Tuesday, 15 Sep 2026 | 10:34 PM

Trending :

EXCLUSIVE

सालाना 90 लाख होगा कार प्रोडक्शन:कार कंपनियां 1 लाख करोड़ लगा 65% बढ़ाएंगी उत्पादन, कम दाम पर बेहतर कारों की उम्मीद

सालाना 90 लाख होगा कार प्रोडक्शन:कार कंपनियां 1 लाख करोड़ लगा 65% बढ़ाएंगी उत्पादन, कम दाम पर बेहतर कारों की उम्मीद

देश की पांच बड़ी कार कंपनियां अगले 5-6 साल में करीब 1 लाख करोड़ रुपए निवेश करके उत्पादन क्षमता 65% तक बढ़ाने जा रही हैं। इससे कारों का सालाना उत्पादन 55 लाख से बढ़कर 90 लाख तक पहुंच सकता है। बढ़ती मांग के बीच इससे सप्लाई बढ़ेगी, नए मॉडल आएंगे और लोकप्रिय मॉडलों के लिए इंतजार की अवधि घट सकती है। देश की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों मारुति सुजुकी इंडिया, टोयोटा फिलोस्कर मोटर, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा मोटर्स और जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया ने आक्रामक विस्तार की योजना बनाई है। इसके तहत भारी-भरकम निवेश से नए कारखाने खोले जाएंगे। एसयूवी, ईपी और हाइब्रिड टेक्नोलॉजी पर जोर दिया जाएगा। इसका मतलब है कि आगामी वर्षों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। नतीजतन अभी के मुकाबले कम कीमतों पर बेहतर फीचर वाली कारें बाजार में आ सकती हैं। क्षमता विस्तार की होड़: नई फैक्ट्रियां, मॉडल, टेक्नोलॉजी पर फोकस मारुति सुजुकीः 35,000 करोड़ रुपए का नया निवेश कंपनी अभी सालाना 26 लाख कारें बना सकती है। 2027 से 2030 के बीच अतिरिक्त 15 लाख कारों की उत्पादन क्षमता जोड़ेगी। गुजरात के गांधीनगर में सालाना 10 लाख कारों का नया बड़ा प्लांट लगेगा। बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच कंपनी बाजार हिस्सेदारी बचाना चाहती है। टोयोटा किर्लोस्कर मोटरः क्षमता दोगुनी करेगी टोयोटा किलोस्कर मोटर उत्पादन क्षमता दोगुनी सालाना 10 लाख कारों तक पहुंचाने जा रही है। बिदादी (कर्नाटक) प्लांट का विस्तार करेगी। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में नया बड़ा कारखाना लगाएगी। इससे फॉच्यूनर, इनोवा जैसे मॉडलों की लंबी वेटिंग कम हो जाएगी। महिंद्रा एंड महिंद्राः सालाना उत्पादन 7.4 लाख बढ़ाएगी कंगनी नागपुर में 5 लाख और चाकण में 2.4 लाख यूनिट की नई फैसिलिटी जोड़ेगी। अभी उत्पादन क्षमता सालाना 7.74 लाख कारों की है। 2030 तक इसे 15 लाख से ऊपर ले जाने का लक्ष्य है। 2027 में आने वाली कॉम्पैक्ट एसयूवी रेंज के लिए यह जरूरी है। टाटा मोटर्स नई ईवी, एसयूवी उतारेगी कंपनी तमिलनाडु में नया प्लॉट लगाएगी। जिसमें 9,000 करोड़ रुपए लगेंगे और सालाना 2.5 लाख कारें बनेगी। मौजूदा फैक्ट्रियां सालाना 8.5 लाख तक कारें बना रही हैं। कंपनी इलेक्ट्रिक कारों और एसयूवी के नए मॉडलों पर फोकस करेगी। नए मॉडल उतारेगी। एमजी मोटर क्षमता तीन गुना करेगी जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया 4,000 करोड़ रुपए के निवेश से क्षमता लगभग तीन गुना करके सालाना 3 लाख कारों तक पहुंचाएगी। कंपनी प्लग-इन हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों के नए मॉडल बाजार में उतारने पर फोकस कर रही है। आक्रामक विस्तार की जरूरत इसलिए पड़ी – जीएसटी के ढांचे में बदलाव और कटौती से टैक्स व्यवस्था अब बिलकुल स्पष्ट हो गई है। पहले टैक्स के मामले में अनिश्चितता बनी हुई थी, लेकिन अब कंपनियां लंबे समय की प्लानिंग कर सकती है। – मांग लगातार बढ़ रही है। आगामी वर्षों में भी कमोबेश यही स्थिति रहेगी। वाहन डीलरों के संगठन फाडा के प्रेसिडेंट सीएस विग्नेश्वर ने कहा कि जीएसटी में कटौती कई साल तक मांग मजबूत रखेगी। घरेलु, विदेशी बाजारों में मजबूत डिमांड सबसे बड़ा आकर्षण। – 2025 में रिकॉर्ड 45.30 लाख कारों की बिक्री हुई। – घरेलू बाजार में बिकी सालाना 7.3% बढ़ी, इलेक्ट्रिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन 17% बढ़ा – गाड़ियों के निर्यात में 19.2% की तगड़ी बढ़ोतरी हुई।

ब्राजील कार्निवल, उमड़ा जनसैलाब, टूटेगा रिकॉर्ड:6.5 करोड़ लोगों की भीड़ और 190 करोड़ का बजट, सांबा की धुन पर थिरकी दुनिया

ब्राजील कार्निवल, उमड़ा जनसैलाब, टूटेगा रिकॉर्ड:6.5 करोड़ लोगों की भीड़ और 190 करोड़ का बजट, सांबा की धुन पर थिरकी दुनिया

दुनिया के सबसे बड़े उत्सवों में से एक बाजील कार्निवल चरम पर पहुंच चुका है। 13 फरवरी से शुरू हुआ उत्सव अलग-अलग शहरों के बाद अब रियो डी जेनेरियों में दस्तक दे चुका है। 21 फरवरी तक चलने वाले कार्निवल में रिकॉर्ड तोड़ भीड़ उमड़ रही है। इस साल अनुमान है कि लगभग 6.5 करोड़ लोग शामिल होंगे। अलग-अलग शहरों में कार्निवाल में 4 हजार से ज्यादा कलाकार हिस्सा ले रहे हैं। रियो डी जेनेरियो में ही करीब 80 लाख लोगों के आने की उम्मीद है। कलाकार और सांबा स्कूल भाग ले रहे हैं रियो में परेड का केंद्र सांबाडीम है, जहां 12 टॉप-लीग सांबा स्कूल मुख्य प्रतियोगिता में उतर रहे हैं। इनके साथ दर्जनों स्कूल निचली डिवीजनों में परेड करते हैं। हर बड़े सांबा स्कूल में हजारों डांसर, म्यूजीशियन, कारीगर, कॉस्ट्यूम डिजाइनर टेलर और सेट बनाने वाले लोग जुड़े होते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक अकेले एक उभरते स्कूल पाड़े मिग्वेल का बजट करीब 190 करोड़ रु है। अकेले रियो में हर साल करीब 70.000 अस्थायी नौकरियां मिलती हैं। इसमें सुरक्षा, सफाई, स्टाल, होटल रेस्तरां स्टाफ, इवेंट मैनेजमेंट शामिल हैं।

