Wednesday, 02 Sep 2026 | 06:06 AM

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स्पोर्ट्स अपडेट्स- बांग्लादेश के गेंदबाजी कोच शॉन टैट का इस्तीफा:फैमिली कारणों का हवाला दिया; राशिद के टेस्ट खेलने पर सस्पेंस बरकरार

स्पोर्ट्स अपडेट्स- बांग्लादेश के गेंदबाजी कोच शॉन टैट का इस्तीफा:फैमिली कारणों का हवाला दिया; राशिद के टेस्ट खेलने पर सस्पेंस बरकरार

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज शॉन टैट ने बांग्लादेश के तेज गेंदबाजी कोच का पद छोड़ दिया है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के मुताबिक, टैट ने पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए आपसी सहमति से इस्तीफा दिया। टैट का कॉन्ट्रैक्ट 2027 वर्ल्ड कप तक का था, जिसे उन्होंने बीच में ही छोड़ दिया है। बांग्लादेश को यह झटका 9 जून से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शुरू हो रही घरेलू सीरीज से ठीक पहले लगा है। इस दौरे पर 3 वनडे और 3 टी-20 मैच खेले जाएंगे। टैट के जाने के बाद बांग्लादेश के पूर्व तेज गेंदबाज तल्हा जुबैर को टीम का नया कोच बनाया जा सकता है। राशिद के टेस्ट खेलने पर अफगान कप्तान बोले- यह सेलेक्टर्स और उनके बीच का मामला अफगान कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी ने कहा कि स्टार स्पिनर राशिद खान दोबारा टेस्ट खेलेंगे या नहीं, यह फैसला उनके और सेलेक्टर्स के बीच का है। भारत के खिलाफ इकलौता टेस्ट मैच 6 जून से शुरु हो रहा है। मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में शाहीदी ने साफ किया कि उन्होंने इस बारे में राशिद से कोई निजी बातचीत नहीं की है। राशिद की सेलेक्टर्स से चर्चा हुई है और वे इस पर ज्यादा बात नहीं करना चाहते। राशिद ने अब तक खेले 6 टेस्ट मैचों में शानदार प्रदर्शन करते हुए 45 विकेट चटकाए हैं। इंग्लैंड-न्यूजीलैंड पहला टेस्ट बारिश की वजह से रुका, इंग्लैंड का स्कोर 24/1 लॉर्ड्स में इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच शुरू हुए पहले टेस्ट मैच के पहले दिन का खेल बारिश की वजह रुक गया है। न्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। खेल रुकने तक इंग्लैंड ने अपनी पहली पारी में 10 ओवर में 1 विकेट खोकर 24 रन बना लिए हैं। क्रीज पर सलामी बल्लेबाज बेन डकेट 12 रन और जैकब बेथेल 4 रन बनाकर खेल रहे हैं। इससे पहले डेब्यू कर रहे सलामी बल्लेबाज एमिलियो गे सिर्फ 8 रन बनाकर काइल जैमिसन का शिकार बने।

मूवी रिव्यू – ‘मां बहन’:माधुरी दीक्षित-तृप्ति डिमरी भी नहीं बचा पाईं यह बिखरी हुई डार्क कॉमेडी, हंसी से ज्यादा सिर पकड़ने पर मजबूर करती है

मूवी रिव्यू – ‘मां बहन’:माधुरी दीक्षित-तृप्ति डिमरी भी नहीं बचा पाईं यह बिखरी हुई डार्क कॉमेडी, हंसी से ज्यादा सिर पकड़ने पर मजबूर करती है

