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फ्रांस में 100 से ज्यादा स्कूलों में चाइल्ड एब्यूज स्कैंडल:3 साल की बच्ची का 'मॉनिटर' ने रेप किया; केस की खुली सुनवाई शुरू

फ्रांस में 100 से ज्यादा स्कूलों में चाइल्ड एब्यूज स्कैंडल:3 साल की बच्ची का 'मॉनिटर' ने रेप किया; केस की खुली सुनवाई शुरू

फ्रांस इस समय एक बड़े चाइल्ड एब्यूज स्कैंडल से जूझ रहा है। पेरिस समेत 100 से ज्यादा स्कूलों और डे-केयर सेंटरों में बच्चों के साथ हिंसा, यौन शोषण और रेप के आरोपों की जांच चल रही है। मामले सामने आने के बाद देशभर में आक्रोश बढ़ गया है। 100 से ज्यादा संस्थानों में जांच पेरिस की प्रॉसिक्यूटर लॉर बेको ने बताया कि राजधानी में 84 प्रीस्कूल, करीब 20 प्राइमरी स्कूल और लगभग 10 डे-केयर सेंटरों में जांच चल रही है। कई मामलों में छोटे बच्चों के साथ रेप और यौन शोषण के आरोप लगाए गए हैं। आरोप स्कूल मॉनिटर्स पर लगे हैं। ये वे कर्मचारी होते हैं जो बच्चों की देखभाल लंच ब्रेक, खेल, सोने के समय और आफ्टर-स्कूल गतिविधियों के दौरान करते हैं। #MeTooSchool आंदोलन ने उठाई आवाज
कोर्ट के बाहर #MeTooSchool आंदोलन से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बैनर पर लिखा- “कोई भी बच्चा स्कूल जाने से न डरे।” आंदोलन की सह-संस्थापक बार्का जरूआली ने कहा कि अब पूरे देश में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागने की जरूरत है। बच्चों को भूखा रखने और मारपीट के आरोप अभिभावकों ने आरोप लगाया कि कुछ मॉनिटर्स बच्चों पर चिल्लाते थे, बाल खींचते थे और खाना देने से मना कर देते थे। कुछ मामलों में बच्चों के साथ यौन शोषण के आरोप भी लगे हैं। पीड़ित परिवारों के वकीलों का कहना है कि कई अभिभावकों को शिकायत दर्ज कराने और कार्रवाई करवाने के लिए महीनों संघर्ष करना पड़ा। पीड़ित परिवारों ने ट्रायल सार्वजनिक कराया फ्रांस में बच्चों से जुड़े मामलों की सुनवाई आमतौर पर बंद कमरे में होती है, लेकिन इस बार पीड़ित परिवारों ने ट्रायल सार्वजनिक रखने की मांग की। परिवारों के वकीलों के मुताबिक वे गिसेल पेलिको के चर्चित रेप केस से प्रेरित थे। गिसेल ने कहा था कि “शर्म पीड़ितों नहीं, अपराधियों को होनी चाहिए।” कोर्ट में शुरू हुआ पहला बड़ा ट्रायल स्कैंडल से जुड़े पहले बड़े मामलों में से एक का ट्रायल इस हफ्ते पेरिस में शुरू हुआ। 36 वर्षीय स्कूल सहायक डेविड जी. पर सितंबर 2024 से अप्रैल 2025 के बीच 3 से 5 साल के पांच बच्चों के यौन शोषण और दो महिला सहकर्मियों के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप है। हालांकि, आरोपी ने सभी आरोपों से इनकार किया है। जांचकर्ताओं के मुताबिक बच्चों ने पुलिस को अपने शब्दों में अनुचित छूने की घटनाएं बताईं। अगर दोष साबित हुए तो आरोपी को 10 साल तक की जेल और 1.5 लाख यूरो तक जुर्माना हो सकता है। बच्चों में दिखा गंभीर मानसिक असर कुछ अभिभावकों ने कहा कि उनके बच्चों में लंबे समय से डर और मानसिक तनाव के संकेत दिख रहे थे। एक वकील ने बताया कि 3 साल का एक बच्चा स्कूल जाने से डरने लगा था। आरोप है कि उसके साथ हिंसा