Tuesday, 15 Sep 2026 | 09:07 PM

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अपने पिता को मार लाश के टुकड़े करने वाला ‘बेटा’ कैसे फंसा जाल में? पुलिस को कैसे हुआ उसपर शक, जानिए लखनऊ मर्डर केस की पूरी कहानी

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Lucknow Murder Case News: नवाबों के शहर लखनऊ का पॉश इलाका ‘आशियाना’ उस वक्त थर्रा उठा, जब एक घर के बंद कमरे से बदबू आने लगी. ये बदबू किसी कूड़े की नहीं, बल्कि उस पिता की लाश की थी, जिसे उसके अपने ही इकलौते बेटे ने बेरहमी से काटकर टुकड़े टुकड़े कर दिया था. पुलिस जब मौके पर पहुंची और घर के अंदर का नजारा देखकर दंग रह गई. दरअसल, मशहूर पैथोलॉजी और शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह की लाश ‘नीले ड्रम’ के अंदर कटी-फटी हालत में थी. सबसे ज्यादा खौफनाक बात यह थी कि इस कत्ल को किसी बाहरी दुश्मन ने नहीं, बल्कि उनके अपने 21 साल के बेटे अक्षत प्रताप सिंह ने अंजाम दिया था. 21 साल के बीकॉम छात्र ने ‘श्रद्धा’ और मेरठ के ‘सौरभ हत्याकांड’ की तर्ज पर अपने पिता के शरीर को आरी से काटकर टुकड़ों में बांट दिया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिता चाहता था कि बेटा डॉक्टर बने, लेकिन बेटे ने उसी आरी से पिता के जिस्म को चीर डाला जिससे कभी वह एनाटॉमी पढ़ने वाला था. आइए जानते हैं आखिर पुलिस ने इस शातिर कातिल को कैसे दबोचा और कैसे एक ‘नीला ड्रम’ इस खौफनाक राज का गवाह बना. नीट का दबाव और वो खूनी सुबहवारदात की शुरुआत 20 फरवरी की सुबह करीब 4:30 बजे हुई. आशियाना के सेक्टर-एल स्थित मकान नंबर 91 में मानवेंद्र सिंह अपने बेटे अक्षत (21) पर नीट परीक्षा की तैयारी करने और पढ़ाई पर ध्यान देने का दबाव बना रहे थे. क्योंकि, अक्षत पहले भी दो बार परीक्षा दे चुका था, लेकिन सफल नहीं हुआ था. बाप-बेटे के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मानवेंद्र ने गुस्से में अपनी लाइसेंसी राइफल तान दी. तभी अक्षत ने राइफल छीनी और सीधे पिता के सिर में गोली दाग दी. मौके पर ही मानवेंद्र की मौत हो गई. बहन के सामने हुआ कत्ल, 4 दिन तक घर में कैद रही मासूमजिस वक्त अक्षत ने पिता को गोली मारी, उसकी 11वीं में पढ़ने वाली छोटी बहन कृति जाग गई थी. उसने खून से लथपथ पिता को देखा तो चीख पड़ी. लेकिन अक्षत के सिर पर उस वक्त खून सवार था. उसने अपनी सगी बहन को धमकी दी कि अगर किसी को बताया तो उसे भी मार डालेगा. डरी-सहमी मासूम 4 दिन तक उसी घर में कैद रही जहां उसके पिता की लाश के टुकड़े किए जा रहे थे. आरी से किए टुकड़े, नीले ड्रम में भरा धड़हत्या के बाद अक्षत ने सबूत मिटाने के लिए बाजार से एक इलेक्ट्रॉनिक आरी और एक बड़ा नीला ड्रम खरीदा. उसने अपने पिता की लाश को घसीटकर तीसरी मंजिल से ग्राउंड फ्लोर के एक खाली कमरे में लाया. वहां उसने लाश के हाथ और पैर काटकर अलग कर दिए. उसने हाथ-पैर को कार में लादकर पारा के सदरौना इलाके में फेंक दिया, जबकि धड़ को नीले ड्रम में भरकर केमिकल (एसिड) से गलाने की कोशिश की. खून से सने बिस्तर और चादर को उसने अमौसी ले जाकर जला दिया. क्या इस हैवानियत में कोई और भी शामिल था?