Friday, 16 Oct 2026 | 02:11 PM

Trending :

US Deploys Space Weapons | Warning to Russia and China

US Deploys Space Weapons | Warning to Russia and China

वॉशिंगटन डीसी4 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

अमेरिका ने पहली बार सार्वजनिक रूप से माना है कि उसने अंतरिक्ष में हथियार तैनात कर रखे हैं। अमेरिकी वायुसेना के सचिव ट्रॉय मिंक ने सोमवार को कहा कि अमेरिका के पास ऑर्बिट में ऐसे हथियार हैं, जिनका इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर अमेरिकी सैन्य बलों को दुश्मन की कार्रवाई से बचाने के लिए किया जा सकता है।

मिंक ने इन हथियारों को ‘स्पेस कंट्रोल वेपन्स’ बताया। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि ये हथियार किस तरह के हैं, कितने हैं और इन्हें कब अंतरिक्ष में तैनात किया गया था।

मिंक का बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका, रूस और चीन के बीच अंतरिक्ष में सैन्य ताकत बढ़ाने की होड़ तेज हो रही है। ऐसे में अमेरिका का यह खुलासा रूस और चीन के लिए चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। इससे अंतरिक्ष में हथियारों की प्रतिस्पर्धा और बढ़ने की आशंका भी है।

ट्रॉय मिंक ने सोमवार को मैरीलैंड में आयोजित एयर, स्पेस एंड साइबर कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी अंतरिक्ष क्षमताओं को लेकर यह जानकारी दी।

ट्रॉय मिंक ने सोमवार को मैरीलैंड में आयोजित एयर, स्पेस एंड साइबर कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी अंतरिक्ष क्षमताओं को लेकर यह जानकारी दी।

मिंक बोले- दुश्मन की कार्रवाई से अमेरिकी सेना की रक्षा करेंगे

मिंक ने कहा कि अमेरिका लगातार यह सुनिश्चित कर रहा है कि बदलते खतरों से निपटने के लिए उसकी सेना तैयार रहे। इसी वजह से अमेरिका के पास अब ऑर्बिट में ऐसे स्पेस कंट्रोल हथियार हैं, जो दुश्मन की कार्रवाई से अमेरिकी सैन्य बलों की रक्षा करने में सक्षम हैं।

हालांकि, मिंक ने इन हथियारों की वास्तविक क्षमता के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।

जब उनसे हथियारों के बारे में और जानकारी मांगी गई तो उन्होंने कोई अतिरिक्त विवरण देने से इनकार कर दिया। इसलिए अभी यह पता नहीं है कि अमेरिका ने अंतरिक्ष में किस तरह के हथियार तैनात किए हैं।

रूस-चीन के लिए क्यों अहम है यह खुलासा?

अमेरिका लंबे समय से रूस और चीन की बढ़ती काउंटर-स्पेस क्षमताओं को लेकर चिंता जताता रहा है।

आधुनिक युद्ध में सैटेलाइट बेहद महत्वपूर्ण हो चुके हैं। सेनाएं इनका इस्तेमाल संचार, नेविगेशन, खुफिया जानकारी जुटाने और मिसाइलों की निगरानी जैसे कामों के लिए करती हैं।

इसलिए किसी देश के सैटेलाइट पर हमला उसकी सैन्य क्षमता को कमजोर कर सकता है। इसी वजह से बड़ी सैन्य ताकतें अब सिर्फ अपने सैटेलाइट की संख्या बढ़ाने पर ध्यान नहीं दे रही हैं, बल्कि उन्हें दुश्मन के हमले से बचाने और विरोधी की अंतरिक्ष क्षमताओं को रोकने की तकनीक भी विकसित कर रही हैं।

मिंक का यह कहना कि अमेरिका के पास ऑर्बिट में हथियार मौजूद हैं, इसी बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच एक अहम सैन्य संकेत माना जा रहा है।

रूस अंतरिक्ष को युद्ध का एक क्षेत्र मानता है

अमेरिकी स्पेस फोर्स के मुताबिक, रूस अंतरिक्ष को युद्ध का एक क्षेत्र मानता है। अमेरिका का कहना है कि रूस के लिए भविष्य के संघर्ष में अंतरिक्ष पर बढ़त निर्णायक हो सकती है।

