीय महिला ने पति, सास और ससुर पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने, मारपीट करने और जेवर ले जाने के आरोप लगाए हैं। महिला की शिकायत पर इंदरगढ़ पुलिस ने सोमवार को केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़िता ने बताया कि, उसकी शादी 16 फरवरी 2020 को भोपाल निवासी आशीष दीक्षित से हुई थी। आशीष लोको पायलट है। शादी में उसके पिता ने अपनी हैसियत के अनुसार नकद राशि, सोने-चांदी के जेवर और अन्य सामान दिया था। आरोप है कि शादी के कुछ दिन बाद से ही पति आशीष, ससुर घनश्याम दीक्षित और सास अशोक दीक्षित कम दहेज का ताना देकर उसे परेशान करने लगे। महिला के अनुसार, आरोपियों ने कई बार मारपीट की और अतिरिक्त 10 लाख रुपए की मांग करते रहे। वर्ष 2021 में बेटी होने के बाद भी प्रताड़ना कम नहीं हुई। परेशान होकर उसने यह बात अपने मायके वालों को बताई। जिन्होंने ससुराल पक्ष को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। खुशबू का कहना है कि 16 अप्रैल 2024 को उसका पति महोनाजाट आया और उसके साथ मारपीट कर जेवर लेकर चला गया। इसके बाद से ही उसे मायके में छोड़ रखा है और 10 लाख रुपए लाने की शर्त रखी जा रही है। हाल ही में रिश्तेदारों द्वारा फोन पर समझाने की कोशिश भी बेनतीजा रही। पीड़िता ने अपने पिता और भाई के साथ थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

क्या आईवीएफ वाकई 100 प्रतिशत सफल होता है? समझिए प्रक्रिया, लागत और सक्सेस रेट का पूरा हिसाब-किताब

