एक्ट्रेस ने बेंगलुरु की सड़क पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया:'बिग बॉस कन्नड़' फेम दिव्या सुरेश बोलीं- अज्ञात व्यक्ति ने कार तक पीछा किया

‘बिग बॉस कन्नड़’ की पूर्व कंटेस्टेंट और एक्ट्रेस दिव्या सुरेश ने बेंगलुरु में देर रात अपने साथ हुई कथित छेड़छाड़ की घटना शेयर की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि यह घटना रविवार रात करीब 11:30 बजे हुई, जब वह अपनी कजिन के साथ कार की ओर जा रही थीं। दिव्या ने इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा कि एक अज्ञात व्यक्ति उनका पीछा करने लगा और उनके सामने अश्लील हरकतें करने लगा। उन्होंने बताया कि उन्होंने और उनकी कजिन ने तुरंत उसे टोका, लेकिन वह नहीं रुका और उनके कार में बैठने तक उनका पीछा करता रहा। दिव्या ने कहा कि केवल रात में सड़क पर चलने की वजह से किसी भी महिला को इस तरह के उत्पीड़न का सामना नहीं करना चाहिए। उन्होंने अपनी पोस्ट में बेंगलुरु पुलिस को टैग करते हुए सवाल किया, “जिस सुरक्षा का हमें बार-बार भरोसा दिया जाता है, वह कहां है?” घटना का वीडियो भी किया था रिकॉर्ड दिव्या ने घटना का एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया था, जिसे उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया। वीडियो में उनकी कजिन कथित तौर पर उस व्यक्ति की ओर इशारा करते हुए कहती हैं, “उसके हाथ की हरकत देखो।” वहीं, दिव्या कहती हैं कि जैसे ही वे कार में बैठीं, वह व्यक्ति उनका पीछा करता रहा। उनकी कजिन वीडियो में पुलिस को फोन करने के लिए भी कहती सुनाई देती हैं। कौन हैं दिव्या सुरेश 33 साल की दिव्या सुरेश टीवी शो ‘बिग बॉस कन्नड़ 8’ में नजर आ चुकी हैं। यह शो 2021 में प्रसारित हुआ था और इसे किच्चा सुदीप ने होस्ट किया था। उन्होंने ‘नन्ना हेन्ड्थी MBBS’ और ‘जोड़ी हक्की’ जैसे कन्नड़ टीवी सीरियल्स में काम किया है। दिव्या 2017 में मिस इंडिया साउथ का टाइटल भी जीत चुकी हैं। उन्होंने उसी साल कन्नड़ फिल्म ‘#9 हिल्टन क्रॉस’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। वह ‘राउडी बेबी’, ‘केम्पू हलादी हसिरु’ और ‘हिरण्या’ जैसी कई फिल्मों में भी नजर आई हैं। पिछले साल भी रही थीं चर्चा में अक्टूबर 2025 में बेंगलुरु में हुए एक कथित हिट-एंड-रन मामले में भी दिव्या सुरेश का नाम सामने आया था। आरोप था कि उनकी कार ने एक बाइक को टक्कर मार दी, जिस पर तीन लोग सवार थे। हादसे में एक महिला के घुटने की हड्डी टूट गई और उसका ऑपरेशन कराना पड़ा। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दिव्या की कार जब्त की थी। पूछताछ में दिव्या ने माना कि वह गाड़ी चला रही थीं। उनका कहना था कि फ्लाइट पकड़ने की जल्दी में वह मौके पर नहीं रुकीं। इस मामले में आरटी नगर ट्रैफिक पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया शुरू की थी।
महाराजा रणजीत सिंह की बरसी पर पाकिस्तान गए श्रद्धालु लौटे:गुरुद्वारों के दर्शन कर जताई खुशी; सरकारों से मांगी वीजा में ढील

महाराजा रणजीत सिंह की बरसी के अवसर पर पाकिस्तान गया सिख श्रद्धालुओं का जत्था मंगलवार को अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते भारत लौट आया। इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने ननकाना साहिब, पंजा साहिब, करतारपुर साहिब सहित कई ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन किए। भारत लौटने पर श्रद्धालुओं के चेहरों पर खुशी झलक रही थी। श्रद्धालुओं ने बताया कि यह यात्रा उनके लिए काफी इमोशनल रही। इसे वह भुला नहीं सकते। अमृतसर के श्रद्धालु बलवीर सिंह ने कहा कि सबसे पहले उन्होंने ननकाना साहिब में गुरु नानक देव जी के जन्मस्थान के दर्शन किए। इसके बाद पंजा साहिब, लाहौर स्थित अन्य ऐतिहासिक गुरुद्वारे और करतारपुर साहिब के दर्शन का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि इन पवित्र स्थलों पर पहुंचकर मन को गहरी शांति और आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हुआ। पाकिस्तान में व्यवस्थाओं और सुरक्षा की सराहना श्रद्धालुओं ने पाकिस्तान में की गई व्यवस्थाओं की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे और हर समय सुरक्षा कर्मी उनके साथ मौजूद रहे। किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। श्रद्धालुओं ने कहा कि उन्हें वहां लोगों से बहुत प्रेम, सम्मान और सहयोग मिला, जिससे उनका अनुभव और भी बेहतर हो गया। एक अन्य श्रद्धालु हरजीत कौर ने बताया कि यह जत्था 21 जून को पाकिस्तान गया था और आज 30 जून को वापस लौटा। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान उनकी वर्षों पुरानी मनोकामना पूरी हुई। पवित्र गुरुद्वारों के दर्शन कर उन्होंने अत्यंत आनंद और संतोष महसूस किया। वीजा प्रक्रिया आसान करने की श्रद्धालुओं की अपील श्रद्धालुओं ने भारत और पाकिस्तान दोनों सरकारों से अपील की कि धार्मिक यात्राओं को और सरल बनाया जाए। उन्होंने कहा कि वीजा प्रक्रिया को आसान किया जाना चाहिए और श्रद्धालुओं को अधिक से अधिक अवसर दिए जाने चाहिए ताकि वे अपने पवित्र स्थलों के दर्शन कर सकें। इससे दोनों देशों के बीच आपसी प्रेम, भाईचारा और सांस्कृतिक संबंध मजबूत होंगे। साझा विरासत को संरक्षित करने बेहतर प्रयास उन्होंने यह भी कहा कि साझा विरासत को संरक्षित करने और लोगों के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए सीमा पार धार्मिक यात्राओं को बढ़ावा देना बहुत आवश्यक है। श्रद्धालुओं का मानना है कि ऐसे आयोजनों से न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि दोनों देशों के बीच शांति और सद्भाव का संदेश भी जाता है।
वर्ल्ड अपडेट्स:एपस्टीन कनेक्शन की समीक्षा पूरी होने तक वॉरेन बफे ने गेट्स फाउंडेशन को दान रोका: रिपोर्ट

बर्कशायर हैथवे के चेयरमैन वॉरेन बफे ने इस साल गेट्स फाउंडेशन को होने वाला अपना नियमित मध्य-वर्षीय अरबों डॉलर का दान फिलहाल रोक दिया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, वे फाउंडेशन और दिवंगत यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के संबंधों की बाहरी समीक्षा पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, गेट्स फाउंडेशन के CEO मार्क सुजमैन ने एपस्टीन से जुड़े फाउंडेशन के पुराने संपर्कों की स्वतंत्र जांच कराई है। इसकी रिपोर्ट गर्मियों में आने की उम्मीद है। बताया गया है कि बफेट दान पर अंतिम फैसला साल के आखिर में, संभवतः अपनी थैंक्सगिविंग चिट्ठी जारी करने के समय ले सकते हैं। 95 वर्षीय बफे पिछले दो दशकों में बर्कशायर हैथवे के 47 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के शेयर गेट्स फाउंडेशन को दान कर चुके हैं। गेट्स फाउंडेशन उस समय विवादों में आया था जब अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी कुछ ईमेल में एपस्टीन और फाउंडेशन के कर्मचारियों के बीच संवाद का जिक्र सामने आया। इसी के बाद फाउंडेशन ने पुराने संबंधों की स्वतंत्र समीक्षा शुरू कराई। रॉयटर्स के अनुसार, इस मामले पर बर्कशायर हैथवे और गेट्स फाउंडेशन की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। एजेंसी स्वतंत्र रूप से वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट की पुष्टि भी नहीं कर सकी।
वर्ल्ड अपडेट्स:एपस्टीन कनेक्शन की समीक्षा पूरी होने तक वॉरेन बफे ने गेट्स फाउंडेशन को दान रोका: रिपोर्ट

बर्कशायर हैथवे के चेयरमैन वॉरेन बफे ने इस साल गेट्स फाउंडेशन को होने वाला अपना नियमित मध्य-वर्षीय अरबों डॉलर का दान फिलहाल रोक दिया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, वे फाउंडेशन और दिवंगत यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के संबंधों की बाहरी समीक्षा पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, गेट्स फाउंडेशन के CEO मार्क सुजमैन ने एपस्टीन से जुड़े फाउंडेशन के पुराने संपर्कों की स्वतंत्र जांच कराई है। इसकी रिपोर्ट गर्मियों में आने की उम्मीद है। बताया गया है कि बफेट दान पर अंतिम फैसला साल के आखिर में, संभवतः अपनी थैंक्सगिविंग चिट्ठी जारी करने के समय ले सकते हैं। 