अमेरिकी अधिकारियों ने रूस के कुछ सैटेलाइट मिशनों को लेकर भी चिंता जताई है। उनके मुताबिक, इन मिशनों से ऐसी क्षमताओं के विकास का संकेत मिलता है जिनका इस्तेमाल भविष्य में अंतरिक्ष में हमले और बचाव, दोनों के लिए किया जा सकता है।

अमेरिका को रूस की संभावित अंतरिक्ष-आधारित परमाणु हथियार क्षमता को लेकर भी चिंता है। अमेरिकी अधिकारियों ने पहले आशंका जताई थी कि रूस ऐसा हथियार विकसित कर सकता है जो बड़ी संख्या में सैटेलाइट को नुकसान पहुंचाने में सक्षम हो। रूस ने इन आरोपों से इनकार किया है।

चीन भी तेजी से बढ़ा रहा अंतरिक्ष क्षमता

अमेरिका के मुताबिक, चीन अपनी सैन्य आधुनिकीकरण योजना के तहत अंतरिक्ष और काउंटर-स्पेस क्षमताएं विकसित कर रहा है।

चीन की बढ़ती सैन्य और अंतरिक्ष ताकत को अमेरिका अपने लिए बड़ी चुनौती मानता है। अमेरिकी अधिकारियों ने चीन की हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक को लेकर भी चिंता जताई है।

ऐसे में अमेरिका का अंतरिक्ष में हथियार तैनात करने की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार करना यह संकेत देता है कि वॉशिंगटन अंतरिक्ष में अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत कर रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर विरोधी की कार्रवाई का जवाब दिया जा सके।

हालांकि, अमेरिका ने जिन हथियारों की तैनाती की बात कही है, उनकी वास्तविक क्षमता अभी गुप्त है।

अगर अंतरिक्ष में युद्ध हुआ तो असर धरती पर भी पड़ेगा

अंतरिक्ष में सैन्य टकराव का असर सिर्फ सैनिकों और सैटेलाइट तक सीमित नहीं रहेगा। आज दुनिया की कई जरूरी सेवाएं सैटेलाइट पर निर्भर हैं।

मौसम की जानकारी, प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी, नेविगेशन और संचार जैसे कामों में सैटेलाइट महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

GPS जैसी नेविगेशन सेवाओं का इस्तेमाल विमान, जहाज, ट्रक और दूसरी परिवहन सेवाओं में होता है। बैंकिंग और वित्तीय सिस्टम में भी सटीक समय और संचार के लिए सैटेलाइट से मिलने वाली सेवाओं का इस्तेमाल किया जाता है।

अगर बड़े पैमाने पर सैटेलाइट को नुकसान पहुंचाया जाता है तो संचार, नेविगेशन और कई जरूरी नागरिक सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

यही वजह है कि अंतरिक्ष में हथियारों की बढ़ती तैनाती को सिर्फ अमेरिका, रूस और चीन के बीच सैन्य प्रतिस्पर्धा के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।

1967 की संधि ने परमाणु हथियारों पर लगाई थी रोक

अंतरिक्ष में हथियार तैनात करने के अमेरिकी खुलासे के बीच 1967 की आउटर स्पेस ट्रीटी भी चर्चा में आ गई है।

अमेरिका, सोवियत संघ और कई दूसरे देशों ने करीब 60 साल पहले यह संधि की थी। इसका मकसद अंतरिक्ष को परमाणु हथियारों और सामूहिक विनाश के दूसरे हथियारों की तैनाती से बचाना था।

संधि के तहत पृथ्वी की कक्षा में परमाणु हथियार या दूसरे सामूहिक विनाश के हथियार रखने पर रोक लगाई गई है।

हालांकि, इसमें हर तरह के पारंपरिक हथियारों को अंतरिक्ष में तैनात करने पर पूरी तरह रोक नहीं है। इसलिए अमेरिका के मौजूदा बयान से सीधे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उसने इस संधि का उल्लंघन किया है।

