Thursday, 24 Sep 2026 | 06:01 AM

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योगी बोले- नमाज पढ़नी है तो शिफ्ट में पढ़िए:सड़क पर नहीं पढ़ी जाएगी; प्यार से मानेंगे तो ठीक, नहीं तो दूसरा तरीका अपनाएंगे

योगी बोले- नमाज पढ़नी है तो शिफ्ट में पढ़िए:सड़क पर नहीं पढ़ी जाएगी; प्यार से मानेंगे तो ठीक, नहीं तो दूसरा तरीका अपनाएंगे

यूपी में बकरीद से पहले सड़कों पर नमाज को लेकर सीएम योगी ने चेतावनी दी है। लखनऊ में सोमवार को एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा- सड़कें नमाज पढ़ने या किसी तरह की भीड़ जुटाने के लिए नहीं हैं। लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या यूपी में सड़कों पर नमाज होती है? मैं कहता हूं- कतई नहीं। उन्होंने कहा- सड़कें आम लोगों के चलने के लिए हैं। कोई भी आकर ट्रैफिक डिस्टर्ब करे, यह अधिकार किसी को नहीं है। नमाज पढ़नी है तो तय जगह पर पढ़िए। संख्या ज्यादा है तो शिफ्ट में पढ़ लीजिए। हम नमाज नहीं रोकेंगे, लेकिन सड़क पर अराजकता नहीं होने देंगे। योगी ने आगे कहा- सरकार पहले संवाद से समाधान चाहती है। लेकिन, कानून तोड़ने वालों पर सख्ती भी होगी। प्यार से मानेंगे तो ठीक है, नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे। सीएम योगी ने बरेली में हुए बवाल का भी जिक्र किया। कहा- बरेली में लोगों ने हाथ आजमाया था, ताकत भी देख ली। कानून सभी के लिए बराबर है। किसी को भी सड़क जाम करने या अव्यवस्था फैलाने की छूट नहीं दी जाएगी। दरअसल, यूपी में सितंबर 2025 में आई लव मोहम्मद को लेकर विवाद हुआ था। बरेली में मुस्लिम नेता मौलाना तौकीर रजा ने नमाज के बाद धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया। पुलिस ने रोका तो पथराव हो गया। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। CM बोले- पहले कट्टा-बम बनते थे, अब ब्रह्मोस मिसाइल बन रही योगी ने यूपी के विकास और निवेश का जिक्र किया। कहा- पहले प्रदेश की पहचान कट्टा और बम से होती थी, लेकिन अब यहां ब्रह्मोस मिसाइल बन रही है। नकारात्मक माहौल होगा तो ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया’ पैदा होगा। सकारात्मक माहौल होगा तो ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ बनेगा। यूपी में तेजी से निवेश आ रहा है। रोजगार बढ़ रहे हैं। यूपी जल्द 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनेगा। यूपी में महिलाओं की सुरक्षा बेहतर हुई योगी ने कहा- यूपी में पहले महिलाएं दिन में भी बाहर निकलने से डरती थीं। अब वे नाइट शिफ्ट में काम कर रही हैं। सुरक्षित घर लौट रही हैं। अब कोई बेटी से छेड़खानी नहीं कर सकता। उन्होंने कहा- यूपी अब ‘बीमारू राज्य’ नहीं, बल्कि रेवेन्यू सरप्लस स्टेट बन चुका है। पिछले 6 साल से यूपी लगातार रेवेन्यू सरप्लस में है। अब प्रदेश को किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ती। यूपी के पास कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर और युवाओं की ताकत जैसी अपार संभावनाएं हैं। सरकार सभी 75 जिलों के संतुलित विकास पर काम कर रही है। बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान सड़क पर नमाज का मुद्दा उठाया था सीएम योगी ने हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान सड़कों पर नमाज के मुद्दे को उठाया था। उन्होंने बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि दीदी सड़कों पर नमाज पढ़वाती हैं और हिंदू त्योहारों पर पाबंदी लगाती हैं। यूपी में कोई सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ सकता। सड़कें यातायात के लिए हैं, नमाज के लिए नहीं। नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा। योगी सरकार ने सड़क पर नमाज पढ़ने पर रोक लगाई थी योगी सरकार ने 2022-2023 में सड़कों पर नमाज पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। आदेश दिया कि ईद, अलविदा जुमा या किसी भी अन्य दिन सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ी जाएगी। धार्मिक कार्यक्रम केवल ईदगाह, मस्जिदों या निर्धारित धार्मिक स्थलों के अंदर ही होने चाहिए। ———————- ये खबर भी पढ़ें… लखनऊ में हंगामा, पथराव और लाठीचार्ज: बुलडोजर से वकीलों के 240 चैंबर ढहाए; अखिलेश बोले- भाजपा किसी की सगी नहीं लखनऊ जिला कोर्ट के बाहर रविवार को जमकर हंगामा हुआ। बुलडोजर से चैंबर तोड़े जाने के विरोध में वकील भड़क गए। वकीलों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस ने दौड़ा-दौड़ाकर लाठियां बरसाईं। इस दौरान भीड़ में से कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। VIDEO में देखिए पूरा बवाल…

फीफा कप 2026; ‘परफेक्ट’ घास तैयार:47 करोड़ खर्च कर वैज्ञानिकों की टीम लगाई गई, 8 साल में 170 से ज्यादा प्रयोग

फीफा कप 2026; ‘परफेक्ट’ घास तैयार:47 करोड़ खर्च कर वैज्ञानिकों की टीम लगाई गई, 8 साल में 170 से ज्यादा प्रयोग

फीफा वर्ल्ड कप 2026 शुरू होने में अब कुछ ही हफ्ते बचे हैं। टूर्नामेंट के 104 मैचों के लिए इस बार ऐसी प्राकृतिक घास तैयार की जा रही है, जो अलग-अलग मौसम और स्टेडियम की परिस्थितियों में भी एक जैसी खेले। इसके लिए फीफा ने करीब 47 करोड़ रुपए खर्च कर वैज्ञानिकों की टीम लगाई है। टीम ने पिछले 8 साल में 170 से ज्यादा प्रयोग किए हैं, ताकि खिलाड़ियों की चोट का खतरा घटे और ट्रैक्शन व बॉल बाउंस बेहतर रहे। 2024 के कोपा अमेरिका टूर्नामेंट में अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने अटलांटा स्टेडियम की अस्थाई प्राकृतिक घास की शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि पिच ‘डिजास्टर’ (बेहद खराब) है और गेंद ‘स्प्रिंगबोर्ड’ की तरह अजीब ढंग से उछल रही है। साल 2026 के वर्ल्ड कप में मेजबान अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको ऐसी बदनामी से बचना चाहते हैं। 5 मिलीमीटर का अंतर भी बदल सकता है खेल का मिजाज टेनेसी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉन सोरोचन और मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ट्रे रोजर्स की देखरेख में वर्ल्ड कप के 16 स्टेडियमों के लिए पिच तैयार हो रही हैं। सोरोचन के मुताबिक घास की ऊंचाई में सिर्फ 5 मिलीमीटर का फर्क भी खेल का मिजाज बदल देता है। इसे परखने के लिए लैब के छोटे मैदानों पर चमकदार लाल रंग की मशीनों से फुटबॉल को शूट किया गया। इससे बॉल की स्पीड तक मापा गया।

लेकिन असल में निशांत कुमार कौन हैं?

