तमिलनाडु कांग्रेस कैबिनेट: 59 साल बाद तमिलनाडु कांग्रेस कैबिनेट में शामिल, दो नेता आज खरीदे गए मंत्री पद की शपथ

तमिलनाडु कांग्रेस कैबिनेट: लगभग छह दशकों में पहली बार कांग्रेस तमिल कैबिनेट का हिस्सा बन रही है। पार्टी के दो नेता गुरुवार को तमिलंगा वेट्री कज़गम (टीवीके) के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं। यह घोषणा तब हुई, जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ़ विजय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार में कांग्रेस एलिजाबेथ एस. कुमार और पी. राजेश विश्वनाथन को शामिल करने की मंजूरी दी। इस कदम को तमिल के समुद्री राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण कदम और टीवीके सरकार के समर्थन वाले गठबंधन को मजबूत करने का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है। सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से इस घटना की पुष्टि की गई और इसे पार्टी के लिए एक ऐतिहासिक महल स्मारक के.सी.सी. के रूप में प्रस्तुत किया गया। वेणुगोपाल ने कहा, “यह हमारे लिए एक ऐतिहासिक अवसर है क्योंकि कांग्रेस 59 साल लंबे अंतराल के बाद तमिलनाडु मंत्रिमंडल में शामिल हो रही है।” वे दोनों नेताओं ने अपनी सहमति भी जताई और विश्वास जताया कि वे एक कल्याण-शादीशाह मॉडल को आगे बढ़ाने वाले ट्रेलर में जनता के सवालों को पूरा करने की दिशा में काम करेंगे। तमिलनाडु विधानसभा में कांग्रेस के अभी 5 विधायक और चुनाव के बाद यह टीवीके सरकार की प्रमुख सहायक शक्ति के रूप में उभरी है। कांग्रेस द्वारा समर्थित, वामपंथी विचारधारा, वीसीके और एआईयू शैली सहित अन्य गठबंधन सहयोगियों के साथ मिलकर विजय के नेतृत्व वाले प्रशासन को विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा आसानी से पार करने में समर्थन साबित हुआ। राजनीतिक पर्यवेक्षक कांग्रेस विधान में शामिल होने जाने को मंत्रिमंडल विस्तार की एक सामान्य प्रक्रिया से कहीं अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे टीवीके नेतृत्व द्वारा गठबंधन प्रबंधन को मजबूत करने और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए सहयोगी कंपनियों को अधिक प्रतिनिधित्व देने के लिए एक सोची-समझदारी रणनीति वाला कदम उठाने पर विचार किया जा रहा है। गुरुवार को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में तमिलनाडु की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत करने वाला माना जा रहा है, जिसमें कांग्रेस लगभग छह दशक के अंतराल के बाद राज्य में मंत्री पद की जिम्मेदारी के लिए नियुक्ति के लिए लौट रही है।
सिर्फ जून-जुलाई में मिलता है ये रसीला फल, नहीं खाया तो पछताएंगे, जानें नाम

Last Updated:May 21, 2026, 11:00 IST Lychee Health Benefits: गर्मियों में जिस तरह लोगों को आम का इंतजार रहता है, उसी तरह कुछ लोगों को लीची का इंतजार रहता है. काफी लोग लीची खाना पसंद करते हैं. रसीली, मीठे स्वाद वाली पानी से भरपूर लीची बेहद ही पौष्टिक फल है. यह मुख्य रूप से गर्मियों का ही फल है, जो मई से जुलाई के महीने में मिलता है. बिहार, उत्तर प्रदेश, वेस्ट बंगाल, उत्तराखंड में इसकी अधिक खेती होती है. बिहार में मुजफ्फरपुर में मिलने वाली लीची देशभर में बहुत मशहूर है. जानिए लीची में कौन से पोषक तत्व होते हैं और इसके सेवन से क्या-क्या फायदे हो सकते हैं. लीची में पाए जाने वाले पोषक तत्व- रसीली