लेकिन अमेरिका ने अभी यह नहीं बताया है कि ऑर्बिट में तैनात किए गए ‘स्पेस कंट्रोल वेपन्स’ किस श्रेणी के हथियार हैं। इसलिए इनकी वास्तविक प्रकृति सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के लिहाज से इनकी स्थिति क्या है।

ट्रम्प के दौर में अंतरिक्ष पर बढ़ा फोकस

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में अमेरिका ने अंतरिक्ष को अपनी रक्षा रणनीति में और ज्यादा महत्व दिया है।

ट्रम्प ने अमेरिकी अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत करने और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को आधुनिक बनाने पर जोर दिया है। उनकी ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल डिफेंस योजना भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

अमेरिका का लक्ष्य ऐसी मिसाइल रक्षा व्यवस्था तैयार करना है जो अलग-अलग तरह के मिसाइल हमलों से देश की रक्षा कर सके। इसके लिए जमीन और अंतरिक्ष आधारित तकनीकों के इस्तेमाल पर काम किया जा रहा है।

मिंक ने सोमवार को यह भी बताया कि अमेरिका का स्पेस-बेस्ड इंटरसेप्टर प्रोग्राम तेजी से आगे बढ़ा है। उनके मुताबिक, यह प्रोग्राम शुरुआती कॉन्ट्रैक्ट से लेकर उड़ान के लिए तैयार हार्डवेयर तक एक साल से भी कम समय में पहुंच गया।

हालांकि, उन्होंने इस प्रोग्राम की तकनीकी जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की।

अंतरिक्ष में सैन्य प्रतिस्पर्धा का नया दौर

अमेरिका के इस खुलासे से एक बात साफ है कि अंतरिक्ष अब सिर्फ सैटेलाइट, संचार और वैज्ञानिक शोध का क्षेत्र नहीं रह गया है।

अमेरिका, रूस और चीन तीनों अंतरिक्ष को अपनी सैन्य ताकत का अहम हिस्सा मान रहे हैं। तीनों देश अपनी अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं और इसी के साथ अंतरिक्ष में संभावित सैन्य टकराव का खतरा भी बढ़ रहा है।

ऐसे में मिंक का बयान सिर्फ अमेरिकी सैन्य क्षमता का खुलासा नहीं है। इसे रूस और चीन के लिए यह संकेत भी माना जा रहा है कि अमेरिका अंतरिक्ष में अपनी सैन्य क्षमताएं बढ़ा रहा है और जरूरत पड़ने पर अपने सिस्टम की रक्षा के लिए इनका इस्तेमाल करेगा।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका ने ऑर्बिट में कौन से हथियार तैनात किए हैं और उनकी वास्तविक क्षमता कितनी है। मिंक ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।

लेकिन पहली बार सार्वजनिक रूप से हथियारों की मौजूदगी स्वीकार किए जाने से इतना जरूर स्पष्ट हो गया है कि अंतरिक्ष अमेरिका, रूस और चीन के बीच सैन्य प्रतिस्पर्धा का अहम मोर्चा बन चुका है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
आंधी-बारिश में ताजमहल के पत्थर टूटकर गिर रहे:दीवारों में दरारें, रॉयल गेट भी बदहाल; पूर्व इंचार्ज बोले- अब ASI ठेकेदारों के भरोसे

May 8, 2026/
7:00 am

ताजमहल करीब 373 साल पुराना हो चुका है। दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारतों में शामिल इस स्मारक के रॉयल गेट...

अमेरिका के 50 फाइटर जेट मिडिल ईस्ट रवाना:इनमें F-22, F-35 और F-16 शामिल, अमेरिका बोला- ईरान शर्तें नहीं मान रहा, हमारे पास दूसरे रास्ते मौजूद

February 18, 2026/
12:39 pm

अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में पिछले 24 घंटों में 50 से ज्यादा फाइटर जेट भेजे हैं। इंडिपेंडेंट फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा और...

अमेरिका में एआई से जॉब संकट टला:अगस्त में 1.62 लाख जॉब पैदा हुए, उम्मीद से तीन गुना ज्यादा बढ़ोतरी

September 6, 2026/
1:54 pm

एआई को लेकर लंबे समय से डर जताया जा रहा था कि यह तकनीक लाखों इंसानों की नौकरियां छीनकर उन्हें...