95 वर्षीय बफे पिछले दो दशकों में बर्कशायर हैथवे के 47 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के शेयर गेट्स फाउंडेशन को दान कर चुके हैं। गेट्स फाउंडेशन उस समय विवादों में आया था जब अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी कुछ ईमेल में एपस्टीन और फाउंडेशन के कर्मचारियों के बीच संवाद का जिक्र सामने आया। इसी के बाद फाउंडेशन ने पुराने संबंधों की स्वतंत्र समीक्षा शुरू कराई। रॉयटर्स के अनुसार, इस मामले पर बर्कशायर हैथवे और गेट्स फाउंडेशन की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। एजेंसी स्वतंत्र रूप से वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट की पुष्टि भी नहीं कर सकी। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबर… किंग चार्ल्स के आधिकारिक विवरण से 500 साल पुरानी ‘डिफेंडर ऑफ द फेथ’ उपाधि हटी ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय के आधिकारिक कार्य विवरण से 500 साल पुरानी ‘डिफेंडर ऑफ द फेथ’ की उपाधि हटा दी गई है। 2025-26 की सॉवरेन ग्रांट रिपोर्ट में अब उन्हें इंग्लैंड चर्च का सुप्रीम गवर्नर और ब्रिटेन के बहुधार्मिक समाज में आस्था के लिए स्थान की रक्षा करने वाला बताया गया है। नई रिपोर्ट की भाषा पिछले साल की रिपोर्ट से अलग है। पहले चार्ल्स को ‘हेड ऑफ द चर्च ऑफ इंग्लैंड एंड डिफेंडर ऑफ द फेथ” कहा जाता था। हालांकि, शाही परिवार की आधिकारिक वेबसाइट पर यह उपाधि अभी भी दर्ज है। ‘डिफेंडर ऑफ द फेथ’ की उपाधि 1521 में पोप लियो दशम ने इंग्लैंड के राजा हेनरी अष्टम को दी थी। यह सम्मान उन्हें मार्टिन लूथर के धार्मिक सुधार आंदोलन का विरोध करने के बाद मिला था। यह बदलाव तीन दशक पुरानी बहस को फिर चर्चा में ले आया है। 1994 में प्रिंस ऑफ वेल्स रहते हुए चार्ल्स ने कहा था कि वे ‘डिफेंडर ऑफ द फेथ’ कहलाना पसंद करेंगे, ताकि वे केवल ईसाई धर्म ही नहीं बल्कि सभी धर्मों का प्रतिनिधित्व कर सकें। 2023 में राज्याभिषेक के दौरान उन्होंने पारंपरिक शपथ नहीं बदली थी, लेकिन प्रस्तावना में यह जोड़ा गया था कि इंग्लैंड चर्च ऐसा वातावरण बनाएगा, जहां सभी धर्मों और मान्यताओं के लोग स्वतंत्र रूप से रह सकें। अमेरिकी कैथोलिक आर्चडायसीज 500 से अधिक बाल यौन शोषण पीड़ितों को 39.5 करोड़ डॉलर देगा अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को कैथोलिक आर्चडायसीज ने 500 से अधिक बाल यौन शोषण मुकदमों के निपटारे के लिए 39.5 करोड़ डॉलर (395 मिलियन डॉलर) देने पर सैद्धांतिक सहमति जताई है। समझौते के तहत आर्चबिशप साल्वातोरे जे. कॉर्डिलियोने प्रत्येक पीड़ित को व्यक्तिगत माफी पत्र लिखेंगे। साथ ही चर्च को बाल सुरक्षा और पारदर्शिता से जुड़े कई सुधार भी लागू करने होंगे। आर्चबिशप कॉर्डिलियोने ने श्रद्धालुओं को लिखे पत्र में कहा कि कोई भी आर्थिक समझौता अतीत के दर्द को मिटा नहीं सकता, लेकिन इससे पीड़ितों को उचित मुआवजा देने का रास्ता खुलेगा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि संस्थागत विफलताओं के कारण यह नुकसान हुआ और सभी पीड़ितों से ईमानदारी से माफी मांगी। समझौते के तहत चर्च को बाल यौन शोषण के आरोप झेल चुके पादरियों की सूची सार्वजनिक रखनी होगी, उसे नियमित रूप से प्रकाशित करना होगा और पीड़ितों को चुप कराने वाले गोपनीयता समझौतों पर रोक लगानी होगी। यह मामला अमेरिका में कैथोलिक चर्च से जुड़े बाल यौन शोषण मामलों में हुए बड़े मुआवजा समझौतों की श्रृंखला का नया उदाहरण है। अक्टूबर 2024 में लॉस एंजिलिस आर्चडायसीज ने 1,353 मामलों के निपटारे के लिए 88 करोड़ डॉलर (880 मिलियन डॉलर) के समझौते पर सहमति जताई थी।
'चौहान' के टीजर पर विवाद:'पठानों से कह दो, चौहान आ गया' डायलॉग पर आपत्ति, क्षत्रिय परिषद बोला- इतिहास को सांप्रदायिक नजरिए से न दिखाएं

अजय देवगन की फिल्म ‘चौहान’ का टीजर विवाद में आ गया। क्षत्रिय परिषद नाम के संगठन ने कहा कि ऐतिहासिक विरासत को सांप्रदायिक लामबंदी का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। संगठन ने फिल्म प्रोड्यूसर्स से राजपूत नाम का इस्तेमाल जातीय और सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने के लिए नहीं करने की अपील की। 