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IVF Fertility Treatment: जब कपल्स फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के विकल्पों पर विचार करना शुरू करते हैं, तो आमतौर पर दो सवाल सबसे पहले सामने आते हैं, आईवीएफ कितना सफल है और आईवीएफ की लागत कितनी है? हालांकि, ये अलग-अलग सवाल लग सकते हैं, लेकिन ये एक-दूसरे से गहराई से जुड़े होते हैं. कई मामलों में, आईवीएफ की सफलता दर और लागत एक-दूसरे को उतना ही प्रभावित करती हैं, जितना लोग समझ नहीं पाते. इस संबंध को समझना कपल्स को फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के बारे में बेहतर निर्णय लेने में मदद कर सकता है और ऐसे फर्टिलिटी सेंटर का चयन करने में सहायक होता है,जो सफल परिणामों के साथ-साथ उनके निवेश के लिए उचित मूल्य भी प्रदान करे. आईवीएफ एक मल्टी-स्टेप फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के रूप में आईवीएफ या इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (In Vitro Fertilization), कोई एकल प्रक्रिया नहीं है. यह एक सावधानीपूर्वक योजनाबद्ध प्रक्रिया है, जिसमें कई चरण शामिल होते हैं. उपचार आमतौर पर अंडाशयों को अंडे बनाने के लिए उत्तेजित करने से शुरू होता है. इसके बाद इन अंडों को निकाला जाता है और एक विशेष प्रयोगशाला में शुक्राणुओं के साथ निषेचित किया जाता है. जब भ्रूण विकसित हो जाते हैं, तो उनमें से एक या अधिक को गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया का हर चरण अंतिम परिणाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. उन्नत प्रयोगशाला तकनीक से लेकर अनुभवी डॉक्टरों और एम्ब्रियोलॉजिस्ट तक, कई अहम पहलू मिलकर सफलता दर को बेहतर बनाने में योगदान देते हैं. जैसा कि फर्टिलिटी विशेषज्ञ अक्सर बताते हैं:“आईवीएफ एक ऐसी यात्रा है, जो कई चरणों से मिलकर बनती है और हर चरण की सफलता अंतिम परिणाम में योगदान देती है.” सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. आईवीएफ की सफलता दर को समझना आईवीएफ की सफलता दर का मतलब है, इस उपचार के माध्यम से गर्भधारण होने की संभावना. यह दर कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे उम्र, प्रजनन स्वास्थ्य और क्लिनिक की विशेषज्ञता. जब कपल्स फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के बारे में जानकारी जुटाते हैं, तो वे अक्सर अलग-अलग क्लिनिक की आईवीएफ सफलता दर की तुलना करते हैं ताकि यह समझ सकें कि किन केंद्रों के परिणाम बेहतर हैं. हालांकि, सफलता दर को हमेशा संदर्भ में समझना चाहिए. यह उपचारित आयु समूह या मामले की जटिलता के अनुसार अलग-अलग हो सकती है. आज कई प्रतिष्ठित फर्टिलिटी सेंटर उपचार को अधिक सुलभ बनाने के लिए पारदर्शी मूल्य निर्धारण, पर्सनलाइज़्ड ट्रीटमेंट प्लांस और लचीले भुगतान विकल्प भी प्रदान कर रहे हैं, जिससे अपनी फर्टिलिटी जर्नी शुरू करने वाले कपल्स को सहायता मिलती है. Birla Fertility & IVF जैसे केंद्रों में ध्यान केवल उन्नत फर्टिलिटी ट्रीटमेंट प्रदान करने पर ही नहीं, बल्कि कपल्स को उपचार की योजना और लागत के बारे में स्पष्ट मार्गदर्शन देने पर भी होता है. आधुनिक तकनीक, अनुभवी विशेषज्ञों और व्यक्तिगत देखभाल के साथ, यह केंद्र उपचार की वहनीयता और मजबूत क्लिनिकल परिणामों के बीच सही संतुलन प्रदान करने का प्रयास करता है. सफलता दर कुल आईवीएफ लागत को कैसे प्रभावित करती है? भारत में कई कपल्स प्रति चक्र आईवीएफ लागत पर ध्यान देते हैं, जो स्वाभाविक है. फर्टिलिटी ट्रीटमेंट एक महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णय होता है. हालांकि, आईवीएफ की वास्तविक लागत अक्सर इस बात पर निर्भर करती है कि गर्भधारण के लिए कितने चक्रों की आवश्यकता पड़ती है. उदाहरण के लिए, यदि किसी फर्टिलिटी सेंटर की सफलता दर अधिक है, तो कपल्स को कम उपचार चक्रों की आवश्यकता हो सकती है. इससे कुल लागत और बार-बार उपचार से होने वाला भावनात्मक तनाव दोनों कम हो सकते हैं. वहीं, कम सफलता दर वाले केंद्रों में कई प्रयास करने पड़ सकते हैं, जिससे कुल खर्च बढ़ जाता है. अध्ययनों के अनुसार, भारत में औसत आईवीएफ सफलता दर प्रति चक्र लगभग 30% से 50% के बीच होती है, जो उम्र, प्रजनन स्थिति और क्लिनिक की विशेषज्ञता जैसे कारकों पर निर्भर करती है. इनमें उम्र एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. आयु समूह के अनुसार आईवीएफ सफलता दर आयु समूह प्रति चक्र औसत सफलता दर मुख्य जानकारी35 वर्ष से कम 40%-50% बेहतर अंडाणु गुणवत्ता से परिणाम बेहतर होते हैं.35-37 वर्ष 35%-40% सफलता दर अच्छी रहती है, लेकिन धीरे-धीरे कम हो सकती है.38-40 वर्ष 25%-30% उम्र के साथ अंडाणुओं की गुणवत्ता और संख्या घटने लगती है.40 वर्ष से अधिक 10%-20% आईवीएफ संभव है, लेकिन सफलता दर अपेक्षाकृत कम होती है.क्योंकि आईवीएफ में कभी-कभी कई प्रयास करने पड़ते हैं, इसलिए समय के साथ कुल सफलता दर बढ़ सकती है. शोध बताते हैं कि 35 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में तीन आईवीएफ चक्रों के बाद कुल सफलता दर लगभग 60%-80% तक पहुंच सकती है.  यही कारण है कि आईवीएफ लागत और सफलता दर के बीच संबंध इतना महत्वपूर्ण है. यदि कम चक्रों में सफलता मिल जाती है, तो कुल वित्तीय बोझ काफी कम हो सकता है. जैसा कि फर्टिलिटी विशेषज्ञ अक्सर सलाह देते हैं:“आईवीएफ उपचार का मूल्यांकन करते समय केवल एक चक्र की लागत नहीं, बल्कि कुल सफलता की संभावना पर भी ध्यान देना चाहिए.” इस संतुलन को समझकर कपल किफायती और प्रभावी आईवीएफ उपचार का चयन कर सकते हैं और अपनी फर्टिलिटी जर्नी के लिए सही निर्णय ले सकते हैं. आईवीएफ सफलता दर को प्रभावित करने वाले कारक आईवीएफ उपचार के परिणाम कई कारकों पर निर्भर करते हैं. इन कारकों को समझने से कपल्स को अपनी प्रजनन यात्रा बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है. उम्र उम्र प्रजनन क्षमता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. 35 और 40 वर्ष के बाद आईवीएफ सफलता दर कम हो सकती है क्योंकि समय के साथ अंडाणुओं की गुणवत्ता और संख्या घटती है. हालांकि, आधुनिक उपचार और व्यक्तिगत देखभाल के माध्यम से कई कपल अभी भी सफल परिणाम प्राप्त कर सकते हैं. अंडाणु और शुक्राणु की गुणवत्ता स्वस्थ अंडाणु और शुक्राणु भ्रूण के विकास के लिए आवश्यक होते हैं. इसलिए, विशेषज्ञ उपचार योजना बनाने से पहले दोनों पार्टनर्स का मूल्यांकन करते हैं. तकनीक और प्रयोगशाला मानक उन्नत एम्ब्रियोलॉजी लैब और कुशल एम्ब्रियोलॉजिस्ट भ्रूण के विकास और चयन को बेहतर बनाते हैं, जिससे सफलता दर बढ़ती है. व्यक्तिगत उपचार दृष्टिकोण हर कपल्स की स्थिति अलग होती है. जो क्लिनिक पर्सनलाइज़्ड उपचार योजनाएं बनाते हैं, वे अक्सर बेहतर

इजराइल ने CNN पत्रकारों से बदसलूकी पर बटालियन सस्पेंड की:सैनिकों ने हिरासत में लिया था; ऑपरेशन से हटाकर ट्रेनिंग में भेजा

इजराइल ने CNN पत्रकारों से बदसलूकी पर बटालियन सस्पेंड की:सैनिकों ने हिरासत में लिया था; ऑपरेशन से हटाकर ट्रेनिंग में भेजा