दावा- गाजा के 90% इलाके पर हमास का कब्जा:विरोध करने वालों की सजा दे रहा; ट्रम्प बोले- पीस बोर्ड को ₹90 हजार करोड़ देंगे

दावा- गाजा के 90% इलाके पर हमास का कब्जा:विरोध करने वालों की सजा दे रहा; ट्रम्प बोले- पीस बोर्ड को ₹90 हजार करोड़ देंगे

गाजा में अक्टूबर में लागू हुए सीजफायर के बाद हालात फिर बदलते दिख रहे हैं। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक गाजा के एक कार्यकर्ता मोहम्मद दियाब का दावा है कि हमास ने उन इलाकों के 90% से ज्यादा हिस्से पर दोबारा कब्जा जमा लिया है, जहां वह पहले से मौजूद था। दियाब का कहना है कि हमास की पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां फिर से सड़कों पर दिखाई दे रही हैं। वे अपराध रोकने के नाम पर कार्रवाई कर रही हैं और जिन लोगों को अपना विरोधी या सहयोगी मानती हैं, उनके खिलाफ कदम उठा रही हैं। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ऐलान किया है कि अमेरिका गाजा के लिए बने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को 10 अरब डॉलर (90 हजार करोड़ रुपये) की मदद देगा। यह संगठन अंतरराष्ट्रीय विवाद सुलझाने के लिए बनाया गया है और इसकी शुरुआत गाजा पट्टी के पुनर्निर्माण के मकसद से हुई थी। बोर्ड ऑफ पीस मीटिंग की 3 तस्वीर… बोर्ड की मीटिंग में 50 देश के नेता शामिल हुए ट्रम्प ने कहा कि यह रकम युद्ध पर होने वाले खर्च के मुकाबले बहुत छोटी है। उन्होंने सदस्य देशों से कहा कि अगर सभी देश साथ आएं तो उस इलाके में स्थायी शांति लाई जा सकती है, जो सदियों से युद्ध और हिंसा झेलता आया है। ट्रम्प की अध्यक्षता में बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक वॉशिंगटन में हो रही है। पहले शिखर सम्मेलन में कम से कम 50 देशों के राष्ट्राध्यक्ष, विदेश मंत्री या दूत शामिल हुए। बैठक में गाजा के लिए ट्रम्प की शांति योजना पर रिपोर्ट पेश की जानी है। हालांकि टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के मुताबिक बोर्ड के शुरुआती दस्तावेज में गाजा का साफ तौर पर जिक्र नहीं है। ट्रम्प ने कहा कि बोर्ड का मकसद सिर्फ गाजा नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में शांति लाना है। वहीं कई यूरोपीय देशों ने इसे ट्रम्प का निजी प्रोजेक्ट बताते हुए इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है। 9 सदस्य गाजा के लिए 7 अरब डॉलर देने पर सहमत ट्रम्प ने गुरुवार को कहा कि कजाकिस्तान, अजरबैजान, UAE, मोरक्को, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, उज्बेकिस्तान और कुवैत ने गाजा राहत के लिए 7 अरब डॉलर (63 हजार करोड़ रुपए) से ज्यादा मदद देने के लिए सहमत हो गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इंडोनेशिया, मोरक्को, अल्बानिया, कोसोवो और कजाकिस्तान ने गाजा में हालात संभालने के लिए अपने सैनिक और पुलिस बल भेजने का वादा किया है। ट्रम्प ने कहा कि मिस्र और जॉर्डन भी बड़ी मदद कर रहे हैं। वे सैनिक, ट्रेनिंग और एक भरोसेमंद फिलिस्तीनी पुलिस बल तैयार करने में सहयोग दे रहे हैं। ट्रम्प ने कहा कि गाजा पर खर्च किया गया हर डॉलर इलाके में स्थिरता लाने और बेहतर भविष्य बनाने में निवेश है। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि कितने सैनिक भेजे जाएंगे, वे कब तैनात होंगे और दी गई रकम का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा। ट्रम्प के कंट्रोल में होगा पूरा पीस बोर्ड चार्टर के अनुसार, डोनाल्ड ट्रम्प को इनॉगुरल चेयरमैन (प्रथम अध्यक्ष) नामित किया गया है, और यह पद लाइफटाइम उनके द्वारा चुने गए उत्तराधिकारी तक रह सकता है। उनके पास वीटो पावर है। बोर्ड के अधिकांश फैसलों को चेयरमैन की मंजूरी चाहिए होती है, जिसका मतलब है कि ट्रम्प किसी भी निर्णय को रोक सकते हैं। बोर्ड के सदस्यों को जोड़ने, हटाने एजेंडा तय करने, सब्सिडियरी बॉडी बनाने, ग्रुप भंग करने पर ट्रम्प का पूरा कंट्रोल होगा। राष्ट्रपति पद खत्म होने के बाद भी वे चेयरमैन बने रह सकते हैं, क्योंकि यह पद उनकी राष्ट्रपति पद से स्वतंत्र है। केवल एग्जीक्यूटिव बोर्ड के सर्वसम्मति से उन्हें हटाया जा सकता है (जो व्यावहारिक रूप से लगभग असंभव है, क्योंकि एग्जीक्यूटिव बोर्ड भी ट्रम्प ही नियुक्त करेंगे)। कई देशों ने शामिल होने से इनकार किया कई देशों ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया है, खासकर यूरोपीय देशों और कुछ सहयोगियों ने। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी आने से इनकार कर दिया है। उनकी जगह विदेश मंत्री गिदोन सार पहुंचे। न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने स्पष्ट कहा कि बोर्ड का काम संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने बोर्ड में शामिल न होने का फैसला लिया, क्योंकि न्यूजीलैंड इसमें खास योगदान नहीं दे पाएगा । अधिकांश यूरोपीय देशों ने भी चिंता जताई है कि यह UN को कमजोर कर सकता है या ट्रम्प के व्यक्तिगत नियंत्रण वाला शरीर बन सकता है। कई G7 देशों ने भी दूरी बनाई है। शुरू में यह गाजा में युद्धविराम (2025 में हुए समझौते) को लागू करने, पुनर्निर्माण और स्थिरता के लिए था। UN सिक्योरिटी काउंसिल रेजोल्यूशन 2803 ने इसे स्वीकार किया था। गाजा में फोर्स के तैनाती की तैयारी में ट्रम्प गाजा में सुधार को लेकर ट्रम्प की 20 सूत्रीय योजना का पहला चरण सितंबर में घोषित हुआ था, जिसे तीन महीने पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने समर्थन दिया। पहले चरण में इजराइल-हमास के बीच आंशिक संघर्षविराम, मानवीय सहायता में बढ़ोतरी और बंधकों की रिहाई शामिल थी। दूसरे चरण में ISF की तैनाती और प्रशासनिक ढांचा खड़ा करना शामिल है। हालांकि, इन कदमों में देरी हो रही है। पिछले महीने एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा था कि ISF के गठन की घोषणा कुछ दिनों में हो सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। UN के प्रस्ताव के अनुसार, ISF को 2027 तक गाजा की सीमाओं की सुरक्षा, हथियारों को नष्ट करना, गैर-राज्य सशस्त्र समूहों के ढांचे को खत्म करने और नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी जाएगी। अब तक केवल इंडोनेशिया ने सार्वजनिक रूप से करीब 2,000 सैनिक भेजने की बात कही है। वे अप्रैल से पहले तैनात नहीं होंगे और गाजा के उस हिस्से में नहीं जाएंगे जो अभी भी इजराइली सेना के नियंत्रण में है। हमास बोला- जब तक इजराइली सेना यहां है, हथियार नहीं छोड़ेंगे दूसरी ओर हमास ने कहा है कि जब तक इजराइली सेना पूरी तरह नहीं हटती, वह हथियार नहीं डालेगा। हाल ही में हमास लीडर ओसामा हमदान ने अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में कहा कि संगठन ने अभी तक हथियारों पर कोई औपचारिक फैसला नहीं लिया है। वहीं, इजराइल का कहना है कि जब तक हमास पूरी तरह हथियार नहीं छोड़ता, सेना

