बेंगलुरु में प्रेग्नेंट बिल्ली क्यों हुई किडनैप? मामला खुला तो पुलिस भी रह गई हैरान, 9 लोगों पर FIR दर्ज

Last Updated:February 09, 2026, 17:58 IST बेंगलुरु के HAL इलाके में एक गर्भवती बिल्ली की किडनैपिंग का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. अपार्टमेंट मालिक और सुरक्षाकर्मियों सहित 9 लोगों ने बिल्ली को प्लास्टिक में लपेटकर ऑटो से अज्ञात स्थान पर फिंकवा दिया. निवासियों का आरोप था कि वह दूध चुराती और वाहनों को नुकसान पहुंचाती थी. पुलिस ने पशु क्रूरता अधिनियम के तहत FIR दर्ज की है. अब आरोपी बिल्ली को सुरक्षित एडॉप्शन सेंटर सौंपने पर सहमत हुए हैं. पुलिस मामले की जांच कर रही है. बेंगलुरु के पॉश इलाके HAL से एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है जिसने पशु प्रेमियों और कानून व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है. एक गर्भवती बेजुबान बिल्ली जो वनश्री अपार्टमेंट्स की छतों और गलियारों में अपना सुरक्षित आशियाना तलाश रही थी, अचानक गायब हो गई. जब इस किडनैपिंग की परतें खुलीं तो पता चला कि यह किसी बाहरी अपराधी का काम नहीं बल्कि अपार्टमेंट के ही रसूखदार लोगों की सोची-समझी साजिश थी. प्लास्टिक में लपेटा, टोकरी में डाला और ले गएघटना की कहानी किसी थ्रिलर फिल्म जैसी है. अपार्टमेंट के कुछ निवासियों को बिल्ली का वहां रहना रास नहीं आ रहा था. आरोप है कि अपार्टमेंट मालिक, सिक्योरिटी मैनेजर और स्टाफ सहित कुल 9 लोगों ने मिलकर इस बेजुबान को हटाने का प्लान बनाया. FIR के अनुसार, गर्भवती बिल्ली को बेरहमी से एक प्लास्टिक कवर में लपेटा गया उसे एक टोकरी में बंद किया गया और गुपचुप तरीके से एक ऑटो-रिक्शा में लादकर अज्ञात स्थान पर फेंक दिया गया. इस क्रूरता का पता तब चला जब पशु प्रेमी और अपार्टमेंट निवासी हरीश ने बिल्ली को न पाकर शोर मचाया. बेजुबान की जान को खतरा देख उन्होंने तुरंत HAL पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ‘पशु क्रूरता निवारण अधिनियम’ के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है. क्यों बनी बिल्ली ‘दुश्मन’? जब पुलिस ने अपार्टमेंट के लोगों से पूछताछ की तो चौंकाने वाली वजहें सामने आईं. निवासियों का दावा था कि बिल्ली उनक वाहनों की सीटों को नुकसान पहुंचा रही थी. इतना ही नहीं, कुछ लोगों की शिकायत थी कि वह दूध की तलाश में अक्सर पड़ोस के घरों में घुस जाती थी. अपनी इन छोटी-छोटी परेशानियों के लिए उन्होंने एक गर्भवती जीव को मौत के मुंह में धकेलने जैसा कदम उठा लिया. पुलिस की कार्रवाईशुरुआत में बिल्ली का कोई सुराग नहीं मिल रहा था, जिससे उसकी हत्या की आशंका गहरा गई थी. हालांकि, पुलिस के बढ़ते दबाव के बाद अब मामला ‘बी रिपोर्ट’ (B-report) की ओर बढ़ा है. अपार्टमेंट के निवासियों ने अपनी गलती मानते हुए अब बिल्ली को वापस लाकर एक ‘एनिमल एडॉप्शन सेंटर’ को सौंपने पर सहमति जताई है ताकि उसकी सुरक्षा और आने वाले बच्चों की देखभाल सुनिश्चित हो सके. मामले के मुख्य अपडेट:· आरोपी: अपार्टमेंट मालिक और सुरक्षा कर्मचारियों सहित कुल 9 लोग. · जुर्म: प्लास्टिक में लपेटकर अवैध रूप से बिल्ली को किडनैप और रिलोकेट करना. · कानूनी धारा: पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (Prevention of Cruelty to Animals Act). · ताजा स्थिति: निवासियों ने बिल्ली को सुरक्षित एडॉप्शन सेंटर भेजने का वादा किया है. About the Author Sandeep Gupta पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें Location : Bangalore,Bangalore,Karnataka First Published : February 09, 2026, 17:58 IST
Fake IPS Officer Digital Arrest: delhi police crime branch | whatsapp video call | woman of 40 lakh arrested | व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर रोजाना हाजिरी, फर्जी IPS ने महिला से ऐसे हड़प लिए 40 लाख रुपये, अब हुआ गिरफ्तार

