पीएम को सलाह देने के सवाल पर मनोज बाजपेयी बोले:मैं इन सब चक्करों में नहीं पड़ता, हर व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी और विशेषज्ञता होती है

फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ के प्रमोशन के दौरान अभिनेता मनोज बाजपेयी ने राजनीति और नेतृत्व से जुड़े सवाल पर संतुलित जवाब दिया। दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री को एक सलाह देनी हो तो वह क्या देंगे, तो उन्होंने कहा कि वह खुद को ऐसी स्थिति में नहीं मानते कि प्रधानमंत्री को कोई सलाह दे सकें। मनोज बाजपेयी ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री को क्या सलाह दूंगा? मैं उस स्थिति में नहीं हूं। मैं इन सब चक्करों में नहीं पड़ता हूं।” इससे स्पष्ट था कि वह राजनीतिक बहसों और टिप्पणियों से दूरी बनाए रखना पसंद करते हैं। बातचीत के दौरान मनोज ने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी और विशेषज्ञता का क्षेत्र होता है। उनका मानना है कि आर्थिक संकट, नीतिगत फैसले और देश चलाने जैसे मुद्दों पर फैसला लेने का काम उसी क्षेत्र के विशेषज्ञों का है। इंटरव्यू में 1991 के आर्थिक संकट और मौजूदा वैश्विक हालात पर सवाल पूछे जाने पर मनोज ने कहा कि ऐसे मामलों में आम आदमी या कलाकार की भूमिका सीमित होती है। अर्थव्यवस्था को संभालने और संकट से निकालने का काम विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं का है। मनोज ने कहा, “आपको पत्रकार की जिम्मेदारी निभानी आती है, मुझे अभिनेता की जिम्मेदारी निभानी आती है। इसके अलावा हम सिर्फ पढ़ सकते हैं और समझने की कोशिश कर सकते हैं कि देश और दुनिया में क्या हो रहा है।” उन्होंने बताया कि मुश्किल समय में आम लोग खर्च कम करके और आर्थिक रूप से सतर्क रहकर परिस्थितियों का सामना करते हैं। उनके मुताबिक, कई लोग भविष्य की अनिश्चितताओं को देखते हुए बड़े खर्चों से बच रहे हैं और बचत सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं। मनोज बाजपेयी का मानना है कि किसी भी क्षेत्र में विशेषज्ञता का सम्मान होना चाहिए। इसलिए वह राजनीतिक या आर्थिक फैसलों पर सार्वजनिक रूप से सलाह देने से बचते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा अपने काम पर ध्यान दिया है और वही उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। वर्क फ्रंट पर मनोज बाजपेयी जल्द ही फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ में नजर आएंगे। फिल्म 1991 के आर्थिक संकट की पृष्ठभूमि पर आधारित है और इसमें एक आरबीआई गवर्नर के सामने आने वाली चुनौतियों को दिखाया गया है। मनोज का कहना है कि यह सिर्फ अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, दबाव और कठिन परिस्थितियों में फैसले लेने की कहानी भी है। _________________________________ मनोज बाजपेयी का यह इंटरव्यू भी पढ़ें… आर्थिक संकट में देश संभालना बड़ी जिम्मेदारी:मनोज बाजपेयी बोले- आम आदमी खर्च नियंत्रित कर सकता है, लेकिन देश को संकट से एक्सपर्ट्स ही निकालते हैं 1991 के आर्थिक संकट पर बनी फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ को लेकर मनोज बाजपेयी ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। उन्होंने कहा कि फिल्म में एक आरबीआई गवर्नर के देश की उम्मीद बनने और देश को संकट से निकालने की जंग दिखाई गई है। मनोज ने इसे ‘इकोनॉमिक थ्रिलर’ बताया। उन्होंने वैश्विक हालात, ईरान-यूएस तनाव, आम आदमी की परेशानियों, ओटीटी और थिएटर की कमी पर भी राय रखी।पूरा इंटरव्यू पढ़ें..