पुलिस अब इस एंगल की भी जांच कर रही है कि क्या 21 साल का लड़का अकेले इतनी बड़ी लाश को काटकर ठिकाने लगा सकता था? हालांकि, अभी तक अक्षत ने अकेले ही जुर्म कुबूल किया है. पुलिस के जाल में कैसे फंसा ‘शातिर’ बेटा? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अक्षत ने खुद को बचाने के लिए पूरी प्लानिंग की थी. उसने खुद थाने जाकर पिता की गुमशुदगी दर्ज कराई थी. उसने कहानी बुनी कि ‘पापा दिल्ली गए हैं और फोन बंद आ रहा है.’ अक्षत ने पुलिस और पड़ोसियों को भी यही कहानी सुनाई थी. लेकिन पुलिस को शक तब हुआ जब मानवेंद्र के मोबाइल की आखिरी लोकेशन उनके अपने ही लैब के पास मिली, जबकि बेटा उन्हें दिल्ली में बता रहा था. इतना ही नहीं, पुलिस की पूछताछ में अक्षत बार-बार बयान बदल रहा था. कभी कहता पिता ने सुसाइड किया, तो कभी कहता वो कहीं चले गए हैं. पुलिस को कैसे हुआ शक? वो 3 गलतियां जो भारी पड़ींअक्षत खुद को बहुत शातिर समझ रहा था, लेकिन पुलिस की पैनी नजरों से नहीं बच सका. शक की सुई इन वजहों से घूमी: मानवेंद्र के तीनों मोबाइल बंद थे, लेकिन उनकी अंतिम लोकेशन काकोरी स्थित उनके अपने लैब में मिली. जब पुलिस ने अक्षत से पूछा कि पिता दिल्ली गए तो लोकेशन यहाँ कैसे? वह हकलाने लगा. अक्षत बार-बार कार धो रहा था. उसकी चाची ने जब कार साफ करने में मदद की पेशकश की, तो उसने सख्ती से मना कर दिया. कार की डिक्की में खून के निशान रह गए थे. पड़ोसियों ने जब अपने कैमरों की फुटेज देखी, तो 19 फरवरी की रात मानवेंद्र घर के अंदर जाते दिखे, लेकिन बाहर निकलते कभी नहीं दिखे. वहीं अक्षत रात के अंधेरे में कार लेकर बार-बार बाहर जा रहा था. करीबी दोस्त के सामने टूटा अक्षतजब पुलिस और पड़ोसियों का दबाव बढ़ा, तो सोमवार दोपहर अक्षत ने अपने पिता के करीबी दोस्त सोनू को फोन किया और कहा, ‘अंकल पापा ने सुसाइड कर लिया है.’ जब सोनू घर पहुंचे और कड़ाई से पूछा, तो अक्षत फूट-फूट कर रोने लगा और सारा सच उगल दिया. पुलिस ने जब घर की तलाशी ली, तो नीले ड्रम से मानवेंद्र का धड़ बरामद हुआ. नीला ड्रम और ‘मेरठ’ कनेक्शनपुलिस को घर के ग्राउंड फ्लोर के कमरे से वही नीला ड्रम मिला, जिसमें मानवेंद्र का धड़ भरा हुआ था. जांच में पता चला कि अक्षत ने मेरठ के ‘सौरभ हत्याकांड’ से प्रेरित होकर लाश को ड्रम में भरकर एसिड से गलाने या सीमेंट से भरने की योजना बनाई थी. बिखर गया हंसता-खेलता परिवारमानवेंद्र सिंह मूल रूप से जालौन के थे. उनके पिता रिटायर्ड दरोगा हैं. 9 साल पहले मानवेंद्र की पत्नी की मौत हो गई थी. वह अपने पीछे करोड़ों की संपत्ति (पैथोलॉजी और शराब की दुकानें) छोड़ गए हैं. अब पिता की मौत हो चुकी है, बेटा जेल में है और मासूम बेटी गहरे सदमे में. डीसीपी सेंट्रल विक्रांत वीर के मुताबिक, आरोपी अक्षत को गिरफ्तार कर लिया गया है. हत्या में इस्तेमाल लाइसेंसी राइफल, आरी और कार बरामद कर ली गई है. पुलिस अब शव के उन हिस्सों की तलाश कर

