Tuesday, 22 Sep 2026 | 11:16 AM

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रुबीना दिलैक बोलीं- मां बनना सिर्फ खुशी नहीं:भावनात्मक बदलावों से जूझीं, कहा- महिलाएं पोस्टपार्टम डिप्रेशन जैसी मुश्किल स्थिति में पहुंच जाती हैं

रुबीना दिलैक बोलीं- मां बनना सिर्फ खुशी नहीं:भावनात्मक बदलावों से जूझीं, कहा- महिलाएं पोस्टपार्टम डिप्रेशन जैसी मुश्किल स्थिति में पहुंच जाती हैं

टीवी एक्ट्रेस रुबीना दिलैक इन दिनों अपने रियलिटी शो ‘द वार्ड’ को लेकर चर्चा में हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में रुबीना ने मदरहुड, पोस्टपार्टम डिप्रेशन, महिलाओं की मानसिक सेहत और परिवार के सपोर्ट जैसे अहम मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि मां बनना सिर्फ खुशियों का सफर नहीं, बल्कि भावनात्मक और मानसिक बदलावों से भरा दौर भी होता है, जिस पर समाज में कम बात होती है। रुबीना ने यह भी कहा कि नई मांओं को सबसे ज्यादा समझ, सपोर्ट और सही काउंसिलिंग की जरूरत होती है, ताकि वे खुद को फिर से संभाल सकें। सवाल: ‘द वार्ड’ एक इमोशनल एक्सपेरिमेंट जैसा शो है। इस शो ने आपको कैसे प्रभावित किया? जवाब: मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकती हूं कि मैंने इस शो को खुद अपनी जिंदगी में महसूस किया था। जब मैं मां बनी, तब मुझे एहसास हुआ कि मदरहुड सिर्फ खुशियां नहीं लाता, बल्कि इसके साथ शरीर, दिमाग और भावनाओं में बहुत बदलाव आते हैं। लेकिन इन बातों पर लोग खुलकर बात नहीं करते। मुझे हमेशा लगता था कि काश किसी ने मुझे पहले यह सब समझाया होता। इसी सोच के साथ मैंने चाहा कि एक ऐसी कम्युनिटी बने, जहां नई मांएं और प्रेग्नेंट महिलाएं खुलकर अपने अनुभव और परेशानियां साझा कर सकें। जब ‘द वार्ड’ शो आया, तो लगा कि यही वो मंच है जिसकी मैं कल्पना कर रही थी। हमने अलग-अलग महिलाओं को एक साथ लाकर उनकी कहानियां, संघर्ष और भावनाएं समझने की कोशिश की। तब महसूस हुआ कि हर महिला की प्रेग्नेंसी अलग हो सकती है, लेकिन भावनाएं लगभग एक जैसी होती हैं। सवाल: भारत में मदरहुड और उसके त्याग को तो सेलिब्रेट किया जाता है, लेकिन मां बनने के बाद एक महिला की अपनी पहचान खो जाती है। इस शो में इस मुद्दे पर कैसे बात की गई? जवाब: हमने इस शो के जरिए यही समझाने की कोशिश की है कि बच्चा पैदा होने के बाद परिवार तो अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाता है, लेकिन सबसे ज्यादा बदलाव एक नई मां की जिंदगी में आते हैं। उसे खुद को दोबारा पहचानने में समय लगता है। इसलिए हमने अलग-अलग शहरों और गांवों से आई महिलाओं की कहानियां सामने रखीं। किसी को परिवार का साथ मिला, तो किसी को नहीं मिला। अलग-अलग संस्कृतियों और परिवारों की सोच भी देखने को मिली। इन कहानियों के जरिए हमने यह दिखाने की कोशिश की कि महिलाओं को इस समय सबसे ज्यादा सपोर्ट की जरूरत होती है और परिवार मिलकर उनका सहारा बन सकता है। सवाल: मदरहुड के दौरान महिलाओं को हर तरफ से सलाह मिलती है। आपने खुद इन सलाहों को कैसे संभाला? जवाब: मदरहुड में हर कोई आपको सलाह देता है और खुद को एक्सपर्ट समझता है। लेकिन मैंने यह सीखा कि हर महिला की जर्नी अलग होती है। मैंने सबकी बातें सुनीं, लेकिन वही किया जो मुझे और मेरे बच्चों के लिए सही लगा। मैं शो में आई महिलाओं से भी यही कहती थी कि खुद पर भरोसा करें। अपने मन की आवाज सुनें। आपका दिल आपको बता देगा कि आपके लिए क्या सही है और क्या गलत। हमारा मकसद हर महिला को इतना मजबूत बनाना था कि वह अपनी पहचान के साथ इस सफर को तय कर सके। सवाल: प्रेग्नेंसी में शारीरिक स्वास्थ्य पर तो बात होती है, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य और काउंसिलिंग को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। आपने इस पर कितना ध्यान दिया? जवाब: हमने इस बात पर बहुत ध्यान दिया। क्योंकि अगर कोई महिला मानसिक रूप से कमजोर महसूस करने लगे, तो उसके लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है। प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के दौरान शरीर में बहुत बदलाव आते हैं, जिनका असर मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है। अगर सही समय पर काउंसिलिंग और सपोर्ट न मिले, तो महिला पोस्टपार्टम डिप्रेशन जैसी स्थिति में जा सकती है। पहले लोग इन बातों पर खुलकर चर्चा नहीं करते थे, लेकिन अब जागरूकता बढ़ रही है। हमारा मकसद यही है कि महिलाएं अपने भावनात्मक बदलावों को पहचानें और जरूरत पड़ने पर मदद लेने से न हिचकें। सवाल: आपने खुद पोस्टपार्टम डिप्रेशन का सामना किया। उस दौर से कैसे बाहर निकलीं? जवाब: पोस्टपार्टम डिप्रेशन एक ऐसा दौर है, जो हर महिला के लिए अलग होता है। यह कुछ दिनों से लेकर कई महीनों तक रह सकता है। इससे पूरी तरह बचना मुश्किल है, लेकिन अगर आपको इसकी जानकारी हो, तो इसे संभालना आसान हो जाता है। मेरी न्यूट्रिशनिस्ट ने मुझे पहले ही समझा दिया था कि बच्चे के जन्म के बाद अलग-अलग समय पर हार्मोनल बदलाव आएंगे। इसलिए मैंने खुद पर ध्यान देना शुरू किया। अगर मूड खराब हो रहा है, बिना वजह रोना आ रहा है या लोगों से बात करने का मन नहीं है, तो यह संकेत हो सकते हैं। ऐसे समय में मैंने छोटी-छोटी चीजें कीं, जैसे थोड़ी वॉक करना, स्ट्रेचिंग करना और खुद को एक्टिव रखने की कोशिश करना। जागरूकता ही सबसे बड़ी ताकत है। सवाल: इस दौर में पति का सपोर्ट कितना जरूरी होता है? जवाब: पति का सपोर्ट बहुत जरूरी होता है। अगर आपका पार्टनर आपको समझने के बजाय लगातार शिकायत करे, तो महिला की परेशानी और बढ़ जाती है। पोस्टपार्टम के दौरान कई बार महिला मानसिक रूप से बहुत थकी हुई होती है। उसे अकेले समय की जरूरत होती है। अगर पति समझदारी दिखाए और महिला पर दबाव न डाले, तो वह इस दौर से बेहतर तरीके से बाहर निकल सकती है। सवाल: छोटे शहरों और गांवों में आज भी मानसिक स्वास्थ्य और काउंसिलिंग को लेकर जागरूकता कम है। वहां की महिलाओं और परिवारों से क्या कहना चाहेंगी? जवाब: हम इस शो के जरिए छोटे-छोटे कदम उठाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे शो में गांवों और छोटे शहरों की महिलाएं भी आईं, जिन्होंने खुलकर अपनी परेशानियां बताईं। आज भी कई लोग काउंसलर या थेरेपिस्ट के पास जाने को गलत मानते हैं, लेकिन हम यही कहना चाहते हैं कि अगर मदद की जरूरत हो, तो उसे लेने में शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए। महिलाओं को एक सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए, जहां वे खुलकर अपनी बात कह सकें। सवाल: प्रेग्नेंसी में खान-पान को लेकर भी कई गलत धारणाएं होती हैं। इस पर