लेकिन असल में निशांत कुमार कौन हैं?

वो वीडियो जिसने बिहार के नए स्वास्थ्य मंत्री को रातों-रात मशहूर बना दिया: बिहार के नए स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का वीडियो गलत कारणों से वायरल हो रहा है। वीडियो में दिखाया गया है कि वह सार्वजनिक कार्यक्रमों में स्पष्ट रूप से भ्रमित दिखाई दे रहे हैं – अपने पिता के पैर छूते समय हिलना, गुरुद्वारे में अपने कपड़ों को संभालने के लिए संघर्ष करना, अपनी कुर्सी पर अस्थिर रूप से हिलना, और बुनियादी सवाल पूछे जाने पर बीच वाक्य से पीछे हटना। सोशल मीडिया ने स्पष्ट रूप से पूछा कि क्या वह व्यक्ति जो अब 130 मिलियन से अधिक लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवा का प्रभारी है, स्पष्ट रूप से कहें तो ठीक है। न तो मंत्री और न ही जेडीयू ने कोई स्पष्टीकरण दिया है. तो वास्तव में निशांत कुमार कौन है – और वह यहां कैसे पहुंचा? (एक्स/@दिनेशरेडबुल) उनके अधिकांश जीवन में, किसी ने उनके बारे में नहीं सुना: 20 जुलाई 1975 को जन्मे निशांत कुमार नीतीश कुमार और मंजू सिन्हा के इकलौते बेटे हैं। 2007 में उनकी मां का निधन हो गया और तब से निशांत ने पटना में काफी हद तक निजी जीवन व्यतीत किया। भारत में कई राजनीतिक उत्तराधिकारियों के विपरीत, वह शायद ही कभी सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखाई देते थे और वर्षों तक राजनीतिक जिम्मेदारियों से बचते रहे। उन्होंने पटना के सेंट करेन और मसूरी के मानव भारती इंटरनेशनल स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त की, फिर बीआईटी मेसरा, रांची से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। वह अविवाहित हैं, उनकी कोई संतान नहीं है और उन्होंने दशकों तक खुद को लगभग पूरी तरह से सार्वजनिक रडार से दूर रखा। 2017 में, उन्होंने कहा कि वह राजनीति से कोई लेना-देना नहीं चाहते: लंबे समय तक निशांत ने दावा किया था कि उनका राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं है. 2017 में उन्होंने साफ तौर पर कहा था, “मुझे न तो राजनीति में रुचि है और न ही इस क्षेत्र के बारे में कोई जानकारी है. मेरा पहला प्यार अध्यात्म है और फिलहाल मैं अध्यात्म की राह पर आगे बढ़ रहा हूं.” हाल ही में पिछले साल की तरह, उन्हें पार्टी का टिकट नहीं दिया गया था और उनसे सक्रिय राजनीति में प्रवेश की उम्मीद नहीं की गई थी। जेडीयू के अधिकांश अंदरूनी सूत्रों ने निजी तौर पर मान लिया था कि वह स्थायी रूप से किनारे पर रहेंगे। फिर उनके पिता ने छोड़ने का फैसला किया और सब कुछ बदल गया: मार्च 2026 में नीतीश कुमार द्वारा मुख्यमंत्री पद से अपने लंबित इस्तीफे और राज्यसभा चुनाव लड़ने के इरादे की घोषणा के बाद, उनके बेटे निशांत जद (यू) में शामिल हो गए – एक कदम जिसे व्यापक रूप से नीतीश की वंशवाद विरोधी लंबे समय से चली आ रही नीति से प्रस्थान के रूप में देखा जाता है। राजनीति में उनका आधिकारिक प्रवेश 7 मार्च, 2026 को हुआ। उनका लॉन्च कार्यक्रम वाल्मिकी नगर से “सद्भाव यात्रा” था – वही शुरुआती बिंदु जो उनके पिता ने मुख्यमंत्री के रूप में अपने लगभग दो दशक के कार्यकाल के दौरान कई यात्राओं के लिए चुना था। प्रतीकवाद अचूक था. दो महीने बाद, वह कैबिनेट मंत्री बने: निशांत कुमार को 7 मई, 2026 को एक भव्य समारोह में बिहार कैबिनेट में शामिल किया गया, जिसमें पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शामिल हुए। उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय सौंपा गया – जो बिहार के सबसे महत्वपूर्ण विभागों में से एक है, जो 130 मिलियन से अधिक लोगों के लिए स्वास्थ्य देखभाल की देखरेख करता है। वह ठीक 61 दिनों तक पार्टी के सदस्य रहे। फिर, 48 घंटों के भीतर, वीडियो प्रसारित होने लगे – और सवाल शुरू हो गए। ‘1925’ भाषण और गुरुद्वारा क्लिप्स: वायरल सामग्री लहरों में आई। शपथ लेने के तुरंत बाद एनडीटीवी से बात करते हुए, निशांत कुमार ने जेडीयू को “1925 के बिहार चुनाव में 200 सीटें” जिताने के लिए बिहार के मतदाताओं को धन्यवाद दिया – यह तारीख भारत की आजादी, जेडीयू के अस्तित्व और आधुनिक लोकतंत्र से भी पहले की है। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने तुरंत क्लिप शेयर किया. फिर गुरुद्वारे के वीडियो आए. फिर शपथ ग्रहण का फुटेज. मीम्स से भरा सोशल मीडिया. टिप्पणियाँ “पुनर्वास से मंत्रालय तक” से लेकर “जब आपके पिता आपके लिए आपका करियर तय करते हैं” से लेकर “बिहार कभी भी एक राज्य के रूप में विकसित नहीं हो पाएगा” तक शामिल थीं। सबसे बड़ा सवाल जिसका जवाब कोई नहीं देना चाहता: मीम्स के पीछे एक तीखा राजनीतिक सवाल है. जैसा कि एक व्यापक रूप से साझा की गई पोस्ट में कहा गया है: “उनके पास शासन में कोई बड़ा राजनीतिक अनुभव नहीं है। सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधारों में कोई दृश्य रिकॉर्ड नहीं है। बड़ी प्रणालियों को संभालने की कोई सिद्ध प्रशासनिक पृष्ठभूमि नहीं है। फिर भी बिहार के सबसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों में से एक उनसे जुड़ा हुआ है क्योंकि वह नीतीश कुमार के बेटे हैं। यह वही बिहार है जहां सरकारी अस्पतालों में भीड़ रहती है और कई मरीज़ अभी भी उचित इलाज के लिए राज्य के बाहर जाते हैं।” राजद के एक प्रवक्ता ने कहा, “जिन नेताओं ने हमें दशकों तक जंगल राज और भाई-भतीजावाद पर व्याख्यान दिया, उन्होंने अब अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उसी परिवारवाद को अपना लिया है।” बिहार के लिए वीडियो सिर्फ मनोरंजन नहीं है. वे इस बारे में सवाल हैं कि सत्ता किसे मिलती है – और क्यों।

