Tuesday, 15 Sep 2026 | 04:08 PM

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विजय थलपति फिल्म 'जन नायकन' पर सेंसर का निर्णय कल:रिवाइजिंग कमेटी करेगी नई स्क्रीनिंग, फिल्म देखने के बाद सर्टिफिकेट को लेकर होगा फैसला

विजय थलपति फिल्म 'जन नायकन' पर सेंसर का निर्णय कल:रिवाइजिंग कमेटी करेगी नई स्क्रीनिंग, फिल्म देखने के बाद सर्टिफिकेट को लेकर होगा फैसला

साउथ सिनेमा के सुपरस्टार विजय थलपति की मोस्ट-अवेटेड फिल्म ‘जन नायकन’ को लेकर सेंसर से जुड़ा विवाद अभी तक खत्म नहीं हुआ है। फिल्म को सर्टिफिकेट देने से पहले सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन की रिवाइजिंग कमेटी एक बार फिर फिल्म की स्क्रीनिंग करने वाली है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक 17 मार्च को कमेटी फिल्म देखेगी और इसके बाद सर्टिफिकेट को लेकर फैसला लिया जा सकता है। पहले यह स्क्रीनिंग 9 मार्च को तय की गई थी, लेकिन कमेटी के एक सदस्य के बीमार पड़ने के कारण इसे टाल दिया गया था। अब नई तारीख तय कर दी गई है और प्रोडक्शन हाउस को इसकी जानकारी दे दी गई है। इस स्क्रीनिंग के बाद कमेटी यह तय करेगी कि फिल्म को सर्टिफिकेट दिया जाए या इसमें कुछ बदलाव किए जाएं। ‘जना नायगन’ पिछले कई महीनों से सेंसर प्रक्रिया में फंसी हुई है। फिल्म को पहले एग्जामिनिंग कमेटी के सामने पेश किया गया था। वहां कुछ आपत्तियों के बाद इसे रिवाइजिंग कमेटी के पास भेज दिया गया। इसी वजह से फिल्म की रिलीज लगातार टलती रही और फैंस को लंबे समय से इंतजार करना पड़ रहा है। फिल्म का निर्देशन एच. विनोथ ने किया है। यह एक बड़े बजट की एक्शन-ड्रामा फिल्म मानी जा रही है और इंडस्ट्री में इसे विजय के करियर की अहम फिल्मों में से एक बताया जा रहा है। अब सबकी नजर 17 मार्च को होने वाली रिवाइजिंग कमेटी की स्क्रीनिंग पर है। इसी के बाद फिल्म की रिलीज को लेकर स्थिति साफ हो सकती है। दरअसल, फिल्म पहले 9 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी, लेकिन सेंसर सर्टिफिकेट समय पर न मिलने के कारण इसकी रिलीज टालनी पड़ी। इसके बाद मामला अदालत तक पहुंच गया था और निर्माताओं ने सर्टिफिकेशन को लेकर कानूनी लड़ाई भी लड़ी थी।

बेंगलुरु के कैफे ने बिल में 5% गैस-संकट चार्ज जोड़ा:₹358 का नींबू पानी मंगाने पर ₹17 एक्स्ट्रा पैसे वसूले; सोशल मीडिया पर वायरल हुई रसीद

बेंगलुरु के कैफे ने बिल में 5% गैस-संकट चार्ज जोड़ा:₹358 का नींबू पानी मंगाने पर ₹17 एक्स्ट्रा पैसे वसूले; सोशल मीडिया पर वायरल हुई रसीद