रुबीना दिलैक बोलीं- मां बनना सिर्फ खुशी नहीं:भावनात्मक बदलावों से जूझीं, कहा- महिलाएं पोस्टपार्टम डिप्रेशन जैसी मुश्किल स्थिति में पहुंच जाती हैं

रुबीना दिलैक बोलीं- मां बनना सिर्फ खुशी नहीं:भावनात्मक बदलावों से जूझीं, कहा- महिलाएं पोस्टपार्टम डिप्रेशन जैसी मुश्किल स्थिति में पहुंच जाती हैं

टीवी एक्ट्रेस रुबीना दिलैक इन दिनों अपने रियलिटी शो ‘द वार्ड’ को लेकर चर्चा में हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में रुबीना ने मदरहुड, पोस्टपार्टम डिप्रेशन, महिलाओं की मानसिक सेहत और परिवार के सपोर्ट जैसे अहम मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि मां बनना सिर्फ खुशियों का सफर नहीं, बल्कि भावनात्मक और मानसिक बदलावों से भरा दौर भी होता है, जिस पर समाज में कम बात होती है। रुबीना ने यह भी कहा कि नई मांओं को सबसे ज्यादा समझ, सपोर्ट और सही काउंसिलिंग की जरूरत होती है, ताकि वे खुद को फिर से संभाल सकें। सवाल: ‘द वार्ड’ एक इमोशनल एक्सपेरिमेंट जैसा शो है। इस शो ने आपको कैसे प्रभावित किया? जवाब: मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकती हूं कि मैंने इस शो को खुद अपनी जिंदगी में महसूस किया था। जब मैं मां बनी, तब मुझे एहसास हुआ कि मदरहुड सिर्फ खुशियां नहीं लाता, बल्कि इसके साथ शरीर, दिमाग और भावनाओं में बहुत बदलाव आते हैं। लेकिन इन बातों पर लोग खुलकर बात नहीं करते। मुझे हमेशा लगता था कि काश किसी ने मुझे पहले यह सब समझाया होता। इसी सोच के साथ मैंने चाहा कि एक ऐसी कम्युनिटी बने, जहां नई मांएं और प्रेग्नेंट महिलाएं खुलकर अपने अनुभव और परेशानियां साझा कर सकें। जब ‘द वार्ड’ शो आया, तो लगा कि यही वो मंच है जिसकी मैं कल्पना कर रही थी। हमने अलग-अलग महिलाओं को एक साथ लाकर उनकी कहानियां, संघर्ष और भावनाएं समझने की कोशिश की। तब महसूस हुआ कि हर महिला की प्रेग्नेंसी अलग हो सकती है, लेकिन भावनाएं लगभग एक जैसी होती हैं। सवाल: भारत में मदरहुड और उसके त्याग को तो सेलिब्रेट किया जाता है, लेकिन मां बनने के बाद एक महिला की अपनी पहचान खो जाती है। इस शो में इस मुद्दे पर कैसे बात की गई? जवाब: हमने इस शो के जरिए यही समझाने की कोशिश की है कि बच्चा पैदा होने के बाद परिवार तो अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाता है, लेकिन सबसे ज्यादा बदलाव एक नई मां की जिंदगी में आते हैं। उसे खुद को दोबारा पहचानने में समय लगता है। इसलिए हमने अलग-अलग शहरों और गांवों से आई महिलाओं की कहानियां सामने रखीं। किसी को परिवार का साथ मिला, तो किसी को नहीं मिला। अलग-अलग संस्कृतियों और परिवारों की सोच भी देखने को मिली। इन कहानियों के जरिए हमने यह दिखाने की कोशिश की कि महिलाओं को इस समय सबसे ज्यादा सपोर्ट की जरूरत होती है और परिवार मिलकर उनका सहारा बन सकता है। सवाल: मदरहुड के दौरान महिलाओं को हर तरफ से सलाह मिलती है। आपने खुद इन सलाहों को कैसे संभाला? जवाब: मदरहुड में हर कोई आपको सलाह देता है और खुद को एक्सपर्ट समझता है। लेकिन मैंने यह सीखा कि हर महिला की जर्नी अलग होती है। मैंने सबकी बातें सुनीं, लेकिन वही किया जो मुझे और मेरे बच्चों के लिए सही लगा। मैं शो में आई महिलाओं से भी यही कहती थी कि खुद पर भरोसा करें। अपने मन की आवाज सुनें। आपका दिल आपको बता देगा कि आपके लिए क्या सही है और क्या गलत। हमारा मकसद हर महिला को इतना मजबूत बनाना था कि वह अपनी पहचान के साथ इस सफर को तय कर सके। सवाल: प्रेग्नेंसी में शारीरिक स्वास्थ्य पर तो बात होती है, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य और काउंसिलिंग को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। आपने इस पर कितना ध्यान दिया? जवाब: हमने इस बात पर बहुत ध्यान दिया। क्योंकि अगर कोई महिला मानसिक रूप से कमजोर महसूस करने लगे, तो उसके लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है। प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के दौरान शरीर में बहुत बदलाव आते हैं, जिनका असर मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है। अगर सही समय पर काउंसिलिंग और सपोर्ट न मिले, तो महिला पोस्टपार्टम डिप्रेशन जैसी स्थिति में जा सकती है। पहले लोग इन बातों पर खुलकर चर्चा नहीं करते थे, लेकिन अब जागरूकता बढ़ रही है। हमारा मकसद यही है कि महिलाएं अपने भावनात्मक बदलावों को पहचानें और जरूरत पड़ने पर मदद लेने से न हिचकें। सवाल: आपने खुद पोस्टपार्टम डिप्रेशन का सामना किया। उस दौर से कैसे बाहर निकलीं? जवाब: पोस्टपार्टम डिप्रेशन एक ऐसा दौर है, जो हर महिला के लिए अलग होता है। यह कुछ दिनों से लेकर कई महीनों तक रह सकता है। इससे पूरी तरह बचना मुश्किल है, लेकिन अगर आपको इसकी जानकारी हो, तो इसे संभालना आसान हो जाता है। मेरी न्यूट्रिशनिस्ट ने मुझे पहले ही समझा दिया था कि बच्चे के जन्म के बाद अलग-अलग समय पर हार्मोनल बदलाव आएंगे। इसलिए मैंने खुद पर ध्यान देना शुरू किया। अगर मूड खराब हो रहा है, बिना वजह रोना आ रहा है या लोगों से बात करने का मन नहीं है, तो यह संकेत हो सकते हैं। ऐसे समय में मैंने छोटी-छोटी चीजें कीं, जैसे थोड़ी वॉक करना, स्ट्रेचिंग करना और खुद को एक्टिव रखने की कोशिश करना। जागरूकता ही सबसे बड़ी ताकत है। सवाल: इस दौर में पति का सपोर्ट कितना जरूरी होता है? जवाब: पति का सपोर्ट बहुत जरूरी होता है। अगर आपका पार्टनर आपको समझने के बजाय लगातार शिकायत करे, तो महिला की परेशानी और बढ़ जाती है। पोस्टपार्टम के दौरान कई बार महिला मानसिक रूप से बहुत थकी हुई होती है। उसे अकेले समय की जरूरत होती है। अगर पति समझदारी दिखाए और महिला पर दबाव न डाले, तो वह इस दौर से बेहतर तरीके से बाहर निकल सकती है। सवाल: छोटे शहरों और गांवों में आज भी मानसिक स्वास्थ्य और काउंसिलिंग को लेकर जागरूकता कम है। वहां की महिलाओं और परिवारों से क्या कहना चाहेंगी? जवाब: हम इस शो के जरिए छोटे-छोटे कदम उठाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे शो में गांवों और छोटे शहरों की महिलाएं भी आईं, जिन्होंने खुलकर अपनी परेशानियां बताईं। आज भी कई लोग काउंसलर या थेरेपिस्ट के पास जाने को गलत मानते हैं, लेकिन हम यही कहना चाहते हैं कि अगर मदद की जरूरत हो, तो उसे लेने में शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए। महिलाओं को एक सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए, जहां वे खुलकर अपनी बात कह सकें। सवाल: प्रेग्नेंसी में खान-पान को लेकर भी कई गलत धारणाएं होती हैं। इस पर