लू में ज्यादा बाहर न निकलें, आंखों की इन 3 समस्याओं का हो जाएंगे शिकार, डॉक्टर से समझें खतरे

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Last Updated:May 18, 2026, 14:04 IST Eye Problems in Summer Heat: तेज गर्मी और लू का असर आंखों पर भी बुरी तरह पड़ता है. अगर आप भीषण गर्मी में आंखों को खयाल नहीं रखेंगे, तो इससे ड्राई आई, एलर्जी और इंफेक्शन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. डॉक्टर्स की मानें तो आंखों को धूप से बचाना जरूरी होता है. इसके लिए घर से निकलते वक्त सनग्लासेस जरूर इस्तेमाल करने चाहिए. गर्मी में आंखों को हेल्दी रखने के लिए धूप में बाहर जाने से बचें. How Summer Heat Affect Eyes: देश के कई हिस्सों में इस वक्त भीषण गर्मी का प्रकोप देखने को मिल रहा है. दिल्ली-एनसीआर में पारा 45 के पार हो गया है. मौसम विभाग की मानें तो अगले एक सप्ताह तक इसी तरह आसमान से आग बरसेगी. गर्मी में तेज धूप और गर्म हवाएं आंखों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं. लू के दौरान लंबे समय तक बाहर रहने से आंखों में ड्राइनेस, जलन, लालिमा और संक्रमण जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं. डॉक्टर्स के अनुसार तेज धूप में मौजूद अल्ट्रावायलेट किरणें और गर्म हवाएं आंखों की संवेदनशील परत को प्रभावित करती हैं. नई दिल्ली के विजन आई सेंटर के मेडिकल डायरेक्टर और रिफ्रेक्टिव सर्जन डॉ. तुषार ग्रोवर ने News18 को बताया गर्मी और लू की वजह से आंखों की नमी तेजी से कम होने लगती है. जब आंखों में पर्याप्त आंसू नहीं बनते या जल्दी सूख जाते हैं, तो ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या हो सकती है. लंबे समय तक धूप में रहना, कम पानी पीना, लगातार स्क्रीन देखना और AC में ज्यादा समय बिताना इस समस्या को बढ़ा सकता है. इस कंडीशन में लोगों को आंखों में जलन, चुभन, खुजली, धुंधला दिखना और लालिमा जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. कई बार आंखों से बार-बार पानी भी आने लगता है. अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो आंखों में इंफेक्शन और कॉर्निया से जुड़ी परेशानियां भी हो सकती हैं. डॉक्टर ग्रोवर के मुताबिक गर्मियों में धूल, पसीना और प्रदूषण बढ़ने से आंखों में एलर्जी और संक्रमण का खतरा काफी ज्यादा हो जाता है. तेज गर्मी और नमी में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से फैलते हैं, जिससे कंजंक्टिवाइटिस यानी आई फ्लू जैसी समस्या हो सकती है. आई फ्लू होने पर लोगों को आंखों में रेडनेस, खुजली, सूजन, पानी आना और चिपचिपा पदार्थ निकलने जैसी परेशानियां देखने को मिल सकती हैं. कुछ लोगों को तेज रोशनी में आंखें खोलने में भी परेशानी होती है. अगर गंदे हाथों से आंखों को बार-बार छुआ जाए, तो संक्रमण तेजी से फैल सकता है. एक्सपर्ट ने बताया कि तेज धूप में मौजूद अल्ट्रावायलेट यानी UV किरणें आंखों के लिए काफी नुकसानदायक मानी जाती हैं. बिना सनग्लासेस के लंबे समय तक धूप में रहने से आंखों की बाहरी सतह प्रभावित हो सकती है. लगातार UV एक्सपोजर से भविष्य में मोतियाबिंद और रेटिना से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है. धूप में ज्यादा काम करने वाले लोग, बाइक चलाने वाले, बच्चे और बुजुर्ग इस खतरे की चपेट में जल्दी आ सकते हैं. इसलिए आंखों को सीधी धूप से बचाना बेहद जरूरी है. अब सवाल है कि गर्मी में आंखों को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें? डॉक्टर ग्रोवर ने बताया कि गर्मियों में आंखों को सुरक्षित रखने के लिए बाहर निकलते समय हमेशा UV प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस पहनें. दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच तेज धूप में बाहर निकलने से बचें. शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त पानी पिएं और आंखों को बार-बार हाथ लगाने से बचें. बाहर से आने के बाद आंखों को साफ पानी से धोना फायदेमंद हो सकता है. लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप स्क्रीन देखने से भी आंखों पर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए बीच-बीच में आंखों को आराम देना जरूरी है. अगर आंखों में तेज दर्द, लगातार रेडनेस, सूजन, धुंधला दिखना या रोशनी से ज्यादा परेशानी हो रही हो, तो तुरंत आंखों के डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

गर्मी में अमृत है मऊ का तरबूज! मिठास ऐसी कि विदेश तक है डिमांड, स्वाद के साथ मिलेगी जबरदस्त ठंडक

