गर्मी में बार-बार गला सूखना, नॉर्मल या किस बीमारी का संकेत? ENT एक्सपर्ट ने दी ये चेतावनी

Last Updated:May 13, 2026, 19:30 IST Frequent Dry Throats Causes: अगर गला सूखने की समस्या बार-बार हो रही है और लंबे समय तक बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए. ये सिर्फ गर्मी का साइड इफेक्ट नहीं होता है, बल्कि गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत भी हो सकता है. ख़बरें फटाफट गर्मी के मौसम में ज्यादा प्यास लगना और गला सूखना आम बात होती है. दरअसल, ऐसा तेज धूप और गर्म हवाओं के प्रभाव से होता है, जिसमें से शरीर जल्दी पानी खोने लगता है. लेकिन अगर आपका गला बार-बार सूख रहा है और पानी पीने के बाद भी आराम नहीं मिल रहा, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. मेडफर्स्ट ईएनटी सेंटर में कंसल्टेंट, डॉक्टर राजेश भारद्वाज बताते हैं कि गला सूखना कई बार सिर्फ गर्मी का असर होता है, लेकिन कुछ स्थितियों में यह शरीर में चल रही किसी बीमारी का संकेत भी हो सकता है. इसलिए लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है. बार-बार गला सूखने का कारण गर्मी का साइड इफेक्टगर्मियों में शरीर से बहुत ज्यादा पसीना निकलता है. पसीने के साथ शरीर का पानी और जरूरी मिनरल्स भी कम होने लगते हैं. जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है. इसका सबसे आम संकेत गला और मुंह सूखना होता है. इसके अलावा व्यक्ति को कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द और थकान जैसी परेशानियां भी महसूस हो सकती हैं. कई लोगों को बार-बार पानी पीने की इच्छा होती है, लेकिन फिर भी राहत नहीं मिलती. ऐसी स्थिति में शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी होता है. इसके लिए दिनभर पर्याप्त पानी पीना चाहिए। साथ ही नींबू पानी, नारियल पानी, छाछ, जूस और दूसरे तरल पदार्थ भी लेने चाहिए. डायबिटीज का संकेतबार-बार गला सूखना डायबिटीज यानी शुगर की बीमारी का संकेत भी हो सकता है. जब शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है, तो व्यक्ति को ज्यादा प्यास लगने लगती ह. इसके साथ बार-बार पेशाब आना, जल्दी थक जाना और अचानक वजन कम होना जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं. अगर किसी व्यक्ति को ये समस्याएं लगातार महसूस हो रही हैं, तो उसे डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए. समय रहते शुगर की पहचान होने से बीमारी को कंट्रोल करना आसान हो जाता है. थायराइड बढ़ने का असर थायरॉइड की बीमारी होने पर भी कई लोगों को यह परेशानी होती है. थायरॉइड लार ग्रंथियों के कामकाज को प्रभावित करता है, जो लार उत्पादन को कंट्रोल करती हैं. जब ये ग्रंथियां खराब हो जाती हैं, तो वे पर्याप्त लार नहीं बना पातीं, जिससे सूखे और फटे होंठ, बोलने और निगलने में कठिनाई जैसी समस्याएं होने लगती है. ये भी हैं कारणकुछ लोगों का गला इसलिए भी सूखता है क्योंकि वे मुंह से सांस लेते हैं. यह समस्या खासकर उन लोगों में ज्यादा होती है जिन्हें खर्राटे आते हैं या नाक बंद रहने की परेशानी रहती है. रात में एसी में सोने से भी कई बार सुबह उठने पर गला सूखा महसूस होता है. इसके अलावा एलर्जी, ज्यादा कैफीन का सेवन, धूम्रपान और स्ट्रेस के कारण भी ऐसा हो सकता है. अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो ईएनटी यानी कान, नाक और गला विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
जैसे ही कांग्रेस ने केरल में मुख्यमंत्री का चेहरा तय किया, सतीसन, चेन्निथला के घरों के बाहर समर्थक जमा हो गए भारत समाचार

