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अपने पिता को मार लाश के टुकड़े करने वाला ‘बेटा’ कैसे फंसा जाल में? पुलिस को कैसे हुआ उसपर शक, जानिए लखनऊ मर्डर केस की पूरी कहानी

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Lucknow Murder Case News: नवाबों के शहर लखनऊ का पॉश इलाका ‘आशियाना’ उस वक्त थर्रा उठा, जब एक घर के बंद कमरे से बदबू आने लगी. ये बदबू किसी कूड़े की नहीं, बल्कि उस पिता की लाश की थी, जिसे उसके अपने ही इकलौते बेटे ने बेरहमी से काटकर टुकड़े टुकड़े कर दिया था. पुलिस जब मौके पर पहुंची और घर के अंदर का नजारा देखकर दंग रह गई. दरअसल, मशहूर पैथोलॉजी और शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह की लाश ‘नीले ड्रम’ के अंदर कटी-फटी हालत में थी. सबसे ज्यादा खौफनाक बात यह थी कि इस कत्ल को किसी बाहरी दुश्मन ने नहीं, बल्कि उनके अपने 21 साल के बेटे अक्षत प्रताप सिंह ने अंजाम दिया था.

21 साल के बीकॉम छात्र ने ‘श्रद्धा’ और मेरठ के ‘सौरभ हत्याकांड’ की तर्ज पर अपने पिता के शरीर को आरी से काटकर टुकड़ों में बांट दिया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिता चाहता था कि बेटा डॉक्टर बने, लेकिन बेटे ने उसी आरी से पिता के जिस्म को चीर डाला जिससे कभी वह एनाटॉमी पढ़ने वाला था. आइए जानते हैं आखिर पुलिस ने इस शातिर कातिल को कैसे दबोचा और कैसे एक ‘नीला ड्रम’ इस खौफनाक राज का गवाह बना.

नीट का दबाव और वो खूनी सुबह
वारदात की शुरुआत 20 फरवरी की सुबह करीब 4:30 बजे हुई. आशियाना के सेक्टर-एल स्थित मकान नंबर 91 में मानवेंद्र सिंह अपने बेटे अक्षत (21) पर नीट परीक्षा की तैयारी करने और पढ़ाई पर ध्यान देने का दबाव बना रहे थे. क्योंकि, अक्षत पहले भी दो बार परीक्षा दे चुका था, लेकिन सफल नहीं हुआ था. बाप-बेटे के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मानवेंद्र ने गुस्से में अपनी लाइसेंसी राइफल तान दी. तभी अक्षत ने राइफल छीनी और सीधे पिता के सिर में गोली दाग दी. मौके पर ही मानवेंद्र की मौत हो गई.

बहन के सामने हुआ कत्ल, 4 दिन तक घर में कैद रही मासूम
जिस वक्त अक्षत ने पिता को गोली मारी, उसकी 11वीं में पढ़ने वाली छोटी बहन कृति जाग गई थी. उसने खून से लथपथ पिता को देखा तो चीख पड़ी. लेकिन अक्षत के सिर पर उस वक्त खून सवार था. उसने अपनी सगी बहन को धमकी दी कि अगर किसी को बताया तो उसे भी मार डालेगा. डरी-सहमी मासूम 4 दिन तक उसी घर में कैद रही जहां उसके पिता की लाश के टुकड़े किए जा रहे थे.

आरी से किए टुकड़े, नीले ड्रम में भरा धड़
हत्या के बाद अक्षत ने सबूत मिटाने के लिए बाजार से एक इलेक्ट्रॉनिक आरी और एक बड़ा नीला ड्रम खरीदा. उसने अपने पिता की लाश को घसीटकर तीसरी मंजिल से ग्राउंड फ्लोर के एक खाली कमरे में लाया. वहां उसने लाश के हाथ और पैर काटकर अलग कर दिए. उसने हाथ-पैर को कार में लादकर पारा के सदरौना इलाके में फेंक दिया, जबकि धड़ को नीले ड्रम में भरकर केमिकल (एसिड) से गलाने की कोशिश की. खून से सने बिस्तर और चादर को उसने अमौसी ले जाकर जला दिया.

