ईपीएस ने ‘पीठ में छुरा घोंपने वाले’ विजय पर ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ का आरोप लगाया, एआईएडीएमके-डीएमके गठबंधन की रिपोर्टों को खारिज किया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:18 मई, 2026, 20:40 IST पलानीस्वामी ने कहा कि फर्जी खबरें प्रसारित की गईं जिसमें आरोप लगाया गया कि अन्नाद्रमुक द्रमुक के समर्थन से सरकार बनाने की योजना पर काम कर रही है। एक विद्रोही खेमे के टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार से हाथ मिलाने के बाद एआईएडीएमके सुप्रीमो एडप्पादी के पलानीस्वामी को बड़ा झटका लगा। (पीटीआई/फ़ाइल) अन्नाद्रमुक के संकटग्रस्त प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी ने सोमवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय पर विधायकों को “खरीद-फरोख्त” करके लुभाने का आरोप लगाया और सरकार बनाने के लिए द्रमुक के साथ उनकी पार्टी के गठबंधन की अफवाहों को खारिज कर दिया। उनकी टिप्पणी एसपी वेलुमणि और सी वे षणमुगम के नेतृत्व वाले एक विद्रोही अन्नाद्रमुक गुट द्वारा ईपीएस पर कट्टर प्रतिद्वंद्वी द्रमुक के साथ सरकार बनाने का प्रयास करने का आरोप लगाने के बाद विजय को बाहरी समर्थन देने के बाद आई है। हालांकि, पलानीस्वामी ने एक बयान में कहा कि फर्जी खबरें प्रसारित की गईं जिसमें आरोप लगाया गया कि एआईएडीएमके डीएमके के समर्थन से सरकार बनाने की योजना पर काम कर रही है, उन्होंने कहा कि पार्टी की स्थापना 1972 में डीएमके के विरोध के सिद्धांत पर की गई थी। ईपीएस ने ‘बैकस्टैबर’ विजय की आलोचना की अन्नाद्रमुक सुप्रीमो ने विजय की तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) पर “खरीद-फरोख्त” और मंत्री पद की पेशकश के जरिए अन्नाद्रमुक पदाधिकारियों को लुभाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “जो पार्टी शुद्ध ताकत होने का दावा करती है, वह द्रमुक सहयोगियों के चरणों में गिर गई है। उसी पार्टी ने विधायकों की खरीद-फरोख्त कर अन्नाद्रमुक की पीठ में छुरा घोंपा है।” पलानीस्वामी ने आगे कहा कि टीवीके थोड़े समय के लिए ही टिकेगी और उन्हें विश्वास है कि तमिलनाडु में जल्द ही एआईएडीएमके की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा, ”एमजीआर और जयललिता के दिनों से, हमने विश्वासघात करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है और अगर वे पश्चाताप करते हैं तो उन्हें वापस ले लेते हैं।” इस बीच, बागी एआईएडीएमके नेता सी वे शनमुगम ने ईपीएस पर चुनाव से पहले टीवीके के साथ गठबंधन करने के लिए वरिष्ठ नेताओं की बार-बार सलाह को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उनकी टिप्पणी पलानीस्वामी द्वारा 13 मई को विधानसभा विश्वास प्रस्ताव के दौरान नेतृत्व की अवहेलना करने के लिए विधायक एसपी वेलुमणि और सी विजयभास्कर सहित कई बागी नेताओं को पार्टी पदों से निष्कासित करने के बाद आई है। अन्नाद्रमुक ने यह भी कहा कि उन्होंने उन 25 विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए आवेदन किया है जिन्होंने पार्टी के व्हिप की अवज्ञा की और टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने के लिए मतदान किया, जो ईपीएस नेतृत्व के तहत पार्टी में सबसे गंभीर संकट को दर्शाता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ईपीएस ने ‘पीठ में छुरा घोंपने वाले’ विजय पर ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ का आरोप लगाया, एआईएडीएमके-डीएमके गठबंधन की रिपोर्टों को खारिज किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु की राजनीति(टी)तमिलनाडु सरकार(टी)ईपीएस विजय(टी)ईपीएस बनाम विजय(टी)एआईएडीएमके-डीएमके गठबंधन(टी)एआईएडीएमके बागी विधायक(टी)विजय सरकार
खांसी में कौन से फल खाएं ताकि दवा से भी तेजी से मिले आराम? जानिए ये 4 असरदार फ्रूट्स का राज

