लालबागचा राजा के दरबार में पहुंचे विद्युत जामवाल:आरती के साथ शंख और डमरू बजाकर लिया बप्पा का आशीर्वाद

बॉलीवुड एक्टर विद्युत जामवाल गणेशोत्सव के मौके पर मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा के दरबार में बप्पा के दर्शन करने पहुंचे। सोमवार को गणेश चतुर्थी के अवसर पर उन्होंने बप्पा के दर्शन किए। दर्शन के दौरान विद्युत ने आरती करने के साथ शंख और डमरू भी बजाया। इस दौरान वे पारंपरिक सफेद लिबास में नजर आए। लालबागचा राजा का इस साल 2026 में 93वां वर्ष है। इस बार बप्पा का दरबार महादेव-थीम वाले मंदिर के रूप में सजाया गया है, जिसमें एक विशाल त्रिशूल भी स्थापित किया गया है। पहले भी कई मौकों पर शंख बजाया है हालांकि यह पहली बार नहीं है जब विद्युत जामवाल ने शंख बजाया है। जून 2026 में एक योग कार्यक्रम के दौरान भी विद्युत ने शंखनाद किया था। महाकुंभ 2025 में भी विद्युत जामवाल को शंख बजाते हुए देखा गया था। वहीं, साल 2025 की शुरुआत में विद्युत ने शंख बजाते हुए अपना एक वीडियो शेयर किया था। उन्होंने बताया था कि शंख बजाने से शरीर और मन, दोनों पर सकारात्मक असर पड़ता है। उन्होंने वीडियो के कैप्शन में लिखा था, “इस नए साल में जो भी इस शंख की आवाज सुने, उसकी तरंगें उसके अंदर की बेहतरीन चीजों को बाहर लाएं। यह आवाज उस व्यक्ति के साथ शेयर करें, जो आपके हिसाब से और बेहतर करने की क्षमता रखता है।” विद्युत ने 2024 के ‘एक्शन हीरो फिटनेस अवॉर्ड्स’ के दौरान स्टेज पर भी शंख बजाने की यह प्रैक्टिस दिखाई थी। उन्होंने कहा था, “यह 99.99 फीसदी समस्याओं को दूर कर सकता है।” उन्होंने आगे बताया था कि शंख बजाना सीखना उनकी फिटनेस जर्नी का एक अहम हिस्सा रहा है। सेलेब्स ने बप्पा का स्वागत किया गणेश उत्सव 2026 में बॉलीवुड और टीवी सितारों ने पूरे उत्साह के साथ गणपति बप्पा का स्वागत किया। गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले सुनीता आहूजा बप्पा को घर लेकर आईं। इस दौरान वह ढोल की थाप पर अकेले डांस करती नजर आईं। शिल्पा शेट्टी, हंसिका मोटवानी, धनश्री वर्मा, डेजी शाह और दीपशिखा नागपाल समेत कई सितारों ने घर में गणपति की स्थापना की। शिल्पा शेट्टी ने बप्पा की आरती भी की। अंकिता लोखंडे भी भारी बारिश के बीच गणपति उत्सव में शामिल हुईं। अमिताभ बच्चन हर रविवार की तरह जलसा के बाहर फैंस से मिलने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने ‘गणपति बप्पा मोरया’ लिखा पटका पहना था। अंबानी परिवार ने भी भव्य तरीके से बप्पा का स्वागत किया। राधिका मर्चेंट भांजे को गोद में लेकर दर्शन करने पहुंचीं। अनंत अंबानी भी उनके साथ मौजूद रहे। टीवी प्रोड्यूसर राजन शाही के गणपति पंडाल में ‘अनुपमा’ फेम रूपाली गांगुली भी नजर आईं। देखिए सेलेब्स की तस्वीरें
सोहेल खान के घर हुई गणपति पूजा:बहन अर्पिता-अलवीरा समेत पूरा खान परिवार पहुंचा, विसर्जन में शामिल हो सकते हैं सलमान

