Tuesday, 15 Sep 2026 | 10:27 PM

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यूपी के इंजीनियर और उसकी पत्नी को फांसी होगी:बच्चों का यौन शोषण करके वीडियो बनाकर बेचता था; जज बोले- मरते दम तक फंदे पर लटकाओ

यूपी के इंजीनियर और उसकी पत्नी को फांसी होगी:बच्चों का यौन शोषण करके वीडियो बनाकर बेचता था; जज बोले- मरते दम तक फंदे पर लटकाओ

उत्तर प्रदेश के बांदा कोर्ट ने शुक्रवार को बच्चों का यौन शोषण करने वाले पति-पत्नी को फांसी की सजा सुनाई। ये दोनों बच्चों का यौन शोषण करते थे और अश्लील वीडियो-फोटो बनाकर डार्क वेब के जरिए विदेशों में बेचते थे। फैसला देते समय पॉक्सो कोर्ट के जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने कहा- दोनों पति-पत्नी को मरते दम तक फंदे पर लटकाए रखा जाए। इससे पहले कोर्ट ने 18 फरवरी को दोनों को दोषी ठहराया था। पति रामभवन सिंचाई विभाग का इंजीनियर था, जबकि पत्नी दुर्गावती हाउस वाइफ थी। सीबीआई ने रामभवन को 18 नवंबर, 2020 को अरेस्ट किया था। वहीं, दुर्गावती को गवाहों पर दबाव डालकर समझौता कराने का दोषी पाया गया था। पति-पत्नी ने 50 से ज्यादा बच्चों का यौन शोषण किया बांदा का रहने वाला रामभवन (55) चित्रकूट में सिंचाई विभाग में जेई के पद पर तैनात था। वह चित्रकूट की SDM कॉलोनी में पत्नी दुर्गावती (50) के साथ रहता था। दोनों के कोई संतान नहीं थी। रामभवन अपनी पत्नी के साथ मिलकर गरीब घरों के बच्चों को लालच देकर अपने जाल में फंसाता था। दोनों मिलकर नाबालिगों का कुकर्म करते थे। बच्चों की उम्र 5 से 16 साल के बीच होती थी। बच्चों के साथ पत्नी संबंध बनाती थी, जबकि रामभवन उनसे कुकर्म करता था। इतना ही नहीं, दोनों लैपटॉप के कैमरे के जरिए बच्चों के अश्लील वीडियो भी बना लेते थे। इस दौरान अगर कोई बच्चा विरोध करता था, तो पति-पत्नी उसे मारते-पीटते थे। चिल्लाने पर उनका मुंह दबा देते थे। फिर पैसे या खिलौने, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट देने का लालच देकर उसकी जुबान बंद करा देते थे। एक बच्चे ने बताया था कि रामभवन मोबाइल फोन में गेम खेलने और यूट्यूब पर वीडियो दिखाने का लालच देकर अपने घर बुलाता था। पति-पत्नी कभी बांदा में किराए का मकान लेकर, तो कभी चित्रकूट में गंदा काम करते थे। इस दौरान पति-पत्नी ने 50 से ज्यादा बच्चों का यौन शोषण किया। इसकी शिकायत मिलने पर 31 अक्टूबर, 2020 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रामभवन के खिलाफ केस दर्ज किया। आरोप था कि वह बच्चों के अश्लील वीडियो/फोटो बनाकर डार्क वेब के जरिए अंतरराष्ट्रीय पेडोफाइल नेटवर्क तक पहुंचाता था। इसके बाद 17 नवंबर 2020 को सीबीआई ने रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के 88वें दिन दाखिल की थी चार्जशीट CBI ने गिरफ्तारी के 88वें दिन बाद बांदा कोर्ट में 700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट में मेडिकल रिपोर्ट और बच्चों के बयानों को आधार बनाया गया था। इस दौरान CBI की टीम ने 4 से 42 साल तक की उम्र के लोगों के बयान दर्ज किए। सभी का मेडिकल परीक्षण कराने के साथ डिजिटल एविडेंस को कनेक्ट किया गया था। वकील बोले- इंटरपोल से मिला था इनपुट पॉक्सो कोर्ट के अधिवक्ता कमल सिंह ने बताया- यह मामला अक्टूबर- 2020 का है। सीबीआई को इंटरपोल की तरफ से सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति 3 मोबाइल नंबरों से 7 से लेकर 18 साल के बच्चों के पोर्न वीडियो बनाकर इंटरनेट में अपलोड करता है। साथ ही एक पेन ड्राइव भी मिली थी। उसमें 34 बच्चों के वीडियो और 679 फोटो थीं। ये बच्चे बांदा, चित्रकूट समेत आसपास के जिलों के रहने वाले थे। उस नंबर को ट्रेस किया गया, तो पता चला कि रामभवन अपनी पत्नी के साथ यह गंदा काम कर रहा था। रामभवन सिंचाई विभाग में जेई के पद पर तैनात था। सीबीआई ने बांदा पुलिस के साथ मिलकर जेई और उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया था। बच्चों से जुड़ा मामला होने के चलते सीबीआई ने पॉक्सो कोर्ट में ट्रायल कराया। इस मामले में फरवरी 2021 में चार्जशीट लगाई। 74 गवाह CBI ने पॉक्सो कोर्ट में पेश किए। अधिवक्ता ने मांग करते हुए कहा- डीएम को एक पत्र लिखा जाए, जिसमें पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख रुपए की राशि देने का काम किया जाए। चीन-अमेरिका समेत 47 देशों को बेचे थे वीडियो वकील ने बताया कि इन दोनों ने ये गंदे वीडियो चीन, अमेरिका, ब्राजील और अफगानिस्तान समेत 47 देशों को बेचे थे। जो बच्चे दरिंदगी का शिकार हुए थे, उनका इलाज दिल्ली AIIMS में किया गया था। ———————- ये खबर भी पढ़ेंः- शाह मानहानि केस-राहुल गांधी का आरोपों से इनकार, कहा- राजनीतिक साजिश में फंसाया गृह मंत्री अमित शाह पर टिप्पणी के मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी शुक्रवार को यूपी में सुल्तानपुर की MP/MLA कोर्ट में पेश हुए। उनके वकील के मुताबिक, राहुल ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह केस राजनीतिक दुर्भावना के तहत दर्ज कराया गया है। इसमें कोई ठोस आधार नहीं है। पढ़ें पूरी खबर…

मूवी रिव्यू – ‘शतक’:सौ साल की विचारधारा पर बनी फिल्म, क्या इतिहास के कठिन सवालों का जवाब देती है या सिर्फ एक पक्ष दिखाती है?

मूवी रिव्यू – ‘शतक’:सौ साल की विचारधारा पर बनी फिल्म, क्या इतिहास के कठिन सवालों का जवाब देती है या सिर्फ एक पक्ष दिखाती है?