होमताजा खबरDelhi व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर रोजाना हाजिरी, फर्जी IPS ने महिला से हड़प लिए 40 लाख Last Updated:February 09, 2026, 13:54 IST Fake IPS Officer Digital Arrest: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम के एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है. आरोपियों ने एक महिला को फर्जी IPS बनकर 3 महीने तक कैद में रखा और उसके जीवन भर की जमा पूंजी 40 लाख रुपये ठग लिए. लेकिन मामला जब दिल्ली पुलिस के पास पहुंचा तो तहकीकात में आरोपियों के बैंक खातों का संबंध 100 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और 190 साइबर शिकायतों से पाया गया है. जानें कैसे दिल्ली पुलिस ने 100 करोड़ कमाने वाले इस गिरोह का भंडाफोड़ किया है. नई दिल्ली. देश में डिजिटल अरेस्ट की एक से बढ़कर एक घटनाएं सामने आ रही हैं. डिजिटल इंडिया के इस दौर में साइबर ठग अब आपके बैंक खाते के साथ-साथ अब आपके दिमाग पर भी कब्जा कर रहे हैं. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की साइबर सेल (Cyber Cell) ने एक ऐसे ही रूह कंपा देने वाले स्कैम का पर्दाफाश किया है, जिसकी कहानी सुनकर हिल जाएंगे आप. दिल्ली पुलिस ने दो आरोपियों अनीश और मनी सिंह को गिरफ्तार किया है. लेकिन दोनों ने किस तरह घर में रह रही एक अकेली महिला को जाल में फंसाया और कैसे उससे 40 लाख रुपये तीन महीने में उड़ा लिए इसकी कहानी जानकर हैरान हो जाएंगे. दिल्ली की एक हाउसवाइफ को 15 अक्टूबर 2025 को एक कॉल आई. फोन करने वाले ने खुद को आईपीएस राघव मित्तल साइबर सेल, मुंबई बताया. उसने महिला पर आरोप लगाया कि उसके आधार कार्ड का इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों में हुआ है. उस फर्जी आईपीएस ने महिला को इतना डरा दिया गया कि वह 12 दिसंबर 2025 तक यानी करीब 3 महीने तक अपने ही घर में डिजिटल कैद में रही. उसे आदेश दिया गया था कि वह किसी से बात न करे, वर्ना उसके इंजीनियर बेटे और पति को जेल भेज दिया जाएगा. ठग उसे रोजाना व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर हाजिरी देने और यह सुनिश्चित करने के लिए मजबूर करते थे कि वह चुप है. महिला से तीन महीने में 40 लाख उड़ाए डर के इस माहौल में महिला ने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई 40 लाख रुपये ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए. ठगों ने उसे यह तक विश्वास दिला दिया था कि उसके घर के बाहर पुलिस तैनात है और जरा सी गलती उसे तबाह कर देगी. हर पेमेंट के बाद उसे चैट और कॉल लॉग डिलीट करने का आदेश दिया जाता था ताकि कोई सबूत न बचे. 4 लेयर के फंड फ्लो ने खोला 100 करोड़ का राज जब इस घटना में महिला के 40 लाख लूट गए तो पति और बेटा को इसकी जानकारी दी. पति और बेटे को समझ में आ गया कि उनके साथ साइबर फ्रॉड हो गया है. महिला ने दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और पूरी कहानी बताई. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने इंस्पेक्टर संदीप सिंह और तकनीकी विशेषज्ञ हेड कांस्टेबल अक्षय कुमार की टीम ने इस जटिल मामले की कमान संभाली. महिला द्वारा डिलीट किए गए डेटा के बावजूद, टीम ने तकनीकी विश्लेषण के जरिए एक बैंक खाते का पता लगाया जो M/s Vrindakart Skyline Shoppers Private Limited के नाम पर था. इस गिरोह के खातों का विश्लेषण करने पर पता चला कि देशभर में इनके खिलाफ 190 साइबर शिकायतें दर्ज हैं और करीब 100 करोड़ रुपये का फ्रॉड इन खातों के जरिए किया गया है. आरोपी अनीश और मनी सिंह ‘वृंदाकार्ट’ जैसी शेल कंपनियां बनाकर पैसा रूट करते थे. ये दोनों आरोपी पहले भी फरीदाबाद पुलिस द्वारा इसी तरह के मामले में पकड़े जा चुके थे. एसीपी अनिल शर्मा की देखरेख में इंस्पेक्टर विनय कुमार, एसआई राकेश मलिक और अन्य जवानों की टीम ने दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में छापेमारी कर इन ठगों को दबोचा. इनके पास से फर्जी सिम कार्ड और जाली दस्तावेज बरामद हुए हैं. About the Author रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें Location : New Delhi,New Delhi,Delhi First Published : February 09, 2026, 13:54 IST
Peeragarhi flyover 3 death body | पीरागढ़ी फ्लाईओवर पर कार में 3 लाश, एक महिला संग 2 पुरुष कौन थे, सॉफ्ट ड्रिंक खोलेगा रहस्य, अब तक क्या पता चला? | Peeragarhi flyover 3 death body in car 1 woman 2 men who were those how they killed soft drink bottle mystery what police found

