Heatwave | Pregnant Women Safety Tips | भीषण गर्मी में गर्भवती महिलाएं रखें खास ध्यान, डॉक्टर ने बताए जरूरी उपाय

Last Updated:May 18, 2026, 17:34 IST Tips To Be Safe In Summer Season For Pregnant Women: राजस्थान की भीषण गर्मी अब गर्भवती महिलाओं के लिए चिंता बढ़ाने लगी है. डॉक्टरों के मुताबिक तेज धूप, लू और शरीर में पानी की कमी का असर मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों पर पड़ सकता है. जोधपुर की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पूनम पारख ने सलाह दी है कि इस मौसम में पर्याप्त पानी, नारियल पानी, छाछ और हल्का भोजन बेहद जरूरी है. साथ ही धूप से बचाव और आराम का भी खास ध्यान रखना चाहिए. जोधपुर. राजस्थान में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी अब गर्भवती महिलाओं के लिए भी चिंता का कारण बनती जा रही है. तेज धूप, लू और शरीर में पानी की कमी का असर मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों की सेहत पर पड़ सकता है. ऐसे में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पूनम पारख ने गर्भवती महिलाओं को गर्मी के मौसम में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है. डॉक्टरों के अनुसार इस दौरान शरीर को हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी होता है. इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए. इसके अलावा नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी और ताजे फलों का सेवन भी शरीर को राहत देता है. डॉक्टरों का कहना है कि थोड़ी सतर्कता और सही देखभाल से इस भीषण गर्मी में भी गर्भवती महिलाएं खुद को और अपने होने वाले बच्चे को सुरक्षित रख सकती हैं. शरीर में पानी की कमी न होने देंडॉ. पूनम पारख के अनुसार गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर का तापमान सामान्य से थोड़ा अधिक रहता है. ऐसे में गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन का खतरा तेजी से बढ़ जाता है. उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं को लंबे समय तक धूप में रहने से बचना चाहिए और बाहर निकलते समय सिर को ढककर रखना चाहिए, ताकि लू का असर कम हो सके. डॉक्टरों के मुताबिक नारियल पानी, छाछ, ताजे फलों का जूस और स्मूदी शरीर में पानी की कमी नहीं होने देते. इसके साथ ही समय-समय पर आराम करना भी जरूरी है. अधिक देर तक गर्म वातावरण में रहने से कमजोरी और चक्कर जैसी परेशानी हो सकती है. खानपान और कपड़ों का भी रखें ध्यानविशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों में ज्यादा तेल-मसाले और तली-भुनी चीजों का सेवन शरीर पर भारी पड़ सकता है. गर्भवती महिलाओं को हल्का और सुपाच्य भोजन लेना चाहिए. दलिया, खिचड़ी, दही और मौसमी फल इस मौसम में बेहतर विकल्प माने जाते हैं. डॉक्टरों ने सलाह दी है कि लंबे समय तक खाली पेट नहीं रहना चाहिए और समय पर भोजन करना जरूरी है. डॉ. पूनम ने बताया कि गर्मी से राहत पाने के लिए एसी का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन कमरे का तापमान बहुत ज्यादा कम नहीं रखना चाहिए. एसी वाले ठंडे कमरे से सीधे तेज गर्मी में जाने से शरीर पर अचानक असर पड़ सकता है. इसके अलावा महिलाओं को ढीले-ढाले और सूती कपड़े पहनने चाहिए, ताकि शरीर में हवा का संचार बना रहे और गर्मी कम महसूस हो. About the Author Anand Pandey आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Jodhpur,Jodhpur,Rajasthan
तेजा सज्जा की ‘हनु-मैन’ अब 3D में:25 जून को सिनेमाघरों में होगी रिलीज; अगले भाग में ऋषभ शेट्टी की एंट्री से बढ़ा फैंस का रोमांच

