एसआई भर्ती री-एग्जाम-2021 के एडमिट कार्ड अपलोड:2.18 लाख कैंडिडेट्स, 11 जिलों में 666 सेंटर; 20 दिन में मिलेगा रिजल्ट

राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से सब-इंस्पेक्टर/ प्लाटून कमांडर संयुक्त प्रतियोगी री एग्जाम-2021 का आयोजन 20 सितम्बर को होगा। इसके लिए कैंडिडेट्स के एडमिट कार्ड अपलोड कर दिए गए है। इसमें 2.18 लाख अभ्यर्थी शामिल होंगे, 11 जिलों में 666 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। आयोग प्रशासन का प्रयास है कि इस एग्जाम का रिजल्ट 20 दिन में जारी कर दिया जाए। 11 जिलों में 666 परीक्षा केंद्र प्रदेश के 11 जिलों में कुल 666 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें कुल 2 लाख 18 हजार 131 रजिस्टर्ड अभ्यर्थी शामिल होंगे। इसके लिए अजमेर में 74, अलवर में 48, भरतपुर में 58, बीकानेर में 47, हनुमानगढ़ में 23, जयपुर में सर्वाधिक 187, जोधपुर में 81, कोटा में 58, श्रीगंगानगर में 10, टोंक में 16 और उदयपुर में 64 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा का आयोजन दो पारियों में किया जाएगा। प्रथम पारी में सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक सामान्य हिंदी का पेपर होगा, जबकि द्वितीय पारी में दोपहर 03:00 बजे से शाम 05:00 बजे तक सामान्य ज्ञान व सामान्य विज्ञान की परीक्षा ली जाएगी। भर्ती में 7 लाख 97 हजार कैंडिडेट ने किया था आवेदन उपनिरीक्षक/प्लाटून कमांडर परीक्षा-2021 का विज्ञापन 3 फरवरी 2021 को जारी किया गया था। इस भर्ती के लिए पहले हुई परीक्षा में 7 लाख 97 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इनमें से 3 लाख 83 हजार 97 अभ्यर्थी पिछली परीक्षा (13 से 15 सितंबर 2021) में शामिल हुए थे। पेपर लीक के कारण परीक्षा रद्द कर दी गई। जब री-एग्जाम कराने का निर्णय लिया गया, तब 8 मई 2025 को पहले केवल परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को ही मौका दिया गया था। बाद में सभी अभ्यर्थियों को इस परीक्षा में शामिल होने की छूट दे दी गई। लेकिन एग्जाम की सहमति 2.18 लाख कैंडिडेट्स ने दी। केंद्र पर 2 घंटे पहले पहुंचना होगा, 60 मिनट पहले बंद होंगे प्रवेश द्वार परीक्षा में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। अभ्यर्थियों को परीक्षा शुरू होने से 2 घंटे पहले परीक्षा केंद्र पर उपस्थित होना अनिवार्य है। किसी भी परीक्षार्थी को परीक्षा शुरू होने के 60 मिनट पूर्व तक ही केंद्र में प्रवेश दिया जाएगा। इसके बाद प्रवेश द्वार पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे और किसी भी परिस्थिति में परीक्षार्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। बायोमेट्रिक जांच, मेटा ग्लासेस और हाईटेक डिवाइसेज पर पैनी नजर परीक्षा में किसी भी प्रकार की जालसाजी, नकल या डमी अभ्यर्थी को रोकने के लिए थंब इंप्रेशन और फेस रिकॉगनीशन का उपयोग करते हुए सघन बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण लागू किया गया है। प्रवेश के दौरान HHMD और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के माध्यम से अभ्यर्थियों की गहन जांच की जाएगी। इसके अतिरिक्त मेटा ग्लासेस और ब्लूटूथ डिवाइसेज जैसे हाईटेक उपकरणों की रोकथाम के लिए भी पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।
मंदाकिनी ने दाऊद इब्राहिम संग तस्वीर पर सफाई दी:एक्ट्रेस बोलीं- उन्होंने शारजाह में क्रिकेट मैच के लिए नहीं बुलाया था

एक्ट्रेस मंदाकिनी ने दाऊद इब्राहिम के साथ वायरल हुई अपनी तस्वीर पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि दाऊद ने उन्हें शारजाह क्रिकेट मैच के लिए नहीं बुलाया था। मंदाकिनी के मुताबिक, वह एक शो के लिए दुबई गई थीं। इसके बाद क्रिकेट मैच देखने पहुंचीं, जहां यह तस्वीर ली गई थी। उस समय उन्हें नहीं पता था कि तस्वीर विवाद का कारण बनेगी। मंदाकिनी ने ANI को दिए इंटरव्यू में कहा कि तस्वीर को लेकर हुई अटकलों और खबरों पर उनका कोई नियंत्रण नहीं था। इस विवाद से उनके फिल्म करियर को बहुत नुकसान हुआ। एक्ट्रेस ने कहा कि एक कलाकार कई लोगों से मिलता है। कलाकार किसी के साथ भेदभाव नहीं करता। उन्होंने कहा, “लोग जो लिखना या कहना चाहते हैं, उस पर हमारा नियंत्रण नहीं होता। एक कलाकार को हजारों लोगों से मिलना पड़ता है और सभी उसके लिए बराबर होते हैं।” मंदाकिनी ने कहा, “हमारे साथ बहुत सारे लोग थे। ऐसे में किसे चुनें और किसे न चुनें? हम वहां एक शो के लिए गए थे। नहीं, मुझे दाऊद ने नहीं बुलाया था। मैं दुबई में एक शो के लिए गई थी और फिर मैच देखने पहुंची। उस समय मुझे इसका अंदाजा नहीं था।” विवाद का असर मंदाकिनी ने बताया कि बाद में यह तस्वीर विवाद का विषय बन गई। इसे लेकर बड़े स्तर पर अटकलें लगाई गईं। उन्होंने कहा, “इस विवाद से बहुत नुकसान हुआ। बाद में मुझे पता चला कि इन सभी चीजों को संभालने के लिए एक टीम होनी चाहिए। मैंने हर जगह इन अफवाहों का खंडन किया।” 80 और 90 के दशक में दाऊद दुबई से अपना नेटवर्क चला रहा था। वहां वह अक्सर बॉलीवुड सितारों के लिए आलीशान पार्टियां रखता था। मंदाकिनी के अलावा एक्टर अनिल कपूर की भी शारजाह स्टेडियम से एक पुरानी तस्वीर इंटरनेट पर मौजूद है, जिसमें वे राज कपूर और महबूब के साथ बैठे हैं और उनके पीछे दाऊद इब्राहिम दिखाई दे रहा है। हालांकि, इस तस्वीर को लेकर अनिल कपूर की बेटी सोनम कपूर ने सोशल मीडिया पर सफाई दी थी कि उनके पिता वहां राज कपूर और कृष्णा कपूर के साथ सिर्फ भारतीय क्रिकेट मैच देखने गए थे और उन्हें जानकारी नहीं थी कि उनके पास कौन बैठा है। वहीं, ऋषि कपूर ने खुद स्वीकार किया था कि वे दुबई में दाऊद से 2 बार मिले थे। मंदाकिनी ने बताया ‘राम तेरी गंगा मैली’ के चर्चित सीन का सच मंदाकिनी ने फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ से डेब्यू किया था। इसमें उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई और 1980 के दशक में हिंदी सिनेमा के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गईं। राज कपूर के निर्देशन में बनी यह फिल्म बड़ी हिट रही। हालांकि, फिल्म के कई सीन बाद में चर्चा और विवाद का विषय बने। मंदाकिनी ने गाने ‘तुझे बुलाएं ये मेरी बहनें’ में सफेद साड़ी में फिल्माए गए झरने वाले सीन और बहस में रहे स्तनपान वाले सीन पर बात की। उन्होंने कहा कि इन दृश्यों का उद्देश्य फिल्म में मासूमियत और पवित्रता को दिखाना था। ANI को दिए इंटरव्यू में मंदाकिनी ने बताया कि जब उन्होंने फिल्म की शूटिंग शुरू की, तब वह सिर्फ 16 साल की थीं और उन्हें पूरी तरह अंदाजा नहीं था कि बाद में इन सीन को किस तरह देखा जाएगा। झरने वाले सीन के बारे में मंदाकिनी ने कहा कि राज कपूर ने उन्हें सीन समझाया था। उनके मुताबिक, इसका उद्देश्य अश्लीलता दिखाना नहीं था, बल्कि फिल्म की कहानी और गंगा के किरदार की पवित्रता को सामने रखना था। एक्ट्रेस ने कहा, “उनका तरीका