मुंबई में गणेशोत्सव की धूम के बीच अभिनेता सोहेल खान के घर भी गणपति पूजा का आयोजन किया गया। इस खास मौके पर खान परिवार के कई सदस्य एक साथ नजर आए। अर्पिता खान शर्मा, अलवीरा खान अग्निहोत्री और मां सलमा खान सोहेल के घर गणपति बप्पा के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचीं। परिवार ने पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ बप्पा का स्वागत किया। इस दौरान घर पर धार्मिक माहौल देखने को मिला। अर्पिता और अलवीरा पारंपरिक अंदाज में नजर आईं, वहीं सलमा खान भी परिवार के साथ गणपति पूजा में शामिल हुईं। सलमान भी शाम की आरती में शामिल हो सकते हैं। खान परिवार हर साल गणेशोत्सव को खास अंदाज में मनाता है। ऐसे में सोहेल खान के घर हुई इस पूजा में परिवार की एकजुटता और बप्पा के प्रति आस्था साफ नजर आई। पिछले साल बहन अर्पिता के घर की गणेश आरती में शामिल हुए थे सलमान सलमान खान की बहन अर्पिता खान शर्मा हर साल गणपति बप्पा की स्थापना करती हैं। बीते साल सलमान खान समेत पूरा खान परिवार उनके घर गणेश आरती में शामिल हुआ था। देखिए 2025 में हुई गणेश आरती से खान परिवार की झलक- सलमान खान का परिवार हर साल गणेशोत्सव में चर्चा में रहता है। सोहेल खान, अर्पिता खान के घर गणपति स्थापना होती है और विसर्जन में पूरा परिवार साथ नजर आता है। साल 2024 में भी सलमान खान बहन के गणपति विसर्जन का हिस्सा बने। रिब इंजरी के बावजूद उन्होंने विसर्जन में जमकर डांस किया था। देखिए 2024 में खान परिवार के गणपति विसर्जन की झलक-
यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार के बीच लड़ाई तेज:सऊदी पर ड्रोन और मिसाइल से हमला हमल, 82 हजार से ज्यादा लोग बेघर

यमन में ईरान समर्थित हूतियों और सरकार के बीच लड़ाई तेज हो गई है। रविवार को यमनी सरकारी बलों ने लाल सागर के पास हूती ठिकानों पर हमले किए। इसके जवाब में हूतियों ने पड़ोसी सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। यमनी सरकार ने लाल सागर के तट पर और सैनिक भेजने की बात कही है। पिछले हफ्ते हूतियों ने लाल सागर के किनारे मौजूद मोखा बंदरगाह शहर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के एक द्वीप पर कब्जा कर लिया था। यह जलडमरूमध्य एक अहम समुद्री रास्ता है। संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी के मुताबिक, सितंबर की शुरुआत से अब तक यमन में 82 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं। लड़ाई बढ़ने से वैश्विक तेल सप्लाई और कीमतों पर भी दबाव बढ़ रहा है। यमन की सेना के 500 से ज्यादा लड़ाके मारे गए सरकार के साथ लड़ रहे नेशनल रेजिस्टेंस बल ने बताया कि पिछले 4 हफ्तों में पश्चिमी तट पर उसके 500 से ज्यादा लड़ाके मारे गए। यह इस बल की ओर से जारी की गई पहली व्यापक मौतों की संख्या है। बल ने यह भी दावा किया कि होदेदा और ताइज प्रांतों में 1,000 से ज्यादा हूती लड़ाके मारे गए। हूती प्रवक्ता ने इन आंकड़ों पर टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया। खबर अपडेट हो रही है…
नीलम ने गोविंदा संग रिश्ते की अफवाहों पर रिएक्शन दिया:बोलीं- उस समय मैं बहुत छोटी थी, उनकी शादी की जानकारी बाद में मिली