Last Updated:May 18, 2026, 20:39 IST खांसी और गले की खराश होने पर सही खानपान शरीर को जल्दी रिकवर करने में मदद कर सकता है. अनानास, अनार का जूस, केला और कीवी जैसे फल विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट और जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जो इम्यूनिटी मजबूत करने में सहायक माने जाते हैं. खांसी में खाने वाले फल. मौसम बदलते ही खांसी, गले में खराश और बलगम जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं. कई लोग दवाइयों के साथ खानपान पर भी ध्यान देते हैं, क्योंकि कुछ चीजें गले को राहत पहुंचाने में मदद कर सकती हैं. खासतौर पर फल शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट देते हैं, जिससे इम्यूनिटी मजबूत होती है और शरीर जल्दी रिकवर करने में मदद पाता है. हालांकि खांसी में हर फल फायदेमंद नहीं होता, इसलिए ऐसे फलों का चुनाव जरूरी है जो गले को आराम दें और शरीर को हाइड्रेट रखें. सही फल खाने से कमजोरी कम होती है और गले की जलन में भी राहत मिल सकती है. आइए जानते हैं कौनसे फल आपको राहत दे सकते हैं. अनानासअनानास में ब्रोमेलिन नाम का एंजाइम पाया जाता है, जो गले में जमा बलगम को पतला करने और सूजन कम करने में मदद कर सकता है. यही वजह है कि कई लोग खांसी और गले की खराश में अनानास को फायदेमंद मानते हैं. इसमें विटामिन C भी होता है, जो इम्यूनिटी को सपोर्ट करता है. लेकिन बहुत ज्यादा खट्टा अनानास कुछ लोगों के गले में जलन भी कर सकता है, इसलिए इसे संतुलित मात्रा में खाना चाहिए. अनार का जूसअनार का जूस एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन्स से भरपूर होता है. यह शरीर को हाइड्रेट रखने और कमजोरी कम करने में मदद कर सकता है. खांसी के दौरान जब शरीर थका हुआ महसूस करता है, तब अनार का जूस एनर्जी देने का काम कर सकता है. इसे बहुत ठंडा पीने से बचना चाहिए, क्योंकि ठंडी चीजें कुछ लोगों की खांसी बढ़ा सकती हैं. केलाकेला पोषक तत्वों से भरपूर और आसानी से पचने वाला फल माना जाता है. इसमें फास्ट-एक्टिंग कार्बोहाइड्रेट और सॉल्युबल फाइबर होता है, जो शरीर को जल्दी एनर्जी देने में मदद करता है. खांसी, सर्दी या कमजोरी के दौरान केला रिकवरी में मददगार माना जाता है. यही वजह है कि BRAT डाइट में भी केले को शामिल किया जाता है. हालांकि अगर केला खाने से बलगम बढ़ता महसूस हो, तो इसकी मात्रा कम रखनी चाहिए. कीवी भी काफी फायदेमंद कीवी भले ही खांसी में थोड़ा अलग विकल्प लगे, लेकिन इसे इम्यूनिटी बढ़ाने वाले फलों में गिना जाता है. इसमें विटामिन C और कई माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर को इंफेक्शन से लड़ने में मदद कर सकते हैं. कुछ स्टडीज के मुताबिक, सर्दी-जुकाम के दौरान कीवी खाने से गले की परेशानी और रिकवरी में फायदा मिल सकता है. इसे भी सामान्य तापमान पर खाना बेहतर माना जाता है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi
लौकी पनीर चिल्ला रेसिपी: मिनटों में असली से भरपूर लौकी-पनीर चीला, नोट करें कम तेल वाली ये रेसिपी रेसिपी

18 मई 2026 को 20:25 IST पर अपडेट किया गया लौकी पनीर चीला रेसिपी: आज कल लोग अपनी सामग्री को बनाने के लिए बार-बार सामग्री और टेस्टी डिश की तलाश में रहते हैं। ऐसे में लौकी और पनीर से तैयार होने वाला चीला एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। यह रेसिपी सिर्फ जल्दी बन जाती है, बल्कि इतनी स्वादिष्ट होती है, खास बात यह है कि यह नॉन फ्राइड डिश लंबे समय तक पेट भरने में भी मदद करती है। अनुसरण करना : चीला बनाने के लिए आवश्यक सामग्री 200 ग्राम पनीरएक प्रारंभिक आकार की लौकीएक चौथाई कप बेसनहरी मिर्चहरा धनियाइसके अलावा जीरा पाउडरआधी काली मिर्च पाउडरसेंधा नमकपानीदेसी घी छवि: फ्रीपिक सबसे पहले लोकी को छीलकर अच्छी तरह धो लें और फिर कद्दू कर लें। इसके साथ पनीर को भी बढ़िया कर लीजिये. अब एक बड़े बाउल में लॉकी और क्रीमी बिल्डिंग बेसन को अच्छी तरह से मिक्स करें। छवि: एक्स अब इस कंपनी में इलेक्ट्रोनिक कटी हरी मिर्च, हरा धनिया, बाकी जीरा पाउडर, काली मिर्च और नमक डाला जाता है। फिर छोटा सा पानी एलेसेम्बल बैटर तैयार करें ताकि आसानी से बनाया जा सके। छवि: एक्स तवा गर्म करें और उस पर थोड़ी घी डालें। रेडी बैटर को करचूल की मदद से फैलाया गया और कैमरे में कैद कर लिया गया। जब चीला एक तरफ से पक जाए तो उसे पलटकर दूसरी तरफ से भी सेंक लें। इससे चीला अंदर तक अच्छी तरह से पैक होगा। छवि: फ्रीपिक गर्मागर्म लोकी-पनीर चीले को हरी चटनी के साथ सर्व करें। यह रेसिपी स्वाद के साथ स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखती है। ये एक प्रत्यक्ष दृश्य है, जिससे आपका पेट भरा हुआ महसूस होगा। छवि: एक्स द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 18 मई 2026 को 20:25 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)फलाहारी चीला(टी)पनीर लौकी चीला(टी)स्वस्थ व्रत रेसिपी(टी)नवरात्रि नाश्ता(टी)लौकी पनीर रेसिपी(टी)कुट्टू आटा रेसिपी(टी)भारतीय व्रत भोजन(टी)स्वस्थ चीला रेसिपी(टी)नवरात्रि स्पेशल डिश(टी)नॉन फ्राइड रेसिपी
