Tuesday, 15 Sep 2026 | 03:29 PM

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बस किराया बढ़ा तो बुजुर्ग को पार्सल करने की कोशिश:बेंगलुरु में कूरियर खुला तो जिंदा निकला, पकड़ने जाने पर कहा- विरोध जता रहे थे

बस किराया बढ़ा तो बुजुर्ग को पार्सल करने की कोशिश:बेंगलुरु में कूरियर खुला तो जिंदा निकला, पकड़ने जाने पर कहा- विरोध जता रहे थे

कर्नाटक के बेंगलुरु में एक परिवार ने बुजुर्ग को बोरे में बांधकर कूरियर से पार्सल करने की कोशिश की। परिवार ने यह कदम बस किराया बढ़ने के विरोध में उठाया। घटना मंगलवार शाम की है, जिसका वीडियो बुधवार को सामने आया। कूरियर सेंटर के कर्मचारियों को बोरे में हलचल दिखी तो उन्होंने उसे खोलकर देखा। अंदर से एक बुजुर्ग व्यक्ति निकला। इसके बाद कर्मचारियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस के मुताबिक परिवार एक निजी कूरियर सेंटर पहुंचा और कहा कि वे बुजुर्ग को पार्सल करना चाहते हैं। बोरी में बंद होने के कारण बुजुर्ग को सांस लेने में दिक्कत होने लगी, जिससे स्थिति गंभीर हो गई। दो तस्वीरों में देखिए कैसे पकड़ा गया पारर्सल… माफी के बाद चेतावनी देकर छोड़ा पुलिस की पूछताछ में बुजुर्ग की बेटी ने बताया कि यह पूरा मामला सोशल मीडिया रील बनाने के लिए किया गया था। परिवार ने बुजुर्ग को एक बोरी में डालकर यह स्टंट किया। परिवार ने पुलिस और लोगों से माफी मांगी। अधिकारियों ने कहा कि इस तरह का स्टंट किसी की जान को खतरे में डाल सकता है और इसके गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं। हालांकि पुलिस ने इस मामले में कोई केस दर्ज नहीं किया। परिवार से वीडियो के जरिए माफी मंगवाकर सख्त चेतावनी देकर छोड़ दिया। ———– रील बनाने के दौरान हुई घटना की ये खबर भी पढ़ें… रील बना रहे युवक ने खुद पर गोली चलाई, मौत:VIDEO शूट कर रहा दोस्त अरे नहीं–अरे नहीं चिल्लाया, पुलिस बोली– पिस्तौल दोस्त की थी दिल्ली के न्यू अशोका गार्डन में मंगलवार को रील बनाते वक्त एक युवक की मौत हो गई। वह अपने दोस्त की पिस्तौल लेकर रील बना रहा था। दोस्त ही इसे शूट कर रहा था। पुलिस का कहना है पिस्तौल का लाइसेंस वीडियो शूट करने वाले दोस्त के नाम पर है। मामले की जांच की जा रही है। पूरी खबर पढ़ें…

आगरा-मुंबई नेशनल हाइवे पर ट्रक-कार भिड़े, दो की मौत:आगरा से भोपाल जा रहे थे, एक घंटे कार की बॉडी में फंसे रहे घायल

आगरा-मुंबई नेशनल हाइवे पर ट्रक-कार भिड़े, दो की मौत:आगरा से भोपाल जा रहे थे, एक घंटे कार की बॉडी में फंसे रहे घायल