PAK गई पंजाबी महिला ने बताई लव स्टोरी:9 साल पहले फेसबुक पर इश्क हुआ, बच्चों से छिपाकर रखती मोबाइल, पति 22 साल से UK में

PAK गई पंजाबी महिला ने बताई लव स्टोरी:9 साल पहले फेसबुक पर इश्क हुआ, बच्चों से छिपाकर रखती मोबाइल, पति 22 साल से UK में

पंजाब से पाकिस्तान जाकर इस्लाम कबूल करने और नासिर हुसैन से निकाह करने वाली सरबजीत कौर उर्फ नूर फातिमा ने एक इंटरव्यू में अपनी पूरी कहानी बताई। सरबजीत कौर ने खुलासा किया कि उसकी और नासिर हुसैन की बातचीत 2016 में फेसबुक के जरिए शुरू हुई थी, जो बाद में दोस्ती से प्यार में बदल गई और 2025 के अंत तक शादी कर ली। सरबजीत ने बताया कि उसका पति 22 साल से यूके में है और वह मोबाइल अपने बच्चों से छिपाकर रखती थी। वह पहली बार ननकाना साहिब गई थी और 4 नवंबर को गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान पहुंची। सरबजीत ने यह भी कहा कि उसने अपनी इच्छा से इस्लाम कबूल किया और किसी के दबाव में कोई फैसला नहीं लिया। वहीं वकील ने भी वीजा, जांच और कानूनी प्रक्रिया को लेकर चल रही खबरों पर सफाई दी। इंटरव्यू के दौरान सरबजीत कौन ने अपने परिवार, बच्चों, पाकिस्तान पहुंचने, निकाह और वायरल ऑडियो से जुड़े सवालों के जवाब देते हुए कई बातों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। पढ़ें पूरी रिपोर्ट…. सरबजीत की जुबानी प्यार से लेकर पाक पहुंचने तक की कहानी सवाल: आपकी मुलाकात कैसे हुई? किस साल से आप पंजाब में रहकर बातचीत कर रही थीं? इश्क की कहानी कब शुरू हुई? जवाब: 2016 में हमारी बातचीत शुरू हुई। फेसबुक के जरिए संपर्क हुआ। 2025 के अंत तक हमने शादी कर ली। सवाल: क्या आप पहले भी ननकाना साहिब गई थीं? क्या पहले मुलाकात हुई थी? जवाब: नहीं, मैं पहली बार ननकाना साहिब गई थी। सवाल : कुछ दिन पहले खबरें चली थीं कि आपको वापस भेजा जा रहा है? जवाब (वकील): ऐसा कुछ नहीं था। वीजा एक्सटेंशन नहीं हुआ था, इसलिए पाकिस्तानी एजेंसियों को जांच करनी थी। जांच के बाद हमने याचिका दायर की कि इन्हें डिपोर्ट न किया जाए। बाद में कानूनी दस्तावेज पूरे किए गए और शेल्टर होम से रिहा कर दिया गया। सवाल: आपकी प्रेम कहानी कैसे शुरू हुई? जवाब: पहले दोस्ती थी, बाद में प्यार में बदल गई। सवाल: उस समय आपके पति कर्नेल सिंह आपके साथ थे? जवाब: कर्नेल सिंह 22 साल से यूके में रहते हैं। सवाल: क्या घर में किसी को पता था? आपके बेटे ने कहा कि आपको फोन चलाना या मैसेज करना भी नहीं आता था, फिर फेसबुक चैट कैसे की? जवाब: मैं फेसबुक से टिकटॉक पर आई। बच्चों से छुपाकर फोन रखा हुआ था। सवाल: आपके कितने बच्चे हैं? जवाब: दो बेटे हैं। सवाल: लोग कह रहे हैं कि आपने पंजाब में बसता-हंसता परिवार छोड़ दिया, गुरुओं की धरती का गलत इस्तेमाल किया। क्या आपको शर्म नहीं आती? जवाब: शर्म तो उन लोगों को आनी चाहिए। मैं किसी गलत रिश्ते में नहीं हूं। मैंने शादी की है। मैं गुरुओं-पीरों की धरती पर शादी करके आई हूं। मैंने कोई गलत कदम नहीं उठाया। सवाल: आपने कहा कि मुस्लिम बनकर आपको सुकून मिल रहा है। क्या आपको अपनी पुरानी धरती या गुरबाणी से सुकून नहीं मिला? जवाब: सिख धर्म और इस्लाम एक ही हैं। अल्लाह एक ही हैं। गोल्डन टेंपल की नींव भी एक मुस्लिम ने रखी थी। सवाल: आपकी एक ऑडियो वायरल हुई थी, जिसमें आप कह रहे थे कि आप एक आपत्तिजनक वीडियो डिलीट करवाने गए थे। क्या इस बात में कोई सच्चाई है? और क्या यह सही है कि नासिर हुसैन की बहन ने आपको पीटा? जवाब: नहीं, ऐसी कोई बात नहीं। जो भी किया, मैंने अपनी मर्जी से किया। मैंने अपनी इच्छा से इस्लाम कबूल किया। सवाल: जो ऑडियो वायरल हुई थी, वह कहां से आई? जवाब: मुझे नहीं पता, किसी ने बना ली होगी। सवाल: जब आप ननकाना साहिब पहुंचीं तो नासिर कैसे मिला? कौन-कौन पंजाब से आपके साथ गया था? जवाब: जिस दिन मैं आई, किसी रिश्तेदार या बच्चों को पता नहीं था। मेरा 13 दिन का वीजा लगा था, गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व पर 4 नवंबर को वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान पहुंची। वहां पहुंचकर मोबाइल का वाई-फाई ऑन किया, फिर संपर्क हुआ। सवाल: क्या आप शेखूपुरा से फरार हुई थीं? जवाब (वकील): ये फरार नहीं थीं। वीजा एक्सटेंशन की अर्जी दी गई थी। इस दौरान सरबजीत ने खुद कहा कि वह 4 नवंबर को पहुंचीं और 5 नवंबर को ही कोर्ट में पेश हो गई थीं। बाद में हाई कोर्ट में भी दस्तावेज जमा किए गए। फरार होने की बात गलत है। सवाल: क्या आपको परिवार की याद आती है? जवाब: नहीं। ******************* ये खबर भी पढ़ें: पाकिस्तान गई पंजाबी महिला ने नाम बदलकर निकाह किया: अटारी बॉर्डर से गई थी, खाली इमिग्रेशन फॉर्म से बढ़ा शक; तलाश में जुटी थी एजेंसियां पाकिस्तान दर्शन के लिए गए भारतीय सिख श्रद्धालुओं के जत्थे से कपूरथला की महिला सरबजीत कौर की गैरमौजूदगी का मामला अब स्पष्ट हो गया है। शुरुआती तौर पर सरबजीत के लापता होने की सूचना मिली थी, लेकिन जांच में पता चला है कि वे अब लापता नहीं, बल्कि उन्होंने पाकिस्तान में अपना नाम बदलकर नूर हुसैन के नाम से निकाह कर लिया है। (पढ़ें पूरी खबर)