ऐसा था कि आप उनसे कोई सवाल ही नहीं करते थे। इतना प्यार से, इतना जेंटल, जैसे आपका फैमिली मेंबर आपसे करवा रहा हो। मुझे कहीं से कोई अश्लीलता महसूस नहीं हुई। कोई खराब या घिनौना एहसास नहीं था। पूरी फिल्म यही थी कि गंगा को अपवित्र करना चाहते थे, लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए।” उन्होंने आगे कहा, “वह मेरे सामने थे। थोड़ा सा मुझे लगा तो मैंने साड़ी को डबल कर लिया। उन्होंने कहा डबल कर लो, तो मैंने कर लिया। बस हो गया वो शॉट। यह मेरे लिए बड़ी बात थी, क्योंकि मैं बहुत छोटी जगह से आई थी।” मंदाकिनी ने स्तनपान के सीन पर सफाई दी मंदाकिनी ने फिल्म के चर्चित स्तनपान वाले सीन पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि इसमें वास्तव में स्तनपान नहीं कराया गया था और कैमरे की पोजिशनिंग के जरिए ऐसा सीन बनाया गया था। उन्होंने कहा, “नहीं, वहां कोई स्तनपान नहीं था। उन्होंने इसे बहुत अच्छे तरीके से फिल्माया था। मेरे लिए अब समझाना मुश्किल है, लेकिन अगर मैं बताऊंगी कि इसे कैसे किया गया था, तो आप समझ जाएंगे।” अभिनेत्री ने बताया कि सीन में उनके पास एक बच्चा था, जिसे उन्होंने कसकर पकड़ा हुआ था। उन्होंने कहा, “हां, मेरे पास बच्चा था और मैंने उसे कसकर पकड़ा था, लेकिन वह स्तनपान नहीं था। मैं यही सबको बताना चाहती हूं।” मंदाकिनी के मुताबिक, उन्होंने लो-कट आउटफिट पहना था और बच्चे को शरीर के करीब रखा था। कैमरे के एंगल की वजह से ऐसा लगा कि मां अपने बच्चे को स्तनपान करा रही है। उन्होंने कहा कि सीन का उद्देश्य मां और बच्चे के रिश्ते को दिखाना था, जिसे बाद में अलग तरह से समझा गया। सफलता के बाद झरने वाला सीन दोहराने से मना किया अभिनेत्री ने यह भी बताया कि ‘राम तेरी गंगा मैली’ की सफलता के बाद कुछ फिल्ममेकर्स ने उनसे झरने वाले सीन को दोहराने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उनका कहना था कि किसी फिल्म के सफल होने के लिए सिर्फ एक सीन नहीं, बल्कि अच्छी कहानी जरूरी है। उन्होंने कहा, “हिट होने के लिए बहुत अच्छी कहानी चाहिए, जो ‘राम तेरी गंगा मैली’ में थी। उसमें क्या दिखाया गया है? उसका ट्रीटमेंट क्या है? डायरेक्टर आपको क्या मैसेज देना चाहता है? सब कुछ मायने रखता है।” ‘राम तेरी गंगा मैली’ की सफलता के बाद उन्होंने मिथुन चक्रवर्ती और गोविंदा समेत इंडस्ट्री के कई प्रमुख कलाकारों के साथ काम किया और अपने करियर में कई फिल्मों में नजर आईं।
मंदाकिनी ने दाऊद इब्राहिम संग तस्वीर पर सफाई दी:एक्ट्रेस बोलीं- उन्होंने शारजाह में क्रिकेट मैच के लिए नहीं बुलाया था

एक्ट्रेस मंदाकिनी ने दाऊद इब्राहिम के साथ वायरल हुई अपनी तस्वीर पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि दाऊद ने उन्हें शारजाह क्रिकेट मैच के लिए नहीं बुलाया था। मंदाकिनी के मुताबिक, वह एक शो के लिए दुबई गई थीं। इसके बाद क्रिकेट मैच देखने पहुंचीं, जहां यह तस्वीर ली गई थी। उस समय उन्हें नहीं पता था कि तस्वीर विवाद का कारण बनेगी। मंदाकिनी ने ANI को दिए इंटरव्यू में कहा कि तस्वीर को लेकर हुई अटकलों और खबरों पर उनका कोई नियंत्रण नहीं था। इस विवाद से उनके फिल्म करियर को बहुत नुकसान हुआ। एक्ट्रेस ने कहा कि एक कलाकार कई लोगों से मिलता है। कलाकार किसी के साथ भेदभाव नहीं करता। उन्होंने कहा, “लोग जो लिखना या कहना चाहते हैं, उस पर हमारा नियंत्रण नहीं होता। एक कलाकार को हजारों लोगों से मिलना पड़ता है और सभी उसके लिए बराबर होते हैं।” मंदाकिनी ने कहा, “हमारे साथ बहुत सारे लोग थे। ऐसे में किसे चुनें और किसे न चुनें? हम वहां एक शो के लिए गए थे। नहीं, मुझे दाऊद ने नहीं बुलाया था। मैं दुबई में एक शो के लिए गई थी और फिर मैच देखने पहुंची। उस समय मुझे इसका अंदाजा नहीं था।” मंदाकिनी ने बताया कि बाद में यह तस्वीर विवाद का विषय बन गई। इसे लेकर बड़े स्तर पर अटकलें लगाई गईं। उन्होंने कहा, “इस विवाद से बहुत नुकसान हुआ। बाद में मुझे पता चला कि इन सभी चीजों को संभालने के लिए एक टीम होनी चाहिए। मैंने हर जगह इन अफवाहों का खंडन किया।” 80 और 90 के दशक में दाऊद दुबई से अपना नेटवर्क चला रहा था। वहां वह अक्सर बॉलीवुड सितारों के लिए आलीशान पार्टियां रखता था। मंदाकिनी के अलावा एक्टर अनिल कपूर की भी शारजाह स्टेडियम से एक पुरानी तस्वीर इंटरनेट पर मौजूद है, जिसमें वे राज कपूर और महबूब के साथ बैठे हैं और उनके पीछे दाऊद इब्राहिम दिखाई दे रहा है। हालांकि, इस तस्वीर को लेकर अनिल कपूर की बेटी सोनम कपूर ने सोशल मीडिया पर सफाई दी थी कि उनके पिता वहां राज कपूर और कृष्णा कपूर के साथ सिर्फ भारतीय क्रिकेट मैच देखने गए थे और उन्हें जानकारी नहीं थी कि उनके पास कौन बैठा है। वहीं, ऋषि कपूर ने खुद स्वीकार किया था कि वे दुबई में दाऊद से 2 बार मिले थे। मंदाकिनी ने बताया ‘राम तेरी गंगा मैली’ के चर्चित सीन का सच मंदाकिनी ने फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ से डेब्यू किया था। इसमें उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई और 1980 के दशक में हिंदी सिनेमा के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गईं। राज कपूर के निर्देशन में बनी यह फिल्म बड़ी हिट रही। हालांकि, फिल्म के कई सीन बाद में चर्चा और विवाद का विषय बने। मंदाकिनी ने गाने ‘तुझे बुलाएं ये मेरी बहनें’ में सफेद साड़ी में फिल्माए गए झरने वाले सीन और बहस में रहे स्तनपान वाले सीन पर बात की। उन्होंने कहा कि इन दृश्यों का उद्देश्य फिल्म में मासूमियत और पवित्रता को दिखाना था। ANI को दिए इंटरव्यू में मंदाकिनी ने बताया कि जब उन्होंने फिल्म की शूटिंग शुरू की, तब वह सिर्फ 16 साल की थीं और उन्हें पूरी तरह अंदाजा नहीं था कि बाद में इन सीन को किस तरह देखा जाएगा। झरने वाले सीन के बारे में मंदाकिनी ने कहा कि राज कपूर ने उन्हें सीन समझाया था। उनके मुताबिक, इसका उद्देश्य अश्लीलता दिखाना नहीं था, बल्कि फिल्म की कहानी और गंगा के किरदार की पवित्रता को सामने रखना था। एक्ट्रेस ने कहा, “उनका तरीका ऐसा था कि आप उनसे कोई सवाल ही नहीं करते थे। इतना प्यार से, इतना जेंटल, जैसे आपका फैमिली मेंबर आपसे करवा रहा हो। मुझे कहीं से कोई अश्लीलता महसूस नहीं हुई। कोई खराब या घिनौना एहसास नहीं था। पूरी फिल्म यही थी कि गंगा को अपवित्र करना चाहते थे, लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए।” उन्होंने आगे कहा, “वह मेरे सामने थे। थोड़ा सा मुझे लगा तो मैंने साड़ी को डबल कर लिया। उन्होंने कहा डबल कर लो, तो मैंने कर लिया। बस हो गया वो शॉट। यह मेरे लिए बड़ी बात थी, क्योंकि मैं बहुत छोटी जगह से आई थी।”’ मंदाकिनी ने स्तनपान के सीन पर सफाई दी मंदाकिनी ने फिल्म के चर्चित स्तनपान वाले सीन पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि इसमें वास्तव में स्तनपान नहीं कराया गया था और कैमरे की पोजिशनिंग के जरिए ऐसा सीन बनाया गया था। उन्होंने कहा, “नहीं, वहां कोई स्तनपान नहीं था। उन्होंने इसे बहुत अच्छे तरीके से फिल्माया था। मेरे लिए अब समझाना मुश्किल है, लेकिन अगर मैं बताऊंगी कि इसे कैसे किया गया था, तो आप समझ जाएंगे।” अभिनेत्री ने बताया कि सीन में उनके पास एक बच्चा था, जिसे उन्होंने कसकर पकड़ा हुआ था। उन्होंने कहा, “हां, मेरे पास बच्चा था और मैंने उसे कसकर पकड़ा था, लेकिन वह स्तनपान नहीं था। मैं यही सबको बताना चाहती हूं।” मंदाकिनी के मुताबिक, उन्होंने लो-कट आउटफिट पहना था और बच्चे को शरीर के करीब रखा था। कैमरे के एंगल की वजह से ऐसा लगा कि मां अपने बच्चे को स्तनपान करा रही है। उन्होंने कहा कि सीन का उद्देश्य मां और बच्चे के रिश्ते को दिखाना था, जिसे बाद में अलग तरह से समझा गया। सफलता के बाद झरने वाला सीन दोहराने से मना किया अभिनेत्री ने यह भी बताया कि ‘राम तेरी गंगा मैली’ की सफलता के बाद कुछ फिल्ममेकर्स ने उनसे झरने वाले सीन को दोहराने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उनका कहना था कि किसी फिल्म के सफल होने के लिए सिर्फ एक सीन नहीं, बल्कि अच्छी कहानी जरूरी है। उन्होंने कहा, “हिट होने के लिए बहुत अच्छी कहानी चाहिए, जो ‘राम तेरी गंगा मैली’ में थी। उसमें क्या दिखाया गया है? उसका ट्रीटमेंट क्या है? डायरेक्टर आपको क्या मैसेज देना चाहता है? सब कुछ मायने रखता है।” ‘राम तेरी गंगा मैली’ की सफलता के बाद उन्होंने मिथुन चक्रवर्ती और गोविंदा समेत इंडस्ट्री के कई प्रमुख कलाकारों के साथ काम किया और अपने करियर में कई फिल्मों में नजर आईं।
रिपोर्ट- ट्रम्प सरकार ने हूती विद्रोहियों से सीक्रेट डील की:अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं करेंगे हूती लड़ाके, बदले में सऊदी की मदद नहीं करेगा अमेरिका

अमेरिकी अधिकारियों ने ओमान में हूती नेताओं से मुलाकात की। इसके बदले में ट्रम्प प्रशासन ने यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब को सैन्य मदद नहीं देने का फैसला किया है। ब्रिटिश अखबार द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिलाया है कि 2025 में दोनों पक्षों के बीच हुआ सीजफायर अभी कायम है और वे लाल सागर में अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे। हालांकि, सऊदी अरब से जुड़े जहाजों और सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को वे अपना लक्ष्य मानते हैं। उपराष्ट्रपति वेंस बोले- हम हूतियों के साथ सीधे संपर्क में अमेरिकी अधिकारियों ने पिछले हफ्ते में ओमान की राजधानी मस्कट के अमेरिकी दूतावास में हूती नेताओं के साथ बैठक की। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोमवार को पुष्टि की कि अमेरिका हूतियों के साथ सीधे संपर्क में है। अमेरिका ने मार्च 2025 में हूतियों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया था। इसके बावजूद हाल के महीनों में अमेरिकी अधिकारियों ने हूती नेताओं के अलावा हमास, हिजबुल्लाह और ईरान के प्रतिनिधियों से भी बातचीत की है। सऊदी अरब को अकेले लड़ना पड़ सकता है पिछले हफ्ते हूतियों ने यमन के पश्चिमी हिस्से में लाल सागर के तट से लगे बड़े इलाके पर कब्जा कर लिया। इसके बाद सऊदी अरब ने अमेरिका से मदद की उम्मीद की थी। अमेरिका ने हूती गतिविधियों को बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य से नौवहन की स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया है, लेकिन अभी तक सऊदी अरब के समर्थन में सीधे सैन्य कार्रवाई नहीं की है। इसकी एक वजह यह भी है कि अमेरिका पहले से ईरान के साथ महंगे और संसाधन खपाने वाले संघर्ष में उलझा हुआ है। ईरान हूतियों का समर्थन करता है। यमन में अमेरिका के पूर्व उप राजदूत नबील खौरी ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन और हूतियों के बीच एक तरह की ‘मौन समझ’ बनी है। खौरी के मुताबिक, हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिलाया है कि अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की लाल सागर में आवाजाही प्रभावित नहीं होगी। उनके अनुसार खतरा मुख्य रूप से सऊदी जहाजों या सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को है। सऊदी ने कहा- मक्का की ओर ड्रोन भेजा गया सऊदी अरब ने मंगलवार को दावा किया कि हूतियों ने पवित्र शहर मक्का की ओर ड्रोन भेजा था। सऊदी रक्षा बलों ने इसे नष्ट करने की बात कही। सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्किये अल-मलिकी के मुताबिक, ड्रोन को स्थानीय समयानुसार शाम करीब 6:50 बजे मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र के पास रोका गया। सऊदी अरब ने कहा कि मक्का पर किसी भी तरह का हमला ‘रेड लाइन’ है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और 57 देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) ने भी इस दावे की निंदा की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे ‘घिनौना और जघन्य’ हमला बताया। हूतियों ने सऊदी के आरोप को ‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’ बताया हूती नेतृत्व ने सऊदी अरब के दावे को खारिज कर दिया। हूतियों ने इसे ‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’ बताते हुए कहा कि इस तरह के दावों से पहले भी लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई है। हूती उप विदेश मंत्री अब्दुल वहीद अबू रास ने उल्टा सऊदी अरब पर मक्का और मदीना जैसे पवित्र स्थलों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। हूतियों ने सऊदी F-15 गिराने का भी दावा किया हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने मारिब के पास सऊदी अरब का F-15 लड़ाकू विमान गिराया है। साथ ही लाल सागर के बंदरगाह शहर यानबू में सऊदी तेल कंपनी अरामको के एक संयंत्र पर हमला करने का दावा किया। हालांकि, हूती सैन्य प्रवक्ता ने इन दावों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया। हूती वार्ता टीम के प्रमुख मोहम्मद अब्दुल सलाम ने कहा कि F-15 गिराने का दावा पश्चिमी देशों के लिए चेतावनी है कि वे सऊदी ‘प्रचार’ का शिकार न बनें। सऊदी अरब पाकिस्तान और तुर्किये से मदद मांग रहा हूती राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-फराह ने कहा कि सऊदी अरब यमन में मुश्किल स्थिति में है। उनके मुताबिक, सऊदी अरब ने युद्ध और नाकेबंदी के बावजूद अपने लक्ष्य हासिल नहीं किए। उन्होंने दावा किया कि अब सऊदी अरब पाकिस्तान, तुर्किये, अमेरिका, इजराइल और मिस्र से समर्थन मांग रहा है और मक्का पर हमले के दावे के जरिए मुस्लिम देशों को अपने साथ लामबंद करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका-इजराइल समेत अरब देशों के सैन्य प्रमुखों की गुप्त बैठक इस बीच, इजराइली अधिकारियों ने अमेरिका, इजराइल और कई अरब देशों के सैन्य अधिकारियों की जर्मनी में हुई एक गुप्त बैठक की जानकारी लीक की है। एक्सिओस के पत्रकार बराक रैविड