देशभर में जारी LPG संकट का असर अब लोगों की जेब पर सीधे तौर पर दिख रहा है। बेंगलुरु के एक कैफे ने अपने ग्राहक को नींबू पानी के बिल पर 5% ‘गैस क्राइसिस चार्ज’ (गैस संकट शुल्क) लगा दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कैफे की रसीद की फोटो वायरल होने के बाद लोग इस पर तरह-तरह की रिएक्शन दे रहे हैं। ₹358 के ऑर्डर पर ₹17 का एक्स्ट्रा चार्ज बेंगलुरु के ‘थियो कैफे’ की इस वायरल रसीद के मुताबिक, एक ग्राहक ने दो मिंट लेमोनेड (नींबू पानी) ऑर्डर किए थे। एक लेमोनेड की कीमत ₹179 थी, यानी दो के लिए ₹358 हुए। कैफे ने पहले ₹17.90 का 5% डिस्काउंट दिया, लेकिन फिर स्टैंडर्ड GST (CGST और SGST) के साथ ‘गैस क्राइसिस चार्ज’ के नाम पर 5% यानी ₹17.01 अलग से जोड़ दिए। इस तरह ग्राहक का कुल बिल ₹374 हो गया। सोशल मीडिया पोस्ट वायरल, लोग बोले- ‘बिना गैस का क्या चार्ज?’ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बिल की फोटो शेयर होते ही यूजर्स ने कैफे की आलोचना की। लोगों ने सवाल पूछा कि नींबू पानी बनाने में आखिर कौन सी गैस इस्तेमाल होती है, जो इसके लिए ‘क्राइसिस शुल्क’ वसूला जा रहा है? कुछ यूजर्स ने इसे ग्राहकों को लूटने का नया बहाना बताया, तो कुछ ने इसे ‘महंगाई का डिजिटल अवतार’ बताया। दिल्ली-NCR से लेकर बिहार तक एजेंसियों पर लंबी कतारें गैस की कमी सिर्फ बेंगलुरु तक सीमित नहीं है। दिल्ली-NCR, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों में भी एलपीजी डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर्स के बाहर सुबह से ही लंबी लाइनें लग रही हैं। घरेलू सिलेंडरों की बुकिंग में भी लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर होर्डिंग (जमाखोरी) की खबरें आने के बाद प्रशासन ने छापेमारी भी तेज कर दी है। कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई शुरू सरकार ने 5 दिन बाद कमर्शियल LPG सिलेंडर पर लगी रोक हटा दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कमर्शियल सिलेंडर का वितरण शुरू कर दिया गया है। सरकार ने 9 मार्च को कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पर रोक लगाई थी। होर्मुज से निकले 2 जहाज, 92 हजार टन गैस लेकर आ रहे भारत मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर है। दो भारतीय LPG कैरियर (माल वाहक जहाज), ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’, होर्मुज रूट को पार कर चुके हैं। बंदरगाह और जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि ये जहाज करीब 92,700 मीट्रिक टन LPG लेकर आ रहे हैं। इनके 16 और 17 मार्च तक मुंद्रा और कांडला बंदरगाह पहुंचने की उम्मीद है। सिलेंडर के लिए राजस्थान-बिहार में कई जगह जाम लगा अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से देश में LPG संकट बढ़ गया है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब-चंडीगढ़, हरियाणा और राजस्थान सहित अन्य राज्यों में सिलेंडर के लिए सुबह से ही गैस एजेंसियों और गोदामों पर लाइनें लग गई हैं। LPG संकट के कारण गैस सिलेंडर की कालाबाजारी भी बढ़ गई है। 950 रुपए में आने वाला घरेलू गैस सिलेंडर 3500 रुपए और 2 हजार रुपए के कॉमर्शियल सिलेंडर ब्लैक में 5 हजार रुपए में बेचा जा रहा है। PNG कनेक्शन वालों को नहीं मिलेगा LPG सिलेंडर अगर आपके घर में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन है, तो अब आपको अपना LPG सिलेंडर को सरेंडर करना होगा। देश में गहराते गैस संकट के बीच पेट्रोलियम मंत्रालय ने सप्लाई के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए आदेश के मुताबिक, PNG यूजर्स को न तो नया LPG कनेक्शन मिलेगा और न ही पुराना सिलेंडर रिफिल होगा। सरकार इससे पहले सप्लाई को लेकर 9 दिन में 3 बार नए नियम जारी कर चुकी है। रसोई गैस की सप्लाई के 4 नए नियम LPG सिलेंडर बुकिंग के नियम तीन बार बदले 6 मार्च: घरेलू LPG बुकिंग के लिए लॉक-इन पीरियड 21 दिन किया गया। 9 मार्च: डिमांड बढ़ने से शहरों में लॉक-इन पीरियड बढ़ाकर 25 दिन किया। 12 मार्च: ग्रामीण क्षेत्रों में सिलेंडर बुक करने का गैप 45 दिन किया गया। कनेक्शन सरेंडर न करने पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। सरकार चाहती है कि जिनके पास पीएनजी का विकल्प है, वे सिलेंडर छोड़ दें ताकि सिलेंडर उन लोगों तक पहुंच सके जिनके पास और कोई ऑप्शन नहीं है। शनिवार को नोटिफिकेशन जारी में कहा गया कि जिनके पास दोनों कनेक्शन हैं, वे तुरंत नजदीकी LPG डिस्ट्रीब्यूटर या कंपनी के पोर्टल पर जाकर कनेक्शन सरेंडर करें। सरेंडर करने पर जुर्माना नहीं लगेगा, लेकिन नियम तोड़ने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

मंत्रियों के अनुपस्थित रहने पर कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष ने पद पर बने रहने से किया इनकार; सीएम के आश्वासन के बाद नाटक खत्म | बेंगलुरु-न्यूज़ न्यूज़

US President Donald Trump (AFP)