तेलुगु सुपरहीरो फिल्म ‘हनु-मैन’ एक बार फिर बड़े परदे पर वापसी करने जा रही है। इस बार फिल्म को 3डी फॉर्मेट में रिलीज किया जाएगा, जिससे दर्शकों को पहले से ज्यादा भव्य और रोमांचक सिनेमाई अनुभव मिलने वाला है। निर्माताओं ने आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि ‘हनु-मैन 3डी’ 25 जून 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। मेकर्स ने नए पोस्टर के साथ सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह फिल्म पहले दर्शकों के दिलों पर राज कर चुकी है और अब नए अंदाज में लौट रही है। साल 2024 में रिलीज हुई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल की थी और भारतीय सुपरहीरो फिल्मों के लिए नई शुरुआत मानी गई थी। फिल्म की कहानी काल्पनिक गांव अंजनाद्री पर आधारित है, जहां हनुमंथु नाम का एक साधारण युवक भगवान हनुमान की दिव्य शक्तियां प्राप्त करने के बाद लोगों की रक्षा करता है। इसमें तेजा के अलावा अमृता अय्यर, वरलक्ष्मी सरथकुमार, समुद्रकानी और विनय राय ने भी अहम किरदार निभाए थे। फिल्म के अगले पार्ट ‘जय हनुमान’ में ऋ षभ शेट्टी भी नजर आएंगे निर्देशक प्रशांत वर्मा की यह फिल्म उनके सिनेमैटिक यूनिवर्स की पहली कड़ी मानी जाती है। फिल्म की सफलता के बाद अब इसके अगले भाग ‘जय हनुमान’ को लेकर भी दर्शकों में काफी उत्साह है। खबरों के मुताबिक, आगामी फिल्म में ऋषभ शेट्टी भी नजर आ सकते हैं। जिनका पहला लुक भी मेकर्स ने बाते साल ही रिवील कर दिया था। ऐसे में अब ‘हनु-मैन 3डी’ की दोबारा रिलीज को लेकर फैंस के बीच जबरदस्त उत्सुकता देखने को मिल रही है और माना जा रहा है कि फिल्म एक बार फिर बॉक्स ऑफिस पर बड़ा रिकॉर्ड बना सकती है।
कर्नाटक में दो हाथियों की लड़ाई में पर्यटक की मौत:महिला हाथियों को नहाते देख रही थी, उनके नीचे दबी; बच्चे सहित दो लोग बाल-बाल बचे

कर्नाटक के कोडागु जिले स्थित डुबारे एलीफेंट कैंप में दो हाथियों की लड़ाई के दौरान एक महिला पर्यटक की मौत हो गई। घटना का दर्दनाक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक हाथी महिला के ऊपर गिर गया। एक पुरुष और उसकी गोद में एक बच्चा बाल-बाल बच गए। अधिकारियों के मुताबिक, मृतक की पहचान तमिलनाडु की रहने वाली 33 साल की तुलसी के रूप में हुई है। वह नदी किनारे खड़ी होकर हाथियों को नहलाते हुए देख रही थी। नदी में 6 से 7 हाथी थे। उनके साथ महावत भी थे। तभी दो हाथी हिंसक होकर बेकाबू हो गए। 7 विजुअल्स के जरिए पूरी घटना देखिए…
कर्नाटक में दो हाथियों की लड़ाई में पर्यटक की मौत:महिला हाथियों को नहाते देख रही थी, उनके नीचे दबी; बच्चे सहित दो लोग बाल-बाल बचे

कर्नाटक के कोडागु जिले स्थित डुबारे एलीफेंट कैंप में दो हाथियों की लड़ाई के दौरान एक महिला पर्यटक की मौत हो गई। घटना का दर्दनाक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक हाथी महिला के ऊपर गिर गया। एक पुरुष और उसकी गोद में एक बच्चा बाल-बाल बच गए। अधिकारियों के मुताबिक, तमिलनाडु की पर्यटक तुलसी (33) नदी किनारे खड़ी होकर हाथियों को नहलाते हुए देख रही थीं। नदी में 6 से 7 हाथी थे। उनके साथ महावत भी थे। तभी दो हाथी हिंसक होकर बेकाबू हो गए। इस दौरान वहां चीख-पुकार मच गई। 7 विजुअल्स के जरिए पूरी घटना देखिए… ——————————– ये खबरें भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- वनतारा में कानून का उल्लंघन नहीं हुआ:सही प्रक्रिया से लाए जानवर, सवाल उठाने से अवैध नहीं हो जाते सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जामनगर स्थित वनतारा वाइल्डलाइफ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर में जानवरों की खरीद-बिक्री नियमों के दायरे में हुई है। इस सेंटर को अंबानी परिवार का रिलायंस फाउंडेशन चलाता है। कोर्ट ने कहा कि विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी नहीं मिली है। पूरी खबर पढ़ें…