ATF की कीमतों पर ₹75.60 प्रति लीटर कैप लगाया:सरकार ने ₹10,000 करोड़ के फंड को भी मंजूरी दी, इससे जेट-फ्यूल की कीमतों को कंट्रोल किया जाएगा

मिडिल ईस्ट संघर्ष के बीच सरकार ने एयरलाइंस कंपनियों, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) और हवाई यात्रियों को राहत देने के लिए ₹10,000 करोड़ के एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड को मंजूरी दी। इसके अलावा सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमत ₹75.60 प्रति लीटर पर फिक्स (कैप) कर दी हैं। एटीएफ की बढ़ती कीमतों को स्थिर करने के लिए यह फैसले लिए गए हैं। बुधवार (3 जून) को नई दिल्ली में हुई केंद्रीय कैबिनेट मीटिंग में इस फंड को मंजूरी दी गई है। यह फंड ATF की कीमतों में उतार-चढ़ाव को कंट्रोल करेगा। इस फंड का इस्तेमाल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार के हवाई ऑपरेशन्स के लिए किया जाएगा। मार्च से मई के बीच 2.5 गुना बढ़े दाम, ₹75.6 पर कैपिंग सरकार के मुताबिक, मिडिल ईस्ट संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में हवाई ईंधन (ATF) की कीमतों में भारी उछाल आया है। मार्च 2026 में ATF की कीमत जो 60.5 रुपए प्रति लीटर थी, वह मई 2026 में दोगुनी से भी ज्यादा बढ़कर 142 रुपए प्रति लीटर के पार पहुंच गई है। बढ़ती कीमतों से राहत देने के लिए सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमत को 75.6 रुपए प्रति लीटर पर कैप (अधिकतम सीमा तय) कर दिया है। एयरलाइंस कंपनियों के कुल ऑपरेटिंग खर्च में अकेले ATF की हिस्सेदारी लगभग 40% होती है। ऐसे में कीमतों में आए इस तेज उछाल ने एयरलाइंस और तेल कंपनियों दोनों पर बड़ा आर्थिक दबाव बना दिया था। नए फंड से होने वाले 6 बड़े फायदे सरकार ने बताया है कि ₹10,000 करोड़ के इस नए फंड की मदद से एविएशन सेक्टर को यह 6 बड़े फायदे मिलेंगे… ओएमसी को ब्याज मुक्त एडवांस के रूप में मिलेगी बजटीय सहायता केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार ने शेड्यूल्ड इंडियन एयरलाइंस को उनके घरेलू और इंटरनेशनल ऑपरेशंस के लिए एटीएफ प्राइस स्टेबलाइजेशन सपोर्ट देने का फैसला किया है। इसके लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को अधिकतम ₹10,000 करोड़ तक की वन-टाइम बजटीय सहायता मंजूर की गई है। यह बजटीय सहायता ओएमसी को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की अनुदान मांगों के माध्यम से ब्याज मुक्त एडवांस के रूप में दी जाएगी। अंतरराष्ट्रीय कीमतें कम होने पर सरकार वापस लेगी पैसा सरकार की यह सहायता पूरी तरह अस्थायी है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की कीमतें कम (मॉडरेट) हो जाएंगी, तब ओएमसी से अंतर की राशि (डिफरेंशियल अमाउंट) वापस वसूल ली जाएगी। इस वसूली गई रकम को भारत के कंसोलिडेटेड फंड में वापस जमा किया जाएगा। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक कि पूरी सहायता राशि को पूरी तरह से रिकवर और सेटल नहीं कर लिया जाता। ओएमसी और एयरलाइंस के बीच MoU होगा यह स्कीम उन सभी शेड्यूल्ड इंडियन कैरियर्स (एयरलाइंस) के लिए उपलब्ध होगी जो इसमें शामिल होने के इच्छुक हैं। यह लाभ घरेलू और इंटरनेशनल दोनों तरह के ऑपरेशंस पर मिलेगा। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए भाग लेने वाली भारतीय एयरलाइंस और ओएमसी के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय इस MoU में हस्ताक्षरकर्ता होंगे। 3 साल तक सिर्फ ओएमसी से ही एटीएफ खरीद सकेंगी एयरलाइंस इस वन-टाइम अरेंजमेंट के तहत, योजना में शामिल होने वाली एयरलाइंस अधिकतम तीन साल की अवधि तक केवल ओएमसी से ही एटीएफ की खरीद करेंगी। हालांकि, यह व्यवस्था वार्षिक समीक्षा (एनुअल रिव्यू) के अधीन होगी। यदि सरकार द्वारा दिया गया एडवांस अमाउंट तीन साल से पहले ही पूरी तरह रिकवर हो जाता है, तो यह व्यवस्था उसी समय समाप्त हो जाएगी। क्या होता है प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड (PSF)? प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड यानी मूल्य स्थिरता कोष सरकार द्वारा बनाया गया एक विशेष फंड होता है, जिसका उद्देश्य किसी जरूरी वस्तु (जैसे इस मामले में हवाई ईंधन) की कीमतों में होने वाले अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकना है। जब वैश्विक बाजार में कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं, तो इस फंड के पैसों का इस्तेमाल कंपनियों और आम लोगों को नुकसान से बचाने के लिए किया जाता है। चूंकि यह एक ‘रिवॉल्विंग फंड’ है, इसलिए यह स्थिति सामान्य होने पर वापस खुद को री-फंड या री-जेनरेट कर लेता है। ये खबर भी पढ़ें… भारतीय सामानों पर 12.5% तक एक्सट्रा टैरिफ लग सकता है: अमेरिका ने 54 देशों पर जबरन मजदूरी का आरोप लगाया; दिल्ली में ट्रेड डील पर बातचीत अमेरिका ने भारत समेत दुनिया की 54 अर्थव्यवस्थाओं को ऐसी लिस्ट में रखा है, जो जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात को रोकने में नाकाम रही हैं। इस आधार पर अमेरिका ने अतिरिक्त कस्टम ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव रखा है। पढ़ें यह QA रिपोर्ट… पूरी खबर पढ़ें…