‘परमेश्वर को मुख्यमंत्री बनाओ’: कांग्रेस विधायक ने कर्नाटक में नेतृत्व की नई चर्चा छेड़ी | बेंगलुरु-न्यूज़ न्यूज़

आखरी अपडेट:18 मई, 2026, 19:35 IST राजन्ना ने इस बात पर जोर दिया कि अगर पार्टी नेतृत्व परिवर्तन का फैसला करती है तो वह परमेश्वर का समर्थन करेंगे। कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर (फाइल फोटो) कर्नाटक में संभावित नेतृत्व परिवर्तन पर ताजा राजनीतिक चर्चा सोमवार को तब तेज हो गई जब वरिष्ठ कांग्रेस विधायक केएन राजन्ना ने कहा कि अगर सिद्धारमैया को हटाया जाता है तो गृह मंत्री जी परमेश्वर को मुख्यमंत्री पद के लिए विचार किया जाना चाहिए। पूर्व मंत्री राजन्ना ने कहा कि परमेश्वर ने अवसर के लिए लंबे समय से इंतजार किया था और अगर कांग्रेस नेतृत्व ने बदलाव करने का फैसला किया तो वह राज्य का नेतृत्व करने का मौका पाने के हकदार थे। पत्रकारों से बात करते हुए, राजन्ना ने कहा कि परमेश्वर ने आठ साल तक कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में कार्य किया था और अगर वह अपनी सीट जीतते तो 2013 के विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री बन सकते थे। शीर्ष पद के लिए गृह मंत्री का समर्थन करते हुए राजन्ना ने कहा, “वह तब चुनाव हार गए थे और उनका बकाया अभी भी लंबित है।” ‘राहुल गांधी और हाईकमान करेंगे फैसला’ राजन्ना ने इस बात पर जोर दिया कि वह केवल अपनी निजी राय व्यक्त कर रहे हैं और कहा कि अंतिम निर्णय कांग्रेस आलाकमान और राहुल गांधी पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि अगर उनकी राय मांगी गई तो वह चाहेंगे कि सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने रहें। हालांकि, अगर पार्टी नेतृत्व परिवर्तन का फैसला करती है तो वह परमेश्वर का समर्थन करेंगे। कर्नाटक नेतृत्व वार्ता संभवत: केरल में हुई होगी राजन्ना ने यह भी दावा किया कि कर्नाटक के नेतृत्व के बारे में चर्चा सोमवार को तिरुवनंतपुरम में हुई होगी, जहां कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता नई केरल सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के लिए एकत्र हुए थे। इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी नेता राहुल गांधी, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार मौजूद थे। राजन्ना ने कहा कि यह उनका “भविष्यवाणी” था कि बैठक के दौरान कर्नाटक की राजनीति पर चर्चा हुई होगी। ‘दलित मुख्यमंत्री’ की मांग तेज़ यह टिप्पणी कर्नाटक में किसी दलित नेता को मुख्यमंत्री बनाने की कांग्रेस के एक वर्ग के भीतर बढ़ती मांग के बीच आई है। यदि ऐसा कोई निर्णय लिया जाता है तो परमेश्वर को अग्रणी नामों में से एक के रूप में देखा जा रहा है। संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चा के दौरान उनका नाम कई बार सामने आया है, खासकर पार्टी में अहिंदा नेताओं के बीच। AHINDA अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों और दलितों का एक राजनीतिक और सामाजिक समूह है, जो सिद्धारमैया की राजनीति से निकटता से जुड़ा हुआ है। सत्ता साझेदारी पर बहस जारी है नवंबर 2025 में कांग्रेस सरकार द्वारा अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा पड़ाव पार करने के बाद से नेतृत्व में फेरबदल की अटकलें जारी हैं। शिवकुमार के समर्थकों ने बार-बार मांग की है कि 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस की सरकार बनने पर कथित सत्ता साझेदारी व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। चल रही राजनीतिक चर्चा से राज्य में कैबिनेट फेरबदल की अफवाहें भी तेज हो गई हैं। इस बीच, कर्नाटक के वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री ईश्वर खंड्रे ने पहले कहा था कि कैबिनेट बदलाव के संबंध में कोई भी निर्णय मुख्यमंत्री और कांग्रेस आलाकमान द्वारा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान शासन और विकास कार्यों पर केंद्रित है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक राजनीति(टी)कर्नाटक राजनीति समाचार(टी)राजनीतिक हलचल(टी)कर्नाटक सीएम
गर्मियों में वरदान है ये देसी फल! आंखों की रोशनी से लेकर खून बढ़ाने तक में फायदेमंद, गांवों से शहरों तक लोग हैं दीवाने