Peeragarhi Flyover Death Mystery: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रविवार को पीरागढ़ी फ्लाईओवर पर एक कार के अंदर तीन लोग मृत पाए गए. मृतकों की पहचान रंधीर, शिवनरेश और लक्ष्मी के रूप में हुई है. इनमें से एक वाहन का मालिक भी था. दोपहर बाद करीब 3:50 बजे PCR कॉल मिली, जिसमें बताया गया कि फ्लाईओवर की सर्विस लेन के पास एक कार में बैठे तीन लोग बेहोश पड़े हैं. दिल्ली पुलिस ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि बाहरी दिल्ली के पीरागढ़ी फ्लाईओवर पर दो पुरुष और एक महिला के शव मिले हैं. पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह खुद ही जान देने का मामला लगता है. बाहरी जिला के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने बताया कि मामले की जांच जारी है. डीसीपी सचिन शर्मा ने बताया कि हमें एक कार में तीन शव होने की सूचना मिली थी. उन्होंने बताया कि ऐसा नहीं लगता कि कोई जोर-जबरदस्ती हुई है. पुलिस अभी जांच कर रही है. पुलिस ने बताया कि शवों पर किसी प्रकार की चोट के स्पष्ट निशान नहीं हैं. इस घटना से जुड़ी हर डिटेल इस तरह से है -: घटना कहां हुई?दिल्ली के पश्चिमी इलाके में पीरागढ़ी फ्लाईओवर के पास एक कार में तीन शव मिलने से सनसनी फैल गई. यह कार सर्विस लेन के पास खड़ी थी. दिल्ली पुलिस को सूचना कैसे मिली?करीब 3:50 बजे PCR कॉल मिली कि कार में बैठे लोग प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं और बेहोश लग रहे हैं. मौके पर पहुंचने पर पुलिस ने क्या पाया?पुलिस ने कार खोलकर देखा तो अंदर तीनों लोग मृत मिले और वाहन में जहरीले पदार्थ की तेज गंध थी. कार से सॉफ्ट ड्रिंक का बोतल बरामद किया गया है, जिसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. क्या मृतकों की पहचान हुई है?मृतकों की पहचान 76 वर्षीय रंधीर सिंह, 47 वर्षीय शिव नरेश सिंह और 40 वर्षीय लक्ष्मी देवी के रूप में हुई है. मृतक कहां के रहने वाले थे?रंधीर सिंह और शिव नरेश सिंह बापरोला गांव के निवासी थे, जबकि लक्ष्मी देवी का पता अभी स्पष्ट नहीं है. कार में उनकी स्थिति कैसी थी?रंधीर सिंह ड्राइविंग सीट पर थे, जबकि शिव नरेश और लक्ष्मी देवी पीछे की सीट पर बैठे मिले. सभी शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है. रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वजहों का पता चल सकेगा. कार किसकी थी?पुलिस के अनुसार कार मृतकों में से एक की ही थी. क्या शरीर पर चोट के निशान थे?पुलिस ने बताया कि किसी भी शव पर बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं. मौके से क्या-क्या बरामद हुआ?कार से मोबाइल फोन, नकदी और महिला के पहने हुए गहने सुरक्षित मिले हैं. सॉफ्ट ड्रिंक का बोतल भी मिला है. क्या कोई संदिग्ध वस्तु मिली?फॉरेंसिक टीम को कार में एक सॉफ्ट ड्रिंक की बोतल मिली है, जिसे जांच के लिए भेजा गया है. पुलिस की शुरुआती जांच क्या कहती है?पुलिस की मानें तो प्राथमिक जांच में यह मामला सामूहिक आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है. हत्या की आशंका पर क्या कहा गया?फिलहाल जबरन कार्रवाई के कोई संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन सभी पहलुओं की जांच जारी है. परिजनों से संपर्क कैसे हुआ?दस्तावेजों के आधार पर पुलिस ने रंधीर सिंह के परिजनों से संपर्क किया और एक रिश्तेदार मौके पर पहुंचा. लक्ष्मी देवी का अन्य दो से क्या संबंध था?परिजन उनके संबंध के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके हैं. शवों का क्या किया गया है?तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. फिलहाल रिपोर्ट का इंतजार है, ताकि मौत की वजहों का पता चल सके. मौत के कारणों की पुष्टि कैसे होगी?पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही सही कारणों का पता चलेगा. पुलिस अधिकारियों ने क्या बयान दिया?डीसीपी सचिन शर्मा ने कहा कि मामला संदिग्ध नहीं लग रहा, लेकिन जांच जारी है. इलाके में क्या कदम उठाए गए?पुलिस ने घटनास्थल को घेर लिया और फॉरेंसिक टीम के साथ साक्ष्य जुटाए. क्या कोई लूटपाट या संघर्ष के संकेत मिले?नहीं, सभी कीमती सामान सुरक्षित मिले हैं और संघर्ष के कोई निशान नहीं पाए गए. आगे की कार्रवाई क्या होगी?फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तय करेगी.