थाने पहुंची हरियाणवी कलाकारों की कन्ट्रोवर्सी:'जीजा जी' सॉन्ग पर विवाद, सिंगर मीता बोले-बिग बॉस ऑफर के लिए कर रही; सोनिका ने गंदा आदमी बताया

थाने पहुंची हरियाणवी कलाकारों की कन्ट्रोवर्सी:'जीजा जी' सॉन्ग पर विवाद, सिंगर मीता बोले-बिग बॉस ऑफर के लिए कर रही; सोनिका ने गंदा आदमी बताया

हरियाणवी सिंगर अमित खासा उर्फ मीता बरोदा और मॉडल सोनिका सिंह का विवाद अब थाने तक पहुंच गया है। सोनिका सिंह का कहना है कि लगातार हो रही बदनामी से परेशान होकर उन्होंने पुलिस में शिकायत दी है। बता दें कि दोनों स्टॉर्स के बीच ‘जीजा जी’ सॉन्ग को लेकर विवाद चल रहा है। दोनों सोशल मीडिया पर भी एक- दूसरे के खिलाफ बयानबाजी कर चुके हैं। दोनों ने सॉन्ग की ऑनरशिप, यू-ट्यूब इनकम को लेकर अपना दावा कर रहे हैं। जीजा जी सॉन्ग करीब एक साल पहले आजाद सिंह खांडा खेड़ी की रागनी का मॉडिफाई वर्जन था। सिंगर मीता बरोदा का कहना है कि आजाद सिंह से परमिशन लेने के बाद ही उन्होंने इस गाने को रिकॉर्ड किया था। मीता बरोदा ने कहा… सोनिका बेवजह कन्ट्रोवर्सी को लंबा खींच रही है। उन्हें बिग बॉस में जाना है। इसीलिए कॉन्ट्रोवर्सी कर रही है। अब सिलसिलेवार पढ़िए विवाद की वजह… अब पढ़िए सोनिका सिंह ने क्या दावा किया… 3 पॉइंट में पढ़िए…विवाद पर मीता बरोदा क्या बोले सोनिका बोलीं- पुलिस को शिकायत दी सोनिका का कहना है कि सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणियों और बदनाम करने के प्रयास के चलते उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने मीता के साथ किसी प्रकार की धोखाधड़ी नहीं की है। पुलिस भी मामले की जांच कर रही है। ——————- ये खबर भी पढ़ें… हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा ने सरपंच को धमकाया, VIDEO:मंच से उतारकर बोले- MLA-मंत्री तक को कुछ नहीं समझता, भीड़ से भी धक्का-मुक्की की हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। एक लाइव शो के दौरान उन्होंने स्टेज पर खड़े पूर्व सरपंच व समर्थकों पर चिल्लाते हुए नीचे उतरने को कह दिया। सिंगर ने कहा- मेरे गाने के प्रोग्राम के बीच में कोई सरपंच हो, कोई एमएलए हो, कोई मंत्री हो, मैं किसी ने कुछ नहीं मानता। आप चाहे सरपंच हो मेरा परफॉर्मेंस नीचे बैठकर देखो। (पूरी खबर पढ़ें)

पाकिस्तान में इमरान की रिहाई के लिए यूथ फोर्स बनी:खैबर में अटक ब्रिज पर समर्थकों ने कब्जा किया; आर्मी चीफ ने 5 हजार फौजी भेजे

पाकिस्तान में इमरान की रिहाई के लिए यूथ फोर्स बनी:खैबर में अटक ब्रिज पर समर्थकों ने कब्जा किया; आर्मी चीफ ने 5 हजार फौजी भेजे

पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर पाकिस्तान में हालात बेकाबू हो रहे हैं। इमरान की पार्टी पाक तहरीक-ए-इंसाफ(PTI) के हजारों समर्थकों ने खैबर सूबे में सामरिक और रणनीतिक रूप से अहम अटक ब्रिज पर बुधवार को कब्जा जमा लिया है। ब्रिज के दोनों ओर इमरान समर्थकों के जमावड़े के कारण वाहन अटके ​हुए हैं। पीटीआई के तेवरों को देखते हुए पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने इस्लामाबाद, पेशावर व रावलपिंडी कैंट से लगभग 5 हजार फौजी रवाना किए हैं। उधर, खैबर के मुख्यमंत्री सुहैल अफरीदी ने रिहाई के लिए युवाओं की इमरान रिलीज फोर्स बनाने का ऐलान किया है। इमरान के समर्थन में तहाफुज पार्टी (TTP) ने भी इस्लामाबाद कूच का ऐलान किया है। पुल पर कब्जे की दो तस्वीरें… खैबर सूबा पाकिस्तान से कटा इमरान समर्थकों के अटक ब्रिज पर कब्जे से खैबर सूबा से पाक से कट गया है। इससे पाकिस्तान में अफरा-तफरी मच गई है। आनन फानन में आर्मी चीफ को फौज भेजने का फैसला लेना पड़ा। 30 महीने से जेल में इमरान पूर्व पीएम इमरान खान अगस्त, 2023 से इस्लामाबाद की अडियाला जेल में बंद हैं। अभी वे तोशाखाना भ्रष्टाचार केस में 14 साल की जेल काट रहे हैं। इमरान की पत्नी बुशरा बीबी भी अडियाला जेल में सजा काट रही है। इमरान के खिलाफ लगभग एक सौ से अधिक मामले दर्ज हैं। इसमें से लगभग एक दर्जन मामले लोअर-हाईकोर्ट में कोर्ट में चल रहे हैं। इमरान की जेल पर मुनीर का ताला, लेकिन इसकी चाबी ट्रम्प के पास इमरान को जेल में रखने में आर्मी चीफ मुनीर की बड़ी भूमिका है। पीएम रहते हुए इमरान ने मुनीर को खुफिया एजेंसी ISI चीफ के पद से हटाया था। जानकारों के अनुसार इमरान की जेल पर भले ही मुनीर का ताला हो, पर इसकी चाबी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पास है। अंतराष्ट्रीय स्तर पर फ्री इमरान मूवमेंट के बाद भी ट्रम्प मुनीर पर रिहाई का दबाव डालने के मूड में नहीं हैं। ———- ये खबर भी पढ़ें… 5 देशों के 14 पूर्व–कप्तानों की पाकिस्तान सरकार को चिट्ठी:इमरान खान के इलाज की मांग, इनमें भारत के दो, पाकिस्तान का कोई नहीं पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की खराब सेहत को लेकर 5 देशों के 14 पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कप्तानों ने पाकिस्तान सरकार को चिट्ठी लिखी है। 73 साल के इमरान अगस्त 2023 से जेल में हैं। इस चिट्ठी पर सुनील गावस्कर, कपिल देव, ग्रेग चैपल, बेलिंडा क्लार्क, माइकल एथरटन, नासिर हुसैन, इयान चैपल, एलन बॉर्डर, माइकल ब्रियरली, डेविड गावर, किम ह्यूजेस, क्लाइव लॉयड, स्टीव वॉ और जॉन राइट ने साइन किए हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 14 दिग्गज कप्तानों ने पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ से इमरान को उचित इलाज दिए जाने की अपील की है। पूरी खबर पढ़ें…

मूंगफली तिल धनिया चटनी: घर पर आधी-अधूरी मूंगफली, तिल और धनिया की चटनी, नोट कर लें रेसिपी

मूंगफली तिल धनिया चटनी: घर पर आधी-अधूरी मूंगफली, तिल और धनिया की चटनी, नोट कर लें रेसिपी

मूंगफली तिल धनिया चटनी: किसी की थाली में अगर मैक शामिल हो जाए तो सिंपल सा खाना भी टेस्टी लगता है। आप अब तक धनिया, पुदीना, टमाटर या लहसुन की चटनी जरूर चाहेंगे, लेकिन अगर स्वाद में कुछ नया करना चाहते हैं तो तिल धनिया की चटनी एक बेहतरीन पद हो सकती है। मूंगफली और तिल का कॉम्बिनेशन इस चटनी को अलग और स्वादिष्ट स्वाद देता है। इसमें मौजूद परमाणु सामग्री और पोषक तत्व इसे स्वाद के साथ स्वास्थ्य मंद भी तोड़ देते हैं। यह चटनी रोटी, पराठा, इडली, डोसा और यहां तक ​​कि चावल के साथ भी बहुत अच्छी लगती है। यह न सिर्फ स्वाद में लाजवाब है बल्कि इसे बनाना भी बेहद आसान है। इसे बनाने की विधि काफी आसान है, आइए आपके लिए जानते हैं इस रेसिपी की रेसिपी। मूंगफली, तिल और धनिया की चटनी बनाने की आवश्यक सामग्री इस मसाले को बनाने के लिए आधा कप मूंगफली का तेल, 2 से 4 हरी मिर्च, मसाला नमक, 3 से 4 लहसुन की कलियां, 2 से 4 लहसुन की कलियां, 2 से 4 कटा हुआ धनिया पत्ती, 1 छोटा मसाला तेल, आधा छोटा मसाला राई के दाने, 4 से 5 काली मिर्च और चुटकी भर हींग की जरूरत होती है. सबसे पहले एक कड़ाही को गैस पर रखा जाता था और बिना तेल डाला जाता था और तिल को आधा-आधा गैस पर लगाया जाता था, सौर ऊर्जा तक भून लिया जाता था। ध्यान दें कि उदाहरण के तौर पर ज्यादातर न जलते हुए अन्य स्वाद वाले पाउडर हो सकते हैं। भुनने के बाद जिज्ञासु ठंडा होने दें। इसके बाद प्लास्टिक जार में भुनी हुई मूंगफली और तिल डाले गए। इसमें हरी मिर्च, नमक, लहसुन, कटा हुआ धनिया पत्ता और थोड़ा सा पानी पूरा दरदरा या विशेषज्ञ पेस्ट तैयार कर लें। अब तैयार मॅकॅच को एक बाउल में निकाल लें। एक छोटे पैन में तेल गरम करें और राई के दाने डालें। जब राई चटकने लगे तो इसमें कारी पत्ता और हींग डाल शामिल थे। तैयार को उपयुक्त के ऊपर अच्छे से फैलाया गया। ऐसे ही कुछ मिनटों में आपका स्वादिष्ट तिल-धनिया की चटनी तैयार हो जाती है। इसे आप किसी भी तरह के खाने के साथ आम खा सकते हैं, जिससे खाने का स्वाद दोगुना हो जाएगा। (टैग्सटूट्रांसलेट)मूंगफली तिल धनिया चटनी(टी)मूंगफली तिल की चटनी रेसिपी(टी)भारतीय चटनी रेसिपी(टी)स्वस्थ चटनी(टी)आसान चटनी रेसिपी(टी)घर की चटनी(टी)मूंगफली की चटनी(टी)तिल की चटनी(टी)धनिया चटनी(टी)दक्षिण भारतीय शैली की चटनी