ग्वालियर के घाटीगांव में आगरा-मुंबई नेशनल हाइवे पर एक इको कार में सामने से तेज रफ्तार में रहे आयशर ट्रक ने टक्कर मार दी। ट्रक की टक्कर से कार पूरी पिचक गई और कार में सवार युवक उसमें फंस गए। घटना मंगलवार शाम की है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। कार की बॉडी में घायल फंसे हुए थे। पुलिस ने तत्काल क्रेन व कटर की मदद से तीनों घायलों को बाहर निकाला और हॉस्पिटल पहुंचाया है। घटना में एक घायल ने अस्पताल पहुंचने से पहले दम तोड़ दिया, जबकि एक घायल की देर रात मौत हुई है। पुलिस ने शवों को निगरानी में लेकर पड़ताल शुरू कर दी है। मृतक व घायल आगरा के व्यापारी हैं और यह व्यापारिक काम से आगरा से भोपाल जा रहे थे। उत्तर प्रदेश के आगरा एटमादौल स्थित टेडी बगिया इस्लाम नगर निवासी 22 वर्षीय सोहेल पुत्र फिरोज खान कांच की मूर्तियों का व्यापार करते हैं। उसके साथ में 23 वर्षीय सलमान खान, 32 वर्षीय मोहम्मद यूसुफ भी व्यापार करते हैं। मंगलवार को सोहेल अपने बड़े भाई की ईको कार नंबर UP80 GA-1120 में कांच की मूर्तियों की पेटियों को लेकर आगरा से भोपाल के लिए निकले थे। आगरा से निकलते समय कार को यूसुफ चला रहा था, लेकिन ग्वालियर आने के बाद सलमान ने कार की स्टेयरिंग संभाल ली और यूसुफ पास में बैठ गया, जबकि सोहेल पीछे की सीट पर बैठा था। ग्वालियर क्रॉस कर आगरा-मुंबई नेशनल हाइवे पर यह सभी लोग अभी घाटीगांव-मोहना के बीच सिरसा गांव की तरफ पहुंचे ही थे कि इसी समय सामने से आ रहे आयशर ट्रक नंबर UP25 JT-5251 के चालक ने तेजी व लापरवाही से चलाते हुए कार में टक्कर मार दी। कार में ट्रक की सीधी टक्कर लगने के बाद कार आगे से पूरी तरह पिचक गई। फ्रंट की सीट पर बैठे सलमान व यूसुफ कार की बॉडी में फंस गए, जबकि पीछे की सीट पर बैठे सोहेल भी गंभीर रूप से घायल हो गया था। घटना की सूचना मिलते ही घाटीगांव थाना पुलिस स्पॉट पर पहुंची और रेस्क्यू शुरू किया है। कार की बॉडी में फंसे से सलमान-युसूफ जब पुलिस ने रेस्क्यू शुरू किया तो ड्राइविंग सीट पर सलमान खान व फ्रंट की सीट पर यूसुफ फंसा हुआ था। पुलिस को कटर व क्रेन की मदद से उनको कार की बॉडी से बाहर निकाल कर अस्पताल पहुंचाने में एक घंटा लग गया। अस्पताल पहुंचाने के बाद सलमान ने तत्काल दम तोड़ दिया था, जबकि मोहम्मद युसूफ ने देर रात इलाज के दौरान दम तोड़ा है। सोहेल की हालत नाजुक बनी हुई है। उसे परिजन आगरा ले गए हैं और वहां के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा है। सिर में कांच ही कांच मिला मृतकों की कार में कांच की मूर्तियां भरी हुई थीं। आगे ट्रक ने टक्कर मारी और पीछे से कांच की मूर्तियां टूटकर घायल व मृतकों के सिर में घुस गई हैं। घायल सोहेले के सिर से डॉक्टर अभी तक कांच के 50 टुकड़े निकाल चुके हैं। जबकि सलमान व यूयुफ के शरीर में 30 से ज्यादा स्थानों पर कांच घुसे पाए गए हैं। ट्रक पकड़ा, चालक फरार इस मामले में घाटीगांव थाना पुलिस ने बताया कि हादसे के बाद भागने से पहले ही ट्रक को पकड़ लिया गया था, लेकिन ट्रक चालक फरार हो गया है। आरोपी की तलाश की जा रही है और शवों को पोस्टमार्टम के बाद परिजन के सुपुर्द कर दिया गया है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: कोलकाता सीटों के लिए टीएमसी उम्मीदवारों की पूरी सूची | कोलकाता-समाचार समाचार

Ranveer Singh returns as Hamza in Dhurandhar 2: The Revenge, one of the biggest Bollywood releases of 2026.