Last Updated:May 18, 2026, 19:06 IST उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के तराई क्षेत्रों में पाया जाने वाला बड़हर का फल गर्मियों में खास तौर पर लोगों के बीच काफी लोकप्रिय माना जाता है. मंकी फ्रूट के नाम से पहचाने जाने वाला यह देसी फल न सिर्फ स्वाद में खास होता है, बल्कि आंखों की रोशनी बढ़ाने, पाचन सुधारने, शरीर को ठंडक देने और खून की कमी दूर करने में भी फायदेमंद माना जाता है. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तराई इलाके में कई ऐसे पेड़-पौधे पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. इन्हीं में से एक है बड़हर का फल, जो खासतौर पर गर्मियों के मौसम में मिलता है और अपने स्वाद के साथ औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है. बड़हर का फल केवल स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य लाभ के कारण भी वर्षों से उपयोग किया जाता रहा है. गांवों में आज भी लोग गर्मी के मौसम का बेसब्री से इंतजार करते हैं, ताकि इस फल का सेवन कर सकें. माना जाता है कि यह शरीर को ताजगी देने के साथ कई स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने में भी मदद करता है. बड़हर का फल मई से लेकर जुलाई महीने तक बाजारों में आसानी से मिल जाता है. वहीं ग्रामीण इलाकों में आज भी यह फल पेड़ों पर भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जिसके कारण लोग इसे बिना पैसे खर्च किए भी आसानी से प्राप्त कर लेते हैं. जैसे-जैसे यह फल पकता है, इसका रंग हरे से बदलकर हल्का पीला, गुलाबी और फिर भूरा होने लगता है. बाजार में बड़हर के फल की कीमत करीब 5 से 10 रुपये तक होती है, लेकिन इसे औषधीय गुणों का भंडार माना जाता है. यही वजह है कि लोग गर्मियों में इसका सेवन बड़े शौक से करते हैं. अगर आप भी आंखों की रोशनी कमजोर होने की समस्या से परेशान हैं, तो गर्मियों में मिलने वाला बड़हर का फल आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. आज के डिजिटल दौर में लगातार मोबाइल और स्क्रीन का इस्तेमाल करने की वजह से युवाओं में आंखों की रोशनी कमजोर होने की समस्या तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में यह फल आंखों के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है. मंकी फ्रूट के नाम से पहचाने जाने वाले बड़हर के फल में विटामिन-ए भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करता है. माना जाता है कि विटामिन-ए से भरपूर आहार रतौंधी जैसी समस्याओं को दूर रखने में भी सहायक हो सकता है. इस फल का सेवन लोग कई तरीकों से करते हैं और गर्मियों में इसे स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google गर्मियों के मौसम में लोग अक्सर पाचन संबंधी समस्याओं से परेशान रहते हैं, लेकिन बड़हर का फल पाचन तंत्र के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. यह फल पाचन शक्ति को मजबूत बनाने में मदद करता है और इसके सेवन से पेट से जुड़ी कई समस्याओं में राहत मिल सकती है. गर्मी के दिनों में शरीर जल्दी थक जाता है और कमजोरी महसूस होने लगती है. ऐसे में बड़हर के फल में मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर को ऊर्जा देने का काम करते हैं और दिनभर ताजगी बनाए रखने में मदद करते हैं. त्वचा की झुर्रियों और स्किन एजिंग जैसी समस्याओं से बचने के लिए भी बड़हर का फल बेहद फायदेमंद माना जाता है. एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर यह फल त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है और बढ़ती उम्र के असर को कम करने में सहायक माना जाता है. माना जाता है कि बड़हर त्वचा के घावों को भरने में भी मदद कर सकता है. इसके लिए लोग बड़हर के पेड़ की छाल को सुखाकर उसका पाउडर तैयार करते हैं और उसे प्रभावित जगह पर लगाते हैं. इससे घाव जल्दी भरने में मदद मिल सकती है. बड़हर के फल में आयरन समेत कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करने में मददगार माने जाते हैं. माना जाता है कि नियमित रूप से बड़हर का सेवन करने से खून की कमी यानी एनीमिया जैसी समस्या से बचाव में सहायता मिल सकती है. गर्मियों के मौसम में कई लोगों के शरीर में कमजोरी और खून की कमी की समस्या देखने को मिलती है. ऐसे में यह फल स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. खास बात यह है कि गर्मियों में बड़हर का फल आसानी से बाजारों और ग्रामीण इलाकों में उपलब्ध हो जाता है. गर्मियों के मौसम में लोग ऐसे खाद्य पदार्थों की तलाश करते हैं, जो शरीर को ठंडक और ताजगी प्रदान कर सकें. यही वजह है कि आज भी ग्रामीण से लेकर शहरी इलाकों तक बड़ी संख्या में