आरएएस-2026 में 607 पदों पर भर्ती, आवेदन कल से:3 जुलाई लास्ट डेट; जानिए-एपीपी के 371 पद व अन्य भर्ती में कब से कर सकेंगे अप्लाई

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की ओर से निकाली गई राजस्थान राज्य और अधीनस्थ सेवाएं (RAS) संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा-2026 के 607 पदों के लिए आवेदन कल (4 जून) से शुरू होंगे। इच्छुक अभ्यर्थी 3 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं। परीक्षा 29 नवंबर 2026 को आयोजित की जाएगी। इस भर्ती में राज्य सेवा के 192 पद और अधीनस्थ सेवा के 415 पद शामिल हैं। 1 जनवरी 2027 को अभ्यर्थी की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष होनी चाहिए। अभ्यर्थियों का चयन प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के माध्यम से किया जाएगा। प्रारंभिक परीक्षा में वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाएंगे, जबकि मुख्य परीक्षा में वर्णनात्मक प्रश्न होंगे। ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। राज्य सेवाएं (192 पद) अधीनस्थ सेवाएं (415 पद) सहायक अभियोजन-अधिकारी, पद 371, आवेदन 8 जून से शुरू होंगे राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) सहायक अभियोजन अधिकारी (गृह विभाग-अभियोजन) के 371 पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन 8 जून से आमंत्रित कर रहा है। आवेदन 7 जुलाई तक किए जा सकेंगे। इस भर्ती के लिए प्रारंभिक परीक्षा 2 सितंबर को आयोजित की जाएगी। 1 जनवरी 2027 को न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष से कम होनी चाहिए। आयोग ने इन पदों को 2024 में विज्ञापित किया था, जिसके बाद आयु की गणना 1 जनवरी 2025 को आधार मानकर की गई थी। चूंकि इन पदों के लिए कोई नया विज्ञापन जारी नहीं किया गया है, इसलिए अभ्यर्थियों को अधिकतम आयु सीमा में एक वर्ष की अतिरिक्त छूट दी जाएगी। अभ्यर्थियों का चयन प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से होगा, जो दो चरणों में आयोजित की जाएगी: प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा। 11 जून से कर सकेंगे आवेदन, 3 डिवीजन में भर्ती राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला में वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी के कुल 3 पदों पर भर्ती होगी। इसमें टॉक्सिकोलॉजी, फिजिक्स और बैलिस्टिक्स डिवीजन में 1-1 पद शामिल हैं। ऑनलाइन आवेदन 11 जून से शुरू होकर 10 जुलाई 2026 रात 12 बजे तक कर सकेंगे। खास बात ये है कि अगर कोई अभ्यर्थी एक से ज्यादा डिवीजन के लिए आवेदन करना चाहता है तो उसे हर पद के लिए अलग-अलग फॉर्म भरना होगा। ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं होंगे। परीक्षा तिथि बाद में घोषित होगी। शैक्षणिक योग्यता व वर्गवार जानकारी आयोग की वेबसाइट http://rpsc.rajasthan.gov.in पर देखी जा सकती है। लेक्चरर (विशेष शिक्षा) के 121 पदों पर भर्ती प्रोसेस जारी राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने माध्यमिक शिक्षा विभाग में लेक्चरर (विशेष शिक्षा) के 121 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन सोमवार से शुरू कर दिए हैं। कैंडिडेट्स 30 जून 2026 की रात 12 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। कैंडिडेट की उम्र 1 जनवरी 2027 को 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। ऑफलाइन आवेदन मान्य नहीं होंगे। कैंडिडेट का सिलेक्शन एग्जाम के माध्यम से होगा। परीक्षा तिथि और परीक्षा केंद्रों की जानकारी बाद में अलग से जारी की जाएगी। (अधिक जानकारी के लिए करें क्लिक) पढें ये खबर भी….
शॉर्ट्स और बनियान में मंदिर पहुंचे वरुण धवन:पहनावे पर उठे सवाल; फैंस बोले- भगवान के घर तो ढंग के कपड़े पहनते

बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन मुंबई के एक मंदिर में शॉर्ट्स और सैंडो बनियान पहने नजर आए। वरुण अपनी आने वाली फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ की रिलीज से पहले मंदिर में आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। लेकिन अब वे अपने इस पहनावे की वजह से शल मीडिया पर ट्रोल हो रहे हैं। मंदिर परिसर से बाहर निकलते समय उनके माथे पर तिलक लगा था और उन्होंने पैपराजी को देखकर मुस्कुराते हुए पोज भी दिए। हालांकि, उनका यह पहनावा कई लोगों को पसंद नहीं आया और लोगों ने मंदिर की मर्यादा का ध्यान रखने की सलाह दी। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने जताई नाराजगी वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने वरुण के लुक पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। एक यूजर ने लिखा, “कम से कम मंदिर के लिए तो ढंग के कपड़े पहन लेते।” दूसरे यूजर ने कमेंट किया, “प्रभु शर्ट तो पहन लेते, कुछ तो ढंग का पहन लेते, तुम मंदिर आए हो। सिर्फ बताने के लिए जबरदस्ती क्यों आते हो यार।” वहीं एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया कि इस तरह कपड़े पहनकर मंदिर कौन जाता है। 5 जून को रिलीज हो रही है नई फिल्म वरुण धवन इन दिनों अपनी फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ के प्रमोशन में बिजी हैं। यह फिल्म 5 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। इसका निर्देशन उनके पिता डेविड धवन ने किया है। फिल्म में वरुण के साथ पूजा हेगड़े, मृणाल ठाकुर और मनीष पॉल मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। इस फिल्म को एक फैमिली एंटरटेनर के रूप में तैयार किया गया है, जिसमें डेविड धवन का पुराना कॉमेडी स्टाइल देखने को मिलेगा। फिल्म रिलीज से पहले कानूनी विवाद में फंसी रिलीज से ठीक पहले यह फिल्म एक कानूनी विवाद में भी घिर गई है। प्रोड्यूसर वाशु भगनानी की कंपनी पूजा एंटरटेनमेंट ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने टिप्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड, रमेश तौरानी, कुमार एस तौरानी और डायरेक्टर डेविड धवन के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। विवाद 1999 की फिल्म ‘बीवी नंबर 1’ के मशहूर गाने ‘चुनरी चुनरी’ के इस्तेमाल को लेकर है। आरोप है कि इस गाने को बिना इजाजत नई फिल्म में इस्तेमाल किया गया है।
डिस्काउंट की बारिश; मंदी से लड़ रहे फैशन ब्रांड्स:बिक्री 30% घटी तो जुलाई की सेल जून में, फैशन प्रोडक्ट्स पर 40% तक छूट

फैशन रिटेलर्स ने इस साल बिक्री बढ़ाने के लिए समय से पहले ही बड़े डिस्काउंट का सहारा लेना शुरू कर दिया है। कई कंपनियों और रिटेलर्स ने मिड-सीजन सेल लॉन्च कर दी है। आम तौर पर ऐसी सेल जुलाई में शुरू होती है। बढ़ती महंगाई, वैश्विक अनिश्चितताओं और ग्राहकों की सतर्क खरीदारी के बीच स्टॉक खाली करना और कमजोर मांग से निपटना इस रणनीति का लक्ष्य है। इंडस्ट्री डेटा के मुताबिक, बीते दो महीनों में फैशन सेक्टर की बिक्री करीब 30% कम हो गई है। पेट्रोल-डीजल, सीएनजी, एलपीजी और रोजमर्रा की जरूरतों पर बढ़ते खर्च के चलते ज्यादातर उपभोक्ता कपड़े और लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स पर खर्च घटाने लगे हैं। यह घरेलू बजट संतुलित रखने के प्रयास का हिस्सा है। इसे देखते हुए बिक्री बढ़ाने के लिए आधा दर्जन ब्रांड्स और मिंत्रा, नायका फैशन, फ्लिपकार्ट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म चुनिंदा प्रोडक्ट्स पर 40% तक छूट दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि रिटेलर्स अब पारंपरिक ‘एंड-ऑफ-सीजन सेल’ का इंतजार करने के बजाय बीच सीजन में ही इन्वेंट्री निकालने की रणनीति अपना रहे हैं। यह इस बात का संकेत है कि उपभोक्ता अब खर्च करने से पहले कीमत और वैल्यू को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क हो गए हैं। चुनौती – गैर-जरूरी खर्च में अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे आम भारतीय – पिछले 2 महीनों में फैशन प्रोडक्ट्स की बिक्री करीब 30% घटी – भू-राजनीतिक तनाव के बीच घरेलू खर्च बढ़ने से लोग चिंतित – बिजनेस के मामले में स्प्रिंग-समर सीजन खासा कमजोर रहा – कंज्यूमर बड़े गैर-जरूरी खर्च में अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे 30% पर आ गई इस साल मार्च में गैर-जरूरी चीजें खरीदने की इच्छा, पहले ये 70% से ऊपर थी। रणनीति – ग्राहक स्टोर तक आएं, ऐसी कोशिश ब्लैंकेट मार्कडाउन नहीं- सिर्फ चुनिंदा स्टॉक-कीपिंग यूनिट्स पर डिस्काउंट दे रहीं कंपनियां। बंडलिंग ऑफ- 1+1, 1+2 जैसे ऑफर्स की मदद से एक खरीदारी पर ज्यादा प्रोडक्ट बेचने की चल रही कोशिश। इसमें एक प्रोडक्ट की खरीदारी पर एक या दो प्रोक्ट्स फ्री देने की पेशकश की जाती है। फुटफॉल बढ़ाना- आकर्षक ऑफर के जरिए ग्राहकों को स्टोर तक लाकर त्योहारी सीजन से पहले इन्वेंटरी खाली करना। मार्जिन सुरक्षा- दाम में गहरी छूट की जगह टारगेटेड डिस्काउंट, ताकि मार्जिन बना रहे। ग्रोथ: चार साल में 52% बढ़ा भारतीय फैशन/अपैरल बाजार, 2025 में मार्केट साइज 11 लाख करोड़ पार वर्ष – मार्केट साइज विश्लेषण 2021 – 7.5 कोविड बाद रिकवरी; बिक्री 45% बढ़ी 2022 – 8.5 फिजिकल स्टोर खुले; 15-20% ग्रोथ 2023 – 9.5 बिक्री अनुमान के अनुरूप 2024 – 10 बिक्री अनुमान से ज्यादा 2025 – 11.4 14 फीसदी की तेज ग्रोथ (नोट: आंकड़े लाख करोड़ रुपए में, स्रोत: स्टैटिस्टा, वजीर एडवाइजर्स) ‘एंड-ऑफ-सीजन सेल’ भी जल्द शुरू होने के आसार पहले: जुलाई में शुरू होती थी और 15 अगस्त तक चलती थी अब: जून के शुरुआती हफ्ते में शुरू हो गई, ताकि बिक्री बढ़े कलेक्शन: अगस्त की जगह मिड-जुलाई से ही आने लगेगा कंज्यूमर मूड: डेलॉय की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल मार्च के दौरान भारत में बड़ी और गैर-जरूरी शॉपिंग की इच्छा घटकर 65% पर आ आई, जो पहले 70% थी। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘भारतीय उपभोक्ता कैलिब्रेटेड कंजम्पशन के दौर में हैं। यानी ये आकांक्षा और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में हैं।’