आखरी अपडेट:मार्च 18, 2026, 13:26 IST पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: कोलकाता में कुल 11 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें भबनीपुर भी शामिल है जहां ममता बनर्जी का मुकाबला बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी से होगा मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी द्वारा अनावरण की गई उम्मीदवार सूची, भाजपा के साथ उच्च-वोल्टेज चुनावी टकराव के एक और दौर के लिए मंच तैयार करती है। (पीटीआई) ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की, जो हाल के दिनों में सबसे बड़े उम्मीदवारों में से एक है। सत्तारूढ़ दल ने 294 सीटों वाली विधानसभा में लगातार चौथी बार कार्यकाल के लिए 291 उम्मीदवारों की घोषणा की। मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी द्वारा अनावरण की गई उम्मीदवार सूची, भाजपा के साथ हाई-वोल्टेज चुनावी टकराव के एक और दौर के लिए मंच तैयार करती है, जिसमें भबनीपुर में सीधा आमना-सामना भी शामिल है, जहां वह विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ अपनी सीट का बचाव करेंगी, जिससे 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान नंदीग्राम में हुई प्रतिद्वंद्विता फिर से शुरू हो जाएगी। कोलकाता में भवानीपुर समेत कुल 11 विधानसभा सीटें आती हैं। यहां कोलकाता में निर्वाचन क्षेत्रों के लिए टीएमसी की पूरी उम्मीदवार सूची पर एक नजर डालें: भबनीपुर, कोलकाता-ममता बनर्जी कोलकाता बंदरगाह – फिरहाद हकीम राशबिहारी – देबाशीष कुमार बालीगंज – सोवन्देब चट्टोपाध्याय चौरंगी – नयना बंदोपाध्याय अंत में – संदीपन साहा बेलेघाटा – कुणाल घोष जोरासांको – विजय उपाध्याय श्यामपुकुर – डॉ. शशि पांजा मानिकतला – श्रेया पांडे काशीपुर-बेलगछिया – अतिन घोष उम्मीदवारों की सूची दर्शाती है कि पार्टी के अंदरूनी सूत्र इसे “नियंत्रित मंथन” रणनीति के रूप में वर्णित करते हैं, जो संगठनात्मक निरंतरता के साथ पीढ़ीगत परिवर्तन को संतुलित करती है क्योंकि टीएमसी भाजपा के आक्रामक अभियान का सामना करते हुए सत्ता में लगभग तीन कार्यकाल के बाद संचित सत्ता विरोधी लहर का मुकाबला करने का प्रयास करती है। अपने कालीघाट आवास से उम्मीदवारों की घोषणा करते हुए, ममता बनर्जी ने कहा कि पार्टी 291 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि तीन दार्जिलिंग हिल्स निर्वाचन क्षेत्रों को अनित थापा के नेतृत्व वाले भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा के सहयोगी के लिए छोड़ देगी। 224 विधायकों में से, पार्टी ने 135 (लगभग 60%) को बरकरार रखा, 15 को अलग-अलग सीटों पर स्थानांतरित कर दिया, और 74 को हटा दिया, जिससे नेतृत्व द्वारा अपने बूथ-स्तरीय संगठनात्मक नेटवर्क को संरक्षित करते हुए स्थानीय सत्ता-विरोधी लहर को बेअसर करने का प्रयास किया गया। भबनीपुर प्रतियोगिता के निर्णायक लड़ाइयों में से एक के रूप में उभरने की उम्मीद है, जिसमें बनर्जी एक बार फिर अधिकारी से भिड़ेंगी, जिन्होंने राज्य में टीएमसी की जीत के बावजूद 2021 में नंदीग्राम में उन्हें मामूली अंतर से हराया था। कई वरिष्ठ मंत्रियों – फिरहाद हकीम, अरूप विश्वास और चंद्रिमा भट्टाचार्य – को उनके मौजूदा निर्वाचन क्षेत्रों से फिर से नामांकित किया गया है। 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए चुनाव 23 और 29 अप्रैल को होंगे। वोटों की गिनती 4 मई को होगी। पहले प्रकाशित: मार्च 18, 2026, 13:26 IST अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)ममता बनर्जी(टी)तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवारों की सूची(टी)टीएमसी उम्मीदवार फेरबदल(टी)भबनीपुर निर्वाचन क्षेत्र(टी)सुवेंदु अधिकारी(टी)कोलकाता विधानसभा सीटें(टी)बीजेपी बनाम टीएमसी

बंगाल चुनाव 2026: ‘डबल स्कैम’ बनाम ‘एसएससी घोटाला’ की नोकझोंक! उम्मीदवार सूची पर टीएमसी-बीजेपी-मुखौटा

बंगाल चुनाव 2026: 'डबल स्कैम' बनाम 'एसएससी घोटाला' की नोकझोंक! उम्मीदवार सूची पर टीएमसी-बीजेपी-मुखौटा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले नैतिकता एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप के दौर में प्रवेश कर चुकी है। शुफ़ल कैथोलिक कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच उम्मीदवार सूची को लेकर नई राजनीतिक जंग छिड़ गई है। दोनों दल सोशल मीडिया के माध्यम से एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं, जिससे स्टालिन और अधिक गर्म दिख रहे हैं। टीएमसी ने अपने आधिकारिक पोस्ट में सुवेंदु अधिकारी को लेकर पुराने घोटालों का ज़िक्र किया। पोस्ट में कहा गया है कि वह नेता ‘नारदा स्टिंग ऑपरेशन में कैमरे लेकर रंगे हाथ पकड़ा दिए थे। ‘सरदा प्रमुख सुदीप्तो सेन ने अपने नाम से एक डाका पत्र लिखकर करोड़ों रुपये के अवैध गबन का आरोप लगाया था।’ इसके साथ ही पोस्ट में आरोप लगाते हुए कहा गया, ‘नारदा घोटाला। सारदा संगठन. दोहरी भागीदारी. डबल टिकट. इस बयान को राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि पश्चिम बंगाल की राजनीति में नारदा और शारदा जैसे कलाकार लंबे समय से चुनावी चर्चा का हिस्सा बने हुए हैं। चुनाव से पहले इन सदस्यता को फिर से अपलोड रणनीति का संकेत माना जा रहा है। बीजेपी का युद्ध वहीं बीजेपी की पश्चिम बंगाल इकाई ने मैथ्यूज की उम्मीदवार सूची को लेकर भर्ती में पदोन्नति हासिल की है. बीजेपी ने अपने पोस्ट में कहा, ‘तृणमूल की अभ्यर्थी सूची की शुरुआत ही एसएससी से होती है। सब्जी-चैनलो, सब्जी को बागान बनाओ और फिर टीएमसी से टिकट पाओ। यहां तक ​​कि उनकी बेटी की अवैध नौकरी भी कलकत्ता हाई कोर्ट ने रद्द कर दी है. यही है मेक्लिगंज से उम्मीदवार परेश अधिकारी की छोटी-सी कहानी।’ बीजेपी के इस बयान में कहा गया है कि रोजगार और गरीबों के मुद्दे पर बहस के बीच केंद्र में लाने की कोशिश की जा रही है. पश्चिम बंगाल में एसएससी भर्ती विवाद में पिछले कुछ समय से राजनीतिक रूप से सेविका की भूमिका निभाई जा रही है, जिसने राज्य की राजनीति में बड़ा प्रभाव डाला है। सोशल मीडिया पर वार राजनीतिक नैतिकता का मानना ​​है कि दोनों विचारधाराओं के बीच यह विचारधारा केवल एक उम्मीदवार तक सीमित नहीं है, बल्कि नैतिकतावादी विचारधारा को प्रभावित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। जहां पुराने घोलाटनों को 1997 से 2000 के बीच 1997 से 2000 के बीच 2000 से 2000 के बीच भारतीय जनता पार्टी रोजगार और भर्ती से जुड़े मामलों को लेकर सवाल पूछती रही है। यह विवाद एक बार सामने आया है कि जब राज्य में नामांकन तेज हो गए हैं और किले के किले की घोषणा के साथ-साथ राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो रही है। विशेषज्ञ का कहना है कि ऐसे आरोप-प्रत्यारोप के बीच राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दिया जा सकता है। अब देखिए कि आने वाले दिनों में यह सिद्धांत जंग किस दिशा में जाता है और क्या यह मुद्दा असल में न्यायिक निर्णयों को प्रभावित करेगा या फिर नामांकन पुष्टिकरण तक सीमित रह जाएगा। यह तय है कि बंगाल की राजनीति में चुनाव से पहले आरोप की यह लड़ाई अभी और तेजी से होने वाली है। (टैग्सटूट्रांसलेट)डब्ल्यूबी चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)टीएमसी बनाम बीजेपी(टी)सुवेंदु अधिकारी(टी)नारद घोटाला(टी)एसएससी भर्ती घोटाला(टी)बंगाल राजनीति समाचार(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी) भाजपा(टी)सुवेंदु अधिकारी(टी)नारदा घोटाला(टी)एसएससी भर्ती घोटाला(टी)बंगाल राजनीति समाचार

