होली के त्योहार में 948 सड़क हादसे:सागर 67 के साथ टॉप पर; नशा, तेज रफ्तार और नियमों की अनदेखी बनी बड़ी वजह

होली के उत्सव के बीच प्रदेश में सड़क हादसों का ग्राफ चिंताजनक रूप से बढ़ गया। 4 मार्च को 108 एंबुलेंस सेवा के डेटा के अनुसार एक ही दिन में 948 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। सबसे अधिक 67 हादसे सागर जिले में हुए, जबकि राजधानी भोपाल 39 मामलों के साथ आठवें स्थान पर रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि तेज रफ्तार, शराब पीकर वाहन चलाना और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी हादसों के प्रमुख कारण हैं। सरकारी अस्पतालों में सामान्य दिनों की तुलना में दोगुने से अधिक घायल इलाज के लिए पहुंचे। सागर टॉप पर, कई जिलों में बढ़े मामले प्रदेश में दर्ज 948 सड़क हादसों में सागर जिला 67 मामलों के साथ पहले स्थान पर रहा। इसके बाद विदिशा में 55, इंदौर में 46 और जबलपुर में 45 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। महाकौशल और विंध्य क्षेत्र के जिलों में भी स्थिति गंभीर रही। रीवा और सतना में 42-42 तथा रायसेन में 41 हादसे दर्ज हुए। राजधानी भोपाल में 39 दुर्घटनाएं सामने आईं, जिससे वह सूची में आठवें स्थान पर रहा। वहीं, छिंदवाड़ा (30), धार (28), सिंगरौली (27), खरगोन और बालाघाट (25-25) में भी उल्लेखनीय संख्या में सड़क हादसे हुए। वहीं शाजापुर में 2 और दतिया में 1 हादसा दर्ज किया गया। नशा और तेज रफ्तार बनी बड़ी वजह 108 एंबुलेंस सेवा के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने बताया कि तेज रफ्तार, शराब पीकर वाहन चलाना और यातायात नियमों की अनदेखी सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने कहा कि होली के दौरान नशे की हालत में वाहन चलाने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इस बार बीते साल की तुलना में नशे में हुए एक्सीडेंट की संख्या अधिक रही है। भोपाल में सामान्य से दोगुने मामले राजधानी भोपाल के सरकारी अस्पतालों में होली के दौरान सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े 62 घायल इलाज के लिए पहुंचे। जबकि सामान्य दिनों में यह संख्या 20 से 25 के बीच रहती है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, अधिकतर घायलों में बाइक सवार शामिल थे। कई मामलों में हेलमेट का उपयोग नहीं किया गया था, जिससे सिर में गंभीर चोटें आईं। ट्रॉमा मामलों में 30 प्रतिशत तक मृत्यु दर कम्युनिटी मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. कुलदीप गुप्ता के अनुसार, एक रिसर्च में पाया गया है कि सड़क दुर्घटना के बाद ट्रॉमा में लाए गए 10 गंभीर घायलों में से 3 की जान नहीं बच पाती। उन्होंने कहा कि ज्यादातर मामलों में ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं किया गया था। बाइक चालकों के लिए हेलमेट पहनना बेहद जरूरी है, क्योंकि सिर की चोटें जानलेवा साबित हो सकती हैं। कई उदाहरण ऐसे भी हैं जहां हेलमेट पहनने के कारण गंभीर हादसे के बावजूद व्यक्ति की जान बच गई। हेलमेट और सीट बेल्ट की अनदेखी तरुण सिंह परिहार ने बताया कि अधिकांश मामलों में लोग हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग नहीं करते। छोटी दुर्घटना भी इसी कारण गंभीर रूप ले लेती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वाहन चलाते समय सभी नियमों का पालन करें। किसी भी आपात