प्लेऑफ की टीमों में क्या रहा कॉमन फैक्टर:टॉप बैटर्स ने औसतन 1550+ रन बनाए; कोई टीम लगातार 3 से ज्यादा मैच नहीं हारी

प्लेऑफ की टीमों में क्या रहा कॉमन फैक्टर:टॉप बैटर्स ने औसतन 1550+ रन बनाए; कोई टीम लगातार 3 से ज्यादा मैच नहीं हारी

IPL 2026 के लीग स्टेज के बाद रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, गुजरात टाइटंस, सनराइजर्स हैदराबाद और राजस्थान रॉयल्स ने प्लेऑफ में जगह बनाई। 26 मई को बेंगलुरु और गुजरात के बीच क्वालिफायर-1 खेला जाएगा, जबकि 27 मई को हैदराबाद और राजस्थान एलिमिनेटर में भिड़ेंगे। चारों टीमों का सफर अलग रहा, लेकिन प्रदर्शन में कई कॉमन फैक्टर्स नजर आए। स्टोरी में प्लेऑफ में पहुंची चारों टीमों के कॉमन फैक्टर्स का एनालिसिस है। इसके लिए 4 पैरामीटर्स तय किए गए हैं…. 1. टॉप बैटर्स का प्रदर्शन 2. टॉप बॉलर्स का प्रदर्शन 3. किस टीम ने कितनी बार 200+ स्कोर बनाए 4. टीमों की विनिंग और लूजिंग स्ट्रीक 1. गुजरात-हैदराबाद के टॉप-3 बैटर्स का औसत 576 रन प्रति बल्लेबाज प्लेऑफ में पहुंची टीमों की सबसे बड़ी ताकत टॉप ऑर्डर रहा। बेंगलुरु के विराट कोहली (557), देवदत्त पडिक्कल (433) और रजत पाटीदार (393) ने मिलकर 1383 रन बनाए। गुजरात के साई सुदर्शन (638), शुभमन गिल (616) और जोस बटलर (469) ने 1723 रन जोड़े। हैदराबाद के हेनरिक क्लासन (606), ईशान किशन (569) और अभिषेक शर्मा (563) ने 1738 रन बनाए। राजस्थान के वैभव सूर्यवंशी (583), ध्रुव जुरेल (458) और यशस्वी जायसवाल (397) ने 1438 रन बनाए। चारों प्लेऑफ टीमों के टॉप-3 बल्लेबाजों ने मिलकर 6282 रन बनाए। प्रति टीम टॉप-3 बल्लेबाजों का औसत 1570.5 रन रहा। गुजरात और हैदराबाद के टॉप-3 बल्लेबाजों का औसत योगदान 576 रन प्रति बल्लेबाज रहा। राजस्थान के सूर्यवंशी ने 232.27 के स्ट्राइक रेट से टीम को तेज शुरुआत दिलाई। बेंगलुरु के कोहली ने 1 शतक और 4 फिफ्टी लगाईं। हैदराबाद के अभिषेक शर्मा ने 206.22 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की। गुजरात के ओपनर साई सुदर्शन और शुभमन गिल ने मिलकर 1254 रन बनाए। 2. बेंगलुरु के बॉलर्स ने 50 विकेट निकाले प्लेऑफ टीमों के गेंदबाजों ने पूरे सीजन लगातार विकेट लेकर मैचों का रुख बदला। बेंगलुरु के भुवनेश्वर कुमार (24), रासिख सलाम (14) और जोश हेजलवुड (12) ने 50 विकेट लिए। गुजरात के कगिसो रबाडा (24), राशिद खान (19) और मोहम्मद सिराज (17) ने 60 विकेट लिए। हैदराबाद के ईशान मलिंगा (19), साकिब हुसैन (15) और प्रफुल हिंगे (11) ने 45 विकेट लिए। राजस्थान के जोफ्रा आर्चर (21), बृजेश शर्मा (13) और नांद्रे बर्गर (11) ने 45 विकेट निकाले। प्लेऑफ टीमों के टॉप-3 गेंदबाजों ने औसतन 50+ विकेट लिए। बेंगलुरु और गुजरात के टॉप गेंदबाजों ने मिलकर 110 विकेट निकाले। औसतन हर गेंदबाज ने 18.33 विकेट लिए। भुवनेश्वर और रबाडा ने 24-24 विकेट लेकर अपनी टीमों की गेंदबाजी अटैक लीड की। राशिद खान और सिराज ने मिडिल व डेथ ओवर्स में असर छोड़ा। राजस्थान के लिए आर्चर और हैदराबाद के मलिंगा ने नई गेंद से लगातार विकेट निकाले। 3. 200+ स्कोर बनाए तो जीत पक्की प्लेऑफ की चार टीमों में सबसे ज्यादा 200+ स्कोर हैदराबाद ने बनाए। टीम ने 9 बार 200+ रन बनाए, जिनमें 7 मैच जीते और 2 हारे। बेंगलुरु के खिलाफ 255/4, मुंबई के खिलाफ 249/4, दिल्ली के खिलाफ 242/2 और पंजाब के खिलाफ 235/4 जैसे बड़े स्कोर बनाए। हैदराबाद का रनरेट 10.66 रहा, जो चारों प्लेऑफ टीमों में सबसे ज्यादा था। बेंगलुरु ने 8 बार 200+ स्कोर बनाए। टीम को 5 मैचों में जीत और 3 में हार मिली। चेन्नई के खिलाफ 250/3, मुंबई के खिलाफ 240/4 और पंजाब के खिलाफ 222/4 जैसे बड़े टोटल बनाए। टीम का रनरेट 10.50 रहा। इसी बल्लेबाजी की वजह से बेंगलुरु का नेट रनरेट +0.783 रहा, जो प्लेऑफ टीमों में सबसे बेहतर था। गुजरात ने 5 बार 200+ स्कोर बनाए। टीम ने 3 मैच जीते और 2 गंवाए। राजस्थान और चेन्नई के खिलाफ 229-229 रन बनाए, जबकि दिल्ली के खिलाफ 210 रन बनाए। टीम का रनरेट 9.37 और नेट रनरेट +0.695 रहा। यही टॉप-2 फिनिश की बड़ी वजह बना। राजस्थान ने 7 बार 200+ स्कोर बनाए। टीम को 5 जीत और 2 हार मिलीं। पंजाब के खिलाफ 228/4, लखनऊ के खिलाफ 225/3 और गुजरात के खिलाफ 210 रन बनाए। राजस्थान का रनरेट 10.24 रहा। टीम +0.189 नेट रनरेट के साथ चौथे स्थान पर रही। 4. कोई भी टीम लगातार 3 से ज्यादा मैच नहीं हारी प्लेऑफ में पहुंची चारों टीमों का बड़ा कॉमन फैक्टर उनकी निरंतरता रही। बेंगलुरु पूरे सीजन लगातार 2 से ज्यादा मैच नहीं हारी। गुजरात ने शुरुआती दो मैच हारने के बाद लगातार 3 जीत दर्ज कीं। हैदराबाद ने अप्रैल के पहले हफ्ते में लगातार 2 हार झेलीं, लेकिन बाद में लगातार 5 मैच जीतकर वापसी की। राजस्थान को सीजन में लगातार 3 हार मिलीं, लेकिन टीम ने बाद में लखनऊ और मुंबई को हराकर वापसी की। चारों टीमों ने सीजन में कम से कम एक बड़ा विनिंग स्ट्रीक बनाया। बेंगलुरु ने मुंबई, कोलकाता और पंजाब को हराकर लगातार 3 जीत दर्ज कीं। राजस्थान ने सीजन की शुरुआत लगातार 4 जीत के साथ की थी। टीम ने चेन्नई, गुजरात, मुंबई और बेंगलुरु को हराकर शुरुआती बढ़त बनाई। गुजरात ने चेन्नई, बेंगलुरु, पंजाब, राजस्थान और हैदराबाद को हराकर लगातार 5 मैच जीते। हैदराबाद ने राजस्थान, चेन्नई, दिल्ली, राजस्थान और मुंबई के खिलाफ लगातार 5 मैच जीते।