असम चुनाव: असम चुनाव से पहले कांग्रेस में बड़ा धमाका! ‘एक टिकट’ पर दशक का रिश्ता, बोलियाँ प्रियंका गांधी

असम चुनाव: असम चुनाव से पहले कांग्रेस में बड़ा धमाका! 'एक टिकट' पर दशक का रिश्ता, बोलियाँ प्रियंका गांधी

असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के अंदर हलचल तेज हो गई है। वरिष्ठ नेता और सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी की रणनीति और कमजोर स्थिति पर बड़े सवाल उठाए हैं। इस पूरी घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया है कि कांग्रेस पार्टी के कम्युनिस्ट पार्टी के मुखिया प्रियंका गांधी ने इसे “बहुत सारे बंधन” करार दिया और संकेत दिया कि टिकट पार्टियों को लेकर ब्रेकअप होगा, इस फैसले का मुख्य कारण हो सकता है। प्रियंका गांधी ने कहा, ‘यह बहुत सारे बंधक हैं।’ मेरा मानना ​​है कि वे एक टिकट के पोस्ट को लेकर नाराज थे और हमें खेद है कि इस मुद्दे पर उनकी बात करने का मौका नहीं मिल सका। उनका यह कथन है कि यदि समय रहते संवाद होता, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। अपमान और अपमान का आरोप दूसरी ओर, प्रद्युत बोरदोलोई ने अपनी बेरोजगारी और अपमान को पार्टी के पीछे मुख्य कारण बताया। उन्होंने कहा, ‘आज मैंने अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों में से एक को छोड़ दिया है और मैं खुश नहीं हूं, लेकिन यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि कांग्रेस पार्टी के अंदर, विशेष रूप से असम कांग्रेस में, कई विचारधाराएं मुझे सिखाई जा रही थीं। यहां तक ​​कि पार्टी का नेतृत्व भी मेरी प्रति सहानुभूति नहीं थी। मैंने अपना पूरा जीवन कांग्रेस के साथ स्थापित किया है, लेकिन अब मैं खुद को बहुत अकेला महसूस कर रहा हूं।’ इस बीच, कांग्रेस ने स्थिति को दफनाने की कोशिश करते हुए बोरदोलोई के बेटे प्रतीक बोरदोलोई को मार्गेरिटा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। इसे विशेष संतुलन साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन यह भी सवाल उठ रहा है कि इससे क्या संगठन के अंदर मंदी कम होगी। भारतीय जनता पार्टी पर हमला भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (यूबीटी) के अल्पसंख्यक भाईचारे ने केंद्र की भाजपा पर नरमी बरतने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘जो हो रहा है वह चिंता का विषय है। कांग्रेस से लगातार लोगों का जाना और सागर में क्रॉस वोट का उदाहरण है। पशुधन पार्टी जिस तरह दबाव और लालच का इस्तेमाल कर अस्थिरता को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है, वह शर्मनाक है। ‘प्रतिभा की कमी है, इसलिए उन्हें भाजपा अन्य आश्रमों से लोगों को लाना पड़ रहा है।’ असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने भी बोर्डोलाई से मुलाकात के बाद कहा, ‘असम के मुख्यमंत्री हमारे युवा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई की छवि मीडिया के माध्यम से राजनीतिक रूप से खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। मैंने और जर्नलिस्ट सिंह ने आगामी परीक्षाओं पर विस्तृत चर्चा की है।’ बीजेपी ने दावा किया हमसे कोई बातचीत नहीं वहीं असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, ‘मेरा प्रद्युत बोरदोलोई से कोई संपर्क नहीं है। मुझे नहीं लगता कि उन्होंने अभी तक किसी बीजेपी नेता से बात की है. ‘भविष्य में आपके संपर्क की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।’ सिद्धांत यह है कि असम में 126 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा और 4 मई को तीसरी होगी। भाजपा नेतृत्व वाली शाही सरकार लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है, जबकि कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए संघर्ष कर रही है। (टैग्सटूट्रांसलेट)असम विधानसभा चुनाव(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)असम चुनाव 2026(टी)असम चुनाव 2026(टी)प्रद्युत बोरदोलोई का इस्तीफा(टी)प्रियंका गांधी का बयान(टी)कांग्रेस बनाम बीजेपी(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)असम राजनीति समाचार(टी)असम विधानसभा चुनाव(टी)असम संसदीय चुनाव 2026(टी)असम चुनाव 2026(टी)असम चुनाव 2026(टी)प्रद्युत बोरदोलोई की छुट्टी(टी)प्रियंका गांधी का बयान(टी)कांग्रेस बनाम भाजपा(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)असम की राजनीति समाचार