25 जून को फिल्म का टीजर रिलीज किया गया था। इसमें अजय देवगन की आवाज में एक डायलॉग है, “पठानों से कह दो, चौहान आ गया है।” सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसे धार्मिक विभाजन बढ़ाने की कोशिश बताया। फिल्म को कश्मीर संघर्ष के चित्रण और यह दिखाने को लेकर भी आलोचना मिली कि पैलेट गन से कम नुकसान होता है। क्षत्रिय परिषद ने अपने बयान में कहा कि इतिहास की जटिलता का सम्मान किया जाना चाहिए और राजपूत विरासत का इस्तेमाल राजनीतिक या वैचारिक उद्देश्यों के लिए नहीं होना चाहिए। संगठन ने कहा कि ‘चौहान’ कुलनाम का समकालीन सांप्रदायिक राजनीति के लिए इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता। संगठन ने कहा कि जब मेनस्ट्रीम मीडिया और पब्लिक बातचीत में राजपूत समुदाय की आवाज पहले से कम प्रतिनिधित्व रखती है, तब किसी राजपूत कुलनाम का उपयोग केवल विवाद, जातीय और सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने या राजनीतिक माहौल बनाने के लिए करना गैर-जिम्मेदाराना और असम्मानजनक है। इतिहास के उदाहरण भी दिए संगठन ने कहा कि भारतीय इतिहास को सांप्रदायिक नजरिए से नहीं देखा जा सकता। बयान में कहा गया कि कई अवसरों पर राजपूत और पठान एक-दूसरे के साथ मिलकर लड़े। इसमें खानवा के युद्ध में महाराणा सांगा के नेतृत्व में महमूद लोदी, हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप की सेना में हकीम खान सूर, फरीद खान (बाद में शेरशाह सूरी) का राजा रायसल शेखावत से जुड़ाव और प्रथम पानीपत के युद्ध में महाराजा विक्रमादित्य तोमर का लोदी सेना के साथ लड़ना शामिल है। संगठन ने कहा कि ये घटनाएं बताती हैं कि मध्यकालीन राजनीतिक गठबंधन शासन, निष्ठा और सैन्य रणनीति पर आधारित थे, न कि आज थोपे जा रहे सांप्रदायिक नजरिए पर। फिल्म के टीजर की सोशल मीडिया पर तारीफ और आलोचना, दोनों हुई। एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने कश्मीर में पैलेट गन के सबसे कम उम्र के पीड़ित से जुड़ी एक खबर शेयर करते हुए लिखा कि पैलेट गन कम नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि यह गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यधारा के कश्मीरी पठान नहीं हैं और पोस्ट के साथ ‘विवेक अग्निहोत्री-फिकेशन ऑफ बॉलीवुड’ लिखा। जियो स्टूडियोज और कलर येलो प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी ज्योति देशपांडे, आनंद एल राय और हिमांशु शर्मा की यह फिल्म 1 अक्टूबर को रिलीज होगी।
'चौहान' के टीजर पर विवाद:'पठानों से कह दो, चौहान आ गया' डायलॉग पर आपत्ति, क्षत्रिय परिषद बोला- इतिहास को सांप्रदायिक नजरिए से न दिखाएं

अजय देवगन की फिल्म ‘चौहान’ का टीजर विवाद में आ गया। क्षत्रिय परिषद नाम के संगठन ने कहा कि ऐतिहासिक विरासत को सांप्रदायिक लामबंदी का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। संगठन ने फिल्म प्रोड्यूसर्स से राजपूत नाम का इस्तेमाल जातीय और सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने के लिए नहीं करने की अपील की। 25 जून को फिल्म का टीजर रिलीज किया गया था। इसमें अजय देवगन की आवाज में एक डायलॉग है, “पठानों से कह दो, चौहान आ गया है।” सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसे धार्मिक विभाजन बढ़ाने की कोशिश बताया। फिल्म को कश्मीर संघर्ष के चित्रण और यह दिखाने को लेकर भी आलोचना मिली कि पैलेट गन से कम नुकसान होता है। क्षत्रिय परिषद ने अपने बयान में कहा कि इतिहास की जटिलता का सम्मान किया जाना चाहिए और राजपूत विरासत का इस्तेमाल राजनीतिक या वैचारिक उद्देश्यों के लिए नहीं होना चाहिए। संगठन ने कहा कि ‘चौहान’ कुलनाम का समकालीन सांप्रदायिक राजनीति के लिए इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता। संगठन ने कहा कि जब मेनस्ट्रीम मीडिया और पब्लिक बातचीत में राजपूत समुदाय की आवाज पहले से कम प्रतिनिधित्व रखती है, तब किसी राजपूत कुलनाम का उपयोग केवल विवाद, जातीय और सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने या राजनीतिक माहौल बनाने के लिए करना गैर-जिम्मेदाराना और असम्मानजनक है। इतिहास के उदाहरण भी दिए संगठन ने कहा कि भारतीय इतिहास को सांप्रदायिक नजरिए से नहीं देखा जा सकता। बयान में कहा गया कि कई अवसरों पर राजपूत और पठान एक-दूसरे के साथ मिलकर लड़े। इसमें खानवा के युद्ध में महाराणा सांगा के नेतृत्व में महमूद लोदी, हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप की सेना में हकीम खान सूर, फरीद खान (बाद में शेरशाह