स्थिति में निजी वाहन से ले जाने के बजाय एंबुलेंस सेवा का उपयोग करें, क्योंकि उसमें जीवन रक्षक उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद रहता है। जागरूकता ही बचाव का रास्ता विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहारों के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। उत्सव का माहौल सड़क सुरक्षा के नियमों को नजरअंदाज करने का कारण नहीं बनना चाहिए। तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण बढ़ते हादसे यह संकेत दे रहे हैं कि सड़क सुरक्षा को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान और सख्त प्रवर्तन की आवश्यकता है, ताकि आने वाले समय में ऐसे आंकड़ों में कमी लाई जा सके।
डीजी वरुण कपूर ने मैहर सब जेल का निरीक्षण किया:गंदगी पर जताई नाराजगी, बोले- जल्द होगा नई जेल का निर्माण

मध्य प्रदेश के जेल महानिदेशक (डीजी) वरुण कपूर ने गुरुवार को मैहर सब जेल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने जेल परिसर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और बंदियों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान जेल अधीक्षक लीना कोष्ठा, एसडीएम दिव्या पटेल और जेलर रामजी त्रिपाठी भी उपस्थित थे। निरीक्षण के दौरान डीजी कपूर ने बैरकों का दौरा किया। उन्होंने कैदियों के खान-पान की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य मूलभूत सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। डीजी ने बंदियों को दिए जाने वाले अनाज की गुणवत्ता भी जांची। एक बैरक में बने टैंक में पानी और सफाई का अभाव पाए जाने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की और जेलर को तत्काल सफाई व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए। निरीक्षण के बाद मीडिया से बातचीत में डीजी वरुण कपूर ने बताया कि मैहर सब जेल का भवन काफी पुराना और छोटा है। इसकी क्षमता केवल 55 कैदियों की है, जबकि यहां हमेशा क्षमता से अधिक बंदी रहते हैं। उन्होंने कहा कि मैहर में एक नई और बड़ी जेल के निर्माण की सख्त आवश्यकता है। इसके लिए जमीन भी चिन्हित कर ली गई है और शासन की योजना के तहत जल्द ही निर्माण कार्य शुरू करने का प्रयास किया जाएगा। जल्द मिल सकती है प्रस्ताव को स्वीकृति पुलिस विभाग की तर्ज पर जेल कर्मचारियों को भी साल में 13 महीने का वेतन दिए जाने के सवाल पर डीजी कपूर ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि इस विषय पर काफी समय से विचार चल रहा है और मुख्यालय की ओर से इसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जा चुका है। डीजी ने आश्वस्त किया कि मुख्यालय इस प्रस्ताव को जल्द स्वीकृति दिलाने के लिए प्रयासरत है।
अटरिया मोड़ पर बुलेट फिसलने से युवक घायल:हादसे के बाद बोलेरो ले जाने पर विवाद; पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर शांत कराया मामला

मऊगंज थाना क्षेत्र के अटरिया मोड़ के पास गुरुवार शाम एक बुलेट बाइक बेकाबू होकर फिसल गई। इस हादसे में पाड़र निवासी राहुल पटेल गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल के पैर में फ्रैक्चर होने के कारण प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए रीवा रेफर कर दिया है। बेकाबू होकर सड़क पर गिरी बाइक राहुल पटेल शाम करीब 5 बजे अपनी बुलेट से साथियों से मिलने छुहिया गांव जा रहे थे। इसी दौरान अटरिया मोड़ के समीप उनकी बाइक बेकाबू हो गई। सड़क पर गिरने से राहुल के पैर में गंभीर चोट आई। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे साथियों ने उन्हें तत्काल सिविल अस्पताल मऊगंज पहुंचाया। बोलेरो ले जाने को लेकर अस्पताल में हंगामा घायल को अस्पताल ले जाने के लिए साथियों ने छुहिया गांव में खड़ी एक बोलेरो मालिक को बिना बताए उठा ली। वाहन न मिलने पर मालिक को गाड़ी चोरी होने का संदेह हुआ। बोलेरो की तलाश करते हुए मालिक और गांव के अन्य युवक अस्पताल पहुंच गए, जहां दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। पुलिस ने हस्तक्षेप कर सुलझाया विवाद अस्पताल में तनाव की स्थिति निर्मित होने पर मऊगंज पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया, जिसके बाद वाहन मालिक अपनी गाड़ी लेकर वापस लौटा। पुलिस की मौजूदगी में स्थिति सामान्य होने के बाद डॉक्टरों ने घायल राहुल को एंबुलेंस के जरिए रीवा रवाना किया।
‘210 सीटों पर 35% वोट शेयर’: बीजेपी को क्यों लगता है कि बंगाल 2026 के निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ सकता है | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 05, 2026, 20:07 IST भाजपा सूत्रों का कहना है कि कई जमीनी आकलन पश्चिम बंगाल में, विशेष रूप से प्रेसीडेंसी क्षेत्र-कोलकाता और इसके आसपास के शहरी क्षेत्र में एक स्पष्ट बदलाव का संकेत देते हैं। समिक भट्टाचार्य, सुकांत मजूमदार और सुवेंदु अधिकारी सहित पश्चिम बंगाल भाजपा के शीर्ष नेता। फ़ाइल चित्र वर्षों तक पश्चिम बंगाल की राजनीति एक कठोर ढाँचे में बंधी हुई दिखाई दी। लेकिन सतह के नीचे, चुनावी मानचित्र इस तरह से बदल रहा है कि इसे नज़रअंदाज़ करना कठिन होता जा रहा है। कई जमीनी आकलन अब सुझाव देते हैं कि राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से लगभग 210 पर भाजपा को लगभग 35% वोट शेयर हासिल है। ऐसे राज्य में जहां राजनीति अक्सर गति पकड़ते ही नाटकीय रूप से बदल जाती है, ऐसे आंकड़े नियमित विपक्षी वृद्धि से कुछ बड़े होने की ओर इशारा करते हैं। इस बदलाव के सबसे स्पष्ट संकेत प्रेसीडेंसी क्षेत्र-कोलकाता और इसके आसपास के शहरी क्षेत्र से उभर रहे हैं। पश्चिम बंगाल के लिए जिम्मेदार एक वरिष्ठ भाजपा नेता का दावा है कि वर्षों बाद हुए शहरी निकाय चुनावों में इस क्षेत्र की लगभग 110 सीटों पर भाजपा आगे चल रही थी। शहरी बंगाल परंपरागत रूप से राजनीतिक रूप से निर्णायक रहा है, और यहां बदलाव अक्सर व्यापक चुनावी धाराओं का संकेत देता है। जिसे कभी एक पृथक उछाल के रूप में खारिज कर दिया गया था, वह अब एक संरचनात्मक उपस्थिति में तब्दील होता दिख रहा है। लेकिन केवल चुनावी आंकड़े ही बंगाल में बदलते मूड को स्पष्ट नहीं करते हैं। राज्य के युवाओं का एक बड़ा वर्ग – विशेषकर बेरोजगार – तेजी से बेचैन हो गया है। अवसर के बिना कल्याण का वादा फीका पड़ने लगा है। इस भावना को पहचानते हुए, भाजपा बेरोजगार युवाओं पर लक्षित प्रतिस्पर्धी कल्याण योजनाएं शुरू करने की तैयारी कर रही है, जो उन्हें सत्तारूढ़ सरकार द्वारा पेश किए गए लोगों के लिए अधिक मजबूत विकल्प के रूप में पेश कर रही है। जो संदेश दिया जा रहा है वह सरल है: कल्याण से सशक्तिकरण होना चाहिए, न कि निर्भरता। एक और कथात्मक लड़ाई भी चल रही है-पहचान को लेकर। वर्षों से, ममता बनर्जी और सत्तारूढ़ प्रतिष्ठान ने भाजपा को बंगाल में एक “बाहरी” ताकत के रूप में चित्रित करने का प्रयास