इजराइली सेना ने वेस्ट बैंक में CNN के पत्रकारों से बदसलूकी और हिरासत में लेने के मामले में एक पूरी बटालियन को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही रिजर्व बटालियन की सभी ऑपरेशनल गतिविधियां सस्पेंड कर दी हैं। सेना के मुताबिक इस बटालियन को तुरंत प्रभाव से वेस्ट बैंक से हटाकर ट्रेनिंग के लिए भेज दिया गया है। जांच पूरी होने तक यह यूनिट किसी भी ऑपरेशन में शामिल नहीं होगी। यह घटना पिछले हफ्ते फिलिस्तीनी गांव तायासिर में हुई थी, जहां CNN की टीम रिपोर्टिंग कर रही थी। आरोप है कि सैनिकों ने टीम को हिरासत में लिया और एक फोटो जर्नलिस्ट के साथ मारपीट भी की, जिससे उसका कैमरा टूट गया। इजराइली सेना ने कहा है कि बटालियन को प्रोफेशनल और एथिकल ट्रेनिंग दी जाएगी और मामले में शामिल सैनिकों के खिलाफ अलग से कार्रवाई भी की जाएगी। पत्रकारों से बदसलूकी का वीडियो… इजराइली सैनिकों ने पत्रकार का गला पकड़ा 26 मार्च को वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनी गांव तयासिर में CNN की टीम रिपोर्टिंग कर रही थी। कुछ समय पहले ही वहां इजराइली सेटलर्स ने हमला किया था। उसी के बाद की स्थिति दिखाने के लिए CNN के पत्रकार जेरेमी डायमंड अपनी टीम के साथ गांव पहुंचे थे। आसपास टूटे हुए ढांचे, बिखरा सामान और डरे हुए स्थानीय लोग उस हमले की कहानी बयान कर रहे थे। टीम कैमरे पर हालात रिकॉर्ड कर रही थी और चश्मदीदों से बात कर रही थी। तभी अचानक वहां इजरायली सैनिकों की टीम पहुंची। शुरुआत में सैनिकों ने टीम से सवाल-जवाब किए, लेकिन माहौल जल्दी ही तनावपूर्ण हो गया। कुछ ही देर में सैनिकों ने CNN टीम को आगे बढ़ने से रोक दिया और उन्हें वहीं रोककर हिरासत में ले लिया। इसी दौरान हालात और बिगड़ गए। आरोप है कि एक सैनिक ने फोटो जर्नलिस्ट सिरिल थियोफिलॉस को पकड़कर उनका गला जकड़ लिया। अचानक हुए इस हमले से वह संतुलन खो बैठे और जमीन पर गिर गए। इस धक्का-मुक्की में उनका कैमरा भी टूट गया। अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठन ने हमले की निंदा की वेस्ट बैंक में CNN की टीम के साथ हुई बदसलूकी को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठन फॉरेन प्रेस एसोसिएशन (FPA) ने निंदा की। संगठन ने इस घटना को हिंसक हमला बताते हुए प्रेस की आजादी पर सीधा हमला करार दिया। संगठन ने आरोप लगाया कि सैनिकों ने पत्रकारों और वहां मौजूद लोगों पर बंदूक तान दी, जबकि पत्रकार अपनी पहचान बता चुके थे। इतना ही नहीं, टीम को शूटिंग बंद करने के लिए मजबूर किया गया और कैमरा छीनने की धमकी भी दी गई। संगठन ने इस मामले की जांच की मांग करते हुए कहा कि यह घटना दिखाती है कि मीडिया के प्रति दुश्मनी बढ़ रही है, जो बेहद चिंताजनक है। हरेदी समुदाय के लिए बनाई गई नेत्जाह यूनिट इजराइल में हर किसी के लिए जरूरी रूप से सेना में शामिल होने का नियम है। पुरुषों को लगभग तीन साल और महिलाओं को दो साल सेना में सेवा देनी होती है। यह यूनिट इजराइली सेना की कफिर ब्रिगेड का हिस्सा है। 1948 में जब इस देश का गठन हुआ था। तब हरेदी समुदाय से आने वाले 400 अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पुरुषों को सेना में सेवा से छूट दी थी। इसका मकसद था कि ये लोग धार्मिक शिक्षा और यहूदी परंपराओं को बचाने का काम जारी रख सकें। धीरे-धीरे हरेदी समुदाय के लोगों का आंकड़ा बढ़ता गया जो सेना में शामिल होने से बचते रहे। इससे बाकी समुदाय नाराज रहने लगे। इसके बाद सरकार ने 1999 में नेत्जाह येहूदा यूनिट बनाई जहां वे अपनी धार्मिक पहचान बनाए रखते हुए सेना में सेवा दे सकें। यह यूनिट बाकी सैन्य यूनिट्स से थोड़ी अलग है। इसमें महिलाएं शामिल नहीं होतीं। माहौल पूरी तरह से धार्मिक वाला रखा जाता है और कोषेर (धार्मिक नियमों वाला) खाना दिया जाता है। ज्यादातर वेस्ट बैंक (पश्चिमी तट) इलाके में तैनाती रहती है। सुरक्षा और गश्त जैसे काम करती है। हालांकि इस यूनिट में हरेदी के अलावा भी दूसरे समुदाय के लोग शामिल होते हैं। हालांकि आबादी सबसे ज्यादा हरेदी समुदाय के लोगों की होती है। विवादों में रही है यह यूनिट

अमेरिका से आए युवक की थार से कुचलकर हत्या:कुरुक्षेत्र में जीजा के दोस्त की शादी में आया, डीजे पर डांस करते हुए कहासुनी हुई