कॉलेजों में नए पाठ्यक्रम शुरू कराने का मुद्दा विधानसभा पहुंचा:उच्च शिक्षा मंत्री बोले-कॉलेजों का परीक्षण किया, जगह होने पर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स स्वीकृत करेंगे

कॉलेजों में नए पाठ्यक्रम शुरू कराने का मुद्दा विधानसभा पहुंचा:उच्च शिक्षा मंत्री बोले-कॉलेजों का परीक्षण किया, जगह होने पर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स स्वीकृत करेंगे

सागर की खुरई विधानसभा क्षेत्र के खुरई, बांदरी और मालथौन कॉलेज में नए पाठ्यक्रम शुरू कराने, स्टाफ बढ़ाने और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने का मुद्दा सोमवार को विधानसभा में गूंजा। खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह ने विधानसभा में ध्यानाकर्षण के माध्यम से खुरई, मालथौन और बांदरी शासकीय महाविद्यालयों में संकाय व विषय बढ़ाने, स्टाफ बढ़ाने, स्पोर्ट्स कांप्लेक्स बनाने की मांग की। उन्होंने खुरई शासकीय महाविद्यालय में विधि संकाय और बीएड शुरू करने की मांग भी की। जिस पर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अपने उत्तर में ज्यादातर मांगों पर अपनी सहमति प्रदान करते हुए अगले सत्र से पाठ्यक्रम शुरू करने और जगह की उपलब्धता होने पर स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स स्वीकृत करने का आश्वासन दिया है। खुरई विधायक ने यह मांगें रखी ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए पूर्व गृहमंत्री व खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह ने कहा कि खुरई महाविद्यालय में स्नातक में 1714 और स्नातकोत्तर में 363 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। खुरई कालेज में स्टेडियम नहीं है। भवन में भी कठिनाई हैं। यहां विज्ञान संकाय में वनस्पतिशास्त्र, रसायनशास्त्र, प्राणी शास्त्र, भौतिक शास्त्र और कला संकाय के अंग्रेजी साहित्य विषय में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम और वाणिज्य संकाय में स्नातक पाठ्यक्रम शुरू किए जाने की आवश्यकता है। कुछ कॉलेजों में पोस्ट ग्रेजुएशन प्रोग्राम शुरू करने की मांग इसके अलावा विधि संकाय में नवीन पाठ्यक्रम व बीएड भी शुरू किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मालथौन शासकीय महाविद्यालय में 1700 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जिन्हें नवीन पाठ्यक्रमों की आवश्यकता है। उन्होंने मालथौन शासकीय महाविद्यालय में हिंदी, ज्योग्राफी, राजनीति विज्ञान, इतिहास और विज्ञान संकाय में वनस्पति विज्ञान, दूदाजी में पोस्ट ग्रेजुएशन कक्षाओं की आवश्यकता है। बांदरी शासकीय महाविद्यालय की स्थिति बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां कुल 900 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जिन्हें वाणिज्य संकाय में स्नातक और कला संकाय में पीजी पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाने की आवश्यकता है। कॉलेज में स्वीकृत पद हैं खाली विधायक भूपेंद्र सिंह ने ध्यानाकर्षण में कहा कि मालथौन शासकीय महाविद्यालय में 15 पद स्वीकृत हैं। जिनमें से 10 पद रिक्त हैं और बांदरी महाविद्यालय में 19 स्वीकृत पदों में से 14 पद रिक्त हैं। जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाना पड़ता है। जिससे उन पर आर्थिक बोझ आता है। महाविद्यालयों में नए विषय प्रोग्राम भी स्वीकृत उच्च शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार ने उक्त बिंदुओं पर जवाब देते हुए कहा कि स्ववित्तीय योजना में सरकार या विभाग से अनुमति की जरूरत नहीं है। 2023 में इस आशय का संशोधन कर दिया गया है। प्राचार्य ही संकाय में स्नातकोत्तर कक्षाएं प्रारंभ कर सकते हैं। इन महाविद्यालयों में नवीन विषय, संकाय प्रारंभ करने के लिए प्राचार्य ही सक्षम है। इसके लिए प्राचार्यों को उचित कार्रवाई के लिए निर्देशित किया जा रहा है। शासकीय महाविद्यालयों खुरई, मालथौन व बांदरी में रिक्त पदों की पूर्ति के लिए कार्रवाई करते हुए वर्ष 2025 में शासकीय महाविद्यालय खुरई में 1 सहायक प्राध्यापक, बांदरी में 1 सहायक प्राध्यापक और मालथौन में 2 सहायक प्राध्यापकों को पदस्थ किया गया है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग से प्राप्त वर्ष 2022 की 2053 अभ्यर्थियों, सहायक प्राध्यापक, ग्रंथपाल व क्रीड़ा अधिकारी की चयन सूचियों के आधार पर नियुक्ति की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। इन महाविद्यालयों में अधोसंरचना विकास, नए विषय और संकाय शुरू करने और रिक्त पदों की पूर्ति के लिए नियमानुसार वित्तीय संसाधनों के अनुसार कार्रवाई और वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। मंत्री परमार ने बताया कि इन तीनों महाविद्यालयों का हमने परीक्षण करा लिया है जो कुछ विषय यहां से शुरू कराना होगा, वह यहां से कराने की तैयारी कर रहे हैं। शेष कुछ हम स्ववित्तीय योजना से संचालित कर सकते हैं।