लीची में कई तरह के पोषक तत्व होते हैं. गर्मियों में आने वाला ये फल सिर्फ तीन महीने ही मिलता है, वह भी बहुत कम मात्रा में. ऐसे में इसका स्वाद एक बार तो जरूर चख लेना चाहिए. लीची में विटामिन सी ,पोटैशियम, कॉपर, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट्स, कार्बोहाइड्रेट्स, नेचुरल शर्करा, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस आदि मौजूद होते हैं. लीची में पानी की मात्रा लगभग 82 प्रतिशत होती है. लिची के सेवन से हार्ट की सेहत भी अच्छी होती है. चूंकि, इसमें पोटैशियम काफी होता है, जो ब्लड प्रेशर को रेगुलेट करता है. साथ ही ये हेल्दी ब्लड सर्कुलेशन को भी सपोर्ट करता है. ऐसे में आप इन तीन महीने तो लीची खाने का लुत्फ उठा ही सकते हैं. लिची में विटामिन सी भरपूर होता है. यह इम्यूनिटी को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है. विटामिन सी शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने का काम करता है, जिससे इम्यून सिस्टम कॉमन इंफेक्शन, रोगों से लड़ने काम करती है. Add News18 as Preferred Source on Google फाइबर से भरपूर लीची पाचन तंत्र को हेल्दी रखती है. डायटरी फाइबर और पानी से फाइबर होने के कारण ये पेट की सेहत के लिए बेहद ही ज्यादा हेल्दी फल है. कब्ज होने पर लीची खाने से फायदा होता है. सुबह पेट अच्छी तरह से साफ होता है. यदि आपके बाल और त्वचा बहुत डल, बेजान, ड्राई, अनहेल्दी नजर आते हैं तो आप लीची खाएं. इसमें मौजूद विटामिन C कोलेजन बनने में मदद करता है. इससे स्किन हेल्दी और जवां दिखती है. कॉपर जैसे मिनरल्स बालों की वृद्धि को बढ़ावा देते हैं. बालों में चमक आ सकती है. स्कैल्प हेल्दी रहते हैं. गर्मी में अक्सर शरीर की एनर्जी कम हो जाती है. हमेशा थकान महसूस होता है. आप लीची के सेवन से शरीर को भरपूर ऊर्जा प्रदान कर सकते हैं. लीची में मौजूद बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन, कॉपर और नेचुरल ग्लूकोज होने के कारण लीची मेटाबॉलिज़्म को संतुलित रखती है. थकान कम करने में मदद करती है. एक दिन में कितनी लीची खानी चाहिए- लीची बेहद फायदेमंद होती है, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. किसी भी चीज को अधिक खाने से फायदे की बजाय नुकसान हो होता है. आप प्रतिदिन लगभग 4 से 8 लीची खाएं. इससे अधिक लीची खाना ठीक नहीं, क्योंकि इसमें नेचुरल ग्लूकोज होता है. साथ ही इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी मीडियम होता है. अधिक सेवन से ब्लड शुगर लेवल अचानक से बढ़ सकता है. मामूली एलर्जी, पेट खराब भी हो सकता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
नौतपा में 50 डिग्री तक पहुंच सकता है पारा, इस बार कब पड़ेंगे साल के 9 सबसे गर्म दिन, अभी से हो जाएं अलर्ट

Extreme Heat Warning in India: देश के कई राज्यों में गर्मी ने अभी से लोगों की परेशानी बढ़ानी शुरू कर दी है. मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान और तेजी से बढ़ सकता है. इसी बीच लोग नौतपा को लेकर भी चर्चा कर रहे हैं, जिसे साल के सबसे गर्म दिनों में गिना जाता है. मान्यता है कि नौतपा के दौरान सूर्य की किरणें सीधे धरती पर ज्यादा प्रभाव डालती हैं, जिसकी वजह से भीषण गर्मी पड़ती है. नौतपा में कई इलाकों में तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. ऐसे में लोगों को सावधानी बरतनी होगी, ताकि सेहत को