राहुल ने रोहित की बराबरी की:IPL में 51वीं बार फिफ्टी+ स्कोर बनाया, कुलदीप की हैट्रिक बॉल पर कैच छूटा; मोमेंट्स-रिकॉर्ड्स

राहुल ने रोहित की बराबरी की:IPL में 51वीं बार फिफ्टी+ स्कोर बनाया, कुलदीप की हैट्रिक बॉल पर कैच छूटा; मोमेंट्स-रिकॉर्ड्स

दिल्ली कैपिटल्स ने IPL 2026 के आखिरी लीग मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स को 40 रन से हरा दिया। ईडन गार्डन्स में दिल्ली के केएल राहुल ने IPL में सबसे ज्यादा फिफ्टी लगाने के मामले में रोहित शर्मा की बराबरी कर ली। उन्होंने 51वीं बार पचास या उससे ज्यादा का स्कोर बनाया। रविवार को कुलदीप यादव की हैट्रिक बॉल पर विकेटकीपर अभिषेक पोरेल ने कैच छोड़ दिया। वहीं कोलकाता के मनीष पांडे IPL में 4 हजार रन बनाने वाले तीसरे सबसे धीमें प्लेयर बने। दिल्ली-कोलकाता मैच के टॉप रिकॉर्ड्स-मोमेंट्स… 1. राहुल IPL में सबसे ज्यादा फिफ्टी लगाने वाले चौथे खिलाड़ी कोलकाता के खिलाफ केएल राहुल ने 60 रन की पारी खेली। यह IPL में उनकी 51वीं फिफ्टी रही। इसके साथ ही वह लीग में सबसे ज्यादा 50+ स्कोर करने वाले संयुक्त रुप से चौथे खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने रोहित शर्मा की बराबरी की। इस लिस्ट में विराट कोहली पहले नंबर पर हैं, जिन्होंने 76 बार यह स्कोर बनाया है। 2. मनीष IPL में सबसे धीमे 4 हजार रन बनाने वाले तीसरे खिलाड़ी रनचेज के सातवें ओवर में मनीष ने चौका लगाकर IPL में अपने 4 हजार रन पूरे किए। उन्होंने इसके लिए 164 पारी खेली। वे IPL में सबसे धीमे 4 हजार रन बनाने वाले तीसरे खिलाड़ी बन गए हैं। इस लिस्ट में दिनेश कार्तिक नंबर-1 पर हैं, जिन्होंने 188 पारी खेली थी। 3. राहुल ने सीजन में छठवीं बार 50+ स्कोर किया राहुल ने बतौर विकेटकीपर IPL के एक सीजन में सबसे ज्यादा 50+ स्कोर बनाने के रिकॉर्ड की बराबरी की है। उन्होंने कोलकाता के खिलाफ फिफ्टी के साथ इस सीजन 6 फिफ्टी या उससे ज्यादा स्कोर बनाए। इससे पहले वे 2018 में भी 6 बार बतौर विकेटकीपर 6 बार यह कारनामा कर चुके हैं। उनके अलावा ऋषभ पंत (2018) और प्रभसिमरन सिंह (2026) इस आंकड़े तक पहुंच चुके हैं। 4. बिना 50+ साझेदारी के चौथा सबसे बड़ा स्कोर बना दिल्ली ने कोलकाता के खिलाफ 203 रन का स्कोर बनाया। यह बिना किसी अर्धशतकीय साझेदारी के IPL का चौथा सबसे बड़ा टीम टोटल है। इस लिस्ट में चेन्नई सुपर किंग्स नंबर-1 पर है, जिन्होंने 2026 में मुंबई के खिलाफ वानखेड़े स्टेडियम पर 207/6 का स्कोर बनाया था। 5. रहाणे दिल्ली के खिलाफ सबसे ज्यादा 50+ बनाने वाले दूसरे खिलाड़ी अजिंक्य रहाणे ने दिल्ली के खिलाफ 63 रन की पारी खेली। उनका IPL में दिल्ली के खिलाफ यह आठवां 50+ स्कोर है। दिल्ली के खिलाफ सबसे ज्यादा बार 50+ स्कोर करने वाले दूसरे खिलाड़ी हैं। इस लिस्ट में विराट कोहली नंबर-1 पर है, जिन्होंने दिल्ली के खिलाफ 11 बार यह कारनामा किया है। यहां से टॉप-2 मोमेंट्स… 1. कुलदीप की हैट्रिक बॉल पर पोरेल ने छोड़ा कैच कोलकाता की पारी के 14वें ओवर में कुलदीप ने गजब की गेंदबाजी की। उन्होंने ओवर की दूसरी गेंद पर अजिंक्य रहाणे (63) और तीसरी गेंद पर रिंकू सिंह (0) को आउट किया। हैट्रिक बॉल पर भी कुलदीप ने तेजस्वी दहिया को फंसा लिया था। तेजस्वी के बैट का किनारा लेकर गेंद विकेटकीपर पोरेल के पास गई, लेकिन उन्होंने कैच छोड़ दिया। इस तरह कुलदीप हैट्रिक से चूक गए। 2. स्टार्क के ओवर में 3 विकेट गिरे रनचेज में स्टार्क के ओवर में कोलकाता ने 3 विकेट गंवा दिए। 17वें ओवर की पहली गेंद पर रोवमन पॉवेल (29) समीर रिजवी के डायरेक्ट-हिट पर रन आउट हुए। इसकी अगली ही गेंद पर स्टार्क ने अनुकुल रॉय (9) का अपनी ही गेंद पर कैच लपका। इसके बाद चौथी गेंद पर कार्तिक त्यागी (0) मिड-ऑफ पर अक्षर पटेल को कैच दे बैठे।