अमेरिका में शराब की खपत घटी, कमाई पर बड़ा झटका:सर्वे 31% ऑपरेटर्स ने शराब बिक्री में गिरावट की बात कही

अमेरिका में शराब की खपत घटी, कमाई पर बड़ा झटका:सर्वे 31% ऑपरेटर्स ने शराब बिक्री में गिरावट की बात कही

अमेरिका में शराब की खपत घट रही है। इसका सबसे बड़ा असर रेस्तरां बिजनेस पर पड़ रहा है। 2025 के गैलप पोल के मुताबिक अमेरिका में शराब पीने वालों की हिस्सेदारी निचले स्तर पर है। सिर्फ 54% लोगों ने कहा कि वे शराब पीते हैं। जो पीते हैं, वे भी पहले से कम पी रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण सेहत पर असर और शराब की कीमतों में बढ़ोतरी माना जा रहा है। 2025 में 31% अमेरिकी ऑपरेटर्स ने शराब बिक्री में गंभीर गिरावट की बात कही। न्यू जर्सी के मोंटक्लेयर में रेस्टोरेंट चलाने वाले डेमन वाइज ने बताया कि पहले उनकी कमाई का फॉर्मूला 40% खाना और 60% शराब था। पहले 50-50 हुआ। फिर 70% कमाई खाने से और सिर्फ 30% शराब से आने लगी। मिलेनियल्स ने कम की शराब, जेन-जी ने फेरा मुंह टेक्नोमिक की 2026 रिपोर्ट के अनुसार, शराब के सबसे बड़े शौकीन रहे मिलेनियल्स (31-45 वर्ष) अब इससे दूरी बना रहे हैं। वहीं जेन-जी युवा उस खालीपन को नहीं भर पा रहे हैं। वे रेस्टोरेंट में अक्सर सिर्फ एक ड्रिंक और फोटो तक सीमित हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक महंगाई या कैनाबिस जैसे विकल्पों के कारण नई पीढ़ी शराब पर पैसा खर्च नहीं करना चाहती। सेहत, आदतें और जीएलपी-1 दवाएं भी एक बड़ी वजह जनवरी 2025 में यूएस सर्जन जनरल विवेक मूर्ति की रिपोर्ट में हल्की या मध्यम शराब खपत को भी कैंसर रिस्क से जोड़ा गया। इसके अलावा सेहत को लेकर बढ़ती जागरूकता, पीढ़ियों की बदलती आदतें और करीब 6% अमेरिकियों का जीएलपी-1 दवाओं का इस्तेमाल भी वजह मानी जा रही है। इन दवाओं से शराब की इच्छा कम होने के संकेत मिले हैं। महंगी शराब और बेरोजगारी ने तोड़ी युवाओं की कमर लॉस एंजिल्स के व्यवसायी डस्टिन लैंकेस्टर के अनुसार बढ़ती लागत युवाओं को शराब से दूर कर रही है। पहले व्हिस्की और बीयर 8 डॉलर यानी करीब 730 रुपए में मिल जाती थी, जिसकी कीमत अब 20 डॉलर यानी 1,800 रुपए तक पहुंच गई है। टेक्नोमिक रिपोर्ट के मुताबिक 9.2% बेरोजगारी दर के कारण जेन-जी की जेब पर भी दबाव बढ़ा है।

जब राहुल नेतृत्व करते हैं, तो प्रियंका इंतजार करती हैं? असम, केरल में कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर नई बहस छिड़ गई | राजनीति समाचार

Ranveer Singh returns as Hamza in Dhurandhar 2: The Revenge, one of the biggest Bollywood releases of 2026. Image/X