करने वाले मॉनिटर के खिलाफ पहले भी शिकायतें थीं। प्रशासन पर बढ़ा दबाव मामले सामने आने के बाद पेरिस प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। अधिकारियों के मुताबिक 2026 के पहले तीन महीनों में 78 स्कूल सहायकों को सस्पेंड किया गया, जिनमें 31 पर यौन शोषण के आरोप हैं। फ्रांस की स्वतंत्र संस्था CIIVISE के अनुसार देश में हर साल करीब 1.6 लाख बच्चे रेप या यौन शोषण का शिकार होते हैं। फ्रांस में स्कूल मॉनिटर कौन होते हैं? फ्रांस में स्कूल मॉनिटर, जिन्हें एनिमेटर या पेरिस्कोलर स्टाफ भी कहा जाता है, स्थानीय नगर प्रशासन द्वारा नियुक्त कर्मचारी होते हैं। ये सीधे फ्रांस के शिक्षा मंत्रालय के अधीन नहीं होते। इनकी जिम्मेदारी नर्सरी और प्राइमरी स्कूलों में 3 से 11 साल तक के बच्चों की निगरानी करना होती है। ये बच्चों को लंच ब्रेक, दोपहर की नींद, खेलकूद और आफ्टर-स्कूल गतिविधियों के दौरान संभालते हैं। ये शिक्षक नहीं होते, बल्कि खेल, क्राफ्ट और मनोरंजन गतिविधियां संचालित करते हैं। वहीं सेकेंडरी स्कूलों (कॉलेज और हाई स्कूल) में अनुशासन, सुरक्षा और अनुपस्थिति की निगरानी ‘स्कूल लाइफ’ स्टाफ करता है, जो विशेष प्रशासनिक अधिकारियों के अधीन काम करता है। फ्रांस में तीन साल की उम्र से स्कूल जाना जरूरी है। इसलिए नर्सरी और प्राइमरी स्कूलों में छोटे बच्चे दिन का बड़ा हिस्सा इन मॉनिटर्स के साथ बिताते हैं। मॉनिटर्स सीधे शिक्षा मंत्रालय या स्कूल के कर्मचारी नहीं होते। इन्हें स्थानीय प्रशासन, नगर परिषद या सिटी हॉल की तरफ से भर्ती किया जाता है। अब यह सिस्टम विवादों में है। ऐसा कहा जा रहा है कि मॉनिटर्स की भर्ती प्रक्रिया बहुत कमजोर है। कई लोगों को बिना खास ट्रेनिंग, मनोवैज्ञानिक जांच या पेशेवर डिग्री के काम पर रख लिया जाता है। बड़ी संख्या में लोग अस्थायी या घंटे के हिसाब से काम करते हैं, इसलिए निगरानी और जवाबदेही भी कमजोर रहती है। क्या है #MeTooSchool आंदोलन? #MeTooSchool फ्रांस का एक अभिभावक और सामाजिक आंदोलन है, जो स्कूलों में बच्चों के खिलाफ यौन शोषण, हिंसा और उत्पीड़न के मामलों को सामने लाने और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग करता है। पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया कि शुरुआती शिकायतों को स्कूल प्रशासन ने नजरअंदाज कर दिया था। पेरिस की प्रॉसिक्यूटर लॉर बेको के मुताबिक राजधानी में 84 नर्सरी स्कूल, 20 प्राइमरी स्कूल और 10 डे-केयर सेंटरों में जांच चल रही है। पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोयर ने बताया कि 2026 की शुरुआत से अब तक 78 स्कूल और आफ्टर-स्कूल कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है। इनमें 31 पर यौन हिंसा के आरोप हैं। उन्होंने बच्चों के खिलाफ अपराध रोकने के लिए 2 करोड़ यूरो की योजना की घोषणा की है। आगे क्या? फ्रांस सरकार स्कूलों और डे-केयर सेंटरों में सुरक्षा नियम कड़े कर सकती है। बच्चों के साथ काम करने वाले स्टाफ की जांच और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन बढ़ाए जाने की संभावना है। आने वाले महीनों में और ट्रायल और गिरफ्तारी हो सकती हैं।