अमेरिका से आए युवक की थार से कुचलकर हत्या:कुरुक्षेत्र में जीजा के दोस्त की शादी में आया, डीजे पर डांस करते हुए कहासुनी हुई

हरियाणा के कुरुक्ष्रेत्र में एक युवक की थार से कुचलकर हत्या कर दी गई। युवक इस्माइलाबाद में अपने जीजा के दोस्त की शादी में आया था। यहां डीजे पर डांस करते समय उसकी दूसरे युवक से कहासुनी हो गई। पहले तो लोगों ने इनका झगड़ा शांत करा दिया। शादी के बाद आरोपी ने घटना को अंजाम दिया। मृतक की पहचान पिहोवा के खेड़ी शीशगरां के साहिल (30) के तौर पर हुई है। साहिल पिछले 7 साल से अमेरिका में रह रहा था। वह एक महीने पहले ही भारत आया था। घर में साहिल की शादी की बात चल रही थी। इस्माइलाबाद पुलिस ने परिवार की शिकायत पर युवक के खिलाफ केस दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। अब सिलसिलेवार ढंग से जानिए पूरा मामला… डीजे पर गाने को लेकर कहासुनी हुई इस्माइलाबाद में गुरु गोबिंद सिंह कॉलोनी निवासी शैमिन पंजरथ ने बताया कि मेरा साला साहिल कुमार रविवार रात शादी के प्रोग्राम में शामिल होने आया था। इस प्रोग्राम में उसकी कॉलोनी का दीपांशु भी आया हुआ था। दीपांशु और साहिल DJ पर डांस कर रहे थे। यहां गाने को लेकर दीपांशु और साहिल के बीच थोड़ी बहस हुई। तब उनको समझाकर शांत कर दिया था। जीजा-साले को थार से टक्कर मारी शैमिन ने बताया कि प्रोग्राम के बाद रात करीब 12:40 बजे मैं अपने साले साहिल कुमार, दोस्त सिमरदीप सिंह, रमन नागपाल और विपुल बजाज के साथ हाईवे पर चम्मू चौक पर खड़ा था। तभी सामने से काली थार (HR 31 W 2645) आई, जिसने साहिल के साथ-साथ मुझे जोरदार टक्कर मार दी। इसमें उनको भी चोटें लगीं। बैक कर थार साहिल पर चढ़ाई शैमिन ने आगे बताया कि टक्कर मारने के बाद दीपांशु ने उनके पास गाड़ी रोकी और शीशा नीचे किया। तब मैंने दीपांशु से पूछा कि मारना चाहते हो क्या? तभी दीपांशु ने जवाब दिया, अच्छा बच गया और फिर गाड़ी पीछे करके दोबारा साहिल के ऊपर चढ़ा दी। उसके बाद दीपांशु मौके से भाग गया। घायल साहिल को गाड़ी से अंबाला के प्राइवेट अस्पताल में पहुंचाया। यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इंडियाना स्टोर पर काम करता था साहिल साहिल के छोटे भाई लविश कुमार ने बताया कि बड़ा भाई साहिल अमेरिका के इंडियाना में स्टोर पर काम करता था। इससे पहले अमेरिका में ड्राइवरी करता था। वहां से आने के बाद साहिल पहली बार अपनी बहन से मिलने इस्माइलाबाद गया था। SHO बोले- आरोपी की तलाश कर रहे इस्माइलाबाद थाने के SHO जगदीश कुमार ने बताया कि पुलिस ने आरोपी दीपांशु के खिलाफ BNS की धारा 103(1) और 109(1) के तहत केस दर्ज कर लिया है। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के हवाले कर दिया। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

‘उन्हें मानसिक डॉक्टर की जरूरत है’: नवीन पटनायक ने बीजू पटनायक पर बीजेपी सांसद की ‘अपमानजनक’ टिप्पणी की आलोचना की | राजनीति समाचार

RBSE 12th Result 2026 Date Live: Scorecards soon at rajeduboard.rajasthan.gov.in.