नुकसान न हो. नौतपा को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं भी हैं. क्या होता है नौतपा? हिंदू पंचांग और ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब नौतपा की शुरुआत मानी जाती है. यह अवधि लगातार 9 दिनों तक चलती है और इसे साल के सबसे गर्म दिनों का समय माना जाता है. इस दौरान सूर्य की तपिश सबसे ज्यादा महसूस होती है और उत्तर भारत समेत कई हिस्सों में लू का असर काफी बढ़ जाता है. इस साल कब शुरू होगा नौतपा? इस बार नौतपा 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक रहने की संभावना है. इन 9 दिनों के दौरान दिन का तापमान सामान्य से काफी ज्यादा रह सकता है. मौसम विभाग के मुताबिक राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य भारत के कई हिस्सों में तेज गर्मी और हीटवेव की स्थिति बन सकती है. कितना बढ़ सकता है तापमान? नौतपा के दौरान आमतौर पर तापमान 47 से 48 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है. कई इलाकों में तो तापमान 45 से 52 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण हीटवेव की स्थिति बन सकती है नौतपा क्यों पड़ता है? वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय सूर्य कर्क रेखा के करीब पहुंचता है. इससे सूर्य की किरणें ज्यादा सीधी और तीखी हो जाती हैं, जिसके कारण धरती का तापमान तेजी से बढ़ता है. इसका सेहत पर क्या असर पड़ता है? नौतपा में अत्यधिक गर्मी के कारण हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. लोगों को डिहाइड्रेशन और कमजोरी महसूस हो सकती है. कई बार चक्कर आने और थकान की शिकायत बढ़ जाती है. नौतपा में बुजुर्गों और बच्चों को ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है, क्योंकि उनका शरीर ज्यादा सेंसिटिव होता है. नौतपा में सभी लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए. नौतपा में कैसे करें बचाव? दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक धूप में निकलने से बचेंज्यादा से ज्यादा पानी और समय-समय पर ORS पिएंहल्की और लिक्विड डाइट लें, सूती और ढीले कपड़े पहनेंबाहर निकलते समय सिर और चेहरे को ढककर रखें नौतपा को लेकर धार्मिक मान्यताएं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नौतपा में सूर्य देव की तपिश सबसे अधिक होती है. इस दौरान सूर्य देव की पूजा, जल अर्पित करना और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे स्वास्थ्य, ऊर्जा और सकारात्मकता मिलती है. कहा जाता है कि नौतपा जितना तेज पड़ता है, मानसून उतना ही अच्छा होता है. पुराने समय में किसान इसे अच्छी बारिश और बेहतर फसल का संकेत मानते थे. नौतपा को तप का समय भी माना जाता है. धार्मिक रूप से यह आत्मसंयम, साधना और धैर्य का प्रतीक माना जाता है. कई लोग इस दौरान व्रत, दान-पुण्य और पूजा-पाठ करते हैं. भीषण गर्मी के कारण इस समय प्यासे लोगों और जानवरों को पानी पिलाना पुण्य का काम माना जाता है. कई जगहों पर प्याऊ लगाई जाती हैं और जल सेवा की जाती है.
दिल्ली में हीट स्ट्रोक का पहला मामला, 24 साल का छात्र RML अस्पताल में भर्ती, हालत गंभीर