डार्क कॉमेडी बनाना आसान नहीं होता। इसमें अपराध भी चाहिए, हास्य भी चाहिए और किरदारों का पागलपन भी। नेटफ्लिक्स की नई फिल्म मां बहन इन तीनों चीजों को एक साथ परोसने की कोशिश तो करती है, लेकिन आखिर तक आते आते यह तय नहीं कर पाती कि इसे कॉमेडी बनना है, थ्रिलर बनना है या पारिवारिक ड्रामा। नतीजा एक ऐसी फिल्म के रूप में सामने आता है जिसमें शोर बहुत है, लेकिन असर बेहद कम। फिल्म की कहानी कहानी रेखा और उसकी दो बेटियों के इर्द गिर्द घूमती है। एक दिन उनके घर की रसोई में एक लाश मिल जाती है और यहीं से शुरू होता है झूठ, छिपाने और बचने का सिलसिला। पड़ोसियों की ताकझांक, परिवार के भीतर की खींचतान और लगातार बढ़ती मुसीबतों के बीच तीनों महिलाएं इस राज को छिपाने की कोशिश करती हैं। सुनने में यह सेटअप दिलचस्प लगता है, लेकिन समस्या यह है कि फिल्म पहले आधे घंटे में जितना वादा करती है, उसके बाद उतना निभा नहीं पाती। फिल्म में एक्टिंग माधुरी दीक्षित पूरी फिल्म में सबसे ज्यादा ईमानदार नजर आती हैं। वह अपने अनुभव से कई कमजोर दृश्यों को संभालने की कोशिश करती हैं, लेकिन कमजोर लेखन उनके हाथ बांध देता है। तृप्ति डिमरी के हिस्से कुछ अच्छे पल आते हैं, मगर उनका किरदार लगातार एक जैसा बना रहता है। रवि किशन अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं, लेकिन उन्हें भी ऐसा कोई दृश्य नहीं मिलता जो लंबे समय तक याद रह सके। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि कलाकार मेहनत करते दिखते हैं, लेकिन किरदार कागज पर अधूरे लिखे गए हैं। दर्शक उनसे जुड़ने से पहले ही कहानी अगले मोड़ पर भागने लगती है। फिल्म का निर्देशन सुरेश त्रिवेणी ने पहले तुम्हारी सुलु जैसी संवेदनशील फिल्म दी थी, इसलिए उम्मीदें ज्यादा थीं। यहां उनका निर्देशन कई जगह असमंजस का शिकार लगता है। फिल्म डार्क कॉमेडी बनना चाहती है, लेकिन कई दृश्य इतने बनावटी लगते हैं कि न हंसी आती है और न तनाव महसूस होता है। सबसे बड़ी कमी स्क्रीनप्ले है। कई घटनाएं सिर्फ इसलिए होती हैं क्योंकि कहानी को आगे बढ़ाना है। किरदारों के फैसले स्वाभाविक नहीं लगते। फिल्म में रहस्य का तत्व भी है, लेकिन उसके खुलासे उतने प्रभावशाली नहीं हैं जितने होने चाहिए थे। तकनीकी तौर पर फिल्म ठीक ठाक है। कैमरा वर्क और प्रोडक्शन डिजाइन कहानी के छोटे शहर वाले माहौल को पकड़ते हैं, लेकिन एडिटिंग बार बार लय तोड़ती है। कई दृश्य जरूरत से ज्यादा लंबे और कई महत्वपूर्ण पल अधूरे महसूस होते हैं। फिल्म में संगीत फिल्म का संगीत ऐसा नहीं है जो थिएटर या ओटीटी से बाहर निकलने के बाद याद रह जाए। बैकग्राउंड स्कोर कुछ जगह माहौल बनाने की कोशिश करता है, लेकिन कहानी की कमजोर पकड़ के कारण उसका असर भी सीमित रह जाता है। फिल्म को लेकर फाइनल वर्डिक्ट मां बहन एक शानदार विचार पर बनी औसत फिल्म है। लाश, झूठ और अजीबोगरीब परिवार वाला इसका सेटअप दिलचस्प था, लेकिन कमजोर लेखन, अस्थिर टोन और अधूरी कॉमेडी इसे खास बनने से रोक देती है। माधुरी दीक्षित और तृप्ति डिमरी अपनी तरफ से पूरी कोशिश करती हैं, लेकिन जब कहानी ही बार बार पटरी से उतरती रहे तो कलाकार भी ज्यादा कुछ नहीं कर सकते। अगर आप सिर्फ स्टार कास्ट के लिए देखना चाहते हैं तो एक बार मौका दे सकते हैं, लेकिन मजबूत डार्क कॉमेडी की उम्मीद लेकर बैठेंगे तो निराशा हाथ लगेगी।

दुनियाभर के टॉप लग्जरी ब्रांड्स का ‘टॉप सीक्रेट’ मुंबई में:क्रिस्टियन डियोर, गुची, प्रादा के कपड़ों पर कढ़ाई चाणक्य इंटरनेशनल करती है

दुनियाभर के टॉप लग्जरी ब्रांड्स का ‘टॉप सीक्रेट’ मुंबई में:क्रिस्टियन डियोर, गुची, प्रादा के कपड़ों पर कढ़ाई चाणक्य इंटरनेशनल करती है