passport rules if you live in ghaziabad and have a passport issued with a delhi address right wrong punishment jail | रहते हैं गाजियाबाद में और दिल्ली के पते पर बना है पासपोर्ट, तो अब जाएंगे जेल! शुरू होने जा रहा बड़ा अभियान

गाजियाबाद. हाल ही में गाजियाबाद में एक ही एड्रेस पर 22 पासपोर्ट बनने की खबर ने विदेश मंत्रालय को हैरान और परेशान कर दिया है. पिछले दिनों गाजियाबाद में एक बहुत बड़े पासपोर्ट फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ था, जिसमें एक ही पते और एक ही मोबाइल नंबर और फर्जी कागजों के दम पर 22 पासपोर्ट बनवा लिए गए. इस खेल में पोस्ट ऑफिस का पोस्टमैन भी शामिल था. दिल्ली पासपोर्ट ऑफिस की चिट्ठी के बाद जब गाजियाबाद पुलिस ने जांच शुरू की, परत दर परत राज खुलते चले गए. ऐसे में अब पासपोर्ट विभाग ने बड़ी तैयारी शुरू की है, जिसमें पासपोर्ट उसी एड्रेस पर बनेगा, जिस एड्रेस पर आवेदक का कम से कम एक स्थाई पता हो. अगर आप गाजियाबाद में रहते हैं दिल्ली में नौकरी या पढ़ाई के सिलसिले में पहले कभी रह रहे थे, तो अब आप दिल्ली के एड्रेस पर पासपोर्ट नहीं बना सकते. बीते कुछ सालों से आपको अपना पासपोर्ट बनवाने के लिए गांव या शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती है. विदेश मंत्रालय की Apply Anywhere in India योजना के तहत आप भारत के किसी भी कोने से पासपोर्ट के लिए आवेदन कर सकते हैं. लेकिन, इस सुविधा के साथ कुछ सख्त नियम भी जुड़े हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना आपको अपराधी बना सकता है. क्या गाजियाबाद का व्यक्ति दिल्ली में पासपोर्ट बनवा सकता है?जी हां, बिल्कुल! 2018 में शुरू हुई इस योजना के तहत अब क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (RPO) की सीमाएं खत्म हो गई हैं. आप कैसे पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) को चुन सकते हैं, कैसे होता है वेरिफिकेशन? जी आप बिल्कुल अपने पसंद का पोसपोर्ट सेवा केंद्र चुन सकते हैं. पुलिस वेरिफिकेशन आपके ‘वर्तमान पते’ (Current Address) पर ही होगा, जहां आप अभी रह रहे हैं. लेकिन बहुत लोग ये करते हैं कि वह रहते हैं गाजियाबाद में लेकिन दिल्ली के अपने पुराने पते पर पासपोर्ट बना लेते हैं. पुलिस वेरिफेकशन में अड़ोसी-पड़ोसी को बोले रखते हैं कि आए तो बता दीजिएगा कि मैं यही रहता हूं. बाद में पुलिस की मदद से पासपोर्ट तो बना लेते हैं, लेकिन जो गैरकानूनी है. पासपोर्ट बनाने के लिए क्या-क्या जरूरी दस्तावेज चाहिए? आपको दिल्ली में रहने का सबूत जैसे रेंट एग्रीमेंट, बिजली का बिल, बैंक पासबुक या कंपनी का लेटर देना होगा. भले ही आपके स्थायी पते के दस्तावेज बिहार के हों, लेकिन वर्तमान पता साबित करना अनिवार्य है. क्या पुराने पते पर पासपोर्ट बन सकता है?अक्सर लोग उस पते पर पासपोर्ट बनवाने की कोशिश करते हैं जहां वे पहले रहते थे लेकिन अब नहीं रहते. यह पूरी तरह गैर-कानूनी है. पासपोर्ट के नियमों के मुताबिक, आपको केवल उसी पते का जिक्र करना चाहिए जहां आप आवेदन के समय पिछले एक साल से रह रहे हैं. यदि पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान आप उस पते पर नहीं पाए जाते हैं, तो आपकी रिपोर्ट ‘Adverse’ लग जाएगी. इससे न केवल आपका पासपोर्ट आवेदन रद्द होगा, बल्कि आपको ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है. फर्जी एड्रेस पर पासपोर्ट बनाना कितना बड़ा