के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने पिछले सप्ताह यह बैठक आयोजित की थी। बैठक में इजराइल, सऊदी अरब, UAE, बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और मिस्र के सैन्य प्रमुख शामिल हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, छह महीने से ज्यादा समय पहले अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद यह इस तरह की पहली बैठक थी। इजराइल, जिसे पहले हूती हमलों का सामना करना पड़ा था, अब सऊदी अरब की ओर से यमन में हस्तक्षेप करने की पेशकश कर रहा है। UN में लाल सागर बंद करने की कोशिश की निंदा मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में लाल सागर को बंद करने की किसी भी कोशिश की निंदा की गई। बैठक में रूस के रुख में भी बदलाव के संकेत मिले। रूसी प्रतिनिधि ने पहले जहां यमन में अदन स्थित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को ही एकमात्र वैध सरकार माना था, अब उससे कुछ दूरी बनाते हुए नजर आए। चीन पहुंचा ईरान, होर्मुज पर समर्थन की कोशिश बुधवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रशासन को लेकर ईरान की योजनाओं पर समर्थन हासिल करने की कोशिश की गई। ईरान और अमेरिका की अलग-अलग नाकेबंदी के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य अभी बंद है। चीन ने कहा कि वह नहीं चाहता कि क्षेत्रीय तनाव यमन और लाल सागर तक फैले। बीजिंग ने अमेरिका से जून में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के आधार
बादशाह को चैलेंज कर चुकीं हरियाणवी लेडी सिंगर को धमकी:लॉरेंस गैंग का मैसेज-2 दिन में गोली लगेगी; 'आजा तनै बादशाह सुनाऊं रे टरीरी' गा चुकीं

‘आजा बादशाह तनै सुनाऊं रै टटीरी’ सॉन्ग से रैपर बादशाह को चैलेंज करने वाली हरियाणवी सिंगर सुदेश को लॉरेंस गैंग के नाम से धमकी मिली है। उनके वॉट्सएप नंबर पर मैसेज कर लिखा- ”लॉरेस ग्रुप से अंकित बोलू हूं। 2 लाख भेज दे चुपचाप, 2 दिन का टाइम है, फिर गोली लगेगी” सुदेश ने कैथल SP मनप्रीत सिंह को शिकायत देकर सुरक्षा की मांग की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। मोबाइल नंबर की लोकेशन चेक की जा रही है। इधर, पाखंडवाद पर कन्ट्रोवर्सी के बीच सुदेश ने करीब 15 दिन पहले ही ‘खीर पाखंड़िया की’ सॉन्ग गाया था। वहीं, 1 मार्च 2026 को रिलीज हुए बादशाह के ‘टटीरी’ सॉन्ग के जवाब में सुदेश ने 9 मार्च को ‘बोली ए टटीरी’ सॉन्ग गाया था। हालांकि बादशाह के सॉन्ग को बैन कर दिया गया था। मैसेज में लिखा- तेरा भी टाइम आ लिया सिंगर सुदेश को धमकी देने वाले व्यक्ति ने खुद को अंकित बताते हुए लिखा- तेरा भी टाइम आ लिया है, चुपचाप 2 लाख रुपए दे दे। फिर यह ना कहना कि ये के हो गया मेरे साथ। जय बलकारी, लॉरेंस ग्रुप। इसके बाद लिखा कि 2 दिन का टाइम है तेरे धोरे, नहीं फिर गोली चलेगी। नंबर ब्लॉक करने से पहले सोच भी लेना। पुलिस धोरे जा या फिर किसी के पास जा। चेक कर लिए, कोई ना, तेरे को टाइम दिया है। अब पढ़िए, पुलिस शिकायत में क्या बताया वॉट्सएप मैसेज भेग मांगे पैसे: शिकायत के अनुसार, सुदेश के मोबाइल पर 10 सितंबर की रात 10:48 बजे से 11:43 बजे तक एक अज्ञात मोबाइल नंबर से लगातार मैसेज आए। आरोप है कि मैसेज भेजने वाले ने 2 लाख रुपए की मांग की। पैसे नहीं देने पर जान से मारने की धमकी दी। लॉरेंस गैंग का मेंबर बताया: सुदेश ने पुलिस को बताया कि वह धमकी देने वाले व्यक्ति को नहीं जानती। उन्होंने धमकी भरे मैसेज के स्क्रीनशॉट भी शिकायत के साथ पुलिस को उपलब्ध करवाए हैं। वहीं, सुदेश का कहना है कि पूरा परिवार डरा हुआ है। धमकी के कारण रातभर सो भी नहीं पा रहे। एसपी से सुरक्षा मांगी: सिंगर सुदेश ने 11 सितंबर को कैथल एसपी मनप्रीत सिंह को शिकायत देकर आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। सिंगर को भेजा गया धमकी भरा मैसेज क्या है, बादशाह और सुदेश के टटीरी सॉन्ग बादशाह का बैन हो चुका ‘टटीरी’ सॉन्ग हरियाणवी लोकगीत टटीरी को बादशाह ने नए रैप वर्जन में 1 मार्च को रिलीज किया था। रिलीज होने के बाद से ही उन पर अश्लील शब्दों और दृश्य दिखाने के आरोप लगे थे। इसके बाद सोशल मीडिया पर इस सॉन्ग का बॉयकाट शुरू हो गया। विरोध बढ़ने के बाद रैप वर्जन को कई प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया, उसी विवाद के बाद कई कलाकारों ने टटीरी गीत को अपने-अपने अंदाज में गाकर रिलीज किया। सुदेश का ऐसी न थी ‘टटीरी’ सॉन्ग क्यूट रोहिल्ला यूट्यूब चैनल पर 9 मार्च को असली टटीरी नाम से सॉन्ग रिलीज हुआ था। इस गीत में सीधे तौर पर बादशाह को संबोधित करते हुए कहा गया है कि वह टटीरी गीत को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। सॉन्ग के लिरिक्स है- ”आज्या तनै बादशाह सुनाऊं रे टरीरी, ऐसी ना थी जैसी तनै बनाई रे टटीरी। गंदा गाकै पेश करया क्यू आई तनै काण ना, गलत बौलै धी बेटी नै, के तेर घर मै भाण ना, गाने मैं गंदगीं मचाई रे भतेरी।” ————– यह खबर भी पढ़ें… हरियाणवी सिंगर ने गाया- ऐसी ना थी,जैसी तनै बनाई ‘टटीरी’:बादशाह का नाम लेकर ‘तेरे घर में बहन-बेटी ना’ लिरिक्स गाए; सिमरन का न्यू सॉन्ग रिलीज हरियाणवी लोक गीत ‘टटीरी’ को अब सिंगरों ने नए वर्जन में गाकर बॉलीवुड रैपर बादशाह को जवाब दिया है। यूट्यूब से हटाए गए बादशाह के टटीरी सॉन्ग में उनके साथ काम करने वाली सिमरन जागलान में भी इसे अब नए ढंग में पेश किया है। (पूरी खबर पढ़ें)
भारत पर 100% टैरिफ बिल पर अमेरिकी संसद में वोटिंग:रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर ट्रम्प लगा सकेंगे भारी शुल्क; सीनेट से पास हो चुका

अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में आज उस बिल पर अंतिम वोटिंग होगी, जिसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक एक्सट्रा टैरिफ लग सकता है। इसका असर भारत और चीन जैसे देशों पर पड़ सकता है। हालांकि, इस वोटिंग का मतलब भारत पर तुरंत 100% टैरिफ लगना नहीं है। बिल कानून बना तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ऐसा टैरिफ लगाने की कानूनी शक्ति मिल जाएगी। मंगलवार को हाउस ने 214-211 वोट से बिल को अंतिम वोटिंग के लिए आगे बढ़ाया था। इससे पहले अमेरिकी सीनेट अगस्त में इसे 86-11 वोट से पास कर चुकी है। यह बिल कानून बना तो भारत पर असर पहली स्थिति: भारत रूस से तेल खरीदता रहे अमेरिका के 100% टैरिफ का सीधा असर भारत के निर्यात बिल पर पड़ सकता है। इससे भारतीय सामान अमेरिका में दोगुना महंगा हो जाएगा। अमेरिकी खरीदार सस्ता विकल्प ढूंढेंगे जैसे बांग्लादेश, वियतनाम, मैक्सिको, चीन। नतीजतन भारत के टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स, लेदर, समुद्री उत्पाद, केमिकल्स आदि के ऑर्डर घट जाएंगे। दूसरी स्थिति: भारत रूस को छोड़कर दूसरे देशों से तेल खरीदे तो रूस से आने वाले तेल पर प्रतिबंध या टैरिफ का दबाव बढ़ता है, तो भारत को दूसरे देशों से तेल खरीदना पड़ेगा। यह महंगा पड़ सकता है, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। रूस के रक्षा क्षेत्रों पर भी प्रतिबंध लगेगा बिल का नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ है। अगर अमेरिकी संसद का निचला सदन इसे मंजूरी दे देता है, तो बिल व्हाइट हाउस जाएगा। यहां राष्ट्रपति ट्रम्प के साइन करते ही यह कानून बन जाएगा। इस बिल में रूस के तेल और रक्षा से जुड़े कारोबार पर कड़े प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। साथ ही रूस के उन टैंकरों पर भी कार्रवाई हो सकती है जो मौजूदा प्रतिबंधों से बचते हुए दूसरे देशों तक रूसी तेल पहुंचाते हैं। इन टैंकरों के नेटवर्क को रूस का ‘शैडो फ्लीट’ कहा जाता है। अमेरिका पहले भी रूस पर ऐसे प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर चुका है। लेकिन ईरान युद्ध के दौरान होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल की सप्लाई पर असर पड़ा और दुनिया में तेल की कमी का डर बढ़ गया। इसके बाद अमेरिकी सरकार को रूस के तेल की बिक्री पर कुछ समय के लिए लगी पाबंदियों में छूट देनी पड़ी थी। ईरान के साथ ट्रेड करने वाली कंपनियों पर प्रतिबंध बढ़ेगा अगर यह कानून बन जाता है तो 1996 का ‘ईरान प्रतिबंध कानून’ 2031 तक बढ़ जाएगा। यह कानून उन गैर-अमेरिकी कंपनियों पर पाबंदी लगाता है जो ईरान के साथ व्यापार करती हैं। यह कानून इसी साल खत्म होने वाला था। इस बिल से अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार भी मिल जाएगा कि वे अमेरिका में आने वाले रूसी सामान पर 500% तक टैरिफ लगा सकें। राष्ट्रपति का यह अधिकार 5 साल तक लागू रहेगा। यूरोपीय देशों को टैरिफ में राहत देगा अमेरिका रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम को भी इसके दायरे में रखा गया है। हालांकि, जो देश रूस की कुल गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और अपनी निर्भरता घटाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, उन्हें छूट मिल सकती है। सीनेट में पेश बिल के तहत 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से छूट दी गई है। इन देशों को राहत इसलिए दी गई है, क्योंकि ये रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और धीरे-धीरे उस पर अपनी निर्भरता भी कम कर रहे हैं। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है। इसका निशाना सिर्फ वे देश हैं, जो अब भी रूस के तेल कारोबार को सबसे ज्यादा आर्थिक सहारा दे रहे हैं। बिल में रूस के ऊर्जा उद्योग, वित्तीय संस्थानों, रक्षा औद्योगिक ढांचे, कारोबारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। —————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका से पैसा निकालने लगे दुनिया के बड़े निवेशक: 40 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज से बढ़ी चिंता, सोना खरीद रहे, चीन में निवेश बढ़ा रहे अमेरिका पर 40 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज है। इसके साथ ब्याज दरें, टैरिफ और दूसरे देशों पर लगाए जा रहे आर्थिक प्रतिबंध भी बढ़ रहे हैं। इससे दुनिया के कुछ निवेशक अब सोच रहे हैं कि अपना पैसा अमेरिका के अलावा कहां लगाया जाए। पूरी खबर पढ़ें…
कहीं कीचड़ में स्कूल जाते बच्चे, कहीं घुटनों तक पानी:कहीं फिसलन, कहीं सांप-बिच्छू तो, कहीं पानी में डूबने का खतरा; वीडियो वायरल

एमपी के रायसेन जिले में गैरतगंज तहसील में आने वाले देवनगर में स्कूल जाती छात्राओं का वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में बच्चे कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल की तरफ जा रहे हैं और उनकी पीठ पर स्कूल बैग हैं और ये इन बच्चों का आम रास्ता है। कीचड़ भरे रास्ते से रोज जाते हैं स्कूल वे आगे जाकर पहले पानी ढूंढते हैं ताकि अपने पैर साफ कर सकें उसके बाद ही स्कूल तक पहुंच पाते हैं। इसी वजह से इन बच्चों ने पैरों में किसी भी तरह की कोई चप्पल या जूते भी नहीं पहन रखे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक बच्चे रोज इसी तरह स्कूल जाने को मजबूर हैं, कई बार वे फिसलकर गिर पड़ते हैं और चोटिल हो जाते हैं। इसी मुश्किल रास्ते की वजह से कई बार छोटे बच्चों का स्कूल जाना कठिन हो जाता है। खतरनाक रास्ते से जाने की वजह से सांप-बिच्छू के काटने का भी खतरा रहता है। स्कूल टीचर भी कर चुके हैं सड़क की मांग वहीं स्कूल टीचर का कहना है कि कई बार वे इसकी शिकायत कर चुकी हैं और पंचायत प्रशासन से सड़क बनाने के लिए आवेदन भी दे चुके हैं लेकिन अभी तक कोई भी हल नहीं निकला है। वहीं ग्रामीणों को कहना है कि सरपंच से कई बार इसकी शिकायत कर चुके हैं कि बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है। साथ ही आम लोगों को भी आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। लेकिन सरपंच का कहना है कि वो रोड नहीं बनवाएगा। बिहार में 25 सालों से पुल की मांग ये सिर्फ एमपी के के गांव की तस्वीर नहीं है ऐसा ही एक वीडियो देशभर से आ रहे हैं। बिहार के गया जिले के मानपुर प्रखंड में कईया गांव का है। जहां बच्चे घुटने तक पानी पार करकर स्कूल जा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, यहां एक तरफ नदी है और एक तरफ नहर लेकिन कोई पुल नहीं है। इस वजह से बच्चों को रोज इसी तरह स्कूल जाना पड़ता है। 3 महीने में 3 हफ्ते ही स्कूल जा पा रहे बच्चे ग्रामीणों की शिकायत है कि बच्चे बारिश के समय कई-कई दिनों तक स्कूल नहीं जा पाते हैं क्योंकि पानी बढ़ जाता है और न रोड है न पुल है। जिससे बच्चों के डूबने का खतरा होता है इसलिए बच्चे 3 महीने की बारिश में हफ्ते में 1-2 दिन ही स्कूल जा पाते हैं, उन्हें मजबूरी में क्लास छोड़नी पड़ती हैं। ‘डीएम साहब हमारे स्कूल की रोड बनवा दीजिए’ ऐसा ही एक ओर वीडियो वायरल हो रहा है, दावा है कि ये वीडियो एमपी के बुरहानपुर जिले के देवला ग्राम पंचायत का है। इस वीडियो में बच्चे कीचड़ में सिर पर किताबें लेकर स्कूल से वापस घर की तरफ आ रहे हैं। इस वीडियो में बच्चे अपना स्कूल दिखा रहे हैं और कह रहे हैं ‘डीएम साहब हमारे स्कूल की रोड बनवा दीजिए, वो हमारा स्कूल है, स्कूल जाने में दिक्कत होती है। ‘ शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के मुताबिक शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act 2009) के सेक्शन 6 के तहत बच्चों के स्कूल की दूरी के स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। साथ ही रास्ते पर बेहतर रोशनी और पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ होना चाहिए। ————————– मिड डे मील में कहीं कीड़े, कहीं सड़े आलू:आरोप छात्रों से प्रिंसिपल कहते हैं- शिकायत की तो केस कर देंगे, देशभर के कई राज्यों के मामले एमपी के छिंदवाड़ा के मानेगांव में स्कूली बच्चों के मध्यान भोजन यानी मिड डे मील में खाने की गुणवत्ता, सामग्री और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पूरी खबर पढ़ें..