आखरी अपडेट:मार्च 16, 2026, 16:15 IST आर अशोक ने सरकार के कामकाज पर गहरा असंतोष व्यक्त किया और कहा कि सदन में घटनाक्रम एक अभूतपूर्व स्थिति को दर्शाता है कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया. (पीटीआई फ़ाइल) कर्नाटक विधानसभा में सोमवार को अभूतपूर्व दृश्य सामने आया जब अध्यक्ष यूटी खादर ने कार्यवाही के दौरान कांग्रेस के मंत्रियों और विधायकों की अनुपस्थिति पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए सदन की अध्यक्षता जारी रखने से इनकार कर दिया। खादर ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि आखिरकार सीएम सिद्धारमैया के आश्वासन के बाद मामला सुलझ गया। क्या हुआ? नाराज खादर ने यह घोषणा किए बिना कि सदन फिर से कब बुलाएगा, सत्र अचानक स्थगित कर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक मंत्रियों और विधायकों दोनों की उपस्थिति के मुद्दे का समाधान नहीं हो जाता, तब तक वह कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं करेंगे। स्पीकर का गुस्सा कई मंत्रियों और अधिकारियों की अनुपस्थिति से उपजा, जिनसे विधायकों द्वारा उठाए गए लिखित सवालों का जवाब देने के लिए उपस्थित रहने की उम्मीद थी। मंत्रियों के सदन से गायब रहने पर कई सदस्यों ने कहा कि उनके प्रश्न अनुत्तरित रह गए, जिससे विपक्ष में भी आक्रोश फैल गया। यह घटना तब हुई जब सूचीबद्ध 230 प्रश्नों में से 84 के लिखित उत्तर सदन में रखे जा रहे थे। विपक्ष ने सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि मंत्री सत्र की शुरुआत से ही अपेक्षित जवाब देने में विफल रहे हैं। विपक्ष के नेता आर अशोक ने कहा कि विधानसभा में उपस्थिति बेहद कम थी, उन्होंने दावा किया कि सदन में बमुश्किल 15 प्रतिशत सदस्य मौजूद थे। उन्होंने बताया कि यह मुद्दा चौथी बार उठाया गया है, उन्होंने मंत्रियों और विधायकों द्वारा दिखाई गई गंभीरता की कमी पर निराशा व्यक्त की। स्पष्ट रूप से नाराज खादर ने सदन को याद दिलाया कि विधानसभा सत्र निर्वाचन क्षेत्रों की चिंताओं को दूर करने के लिए है और विधायकों के सवालों का जवाब देने के लिए मंत्रियों के उपस्थित रहने की उम्मीद की जाती है। “हम निर्वाचन क्षेत्रों की समस्याओं पर चर्चा करने के लिए इस सदन का आयोजन करते हैं। यह सत्र मंत्रियों के सवालों के जवाब देने के लिए है। अगर सवाल पूछे जाते हैं और कोई जवाब नहीं मिलता है, तो यह कैसे जारी रह सकता है?” स्पीकर ने सदन में कहा. उन्होंने यह भी बताया कि विधायकों से हर कुछ महीनों में आयोजित सत्र के दौरान मिलने की उम्मीद की जाती है और इस बात पर जोर दिया कि कार्यवाही को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। खादर ने यह कहते हुए सदन स्थगित कर दिया कि वह तब तक सत्र का संचालन नहीं करेंगे जब तक कि अनुपस्थिति के मामले पर ध्यान नहीं दिया जाता और सरकार उठाई गई चिंताओं का जवाब नहीं देती। विधानसभा में एक दुर्लभ क्षण में, अध्यक्ष निराशा में आसन से चले गए, और सदन को अगली बैठक के लिए समय निर्दिष्ट किए बिना स्थगित कर दिया। खादर ने News18 को क्या बताया “सीएम ने मुझे आश्वासन दिया है कि इसे दोबारा नहीं दोहराया जाएगा। उन सचिवों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी जिन्होंने सवालों के जवाब देने में देरी की है। मुख्य सचिव को मामले को देखने और कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। आश्वासन दिया गया है कि मंत्री सवालों का जवाब देने के लिए मौजूद रहेंगे।” खादर ने कहा, “पिछले 4-5 दिनों से, मैंने चेतावनी जारी की है। मैंने मुख्य सचिव, सरकार और विपक्ष के नेता के साथ बैठक की और यह बताया गया कि यदि कोई प्रश्न अनुत्तरित रहता है तो उत्तर के लिए एक निश्चित समय सीमा और देरी का कारण बताया जाना चाहिए।” आर अशोक ने उठाए सवाल स्थगन के बाद मीडिया से बात करते हुए, आर अशोक ने सरकार के कामकाज पर गहरा असंतोष व्यक्त किया और कहा कि सदन में घटनाक्रम एक अभूतपूर्व स्थिति को दर्शाता है। अशोक ने कहा, “आज हमने विधानसभा में जो देखा वह एक असहायता को दर्शाता है जो पहले कभी नहीं देखी गई। अध्यक्ष को खुद विधानसभा छोड़नी पड़ी।” उन्होंने बताया कि सत्र के दौरान लिखित रूप में उत्तर देने के लिए प्रतिदिन 200 से 250 प्रश्न सूचीबद्ध किए जाते हैं, लेकिन उनमें से केवल कुछ ही प्रश्नों को वास्तव में प्रतिक्रिया मिलती है। उन्होंने कहा, ”हर दिन, केवल 10 प्रतिशत, 20 प्रतिशत या अधिकतम 30 प्रतिशत प्रश्नों का उत्तर दिया जा रहा है।” अशोक ने कहा कि विधानसभा सत्र आयोजित किए जाते हैं ताकि विभिन्न तालुकों के विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्रों से संबंधित मुद्दे उठा सकें और सरकार से समाधान मांग सकें। उन्होंने कहा, “सत्र इसलिए आयोजित किया जाता है क्योंकि अपने संबंधित तालुकों के विधायक अपने तालुकों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रश्न पूछते हैं। विधानसभा इन सवालों के कारण चलती है।” अशोक ने सरकार की कार्यप्रणाली की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन में कोई दिशा-निर्देश नहीं है. उन्होंने कहा, “आज कोई दिशा ही नहीं है। शासन खत्म हो गया है। किसी भी सवाल का कोई जवाब नहीं है।” पहले प्रकाशित: मार्च 16, 2026, 16:11 IST समाचार शहर बेंगलुरु-समाचार मंत्रियों के अनुपस्थित रहने पर कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष ने पद पर बने रहने से किया इनकार; सीएम के आश्वासन के बाद नाटक खत्म अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक विधानसभा ड्रामा(टी)कर्नाटक विधानसभा(टी)स्पीकर यूटी खादर(टी)कांग्रेस मंत्रियों की अनुपस्थिति(टी)विधानसभा सत्र स्थगन(टी)विपक्ष की आलोचना(टी)आर अशोक(टी)सरकारी कामकाज

