पाकिस्तान में जन्म, न्यूजीलैंड से रिकॉर्ड:पिता की कोचिंग और अकरम से प्रेरणा; अब्बास ने डेब्यू मैच में ही रचा इतिहास

लाहौर में जन्मे मुहम्मद अब्बास जब एक साल के थे, तब उनका परिवार हजारों किलोमीटर दूर न्यूजीलैंड के ऑकलैंड चला गया था। अब पाकिस्तान की कोई याद उनके पास नहीं बची। लेकिन पहचान दो देशों से मिलकर बनी है- खून में पाकिस्तान और परवरिश में न्यूजीलैंड। अब्बास कहते हैं, ‘मैं बहुत छोटा था, इसलिए कुछ याद नहीं है। लेकिन मेरी पूरी परवरिश न्यूजीलैंड में हुई।’ यही दोहरी पहचान उनकी कहानी को खास बनाती है। अब्बास के पिता की वजह से उनका क्रिकेट से बचपन से ही लगाव था। अब्बास के शुरुआती हीरो पाकिस्तानी पेसर वसीम अकरम रहे। अब्बास कहते हैं, ‘मैंने उनके करियर का आखिरी हिस्सा ही देखा, लेकिन मेरे पापा हमेशा उनके बारे में बताते थे।’ बाद में न्यूजीलैंड के खिलाड़ियों ने उन्हें प्रेरित किया। केन विलियमसन और ट्रेंट बोल्ट उनके रोल मॉडल बने। कुछ साल पहले उनकी जिंदगी में एक बड़ा मोड़ आया। पिता को वेलिंगटन में कोच की नौकरी मिली। अब अब्बास के सामने दो रास्ते थे, ऑकलैंड में रहना या परिवार के साथ वेलिंगटन जाना। उन्होंने परिवार को चुना। यही बदलाव उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक ले आया। मार्च 2025 में उन्हें न्यूजीलैंड के लिए वनडे डेब्यू का मौका मिला। खास बात यह थी कि मुकाबला पाकिस्तान के खिलाफ नेपियर में था। अब्बास कहते हैं ‘यह थोड़ा अजीब अहसास था। मैं उम्मीद नहीं कर रहा था कि खेलूंगा, लेकिन अचानक प्लेइंग इलेवन में आ गया। यह मेरे लिए सपने जैसा था।’ उन्होंने डेब्यू को यादगार बना दिया। नंबर-6 पर बल्लेबाजी करते हुए 26 गेंदों में 52 रन ठोक दिए और डेब्यू मैच में सबसे तेज फिफ्टी का रिकॉर्ड बना दिया। वे मुस्कुराते हुए कहते हैं, ‘मुझे उस समय पता ही नहीं था कि यह रिकॉर्ड है। बाद में बताया गया। अभी भी विश्वास नहीं होता।’ टॉम लैथम जैसे खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करना उन्हें अब भी खास लगता है। हालांकि, पाकिस्तान से उनका रिश्ता अब भी कायम है। वे कहते हैं ‘मेरे कई रिश्तेदार वहां हैं। मैं 2018 तक नियमित जाता था। अब क्रिकेट की वजह से नहीं जा पाता, लेकिन दोनों देशों से मेरा गहरा जुड़ाव है।’ क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं बल्कि पिता से जुड़ा खास रिश्ता अब्बास के क्रिकेटिंग करियर की शुरुआत उनके पिता से होती है। उनके पिता ही उनके कोच भी रहे हैं। क्रिकेट उनके लिए सिर्फ खेल नहीं, बल्कि पिता से जुड़ा रिश्ता भी है। वे बताते हैं, ‘मेरे पिता ही मेरे सबसे बड़े कोच हैं। वे बॉलिंग कोच हैं और बचपन से मैंने उन्हीं के साथ ट्रेनिंग की है। उन्होंने ही मुझे क्रिकेट से जोड़ा।’ पिता के साथ बिताए गए समय, अभ्यास और अनुशासन ने उन्हें एक मजबूत खिलाड़ी बनाया।
पाकिस्तान में जन्म, न्यूजीलैंड से रिकॉर्ड:पिता की कोचिंग और अकरम से प्रेरणा; अब्बास ने डेब्यू मैच में ही रचा इतिहास

लाहौर में जन्मे मुहम्मद अब्बास जब एक साल के थे, तब उनका परिवार हजारों किलोमीटर दूर न्यूजीलैंड के ऑकलैंड चला गया था। अब पाकिस्तान की कोई याद उनके पास नहीं बची। लेकिन पहचान दो देशों से मिलकर बनी है- खून में पाकिस्तान और परवरिश में न्यूजीलैंड। अब्बास कहते हैं, ‘मैं बहुत छोटा था, इसलिए कुछ याद नहीं है। लेकिन मेरी पूरी परवरिश न्यूजीलैंड में हुई।’ यही दोहरी पहचान उनकी कहानी को खास बनाती है। अब्बास के पिता की वजह से उनका क्रिकेट से बचपन से ही लगाव था। अब्बास के शुरुआती हीरो पाकिस्तानी पेसर वसीम अकरम रहे। अब्बास कहते हैं, ‘मैंने उनके करियर का आखिरी हिस्सा ही देखा, लेकिन मेरे पापा हमेशा उनके बारे में बताते थे।’ बाद में न्यूजीलैंड के खिलाड़ियों ने उन्हें प्रेरित किया। केन विलियमसन और ट्रेंट बोल्ट उनके रोल मॉडल बने। कुछ साल पहले उनकी जिंदगी में एक बड़ा मोड़ आया। पिता को वेलिंगटन में कोच की नौकरी मिली। अब अब्बास के सामने दो रास्ते थे, ऑकलैंड में रहना या परिवार के साथ वेलिंगटन जाना। उन्होंने परिवार को चुना। यही बदलाव उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक ले आया। मार्च 2025 में उन्हें न्यूजीलैंड के लिए वनडे डेब्यू का मौका मिला। खास बात यह थी कि मुकाबला पाकिस्तान के खिलाफ नेपियर में था। अब्बास कहते हैं ‘यह थोड़ा अजीब अहसास था। मैं उम्मीद नहीं कर रहा था कि खेलूंगा, लेकिन अचानक प्लेइंग इलेवन में आ गया। यह मेरे लिए सपने जैसा था।’ उन्होंने डेब्यू को यादगार बना दिया। नंबर-6 पर बल्लेबाजी करते हुए 26 गेंदों में 52 रन ठोक दिए और डेब्यू मैच में सबसे तेज फिफ्टी का रिकॉर्ड बना दिया। वे मुस्कुराते हुए कहते हैं, ‘मुझे उस समय पता ही नहीं था कि यह रिकॉर्ड है। बाद में बताया गया। अभी भी विश्वास नहीं होता।’ टॉम लैथम जैसे खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करना उन्हें अब भी खास लगता है। हालांकि, पाकिस्तान से उनका रिश्ता अब भी कायम है। वे कहते हैं ‘मेरे कई रिश्तेदार वहां हैं। मैं 2018 तक नियमित जाता था। अब क्रिकेट की वजह से नहीं जा पाता, लेकिन दोनों देशों से मेरा गहरा जुड़ाव है।’ क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं बल्कि पिता से जुड़ा खास रिश्ता अब्बास के क्रिकेटिंग करियर की शुरुआत उनके पिता से होती है। उनके पिता ही उनके कोच भी रहे हैं। क्रिकेट उनके लिए सिर्फ खेल नहीं, बल्कि पिता से जुड़ा रिश्ता भी है। वे बताते हैं, ‘मेरे पिता ही मेरे सबसे बड़े कोच हैं। वे बॉलिंग कोच हैं और बचपन से मैंने उन्हीं के साथ ट्रेनिंग की है। उन्होंने ही मुझे क्रिकेट से जोड़ा।’ पिता के साथ बिताए गए समय, अभ्यास और अनुशासन ने उन्हें एक मजबूत खिलाड़ी बनाया।
रितेश की फिल्म ‘राजा शिवाजी’ की कमाई 50 करोड़ पार:टॉप-5 मराठी फिल्मों में शामिल; महाराष्ट्र में टैक्स-फ्री करने की मांग

रितेश देशमुख के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘राजा शिवाजी’ ने बॉक्स ऑफिस पर 50 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर लिया है। छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित इस फिल्म को मराठी और हिंदी दोनों भाषाओं में रिलीज किया गया था। हालांकि रिलीज के पांचवें दिन (मंगलवार) को फिल्म की कमाई में थोड़ी गिरावट देखी गई। सैक्निल्क की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को फिल्म ने मराठी वर्जन में करीब 3.35 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया। यह सोमवार के मुकाबले करीब 20.4% कम है। फिल्म के अब तक के कुल नेट कलेक्शन की बात करें, तो यह 44 करोड़ रुपए हो गया है। इसमें मराठी वर्जन का योगदान सबसे ज्यादा 30.5 करोड़ रुपए है। वर्ड-ऑफ-माउथ का मिल रहा फायदा फिल्म का इंडिया ग्रॉस कलेक्शन अब 52.68 करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है। हिंदी वर्जन की शुरुआत मराठी के मुकाबले थोड़ी धीमी रही थी, लेकिन रिव्यू और वर्ड-ऑफ-माउथ की वजह से हिंदी बेल्ट में भी फिल्म की कमाई बढ़ रही है। इस कलेक्शन के साथ ही ‘राजा शिवाजी’ अब तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली टॉप-5 मराठी फिल्मों की लिस्ट में शामिल हो गई है। महाराष्ट्र में टैक्स-फ्री करने की मांग फिल्म की सफलता के बीच शिवसेना (UBT) नेता अंबादास दानवे ने इसे