सूरी) का राजा रायसल शेखावत से जुड़ाव और प्रथम पानीपत के युद्ध में महाराजा विक्रमादित्य तोमर का लोदी सेना के साथ लड़ना शामिल है। संगठन ने कहा कि ये घटनाएं बताती हैं कि मध्यकालीन राजनीतिक गठबंधन शासन, निष्ठा और सैन्य रणनीति पर आधारित थे, न कि आज थोपे जा रहे सांप्रदायिक नजरिए पर। फिल्म के टीजर की सोशल मीडिया पर तारीफ और आलोचना, दोनों हुई। एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने कश्मीर में पैलेट गन के सबसे कम उम्र के पीड़ित से जुड़ी एक खबर शेयर करते हुए लिखा कि पैलेट गन कम नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि यह गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यधारा के कश्मीरी पठान नहीं हैं और पोस्ट के साथ ‘विवेक अग्निहोत्री-फिकेशन ऑफ बॉलीवुड’ लिखा। जियो स्टूडियोज और कलर येलो प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी ज्योति देशपांडे, आनंद एल राय और हिमांशु शर्मा की यह फिल्म 1 अक्टूबर को रिलीज होगी।
न्यूजीलैंड ने 27 साल बाद इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज जीती:160 रन से हराया; स्टोक्स के आखिरी मैच में इंग्लैंड 212 रन पर सिमटा

बेन स्टोक्स अपने आखिरी इंटरनेशनल मैच को जीत के साथ यादगार बनाना चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। ट्रेंट ब्रिज में खेले गए तीसरे टेस्ट में न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड को 160 रन से हराकर तीन मैचों की सीरीज 2-1 से जीत ली। 373 रन का पीछा कर रही इंग्लैंड की दूसरी पारी 212 रन पर सिमट गई। इसी के साथ कीवी टीम ने 27 साल बाद इंग्लैंड में कोई सीरीज जीती। टीम ने इससे पहले 1999 यह कारनामा किया था। यह न्यूजीलैंड की इंग्लैंड में 20 टेस्ट सीरीज में सिर्फ चौथी जीत है। खास बात यह रही कि टीम ने पहला टेस्ट हारने के बाद लगातार दो मुकाबले जीतकर सीरीज अपने नाम की। ऐसा उसने इंग्लैंड में दूसरी बार किया है। दूसरी ओर इंग्लैंड को 2012 के बाद पहली बार घर में तीन या उससे ज्यादा टेस्ट की सीरीज गंवानी पड़ी। स्टोक्स की विदाई जीत के साथ नहीं हुई मैच का सबसे बड़ा पल बेन स्टोक्स का संन्यास था। 35 साल के ऑलराउंडर ने चौथे दिन संन्यास की घोषणा की थी। टारगेट का पीछा करते हुए स्टोक्स ने पनिंग की और सिर्फ 20 गेंदों में 30 रन बनाकर तेज शुरुआत दी, लेकिन बड़ी पारी नहीं खेल सके। पांचवें दिन दो रनआउट ने बदला मुकाबला इंग्लैंड ने अंतिम दिन 103/4 से खेलना शुरू किया, लेकिन सुबह के पहले घंटे में ही मैच हाथ से निकल गया। पहले नाथन स्मिथ ने एमिलियो गे (10) को आउट किया। इसके बाद हेनरी निकोल्स के शानदार डायरेक्ट हिट पर जो रूट (18) रन आउट हो गए। इसके बाद न्यूजीलैंड ने लगातार दबाव बनाए रखा। मिचेल सैंटनर ने गस एटकिंसन को LBW किया, जबकि दूसरे डयरेक्ट हिट पर जोश टंग रन आउट हुए। आखिर में सैंटनर ने जेमी स्मिथ (60) को आउट कर इंग्लैंड की पारी 212 रन पर समेट दी। जेमी स्मिथ ने 60 रन बनाए टॉप ऑर्डर के फ्लॉप होने के बाद विकेटकीपर जेमी स्मिथ ने 60 रन की पारी खेली। उन्होंने गस एटकिंसन के साथ 75 रन जोड़कर कुछ देर मुकाबला रोके रखा, लेकिन दूसरे छोर से लगातार विकेट गिरते रहे। जेमी के आउट होते ही इंग्लैंड की उम्मीदें भी खत्म हो गईं। पहली पारी में न्यूजीलैंड ने 438 रन बनाए मैच का आधार न्यूजीलैंड की पहली पारी रही। कप्तान टॉम लैथम (151) और डेवोन कॉनवे (157) ने पहले विकेट के लिए 317 रन जोड़कर इंग्लैंड के गेंदबाजों को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया। न्यूजीलैंड ने पहली पारी में 438 रन बनाए। इंग्लैंड ने जवाब में 354 रन बनाए, जिससे न्यूजीलैंड को 84 रन की बढ़त मिली। दूसरी पारी में डेरिल मिचेल (100)* और रचिन रवींद्र (94) की बदौलत टीम ने 288/9 पर पारी घोषित कर इंग्लैंड के सामने 373 रन का लक्ष्य रखा। चोटों के बावजूद न्यूजीलैंड ने जीत हासिल की पूरे मैच के दौरान न्यूजीलैंड चोटों से जूझता रहा। मैट हेनरी पहले ही बाहर थे। ब्लेयर टिकनर चोटिल हुए तो उनकी जगह कन्कशन सब्स्टीट्यूट जैक फाउल्क्स मैदान पर उतरे। अंतिम दिन विल ओ’रूर्के भी हैमस्ट्रिंग की वजह से मैदान छोड़ गए। इंग्लैंड का 14 साल बाद घर में सीरीज हारना इंग्लैंड