क्रिस्टियन डियोर, प्रादा, गुची जैसे दुनिया के 30 से ज्यादा टॉप लग्जरी ब्रांड्स के कपड़ों पर भारत में कढ़ाई होती है। ये नामी ब्रांड्स अपने कपड़ों की खास कढ़ाई मुंबई की ‘चाणक्य इंटरनेशनल’ से करवाते हैं। यहां के कारीगर हाथ की कढ़ाई से 5,000 साल पुरानी विरासत बचाए हुए हैं। चाणक्य इंटरनेशनल की शुरुआत गुजरात के विनोद शाह ने 1984 में की थी। इसका मकसद भारतीय कपड़ों पर सामूहिक रूप से की गई कारीगरी का पूरी दुनिया में पहचान दिलाना था। दुनिया के सबसे महंगे डिजाइनर और रेडीमेड कपड़ों में भारतीय कढ़ाई की मांग सबसे ज्यादा है। इसकी क्वालिटी का कोई मुकाबला नहीं है। पश्चिमी देशों में यह हुनर खत्म हो चुका है। भारत सदियों से दुनिया को कपड़े निर्यात कर रहा है। 16वीं और 17वीं सदी में भी भारत से फ्रांस सहित कई देशों को मलमल, सिल्क और कढ़ाई वाले कपड़े भेजे जाते थे। यही पुरानी विरासत आज भी भारतीय कला को आधुनिक बनाए हुए है। विनोद शाह की बेटी 49 वर्षीय करिश्मा स्वाली पिछले 30 साल से चाणक्य की मैनेजिंग और क्रिएटिव डायरेक्टर हैं। करिश्मा यहां 2,400 कारीगरों का नेतृत्व करती हैं। बचपन में जब वह पहली बार पिता की वर्कशॉप गईं, तो वहां सामूहिक काम देखकर उन्हें अहसास हुआ कि मिलकर जुटने से नतीजा उम्मीद से सुंदर होता है। डियोर फॉल 2023 शो के दौरान चाणक्य इंटरनेशनल को एक बड़ी टेक्सटाइल कलाकृति बनाने की जिम्मेदारी मिली थी। इसमें 1,008 मास्टर्स और महिलाओं ने मिलकर एक विशाल पारंपरिक तोरण बनाया था, जिसका इस्तेमाल घरों में स्वागत के लिए होता है। करिश्मा ने हाल ही में वेनिस बिएनाले और रोम की वेटिकन लाइब्रेरी में चाणक्य की कलाकृतियों का प्रदर्शन किया है। करिश्मा का मानना है कि इस कला की सबसे बड़ी ताकत यह है कि एआई कभी भी हाथ के इस हुनर की जगह नहीं ले सकता है। हुनर – नई पीढ़ी को सिखा रहे कढ़ाई, एआई भी नहीं ले सकती इंसानी कला की जगह करिश्मा ने नई पीढ़ी के लिए ‘चाणक्य स्कूल ऑफ क्राफ्ट’ खोला है। सबसे बड़ी चुनौती करिकुलम बनाना नहीं, बल्कि स्टूडेंट्स का न आना था। करिश्मा ने खुद गरीब बस्तियों में घर-घर जाकर महिलाओं को मुफ्त हुनर सिखाने के लिए मनाया। तब संदेह के बीच सिर्फ 22 महिलाएं अपने पतियों और सास के साथ आईं, जो बाहर बैठकर इंतजार करते थे। आज 10 साल बाद स्कूल में 1,400 महिलाएं हैं और लंबी वेटिंग लिस्ट है।

कंगना रनोट के बयान पर भड़के अशोक पंडित:बोले- वो बकवास करती है, इसलिए बैन किया था; एक्ट्रेस ने रणवीर सिंह को सपोर्ट किया था

कंगना रनोट के बयान पर भड़के अशोक पंडित:बोले- वो बकवास करती है, इसलिए बैन किया था; एक्ट्रेस ने रणवीर सिंह को सपोर्ट किया था

फिल्म ‘डॉन 3’ विवाद में रणवीर सिंह के समर्थन में दिए गए कंगना रनोट के बयान पर FWICE के चीफ एडवाइजर अशोक पंडित ने रिएक्शन दिया। उन्होंने कहा कि कंगना बकवास करती हैं, इसलिए मैंने उन्हें बैन किया था। हिन्दुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में पंडित ने कहा, “इंडस्ट्री के बहुत से लोग हमें गालियां देने लगे हैं। कल कंगना ने भी कुछ कहा। लोग पूरे मामले को समझे बिना ही कमेंट कर रहे हैं। कंगना ने यह भी कहा कि मुझे इंडस्ट्री ने बैन कर दिया है। मैंने कहा, ‘तुम बेकार की बातें करती हो, इसलिए मैंने तुम्हें बैन किया था।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे इसकी परवाह नहीं है। यहां पूरी फिल्म इंडस्ट्री का बड़ा मुद्दा चल रहा है। तुम्हें तो असली मामला भी नहीं पता, फिर भी बोल रही हो। हम रणवीर के खिलाफ नहीं हैं। हम सिर्फ उस घटना की बात कर रहे हैं जो हुई है।” रणवीर को लेकर कंगना ने क्या कहा था? रणवीर सिंह को मिलने नॉन-कोऑपरेशन को लेकर कंगना ने कहा था, “आप मुझसे यह सवाल पूछ रहे हैं, मुझे तो हर किसी ने बैन किया हुआ है। मैं यही कहना चाहूंगी कि जब आपकी हैसियत बढ़ती है, तो आपके दुश्मन भी बढ़ते हैं। ऐसा कभी नहीं हो सकता कि आपकी हैसियत बढ़े और दुश्मन न बढ़ें। आज रणवीर सिंह को सोचना चाहिए कि उनकी क्या हैसियत है कि उनके इतने दुश्मन बन गए हैं। यह एक तरह से अच्छा ही है।” कंगना ने अपनी जिंदगी का उदाहरण देते हुए आगे कहा था कि जब आप लाइफ में आगे बढ़ते हैं तो कई तरह की मुश्किलें आती हैं। उन्होंने कहा था, “मेरे साथ तो इतना सब कुछ हुआ है, लेकिन देखिए आज मैं अच्छा काम कर रही हूं। मेरी गाड़ी भी अच्छी चल रही है। इसलिए इन चीजों से कोई फर्क नहीं पड़ता है, समय के साथ सब कुछ ठीक हो जाएगा।” बता दें कि बुधवार को फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने रणवीर सिंह के खिलाफ जारी नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव (NCD) को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया। रणवीर पर नॉन-कोऑपरेशन का फैसला FWICE ने वापस लिया FWICE ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद आधिकारिक बयान में कहा कि इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) के हस्तक्षेप और अपील के बाद यह फैसला लिया गया है। अशोक पंडित बोले- बैन नहीं था अशोक पंडित ने कहा कि FWICE ने कभी भी रणवीर सिंह पर बैन नहीं लगाया था। उन्होंने मीडिया से अपील की कि इस मामले को बैन के तौर पर पेश न किया जाए, क्योंकि इससे कन्फ्यूजन पैदा होता है। पंडित ने यह भी कहा कि FWICE के पास किसी को बैन करने का अधिकार नहीं है। संगठन केवल नॉन-कोऑपरेशन यानी सहयोग न करने का फैसला ले सकता है। उनके मुताबिक, यह एक लोकतांत्रिक अधिकार है कि कोई तकनीशियन, वर्कर, निर्माता या कलाकार किसी व्यक्ति के साथ काम करना चाहता है या नहीं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