लोग बड़हर के फल का सेवन करना पसंद करते हैं. माना जाता है कि यह फल शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाने और दिनभर ताजगी बनाए रखने में सहायक होता है. बड़हर में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण भी पाए जाते हैं, जो लिवर को स्वस्थ रखने में मददगार माने जाते हैं. खास बात यह है कि इस फल का सेवन लोग कच्चा और पका, दोनों रूपों में कर सकते हैं. बड़हर का पेड़ सामान्य पेड़ों की तुलना में काफी बड़ा और घना माना जाता है. इसकी शाखाएं दूर तक फैली रहती हैं और इसकी छाया बेहद ठंडी मानी जाती है, यही वजह है कि गर्मियों में लोग इसके नीचे बैठना पसंद करते हैं. बड़हर का फल कई पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर को ऊर्जा देने में मदद करते हैं. गर्मियों के मौसम में शरीर में पानी और पोषण की कमी होना आम बात है, ऐसे में यह फल शरीर को ताजगी और जरूरी पोषण देने के लिए फायदेमंद माना जाता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
महाराष्ट्र के पालघर में ट्रक-कंटेनर की टक्कर, 12 की मौत:25 घायल; ट्रक में 100 से ज्यादा लोग सवार थे, सभी सगाई में जा रहे थे

महाराष्ट्र के पालघर में मुंबई-अहमदाबाद नेशनल हाईवे पर सोमवार को ट्रक की सामने से आ रहे कंटेनर से टक्कर हो गई। हादसे में ट्रक सवार 12 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 20 से 25 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। जानकारी के मुताबिक डहाणू तहसील के बापूगांव से 100 से ज्यादा लोग एक सगाई कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ट्रक में सवार होकर जा रहे थे। इसी दौरान पालघर जिले के धानीवरी गांव के पास सामने से आ रहे कंटेनर से ट्रक की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि ट्रक और कंटेनर दोनों सड़क पर पलट गए। हादसे में ट्रक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद ट्रक में बैठे कई लोग उसके नीचे दब गए। मृतकों और घायलों में महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल हैं। हादसे से जुड़ी 3 तस्वीरें… घायलों का अस्पताल में इलाज जारी घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और हाईवे पुलिस मौके पर पहुंचे। लोगों की मदद से ट्रक में फंसे घायलों को बाहर निकाला गया और तुरंत कासा उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस दुर्घटना के कारण मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर लंबा जाम लग गया। पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर ट्रैफिक बहाल कराया। पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच में हादसे की वजह तेज रफ्तार और ड्राइवर की लापरवाही मानी जा रही है।
महाराष्ट्र के पालघर में ट्रक-कंटेनर की टक्कर, 12 की मौत:25 घायल; ट्रक में 100 से ज्यादा लोग सवार थे, सभी सगाई में जा रहे थे

महाराष्ट्र के पालघर में मुंबई-अहमदाबाद नेशनल हाईवे पर सोमवार को ट्रक और कंटेनर की टक्कर हो गई। हादसे में ट्रक सवार 12 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 20 से 25 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। जानकारी के मुताबिक डहाणू तहसील के बापूगांव से 100 से ज्यादा लोग एक सगाई कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ट्रक में जा रहे थे। इसी दौरान पालघर जिले के धानीवरी गांव के पास सामने से आ रहे कंटेनर से ट्रक की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि ट्रक और कंटेनर दोनों सड़क पर पलट गए। हादसे में ट्रक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद ट्रक में बैठे कई लोग उसके नीचे दब गए। मृतकों और घायलों में महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल हैं। हादसे से जुड़ी 3 तस्वीरें… घायलों का अस्पताल में इलाज जारी घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और हाईवे पुलिस मौके पर पहुंचे। लोगों की मदद से ट्रक में फंसे घायलों को बाहर निकाला गया और तुरंत कासा उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस दुर्घटना के कारण मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर लंबा जाम लग गया। पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर ट्रैफिक बहाल कराया। पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच में हादसे की वजह तेज रफ्तार और ड्राइवर की लापरवाही मानी जा रही है। खबर लगातार अपडेट की जा रही है…..