आखरी अपडेट:30 मार्च, 2026, 12:38 IST बीजू पटनायक के खिलाफ विवादित टिप्पणी के बाद निशिकांत दुबे को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। बीजद नेता नवीन पटनायक; भाजपा सांसद निशिकांत दुबे (दाएं) (छवि: पीटीआई/फ़ाइल) भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक के बारे में विवादास्पद टिप्पणी करने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है, जिस पर उनके बेटे और बीजद नेता नवीन पटनायक ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। दुबे की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, नवीन पटनायक ने कहा कि वह अपने पिता के बारे में दिए गए “अपमानजनक” बयानों से “आश्चर्यचकित” थे। उन्होंने कहा, “बीजू बाबू के बारे में कही गई अपमानजनक बातें सुनकर मुझे आश्चर्य हुआ। मुझे नहीं लगता कि उन्हें पता है कि प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें चीनी संघर्ष के दौरान रणनीति में मदद करने के लिए दिल्ली में अपने बगल में एक कार्यालय दिया था, जब वह ओडिशा के मुख्यमंत्री थे। मैं तब लगभग 13 साल का था, लेकिन मुझे याद है कि बीजू बाबू चीनी हमले से कितने गुस्से में थे और उन्होंने इसे पीछे हटाने के लिए कितना कुछ किया था।” वीडियो | भुवनेश्वर: ओडिशा के पूर्व सीएम नवीन पटनायक ने अपने पिता बीजू पटनायक पर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “बीजू बाबू के बारे में कही गई अपमानजनक बातें सुनकर मुझे आश्चर्य हुआ। मुझे नहीं लगता कि वह जानते हैं कि प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें… pic.twitter.com/XnXrY03ZZ1– प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (@PTI_News) 30 मार्च 2026 ओडिशा में विपक्ष के नेता ने यहां तक ​​सुझाव दिया कि भाजपा सांसद को “मानसिक चिकित्सक” से परामर्श लेना चाहिए। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि इस तरह की अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए सांसद को किसी मानसिक चिकित्सक के ध्यान की जरूरत है।” दुबे ने बीजू पटनायक के बारे में क्या कहा? विवाद शुक्रवार को शुरू हुआ, जब दुबे ने एक्स पर आरोपों की एक श्रृंखला साझा की, जिसमें दावा किया गया कि नेहरू-गांधी परिवार ने 1960 के दशक के दौरान “अमेरिका के दलाल” के रूप में काम किया था। दुबे ने ट्वीट किया, “अमेरिका के दलाल नेहरू-गांधी परिवार, आज ही के दिन यानी 27 मार्च 1963 को ओडिशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री बीजू पटनायक जी अमेरिका पहुंचे थे। चीन के साथ 1962 का युद्ध हमने अमेरिका के इशारे पर और अमेरिका के पैसे से लड़ा था।” वरिष्ठ भाजपा नेता ने आगे आरोप लगाया कि बीजू पटनायक ने प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू और सीआईए के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम किया था, चीन के साथ 1962 के युद्ध के दौरान सहायता प्रदान की और भारत के रणनीतिक मामलों में अमेरिकी भागीदारी को सुविधाजनक बनाया। उनके पोस्ट में दलाई लामा के भाई और अमेरिकी सहायता के बारे में दावे शामिल थे, और 1955 और 1962 के बीच चुनावों में अमेरिका से कांग्रेस को कथित वित्तीय सहायता का संदर्भ दिया गया था। दुबे ने आरोप लगाया, “दलाई लामा के भाई अमेरिका के संपर्क में थे; 1959 में दलाई लामा अमेरिकी मदद से भारत आए थे। बीजू पटनायक जी नेहरू जी और अमेरिका/सीआईए के बीच महत्वपूर्ण कड़ी थे।” दुबे की टिप्पणी पर सस्मित पात्रा ने संसदीय पैनल से इस्तीफा दिया इस टिप्पणी की बीजद के कई नेताओं ने तीखी आलोचना की। इससे पहले शनिवार को, सस्मित पात्रा ने अपनी टिप्पणी के विरोध में संचार और आईटी पर संसदीय स्थायी समिति से इस्तीफा दे दिया, जिसके अध्यक्ष दुबे हैं। पात्रा ने टिप्पणियों को “अपमानजनक, गलत और गैर-जिम्मेदाराना आक्षेप” बताते हुए कहा कि वह किसी ऐसे व्यक्ति के अधीन काम करना जारी नहीं रख सकते जिसने एक राष्ट्रीय आइकन के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की। जगह : भुवनेश्वर, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 30 मार्च, 2026, 12:38 IST समाचार राजनीति ‘उन्हें मानसिक डॉक्टर की जरूरत है’: नवीन पटनायक ने बीजू पटनायक पर बीजेपी सांसद की ‘अपमानजनक’ टिप्पणी की आलोचना की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)राजनीतिक विवाद निशिकांत दुबे बीजू पटनायक नवीन पटनायक(टी)बीजेपी सांसद की विवादित टिप्पणी बीजू पटनायक(टी)नवीन पटनायक की निशिकांत दुबे पर प्रतिक्रिया(टी)ओडिशा की राजनीति बीजेडी बीजेपी झड़प(टी)ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री पर टिप्पणी(टी)मानसिक चिकित्सक टिप्पणी राजनीतिक विवाद(टी)जवाहरलाल नेहरू बीजू पटनायक चीनी संघर्ष(टी)ओडिशा में विपक्ष के नेता की प्रतिक्रिया

बुरहानपुर में अध्यापक संगठनों ने बनाया संयुक्त शिक्षा मोर्चा:प्रथम नियुक्ति से सेवा गणना, TET रद्द करने की मांग पर आंदोलन

बुरहानपुर में अध्यापक संगठनों ने बनाया संयुक्त शिक्षा मोर्चा:प्रथम नियुक्ति से सेवा गणना, TET रद्द करने की मांग पर आंदोलन