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Last Updated:May 18, 2026, 13:42 IST गर्मी के मौसम में तरबूज लोगों की पहली पसंद माना जाता है, लेकिन मऊ का देसी तरबूज अपनी खास मिठास और स्वाद की वजह से अलग पहचान बना चुका है. नदी किनारे उगाया जाने वाला यह तरबूज न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है, बल्कि पानी की कमी दूर करने और ताजगी बनाए रखने में भी मदद करता है. यही वजह है कि इसकी मांग उत्तर प्रदेश से लेकर बड़े शहरों और विदेशों तक बनी रहती है. गर्मियों का सीजन आते ही लोग तरबूज और खरबूजा खाना खूब पसंद करते हैं, लेकिन इन दिनों मऊ का तरबूज लोगों के बीच खास पहचान बना रहा है. माना जाता है कि यहां का तरबूज खाते ही शरीर को ठंडक महसूस होती है और यह शरीर में खून बढ़ाने में भी मददगार माना जाता है. यही वजह है कि लोग इस तरबूज को बड़े चाव से खाते हैं. इसकी मिठास और स्वाद लोगों को इतना पसंद आता है कि सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में जाने वाले लोग भी इसे अपने साथ लेकर जाते हैं. इस खास तरबूज की खेती के लिए जनवरी से फरवरी के बीच बीजों की बुवाई की जाती है. इसके बाद फसल धीरे-धीरे तैयार होती है और अप्रैल के अंतिम दिनों से लेकर मई की शुरुआत में बाजार में आना शुरू हो जाती है. इस तरबूज को तैयार होने में काफी समय और मेहनत लगती है, इसलिए किसान इसकी खेती में विशेष ध्यान रखते हैं. तरबूज की अच्छी पैदावार और मिठास के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. ऐसी मिट्टी में उगाए गए तरबूज में ज्यादा मिठास आती है, जिसकी वजह से इसका स्वाद लोगों को बेहद पसंद आता है. मऊ में उगाए जाने वाले इस खास तरबूज की मांग सिर्फ उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों तक भी इसकी सप्लाई की जाती है. इतना ही नहीं, यहां आने वाले कई लोग इस तरबूज को अपने साथ विदेश तक लेकर जाते हैं. लोगों का मानना है कि मऊ के तरबूज जैसी मिठास प्रदेश में दूसरी जगह आसानी से नहीं मिलती. यही वजह है कि इसकी डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है. खास बात यह भी है कि खेतों से निकलने के बाद यह तरबूज कई दिनों तक खराब नहीं होता, इसलिए लोग इसे आसानी से लंबी दूरी तक लेकर जा सकते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google अगर मऊ में मिलने वाले तरबूज की कीमत की बात करें, तो यह खेतों से काफी सस्ते दामों में आसानी से मिल जाता है. जहां बाजारों में इसकी कीमत ज्यादा होती है, वहीं सीधे खेतों से खरीदने पर यह करीब 20 रुपये प्रति किलो तक मिल जाता है. यही तरबूज बाद में बाजारों में अधिक दामों पर बेचा जाता है. मऊ में बड़े पैमाने पर तरबूज की खेती होने की वजह से यहां इसकी कीमत अपेक्षाकृत कम रहती है. यही कारण है कि लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों से यहां पहुंचकर बड़ी मात्रा में तरबूज खरीदकर दूसरे जिलों और शहरों तक ले जाते हैं. तरबूज बाहर से हरे रंग का दिखाई देता है, लेकिन काटने पर अंदर से इसका गूदा गहरे लाल रंग का होता है. यही लाल रंग वाला तरबूज अपने बेहद मीठे स्वाद के लिए जाना जाता है. गर्मियों में लोग इसे बड़े चाव से खाना पसंद करते हैं. तरबूज खाने का सबसे अच्छा तरीका यह माना जाता है कि बाजार से लाने के बाद इसे कुछ देर तक ठंडे पानी में रखा जाए. इसके बाद इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर छिलके अलग कर दिए जाएं और फिर इसका सेवन किया जाए. इसकी मिठास शरीर को अंदर से ताजगी देने का काम करती है और यह शरीर में खून बढ़ाने में भी मददगार माना जाता है. यही वजह है कि गर्मी के मौसम में तरबूज लोगों की पहली पसंद बना रहता है. अगर मऊ जनपद के सबसे फेमस तरबूज की बात करें, तो भातकोल बाजार का तरबूज सबसे ज्यादा मशहूर माना जाता है. यहां नदी किनारे बड़े पैमाने पर तरबूज की खेती की जाती है, जिससे फल में खास मिठास आती है. किसान खेतों से ताजा तरबूज सीधे बाजार में लेकर आते हैं, इसलिए यहां मिलने वाला तरबूज पूरी तरह ताजा और स्वादिष्ट माना जाता है. लोगों का कहना है कि भातकोल बाजार के तरबूज जैसी मिठास पूरे मऊ जिले में कहीं और नहीं मिलती. यही वजह है कि इस बाजार के तरबूज की मांग दूर-दूर तक रहती है और लोग खास तौर पर यहां से तरबूज खरीदने पहुंचते हैं. गर्मी के मौसम में तरबूज को शरीर में पानी की कमी दूर करने और खून बढ़ाने के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. यही वजह है कि लोग गर्मियों में इसका सेवन सबसे ज्यादा करते हैं. तरबूज शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ ताजगी बनाए रखने में भी मदद करता है. मऊ में खास तौर पर नदी किनारे तरबूज की खेती की जाती है, जिससे इसमें प्राकृतिक मिठास अधिक आती है. यही खास स्वाद और मिठास लोगों को बेहद पसंद आती है, जिसके कारण यहां का तरबूज दूर-दूर तक भेजा जाता है और इसकी मांग लगातार बनी रहती है. अगर तरबूज को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर ऊपर से हल्का काला नमक छिड़क कर खाया जाए, तो इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. गर्मियों में लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं, क्योंकि यह शरीर को ठंडक और ताजगी देने का काम करता है. तरबूज में पानी की मात्रा काफी अधिक होती है, इसलिए इसे शरीर में पानी की कमी दूर करने और खून बढ़ाने के लिए फायदेमंद माना जाता है. खास बात यह है कि मऊ जनपद का तरबूज अपनी जबरदस्त मिठास और देसी स्वाद की वजह से काफी मशहूर है. यही कारण है कि इसकी मांग सिर्फ आसपास के इलाकों में ही नहीं, बल्कि दूर-दराज और विदेशों तक भी बनी रहती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

क्या हाई ब्लड प्रेशर में एक्सरसाइज करना सेफ है? जानें एक्सपर्ट्स की राय – News18 हिंदी