होमताजा खबरDelhi दिल्ली में हीट स्ट्रोक का पहला मामला, 24 साल का छात्र RML अस्पताल में भर्ती Last Updated:May 21, 2026, 10:09 IST दिल्ली में इस सीजन का पहला हीट स्ट्रोक केस सामने आया है. 24 वर्षीय छात्र को ट्रेन में हालत बिगड़ने के बाद आरएमएल में भर्ती किया गया है. उसका इमर्सन कूलिंग से इलाज किया जा रहा है. फिलहाल छात्र की हालत गंभीर है. दिल्ली के आरएमएल अस्पताल में हीट स्ट्रोक का पहला केस आया है. दिल्ली में हीट स्ट्रोक का पहला मामला सामने आया है. राजधानी के डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में 24 साल के छात्र को हीट स्ट्रोक की वजह से भर्ती कराया गया है. फिलहाल छात्र की हालत गंभीर है. आरएमएल में छात्र को इमर्सन कूलिंग तकनीक से इलाज दिया जा रहा है. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi
क्या पीतल के बर्तन में चाय बनाने से बढ़ जाता है स्वाद? हकीकत जानकर चौंक जाएंगे

Last Updated:May 21, 2026, 10:03 IST Benefits of Making Tea in Brass Pots: कई लोग मानते हैं कि पीतल के बर्तन में बनी चाय का स्वाद बेहतर होता है, लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार यह हमेशा सुरक्षित नहीं माना जाता. चाय में मौजूद तत्व पीतल के साथ रिएक्शन कर सकते हैं. चाय बनाने के लिए स्टेनलेस स्टील या अन्य फूड-ग्रेड बर्तनों का इस्तेमाल करना ज्यादा बेहतर माना जाता है. पीतल के बर्तनों को चाय बनाने के लिए अच्छा नहीं माना जाता है. Brass Utensils Enhance Tea Flavor: हर साल 21 मई को इंटरनेशनल टी डे मनाया जाता है. यह खास दिन चाय के हेल्थ बेनिफिट्स और महत्व के बारे में जागरूक करने के उद्देश्य से सेलिब्रेट किया जाता है. करोड़ों लोगों के लिए चाय सिर्फ एक ड्रिंक नहीं, बल्कि इमोशन है. हर मौसम में लोग चाय पीना पसंद करते हैं. चाय का स्वाद बेहतर बनाने के लिए लोग अलग-अलग तरीके अपनाते हैं. कोई मिट्टी के कुल्हड़ में चाय पीना पसंद करता है तो कोई तांबे या पीतल के बर्तनों में बनी चाय को ज्यादा स्वादिष्ट मानता है. अब सवाल है कि क्या सच में पीतल के बर्तन में चाय बनाने से उसका स्वाद बढ़ जाता है? यूपी के गाजियाबाद स्थित रंजना न्यूट्रीग्लो क्लीनिक की फाउंडर और डाइटिशियन रंजना सिंह ने News18 को बताया कि पीतल तांबा और जिंक से बना मिश्रधातु होता है. पुराने समय में पीतल के बर्तनों का इस्तेमाल खाना बनाने और पानी रखने के लिए काफी किया जाता था. आयुर्वेद में भी पीतल के बर्तनों को कुछ मामलों में उपयोगी माना गया है. यह धातु गर्मी को तेजी से फैलाती है, इसलिए इसमें खाना जल्दी गर्म हो जाता है. इसी वजह से कुछ लोग मानते हैं कि पीतल के बर्तन में बनी चाय का स्वाद अलग और ज्यादा अच्छा होता है. पीतल के बर्तन में चाय बनाने से स्वाद में हल्का बदलाव महसूस हो सकता है, लेकिन यह हमेशा अच्छा ही हो ऐसा जरूरी नहीं है. चाय में मौजूद टैनिन और दूध जैसी चीजें पीतल की धातु के साथ रिएक्ट कर सकती हैं. इससे चाय का स्वाद थोड़ा मेटैलिक या अलग लगता है. कुछ लोगों को यह स्वाद पसंद आता है, जबकि कई लोगों को यह सामान्य नहीं लगता है. एक्सपर्ट का कहना है कि पीतल के बर्तन में ज्यादा एसिडिक चीजें बनाना सही नहीं माना जाता. चाय में मौजूद तत्व धातु के साथ रिएक्शन कर सकते हैं, खासकर अगर बर्तन अंदर से टिन चढ़ा हुआ न हो. बिना कलई वाले पीतल के बर्तन में चाय बनाने से धातु के कण पेय में मिल सकते हैं, जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. इसी वजह से कई विशेषज्ञ स्टेनलेस स्टील या फूड-ग्रेड बर्तनों को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं. डाइटिशियन के अनुसार अगर आप चाय का स्वाद बेहतर बनाना चाहते हैं, तो उसके लिए बर्तनों से ज्यादा जरूरी है सही सामग्री और बनाने का तरीका. ताजी चायपत्ती, सही मात्रा में दूध, अदरक, इलायची और सही उबाल चाय का स्वाद कई गुना बढ़ा सकते हैं. मिट्टी के कुल्हड़ में चाय पीने से भी प्राकृतिक खुशबू और अलग स्वाद महसूस होता है, जिसे कई लोग पसंद करते हैं. पीतल के बर्तन में चाय बनाने से स्वाद में थोड़ा बदलाव जरूर आ सकता है, लेकिन इसे हमेशा बेहतर कहना सही नहीं होगा. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