‘सत्ता का दुरुपयोग’: बीजेपी ने कांग्रेस कार्यालयों के लिए भूमि आवंटन को लेकर कर्नाटक सरकार पर निशाना साधा | राजनीति समाचार

'सत्ता का दुरुपयोग': बीजेपी ने कांग्रेस कार्यालयों के लिए भूमि आवंटन को लेकर कर्नाटक सरकार पर निशाना साधा | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:फ़रवरी 18, 2026, 23:46 IST बीजेपी ने कांग्रेस पर कर्नाटक में कांग्रेस भवनों के लिए रियायती दरों पर सरकारी जमीन आवंटित करने का आरोप लगाया है. बीजेपी नेता गौरव भाटिया. (पीटीआई) भाजपा और कांग्रेस के बीच तब राजनीतिक खींचतान शुरू हो गई जब भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर पार्टी कार्यालयों के निर्माण के लिए राज्य भर में नागरिक सुविधा (सीए) स्थल रियायती दरों पर आवंटित करने का आरोप लगाया। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, राज्य इकाई ने बेलगावी में 1924 के कांग्रेस सत्र की शताब्दी को चिह्नित करने के लिए कम से कम 100 नई इमारतों के निर्माण का लक्ष्य रखा है, जिसकी अध्यक्षता महात्मा गांधी ने की थी। 2024 में शताब्दी समारोह के दौरान, सरकार ने पार्टी की विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए नई इमारतें स्थापित करने की योजना की घोषणा की। भाजपा ने आरोप लगाया कि सरकारी भूमि के कई भूखंड कांग्रेस को ‘कौड़ी के दाम’ पर आवंटित किए गए – मार्गदर्शन मूल्य का केवल पांच प्रतिशत, और इसे “सत्ता का बेशर्म दुरुपयोग” कहा गया। पार्टी ने दावा किया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में कांग्रेस भवनों के निर्माण की सुविधा के लिए कैबिनेट बैठकों के दौरान आवंटन की मंजूरी दी गई थी। राज्य भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने एक्स पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये की नागरिक सुविधा साइटों को भारी रियायती दरों पर कांग्रेस को सौंप दिया गया था। उन्होंने कहा, “भ्रष्ट कांग्रेस सरकार को लोगों के कल्याण में कोई दिलचस्पी नहीं है। खजाना लूटना ही उसका एकमात्र मंत्र है। अब, स्व-सेवारत भ्रष्टाचार के एक चौंकाने वाले कृत्य में, कांग्रेस सरकार ने राज्य भर में करोड़ों रुपये की सीए (सिविक एमेनिटी) साइटों को बाजार मूल्य के मात्र 5% पर आवंटित कर दिया है। यह सरकारी खजाने को सीधा नुकसान और कर्नाटक के लोगों के साथ विश्वासघात है।” कांग्रेस ने पार्टी कार्यालयों के लिए सरकारी जमीन हड़प ली – सत्ता का एक और बेशर्म दुरुपयोग गरीबों को जमीन और आवास प्रदान करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन भ्रष्ट कांग्रेस सरकार को लोगों के कल्याण में कोई दिलचस्पी नहीं है। खजाना लूटना ही इसका एकमात्र मंत्र है… pic.twitter.com/ZJf1saEm1K – विजयेंद्र येदियुरप्पा (@BYVijayender) 18 फ़रवरी 2026 भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने भी कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा और दावा किया कि लगभग 50 करोड़ रुपये मूल्य की 24 साइटों को लगभग 2 करोड़ रुपये में कांग्रेस भवन ट्रस्ट को हस्तांतरित कर दिया गया था। उन्होंने इस कदम को “सरासर भ्रष्टाचार” करार दिया और स्थानांतरण के पीछे के उद्देश्य पर सवाल उठाया। समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से भाटिया ने कहा, “कांग्रेस पार्टी के लिए, राज्य और देश के लोग मायने नहीं रखते। कांग्रेस का डीएनए यह है: उन्हें ‘नकली गांधी परिवार’ को खुश करना है…कर्नाटक में सत्ता की खींचतान दिखाई दे रही है…क्या कर्नाटक के लोगों को इसका खामियाजा भुगतना चाहिए? क्या इससे सीएम सिद्धारमैया को सार्वजनिक जमीन हड़पने और उसे कम कीमत पर कांग्रेस की संपत्ति में बदलने का लाइसेंस मिलता है, यहां तक ​​कि सरकार को बाजार मूल्य भी नहीं देना पड़ता? आज, चिंता भ्रष्टाचार है…” भाटिया ने समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से कहा। #घड़ी | दिल्ली | बीजेपी नेता गौरव भाटिया कहते हैं, “…आज सवाल पूछा जाना चाहिए… सीएम सिद्धारमैया के नेतृत्व में कर्नाटक की कांग्रेस सरकार कर्नाटक के नागरिकों के लिए नागरिक सुविधाओं के लिए भूमि के 24 टुकड़ों को क्यों स्थानांतरित कर रही है और उन्हें उपयोग के लिए परिवर्तित कर रही है… pic.twitter.com/PeInUv59fh– एएनआई (@ANI) 18 फ़रवरी 2026 विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाडी नारायणस्वामी ने दावा किया कि कांग्रेस भवनों के निर्माण के लिए राजस्व विभाग से पांच और स्थानीय निकायों से 26 सहित 31 साइटों को मंजूरी दी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इनमें से कई नागरिक सुविधा स्थल थे जो राजनीतिक उपयोग के लिए नहीं थे और चिकबल्लापुर, बादामी और मांड्या में भूमि को उनके बाजार मूल्य के एक अंश पर आवंटित किए जाने का उदाहरण दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आवंटन वापस नहीं लिया गया तो भाजपा कानूनी कार्रवाई करेगी। इस बीच, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि कांग्रेस बेलगावी में 1924 के कांग्रेस सत्र की शताब्दी को चिह्नित करने के लिए 100 नई इमारतों का निर्माण कर रही थी, जिसकी अध्यक्षता महात्मा गांधी ने की थी। शिवकुमार ने कहा, “हां, हम कांग्रेस भवन के लिए सरकारी जमीन का उपयोग कर रहे हैं। हम 5,000 से 10,000 वर्ग फुट के भूखंड आवंटित कर रहे हैं।” उन्होंने भाजपा पर दोहरे मानदंड अपनाने का भी आरोप लगाया और उसके कार्यकाल के दौरान ऐसे उदाहरणों की ओर इशारा किया जब विभिन्न ट्रस्टों को रियायती दरों पर भूमि आवंटित की गई थी। चाणक्य विश्वविद्यालय को आवंटित जमीन का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि इसकी कीमत 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ थी लेकिन इसे 50 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से दिया गया। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: फ़रवरी 18, 2026, 23:46 IST समाचार राजनीति ‘सत्ता का दुरुपयोग’: भाजपा ने कांग्रेस कार्यालयों के लिए भूमि आवंटन को लेकर कर्नाटक सरकार पर निशाना साधा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कांग्रेस सरकार भूमि आवंटन(टी)भाजपा कांग्रेस राजनीतिक विवाद(टी)नागरिक सुविधा स्थल कर्नाटक(टी)कांग्रेस भवन निर्माण(टी)कर्नाटक सरकार भूमि आवंटन(टी)भ्रष्टाचार के आरोप कांग्रेस(टी)भाजपा कानूनी कार्रवाई कांग्रेस(टी)रियायती भूमि दरें कर्नाटक