Khabar hatke- Bihar Girl Tower Reel

April 28, 2026/
4:30 am

बिहार में एक लड़की शादी के लिए टावर पर चढ़ गई, वहां रील बनाकर पोस्ट कर दी, 11 हजार व्यूज...

BAN vs AUS Live Score: Follow latest updates from 2nd T20I. (AP Photo)

June 19, 2026/
10:29 am

आखरी अपडेट:19 जून, 2026, 10:29 IST व्हिप जारी होने के बावजूद गुरुवार को नई दिल्ली में बुलाई गई संसदीय दल...

‘जब खुली किताब’ का ट्रेलर आउट:पंकज कपूर और डिंपल कपाड़िया लीड रोल में आएंगे नजर, 6 मार्च को जी5 पर स्ट्रीम होगी फिल्म

March 3, 2026/
4:20 pm

एप्लॉज एंटरटेनमेंट की फिल्म ‘जब खुली किताब’ का ट्रेलर रिलीज हो गया है। फिल्म में दिग्गज एक्टर पंकज कपूर और...

राजनीति

US Deploys Space Weapons | Warning to Russia and China

US Deploys Space Weapons | Warning to Russia and China

वॉशिंगटन डीसी4 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

अमेरिका ने पहली बार सार्वजनिक रूप से माना है कि उसने अंतरिक्ष में हथियार तैनात कर रखे हैं। अमेरिकी वायुसेना के सचिव ट्रॉय मिंक ने सोमवार को कहा कि अमेरिका के पास ऑर्बिट में ऐसे हथियार हैं, जिनका इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर अमेरिकी सैन्य बलों को दुश्मन की कार्रवाई से बचाने के लिए किया जा सकता है।

मिंक ने इन हथियारों को ‘स्पेस कंट्रोल वेपन्स’ बताया। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि ये हथियार किस तरह के हैं, कितने हैं और इन्हें कब अंतरिक्ष में तैनात किया गया था।

मिंक का बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका, रूस और चीन के बीच अंतरिक्ष में सैन्य ताकत बढ़ाने की होड़ तेज हो रही है। ऐसे में अमेरिका का यह खुलासा रूस और चीन के लिए चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। इससे अंतरिक्ष में हथियारों की प्रतिस्पर्धा और बढ़ने की आशंका भी है।

ट्रॉय मिंक ने सोमवार को मैरीलैंड में आयोजित एयर, स्पेस एंड साइबर कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी अंतरिक्ष क्षमताओं को लेकर यह जानकारी दी।

ट्रॉय मिंक ने सोमवार को मैरीलैंड में आयोजित एयर, स्पेस एंड साइबर कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी अंतरिक्ष क्षमताओं को लेकर यह जानकारी दी।

मिंक बोले- दुश्मन की कार्रवाई से अमेरिकी सेना की रक्षा करेंगे

मिंक ने कहा कि अमेरिका लगातार यह सुनिश्चित कर रहा है कि बदलते खतरों से निपटने के लिए उसकी सेना तैयार रहे। इसी वजह से अमेरिका के पास अब ऑर्बिट में ऐसे स्पेस कंट्रोल हथियार हैं, जो दुश्मन की कार्रवाई से अमेरिकी सैन्य बलों की रक्षा करने में सक्षम हैं।

हालांकि, मिंक ने इन हथियारों की वास्तविक क्षमता के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।

जब उनसे हथियारों के बारे में और जानकारी मांगी गई तो उन्होंने कोई अतिरिक्त विवरण देने से इनकार कर दिया। इसलिए अभी यह पता नहीं है कि अमेरिका ने अंतरिक्ष में किस तरह के हथियार तैनात किए हैं।

रूस-चीन के लिए क्यों अहम है यह खुलासा?