किया है। फिर भी भाजपा का कहना है कि यह आरोप खोखला लगता है जब कोई याद करता है कि पार्टी के संस्थापकों में से एक बंगाली राष्ट्रवादी नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे। उनकी विरासत बंगाल के राजनीतिक इतिहास के साथ गहराई से जुड़ी हुई है। उस वंश का आह्वान करके, पार्टी अपनी बंगाली साख को पुनः प्राप्त करने और इसके खिलाफ तैनात क्षेत्रीयवादी आख्यान को कुंद करने का प्रयास कर रही है। “हम एक बंगाली पार्टी हैं। हमारे संस्थापक एक बंगाली हैं। हमारी बंगाली साख पर सवाल उठाने वाली ममता बनर्जी कौन होती हैं?” बीजेपी नेता पूछते हैं. हालाँकि, राजनीति शायद ही कभी केवल तर्कों से तय होती है। इसका निर्णय उन क्षणों से होता है – वे क्षण जब मतदाता सामूहिक रूप से महसूस करते हैं कि मौजूदा व्यवस्था ने अपना काम कर लिया है। भाजपा नेता इस बात पर जोर देते हैं कि बंगाल में अब वह घड़ी आ सकती है। उनका तर्क है कि शहरी कोलकाता से लेकर अर्ध-शहरी इलाकों तक सभी जिलों में ऐसे संकेत हैं कि मतदाताओं का धैर्य कमजोर हो रहा है। उनका दावा है कि आर्थिक चिंताएं, शासन की थकान और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की बढ़ती इच्छा मिलकर एक ऐसा मूड बना रही है जिसे राजनीतिक पर्यवेक्षक अक्सर “टिपिंग पॉइंट” के रूप में वर्णित करते हैं। यह देखना अभी बाकी है कि क्या वह निर्णायक बिंदु अंततः सत्ता परिवर्तन में तब्दील होता है। बंगाल में आश्चर्यजनक राजनीतिक परिणामों का एक लंबा इतिहास रहा है। सवाल यह है कि क्या 2026 काफी आश्चर्यजनक होगा? पहले प्रकाशित: मार्च 05, 2026, 20:07 IST समाचार राजनीति ‘210 सीटों पर 35% वोट शेयर’: बीजेपी को क्यों लगता है कि बंगाल 2026 के निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रहा है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)बीजेपी(टी)बंगाल(टी)टीएमसी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव
बालाजी टेलीफिल्म्स विवाद पर राज शांडिल्य का बयान:कॉन्ट्रैक्ट कॉन्ट्रोवर्सी के बीच आरोपों को निराधार बताया, कहा- 'भागम भाग 2' तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ेगी

फिल्ममेकर राज शांडिल्य और बालाजी टेलीफिल्म्स के बीच इन दिनों कॉन्ट्रैक्ट को लेकर विवाद चर्चा में है। इस बीच राज शांडिल्या ने एक बयान जारी कर अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताया है और कहा है कि उनकी आने वाली फिल्म ‘भागम भाग 2’ तय योजना के अनुसार आगे बढ़ रही है। राज शांडिल्य ने कहा कि उन्होंने अपने कॉन्ट्रैक्ट के तहत कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए बालाजी टेलीफिल्म्स के साथ अपनी व्यवस्था समाप्त करने का नोटिस जारी किया था। उनके मुताबिक इस नोटिस को जारी हुए दो हफ्ते से ज्यादा समय हो चुका है। अगर कंपनी को इस फैसले को चुनौती देने का कोई ठोस आधार लगती, तो वह सिविल कोर्ट का रुख कर सकती थी, लेकिन अब तक ऐसी कोई कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं की गई है। डायरेक्टर का कहना है कि अब उनके खिलाफ बढ़ा-चढ़ाकर और बेबुनियाद आपराधिक आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने इसे दबाव बनाने की कोशिश बताते हुए कहा कि उन्हें अपनी कानूनी स्थिति पर पूरा भरोसा है और किसी भी आरोप का जवाब वे कानूनी प्रक्रिया के तहत देंगे। दरअसल, यह विवाद कथित तौर पर उस कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा है जो राज शांडिल्या ने बालाजी टेलीफिल्म्स की प्रमुख एकता कपूर की कंपनी के साथ किया था। रिपोर्ट्स के अनुसार इस डील के तहत उन्हें तीन फिल्मों का निर्देशन करना था। आरोप है कि तीसरी फिल्म पूरी किए बिना ही उन्होंने अन्य प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू कर दिया, जिसमें ‘भागम भाग’ 2’ भी शामिल है। दूसरी ओर, राज शांडिल्य का कहना है कि उन्होंने नियमों के तहत ही यह समझौता समाप्त किया है। उन्होंने यह भी साफ किया कि ‘भागम भाग’ 2’ की योजना में कोई बदलाव नहीं हुआ है और फिल्म का काम तय शेड्यूल के अनुसार आगे बढ़ेगा। निर्देशक ने फिल्म और क्रिएटिव इंडस्ट्री से जुड़े लोगों से भी अपील की कि वे इस मामले में अपनाए जा रहे दबाव के तरीकों पर ध्यान दें और भविष्य में पेशेवर साझेदारी तय करते समय अपनी राय खुद बनाएं। बता दें कि फिल्म भागम भाग’ साल 2006 में रिलीज हुई एक कॉमेडी फिल्म थी। इसका निर्देशन मशहूर फिल्ममेकर प्रियदर्शन ने किया था। फिल्म में अक्षय कुमार, गोविंदा और लारा दत्ता जैसे कलाकार नजर आए थे। यह फिल्म अपनी तेज-तर्रार कॉमेडी, गलतफहमियों और मजेदार भागदौड़ वाली कहानी के लिए काफी पसंद की गई थी। बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म सफल रही और बाद में इसे एक कल्ट कॉमेडी माना जाने लगा। अब इस फिल्म का सीक्वल भागम भाग’ 2 बनाया जा रहा है। इस बार फिल्म का निर्देशन राज शांडिल्य कर रहे हैं। फिल्म में एक बार फिर अक्षय कुमार और परेश रावल जैसे कलाकारों के होने की चर्चा है। मेकर्स इस सीक्वल को पहले पार्ट की तरह फुल कॉमेडी और एंटरटेनमेंट से भरपूर बनाने की योजना बना रहे हैं।
Reuse T Shirts: होली पर रंगी पुरानी टी-शर्ट को नहीं बनाएं, स्मार्ट स्टूडेंट से ऐसे करें रीयूज़

पुरानी टी-शर्ट का पुन: उपयोग करें: आजकल सस्तेनेबल लिविंग का चलन बढ़ रहा है। ऐसे में पुराने एनीमेल को-इस्तेमाल करना न सिर्फ शामिल है, बल्कि कूड़ा-कचरा कम करने में भी मदद करता है। भारत में हर साल लाखों टन कपड़े के रूप में फेंके जाते हैं, जिनमें टी-शर्ट प्रमुख हैं। लेकिन कम लचीलापन से उपयोगी सामान में बदलाव किया जा सकता है। यहां हम कुछ स्मार्ट तरीके सुझाए जा रहे हैं, जिन्हें घर पर आसानी से बनाया जा सकता है। 1. तकिया कवर: टी-श्रेणी के सजावटी तत्वों को सिलें और अंदर भरें। अगर साए नहीं आता, तो फ़्यूज़िबल वेबिंग का उपयोग करें। यह घर की सजावट के लिए प्रभाव डालता है। 2. कैंसर कवर: कोलेजन के आकार में फैक्ट्रियां, सिलें और अंदरूनी सामान शामिल हैं। इससे पहले या बिस्तर की लुक बदली जा सकती है, बिना नए सामान की व्यवस्था के। 3. अंतिम संस्कार: पुराने टी-शर्टों को चौकोर प्रदर्शन में विशाखापटें लें। फ़्लैनल कपड़े से लाइनिंग डेस्टिनीट कोलम्बिया तैयार करें। इससे पहले घर में गर्माहट और पुराने कपड़े के फायदे नहीं मिलेंगे। 4. टोट बैग: वज्र और कांच के आभूषण नीचे सिलें या आभूषण। यह बाज़ार में जाने या छोटी चीज़ें रखने के लिए उपयोगी है। मजबूत और मजबूत वाल्व लंबे समय तक बना रहेगा। 5. साफ-सफाई के कपड़े: सबसे खराब टी-शर्ट को छोटी-छोटी कक्षाओं में पिरोया जाता है। एफ़आईएल, स्टील या इलेक्ट्रॉनिक्स साफ़ करने में उपयोग किया जाता है। यह क्लॉथ क्लॉथ से बेहतर विकल्प है। 6. छोटा काला: टी-शर्ट को सजावटी गूंथें या क्रोशिया से बुनें। दरवाज़ा या बच्चों के कमरे में जगह। सुविधा और आसानी से धोने योग्य। 