‘निराधार और मनगढ़ंत’: मायावती ने यूपी गठबंधन की चर्चा को खारिज किया, कहा कि 2027 के चुनावों में बसपा अकेले दम पर उतरेगी | राजनीति समाचार

'निराधार और मनगढ़ंत': मायावती ने यूपी गठबंधन की चर्चा को खारिज किया, कहा कि 2027 के चुनावों में बसपा अकेले दम पर उतरेगी | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:18 फरवरी, 2026, 21:53 IST मायावती का यह बयान बसपा और असदुद्दीन औवेसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम के बीच संभावित समझ की अटकलों के बीच आया है बसपा प्रमुख ने हाल ही में दिल्ली में टाइप-8 बंगले के आवंटन पर आलोचना को भी संबोधित किया। (फाइल फोटो) उन अफवाहों को खारिज करते हुए कि बहुजन समाज पार्टी 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन में लड़ सकती है, मायावती ने बुधवार को स्पष्ट रूप से घोषणा की कि बसपा आगामी चुनाव अकेले लड़ेगी। लखनऊ में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, पूर्व मुख्यमंत्री ने संभावित गठजोड़ की खबरों को “झूठा, मनगढ़ंत और एक साजिश का हिस्सा” करार दिया, जो पार्टी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं को गुमराह करने के लिए बनाई गई थी। उनका स्पष्टीकरण बसपा और असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के बीच संभावित समझ की अटकलों के बीच आया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के अखिलेश यादव द्वारा हाल ही में नए सिरे से संबंधों की संभावना का संकेत देने, यह कहते हुए कि “गठबंधन बनते और टूटते हैं” और बसपा के साथ पिछले राजनीतिक सहयोग को याद करने के बाद चर्चा और तेज हो गई थी। हालाँकि, मायावती ने अस्पष्टता के लिए बहुत कम जगह छोड़ी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने के पार्टी के फैसले की घोषणा पहले ही कई बार की जा चुकी है, जिसमें 9 अक्टूबर, 2025 को बसपा संस्थापक कांशी राम की पुण्य तिथि पर लखनऊ में आयोजित रैली भी शामिल है। उन्होंने कहा, “आगे चर्चा की कोई गुंजाइश नहीं है। कुछ नेता और मीडिया के कुछ वर्ग जानबूझकर ऐसी अफवाहें फैला रहे हैं। उन्हें कटी पतंग की तरह उड़ने और खुद का मजाक बनाने से बचना चाहिए।” सुरक्षा, बंगला विवाद और राजनीतिक संदेश बसपा प्रमुख ने हाल ही में दिल्ली में टाइप-8 बंगले के आवंटन पर आलोचना को भी संबोधित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2 जून, 1995 को लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस की घटना के बाद उत्पन्न सुरक्षा चिंताओं के कारण कांग्रेस शासन के दौरान उन्हें इसी तरह के उच्च सुरक्षा वाले आवास प्रदान किए गए थे, जब सपा सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद उन पर सपा कार्यकर्ताओं द्वारा कथित तौर पर हमला किया गया था। उन्होंने कहा, “बीजेपी सरकार ने पहले कई बंगले आवंटित किए थे, लेकिन सुरक्षा कारणों से उन्हें स्वीकार नहीं किया गया या खाली कर दिया गया। मुझे अब उपयुक्त टाइप-8 बंगला आवंटित किया गया है, जिसे मैंने स्वीकार कर लिया है। इस पर कोई गंदी राजनीति नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उनका सुरक्षा कवर बढ़ाया गया है। ‘स्वार्थी नेता गठबंधन की बातें फैला रहे हैं’ प्रतिद्वंद्वी दलों पर निशाना साधते हुए, मायावती ने “स्वार्थी नेताओं” पर जानबूझकर भ्रम पैदा करने के लिए गठबंधन की अफवाहें फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा, कांग्रेस और भाजपा ऐतिहासिक रूप से अंबेडकर विरोधी मानसिकता रखते हैं और पूरी तरह से चुनावी अंकगणित के लिए बसपा के साथ गठबंधन करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “ये पार्टियां केवल अपने राजनीतिक और वोट-बैंक हितों के लिए बसपा से संपर्क करती हैं। ऐसे गठबंधनों से हमारे आंदोलन को कभी कोई फायदा नहीं हुआ है।” पार्टी कार्यकर्ताओं से 2027 के मिशन पर ध्यान केंद्रित रखने का आग्रह करते हुए, उन्होंने उनसे बसपा के प्रतीक का आह्वान करते हुए “आधारहीन और मनगढ़ंत कथाओं” को नजरअंदाज करने और “हाथी की शांत और स्थिर चाल के साथ आगे बढ़ने” के लिए कहा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, प्रतिद्वंद्वी पार्टियां बसपा के स्वतंत्र अभियान को पटरी से उतारने के लिए “अनुनय, दबाव, दंड और विभाजन” की रणनीति तेज कर देंगी। देशभर के अंबेडकरवादियों का आह्वान करते हुए उन्होंने उनसे पार्टी के “लौह नेतृत्व” पर भरोसा करने और बाबासाहेब द्वारा परिकल्पित सम्मान और स्वाभिमान के आंदोलन को मजबूत करने की दिशा में काम करने का आग्रह किया। अकेले जाने का राजनीतिक महत्व राजनीतिक विश्लेषकों ने इस घोषणा को वर्षों के उतार-चढ़ाव भरे चुनावी भाग्य के बाद बसपा की स्टैंडअलोन पहचान को पुनः प्राप्त करने के लिए एक सोचा-समझा कदम बताया। डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. शशिकांत पांडे ने घोषणा को प्रतीकात्मक और रणनीतिक दोनों बताया। डॉ. पांडे ने कहा, “मायावती के अकेले चुनाव लड़ने के आग्रह का उद्देश्य पार्टी के मूल दलित वोट आधार को मजबूत करना है, जिसके बारे में उनका मानना ​​है कि गठबंधन में यह कमजोर हो जाता है। साथ ही, यह एक संदेश भी देता है कि बसपा निर्भरता के बजाय ताकत से बातचीत करना चाहती है।” उन्होंने कहा कि 2007 में पार्टी की पूर्ण बहुमत की जीत का उनका बार-बार जिक्र करना आकस्मिक नहीं है। उन्होंने बताया, “2007 का हवाला देकर वह मतदाताओं को याद दिला रही हैं कि बसपा ने एक बार स्वतंत्र रूप से सत्ता हासिल की थी। संदेश संगठनात्मक विश्वास को बहाल करने और एकल-पार्टी बहुमत की मनोवैज्ञानिक अपील को पुनर्जीवित करने के बारे में है।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 18 फरवरी, 2026, 21:53 IST समाचार राजनीति ‘आधारहीन और मनगढ़ंत’: मायावती ने यूपी गठबंधन की चर्चा को खारिज किया, कहा कि 2027 के चुनावों में बसपा अकेले दम पर चुनाव लड़ेगी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