महाराष्ट्र में टैक्स-फ्री करने की मांग उठाई है। दानवे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर कहा है कि यह फिल्म शिवाजी महाराज के महान कार्यों को युवाओं और जनता तक पहुंचाती है। उन्होंने मांग की कि फिल्म को टैक्स-फ्री किया जाए ताकि टिकट सस्ते हों और ज्यादा से ज्यादा लोग इसे सिनेमाघरों में जाकर देख सकें। फिल्म में है बड़ी स्टारकास्ट 1 मई को रिलीज हुई इस फिल्म में रितेश देशमुख ने न सिर्फ मुख्य भूमिका निभाई है, बल्कि इसका निर्देशन भी खुद किया है। फिल्म में संजय दत्त, अभिषेक बच्चन, विद्या बालन, भाग्यश्री और जेनेलिया देशमुख जैसे बड़े सितारे अहम किरदारों में नजर आए हैं। इनके अलावा महेश मांजरेकर, सचिन खेडेकर, फरदीन खान, जितेंद्र जोशी और अमोल गुप्ते ने भी फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं।
रितेश की फिल्म ‘राजा शिवाजी’ की कमाई 50 करोड़ पार:टॉप-5 मराठी फिल्मों में शामिल; महाराष्ट्र में टैक्स-फ्री करने की मांग

रितेश देशमुख के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘राजा शिवाजी’ ने बॉक्स ऑफिस पर 50 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर लिया है। छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित इस फिल्म को मराठी और हिंदी दोनों भाषाओं में रिलीज किया गया था। हालांकि रिलीज के पांचवें दिन (मंगलवार) को फिल्म की कमाई में थोड़ी गिरावट देखी गई। सैक्निल्क की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को फिल्म ने मराठी वर्जन में करीब 3.35 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया। यह सोमवार के मुकाबले करीब 20.4% कम है। फिल्म के अब तक के कुल नेट कलेक्शन की बात करें, तो यह 44 करोड़ रुपए हो गया है। इसमें मराठी वर्जन का योगदान सबसे ज्यादा 30.5 करोड़ रुपए है। वर्ड-ऑफ-माउथ का मिल रहा फायदा फिल्म का इंडिया ग्रॉस कलेक्शन अब 52.68 करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है। हिंदी वर्जन की शुरुआत मराठी के मुकाबले थोड़ी धीमी रही थी, लेकिन रिव्यू और वर्ड-ऑफ-माउथ की वजह से हिंदी बेल्ट में भी फिल्म की कमाई बढ़ रही है। इस कलेक्शन के साथ ही ‘राजा शिवाजी’ अब तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली टॉप-5 मराठी फिल्मों की लिस्ट में शामिल हो गई है। महाराष्ट्र में टैक्स-फ्री करने की मांग फिल्म की सफलता के बीच शिवसेना (UBT) नेता अंबादास दानवे ने इसे महाराष्ट्र में टैक्स-फ्री करने की मांग उठाई है। दानवे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर कहा है कि यह फिल्म शिवाजी महाराज के महान कार्यों को युवाओं और जनता तक पहुंचाती है। उन्होंने मांग की कि फिल्म को टैक्स-फ्री किया जाए ताकि टिकट सस्ते हों और ज्यादा से ज्यादा लोग इसे सिनेमाघरों में जाकर देख सकें। फिल्म में है बड़ी स्टारकास्ट 1 मई को रिलीज हुई इस फिल्म में रितेश देशमुख ने न सिर्फ मुख्य भूमिका निभाई है, बल्कि इसका निर्देशन भी खुद किया है। फिल्म में संजय दत्त, अभिषेक बच्चन, विद्या बालन, भाग्यश्री और जेनेलिया देशमुख जैसे बड़े सितारे अहम किरदारों में नजर आए हैं। इनके अलावा महेश मांजरेकर, सचिन खेडेकर, फरदीन खान, जितेंद्र जोशी और अमोल गुप्ते ने भी फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं।
बिहार के जंगलों में मिलता है ये सूपरफूड फल, त्वचा-बालों के लिए है रामबाण, सिर्फ 2 माह ही है मिलता