7. पेट पालतू जानवर: पट्टियां गूंथकर रोबोट खिलौना निर्माता के रूप में। दांतों के लिए सुरक्षित, क्योंकि कॉटन दांतों को नुकसान नहीं पहुंचाता। 8. प्लांट हैंगर: वजीरे को मैक्रमे स्टाइल में बुनें। गमले टांगने के लिए इस्तेमाल करें, घर को हरा-भरा बनाएं। ये तरीके न सिर्फ पैसे बचाते हैं, बल्कि प्लास्टिक और प्लास्टिक को भी कम करते हैं। ऐसे उपाय भारत के जीरो वेस्ट लक्ष्य में योगदान देते हैं। अगर आपके पास पुराने टी-शर्ट हैं, तो आज ही खरीदें। इससे आपकी पुरातनता और घर का सामान भी एडजस्ट हो जाएगा। (टैग्सटूट्रांसलेट) पुरानी टी-शर्ट का पुन: उपयोग (टी) कपड़ों के लिए अपसाइक्लिंग विचार (टी) DIY टी-शर्ट प्रोजेक्ट्स (टी) पर्यावरण-अनुकूल कपड़ों का पुन: उपयोग (टी) टी-शर्ट को पुन: उपयोग करने के रचनात्मक तरीके
भाई दूज पर भी दतिया में होली का उत्साह:एसपी समेत पुलिसकर्मी भी रंग-गुलाल में सराबोर

भाई दूज के पर्व पर भी दतिया में होली का रंग और उत्साह थमने का नाम नहीं लेता दिखा। जिलेभर में रंग, गुलाल और फाग के सुरों के साथ त्योहार का माहौल बना रहा। खास बात यह रही कि पुलिस भी आमजन के साथ रंगों में सराबोर नजर आई, जिससे सौहार्द और उत्सव का संदेश मिला। पुलिस लाइन ग्राउंड में जिले की पुलिस ने सामूहिक रूप से होली मनाई। इस दौरान थाना प्रभारी से लेकर एसपी सूरज वर्मा तक रंग-गुलाल में सराबोर नजर आए। पुलिस अधिकारियों और जवानों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाया और भाईचारे के साथ होली की खुशियां साझा कीं। चौराहों पर भी उत्सव दिखा वहीं शहर के गली, चौक और चौराहों पर भी उत्सव का नजारा देखने को मिला। फाग मंडलियों ने पारंपरिक बुंदेली गीतों की प्रस्तुति दी। जिनकी धुनों पर लोग झूमते और ठुमके लगाते नजर आए। बाजारों में युवाओं की टोलियां रंग-गुलाल उड़ाती हुई निकलती दिखीं। जिससे माहौल पूरी तरह उत्सवमय बना रहा। भाई दूज के मौके पर बहनों ने भी पूरे विधि-विधान से भाइयों का तिलक कर उनकी लंबी उम्र की कामना की। घर-घर में भाई दूज का पर्व धूमधाम से मनाया गया। हालांकि, कुछ इलाकों में रंग-गुलाल लगाने को लेकर हल्के-फुल्के विवाद की स्थिति भी सामने आई, लेकिन पुलिस की सतर्कता से हालात पर तुरंत काबू पा लिया।
अटकलें, बैठकें और आधी रात की कॉल: होली पर कैसे बदल गई बिहार की राजनीति | 10 अंक | पटना-न्यूज़ न्यूज़

आखरी अपडेट:मार्च 05, 2026, 14:38 IST गुरुवार को नामांकन दाखिल करने का आखिरी दिन होने के कारण, राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि राज्य सत्ता में महत्वपूर्ण बदलाव के कगार पर हो सकता है। बुधवार की रात बैठक के दौरान नीतीश कुमार ने उमेश कुशवाहा को जदयू के प्रदेश अध्यक्ष पद पर बने रहने की मंजूरी दे दी. (क्रेडिट: पीटीआई) बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अपने पद से हटने और राज्यसभा में जाने की अटकलों से पटना से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। होली के मौके पर राजनीतिक गलियारों में शुरू हुई चर्चा बुधवार की देर रात नीतीश कुमार के आवास पर एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद ठोस निर्णय की ओर बढ़ती दिखाई दी। सूत्र बताते हैं कि देर रात के विचार-विमर्श के दौरान बिहार के सीएम के राजनीतिक भविष्य और राज्य के नेतृत्व के संबंध में एक महत्वपूर्ण निर्णय को अंतिम रूप दिया गया, जिसकी आधिकारिक घोषणा आज होने की उम्मीद है। इस घटनाक्रम से सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी दोनों खेमों में हड़कंप मच गया है। नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में प्रवेश करने की बढ़ती चर्चा और ‘ऑपरेशन लोटस’ की सुगबुगाहट के बीच, महागठबंधन ने इस घटनाक्रम को जनता के जनादेश का अपमान बताया है। गुरुवार को नामांकन दाखिल करने का आखिरी दिन होने के कारण, राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि राज्य सत्ता में महत्वपूर्ण बदलाव के कगार पर हो सकता है। बुधवार, 4 मार्च को बिहार में क्या हुआ, आइए जानते हैं 1. बुधवार सुबह से ही राजनीतिक गलियारों में ऐसी खबरें आ रही थीं कि नीतीश कुमार को राज्यसभा के लिए जनता दल (यूनाइटेड) के दूसरे उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा जा सकता है। 2. शाम करीब 6 बजे नीतीश कुमार ने अपने आवास पर संजय झा और विजय कुमार चौधरी समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ आपात बैठक बुलाई. 3. चर्चा के दौरान, विजय चौधरी ने कहा कि अंतिम फैसला नीतीश कुमार का होगा, हालांकि कथित तौर पर पार्टी के भीतर एक वर्ग उनके दिल्ली जाने को लेकर अनिच्छुक था। 4. राज्यसभा सीट के लिए केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर का नाम लगभग तय हो चुका है और बताया जा रहा है कि उन्होंने जरूरी कागजी कार्रवाई भी पूरी कर ली है. 5. निशांत कुमार के राजनीतिक भविष्य को लेकर दो संभावनाओं पर चर्चा हो रही थी, या तो उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है या फिर राज्यसभा भेजा जा सकता है. 6. बैठक के दौरान नीतीश कुमार ने उमेश कुशवाहा को जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष पद पर बने रहने पर मुहर लगा दी. 7. लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को खारिज कर दिया और कहा कि सरकार नीतीश कुमार के नेतृत्व में जारी रहेगी। 8. राजेश रंजन (पप्पू यादव) ने बीजेपी पर जनादेश को हाईजैक करने की कोशिश करने का आरोप लगाया और राज्य में सत्ता पर कब्जा करने की साजिश का आरोप लगाया. 9. शक्ति सिंह यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर दावा किया कि भाजपा ने नीतीश कुमार पर दबाव बनाने के लिए “मूक ऑपरेशन लोटस” चलाया था। 10. सूत्रों के मुताबिक, देर रात बंद कमरे में चली मंत्रणा के परिणामस्वरूप नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के संभावित कदम और बिहार के लिए नए नेतृत्व फॉर्मूले पर व्यापक सहमति बनी। पहले प्रकाशित: मार्च 05, 2026, 14:38 IST समाचार शहर पटना-समाचार अटकलें, बैठकें और आधी रात की कॉल: होली पर कैसे बदल गई बिहार की राजनीति | 10 पॉइंट अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)नीतीश कुमार राज्यसभा(टी)बिहार की राजनीति(टी)नीतीश कुमार का इस्तीफा(टी)जेडी(यू) नेतृत्व(टी)निशांत कुमार की राजनीति(टी)बिहार के मुख्यमंत्री(टी)एनडीए विपक्ष(टी)ऑपरेशन लोटस
करणवीर बोहरा के पिता और प्रोड्यूसर महेंद्र बोहरा का निधन:एक्टर ने इंस्टाग्राम पर दी जानकारी; तेजा, टक्कर जैसी फिल्में प्रोड्यूस की थीं