पूर्व PM देवगौड़ा ने राहुल के प्रदर्शन की आलोचना की:सोनिया को लेटर लिखकर कहा- संसद की सीढ़ियों पर चाय-नाश्ते करना उसकी गरिमा कम करता है

पूर्व PM देवगौड़ा ने राहुल के प्रदर्शन की आलोचना की:सोनिया को लेटर लिखकर कहा- संसद की सीढ़ियों पर चाय-नाश्ते करना उसकी गरिमा कम करता है

पूर्व प्रधानमंत्री और जेडी(एस) नेता एचडी देवगौड़ा ने संसद में विपक्ष के हंगामे के तरीके को लेकर कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को लेटर लिखा है। उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी का नाम लिए बिना संसद उनके विरोध की आलोचना की। 92 साल के देवगौड़ा ने दो पेज के लेटर में राहुल के हाल के प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि संसद के बजट सत्र के दौरान लगातार नारेबाजी, पोस्टर दिखाने और धरना-प्रदर्शन से लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को नुकसान पहुंच रहा है। संसद परिसर में सीढ़ियों पर बैठकर चाय-नाश्ते के साथ प्रदर्शन करना संस्थान की गरिमा को कम करता है। देवगौड़ा ने संसद परिसर में बढ़ती अव्यवस्था और विरोध के तरीके पर चिंता जताते हुए इसे ‘कैजुअल प्रोटेस्ट की संस्कृति’ बताया। उन्होंने सोनिया गांधी से अपील करते हुए कहा- विपक्ष की वरिष्ठ नेता होने के नाते आप अपने सांसदों से बात करें और संसदीय मर्यादा बनाए रखने के लिए उन्हें समझाएं। देवगौड़ा ने आगे सोनिया से कहा- संसद के भीतर और उसके परिसर में पैदा हो रही अराजक स्थिति लोकतंत्र की बुनियाद को नुकसान पहुंचा सकती है। विपक्षी दलों को विरोध करने का पूरा अधिकार है, लेकिन विरोध का तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं को क्षति न पहुंचे। उन्होंने सोनिया गांधी से अपील की कि वह विपक्ष के सीनियर नेताओं से बात करें और अपने अनुभव और परिपक्वता के आधार पर उन्हें संयम बरतने की सलाह दें। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 75 वर्षों में देश ने मिलकर लोकतांत्रिक संस्थाओं का निर्माण किया है और विरोध का तरीका ऐसा होना चाहिए जो इस व्यवस्था को कमजोर न करे। लेटर के अंत में उन्होंने कहा कि विरोध लोकतंत्र का अहम हिस्सा है, लेकिन उसे संसदीय नियमों और परंपराओं के दायरे में ही होना चाहिए ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनी रहे।

सलमान खान की ‘बैटल ऑफ गलवान’ अब ‘मातृभूमि’:टाइटल बदलने पर डायरेक्टर अपूर्व लाखिया बोले- फैसला अचानक नहीं, लंबे समय से चल रही थी चर्चा

सलमान खान की ‘बैटल ऑफ गलवान’ अब ‘मातृभूमि’:टाइटल बदलने पर डायरेक्टर अपूर्व लाखिया बोले- फैसला अचानक नहीं, लंबे समय से चल रही थी चर्चा