मध्य प्रदेश के अध्यापक संगठनों ने 29 मार्च को भोपाल के गांधी भवन में एक संयुक्त बैठक की। इस बैठक में सभी प्रदेश अध्यक्षों की सहमति से एक प्रदेश स्तरीय चरणबद्ध आंदोलन पर निर्णय लिया गया। आंदोलन का मुख्य उद्देश्य प्रथम नियुक्ति दिनांक से सेवा गणना और टीईटी (TET) परीक्षा को निरस्त करवाना है। साथ ही, सरकार से सुप्रीम कोर्ट में शिक्षकों का पक्ष रखने की मांग भी की गई है। मोर्चा के सदस्य ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित ने बताया कि आंदोलन के तहत 8 अप्रैल को जिला स्तर पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर धरना आयोजित कर जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा। अंत में, 18 अप्रैल को भोपाल में एक सामूहिक धरना प्रदर्शन करने पर सहमति बनी है। इस संयुक्त मोर्चे में कई प्रमुख अध्यापक संगठन और उनके पदाधिकारी शामिल हैं। इनमें शिल्पी सिवान (प्रदेश अध्यक्ष, आजाद अध्यापक संघ), मनोहर दुबे (प्रदेश अध्यक्ष, प्रांतीय शिक्षक संघ), जगदीश यादव (प्रदेश अध्यक्ष, राज्य शिक्षक संघ), राकेश दुबे (प्रदेश अध्यक्ष, शासकीय शिक्षक संगठन), भरत पटेल (प्रदेश अध्यक्ष, आजाद अध्यापक शिक्षक संघ), राकेश नायक (प्रदेश अध्यक्ष, राज्य शिक्षक कांग्रेस), शालिगराम चौधरी (प्रदेश अध्यक्ष, राज्य अध्यापक संघ), परमानंद डेहरिया (प्रदेश अध्यक्ष, NMOPS), डीके सिंगोर (प्रदेश अध्यक्ष, ट्रायबल वेलफेयर एसोसिएशन), राकेश पटेल (प्रदेश अध्यक्ष, गुरुजी शिक्षक संघ), रमाशंकर पांडे (प्रदेश अध्यक्ष, नवीन शिक्षक गुरुजी संघ), विनोद राठौर (महासचिव, PMUMS), पवन खरे (कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष, PMUMS), राजिक कुरैशी (प्रदेश अध्यक्ष, मध्यप्रदेश शिक्षक अध्यापक संघ), वीरेंद्र पटेल, भरत भार्गव (प्रदेश अध्यक्ष, अध्यापक अधिकार संघ), महेश भादे (प्रदेश अध्यक्ष, अध्यापक संघर्ष समिति) और राजा भैय्या गुर्जर (प्रदेश अध्यक्ष, क्रांतिकारी जनशिक्षक मोर्चा) प्रमुख हैं। मंडी कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर संतोष सिंह दीक्षित ने भी संयुक्त शिक्षा मोर्चा को अपना सहयोग और समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि वे कर्मचारी हित में शिक्षकों के साथ खड़े हैं।

जनगणना 2026: पहले चरण के लिए 33 सवाल तय:ऑनलाइन पोर्टल पर भी जानकारी दे सकेंगे; लिव-इन कपल को शादीशुदा का दर्जा मिलेगा

जनगणना 2026: पहले चरण के लिए 33 सवाल तय:ऑनलाइन पोर्टल पर भी जानकारी दे सकेंगे; लिव-इन कपल को शादीशुदा का दर्जा मिलेगा

केंद्र सरकार ने 2026 की जनगणना के पहले चरण के लिए 33 सवाल जारी किए हैं, जो 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो रहा है। इसमें कहा गया है कि स्थिर रिश्ते में रहने वाले लाइव-इन कपल्स को भी शादीशुदा माना जाएगा। ऐसा तब ही होगा जब कपल मानेगा की उनका रिश्ता लंबा चलने वाला है। पहले चरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया गया है, जहां लोग खुद अपनी जानकारी भर सकेंगे। उनकी मदद के लिए इस पोर्टल पर FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) भी दिए गए हैं। यह चरण ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ कहलाता है। इसका मकसद देश में घरों और बुनियादी सुविधाओं की जानकारी जुटाना है, ताकि सरकार बेहतर योजनाएं बना सके। दूसरे चरण में आबादी से जुड़ी डिटेल जानकारी ली जाएगी। पहला फेज 1 अप्रैल 2026 से केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने 8 जनवरी को बताया था कि देश में होने वाली जनगणना 2027 का पहला फेज 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच किया जाएगा। हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने यहां 30 दिनों में यह काम पूरा करेंगे। सरकार ने यह भी कहा कि घरों की लिस्टिंग शुरू होने से 15 दिन पहले लोगों को खुद से जानकारी भरने (सेल्फ एन्यूमरेशन) का विकल्प भी दिया जाएगा। दरअसल जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से इसे टाल दिया गया था, जो अब 2027 में पूरी होगी। जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी सरकार ने बताया कि इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। करीब 30 लाख कर्मचारी मोबाइल एप के जरिए जानकारी जुटाएंगे। मोबाइल एप, पोर्टल और रियल टाइम डेटा ट्रांसफर से जनगणना बहुत हद तक पेपरलेस होगी। ये ऐप Android और iOS दोनों पर काम करेंगे। जाति से जुड़ा डेटा भी डिजिटल तरीके से इकट्ठा किया जाएगा। आजादी के बाद पहली बार जनगणना में जाति की गिनती शामिल होगी। इससे पहले अंग्रेजों के समय 1931 तक जाति आधारित जनगणना हुई थी। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने अप्रैल में लिया था। 2011 की पिछली जनगणना के अनुसार, भारत की आबादी करीब 121 करोड़ थी, जिसमें लगभग 51.5% पुरुष और 48.5% महिलाएं थीं। मैप पर हर घर ‘डिजी डॉट’ बनेगा, इसके 5 फायदे होंगे 1. आपदा में सटीक राहत- जियो टैगिंग से बना डिजिटल लेआउट मैप बादल फटने, बाढ़ या भूकंप जैसी आपदा के समय उपयोगी साबित होगा। सुदूर हिमालयी क्षेत्र में बसे किसी गांव में बादल फटने जैसी घटना के समय इस मैप से तुरंत पता चल जाएगा कि किस घर में कितने लोग रहते हैं। होटलों में क्षमता के हिसाब से कितने लोग रहे होंगे। इस ब्योरे से बचाव के लिए जरूरी तमाम नौका, हेलिकॉप्टर, फूड पैकेट आदि की व्यवस्था करने में मदद मिलेगी। 2. परिसीमन में मदद मिलेगी- राजनीतिक सीमाएं जैसे संसदीय या विधानसभा क्षेत्रों का युक्तिसंगत तरीके से निर्धारण करने में भी इससे मदद मिलेगी। जियो टैगिंग से तैयार मैप से यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि क्षेत्र में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र का संतुलित बंटवारा कैसे हो। समुदायों को ऐसे न बांट दिया जाए कि एक मोहल्ला एक क्षेत्र में और दूसरा मोहल्ला किसी अन्य क्षेत्र में शामिल हो जए। घरों के डिजी डॉट से डिलिमिटेशन की प्रक्रिया में आसानी होगी। 3. शहरी प्लानिंग में आसानी- शहरों में सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों या पार्कों की प्लानिंग करने में भी यह मैप उपयोगी साबित होगा। अगर किसी जगह के घरों के डिजिटल लेआउट में बच्चों की अधिकता होगी तो पार्क और स्कूल प्राथमिकता से बनाने की योजना तैयार की जा सकेंगी। यदि किसी बस्ती में कच्चे मकानों या खराब घरों की अधिकता दिखेगी तो वहां किसी मेडिकल इमरजेंसी के समय तत्काल मोबाइल राहत वैन भेजी जा सकेंगी। 4. शहरीकरण और पलायन दर का डेटा मिलेगा- इस जनगणना के दस साल बाद होनी वाली जनगणना में डिजिटल मैप के परिवर्तन आसानी से दर्ज किए जा सकेंगे। देश के विभिन्न हिस्सों में शहरीकरण की दर और पलायन के क्षेत्रों की मैपिंग की तुलना सटीक ढंग से की जा सकेगी। 5. मतदाता सूची से डुप्लीकेट नाम हट जाएंगे- आधार की पहचान के साथ जियो टैगिंग मतदाता सूची को सटीक और मजबूत बनाने में सहायक होगी। जब वोटर किसी भौगोलिक स्थान से डिजिटली जुड़ा होगा तो दोहरे पंजीकरण के समय उसके मूल निवास का पता भी सामने आएगा। …………………… ये खबर भी पढ़ें… देश में आजादी के बाद पहली बार जातिगत जनगणना होगी, बिहार चुनाव से पहले केंद्र का फैसला देश में आजादी के बाद पहली बार जाति जनगणना कराई जाएगी। केंद्रीय कैबिनेट ने जाति जनगणना को मंजूरी दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इसे मूल जनगणना के साथ ही कराया जाएगा। देश में इसी साल के आखिर में बिहार विधानसभा के चुनाव होने हैं। पूरी खबर पढ़ें…