संगीत- फैशन की दुनिया में चमका एस्टन विला का खिलाड़ी:इंग्लैंड के 30 वर्षीय कोर्टनी हॉस; अपराधियों के हमले ने छीना फुटबॉल करियर

एक समय था, जब इंग्लैंड के फुटबॉल मैदानों में कोर्टनी हॉस का नाम गूंजता था। प्रीमियर लीग में खेलना, लाखों पाउंड की कमाई, बड़े स्टेडियमों की चमक और दुनिया भर में पहचान, यह सब उनके जीवन का हिस्सा था। लेकिन अब वही खिलाड़ी फुटबॉल से दूर, माइक्रोफोन के सामने खड़ा होकर अपने नए सपनों को आवाज दे रहा है। 30 वर्षीय कोर्टनी हॉस की कहानी सिर्फ एक फुटबॉलर की नहीं, बल्कि संघर्ष, दर्द और फिर नई शुरुआत की कहानी है। इंग्लैंड के क्लब एस्टन विला के लिए खेलने वाले इस डिफेंडर ने करियर में कई बड़े पल देखे। मैनचेस्टर यूनाइटेड के खिलाफ ओल्ड ट्रैफर्ड में विजयी गोल करना सबसे यादगार पल बना। लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था। साल 2018 में क्रिसमस के दौरान लंदन में परिवार से मिलने गए हॉस का कुछ अपराधियों ने पीछा किया। घर पहुंचते ही उन पर हमला हुआ। सिर पर बोतल से वार किया गया। खून से लथपथ हालत में वह किसी तरह अस्पताल पहुंचे। उस रात उन्होंने सिर्फ अपना करियर नहीं, बल्कि अपनी जान भी लगभग खो दी थी। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। फुटबॉल खेलना जारी रखा, लेकिन शरीर अब उनका साथ छोड़ने लगा था। कभी ग्रोइन इंजरी, कभी एंकल और फिर घुटने की गंभीर समस्या। चोटें बढ़ती गईं और मैदान पर उनका समय कम होता गया। 2022 में वह वॉटफोर्ड क्लब गए, उम्मीद थी कि करियर पटरी पर लौटेगा। लेकिन घुटने की चोट ने सब खत्म कर दिया। लगातार सर्जरी हुईं, रिहैब चला, लेकिन वापसी नहीं हो सकी। दो साल तक उन्होंने प्रोफेशनल मैच नहीं खेला। आखिरकार एस्टन विला ने भी उनका साथ छोड़ दिया। जहां कई खिलाड़ी ऐसे समय में टूट जाते हैं, वहीं हॉस ने खुद को नए रास्ते पर खड़ा किया। फुटबॉल से दूर होने के बाद उन्होंने संगीत को चुना, जो उनका बचपन का प्यार था। अब वह ‘कोर्टनी हॉस’ नहीं, बल्कि ‘कोर्ट्स’ के नाम से पहचाने जाना चाहते हैं। अब उनका इंस्टाग्राम फुटबॉल नहीं, बल्कि म्यूजिक वीडियो और गानों से भरा है। जल्द ही उनका नया एल्बम आने वाला है। इसके साथ ही वह ‘ब्लाइंडेड माइंड्स’ नाम से कपड़ों का ब्रांड भी लॉन्च कर रहे हैं। कभी प्रीमियर लीग का डिफेंडर रहा यह खिलाड़ी जिंदगी के नए मैदान में उतर चुका है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब उसके हाथ में फुटबॉल नहीं, बल्कि माइक्रोफोन है। लेकिन जज्बा वही पुराना है- गिरकर फिर उठने का। हॉस के परिवार में सभी संगीत के शौकीन हॉस का परिवार संगीत के बेहद करीब रहा है। सात भाइयों वाले परिवार में सभी माइकल जैक्सन, अशर, क्रिस ब्राउन जैसे कलाकारों के गाने सुना करते थे। परिवार की पार्टियों में सभी भाई मिलकर गाते थे और बचपन में उन्हें लगता था कि वे ‘जैक्सन फाइव’ का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा था कि उन्हें रैप, आर एंड बी, क्लासिकल, इंडी और रॉक सहित हर तरह का संगीत पसंद है। हालांकि, उन्होंने आर एंड बी को इसलिए चुना क्योंकि उन्हें लगा कि उनकी आवाज इस शैली के लिए सबसे बेहतर है।
कॉफी छोड़ लोग पी रहे ‘Cortisol Mocktail’, क्या सच में मिनटों में कम होता है स्ट्रेस?