‘बिहार में घर पर शराब पहुंचाई जा रही है’: जीतन राम मांझी ने तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की | राजनीति समाचार

'बिहार में घर पर शराब पहुंचाई जा रही है': जीतन राम मांझी ने तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:18 फरवरी, 2026, 21:13 IST जीतन राम मांझी ने भ्रष्टाचार, वित्तीय घाटे और तस्करों को छोड़े जाने वाले कमजोर प्रवर्तन का हवाला देते हुए नीतीश कुमार से बिहार में त्रुटिपूर्ण शराबबंदी को ठीक करने का आग्रह किया। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और बिहार के सीएम नीतीश कुमार. (फ़ाइल छवियाँ) केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने बुधवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से शराब तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह करते हुए कहा कि राज्य में शराबबंदी भ्रष्टाचार और कमजोर प्रवर्तन के कारण कमजोर हो रही है, यहां तक ​​​​कि छोटे अपराधियों को भी कानून का खामियाजा भुगतना पड़ता है। मांझी ने आरोप लगाया कि प्रवर्तन अधिकारी मामूली शराब पीने वालों को पकड़ लेते हैं, जबकि बड़े पैमाने पर तस्करी करने वालों को रिश्वत लेकर छोड़ दिया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि शराबबंदी का विचार त्रुटिपूर्ण नहीं है, लेकिन इसके कार्यान्वयन में तत्काल सुधार की जरूरत है. समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से उन्होंने कहा, “…हम लंबे समय से कह रहे हैं कि शराब नीति गलत नहीं है, और शराबबंदी लागू की जानी चाहिए। हालांकि, इसके कार्यान्वयन में खामियां हैं। यही कारण है कि हम नीतीश कुमार को बार-बार यह बता रहे हैं, और हमारे अनुरोध पर तीसरी समीक्षा करने के लिए हम उन्हें धन्यवाद देते हैं।” #घड़ी | गया, बिहार: केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी कहते हैं, “…हम लंबे समय से कह रहे हैं कि शराब नीति गलत नहीं है, और शराबबंदी लागू की जानी चाहिए। हालांकि, इसके कार्यान्वयन में खामियां हैं। इसलिए हम नीतीश कुमार से बार-बार कह रहे हैं… pic.twitter.com/GIbt4I5cMa– एएनआई (@ANI) 18 फ़रवरी 2026 उन्होंने कहा, “तीसरी समीक्षा में कहा गया है कि जो लोग कम शराब पीते हैं उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए… लेकिन हमारे राज्य में प्रवर्तन अधिकारी उन्हीं लोगों को पकड़ते हैं, जबकि बड़े पैमाने पर तस्करी करने वालों को पैसे लेकर छोड़ दिया जा रहा है। नीतीश कुमार को कार्रवाई करनी चाहिए।” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि शराबबंदी से बिहार सरकार को काफी आर्थिक नुकसान हो रहा है और नीतीश कुमार को इस पर ध्यान देना चाहिए. बिहार में 2016 में पूर्ण शराबबंदी लागू की गई थी जब कुमार महागठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे थे। पहले की रिपोर्टों के अनुसार, तब से, प्रवर्तन के कारण 8.43 लाख से अधिक मामले और लगभग 12.8 लाख गिरफ्तारियाँ हुई हैं। बड़े पैमाने पर कार्रवाई के बावजूद, मांझी ने आरोप लगाया कि संगठित तस्करी बेरोकटोक जारी है, कुछ क्षेत्रों में कथित तौर पर शराब घर पर पहुंचाई जा रही है। शराबबंदी से पहले, राज्य को शराब की बिक्री से उत्पाद शुल्क के रूप में सालाना 3,000 करोड़ रुपये से अधिक की आय होती थी। नई कल्याण प्रतिबद्धताओं के साथ – जिसमें महिलाओं के लिए नकद हस्तांतरण, बढ़ी हुई पेंशन और बिजली सब्सिडी शामिल है – 28,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आने की उम्मीद है, बिहार के वित्तीय स्वास्थ्य पर चिंताएं तेज हो गई हैं। पिछले साल राज्य का राजकोषीय घाटा उसके सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 9.2% था। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 18 फरवरी, 2026, 21:13 IST समाचार राजनीति ‘बिहार में घर पर शराब की डिलीवरी’: जीतन राम मांझी ने तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)बिहार शराबबंदी(टी)बिहार में शराब तस्करी(टी)जीतन राम मांझी शराब नीति(टी)नीतीश कुमार शराब कानून(टी)शराबबंदी प्रवर्तन बिहार(टी)शराब प्रवर्तन में भ्रष्टाचार बिहार(टी)बिहार उत्पाद शुल्क राजस्व हानि(टी)शराब गिरफ्तारी बिहार