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X क्या हाई ब्लड प्रेशर में एक्सरसाइज करना सेफ है? जानें एक्सपर्ट्स की राय   Health Tips: फिट और हेल्दी रहने के लिए रोजाना कम से कम 40 मिनट एक्सरसाइज करने की सलाह हर डॉक्टर देता है, लेकिन हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट पेशेंट्स के लिए ये सवाल और भी बड़ा बन जाता है. क्या एक्सरसाइज करना उनके लिए सुरक्षित है या खतरनाक? इस वीडियो में हम आसान भाषा में समझेंगे कि हाई BP वाले लोगों को जिम या घर पर वर्कआउट करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, कौन-सी एक्सरसाइज़ से बचना चाहिए और कौन-सी उनके लिए फायदेमंद हो सकती है. साथ ही हम यह भी जानेंगे कि डाइट में क्या शामिल करें, और क्या प्रोटीन सप्लीमेंट्स लेना उनके लिए सुरक्षित है या नहीं? न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

चरवाहे ने देख लिया था इजराइल का सीक्रेट सैन्य ठिकाना:हेलिकॉप्टर से पीछा कर मारा, तब खुला इराक में इजराइली कैंप का राज

चरवाहे ने देख लिया था इजराइल का सीक्रेट सैन्य ठिकाना:हेलिकॉप्टर से पीछा कर मारा, तब खुला इराक में इजराइली कैंप का राज

तारीख- 3 मार्च जगह- अल-नुखैब कस्बा, पश्चिमी इराक 29 साल का चरवाहा अवाद अल-शम्मारी अपनी पिकअप गाड़ी लेकर जरूरी सामान लेने निकला था। सऊदी अरब और जॉर्डन की सीमाओं के पास बसे इस रेगिस्तानी इलाके में गाड़ियों का गुजरना आम बात थी। कुछ घंटों बाद वही गाड़ी आग की लपटों में घिरी और गोलियों से छलनी हालत में वापस दिखाई दी। लोगों ने बताया कि एक हेलिकॉप्टर ट्रक का पीछा कर रहा था और लगातार उस पर गोलियां चला रहा था, जब तक कि ट्रक रेत में रुक नहीं गया। परिजनों का कहना है कि अवाद गलती से इजराइल के एक सीक्रेट सैन्य ठिकाने तक पहुंच गया था। वहां उसे एक अस्थायी हवाई पट्टी के आसपास सैनिक, हेलिकॉप्टर और तंबू दिखाई दिए। उसने तुरंत इराकी सेना के रिजनल कमांड को फोन कर इसकी सूचना दी। परिवार का मानना है कि इसी वजह से उसकी हत्या कर दी गई। इजराइली सेना ने इन आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की है। रिपोर्ट में शामिल गवाहों और अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों से नाम छिपाने की शर्त पर न्यूयॉर्क टाइम्स से बात की है। ईराक में इजराइल के 2 सीक्रेट सैन्य ठिकाने इजराइल पिछले एक साल से ज्यादा समय तक इराक के पश्चिमी रेगिस्तान में दो सीक्रेट मिलिट्री बेस चला रहा था। क्षेत्रीय और इराकी अधिकारियों के अनुसार इजराइल उस जगह का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में सहायता के लिए कर रहा था। इनमें से एक वही अड्डा था जिसे अवाद ने देख लिया था। इससे पहले वॉल स्ट्रीट जर्नल ने भी इराक में एक इजराइली ठिकाने की खबर दी थी, लेकिन इराकी अधिकारियों ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि दूसरा सीक्रेट ठिकाना भी मौजूद था। अधिकारियों ने कहा कि यह ठिकाना अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जून 2025 में हुई 12 दिन की लड़ाई से पहले ही बनाया जा चुका था। एक क्षेत्रीय अधिकारी के मुताबिक इजराइल ने 2024 के आखिर में ही ऐसे सीक्रेट ठिकानों की तैयारी शुरू कर दी थी ताकि भविष्य के युद्धों में उनका इस्तेमाल किया जा सके। अमेरिका को थी इजराइली सीक्रेट ठिकाने की जानकारी कम से कम एक सीक्रेट अड्डे की जानकारी अमेरिका को जून 2025 या उससे पहले से थी। इससे माना जा रहा है कि अमेरिका ने इराक से यह बात छिपाई कि उसकी जमीन पर एक दुश्मन देश की सेना काम कर रही थी। इराकी सांसद वाद अल-कदू ने कहा कि इजराइल का इराक की जमीन पर सीक्रेट ठिकाने बनाना देश की संप्रभुता और इराकी लोगों के सम्मान का खुला उल्लंघन है। क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक इजराइल को भरोसा था कि वह इराक में सीक्रेट ठिकाना चला सकता है, क्योंकि वहां अमेरिका की मजबूत सैन्य मौजूदगी है। अधिकारियों ने कहा कि 2025 की लड़ाई और मौजूदा तनाव के दौरान अमेरिका ने इराक से अपने रडार बंद करवाए थे, ताकि अमेरिकी विमानों की जानकारी बाहर न जाए। इसकी वजह से इराक अपने इलाके में संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने के लिए काफी हद तक अमेरिका पर निर्भर हो गया। इस खुलासे ने इराक के लिए असहज सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला ये कि क्या इराकी सुरक्षा बलों को विदेशी सैन्य मौजूदगी की जानकारी नहीं थी? या फिर उन्हें पता था लेकिन उन्होंने नजरअंदाज किया? दोनों ही हालात से पता चलता है कि इराक अभी भी अपनी जमीन पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं रख पा रहा है। इराकी सेना के कमांडर बोले- मुझे पहले से शक था इराकी सेना के यूफ्रेट्स यूनिट के कमांडर मेजर जनरल अली अल-हमदानी ने कहा कि सेना को एक महीने पहले से रेगिस्तान में इजराइली मौजूदगी का शक था। वहां रहने वाले बेदुइन समुदाय के लोग कई हफ्तों से सेना को बता रहे थे कि रेगिस्तान में संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। लोगों ने हेलिकॉप्टरों की आवाजाही, सैनिकों की मौजूदगी और रेगिस्तान में बने अस्थायी ढांचे देखे थे। अली अल-हमदानी ने कहा कि सेना को शक था कि वहां इजराइली बल मौजूद हो सकते हैं, लेकिन सेना ने सीधे वहां जाने की बजाय दूर से निगरानी करना चुना। उन्होंने बताया कि इराकी सेना ने अमेरिकी अधिकारियों से भी जानकारी मांगी थी, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। इसके कुछ समय बाद जब चरवाहे अवाद ने खुद फोन कर बताया कि उसने एक हवाई पट्टी के आसपास सैनिक, हेलिकॉप्टर और तंबू देखे हैं, तब मामला और गंभीर हो गया। लेकिन कुछ ही समय बाद उसका संपर्क टूट गया। सेना जांच के लिए पहुंची, इजराइल ने हमला कर भगाया अवाद के परिवार ने दो दिन तक उसकी तलाश की। बाद में उन्हें उन बेदुइन लोगों के बारे में पता चला जिन्होंने उसकी हत्या देखी थी। अवाद के चचेरे भाई आमिर अल-शम्मारी ने कहा कि लोगों ने उन्हें बताया कि रेगिस्तान में अवाद जैसी एक जली हुई पिकअप गाड़ी पड़ी है, लेकिन डर के कारण कोई वहां जाने की हिम्मत नहीं कर रहा था। जब परिवार वहां पहुंचा तो उन्हें जली हुई गाड़ी और अवाद का शव मिला। परिवार ने उसकी खून से लथपथ तस्वीरें साझा कीं। उसका सिर और उंगलियां बुरी तरह जली हुई थीं। परिवार ने उसी जगह गाड़ी के पास एक साधारण कब्र बनाकर उसे दफना दिया। अली अल-हमदानी के मुताबिक अवाद की सूचना के अगले दिन इराकी सेना ने इलाके में जांच के लिए टुकड़ी भेजी। लेकिन जैसे ही सैनिक उस इलाके के करीब पहुंचे, उन पर हमला हो गया। एक सैनिक मारा गया, दो घायल हुए और सेना की गाड़ियों पर बमबारी की गई। इसके बाद सैनिकों को पीछे हटना पड़ा। सीनियर अधिकारियों ने जांच को धीमा करने की कोशिश की बगदाद में सीनियर अफसर समझ नहीं पा रहे थे कि हमला किसने किया। कुछ बड़े सैन्य अधिकारियों ने घटना को कम महत्व देकर जांच को धीमा कर दिया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से इराकी सेना ने सिर्फ इतना कहा कि ‘विदेशी फोर्स’ ने हमला किया और UNSC में शिकायत दर्ज कराई गई है। हालांकि अंदरूनी स्तर पर इराकी आर्मी चीफ जनरल अब्दुल-अमीर यारल्लाह ने अमेरिकी सेना से संपर्क किया। मेजर जनरल हमदानी और दो सीनियर अधिकारियों के मुताबिक अमेरिकी पक्ष ने कहा कि हमला अमेरिका ने नहीं किया। इसके बाद इराकी अधिकारियों को समझ आया कि यह इजराइल था। अली अल-हमदानी ने न्यूयॉर्क टाइम्स