सेंसेक्स 400 अंक चढ़कर 75,700 पर कारोबार कर रहा:निफ्टी 130 अंक ऊपर 23,790 पर पहुंचा; सरकारी बैंक और मेटल शेयरों में खरीदारी

आज यानी गुरुवार, 21 मई को सेंसेक्स 400 अंक (0.50%) की तेजी के साथ 75,700 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 130 अंकों (0.55%) की तेजी है, ये 23,790 पर पहुंच गया है। आज के कारोबार में सरकारी बैंक और मेटल शेयरों में खरीदारी है। साउथ कोरिया का बाजार 7% से ज्यादा चढ़ा कल अमेरिकी बाजार तेजी के साथ बंद हुए विदेशी निवेशकों ने कल ₹1597 करोड़ के शेयर बेचे सेंसेक्स कल 118 अंक चढ़कर बंद हुआ था
क्या 50% विधायकों के चुनाव बाद हिंसा विरोध प्रदर्शन में शामिल न होने से टीएमसी टूट रही है? | भारत समाचार

आखरी अपडेट:21 मई, 2026, 09:10 IST पश्चिम बंगाल विधानसभा में 80 में से केवल 35 टीएमसी विधायक विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए, जिससे आंतरिक दरार की अटकलें तेज हो गईं क्योंकि पार्टी चुनाव में हार के बाद फिर से संगठित होने के लिए संघर्ष कर रही है। टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी, बाईं ओर, पश्चिम बंगाल के कालीघाट में लीगल सेल के साथ एक बैठक के दौरान बोलती हुई। (स्रोत: पीटीआई) बुधवार को पार्टी के पहले बड़े विरोध कार्यक्रम से लगभग 50% तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायकों की अनुपस्थिति ने 15 साल तक सत्ता में रहने के बाद 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में अपमानजनक हार का सामना करने के बाद पार्टी के टूटने की संभावना के बारे में ताजा राजनीतिक चर्चा शुरू कर दी। कथित तौर पर पार्टी द्वारा सड़क पर राजनीति में लौटने की आवश्यकता पर आंतरिक रूप से चर्चा करने के एक दिन बाद विधायक विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए। ‘चुनाव बाद हिंसा’ के खिलाफ टीएमसी विधायकों ने धरना नहीं दिया कुछ टीएमसी विधायकों ने “चुनाव के बाद की हिंसा” और फेरीवालों को हटाने के अभियान के विरोध में विधानसभा परिसर में अंबेडकर प्रतिमा के पास धरना दिया। यह विरोध सत्ता से विपक्ष में आने के बाद पार्टी का पहला समन्वित आंदोलन था। यह विरोध प्रदर्शन कथित तौर पर चुनाव बाद हिंसा, बेदखली और इमारतों को गिराने के लिए बुलडोजर के इस्तेमाल को लेकर आयोजित किया गया था। भाग लेने वाले विधायकों में सोवन्देब चट्टोपाध्याय, नयना बनर्जी, कुणाल घोष और रीताब्रता बनर्जी शामिल थे। यह भी पढ़ें: क्यों तृणमूल द्वारा संचालित कोलकाता सिविक बॉडी उल्लंघनों के लिए अभिषेक बनर्जी की संपत्तियों की जांच कर रही है? हालाँकि, 80 विधायकों में से केवल 35 विधायकों ने विरोध प्रदर्शन में भाग लिया, जिसने जल्द ही राजनीतिक हलकों में संगठन के भीतर दरार की अटकलों को हवा दे दी, जब पार्टी चुनावी झटके का सामना करने के बाद फिर से संगठित होने की कोशिश कर रही है। क्या टीएमसी सत्तारूढ़ दल से विपक्षी