क्या आप भी फ्रिज में रखते हैं कटे फल? ये गलती सेहत पर पड़ सकती है भारी, एक्सपर्ट ने बताया कब बन जाते हैं जहरीले

Cut Fruits Storage: गर्मियों में ज्यादातर लोग तरबूज, खरबूजा, पपीता या अनानास जैसे फलों को काटकर फ्रिज में रख देते हैं ताकि बार-बार काटने की झंझट न रहे और ठंडे फल आसानी से मिल जाएं. देखने में यह आदत काफी आसान लगती है, लेकिन कई बार यही छोटी सी लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है. बहुत से लोग सोचते हैं कि फ्रिज में रखने के बाद फल पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं, जबकि सच यह है कि कटने के बाद फलों की ताजगी तेजी से कम होने लगती है. हवा, नमी और बैक्टीरिया के संपर्क में आने के बाद उनमें खराबी शुरू हो जाती है, अगर सही तरीके से स्टोर न किया जाए तो कटे हुए फल पेट से जुड़ी दिक्कतों की वजह भी बन सकते हैं. खासकर गर्म मौसम में बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं और फल जल्दी खराब हो जाते हैं. यही कारण है कि एक्सपर्ट कटे फलों को ज्यादा देर तक स्टोर करने से बचने की सलाह देते हैं, अगर आप भी अक्सर कटे हुए फल फ्रिज में रखते हैं, तो यह जानना जरूरी है कि उन्हें कितनी देर तक सुरक्षित रखा जा सकता है और स्टोर करने का सही तरीका क्या है. कटे हुए फल जल्दी क्यों खराब होते हैं?जब भी किसी फल को काटा जाता है, उसकी बाहरी सुरक्षा परत हट जाती है. इसके बाद फल सीधे हवा और नमी के संपर्क में आ जाता है. यही वजह है कि उनमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं. साल्मोनेला, ई. कोलाई और लिस्टेरिया जैसे हानिकारक बैक्टीरिया कटे फलों में तेजी से बढ़ सकते हैं. फ्रिज बैक्टीरिया की रफ्तार को धीमा जरूर करता है, लेकिन उन्हें पूरी तरह खत्म नहीं करता. इसलिए यह मान लेना गलत है कि फ्रिज में रखा हर कटे फल पूरी तरह सुरक्षित है. ऑक्सीडाइजेशन से कम हो जाते हैं पोषक तत्वआपने कई बार देखा होगा कि कटने के कुछ देर बाद सेब या केला भूरा पड़ने लगता है. यह ऑक्सीडाइजेशन की वजह से होता है. हवा के संपर्क में आने पर फलों में मौजूद विटामिन-सी जैसे पोषक तत्व धीरे-धीरे कम होने लगते हैं. यानी फल सिर्फ स्वाद ही नहीं खोते, बल्कि उनका न्यूट्रिशन भी कम होने लगता है. लंबे समय तक कटे फल रखने से उनकी गुणवत्ता प्रभावित होती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. कितने समय तक सुरक्षित रहते हैं कटे फल?कटे फलों की सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि उन्हें किस तापमान पर रखा गया है. अगर फल कमरे के तापमान पर रखे हैं, तो उन्हें 4 से 6 घंटे के अंदर खा लेना चाहिए. अगर फ्रिज का तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से कम है, तो ज्यादातर कटे फल करीब 24 घंटे तक ठीक रह सकते हैं. तरबूज, खरबूजा, पपीता और अनानास जैसे ज्यादा पानी वाले फल जल्दी खराब होते हैं. केला और सेब जैसे फल जल्दी रंग बदलते हैं, इसलिए इन्हें काटने के तुरंत बाद खाना बेहतर माना जाता है. लोग स्टोर करते समय कौन सी गलतियां करते हैं?कई लोग कटे फलों को प्लेट में खुला छोड़ देते हैं या हल्के फॉयल में ढककर फ्रिज में रख देते हैं. इससे फल लगातार हवा के संपर्क में बने रहते हैं और जल्दी खराब हो जाते हैं. इसके अलावा बार-बार फ्रिज खोलने से अंदर का तापमान बदलता रहता है. तापमान में उतार-चढ़ाव होने पर फलों में खराबी तेजी से बढ़ती है. कई बार लोग एक ही कंटेनर को बार-बार खोलते रहते हैं, जिससे बाहर की दूषित हवा अंदर पहुंचती रहती है. कटे फलों को सुरक्षित रखने का सही तरीका 1. एयरटाइट कंटेनर का इस्तेमाल करेंकटे हुए फलों को हमेशा कांच या अच्छी क्वालिटी के एयरटाइट कंटेनर में रखें. इससे हवा अंदर कम जाती है और फल ज्यादा समय तक ताजे बने रहते हैं. 2. साफ-सफाई का ध्यान रखेंफल काटने से पहले हाथ, चाकू और कटिंग बोर्ड अच्छी तरह साफ करें. गंदे बर्तन या चाकू से बैक्टीरिया सीधे फल के अंदर पहुंच जाते हैं. 3. तुरंत फ्रिज में रखेंफल काटने के बाद उन्हें ज्यादा देर बाहर न छोड़ें. तुरंत फ्रिज में रखना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. 4. छोटे हिस्सों में स्टोर करेंअगर ज्यादा फल काट रहे हैं, तो उन्हें छोटे-छोटे कंटेनर में रखें. इससे हर बार पूरा कंटेनर खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी. कैसे पहचानें कि फल खराब हो चुके हैं?कई बार फल देखने में ठीक लगते हैं, लेकिन अंदर से खराब हो चुके होते हैं. ऐसे में इन संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है. फल से खट्टी या फर्मेंटेशन जैसी गंध आना, फल का चिपचिपा हो जाना, ज्यादा पानी छोड़ना, रंग का बहुत ज्यादा गहरा या काला पड़ जाना, स्वाद में बदलाव महसूस होना. अगर इनमें से कोई भी संकेत दिखे, तो ऐसे फल खाने से बचना चाहिए. बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा जरूरी सावधानीकटे हुए खराब फल बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए ज्यादा नुकसानदायक हो सकते हैं. ऐसे लोगों में फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए उनके लिए हमेशा ताजे और तुरंत कटे फल देना ज्यादा सुरक्षित रहता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