भोपाल में आज कई इलाकों में गुल रहेगी बिजली:SET के एडमिट कार्ड वेबसाइट पर उपलब्ध; जानिए शहर में कहां-क्या खास

भोपाल में आज कई इलाकों में गुल रहेगी बिजली:SET के एडमिट कार्ड वेबसाइट पर उपलब्ध; जानिए शहर में कहां-क्या खास

आपको हम बता रहे हैं, भोपाल शहर में आज कहां-क्या हो रहा है। यहां हर वो जानकारी होगी, जो आपके काम आएगी। संगीत-संस्कृति, आर्ट, ड्रामा के इवेंट से लेकर मौसम, सिटी ट्रैफिक, बिजली-पानी की सप्लाई से जुड़ा हर अपडेट मिलेगा। काम की जरूरी लिंक्स आधार अपडेशन- नया/ नि:शुल्क/ बायो मैट्रिक अपडेट- 100 रुपए, डेमोग्राफिक अपडेट- 50 रुपए, इन सेंटरों में आधार अपडेशन/ जेनरेशन की सुविधा। सेंटर्स की पूरी लिस्ट के लिए क्लिक करें। हेल्थ सर्विसेज : एम्स/जेपी, खुशीलाल ऑटो गैस/ इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन, सीएनजी स्टेशन थाने इमरजेंसी कॉन्टैक्ट नंबर सीएनजी पंप स्टेशन

खबर हटके- ठंड में खुलेआम नंगे होकर नहाने की परंपरा:कबाड़ में पड़े ट्रैक्टर ने बनाया करोड़पति; शादी में जूता छिपाने पर रोक

खबर हटके- ठंड में खुलेआम नंगे होकर नहाने की परंपरा:कबाड़ में पड़े ट्रैक्टर ने बनाया करोड़पति; शादी में जूता छिपाने पर रोक

जापान में ठंड के मौसम में खुलेआम नंगे होकर नहाने की एक अनोखी परंपरा है। वहीं कबाड़ में पड़े 105 साल पुराने ट्रैक्टर ने शख्स को करोड़पति बना दिया। उधर छत्तीसगढ़ में एक समाज ने शादी में जूता छिपाने की रस्म पर बैन लगा दिया। आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…

ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर की जांच होगी आसान:IIT इंदौर ने डेवलप की हाई-एक्युरेसी तकनीक; ग्रामीण क्षेत्रों में भी समय पर इलाज की उम्मीद

ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर की जांच होगी आसान:IIT इंदौर ने डेवलप की हाई-एक्युरेसी तकनीक; ग्रामीण क्षेत्रों में भी समय पर इलाज की उम्मीद