दल में स्थानांतरित हो सकती है? राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, चुनाव के बाद टीएमसी के पहले बड़े विरोध प्रदर्शन में अपेक्षाकृत कम उपस्थिति ने अनिवार्य रूप से इस बात पर सवाल उठाया है कि पार्टी एक लंबे समय से सत्तारूढ़ दल से विपक्षी दल में कितनी आसानी से बदलाव कर सकती है। उनका मानना है कि मुद्दा सिर्फ विरोध प्रदर्शन में कम उपस्थिति नहीं हो सकता है, बल्कि इस तरह के प्रकाशिकी राजनीतिक क्षेत्र में उस समय संदेश भेजते हैं जब पार्टी चुनाव के झटके के बाद अपने संगठनात्मक विश्वास को फिर से बनाने की कोशिश कर रही है। वरिष्ठ टीएमसी विधायक सोवनदेब चट्टोपाध्याय ने आंतरिक कलह की अफवाहों को खारिज कर दिया और विधायकों की अनुपस्थिति के लिए साजो-सामान संबंधी बाधाओं और संगठनात्मक जिम्मेदारियों को जिम्मेदार ठहराया। पीटीआई से बात करते हुए उन्होंने कहा, “आज कार्यक्रम में लगभग 35 विधायक मौजूद थे। चूंकि विधायक चुनाव के बाद हिंसा प्रभावित कई इलाकों में कार्यकर्ताओं के साथ व्यस्त थे, इसलिए कई लोग नहीं आ सके। और फिर कार्यक्रम एक दिन के नोटिस पर आयोजित किया गया था, इसलिए दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले विधायकों के लिए इसमें आना एक समस्या थी।” क्या चुनावी हार के बाद टीएमसी खुद को पुनर्जीवित कर सकती है? हालाँकि, विरोध का स्वरूप महत्वपूर्ण था क्योंकि यह पार्टी द्वारा कालीघाट में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करने के एक दिन बाद आया था, जहाँ, पार्टी सूत्रों के अनुसार, कई विधायकों ने चिंता जताई थी कि टीएमसी केवल रणनीति सत्रों के माध्यम से खुद को पुनर्जीवित नहीं कर सकती है और उसे जमीनी स्तर पर लामबंदी के माध्यम से लोगों के साथ फिर से जुड़ने की आवश्यकता होगी। यह भी पढ़ें: ‘बदसूरत, विचित्र प्रतिमा’: साल्ट लेक स्टेडियम से हटाई जाएगी ममता द्वारा डिजाइन की गई फुटबॉल की मूर्ति पार्टी सूत्रों के अनुसार, पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने मंगलवार की बैठक में भाग लिया था, जहां कुछ विधायकों ने चुनाव में हार के बाद सड़क पर आंदोलन से पार्टी नेतृत्व की कथित अनुपस्थिति पर चिंता जताई थी। कुछ विधायकों ने कथित तौर पर यह भी कहा कि “बंद कमरों के अंदर बैठकें आयोजित करने” से उस पार्टी को मदद नहीं मिलेगी जो अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है। सूत्रों के अनुसार, कालीघाट में हुई चर्चा में नेतृत्व के चुनाव के बाद के राजनीतिक दृष्टिकोण पर पार्टी के कुछ वर्गों की चिंताएं भी प्रतिबिंबित हुईं। इस राजनीतिक पृष्ठभूमि में, बुधवार का विरोध चुनाव के बाद की हिंसा और अतिक्रमण विरोधी उपायों पर चिंताओं से परे महत्व रखता है। टीएमसी के लिए, जन आंदोलन और सड़क पर विरोध प्रदर्शन लंबे समय से उसकी राजनीतिक रणनीति का अभिन्न अंग रहे हैं। सिंगुर और नंदीग्राम आंदोलन से लेकर वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ निरंतर अभियानों तक, पार्टी ने ऐतिहासिक रूप से अपने राजनीतिक कथानक को मजबूत करने और मतदाताओं से जुड़ने के लिए सार्वजनिक लामबंदी पर भरोसा किया है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया क्या 50% विधायकों के चुनाव बाद हिंसा विरोध प्रदर्शन में शामिल न होने से टीएमसी टूट रही है? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