अमित शाह के बयान पर ममता बनर्जी ने पलटवार करते हुए कहा- ‘मैं कई बार मौत के मुंह से लौटती हूं, मुझे…’

अमित शाह के बयान पर ममता बनर्जी ने पलटवार करते हुए कहा- 'मैं कई बार मौत के मुंह से लौटती हूं, मुझे...'

अमित शाह के बयान पर ममता बनर्जी ने दिया जवाब: पश्चिम बंगाल चुनाव की तारीख जैसे-जैसे ताजा आ रही है, वैसे-वैसे राज्य में हलचल तेज हो रही है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार यानी 29 मार्च को केंद्रीय अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने साल 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान अपनी चोट को लेकर टिप्पणी की थी। ममता ने कहा कि उन्होंने उनकी मेडिकल रिपोर्ट देखी है, जिसमें उनकी चोट की पुष्टि दर्ज है। अमित शाह और ममता बनर्जी के बीच जंज़ी जंग टीएमसी सरकार के खिलाफ विपक्ष जारी करते हुए अमित शाह ने ममता बनर्जी पर ‘हमें पीड़ित होने की राजनीति’ करने का आरोप लगाया था. उन्होंने अपने बयान में कहा था कि वे कभी अपनी चोट की बात करते हैं, तो कभी चुनाव आयोग को कोसती हैं, लेकिन अब बंगाल की जनता उनकी ‘विक्टिम कार्ड’ वाली राजनीति को समझ गई है। अमित शाह ने पलटवार पर यही बयान देते हुए ममता बनर्जी ने एक रैली के दौरान कहा, ‘वे कहते हैं कि मैं चुनाव के समय धारधार घूमती हूं। मैं कई बार मौत के मुंह से वापस लौटता हूं। ‘वस्तु चिकित्सक की रिपोर्ट देखें।’ ममता ने आगे सवाल करते हुए कहा कि क्या आपने साल 2021 के चुनाव में मेरे पैर को छुआ था? मैंने एक बार फिर से प्रचार-प्रसार किया। क्या आप मुझे मारने की योजना बना रहे हैं?’ अपनी सरकार के ‘पुराने कर्मों’ के लिए एनामेल जारी करने की बात पर भी ममता बनर्जी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें अपने ‘पुराने कर्मों’ के लिए अनावृत्त जारी करना चाहिए। हालांकि इस दौरान उन्होंने अमित शाह का नाम नहीं लिया. ममता बनर्जी ने अमित शाह पर सैद्धांतिक अध्ययन किया ममता बनर्जी ने पिछले साल अमेरिका में डोनाल्ड प्रतिबंधित प्रशासन द्वारा अवैध भारतीय दूतावास के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अमित शाह पर डिपोर्टेशन का ज़िक्र किया था। उन्होंने कहा, ‘जब गुजरातियों को अमेरिका से कमर में भरकर भारत वापस भेजा जा रहा था, तब आप कहां थे? उस रैली में ममता बनर्जी ने खुद को ‘उम्मीदवार’ के रूप में जनता से उन पर भरोसा करने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘तुम्हें ये देखने की जरूरत नहीं है कि प्रतियोगी कौन है। मैं ही उम्मीदवार हूं. कृपया विश्वास करें और वोट करें।’ (टैग्सटूट्रांसलेट)राजनीतिक समाचार(टी)टीएमसी(टी)बीजेपी(टी)ममता बनर्जी(टी)अमित शाह(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव की तारीख जिलेवार 2026(टी)2026 पश्चिम बंगाल चुनाव उम्मीदवार(टी)2026 पश्चिम बंगाल में वोट तारीख और समय(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 बीजेपी उम्मीदवार (टी) राजनीतिक समाचार (टी) टीएमसी (टी) बीजेपी (टी) ममता बनर्जी (टी) अमित शाह (टी) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 (टी) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (टी) पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 (टी) पश्चिम बंगाल चुनाव की तारीख (ज़िलावर) 2026 (टी) 2026 पश्चिम बंगाल चुनाव के उम्मीदवार (टी) 2026 पश्चिम बंगाल में मतदान की तारीख और समय (टी) पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 बीजेपी उम्मीदवार