टीएमसी विद्रोह समाचार लाइव अपडेट: ऋतब्रत बनर्जी नेता प्रतिपक्ष बनने को तैयार? 59 विधायकों ने समर्थन पत्र पर हस्ताक्षर किये

टीएमसी विद्रोह समाचार लाइव अपडेट: ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के भीतर राजनीतिक संकट बुधवार को गहरा गया, जिसमें व्यापक विद्रोह के संकेत मिलने से राज्य विधानसभा में पार्टी की एकता पर नए सवाल खड़े हो गए। टीएमसी से निकाले जाने के एक दिन बाद बागी विधायक रीतब्रत बनर्जी विधानसभा पहुंचे और 59 विधायकों के समर्थन का दावा किया। बनर्जी ने जिसे उन्होंने साथी विधायकों के समर्थन पत्र के रूप में वर्णित किया, उसे प्रस्तुत किया। विधानसभा अधिकारियों के समक्ष अपना दावा पेश करते समय उनके साथ अरूप रॉय, शिउली साहा और अखरुज्जमां सहित कई विधायक भी थे। बागी विधायक, जो “असली” तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करने का दावा कर रहे हैं, अब मांग कर रहे हैं कि रीताब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता नियुक्त किया जाए। ममता बनर्जी की टीएमसी के पास सिर्फ 20 विधायक? यदि बनर्जी द्वारा उद्धृत संख्याएँ सटीक हैं, तो यह विधानसभा के राजनीतिक समीकरणों में एक नाटकीय बदलाव का संकेत होगा, जिससे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को केवल 20 विधायकों के समर्थन के साथ छोड़ दिया जाएगा। हालाँकि, दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है, और तृणमूल कांग्रेस ने अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की है। शोभनदेब चट्टोपाध्याय को सदन का नेता नियुक्त किया गया सामने आ रहे घटनाक्रम के बीच, वरिष्ठ टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस को पार्टी के विधायी नेतृत्व में फेरबदल के बारे में सूचित किया। उन्होंने कहा कि शोभनदेब चट्टोपाध्याय को सदन का नेता नियुक्त किया गया है, जबकि आशिमा पात्रा और नयना बंदोपाध्याय उपनेता के रूप में काम करेंगे। फिरहाद हकीम को विधानसभा में पार्टी का मुख्य सचेतक नामित किया गया है। ताजा घटनाक्रम टीएमसी द्वारा विधायक रीताब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए तत्काल प्रभाव से निष्कासित करने के कुछ दिनों बाद आया है। चूंकि पार्टी ने राज्य में सत्ता खो दी है, इसलिए कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से इसके कामकाज पर असंतोष व्यक्त किया है। सभी टीएमसी समाचार लाइव अपडेट के लिए यहां फॉलो करें (टैग्सटूट्रांसलेट)टीएमसी विद्रोह समाचार लाइव(टी)टीएमसी संकट लाइव अपडेट(टी)ममता बनर्जी लाइव न्यूज(टी)टीएमसी विभाजन समाचार(टी)टीएमसी विद्रोह नवीनतम अपडेट(टी)ऋताब्रता बनर्जी समाचार(टी)टीएमसी विद्रोही विधायक समाचार(टी)पश्चिम बंगाल राजनीतिक संकट(टी)टीएमसी आंतरिक संघर्ष(टी)तृणमूल कांग्रेस विद्रोह(टी)ममता बनर्जी पार्टी संकट(टी)टीएमसी ब्रेकिंग न्यूज(टी)टीएमसी लाइव अपडेट आज(टी)टीएमसी विद्रोही नेता(टी)टीएमसी विधायक विद्रोह(टी)बंगाल राजनीति लाइव(टी)पश्चिम बंगाल समाचार लाइव(टी)टीएमसी गुट युद्ध(टी)टीएमसी नेतृत्व संकट
टीएमसी में विद्रोही: तृणमूल दो हिस्सों में बंट गई – जावेद खान, शिउली साहा और पूरी बागी विधायक सूची | कोलकाता-समाचार समाचार

आखरी अपडेट:03 जून, 2026, 12:31 IST चुनाव नतीजों के बमुश्किल एक महीने बाद, लगभग 60 टीएमसी विधायकों – जिनमें पूर्व ममता वफादार भी शामिल हैं – ने विपक्ष के नेता के रूप में रीताब्रत बनर्जी की मांग की है। एक समय ममता बनर्जी के वफादार रहे विधायकों ने आज सार्वजनिक रूप से पार्टी नेतृत्व के खिलाफ 60 हस्ताक्षरों के साथ विधानसभा की ओर मार्च किया। चुनाव परिणाम घोषित होने के बमुश्किल एक महीने बाद ही तृणमूल कांग्रेस में तीव्र और खुले तौर पर टूट हो गई है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में एक विद्रोही गुट बुधवार को लगभग 60 विधायकों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र लेकर पश्चिम बंगाल विधानसभा पहुंचा, जिससे एक नाटकीय घटनाक्रम सामने आया जिसने सत्तारूढ़ दल के भीतर गहरी दरार को उजागर कर दिया है। विद्रोही समूह स्पीकर को पत्र लिखकर मांग करेगा कि उलुबेरिया पुरबा के विधायक रीताब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दी जाए। एंटली के संदीपन साहा को विपक्ष के उपनेता के रूप में प्रस्तावित किया गया है, जबकि रघुनाथगंज विधायक अखुरज्जमां का नाम मुख्य सचेतक के रूप में आगे बढ़ाया गया है। विद्रोही क्या मांग रहे हैं? इस कदम से पहले असंतुष्ट दो दिनों से कोलकाता में डेरा डाले हुए थे। मंगलवार शाम को एमएलए हॉस्टल में बागी विधायकों की एक बैठक हुई, जिसमें बनर्जी और साहा ने भाग लिया, जिससे आज विधानसभा में पेश होने से पहले समूह की स्थिति पक्की हो गई। पूर्व मंत्री और सुजापुर विधायक सबीना यास्मीन ने स्पष्ट कहा: “हम विपक्ष के नेता के रूप में रीतब्रत बनर्जी का नाम प्रस्तावित करेंगे।” विद्रोह के पीछे कौन है? जो चीज़ विद्रोह को महत्वपूर्ण बनाती है वह है इसकी व्यापकता। यह सिर्फ असंतुष्ट दिग्गजों का जमावड़ा नहीं है – विद्रोही खेमे का समर्थन करने वालों में कई पहली बार विधायक बने हैं जिन्होंने कुछ हफ्ते पहले ही अपनी सीटें जीती हैं। मुर्शिदाबाद जिले के बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक-समुदाय के विधायकों ने भी समूह के समर्थन में अपना समर्थन दिया है। कुछ प्रमुख नामों में शामिल हैं: • पूर्व मंत्री जावेद खान (कस्बा) – एक समय ममता बनर्जी के करीबी माने जाते थे • पूर्व मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा (बोलपुर) – एक और पूर्व ममता वफादार • बीरभूम के ताकतवर काजल शेख • पूर्व मंत्री शिउली साहा (केशपुर) • संदीपन साहा (अंततः), विपक्ष के प्रस्तावित उपनेता • ऋतब्रत बनर्जी (उलुबेरिया पुरबा), विद्रोही चेहरा क्या खुलेआम सामने आए सभी विधायक बागी हैं? काफी नहीं। बुधवार, 3 जून को विधानसभा में आए कुछ विधायकों ने खुलकर बगावत का ऐलान करना बंद कर दिया. कुछ लोगों का कहना था कि ममता बनर्जी उनकी नेता बनी रहेंगी; अन्य लोगों ने विधानसभा में आने का कारण व्यक्तिगत कार्य बताया। कौन से विधायक हैं बागी खेमे में? न्यूज़18 के रिपोर्टर द्वारा ग्राउंड पर निम्नलिखित नामों की पुष्टि की गई. अन्य स्रोतों द्वारा भी अतिरिक्त नाम बताए गए हैं: News18 द्वारा पुष्टि: • बरनाली धारा — कुलपी • सुभाशीष धारा – महेशतला (दक्षिण 24 परगना) • नियामत शेख – हरिहरपारा (मुर्शिदाबाद) • मोहम्मद नूर आलम- समसेरगंज • समीर जाना–पाथरप्रतिमा • तापस मैती – डोमजूर • नीलिमा मिश्रा – बसंती • अरूप रॉय – हावड़ा मध्य • सबीना यास्मीन – सुजापुर • अखुरज्जमां–रघुनाथगंज • उषारानी मंडल – मिनाखान • गुलशन मलिक – पांचला • पिया पाल – सांकराइल • जावेद खान–कस्बा • संदीपन साहा – अंत में • ऋतब्रत बनर्जी – उलुबेरिया पुरबा • प्रसून बनर्जी–चंचल • चंद्रनाथ सिन्हा – बोलपुर • रथिन घोष – मध्यमग्राम • शिउली साहा – केशपुर इसके अतिरिक्त News18 बांग्ला द्वारा रिपोर्ट किया गया: • काजल शेख – बीरभूम • समीर पांजा – उदयनारायणपुर (हावड़ा) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में न्यूज़ डेस्क न्यूज़ डेस्क उत्साही संपादकों और लेखकों की एक टीम है जो भारत और विदेशों में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण और विश्लेषण करती है। लाइव अपडेट से लेकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से लेकर गहन व्याख्याताओं तक…और पढ़ें समाचार शहर कोलकाता-समाचार टीएमसी में विद्रोही: तृणमूल दो हिस्सों में बंट गई – जावेद खान, शिउली साहा और पूरी बागी विधायक सूची अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तृणमूल कांग्रेस(टी)टीएमसी(टी)ममता बनर्जी(टी)रिताब्रता बनर्जी(टी)कोलकाता समाचार(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा
चांदी ₹3,300 गिरकर ₹2.62 लाख किलो पर आई:ऑल टाइम हाई से ₹1.24 लाख नीचे आ चुकी, सोना आज ₹1,030 सस्ता हुआ

सोने-चांदी के दाम में आज यानी 3 जून को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम आज 1,030 रुपए गिरकर 1.55 लाख रुपए हो गया है। 1 किलो चांदी की कीमत 3,300 रुपए कम होकर 2.62 लाख रुपए पर आ गई है। कैरेट के हिसाब से सोने की कीमत देश के बड़े शहरों में सोने की कीमत सोर्स: goodreturns 3 जून 2026 सोने की कीमतों का सफर: ₹1.76 लाख से ₹1.55 लाख तक सोने में इस साल की शुरुआत में तेजी दिखी थी, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में मुनाफावसूली और वैश्विक कारणों से इसमें गिरावट आई है। चांदी की कीमतों में क्रैश: ₹3.86 लाख से ₹2.62 लाख तक चांदी में सोने के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। यह अपने ऑलटाइम हाई से काफी नीचे आई है। सोना 125 दिन में ₹21 हजार और चांदी ₹1.24 लाख सस्ती सोर्स: IBJA गिरावट के मुख्य कारण: मेटल छोड़कर ‘कैश’ पर भरोसा आमतौर पर जंग के माहौल में सोने-चांदी के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है:
भारतीय सामानों पर 12.5% तक एक्सट्रा टैरिफ लग सकता है:अमेरिका ने 54 देशों पर जबरन मजदूरी का आरोप लगाया; दिल्ली में ट्रेड डील पर बातचीत

अमेरिका ने भारत समेत दुनिया की 54 अर्थव्यवस्थाओं को ऐसी लिस्ट में रखा है, जो जबरन मजदूरी से बने सामानों के आयात को रोकने में नाकाम रही हैं। इस आधार पर अमेरिका ने अतिरिक्त कस्टम ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव रखा है। पूरी खबर को समझने के लिए पढ़ें यह QA रिपोर्ट… सवाल 1: अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) की रिपोर्ट में भारत को लेकर क्या कहा गया है? जवाब: USTR ने ‘सेक्शन 301’ के तहत की गई जांच के नतीजे जारी किए हैं। इसमें भारत समेत दुनिया की 54 अर्थव्यवस्थाओं के नाम है। अमेरिका का आरोप है कि इन देशों में फोर्स्ड लेबर की व्यवस्था को रोकने के लिए पर्याप्त और प्रभावी कानूनी उपाय मौजूद नहीं हैं। सवाल 2: अमेरिका ने इन देशों के सामान पर कितना एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया है? जवाब: USTR ने अपनी रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित देशों से आने वाले सामानों पर 10% से लेकर 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। सवाल 3: इस पूरे मामले पर अमेरिकी प्रशासन का क्या स्टैंड है और उन्होंने क्या बयान दिया है? जवाब: अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि एंबेसडर जेमिसन ग्रीर ने कहा, “हमारे सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी साझेदारों के जबरन श्रम से बने सामानों के आयात पर रोक न लगाना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। इसकी वजह से ऐसी स्थिति बनती है जहां अमेरिकी वर्कफोर्स को वैश्विक स्तर पर एक असमान मैदान में प्रतिस्पर्धा करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह इस जांच के निष्कर्षों के आधार पर जवाबी व्यापारिक कार्रवाई आगे बढ़ाएगा। सवाल 4: यह ‘सेक्शन 301’ क्या है, जिसके तहत अमेरिका यह कार्रवाई कर रहा है? जवाब: सेक्शन 301 अमेरिका के ‘ट्रेड एक्ट ऑफ 1974’ का एक विशेष प्रावधान है। यह कानून USTR को विदेशी सरकारों की उन व्यापारिक नीतियों, तौर-तरीकों या कदमों की जांच करने का अधिकार देता है जो अमेरिकी व्यापारिक हितों के लिए अनुचित, भेदभावपूर्ण या उन पर बोझ डालने वाली हों। अगर जांच में कोई देश दोषी पाया जाता है, तो अमेरिकी प्रशासन को उस देश के खिलाफ ज्यादा टैरिफ लगाने, कोटा तय करने या अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लगाने का कानूनी अधिकार मिल जाता है। सवाल 5: भारत के अलावा इस लिस्ट में और कौन-कौन से प्रमुख देश शामिल हैं? जवाब: USTR ने कुल 54 देशों को इस मुख्य लिस्ट में शामिल किया है। इनमें भारत के अलावा चीन, ब्राजील, यूनाइटेड किंगडम (UK), जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका और थाईलैंड जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके अलावा छह अन्य अर्थव्यवस्थाओं- कनाडा, यूरोपीय संघ (EU), मैक्सिको, पाकिस्तान, इंडोनेशिया और इक्वाडोर को भी कानून को सही ढंग से लागू न करने की श्रेणी में रखा गया है। सवाल 6: इस घोषणा का समय भारत के लिए क्यों संवेदनशील है? जवाब: यह टाइमिंग इसलिए बेहद संवेदनशील है क्योंकि अमेरिकी व्यापार अधिकारियों का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस समय नई दिल्ली में है। मंगलवार से दोनों देशों के बीच तीन दिवसीय दौर की बातचीत शुरू हुई है। दोनों पक्ष पिछले 15 महीनों से एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के पहले चरण को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक के ठीक बीच में अमेरिकी एजेंसी का भारत के खिलाफ ऐसी रिपोर्ट जारी करने से बातचीत की टेबल पर दबाव बढ़ सकता है। सवाल 7: द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का क्या कहना है? जवाब: वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा था कि 99% चीजें फाइनल हो चुकी हैं। अब केवल छोटे मुद्दों, कॉमा और फुल स्टॉप पर चर्चा हो रही है। अमेरिका में हाल ही में हुए कानूनी बदलावों को इस समझौते में कैसे शामिल करना है, इसी को फाइनल किया जा रहा है। गोयल को उम्मीद है कि जल्द ही पहले ट्रांच पर साइन हो जाएंगे। सवाल 8: क्या भारत अमेरिका के साथ इस डील को तुरंत फाइनल कर पाएगा या कोई अड़चन है? जवाब: 99% बातचीत पूरी होने के बावजूद डील के तुरंत फाइनल होने की उम्मीद कम है। इसका कारण यह है कि ट्रंप प्रशासन के लगाए गए अस्थाई 10% टैक्स की अवधि अगले महीने खत्म हो रही है। जब तक वाशिंगटन अपने टैरिफ ढांचे को लेकर पूरी स्पष्टता नहीं देता, तब तक डील पर अंतिम मुहर लगना मुश्किल है। भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसके एक्सपोर्टर्स को प्रतिद्वंद्वी देशों के मुकाबले अमेरिकी मार्केट में प्रतिस्पर्धी स्थिति मिलती रहे। सवाल 9: अमेरिका की तरफ से भारत पर ‘जबरन श्रम’ के अलावा क्या कोई और भी जांच चल रही है? जवाब: हां, भारत इस समय अमेरिका की दो अलग-अलग ‘सेक्शन 301’ जांच का सामना कर रहा है। पहली जांच जबरन श्रम को रोकने के उपायों को लेकर है। वहीं दूसरी जांच सोलर मॉड्यूल्स, प्रोसेस्ड फूड, स्टील और एल्युमिनियम जैसे सेक्टर्स में कथित ‘स्ट्रक्चरल ओवरकैपेसिटी’ (जरूरत से ज्यादा उत्पादन क्षमता) को लेकर है। इस जांच में भारत के साथ दुनिया के 14 अन्य देश भी शामिल हैं। सवाल 10: इस स्थिति का भारतीय एक्सपोर्टर्स पर क्या असर पड़ सकता है? जवाब: अगर अमेरिका अतिरिक्त 10% से 12.5% की ड्यूटी लागू कर देता है, तो भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे जिससे हमारे एक्सपोर्ट को नुकसान हो सकता है। हालांकि, USTR ने टेक्सटाइल और अपैरल के लिए एक अलग मैकेनिज्म का सुझाव दिया है। इसके तहत चुनिंदा देशों से एक निश्चित मात्रा में कपड़ों के इंपोर्ट को कम ‘सेक्शन 301’ टैरिफ रेट पर अनुमति दी जा सकती है। भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए यह एक मामूली राहत की बात हो सकती है।
अमित जानी बोले- 'काला हिरण' सलमान की बायोपिक नहीं है:फिल्म बिश्नोई समाज पर आधारित, कहा- नोटिस भेजकर हम पर दबाव बनाया जा रहा है

फिल्म ‘काला हिरण’ को लेकर जारी विवाद के बीच फिल्म के प्रोड्यूसर अमित जानी ने सलमान खान की लीगल टीम के नोटिस पर रिएक्शन दिया है। अपने ऑफिशियल फेसबुक अकाउंट में पोस्ट किए वीडियो में अमित जानी ने कहा कि हमारी पूरी फिल्म सलमान खान की बायोपिक नहीं है। हमारी पूरी फिल्म सलमान खान के नजरिए से नहीं है। अमित जानी ने वीडियो में कहा, ‘सलमान खान की लीगल टीम की ओर से नोटिस भेजकर हम पर दबाव बनाया जा रहा है कि हम फिल्म की रिलीज रोक दें और 20 जून को टीजर जारी न करें।’ वहीं ABP न्यूज के साथ बातचीत में अमित जानी ने कहा है कि फिल्म ‘काला हिरण’ बिश्नोई समाज के संघर्ष, उनकी विरासत और वन्यजीवों के प्रति उनके समर्पण को दिखाती है। जानी ने कहा कि सलमान खान फिल्म का सिर्फ एक पार्ट हैं। ‘काला हिरण’ को लेकर सलमान खान की ओर से लीगल नोटिस भेजा गया था। न्यूज18 की रिपोर्ट में बताया गया था कि सलमान की ओर से लॉ फर्म DSK लीगल ने कास्टिंग डायरेक्टर अक्षय पांडे को एक लीगल नोटिस भेजा है। इस नोटिस में ‘काला हिरण’ नाम की प्रस्तावित फिल्म के प्रोडक्शन और प्रमोशन को तुरंत रोकने की मांग की गई है। नोटिस में कहा गया था कि यह फिल्म कथित तौर पर सलमान खान के काला हिरण शिकार मामले से प्रेरित है। सलमान की लीगल टीम का दावा है कि इस फिल्म से उनकी इमेज को नुकसान पहुंच सकता है, चल रही लीगल प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और उनके पर्सनल राइट्स का उल्लंघन हो सकता है। सलमान की लीगल टीम का कहना है कि एक्टर ने अपने नाम, पहचान या उनसे जुड़े किसी भी कथित घटनाक्रम के इस्तेमाल की कोई अनुमति नहीं दी है। 20 जून को आना था टीजर बता दें कि सलमान से जुड़े काला हिरण शिकार मामले पर आधारित फिल्म ‘काला हिरण’ का पोस्टर शुक्रवार को जारी किया गया था। वहीं कहा गया था कि फिल्म का फर्स्ट लुक और टीजर 20 जून को जारी किया जाएगा। फिल्म में सलमान और गैंगस्टर लॉरेंस के बीच के विवाद को दिखाया जाएगा। हालांकि, यह जानकारी सामने नहीं आई थी कि इसमें कौन लीड रोल में है। वहीं, इसके पोस्टर में जो एक्टर दिखा है, वह जाना-पहचाना नहीं है। 1998 में काला हिरण शिकार मामला सामने आया सलमान खान से जुड़ा काला हिरण शिकार मामला साल 1998 में सामने आया था, जब वो जोधपुर में फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग कर रहे थे। सलमान के खिलाफ कुल चार केस दर्ज किए गए थे। इनमें दो चिंकारा शिकार मामले, एक कांकाणी काला हिरण शिकार मामला और एक आर्म्स एक्ट का मामला शामिल था। काला हिरण शिकार मामले में बिश्नोई समुदाय की शिकायत पर सलमान के साथ सैफ अली खान, तब्बू, सोनाली बेंद्रे और नीलम के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया था। इन मामलों में 12 अक्टूबर 1998 को सलमान को पहली बार गिरफ्तार किया गया, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई। अप्रैल 2006 में चिंकारा शिकार मामलों में सलमान को सजा सुनाई गई। जनवरी 2017 में उन्हें आर्म्स एक्ट मामले में बरी कर दिया गया। वहीं, 5 अप्रैल 2018 को काला हिरण शिकार मामले में उन्हें 5 साल की जेल और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा मिली। इसी मामले में बाकी कलाकारों को बरी कर दिया गया था। बाद में सलमान को जमानत मिल गई। फिलहाल यह मामला राजस्थान हाई कोर्ट में लंबित है। मई 2026 में हुई सुनवाई के बाद अदालत ने अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 के लिए तय की है। सलमान खान फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।