कीड़े-मकौड़े की तरह रेंगते हुए मंत्री आवास पहुंचे प्रदर्शनकारी:लखनऊ में 69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का अनोखा प्रदर्शन

कीड़े-मकौड़े की तरह रेंगते हुए मंत्री आवास पहुंचे प्रदर्शनकारी:लखनऊ में 69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का अनोखा प्रदर्शन

69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों आज, सोमवार को शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी सड़क पर लेटते हुए मंत्री के आवास तक पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि हम लोग सरकार की नजर में कीड़े-मकौड़े हो चुके हैं। हमारी कहीं कोई सुनवाई नहीं है, इसलिए आज हम लोग कीड़ों की तरह रेंगते हुए मंत्री के आवास पर पहुंचे हैं। भीषण गर्मी की वजह से कई अभ्यर्थी बदहवास हो गए। पुलिस ने उन्हें पानी पिलाया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस प्रदर्शन को लेकर एक्स पर पोस्ट किया है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों का वीडियो पोस्ट करके लिखा। अखिलेश यादव का पोस्ट हूबहू पढ़िए- संविधान द्वारा दिये गये आरक्षण के अधिकार को मारनेवाली भाजपा का अंहकार आज अंदर-ही-अंदर बहुत खुश होगा कि सदियों से वंचित, शोषित, पीड़ित समाज आज भी उनके वर्चस्व के आगे दंडवत होकर याचना कर रहा है लेकिन अपने प्रभुत्व के घमंड में चूर भाजपाई और उनके संगी-साथी ये भी याद रखें कि जब आग्रह हार जाता है, तब इंसान सीमाएं लांघ जाता है। देखिए 3 तस्वीरें… अब हमारे अंदर सहन शक्ति नहीं बची बनारस से आए कैलाश नाथ मौर्या ने कहा कि हम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से बस यही कहना चाहते हैं कि हम अब अपना धैर्य खो चुके हैं। हमारे अंदर बिल्कुल भी सहन शक्ति नहीं बची है। हम लोग घर से हार चुके हैं और अब सरकार से भी उम्मीद नहीं रही है। यह अंतिम फरियाद है। सुनवाई नहीं हुई तो हम सभी अभ्यर्थी सामूहिक तौर पर आत्मदाह करेंगे। एक छोटी सी खेती है उसी से घर का खर्च चलता है। हम लोग अपने बच्चों को अच्छे शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं। सिस्टम की वजह से बेरोजगार घूम रहे हैं। हाईकोर्ट में जीतने के बाद भी हमें नौकरी नहीं मिली है। हमारी बात कोई सुनने को तैयार नहीं है। हर कोई हमारे बारे में उल्टा बोलता है। ओम प्रकाश राजभर हमारे मंत्री हैं, जिन्होंने कभी न्याय की बात नहीं की। राजभर कहते हैं कि यह 69000 शिक्षक भर्ती वाले जूता खाने के लायक हैं, यह कितना शर्मनाक बयान है। अगर नौकरी नहीं मिली तो हम लोग चंदा इकट्‌ठा करके ओमप्रकाश राजभर के खिलाफ प्रचार करेंगे और उन्हें चुनाव हरवायेंगे। दिल्ली तक भटकर रहे हैं, लेकिन न्याय नहीं मिल रहा है भीषण गर्मी में रोते गिड़गिड़ाते हुए नवलेश ने बताया कि जौनपुर से आए हैं। हम मुख्यमंत्री और पिछड़ों के मंत्री अनुप्रिया पटेल से कहना चाहते हैं कि हमें न्याय दिलाइए। हम उन्हीं के बच्चे हैं। पिछले कई सालों से लखनऊ और जौनपुर के चक्कर काट रहे हैं। अब मामला सुप्रीम कोर्ट चला गया है तो दिल्ली में भी भटकना पड़ रहा है। हम हाथ जोड़कर सरकार से यह कहना चाहते हैं कि कल सुप्रीम कोर्ट में हमारी तारीख लगी है। अपना वकील जरूर भेजें। अगर हमारी सुनवाई नहीं हुई तो जान दे देंगे। इस भर्ती के अभ्यर्थियों में किसी ने अपनी मां खोई है तो किसी ने अपना बाप खोया है। ‘पिछड़ों-दलितों की हालत कीड़े-मकौड़े की तरह हो गई’ देवरिया से आए धनंजय गुप्ता ने कहा कि हम लोग आज मंत्री संदीप सिंह के आवास पर कीड़ों की तरह रेंगते हुए आए हैं। उनको बताने आए हैं कि आपकी सरकार में पिछड़ा और दलितों की हालत कीड़े-मकौड़े की तरह हो गई है। हम इतना चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में सरकारी अधिवक्ता पेश हो जाए। 30 से ज्यादा डेट लगी और किसी में भी सरकारी अधिवक्ता करना पहुंचना बेहद शर्मनाक है। फैसला क्या होगा यह तो कोर्ट तय करेगा मगर कम से कम सरकार अपना वकील भेजे और केस आगे बढ़े। नौकरी न मिलने से हम लोग कीड़े-मकौड़े की जिंदगी जी रहे हैं। कहीं कोई सम्मान नहीं है। कल 19 में को सुप्रीम कोर्ट में हमारी तारीख लगी है। अगर सरकार का नुमाइंदा उपस्थित हो जाए तो बहुत मेहरबानी होगी। तपती हुई धूप में हम सड़क पर लेटे हैं, तो यह हमारी मजबूरी है। कोई खुशी से नहीं लेटा है। शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपा 69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप से मुलाकात की। उन्हें ज्ञापन सौंपा। अभ्यर्थियों का कहना है कि मंत्री संदीप सिंह की तरफ से आश्वासन मिला है कि सरकारी अधिवक्ता कल सुप्रीम में मौजूद रहेगा। —————- यह खबर भी पढ़िए… लखनऊ में ढाबा संचालक की हत्या:झगड़े का वीडियो बनाने पर दबंगों ने सिर में मारी गोली, 3 संदिग्ध हिरासत में लखनऊ में दबंगों ने एक ढाबा संचालक के सिर में गोली मारकर हत्या कर दी। उसने ढाबे के सामने रोड पर लड़ाई कर रहे युवकों का वीडियो बनाया था। इससे नाराज होकर दबंग युवकों ने घटना को अंजाम दिया। ढाबा संचालक को गंभीर हालत में ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी ऑपेरशन के दौरान मौत हो गई। पूरी खबर पढ़ें