Last Updated:May 06, 2026, 10:55 IST Badahar Khane Ke Fayde: बिहार के वनों में पाया जाने वाला बड़हर (बरहर) प्रकृति का एक बहुउपयोगी और पोषण से भरपूर फल है. यह विटामिन A, विटामिन C और फाइबर का बेहतरीन स्रोत है. इसके नियमित सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता है, त्वचा स्वस्थ और चमकदार रहती है तथा बाल मजबूत बनते हैं. इसके औषधीय गुण इम्यूनिटी बढ़ाने, सूजन कम करने और शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करने में सहायक सिद्ध होते हैं. इसके अलावा बड़हर का उपयोग सब्जी, अचार, चटनी और सूखे फल के रूप में भी किया जाता है. इस मौसमी फल को अपने आहार में शामिल करके आप प्राकृतिक तरीके से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं. बड़हर एक अत्यंत पौष्टिक वन्य फल है, जो विटामिन A, C और फाइबर से भरपूर होता है. इसका सेवन पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है, कब्ज दूर करता है और आंतों को स्वस्थ रखता है. यह त्वचा को निखारने, मुंहासों से राहत देने और बालों को मजबूत बनाने में सहायक है. एंटीऑक्सीडेंट गुण इम्यूनिटी बढ़ाते हैं और संक्रमण से बचाव करते हैं. इसके अलावा बड़हर सूजन कम करने, ब्लड शुगर कंट्रोल करने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी उपयोगी है. गर्मियों में इसका नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है. ( एआई फोटो ) बिहार का प्रसिद्ध जंगली फल बड़हर मुख्य रूप से गर्मियों के मौसम में उपलब्ध होता है. यह आमतौर पर मार्च से जून तक मिलता है. सबसे अच्छा समय अप्रैल से मई का महीना है, जब फल पूरी तरह पक जाता है और स्वाद में मीठा-खट्टा होता है. यह फल गर्मी में शरीर को ठंडक प्रदान करता है और पोषण से भरपूर होता है. जून के बाद इसकी उपलब्धता कम हो जाती है. इसलिए स्वास्थ्य लाभ लेने के लिए इसे पके हुए रूप में मई-जून में ही खाएं. ( एआई फोटो ) बिहार में बड़हर मुख्य रूप से जंगलों और ग्रामीण इलाकों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. यह विशेषकर पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, मुंगेर, रोहतास, गया, नवादा, जमुई और सीतामढ़ी के जंगलों में बहुतायत में मिलता है. यह फल मार्च से जून तक उपलब्ध रहता है. सबसे अच्छा समय मई-जून का है. वहीं, गर्मी और लू के मौसम में बड़हर खाना बहुत फायदेमंद है क्योंकि यह शरीर को ठंडक देता है, प्यास बुझाता है, पाचन सुधारता है और गर्मी से होने वाली थकान व कमजोरी को दूर करता है. ( एआई फोटो ) Add News18 as Preferred Source on Google बता दें कि बड़हर खाने से त्वचा में प्राकृतिक निखार आता है. इसमें विटामिन A, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं, जो मुंहासे, दाग-धब्बे कम करने और त्वचा को चमकदार बनाने में मदद करते हैं. जहां नियमित सेवन से त्वचा स्वस्थ, नरम और जवां दिखती है. वहीं, बिहार के स्थानीय बाजारों में बड़हर की कीमत मौसम के अनुसार बदलती रहती है. पके बड़हर की कीमत आमतौर पर ₹40 से ₹80 प्रति किलो तक रहती है. इसके अलावा अच्छी क्वालिटी और कम उपलब्धता के समय यह ₹100 प्रति किलो तक भी पहुंच जाता है. ( एआई फोटो ) वैसे तो बड़हर बिहार का प्रसिद्ध जंगली फल है, जो गर्मियों में जंगलों और ग्रामीण इलाकों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, लेकिन पके बड़हर को लोग बड़े चाव से खाते हैं. इसका मीठा-खट्टा स्वाद गर्मी में विशेष रूप से पसंद किया जाता है. बिहार की महिलाएं बड़हर का स्वादिष्ट अचार भी बनाती हैं, जो साल भर खाया जा सकता है. वहीं, पौष्टिकता से भरपूर यह फल न सिर्फ स्वादिष्ट है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. ( एआई फोटो ) न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
तमिलनाडु में एआईएडीएमके के होगे दो टुकड़े, विजय ने दागे डंक! 30 टुकड़े टूटेंगे?