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फ्रांस में 100 से ज्यादा स्कूलों में चाइल्ड एब्यूज स्कैंडल:3 साल की बच्ची का 'मॉनिटर' ने रेप किया; केस की खुली सुनवाई शुरू

फ्रांस इस समय एक बड़े चाइल्ड एब्यूज स्कैंडल से जूझ रहा है। पेरिस समेत 100 से ज्यादा स्कूलों और डे-केयर सेंटरों में बच्चों के साथ हिंसा, यौन शोषण और रेप के आरोपों की जांच चल रही है। मामले सामने आने के बाद देशभर में आक्रोश बढ़ गया है। 100 से ज्यादा संस्थानों में जांच पेरिस की प्रॉसिक्यूटर लॉर बेको ने बताया कि राजधानी में 84 प्रीस्कूल, करीब 20 प्राइमरी स्कूल और लगभग 10 डे-केयर सेंटरों में जांच चल रही है। कई मामलों में छोटे बच्चों के साथ रेप और यौन शोषण के आरोप लगाए गए हैं। आरोप स्कूल मॉनिटर्स पर लगे हैं। ये वे कर्मचारी होते हैं जो बच्चों की देखभाल लंच ब्रेक, खेल, सोने के समय और आफ्टर-स्कूल गतिविधियों के दौरान करते हैं। #MeTooSchool आंदोलन ने उठाई आवाज
कोर्ट के बाहर #MeTooSchool आंदोलन से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बैनर पर लिखा- “कोई भी बच्चा स्कूल जाने से न डरे।” आंदोलन की सह-संस्थापक बार्का जरूआली ने कहा कि अब पूरे देश में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागने की जरूरत है। बच्चों को भूखा रखने और मारपीट के आरोप अभिभावकों ने आरोप लगाया कि कुछ मॉनिटर्स बच्चों पर चिल्लाते थे, बाल खींचते थे और खाना देने से मना कर देते थे। कुछ मामलों में बच्चों के साथ यौन शोषण के आरोप भी लगे हैं। पीड़ित परिवारों के वकीलों का कहना है कि कई अभिभावकों को शिकायत दर्ज कराने और कार्रवाई करवाने के लिए महीनों संघर्ष करना पड़ा। पीड़ित परिवारों ने ट्रायल सार्वजनिक कराया फ्रांस में बच्चों से जुड़े मामलों की सुनवाई आमतौर पर बंद कमरे में होती है, लेकिन इस बार पीड़ित परिवारों ने ट्रायल सार्वजनिक रखने की मांग की। परिवारों के वकीलों के मुताबिक वे गिसेल पेलिको के चर्चित रेप केस से प्रेरित थे। गिसेल ने कहा था कि “शर्म पीड़ितों नहीं, अपराधियों को होनी चाहिए।” कोर्ट में शुरू हुआ पहला बड़ा ट्रायल स्कैंडल से जुड़े पहले बड़े मामलों में से एक का ट्रायल इस हफ्ते पेरिस में शुरू हुआ। 36 वर्षीय स्कूल सहायक डेविड जी. पर सितंबर 2024 से अप्रैल 2025 के बीच 3 से 5 साल के पांच बच्चों के यौन शोषण और दो महिला सहकर्मियों के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप है। हालांकि, आरोपी ने सभी आरोपों से इनकार किया है। जांचकर्ताओं के मुताबिक बच्चों ने पुलिस को अपने शब्दों में अनुचित छूने की घटनाएं बताईं। अगर दोष साबित हुए तो आरोपी को 10 साल तक की जेल और 1.5 लाख यूरो तक जुर्माना हो सकता है। बच्चों में दिखा गंभीर मानसिक असर कुछ अभिभावकों ने कहा कि उनके बच्चों में लंबे समय से डर और मानसिक तनाव के संकेत दिख रहे थे। एक वकील ने बताया कि 3 साल का एक बच्चा स्कूल जाने से डरने लगा था। आरोप है कि उसके साथ हिंसा करने वाले मॉनिटर के खिलाफ पहले भी शिकायतें थीं। प्रशासन पर बढ़ा दबाव मामले सामने आने के बाद