एक्ट्रेस नीलम कोठारी ने हाल ही में गोविंदा के साथ अपने रिश्ते की अफवाहों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब दोनों के रिश्ते को लेकर चर्चाएं थीं, तब वह बहुत छोटी थीं और उन्हें गोविंदा की शादी की जानकारी नहीं थी। नीलम ने यह बात टाइम्स नाउ के इंटरव्यू में कही। गौरतलब है कि नीलम कोठारी और गोविंदा ने 1980 के दशक और 1990 के शुरुआती वर्षों में कई फिल्मों में साथ काम किया था। इसके बाद दोनों के रिश्ते को लेकर अफवाहें वर्षों तक चलती रहीं। इंटरव्यू में नीलम से कहा गया कि गोविंदा ऑफ-स्क्रीन उनसे प्यार करते थे। इस पर नीलम ने कहा, “मुझे नहीं पता। सबसे पहले तो मैं उस समय बहुत छोटी थी। अब मुझे पता चला है कि शायद उस वक्त उनकी शादी हो चुकी थी।” वहीं, नीलम के पास बैठे पति समीर सोनी ने गोविंदा को लेकर कहा, “वह बहुत अच्छे इंसान हैं। जब भी मैं उनसे मिला हूं, वह बहुत गर्मजोशी से मिले हैं।” समीर ने यह भी कहा, “जो बात 20 साल पहले हुई भी हो सकती है और नहीं भी, उसके बारे में मुझे पता ही नहीं, तो मैं उसे लेकर कैसे बैठ सकता हूं? वह अब भी दावा करते हैं कि वह तुमसे बहुत प्यार करते थे।” रिश्ता उनके लिए विकल्प नहीं था नीलम कोठारी ने बताया कि उस दौर में उनके लिए रिश्ता बनाना कभी विकल्प नहीं था। उनका पूरा ध्यान हिंदी सीखने और फिल्मों में काम करने पर था। नीलम ने यह भी बताया कि कम उम्र की वजह से उनके परिवार का कोई सदस्य शूटिंग पर उनके साथ जाता था। नीलम के मुताबिक, सेट पर सभी लोग उन्हें बहुत प्यार करते थे। उनके को-स्टार्स भी उनके साथ बच्चे जैसा व्यवहार करते थे। समीर सोनी ने कहा कि जैकी श्रॉफ और संजय दत्त खास तौर पर नीलम को लेकर बहुत प्रोटेक्टिव रहते थे। नीलम और गोविंदा की जोड़ी नीलम कोठारी और गोविंदा की जोड़ी ने 80 और 90 के दशक में कई फिल्मों में साथ काम किया था। पर्दे पर उनकी केमिस्ट्री दर्शकों को खूब पसंद आती थी। इस जोड़ी की पर्दे पर शुरुआत फिल्म ‘लव 86’ से हुई थी। 14 फरवरी 1986 को रिलीज हुई यह मूवी गोविंदा की डेब्यू फिल्म भी थी। इसके 2 हफ्ते बाद 28 फरवरी 1986 को दोनों की दूसरी फिल्म ‘इल्जाम’ रिलीज हुई। इस फिल्म के गानों और गोविंदा के बेहतरीन डांस (खासकर गाने ‘स्ट्रीट डांसर’ ) ने उन्हें रातों-रात फिल्म इंडस्ट्री में बड़ी पहचान दिलाई। दोनों ‘खुदगर्ज’ (1987) में साथ नजर आए। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर सफल रही। इसके बाद नीलम और गोविंदा ने ‘सिंदूर’, ‘हत्या’, ‘दो कैदी’ और ‘फर्ज की जंग’ जैसी कई अन्य फिल्मों में भी साथ काम किया। इसी दौरान दोनों के रिश्ते की अफवाहें सामने आई थीं। 15 साल की उम्र में फिल्मों में डेब्यू किया नीलम कोठारी का जन्म हांगकांग में हुआ था। उनके पिता शिशिर कोठारी गुजराती जैन थे, जबकि मां परवीन कोठारी पारसी थीं। बचपन से ही नीलम को संगीत और डांस में रुचि थी। उन्होंने कीबोर्ड बजाना और जैज बैले भी सीखा। उनकी पढ़ाई हांगकांग के आइलैंड स्कूल में हुई। बाद में उनका परिवार बैंकॉक शिफ्ट हो गया। मुंबई में छुट्टियां बिताने के दौरान उनकी मुलाकात फिल्म डायरेक्टर रमेश बहल से हुई। उन्होंने नीलम को फिल्म में काम करने का ऑफर दिया, जिसके बाद नीलम ने एक्टिंग में हाथ आजमाने का फैसला किया। इसके बाद, जब वो महज 15 साल की थीं, तब बतौर लीड उनकी पहली फिल्म ‘जवानी’ (1984) रिलीज हुई थी। वहीं, कई लोकप्रिय फिल्मों में काम करने के बाद नीलम ने साल 2001 में अभिनय से दूरी बना ली थी। बाद में उन्होंने ज्वेलरी डिजाइनिंग में कदम रखा। कई साल बाद नीलम 2020 में रियलिटी शो ‘फैबुलस लाइव्स ऑफ बॉलीवुड वाइव्स’ में नजर आईं। इसमें उनकी दोस्त महीप कपूर, भावना पांडे और सीमा सजदेह भी थीं। वह इसके स्पिन-ऑफ ‘फैबुलस लाइव्स वर्सेज बॉलीवुड वाइव्स’ में भी नजर आईं। इसमें मुंबई और दिल्ली की कास्ट को साथ लाया गया था।