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में ब्रेस्ट कैंसर और सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में मृत्यु के दो प्रमुख कारण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल इमेजिंग के जरिए इन कैंसरों की समय पर पहचान हजारों जानें बचा सकती है। हालांकि, देश में प्रशिक्षित रेडियोलॉजिस्ट की भारी कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिसका असर खासतौर पर ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में अधिक देखने को मिलता है। इसी चुनौती का समाधान निकालते हुए आईआईटी इंदौर के शोधकर्ताओं ने अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एल्गोरिदम [डेवपल किए हैं। ये मेडिकल इमेज में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर की बेहद सटीक पहचान और लोकेशन तय करने में सक्षम हैं। यह तकनीक न केवल कैंसर की जल्दी पहचान करती है, बल्कि अनावश्यक बायोप्सी की जरूरत को भी कम कर सकती है। आईआईटी इंदौर के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग की MODSS लैब में प्रोफेसर कपिल आहूजा के नेतृत्व में यह रिसर्च किया गया है। टीम में पीएचडी छात्र सौरभ सैनी, पूर्व पोस्टडॉक्टरल शोधकर्ता डॉ. दीप्ति ताम्रकार और पूर्व पीएचडी छात्र डॉ. आदित्य ए. शास्त्री शामिल रहे। मैमोग्राम से ब्रेस्ट कैंसर की सटीक पहचान ब्रेस्ट कैंसर की जांच में उपयोग होने वाले मैमोग्राम में बारीक टेक्सचर पैटर्न होते हैं, जो कैंसर की स्थिति में अनियमित हो जाते हैं। आईआईटी इंदौर की टीम ने ‘हिस्टोग्राम ऑफ ओरिएंटेड टेक्सचर (HOT)’ डिस्क्रिप्टर एल्गोरिदम के जरिए इन पैटर्न का गहराई से विश्लेषण किया, जिससे घने ब्रेस्ट टिशू की स्थिति में भी स्वस्थ और कैंसरग्रस्त ऊतकों के बीच स्पष्ट अंतर संभव हो सका। सर्वाइकल कैंसर के लिए डीप लर्निंग समाधान सर्वाइकल कैंसर की पहचान में उपयोग होने वाली कोल्पोस्कोपी इमेज के लिए शोधकर्ताओं ने ‘ब्लॉक-फ्यूज्ड अटेंशन-ड्रिवन एडाप्टिवली-पूल्ड रेसनेट’ नामक डीप लर्निंग एल्गोरिदम डेवलप किया है। यह तकनीक रंग, किनारे, आकार और संरचना जैसी सूक्ष्म व अमूर्त विशेषताओं को एक साथ पहचानने में सक्षम है। पारदर्शिता और भरोसे पर जोर आईआईटी इंदौर के डायरेक्टर प्रो. सुहास जोशी ने कहा कि यह शोध राष्ट्रीय स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान की दिशा में संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि डेवलप AI सिस्टम यह भी स्पष्ट करता है कि वह किसी निष्कर्ष पर कैसे पहुंचा, जिससे डॉक्टरों का भरोसा और पारदर्शिता दोनों बढ़ती हैं। भारतीय मरीजों पर होगा ट्रायल प्रोफेसर कपिल आहूजा ने बताया कि अब तक एल्गोरिदम को वैश्विक डेटासेट पर प्रशिक्षित किया गया है, लेकिन अब भारतीय मरीजों के लिए विशेष प्रोटोटाइप तैयार किया जा रहा है। इसके लिए टीम ने एचसीजी कैंसर अस्पताल की सीनियर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रेणु दुबे शर्मा के साथ सहयोग किया है। इस ‘लैब-टू-मार्केट’ पहल को दृष्टि साइबर फिजिकल सिस्टम्स फाउंडेशन का समर्थन मिला है। शोधकर्ताओं का लक्ष्य भविष्य में इसी AI तकनीक को थायरॉयड, फेफड़े, ओरल, कोलोरेक्टल और इसोफेगल कैंसर जैसे अन्य प्रमुख कैंसरों तक विस्तार देने का है, जो भारत में कैंसर से होने वाली मौतों के शीर्ष कारणों में शामिल हैं।