‘शतक: संघ के 100 वर्ष’ एक ऐसी फिल्म है जो एक लंबे वैचारिक और ऐतिहासिक सफर को स्क्रीन पर समेटने की कोशिश करती है। निर्देशक आशीष मॉल ने 100 साल की कहानी को सीमित समय में पेश करने का जिम्मा उठाया है। फिल्म की टोन गंभीर और संतुलित रखने की कोशिश दिखाई देती है, लेकिन इतना बड़ा विषय अपने साथ चुनौतियां भी लेकर आता है। फिल्म की कहानी फिल्म डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के शुरुआती जीवन से शुरू होकर माधव सदाशिव गोलवलकर के दौर तक पहुंचती है। कहानी RSS की स्थापना, उसके विस्तार और अलग-अलग ऐतिहासिक घटनाओं में उसकी भूमिका को दिखाती है। हालांकि, नैरेटिव एक खास दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ता है। कुछ विवादित पहलुओं को बहुत हल्के ढंग से छुआ गया है। महात्मा गांधी की हत्या का जिक्र आता है, लेकिन हत्यारे का नाम नहीं लिया जाता। गांधी जी की हत्या के बाद लगे प्रतिबंध जैसे अहम ऐतिहासिक मोड़ों को भी संक्षेप में दिखाकर आगे बढ़ जाया जाता है, जिससे जटिल बहसों की गहराई सामने नहीं आ पाती। कई बड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम तेज रफ्तार में गुजरते हैं, इसलिए फिल्म जानकारी ज्यादा देती है, भावनात्मक ठहराव कम महसूस होता है। फिल्म में अभिनय कलाकारों ने संयमित और गंभीर अभिनय किया है। हेडगेवार और गोलवलकर के किरदार प्रभावशाली लगते हैं और फिल्म की टोन के अनुरूप रहते हैं। ओवरड्रामैटिक अंदाज से बचना फिल्म की ताकत है। फिर भी, तेज गति के कारण किरदारों का मानवीय पक्ष सीमित रह जाता है। कई जगह पात्र विचारों के प्रतिनिधि ज्यादा लगते हैं, इंसान कम। फिल्म का निर्देशन और टेक्निकल पहलू आशीष मॉल का निर्देशन नियंत्रित और साफ है। फिल्म उद्देश्य से भटकती नहीं। CGI और VFX का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया गया है, जिससे कई दृश्य भव्य लगते हैं। लेकिन यही तकनीकी चमक कुछ जगह कृत्रिम महसूस होती है। सेट और लोकेशन जरूरत से ज्यादा सजे हुए लगते हैं, जिससे उस दौर की वास्तविकता का असर थोड़ा कम हो जाता है। लगातार संवाद और घटनाओं की तेजी फिल्म को कई बार डॉक्यूमेंट्री या लेक्चर जैसा टोन दे देती है। फिल्म का म्यूजिक बैकग्राउंड स्कोर कहानी के माहौल को सपोर्ट करता है और गंभीरता बनाए रखता है। संगीत ओवरपावर नहीं करता, लेकिन ऐसा कोई खास म्यूजिक मोमेंट नहीं जो लंबे समय तक याद रहे। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट ‘शतक’ एक ईमानदार और महत्वाकांक्षी प्रयास है, जो अपने विषय को सम्मान के साथ पेश करती है। लेकिन तेज रफ्तार और चुनिंदा दृष्टिकोण की वजह से फिल्म पूरी गहराई नहीं पकड़ पाती। इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए एक ठीकठाक अनुभव, मगर सिनेमाई असर के लिहाज से सीमित।

पंजाबी सिंगर को लाइव शो में फैन ने किया प्रपोज:पोस्टर पर लिखा- मेरी मम्मी नू पसंद है तू, सुनंदा शर्मा ने दिया मजेदार जवाब

पंजाबी सिंगर को लाइव शो में फैन ने किया प्रपोज:पोस्टर पर लिखा- मेरी मम्मी नू पसंद है तू, सुनंदा शर्मा ने दिया मजेदार जवाब

पंजाबी सिंगर सुनंदा शर्मा को लाइव शो के दौरान एक फैन ने प्रपोज किया। भीड़ में खड़े फैन ने दिल के आकार वाले पोस्टर पर लिखा था-“मेरी मम्मी नू पसंद है तू (मेरी मम्मी को तुम पसंद हो)। इस पर सुनंदा ने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया- पर मेरी मम्मी नू भी तां पसंद आने चाहिदे ओ (लेकिन मेरी मम्मी को भी तो तुम पसंद आने चाहिए)। सुनंदा ने फैन को स्टेज पर बुलाया, गले लगाया और उसके साथ डांस भी किया। इस खास पल का वीडियो खुद सिंगर ने सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसे फैंस खूब पसंद कर रहे हैं। 17 फरवरी को जयपुर में पूर्णिमा ग्रुप के वार्षिक खेल एवं सांस्कृतिक उत्सव ‘आरोहण 2026’ के दौरान यह मोमेंट देखने को मिला। अब पढ़िए वीडियो में क्या दिख रहा… 24 घंटे में 12 लाख से ज्यादा लाइक्स सुनंदा ने बुधवार को इस पल को अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया। पोस्ट के कैप्शन में लिखा— आई लव यू बादशाहो, यू गाइस आर माय स्ट्रेंथ। कंसर्ट्स में पूरी रौनक लगी रहती है। इस वीडियो को 24 घंटे के अंदर 1.2 मिलियन से ज्यादा लाइक्स, 4800 से अधिक कमेंट्स और लगभग 48 हजार लोगों ने शेयर किया । फैंस बोले- दीदी हमारा नंबर कब आएगा वीडियो इतना वायरल हुआ कि फैंस ने अपनी स्टोरी पर इसे शेयर करते हुए लिखना शुरू कर दिया सुनंदा दीदी हमारा नंबर कब आएगा। सुनंदा ने भी दरियादिली दिखाते हुए कई फैंस की स्टोरीज को री-शेयर किया और मजेदार जवाब देते हुए लिखा- हाहा..आ जाओ अगले शो में। सिंगर ने लिखा- आ जाओ कल वाले शो में इस बीच फैन ने सुनंदा के स्टाइल की हूबहू नकल उतारते हुए वीडियो बनाकर पोस्ट कर दिया। सुनंदा ने उस फैन को भी निराश नहीं किया और वीडियो शेयर करते हुए लिखा आ जाओ कल वाले शो में।

बजट सत्र युद्धक्षेत्र: सरकार के अप्रभावित रहने पर विपक्षी एकता को परीक्षा का सामना करना पड़ा | राजनीति समाचार

Left: US President Donald Trump; Right: Iran's Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei (Credits: Reuters)