क्या इस हैवानियत में कोई और भी शामिल था?
पुलिस अब इस एंगल की भी जांच कर रही है कि क्या 21 साल का लड़का अकेले इतनी बड़ी लाश को काटकर ठिकाने लगा सकता था? हालांकि, अभी तक अक्षत ने अकेले ही जुर्म कुबूल किया है.

पुलिस के जाल में कैसे फंसा ‘शातिर’ बेटा?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अक्षत ने खुद को बचाने के लिए पूरी प्लानिंग की थी. उसने खुद थाने जाकर पिता की गुमशुदगी दर्ज कराई थी. उसने कहानी बुनी कि ‘पापा दिल्ली गए हैं और फोन बंद आ रहा है.’ अक्षत ने पुलिस और पड़ोसियों को भी यही कहानी सुनाई थी. लेकिन पुलिस को शक तब हुआ जब मानवेंद्र के मोबाइल की आखिरी लोकेशन उनके अपने ही लैब के पास मिली, जबकि बेटा उन्हें दिल्ली में बता रहा था. इतना ही नहीं, पुलिस की पूछताछ में अक्षत बार-बार बयान बदल रहा था. कभी कहता पिता ने सुसाइड किया, तो कभी कहता वो कहीं चले गए हैं.

पुलिस को कैसे हुआ शक? वो 3 गलतियां जो भारी पड़ीं
अक्षत खुद को बहुत शातिर समझ रहा था, लेकिन पुलिस की पैनी नजरों से नहीं बच सका. शक की सुई इन वजहों से घूमी:

  1. मानवेंद्र के तीनों मोबाइल बंद थे, लेकिन उनकी अंतिम लोकेशन काकोरी स्थित उनके अपने लैब में मिली. जब पुलिस ने अक्षत से पूछा कि पिता दिल्ली गए तो लोकेशन यहाँ कैसे? वह हकलाने लगा.
  2. अक्षत बार-बार कार धो रहा था. उसकी चाची ने जब कार साफ करने में मदद की पेशकश की, तो उसने सख्ती से मना कर दिया. कार की डिक्की में खून के निशान रह गए थे.
  3. पड़ोसियों ने जब अपने कैमरों की फुटेज देखी, तो 19 फरवरी की रात मानवेंद्र घर के अंदर जाते दिखे, लेकिन बाहर निकलते कभी नहीं दिखे. वहीं अक्षत रात के अंधेरे में कार लेकर बार-बार बाहर जा रहा था.

करीबी दोस्त के सामने टूटा अक्षत
जब पुलिस और पड़ोसियों का दबाव बढ़ा, तो सोमवार दोपहर अक्षत ने अपने पिता के करीबी दोस्त सोनू को फोन किया और कहा, ‘अंकल पापा ने सुसाइड कर लिया है.’ जब सोनू घर पहुंचे और कड़ाई से पूछा, तो अक्षत फूट-फूट कर रोने लगा और सारा सच उगल दिया. पुलिस ने जब घर की तलाशी ली, तो नीले ड्रम से मानवेंद्र का धड़ बरामद हुआ.

नीला ड्रम और ‘मेरठ’ कनेक्शन
पुलिस को घर के ग्राउंड फ्लोर के कमरे से वही नीला ड्रम मिला, जिसमें मानवेंद्र का धड़ भरा हुआ था. जांच में पता चला कि अक्षत ने मेरठ के ‘सौरभ हत्याकांड’ से प्रेरित होकर लाश को ड्रम में भरकर एसिड से गलाने या सीमेंट से भरने की योजना बनाई थी.

बिखर गया हंसता-खेलता परिवार
मानवेंद्र सिंह मूल रूप से जालौन के थे. उनके पिता रिटायर्ड दरोगा हैं. 9 साल पहले मानवेंद्र की पत्नी की मौत हो गई थी. वह अपने पीछे करोड़ों की संपत्ति (पैथोलॉजी और शराब की दुकानें) छोड़ गए हैं. अब पिता की मौत हो चुकी है, बेटा जेल में है और मासूम बेटी गहरे सदमे में. डीसीपी सेंट्रल विक्रांत वीर के मुताबिक, आरोपी अक्षत को गिरफ्तार कर लिया गया है. हत्या में इस्तेमाल लाइसेंसी राइफल, आरी और कार बरामद कर ली गई है. पुलिस अब शव के उन हिस्सों की तलाश कर रही है जिन्हें आरोपी ने बाहर फेंका था.