Last Updated:May 18, 2026, 15:52 IST सोशल मीडिया पर इन दिनों “Cortisol Mocktail” तेजी से वायरल हो रहा है. नारियल पानी और नींबू जैसे इंग्रेडिएंट्स से बना यह कैफीन-फ्री ड्रिंक स्ट्रेस कम करने का दावा करता है. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह सिर्फ सपोर्टिव ड्रिंक है, तनाव का पूरा इलाज नहीं. ख़बरें फटाफट आजकल सोशल मीडिया पर एक नया ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे “Cortisol Mocktail” कहा जा रहा है. कहा जा रहा है कि यह ड्रिंक तनाव यानी स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल को कम करने में मदद करता है और कुछ ही मिनटों में शरीर को रिलैक्स महसूस कराता है. इसी वजह से कई लोग अब अपनी सुबह की कॉफी छोड़कर इस नए हेल्दी ड्रिंक को अपना रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या सच में यह ड्रिंक इतना असरदार है या सिर्फ एक और वेलनेस ट्रेंड है? कॉर्टिसोल मॉकटेल एक तरह का हेल्दी ड्रिंक कॉम्बिनेशन है. इसमें आमतौर पर नारियल पानी, नींबू का रस, नमक और कुछ प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट ड्रिंक्स या जूस शामिल किए जाते हैं. कुछ लोग इसमें मैग्नीशियम पाउडर या हर्बल इंग्रेडिएंट्स भी मिलाते हैं. इसे “कॉर्टिसोल मॉकटेल” इसलिए कहा जाता है क्योंकि माना जाता है कि यह शरीर में स्ट्रेस हार्मोन को बैलेंस करने में मदद करता है. क्या सच में कम होता है स्ट्रेस?विशेषज्ञों के अनुसार, कोई भी एक ड्रिंक सीधे तौर पर स्ट्रेस को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकता. हालांकि, इसमें शामिल कुछ तत्व शरीर को रिलैक्स करने में मदद कर सकते हैं. जैसे नारियल पानी शरीर को हाइड्रेट रखता है और इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस सुधारता है, जिससे थकान कम महसूस होती है. नींबू में मौजूद विटामिन C इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करता है, जो स्ट्रेस के असर को थोड़ा कम महसूस कराने में मदद कर सकता है. लेकिन यह समझना जरूरी है कि स्ट्रेस एक जटिल मानसिक और शारीरिक स्थिति है, जिसे सिर्फ किसी ड्रिंक से पूरी तरह कंट्रोल नहीं किया जा सकता. इसके लिए नींद, लाइफस्टाइल, एक्सरसाइज और मेंटल हेल्थ का सही संतुलन ज्यादा महत्वपूर्ण होता है. क्यों छोड़ रहे हैं लोग कॉफी?कॉफी में कैफीन होता है, जो कुछ लोगों में बेचैनी, घबराहट और हार्ट रेट बढ़ा सकता है. खासकर जो लोग पहले से ही स्ट्रेस या एंग्जायटी महसूस करते हैं, वे कॉफी की जगह ऐसे ड्रिंक्स चुन रहे हैं जो शरीर को हल्का और शांत महसूस कराएं. कॉर्टिसोल मॉकटेल को लोग इसलिए भी पसंद कर रहे हैं क्योंकि यह कैफीन-फ्री होता है और हाइड्रेशन भी देता है. क्या यह सच में फायदेमंद है?अगर इसे एक हेल्दी ड्रिंक की तरह देखा जाए तो यह फायदेमंद हो सकता है, खासकर गर्मियों में शरीर को हाइड्रेट रखने और हल्का महसूस कराने के लिए. लेकिन इसे “मैजिक स्ट्रेस रिमूवर” मानना सही नहीं होगा. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर किसी को लंबे समय तक स्ट्रेस, नींद की समस्या या एंग्जायटी है, तो उसे लाइफस्टाइल सुधार और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi
ब्यूटी+पर्सनल केयर का खर्च 10 साल में 5 गुना बढ़ा:ड्रेसिंग टेबल में काजल, पाउडर, लिपस्टिक ही नहीं; एसपीएफ फाउंडेशन, मॉइश्चराइजर-प्राइमर कॉम्बो जैसे प्रोडक्ट भी