तमिल की राजनीति में इस बार बड़ा रिवर्सफेयर देखने को मिला है। विधानसभा चुनाव में अभिनेता से नेता बने विक्ट्री की पार्टी टीवीके 108 गेट अचीव कर सबसे बड़ी पार्टी बनी है। टीवीके को समर्थन देने के लिए राजनीतिक दल विशेष गुणा-गणित सेट करने में टिके हैं। इसी क्रम में ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कशगम’ (एआईएडीएमके) में बगावत के सुर दिख रहे हैं। टीवी के सपोर्ट को लेकर पार्टी दो आकर्षक नजर आ रही है। एआईएडीएमके की आज (6 मई) को होने वाली विधायक दल की बैठक भी बताई गई है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के 47 विधायक में से ज्यादातर टीवीके को समर्थन देने की मांग कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता अप्पादी को चेतावनी दी गई है कि अगर उन्होंने जल्द ही निर्णय नहीं लिया तो 30 से अधिक विधायक पार्टी विजय को समर्थन दे देंगे। इस बगावत के नेतृत्व वाले सीवी षणमुगम कर रहे हैं, ऐसी खबर मिल रही है कि कुछ देर में उनके घर पर एआईए पत्रकार के विधायक पहुंच सकते हैं। बिश्नामे की बैठक टी.एल.आई एआईएके पत्रिका के नवनिर्वाचित बैच की रविवार (6 मई) को चेन्नई में बैठक हुई थी, लेकिन ऐन पत्रिका पर यह बात कही गई। पार्टी का एक बड़ा विजय की पार्टी टीवीके कम से कम एक साल के लिए खुलकर समर्थन के पक्ष में है। यह स्थिति इसलिए अहम है क्योंकि टीवीके राज्य क्षेत्र में सबसे बड़ी पार्टी उभरकर सामने आ रही है, लेकिन वह बहुमत के आंकड़ों से पीछे है। टीवीके के लिए 234 क्वार्टर वाली विधानसभा में 118 दरवाजे जरूरी हैं, जबकि टीवीके के लिए 108 दरवाजे जरूरी हैं। टीवीके ने अकेले चुनावी लड़ाई लड़ी थी, इसलिए अब टीचर्स और एआईए मैगजीन्स के दोनों खेमों की डॉक्यूमेंट्री से बातचीत तेजी से हुई है। समर्थकों के अनुसार, शिक्षकों के गठबंधन की सहयोगी कांग्रेस, जिसने पांच-पांचवीं साझेदारी की है, विजय को समर्थन देने के लिए अधिक से अधिक वोट मांगे जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी की जीत पर उन्हें फोन कर बधाई देने के साथ ही सहयोग के संकेत भी दिए जा रहे हैं। तमिलनाडु चुनाव परिणाम 2026: ‘हम पर भरोसा कम…’, टीवीके की ऐतिहासिक जीत पर इमोशनल हुई जीत, ये क्या बोल गए?” href=’https://www.abplive.com/news/india/tamil-nadu-election-result-2026-vijay-emotional-message-more-mocked-us-than-supported-us-tvk-won-108-seats-3125740′ target=”_self”>तमिलनाडु चुनाव परिणाम 2026: ‘हम पर भरोसा कम…’, टीवीके की ऐतिहासिक जीत पर इमोशनल हुई जीत, ये क्या बोल गए? एआईएके अलायंस के सहयोगी ने चार चर्चों की घोषणा की है, वह भी तैयारी के लिए समर्थन दे रहे हैं। जल्द ही राष्ट्रपति अंबुमणि रामदास और उनकी विजय यात्रा पर भी चर्चा हो रही है. विजय पहले ही गठबंधन सरकार के लिए अपनी सहमति जता चुके हैं, जिससे छोटे आश्रमों को आश्रम में जगह-जगह मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। यदि एआईएडीएमके बाहर से समर्थित है, तो विजय आसानी से बहुमत हासिल कर सकती है और सरकार पर मजबूत पकड़ कायम रख सकती है। तमिलनाडु में राहुल गांधी की ‘हाथ’ विजय के साथ, कांग्रेस पार्टी TVK का समर्थन” href=’https://www.abplive.com/news/india/tamil-nadu-election-result-2026-congress-supports-vijay-party-tvk-for-formation-of-government-3125734′ target=”_self”>तमिलनाडु में राहुल गांधी की ‘हाथ’ विजय के साथ, कांग्रेस पार्टी TVK का समर्थन
अन्नाद्रमुक में दरार? विजय का समर्थन करने वाले दो-तिहाई से अधिक विधायकों ने सीवी षणमुगम के चेन्नई कार्यालय में मुलाकात की | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:06 मई, 2026, 10:15 IST करीब 35 विधायक चेन्नई में एआईएडीएमके नेता के दफ्तर पहुंचे. एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी और टीवीके प्रमुख विजय (पीटीआई फाइल फोटो) अन्नाद्रमुक के दो-तिहाई से अधिक विधायक थलापति विजय को समर्थन देने के लिए चेन्नई में राज्यसभा नेता सीवी शनमुगम के कार्यालय में एकत्र हुए, जो पार्टी में दरार का संकेत है। करीब 35 विधायक चेन्नई में एआईएडीएमके नेता के दफ्तर पहुंचे. षणमुगम ने तमिलनाडु चुनाव में मैलम सीट से जीत हासिल की है. कथित तौर पर, इन विधायकों ने एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी से टीवीके के साथ गठबंधन के बारे में सोचने का अनुरोध किया है, जो बहुमत के निशान से 10 सीटों से कम है। यह भी पढ़ें | विजय के पास बहुमत से 10 विधायक कम, कांग्रेस के पास सिर्फ 5: टीवीके कैसे बनाएगी सरकार? तमिलनाडु में एक नाटकीय राजनीतिक बदलाव देखा गया क्योंकि द्रविड़ राजनीति में निहित दोनों पार्टियों में से कोई भी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर नहीं सकी। टीवीके ने अपने पहले चुनाव में 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें हासिल कीं, एआईएडीएमके को 47 सीटें मिलीं। टीवीके, जिसे पहले से ही पांच कांग्रेस विधायकों का समर्थन प्राप्त था, अब अधिक संख्या हासिल करने के लिए सीपीआई और