पेट रहेगा साफ, त्वचा करेगी ग्लो… गर्मी में रोज खाएं ये फल, डॉक्टर ने बताए चौंकाने वाले लाभ

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Last Updated:May 18, 2026, 12:36 IST गर्मी का मौसम आते ही शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी हो जाता है. ऐसे में खरबूजा एक ऐसा फल है, जो न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है बल्कि पाचन, त्वचा, दिल और आंखों की सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. डॉक्टरों के मुताबिक इसमें मौजूद पानी, फाइबर और विटामिन शरीर को दिनभर ऊर्जा देने में मदद करते हैं. गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक और दिनभर तरोताजा रखने के लिए खरबूजा खाना बेहद फायदेमंद माना जाता है. खासतौर पर सुबह के समय इसका सेवन शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है. वहीं अगर आप इसे दोपहर में खाते हैं, तो यह शरीर को ज्यादा ऊर्जा देने का काम करता है और तेज गर्मी से राहत दिलाने में भी मददगार साबित होता है. गांवों में पुराने समय से ही खेतों में काम करने वाले लोग खरबूजा खाते रहे हैं. माना जाता है कि यह शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता और लंबे समय तक ठंडक बनाए रखता है. गर्म हवाओं और तेज धूप के बीच खरबूजा शरीर को तरोताजा रखने वाला प्राकृतिक फल माना जाता है. मेडिकल कॉलेज सुल्तानपुर में कार्यरत आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि खरबूजा एक प्राकृतिक फल है, जो गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक पहुंचाने का काम करता है. तेज धूप और ज्यादा पसीना निकलने की वजह से इस मौसम में शरीर में जल्दी थकावट महसूस होने लगती है और लू लगने का खतरा भी बढ़ जाता है. ऐसे में खरबूजा शरीर को हाइड्रेट रखने और गर्मी से राहत दिलाने के लिए एक बेहतर उपाय माना जाता है. डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव आगे बताते हैं कि खरबूजा पाचन के लिए भी बेहद लाभकारी माना जाता है, क्योंकि इसमें पर्याप्त मात्रा में फाइबर पाया जाता है. फाइबर पेट को साफ रखने और पाचन क्रिया को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है. गर्मियों में लोग अक्सर भारी और तला-भुना भोजन खा लेते हैं, जिससे कब्ज और गैस जैसी समस्याएं होने लगती हैं. ऐसे समय में खरबूजा पेट को हल्का और ठंडा बनाए रखने में मदद करता है, जिससे शरीर को आराम महसूस होता है. Add News18 as Preferred Source on Google खरबूजा खाने से भोजन जल्दी पचने में मदद मिलती है और पेट में होने वाली जलन भी कम होती है. अगर इसे सुबह खाली पेट सीमित मात्रा में खाया जाए, तो पेट साफ रहता है और पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है. हालांकि, खरबूजा खाने के तुरंत बाद पानी पीने से बचना चाहिए. ऐसा करने से पेट खराब हो सकता है और लूज मोशन जैसी समस्या भी हो सकती है. इसलिए इसे खाने के कुछ समय बाद ही पानी पीना बेहतर माना जाता है. आज के समय में बढ़ता वजन लोगों के लिए बड़ी समस्या बन चुका है. ऐसे में खरबूजा उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है, जो वजन कम करना चाहते हैं. इसमें कैलोरी की मात्रा कम होती है, जिससे यह वजन घटाने में मददगार साबित होता है. गर्मियों में भारी स्नैक्स खाने की बजाय खरबूजा खाने से शरीर को जरूरी पोषण मिलता है और अतिरिक्त चर्बी बढ़ने का खतरा भी कम रहता है. सुबह नाश्ते में या फिर शाम को हल्की भूख लगने पर खरबूजा खाना फायदेमंद माना जाता है. इसमें मौजूद फाइबर लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है और भूख को कंट्रोल करता है. खरबूजा केवल शरीर को ठंडक पहुंचाने का काम ही नहीं करता, बल्कि त्वचा के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें विटामिन-ए और विटामिन-सी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो त्वचा को स्वस्थ, मुलायम और चमकदार बनाए रखने में मदद करते हैं. गर्मियों में तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण त्वचा अक्सर रूखी और बेजान हो जाती है. ऐसे में नियमित रूप से खरबूजा खाने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती और त्वचा में नमी बनी रहती है, जिससे चेहरा ताजा और ग्लोइंग नजर आता है. खरबूजा एक ऐसा फल है, जो दिल और आंखों की सेहत के लिए भी बेहद लाभकारी माना जाता है. इसमें पोटैशियम पाया जाता है, जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है और हृदय को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होता है. इसके साथ ही खरबूजे में मौजूद विटामिन-ए आंखों की रोशनी के लिए जरूरी माना जाता है. गर्मियों में शरीर जल्दी थक जाता है और कमजोरी महसूस होने लगती है, लेकिन खरबूजा शरीर को ऊर्जा देने और ताजगी बनाए रखने में मदद करता है. गर्मी के मौसम में शरीर से लगातार पसीना निकलता रहता है, जिससे डिहाइड्रेशन की समस्या होने लगती है. खरबूजा लगभग 90 प्रतिशत पानी से भरपूर होता है, इसलिए यह शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखने में मदद करता है. जो लोग दिनभर बाहर काम करते हैं, उनके लिए यह फल बेहद फायदेमंद माना जाता है. खरबूजा खाने से शरीर में ताजगी बनी रहती है और बार-बार प्यास भी नहीं लगती. यही वजह है कि डॉक्टर गर्मियों में पानी से भरपूर फलों का सेवन करने की सलाह देते हैं. खरबूजा खाने का सबसे अच्छा तरीका यह माना जाता है कि इसे ताजा काटकर तुरंत खाया जाए, ताकि इसके सभी पोषक तत्व शरीर को पूरी तरह मिल सकें. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