सलमान खान की अपकमिंग वॉर ड्रामा फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ का नाम अब बदलकर ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ कर दिया गया है। फिल्म के टाइटल बदलने की खबर सामने आने के बाद इसे लेकर काफी चर्चा हो रही है। अब फिल्म के डायरेक्टर अपूर्व लाखिया ने इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है और बताया कि यह फैसला अचानक नहीं लिया गया था। हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत के दौरान अपूर्व लाखिया ने कहा कि फिल्म का टाइटल बदलना किसी एक दिन में लिया गया फैसला नहीं था। मेकर्स काफी समय से इस पर विचार कर रहे थे। उनका कहना है कि नया नाम फिल्म के बड़े और व्यापक भाव को बेहतर तरीके से दर्शाता है। फिल्म पहले ‘बैटल ऑफ गलवान’ नाम से बनाई जा रही थी, जो 2020 में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई गलवान घाटी की झड़प से प्रेरित कहानी पर आधारित है। इस घटना में भारतीय सेना के जवानों ने बेहद कठिन परिस्थितियों में बहादुरी दिखाई थी। इसी घटना को फिल्म की कहानी का आधार बनाया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाइटल बदलने के पीछे एक वजह यह भी है कि मेकर्स फिल्म को सिर्फ एक घटना तक सीमित नहीं रखना चाहते थे। ‘मातृभूमि’ नाम देशभक्ति और बलिदान की भावना को ज्यादा व्यापक तरीके से दर्शाता है। हाल ही में सलमान खान ने सोशल मीडिया पर फिल्म का नया पोस्टर शेयर किया था, जिसमें नया टाइटल और टैगलाइन ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ दिखाई दी। पोस्टर में सलमान घायल हालत में दुश्मनों का सामना करते नजर आ रहे हैं। फिल्म में सलमान खान के साथ चित्रांगदा सिंह अहम भूमिका में दिखाई देंगी। यह पहली बार होगा जब दोनों कलाकार किसी फिल्म में साथ नजर आएंगे। फिल्म की कहानी गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों की बहादुरी और संघर्ष को दिखाएगी। यह वॉर ड्रामा हाई-एल्टीट्यूड लोकेशन्स पर शूट की गई है, ताकि असली माहौल को पर्दे पर दिखाया जा सके। हालांकि टाइटल बदलने के बाद अब फिल्म की रिलीज डेट को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। मेकर्स की ओर से अभी तक नई रिलीज डेट का आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है।

पहले पहाड़ खत्म कराएं, अब पानी बचाने की मुहिम:खंडवा की देशगांव घाटी पर 8 हजार कंटूर ट्रेंच खुदेंगे, कलेक्टर ने चलाई गेंती

पहले पहाड़ खत्म कराएं, अब पानी बचाने की मुहिम:खंडवा की देशगांव घाटी पर 8 हजार कंटूर ट्रेंच खुदेंगे, कलेक्टर ने चलाई गेंती

खंडवा-इंदौर नेशनल हाईवे पर स्थित देशगांव घाटी की जमीन पर अब जल संरक्षण के लिए मुहिम शुरू की गई हैं। यहां सैकड़ों एकड़ जमीन पर 8 हजार कंटूर ट्रेंच खोदे जाने का प्लान जनपद पंचायत छैगांवमाखन ने बनाया हैं। सोमवार को कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने पंडित से भूमिपूजन कराया और खुद गेंती चलाकर भूमिपूजन किया हैं। खंडवा जिले में भूजल संरक्षण के लिए गांव का पानी गांव में अभियान प्रारंभ किया गया है। इस अभियान के तहत छैगांवमाखन जनपद के ग्राम देशगांव में सोमवार को प्रशासन और नेताओं की मौजूदगी में कंटूर ट्रेंच खुदाई के कार्य का शुभारंभ किया गया। इस दौरान कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने कंटूर ट्रेंच खुदाई कार्य के लिए श्रमदान किया, और मौजूद ग्रामीणों, अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को जल संग्रहण संबंधी शपथ दिलाई। कार्यक्रम में सीईओ जिला पंचायत डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा, जनपद अध्यक्ष छैगांवमाखन महेंद्र सावनेर, जिला पंचायत सदस्य श्रीराम चौधरी, नानकराम बरवाहे सहित जनपद सदस्य प्रतिनिधि देवेंद्रसिंह गौड़, सीईओ पंकज डाले व पंचायत प्रतिनिधि मौजूद थे। कारोबियों ने खत्म कर दी देशगांव घाटी बता दें कि, हाईवे पर मौजूद देशगांव घाटी को 150 फीट तक खोदकर नेशनल हाईवे का फोरलेन रास्ता निकाला गया हैं। एक तरफ जहां एनएचएआई ने रास्ते को सुगम बनाने के लिए पहाड़ी को खोदकर समतल किया हैं। वहीं दूसरी ओर शहर के कारोबियों ने पहाड़ी वाली जमीन खरीदकर बाद में उसे समतल करा लिया और पेट्रोल पंप खोल लिए। इस प्रकिया में कारोबारी ने खनिज विभाग और शासन को एक रूपए की रायल्टी तक जमा नहीं कराई। जबकि कारोबियों ने पहाड़ को पूरी तरह खत्म कर दिया।

डॉ.हेल्म्सटेटर की बुक से पढ़ें सोच का जादू:मैं बूढ़ा हो गया, यह सोच बदलें; छोटे काम पूरे करके खुद की तारीफ करें

डॉ.हेल्म्सटेटर की बुक से पढ़ें सोच का जादू:मैं बूढ़ा हो गया, यह सोच बदलें; छोटे काम पूरे करके खुद की तारीफ करें