जुर्मपासपोर्ट एक बेहद संवेदनशील दस्तावेज है. फर्जी पते या गलत जानकारी देना राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ माना जाता है. पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 12 कहता है कि अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देता है या तथ्यों को छुपाता है, तो उसे 2 साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं. यदि कोई गैर-भारतीय जैसे बांग्लादेशी या रोहिंग्या फर्जी पते पर भारतीय पासपोर्ट बनवाता है, तो सजा 1 साल से 5 साल तक की जेल और 50,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. 2026 के नए नियम: डिजिटल और सख्त वेरिफिकेशनसाल 2026 में पासपोर्ट नियमों को और भी ‘हाई-टेक’ बनाया गया है. अब पुलिस वेरिफिकेशन के लिए डिजिटल टैब का इस्तेमाल होता है, जो सीधे जीपीएस (GPS) लोकेशन से जुड़ा होता है. इसका मतलब है कि पुलिसकर्मी को आपके घर आना ही होगा और वह आपकी लोकेशन को सिस्टम में अपडेट करेगा. अगर आप उस एड्रेस पर नहीं रहते हैं, तो सिस्टम तुरंत उसे रिजेक्ट कर देगा. जरूरी सलाह सच्चाई ही रास्ता है: हमेशा अपने वर्तमान पते की जानकारी दें. अगर आप किराए पर हैं, तो रेंट एग्रीमेंट को ही आधार बनाएं. पुराना पासपोर्ट अपडेट: अगर आपके पास पहले से पासपोर्ट है और आपका पता बदल गया है, तो उसे ‘Re-issue’ करवाकर नया पता दर्ज कराएं. पुलिस से न डरें: पुलिस वेरिफिकेशन अब पहले से बहुत आसान और पारदर्शी हो गया है. बस आपके पास सही दस्तावेज होने चाहिए. पासपोर्ट बनवाना अब आपका अधिकार है और सरकार ने इसे सुगम बनाया है, लेकिन ईमानदारी ही इसकी पहली शर्त है. फर्जीवाड़े की छोटी सी कोशिश आपकी विदेश यात्रा के सपने को हमेशा के लिए खत्म कर सकती है.
राजीव चौक मेट्रो स्टेशन से चंद सेकंड में उड़ गया लैपटॉप, फोन कॉल पर लगा था शख्स, चोरों ने लगा दिया चूना – dmrc action delhi police arrest laptop theft rajiv chowk metro station gate 5 security check cctv footage

नई दिल्ली. अगर आप दिल्ली मेट्रो में सफर कर रहे हैं और वो भी राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर तो जरा होशियार हो जाएं. दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे चोर को गिरफ्तार किया है, जो आपके आंखों के सामने से आपका सामान गायब कर देता था. दिल्ली का सबसे व्यस्त और दिल कहा जाने वाला राजीव चौक मेट्रो स्टेशन अपनी भीड़भाड़ के लिए जाना जाता है. लेकिन इसी भीड़ का फायदा उठाकर अपराधी मासूम यात्रियों को अपना निशाना बना रहे हैं. यहां पर एक ऐसी वारदात सामने आई है जहां एक यात्री की महज चंद सेकंड की फोन कॉल की व्यस्तता ने उसका कीमती लैपटॉप चोरी करवा दिया. हालांकि, दिल्ली पुलिस की मेट्रो यूनिट ने अपनी तकनीकी कुशलता और सीसीटीवी की मदद से आरोपी को धर दबोचा है. यह मामला 30 जनवरी 2026 का है. पीड़ित यात्री राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 5 और 6 के पास बने सिक्योरिटी चेक पॉइंट पर पहुंचा. सुरक्षा नियमों के मुताबिक, उसने अपना लैपटॉप बैग एक्स-बीआईएस (X-BIS) मशीन पर स्कैनिंग के लिए रखा. इसी दौरान पीड़ित के मोबाइल पर एक फोन कॉल आ गई. वह फोन पर बात करने में इतना मशगूल हो गया कि उसने मशीन की दूसरी तरफ से अपना बैग उठाना याद नहीं रहा. इसी चंद सेकंड की लापरवाही का फायदा पास खड़े एक शातिर चोर ने उठा लिया. चोर ने बड़ी सफाई से मशीन से बैग उठाया और चंपत हो गया. बैग