आखरी अपडेट:13 मई, 2026, 19:17 IST दोनों नेता शीर्ष पद के लिए दावा करने वालों में सबसे आगे हैं, जिससे पार्टी के भीतर आंतरिक प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला के आवास पर जुटे समर्थक। (स्क्रीन हड़पना) बुधवार को परवूर में वीडी सतीसन के कार्यालय के बाहर समर्थक बड़ी संख्या में एकत्र हुए, जबकि तिरुवनंतपुरम में रमेश चेन्निथला के आवास के बाहर भी इसी तरह के दृश्य सामने आए, क्योंकि कांग्रेस अपने केरल के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा करने के करीब पहुंच गई थी। दोनों नेता शीर्ष पद के लिए दावा करने वालों में सबसे आगे हैं, जिससे पार्टी के भीतर आंतरिक प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। वीडियो | तिरुवनंतपुरम, केरल: समर्थक कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला के आवास पर एकत्र हुए क्योंकि पार्टी आलाकमान केरल के मुख्यमंत्री पर अपने फैसले की घोषणा करने की तैयारी कर रहा है। pic.twitter.com/0sJJQlSLlz– प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (@PTI_News) 13 मई 2026 कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं के आवास के बाहर एकत्र हुए लोगों में कई समर्थक विधायक भी शामिल थे। स्थानों के दृश्यों में दोनों नेताओं के समर्थन में बड़ी भीड़ जमा होती दिख रही है। #घड़ी | कोच्चि, केरलम | परवूर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विजेता उम्मीदवार वीडी सतीसन के समर्थक कोच्चि में उनके आवास पर इकट्ठा हुए हैं क्योंकि केरल के सीएम चेहरे का फैसला करने के लिए दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान की बैठकें चल रही हैं। pic.twitter.com/a2RdR28ebL– एएनआई (@ANI) 13 मई 2026 केरल विधानसभा चुनाव में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की निर्णायक जीत के 10 दिन बाद भी कांग्रेस के मुख्यमंत्री पद के चयन पर जारी अनिश्चितता के बीच समर्थन का यह प्रदर्शन सामने आया है। कई दौर की मंत्रणा के बावजूद नेतृत्व अब तक किसी नाम को अंतिम रूप देने में विफल रहा है। इससे पहले, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने नई दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ अंतिम दौर की चर्चा की, यह बैठक लगभग 40 मिनट तक चली। बातचीत के बाद कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई, लेकिन पार्टी सूत्रों ने संकेत दिया कि बुधवार रात तक कोई फैसला हो सकता है. दौड़ कई प्रमुख दावेदारों तक सीमित हो गई है, जिनमें निवर्तमान विधानसभा में विपक्ष के नेता सतीसन, वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला और एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल शामिल हैं, जिनके बारे में माना जाता है कि उन्हें विधायकों के एक वर्ग से महत्वपूर्ण समर्थन प्राप्त है। पार्टी कार्यकर्ताओं के जमीनी स्तर के दबाव ने भी निर्णय में देरी करने में भूमिका निभाई है, विभिन्न नेताओं के समर्थक खुले तौर पर पूरे केरल में उनके पक्ष में लामबंद हो रहे हैं। यूडीएफ के भीतर सहयोगी कथित तौर पर सतीसन का समर्थन कर रहे हैं, जिन्हें जमीन पर कैडरों के बीच भी मजबूत समर्थन प्राप्त है। नई सरकार का नेतृत्व कौन करेगा, इस पर अंतिम निर्णय लेने से पहले राजनीतिक स्थिति का आकलन करने के लिए कांग्रेस आलाकमान राज्य के नेताओं और पूर्व राज्य इकाई प्रमुखों के साथ लगातार परामर्श कर रहा है। (पीटीआई से इनपुट्स के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : केरल, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया जैसे ही कांग्रेस ने केरल में मुख्यमंत्री का चेहरा तय किया, सतीसन, चेन्निथला के घरों के बाहर समर्थक जमा हो गए अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार(टी)वीडी सतीसन(टी)रमेश चेन्निथला(टी)केरल कांग्रेस नेतृत्व(टी)कांग्रेस की आंतरिक प्रतिस्पर्धा(टी)केरल की राजनीति(टी)मुख्यमंत्री पद की दौड़(टी)परवूर समर्थक