आप क्या चाहते हैं व उसे कैसे हासिल करें? दरअसल हमारा दिमाग रोज हजारों बार खुद से बात करता है। यदि ये बातें नकारात्मक हों तो मुश्किलें आती हैं। खासकर बुजुर्ग अक्सर सोचते हैं कि अब कुछ नहीं हो सकता। इस सोच को बदलें, छोटे काम पूरे करके खुद की तारीफ करें। इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और अकेलापन कम महसूस होगा। आपके मन में नकारात्मक बातें आएं तो ये 3 काम करें, आत्मविश्वास बढ़ेगा और खुशी मिलेगी नकारात्मक बातों को तुरंत रोकें जब भी मन में ‘मैं बूढ़ा हो गया’ जैसी बातें आएं तो तुरंत रोकें। उनकी जगह पॉजिटिव वाक्य बोलें-‘मैं अभी भी सीख सकता हूं’। रोजाना 10 बार यह अभ्यास करें। इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा। सफलता की कल्पना करें रोज सुबह 5 मिनट आंखें बंद करके सोचें कि आप क्या चाहते हैं-परिवार के साथ घूमना, नया हुनर सीखना या पोते-पोतियों को कुछ सिखाना। इसे इतना साफ देखें जैसे वह सच हो चुका है। छोटे लक्ष्य बनाएं और खुशी मनाएं सप्ताह में एक छोटा काम चुनें। जैसे रोज 10 मिनट वॉक करना या एक पुरानी किताब पढ़ना। जब पूरा हो जाए तो खुद को तारीफ दें-‘मैंने अच्छा किया’। यह आदत बन जाएगी तो आप खुश रहेंगे।

बुजुर्गों को लंबी नींद से ज्यादा जरूरी गहरी नींद:बबल फुलाएं, गुनगुने पानी में पैर डुबोएं; नींद अच्छी आएगी

बुजुर्गों को लंबी नींद से ज्यादा जरूरी गहरी नींद:बबल फुलाएं, गुनगुने पानी में पैर डुबोएं; नींद अच्छी आएगी

बढ़ती उम्र में अच्छी नींद दवाई के जैसी है। इसमें भी लंबे समय तक बिस्तर पर पड़े रहने से ज्यादा जरूरी है गहरी नींद। यह बात नींद पर हुईं कई रिसर्च में साबित हो चुकी है। अब सवाल यह है कि गहरी नींद आएगी कैसे? इसमें सोने से पहले बबल फुलाना, नमक के गुनगुने पानी में पैर रखकर बैठने जैसे तरीके मदद करेंगे। अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन की रिसर्च कहती है अच्छी नींद के दौरान शरीर खुद को रिपेयर करता है। याददाश्त मजबूत, इम्युनिटी बेहतर होती है। इन परेशानियों को नजरअंदाज न करें, डॉक्टर से मिलें नीचे दी परेशानियों में से यदि 2-3 लगातार 2-3 हफ्ते या उससे ज्यादा समय से हों रही हैं तो नींद विशेषज्ञ या जनरल फिजिशियन से मिलें। रात के वक्त सोने में देर लगना- 30-60 मिनट या उससे ज्यादा समय लगना। रात में 3-4 बार उठना और फिर नींद न आना। जोर से खर्राटे और सांस रुकना – स्लीप एप्निया, ये अटैक का खतरा बढ़ाता है। पैरों में दर्द या अकड़न रेस्टलेस लेग सिंड्रोम। चिंता या पुरानी यादों से परेशानी – दिमाग का लंबे समय तक शांत नहीं होना रात 2-3 बजे उठकर फिर से नहीं सो पाना। ये 5 तरीके आपको गहरी नींद लाने में करेंगे मदद एक रूटीन बनाएं – सोने-उठने का समय रोज एक रखें। रात में चाय-कॉफी से बचें। तरीका – खासकर सोने के लिए अलार्म लगाएं। जैसे रात 10 बजे। वहीं रोज सुबह बिना अलार्म उठने के लिए माइंडसेट करें। बबल ब्लोइंग – सोने से पहले बुलबुले फुलाने से अनिद्रा दूर होती है। तरीका- बिस्तर या कुर्सी पर बैठें। बबल मेकर लें। नाक से 4 सेकंड सांस लें, फिर मुंह से 8-10 सेकंड धीरे-धीरे सांस बाहर फूंकें। इसे 5 से 8 बार दोहराएं। सोने का माहौल बनाएं – कमरा अंधेरा, मन शांत व तापमान सेहत अनुकूल रखें। तरीका – पर्दे बंद करें, फोन को ‘नाइट मोड’ पर डालें। बेडरूम सिर्फ सोने के लिए यूज करें। सोने से पहले टीवी न देखें। पैर डुबोएं- गुनगुने पानी से पैरासिम्पैथेटिक नर्व सक्रिय होते हैं। नींद अच्छी आती है। तरीका- बाल्टी में गुनगुना पानी लें। 1 से 2 चम्मच नमक डालें। सोने से 15-20 मिनट पहले 10 मिनट तक पैर डुबोएं। दिनचर्या – सुबह 20 मिनट वॉक या योग, शाम को सैर करें। रात में हल्का भोजन लें। तरीका- एकाग्र होकर वॉक करें। डाइट में रात में दलिया, खिचड़ी जैसा खाना खाएं। बिना छिलके के भीगे बादाम, गुनगुना दूध लें।

गाजियाबाद में छुट्‌टी नहीं देने पर बैंक मैनेजर की हत्या:ऑफिस के अंदर गार्ड ने सीने में गोली मारी, राइफल लेकर भागा