में एक महंगा एचपी (HP) लैपटॉप और उसका चार्जर मौजूद था. पुलिस की जांच और सीसीटीवी का सुराग जब यात्री को अपनी भूल का अहसास हुआ, तब तक बैग गायब हो चुका था. मामले की शिकायत तुरंत राजीव चौक मेट्रो थाना पुलिस को दी गई. 1 फरवरी 2026 को पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) के तहत ई-एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की. दिल्ली पुलिस के मेट्रो डीसीपी कुशल पाल सिंह के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया. जांच टीम ने सबसे पहले घटना स्थल के सीसीटीवी कैमरों को खंगालना शुरू किया. फुटेज की बारीकी से जांच करने पर एक संदिग्ध युवक बैग उठाते हुए साफ नजर आया. हालांकि, आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए चेहरे पर मास्क लगा रखा था. पुलिस ने हार नहीं मानी और आरोपी के आने-जाने के रास्तों का तकनीकी विश्लेषण किया. विश्लेषण से एक चौंकाने वाला पैटर्न सामने आया. आरोपी अक्सर सुबह 8:30 से 9:30 बजे के बीच राजीव चौक मेट्रो स्टेशन से बाहर निकलता था. जाल बिछाकर ऐसे हुई गिरफ्तारी पुलिस टीम ने आरोपी को पकड़ने के लिए 3 फरवरी की सुबह ट्रैप लगाया. सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मी राजीव चौक के एएफसी गेट्स और निकास द्वारों पर तैनात हो गए. सुबह करीब 9:30 बजे, पुलिस की नजर एक युवक पर पड़ी जो पीठ पर एक बैग लटकाए बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था. उसकी कद-काठी सीसीटीवी में दिखे संदिग्ध से हूबहू मिल रही थी. पुलिस ने उसे तुरंत हिरासत में लिया. जब उसके बैग की तलाशी ली गई, तो उसमें से वही चोरी किया गया एचपी लैपटॉप और चार्जर बरामद हुआ. आरोपी का प्रोफाइल और कबूलनामा पकड़े गए आरोपी की पहचान 29 वर्षीय सुमित कुमार के रूप में हुई है, जो दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके का रहने वाला है. पूछताछ के दौरान सुमित ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उसने बताया कि वह मेट्रो स्टेशनों पर ऐसे यात्रियों की तलाश में रहता था जो सुरक्षा जांच के दौरान फोन या अन्य कामों में व्यस्त हो जाते थे. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या सुमित ने पहले भी ऐसी वारदातों को अंजाम दिया है. आरोपी को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. मेट्रो यात्रियों के लिए पुलिस की चेतावनी इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने मेट्रो यात्रियों के लिए एक विशेष गाइडलाइन जारी की है: स्कैनिंग के समय ध्यान रखें: जब भी आप अपना बैग एक्स-रे मशीन पर रखें, तो उसे दूसरी तरफ से निकलने तक अपनी नजरों से ओझल न होने दें. फोन का इस्तेमाल कम करें: सुरक्षा जांच और भीड़भाड़ वाले इलाकों में फोन पर बात करने से बचें, क्योंकि यह अपराधियों को मौका देता है. मास्क के पीछे छिपे चेहरे: कोरोना के बाद अब अपराधी मास्क का इस्तेमाल अपनी पहचान छिपाने के लिए कर रहे हैं, इसलिए अपने आसपास के संदिग्धों पर नजर रखें. तुरंत रिपोर्ट करें: किसी भी सामान के गायब होने पर तुरंत नजदीकी मेट्रो स्टेशन के कंट्रोल रूम या पुलिस डेस्क को सूचित करें. राजीव चौक मेट्रो स्टेशन की यह घटना हमें याद दिलाती है कि सावधानी हटी, तो दुर्घटना घटी. दिल्ली पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने न केवल एक चोरी का मामला सुलझाया है, बल्कि अन्य अपराधियों को भी सख्त संदेश दिया है.