कटहल आम का मिक्स अचार रेसिपी: गरमा गरम किचन में देखने पर क्या आता है आलस? घर में कटहल-आम का मिक्स अचार, सब्जी खाना जायेंगे भूल

सामग्री: 250 कच्ची ग्राम कटहल, 2 बड़ी काली मिर्च, 1 बड़ा काली मिर्च पाउडर, 1 छोटी काली मिर्च पाउडर, 2 बड़ी काली मिर्च पाउडर, 1 बड़ी काली मिर्च पाउडर, 1 छोटी चम्मच मेथी दाना, 1 छोटी काली मिर्च कलौंजी छवि: फ्रीपिक 1 छोटा चम्मच तेल, आधा छोटा चम्मच तेल, 1 कप छोटा चम्मच तेल। बता दें कि यह अचार लंबे समय तक खराब नहीं होता और दाल-चावल, पराठे या साधारण रोटी के साथ भी खाने का मजा डबल कर देता है। छवि: फ्रीपिक अचार बनाने की आसान विधि: सबसे पहले कटहल को छोटी-छोटी कसरत में काट लें। अब कच्चे आम को भी ढोकर छोटे टुकड़ों में काट लें। ध्यान रखें कि दोनों में पानी बिल्कुल न रहे, बाकी अचार जल्दी खराब हो सकते हैं। छवि: एआई अब कटहल में एक बड़ा पोज़िशन और आम मिलाप। नमक और हल्दी करीब 2 से 3 घंटे के लिए रखें। इससे कटहल लिटिल नर हो जाएगा और आम का पानी भी निकल जाएगा। छवि: फ्रीपिक इसके बाद एक पैन में सौंफ, मेथी, राई और को एक पैन सा भून लें। ठंडा होने पर उदाहरण दारारा पीस लें। अब कटहल और आम में लाल मिर्च, भुने हुए टुकड़े और हिंग मॉड्यूल अच्छी तरह से मिक्स करें। छवि: एआई ऊपर से जैतून का तेल गर्म करके ठंडा करें और अचार में मिलायें। अब इस आचार्य को साफ और आकर्षक कांच के जार में भर दें। 3 से 4 दिन तक धूप। बीच-बीच में मछली से शौकीन रहना। छवि: एआई कुछ ही दिनों में स्वादिष्ट कटहल-आम का मिक्स अचार तैयार हो जाएगा। अचार में बिल्कुल भी पानी नहीं डालना चाहिए। हमेशा मछली और सासा का उपयोग करें। छवि: एआई सरसों का तेल अच्छी तरह गर्म करके ठंडा करने के बाद ही डालें। धूप से अचार का स्वाद और भी बढ़ जाता है। छवि: फ्रीपिक कटहल-आम का यह मिक्स अचार इतना टेस्टी लगता है कि लोग बार-बार मांगकर खाएंगे। अगर गर्म में रोज-रोज सब्जी बनाने का मन नहीं है, तो यह अचार आपकी थाली का स्वाद आसानी से बढ़ा सकता है. छवि: एआई
पालक की पूरी रेसिपी: सिर्फ 5 मिनट में हलवाई जैसी खस्ता पालक पूरी, एक खास ट्रिक से फूलेगी पूरी जैसी, आसान विधि

13 मई 2026 को 19:03 IST पर अपडेट किया गया पलक की पूरी रेसिपी: अगर आप भी अपने नामांकन में कुछ नया और अलग करना चाहते हैं, तो पालक पूरी तरह से सर्वश्रेष्ठ पद पर आसीन हो सकता है। यह सिर्फ सेहत के लिए ही नहीं बल्कि घर में बच्चों से लेकर बड़े सबको बहुत पसंद करना है। ये पू डांस चाय के साथ बहुत खूबसूरत लगती हैं। पालक, अदरक और हरी मिर्च के पत्तेपन के साथ यह रेसिपी झटपट तैयार हो जाती है। आइए, इसकी क्विक रेसिपी आपको बताएंगे। अनुसरण करना : सबसे पहले 250 ग्राम धुले हुए पालक को 2-3 मिनट ब्लांच कर लें। ठंडा होने पर अदरक और हरी मिर्च के साथ मिक्सचर पेस्ट बनाएं। छवि: फ्रीपिक एक पोर में 2 कप आटे का आटा गूंथने के लिए लें। इसमें पालक का पेस्ट, जीरा, अजमायन, नमक और 2 मसाले के तेल का मोयन डाला गया। छवि: फ्रीपिक सभी अनीचों को अच्छे से पुराने कड़वे- कड़वे गूंथे आटे लें. चाहिए हो तो ही पानी थोड़ा-थोड़ा करके 15 मिनट के लिए छोड़ दें। छवि: फ्रीपिक एसोसिएट्स