बाजार की मिठाई छोड़िए, गर्मियों में घर पर बनाइए हेल्दी सत्तू के लड्डू, सेहत के लिए टॉनिक से कम नहीं – News18 हिंदी

X गर्मियों में घर पर बनाइए हेल्दी सत्तू के लड्डू, सेहत के लिए टॉनिक से कम नहीं Sattu Laddu Recipe: गर्मी के मौसम में बघेलखंड का देसी सुपरफूड सत्तू एक बार फिर लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है. खास बात यह है कि अब सत्तू का इस्तेमाल सिर्फ शरबत या परंपरागत व्यंजनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे हेल्दी और टेस्टी मीठे लड्डू भी तैयार किए जा रहे हैं. फिटनेस पसंद लोग और हेल्दी डाइट फॉलो करने वाले लोग इन लड्डुओं को खूब पसंद कर रहे हैं, क्योंकि इनमें रिफाइंड शुगर या चाशनी का इस्तेमाल नहीं होता. सीधी निवासी प्रियंका सिंह ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि सत्तू के लड्डू बनाना बेहद आसान है और इसके लिए ज्यादा सामग्री की जरूरत भी नहीं पड़ती. सबसे पहले सत्तू को हल्के देसी घी में भूनकर उसकी खुशबू और स्वाद बढ़ाया जाता है. फिर इसमें गुड़ या खजूर का पेस्ट मिलाकर प्राकृतिक मिठास दी जाती है, जिससे ये लड्डू स्वादिष्ट होने के साथ बेहद पौष्टिक भी बन जाते हैं. सत्तू में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर और आयरन पाया जाता है, जो शरीर को ताकत देने के साथ लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
विजय की टीवीके के लिए मुश्किलें, तमिलनाडु क्षेत्र में विश्वास मत हासिल करने के लिए ‘भ्रष्टाचार’ की ठोस जांच का पता लगाया गया

सुप्रीम कोर्ट में रविवार को तमिल क्षेत्र के तमिलगा वेट्री काश (टीवीके) में प्रमुख न्यायाधीशों पर आरोप लगाया गया है और मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच की गई है। मुख्यमंत्री विजय ने 13 मई को विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पर मतदान के दौरान 144 वोट हासिल किए, जबकि उनके खिलाफ 22 वोट पड़े। मदुरै निवासी केके रमेश ने याचिका में आरोप लगाया है कि तमिलनाडु विधानसभा में लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर सहमति नहीं बनी है। उन्होंने दावा किया कि टीवीके ने 108 सीटों वाले वारंट जारी किए हैं, लेकिन रातों-रात विभिन्न चैनल के हस्ताक्षर प्राप्त कर लिए गए हैं। दस्तावेज़ में यह भी कहा गया है कि दस्तावेज़ पूरी तरह से तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया जाए। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: भारत-रूस-चीन की टिक-टॉक फिर से! ब्रिक्स में जो होगा…वो होगा वास्तविक वैश्विक शक्ति समीकरण” href=’https://www.abplive.com/news/world/brics-summit-2026-putin-xi-jinping-expected-to-attend-in-india-entire-world-amid-iran-us-war-3132660′ target=”_self”>ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: भारत-रूस-चीन की टिक-टॉक फिर से! ब्रिक्स में जो होगा…वो होगा वास्तविक वैश्विक शक्ति समीकरण इसमें कहा गया है, ”तमिलनाडु क्षेत्र में अन्य पुस्तकालयों के कुछ कथित कथित रूप से प्रोक्योरमेंट-फरोख्त में शामिल थे।” टीवीके ने कुछ मशहूर हस्तियों को भारी मात्रा में शामिल किया था। आरोप है कि सौदेबाज़ी की गई और उन्हें बड़ी रकम बाँट दी गई।” फाइल में कहा गया है, ”इसलिए भंग विधानसभा की जाए और मामले की गहन जांच के लिए रिसर्च को अंतिम रूप दिया जाए।” जब तक प्रमाण-पत्र जांच पूरी न हो जाए, तब तक तमिल में राष्ट्रपति शासन स्थापित किया जाना