तेलंगाना निकाय चुनाव: तेलंगाना निकाय चुनाव में 13 हजार से ज्यादा ताकतवर मुकाबले, 11 को वोट को लेकर पूरा।

नगर निगम निकाय चुनाव में लेकर राजनीतिक तापमान चरम पर है, जहां सत्ता की गलियों से लेकर झीलों तक तेलंगाना तट की घोषणा की जा रही है। राज्य के 7 नगर निगमों और 116 नगर निगमों में होने वाले इस ओलंपिक महाकुंभ में कुल 12,993 अभ्यर्थी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, 2,996 वार्डों में इस चुनाव के लिए सभी खंडों को शामिल किया गया है, जहां प्रति वार्ड औसत चार ग्रीन के बीच कड़ी टक्कर को देखने को मिलता है। मतदान 11 तारीख को सुबह से शुरू होगा और 13 को प्रारंभिक के बाद परिणाम घोषित किया जाएगा। रणनीतिकारों के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में आबादी के मैदान में उतरने का मतलब यह है कि कोई भी बैठना आसान नहीं है और हर वार्ड में प्रतिस्पर्धा दिलचस्प होने वाली है। पॉलिटिकल ने चुनावी प्रचार को अपने चरम पर पहुंचा दिया है और 9 तारीख को प्रचार अवधि समाप्त होने से पहले वे वोटर्स को नारे लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। पोलिंग आयोग ने आदर्श आचार संहिता के पालन के निर्देश दिए हैं, ताकि वोटिंग प्रक्रिया के दौरान मतदान करने वालों की संख्या कम हो सके। राजनीतिक के लिए अहम् परीक्षा यह चुनाव केवल स्थानीय डायनासोर के लिए नहीं, बल्कि राज्य के बड़े राजनीतिक चरित्र के लिए भी एक अहम परीक्षा की तरह है। मूर्तिकला से लेकर शहरी विकास तक, इस बार कई मुद्दों पर चर्चाओं में शामिल हैं। खैर ये चुनावी स्थानीय शास्त्रीय लड़ाई तो है, लेकिन इसके नतीजों का असर राज्य की राजनीति पर भी देखने को मिलता है। अब सभी परस्पर विरोधी 11 तारीख को मतदान प्रतिशत पर टिकी हैं, क्योंकि अधिकतर वोट होंगे, लोकतंत्र को समूह ही मजबूत माना जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गयी चुनाव आयोग ने चाक-चौबंद के लिए फिलीस्तीन मतदान के लिए सुरक्षा व्यवस्था शुरू की है और लोगों को डराने या धमकाने के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अपील की है। 13 तारीख को आने वाले नतीजे यह तय करेंगे कि आम जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है और राज्य के शहरी क्षेत्र का विकास किस दिशा में होगा। ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट में सबसे पीछे की कुर्सी पर बैठे हैं ममता बनर्जी, कर रही खुद सर के मुकदमे की लड़ाई (टैग्सटूट्रांसलेट)चुनाव(टी)तेलंगाना(टी)तेलंगाना नागरिक चुनाव(टी)तेलंगाना नगरपालिका चुनाव(टी)तेलंगाना स्थानीय निकाय चुनाव(टी)तेलंगाना राजनीति समाचार(टी)नगर निगम चुनाव(टी)वार्ड चुनाव तेलंगाना(टी)चुनाव(टी)तेलंगाना(टी)तेलंगाना नगर निगम चुनाव(टी)तेलंगाना नगरपालिका चुनाव(टी)तेलंगाना स्थानीय नगरपालिका चुनाव(टी)तेलंगाना राजनीति समाचार(टी)नगर निगम चुनाव(टी)वार्ड चुनावतेलंगाना
मुंबई पुलिस के रडार पर कैसे आया गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, रोहित शेट्टी केस में होगी पूछताछ? | mumbai police crime branch may interrogate lawrence bishnoi anmol bishnoi in bollywood director rohit shetty case

Lawrence Bishnoi: बॉलीवुड डायरेक्टर रोहित शेट्टी के घर फायरिंग में क्या लॉरेंस बिश्नोई गैंग शामिल है? क्या लॉरेंस बिश्नोई या उसके भाई अनमोल बिश्नोई से मुंबई पुलिस पूछताछ करने वाली है? मुंबई के जूहू में बॉलीवुड निर्देशक रोहित शेट्टी के आवास के बाहर एक फरवरी को अज्ञात हमलावरों ने 4-5 राउंड फायरिंग की. गोलीबारी से बालकनी के ग्लास पैनल में निशान आए, लेकिन रोहित शेट्टी सुरक्षित बच गए. उस वक्त रोहित शेट्टी अपने घर के सातवें मंजिल पर थे. इस घटना के बाद मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 12 स्पेशल टीम बनाईं और 100 से ज्यादा CCTV चेक किए. मुंबई पुलिस को इस केस मेंपुणे से बाइक पर आए हमलावर का सुराग मिला. पुलिस ने 5 लोगों को हिरासत में लिया, बाद में 4 गिरफ्तार किए. शुरुआती जांच में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से लिंक का शक, खासकर बाबा सिद्दीकी