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Lucknow Murder Case News: नवाबों के शहर लखनऊ का पॉश इलाका ‘आशियाना’ उस वक्त थर्रा उठा, जब एक घर के बंद कमरे से बदबू आने लगी. ये बदबू किसी कूड़े की नहीं, बल्कि उस पिता की लाश की थी, जिसे उसके अपने ही इकलौते बेटे ने बेरहमी से काटकर टुकड़े टुकड़े कर दिया था. पुलिस जब मौके पर पहुंची और घर के अंदर का नजारा देखकर दंग रह गई. दरअसल, मशहूर पैथोलॉजी और शराब कारोबारी मानवेंद्र सिंह की लाश ‘नीले ड्रम’ के अंदर कटी-फटी हालत में थी. सबसे ज्यादा खौफनाक बात यह थी कि इस कत्ल को किसी बाहरी दुश्मन ने नहीं, बल्कि उनके अपने 21 साल के बेटे अक्षत प्रताप सिंह ने अंजाम दिया था.

21 साल के बीकॉम छात्र ने ‘श्रद्धा’ और मेरठ के ‘सौरभ हत्याकांड’ की तर्ज पर अपने पिता के शरीर को आरी से काटकर टुकड़ों में बांट दिया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिता चाहता था कि बेटा डॉक्टर बने, लेकिन बेटे ने उसी आरी से पिता के जिस्म को चीर डाला जिससे कभी वह एनाटॉमी पढ़ने वाला था. आइए जानते हैं आखिर पुलिस ने इस शातिर कातिल को कैसे दबोचा और कैसे एक ‘नीला ड्रम’ इस खौफनाक राज का गवाह बना.

नीट का दबाव और वो खूनी सुबह
वारदात की शुरुआत 20 फरवरी की सुबह करीब 4:30 बजे हुई. आशियाना के सेक्टर-एल स्थित मकान नंबर 91 में मानवेंद्र सिंह अपने बेटे अक्षत (21) पर नीट परीक्षा की तैयारी करने और पढ़ाई पर ध्यान देने का दबाव बना रहे थे. क्योंकि, अक्षत पहले भी दो बार परीक्षा दे चुका था, लेकिन सफल नहीं हुआ था. बाप-बेटे के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मानवेंद्र ने गुस्से में अपनी लाइसेंसी राइफल तान दी. तभी अक्षत ने राइफल छीनी और सीधे पिता के सिर में गोली दाग दी. मौके पर ही मानवेंद्र की मौत हो गई.

बहन के सामने हुआ कत्ल, 4 दिन तक घर में कैद रही मासूम
जिस वक्त अक्षत ने पिता को गोली मारी, उसकी 11वीं में पढ़ने वाली छोटी बहन कृति जाग गई थी. उसने खून से लथपथ पिता को देखा तो चीख पड़ी. लेकिन अक्षत के सिर पर उस वक्त खून सवार था. उसने अपनी सगी बहन को धमकी दी कि अगर किसी को बताया तो उसे भी मार डालेगा. डरी-सहमी मासूम 4 दिन तक उसी घर में कैद रही जहां उसके पिता की लाश के टुकड़े किए जा रहे थे.

आरी से किए टुकड़े, नीले ड्रम में भरा धड़
हत्या के बाद अक्षत ने सबूत मिटाने के लिए बाजार से एक इलेक्ट्रॉनिक आरी और एक बड़ा नीला ड्रम खरीदा. उसने अपने पिता की लाश को घसीटकर तीसरी मंजिल से ग्राउंड फ्लोर के एक खाली कमरे में लाया. वहां उसने लाश के हाथ और पैर काटकर अलग कर दिए. उसने हाथ-पैर को कार में लादकर पारा के सदरौना इलाके में फेंक दिया, जबकि धड़ को नीले ड्रम में भरकर केमिकल (एसिड) से गलाने की कोशिश की. खून से सने बिस्तर और चादर को उसने अमौसी ले जाकर जला दिया.

क्या इस हैवानियत में कोई और भी शामिल था?
पुलिस अब इस एंगल की भी जांच कर रही है कि क्या 21 साल का लड़का अकेले इतनी बड़ी लाश को काटकर ठिकाने लगा सकता था? हालांकि, अभी तक अक्षत ने अकेले ही जुर्म कुबूल किया है.