के छोटे लो डिस्प्ले और उन पर डिस्प्ले ऑयल प्लग गोल आकार की पुरियां बेलना कर देना शुरू कर देते हैं। छवि: फ्रीपिक गर्म तेल में पूरियों को नापसंद किया गया। कलछी से प्रकाश दबाते हुए दोनों तरफ से सुन्दर और फूलने तक तल लें। छवि: फ्रीपिक इन कुरकुरी पूरियों को आलू की सब्जी या रायते के साथ बनाएं। अधिक मात्रा में कुरकुरेपन के लिए आटे में आधी सूजी भी मिला सकते हैं। छवि: फ्रीपिक द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 13 मई 2026 19:03 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)पालक पूरी(टी)पालक पूरी रेसिपी(टी)झटपट नाश्ता(टी)स्वस्थ हिंदी रेसिपी(टी)क्रिस्पी पुरी टिप्स(टी)भारतीय स्नैक्स(टी)पालक की पूरी कैसे बनाएं
पेट फूलना: पेट फूलने की समस्या से परेशान हैं? अपनाएं ये आसान तरीके, मिनटों में मिलेगा आराम

गैस कैसे कम करें: कई बार थकावट ज्यादा होती है या फिर उपभोक्ता-पीन की वजह से पेट फूल जाता है, यानी ‘ब्लोटिंग’ जो आज भी एक आम समस्या बन जाती है। पेट में भारीपन, कसाव और गैस की वजह से न सिर्फ फर्क पड़ता है, बल्कि कई बार ये पेट फूलना भी होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पाचन संबंधी एसोसिएट्स जैसे खान-पान की गलत धारणा और तनाव के कारण ब्लोटिंग हो सकती है। अगर आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो कुछ आसान घरेलू उपाय और स्टाइल स्टाइल में बदलाव के जरिए इनसे संबंधित पा सकते हैं। तुरंत राहत के लिए अपनाएं ये उपाय खाने के बाद 10-15 मिनट के लिए चलें। वजन घटाने या योग से पेट में फंसे हवा के बाहर भोजन में मदद मिलती है और पाचन सुजाता होती है। कब्ज का कारण पेट में ब्लोटिंग होना बहुत ही खतरनाक है। अपनी पीठ के बल लेटकर पेट पर क्लॉक मोशन में हाथ से मसाज करने से बाउल मूवमेंट बेहतर होता है। स्ट्रेस ब्लोटिंग का एक बड़ा कारण है। गर्म पानी से शरीर को आराम मिलता है और पेट के पोषक तत्वों को भी आराम मिलता है। अंतर्वस्तु में धीरे-धीरे हरा-भरा की मात्रा बढ़ानी चाहिए। अचानक बहुत ज्यादा खाने से गैस बन सकती है, इसलिए फल और ड्रॉप को धीरे-धीरे शामिल करें। इसके साथ ही, दिन भर में पर्याप्त पानी सुनिश्चित करें। सोडायुक्त या फिजी ड्रिंक्स की जगह सादा पानी पियें, क्योंकि सोडा और सॉफ्ट ड्रिंक्स में गैस बेची जाती है। ज़्यादातर नमक और फ़ीट वाली चीज़ें ब्लोटिंग को बढ़ावा दे रही हैं। नमक शरीर में ‘वोटर रिस्क’ पाया जाता है, जिससे पेट फूला हुआ महसूस होता है। वहीं, पचने में ज्यादातर समय लगता है, जो भारीपन का कारण बनता है। इसके अलावा, गेट हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए इसमें शामिल प्रोबायोटिक्स (जैसे दही या उद्योग) शामिल हैं, जो पेट के अच्छे आलोचकों को बढ़ावा देते हैं। इन छोटे-छोटे बदलावों को अपनाकर आप ब्लोटिंग से बच सकते हैं, साथ ही अपने पाचन तंत्र को भी मजबूत बना सकते हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)पेट फूलने के उपाय(टी)गैस को कैसे कम करें(टी)पाचन स्वास्थ्य युक्तियाँ(टी)पेपरमिंट चाय के फायदे(टी)आईबीएस से प्राकृतिक रूप से राहत
टाटा मोटर्स CV का मुनाफा 33% बढ़ा:चौथी तिमाही में यह ₹1,793 करोड़ रहा, रेवेन्यू 19% उछला; कंपनी ₹4 डिविडेंड देगी

टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स को FY26 की चौथी तिमाही में ₹1,793 करोड़ का कॉन्सोलिडेटेड मुनाफा हुआ है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को ₹1,340 करोड़ का मुनाफा हुआ था। यानी सालाना आधार पर कंपनी का मुनाफा 33.8% बढ़ा है। यह ग्रोथ बिक्री में बढ़ोत्तरी और बेहतर मार्जिन की वजह से मिली है। चौथी तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू भी सालाना आधार पर 19.3% बढ़कर 26,098 करोड़ रुपए रहा। पिछले साल की सामान तिमाही में यह 21,863 करोड़ रुपए रहा था। मुनाफे में आई इस तेजी को देखते हुए बोर्ड ने शेयरहोल्डर्स के लिए 4 रुपए प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड का भी ऐलान किया है। Q4 में 1.32 लाख कमर्शियल गाड़ियां बेचीं टाटा मोटर्स ने चौथी तिमाही में 1.32 लाख कमर्शियल गाड़ियां बेचीं, जो पिछले साल के मुकाबले 25% ज्यादा हैं। पूरे वित्त वर्ष 2026 की बात करें तो कुल बिक्री 14% बढ़कर 4.28 लाख यूनिट रही। घरेलू बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी (VAHAN मार्केट शेयर) 35.7% रही। इसमें हैवी कमर्शियल व्हीकल (HCV) सेगमेंट में कंपनी का दबदबा सबसे ज्यादा 55% रहा। इस साल 17 नेक्स्ट-जेनरेशन ट्रक लॉन्च किए कंपनी ने इस साल 17 नेक्स्ट-जेनरेशन ट्रक लॉन्च किए हैं। इसके अलावा भारत के नए लेबर कोड लागू होने की वजह से ग्रेच्युटी और अन्य प्रावधानों में बदलाव का असर भी वित्तीय नतीजों पर दिखा है। मार्च तिमाही में इसके चलते 214 करोड़ रुपए का नेट रिवर्सल दर्ज किया गया, जिसे अनुमानों में बदलाव के तौर पर दिखाया गया है। कॉन्सोलिडेटेड मुनाफा मतलब पूरे ग्रुप का प्रदर्शन कंपनियों के रिजल्ट दो भागों में आते हैं- स्टैंडअलोन और कॉन्सोलिडेटेड। स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है। जबकि, कॉन्सोलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है। यहां, टाटा मोटर्स की जगुआर लैंड रोवर जैसी 100 से ज्यादा सब्सिडियरी और एसोसिएट कंपनियां हैं। इन सभी के फाइनेंशियल रिपोर्ट को मिलाकर कॉन्सोलिडेटेड कहा जाएगा। वहीं, अगर जगुआर लैंड रोवर के अलग रिजल्ट को स्टैंडअलोन कहा जाएगा। क्या होता है EBITDA और EBIT? EBITDA: इसका मतलब है- अर्निंग बिफोर इंटरेस्ट, टैक्स, डेप्रिसिएशन एंड अमोरटाइजेशन। यह बताता है कि ब्याज, टैक्स और अन्य खर्चों से पहले कंपनी ने अपने मुख्य कामकाज से कितना कमाया। EBIT: इसे ‘ऑपरेटिंग प्रॉफिट’ भी कहते हैं। यह कंपनी के कामकाज से होने वाली कुल कमाई को दर्शाता है, जिसमें से केवल ब्याज और टैक्स को नहीं घटाया गया होता। नेट कैश पॉजिटिव: जब किसी कंपनी के पास उसके कुल कर्ज (डेट) से ज्यादा कैश या निवेश मौजूद हो, तो उसे नेट कैश पॉजिटिव कहा जाता है।
टाटा मोटर्स CV का मुनाफा 33% बढ़ा:चौथी तिमाही में यह ₹1,793 करोड़ रहा, रेवेन्यू 19% उछला; कंपनी ₹4 डिविडेंड देगी

टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स को FY26 की चौथी तिमाही में ₹1,793 करोड़ का कॉन्सोलिडेटेड मुनाफा हुआ है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को ₹1,340 करोड़ का मुनाफा हुआ था। यानी सालाना आधार पर कंपनी का मुनाफा 33.8% बढ़ा है। यह ग्रोथ बिक्री में बढ़ोत्तरी और बेहतर मार्जिन की वजह से मिली है। चौथी तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू भी सालाना आधार पर 19.3% बढ़कर 26,098 करोड़ रुपए रहा। पिछले साल की सामान तिमाही में यह 21,863 करोड़ रुपए रहा था। मुनाफे में आई इस तेजी को देखते हुए बोर्ड ने शेयरहोल्डर्स के लिए 4 रुपए प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड का भी ऐलान किया है। FY26 की चौथी तिमाही में टाटा मोटर्स CV का मुनाफा 33% बढ़ा सालाना आधार पर तिमाही आधार पर नोट: आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। Q4 में 1.32 लाख कमर्शियल गाड़ियां बेचीं टाटा मोटर्स