हत्याकांड से जुड़े शुभम लोनकर का मिला है. यह घटना बॉलीवुड में संगठित अपराध और गैंगवार की आशंका बढ़ा रही है. ऐसे में इस हाई-प्रोफाइल केस पूरे देश में चर्चा में है. ऐसे में अहमदाबाद जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई और दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद अनमोल बिश्नोई से क्या मुंबई पुलिस पूछताछ करेगी? लॉरेंस बिश्नोई से होगी पूछताछ! बॉलीवुड निर्देशक रोहित शेट्टी के जूहू स्थित आवास शेट्टी टावर के बाहर 1 फरवरी की देर रात हुई गोलीबारी ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है. अज्ञात हमलावरों ने करीब 4-5 राउंड फायर किए, जिसमें एक गोली बालकनी के ग्लास पैनल को तोड़ते हुए अंदर गई, लेकिन रोहित शेट्टी और उनके परिवार के कोई सदस्य घायल नहीं हुए. उस समय रोहित शेट्टी अपने घर की सातवीं मंजिल पर मौजूद थे. मुंबई पुलिस ने इस घटना के 12 घंटे के भीतर चार लोगों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तार किए शख्स का नाम स्वप्निल साकत, सिद्धार्थ येन्पुरे, आदित्य गायकवाड़, समर्थ पोमाजी है. सभी गिरफ्तार शख्स का उम्र 18 साल से 23 साल के बीच है. इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने हमलावरों को लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया. मुंबई पुलिस के रडार पर क्यों और कैसे आया गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, रोहित शेट्टी केस में होगी पूछताछ? रोहित शेट्टी के घर फायरिंग पर बड़ा अपडेट मुबंई पुलिस ने एक और आरोपी अमन मारोटे को नोटिस जारी किया गया. ये सभी शुभम लोनकर के निर्देश पर काम कर रहे थे, जो लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सदस्य है और बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में आरोपी है. शूटर अभी फरार है. गिरफ्तार लोगों ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए लोनकर से संपर्क किया और स्कूटर खरीदकर उसे जूहू में छोड़ दिया था. क्या बिश्नोई ब्रदर्स से होगी पूछताछ? रोहित शेट्टी के घर हमला करने के बाद कुछ घंटों बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी ली. शुभम लोंकर और आरजू बिश्नोई से जुड़े अकाउंट से पोस्ट में लिखा कि यह ट्रेलर है और अगर रोहित शेट्टी ने उनके काम में दखल दिया तो अगली गोलियां उनके छाती में या बेडरूम में लगेंगी. पोस्ट में पूरे बॉलीवुड को चेतावनी दी गई कि बाबा सिद्दीकी की तरह हालात न हों तो अपनी राह सुधारें. पुलिस इस पोस्ट की आईपी ट्रेस कर रही है. मुंबई पुलिस हल्के में नहीं ले रही ये घटना अब सवाल उठ रहा है कि क्या मुंबई पुलिस अहमदाबाद की साबरमती जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई से पूछताछ करेगी? सूत्रों के अनुसार, क्राइम ब्रांच इस पर विचार कर रही है ताकि असली मोटिव और साजिश का पता लगे. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा है कि शुभम लोनकर ने लोकल लोगों को भर्ती किया, ऐसा लगता है वह बॉलीवुड में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहता है और एक्सटॉर्शन नेटवर्क को फिर से सक्रिय करना चाहता है.. हालांकि, यह भी संभव है कि लोनकर ने बिश्नोई की जानकारी के बिना यह कदम उठाया हो. फिलहाल कोई फाइनल फैसला नहीं हुआ है, लेकिन पूछताछ की संभावना मजबूत है. मुंबई पुलिस के रडार पर क्यों और कैसे आया गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, रोहित शेट्टी केस में होगी पूछताछ? लॉरेंस के भाई अनमोल बिश्नोई, जो तिहाड़ जेल में बंद हैं, इस केस में सीधे रडार पर नहीं दिख रहे. जांच अभी शूटर्स और लोनकर पर केंद्रित है, लेकिन अगर बड़े लेवल की साजिश सामने आई तो अनमोल पर भी नजर जा सकती है. यह घटना बॉलीवुड में संगठित अपराध और गैंगवार की आशंका को बढ़ा रही है. रोहित शेट्टी ने कोई पूर्व धमकी नहीं मिलने की बात कही है, लेकिन उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है. पुलिस अब शूटर को पकड़ने पर फोकस कर रही है, जिसकी गिरफ्तारी से पूरी साजिश खुल सकती है. जांच जारी है और अगले कुछ दिनों में बड़े खुलासे की उम्मीद है.