पुलिस के जाल में कैसे फंसा ‘शातिर’ बेटा?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अक्षत ने खुद को बचाने के लिए पूरी प्लानिंग की थी. उसने खुद थाने जाकर पिता की गुमशुदगी दर्ज कराई थी. उसने कहानी बुनी कि ‘पापा दिल्ली गए हैं और फोन बंद आ रहा है.’ अक्षत ने पुलिस और पड़ोसियों को भी यही कहानी सुनाई थी. लेकिन पुलिस को शक तब हुआ जब मानवेंद्र के मोबाइल की आखिरी लोकेशन उनके अपने ही लैब के पास मिली, जबकि बेटा उन्हें दिल्ली में बता रहा था. इतना ही नहीं, पुलिस की पूछताछ में अक्षत बार-बार बयान बदल रहा था. कभी कहता पिता ने सुसाइड किया, तो कभी कहता वो कहीं चले गए हैं.

पुलिस को कैसे हुआ शक? वो 3 गलतियां जो भारी पड़ीं
अक्षत खुद को बहुत शातिर समझ रहा था, लेकिन पुलिस की पैनी नजरों से नहीं बच सका. शक की सुई इन वजहों से घूमी:

  1. मानवेंद्र के तीनों मोबाइल बंद थे, लेकिन उनकी अंतिम लोकेशन काकोरी स्थित उनके अपने लैब में मिली. जब पुलिस ने अक्षत से पूछा कि पिता दिल्ली गए तो लोकेशन यहाँ कैसे? वह हकलाने लगा.
  2. अक्षत बार-बार कार धो रहा था. उसकी चाची ने जब कार साफ करने में मदद की पेशकश की, तो उसने सख्ती से मना कर दिया. कार की डिक्की में खून के निशान रह गए थे.
  3. पड़ोसियों ने जब अपने कैमरों की फुटेज देखी, तो 19 फरवरी की रात मानवेंद्र घर के अंदर जाते दिखे, लेकिन बाहर निकलते कभी नहीं दिखे. वहीं अक्षत रात के अंधेरे में कार लेकर बार-बार बाहर जा रहा था.

करीबी दोस्त के सामने टूटा अक्षत
जब पुलिस और पड़ोसियों का दबाव बढ़ा, तो सोमवार दोपहर अक्षत ने अपने पिता के करीबी दोस्त सोनू को फोन किया और कहा, ‘अंकल पापा ने सुसाइड कर लिया है.’ जब सोनू घर पहुंचे और कड़ाई से पूछा, तो अक्षत फूट-फूट कर रोने लगा और सारा सच उगल दिया. पुलिस ने जब घर की तलाशी ली, तो नीले ड्रम से मानवेंद्र का धड़ बरामद हुआ.

नीला ड्रम और ‘मेरठ’ कनेक्शन
पुलिस को घर के ग्राउंड फ्लोर के कमरे से वही नीला ड्रम मिला, जिसमें मानवेंद्र का धड़ भरा हुआ था. जांच में पता चला कि अक्षत ने मेरठ के ‘सौरभ हत्याकांड’ से प्रेरित होकर लाश को ड्रम में भरकर एसिड से गलाने या सीमेंट से भरने की योजना बनाई थी.

बिखर गया हंसता-खेलता परिवार
मानवेंद्र सिंह मूल रूप से जालौन के थे. उनके पिता रिटायर्ड दरोगा हैं. 9 साल पहले मानवेंद्र की पत्नी की मौत हो गई थी. वह अपने पीछे करोड़ों की संपत्ति (पैथोलॉजी और शराब की दुकानें) छोड़ गए हैं. अब पिता की मौत हो चुकी है, बेटा जेल में है और मासूम बेटी गहरे सदमे में. डीसीपी सेंट्रल विक्रांत वीर के मुताबिक, आरोपी अक्षत को गिरफ्तार कर लिया गया है. हत्या में इस्तेमाल लाइसेंसी राइफल, आरी और कार बरामद कर ली गई है. पुलिस अब शव के उन हिस्सों की तलाश कर रही है जिन्हें आरोपी ने बाहर फेंका था.

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