कंगना रनोट के बयान पर भड़के अशोक पंडित:बोले- वो बकवास करती है, इसलिए बैन किया था; एक्ट्रेस ने रणवीर सिंह को सपोर्ट किया था

कंगना रनोट के बयान पर भड़के अशोक पंडित:बोले- वो बकवास करती है, इसलिए बैन किया था; एक्ट्रेस ने रणवीर सिंह को सपोर्ट किया था

फिल्म ‘डॉन 3’ विवाद में रणवीर सिंह के समर्थन में दिए गए कंगना रनोट के बयान पर FWICE के चीफ एडवाइजर अशोक पंडित ने रिएक्शन दिया। उन्होंने कहा कि कंगना बकवास करती हैं, इसलिए मैंने उन्हें बैन किया था। हिन्दुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में पंडित ने कहा, “इंडस्ट्री के बहुत से लोग हमें गालियां देने लगे हैं। कल कंगना ने भी कुछ कहा। लोग पूरे मामले को समझे बिना ही कमेंट कर रहे हैं। कंगना ने यह भी कहा कि मुझे इंडस्ट्री ने बैन कर दिया है। मैंने कहा, ‘तुम बेकार की बातें करती हो, इसलिए मैंने तुम्हें बैन किया था।” उन्होंने आगे कहा, “मुझे इसकी परवाह नहीं है। यहां पूरी फिल्म इंडस्ट्री का बड़ा मुद्दा चल रहा है। तुम्हें तो असली मामला भी नहीं पता, फिर भी बोल रही हो। हम रणवीर के खिलाफ नहीं हैं। हम सिर्फ उस घटना की बात कर रहे हैं जो हुई है।” रणवीर को लेकर कंगना ने क्या कहा था? रणवीर सिंह को मिलने नॉन-कोऑपरेशन को लेकर कंगना ने कहा था, “आप मुझसे यह सवाल पूछ रहे हैं, मुझे तो हर किसी ने बैन किया हुआ है। मैं यही कहना चाहूंगी कि जब आपकी हैसियत बढ़ती है, तो आपके दुश्मन भी बढ़ते हैं। ऐसा कभी नहीं हो सकता कि आपकी हैसियत बढ़े और दुश्मन न बढ़ें। आज रणवीर सिंह को सोचना चाहिए कि उनकी क्या हैसियत है कि उनके इतने दुश्मन बन गए हैं। यह एक तरह से अच्छा ही है।” कंगना ने अपनी जिंदगी का उदाहरण देते हुए आगे कहा था कि जब आप लाइफ में आगे बढ़ते हैं तो कई तरह की मुश्किलें आती हैं। उन्होंने कहा था, “मेरे साथ तो इतना सब कुछ हुआ है, लेकिन देखिए आज मैं अच्छा काम कर रही हूं। मेरी गाड़ी भी अच्छी चल रही है। इसलिए इन चीजों से कोई फर्क नहीं पड़ता है, समय के साथ सब कुछ ठीक हो जाएगा।” बता दें कि बुधवार को फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने रणवीर सिंह के खिलाफ जारी नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव (NCD) को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया। रणवीर पर नॉन-कोऑपरेशन का फैसला FWICE ने वापस लिया FWICE ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद आधिकारिक बयान में कहा कि इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) के हस्तक्षेप और अपील के बाद यह फैसला लिया गया है। अशोक पंडित बोले- बैन नहीं था अशोक पंडित ने कहा कि FWICE ने कभी भी रणवीर सिंह पर बैन नहीं लगाया था। उन्होंने मीडिया से अपील की कि इस मामले को बैन के तौर पर पेश न किया जाए, क्योंकि इससे कन्फ्यूजन पैदा होता है। पंडित ने यह भी कहा कि FWICE के पास किसी को बैन करने का अधिकार नहीं है। संगठन केवल नॉन-कोऑपरेशन यानी सहयोग न करने का फैसला ले सकता है। उनके मुताबिक, यह एक लोकतांत्रिक अधिकार है कि कोई तकनीशियन, वर्कर, निर्माता या कलाकार किसी व्यक्ति के साथ काम करना चाहता है या नहीं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