पेरिस प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। अधिकारियों के मुताबिक 2026 के पहले तीन महीनों में 78 स्कूल सहायकों को सस्पेंड किया गया, जिनमें 31 पर यौन शोषण के आरोप हैं। फ्रांस की स्वतंत्र संस्था CIIVISE के अनुसार देश में हर साल करीब 1.6 लाख बच्चे रेप या यौन शोषण का शिकार होते हैं। फ्रांस में स्कूल मॉनिटर कौन होते हैं? फ्रांस में स्कूल मॉनिटर, जिन्हें एनिमेटर या पेरिस्कोलर स्टाफ भी कहा जाता है, स्थानीय नगर प्रशासन द्वारा नियुक्त कर्मचारी होते हैं। ये सीधे फ्रांस के शिक्षा मंत्रालय के अधीन नहीं होते। इनकी जिम्मेदारी नर्सरी और प्राइमरी स्कूलों में 3 से 11 साल तक के बच्चों की निगरानी करना होती है। ये बच्चों को लंच ब्रेक, दोपहर की नींद, खेलकूद और आफ्टर-स्कूल गतिविधियों के दौरान संभालते हैं। ये शिक्षक नहीं होते, बल्कि खेल, क्राफ्ट और मनोरंजन गतिविधियां संचालित करते हैं। वहीं सेकेंडरी स्कूलों (कॉलेज और हाई स्कूल) में अनुशासन, सुरक्षा और अनुपस्थिति की निगरानी ‘स्कूल लाइफ’ स्टाफ करता है, जो विशेष प्रशासनिक अधिकारियों के अधीन काम करता है। फ्रांस में तीन साल की उम्र से स्कूल जाना जरूरी है। इसलिए नर्सरी और प्राइमरी स्कूलों में छोटे बच्चे दिन का बड़ा हिस्सा इन मॉनिटर्स के साथ बिताते हैं। मॉनिटर्स सीधे शिक्षा मंत्रालय या स्कूल के कर्मचारी नहीं होते। इन्हें स्थानीय प्रशासन, नगर परिषद या सिटी हॉल की तरफ से भर्ती किया जाता है। अब यह सिस्टम विवादों में है। ऐसा कहा जा रहा है कि मॉनिटर्स की भर्ती प्रक्रिया बहुत कमजोर है। कई लोगों को बिना खास ट्रेनिंग, मनोवैज्ञानिक जांच या पेशेवर डिग्री के काम पर रख लिया जाता है। बड़ी संख्या में लोग अस्थायी या घंटे के हिसाब से काम करते हैं, इसलिए निगरानी और जवाबदेही भी कमजोर रहती है। क्या है #MeTooSchool आंदोलन? #MeTooSchool फ्रांस का एक अभिभावक और सामाजिक आंदोलन है, जो स्कूलों में बच्चों के खिलाफ यौन शोषण, हिंसा और उत्पीड़न के मामलों को सामने लाने और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग करता है। पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया कि शुरुआती शिकायतों को स्कूल प्रशासन ने नजरअंदाज कर दिया था। पेरिस की प्रॉसिक्यूटर लॉर बेको के मुताबिक राजधानी में 84 नर्सरी स्कूल, 20 प्राइमरी स्कूल और 10 डे-केयर सेंटरों में जांच चल रही है। पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोयर ने बताया कि 2026 की शुरुआत से अब तक 78 स्कूल और आफ्टर-स्कूल कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है। इनमें 31 पर यौन हिंसा के आरोप हैं। उन्होंने बच्चों के खिलाफ अपराध रोकने के लिए 2 करोड़ यूरो की योजना की घोषणा की है। आगे क्या? फ्रांस सरकार स्कूलों और डे-केयर सेंटरों में सुरक्षा नियम कड़े कर सकती है। बच्चों के साथ काम करने वाले स्टाफ की जांच और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन बढ़ाए जाने की संभावना है। आने वाले महीनों में और ट्रायल और गिरफ्तारी हो सकती हैं।

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