नीलम ने गोविंदा संग रिश्ते की अफवाहों पर रिएक्शन दिया:बोलीं- उस समय मैं बहुत छोटी थी, उनकी शादी की जानकारी बाद में मिली

एक्ट्रेस नीलम कोठारी ने हाल ही में गोविंदा के साथ अपने रिश्ते की अफवाहों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब दोनों के रिश्ते को लेकर चर्चाएं थीं, तब वह बहुत छोटी थीं और उन्हें गोविंदा की शादी की जानकारी नहीं थी। नीलम ने यह बात टाइम्स नाउ के इंटरव्यू में कही। गौरतलब है कि नीलम कोठारी और गोविंदा ने 1980 के दशक और 1990 के शुरुआती वर्षों में कई फिल्मों में साथ काम किया था। इसके बाद दोनों के रिश्ते को लेकर अफवाहें वर्षों तक चलती रहीं। इंटरव्यू में नीलम से कहा गया कि गोविंदा ऑफ-स्क्रीन उनसे प्यार करते थे। इस पर नीलम ने कहा, “मुझे नहीं पता। सबसे पहले तो मैं उस समय बहुत छोटी थी। अब मुझे पता चला है कि शायद उस वक्त उनकी शादी हो चुकी थी।” वहीं, नीलम के पास बैठे पति समीर सोनी ने गोविंदा को लेकर कहा, “वह बहुत अच्छे इंसान हैं। जब भी मैं उनसे मिला हूं, वह बहुत गर्मजोशी से मिले हैं।” समीर ने यह भी कहा, “जो बात 20 साल पहले हुई भी हो सकती है और नहीं भी, उसके बारे में मुझे पता ही नहीं, तो मैं उसे लेकर कैसे बैठ सकता हूं? वह अब भी दावा करते हैं कि वह तुमसे बहुत प्यार करते थे।” रिश्ता उनके लिए विकल्प नहीं था नीलम कोठारी ने बताया कि उस दौर में उनके लिए रिश्ता बनाना कभी विकल्प नहीं था। उनका पूरा ध्यान हिंदी सीखने और फिल्मों में काम करने पर था। नीलम ने यह भी बताया कि कम उम्र की वजह से उनके परिवार का कोई सदस्य शूटिंग पर उनके साथ जाता था। नीलम के मुताबिक, सेट पर सभी लोग उन्हें बहुत प्यार करते थे। उनके को-स्टार्स भी उनके साथ बच्चे जैसा व्यवहार करते थे। समीर सोनी ने कहा कि जैकी श्रॉफ और संजय दत्त खास तौर पर नीलम को लेकर बहुत प्रोटेक्टिव रहते थे। नीलम और गोविंदा की जोड़ी नीलम कोठारी और गोविंदा की जोड़ी ने 80 और 90 के दशक में कई फिल्मों में साथ काम किया था। पर्दे पर उनकी केमिस्ट्री दर्शकों को खूब पसंद आती थी। इस जोड़ी की पर्दे पर शुरुआत फिल्म ‘लव 86’ से हुई थी। 14 फरवरी 1986 को रिलीज हुई यह मूवी गोविंदा की डेब्यू फिल्म भी थी। इसके 2 हफ्ते बाद 28 फरवरी 1986 को दोनों की दूसरी फिल्म ‘इल्जाम’ रिलीज हुई। इस फिल्म के गानों और गोविंदा के बेहतरीन डांस (खासकर गाने ‘स्ट्रीट डांसर’ ) ने उन्हें रातों-रात फिल्म इंडस्ट्री में बड़ी पहचान दिलाई। दोनों ‘खुदगर्ज’ (1987) में साथ नजर आए। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर सफल रही। इसके बाद नीलम और गोविंदा ने ‘सिंदूर’, ‘हत्या’, ‘दो कैदी’ और ‘फर्ज की जंग’ जैसी कई अन्य फिल्मों में भी साथ काम किया। इसी दौरान दोनों के रिश्ते की अफवाहें सामने आई थीं। 