भारत में महिलाएं प्राचीन काल से ही सजने-संवरने और सौंदर्य देखभाल के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करती रही हैं। कभी उबटन, चंदन, गुलाबजल, काजल, मेहंदी और प्राकृतिक तेलों तक सीमित रहने वाला ब्यूटी कल्चर आज अरबों रुपए के विशाल बाजार में बदल चुका है। पहले सौंदर्य देखभाल का मतलब केवल पारंपरिक घरेलू नुस्खे और सामाजिक अवसरों पर सजना-संवरना होता था, लेकिन अब यह आत्मविश्वास, लाइफस्टाइल, सेल्फ-केयर, सोशल मीडिया उपस्थिति और व्यक्तिगत पहचान का हिस्सा बन गया है। भारतीय महिलाओं की ड्रेसिंग टेबल अब सिर्फ काजल, पाउडर और एक लिपस्टिक तक सीमित नहीं रही। बीते दो दशकों में भारत का ब्यूटी कल्चर तेजी से बदला है। पहले जहां ‘गोरा दिखाना’ ब्यूटी इंडस्ट्री का सबसे बड़ा वादा था, वहीं अब ‘स्किन हेल्थ’, ‘ग्लो’, ‘सन प्रोटेक्शन’, ‘हाइड्रेशन’ और ‘एंटी-एजिंग’ जैसे शब्द आम हो चुके हैं। महिलाएं अब यह जानना चाहती हैं कि किसी प्रोडक्ट में कौन-सा सक्रिय तत्व है और वह त्वचा पर क्या असर डालेगा। कोविड के बाद ‘स्किन-फर्स्ट” और ‘स्किन मिनिमलिज्म’ का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। यानी कम लेकिन असरदार उत्पादों का इस्तेमाल। ग्लोबल डेटा, वोग इंडिया जैसे प्रकाशनों के मुताबिक अब ‘हाइब्रिड ब्यूटी’ तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यानी ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल जो मेकअप और स्किनकेयर दोनों का काम करें। जैसे- एसपीएफ वाला फाउंडेशन, सीरम युक्त कंसीलर या मॉइश्चराइजर-प्राइमर कॉम्बो। ब्यूटी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के मुताबिक बीते एक दशक में परिवारों के मासिक खर्च में स्किनकेयर, हेयरकेयर और कॉस्मेटिक्स का हिस्सा लगातार बढ़ा है। प्रति महिला ब्यूटी और पर्सनल केयर मासिक खर्च पांच गुना तक बढ़ गया है। बदलता ट्रेंड: फेयर स्किन, ग्लास स्किन, मैट स्किन… हाइब्रिड 1950-60 और पहले – घरेलू नुस्खों और सादगी का दौर ब्यूटी केयर मतलब बेसन, मलाई, हल्दी, गुलाबजल और नारियल तेल। ड्रेसिंग टेबल पर टैल्कम पाउडर, काजल और सिंदूर ही मुख्य उत्पाद होते थे। मेकअप शादी या विशेष अवसरों तक सीमित था। 1960-80- फिल्मों का असर, गोरापन सुंदरता का प्रतीक हीरोइनों की हेयरस्टाइल और चटक मेकअप का असर बढ़ा। रंगीन लिपस्टिक, नेल पॉलिश, कॉम्पैक्ट पाउडर लोकप्रिय हुए। गोरी त्वचा सुंदरता का प्रतीक बनी। फेयरनेस क्रीम का बाजार तेजी से बढ़ा। 1990 का दशक – उदारीकरण और विदेशी ब्रांड्स का प्रवेश अंतरराष्ट्रीय ब्रांड भारत आए। अलग-अलग शेड्स की लिपस्टिक, फाउंडेशन और हेयर कलर के विकल्प मिले। फैशन मैगजीन और टीवी विज्ञापनों ने ‘ग्लैमरस लुक’ को लोकप्रिय बनाया। 2000 का दशक – सलून संस्कृति का उदय छोटे शहरों में भी फेशियल, हेयर स्पा, स्किन ट्रीटमेंट आम होने लगे। युवा लड़कियां भी नियमित ब्यूटी प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने लगीं। 2010 के बाद – इन्फ्लुएंसर्स ने बदला ट्रेंड ‘नो-मेकअप मेकअप’, ‘कोरियन स्किनकेयर’, ‘सनस्क्रीन’, ‘रेटिनॉल’, ‘नियासिनामाइड’ और ‘क्लीन ब्यूटी’ जैसे शब्द आम हो गए। (स्रोत- इंस्टीट्यूटो मारांगोनी, वोग) अब ब्यूटी यानी स्किन हेल्थ ब्यूटी काउंसलर लवीना मनवानी कहती हैं, भारतीय महिलाओं की सोच में सबसे बड़ा बदलाव ‘स्किन हेल्थ’ को लेकर आया है। सोशल मीडिया, कोरियन ब्यूटी ट्रेंड्स ने भी पसंद बदली है। पहले ड्रेसिंग टेबल पर 4-5 उत्पाद होते थे, अब 20-30 होना सामान्य है। 10 साल में ब्यूटी केयर खर्च 5 गुना बढ़ गया है। तेजी से बढ़ रहा ब्यूटी बाजार रेडसीर, रिसर्च एंड मार्केट्स जैसी कंपनियों की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में भारतीय ब्यूटी और पर्सनल केयर (बीपीसी) बाजार का आकार करीब 2 लाख करोड़ रुपए था, जो 2030 तक 4 लाख करोड़ रुपए से ऊपर पहुंचने का अनुमान है। 3-4 वर्षों में भारत चौथा सबसे बड़ा बीपीसी मार्केट होगा। बदल रहा है ब्यूटी प्रोडक्ट की खरीदारी का तरीका 85% उपभोक्ता अब ब्यूटी प्रोडक्ट्स के इंग्रेडिएंट्स पर ध्यान देते हैं। 48% लोग सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से प्रभावित होकर खरीदारी करते हैं। 55% उपभोक्ताओं को कोलेजन आधारित उत्पाद आकर्षक लगते हैं। 46% लोग हायल्यूरोनिक एसिड वाले उत्पाद पसंद कर रहे हैं। (स्रोत- ग्लोबल डेटा)