ने चौथी तिमाही में 1.32 लाख कमर्शियल गाड़ियां बेचीं, जो पिछले साल के मुकाबले 25% ज्यादा हैं। पूरे वित्त वर्ष 2026 की बात करें तो कुल बिक्री 14% बढ़कर 4.28 लाख यूनिट रही। घरेलू बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी (VAHAN मार्केट शेयर) 35.7% रही। इसमें हैवी कमर्शियल व्हीकल (HCV) सेगमेंट में कंपनी का दबदबा सबसे ज्यादा 55% रहा। इस साल 17 नेक्स्ट-जेनरेशन ट्रक लॉन्च किए कंपनी ने इस साल 17 नेक्स्ट-जेनरेशन ट्रक लॉन्च किए हैं। इसके अलावा भारत के नए लेबर कोड लागू होने की वजह से ग्रेच्युटी और अन्य प्रावधानों में बदलाव का असर भी वित्तीय नतीजों पर दिखा है। मार्च तिमाही में इसके चलते 214 करोड़ रुपए का नेट रिवर्सल दर्ज किया गया, जिसे अनुमानों में बदलाव के तौर पर दिखाया गया है। कॉन्सोलिडेटेड मुनाफा मतलब पूरे ग्रुप का प्रदर्शन कंपनियों के रिजल्ट दो भागों में आते हैं- स्टैंडअलोन और कॉन्सोलिडेटेड। स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है। जबकि, कॉन्सोलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है। यहां, टाटा मोटर्स की जगुआर लैंड रोवर जैसी 100 से ज्यादा सब्सिडियरी और एसोसिएट कंपनियां हैं। इन सभी के फाइनेंशियल रिपोर्ट को मिलाकर कॉन्सोलिडेटेड कहा जाएगा। वहीं, अगर जगुआर लैंड रोवर के अलग रिजल्ट को स्टैंडअलोन कहा जाएगा। क्या होता है EBITDA और EBIT? EBITDA: इसका मतलब है- अर्निंग बिफोर इंटरेस्ट, टैक्स, डेप्रिसिएशन एंड अमोरटाइजेशन। यह बताता है कि ब्याज, टैक्स और अन्य खर्चों से पहले कंपनी ने अपने मुख्य कामकाज से कितना कमाया। EBIT: इसे ‘ऑपरेटिंग प्रॉफिट’ भी कहते हैं। यह कंपनी के कामकाज से होने वाली कुल कमाई को दर्शाता है, जिसमें से केवल ब्याज और टैक्स को नहीं घटाया गया होता। नेट कैश पॉजिटिव: जब किसी कंपनी के पास उसके कुल कर्ज (डेट) से ज्यादा कैश या निवेश मौजूद हो, तो उसे नेट कैश पॉजिटिव कहा जाता है।
रात में डरावने सपने क्यों आते हैं? क्या होती है इसकी वजह, रिसर्च में सामने आई यह बात

Last Updated:May 13, 2026, 18:15 IST Frequent Bad Dreams Causes: रात में आने वाले डरावने सपने तनाव, खराब नींद, मानसिक दबाव और कुछ हेल्थ कंडीशंस से जुड़े हो सकते हैं. रिसर्च के अनुसार डरावने सपने कई बार एंजायटी या ट्रॉमा से भी जुड़े होते हैं. हेल्दी स्लीपिंग हैबिट और स्ट्रेस कंट्रोल करने से इस समस्या से राहत मिल सकती है. कुछ लोगों को ट्रीटमेंट की जरूरत भी पड़ सकती है. स्ट्रेस, एंजायटी और ट्रॉमा की वजह से भी रात में डरावने सपने आते हैं. What Causes Scary Dreams At Night: कई बार आपने महसूस किया होगा कि सोते वक्त डरावने सपने आने लगते हैं. ऐसा लगता है जैसे कोई व्यक्ति आपको मारने के लिए पीछा कर रहा है. सपने में कई बार ऐसा लगता है कि सांप, बिच्छू और अन्य जंगली जानवर आपका पीछा कर रहे हैं और आप दौड़ नहीं पा रहे हैं. ये सब डरावने सपने होते हैं और इससे लोगों की नींद टूट जाती है. रात में डरावने सपने यानी नाइटमेयर्स आना एक कॉमन समस्या है, लेकिन कई लोग अचानक डरकर नींद से जाग जाते हैं और उन्हें सपना लंबे समय तक याद भी रहता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो कभी-कभार डरावने सपने आना सामान्य है, लेकिन ऐसा बार-बार होने लगे, तो इसके पीछे सेहत से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं. इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. मायो क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक डरावने सपने आने की कई वजह हो सकती हैं. इनमें तनाव और एंजायटी