आखरी अपडेट:19 फरवरी, 2026, 22:16 IST सिर्फ गैर-कांग्रेसी पार्टियाँ ही नहीं; कांग्रेस के कुछ निलंबित सांसद भी असहयोग की रणनीति से चिंतित हैं दोनों पक्ष इस बात पर अड़े हैं कि वे सही रास्ते पर हैं और उन्हें लोगों का समर्थन प्राप्त है। फ़ाइल छवि बजट सत्र का पहला भाग समाप्त हुए लगभग एक सप्ताह हो गया है, जो हाल के दिनों के सबसे विवादास्पद सत्रों में से एक है। आठ सांसदों को निलंबित कर दिया गया, अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया और विपक्ष के नेता राहुल गांधी की सदस्यता छीनने के लिए एक ठोस प्रस्ताव पेश किया गया। सत्र में एक अभूतपूर्व स्थिति भी देखी गई जहां महिला सांसदों पर भारत के प्रधान मंत्री को नुकसान पहुंचाने की योजना बनाने का आरोप लगाया गया। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि सरकार और विपक्ष के बीच शिष्टाचार और संवाद का टूटना लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है। चूंकि यह आम तौर पर स्वीकार किया जाता है कि सदन चलाने की जिम्मेदारी सरकार की होती है, विश्लेषकों ने सुझाव दिया है कि दूसरी छमाही में, सरकारी प्रबंधकों को विपक्ष के साथ पुल बनाने के लिए काम करना चाहिए। हालाँकि, राजनीतिक नेताओं के साथ बातचीत से दूसरी छमाही में रुख और सख्त होने का संकेत मिलता है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में सीएनएन-न्यूज18 को बताया, “हमने काफी कुछ किया है। जो कुछ हो रहा है उसके लिए एक व्यक्ति का जिद्दी व्यवहार जिम्मेदार है।” विपक्ष की एक मांग सांसदों का निलंबन रद्द करने की थी. लेकिन सरकारी सदन प्रबंधकों का सुझाव है कि, निलंबन रद्द करना तो दूर, दूसरी छमाही में और अधिक सांसदों को निलंबित किया जा सकता है, खासकर वे जो अध्यक्ष के कक्ष में गए और फिर लोकसभा में प्रधान मंत्री को रोकने का प्रयास किया। आगे के निलंबन से विभाजन और गहरा हो सकता है, लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार चिंतित नहीं है। सत्ता पक्ष का आकलन यह है कि गैर-कांग्रेसी विपक्षी दल जैसे द्रमुक, टीएमसी और यहां तक ​​कि वामपंथी भी चाहेंगे कि सदन चले, क्योंकि बंगाल, तमिलनाडु और केरल में चुनावों से पहले, राज्य-विशिष्ट मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए संसदीय मंच का उपयोग करने का यह उनका आखिरी मौका होगा। स्पीकर के खिलाफ अविश्वास के नोटिस पर हस्ताक्षर न करके टीएमसी पहले ही रैंक तोड़ चुकी है। अखिलेश यादव ने भी हस्ताक्षर नहीं किए, हालांकि उनकी पार्टी के सहयोगियों ने हस्ताक्षर किए. अविश्वास प्रस्ताव पर पहले दिन ही चर्चा हो सकती है, क्योंकि सरकार विपक्ष के अंदर फूट को उजागर करना चाहती है। सिर्फ गैर-कांग्रेसी पार्टियाँ ही नहीं; कांग्रेस के कुछ निलंबित सांसद भी असहयोग की रणनीति से चिंतित हैं. निरंतर निलंबन का मतलब है तारांकित या अतारांकित प्रश्न पूछने का कोई मौका नहीं, उपस्थिति का कोई रिकॉर्ड नहीं, और अपने चुनाव क्षेत्र के मुद्दों को उठाने का कोई अवसर नहीं। हालाँकि, वरिष्ठ कांग्रेस नेतृत्व को लगता है कि वे 1) चीनी आक्रामकता के सामने आत्मसमर्पण और 2) ट्रम्प प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण की धारणा को उजागर करके सरकार को रक्षात्मक स्थिति में लाने में कामयाब रहे हैं। दोनों पक्ष इस बात पर अड़े हैं कि वे सही रास्ते पर हैं और उन्हें लोगों का समर्थन प्राप्त है। लेकिन जैसे-जैसे संसदीय चर्चाएँ, वाद-विवाद और बुनियादी सभ्यता प्रभावित होती है, “हम लोग” केवल यह देख सकते हैं कि संसद की लोकतांत्रिक परंपराएँ किसी अखाड़े में कुश्ती मैच जैसी किसी चीज़ को रास्ता देती हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 19 फरवरी, 2026, 22:16 IST समाचार राजनीति बजट सत्र युद्धक्षेत्र: सरकार के अप्रभावित रहने पर विपक्षी एकता को परीक्षा का सामना करना पड़ेगा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें

शिवाजी जयंती पर ‘राजा शिवाजी’ का पहला पोस्टर जारी:कंधों पर कवच और चेहरे पर दृढ़ संकल्प के साथ नजर आए रितेश देशमुख

शिवाजी जयंती पर ‘राजा शिवाजी’ का पहला पोस्टर जारी:कंधों पर कवच और चेहरे पर दृढ़ संकल्प के साथ नजर आए रितेश देशमुख

छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती के मौके पर ऐतिहासिक सिनेमा प्रेमियों के लिए बड़ी घोषणा हुई है। जियो स्टूडियोज और मुंबई फिल्म कंपनी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘राजा शिवाजी’ का पहला पोस्टर गुरुवार को जारी कर दिया गया। फिल्म का निर्देशन और मुख्य भूमिका रितेश विलासराव देशमुख निभा रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्टर शेयर करते हुए इसे शिवाजी जयंती को समर्पित बताया। पोस्टर में रितेश देशमुख छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रभावशाली अवतार में नजर आ रहे हैं। साइड प्रोफाइल में दिखाई दे रहे महाराज के हाथ में तलवार है, कंधों पर कवच और चेहरे पर दृढ़ संकल्प साफ झलकता है। मेकर्स ने विजुअल ट्रीटमेंट को भव्य और गंभीर रखा है, जो स्वराज्य की स्थापना से पहले के संघर्ष और शांति दोनों का संकेत देता है। ‘राजा शिवाजी’ को पैन-इंडिया स्तर पर बड़े पैमाने पर तैयार किया जा रहा है। यह फिल्म मराठी और हिंदी, दोनों भाषाओं में रिलीज होगी। संगीत की जिम्मेदारी मशहूर जोड़ी अजय-अतुल ने संभाली है, जबकि सिनेमैटोग्राफी अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संतोष सिवन कर रहे हैं। मेकर्स का दावा है कि फिल्म तकनीक और विजुअल स्केल के लिहाज से भव्य अनुभव देगी। कहानी सिर्फ एक योद्धा राजा की नहीं, बल्कि उस बेटे की है जिसने स्वराज्य का संकल्प लिया और बड़ी शक्तियों के सामने झुकने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना। फिल्म में शिवाजी महाराज के जीवन, उनके साहस, रणनीति और राष्ट्रगौरव की भावना को सिनेमाई अंदाज में प्रस्तुत किया जाएगा। फिल्म को ज्योति देशपांडे और जेनेलिया देशमुख ने प्रोड्यूस किया है। यह फिल्म 1 मई 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।मेकर्स का कहना है कि यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की कोशिश है। पोस्टर रिलीज के साथ ही दर्शकों में उत्साह बढ़ गया है और अब सभी को टीजर का इंतजार है।