चाहिए।” ट्विशा शर्मा मामले में यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह का बड़ा बयान, ‘मृतका के परिवार की बातें…’” href=’https://www.abplive.com/states/up-uk/twisha-sharma-death-case-former-up-dgp-vikram-singh-reaction-3132265′ target=”_self”>ट्विशा शर्मा मामले में यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह का बड़ा बयान, ‘मृतका के परिवार की बातें…’ (टैग्सटूट्रांसलेट)टीवीके(टी)विजय(टी)तमिलनाडु(टी)राज्य विधान सभा(टी)तमिलगा वेत्री कशगम (टीवीके)(टी)तमिलनाडु(टी)विधानसभा(टी)विजय
एस्टन विला 30 साल बाद बनी यूरोपा लीग चैंपियन:फाइनल में जर्मनी के फ्रीबर्ग को 3-0 से हराया; मैनेजर उनाई एमेरी ने पांचवीं बार जीता खिताब

इंग्लैंड के फुटबॉल क्लब एस्टन विला ने इस्तांबुल में खेले गए यूरोपा लीग फाइनल में जर्मनी के एससी फ्रीबर्ग को 3-0 से हराया। इस जीत के साथ क्लब ने ट्रॉफी जीतकर फैंस का 30 साल का इंतजार खत्म किया। एस्टन विला ने 1996 के बाद पहली बड़ी घरेलू ट्रॉफी और 1982 के बाद पहली बड़ी यूरोपीय ट्रॉफी जीती। टीम की सफलता में मैनेजर उनाई एमेरी की बड़ी भूमिका रही, जिन्होंने रिकॉर्ड पांचवीं बार यूरोपा लीग का खिताब जीता। दोहराव हटाया, वाक्य छोटे किए फाइनल की शुरुआत से ही एस्टन विला ने खेल पर कंट्रोल बनाए रखा। शुरुआती मिनटों में मॉर्गन रोजर्स ने फ्रीबर्ग के गोलकीपर नूह अतुबोलू को शानदार शॉट से सतर्क कर दिया था। इसके बाद विला ने लगातार हमले किए और हाफ-टाइम से पहले पहला गोल दागकर बढ़त बना ली। टाईलेमैंस और बुएंडिया ने पहले हाफ में दागे दो बैक-टू-बैक गोल पहले हाफ में दोनों टीमें गोलरहित बराबरी पर थीं, तभी एस्टन विला ने फ्रीबर्ग के डिफेंस को भेद दिया। कॉर्नर पर मॉर्गन रोजर्स ने पेनल्टी एरिया में सटीक क्रॉस दिया, जिसे यूरी टाईलेमैंस ने गोल में बदल दिया। यह टाईलेमैंस का पूरे सीजन में दूसरा गोल था। उन्होंने दिसंबर के बाद पहला गोल फाइनल में दागा। फ्रीबर्ग पहले गोल से उबर भी नहीं पाया था कि कुछ मिनट बाद एस्टन विला ने दूसरा गोल कर दिया। एमिलियानो बुएंडिया ने डी-एरिया के बाहर से शॉट खेला, जो गोल पोस्ट के कोने में गया। लगातार दो गोल की बदौलत एस्टन विला हाफ-टाइम तक 2-0 से आगे हो गया। दूसरे हाफ में रोजर्स ने किया तीसरा गोल, फ्रीबर्ग को वापसी का मौका नहीं मिला हाफ-टाइम के बाद एस्टन विला ने फ्रीबर्ग को वापसी का मौका नहीं दिया। मॉर्गन रोजर्स ने 58वें मिनट में टीम के लिए तीसरा और निर्णायक गोल दागा। रोजर्स ने एमिलियानो बुएंडिया के क्रॉस पर स्लाइड करते हुए गेंद को नेट में पहुंचाया। इसके साथ विला की 3-0 की बढ़त पक्की हो गई और मैच फ्रीबर्ग के हाथ से निकल गया। उसी जर्सी में उतरी टीम, प्रिंस विलियम और टॉम हैंक्स ने मनाया जश्न बर्मिंघम के इस क्लब के लिए यह जीत भावुक और ऐतिहासिक रही। एस्टन विला ने आखिरी बार 1996 में लीग कप जीता था, जबकि यूरोप में उसकी पिछली बड़ी सफलता 1982 के यूरोपियन कप फाइनल में आई थी, जब टीम ने बायर्न म्यूनिख को हराया था। एस्टन विला इस्तांबुल में सफेद जर्सी पहनकर उतरी, जैसी उसने 1982 में रॉटरडैम में पहनी थी। 1982 की विजेता टीम के हीरो पीटर विथ और डेनिस मॉर्टिमर भी स्टैंड्स में मौजूद थे। ब्रिटिश शाही परिवार के प्रिंस विलियम और हॉलीवुड एक्टर टॉम हैंक्स ने भी जीत का जश्न मनाया। टॉम हैंक्स ने मैच से पहले टीम के लिए खास सपोर्ट मैसेज भेजा था।