एलिस पेरी की युवा खिलाड़ियों को सलाह:अलग-अलग तरह के खेल खेलें, बेहतर खिलाड़ी के साथ बेहतर इंसान भी बनेंगे

एलिस पेरी की युवा खिलाड़ियों को सलाह:अलग-अलग तरह के खेल खेलें, बेहतर खिलाड़ी के साथ बेहतर इंसान भी बनेंगे

जब 16 साल की एक लड़की 2007 में ऑस्ट्रेलिया की जर्सी पहनकर डार्विन के एक छोटे से मैदान पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने उतरी थी, तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि वही खिलाड़ी एक दिन सदी की सर्वश्रेष्ठ महिला क्रिकेटर चुनी जाएगी। लगभग दो दशक बाद एलिस पेरी के नाम रिकॉर्डों का अंबार है, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि खेल के साथ बना रहा वह रिश्ता है, जिसने उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। 35 वर्षीय ऑलराउंडर पेरी कहती हैं कि उनके करियर का सबसे खूबसूरत पहलू यह रहा कि हर साल कुछ नया सीखने और खुद को बेहतर बनाने का मौका मिला। क्रिकेट लगातार बदलता रहा। खासकर टी20 में नए शॉट्स और नई टेक्निक सीखना उनके लिए चुनौती भी था और आनंद भी। उनके अनुसार, खेल में असली संतोष तब मिलता है, जब आप अपनी सीमाओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं। इंग्लैंड के खिलाफ एशेज टेस्ट भी पेरी की यादों का अहम हिस्सा हैं। खासकर 2017 में नॉर्थ सिडनी ओवल पर लगाया गया दोहरा शतक। वे कहती हैं कि उस पारी की सबसे बड़ी खुशी यह थी कि उनके पिता स्टैंड में बैठकर उसे देख रहे थे। क्रिकेट सिखाने से लेकर हर मैच से पहले बात करने तक, उनके पिता आज भी उनकी सबसे बड़ी ताकत हैं। पेरी अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय परिवार को देती हैं। उनके लिए मां प्रेरणा हैं, पिता मार्गदर्शक और बड़ा भाई सबसे अच्छा दोस्त। वहीं, कप्तानों की बात करें तो मेग लैनिंग की शांत नेतृत्व क्षमता और कठिन परिस्थितियों में फैसले लेने की कला ने उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित किया। नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को सलाह देते हुए पेरी कहती हैं कि सिर्फ एक खेल तक सीमित न रहें। जितने ज्यादा खेल खेलेंगे और जितने ज्यादा अनुभव हासिल करेंगे, उतना बेहतर खिलाड़ी और इंसान बनेंगे। उनके मुताबिक खेल का असली मकसद आनंद है। अगर मजा खत्म हो गया, तो खेल का सबसे खूबसूरत हिस्सा भी खो जाएगा। 2020 वर्ल्ड कप उनका सबसे यादगार लम्हा महिला क्रिकेट के इतिहास की सबसे यादगार तस्वीरों में से एक 2020 टी20 वर्ल्ड कप फाइनल की है, जब मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में 86 हजार से ज्यादा दर्शक मौजूद थे। दिलचस्प बात यह है कि उस मैच में पेरी चोट के कारण नहीं खेल सकीं, लेकिन फिर भी वह इसे अपने करियर के सबसे खास पलों में गिनती हैं। उनके मुताबिक यह सिर्फ एक मैच नहीं था, बल्कि उन सभी खिलाड़ियों और लोगों के संघर्ष का सम्मान था जिन्होंने वर्षों तक महिला क्रिकेट को आगे बढ़ाने के लिए काम किया।

‘कारामेलो’ कुत्ते पर भिड़े ब्राजील-मैक्सिको:करेंसी और सांस्कृतिक प्रतीक का विवाद; ब्राजील बोला- सांबा ही है हमारी पहचान

‘कारामेलो’ कुत्ते पर भिड़े ब्राजील-मैक्सिको:करेंसी और सांस्कृतिक प्रतीक का विवाद; ब्राजील बोला- सांबा ही है हमारी पहचान

