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इजराइल ने CNN पत्रकारों से बदसलूकी पर बटालियन सस्पेंड की:सैनिकों ने हिरासत में लिया था; ऑपरेशन से हटाकर ट्रेनिंग में भेजा

इजराइल ने CNN पत्रकारों से बदसलूकी पर बटालियन सस्पेंड की:सैनिकों ने हिरासत में लिया था; ऑपरेशन से हटाकर ट्रेनिंग में भेजा

इजराइली सेना ने वेस्ट बैंक में CNN के पत्रकारों से बदसलूकी और हिरासत में लेने के मामले में एक पूरी बटालियन को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही रिजर्व बटालियन की सभी ऑपरेशनल गतिविधियां सस्पेंड कर दी हैं। सेना के मुताबिक इस बटालियन को तुरंत प्रभाव से वेस्ट बैंक से हटाकर ट्रेनिंग के लिए भेज दिया गया है। जांच पूरी होने तक यह यूनिट किसी भी ऑपरेशन में शामिल नहीं होगी। यह घटना पिछले हफ्ते फिलिस्तीनी गांव तायासिर में हुई थी, जहां CNN की टीम रिपोर्टिंग कर रही थी। आरोप है कि सैनिकों ने टीम को हिरासत में लिया और एक फोटो जर्नलिस्ट के साथ मारपीट भी की, जिससे उसका कैमरा टूट गया। इजराइली सेना ने कहा है कि बटालियन को प्रोफेशनल और एथिकल ट्रेनिंग दी जाएगी और मामले में शामिल सैनिकों के खिलाफ अलग से कार्रवाई भी की जाएगी। पत्रकारों से बदसलूकी का वीडियो… इजराइली सैनिकों ने पत्रकार का गला पकड़ा 26 मार्च को वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनी गांव तयासिर में CNN की टीम रिपोर्टिंग कर रही थी। कुछ समय पहले ही वहां इजराइली सेटलर्स ने हमला किया था। उसी के बाद की स्थिति दिखाने के लिए CNN के पत्रकार जेरेमी डायमंड अपनी टीम के साथ गांव पहुंचे थे। आसपास टूटे हुए ढांचे, बिखरा सामान और डरे हुए स्थानीय लोग उस हमले की कहानी बयान कर रहे थे। टीम कैमरे पर हालात रिकॉर्ड कर रही थी और चश्मदीदों से बात कर रही थी। तभी अचानक वहां इजरायली सैनिकों की टीम पहुंची। शुरुआत में सैनिकों ने टीम से सवाल-जवाब किए, लेकिन माहौल जल्दी ही तनावपूर्ण हो गया। कुछ ही देर में सैनिकों ने CNN टीम को आगे बढ़ने से रोक दिया और उन्हें वहीं रोककर हिरासत में ले लिया। इसी दौरान हालात और बिगड़ गए। आरोप है कि एक सैनिक ने फोटो जर्नलिस्ट सिरिल थियोफिलॉस को पकड़कर उनका गला जकड़ लिया। अचानक हुए इस हमले से वह संतुलन खो बैठे और जमीन पर गिर गए। इस धक्का-मुक्की में उनका कैमरा भी टूट गया। अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठन ने हमले की निंदा की वेस्ट बैंक में CNN की टीम के साथ हुई बदसलूकी को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठन फॉरेन प्रेस एसोसिएशन (FPA) ने निंदा की। संगठन ने इस घटना को हिंसक हमला बताते हुए प्रेस की आजादी पर सीधा हमला करार दिया। संगठन ने आरोप लगाया कि सैनिकों ने पत्रकारों और वहां मौजूद लोगों पर बंदूक तान दी, जबकि पत्रकार अपनी पहचान बता चुके थे। इतना ही नहीं, टीम को शूटिंग बंद करने के लिए मजबूर किया गया और कैमरा छीनने की धमकी भी दी गई। संगठन ने इस मामले की जांच की मांग करते हुए कहा कि यह घटना दिखाती है कि मीडिया के प्रति दुश्मनी बढ़ रही है, जो बेहद चिंताजनक है। हरेदी समुदाय के लिए बनाई गई नेत्जाह यूनिट इजराइल में हर किसी के लिए जरूरी रूप से सेना में शामिल होने का नियम है। पुरुषों को लगभग तीन साल और महिलाओं को दो साल सेना में सेवा देनी होती है। यह यूनिट इजराइली सेना की कफिर ब्रिगेड का हिस्सा है। 1948 में जब इस देश का गठन हुआ था। तब हरेदी समुदाय से आने वाले 400 अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पुरुषों को सेना में सेवा से छूट दी थी। इसका मकसद था कि ये लोग धार्मिक शिक्षा और यहूदी परंपराओं को बचाने का काम जारी रख सकें। धीरे-धीरे हरेदी समुदाय के लोगों का आंकड़ा बढ़ता गया जो सेना में शामिल होने से बचते रहे। इससे बाकी समुदाय नाराज रहने लगे। इसके बाद सरकार ने 1999 में नेत्जाह येहूदा यूनिट बनाई जहां वे अपनी धार्मिक पहचान बनाए रखते हुए सेना में सेवा दे सकें। यह यूनिट बाकी सैन्य यूनिट्स से थोड़ी अलग है। इसमें महिलाएं शामिल नहीं होतीं। माहौल पूरी तरह से धार्मिक वाला रखा जाता है और कोषेर (धार्मिक नियमों वाला) खाना दिया जाता है। ज्यादातर वेस्ट बैंक (पश्चिमी तट) इलाके में तैनाती रहती है। सुरक्षा और गश्त जैसे काम करती है। हालांकि इस यूनिट में हरेदी के अलावा भी दूसरे समुदाय के लोग शामिल होते हैं। हालांकि आबादी सबसे ज्यादा हरेदी समुदाय के लोगों की होती है।
विवादों में रही है यह यूनिट

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