प्लेऑफ की टीमों में क्या रहा कॉमन फैक्टर:टॉप बैटर्स ने औसतन 1550+ रन बनाए; कोई टीम लगातार 3 से ज्यादा मैच नहीं हारी

प्लेऑफ की टीमों में क्या रहा कॉमन फैक्टर:टॉप बैटर्स ने औसतन 1550+ रन बनाए; कोई टीम लगातार 3 से ज्यादा मैच नहीं हारी

IPL 2026 के लीग स्टेज के बाद रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, गुजरात टाइटंस, सनराइजर्स हैदराबाद और राजस्थान रॉयल्स ने प्लेऑफ में जगह बनाई। 26 मई को बेंगलुरु और गुजरात के बीच क्वालिफायर-1 खेला जाएगा, जबकि 27 मई को हैदराबाद और राजस्थान एलिमिनेटर में भिड़ेंगे। चारों टीमों का सफर अलग रहा, लेकिन प्रदर्शन में कई कॉमन फैक्टर्स नजर आए। स्टोरी में प्लेऑफ में पहुंची चारों टीमों के कॉमन फैक्टर्स का एनालिसिस है। इसके लिए 4 पैरामीटर्स तय किए गए हैं…. 1. टॉप बैटर्स का प्रदर्शन 2. टॉप बॉलर्स का प्रदर्शन 3. किस टीम ने कितनी बार 200+ स्कोर बनाए 4. टीमों की विनिंग और लूजिंग स्ट्रीक 1. गुजरात-हैदराबाद के टॉप-3 बैटर्स का औसत 576 रन प्रति बल्लेबाज प्लेऑफ में पहुंची टीमों की सबसे बड़ी ताकत टॉप ऑर्डर रहा। बेंगलुरु के विराट कोहली (557), देवदत्त पडिक्कल (433) और रजत पाटीदार (393) ने मिलकर 1383 रन बनाए। गुजरात के साई सुदर्शन (638), शुभमन गिल (616) और जोस बटलर (469) ने 1723 रन जोड़े। हैदराबाद के हेनरिक क्लासन (606), ईशान किशन (569) और अभिषेक शर्मा (563) ने 1738 रन बनाए। राजस्थान के वैभव सूर्यवंशी (583), ध्रुव जुरेल (458) और यशस्वी जायसवाल (397) ने 1438 रन बनाए। चारों प्लेऑफ टीमों के टॉप-3 बल्लेबाजों ने मिलकर 6282 रन बनाए। प्रति टीम टॉप-3 बल्लेबाजों का औसत 1570.5 रन रहा। गुजरात और हैदराबाद के टॉप-3 बल्लेबाजों का औसत योगदान 576 रन प्रति बल्लेबाज रहा। राजस्थान के सूर्यवंशी ने 232.27 के स्ट्राइक रेट से टीम को तेज शुरुआत दिलाई। बेंगलुरु के कोहली ने 1 शतक और 4 फिफ्टी लगाईं। हैदराबाद के अभिषेक शर्मा ने 206.22 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की। गुजरात के ओपनर साई सुदर्शन और शुभमन गिल ने मिलकर 1254 रन बनाए। 2. बेंगलुरु के बॉलर्स ने 50 विकेट निकाले प्लेऑफ टीमों के गेंदबाजों ने पूरे सीजन लगातार विकेट लेकर मैचों का रुख बदला। बेंगलुरु के भुवनेश्वर कुमार (24), रासिख सलाम (14) और जोश हेजलवुड (12) ने 50 विकेट लिए। गुजरात के कगिसो रबाडा (24), राशिद खान (19) और मोहम्मद सिराज (17) ने 60 विकेट लिए। हैदराबाद के ईशान मलिंगा (19), साकिब हुसैन (15) और प्रफुल हिंगे (11) ने 45 विकेट लिए। राजस्थान के जोफ्रा आर्चर (21), बृजेश शर्मा (13) और नांद्रे बर्गर (11) ने 45 विकेट निकाले। प्लेऑफ टीमों के टॉप-3 गेंदबाजों ने औसतन 50+ विकेट लिए। बेंगलुरु और गुजरात के टॉप गेंदबाजों ने मिलकर 110 विकेट निकाले। औसतन हर गेंदबाज ने 18.33 विकेट लिए। भुवनेश्वर और रबाडा ने 24-24 विकेट लेकर अपनी टीमों की गेंदबाजी अटैक लीड की। राशिद खान और सिराज ने मिडिल व डेथ ओवर्स में असर छोड़ा। राजस्थान के लिए आर्चर और हैदराबाद के मलिंगा ने नई गेंद से लगातार विकेट निकाले। 3. 200+ स्कोर बनाए तो जीत पक्की प्लेऑफ की चार टीमों में सबसे ज्यादा 200+ स्कोर हैदराबाद ने बनाए। टीम ने 9 बार 200+ रन बनाए, जिनमें 7 मैच जीते और 2 हारे। बेंगलुरु के खिलाफ 255/4, मुंबई के खिलाफ 249/4, दिल्ली के खिलाफ 242/2 और पंजाब के खिलाफ 235/4 जैसे बड़े स्कोर बनाए। हैदराबाद का रनरेट 10.66 रहा, जो चारों प्लेऑफ टीमों में सबसे ज्यादा था। बेंगलुरु ने 8 बार 200+ स्कोर बनाए। टीम को 5 मैचों में जीत और 3 में हार मिली। चेन्नई के खिलाफ 250/3, मुंबई के खिलाफ 240/4 और पंजाब के खिलाफ 222/4 जैसे बड़े टोटल बनाए। टीम का रनरेट 10.50 रहा। इसी बल्लेबाजी की वजह से बेंगलुरु का नेट रनरेट +0.783 रहा, जो प्लेऑफ टीमों में सबसे बेहतर था। गुजरात ने 5 बार 200+ स्कोर बनाए। टीम ने 3 मैच जीते और 2 गंवाए। राजस्थान और चेन्नई के खिलाफ 229-229 रन बनाए, जबकि दिल्ली के खिलाफ 210 रन बनाए। टीम का रनरेट 9.37 और नेट रनरेट +0.695 रहा। यही टॉप-2 फिनिश की बड़ी वजह बना। राजस्थान ने 7 बार 200+ स्कोर बनाए। टीम को 5 जीत और 2 हार मिलीं। पंजाब के खिलाफ 228/4, लखनऊ के खिलाफ 225/3 और गुजरात के खिलाफ 210 रन बनाए। राजस्थान का रनरेट 10.24 रहा। टीम +0.189 नेट रनरेट के साथ चौथे स्थान पर रही। 4. कोई भी टीम लगातार 3 से ज्यादा मैच नहीं हारी प्लेऑफ में पहुंची चारों टीमों का बड़ा कॉमन फैक्टर उनकी निरंतरता रही। बेंगलुरु पूरे सीजन लगातार 2 से ज्यादा मैच नहीं हारी। गुजरात ने शुरुआती दो मैच हारने के बाद लगातार 3 जीत दर्ज कीं। हैदराबाद ने अप्रैल के पहले हफ्ते में लगातार 2 हार झेलीं, लेकिन बाद में लगातार 5 मैच जीतकर वापसी की। राजस्थान को सीजन में लगातार 3 हार मिलीं, लेकिन टीम ने बाद में लखनऊ और मुंबई को हराकर वापसी की। चारों टीमों ने सीजन में कम से कम एक बड़ा विनिंग स्ट्रीक बनाया। बेंगलुरु ने मुंबई, कोलकाता और पंजाब को हराकर लगातार 3 जीत दर्ज कीं। राजस्थान ने सीजन की शुरुआत लगातार 4 जीत के साथ की थी। टीम ने चेन्नई, गुजरात, मुंबई और बेंगलुरु को हराकर शुरुआती बढ़त बनाई। गुजरात ने चेन्नई, बेंगलुरु, पंजाब, राजस्थान और हैदराबाद को हराकर लगातार 5 मैच जीते। हैदराबाद ने राजस्थान, चेन्नई, दिल्ली, राजस्थान और मुंबई के खिलाफ लगातार 5 मैच जीते।