15 साल की उम्र में फिल्मों में डेब्यू किया नीलम कोठारी का जन्म हांगकांग में हुआ था। उनके पिता शिशिर कोठारी गुजराती जैन थे, जबकि मां परवीन कोठारी पारसी थीं। बचपन से ही नीलम को संगीत और डांस में रुचि थी। उन्होंने कीबोर्ड बजाना और जैज बैले भी सीखा। उनकी पढ़ाई हांगकांग के आइलैंड स्कूल में हुई। बाद में उनका परिवार बैंकॉक शिफ्ट हो गया। मुंबई में छुट्टियां बिताने के दौरान उनकी मुलाकात फिल्म डायरेक्टर रमेश बहल से हुई। उन्होंने नीलम को फिल्म में काम करने का ऑफर दिया, जिसके बाद नीलम ने एक्टिंग में हाथ आजमाने का फैसला किया। इसके बाद, जब वो महज 15 साल की थीं, तब बतौर लीड उनकी पहली फिल्म ‘जवानी’ (1984) रिलीज हुई थी। वहीं, कई लोकप्रिय फिल्मों में काम करने के बाद नीलम ने साल 2001 में अभिनय से दूरी बना ली थी। बाद में उन्होंने ज्वेलरी डिजाइनिंग में कदम रखा। कई साल बाद नीलम 2020 में रियलिटी शो ‘फैबुलस लाइव्स ऑफ बॉलीवुड वाइव्स’ में नजर आईं। इसमें उनकी दोस्त महीप कपूर, भावना पांडे और सीमा सजदेह भी थीं। वह इसके स्पिन-ऑफ ‘फैबुलस लाइव्स वर्सेज बॉलीवुड वाइव्स’ में भी नजर आईं। इसमें मुंबई और दिल्ली की कास्ट को साथ लाया गया था।
ब्रिटेन के बंटवारे पर साथ आएंगे स्कॉटलैंड, वेल्स-नॉर्दर्न आयरलैंड:तीनों जगहों के नेताओं की कल मीटिंग, अलग होने के पक्ष में

UK के एकजुट रहने पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड के फर्स्ट मिनिस्टर सोमवार को वेल्स की राजधानी कार्डिफ में मिलेंगे। स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड की सरकार के प्रमुख को फर्स्ट मिनिस्टर कहा जाता है। इनके साथ अलग देश आयरलैंड की पार्टी सिन फेन की अध्यक्ष मैरी लू मैकडोनाल्ड भी रहेंगी। बैठक में नेता हर क्षेत्र को अपना भविष्य खुद तय करने का अधिकार देने की बात पर साझा बयान जारी कर सकते हैं। इसमें जरूरत पड़ने पर आजादी या दूसरे बड़े बदलावों पर जनमत संग्रह कराने की बात भी शामिल है। इस बैठक से UK पर दबाव बढ़ सकता है। UK से अलग होने के पक्ष में तीनों जगहों की पार्टियां ब्रिटेन की केंद्र सरकार देश को एकजुट रखने के पक्ष में है। लेकिन स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड में ज्यादा अधिकार और बड़े बदलाव की मांग बढ़ रही है। इन तीनों जगहों पर ऐसी पार्टियां प्रभावशाली हैं जो ब्रिटेन की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव चाहती हैं। स्कॉटलैंड में SNP आजादी का समर्थन करती है। वेल्स में प्लाइड कम्री भी आजादी की मांग करती है। वहीं नॉर्दर्न आयरलैंड में सिन फेन आयरलैंड के साथ जुड़ने का समर्थन करती है। द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, स्कॉटलैंड के फर्स्ट मिनिस्टर जॉन स्विनी और वेल्स के फर्स्ट मिनिस्टर रुन एपी इओर्थवर्ट के साथ नॉर्दर्न आयरलैंड का नेतृत्व भी साझा घोषणा का समर्थन कर सकता है। बैठक में आजादी और संवैधानिक बदलाव के अलावा अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, यूरोप और दूसरे देशों से रिश्ते मजबूत करने पर भी चर्चा होगी। स्कॉटलैंड में फिर जनमत संग्रह की चर्चा स्कॉटलैंड