अमेरिका में AI को लेकर तीन खेमे:मस्क को सभ्यता मिटने का डर, ट्रम्प को चीन से पिछड़ने की चिंता, तीसरा पक्ष इंसानी कंट्रोल चाहता

अमेरिका में AI के विकास की रफ्तार को लेकर बहस तेज है। इसे लेकर तीन अलग-अलग खेमे बन गए हैं। इलॉन मस्क समेत कुछ टेक दिग्गजों को डर है कि AI अगर इंसानों के कंट्रोल से बाहर हुआ तो पूरी मानव सभ्यता के लिए खतरा बन सकता है। वे इसे परमाणु हथियार से भी ज्यादा खतरनाक मानते हैं। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प AI की रफ्तार धीमी करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका जोर अमेरिका को AI की दौड़ में चीन से आगे रखने पर है। उनका मानना है कि ज्यादा रोक-टोक से अमेरिका पीछे रह सकता है। तीसरा खेमा AI को लेकर बीच का रास्ता चाहता है। वह इसकी रफ्तार रोकने के बजाय सुरक्षा नियम और इंसानी निगरानी बनाए रखने के पक्ष में है। राष्ट्रपति ट्रम्प AI पर निगरानी के खिलाफ पिछले एक हफ्ते में AI के विकास को धीमा करने की मांग अमेरिकी राजनीति के बड़े मुद्दों में शामिल हो गई है। कई टेक कंपनियों के बड़े अधिकारी AI पर ज्यादा सावधानी और नियमों की बात कर रहे हैं, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इसका विरोध कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि AI पर नियंत्रण की मांग करने वालों में अमेरिका के राजनीतिक वामपंथी और दक्षिणपंथी, दोनों तरफ के लोग शामिल हैं। आम तौर पर इन दोनों विचारधाराओं में बहुत कम मुद्दों पर सहमति होती है, लेकिन AI के मामले में दोनों तरफ के कुछ नेता इसे नियंत्रित करने की जरूरत मानते हैं। AI को लेकर इस लड़ाई का असर सिर्फ टेक कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे तय होगा कि आने वाले समय में AI हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में किस तरह इस्तेमाल होगा और दुनिया के लिए इसके नियम कौन तय करेगा। AI का विकास धीमा करने के पक्ष में… डारियो अमोडेई डारियो अमोडेई AI कंपनी एंथ्रोपिक के को-फाउंडर और CEO हैं। उन्होंने 2021 में OpenAI छोड़कर एंथ्रोपिक शुरू की थी। कंपनी ने खुद को AI की सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान देने वाली कंपनी के तौर पर पेश किया है। अमोडेई कई बार चेतावनी दे चुके हैं कि भविष्य की AI बेहद खतरनाक हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा है कि इसका इस्तेमाल जैविक हथियार बनाने जैसे खतरनाक कामों में हो सकता है। वह AI पर सरकारी नियम बनाए जाने की मांग करते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने 3,800 शब्दों का एक लेख लिखकर दुनियाभर में AI के विकास की रफ्तार धीमी करने की योजना सामने रखी। रुख बदलने वाले… सैम ऑल्टमैन सैम ऑल्टमैन OpenAI के को-फाउंडर और CEO हैं। 2023 में उन्होंने AI से इंसानों के खत्म होने के खतरे से जुड़े एक बयान पर हस्ताक्षर किए थे। उसी साल अमेरिकी सीनेट में उन्होंने ताकतवर AI मॉडल पर नियम बनाने का समर्थन भी किया था। हालांकि, 2025 के बीच तक उनका रुख कुछ बदल गया। उन्होंने कहा कि AI में बड़े बदलाव धीरे-धीरे होंगे और उन्हें संभालना संभव होगा। लेकिन जुलाई 2026 में OpenAI ने खुद माना कि टेस्ट के दौरान उसके दो मॉडल्स जानबूझकर टेस्टिंग से निकल भागे और चोरी की लॉगिन डिटेल्स और सिक्योरिटी खामी का इस्तेमाल कर AI कंपनी Hugging Face के सर्वर तक पहुंच गए। वो भी बिना किसी इंसानी दखल के। इसके बाद ऑल्टमैन ने कहा कि अब AI के विकास की रफ्तार धीमी करने का समय आ गया है। उन्होंने अमोडेई की इस बात से सहमति जताई कि AI मॉडल के विकास की रफ्तार कम होनी चाहिए। इलॉन मस्क इलॉन मस्क xAI, स्पेसX और टेस्ला के CEO हैं। मस्क लंबे समय से कहते रहे हैं कि AI के खतरनाक होने की संभावना करीब 10 से 20% है। उन्होंने AI को परमाणु हथियारों से भी ज्यादा खतरनाक बताया है और समय रहते नियम बनाने की मांग की है। हालांकि, उन्होंने xAI शुरू की और राष्ट्रपति ट्रम्प को चुनाव में जिताने के लिए बड़ी रकम खर्च की। ट्रम्प प्रशासन में वह कुछ समय तक नियमों में ढील देने से जुड़े काम से भी जुड़े रहे। इसके बावजूद शनिवार को सोशल मीडिया पर मस्क ने अमोडेई की AI को धीमा करने की मांग का समर्थन किया और लिखा कि “डारियो सही हैं।” AI पर बीच का रास्ता चाहते हैं… सत्या नडेला सत्या नडेला माइक्रोसॉफ्ट के चेयरमैन और CEO हैं। उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट और OpenAI के बीच बड़ी साझेदारी को आगे बढ़ाया है। हाल के समय में माइक्रोसॉफ्ट ने अपने खुद के AI टूल्स पर भी जोर बढ़ाया। नडेला ने हाल ही में कहा कि AI का विकास सोच-समझकर और कंट्रोल्ड रफ्तार से होना चाहिए। वह एडवांस्ड AI सिस्टम पर इंसानों की निगरानी के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि ऐसी सुपरइंटेलिजेंस विकसित करने का कोई मतलब नहीं है जो इंसानों के कंट्रोल में न रहे या जिसका फायदा लोगों को न मिले। इसके साथ ही वह AI के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल और खुले AI सिस्टम का भी समर्थन करते हैं। सुंदर पिचाई सुंदर पिचाई अल्फाबेट और गुगल के CEO हैं। पिचाई कई सालों से कहते रहे हैं कि AI इतना जरूरी है कि इस पर सही तरीके से नियम बनने चाहिए। उन्होंने AI के खतरों को भी माना है। हालांकि, वह बहुत कड़े नियमों के बजाय AI के अलग-अलग इस्तेमाल के हिसाब से नियम बनाने के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि AI से मिलने वाले फायदों को हासिल करने में पीछे रहना भी बड़ा खतरा हो सकता है। मार्क जुकरबर्ग मार्क जुकरबर्ग मेटा के चेयरमैन और CEO हैं। उनका मानना है कि AI का कुछ बड़ी कंपनियों के हाथों में सीमित हो जाना ज्यादा बड़ा खतरा है। इसके मुकाबले AI तक ज्यादा लोगों की पहुंच को वह सुरक्षा का एक तरीका मानते हैं। जुकरबर्ग ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका में AI मॉडल जारी करने की रफ्तार धीमी हुई तो इसका फायदा चीन को मिल सकता है। हालांकि, वह AI की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को भी मानते हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि मेटा भविष्य में अपने सबसे शक्तिशाली AI मॉडल सभी के लिए खुले तौर पर जारी नहीं कर सकती। एलेक्जेंडर वेंग एलेक्जेंडर वेंग 2025 में Meta से जुड़े और कंपनी में AI से जुड़े बड़े कामों की जिम्मेदारी संभाली। वह मेटा के डिजिटल असिस्टेंट AI एजेंट ‘म्यूस’ के विकास से भी