टेक्सास में हनुमान जी की मूर्ति से ट्रम्प समर्थक नाराज:कहा- ये दिल्ली नहीं, पिछड़े देशों के लोग अमेरिका पर कब्जा कर रहे

टेक्सास में हनुमान जी की मूर्ति से ट्रम्प समर्थक नाराज:कहा- ये दिल्ली नहीं, पिछड़े देशों के लोग अमेरिका पर कब्जा कर रहे

अमेरिका के टेक्सास राज्य में हनुमान जी की मूर्ति पर ट्रम्प समर्थक नेता कार्लोस टुर्सियोस ने नाराजगी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया X पर लिखा कि यह इस्लामाबाद या नई दिल्ली नहीं है। यह शुगर लैंड, टेक्सास है। टुर्सियोस ने कहा कि पिछड़े देशों के प्रावासी धीरे-धीरे टेक्सास और अमेरिका पर कब्जा कर रहे हैं। यह अमेरिका की तीसरी सबसे बड़ी मूर्ति क्यों है? हमला रोकिए। बता दें कि हनुमान की 90 फीट ऊंची मूर्ति टेक्सास राज्य के ‘श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर’ में लगी है और इसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ कहा जाता है। टुर्सियोस पर नस्लभेदी सोच फैलाने का आरोप कई लोग सोशल मीडिया पर टुर्सियोस के इस बयान का विरोध कर रहे हैं। कुछने उन पर नस्लभेदी सोच फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि प्रवासी समुदाय और अलग-अलग धर्मों के लोगों ने अमेरिकी समाज को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है। कार्तिक गडा नाम के एक यूजर ने अमेरिका में बोली जाने वाली भाषाओं का चार्ट शेयर किया। उन्होंने लिखा कि अमेरिका में 4.1 करोड़ घरों में स्पेनिश बोली जाती है, जबकि भारतीय भाषाएं टॉप 10 में भी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि घर में बोली जाने वाली भाषा समाज में घुलने-मिलने का बड़ा संकेत है और भारतीय-अमेरिकी समुदाय काफी हद तक मुख्यधारा में शामिल हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि जब किसी भारतीय भाषा के बोलने वालों की संख्या स्पेनिश से ज्यादा हो जाएगी, तब यह देखा जाएगा कि कौन कितना घुला-मिला है। नूरी सुन्नाह नाम के एक यूजर ने लिखा कि यह मूर्ति करीब डेढ़ साल से वहीं है। मंदिर में आने वाले हिंदुओं को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है। अगर किसी को यह पसंद नहीं है, तो वह इसे नजरअंदाज कर सकता है। टेक्सास में भगवान हनुमान की 90 फीट ऊंची मूर्ति अमेरिका के टेक्सास राज्य के शुगर लैंड में मौजूद श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में भगवान हनुमान की 90 फीट ऊंची कांसे की मूर्ति है। इसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ कहा जाता है। यह भारत के बाहर हनुमानजी की सबसे ऊंची मूर्ति है। मूर्ति का वजन 90 टन है और इसे पांच धातुओं के मिश्रण से बनाया गया है। हनुमानजी को अभय मुद्रा में हाथ आगे करके और गदा के साथ दिखाया गया है। यह कमल के तख्त पर खड़ी है, जिसे हाथी की मूर्तियों से सजाया गया है। अमेरिका में यह तीसरी सबसे ऊंची मूर्ति है, जो स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी (151 फीट) और फ्लोरिडा की पेगासस एंड ड्रैगन (110 फीट) के बाद आती है। मूर्ति की स्थापना के लिए 15 से 18 अगस्त 2024 को तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा समारोह हुआ था जिसमें हजारों लोग शामिल हुए थे। ट्रम्प समर्थक नेता ने पिछले साल भी विवादित बयान दिया था यह पहली बार नहीं है जब ट्रम्प समर्थक नेता ने हनुमान जी की मूर्ति को लेकर इस तरह का बयान दिया हो। पिछले साल ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के नेता अलेक्जेंडर डंकन ने भगवान हनुमान की प्रतिमा पर विवादित बयान दिया था। उन्होंने इसे झूठे भगवान की झूठी प्रतिमा कहा था। डंकन ने X पर लिखा था- हम टेक्सास में एक झूठे हिंदू भगवान की झूठी मूर्ति क्यों लगने दे रहे हैं? हम एक ईसाई राष्ट्र हैं। कई अन्य संगठनों ने भी इसे धार्मिक आस्था पर हमला बताते हुए माफी की मांग की थी। अमेरिकी नागरिकों ने भी इसकी घोर निंदा की थी। भारतवंशियों के खिलाफ हेट क्राइम बढ़ा ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में भारतवंशियों के खिलाफ हेट क्राइम के मामले बढ़े हैं। बाइडेन कार्यकाल में दक्षिण एशियाई मूल के लोगों के खिलाफ ऑनलाइन नफरत व हिंसा सीमित रही। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2024 तक 46,000 ट्रोलिंग और 884 धमकियां दर्ज हुईं। लेकिन ट्रम्प के लौटते ही हालात बिगड़ गए। अक्टूबर 2025 तक ट्रोलिंग बढ़कर 88,000 तक पहुंची, यानी इसमें 91% की वृद्धि दर्ज की गई। दिसंबर में वीजा और माइग्रेंट मामले में ट्रम्प-मस्क-रामास्वामी बहस के बाद 76% धमकियां ‘नौकरियां छीनने’ से जुड़ी रहीं। ट्रम्प सरकार के H-1B वीजा फीस बढ़ाने और 104 भारतीयों को डिपोर्ट करने के फैसले ने माहौल भड़काया। कई शहरों में निशाने पर भारतीय समुदाय के लोग नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच अमेरिका के शहरों में भारतीय समुदाय को निशाना बनाते हुए हिंसक वारदातों की एक शृंखला सामने आई। फरवरी 2025 में वर्जीनिया में एक भारतीय-अमेरिकी कारोबारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मार्च 2025 में एक किराना स्टोर पर हुए हमले में पिता-पुत्री की जान चली गई। सितंबर 2025 में टेक्सास के डलास में दो छात्रों और श्रमिकों की हत्या कर दी गई। इसी महीने चंद्रमौली नागमल्लैया की सिर काटकर हत्या ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया। अक्टूबर 2025 में पेंसिल्वेनिया के पिट्सबर्ग में एक मोटेल पर गोलीबारी में भारतीय मूल के मालिक और कर्मचारियों को निशाना बनाया गया। वहीं ओहायो, इलिनॉय और इंडियाना राज्यों में छात्रों से हेट क्राइम के मामले सामने आए। ‘भारतीयों को देश से निकालो’ जैसे नारे बढ़ें रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ते नस्लभेद का यह ट्रेंड सिर्फ भारतीयों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई समुदाय को निशाना बना रहा है। इसमें धर्म, नागरिकता या जातीय पहचान का कोई फर्क नहीं किया जा रहा। रिपोर्ट में इसके चार प्रमुख कारण बताए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में प्रवासियों के खिलाफ जो वैश्विक नाराजगी बढ़ी है, वह इस नस्लभेदी ट्रेंड का पहला बड़ा कारण है। यह भावना दुनियाभर में उभर रही दक्षिणपंथी राजनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है। ट्रम्प की नीतियों से भारतीयों पर नस्लभेदी पोस्ट बढ़े H-1B पर अमेरिकी हैं गुस्सा अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर गुस्सा भी इस ट्रेंड को बढ़ा रहा है। दक्षिणपंथी समूहों का आरोप है कि भारतीय ‘कम योग्य’ होते हुए भी अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां छीन रहे हैं। इससे सोशल मीडिया पर ‘भारतीयों को देश से निकालो’ जैसे नारों में इजाफा हुआ। श्वेत वर्चस्ववाद अपने चरम पर भारतीयों के खिलाफ नस्लभेद एशियाई समुदायों के खिलाफ व्यापक भेदभाव का हिस्सा है। ट्रम्प की जीत के बाद श्वेत वर्चस्ववादी गतिविधियां चरम पर पहुंच जाती हैं। जबकि, चुनावी दौर में हेट क्राइम में करीब 80% की बढ़ोतरी देखी जाती है। ट्रेड डील पर तनाव का भी असर भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर तनाव से नफरत को हवा