अमेरिका लंबे समय से रूस और चीन की बढ़ती काउंटर-स्पेस क्षमताओं को लेकर चिंता जताता रहा है।

आधुनिक युद्ध में सैटेलाइट बेहद महत्वपूर्ण हो चुके हैं। सेनाएं इनका इस्तेमाल संचार, नेविगेशन, खुफिया जानकारी जुटाने और मिसाइलों की निगरानी जैसे कामों के लिए करती हैं।

इसलिए किसी देश के सैटेलाइट पर हमला उसकी सैन्य क्षमता को कमजोर कर सकता है। इसी वजह से बड़ी सैन्य ताकतें अब सिर्फ अपने सैटेलाइट की संख्या बढ़ाने पर ध्यान नहीं दे रही हैं, बल्कि उन्हें दुश्मन के हमले से बचाने और विरोधी की अंतरिक्ष क्षमताओं को रोकने की तकनीक भी विकसित कर रही हैं।

मिंक का यह कहना कि अमेरिका के पास ऑर्बिट में हथियार मौजूद हैं, इसी बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच एक अहम सैन्य संकेत माना जा रहा है।

रूस अंतरिक्ष को युद्ध का एक क्षेत्र मानता है

अमेरिकी स्पेस फोर्स के मुताबिक, रूस अंतरिक्ष को युद्ध का एक क्षेत्र मानता है। अमेरिका का कहना है कि रूस के लिए भविष्य के संघर्ष में अंतरिक्ष पर बढ़त निर्णायक हो सकती है।

अमेरिकी अधिकारियों ने रूस के कुछ सैटेलाइट मिशनों को लेकर भी चिंता जताई है। उनके मुताबिक, इन मिशनों से ऐसी क्षमताओं के विकास का संकेत मिलता है जिनका इस्तेमाल भविष्य में अंतरिक्ष में हमले और बचाव, दोनों के लिए किया जा सकता है।

अमेरिका को रूस की संभावित अंतरिक्ष-आधारित परमाणु हथियार क्षमता को लेकर भी चिंता है। अमेरिकी अधिकारियों ने पहले आशंका जताई थी कि रूस ऐसा हथियार विकसित कर सकता है जो बड़ी संख्या में सैटेलाइट को नुकसान पहुंचाने में सक्षम हो। रूस ने इन आरोपों से इनकार किया है।

चीन भी तेजी से बढ़ा रहा अंतरिक्ष क्षमता

अमेरिका के मुताबिक, चीन अपनी सैन्य आधुनिकीकरण योजना के तहत अंतरिक्ष और काउंटर-स्पेस क्षमताएं विकसित कर रहा है।

चीन की बढ़ती सैन्य और अंतरिक्ष ताकत को अमेरिका अपने लिए बड़ी चुनौती मानता है। अमेरिकी अधिकारियों ने चीन की हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक को लेकर भी चिंता जताई है।

ऐसे में अमेरिका का अंतरिक्ष में हथियार तैनात करने की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार करना यह संकेत देता है कि वॉशिंगटन अंतरिक्ष में अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत कर रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर विरोधी की कार्रवाई का जवाब दिया जा सके।

हालांकि, अमेरिका ने जिन हथियारों की तैनाती की बात कही है, उनकी वास्तविक क्षमता अभी गुप्त है।

अगर अंतरिक्ष में युद्ध हुआ तो असर धरती पर भी पड़ेगा

अंतरिक्ष में सैन्य टकराव का असर सिर्फ सैनिकों और सैटेलाइट तक सीमित नहीं रहेगा। आज दुनिया की कई जरूरी सेवाएं सैटेलाइट पर निर्भर हैं।

मौसम की जानकारी, प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी, नेविगेशन और संचार जैसे कामों में सैटेलाइट महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

GPS जैसी नेविगेशन सेवाओं का इस्तेमाल विमान, जहाज, ट्रक और दूसरी परिवहन सेवाओं में होता है। बैंकिंग और वित्तीय सिस्टम में भी सटीक समय और संचार के लिए सैटेलाइट से मिलने वाली सेवाओं का इस्तेमाल किया जाता है।

अगर बड़े पैमाने पर सैटेलाइट को नुकसान पहुंचाया जाता है तो संचार, नेविगेशन और कई जरूरी नागरिक सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

यही वजह है कि अंतरिक्ष में हथियारों की बढ़ती तैनाती को सिर्फ अमेरिका, रूस और चीन के बीच सैन्य प्रतिस्पर्धा के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।