कुछ अन्य दलों तक पहुंच गया है। इससे पहले, एआईएडीएमके नेता के पांडियाराजन ने 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार को “अस्थायी झटका” करार दिया था, यह घोषणा करते हुए कि उनकी पार्टी के पास महत्वपूर्ण वापसी करने के लिए आवश्यक लचीलापन है। अन्नाद्रमुक नेता ने जोर देकर कहा कि मतदाताओं ने “द्रविड़ मॉडल” को खारिज नहीं किया है, क्योंकि द्रमुक और अन्नाद्रमुक के पास सामूहिक रूप से राज्य में 120 से अधिक सीटें हैं। हालांकि, पंडियाराजन ने कहा कि डीएमके के खिलाफ स्पष्ट सत्ता विरोधी लहर का फायदा टीवीके को मिला है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना समाचार राजनीति अन्नाद्रमुक में दरार? विजय का समर्थन करने वाले दो-तिहाई से अधिक विधायकों ने सीवी षणमुगम के चेन्नई कार्यालय में मुलाकात की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
कम उम्र में हो गया है हाई कोलेस्ट्रॉल, तो यहां जानिए एक्सपर्ट के आसान उपाय और डाइट टिप्स

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बदलते खानपान का लोगों की सेहत पर गहरा असर पड़ रहा है. पहले जहां हाई कोलेस्ट्रॉल को उम्रदराज लोगों की समस्या माना जाता था, वहीं अब यह कम उम्र के युवाओं में भी तेजी से देखने को मिल रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते खानपान और जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया, तो यह समस्या आगे चलकर दिल की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है. क्यों बढ़ता है कोलेस्ट्रॉल कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना केवल फैट के सेवन पर निर्भर नहीं करता, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करता है कि हम किस प्रकार का फैट खा रहे हैं. सभी फैट हानिकारक नहीं होते. कुछ हेल्दी फैट्स शरीर के लिए जरूरी होते हैं, जो अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाने और खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में मदद करते हैं. इसलिए डाइट में एवोकाडो, अखरोट, बादाम और ऑलिव ऑयल से बनी हल्की सब्जियों को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है. हर एक घंटे के बाद कम से कम 5 मिनट तक टहलना जरूरी इस विषय पर लोकल 18 की टीम ने अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में कार्यरत आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. मीनाक्षी शर्मा से बातचीत की. उन्होंने बताया कि आजकल लोगों की जीवनशैली काफी बदल गई है और अधिकांश लोग लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं. ऐसे में हर एक घंटे के बाद कम से कम 5 मिनट तक टहलना जरूरी है, ताकि शरीर सक्रिय और स्वस्थ बना रहे. कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर क्या खाएं-पीएं उन्होंने सलाह दी कि खानपान से रिफाइंड ऑयल को हटाकर सरसों का तेल, नारियल तेल और देसी गाय का घी इस्तेमाल करना बेहतर होता है. कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए रात में अलसी का पाउडर लेना फायदेमंद है. साथ ही, लहसुन की 3-4 कलियां रात में पानी में भिगोकर सुबह सेवन करने से भी लाभ मिलता है. डॉ. मीनाक्षी ने बताया कि जिन लोगों को गैस की समस्या रहती है, वे लहसुन का सेवन भोजन के बाद कर सकते हैं. इसके अलावा मेथी दाना और दालचीनी का उपयोग भी आयुर्वेद में लाभकारी माना गया है. अर्जुन की छाल का काढ़ा भी कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में मदद करता है. उन्होंने एक घरेलू उपाय भी बताया कि एक कप दूध में एक कप पानी और 3-4 लहसुन की कलियां डालकर अच्छी तरह उबालें. जब पानी पूरी तरह सूख जाए, तो इस दूध का सेवन करने से भी कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है. इसके अलावा भोजन में चुकंदर का सलाद शामिल करना भी फायदेमंद है. डिनर को लेकर विशेष सावधानी बरतें डिनर को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है, क्योंकि रात का भोजन सीधे पाचन और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है. इसलिए रात का खाना हल्का, संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर होना चाहिए. फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं. ओट्स, दलिया, पालक, लौकी और तोरई जैसी हरी सब्जियों को डिनर में शामिल करना लाभकारी होता है. इसके साथ ही खीरा, टमाटर और गाजर जैसे सलाद पाचन को बेहतर बनाते हैं. प्रोटीन भी संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए रात के समय हल्का लेकिन प्रोटीन युक्त भोजन लेना चाहिए. मूंग दाल, मसूर दाल, ग्रिल्ड पनीर, टोफू, उबले चने और स्प्राउट्स जैसे विकल्प डिनर के लिए उपयुक्त माने जाते हैं. कोलेस्ट्रॉल में क्या न खाएं वहीं, तला-भुना खाना, फास्ट फूड, अधिक नमक और चीनी का सेवन कोलेस्ट्रॉल को तेजी से बढ़ा सकता है. रेड मीट और प्रोसेस्ड फूड से भी दूरी बनाना जरूरी है. विशेषज्ञों का कहना है कि रात के भोजन में जितना संभव हो, सादा और घर का बना खाना ही लेना चाहिए, ताकि दिल की सेहत बनी रहे.