राहुल ने रोहित की बराबरी की:IPL में 51वीं बार फिफ्टी+ स्कोर बनाया, कुलदीप की हैट्रिक बॉल पर कैच छूटा; मोमेंट्स-रिकॉर्ड्स

राहुल ने रोहित की बराबरी की:IPL में 51वीं बार फिफ्टी+ स्कोर बनाया, कुलदीप की हैट्रिक बॉल पर कैच छूटा; मोमेंट्स-रिकॉर्ड्स

दिल्ली कैपिटल्स ने IPL 2026 के आखिरी लीग मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स को 40 रन से हरा दिया। ईडन गार्डन्स में दिल्ली के केएल राहुल ने IPL में सबसे ज्यादा फिफ्टी लगाने के मामले में रोहित शर्मा की बराबरी कर ली। उन्होंने 51वीं बार पचास या उससे ज्यादा का स्कोर बनाया। रविवार को कुलदीप यादव की हैट्रिक बॉल पर विकेटकीपर अभिषेक पोरेल ने कैच छोड़ दिया। वहीं कोलकाता के मनीष पांडे IPL में 4 हजार रन बनाने वाले तीसरे सबसे धीमें प्लेयर बने। दिल्ली-कोलकाता मैच के टॉप रिकॉर्ड्स-मोमेंट्स… 1. राहुल IPL में सबसे ज्यादा फिफ्टी लगाने वाले चौथे खिलाड़ी कोलकाता के खिलाफ केएल राहुल ने 60 रन की पारी खेली। यह IPL में उनकी 51वीं फिफ्टी रही। इसके साथ ही वह लीग में सबसे ज्यादा 50+ स्कोर करने वाले संयुक्त रुप से चौथे खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने रोहित शर्मा की बराबरी की। इस लिस्ट में विराट कोहली पहले नंबर पर हैं, जिन्होंने 76 बार यह स्कोर बनाया है। 2. मनीष IPL में सबसे धीमे 4 हजार रन बनाने वाले तीसरे खिलाड़ी रनचेज के सातवें ओवर में मनीष ने चौका लगाकर IPL में अपने 4 हजार रन पूरे किए। उन्होंने इसके लिए 164 पारी खेली। वे IPL में सबसे धीमे 4 हजार रन बनाने वाले तीसरे खिलाड़ी बन गए हैं। इस लिस्ट में दिनेश कार्तिक नंबर-1 पर हैं, जिन्होंने 188 पारी खेली थी। 3. राहुल ने सीजन में छठवीं बार 50+ स्कोर किया राहुल ने बतौर विकेटकीपर IPL के एक सीजन में सबसे ज्यादा 50+ स्कोर बनाने के रिकॉर्ड की बराबरी की है। उन्होंने कोलकाता के खिलाफ फिफ्टी के साथ इस सीजन 6 फिफ्टी या उससे ज्यादा स्कोर बनाए। इससे पहले वे 2018 में भी 6 बार बतौर विकेटकीपर 6 बार यह कारनामा कर चुके हैं। उनके अलावा ऋषभ पंत (2018) और प्रभसिमरन सिंह (2026) इस आंकड़े तक पहुंच चुके हैं। 4. बिना 50+ साझेदारी के चौथा सबसे बड़ा स्कोर बना दिल्ली ने कोलकाता के खिलाफ 203 रन का स्कोर बनाया। यह बिना किसी अर्धशतकीय साझेदारी के IPL का चौथा सबसे बड़ा टीम टोटल है। इस लिस्ट में चेन्नई सुपर किंग्स नंबर-1 पर है, जिन्होंने 2026 में मुंबई के खिलाफ वानखेड़े स्टेडियम पर 207/6 का स्कोर बनाया था। 5. रहाणे दिल्ली के खिलाफ सबसे ज्यादा 50+ बनाने वाले दूसरे खिलाड़ी अजिंक्य रहाणे ने दिल्ली के खिलाफ 63 रन की पारी खेली। उनका IPL में दिल्ली के खिलाफ यह आठवां 50+ स्कोर है। दिल्ली के खिलाफ सबसे ज्यादा बार 50+ स्कोर करने वाले दूसरे खिलाड़ी हैं। इस लिस्ट में विराट कोहली नंबर-1 पर है, जिन्होंने दिल्ली के खिलाफ 11 बार यह कारनामा किया है। यहां से टॉप-2 मोमेंट्स… 1. कुलदीप की हैट्रिक बॉल पर पोरेल ने छोड़ा कैच कोलकाता की पारी के 14वें ओवर में कुलदीप ने गजब की गेंदबाजी की। उन्होंने ओवर की दूसरी गेंद पर अजिंक्य रहाणे (63) और तीसरी गेंद पर रिंकू सिंह (0) को आउट किया। हैट्रिक बॉल पर भी कुलदीप ने तेजस्वी दहिया को फंसा लिया था। तेजस्वी के बैट का किनारा लेकर गेंद विकेटकीपर पोरेल के पास गई, लेकिन उन्होंने कैच छोड़ दिया। इस तरह कुलदीप हैट्रिक से चूक गए। 2. स्टार्क के ओवर में 3 विकेट गिरे रनचेज में स्टार्क के ओवर में कोलकाता ने 3 विकेट गंवा दिए। 17वें ओवर की पहली गेंद पर रोवमन पॉवेल (29) समीर रिजवी के डायरेक्ट-हिट पर रन आउट हुए। इसकी अगली ही गेंद पर स्टार्क ने अनुकुल रॉय (9) का अपनी ही गेंद पर कैच लपका। इसके बाद चौथी गेंद पर कार्तिक त्यागी (0) मिड-ऑफ पर अक्षर पटेल को कैच दे बैठे।