एक दिन में कितने चम्मच कुकिंग ऑयल खाना चाहिए? डॉक्टर सरीन ने बताई सही मात्रा, ज्यादा खाना नुकसानदायक

Last Updated:May 18, 2026, 15:24 IST Daily Oil Intake for Better Health: अधिकतर लोग रोज जरूरत से ज्यादा तेल का सेवन कर रहे हैं, जिसकी वजह से तमाम बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. मशहूर लिवर डॉक्टर शिवकुमार सरीन के अनुसार वयस्कों को एक दिन में 5 से 6 चम्मच से ज्यादा ऑयल या घी नहीं खाना चाहिए. बच्चों के लिए इसकी मात्रा और कम हो सकती है. ज्यादा तेल खाने से लिवर डिजीज, मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. डॉ. सरीन के अनुसार एक दिन में 5 से 6 चम्मच तेल या घी खाना चाहिए. How Much Oil Safe Per Day: अधिकतर खाने-पीने की चीजों में तेल का इस्तेमाल किया जाता है. सब्जी, दाल, पराठा, स्नैक्स और फास्ट फूड जैसी चीजों में अच्छी खासी मात्रा में ऑयल यूज किया जाता है. शरीर को हेल्दी फैट की जरूरत होती है, लेकिन जरूरत से ज्यादा तेल का सेवन करना कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार तेल का जरूरत से ज्यादा सेवन मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर, फैटी लिवर और हार्ट डिजीज का कारण बन सकता है. ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि आपको रोज कितना तेल खाना चाहिए और कितनी मात्रा सेहत के लिए नुकसानदायक होती है. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने 30 मार्च 2026 को अपने एक्स हैंडल पर देश के मशहूर लिवर डॉक्टर शिवकुमार सरीन का एक वीडियो शेयर किया था. इसमें एसके सरीन ने बताया कि एक सामान्य वयस्क व्यक्ति को रोजाना लगभग 5 से 6 चम्मच तेल या घी का सेवन करना चाहिए. एक चम्मच में करीब 5 ग्राम तेल या घी आता है. इस हिसाब से एक दिन में 25 से 30 ग्राम तेल या घी का सेवन करना चाहिए. अगर इससे कम तेल खाएंगे, तो शरीर को फायदा ही होगा. जो लोग वजन कम करना चाहते हैं या जिन्हें कोई बीमारी है, उन लोगों को कम से कम तेल खाना चाहिए. How much oil are you consuming in a day? Is it within the safe limit? Watch renowned liver expert Dr. Shiv Sarin explain how much oil you can consume in a day & how keeping track of daily oil intake is an effective step in preventing obesity.#StopObesity #EatRightIndia pic.twitter.com/11y6SAqYc8
अंजुम शर्मा बोले- ‘कप्तान’ का मुन्ना जमीनी और रॉ किरदार:‘मिर्जापुर’ के शरद शुक्ला से बिल्कुल अलग अंदाज में दिखे एक्टर

एक्टर अंजुम शर्मा इन दिनों अपनी वेब सीरीज ‘कप्तान’ को लेकर चर्चा में हैं। इस थ्रिलर में अंजुम ने ‘मुन्ना’ का किरदार निभाया है। दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में अंजुम शर्मा ने ‘कप्तान’ के मुन्ना, ‘मिर्जापुर’ के शरद शुक्ला, OTT के बदलते दौर, मास सिनेमा और एक्टिंग के अपने सफर पर बात की। “कप्तान” एक इंटेंस कॉप-क्राइम ड्रामा है, जिसे जतिन वागले ने डायरेक्ट किया है। इसमें साकिब सलीम, सिद्धार्थ निगम और कविता कौशिक भी हैं। यह सीरीज अमेजन MX प्लेयर पर फ्री स्ट्रीम हो रही है। सवाल: ‘मिर्जापुर’ के शरद शुक्ला और ‘कप्तान’ के मुन्ना, दोनों किरदार बिल्कुल अलग हैं। मुन्ना को लेकर क्या सोच थी? जवाब: सबसे पहले तो नाम सुनते ही लोग ‘मिर्जापुर’ वाले मुन्ना तक पहुंच जाते हैं। मुझे भी लगा था कि यार, फिर से मुन्ना? लेकिन फिर लगा कि ठीक है, देखते हैं इसे ‘मिर्जापुर’ के मुन्ना के किरदार से अलग कैसे बनाया जाए। सबसे बड़ा फर्क उसकी बेल्ट और बोली में था। ‘मिर्जापुर’ पूर्वांचल में सेट थी और ‘कप्तान’ वेस्टर्न यूपी में सेट है। ‘कप्तान’ का मुन्ना बहुत ज्यादा जमीनी इंसान है। वो हंसते-हंसते कुछ भी कर देता है। किसी बड़ी घटना को अंजाम देने से पहले बहुत सोचता नहीं है। उसके अंदर एक मस्ती है, एक रॉनेस है। सवाल: इस किरदार के लिए सबसे बड़ी तैयारी क्या थी? जवाब: सबसे बड़ी तैयारी इस रोल की डायलेक्ट की थी। हरियाणा और वेस्टर्न यूपी की बोली में बहुत हल्का फर्क होता है, लेकिन वही फर्क सही पकड़ना जरूरी था। शो में बाकी लोग बाहर से आए हुए हैं, लेकिन मेरा किरदार वहीं का है। इसलिए उसका पूरी तरह उसी मिट्टी का लगना बहुत जरूरी था। सवाल: क्या ‘मिर्जापुर’ के बाद कुछ बिल्कुल अलग करने की चाह थी? जवाब: बिल्कुल। शरद शुक्ला बहुत अच्छा किरदार था, लोगों ने बहुत प्यार दिया, लेकिन वो थोड़ा संयमित था, सोच-समझकर चलने वाला आदमी था। उसके बाद मन था कि कुछ ऐसा किया जाए जहां मैं पूरी तरह खुल सकूं। मुन्ना ने मुझे वो मौका दिया। मैंने अपने सारे औजार निकाल दिए और कहा कि चलो, इस बार कुछ अलग करते हैं। सवाल: मुन्ना को आपने बहुत ‘ह्यूमन’ बनाया है। उसमें एक अपनापन महसूस होता है। जवाब: मेरे लिए किसी भी कैरेक्टर का इंसान होना बहुत जरूरी है। आप उस इंसान से कनेक्ट कर पाओ, ये जरूरी है। हो सकता है कहानी खत्म होने के बाद वो आपको पसंद आए या न आए, लेकिन आपको लगे कि हां, ये असली इंसान है। जैसे एक सीन में वो खेत खाली करवाने जाता है और बहुत आराम से कहता है, ‘भैया कर दीजिए, नहीं करेंगे तो फिर मुझे कुछ करना पड़ेगा।’ वहां आपको लगता है कि यार, इसकी भी अपनी मजबूरी है। सवाल: सोशल मीडिया पर ‘मुन्ना’ के रोल की रील्स काफी वायरल हो रही हैं। क्या इस रिस्पॉन्स की उम्मीद थी? जवाब: सच कहूं तो मैं खुद थोड़ा सरप्राइज था। मिलियंस में व्यूज आ रहे हैं। लोगों ने बहुत प्यार दिया। कुछ लोगों ने तो ये तक कहा कि उन्हें ‘मिर्जापुर’ से ज्यादा ‘कप्तान’ में मेरा काम पसंद आया। ये सुनकर अच्छा भी लगा और थोड़ा शॉक भी हुआ। सवाल: कविता कौशिक के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: शो में हमारे बीच कुछ ऐसे सीन थे जहां हल्की नोकझोंक, सेंशुअलिटी और मस्ती थी, लेकिन हमने बहुत थिन लाइन रखी। उसे ओवर नहीं किया। एक सीन में थोड़ी फिजिकल मैन-हैंडलिंग भी थी, तो मैं बहुत ध्यान रख रहा था कि कविता को चोट न लगे, लेकिन दो-तीन टेक के बाद उन्होंने खुद कहा, ‘अंजुम, थोड़ा और जोर से पकड़ सकते हो।’ फिर वो सीन बहुत अच्छे से निकला। सवाल: आज के समय में ‘मास’ कंटेंट की परिभाषा कैसे बदल रही है? जवाब: मेरे लिए मास का मतलब सिर्फ शोर-शराबा नहीं है। मास का मतलब है ज्यादा से ज्यादा लोगों की भावनाओं से जुड़ना। अगर अलग-अलग उम्र, बैकग्राउंड और सोच वाले लोग किसी चीज से जुड़ते हैं, तो उसमें पक्का क्रेडिबिलिटी होती है। आज के समय में सिर्फ हवा में कोई चीज मास नहीं हो सकती। कहानी, परफॉर्मेंस, एंटरटेनमेंट और एंगेजमेंट सब होना जरूरी है।
अंजुम शर्मा बोले- ‘कप्तान’ का मुन्ना जमीनी और रॉ किरदार:‘मिर्जापुर’ के शरद शुक्ला से बिल्कुल अलग अंदाज में दिखे एक्टर