अमेरिका से पैसा निकालने लगे दुनिया के बड़े निवेशक:40 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज से बढ़ी चिंता, सोना खरीद रहे, चीन में निवेश बढ़ा रहे

अमेरिका पर 40 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज है। इसके साथ ब्याज दरें, टैरिफ और दूसरे देशों पर लगाए जा रहे आर्थिक प्रतिबंध भी बढ़ रहे हैं। इससे दुनिया के कुछ निवेशक अब सोच रहे हैं कि अपना पैसा अमेरिका के अलावा कहां लगाया जाए। कुछ बड़े सरकारी फंड अमेरिकी बॉन्ड में निवेश घटा रहे हैं। कई देशों के केंद्रीय बैंक सोना खरीदकर अपना भंडार बढ़ा रहे हैं। वहीं, जर्मनी की कंपनियों ने 2026 की पहली छमाही में अमेरिका में निवेश कम किया और चीन में निवेश बढ़ाया। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि दुनिया अमेरिका से पूरी तरह दूर हो रही है। डॉलर अभी भी दुनिया की सबसे बड़ी रिजर्व करेंसी है और अमेरिकी शेयर बाजार व बॉन्ड में अब भी बड़ी मात्रा में पैसा लगा हुआ है। अमेरिका को कर्ज लेने के लिए ज्यादा ब्याज देना पड़ रहा अमेरिकी बॉन्ड बाजार में निवेशकों की चिंता अब साफ दिखने लगी है। 10 साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड सितंबर में करीब 5% तक पहुंच गई। 11 सितंबर को यह 4.93% थी, जबकि इससे पहले 4.979% तक पहुंच चुकी थी। आसान भाषा में समझें तो यील्ड बढ़ने का मतलब है कि अमेरिका को कर्ज लेने के लिए निवेशकों को ज्यादा ब्याज देना पड़ रहा है। यानी सरकार के लिए कर्ज लेना महंगा होता जा रहा है। इसका असर आगे चलकर सरकारी खर्च पर भी पड़ सकता है। बॉन्ड में निवेशकों की दिलचस्पी बनाए रखने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी पुराने बॉन्ड की खरीद बढ़ा रहा है। हालांकि, ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट का कहना है कि अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था मजबूत है और बॉन्ड की हाल की नीलामियां अच्छी रही हैं। नॉर्वे अमेरिकी बॉन्ड में निवेश घटा सकता है अमेरिका से निवेश कम करने वालों में नॉर्वे का सरकारी फंड भी शामिल है। करीब 2.3 ट्रिलियन डॉलर (₹218.5 लाख करोड़) का यह फंड अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में अपना पैसा कम करने की योजना बना रहा है। नॉर्वे के फंड में सरकारी बॉन्ड का हिस्सा 70% से घटाकर 50% करने का प्रस्ताव है। इसमें सबसे बड़ी कटौती अमेरिकी बॉन्ड में होने की संभावना है। इससे अमेरिका के बॉन्ड में नॉर्वे का निवेश करीब 80 अरब डॉलर तक कम हो सकता है। हालांकि, नॉर्वे सिर्फ अमेरिका से दूरी बनाने के लिए यह बदलाव नहीं कर रहा। वह जापान के सरकारी बॉन्ड और दूसरे तरह के बॉन्ड में पैसा लगाने पर भी विचार कर रहा है। इसका मकसद अपना पैसा अलग-अलग जगह लगाना और बेहतर कमाई के मौके तलाशना है। जर्मन कंपनियों का अमेरिका में निवेश 65% घटा, चीन में एक-तिहाई बढ़ा अमेरिका और चीन में जर्मन कंपनियों के निवेश के आंकड़ों में इस साल बड़ा फर्क दिखा है। 2026 की पहली छमाही में अमेरिका में उनका निवेश 65% घटकर 4.3 अरब यूरो रह गया। वहीं, चीन में निवेश करीब एक-तिहाई बढ़कर 5.6 अरब यूरो पहुंच गया। जर्मन इकोनॉमिक इंस्टीट्यूट की स्टडी के मुताबिक, अमेरिका में जर्मन कंपनियों का निवेश ऐसे समय घटा है, जब ट्रम्प की टैरिफ और व्यापार नीतियों को लेकर कारोबार में अनिश्चितता बनी हुई है। वहीं, चीन में पहले से काम कर रही जर्मन कंपनियां अपने कारोबार में लगातार पैसा लगा रही हैं। डॉलर की हिस्सेदारी धीरे-धीरे घट रही डॉलर अभी भी दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली रिजर्व करेंसी है। लेकिन दुनिया के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर का हिस्सा धीरे-धीरे कम कर रहे हैं। आईएमएफ के मुताबिक, 2025 की आखिरी तिमाही में दुनिया के विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर की हिस्सेदारी 56.77% थी। इससे पिछली तिमाही में यह 56.93% थी। वहीं, चीन की मुद्रा रेनमिन्बी की हिस्सेदारी सिर्फ 1.95% थी। इसका मतलब यह नहीं है कि चीन की मुद्रा अभी डॉलर की जगह लेने वाली है। डॉलर की पकड़ अब भी बहुत मजबूत है। बस कुछ देश अपने पैसे को अलग-अलग जगह रख रहे हैं। वे डॉलर के साथ दूसरी मुद्राओं और सोने में भी अपना भंडार बढ़ा रहे हैं। केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे डॉलर के साथ अब सोना भी केंद्रीय बैंकों के लिए अहम रिजर्व बनता जा रहा है। कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा बढ़ा रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, दुनिया के केंद्रीय बैंकों ने 2025 में कुल 863 टन सोना खरीदा। यह 2024 के मुकाबले कम था, लेकिन लंबे समय के औसत से अब भी काफी ज्यादा रहा। 2022 से 2025 के बीच केंद्रीय बैंकों ने हर साल औसतन करीब 1,000 टन सोना खरीदा। यानी सोने को रिजर्व में शामिल करने का चलन पिछले कुछ सालों से लगातार बना हुआ है। 2026 में भी खरीद जारी चीन-भारत में भी सोने की मांग बढ़ी सोने की बढ़ती मांग सिर्फ केंद्रीय बैंकों तक सीमित नहीं है। आम निवेशक भी सोने में ज्यादा पैसा लगा रहे हैं। 2025 में चीन में सोने की निवेश मांग 28% बढ़ी। भारत में भी सोने में निवेश की मांग 17% बढ़ी। दोनों देशों के बाजारों ने मिलकर दुनिया में सोने की छड़ों और सिक्कों की कुल मांग का आधे से ज्यादा हिस्सा अपने नाम किया। यानी सोने की मांग दो तरफ से बढ़ रही है। एक ओर केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोना बढ़ा रहे हैं, तो दूसरी ओर चीन और भारत जैसे बड़े बाजारों में आम निवेशक भी सोने को निवेश का विकल्प मान रहे हैं। अमेरिका की आर्थिक ताकत अभी भी बरकरार इन बदलावों के बावजूद अमेरिका की आर्थिक ताकत अभी खत्म नहीं हुई है। दुनिया के विदेशी मुद्रा भंडार में आज भी डॉलर की हिस्सेदारी 56% से ज्यादा है। अमेरिकी शेयर बाजार और सरकारी बॉन्ड में भी दूसरे देशों का पैसा लगा हुआ है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट का कहना है कि अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बना हुआ है और सरकारी बॉन्ड की नीलामी भी अच्छी चल रही है।
लीजेंड्री गायिका MS सुब्बुलक्ष्मी की बायोपिक में रश्मिका:जवाहरलाल नेहरू ने इनसे कहा था- आपके सामने मैं मामूली PM, जानिए क्यों गांधी जी थे फैन