गर्मी में जांघ के आसपास खुजली से हैं परेशान, अपनाएं 5 असरदार देसी उपाय, तुरंत मिलेगा आराम

Last Updated:May 18, 2026, 18:15 IST Itching Home Remedies: गर्मियों में पसीना और नमी बढ़ने से जांघों के आसपास खुजली और रैशेज की समस्या होने लगती है. खासकर टाइट कपड़े पहनने के बाद यह परेशानी हो जाती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो नारियल तेल, एलोवेरा जेल और नीम जैसे घरेलू उपाय जांघ के आसपास होने वाली खुजली से तुरंत राहत दिला सकते हैं. सूती कपड़े भी काफी राहत दे सकते हैं. खुजली से निजात पाने के लिए एलोवेरा जेल या नारियल तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं. Home Remedies of Itching: गर्मी के मौसम में स्किन से जुड़ी समस्याएं सबसे ज्यादा परेशान करती हैं. पसीना, उमस और स्किन में नमी बढ़ने की वजह से जांघों के आसपास खुजली, जलन और रैशेज की समस्या काफी आम है. जो लोग लंबे समय तक बाहर रहते हैं या ज्यादा पसीना बहाते हैं, उन्हें यह परेशानी ज्यादा हो सकती है. कई बार लगातार खुजलाने से त्वचा लाल हो जाती है और इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार जांघों के आसपास खुजली की वजह फंगल इंफेक्शन, पसीना, टाइट कपड़े या त्वचा में रगड़ भी हो सकती है. ऐसे में कुछ आसान घरेलू उपाय जल्द राहत दे सकते हैं. खुजली से निजात पाने के देसी नुस्खे नारियल तेल : नारियल तेल में एंटीबैक्टीरियल और मॉइस्चराइजिंग गुण पाए जाते हैं, जो स्किन को ठंडक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं. अगर खुजली हल्की हो, तो प्रभावित जगह को साफ करके वहां हल्का नारियल तेल लगाया जा सकता है. इससे त्वचा की ड्राइनेस कम होती है और जलन में राहत मिल सकती है. एलोवेरा जेल : एलोवेरा को त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें मौजूद कूलिंग गुण खुजली और जलन को शांत करने में मदद कर सकते हैं. ताजा एलोवेरा जेल को प्रभावित जगह पर लगाने से त्वचा को ठंडक मिलती है और लालिमा कम हो सकती है. नीम का पानी : नीम में एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं. अगर खुजली पसीने या हल्के फंगल इंफेक्शन की वजह से हो रही हो, तो नीम के पत्तों को पानी में उबालकर उस पानी से प्रभावित जगह साफ की जा सकती है. इससे त्वचा को राहत मिल सकती है. एंटीफंगल पाउडर : जांघों के आसपास लगातार नमी बने रहने से बैक्टीरिया और फंगस तेजी से बढ़ सकते हैं. इसलिए नहाने के बाद उस हिस्से को अच्छी तरह सुखाना जरूरी है. जरूरत पड़ने पर एंटीफंगल पाउडर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. ढीले और सूती कपड़े : गर्मी में टाइट और सिंथेटिक कपड़े पहनने से पसीना ज्यादा जमा होता है, जिससे खुजली और रैशेज बढ़ सकते हैं. डॉक्टर के अनुसार सूती और ढीले कपड़े पहनने से त्वचा को हवा मिलती है और पसीना जल्दी सूखता है. इससे संक्रमण का खतरा कम हो सकता है. डॉक्टर से कब करें संपर्क? इस समस्या से बचने के लिए पसीने से गीले कपड़े ज्यादा देर तक न पहनें. दूसरों का तौलिया या कपड़े इस्तेमाल करने से बचें. त्वचा को बार-बार खुजलाने से बचें. अगर खुजली लंबे समय तक बनी रहे, त्वचा पर लाल चकत्ते, सूजन, बदबू या पस बनने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में डर्मेटोलॉजिस्ट से मिलकर सलाह लेना जरूरी हो सकता है, क्योंकि यह फंगल या बैक्टीरियल इंफेक्शन का संकेत हो सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
बंगाल में इमाम-मुअज्जिन और पुजारियों का भत्ता बंद:महिलाओं को 1 जून से ₹3000 मिलेंगे; TMC सरकार में हुए भ्रष्टाचार-महिला उत्पीड़न की जांच होगी

पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कैबिनेट बैठक में कई बड़े फैसले लिए। राज्य सरकार ने इमाम, मुअज्जिन और पुजारियों को दिए जाने वाले भत्ते को 1 जून से बंद करने का फैसला किया है। इसके अलावा TMC सरकार के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार और महिला उत्पीड़न की जांच के लिए 2 आयोग बनेंगे। दोनों आयोगों की अध्यक्षता कलकत्ता हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे। साथ ही महिलाओं को अन्नपूर्णा योजना के तहत हर महीने 3000 रुपए देने, मुफ्त बस यात्रा शुरू करने, सातवां वेतन आयोग गठित करने और OBC सूची में बदलाव जैसे अहम निर्णय भी लिए गए। मार्च में बढ़ाया था मानदेय पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सरकार ने इसी साल मार्च में धार्मिक नेताओं के मानदेय में 500 रुपए की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद राज्य की रजिस्टर्ड मस्जिदों के इमामों को हर महीने 3000 रुपए, जबकि मुअज्जिन और पुजारियों को 2000 रुपए की मदद दी जा रही थी। नई सरकार ने अब इस योजना को बंद करने का फैसला लिया है। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि छात्रों की कोई भी छात्रवृत्ति योजना बंद नहीं की जाएगी। महिलाओं के लिए अन्नपूर्णा योजना कैबिनेट ने महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के लिए ‘अन्नपूर्णा योजना’ को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत 1 जून से महिलाओं को हर महीने 3000 रुपए दिए जाएंगे। सरकार ने कहा कि जो महिलाएं पहले से ‘लक्ष्मी भंडार योजना’ का लाभ ले रही हैं, उन्हें दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी। सरकार जल्द ही नया वेब पोर्टल भी शुरू करेगी, ताकि नई पात्र महिलाएं आवेदन कर सकें। राज्य सरकार ने 1 जून से महिलाओं को सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की भी मंजूरी दी है। हालांकि फिलहाल बसों की संख्या बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। CAA आवेदकों को भी मिलेगा लाभ सरकार ने स्पष्ट किया कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत आवेदन करने वाली महिलाएं और वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए ट्रिब्यूनल पहुंचने वाली महिलाओं को भी अन्नपूर्णा योजना का लाभ मिलेगा। भ्रष्टाचार-उत्पीड़न की जांच के लिए 2 आयोग सरकार ने संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच के लिए रिटायर्ड जस्टिस बिस्वजीत बसु की अध्यक्षता में आयोग बनाया है। इसमें एडीजी रैंक के IPS अधिकारी जयरामन सदस्य सचिव होंगे। आयोग कटमनी, रिश्वतखोरी, सरकारी धन के दुरुपयोग और आम लोगों से धोखाधड़ी जैसे मामलों की जांच करेगा। इसके दायरे में सरकारी अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि, बिचौलिए, ठेकेदार, एनजीओ और सहकारी संस्थाएं भी आएंगी। दूसरा आयोग महिलाओं और बच्चियों पर कथित अत्याचार के मामलों की जांच करेगा। इसकी अध्यक्षता रिटायर्ड जस्टिस समाप्ति चटर्जी करेंगी, जबकि IPS अधिकारी दमयंती सेन सदस्य सचिव होंगी। CM शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि आयोग पिछले कई वर्षों में महिलाओं और बच्चों, खासकर SC, ST और अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के खिलाफ हुए अत्याचारों की जांच करेगा। OBC सूची में होगा बदलाव सरकार ने कलकत्ता हाईकोर्ट के 2024 के फैसले के आधार पर राज्य की मौजूदा OBC सूची को रद्द करने और उसमें संशोधन करने का फैसला लिया है। दरअसल, तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान 77 समुदायों को OBC सूची में शामिल किया गया था, जिनमें 75 मुस्लिम समुदाय थे। इस फैसले को लेकर कानूनी विवाद हुआ था। बाद में कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस सूची को रद्द कर दिया था और 2010 के बाद जारी करीब 5 लाख OBC प्रमाणपत्रों को अमान्य घोषित कर दिया था। नई सरकार अब OBC आरक्षण के लिए पात्रता तय करने हेतु एक नई समिति बनाएगी। सातवें वेतन आयोग को मंजूरी कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों के वेतन में संशोधन के लिए सातवें वेतन आयोग के गठन को भी मंजूरी दे दी है। इसका फायदा सरकारी विभागों के अलावा नगर निकाय, स्थानीय निकाय, शिक्षा बोर्ड और सरकारी शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों को भी मिलेगा। हालांकि राज्य कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी का मुद्दा सोमवार की बैठक में शामिल नहीं था। ———————————- ये खबर भी पढ़ें… कोलकाता में पुलिस पर पथराव, 3 जवान घायल, 40 गिरफ्तार, अतिक्रमण हटाने के विरोध में प्रदर्शन हो रहा था कोलकाता में रविवार को पार्क सर्कस इलाके में अतिक्रमण हटाने के खिलाफ लोगों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस पर पथराव भी हुआ, जिसमें 3 पुलिसकर्मी घायल हो गए। सुरक्षाबलों की गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की गई। बंगाल के CM शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कहा कि मामले में अब तक 40 लोगों को गिरफ्तार किया है। पूरी खबर पढ़ें…