आखरी अपडेट:मार्च 18, 2026, 12:11 IST असम में प्रियंका वाड्रा को तैनात करने के कांग्रेस के फैसले ने रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं क्योंकि केरल में उनकी सीमित उपस्थिति कैडर की बेचैनी को बढ़ाती है और आंतरिक शक्ति की गतिशीलता को उजागर करती है। यह विचित्र स्थिति एक बार फिर राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा मंडली के बीच वर्चस्व की लड़ाई को उजागर करती है। (पीटीआई) विधानसभा चुनावों से पहले, कांग्रेस ने असम में अपने दो सबसे मजबूत नेताओं- डीके शिवकुमार और प्रियंका गांधी वाड्रा- को तैनात किया है, जिससे पार्टी के भीतर कई लोग रणनीति को लेकर हैरान हैं। केरल और असम में मतदान 9 अप्रैल को होना है। प्रियंका वाड्रा को असम में पर्यवेक्षक और मुख्य अभियान प्रबंधक के रूप में नियुक्त किया जाएगा, जहां बढ़त भाजपा के पास है। चुनाव से पहले बरुण बोरा और प्रद्युत बोरदोलोई सहित कुछ बड़े नेता बाहर हुए हैं। और गौरव गोगोई को उनकी पत्नी के कथित पाकिस्तान संबंधों को लेकर भाजपा द्वारा निशाना बनाया जा रहा है, ऐसे में स्टार प्रचारक के रूप में प्रियंका वाड्रा और एक मास्टर रणनीतिकार के रूप में डीके शिवकुमार दोनों को पार्टी को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभालनी होगी। लेकिन उसी दिन केरल में चुनाव होने से, कोई भी आश्चर्यचकित रह जाता है कि प्रियंका वाड्रा दक्षिणी राज्य में क्या करेंगी जहां से वह सांसद हैं। वास्तव में, पिछले कुछ दिनों में, उन्हें अपने राज्य में बहुत कम देखा गया है, जहां राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल सहित अन्य पार्टी नेताओं के अभियान और दौरे देखे गए हैं। वायनाड में भी उनकी अनुपस्थिति ने पार्टी कैडर का ध्यान खींचा है, जिन्हें लगता है कि अपने वक्तृत्व कौशल और लोगों के साथ आसान जुड़ाव के साथ, अगर वह अपनी उपस्थिति महसूस कराती हैं तो एलडीएफ को कड़ी टक्कर दे सकती हैं। असम में डीके शिवकुमार और प्रियंका की पसंद को कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा गौरव गोगोई के हाथ को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जिन्हें राज्य में मौका दिया गया है। लेकिन वहां के सबसे आशावादी कांग्रेस नेताओं को भी जीत की ज्यादा उम्मीद नहीं है. इसलिए, अगर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ता है, तो प्रियंका वाड्रा की चुनावी प्रदर्शन करने की क्षमता पर सवाल उठ सकते हैं। लेकिन अगर कांग्रेस केरल में जीतती है, तो इसका श्रेय राहुल गांधी और उनके करीबी नेताओं के समूह को जाने की संभावना है जो वहां अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। यह विचित्र स्थिति एक बार फिर राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा मंडली के बीच वर्चस्व की लड़ाई को उजागर करती है। कई लोगों के लिए, यह स्पष्ट है कि राहुल गांधी को हमेशा अपनी बहन पर बढ़त रहेगी, जो आमतौर पर उनकी अनुपस्थिति में चमकती रही हैं, लेकिन जब वह सक्रिय होते हैं तो अक्सर उन्हें दरकिनार कर दिया जाता है। जैसा कि पार्टी हलकों में कहा जाता है: जब राहुल गांधी आसपास होते हैं, तो प्रियंका हाशिये पर धकेल दी जाती हैं। असम के नेताओं के बाहर निकलने को प्रियंका वाड्रा की झुंड को एक साथ रखने की क्षमता के लिए एक झटके के रूप में देखा जा रहा है। हार के बाद और अधिक बाहर जाना उनके रिकॉर्ड पर एक और दाग होगा, जबकि राहुल गांधी काफी हद तक बेदाग उभर सकते हैं। फिलहाल, कांग्रेस शीर्ष पर इन अजीब सत्ता समीकरणों में फंसी हुई है। पहले प्रकाशित: मार्च 18, 2026, 12:11 IST समाचार राजनीति जब राहुल नेतृत्व करते हैं, तो प्रियंका इंतजार करती हैं? असम, केरल में कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर नई बहस छिड़ गई है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कांग्रेस विधानसभा चुनाव(टी)कांग्रेस नेता असम(टी)प्रियंका गांधी वाद्रा(टी)डीके शिवकुमार(टी)केरल चुनाव(टी)राहुल गांधी(टी)गौरव गोगोई(टी)बीजेपी असम

LPG सिलेंडर की कमी पर अक्षय कुमार ने दिया रिएक्शन:पत्नी ट्विंकल ने 2 इंडक्शन ऑर्डर किए, कहा- अभी तक तो कोई प्रॉब्लम नहीं है

LPG सिलेंडर की कमी पर अक्षय कुमार ने दिया रिएक्शन:पत्नी ट्विंकल ने 2 इंडक्शन ऑर्डर किए, कहा- अभी तक तो कोई प्रॉब्लम नहीं है