विधानसभा चुनाव से पहले ‘द केरल स्टोरी 2’ पर राजनीति गरमाई: ‘लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश’ | राजनीति समाचार

विधानसभा चुनाव से पहले 'द केरल स्टोरी 2' पर राजनीति गरमाई: 'लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश' | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:19 फरवरी, 2026, 16:59 IST राजीव चन्द्रशेखर ने द केरल स्टोरी 2 का विरोध करने के लिए पिनाराई विजयन की आलोचना की और इसे पाखंड और चुनावी ध्यान भटकाने वाला बताया। विजयन ने एक्स से मुलाकात की और द केरल स्टोरी के सीक्वल की खबरों पर कड़ा विरोध जताया। (फ़ाइल फ़ोटो) केरल भाजपा प्रमुख राजीव चंद्रशेखर ने गुरुवार को राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की आगामी फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2’ पर उनकी “नफरत फैलाने वाली फिल्म” टिप्पणी को लेकर उन पर निशाना साधा और कहा कि वह विधानसभा चुनाव से पहले “लोगों का ध्यान भटकाने” का प्रयास कर रहे हैं। चन्द्रशेखर ने कहा कि विजयन के पास “मुख्यमंत्री के रूप में केवल 45 दिन और” हैं और उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी टिप्पणियों का उद्देश्य सरकार की “10 साल की विफलता” से ध्यान भटकाना है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने आगे विजयन के “पाखंड” को उजागर करते हुए कहा कि जब एक फिल्म रिलीज हुई जो भगवा खेमे के खिलाफ थी, तो विजयन ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के रूप में सराहा, लेकिन जब उनकी राजनीतिक सोच के खिलाफ एक फिल्म बनाई गई, तो यह अचानक एक समस्या बन गई। “पिनाराई विजयन के पास मुख्यमंत्री के रूप में 45 दिन और हैं, और वह जानते हैं कि 46वें दिन उन्हें अपना आवास बदलना होगा। जब एक फिल्म आई जो भाजपा के खिलाफ थी, तो हमने विरोध नहीं किया या कुछ नहीं कहा। उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला दिया। ऐसा कैसे हो सकता है कि जब कोई और उनकी राजनीतिक सोच के खिलाफ फिल्म बनाता है, तो यह अचानक एक समस्या बन जाती है? यह पाखंड है। यह मूल रूप से केरल के लोगों को उनकी 10 साल की विफलता से ध्यान भटकाने का एक प्रयास है।” समाचार एजेंसी एएनआई. #घड़ी | दिल्ली: ‘द केरल स्टोरी 2’ फिल्म पर केरल के सीएम पिनाराई विजयन के रुख के बारे में केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर का कहना है, “पिनाराई विजयन के पास मुख्यमंत्री के रूप में 45 दिन और हैं, और वह जानते हैं कि 46वें दिन उन्हें अपना आवास बदलना होगा…जब… pic.twitter.com/PGh75SICa2– एएनआई (@ANI) 19 फ़रवरी 2026 उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फिल्म निर्माताओं को फिल्में बनाने और दर्शकों को उन्हें देखने का अधिकार है। उन्होंने कहा, “किसी ने आपको संरक्षक नियुक्त नहीं किया है। आपको ऐसा व्यवहार करने की कोई आवश्यकता नहीं है कि आप किसी समुदाय के रक्षक हैं। आज हर भारतीय, हर मलयाली को समान मौलिक अधिकार दिए गए हैं। लोगों को मूर्ख बनाना बंद करें। यह फिल्म इसलिए दिखाई जाएगी क्योंकि जितना आपको फिल्म देखने का अधिकार है, उतना ही मुझे भी फिल्म देखने का अधिकार है। जैसे किसी भी निर्देशक को फिल्म बनाने का अधिकार है, वैसे ही इस निर्देशक को भी फिल्म बनाने का अधिकार है।” चंद्रशेखर ने आगे कहा कि अगर फिल्म में कुछ भी गैरकानूनी है तो लोगों को धमकाने के बजाय मामले को अदालत में ले जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर आपको इससे कोई समस्या है, और अगर फिल्म में कुछ गैरकानूनी है, तो अदालत जाएं। लेकिन लोगों को धमकाने की कोशिश न करें। लोगों में डर पैदा करने के लिए अपने मुख्यमंत्री के पद का इस्तेमाल करने की कोशिश न करें, जिसे हम अनुमति नहीं देंगे।” विजयन ने क्या कहा? इससे पहले दिन में, विजयन ने एक्स से मुलाकात की और द केरल स्टोरी के सीक्वल की रिपोर्टों पर कड़ा विरोध व्यक्त किया। उन्होंने इसे “नफरत फैलाने वाली फिल्म” बताया और कहा कि इसका सीक्वल राज्य में “सांप्रदायिक कलह” भड़काने का एक और प्रयास होगा। “नफरत फैलाने वाली फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ के सीक्वल की रिलीज से संबंधित रिपोर्टों को अत्यंत गंभीरता से देखा जाना चाहिए। पहले भाग के सांप्रदायिक एजेंडे और ज़बरदस्त झूठ को देखने के बाद, केरल एक बार फिर हमारे धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को अवमानना ​​​​के साथ बदनाम करने के इस प्रयास को खारिज कर देगा।” विजयन ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा। नफरत फैलाने वाली फिल्म ‘द केरला स्टोरी’ के सीक्वल की रिलीज से जुड़ी खबरों को बेहद गंभीरता से देखा जाना चाहिए। पहले भाग के सांप्रदायिक एजेंडे और ज़बरदस्त झूठ को पहले ही देख लेने के बाद, केरल एक बार फिर हमारे धर्मनिरपेक्ष को बदनाम करने के इस प्रयास को अस्वीकार कर देगा…- पिनाराई विजयन (@pinarayivijayan) 19 फ़रवरी 2026 मामला पहुंचा हाई कोर्ट इस बीच, फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर एक याचिका के बाद केरल उच्च न्यायालय ने गुरुवार को सूचना और प्रसारण मंत्रालय, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड और फिल्म “द केरल स्टोरी 2 – गोज़ बियॉन्ड” के निर्माता को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता, श्रीदेव नंबूदिरी, जो पेशे से जीवविज्ञानी हैं, ने आरोप लगाया कि फिल्म के टीज़र ने “उनके विवेक को झकझोर दिया”, क्योंकि यह केरल को खराब रोशनी में दिखाता है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि हालांकि फिल्म के टीज़र में अन्य राज्यों की कहानियां शामिल हैं, लेकिन शीर्षक से यह आभास होता है कि घटनाएं, चाहे काल्पनिक हों या वास्तविक, विशेष रूप से केरल में घटित हो रही हैं। ‘द केरल स्टोरी 2’ के निर्माताओं ने हाल ही में सीक्वल का ट्रेलर जारी किया, जिसमें दिखाया गया कि कैसे हिंदू महिलाओं को प्यार के नाम पर इस्लामिक पुरुषों ने फंसाया था। उनके समानांतर जीवन ने दिखाया कि कैसे रोमांस और विद्रोह नियंत्रण और चुप्पी में बदल जाते हैं, प्यार एक ऐसे हथियार में बदल जाता है जो स्वतंत्रता को नष्ट कर देता है। फिल्म को अमरनाथ झा और विपुल अमृतलाल शाह ने लिखा है, जबकि इसका निर्देशन कामाख्या नारायण सिंह ने किया है। यह फिल्म 27 फरवरी को सिनेमाघरों में आएगी। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : तिरुवनंतपुरम, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 19 फरवरी, 2026, 16:59 IST समाचार राजनीति विधानसभा चुनाव से पहले ‘द केरल स्टोरी 2’ पर राजनीति गरमाई: ‘लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश’ अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग

फुल स्टॉप जरूरी, पर प्यार को कॉमा दें:कैमरे के सामने झूठ नहीं चलता, मृणाल और सिद्धांत ने जिंदगी, जजमेंट पर रखी अपनी राय

फुल स्टॉप जरूरी, पर प्यार को कॉमा दें:कैमरे के सामने झूठ नहीं चलता, मृणाल और सिद्धांत ने जिंदगी, जजमेंट पर रखी अपनी राय

मृणाल ठाकुर और सिद्धांत चतुर्वेदी की अपकमिंग रोमांटिक ड्रामा फिल्म ‘दो दीवाने शहर में’ कल यानी कि 20 फरवरी 2026 को रिलीज होने वाली है। मृणाल और सिद्धांत ने हाल ही में दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। मृणाल जहां खुद से प्यार करना, धीमी जिंदगी और भावनात्मक संतुलन की बात करती हैं, वहीं सिद्धांत इंडस्ट्री में जजमेंट, भाषा के कॉम्प्लेक्स और अपनी जड़ों पर गर्व का खुलकर जिक्र किया। पेश है बातचीत के कुछ प्रमुख अंश.. सवाल: मृणाल, इस फिल्म से पहले आप ब्रेकअप की स्थिति में थीं। उस दौर को आप कैसे देखती हैं? जवाब / मृणाल: मेरे लिए वह वही समय और वही मुकाम था, जब यह चीज मेरी जिंदगी में होनी थी। मुझे लगता है कि मेरे भीतर बहुत सारी जटिलताएं, असुरक्षाएं और डर थे। लेकिन आज उन्हीं कमजोरियों को मैंने अपनी ताकत बना लिया है। सवाल: आपने अपनी भाषा और एक्सेंट को लेकर भी असुरक्षा की बात की थी। आज उस डर को कैसे देखती हैं? जवाब / मृणाल:शुरुआत में मुझे बहुत डर लगता था कि अगर मैं हिंदी या अंग्रेजी में बात करूंगी, तो मेरी मराठी एक्सेंट सामने आ जाएगी। लेकिन आज जब मैं मराठी में बात करती हूं, तो वही लोग उसे पसंद करते हैं और बहुत प्यार मिलता है। यह मेरे लिए बहुत बड़ा आत्मविश्वास है। सवाल: इस फिल्म ने आपको जीवन को किस तरह देखने का नजरिया दिया? जवाब / मृणाल: इस फिल्म ने मुझे सिखाया कि जैसे हैं, वैसे ही रहना सबसे जरूरी है। आप से बेहतर आप कोई और नहीं हो सकता। यह एक यात्रा है, एक आत्म-खोज है। मैंने इस फिल्म को एक एक्ट्रेस के तौर पर इसलिए चुना क्योंकि इसकी कहानी अलग और साहसी थी। लेकिन कब यह फिल्म मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गई, मुझे पता ही नहीं चला। सवाल: आज की तेज रफ्तार जिंदगी पर यह फिल्म क्या सवाल उठाती है? जवाब / मृणाल: आज हम हर वक्त जल्दी में रहते हैं। खाना खाते समय भी मोबाइल देखते हैं। सुबह क्या होती है, यह हम भूल चुके हैं। यह फिल्म हमें सिखाती है कि कभी-कभी रुकना जरूरी है, खुद को समझना जरूरी है। अपनी कमजोरियों, अपनी ताकतों और अपने लोगों से प्यार करना जरूरी है। सवाल: सिद्धांत, शूटिंग के दौरान आप निजी तौर पर मुश्किल दौर से गुजर रहे थे। उस अनुभव ने आपके अभिनय को कैसे प्रभावित किया? जवाब / सिद्धांत: जो भी मेरे दिल में चल रहा था, मैंने उसे पर्दे पर उतार दिया है। जब दर्शक फिल्म देखेंगे, तो उन्हें वह महसूस होगा। मैं हमेशा कोशिश करता हूं कि अपने निजी अनुभवों को अपने काम में सच्चाई के साथ डाल सकूं, क्योंकि कैमरे के सामने आप झूठ नहीं बोल सकते। सवाल : क्या वह निजी संघर्ष आपके लिए नुकसानदायक था या मददगार? जवाब / सिद्धांत: इस फिल्म के दौरान मेरी जिंदगी में कुछ चल रहा था, दुर्भाग्य से भी और सौभाग्य से भी। लेकिन मुझे लगता है कि जिंदगी में जो होता है, किसी कारण से होता है। आज पूरी टीम फिल्म से खुश है और मुझे संतोष है कि जो भी दर्द था, वह सही जगह इस्तेमाल हुआ। सवाल: मृणाल, किसी किरदार की तैयारी आप किस तरह करती हैं? जवाब / मृणाल: मेरे लिए तैयारी बहुत आंतरिक होती है। मैं ज्यादातर इंडस्ट्री से बाहर के लोगों से बातचीत करके प्रेरणा लेती हूं। चाहे वह ट्रेन में मिलने वाला कोई यात्री हो, फ्लाइट का सहयात्री हो, या रोजमर्रा की जिंदगी में मिलने वाले लोग, उनकी कहानियां मुझे बहुत कुछ सिखाती हैं। सवाल : रोशनी जैसे किरदार को गढ़ने में किन चीजों ने मदद की? जवाब / मृणाल: हर किरदार के पीछे कोई न कोई असली इंसान होता है। रोशनी कई चीजों का मेल है। जिसमें लेखक की सोच, निर्देशक का नजरिया और मेरी निजी समझ शामिल है। सबसे जरूरी बात यह है कि कलाकार को बहना आना चाहिए, फ्लो में रहना चाहिए और निर्देशक के विजन पर भरोसा करना चाहिए। सवाल: शशांक का किरदार आपके असली जीवन से कितना मेल खाता है? जवाब/ सिद्धांत: बहुत ज्यादा नहीं। अनुभव मिलते-जुलते हो सकते हैं, लेकिन हर इंसान उन्हें अलग तरह से जीता है। मैं जानबूझकर ऐसे किरदार चुनता हूं जो मुझसे काफी अलग हों। अपनी जिंदगी तो मैं जी ही रहा हूं, मुझे दूसरों की जिंदगी को करीब से देखने में दिलचस्पी है। यही मेरी जिज्ञासा है। सवाल : आपके लिए अब तक का सबसे मुश्किल किरदार कौन सा रहा? जवाब / मृणाल: मेरे लिए सबसे मुश्किल किरदार ‘लव सोनिया’ का रहा है। वह मेरी पहली फिल्म थी और मैंने बहुत गहरे अनुभव देखे। उस फिल्म ने मुझे अंदर से तोड़ा भी और आज जो मैं हूं, उसे गढ़ा भी। उस किरदार से निकलना आसान नहीं था। सवाल : सिद्धांत, आपके लिए सबसे कठिन किरदार कौन सा रहा? जवाब / सिद्धांत: मेरे लिए ‘धड़क’ सबसे मुश्किल रही। ट्रैजिक किरदार आपके साथ रह जाते हैं। उस किरदार से निकलने में मुझे लगभग एक साल लग गया। उस दौरान मैं बहुत गुस्से में रहता था, लेकिन एक हल्की और सकारात्मक फिल्म ने मुझे उस अंधेरे से बाहर निकाला। सवाल: इंडस्ट्री में भाषा, पहनावे और पहचान को लेकर होने वाले जजमेंट को आप कैसे देखते हैं? जवाब / सिद्धांत: मुझे बचपन में महंगे कपड़े न पहनने पर चिढ़ाया गया, लेकिन मेरे माता-पिता ने सिखाया कि पहचान काम से बनती है, ब्रांड से नहीं। इंडस्ट्री में कई जगह टैलेंट से ज्यादा भाषा, एक्सेंट और पहनावे को महत्व दिया जाता है, लेकिन हमें अपनी जड़ों और अपनी भाषाओं पर गर्व होना चाहिए। सवाल : सोशल मीडिया की अफवाहों और खबरों को आप कैसे संभालती हैं? जवाब / मृणाल: मैं ध्यान नहीं देती। अगर मुझे कुछ कहना होगा, तो मैं खुद अपने सोशल मीडिया पर कहूंगी। मैं चाहती हूं कि मुझे मेरे काम के लिए जाना जाए. एक ऐसे एक्ट्रेस के रूप में जिसने अलग और मुश्किल रास्ते चुने। सवाल: इस फिल्म में एक संवाद है कि कुछ रिश्तों को फुल स्टॉप लगा देना चाहिए। कब पता चलता है? जवाब / मृणाल : किसी को नहीं पता। जब प्यार में चीजें बहुत बिगड़ जाएं, तो फुल स्टॉप जरूरी होता है। लेकिन अगर दोनों मिलकर समस्याओं से निपट सकते हैं,