गर्मियों में रगड़ा ठंडाई रेसिपी: गर्मी में मूड को ताज़ा कर्ज़ी, बालाजी वाली राँगा ठंडी, बनाना भी है आसान; विशेष विधि नोट करें

तस्वीर का विवरण

सामग्री: 1 चम्मच ठंडा दूध, बादाम, काजू, पिस्ता, 1 बड़ा चम्मच खरबूजे के बीज, 1 बड़ा चम्मच खसखस, 1 छोटा चम्मच सौंफ, 5 काली मिर्च, 5 हरी मिर्च, 2 चम्मच चीनी, केसर, गुलाब की पंखुड़ियां, बर्फ के टुकड़े छवि: फ्रीपिक ठंडाई बनाने की विधि: सबसे पहले बादाम, काजू, पिस्ता, खरबूजे के बीज, खसखस ​​और सौंफ को 2 घंटे के लिए पानी में डुबोकर लें। इसके बाद सभी भूखण्डों का पानी पंप में डाल दिया गया। छवि: एआई थोड़ा दूध, प्लास्टिक पेस्टी तैयार कर लें। अब एक बड़ा पोर्शन में ठंडा दूध लें और डॉक्युमेंट पेस्ट दाल का मिश्रण तैयार किया गया है। फिर इसमें चीनी, इलायची पाउडर, काली मिर्च और केसर की गोलियां शामिल हैं। छवि: फ्रीपिक सभी एनईएलएम को कैमे से मिक्स करें ताकि फ्लेवर अच्छा पसंद आ जाए। इसके बाद ठंडी राखियों को 20-30 मिनट के लिए फ़िरोज़ में भेज दें। अब सर्विंग ग्लास में बर्फ के टुकड़े और ऊपर से अनमोल राँगा ठंडाई डालें। छवि: एआई अंतिम में पिस्ता, गुलाब की पंखुड़ियां और छोटी केसर की सजावट करें। अगर आप ज्यादा भरपूर स्वाद चाहते हैं, तो इसमें थोड़ी सी रबड़ी या मलाई भी मिला सकते हैं। छवि: एआई क्रश्ड आइस डालने के लिए कूलाई को और अधिक मात्रा में ठंडा बनायें. चीनी की जगह शहद या मिश्री का प्रयोग भी किया जा सकता है। छवि: एआई प्रोटोटाइप्स सेपरेट यह कूलई बॉडी को इंस्टेंट एनर्जी एनर्जी देता है। साथ ही गर्मी और लू से बचने में भी मदद मिलती है। घर आए मरीजों को सर्व करने के लिए भी यह एक परफैक्ट समर ड्रिंक है। छवि: फ्रीपिक

ट्रम्प बोले- भारत मुझ पर 100% भरोसा कर सकता है:पीएम मोदी को पता है जरूरत पर कहां फोन करना हैं, मैं और अमेरिका हमेशा खड़े

ट्रम्प बोले- भारत मुझ पर 100% भरोसा कर सकता है:पीएम मोदी को पता है जरूरत पर कहां फोन करना हैं, मैं और अमेरिका हमेशा खड़े

डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ करते हुए कहा है कि भारत जब भी चाहे, अमेरिका और वह खुद उसके साथ खड़े रहेंगे। नई दिल्ली में रविवार को भारत मंडपम कन्वेंशन सेंटर में अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ को लेकर एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ था। इस दौरान ट्रम्प ने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर को फोनकर संबोधित किया। ट्रम्प ने कहा, “भारत मुझ पर 100 फीसदी भरोसा कर सकता है। अगर उन्हें कभी मदद की जरूरत पड़े, तो उन्हें पता है कि कहां फोन करना है। वे यहीं फोन करते हैं।” ट्रम्प ने खुद को पीएम मोदी का बहुत बड़ा फैन बताया। ट्रम्प ने मार्को रूबियो से कहा, “PM मोदी को मेरी तरफ से नमस्ते कहिए और उन्हें बताइए कि मैं उनका बहुत बड़ा प्रशंसक हूं।” ट्रम्प ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “मार्को सबसे बेहतरीन हैं। वह अमेरिका के इतिहास के सबसे महान विदेश मंत्री के रूप में याद किए जाएंगे।” अमेरिकी राजदूत बोले- ट्रम्प हमेशा मोदी के बारे में पूछते हैं अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि जब भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प उनसे बात करते हैं, तो सबसे पहले प्रधानमंत्री मोदी के बारे में पूछते हैं। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका का रिश्ता नया नहीं, बल्कि मजबूत भरोसे पर टिका है। गोर ने कहा कि अमेरिका फर्स्ट का मतलब सिर्फ अमेरिका नहीं है। दोनों देश मिलकर ऐसे मौके तलाश रहे हैं, जिनसे दोनों को फायदा हो। उन्होंने बताया कि भारत में अमेरिकी दूतावास ने इस साल रिकॉर्ड 20.5 अरब डॉलर का निवेश अमेरिका में लाने में मदद की है। अमेरिकी विदेश मंत्री बोले- भारत-अमेरिका में ट्रेड डील जल्द मार्को रुबियो ने रविवार को कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्तों की रफ्तार धीमी नहीं पड़ी है और दोनों देशों के बीच जल्द ही व्यापार समझौता होने की उम्मीद है। भारत दौरे के दूसरे दिन रूबियो ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बातचीत की। उन्होंने अब तक के अपने भारत दौरे को शानदार बताया। रुबियो का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और कूटनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है। इसकी बड़ी वजह राष्ट्रपति ट्रम्प की टैरिफ नीति है, जिसके तहत कई भारतीय उत्पादों पर शुल्क बढ़ाया गया है। जयंशकर बोले- आतंकवाद के खिलाफ नरमी नहीं बरती जाए कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि आज के समय में भारत और अमेरिका के रिश्ते बहुत महत्वपूर्ण हो गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा तय की है। इससे भारत और अमेरिका दोनों के लोगों को फायदा होगा और दुनिया में भी अच्छा मैसेज जाएगा। जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को लेकर “जीरो टॉलरेंस” यानी बिल्कुल भी नरमी नहीं होनी चाहिए। इसी वजह से दोनों देशों के बीच आतंकवाद विरोधी सहयोग बहुत अहम है। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय तेजी से बदल रही है और ऐसे दौर में भारत-अमेरिका रिश्ते और मजबूत होते जा रहे हैं। दोनों देश मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था को सुरक्षित बनाने और दुनिया को ज्यादा विकल्प देने की दिशा में काम कर रहे हैं। जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों लोकतांत्रिक देश हैं। दोनों की अर्थव्यवस्था खुली है और समाज भी खुले विचारों वाला है। यही समानताएं दोनों देशों को मजबूत रणनीतिक साझेदार बनाती हैं। उन्होंने कहा कि व्यापार, रक्षा, टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऊर्जा, अंतरिक्ष, शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कृति जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