1967 की संधि ने परमाणु हथियारों पर लगाई थी रोक

अंतरिक्ष में हथियार तैनात करने के अमेरिकी खुलासे के बीच 1967 की आउटर स्पेस ट्रीटी भी चर्चा में आ गई है।

अमेरिका, सोवियत संघ और कई दूसरे देशों ने करीब 60 साल पहले यह संधि की थी। इसका मकसद अंतरिक्ष को परमाणु हथियारों और सामूहिक विनाश के दूसरे हथियारों की तैनाती से बचाना था।

संधि के तहत पृथ्वी की कक्षा में परमाणु हथियार या दूसरे सामूहिक विनाश के हथियार रखने पर रोक लगाई गई है।

हालांकि, इसमें हर तरह के पारंपरिक हथियारों को अंतरिक्ष में तैनात करने पर पूरी तरह रोक नहीं है। इसलिए अमेरिका के मौजूदा बयान से सीधे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उसने इस संधि का उल्लंघन किया है।

लेकिन अमेरिका ने अभी यह नहीं बताया है कि ऑर्बिट में तैनात किए गए ‘स्पेस कंट्रोल वेपन्स’ किस श्रेणी के हथियार हैं। इसलिए इनकी वास्तविक प्रकृति सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के लिहाज से इनकी स्थिति क्या है।

ट्रम्प के दौर में अंतरिक्ष पर बढ़ा फोकस

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में अमेरिका ने अंतरिक्ष को अपनी रक्षा रणनीति में और ज्यादा महत्व दिया है।

ट्रम्प ने अमेरिकी अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत करने और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को आधुनिक बनाने पर जोर दिया है। उनकी ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल डिफेंस योजना भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

अमेरिका का लक्ष्य ऐसी मिसाइल रक्षा व्यवस्था तैयार करना है जो अलग-अलग तरह के मिसाइल हमलों से देश की रक्षा कर सके। इसके लिए जमीन और अंतरिक्ष आधारित तकनीकों के इस्तेमाल पर काम किया जा रहा है।

मिंक ने सोमवार को यह भी बताया कि अमेरिका का स्पेस-बेस्ड इंटरसेप्टर प्रोग्राम तेजी से आगे बढ़ा है। उनके मुताबिक, यह प्रोग्राम शुरुआती कॉन्ट्रैक्ट से लेकर उड़ान के लिए तैयार हार्डवेयर तक एक साल से भी कम समय में पहुंच गया।

हालांकि, उन्होंने इस प्रोग्राम की तकनीकी जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की।

अंतरिक्ष में सैन्य प्रतिस्पर्धा का नया दौर

अमेरिका के इस खुलासे से एक बात साफ है कि अंतरिक्ष अब सिर्फ सैटेलाइट, संचार और वैज्ञानिक शोध का क्षेत्र नहीं रह गया है।

अमेरिका, रूस और चीन तीनों अंतरिक्ष को अपनी सैन्य ताकत का अहम हिस्सा मान रहे हैं। तीनों देश अपनी अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं और इसी के साथ अंतरिक्ष में संभावित सैन्य टकराव का खतरा भी बढ़ रहा है।

ऐसे में मिंक का बयान सिर्फ अमेरिकी सैन्य क्षमता का खुलासा नहीं है। इसे रूस और चीन के लिए यह संकेत भी माना जा रहा है कि अमेरिका अंतरिक्ष में अपनी सैन्य क्षमताएं बढ़ा रहा है और जरूरत पड़ने पर अपने सिस्टम की रक्षा के लिए इनका इस्तेमाल करेगा।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका ने ऑर्बिट में कौन से हथियार तैनात किए हैं और उनकी वास्तविक क्षमता कितनी है। मिंक ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।

लेकिन पहली बार सार्वजनिक रूप से हथियारों की मौजूदगी स्वीकार किए जाने से इतना जरूर स्पष्ट हो गया है कि अंतरिक्ष अमेरिका, रूस और चीन के बीच सैन्य प्रतिस्पर्धा का अहम मोर्चा बन चुका है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.