को 2012 के बाद पहली बार अपने घर में तीन या उससे ज्यादा टेस्ट मैचों की सीरीज में हार का सामना करना पड़ा। इंग्लैंड ने पिछले 9 टेस्ट में से 7 गंवा दिए हैं। बेन स्टोक्स और ब्रेंडन मैकुलम के ‘बैजबॉल’ में यह टीम का सबसे खराब दौर माना जा रहा है। स्टोक्स का सपना अधूरा रह गया बेन स्टोक्स ने चौथे दिन अचानक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर सभी को चौंका दिया था। उन्होंने कहा कि चार साल कप्तानी करने के बाद अब वह मानसिक और शारीरिक रूप से थक चुके हैं। स्टोक्स ने कहा, सीरीज जीतकर विदाई लेना शानदार होता, लेकिन मुझे अपने करियर और कप्तानी पर गर्व है। अब कई भावनाएं हैं, क्योंकि दोबारा इंग्लैंड के लिए नहीं खेलूंगा। डेरिल मिचेल की पारी बनी जीत की नींव दूसरी पारी में डेरिल मिचेल ने नाबाद 100 रन बनाए। इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों की कई गेंदें उनके शरीर पर लगीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। मैच के बाद मिचेल ने कहा, हम इंग्लैंड जीतने के इरादे से आए थे। सीरीज जीतना हमारे लिए बेहद खास है।
न्यूजीलैंड ने 27 साल बाद इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज जीती:160 रन से हराया; स्टोक्स के आखिरी मैच में इंग्लैंड 212 रन पर सिमटा

बेन स्टोक्स अपने आखिरी इंटरनेशनल मैच को जीत के साथ यादगार बनाना चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। ट्रेंट ब्रिज में खेले गए तीसरे टेस्ट में न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड को 160 रन से हराकर तीन मैचों की सीरीज 2-1 से जीत ली। 373 रन का पीछा कर रही इंग्लैंड की दूसरी पारी 212 रन पर सिमट गई। इसी के साथ कीवी टीम ने 27 साल बाद इंग्लैंड में कोई सीरीज जीती। टीम ने इससे पहले 1999 यह कारनामा किया था। यह न्यूजीलैंड की इंग्लैंड में 20 टेस्ट सीरीज में सिर्फ चौथी जीत है। खास बात यह रही कि टीम ने पहला टेस्ट हारने के बाद लगातार दो मुकाबले जीतकर सीरीज अपने नाम की। ऐसा उसने इंग्लैंड में दूसरी बार किया है। दूसरी ओर इंग्लैंड को 2012 के बाद पहली बार घर में तीन या उससे ज्यादा टेस्ट की सीरीज गंवानी पड़ी। स्टोक्स की विदाई जीत के साथ नहीं हुई मैच का सबसे बड़ा पल बेन स्टोक्स का संन्यास था। 35 साल के ऑलराउंडर ने चौथे दिन संन्यास की घोषणा की थी। टारगेट का पीछा करते हुए स्टोक्स ने पनिंग की और सिर्फ 20 गेंदों में 30 रन बनाकर तेज शुरुआत दी, लेकिन बड़ी पारी नहीं खेल सके। पांचवें दिन दो रनआउट ने बदला मुकाबला इंग्लैंड ने अंतिम दिन 103/4 से खेलना शुरू किया, लेकिन सुबह के पहले घंटे में ही मैच हाथ से निकल गया। पहले नाथन स्मिथ ने एमिलियो गे (10) को आउट किया। इसके बाद हेनरी निकोल्स के शानदार डायरेक्ट हिट पर जो रूट (18) रन आउट हो गए। इसके बाद न्यूजीलैंड ने लगातार दबाव बनाए रखा। मिचेल सैंटनर ने गस एटकिंसन को LBW किया, जबकि दूसरे डयरेक्ट हिट पर जोश टंग रन आउट हुए। आखिर में सैंटनर ने जेमी स्मिथ (60) को आउट कर इंग्लैंड की पारी 212 रन पर समेट दी। जेमी स्मिथ ने 60 रन बनाए टॉप ऑर्डर के फ्लॉप होने के बाद विकेटकीपर जेमी स्मिथ ने 60 रन की पारी खेली। उन्होंने गस एटकिंसन के साथ 75 रन जोड़कर कुछ देर मुकाबला रोके रखा, लेकिन दूसरे छोर से लगातार विकेट गिरते रहे। जेमी के आउट होते ही इंग्लैंड की उम्मीदें भी खत्म हो गईं। पहली पारी में न्यूजीलैंड ने 438 रन बनाए मैच का आधार न्यूजीलैंड की पहली पारी रही। कप्तान टॉम लैथम (151) और डेवोन कॉनवे (157) ने पहले विकेट के लिए 317 रन जोड़कर इंग्लैंड के गेंदबाजों को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया। न्यूजीलैंड ने पहली पारी में 438 रन बनाए। इंग्लैंड ने जवाब में 354 रन बनाए, जिससे न्यूजीलैंड को 84 रन की बढ़त मिली। दूसरी पारी में डेरिल मिचेल (100)* और रचिन रवींद्र (94) की बदौलत टीम ने 288/9 पर पारी घोषित कर इंग्लैंड के सामने 373 रन का लक्ष्य रखा। चोटों के बावजूद न्यूजीलैंड ने जीत हासिल की पूरे मैच के दौरान न्यूजीलैंड चोटों से जूझता रहा। मैट हेनरी पहले ही बाहर थे। ब्लेयर टिकनर चोटिल हुए तो उनकी जगह कन्कशन सब्स्टीट्यूट जैक फाउल्क्स मैदान पर उतरे। अंतिम दिन विल ओ’रूर्के भी