चीनी रोबोट विवाद के बाद प्रोफेसर को नौकरी की तलाश:लिंक्डइन पर लिखा ओपन टू वर्क; गलगोटिया यूनिवर्सिटी AI समिट से बाहर

चीनी रोबोट विवाद के बाद प्रोफेसर को नौकरी की तलाश:लिंक्डइन पर लिखा ओपन टू वर्क; गलगोटिया यूनिवर्सिटी AI समिट से बाहर

चाइनीज रोबोट को गलगोटिया यूनिवर्सिटी का इन्वेंशन बताने वाली प्रोफेसर नेहा सिंह अब नई नौकरी की तलाश में हैं। उन्होंने लिंक्डइन प्रोफाइल पर ‘ओपन टू वर्क’ का स्टेटस अपडेट कर दिया है। इस मामले के आने के बाद सरकार ने यूनिवर्सिटी को AI समिट से बाहर कर दिया था। वहीं यूनिवर्सिटी ने इस पूरे मामले के लिए प्रोफेसर को जिम्मेदार ठहराते हुए माफी मांगी है। यूनिवर्सिटी ने कहा, “हमारी एक प्रतिनिधि को सही जानकारी नहीं थी। वे कैमरे पर आने के उत्साह में गलत तथ्य दे गईं। उन्हें प्रेस से बात करने के लिए अधिकृत भी नहीं किया गया था।” आईटी सचिव बोले- गलत जानकारी बर्दाश्त नहीं विवाद पर बात करते हुए आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा, “हम चाहते हैं कि लोग एक्सपो में जो भी प्रदर्शित करें, उसमें उनका वास्तविक काम दिखे। हम नहीं चाहते कि ऐसे आयोजनों का इस्तेमाल किसी और तरीके से किया जाए। गलत जानकारी को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता।” जब उनसे पूछा गया कि क्या मंत्रालय ने पहले मॉडल्स की जांच नहीं की थी, तो उन्होंने कहा, “ये चीजें बिक्री के लिए नहीं थीं, जहां हमें सर्टिफिकेशन की जरूरत हो। जब कोई प्रोडक्ट का डेमो देता है, तो हम मानकर चलते हैं कि उन्हें पता है वे क्या कह रहे हैं। अगर हम प्रदर्शनी की हर चीज को सर्टिफाई करने लगेंगे, तो लोग कहेंगे कि हम इनोवेशन को रोक रहे हैं।” वीडियो वायरल होने से शुरू हुआ विवाद वीडियो में यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह कह रही हैं कि इस रोबोटिक डॉग का नाम ‘ओरियन’ है। इसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी के ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ ने तैयार किया है। उन्होंने ये भी कहा कि यूनिवर्सिटी AI के क्षेत्र में 350 करोड़ रुपए का निवेश कर रही है। इस वीडियो के सामने आने के बाद कई टेक एक्सपर्ट्स और यूजर्स ने दावा किया कि यह असल में चीनी कंपनी ‘यूनिट्री’ का ‘Go2’ मॉडल है, जो बाजार में 2-3 लाख रुपए में उपलब्ध है। वहीं एक अन्य वीडियो में यूनिवर्सिटी जिस ड्रोन को कैंपस में ‘शुरुआत से’ तैयार करने का दावा कर रही हैं, उसे यूजर्स ने ₹40 हजार वाला रेडीमेड ‘स्ट्राइककर V3 ARF’ मॉडल बताया है। यूनिवर्सिटी ने माना था, हमने नहीं बनाया ये डॉग वीडियो वायरल होने के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने कहा था- हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि गलगोटिया ने यह रोबोटिक डॉग नहीं बनाया है और न ही हमने कभी ऐसा दावा किया है। लेकिन हम ऐसे दिमाग तैयार कर रहे हैं जो जल्द ही भारत में ऐसी ही टेक्नोलॉजी को डिजाइन करेंगे, उनकी इंजीनियरिंग करेंगे और उन्हें यहीं बनाएंगे। नॉलेज बॉक्स: क्या है यूनिट्री Go2 रोबोटिक डॉग यूनिट्री Go2 चीन की यूनिट्री रोबोटिक्स कंपनी द्वारा बनाया गया एक एआई-पावर्ड रोबोटिक डॉग है, जो अपनी फुर्ती और एडवांस सेंसर्स के लिए दुनियाभर में मशहूर है। इसमें 4D LiDAR तकनीक का इस्तेमाल हुआ है, जिसकी मदद से यह सीढ़ियां चढ़ने, ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने और अपने रास्ते में आने वाली बाधाओं को पहचानता है। लगभग 2 से 3 लाख रुपए की कीमत वाला यह रोबोट वॉयस कमांड पर भी काम करता है और मुख्य रूप से तकनीकी रिसर्च और शिक्षा के क्षेत्र में इस्तेमाल किया जाता है। कैसे काम करती है यह तकनीक रोबोटिक डॉग बनाने में मैकेनिकल इंजीनियरिंग और सॉफ्टवेयर का गहरा तालमेल होता है: आर्टिफिशियल मांसपेशियां: इनके पैरों में सर्वो मोटर्स या एक्चुएटर्स लगे होते हैं, जो मांसपेशियों की तरह काम करते हैं। इससे रोबोट सीढ़ियां चढ़ने और कूदने में सक्षम होता है। लिडार (LiDAR) तकनीक: लेजर पल्स के जरिए ये रोबोट अपने आसपास का 3D मैप बना लेते हैं। इससे इन्हें पता चलता है कि सामने दीवार है या कोई और रुकावट। खुद का दिमाग: मशीन लर्निंग एल्गोरिदम की मदद से ये बिना किसी इंसान के बताए खुद फैसला ले सकते हैं कि किस रास्ते से जाना सुरक्षित होगा। 