दुनिया में देशों के बीच विवाद आमतौर पर सीमा, व्यापार या राजनीति को लेकर होते हैं, लेकिन इन दिनों ब्राजील और मैक्सिको के बीच बहस की वजह एक आवारा कुत्ता बना हुआ है। भूरे रंग के देसी कुत्ते, जो ब्राजील में करोड़ों की संख्या में पाए जाते हैं, वहां ‘कारामेलो’ कहलाते हैं। अब यही कुत्ते दोनों देशों के बीच पहचान की लड़ाई के केंद्र में आ गए हैं। विवाद तब शुरू हुआ जब अप्रैल में मैक्सिको ने ‘पेरो कारामेलो’ को अपनी स्थानीय नस्ल घोषित कर दिया और इसे सांस्कृतिक प्रतीक का दर्जा दिया। इसके बाद ब्राजील में सोशल मीडिया से लेकर अखबारों में बवाल मच गया, लोग सवाल उठाने लगे कि जिस कुत्ते को दशकों से ब्राजील की पहचान माना जाता है, उस पर मैक्सिको दावा कैसे कर सकता है। रियो डी जेनेरियो की लुसियाना कहती हैं, कारामेलो ब्राजील का चेहरा है। कोई इसे गैर-ब्राजीलियाई कैसे कह सकता है? कारामेलो सिर्फ आवारा जानवर नहीं हैं। वे जनजीवन में इस कदर रचे-बसे हैं कि मीम्स, टी-शर्ट्स, वायरल गानों, झांकियों और फिल्मों में भी जगह बना चुके हैं। पिछले साल नेटफ्लिक्स पर इनके ऊपर ‘कारामेलो’ नाम की फिल्म भी आई थी। इतना ही नहीं, हाल ही में इन्हें ब्राजील की करेंसी पर छापने का प्रस्ताव भी संसद में आया था। मैक्सिको के पशु कल्याण कार्यकर्ता कहते हैं कि वहां भी ऐसे ही कुत्ते बड़ी संख्या में मौजूद हैं। उनका मानना है कि दोनों देशों का मौसम और इतिहास काफी हद तक समान रहा है। यह केवल एक देश का नहीं, बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका का कुत्ता है।’ दिलचस्प बात है कि बहस पहचान की है, लेकिन समस्या कहीं बड़ी है। ब्राजील में आज भी 2 करोड़ से अधिक आवारा कुत्ते हैं और उनमें 90% से ज्यादा कारामेलो हैं। लोकप्रिय होने के बावजूद गोद लेने के समय लोग अक्सर विदेशी नस्लों को प्राथमिकता देते हैं। यही वजह है कि दोनों देशों के पशु प्रेमी एक बात पर सहमत हैं-कारामेलो चाहे ब्राजील का हो, मैक्सिको का उसे सिर्फ ‘आवारा’ नहीं, बल्कि एक ऐसे साथी के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसे घर और अपनापन दोनों मिल सके। 300 विदेशी प्रजातियों से विकसित है अनोखे नस्ल का यह डॉग वैज्ञानिक दृष्टि से कारामेलो किसी एक शुद्ध नस्ल के कुत्ते नहीं हैं। एक अध्ययन के मुताबिक इन कुत्तों में करीब 300 नस्लों का मिश्रण है। पुर्तगाली उपनिवेशकों और बाद में इटली, जर्मनी, स्पेन तथा जापान से आए प्रवासियों के साथ अलग-अलग नस्लों के कुत्ते ब्राजील पहुंचे थे। इन्हीं के मेल से यह अनोखा समूह विकसित हुआ। मिश्रित नस्ल होने के कारण इनमें आनुवंशिक बीमारियों का खतरा भी अपेक्षाकृत कम होता है।

सोना ₹545 बढ़कर ₹1.56 लाख का 10 ग्राम हुआ:चांदी आज ₹2,432 गिरकर 2.59 लाख पर आई, कैरेट के हिसाब से देखें गोल्ड की कीमत

सोना ₹545 बढ़कर ₹1.56 लाख का 10 ग्राम हुआ:चांदी आज ₹2,432 गिरकर 2.59 लाख पर आई, कैरेट के हिसाब से देखें गोल्ड की कीमत

सोने के दाम में आज यानी 4 जून को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम आज 545 रुपए बढ़कर 1.56 लाख रुपए हो गया है। हालांकि चांदी के दाम में आज गिरावट है। 1 किलो चांदी की कीमत 2,432 रुपए कम होकर 2.59 लाख रुपए पर आ गई है। कैरेट के हिसाब से सोने की कीमत देश के बड़े शहरों में सोने की कीमत सोर्स: goodreturns 4 जून 2026 सोना इस साल 23 हजार और चांदी 29 हजार महंगी इस साल सोने-चांदी की कीमत में तेजी रही है। सोना 2026 में अब तक 23 हजार रुपए और चांदी 29 हजार रुपए महंगी हुई है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.56 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.59 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। इस साल अब तक सोने-चांदी की चाल नोट:- सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत किलो में | सोर्स:- IBJA ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें।