बंगाल में अशांति के बाद तनाव, कोलकाता के बाद अब संदेशखाली में पुलिस-केंद्रीय बल पर बमबारी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद काफी रंगीन हो गए। कई स्थानों से हिंसा, शत्रु और शत्रुओं की खबरें सामने आ रही हैं। मंगलवार (5 मई) को संदेशखाली के बामनघेरी क्षेत्र में राजनीतिक तनाव बढ़ गया। गुंडों ने केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ मिलकर पुलिस पर फायरिंग की। राइफल में तीन सुरक्षाकर्मी घायल हो गए हैं. सरबेरिया-गरती ग्राम पंचायत के बामनघेरी क्षेत्र (वार्ड संख्या 14) में राजनीतिक तनाव भड़काने वाला संदेश उठा। मंगलवार देर रात जब केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ पुलिस के एक इलाके में तोड़फोड़ की गई, इसी दौरान उपद्रवियों ने कथित तौर पर गोलीबारी की सूचना दी। इलाक़े में तालिबान की घटना के बाद तनाव का माहौल है। क्षेत्र में कई हिंसा की घटनाएँ सामने आईं इससे पहले मंगलवार को कोलकाता के न्यूटाउन इलाके में बीजेपी के एक कार्यकर्ता की पीट-पीटकर की हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि इस घटना में रेस्तरां का हाथ है. इस हत्या के बाद परिवार और स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा फूट पड़ा। हमले में कहा गया कि पुलिस ने भीड़ पर लाठीचार्ज करना शुरू कर दिया। न्यूटाउन ही नहीं, राज्य के कई और एशिया से भी हिंसा की खबरें आती हैं। हावड़ा के जगतवर्षपुर में रेस्तरां के जंगल में आग लग गई, जबकि कोलकाता के हॉग मार्केट इलाके में भी भीषण तबाही मच गई। वहीं, जलपाईगुड़ी, दक्षिण 24 परगना और आसनसोल जैसे तेलंगाना में भी आश्रम और भाजपा समर्थकों के बीच आवेश और उग्र घटनाएं सामने आई हैं। पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम: बंगाल में सरकार की शपथ कब लेंगे? बीजेपी नेताओं ने बताई तारीख, मोदी ने रखी मुहर” href=’https://www.abplive.com/news/india/west-bengal-election-result-2026-bjp-President-samik-bhattcharya-statement-on-victory-specially-thanked-diaspore-for-win-information-on-swearing-in-ceremony-3125399′ target=”_self”>पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम: बंगाल में सरकार की शपथ कब लेंगे? बीजेपी नेताओं ने बताई तारीख, मोदी ने रखी मुहर हिंसा की घटनाओं को लेकर EC सख्त हिंसा की घटनाओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने निर्देश दिया है कि जो भी लोग हिंसा फैलाने या हिंसा करने में शामिल हैं, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। सीईसी ने राज्य के बड़े अधिकारियों जैसे मुख्य सचिव, कुणाल, कोलकाता पुलिस आयुक्त और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के प्रमुख ठिकानों (डीजी) को रहने की आवश्यकता बताई है। साथ ही सभी वास्तुशिल्पियों, एसपी और पुलिस अधिकारियों को भी छात्रावास में रहने का आदेश दिया गया है। चुनाव आयोग ने यह भी साफ कर दिया है कि चुनाव के बाद किसी भी तरह की हिंसा पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जाएगा। हिंसा भड़काने और दुश्मनी करने वाले तुरंत गिरफ्तार होंगे। बंगाल में नई सरकार बनने की हलचल तेज, EC ने भेजा नोटिस, 8 मई को होगी बीजेपी विधायकों की बैठक” href=’https://www.abplive.com/elections/west-bengal-assembly-election-ec-notification-for-government-formation-bjp-mla-meeting-on-may-8-when-will-swearing-in-ceremony-3125789′ target=”_self”>बंगाल में नई सरकार बनने की हलचल तेज, EC ने भेजा नोटिस, 8 मई को होगी बीजेपी विधायकों की बैठक
खाना बनाने से दिमाग होता है तेज? नहीं होती भूलने की बीमारी; हफ्ते में एक दिन भी किया तो मिलता है फायदा