किसान महाचौपाल के लिए आज भोपाल पहुंचेंगे राहुल गांधी:जवाहर चौक पर सुबह 10 बजे से कार्यक्रम, कई मार्गों पर डायवर्जन

किसान महाचौपाल के लिए आज भोपाल पहुंचेंगे राहुल गांधी:जवाहर चौक पर सुबह 10 बजे से कार्यक्रम, कई मार्गों पर डायवर्जन

शहर में मंगलवार, 24 फरवरी को “बेहतर ट्रैफिक, बेहतर भोपाल” अभियान के बीच कांग्रेस कमेटी द्वारा जवाहर चौक पर सुबह 10 बजे से किसान महाचौपाल का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सांसद व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शामिल होंगे। इसे देखते हुए यातायात पुलिस ने व्यापक पार्किंग व डायवर्जन प्लान जारी किया है। मंच पर बैठने वाले करीब 200 विशिष्ट अतिथियों के वाहन रंगमहल चौराहा से यादव मेडिकल तिराहा, काटजू तिराहा और राजस्थान स्वीट्स तिराहा होते हुए मॉडल स्कूल के पास ड्रॉप किए जाएंगे। इसके बाद वाहन निर्धारित स्थल पर पार्क होंगे। रूट प्लान ये रहेंगे प्रमुख डायवर्जन यात्रियों से सहयोग की अपील यातायात पुलिस ने एयरपोर्ट आने-जाने वाले यात्रियों से विशेष रूप से अपील की है कि वे परिवर्तित मार्गों का उपयोग करें और पर्याप्त समय लेकर घर से निकलें। किसी भी असुविधा की स्थिति में यातायात कंट्रोल रूम के दूरभाष नंबर 0755-2677340 और 2443850 पर संपर्क किया जा सकता है।

जबलपुर में नेशनल हाईवे ओवरब्रिज धंसने का मामला:ठेकेदार पहले से ब्लैकलिस्ट, कंस्ट्रक्शन कंपनी व जिम्मेदारों पर हुई एफआईआर

जबलपुर में नेशनल हाईवे ओवरब्रिज धंसने का मामला:ठेकेदार पहले से ब्लैकलिस्ट, कंस्ट्रक्शन कंपनी व जिम्मेदारों पर हुई एफआईआर

जबलपुर में नेशनल हाईवे के जबलपुर–हिरन नदी मार्गखंड के 28 किमी पर स्थित रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) की रिटेनिंग वॉल 22 फरवरी 2026 की शाम क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के बाद एहतियातन प्रभावित हिस्से पर यातायात रोक दिया गया और वाहनों को वैकल्पिक मार्ग से निकाला गया। सूचना मिलते ही पुलिस और मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) का अमला मौके पर पहुंचा। एमपीआरडीसी के संभागीय प्रबंधक की शिकायत पर 23 फरवरी 2026 को शाहपुरा थाने में FIR दर्ज की गई। मामला धारा 285, 290, 324(5), 125 एवं 3(5) के तहत पंजीबद्ध है। जांच की जिम्मेदारी थाना प्रभारी निरीक्षक प्रवीण कुमार धुर्वे को सौंपी गई है। 2017 में अनुबंध, 2022 में निर्माण पूरा; लागत 400 करोड़ जबलपुर–हिरन नदी मार्ग के पैकेज-1 अंतर्गत 4-लेन उन्नयन कार्य का अनुबंध 19 दिसंबर 2017 को हुआ था। परियोजना का निर्माण 7 फरवरी 2022 को पूरा किया गया, जिसे लगभग 4 वर्ष 2 माह में पूर्ण किया गया। इस परियोजना की लागत करीब 400 करोड़ रुपए बताई जा रही है। निर्माण कार्य ईपीसी मोड पर मैसर्स आरएसआरआईपीएल‑मेर्सी जॉइंट वेंचर द्वारा किया गया था। 50 वर्ष की आयु, 4 साल में दूसरी बार क्षति विभागीय जानकारी के अनुसार आरओबी की अनुमानित आयु 50 वर्ष बताई गई थी। इससे पहले 9 सितंबर 2025 को भी इसका एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ था। अब दोबारा रिटेनिंग वॉल धंसने से निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायत में मानकों के पालन में कमी का उल्लेख किया गया है। कंपनी पहले ही ब्लैकलिस्ट, मार्ग डीएलपी में एमपीआरडीसी के अनुसार गुणवत्ता से जुड़े कारणों के चलते संबंधित कंपनी को 2 जनवरी 2026 को डिबार (ब्लैकलिस्ट) किया जा चुका है। मार्ग वर्तमान में Defect Liability Period (DLP) में है, इसलिए मरम्मत कार्य और उससे जुड़ा पूरा खर्च ठेकेदार द्वारा ही वहन किया जाएगा। मंत्री बोले- एक माह में सुरक्षित यातायात का लक्ष्य लोकनिर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह ने सोशल मीडिया पर कहा कि आरओबी की रिटेनिंग वॉल का क्षतिग्रस्त होना दुर्भाग्यपूर्ण है और ऐसा नहीं होना चाहिए था। नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने बताया कि सड़क विकास निगम ने युद्ध स्तर पर मरम्मत कार्य शुरू कर दिया है और एक माह के भीतर सुधार कर सुरक्षित यातायात बहाल करने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री ने घटिया निर्माण के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने, FIR दर्ज कराने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सुरक्षा के लिहाज से डायवर्जन मार्ग पर प्रकाश व्यवस्था और संकेतक लगाए गए हैं। साथ ही रेलवे अधिकारियों से समन्वय कर पूर्व की लेवल क्रॉसिंग को पुनः शुरू करने की प्रक्रिया भी चल रही है।