होर्मुज संकट के बीच वेनेजुएलाई राष्ट्रपति भारत आईं:PM मोदी से मिलीं, तेल सप्लाई पर बड़ा समझौता संभव

होर्मुज संकट के बीच वेनेजुएलाई राष्ट्रपति भारत आईं:PM मोदी से मिलीं, तेल सप्लाई पर बड़ा समझौता संभव

वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने बुधवार को पीएम मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत और वेनेजुएला के बीच ऊर्जा सहयोग तेजी से बढ़ा है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच तेल सप्लाई को लेकर बड़ा समझौता हो सकता है। इससे पहले विदेश मंत्री जयशंकर ने भी डेल्सी रोड्रिगेज से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि भारत-वेनेजुएला संबंधों को मजबूत करने में रोड्रिगेज की लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका रही है और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बातचीत दोनों देशों के सहयोग को और आगे बढ़ाएगी। अमेरिका ने 4 जनवरी को तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का तख्तापलट कर दिया था। इसके बाद से रोड्रिगेज कार्यवाहक राष्ट्रपति हैं। रोड्रिगेज की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। होर्मुज संकट की वजह से भारत वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रहा है। वेनेजुएला तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना एनर्जी ट्रैक करने वाली एजेंसी केप्लर के डेटा के मुताबिक, मई 2026 में वेनेजुएला ने तेल सप्लाई के मामले में सऊदी अरब और अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। अभी केवल रूस और UAE ने ही उससे ज्यादा तेल सप्लाई किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने भारत को वेनेजुएला से होने वाली तेल सप्लाई अप्रैल के मुकाबले करीब 50 फीसदी बढ़ गई है। अमेरिका ने जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के बाद वहां के तेल निर्यात पर कुछ ढील दी थी। उसी के बाद अप्रैल से भारत में फिर से वेनेजुएला का तेल आना शुरू हुआ। करीब 303 अरब बैरल तेल भंडार के साथ वेनेजुएला दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार वाला देश माना जाता है। यह भंडार सऊदी अरब और अमेरिका से भी ज्यादा है। अब अमेरिका और वेनेजुएला दोनों कोशिश करेंगे कि भारत के साथ ऐसा समझौता हो, जिससे वेनेजुएला से तेल निर्यात में आई यह तेजी आगे भी जारी रह सके। पहले भी भारत के बड़े सप्लायर्स में शामिल रहा है वेनेजुएला वेनेजुएला भारत के बड़े तेल सप्लायर्स में शामिल रहा है। 2012 में यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना था और कई साल तक टॉप-5 में रहा। 2019 तक वेनेजुएला हर साल करीब 1.6 करोड़ टन कच्चा तेल भारत भेज रहा था। उसी दौरान दोनों देशों का व्यापार बढ़कर 6.4 अरब डॉलर पहुंच गया था, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा तेल कारोबार का था। हालांकि, अमेरिका की तरफ से वेनेजुएला के तेल खरीदारों पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण भारत ने करीब एक साल तक वहां से तेल खरीद बंद कर दी थी। 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार घटकर 67.9 करोड़ डॉलर रह गया। भारत की रिफाइनरियों के लिए फायदेमंद है वेनेजुएलाई तेल वेनेजुएला का कच्चा तेल भारी और ज्यादा सल्फर वाला होता है। इसे प्रोसेस करना आसान नहीं माना जाता। हालांकि, भारत की आधुनिक रिफाइनरियां इस तरह के तेल को डीजल और जेट फ्यूल जैसे उत्पादों में बदल सकती हैं। यह तेल तुलनात्मक रूप से सस्ता भी पड़ता है। इसी वजह से भारतीय रिफाइनरियां इसे आर्थिक रूप से फायदे का सौदा मानती हैं। वहीं, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि वेनेजुएला भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार है। उन्होंने बताया कि भारत की सरकारी तेल कंपनियों का वहां निवेश भी है। भारत सरकार के मुताबिक, भारतीय सरकारी कंपनियों की वेनेजुएला के तेल सेक्टर में अच्छी हिस्सेदारी है और वे आगे भी वहां निवेश बढ़ाने के मौके तलाश रही हैं। रोड्रिगेज तेल मंत्री रहते भी भारत आ चुकी हैं रिपोर्ट्स के मुताबिक डेल्सी रोड्रिगेज छठी बार भारत आई हैं। इससे पहले फरवरी 2025 में भी भारत आई थीं। तब वे वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति और तेल मंत्री थीं। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एनर्जी वीक’ में हिस्सा लिया था। इस दौरान भारत और वेनेजुएला के बीच तेल सप्लाई बढ़ाने, रिफाइनिंग सहयोग और ऊर्जा निवेश पर बातचीत हुई थी। उस समय अमेरिकी प्रतिबंधों में आंशिक ढील के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने फिर से वेनेजुएलाई तेल खरीद बढ़ाने में रुचि दिखाई थी।

होर्मुज संकट के बीच वेनेजुएलाई राष्ट्रपति भारत आईं:PM मोदी से मिलीं, तेल सप्लाई पर बड़ा समझौता संभव

होर्मुज संकट के बीच वेनेजुएलाई राष्ट्रपति भारत आईं:PM मोदी से मिलीं, तेल सप्लाई पर बड़ा समझौता संभव

वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने बुधवार को पीएम मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत और वेनेजुएला के बीच ऊर्जा सहयोग तेजी से बढ़ा है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच तेल सप्लाई को लेकर बड़ा समझौता हो सकता है। इससे पहले विदेश मंत्री जयशंकर ने भी डेल्सी रोड्रिगेज से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि भारत-वेनेजुएला संबंधों को मजबूत करने में रोड्रिगेज की लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका रही है और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बातचीत दोनों देशों के सहयोग को और आगे बढ़ाएगी। अमेरिका ने 4 जनवरी को तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का तख्तापलट कर दिया था। इसके बाद से रोड्रिगेज कार्यवाहक राष्ट्रपति हैं। रोड्रिगेज की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। होर्मुज संकट की वजह से भारत वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रहा है। वेनेजुएला तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना एनर्जी ट्रैक करने वाली एजेंसी केप्लर के डेटा के मुताबिक, मई 2026 में वेनेजुएला ने तेल सप्लाई के मामले में सऊदी अरब और अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। अभी केवल रूस और UAE ने ही उससे ज्यादा तेल सप्लाई किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने भारत को वेनेजुएला से होने वाली तेल सप्लाई अप्रैल के मुकाबले करीब 50 फीसदी बढ़ गई है। अमेरिका ने जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के बाद वहां के तेल निर्यात पर कुछ ढील दी थी। उसी के बाद अप्रैल से भारत में फिर से वेनेजुएला का तेल आना शुरू हुआ। करीब 303 अरब बैरल तेल भंडार के साथ वेनेजुएला दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार वाला देश माना जाता है। यह भंडार सऊदी अरब और अमेरिका से भी ज्यादा है। अब अमेरिका और वेनेजुएला दोनों कोशिश करेंगे कि भारत के साथ ऐसा समझौता हो, जिससे वेनेजुएला से तेल निर्यात में आई यह तेजी आगे भी जारी रह सके। पहले भी भारत के बड़े सप्लायर्स में शामिल रहा है वेनेजुएला वेनेजुएला भारत के बड़े तेल सप्लायर्स में शामिल रहा है। 2012 में यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना था और कई साल तक टॉप-5 में रहा। 2019 तक वेनेजुएला हर साल करीब 1.6 करोड़ टन कच्चा तेल भारत भेज रहा था। उसी दौरान दोनों देशों का व्यापार बढ़कर 6.4 अरब डॉलर पहुंच गया था, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा तेल कारोबार का था। हालांकि, अमेरिका की तरफ से वेनेजुएला के तेल खरीदारों पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण भारत ने करीब एक साल तक वहां से तेल खरीद बंद कर दी थी। 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार घटकर 67.9 करोड़ डॉलर रह गया। भारत की रिफाइनरियों के लिए फायदेमंद है वेनेजुएलाई तेल वेनेजुएला का कच्चा तेल भारी और ज्यादा सल्फर वाला होता है। इसे प्रोसेस करना आसान नहीं माना जाता। हालांकि, भारत की आधुनिक रिफाइनरियां इस तरह के तेल को डीजल और जेट फ्यूल जैसे उत्पादों में बदल सकती हैं। यह तेल तुलनात्मक रूप से सस्ता भी पड़ता है। इसी वजह से भारतीय रिफाइनरियां इसे आर्थिक रूप से फायदे का सौदा मानती हैं। वहीं, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि वेनेजुएला भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार है। उन्होंने बताया कि भारत की सरकारी तेल कंपनियों का वहां निवेश भी है। भारत सरकार के मुताबिक, भारतीय सरकारी कंपनियों की वेनेजुएला के तेल सेक्टर में अच्छी हिस्सेदारी है और वे आगे भी वहां निवेश बढ़ाने के मौके तलाश रही हैं। रोड्रिगेज तेल मंत्री रहते भी भारत आ चुकी हैं रिपोर्ट्स के मुताबिक डेल्सी रोड्रिगेज छठी बार भारत आई हैं। इससे पहले फरवरी 2025 में भी भारत आई थीं। तब वे वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति और तेल मंत्री थीं। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एनर्जी वीक’ में हिस्सा लिया था। इस दौरान भारत और वेनेजुएला के बीच तेल सप्लाई बढ़ाने, रिफाइनिंग सहयोग और ऊर्जा निवेश पर बातचीत हुई थी। उस समय अमेरिकी प्रतिबंधों में आंशिक ढील के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने फिर से वेनेजुएलाई तेल खरीद बढ़ाने में रुचि दिखाई थी।