एक्टर अंजुम शर्मा इन दिनों अपनी वेब सीरीज ‘कप्तान’ को लेकर चर्चा में हैं। इस थ्रिलर में अंजुम ने ‘मुन्ना’ का किरदार निभाया है। दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में अंजुम शर्मा ने ‘कप्तान’ के मुन्ना, ‘मिर्जापुर’ के शरद शुक्ला, OTT के बदलते दौर, मास सिनेमा और एक्टिंग के अपने सफर पर बात की। “कप्तान” एक इंटेंस कॉप-क्राइम ड्रामा है, जिसे जतिन वागले ने डायरेक्ट किया है। इसमें साकिब सलीम, सिद्धार्थ निगम और कविता कौशिक भी हैं। यह सीरीज अमेजन MX प्लेयर पर फ्री स्ट्रीम हो रही है। सवाल: ‘मिर्जापुर’ के शरद शुक्ला और ‘कप्तान’ के मुन्ना, दोनों किरदार बिल्कुल अलग हैं। मुन्ना को लेकर क्या सोच थी? जवाब: सबसे पहले तो नाम सुनते ही लोग ‘मिर्जापुर’ वाले मुन्ना तक पहुंच जाते हैं। मुझे भी लगा था कि यार, फिर से मुन्ना? लेकिन फिर लगा कि ठीक है, देखते हैं इसे ‘मिर्जापुर’ के मुन्ना के किरदार से अलग कैसे बनाया जाए। सबसे बड़ा फर्क उसकी बेल्ट और बोली में था। ‘मिर्जापुर’ पूर्वांचल में सेट थी और ‘कप्तान’ वेस्टर्न यूपी में सेट है। ‘कप्तान’ का मुन्ना बहुत ज्यादा जमीनी इंसान है। वो हंसते-हंसते कुछ भी कर देता है। किसी बड़ी घटना को अंजाम देने से पहले बहुत सोचता नहीं है। उसके अंदर एक मस्ती है, एक रॉनेस है। सवाल: इस किरदार के लिए सबसे बड़ी तैयारी क्या थी? जवाब: सबसे बड़ी तैयारी इस रोल की डायलेक्ट की थी। हरियाणा और वेस्टर्न यूपी की बोली में बहुत हल्का फर्क होता है, लेकिन वही फर्क सही पकड़ना जरूरी था। शो में बाकी लोग बाहर से आए हुए हैं, लेकिन मेरा किरदार वहीं का है। इसलिए उसका पूरी तरह उसी मिट्टी का लगना बहुत जरूरी था। सवाल: क्या ‘मिर्जापुर’ के बाद कुछ बिल्कुल अलग करने की चाह थी? जवाब: बिल्कुल। शरद शुक्ला बहुत अच्छा किरदार था, लोगों ने बहुत प्यार दिया, लेकिन वो थोड़ा संयमित था, सोच-समझकर चलने वाला आदमी था। उसके बाद मन था कि कुछ ऐसा किया जाए जहां मैं पूरी तरह खुल सकूं। मुन्ना ने मुझे वो मौका दिया। मैंने अपने सारे औजार निकाल दिए और कहा कि चलो, इस बार कुछ अलग करते हैं। सवाल: मुन्ना को आपने बहुत ‘ह्यूमन’ बनाया है। उसमें एक अपनापन महसूस होता है। जवाब: मेरे लिए किसी भी कैरेक्टर का इंसान होना बहुत जरूरी है। आप उस इंसान से कनेक्ट कर पाओ, ये जरूरी है। हो सकता है कहानी खत्म होने के बाद वो आपको पसंद आए या न आए, लेकिन आपको लगे कि हां, ये असली इंसान है। जैसे एक सीन में वो खेत खाली करवाने जाता है और बहुत आराम से कहता है, ‘भैया कर दीजिए, नहीं करेंगे तो फिर मुझे कुछ करना पड़ेगा।’ वहां आपको लगता है कि यार, इसकी भी अपनी मजबूरी है। सवाल: सोशल मीडिया पर ‘मुन्ना’ के रोल की रील्स काफी वायरल हो रही हैं। क्या इस रिस्पॉन्स की उम्मीद थी? जवाब: सच कहूं तो मैं खुद थोड़ा सरप्राइज था। मिलियंस में व्यूज आ रहे हैं। लोगों ने बहुत प्यार दिया। कुछ लोगों ने तो ये तक कहा कि उन्हें ‘मिर्जापुर’ से ज्यादा ‘कप्तान’ में मेरा काम पसंद आया। ये सुनकर अच्छा भी लगा और थोड़ा शॉक भी हुआ। सवाल: कविता कौशिक के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: शो में हमारे बीच कुछ ऐसे सीन थे जहां हल्की नोकझोंक, सेंशुअलिटी और मस्ती थी, लेकिन हमने बहुत थिन लाइन रखी। उसे ओवर नहीं किया। एक सीन में थोड़ी फिजिकल मैन-हैंडलिंग भी थी, तो मैं बहुत ध्यान रख रहा था कि कविता को चोट न लगे, लेकिन दो-तीन टेक के बाद उन्होंने खुद कहा, ‘अंजुम, थोड़ा और जोर से पकड़ सकते हो।’ फिर वो सीन बहुत अच्छे से निकला। सवाल: आज के समय में ‘मास’ कंटेंट की परिभाषा कैसे बदल रही है? जवाब: मेरे लिए मास का मतलब सिर्फ शोर-शराबा नहीं है। मास का मतलब है ज्यादा से ज्यादा लोगों की भावनाओं से जुड़ना। अगर अलग-अलग उम्र, बैकग्राउंड और सोच वाले लोग किसी चीज से जुड़ते हैं, तो उसमें पक्का क्रेडिबिलिटी होती है। आज के समय में सिर्फ हवा में कोई चीज मास नहीं हो सकती। कहानी, परफॉर्मेंस, एंटरटेनमेंट और एंगेजमेंट सब होना जरूरी है।