सबसे बड़े फैक्टर्स हैं. नौकरी, पढ़ाई, रिश्तों की परेशानी, आर्थिक तनाव या किसी दुखद घटना का असर दिमाग पर पड़ सकता है. दिमाग सोते समय भी इन भावनाओं को प्रोसेस करता रहता है, जिससे बुरे सपने आने का खतरा बढ़ जाता है. रिसर्च में यह भी सामने आया है कि ट्रॉमा यानी किसी दर्दनाक घटना का अनुभव करने वाले लोगों में नाइटमेयर्स ज्यादा देखे जाते हैं. पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर से जूझ रहे लोगों में डरावने सपनों की समस्या काफी कॉमन मानी जाती है. दुर्घटना, हिंसा, मानसिक आघात या किसी करीबी को खोने जैसी घटनाएं लंबे समय तक सपनों को प्रभावित कर सकती हैं. बार-बार डरावने सपने आने की वजह नींद की कमी भी हो सकती है. अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक ठीक से नहीं सोता या उसकी नींद का समय लगातार बदलता रहता है, तो REM स्लीप प्रभावित हो सकती है. कुछ रिसर्च में पाया गया है कि खराब स्लीप रूटीन और देर रात तक मोबाइल इस्तेमाल करने वाले लोगों में भी डरावने सपने ज्यादा हो सकते हैं. कुछ दवाएं, शराब और अन्य नशीले पदार्थ भी नाइटमेयर्स का कारण बन सकते हैं. कुछ एंटीडिप्रेसेंट्स, ब्लड प्रेशर की दवाएं और शराब छोड़ने के दौरान शरीर में होने वाले बदलाव सपनों को ज्यादा तीव्र बना सकते हैं. कुछ रिसर्च में खाने-पीने की आदतों को भी इससे जोड़ा गया है. एक अध्ययन में पाया गया कि सोने से ठीक पहले हैवी मील या कुछ लोगों में डेयरी उत्पादों का सेवन नींद और सपनों को प्रभावित कर सकता है. हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस पर अभी और रिसर्च की जरूरत है. डॉक्टर्स के अनुसार अगर डरावने सपने कभी-कभार आते हैं, तो आमतौर पर चिंता की बात नहीं होती है. अगर यह बार-बार हों, नींद खराब करने लगें या दिनभर डर और थकान महसूस हो, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी होता है. अच्छी नींद की आदतें, तनाव कम करना, नियमित एक्सरसाइज और सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करने से भी इस समस्या से राहत मिल सकती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
‘अपने भाग्य का अनुमान लगाने में विफल’: विजय द्वारा ज्योतिषी की नियुक्ति रद्द करने पर अन्नाद्रमुक ने चुटकी ली | भारत समाचार

आखरी अपडेट:13 मई, 2026, 17:42 IST निर्णय को रद्द करने का निर्णय वेट्रिवेल को मुख्यमंत्री विभाग में ओएसडी के रूप में पदोन्नत किए जाने के बाद आया। राधन पंडित तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के ज्योतिषी हैं। तस्वीर/एएनआई. (एएनआई छवियां) टीवीके के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने फैसले पर विपक्ष के साथ-साथ सहयोगियों के भारी विरोध के बाद बुधवार को विजय के ज्योतिषी राधन पंडित वेट्रिवेल की तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के विशेष कर्तव्य अधिकारी (राजनीतिक) के रूप में नियुक्ति वापस ले ली। फैसले के बाद, अन्नाद्रमुक ने पार्टी नेता आईएस इंबादुरई पर तंज कसते हुए कहा कि टीवीके की जीत की भविष्यवाणी करने वाले ज्योतिषी अपने भाग्य का अनुमान लगाने में विफल रहे। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “ज्योतिषी अपने भाग्य की भविष्यवाणी करने में विफल रहे। विजय सरकार के बुरे दिन शुरू हो गए हैं।” निर्णय को रद्द करने का निर्णय वेट्रिवेल को मुख्यमंत्री विभाग में ओएसडी के रूप में पदोन्नत किए जाने के बाद आया। ज्योतिषी होने के अलावा, वह टीवीके के प्रवक्ता भी थे और पिछले चुनाव अभियान के दौरान नेतृत्व के करीबी सहयोगी के रूप में काम किया था। 