गर्मियों में इमली का शरबत रेसिपी: गर्मी में शरीर को बर्फ सी ठंडक देगा इमली का खट्टा-मीठा शरबत, 2 मिनट में तैयार हो जाएगा; विधि नोट करें

इमली का शरबत रेसिपी गर्मियों में ठंडा पेय खट्टी मीठी इमली पेय ऊर्जा बूस्टर

24 मई 2026 को 21:19 IST पर अद्यतन किया गया इमली ड्रिंक रेसिपी: गर्मी के मौसम में ठंडा और स्वादिष्ट शरबत पीने का मजा ही अलग होता है। ऐसे में अगर आप कुछ खट्टा-मीठा और ताज़ा मिठाई बनाना चाहते हैं, तो आपके लिए इमली का शरबत शामिल है। इसका स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को बहुत पसंद आता है। यह शरबत शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ गर्मी और थकान से भी राहत दिलाने में मदद करता है। अनुसरण करना : इमली का शरबत बनाने की सामग्री: 1 छोटी कटोरी इमली, 3 से 4 बड़े चीनी या गुड़, 2 चम्मच ठंडा पानी, आधा छोटा मोटा काला नमक, आधा छोटा टुकड़ा जीरा पाउडर, बर्फ के टुकड़े, पुदीने की मिठाइयाँ छवि: फ्रीपिक सबसे पहले इमली को 10 से 15 मिनट के लिए गुनगुने पानी में डुबोएं। जब इमली नर हो जाए, तो इसे हाथों से अच्छी तरह से मसलकर इसमें गूदा निकाल लें और बीज अलग कर दें। छवि: फ्रीपिक अब इमली के गूदे में ठंडा पानी डालें। इसके बाद चीनी या गुड़ के ढांचे में अच्छी तरह का नासा लें। फिर काला नमक और अन्य जीरा पाउडर डालें। अब तैयार करें शरबत को एक गिलास में अच्छी लें ताकि इसमें कोई रेशे न बचे। छवि: एआई ऊपर से बर्फ के टुकड़े और पुदीने की चटनी से गार्निश करें। आपका ठंडा-ठंडा इमली का शरबत तैयार है। छवि: फ्रीपिक इमली का शरबत पीने के फायदे: शरीर को तुरंत ठंडक मिलती है। गर्मी और लू से राहत में मदद मिलती है। पाचन को बेहतर बनाने में सहायता मिलती है। कट्टा-मीठा स्वाद मूड को ताज़ा कर देता है। छवि: एआई अगर आप शरबत को और सबसे मजेदार बनाना चाहते हैं, तो इसमें लिटिल सा नींबू रस और चाट मसाला भी मिला सकते हैं। इसका स्वाद और भी चटपटा है। छवि: एआई द्वारा प्रकाशित: समृद्धि ब्रेजा प्रकाशित 24 मई 2026 को 21:19 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)इमली का शरबत रेसिपी(टी)इमली का शरबत(टी)इमली शरबत ड्रिंक(टी)इमली ड्रिंक(टी)कूलिंग ड्रिंक(टी)ग्रीष्मकालीन ड्रिंक(टी)इमली ड्रिंक रेसिपी

SBI कर्मचारियों की हड़ताल टली:25-26 मई को सामान्य रूप से बैंक शाखाएं खुलेंगी; मैनेजमेंट और यूनियन की बैठक में सहमति बनी

SBI कर्मचारियों की हड़ताल टली:25-26 मई को सामान्य रूप से बैंक शाखाएं खुलेंगी; मैनेजमेंट और यूनियन की बैठक में सहमति बनी

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के कर्मचारियों की 25 और 26 मई को प्रस्तावित दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को टाल दिया गया है। बैंक मैनेजमेंट और यूनियन प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया। अब दोनों दिन बैंक शाखाओं में सामान्य रूप से कामकाज होगा। SBI मैनेजमेंट और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच शुक्रवार को मुंबई स्थित कॉरपोरेट सेंटर में बैठक हुई। SBI स्टाफ एसोसिएशन (बंगाल सर्कल) के सचिव सुदीप दत्ता ने पीटीआई (PTI) को बताया कि मैनेजमेंट के साथ बैठक सकारात्मक रही और महासंघ की उठाई गई कई मांगों पर प्रोग्रेस हुई है। इसे देखते हुए प्रस्तावित हड़ताल को टाल दिया गया। 27-28 मई को बकरीद की छुट्‌टी के चलते बैंक बंद रहेंगे वहीं 27 मई और 28 मई को बकरीद की छुट्‌टी के चलते SBI की ब्रांचों में कामकाज प्रभावित होगा। दरअसल, भारत के अलग-अलग राज्यों में बकरीद का त्योहार अलग-अलग दिन मनाया जाएगा, जिसके लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बकरीद (ईद-उल-अजहा) के लिए दो दिन की छुट्टियां का ऐलान किया है। देश के अधिकांश हिस्सों में 27 मई को बकरीद के कारण SBI बंद रहेगा, जबकि कुछ हिस्सों में 28 मई को छुट्टी रहेगी। वहीं जम्मू-कश्मीर के बैंक सर्किलों में बकरीद के मौके पर 27 और 28 मई दोनों दिन आधिकारिक छुट्टी रहेगी। क्यों हड़ताल पर जाना चाहते थे SBI कर्मचारी ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन (AISBISF) ने अपनी 16 मांगों को लिए हड़ताल का ऐलान किया था। यह हड़ताल कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा, काम करने की बेहतर स्थिति तय करने और ग्राहकों के हितों को ध्यान में रखते हुए बुलाई गई थी। AISBISF, स्टेट बैंक के कर्मचारियों का देशव्यापी प्रतिनिधित्व करने वाला संगठन है, जो कर्मचारियों के अधिकारों, सैलरी और वर्किंग कंडीशन को लेकर मैनेजमेंट से बातचीत करता है। 23-24 मई को वीकेंड की छुट्टी के चलते बैंक बंद थे इससे पहले 23 मई को महीने के चौथे शनिवार और 24 मई को रविवार की छुट्‌टी के चलते बैंक बंद थे। नियम के मुताबिक, देश के सभी बैंकों में हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी रहती है। ————————— ये खबर भी पढ़ें… घर बैठे फ्री में डाउनलोड करें ई-आधार: यह सभी जगह होता है मान्य, जानें इसे डाउनलोड करने की प्रोसेस आधार हमारे देश में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। कई बार हम इसके खोने या खराब होने के डर के कारण इसे अपने साथ नहीं रखते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि आप इसकी वर्चुअल कॉपी (PDF फाइल) भी डाउनलोड कर सकते हैं। इसके लिए आपको कोई फीस नहीं देनी होती और यह सभी जगह मान्य भी है। पूरी खबर पढ़ें…