गाजियाबाद में छुट्‌टी नहीं देने पर बैंक मैनेजर की हत्या:ऑफिस के अंदर गार्ड ने सीने में गोली मारी, राइफल लेकर भागा

गाजियाबाद में पंजाब एंड सिंध बैंक के मैनेजर अभिषेक शर्मा (34 साल) की गार्ड ने गोली मारकर हत्या कर दी। वह बिहार के रहने वाले थे। गार्ड रवींद्र कई दिनों से मैनेजर अभिषेक से छुट्‌टी मांग रहा था। सोमवार दोपहर करीब 1:45 बजे वह मैनेजर के पास पहुंचा। जहां छुट्‌टी को लेकर अभिषेक शर्मा से उसका विवाद हो गया। इसी बीच रवींद्र ने बंदूक से उनकी छाती पर गोली मार दी। अभिषेक लहूलुहान होकर जमीन पर गिर गए। बैंक में अचानक फायरिंग से लोग दहशत में आ गए। इसी बीच आरोपी गार्ड अपने एक अन्य साथी के साथ मौके से भाग निकला। बैंक स्टाफ ने मैनेजर को बाइक से दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन रास्ते में उनकी मौत हो गई। घटना से जुड़ा बैंक के गेट का एक CCTV सामने आया है, जिसमें गार्ड अपने साथी के साथ दिख रहा था। उसके भागने के कुछ मिनट बाद बैंक मैनेजर को लोग उठाकर ले जाते दिखे। वारदात लोनी बॉर्डर थाना क्षेत्र के बलराम नगर इलाके की है। मामले में ACP ज्ञान प्रकाश राय ने बताया, आरोपी गार्ड बागपत का रहने वाला है। काफी समय से छुट्टी को लेकर मैनेजर अभिषेक शर्मा से विवाद था। इसके चलते उसने यह घटना अंजाम दी। आरोपी की तलाश के लिए टीमें लगा दी हैं और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वारदात से जुड़ी 3 फोटो देखिए… गाजियाबाद में पत्नी के साथ रहते थे अभिषेक बैंक मैनेजर अभिषेक शर्मा बिहार में पटना के लखीपुर के रहने वाले थे। अगस्त, 2025 से वह गाजियाबाद में पत्नी के साथ किराए पर रह रहे थे। इस समय पत्नी बिहार में है। घटना की जानकारी दी गई है। परिवार गाजियाबाद आ रहा है। बैंक मैनेजर ने फोन पर फटकार लगाई थी बैंक कर्मियों के अनुसार, रविवार को बैंक में छुट्‌टी थी, लेकिन गार्ड सोमवार सुबह भी ड्यूटी पर नहीं आया। इस पर मैनेजर अभिषेक शर्मा ने उसे फोन किया। ड्यूटी पर न आने का कारण पूछते हुए फटकार लगाई थी। गार्ड ने जवाब दिया कि कुछ इमरजेंसी आ गई है। इसलिए आज नहीं आ सकता हूं। अभिषेक ने कहा कि तुरंत बैंक आओ। रवींद्र गुस्से में दोपहर डेढ़ बजे अपने एक साथी के साथ बाइक से बैंक पहुंचा। उसने साथी को बैंक के बाहर खड़ा कर दिया। फिर अंदर जाकर उसने बैंक में जमा अपनी लाइसेंसी बंदूक ली। इसके बाद वह सीधे बैंक मैनेजर के पास पहुंचकर झगड़ने लगा। घटना के समय बैंक में मैनेजर समेत पांच कर्मचारी काम कर रहे थे। जब तक अन्य कर्मचारी कुछ समझ पाते, तब तक गार्ड ने मैनेजर के सीने में गोली मार दी। आर्मी से रिटायर्ड है आरोपी गार्ड पुलिस के अनुसार, गार्ड रवींद्र हुड्डा (45 साल) 2018 में आर्मी से रिटायर्ड हुआ था। वह बागपत के मंसूरपुर थाना क्षेत्र में चांदीनगर का रहने वाला है। रवींद्र की तीन महीने पहले पंजाब एंड सिंध बैंक में एक एजेंसी के जरिए नौकरी लगी थी। रवींद्र के परिवार में तीन बच्चे हैं। इनमें दो लड़की और एक लड़का है। आरोपी रविंद्र शराब का आदी है और आए दिन नशे में लोगों से झगड़ा करता है। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया- हाफ पैंट और टीशर्ट में आया था गार्ड प्रत्यक्षदर्शी आरएन पांडेय ने बताया, मैं भी बैंक आया था। अंदर जा ही रहा था, तभी गोली चलने की आवाज सुनाई दी तो रुक गया। तभी एक व्यक्ति, जो हाफ पैंट और पीली रंग की टीशर्ट में था, वह बाहर आया। उसके एक हाथ में बंदूक थी। उसके साथ एक और व्यक्ति भी था, जो कुर्ता-पैंट और सिर पर पगड़ी पहने था। दोनों बड़े आराम से बैंक से बाहर निकले। मेन रोड पर एक बाइक खड़ी थी। दोनों उसी बाइक से भाग निकले। बैंक के कर्मी मैनेजर को उठाकर बाहर लेकर आए थे। फॉरेसिंक टीम मौके पर पहुंची DCP सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया- फॉरेसिंक टीम मौके पर पहुंच गई है। घटनास्थल का मौका मुआयना किया जा रहा है। जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार किया जाएगा। गाजियाबाद ग्रामीण जोन के पुलिस उपायुक्त सुरेन्द्र नाथ तिवारी ने बताया- पंजाब एंड सिंध बैंक में तैनात गार्ड की बंदूक बैंक में ही जमा थी। गार्ड ने वहीं से बंदूक वापस लेकर बैंक मैनेजर अभिषेक को गोली मार दी। दोनों के बीच कहासुनी हुई थी। ……………. ये खबर भी पढ़िए… स्टंटबाजी में 12वीं के छात्र की मौत, VIDEO: लखनऊ में बुलेट-स्कूटी की भीषण टक्कर, छात्र उछलकर डिवाइडर पर गिरा लखनऊ में बाइक रेसिंग में 12वीं के छात्र की जान चली गई। जनेश्वर मिश्र पार्क के पास बुलेट और कावासाकी बाइक सवार रेस लगा रहे थे। तभी सामने स्कूटी आ गई। स्कूटी से टकराने के बाद बुलेट डिवाइडर से जा भिड़ी। बुलेट सवार 12वीं का छात्र उछलकर डिवाइडर से टकराकर। उसका सिर फट गया। हादसे के बाद वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई। कावासाकी सवार लड़के ने लोगों की मदद से बुलेट सवार दोस्त को अस्पताल पहुंचाया। जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। पढ़ें पूरी खबर…