हैमस्ट्रिंग की वजह से मैदान छोड़ गए। इंग्लैंड का 14 साल बाद घर में सीरीज हारना इंग्लैंड को 2012 के बाद पहली बार अपने घर में तीन या उससे ज्यादा टेस्ट मैचों की सीरीज में हार का सामना करना पड़ा। इंग्लैंड ने पिछले 9 टेस्ट में से 7 गंवा दिए हैं। बेन स्टोक्स और ब्रेंडन मैकुलम के ‘बैजबॉल’ में यह टीम का सबसे खराब दौर माना जा रहा है। स्टोक्स का सपना अधूरा रह गया बेन स्टोक्स ने चौथे दिन अचानक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर सभी को चौंका दिया था। उन्होंने कहा कि चार साल कप्तानी करने के बाद अब वह मानसिक और शारीरिक रूप से थक चुके हैं। स्टोक्स ने कहा, सीरीज जीतकर विदाई लेना शानदार होता, लेकिन मुझे अपने करियर और कप्तानी पर गर्व है। अब कई भावनाएं हैं, क्योंकि दोबारा इंग्लैंड के लिए नहीं खेलूंगा। डेरिल मिचेल की पारी बनी जीत की नींव दूसरी पारी में डेरिल मिचेल ने नाबाद 100 रन बनाए। इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों की कई गेंदें उनके शरीर पर लगीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। मैच के बाद मिचेल ने कहा, हम इंग्लैंड जीतने के इरादे से आए थे। सीरीज जीतना हमारे लिए बेहद खास है।
IPL क्रिकेटर शशांक, उनके IPS पिता पर भोपाल में FIR:अच्छा खाना नहीं बनाने पर कुक को पीटा-गालियां दीं, रोते हुए VIDEO किया जारी

मध्यप्रदेश के भोपाल में IPL टीम पंजाब किंग्स के बल्लेबाज शशांक सिंह और उनके पिता रिटायर्ड स्पेशल डीजी शैलेष सिंह IPS पर कुक से मारपीट और गाली-गलौज की FIR दर्ज हुई है। पीड़ित विपेंद्र सिंह तोमर का आरोप है कि खाना पसंद नहीं आने पर उसके साथ गाली-गलौज की गई। जब उसने काम छोड़ने की बात कही तो मोबाइल छीन लिया गया, जबरन काम कराया गया और बाद में शैलेष सिंह, शशांक और उनके ड्राइवर ने मिलकर मारपीट की। घटना के बाद युवक ने रोते हुए अपना VIDEO भी जारी किया है। इसके बाद भोपाल के रातीबड़ थाना पुलिस ने सोमवार को FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 2 तस्वीरों में देखिए पीड़ित की चोट के निशान… सरकारी नौकरी का झांसा देकर भोपाल बुलाया रीवा निवासी विपेंद्र सिंह तोमर (31) ने बताया कि परिचित मोहित सिंह सेंगर के जरिए उसे भोपाल बुलाया गया था। उससे कहा गया कि शैलेष सिंह के यहां खाना बनाने का काम करना है और बाद में सरकारी नौकरी लगवाने में मदद की जाएगी। नीलबड़ स्थित घर पर 15 हजार रुपए मासिक वेतन, रहने और खाने की व्यवस्था तय हुई थी। कहा- ‘काम नहीं करेगा तो आया क्यों’ पीड़ित के मुताबिक, काम शुरू करने के कुछ घंटे बाद लगातार काम कराया जाने लगा। पुराने कुक को भी गालियां दी जा रही थीं। यह देखकर उसने काम छोड़ने की बात कही। आरोप है कि इस पर उससे कहा गया, “काम नहीं करेगा तो यहां आया क्यों? क्या मेरा मर्डर करने आया है?” इसके बाद उसका मोबाइल छीन लिया गया और जबरन काम कराया। कमरे में बंद हुआ तो मारपीट का आरोप युवक का कहना है कि वह डरकर कमरे में बंद हो गया था। आरोप है कि इसके बाद शैलेष सिंह, उनके बेटे शशांक सिंह और ड्राइवर ने उसके साथ मारपीट की। पीड़ित के शरीर और चेहरे पर चोट के निशान दिखाई दे रहे हैं। उसका कहना है कि मारपीट के बाद भी उसका मोबाइल वापस नहीं किया गया। बयान और जांच के बाद FIR रातीबड़ थाना पुलिस के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद फरियादी और गवाह के बयान लिए गए। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर शैलेष सिंह, शशांक सिंह और एक कर्मचारी के खिलाफ BNS की धारा 296(बी), 115(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है। विदिशा के युवक ने भी की थी शिकायत इससे पहले 5 मई 2026 को विदिशा के गंजबासौदा निवासी राजीव विश्वकर्मा ने भी पूर्व स्पेशल डीजी शैलेष सिंह के खिलाफ डीजीपी कैलाश मकवाना से शिकायत की थी। युवक ने आरोप लगाया था कि नौकरी के दौरान उसे घर में बंधक बनाकर रखा गया, उसके साथ मारपीट की गई और मोबाइल व बैग छीन लिया गया। शिकायत में यह भी कहा गया था कि जब उसने नौकरी छोड़ने की बात कही तो उसे चोरी, छेड़छाड़ और लूट जैसे मामलों में झूठा फंसाने की धमकी दी गई। युवक का आरोप था कि उसका मोबाइल और बैग भी वापस नहीं किया गया तथा पुलिस सेवा में रहे होने का भय दिखाकर उसे लगातार धमकाया जाता रहा। शशांक इस IPL सीजन 132 रन बना सके शशांक शुरुआती IPL करियर में दिल्ली कैपिटल्स, राजस्थान रॉयल्स और सनराइजर्स हैदराबाद का हिस्सा रहे, लेकिन उन्हें मौके नहीं मिले। असली पहचान 2024 में पंजाब किंग्स के लिए खेलते हुए मिली। इसके बाद 2025 और 2026 में उन्हें 5.5 करोड़ में रिटेन किया था। शशांक ने अब तक 53 IPL मैचों में 905 रन बनाए हैं। 