ईरान-इजरायल जंग के बीच भारत में LPG सिलेंडर की किल्लत हो गई है। देश में कमर्शियल सिलेंडर पर रोक लगा दी गई, जिससे आम जनता के बीच भी सिलेंडर के लिए मारामारी हो रही है। इसी बीच एक्टर अक्षय कुमार ने इस किल्लत पर रिएक्शन दिया है। उनका कहना है कि उनकी पत्नी ट्विंकल खन्ना ने खबर मिलते ही इंडक्शन खरीद लिया है। अक्षय कुमार मंगलवार को बीएमसी कमिश्नर भूषण गगरानी की प्रेस कॉन्फ्रेंस का हिस्सा बने थे। इस दौरान उनसे गैस सिलेंडर की किल्लत होने पर सवाल किया गया, तो एक्टर ने कहा, “तो मेरी पत्नी ने परसों, देखिए, अभी तक तो कोई समस्या नहीं है। लेकिन जो नया ओवन आया है, जो इंडक्शन जैसा है, तो हमने दो खरीद लिए हैं। तो आप भी खरीद लीजिए।” जब एक्टर से पूछा गया कि क्या वो इंडक्शन उनके घर पहुंच गया है, तो एक्टर ने कहा, “फिलहाल तो मुझे यह नहीं पता, लेकिन मुझे इतना मालूम है कि मेरी पत्नी ने उसे ऑर्डर कर दिया है। वह घर पर पहुंचा है या नहीं, यह मुझे अभी तक पता नहीं है।” गोलमाल 5 में नजर आएंगे अक्षय कुमार बता दें कि अक्षय कुमार के पास इन दिनों कई बड़ी फिल्में हैं। वो जल्द ही फिल्म भूत बंगला में नजर आएंगे, जो एक हॉरर कॉमेडी फिल्म है। 2 अप्रैल को रिलीज होने वाली इस फिल्म में अक्षय कुमार के साथ वामिका गब्बी, तब्बू, परेश रावल और राजपाल यादव अहम किरदारों में हैं। इसके अलावा अक्षय वेलकम टू द जंगल, हेरा फेरी 3 और हैवान में भी नजर आने वाले हैं। इसके अलावा अक्षय ने हाल ही में रोहित शेट्टी की गोलमाल फ्रैंचाइली की 5वीं फिल्म गोलमाल भी शुरू कर दी है।

कनाडा में पंजाबी युवक की गोली मारकर हत्या:दोस्तों के साथ लॉन्ग ड्राइव पर निकला था, गर्दन में लगी गोली; इकलौता बेटा

कनाडा में पंजाबी युवक की गोली मारकर हत्या:दोस्तों के साथ लॉन्ग ड्राइव पर निकला था, गर्दन में लगी गोली; इकलौता बेटा

कनाडा में पंजाबी युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। एडमॉन्टन शहर के पास लेड्यूक इलाके में हमलावरों ने हाईवे-2 पर उसकी कार को घेरा। इसके बाक उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। मृतक की पहचान बीरइंदर सिंह (22) के रूप में हुई है, जो स्टडी वीजा पर कनाडा गया था। पुलिस के अनुसार, वह ओंटारियो में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काम कर रहा था। घटना 14 मार्च को हुई। बीरइंदर माता-पिता का इकलौते बेटा था। दोस्तों ने बीरइंदर के पार्थिव शरीर को भारत भेजने के लिए गो फंड मी पेज बनाया था, जिसके जरिए जरूरी फंड जुटा लिया गया है ताकि उनके माता-पिता आखिरी बार अपने बेटे का चेहरा देख सकें। 3 साल पहले कनाडा गया था युवक बीरइंदर सिंह 3 साल पहले कनाडा गया था और पिछले 5 महीनों से एडमॉन्टन में रह रहा था। वह वहां कंस्ट्रक्शन का काम करता था। बीरइंदर अपना खुद का बिजनेस शुरू करने का सपना देख रहा था। 14 मार्च को बीरइंदर अपने 2 बचपन के दोस्तों के साथ पहली बार बैनफ घूमने जा रहा था। पुलिस ने बताया कि दोपहर लगभग 2:50 बीरइंदर अपनी होंडा सिविक कार चला रहा था। तभी एक सफेद पिकअप ट्रक उनकी कार के बगल में आया। ट्रक सवार 2 लोगों ने पहले बीरइंदर की तरफ दोस्ती का इशारा किया। खिड़की खोलते ही युवक पर फायरिंग की जब बीरइंदर ने जवाब में वैसा ही इशारा किया, तो ट्रक सवारों ने अपनी खिड़की नीचे की और उस पर गोली चला दी। (शनिवार की) दोपहर लगभग 2:50 बजे उसे गोलियां मारी गईं। यह वारदात एडमॉन्टन के दक्षिण में स्थित हाईवे 2 पर हुई। गर्दन में गोली लगने से हुई मौत गोली बीरइंदर की गर्दन में लगी। उनके दोस्तों ने कार पर नियंत्रण पाकर उसे सड़क किनारे रोका और मदद के लिए पुलिस को काल की, लेकिन ज्यादा खून बहने के कारण बीरइंदर की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस और बीरइंदर के दोस्तों के अनुसार, उनको नहीं पता कि हमला क्यों किया गया। उनके दोस्तों का मानना है कि यह नस्लभेद या नफरत के कारण हो सकता है, क्योंकि उनका किसी से कोई झगड़ा या रोड रेज जैसा मामला नहीं था। रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) इस मामले की जांच कर रही है। उन्होंने उस पिकअप ट्रक और उसमें सवार 2 लोगों की पहचान के लिए लोगों से डैशकैम फुटेज मांगी है।