एक्टर करणवीर बोहरा के पिता और फिल्म प्रोड्यूसर महेंद्र बोहरा का निधन हो गया है। उनके निधन की जानकारी बेटे करणवीर ने सोशल मीडिया के जरिए दी। महेंद्र बोहरा लंबे समय से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हुए थे। उन्होंने प्रोड्यूसर के तौर पर तेजा और प्यार का कर्ज जैसी फिल्मों में काम किया था। करणवीर ने बुधवार को इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर कर अपने पिता को याद किया। उन्होंने लिखा, “लव यू डैड। मैं आपको शब्दों से ज्यादा मिस करूंगा। जिसने भी अपने माता-पिता को खोया है, वह जानता है कि यह दर्द कैसा होता है, लेकिन इस दुख के बीच मुझे सुकून है कि आपने एक अच्छी और पूरी जिंदगी जी।” उन्होंने आगे लिखा, “आप हमेशा कहते थे कि आप इस दुनिया से शांति से जाना चाहते हैं और बिना किसी तकलीफ के। ऐसा ही हुआ। आप मजबूत थे और आपने हमेशा अपनी शर्तों पर जिंदगी जी।” एक्टर ने कहा- पिता ने उम्मीद रखना सिखाया करणवीर बोहरा ने बताया कि उनके पिता ने उन्हें जिंदगी की कई अहम बातें सिखाईं। उन्होंने कहा, “आपने मुझे और दीदी को सिखाया कि हालात कितने भी मुश्किल हों, उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। अगर गिरो तो दोबारा खड़े होना चाहिए। जिंदगी को जोश और पॉजिटिविटी के साथ जीना चाहिए।” करणवीर ने यह भी कहा कि उनके पिता ने उन्हें सपने देखना और मेहनत करना सिखाया। उन्होंने लिखा, “आपने मुझे सिखाया कि एक प्रोड्यूसर के एक्टर बनो और अपना शॉट पूरा किए बिना सेट मत छोड़ो। आपने मुझे क्रिएट करना सिखाया। आपने सिखाया कि लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए।” एक्टर ने पोस्ट में यह भी लिखा कि जो भी उनके पिता के बारे में बात करता है, वही कहता है कि वह बहुत अच्छे इंसान थे। उन्होंने कहा कि वह खुद को खुशकिस्मत मानते हैं कि उन्हें ऐसा पिता मिला। कई दशकों तक फिल्म इंडस्ट्री में एक्टिव रहे महेंद्र बोहरा कई दशकों तक हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में एक्टिव रहे। वह फिल्म प्रोड्यूसर रामकुमार बोहरा के बेटे थे। अपने करियर में महेंद्र ने कई हिंदी फिल्मों का निर्माण किया। इनमें तेजा, लश्कर, टक्कर, प्यार का कर्ज और हमें तुमसे प्यार कितना जैसी फिल्में शामिल हैं। बोहरा ने कई बड़े कलाकारों के साथ काम किया। उन्होंने नसीरुद्दीन शाह, संजय दत्त, सुनील शेट्टी और सोनाली बेंद्रे जैसे सितारों के साथ फिल्में बनाई।
चांदी 2 दिन में ₹26 हजार सस्ती हुई:₹2.64 लाख किलो पर आई, 10 ग्राम सोना ₹7 हजार गिरकर ₹1.62 लाख का हुआ

सोने और चांदी के दामों में आज यानी 5 मार्च को लगातार दूसरे दिन गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 2 हजार रुपए घटकर ₹1.60 लाख पर आ गया है। इससे पहले इसकी कीमत 1.62 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी। सोना 2 दिन में 7 हजार रुपए सस्ता हुआ है। वहीं, एक किलो चांदी 7 हजार रुपए गिरकर ₹2.64 लाख पर आ गई है। इससे पहले इसकी कीमत ₹2.71 लाख रुपए प्रति किलो थी। ये दो दिन में 26 हजार रुपए सस्ती हुई है। सोना चांदी के दाम में ये गिरावट प्रॉफिट बुकिंग की वजह से आई है। सोना इस साल ₹26 हजार और चांदी ₹27 हजार महंगी इस साल सोने-चांदी की कीमत में तेजी देखने को मिली है। बीते साल के आखिर में सोना 1.33 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर था, जो अब 1.60 लाख रुपए पर है। यानी इसकी कीमत इस साल अब तक 27 हजार बढ़ चुकी है। वहीं चांदी भी इस दौरान 24 हजार रुपए महंगी हुई है। इस साल अब तक सोने-चांदी की चाल अमेरिका-ईरान तनाव पर निर्भर रहेगा बाजार जानकारों का मानना है कि सोने-चांदी की अगली चाल इन दो बातों पर निर्भर करेगी: ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है।