2026 सीजन शशांक के लिए फ्लॉप रहा। उन्होंने 12 मैचों में 132 रन बनाए। उनका बेस्ट स्कोर 56 रन रहा। शशांक जरूरत पड़ने पर ऑफ गेंदबाजी भी करते हैं। IPL करियर में उन्होंने 53 मैचों में 5 विकेट लिए हैं। इस सीजन में उन्होंने 12 मैचों में 4 विकेट लिए। ——————- ये खबर भी पढ़ें… सिया के सामने केतन मर्डर का सीन रीक्रिएट किया गया: पुलिस लोहगढ़ किला ले गई, दीवार से डमी गिराकर देखा पुणे मर्डर केस में पुलिस ने रविवार को केतन को लोहगढ़ किले से गिराने का सीन रीक्रिएट किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके लिए पुलिस सुबह 6.30 बजे आरोपी सिया गोयल को लोहगढ़ किले लेकर पहुंची। टीम करीब 2.30 घंटे किले पर रही। पूरी खबर पढ़ें…
विम्बलडन की ‘घास’ पर ‘हार्ड कोर्ट’ का रोमांच:आधुनिक रैकेट्स, पावर हिटिंग और बेसलाइन टेक्निक ने बदल दिया खेल का व्याकरण

लंदन के ऑल इंग्लैंड क्लब की हरी घास पर सफेद कपड़ों में टेनिस खेलना हमेशा से परंपरा, नजाकत और एक खास शैली का प्रतीक रहा है। एक दौर था जब विम्बलडन वही खिलाड़ी जीतता था, जिसे विशुद्ध रूप से ‘ग्रास-स्पेशलिस्ट’ माना जाता था। पीट सम्प्रास, बोरिस बेकर, स्टीफन एडबर्ग, रोजर फेडरर जैसे दिग्गजों का राज उनकी घातक ‘सर्व-एंड-वॉली’ (सर्विस करके तुरंत नेट पर आना) टेक्निक पर टिका था। लेकिन नए दौर के खिलाड़ियों ने घास पर खेलने के इस पारंपरिक तरीके को इतिहास बना दिया है। अब खिलाड़ी घास की पिचों को भी ‘हार्ड-कोर्ट’ की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। खिलाड़ियों ने अपने उपकरणों, फुटवर्क और खेल शैली में ऐसा बदलाव किया है कि टेनिस का पूरा व्याकरण ही बदल गया है। सोमवार से शुरू हो रहे साल के तीसरे टेनिस ग्रैंड स्लैम विम्बलडन से पहले जानिए कैसे आधुनिक खिलाड़ियों ने खेल की दशा और दिशा बदली है… 1. नए उपकरणों से मिली पावर और स्पिन पहले खिलाड़ी भारी रैकेट और प्राकृतिक (नेचुरल गट) स्ट्रिंग्स का उपयोग करते थे। इस कारण कोर्ट के पीछे से भारी स्पिन के साथ गेंद को हिट करना बहुत मुश्किल होता था। अब खिलाड़ी हल्के कार्बन-फाइबर रैकेट और पॉलिएस्टर स्ट्रिंग्स का इस्तेमाल करते हैं। यह नया कॉम्बिनेशन आधुनिक खिलाड़ियों को हाई स्पीड और भारी ‘टॉपस्पिन’ के साथ गेंद को हिट करने की अनुमति देता है। 2. नेट गेम की जगह बेसलाइन गेम का दबदबा पहले खिलाड़ी ‘सर्व-एंड-वॉली’ रणनीति अपनाते थे। वे तेज सर्विस करते और हवा में ही गेंद को हिट करने के लिए तुरंत नेट की ओर दौड़ पड़ते थे। अब आधुनिक रैकेट्स से ताकतवर शॉट्स आसान हो गए हैं, इसलिए नेट की तरफ भागना बेहद जोखिम भरा हो गया है। खिलाड़ी अब बेसलाइन पर ही जमे रहते हैं और तब तक ताकतवर शॉट्स का आदान-प्रदान करते हैं, जब तक कोई गलती न कर दे। 3. टेनिस कोर्ट की सतहें हो गईं धीमी पहले ग्रास और पारंपरिक हार्ड कोर्ट बहुत चिकने और तेज हुआ करते थे। इन पर गेंद बहुत नीची और तेज उछलती थी। अब इन ताकतवर बेसलाइन शॉट्स से निपटने के लिए टूर्नामेंट्स ने अपनी सतहों को धीमा कर दिया है। ऑल इंग्लैंड क्लब ने कोर्ट को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए घास के मिश्रण को बदल दिया। इससे गेंद ऊंची उछलने लगी और उसकी गति धीमी हो गई, जिससे लंबी रैलियां खेलना संभव हो सका। 4. खिलाड़ियों के फुटवर्क में बड़ा बदलाव पहले घास के कोर्ट पर, खिलाड़ी किसी भी अप्रत्याशित बाउंस से निपटने के लिए छोटे और तेज कदम रखते थे। आधुनिक एथलीट हार्ड कोर्ट पर स्लाइड करना (फिसलना) सीखते हैं। घास की सतह पर भी जूते की विशेष ग्रिप की मदद से हार्ड कोर्ट जैसी आक्रामक स्लाइडिंग करते हैं। वे ‘ओपन स्टांस’ का उपयोग करते हैं और दमदार शॉट मारने के लिए संतुलन बनाए रखते हुए सुरक्षित रूप से रुकने के लिए पैरों को स्लाइड करते हैं।