सद्गुरु ने बताया- गुनगुने पानी में बस 1 चम्मच ये मिलाएं, पेट पूरा कर देगा क्लीन!

सद्गुरु ने बताया- गुनगुने पानी में बस 1 चम्मच ये मिलाएं, पेट पूरा कर देगा क्लीन!

X गुनगुने पानी में बस 1 चम्मच ये मिलाएं, पेट पूरा कर देगा क्लीन!   आजकल हेल्थ और डाइजेशन से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. कब्ज, एसिडिटी, पेट में जलन और मानसिक बेचैनी जैसी परेशानियां आम हो चुकी हैं. ऐसे समय में एक पुराना भारतीय उपाय फिर से चर्चा में है – गुनगुने पानी के साथ घी का सेवन. इस विषय पर एक प्रभावशाली वक्तव्य में सद्गुरु बताते हैं कि सही तरीके से घी का उपयोग हमारे पाचन तंत्र, खासकर कोलन की सफाई और आंतों की सेहत के लिए कितना फायदेमंद हो सकता है. भारतीय भोजन संस्कृति में हजारों वर्षों से घी को विशेष स्थान दिया गया है. परंपरा के अनुसार भोजन की पहली ग्रास में घी लेना सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी माना गया. सद्गुरु समझाते हैं कि घी आहार नली को चिकनाई देता है, जिससे भोजन आसानी से पचता है और आंतों में कुछ भी चिपकता नहीं. खासकर मसालेदार भोजन करने वाले क्षेत्रों में घी को पाचन सुरक्षा कवच की तरह देखा जाता रहा है.

आजमगढ़ में आयुर्वेदिक उपचार की नई सुविधा, 25 स्वास्थ्य केंद्रों पर आयुष चिकित्सक के साथ मिलेगी बेहतर सुविधा