‘कांग्रेस सांसदों को सलाह दें…’: पूर्व पीएम देवेगौड़ा ने संसद में व्यवधान पर सोनिया गांधी को लिखा पत्र | राजनीति समाचार

US President Donald Trump (AFP)

आखरी अपडेट:मार्च 16, 2026, 14:44 IST देवेगौड़ा ने विपक्ष में एक वरिष्ठ नेता के रूप में सोनिया गांधी से कांग्रेस नेताओं और सांसदों को अनुशासन बहाल करने और संसदीय मानदंडों को बनाए रखने की सलाह देने का आग्रह किया। देवेगौड़ा और सोनिया गांधी. (फ़ाइल) पूर्व प्रधान मंत्री एचडी देवेगौड़ा ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर संसद में हाल के व्यवधानों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है, जिसमें उन्होंने कहा कि इसका नेतृत्व बड़े पैमाने पर विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस सांसदों द्वारा किया जा रहा है। 16 मार्च को लिखे अपने पत्र में, गौड़ा ने कहा कि संसद में और उसके आसपास के अराजक दृश्य – जिसमें नारेबाज़ी, तख्तियां प्रदर्शित करना, धरना और अवरोध शामिल हैं – अभूतपूर्व थे और भारत के संसदीय लोकतंत्र की नींव को नुकसान पहुंचाने का जोखिम था। अपने 65 साल के सार्वजनिक जीवन का हवाला देते हुए, जिसमें से अधिकांश समय उन्होंने विपक्ष में बिताया, पूर्व प्रधान मंत्री ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों से संसद की गरिमा और परंपराओं को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि अतीत में तीव्र राजनीतिक असहमति के दौरान भी संसदीय मर्यादा कायम रखी गई थी। जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, बीआर अंबेडकर और मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे नेताओं द्वारा अपनाए गए लोकतांत्रिक मूल्यों को याद करते हुए, गौड़ा ने कहा कि उनके द्वारा स्थापित परंपराएं संसदीय आचरण का मार्गदर्शन करती रहनी चाहिए। यह स्वीकार करते हुए कि विपक्ष की भूमिका कठिन और महत्वपूर्ण दोनों है, उन्होंने कहा कि विरोध स्थापित संसदीय नियमों और परंपराओं के भीतर होना चाहिए। उन्होंने विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता के रूप में गांधी से कांग्रेस नेताओं और सांसदों को अनुशासन बहाल करने और संसदीय मानदंडों को बनाए रखने की सलाह देने का आग्रह किया। गौड़ा ने कहा कि विपक्ष को विरोध करने का पूरा अधिकार है, लेकिन उन्होंने आगाह किया कि इस तरह की कार्रवाइयों से भारत के लोकतंत्र के पिछले 75 वर्षों में निर्मित संस्थानों को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। मौजूदा बजट सत्र में दोनों सदनों में बार-बार व्यवधान देखा गया है, विपक्षी सांसद विभिन्न मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, नारे लगा रहे हैं और तख्तियां प्रदर्शित कर रहे हैं। विरोध प्रदर्शनों के कारण बार-बार स्थगन और कार्यवाही रुकी है, सरकार और विपक्ष व्यवधानों की जिम्मेदारी को लेकर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। पहले प्रकाशित: मार्च 16, 2026, 14:44 IST समाचार राजनीति ‘कांग्रेस सांसदों को सलाह दें…’: पूर्व पीएम देवेगौड़ा ने संसद में व्यवधान पर सोनिया गांधी को लिखा पत्र अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें