अमित जानी बोले- 'काला हिरण' सलमान की बायोपिक नहीं है:फिल्म बिश्नोई समाज पर आधारित, कहा- नोटिस भेजकर हम पर दबाव बनाया जा रहा है

फिल्म ‘काला हिरण’ को लेकर जारी विवाद के बीच फिल्म के प्रोड्यूसर अमित जानी ने सलमान खान की लीगल टीम के नोटिस पर रिएक्शन दिया है। अपने ऑफिशियल फेसबुक अकाउंट में पोस्ट किए वीडियो में अमित जानी ने कहा कि हमारी पूरी फिल्म सलमान खान की बायोपिक नहीं है। हमारी पूरी फिल्म सलमान खान के नजरिए से नहीं है। अमित जानी ने वीडियो में कहा, ‘सलमान खान की लीगल टीम की ओर से नोटिस भेजकर हम पर दबाव बनाया जा रहा है कि हम फिल्म की रिलीज रोक दें और 20 जून को टीजर जारी न करें।’ वहीं ABP न्यूज के साथ बातचीत में अमित जानी ने कहा है कि फिल्म ‘काला हिरण’ बिश्नोई समाज के संघर्ष, उनकी विरासत और वन्यजीवों के प्रति उनके समर्पण को दिखाती है। जानी ने कहा कि सलमान खान फिल्म का सिर्फ एक पार्ट हैं। ‘काला हिरण’ को लेकर सलमान खान की ओर से लीगल नोटिस भेजा गया था। न्यूज18 की रिपोर्ट में बताया गया था कि सलमान की ओर से लॉ फर्म DSK लीगल ने कास्टिंग डायरेक्टर अक्षय पांडे को एक लीगल नोटिस भेजा है। इस नोटिस में ‘काला हिरण’ नाम की प्रस्तावित फिल्म के प्रोडक्शन और प्रमोशन को तुरंत रोकने की मांग की गई है। नोटिस में कहा गया था कि यह फिल्म कथित तौर पर सलमान खान के काला हिरण शिकार मामले से प्रेरित है। सलमान की लीगल टीम का दावा है कि इस फिल्म से उनकी इमेज को नुकसान पहुंच सकता है, चल रही लीगल प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और उनके पर्सनल राइट्स का उल्लंघन हो सकता है। सलमान की लीगल टीम का कहना है कि एक्टर ने अपने नाम, पहचान या उनसे जुड़े किसी भी कथित घटनाक्रम के इस्तेमाल की कोई अनुमति नहीं दी है। 20 जून को आना था टीजर बता दें कि सलमान से जुड़े काला हिरण शिकार मामले पर आधारित फिल्म ‘काला हिरण’ का पोस्टर शुक्रवार को जारी किया गया था। वहीं कहा गया था कि फिल्म का फर्स्ट लुक और टीजर 20 जून को जारी किया जाएगा। फिल्म में सलमान और गैंगस्टर लॉरेंस के बीच के विवाद को दिखाया जाएगा। हालांकि, यह जानकारी सामने नहीं आई थी कि इसमें कौन लीड रोल में है। वहीं, इसके पोस्टर में जो एक्टर दिखा है, वह जाना-पहचाना नहीं है। 1998 में काला हिरण शिकार मामला सामने आया सलमान खान से जुड़ा काला हिरण शिकार मामला साल 1998 में सामने आया था, जब वो जोधपुर में फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग कर रहे थे। सलमान के खिलाफ कुल चार केस दर्ज किए गए थे। इनमें दो चिंकारा शिकार मामले, एक कांकाणी काला हिरण शिकार मामला और एक आर्म्स एक्ट का मामला शामिल था। काला हिरण शिकार मामले में बिश्नोई समुदाय की शिकायत पर सलमान के साथ सैफ अली खान, तब्बू, सोनाली बेंद्रे और नीलम के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया था। इन मामलों में 12 अक्टूबर 1998 को सलमान को पहली बार गिरफ्तार किया गया, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई। अप्रैल 2006 में चिंकारा शिकार मामलों में सलमान को सजा सुनाई गई। जनवरी 2017 में उन्हें आर्म्स एक्ट मामले में बरी कर दिया गया। वहीं, 5 अप्रैल 2018 को काला हिरण शिकार मामले में उन्हें 5 साल की जेल और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा मिली। इसी मामले में बाकी कलाकारों को बरी कर दिया गया था। बाद में सलमान को जमानत मिल गई। फिलहाल यह मामला राजस्थान हाई कोर्ट में लंबित है। मई 2026 में हुई सुनवाई के बाद अदालत ने अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 के लिए तय की है। सलमान खान फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
क्या अन्नामलाई अपना इस्तीफा रोकेंगे? अंदर बाहर निकलने पर पॉज़ बटन दबाने का बीजेपी का फैसला | भारत समाचार

आखरी अपडेट:03 जून, 2026, 10:08 IST भाजपा के लिए, अन्नामलाई तमिलनाडु के उन कुछ नेताओं में से एक हैं जिनकी राज्यव्यापी दृश्यता और समर्पित समर्थन आधार है के अन्नामलाई ने मंगलवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. (एक्स) जब ऐसा लग रहा था कि तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रमुख के अन्नामलाई पार्टी से बाहर निकलने और अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने के लिए तैयार हैं, तो भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने दबाव डालने के लिए कदम उठाया है। अन्नामलाई ने मंगलवार को नई दिल्ली की यात्रा की और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन और राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की, इन अटकलों के बीच कि वह पार्टी से इस्तीफा देने और आने वाले महीनों में तमिलनाडु में एक नया राजनीतिक संगठन शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि बीजेपी आलाकमान अभी उन्हें जाने देने के लिए तैयार नहीं है. यह भी पढ़ें | कमल खोना: क्या भाजपा छोड़ना अन्नामलाई के लिए द्रविड़ स्वीकार्यता पाने का एकमात्र तरीका है? बैठकों के दौरान, अन्नामलाई ने नेतृत्व को इस्तीफा देने के अपने इरादे से अवगत कराया। जवाब में, वरिष्ठ नेताओं ने उनसे किसी भी तत्काल निर्णय को रोकने के लिए कहा, यह संकेत देते हुए कि पार्टी अभी भी अपने विकल्पों पर विचार कर रही है और तमिलनाडु की राजनीति में अपने सबसे पहचाने जाने वाले चेहरों में से एक को बनाए रखने के तरीके तलाश रही है। अन्नामलाई क्यों छोड़ना चाहते हैं? पूर्व आईपीएस अधिकारी को लंबे समय से तमिलनाडु में भाजपा के सबसे आक्रामक विस्तारवादी नेता के रूप में देखा जाता है। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने सलाह दी कि भाजपा बड़ी द्रविड़ पार्टियों के साथ गठबंधन पर बहुत अधिक निर्भर रहने के बजाय एक स्वतंत्र राजनीतिक पहचान स्थापित करे। अंदरूनी सूत्रों ने संकेत दिया है कि पार्टी की गठबंधन रणनीति, विशेष रूप से 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले एआईएडीएमके के साथ नए सिरे से गठबंधन के कारण उनके और भाजपा नेतृत्व के बीच दरार बढ़ गई है। माना जाता है कि अन्नामलाई ने तर्क दिया था कि गठबंधन ने राज्य में भाजपा के विकास पथ को कमजोर कर दिया है। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि अपने इस्तीफे की चर्चा में, अन्नामलाई ने गठबंधन में प्रवेश करने के बाद भाजपा के वोट शेयर में भारी गिरावट की ओर इशारा किया और तर्क दिया कि इस व्यवस्था ने पार्टी को राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में अन्नामलाई द्वारा शीर्ष अधिकारियों को लिखे गए पांच पन्नों के पत्र का हवाला दिया गया है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर “दरकिनार किए जाने” की शिकायत की थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अन्नामलाई ने 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के वोट-शेयर के 11 प्रतिशत से गिरकर पिछले विधानसभा चुनाव में 3 प्रतिशत तक गिरने के लिए पार्टी के गलत फैसलों और अन्नाद्रमुक गठबंधन को जारी रखने को जिम्मेदार ठहराया। बीजेपी ने क्यों लगाया ब्रेक? भाजपा के लिए, अन्नामलाई तमिलनाडु के उन कुछ नेताओं में से एक हैं जिनकी राज्यव्यापी दृश्यता और समर्पित समर्थन आधार है। 2025 में नैनार नागेंद्रन द्वारा राज्य अध्यक्ष के रूप में प्रतिस्थापित किए जाने के बाद भी, वह पार्टी के लिए राज्य में सबसे अधिक पहचाने जाने वाले प्रचारकों में से एक बने रहे। एक कठिन विधानसभा चुनाव के बाद उनका बाहर निकलना न केवल भाजपा के लिए शर्मिंदगी की बात होगी, बल्कि एक प्रतिस्पर्धी राजनीतिक मंच भी तैयार कर सकता है जो असंतुष्ट भाजपा कार्यकर्ताओं और अन्य दलों के नेताओं को आकर्षित कर सकता है। सीएनएन-न्यूज18 ने मंगलवार को खबर दी थी कि चुनावी हार के बाद एआईएडीएमके के कई नेता भी बाहर का रास्ता तलाश रहे हैं और अन्नामलाई के संगठन के लॉन्च होते ही इसमें शामिल हो सकते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि इस संभावना ने नेतृत्व को तत्काल इस्तीफे की अनुमति देने के बजाय सीधे उनसे जुड़ने के लिए प्रेरित किया है। साज़िश को बढ़ाते हुए, तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष नागेंद्रन को भी दिल्ली बुलाया गया क्योंकि अन्नामलाई के भविष्य पर चर्चा तेज हो गई थी। आगे क्या होता है? अभी तक, अन्नामलाई या भाजपा की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है कि उन्होंने अपने इस्तीफे की योजना वापस ले ली है या नहीं। हालाँकि, यह स्पष्ट है कि पार्टी नेतृत्व ने अपने लिए कुछ समय खरीदा है। क्या दिल्ली में होने वाली चर्चाएं अन्नामलाई को रुकने के लिए मनाने के लिए पर्याप्त होंगी या क्या भाजपा ने केवल उस तारीख को आगे बढ़ाया है जो 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद से तमिलनाडु में सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक निकासों में से एक बनने जा रही है? केवल समय बताएगा। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में अपूर्व मिश्रा अपूर्व मिश्रा नौ साल से अधिक के अनुभव के साथ News18.com में समाचार संपादक हैं। वह दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्री राम कॉलेज से स्नातक हैं और एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म से पीजी डिप्लोमा रखती हैं…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया क्या अन्नामलाई अपना इस्तीफा रोकेंगे? अंदर बाहर होने पर पॉज बटन दबाने का बीजेपी का फैसला अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)के अन्नामलाई बीजेपी का इस्तीफा(टी)तमिलनाडु बीजेपी की राजनीति(टी)अन्नामलाई दिल्ली बैठक(टी)बीजेपी एआईएडीएमके गठबंधन(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)बीजेपी वोट शेयर में गिरावट(टी)द्रविड़ राजनीति तमिलनाडु(टी)नैनार नागेंद्रन तमिलनाडु
सेंसेक्स 700 अंक गिरकर 73,900 पर कारोबार कर रहा:निफ्टी 200 अंक नीचे 23,300 पर आया; आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली

आज यानी बुधवार, 3 जून को सेंसेक्स 700 अंक (0.96%) की गिरावट के साथ 73,900 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 200 अंकों (0.80%) की गिरावट है, ये 23,300 पर आ गया है। आज के कारोबार में आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली है। एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार अमेरिकी बाजार में कल तेजी रही विदेशी निवेशकों ने कल 8 हजार करोड़ के शेयर बेचे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल बाजार 383 अंक चढ़कर बंद हुआ था
सेंसेक्स 900 अंक गिरकर 73,700 पर कारोबार कर रहा:निफ्टी 250 अंक नीचे 23,250 पर आया; आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली

आज यानी बुधवार, 3 जून को सेंसेक्स 900 अंक (1.20%) की गिरावट के साथ 73,900 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 250 अंकों (1%) की गिरावट है, ये 23,250 पर आ गया है। आज के कारोबार में आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली है। एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार अमेरिकी बाजार में कल तेजी रही विदेशी निवेशकों ने कल 8 हजार करोड़ के शेयर बेचे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल बाजार 383 अंक चढ़कर बंद हुआ था
RBI मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग आज से:ब्याज दर में कटौती की उम्मीद नहीं, अभी रेपो रेट 5.25% पर

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग आज यानी 3 जून से शुरू हो रही है। यह मीटिंग 5 जून तक चलेगी और इसी दिन इसमें लिए गए सभी फैसलों का ऐलान किया जाएगा। एक्सपर्ट्स के अनुसार इस मीटिंग में ब्याज दरों में कटौती की कम ही उम्मीद है। इससे पहले अप्रैल में हुई मीटिंग में भी रेपो रेट में कटौती नहीं की गई थी। 2025 में चार बार में 1.25% की कटौती रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है? किसी भी सेंट्रल बैंक के पास पॉलिसी रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है, तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है। पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होता है तो डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है। इसी तरह जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है। हर दो महीने में होती है RBI की मीटिंग मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में 6 सदस्य होते हैं। इनमें से 3 RBI के होते हैं, जबकि बाकी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। RBI की मीटिंग हर दो महीने में होती है। बीते दिनों रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठकों का शेड्यूल जारी किया था। इस वित्तीय वर्ष में कुल 6 बैठकें होनी हैं, ये इस वित्त वर्ष की दूसरी मीटिंग है। पहली बैठक अप्रैल में हुई थी।
RBI मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग आज से:ब्याज दर में कटौती की उम्मीद नहीं, अभी रेपो रेट 5.25% पर

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग आज यानी 3 जून से शुरू हो रही है। यह मीटिंग 5 जून तक चलेगी और इसी दिन इसमें लिए गए सभी फैसलों का ऐलान किया जाएगा। एक्सपर्ट्स के अनुसार इस मीटिंग में ब्याज दरों में कटौती की कम ही उम्मीद है। इससे पहले अप्रैल में हुई मीटिंग में भी रेपो रेट में कटौती नहीं की गई थी। 2025 में चार बार में 1.25% की कटौती रिजर्व बैंक रेपो रेट बढ़ाता और घटाता क्यों है? किसी भी सेंट्रल बैंक के पास पॉलिसी रेट के रूप में महंगाई से लड़ने का एक शक्तिशाली टूल है। जब महंगाई बहुत ज्यादा होती है, तो सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट बढ़ाकर इकोनॉमी में मनी फ्लो को कम करने की कोशिश करता है। पॉलिसी रेट ज्यादा होगी तो बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा होगा। बदले में बैंक अपने ग्राहकों के लिए लोन महंगा कर देते हैं। इससे इकोनॉमी में मनी फ्लो कम होता है। मनी फ्लो कम होता है तो डिमांड में कमी आती है और महंगाई घट जाती है। इसी तरह जब इकोनॉमी बुरे दौर से गुजरती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में सेंट्रल बैंक पॉलिसी रेट कम कर देता है। इससे बैंकों को सेंट्रल बैंक से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है। हर दो महीने में होती है RBI की मीटिंग मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में 6 सदस्य होते हैं। इनमें से 3 RBI के होते हैं, जबकि बाकी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। RBI की मीटिंग हर दो महीने में होती है। बीते दिनों रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठकों का शेड्यूल जारी किया था। इस वित्तीय वर्ष में कुल 6 बैठकें होनी हैं, ये इस वित्त वर्ष की दूसरी मीटिंग है। पहली बैठक अप्रैल में हुई थी।
ऑस्ट्रेलिया ने दूसरे वनडे में पाकिस्तान को हराया:नाथन एलिस ने चटकाए 4 विकेट; शादाब खान की 71 रन की पारी बेकार

लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में खेले गए दूसरे वनडे में ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को 41 रन से हराया। इसके साथ ही सीरीज 1-1 से बराबर हो गई। नाथन एलिस ने 33 रन देकर 4 विकेट लिए। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलिया ने 50 ओवरों में 231 रन बनाए थे। जवाब में पाकिस्तान की टीम 44 ओवरों में 190 रन पर सिमट गई। शादाब खान ने 104 गेंदों में 71 रन बनाए, लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सके। जोश इंग्लिस और कैमरन ग्रीन की फिफ्टी 51 रन पर 3 विकेट गिरने के बाद जोश इंग्लिस (51 रन) और कैमरन ग्रीन (50 रन) ने संभलकर बल्लेबाजी की। दोनों ने चौथे विकेट के लिए 51 रन की साझेदारी की। इसके बाद मैट रेनशॉ ने 43 और ओलिवर पीक ने 32 गेंदों में 31 रन बनाकर टीम को 231 रन तक पहुंचाया। विकेटकीपर गाजी गोरी को 7 ओवर के लिए ड्रेसिंग रूम जाना पड़ा लाहौर की भीषण गर्मी का असर खिलाड़ियों पर दिखा। विकेटकीपर गाजी गोरी गर्मी और उमस के कारण 7 ओवर के लिए मैदान से बाहर चले गए। उनकी जगह रोहेल नजीर ने विकेटकीपिंग की। लौटने के बाद भी गोरी संघर्ष करते दिखे और कई गेंदें बाई के रूप में बाउंड्री पार गईं। 58 रन पर गिर गए थे पाकिस्तान के 5 विकेट 232 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान की शुरुआत खराब रही। नाथन एलिस और मैट कुहनेमैन ने पहले दो ओवरों में दोनों ओपनर्स को आउट किया। ऑस्ट्रेलिया ने 12 ओवर के अंदर 58 रन पर पाकिस्तान के 5 विकेट गिरा दिए थे। बाबर आजम और माज सदाकत फ्लॉप रहे। शादाब खान और अराफात मिन्हास के बीच 59 रन की साझेदारी एक समय पाकिस्तान की हार तय लग रही थी, लेकिन शादाब खान और अराफात मिन्हास ने छठे विकेट के लिए 59 रन जोड़े। पैर में जकड़न के बावजूद शादाब क्रीज पर डटे रहे। हारिस रऊफ के साथ 21 रन की साझेदारी में सभी रन शादाब ने बनाए। हालांकि, दूसरे छोर से विकेट गिरते रहे। नाथन एलिस ने रऊफ को बोल्ड कर पाकिस्तान की आखिरी उम्मीद खत्म कर दी। शादाब खान 71 रन बनाकर तनवीर संघा की गेंद पर स्टंप आउट हुए। अब 5 जून को लाहौर में खेला जाएगा सीरीज का फाइनल मैच तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मैच पाकिस्तान ने जीता था, जबकि दूसरा मैच ऑस्ट्रेलिया ने जीता। सीरीज 1-1 से बराबर है। अब तीसरा और निर्णायक मुकाबला शुक्रवार, 5 जून को लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में खेला जाएगा।
ऑस्ट्रेलिया ने दूसरे वनडे में पाकिस्तान को हराया:नाथन एलिस ने चटकाए 4 विकेट; शादाब खान की 71 रन की पारी बेकार

लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में खेले गए दूसरे वनडे में ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को 41 रन से हराया। इसके साथ ही सीरीज 1-1 से बराबर हो गई। नाथन एलिस ने 33 रन देकर 4 विकेट लिए। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलिया ने 50 ओवरों में 231 रन बनाए थे। जवाब में पाकिस्तान की टीम 44 ओवरों में 190 रन पर सिमट गई। शादाब खान ने 104 गेंदों में 71 रन बनाए, लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सके। जोश इंग्लिस और कैमरन ग्रीन की फिफ्टी 51 रन पर 3 विकेट गिरने के बाद जोश इंग्लिस (51 रन) और कैमरन ग्रीन (50 रन) ने संभलकर बल्लेबाजी की। दोनों ने चौथे विकेट के लिए 51 रन की साझेदारी की। इसके बाद मैट रेनशॉ ने 43 और ओलिवर पीक ने 32 गेंदों में 31 रन बनाकर टीम को 231 रन तक पहुंचाया। विकेटकीपर गाजी गोरी को 7 ओवर के लिए ड्रेसिंग रूम जाना पड़ा लाहौर की भीषण गर्मी का असर खिलाड़ियों पर दिखा। विकेटकीपर गाजी गोरी गर्मी और उमस के कारण 7 ओवर के लिए मैदान से बाहर चले गए। उनकी जगह रोहेल नजीर ने विकेटकीपिंग की। लौटने के बाद भी गोरी संघर्ष करते दिखे और कई गेंदें बाई के रूप में बाउंड्री पार गईं। 58 रन पर गिर गए थे पाकिस्तान के 5 विकेट 232 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान की शुरुआत खराब रही। नाथन एलिस और मैट कुहनेमैन ने पहले दो ओवरों में दोनों ओपनर्स को आउट किया। ऑस्ट्रेलिया ने 12 ओवर के अंदर 58 रन पर पाकिस्तान के 5 विकेट गिरा दिए थे। बाबर आजम और माज सदाकत फ्लॉप रहे। शादाब खान और अराफात मिन्हास के बीच 59 रन की साझेदारी एक समय पाकिस्तान की हार तय लग रही थी, लेकिन शादाब खान और अराफात मिन्हास ने छठे विकेट के लिए 59 रन जोड़े। पैर में जकड़न के बावजूद शादाब क्रीज पर डटे रहे। हारिस रऊफ के साथ 21 रन की साझेदारी में सभी रन शादाब ने बनाए। हालांकि, दूसरे छोर से विकेट गिरते रहे। नाथन एलिस ने रऊफ को बोल्ड कर पाकिस्तान की आखिरी उम्मीद खत्म कर दी। शादाब खान 71 रन बनाकर तनवीर संघा की गेंद पर स्टंप आउट हुए। अब 5 जून को लाहौर में खेला जाएगा सीरीज का फाइनल मैच तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मैच पाकिस्तान ने जीता था, जबकि दूसरा मैच ऑस्ट्रेलिया ने जीता। सीरीज 1-1 से बराबर है। अब तीसरा और निर्णायक मुकाबला शुक्रवार, 5 जून को लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में खेला जाएगा।
‘वोट शेयर 11% से गिरकर 3% पर आ गया’: अन्नामलाई ने बीजेपी आलाकमान को पांच पेज के पत्र में क्या कहा | भारत समाचार

आखरी अपडेट:03 जून, 2026, 08:12 IST तमिलनाडु विधानसभा में बीजेपी की ताकत 2021 में चार से घटकर अब सिर्फ एक रह गई है. तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के अन्नामलाई ने सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की, जबकि पार्टी में उनके भविष्य को लेकर अटकलें जारी हैं। तस्वीर/एएनआई सूत्रों के मुताबिक, तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई ने मंगलवार को बीजेपी हाईकमान को मौखिक रूप से बताया कि वह पार्टी छोड़ना चाहते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, अन्नामलाई ने राज्य में पार्टी के वोट शेयर में कमी का मुद्दा उठाया और इस नतीजे के लिए एआईएडीएमके के साथ गठबंधन को जिम्मेदार ठहराया. अन्नामलाई ने बीजेपी छोड़ने के अपने फैसले से अवगत कराया भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन के साथ बैठक में इस्तीफा देने के अपने फैसले के बारे में बोलते हुए, अन्नामलाई ने हाल के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के कारणों को भी रेखांकित किया। कुछ घंटों बाद, नेता ने गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की और उन्हें पद छोड़ने के फैसले के पीछे के कारण बताए। अन्नामलाई को राष्ट्रीय राजधानी में ही रहने के लिए कहा गया और प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंथ्रान को पार्टी आलाकमान ने दिल्ली बुलाया। मंगलवार शाम को नैनार ने तिरुवनंतपुरम से दिल्ली के लिए उड़ान भरी। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, बीजेपी को भरोसा था कि शाह और नबीन से मुलाकात के बाद अन्नामलाई अपना मन बदल लेंगे. हालांकि, उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला नहीं बदला। ‘बीजेपी का वोट शेयर 11% से गिरकर 3% पर आ गया’ सूत्रों के मुताबिक, अन्नामलाई ने बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन को पांच पेज का पत्र सौंपा. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पत्र में नेता ने उन्हें लगभग चार वर्षों के लिए राज्य अध्यक्ष नियुक्त करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व को धन्यवाद दिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें पार्टी में ”दरकिनार” कर दिया गया है। अन्नामलाई ने आगे बताया कि 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा का वोट शेयर 11% से घटकर पिछले विधानसभा चुनाव में 3% हो गया। उन्होंने इस गिरावट के लिए पार्टी के गलत फैसलों और एआईएडीएमके के साथ जारी गठबंधन को जिम्मेदार ठहराया। तमिलनाडु विधानसभा में पार्टी की ताकत 2021 में चार से घटकर अब सिर्फ एक रह गई है. अन्नामलाई बनाएंगे नई राजनीतिक पार्टी? रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व आईपीएस अधिकारी ने कई महीने पहले पार्टी छोड़ दी थी. अन्नामलाई के करीबी सूत्रों के अनुसार, उनका मानना है कि अभिनेता विजय के एक राजनीतिक ताकत के रूप में उदय के बाद तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है। सूत्रों ने यह भी कहा कि अन्नामलाई एक जन आंदोलन शुरू करने पर विचार कर रहे हैं, इस बात पर अटकलें जारी हैं कि क्या यह बाद में एक राजनीतिक पार्टी का रूप ले सकता है। बैठकों के बाद, पार्टी ने अन्नामलाई को आश्वासन दिया कि वे मुद्दों पर चर्चा के बाद जल्द ही वापस लौटेंगे। सूत्र के मुताबिक, बीजेपी हाईकमान भी अन्नामलाई के फैसले से सहमत हो गया है। अन्नामलाई आज औपचारिक घोषणा कर सकते हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में पृषा विभावरी प्रिशा News18.com में मुख्य उप-संपादक हैं, जिनके पास राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचारों में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह संपादकीय नेतृत्व, तीव्र समाचार निर्णय और उच्च प्रभाव वाली टिप्पणी में माहिर हैं…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया ‘वोट शेयर 11% से गिरकर 3% पर आ गया’: बीजेपी आलाकमान को लिखे पांच पन्नों के पत्र में अन्नामलाई ने क्या कहा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)अन्नामलाई(टी)बीजेपी(टी)इस्तीफा(टी)पत्र(टी)छोड़ें(टी)अमित शाह(टी)नितिन नबीन(टी)हाईकमान(टी)तमिलनाडु(टी)चुनाव(टी)विधानसभा
अन्नामलाई एक चौराहे पर: क्या तमिलनाडु का ‘सिंघम’ ‘थलपति’ विजय युग में अकेले दहाड़ सकता है? | भारत समाचार

आखरी अपडेट:03 जून, 2026, 08:06 IST टीवीके अन्नामलाई के लिए एक अलग चुनौती पेश करता है: यह गलतियों को तेजी से ठीक करता है, और द्रमुक नेताओं के विपरीत, विजय पर अभी भी भ्रष्टाचार या वंशवाद की राजनीति के आरोपों का बोझ नहीं है। राजनीतिक परिदृश्य में नाटकीय रूप से बदलाव के साथ, अन्नामलाई 2.0 के सामने एक अजीब, परेशान करने वाली समस्या होगी: तमिझागा वेत्री कज़गम। तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ राजनीतिक पारी खेलने वाले ‘सिंघम’ कहे जाने वाले के अन्नामलाई ने अब भगवा पार्टी से बाहर निकलने की इच्छा व्यक्त की है। जबकि भाजपा कथित तौर पर निर्णय के साथ आ गई है, अन्नामलाई के बाहर निकलने से राज्य के लिए पार्टी के मौजूदा नेतृत्व मैट्रिक्स में एक छेद हो जाएगा। ऐसी अटकलें हैं कि अन्नामलाई अपना खुद का संगठन लॉन्च कर सकते हैं, और अगर ऐसा जल्द ही होता है, तो उनकी दबी हुई आक्रामकता एक नए आकार और रूप में अभिव्यक्ति पाएगी। एडप्पादी के पलानीस्वामी के नेतृत्व में अन्नाद्रमुक के साथ अपने तनावपूर्ण संबंधों और संगठनात्मक संघर्षों को हल करने के लिए गैर-राजनेता जैसे दृष्टिकोण के बावजूद, अन्नामलाई भाजपा के लिए एक मजबूत नेता और जमीनी स्तर के राजनेता थे। तमिलनाडु में सत्ता के लिए लगातार परेशान करने वाला उनका प्रभाव इस बात का प्रमाण है कि राज्य में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए किसी को सेल्युलाइड दुनिया से होने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने निडरता को हथियार बनाया. चाहे वह अपने ‘डीएमके फाइल्स’ अभियान के साथ तत्कालीन सत्तारूढ़ पार्टी पर गंभीर हमला करना हो या उन मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाना हो, जिनसे कई राजनेता बचना पसंद करेंगे – जैसे कि अक्टूबर 2022 के कोयंबटूर ‘सिलेंडर विस्फोट’ को ‘आतंकवादी हमला’ कहना – उन्होंने टालने के बजाय स्पष्टवादिता को चुना। यह भी पढ़ें | नीली आंखों वाले लड़के से अकेले योद्धा तक: भाजपा में अन्नामलाई का उत्थान और पतन अन्नामलाई की जगह नैनार नागेंद्रन को लाने के भाजपा के फैसले को चुनावी चश्मे से ही देखा जाना चाहिए। स्वयं अन्नाद्रमुक के पूर्व सदस्य होने के नाते, नागेंद्रन को, पूरी संभावना है, तमिलनाडु में विपक्षी दल अन्नाद्रमुक के साथ संबंधों को सुचारू बनाने के लिए एक पुल के रूप में देखा जाता था। ऐसी अटकलें थीं कि अन्नाद्रमुक ने मांग की थी कि गठबंधन को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए अन्नामलाई के स्थान पर एक उपयुक्त नेता को नियुक्त किया जाए। भाजपा द्वारा राज्य में पैठ बनाने के लिए गठबंधन का रुख अपनाने के साथ, अन्नामलाई के लिए विकास की संभावनाएं छोटी होती जा रही थीं। जैसा कि प्रतीत होता है, अन्नामलाई की विशेषता शून्य-से-एक संक्रमण है। जब किसी नए प्रयास के लिए प्रारंभिक जोर देने, सशक्त भाषण के माध्यम से ध्यान आकर्षित करने, बिना किसी रोक-टोक के हमला करने और द्रमुक पर दबाव बनाए रखते हुए भाजपा पर लक्षित सवालों की एक श्रृंखला से लड़ने की बात आती है, तो वह अपने तत्व में होते हैं। राजनीतिक परिदृश्य में नाटकीय रूप से बदलाव के साथ, अन्नामलाई 2.0 के सामने एक अजीब, परेशान करने वाली समस्या होगी: तमिझागा वेत्री कज़गम (टीवीके)। जबकि पावर प्ले ने डीएमके के लिए काम किया, इसे टीवीके के साथ दोहराना दो कारणों से एक उप-इष्टतम समाधान होगा: टीवीके बिना सोचे-समझे लिए गए निर्णयों को तुरंत पलटने के लिए निरंतर मोड में प्रतीत होता है। इससे ब्राउनी पॉइंट-स्कोरिंग की कोई गुंजाइश नहीं रह जाती है। दूसरा, द्रमुक के नेताओं के विपरीत, सी जोसेफ विजय पर वंशवाद की राजनीति या भ्रष्टाचार जैसे प्रतीत होने वाले अक्षम्य आरोपों का आरोप नहीं लगाया जा सकता है। यह भी पढ़ें | 2 साल पहले, विजय की फिल्म का नंबर प्लेट पर ‘CM 2026’ था। आज यह भारतीय राजनीति में सबसे ज्यादा वायरल होने वाली क्लिप है अगर अन्नामलाई नए आवरण में चुनावी मैदान में कूदते हैं, तो उनकी ओ-टू-एरेना रणनीति क्या होगी? वह द्रमुक से कैसे भिन्न होंगे, जिसके पास पहले से ही ‘भगवाकरण तिरुवल्लुवर’ आरोप के साथ कुछ अंक हैं। एआईएडीएमके अपने आंतरिक झगड़ों में उलझी हुई है, लेकिन डीएमके एक शक्तिशाली दुश्मन (टीवीके) से लड़ने के लिए तैयार दिख रही है। तब, अन्नामलाई खुद को टीवीके के ध्यान के योग्य साबित करने की अविश्वसनीय स्थिति में पाएंगे, क्योंकि विजय ने कहा है कि वह डीएमके से कम खतरनाक किसी दुश्मन से नहीं लड़ेंगे। यह भाजपा के पूर्व ‘सिंघम’ को दोराहे पर खड़ा कर देता है। नतीजा चाहे जो भी हो, निश्चित रूप से यह कहा जा सकता है कि अन्नामलाई कम यात्रा वाला रास्ता अपनाएंगे। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में पूर्णिमा मुरली सीएनएन-न्यूज18 की वरिष्ठ विशेष संवाददाता पूर्णिमा मुरली ने तमिलनाडु में नागरिक और राजनीतिक मुद्दों पर एक दशक से अधिक समय तक रिपोर्टिंग की है। वह पिछले कुछ वर्षों से चैनल के लिए चेन्नई ब्यूरो का नेतृत्व कर रही हैं…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया अन्नामलाई एक चौराहे पर: क्या तमिलनाडु का ‘सिंघम’ ‘थलपति’ विजय युग में अकेले दहाड़ सकता है? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)के अन्नामलाई बीजेपी एग्जिट(टी)के अन्नामलाई तमिलनाडु(टी)बीजेपी नेतृत्व तमिलनाडु(टी)नैनार नागेंद्रन एआईएडीएमके(टी)डीएमके फ़ाइलें अभियान(टी)तमिझागा वेत्री कड़गम टीवीके(टी)सी जोसेफ विजय राजनीति(टी)तमिलनाडु राजनीतिक गठबंधन