लीजेंड्री गायिका MS सुब्बुलक्ष्मी पर बायोपिक बनेगी। रश्मिका मंदाना फिल्म में उनका किरदार निभाएंगी। फिल्म का आधिकारिक लॉन्च 16 सितंबर 2026 को उनकी 110वीं जयंती पर चेन्नई के द म्यूजिक एकेडमी में किया गया। गौतम तिन्ननुरी फिल्म का निर्देशन कर रहे हैं, जो पहले ‘जर्सी’ और ‘किंगडम’ जैसी हिट फिल्में बना चुके हैं। रश्मिका से पहले साई पल्लवी का नाम इस बायोपिक के लिए सामने आया था। रश्मिका पहली बार ऐसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शख्सियत का किरदार निभाएंगी, जिसकी पहचान मुख्य रूप से कर्नाटक शास्त्रीय संगीत से जुड़ी है। महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू भी थे फैन एस.एस.सुब्बूलक्ष्मी कर्नाटक की महान गायिका थीं, जिनके गाए हुए भजन विष्णु सहास्त्रनामम को यूट्यूब पर 10 करोड़ बार सुना जा चुका है। वहीं भजन गोविंदम को 17 मिलियन और श्री वेंकटेश्वरा सुप्रभातम को 47 मिलियन बार सुना गया है। पद्मश्री से लेकर भारत रत्न तक, ऐसा कोई नामी अवॉर्ड नहीं जो इनके नाम ना हो। आवाज में वो आकर्षण था कि महात्मा गांधी और पं. जवाहरलाल नेहरू भी इनके प्रशंसकों में से एक रहे। महात्मा गांधी खास फरमाइश पर इनसे रघुपति राघव राजा राम सुनते थे। नीली साड़ी इन पर इतनी जंचती थी कि इनके नाम पर ही उस रंग का नाम एमएस ब्लू रख दिया गया। जानिए कैसे देश की सबसे बड़ी गायिका बनीं एम.एस.सुब्बूलक्ष्मी? एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी उर्फ कुंजम्मा का जन्म 16 सितंबर 1916 को मदुरै (तमिलनाडु) में हुआ था। उनकी मां शानमुकावादिर अम्माल देवदासी समाज का हिस्सा थीं जो वीणा बजाती थीं और पिता सुब्रमण्यम अय्यर एक सिंगर। मां ने उनकी ट्रेनिंग मशहूर पं. नारायण राव व्यास से करवाई और महज 10 साल की उम्र में उन्होंने पहली रिकॉर्डिंग की। सुब्बुलक्ष्मी मां की स्टेज परफॉर्मेंस के दौरान उनका साथ देते हुए भजन गाया करती थीं। उनकी पहली परफॉर्मेंस 1929 में मद्रास म्यूजिक एकेडमी के मंच पर हुई, तब वो महज 13 साल की थीं। द वायर को दिए इंटरव्यू में सुब्बुलक्ष्मी ने बताया था कि एक दिन वो घर के बाहर बैठीं मिट्टी का घर बना ही रही थीं कि कोई उन्हें उठाकर सीधे मां के पास मंच पर ले गया। मां करीब 50-100 लोगों के सामने परफॉर्म कर रही थीं और वो चाहती थीं कि सुब्बुलक्ष्मी भी चंद गाने सुनाएं। उन्होंने मिट्टी से सने हाथ पोछे और गाना शुरू किया, तो म्यूजिक एकेडमी तालियों से गूंज उठी। इसके बाद उन्हें लगातार गाने के मौके दिए जाने लगे। उस जमाने के मशहूर पत्रकार टी. सदाशिवम ने 1936 में हुई एक सुब्बुलक्ष्मी की इस परफॉर्मेंस के बाद तमिल वीकली मैगजीन आनंदा विकातम में फ्रंटपेज आर्टिकल लिखा, जिसके बाद उनके कॉन्सर्ट में भारी भीड़ पहुंचने लगी। काम के सिलसिले में हुई मुलाकात के बाद दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे और परिवार के खिलाफ जाकर शादी की। सदाशिवम जानते थे कि सुब्बुलक्ष्मी का हुनर सिर्फ मंच तक सीमित रहने के लिए नहीं है। फिल्ममेकर के. सुब्रह्मण्यम से सिफारिश कर सदाशिवम ने सुब्बुलक्ष्मी को फिल्म सेवासदन में लीड रोल दिलवाया। 1938 की ये फिल्म जबरदस्त हिट रही और सुब्बुलक्ष्मी साउथ का बड़ा नाम बनकर उभरीं। सुब्बुलक्ष्मी के गानों को आम जनता तक पहुंचाने के लिए पति सदाशिवम ने खुद पैसे लगाकर फिल्में बनाने का फैसला किया। सुब्बुलक्ष्मी के सुझाव पर सदाशिवम ने मीराबाई पर पहली फिल्म मीरा (1945) बनाई। फिल्म में सुब्बुलक्ष्मी को ही मीराबाई का लीड रोल दिया गया। मीरा का रोल निभाने के लिए सुब्बुलक्ष्मी खुद उन सभी जगहों पर जाकर रहीं, जहां मीरा ने कृष्ण भक्ति में समय बिताया था। 1944 में फिल्म की शूटिंग न्यूटोन स्टूडियो, मद्रास में शुरू हुई, जिसके बाद टीम ने जयपुर, वृंदावन, चित्तौड़ और द्वारका का चयन किया। फिल्म के कॉन्सेप्ट से प्रभावित होकर उदयपुर के महाराजा ने हाथी-घोड़ों के साथ फिल्म बनाने के लिए अपना पैलेस इस्तेमाल करने की इजाजत से लेकर हर तरह से मदद की। महाराजा के मंत्री की मदद से उन्हें शाही हाथी-घोड़े मिले और साथ ही महल में कहीं भी कभी भी शूटिंग करने की इजाजत भी। शूटिंग के लिए महल की शाही डांसर्स भी दी गईं। फिल्म में नजर आए कई एक्स्ट्रा कलाकार भी शाही लोग थे। 136 मिनट की फिल्म में थे सुब्बुलक्ष्मी के 20 गाने 3 नवंबर 1945 को दिवाली पर फिल्म मीरा रिलीज की गई। 136 मिनट की इस फिल्म में 20 गाने थे, जो सुब्बुलक्ष्मी ने ही गाए थे। ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर इतनी बड़ी हिट रही कि दो साल बाद कुछ सीन को रीशूट कर 1947 में हिंदी में मीराबाई नाम से फिर रिलीज किया गया था। प्रीमियर में पहुंचे थे माउंटबेटन, राजेंद्र प्रसाद, इंदिरा गांधी, जवाहरलाल नेहरू 21 नवंबर 1947 को मीराबाई फिल्म रिलीज हुई, जिससे सुब्बुलक्ष्मी तमिल स्टार से नेशनल स्टार बन गईं। फिल्म में सरोजिनी नायडू ने सुब्बुलक्ष्मी का परिचय करवाते हुए उन्हें नाइटेंगल ऑफ इंडिया (भारत की बुलबुल) नाम दिया था। फिल्म के प्रीमियर में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी पहुंचे थे। इनके अलावा लॉर्ड माउंटबेटन, राजेंद्र प्रसाद, विजयालक्ष्मी पंडित और इंदिरा गांधी जैसी देश की अन्य बड़ी हस्तियां भी थीं। फिल्म देखने के बाद जवाहरलाल नेहरू और माउंटबेटन सुब्बुलक्ष्मी के फैन बन गए थे। फिल्म मीरा तमिल सिनेमा में म्यूजिकल कल्ट साबित हुई। ये फिल्म आज भी भारत की 100 सबसे महान फिल्मों की लिस्ट में शामिल है। मीरा हिट होने के बाद उन्हें कई फिल्मों के ऑफर मिले, लेकिन उन्होंने फिल्मों से हमेशा के लिए रिश्ता तोड़ लिया। जवाहरलाल नेहरू ने कहा था- आपके सामने मैं मामूली प्रधानमंत्री हूं द प्रिंट के अनुसार, 1953 में दिल्ली में हुए कर्नाटक समारोह में सुब्बुलक्ष्मी को प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सामने गाने का मौका मिला। जवाहरलाल नेहरू इस बार खुद को उनकी तारीफ करने से नहीं रोक सके। उन्होंने सुब्बुलक्ष्मी के पास जाकर कहा- आपकी आवाज में दिलों के तार हिला देने की ताकत है, मैं आपके सामने क्या हूं, सिर्फ एक मामूली प्रधानमंत्री। गांधी जी भी फैन थे, सामने बैठाकर करते थे गाने की गुजारिश स्वतंत्रता संग्राम में साथ काम करते हुए महात्मा गांधी और सुब्बुलक्ष्मी की दोस्ती हो गई। गांधी जी को उनकी आवाज इतनी पसंद थी कि उन्होंने कई बार सुब्बुलक्ष्मी से सामने बैठकर रघुपति राघव राजा राम सुनाने की गुजारिश की। 2 अक्टूबर 1947 को महात्मा गांधी ने दिल्ली में सुब्बुलक्ष्मी के लिए एक कार्यक्रम