2011 में शुरू हुई थी गलगोटिया यूनिवर्सिटी ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी 2011 में शुरू हुई थी। ये यूनिवर्सिटी 20 अलग-अलग स्कूलों के जरिए डिप्लोमा से लेकर पीएचडी तक के 200 से ज्यादा कोर्स कराती हैं। सुनील गलगोटिया यूनिवर्सिटी के चांसलर और ध्रुव गलगोटिया CEO हैं। अब दिल्ली में चल रही AI समिट के बारे में जानें…

एक्स हसबेंड ने X वाइफ से लिया ऐसा बदला, सन्न रह गया पूरा शहर, चारों तरफ मची चीख-पुकार | hyderabad sunitha murdered case ex husband arrested revenge inside story domestic violence canada visa passport suspension

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Last Updated:February 19, 2026, 13:28 IST हैदराबाद के वनस्थलीपुरम में एक पूर्व पति ने अपनी एक्स वाइफ के साथ जो सलूक किया, उसकी चर्चा सोशल मीडिया पर शुरू हो गई है. एक्स हसबेंड ने अपनी ही एक्स वाइफ को चाकू से गोदकर हत्या कर दी. पूर्व पत्नी ने पूर्व पति पर घरेलू हिंसा का केस क रखा था. इस कारण आरोपी का पासपोर्ट जब्त हो गया था और वह कनाडा नहीं जा पा रहा था. इसी रंजिश में उसने खौफनाक वारदात को अंजाम दिया. हैदराबाद पुलिस ने आरोपी को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया है. हैदराबाद में एक्स पति ने एक्स वाइफ से लिया खौफनाक बदला. हैदरबाद. तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के वनस्थलीपुरम इलाके में बुधवार को दिन-दहाड़े एक ऐसी घटना घटी है, जिससे हर कोई हैरान और परेशान हो गया. एक पति-पत्नी की तलाक के बाद जो कहानी सामने आई, वह हर किसी को होश उड़ा रहा है. एक आईटी इंजीनियर ने पारिवारिक कलह और कोर्ट कचहरी के चक्कर से तंग आकर अपराधी बन गया. सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपनी एक्स वाइफ के घर में घुसकर मौत के घाट उतार दिया. हत्या के बाद बाथरूम में बंद हो गया. पुलिस ने आरोपी शख्स को गिरफ्तार कर लिया है. मृतक की पहचान सुनीता के रूप में हुई है और आरोपी शख्स का नाम महेश है. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर वह शख्स क्यों इस घटना को अंजाम दिया? क्या मां की मौत ने शख्स को अंदर से तोड़ दिया था? क्या यह हत्या केवल निजी दुश्मनी का नतीजा था या फिर इसके पीछे करियर की बर्बादी, कानूनी पचड़े और परिवार की मौत का बदला लेने की एक लंबी और सनकी दास्तां छिपी थी? कहानी शुरू होती है साल 2022 में जब आरोपी और 29 वर्षीय पीड़िता की शादी हुई थी. दोनों ही आईटी क्षेत्र में काम करते थे और एक खुशहाल भविष्य का सपना देख रहे थे. शादी के बाद पति कनाडा चला गया और कुछ समय बाद पत्नी भी उसके पास पहुंच गई. लेकिन सात समंदर पार जाने के बाद दोनों के बीच दूरियां कम होने के बजाय बढ़ने लगीं. आपसी विवाद इतना बढ़ गया कि महिला वापस भारत लौट आई और उसने महाराष्ट्र में अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस दर्ज करा दिया. सनक की वजह- पासपोर्ट जब्त और मां की मौत साल 2024 में दोनों का आधिकारिक रूप से तलाक हो गया. महिला ने अपनी जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाते हुए अप्रैल 2025 में दूसरी शादी कर ली. वहीं दूसरी ओर आरोपी पति की मुश्किलें बढ़ती जा रही थीं. मार्च 2025 में उसकी मां का निधन हो गया, जिसके बाद वह भारत आया. लेकिन घरेलू हिंसा के केस के कारण उसके खिलाफ लुक-आउट सर्कुलर जारी हो चुका था. इस वजह से उसका पासपोर्ट निलंबित कर दिया गया और वह वापस कनाडा नहीं जा सका. 30-year-old woman allegedly stabbed multiple times by her ex-husband