भीषण गर्मी में बच्चों की सेहत पर खतरा, डॉक्टर ने दी ‘ट्रिपल H’ फॉर्मूला अपनाने की सलाह

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सतना. गर्मी का मौसम शुरू होते ही बच्चों की सेहत पर खतरा मंडराने लगता है. तेज धूप, बढ़ता तापमान और बदलता खानपान बच्चों को जल्दी बीमार कर सकता है. ऐसे में डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो डिहाइड्रेशन, लू और पेट से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं. खासकर छोटे बच्चों में यह खतरा और ज्यादा होता है क्योंकि उनकी इम्युनिटी बाकियों के अपेक्षाकृत कमजोर होती है, इसलिए माता-पिता के लिए जरूरी है कि वे बच्चों के खानपान, रहन-सहन और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें. लोकल 18 से बातचीत में सतना जिला चिकित्सालय के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अखिलेश खरे ने बताया कि जैसे ही गर्मी बढ़ती है, वैसे ही अस्पतालों में बच्चों की संख्या भी बढ़ने लगती है. इस मौसम में बच्चों में वायरल इन्फेक्शन, उल्टी-दस्त और कमजोरी के मामले अधिक सामने आते हैं. कई बार माता-पिता इन लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर स्थिति पैदा कर सकते हैं. डॉक्टर के अनुसार, बच्चों को गर्मी से बचाने के लिए उनके आसपास का वातावरण संतुलित रखना बेहद जरूरी है. न ज्यादा गर्म और न ही ज्यादा ठंडा माहौल होना चाहिए क्योंकि दोनों ही स्थितियां बच्चों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकती हैं. ट्रिपल H फॉर्मूला सबसे जरूरीविशेषज्ञों ने गर्मियों में बच्चों की देखभाल के लिए ट्रिपल H फॉर्मूला को सबसे प्रभावी बताया है, जिसमें हाइड्रेशन, हेल्थी डाइट और हाइजीन शामिल हैं. उन्होंने कहा कि हाइड्रेशन जरूरी है, जिसमें बच्चों को दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाना अनिवार्य है. इसके साथ ही नींबू पानी, नारियल पानी, छाछ और फलों का सेवन भी शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है. दूसरा आता है हेल्थी डाइट, जिसमें बच्चों को हल्का और पौष्टिक भोजन देना चाहिए. हरी सब्जियां, मौसमी फल जैसे- संतरा, मौसंबी, खरबूजा और खीरा शरीर को जरूरी विटामिन और मिनरल देते हैं. तला-भुना और ज्यादा मसालेदार खाना इस मौसम में नुकसानदायक हो सकता है. फिर आता है हाइजीन, जिसमें नाम के ही मुताबिक साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. बच्चों को खाने से पहले और बाहर से आने के बाद हाथ धोने की आदत डालें. साफ सुथरा खाना और स्वच्छ वातावरण बीमारियों से बचाव में अहम भूमिका निभाता है. जंक फूड और बाहर का खाना बन सकता है खतराडॉक्टर का कहना है कि आजकल बच्चे बाहर का खाना, चौपाटी आइटम्स और पैकेज्ड ड्रिंक्स ज्यादा पसंद करते हैं, जो गर्मियों में सेहत के लिए खतरनाक हो सकते हैं. ऐसे फूड्स में बैक्टीरिया और अनहाइजीनिक एलिमेंट्स होने का खतरा रहता है, जिससे पेट संबंधी बीमारियां हो सकती हैं, इसलिए माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को घर का बना ताजा और साफ खाना ही दें. साथ ही बच्चों की पसंद का हेल्दी खाना तैयार करके उन्हें बाहर के खाने से दूर रखा जा सकता है. धूप से बचाव भी उतना ही जरूरीगर्मी के दिनों में बच्चों को तेज धूप में खेलने से बचाना चाहिए. अगर बाहर जाना जरूरी हो, तो उन्हें हल्के कपड़े पहनाएं, टोपी लगाएं और पर्याप्त पानी साथ रखें. दोपहर के समय बाहर निकलने से बचना सबसे बेहतर उपाय है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर माता-पिता बच्चों के खानपान, साफ-सफाई और दिनचर्या पर ध्यान दें, तो गर्मियों में होने वाली अधिकांश बीमारियों से बचा जा सकता है. छोटी-छोटी सावधानियां बच्चों को स्वस्थ रखने में बड़ी भूमिका निभाती हैं. ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही इस मौसम में बच्चों की सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल है.