सेवनियां में किसानों का प्रदर्शन, बोले-धोखे से जमीन हड़प रहे:पुलिस-पटवारी पर बटाईदारों से मारपीट करने का आरोप लगाया

सेवनियां में किसानों का प्रदर्शन, बोले-धोखे से जमीन हड़प रहे:पुलिस-पटवारी पर बटाईदारों से मारपीट करने का आरोप लगाया

सीहोर जिले के सेवनियां गांव में जमीन विवाद को लेकर किसानों ने सड़क पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों ने पुलिस पर बटाईदारों के साथ मारपीट करने और पटवारी पर बिना आदेश खेत में जबरन तारबंदी कराने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यह पूरी कार्रवाई गैरकानूनी तरीके से की गई है। किसानों के अनुसार, गांव के ही एक किसान हनुमंत सिंह ने अपनी कृषि भूमि करीब 14 साल पहले 11 लाख 75 हजार रुपये में पप्पू कौशल को बेची थी। अनुबंध के अनुसार पूरी रकम मिलने के बाद रजिस्ट्री होना थी, लेकिन आरोप है कि हनुमंत सिंह लगातार टालमटोल करते रहे और अब उसी जमीन को किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया। किसी और को कब्जा दिलाने की कोशिश की पप्पू कौशल का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2012 में यह जमीन खरीदी थी और तब से बटाईदारों के जरिए खेती कर रहे हैं। इसके बावजूद हाल ही में पटवारी और पुलिस बिना किसी आदेश के खेत पर पहुंची और जबरन सीमेंट के खंभे गाड़कर तारबंदी कर दी। विरोध करने पर बटाईदार दिलीप और हरिओम को धमकाते हुए पुलिस मंडी थाने ले गई। किसानों का आरोप है कि बिना किसी वैध दस्तावेज के उनके खेत का कब्जा किसी अन्य को दिलाने की कोशिश की गई। इस मामले को लेकर गांव के कई किसानों ने पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर को शिकायत भेजी है और निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

दिल्ली बॉर्डर से लश्कर का आतंकी गिरफ्तार:शब्बीर अहमद लोन ISI के इशार पर भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को अंजाद रहा था

दिल्ली बॉर्डर से लश्कर का आतंकी गिरफ्तार:शब्बीर अहमद लोन ISI के इशार पर भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को अंजाद रहा था

दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियों ने सोमवार को लश्कर-ए-तैयबा (Let) से जुड़े आतंकी शब्बीर अहमद लोन को दिल्ली बॉर्डर से गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह बांग्लादेश में बैठकर भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था। पुलिस के मुताबिक, वह दिल्ली, कोलकाता और तमिलनाडु में आतंकी गतिविधियों के लिए युवाओं की भर्ती करने की तैयारी में था। यह पूरा नेटवर्क पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर संचालित कर रहा था। 4 दिन पहले कश्मीर में लोन के 10 ठिकानों पर छापेमारी काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) ने 26 मार्च को शब्बीर के आतंकी मॉड्यूल की जांच के लिए कश्मीर के तीन जिलों, गांदरबल, शोपियां और श्रीनगर के 10 ठिकानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया था। CIK के मुताबिक, इस मामले के तार एक ट्रांजैक्शनल नेटवर्क से जुड़े पाए गए हैं, जिसमें मॉड्यूल को बांग्लादेश और पाकिस्तान में बैठे लश्कर-ए-तैयबा के हैंडलर्स से निर्देश मिल रहे थे। 2 महीनों से नजर रखे थीं सुरक्षा एजेंसियां पिछले सुरक्षा एजेंसियां 2 महीनों से शब्बीर की गतिविधियों पर नजर रखे थीं। लोन को इससे पहले 2007 में दिल्ली पुलिस ने आतंकवाद के आरोपों में गिरफ्तार किया था। 2019 में जमानत मिलने के बाद वह बांग्लादेश भाग गया था। खबर लगातार अपडेट की जा रही है…