Cooking for brain health : अक्सर हम खाना बनाने को एक थकान भरा काम या रोज़मर्रा की ज़िम्मेदारी मानते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि किचन में बिताया गया आपका थोड़ा सा समय आपकी मानसिक सेहत और याददाश्त के लिए किसी दवा से कम नहीं है? हाल ही में आई एक नई रिसर्च ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कुकिंग न केवल आपके पेट को तृप्त करती है, बल्कि यह आपके दिमाग को भी ‘शार्प’ बनाती है. हाल ही में हुए एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, खाना पकाने की प्रक्रिया एक “कॉग्निटिव एक्सरसाइज” (Cognitive Exercise) की तरह काम करती है. रिसर्च में यह पाया गया कि जो लोग हफ्ते में कम से कम एक दिन भी मन लगाकर खाना बनाते हैं, उनमें भूलने की बीमारी (Dementia) और अल्जाइमर का खतरा उन लोगों की तुलना में काफी कम होता है जो बिल्कुल कुकिंग नहीं करते. जापान के वैज्ञानिकों के अनुसार, किचन में बिताया गया समय आपको भूलने की बीमारी यानी डिमेंशिया (Dementia) से बचा सकता है. 6 साल लंबी स्टडी में हुआ बड़ा खुलासाटोक्यो इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (Tokyo Institute of Science) के रिसर्चर्स ने 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लगभग 11 हजार लोगों की लाइफस्टाइल पर 6 साल तक बारीकी से नजर रखी. बीएमजे जर्नल ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड कम्युनिटी हेल्थ में पब्लिश इस रिपोर्ट के नतीजे चौंकाने वाले रहे. अध्ययन में पाया गया कि जो लोग नियमित रूप से अपने लिए खाना बनाते हैं, उनमें डिमेंशिया होने का खतरा उन लोगों की तुलना में काफी कम होता है जो कुकिंग नहीं करते. यह रिसर्च साबित करती है कि खाना बनाना केवल एक काम नहीं, बल्कि एक जटिल मानसिक प्रक्रिया है. वैज्ञानिकों के अनुसार, हफ्ते में महज एक बार खुद के लिए खाना बनाना भी आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए ‘सुरक्षा कवच’ की तरह काम कर सकता है. कुकिंग से कैसे तेज होता है दिमाग?मल्टीटास्किंग और प्लानिंग: जब आप कोई डिश तैयार करते हैं, तो आप एक साथ कई काम कर रहे होते हैं सब्जी काटना, मसालों का अंदाज़ा लगाना और आंच पर नज़र रखना. यह आपके ब्रेन की प्लानिंग और एग्जीक्यूशन पावर को बढ़ाता है. इंद्रियों का मेल (Sensory Engagement): मसालों की महक, तड़के की आवाज़ और सब्जी का रंग ये सभी हमारी पांचों इंद्रियों को उत्तेजित करते हैं, जिससे न्यूरॉन्स सक्रिय रहते हैं. फोकस और एकाग्रता: रेसिपी को स्टेप-बाय-स्टेप फॉलो करने के लिए गहरी एकाग्रता की आवश्यकता होती है, जो मेडिटेशन (ध्यान) के समान लाभ देती है. हफ्ते में एक दिन भी है काफीअगर आप बहुत व्यस्त रहते हैं और रोज़ खाना नहीं बना सकते, तो रिसर्च आपके लिए एक अच्छी खबर लेकर आई है. शोधकर्ताओं का कहना है कि हफ्ते में सिर्फ एक दिन भी अगर आप अपनी पसंद की कोई डिश पूरे होश और खुशी के साथ बनाते हैं, तो इसके फायदे आपको मानसिक रूप से सक्रिय रखने के लिए पर्याप्त हैं. यह प्रक्रिया तनाव (Stress) को कम करती है और ‘डोपामाइन’ जैसे हैप्पी हार्मोन्स को रिलीज़ करती है. भूलने की बीमारी से बचावबढ़ती उम्र के साथ याददाश्त का कम होना एक आम समस्या है. लेकिन कुकिंग करते समय जब हम नई रेसिपी याद रखते हैं या सामग्री का सही अनुपात तय करते हैं, तो हमारे दिमाग के ‘हिप्पोकैम्पस’ (याददाश्त के लिए जिम्मेदार हिस्सा) की कसरत होती है. इससे ब्रेन सेल्स के बीच कनेक्शन मज़बूत होता है और लंबे समय में भूलने की बीमारी का खतरा टल जाता है. अगली बार जब आप किचन में जाएं, तो उसे बोझ न समझें. उसे एक ‘मेंटल जिम’ (Mental Gym) की तरह देखें जहाँ आप अपनी याददाश्त और रचनात्मकता को निखार रहे हैं. तो इंतज़ार किस बात का? इस वीकेंड अपनी पसंदीदा रेसिपी निकालें और अपने दिमाग को एक नई धार दें! (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)