की आजादी इस पूरी बहस का सबसे बड़ा मुद्दा है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने हाल ही में कहा था कि अगर स्कॉटलैंड और नॉर्दर्न आयरलैंड में आजादी के पक्ष में लोगों के बीच सहमति बनती है, तो एक और जनमत संग्रह पर विचार किया जा सकता है। SNP ने बर्नहम के इस बयान को तुरंत मुद्दा बना लिया। इसके बाद में बर्नहम को सफाई देनी पड़ी। उन्होंने स्कॉटलैंड के फर्स्ट मिनिस्टर स्विनी को चिट्ठी लिखकर कहा कि अगले आम चुनाव से पहले आजादी पर जनमत संग्रह नहीं कराया जाएगा। नॉर्दर्न आयरलैंड को लेकर भी उन्होंने कहा कि अभी ब्रिटेन से अलग होने को लेकर ऐसा माहौल नहीं है। बर्नहम ने 2024 के चुनावी घोषणापत्र का हवाला देते हुए कहा कि लेबर पार्टी स्कॉटलैंड की आजादी या एक और जनमत संग्रह का समर्थन नहीं करती। स्विनी – UK पर एकजुट रहने का दबाव बढ़ा स्विनी ने बर्नहम के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहली बार स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड में ऐसे फर्स्ट मिनिस्टर हैं जो आजादी के पक्ष में हैं। उनके मुताबिक, इससे साफ है कि ब्रिटेन को एकजुट रखने वाली मौजूदा व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। वहीं, वेल्स में भी ज्यादा अधिकार की मांग तेज हो गई है। मई में हुए चुनाव में वहां ब्रिटेन की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली पार्टियों को मजबूती मिली है। 96 सीट पर हुए चुनाव में अलग देश की समर्थक प्लाइड कम्री को 43 जबकि लेबर पार्टी को सिर्फ 9 सीटें मिलीं। इस चुनाव के बाद प्लाइड कम्री के रुन एपी इओर्थवर्ट वेल्स के फर्स्ट मिनिस्टर बने। नॉर्दर्न आयरलैंड के पास आयरलैंड से जुड़ने का रास्ता नॉर्दर्न आयरलैंड का मामला स्कॉटलैंड और वेल्स से अलग है। 1998 के गुड फ्राइडे समझौते के तहत अगर यह संभावना दिखे कि नॉर्दर्न आयरलैंड के ज्यादातर लोग ब्रिटेन से अलग होकर आयरलैंड के साथ जुड़ना चाहते हैं, तो वहां जनमत संग्रह कराया जा सकता है। यहां की नेता सिन फेन का कहना है कि कार्डिफ की बैठक में भी इसी अधिकार की बात उठाई जाएगी कि हर देश और क्षेत्र को लोकतांत्रिक तरीके से अपना भविष्य तय करने का मौका मिलना चाहिए। ट्रम्प के बयान से आयरलैंड के एकीकरण की चर्चा बढ़ी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी हाल में आयरलैंड के एकीकरण पर बयान दिया है। शनिवार को डबलिन दौरे के दौरान ट्रम्प ने कहा कि वह आयरलैंड को एक देश के रूप में देखना पसंद करेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपतियों का इस मुद्दे पर आमतौर पर सावधानी भरा रुख रहा है। ऐसे में ट्रम्प का बयान इस बहस को और चर्चा में ले आया है। मामला सिर्फ आजादी का नहीं, पैसा और यूरोप भी अहम कार्डिफ की बैठक सिर्फ ब्रिटेन से अलग होने की मांग तक सीमित नहीं है। तीनों जगहों की कई प्रमुख पार्टियां यूरोपीय यूनियन के साथ करीबी रिश्तों की समर्थक हैं। UK 2020 में आधिकारिक तौर पर यूरोपीय यूनियन से आजाद हो गया था। इसके लिए 2016 में वोटिंग हुई थी। अगर स्कॉटलैंड या वेल्स भविष्य में आजाद होते हैं, तो वे EU की सदस्यता के लिए आवेदन कर सकते हैं। वहीं अगर नॉर्दर्न