4 मई को, वोटों की गिनती के बीच, जब टीवीके ने आगे बढ़ना शुरू कर दिया था, राधन पंडित विजय से मिलने वाले पहले व्यक्ति थे। इस कदम ने तमिलनाडु के राजनीतिक हलकों में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया क्योंकि टीवीके सरकार को अपना समर्थन देने वाली विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके), सीपीआईएम और सीपीआई जैसी पार्टियों ने खुले तौर पर इस कदम की आलोचना की। डीएमडीके ने विजय के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लिए गए फैसले पर भी सवाल उठाया। पार्टी ने ज्योतिषी की भूमिका और साख पर स्पष्टता की मांग की, जिन्हें अब मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष कर्तव्य अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है। पार्टी ने कहा, ”ज्योतिषी की नियुक्ति से युवाओं में गलत संदेश जाता है।” विधानसभा में शक्ति परीक्षण से पहले, वीसीके विधायक वाणी अरसू ने सरकार से वैज्ञानिक और तर्कसंगत सोच पर ध्यान केंद्रित करने और उन चीजों पर ध्यान न देने का आग्रह किया, जिन्हें बड़े पैमाने पर अंधविश्वास माना जाता है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार को ज्योतिष को नहीं बल्कि वैज्ञानिक सोच को महत्व देना चाहिए।” बढ़ती आलोचना के बीच विजय ने संकेत दिया था कि ज्योतिषी की नियुक्ति रद्द की जा सकती है. फ्लोर टेस्ट के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि कई राजनीतिक दलों की आपत्तियों को देखते हुए फैसले की समीक्षा की जाएगी। उनकी टिप्पणी के तुरंत बाद, वेट्रिवेल की नियुक्ति रद्द कर दी गई। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ‘अपने भाग्य का अनुमान लगाने में विफल’: विजय द्वारा ज्योतिषी की नियुक्ति रद्द करने पर अन्नाद्रमुक ने चुटकी ली अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)विजय ज्योतिषी नियुक्ति विवाद(टी)तमिलनाडु की राजनीति(टी)टीवीके सरकार(टी)विशेष कर्तव्य अधिकारी(टी)राधन पंडित वेट्रिवेल(टी)विजय सरकार की प्रतिक्रिया(टी)ज्योतिषी नियुक्ति रद्द(टी)वीसीके सीपीआई आलोचना
प्रोडूसर करण जौहर की ‘चांद मेरा दिल’ का ट्रेलर रिलीज:लक्ष्य लालवानी और अनन्या पांडे पहली बार एक साथ फिल्म में नजर आएंगे

डायरेक्टर और प्रोडूसर करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी रोमांटिक ड्रामा फिल्म ‘चांद मेरा दिल’ का ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है। इस फिल्म में लक्ष्य लालवानी और अनन्या पांडे मुख्य भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। दोनों कलाकार पहली बार साथ काम कर रहे हैं। फिल्म में अनन्या पांडे ‘चांदनी’ का किरदार निभा रही हैं, जबकि लक्ष्य ‘आरव’ के रोल में हैं। फिल्म का निर्देशन विवेक सोनी ने किया है। ट्रेलर की शुरुआत एक ‘सॉरी’ से होती है, जहां आरव से ऐसी गलती हो जाती है जिसे चांदनी माफ नहीं कर पाती। इसके बाद आरव उसे दूसरा मौका देने के लिए बार-बार कोशिश करता है, लेकिन चांदनी अपने प्यार से ज्यादा अपनी इज्जत को चुनती है। कहानी दोस्ती, प्यार और हार्टब्रेक के इर्द-गिर्द घूमती है। दो इंजीनियरिंग छात्रों की यह लव स्टोरी धीरे-धीरे इमोशनल और दर्दभरी मोड़ ले लेती है। ट्रेलर में एक डायलॉग ‘इज्जत प्यार से बड़ी होती है’ खास तौर पर दर्शकों को प्रभावित कर रहा है। फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर भी अच्छी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। फिल्म 22 मई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।