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Last Updated:February 23, 2026, 22:30 IST आजमगढ़ जिले में मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से आयुर्वेदिक उपचार की नई सुविधा मिलेगी. अब सीएचसी और पीएचसी केंद्रों पर एलोपैथी के साथ-साथ आयुर्वेदिक इलाज भी उपलब्ध होगा. पहले चरण में 25 स्वास्थ्य केंद्रों पर आयुष चिकित्सकों की तैनाती की जाएगी, जहां मरीज आयुर्वेदिक दवाइयों जैसे काढ़ा, तेल और जड़ी बूटियों से इलाज करवा सकेंगे. ख़बरें फटाफट आजमगढ़. जिले में अब मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से एक नई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, मंडलीय अस्पताल के साथ-साथ सीएचसी व पीएचसी सेंटरों पर भी अब एलोपैथ दावों के साथ-साथ आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज की व्यवस्था भी उपलब्ध होगी. मरीज को आयुर्वेदिक उपचार के लिए शहर मुख्यालय की भाग दौड़ नहीं करनी होगी. उन्हें अब अंग्रेजी दावों के साथ-साथ आयुर्वेदिक इलाज के लिए अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज उपलब्ध होगा और साथ ही दवाइयां भी उपलब्ध कराई जाएगी. पहले चरण में 25 अस्पतालों पर शुरू होगी यह व्यवस्थाग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को सस्ता सुरक्षित और भरोसेमंद इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पहले चरण में जिले 25 स्वास्थ्य केंद्रों पर आयुष चिकित्सकों की तैनाती की जाएगी. स्वास्थ्य विभाग के द्वारा चिकित्सकों के बैठने के लिए अलग से ओपीडी कक्ष की व्यवस्था होगी, जिसमें अस्पताल में आने वाले मरीजों को एलोपैथ के अलावा आयुर्वेदिक उपचार का विकल्प भी उपलब्ध होगा. समस्याओं को बताते हुए आयुर्वेदिक चिकित्सकीय सलाह प्राप्त करते हुए दवाइयां भी प्राप्त कर सकेंगे. जड़ी बूटियां से संभव होगा इलाजइसके लिए स्वास्थ्य विभाग के द्वारा पहले चरण में चयनित सीएचसी और पीएचसी में आयुर्वेदिक चिकित्सकों की तैनाती की जाएगी, जहां पर आयुर्वेदिक दवाइयां काढ़ा,तेल और आवश्यक जड़ी बूटियां भी उपलब्ध होगी. इस व्यवस्था के शुरू हो जाने से खास तौर पर उन लोगों को राहत मिलेगी जो महंगे निजी अस्पतालों तक नहीं पहुंच पाते. डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, पेट की बीमारियां एवं त्वचा से संबंधित तमाम समस्याओं से जूझ रहे लोगों को अब प्राकृतिक तरीके से उपचार मिल सकेगा. जिन स्वास्थ्य केंद्रों पर यह सुविधा प्रथम चरण में उपलब्ध होगी उनमें मार्टिनगंज ब्लॉक का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, फूलपुर ब्लॉक के अंबारी पीएससी, बिलरियागंज ब्लॉक के परशुरामपुर, बनकट और जमीन फरेंदा पीएचसी, अजमतगढ़ ब्लॉक के अवुमारी नारायणपुर, बिलरियागंज, तरवां, महानगर ब्लॉक के खरिहानी पीएससी आदि पर आयुष डॉक्टर तैनात किए जाएंगे. About the Author Monali Paul Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें Location : Azamgarh,Uttar Pradesh First Published : February 23, 2026, 22:30 IST

स्क्रीन टाइम का खतरा: मोबाइल की लता से आंखों को लेकर दिमाग तक पर बुरा असर, होती है ये बीमारी, जानें पाने के तरीके

स्क्रीन टाइम का खतरा: मोबाइल की लता से आंखों को लेकर दिमाग तक पर बुरा असर, होती है ये बीमारी, जानें पाने के तरीके

23 फरवरी 2026 को 22:20 IST पर अद्यतन किया गया स्क्रीन टाइम डेंजर: मोबाइल फोन की लता बड़ी बीमारी को कॉलवा है। इस आदत से नजर से लेकर दिमाग तक का बुरा असर। इससे जुड़ने के कुछ तरीके हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपनी मदद कर सकते हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)मोबाइल एडिक्शन(टी)स्क्रीन टाइम साइड इफेक्ट्स(टी)स्मार्टफोन स्वास्थ्य जोखिम(टी)नीली रोशनी प्रभाव(टी)नींद विकार(टी)आंखों में तनाव(टी)सरवाइकल दर्द(टी)डिजिटल डिटॉक्स टिप्स(टी)मोबाइल के अत्यधिक उपयोग की समस्याएं(टी)स्मार्टफोन की लत का इलाज