महवश ने चहल संग रिश्ते की अफवाहों पर तोड़ी चुप्पी:कहा- युजवेंद्र को एक अच्छे दोस्त की जरूरत थी, मैं दोस्ती अच्छे से निभाती हूं

महवश ने चहल संग रिश्ते की अफवाहों पर तोड़ी चुप्पी:कहा- युजवेंद्र को एक अच्छे दोस्त की जरूरत थी, मैं दोस्ती अच्छे से निभाती हूं

एक्ट्रेस और कंटेंट क्रिएटर आरजे महवश ने क्रिकेटर युजवेंद्र चहल के साथ अपने रिश्ते को लेकर चल रही अफवाहों पर रिएक्शन दिया। महवश ने कहा कि उनके और चहल के बीच सिर्फ दोस्ती थी। हाल ही में दोनों ने इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को अनफॉलो किया था, जिसके बाद चर्चाएं तेज हो गईं। इस पर महवश ने पिंकविला को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘लोगों का यह है ना कि चीजों को बहुत बड़ा बना देते हैं। इतनी कोई बड़ी बात नहीं होती, जब आप खुद उस चीज से गुजर रहे होते हो। दोस्तों में बहस हो गई, अनफॉलो हो गया और बात खत्म। इसमें इतनी बड़ी बात है ही नहीं।’ उन्होंने कहा, ‘जिन दोस्तों के साथ आपने छोटी-छोटी बातों पर हंसते हुए वक्त बिताया हो, उनके लिए दिल में बैर नहीं रखना चाहिए। मैं हमेशा उन्हें ऑल द बेस्ट विश करूंगी और मेरी शुभकामनाएं हमेशा उनके साथ रहेंगी।’ महवश बोलीं- मैं दोस्ती बहुत अच्छे से निभाती हूं जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी और चहल की दोस्ती से बढ़कर भी कुछ था, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। महवश ने कहा, ‘नहीं, ऐसा कुछ नहीं था। मैं दोस्ती बहुत अच्छे से निभाती हूं। उस समय उन्हें एक अच्छे दोस्त की बहुत जरूरत थी।’ महवश ने चहल के मेंटल स्ट्रगल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘जैसा कि उन्होंने अपने पॉडकास्ट में बताया था कि उनके मन में सुसाइडल थॉट्स आ रहे थे। उस समय हम सब कोशिश कर रहे थे कि किसी तरह उनका IPL सीजन अच्छे से निकल जाए। हम सबने मिलकर उनका जितना साथ दे सकते थे, दिया।’ उन्होंने यह भी कहा, ‘मेरे लिए बस इतना था कि अपने दोस्त के साथ खड़े रहना है। हम ऐसे वक्त में उनके साथ थे।’ महवश ने यह भी साफ किया कि अगर आगे उनकी और चहल की मुलाकात होगी, तो सब पहले जैसा ही रहेगा। उन्होंने कहा, ‘हम वैसे ही मिलेंगे जैसे हमेशा मिलते थे। जिन दोस्तों के साथ आपने चाय पर बातें की हों और हर तरह के मजाक किए हों, उनसे दिल में क्या ही रखोगे।’ चहल ने रिश्ते की अफवाहों को पहले ही नकारा महवश से पहले चहल रिलेशनशिप की अफवाहों को खारिज कर चुके हैं। राज शमानी के पॉडकास्ट में उन्होंने कहा था कि उनके और महवश के बीच सिर्फ दोस्ती है। उन्होंने यह भी बताया था कि इन अफवाहों की वजह से महवश को ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा, जिसे लेकर उन्हें काफी बुरा लगा। महवश ने अपने पहले प्यार का जिक्र किया हाल ही में दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में महवश ने कहा कि जो पहला प्यार होता है, वो हमेशा आपको याद रहता है। वो एक इंटेंसिटी थी कि जब मैं अपनी स्कूटी लेके उसकी कोचिंग के बाहर जाकर खड़े हुआ करती थी कि वह बस निकलेगा तो बस देख लूंगी। उन्होंने आगे कहा था कि सर्दियों में वह सुबह जल्दी उठ जाती थीं, क्योंकि उस लड़के की स्कूल बस उनके घर के सामने से गुजरती थी। वह सुबह 6 बजे अपने स्कूल जाने से पहले बाहर खड़ी होकर बस का इंतजार करती थीं, सिर्फ एक बार उसे देखने के लिए। बातचीत के दौरान महवश ने एक और मजेदार किस्सा भी शेयर किया। उन्होंने बताया कि एक दूसरा लड़का बाइक लेकर उनके घर के आसपास चक्कर लगाया करता था। जब उनके भाई को इस बारे में पता चला, तो वह उस लड़के को घर ले आए। उसके बाद उस लड़के से एक लेटर लिखवाया गया, जिसमें उसने वादा किया कि वह दोबारा उस घर या मोहल्ले के आसपास नहीं आएगा। बाद में उस लेटर पर लड़के और उसके माता-पिता के भी साइन करवाए गए।