आयरलैंड आयरलैंड में शामिल होता है, तो वह EU का हिस्सा बन जाएगा, क्योंकि आयरलैंड पहले से EU का सदस्य है। अब जानिए कि ये तीनों इलाके ब्रिटेन से कैसे जुड़े और अब अलग होने की मांग क्यों हो रही है… स्कॉटलैंड करीब 300 साल पहले स्कॉटलैंड और इंग्लैंड दो अलग-अलग देश थे। दोनों के अपने राजा, संसद और कानून थे। साल 1603 में इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ प्रथम की मौत हो गई। उनका कोई वारिस नहीं था। तब स्कॉटलैंड के राजा जेम्स VI इंग्लैंड के भी राजा बन गए। यानी अब एक ही व्यक्ति दो देशों का राजा था, लेकिन दोनों देश फिर भी अलग-अलग थे। इसके करीब 100 साल बाद बड़ा फैसला हुआ। 1707 में स्कॉटलैंड और इंग्लैंड की संसद ने समझौता किया। दोनों देश मिलकर ग्रेट ब्रिटेन बन गए। इसके बाद दोनों की अलग-अलग संसद नहीं रही और एक साझा संसद बनी। अलग देश बनने की मांग कब तेज हुई 20वीं सदी में स्कॉटलैंड की आजादी की मांग को राजनीतिक ताकत मिलने लगी। 1934 में स्कॉटिश नेशनल पार्टी (NSP) बनी, जिसका मकसद स्कॉटलैंड को अलग देश बनाना था। इसके बाद यह मुद्दा धीरे-धीरे मजबूत होता गया। 1999 में स्कॉटलैंड को अपनी संसद और सरकार वापस मिली। इससे स्कॉटलैंड को शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे कई मामलों में खुद फैसले लेने का अधिकार मिला, लेकिन रक्षा और विदेश नीति जैसे बड़े मुद्दे अब भी ब्रिटेन की केंद्र सरकार के पास रहे।
संडे प्रोफाइल : विनोद खोसला:टेक में जोखिम भरे निवेश के लिए जाने जाते हैं खोसला

भारतीय मूल के अमेरिकी इन्वेस्टर विनोद खोसला फोर्ब्स की 2026 अमीर इमिग्रेंट्स सूची में सबसे अमीर भारतीय आप्रवासी के रूप में नामित हुए हैं। वे जोखिम भरी टेक्नोलॉजी कंपनियों में निवेश के लिए जाने जाते हैं। विनोद खोसला मानते हैं कि हर बड़ी समस्या में एक बड़ा अवसर छिपा होता है। उनकी यह सोच निवेश के फैसलों में भी दिखती है। 2011 में स्केटिंग के दौरान घुटने में चोट लगने पर डॉक्टरों ने इलाज को लेकर अलग-अलग राय दी। हेल्थ केयर सिस्टम से निराश खोसला ने एक लेख में लिखा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अल्गोरिदम डॉक्टरों से बेहतर काम कर सकते हैं। इस पर लंबे समय तक बहस हुई। इसके बाद उनकी फर्म ने रोबोटिक्स और मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनियों में कई निवेश किए। खोसला आज भी अपनी बात पर कायम हैं। सिलिकॉन वैली की प्रमुख हस्तियों में शामिल 71 वर्षीय खोसला ने तीन अन्य लोगों के साथ 1982 में कंप्यूटिंग कंपनी सन माइक्रोसिस्टम्स की स्थापना की थी। 2010 में उन्होंने इसे ओरेकल को बेच दिया। इसके बाद उनकी वेंचर कैपिटल कंपनी खोसला वेंचर्स ने ग्रीन टेक, हेल्थ केयर और एआई स्टार्टअप्स में बड़े दांव लगाए। 2019 में खोसला वेंचर्स ने ओपनएआई में 50 मिलियन डॉलर यानी करीब 477 करोड़ रुपए का निवेश किया था। उस समय कंपनी आज जैसी बड़ी नहीं थी। खोसला ने बाद में कहा कि ओपनएआई के असफल होने की 90% संभावना भी होती तो दुनिया बदलने की 10% संभावना के लिए यह दांव लगाने लायक था। आज ओपनएआई दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल है। 2023 में जब सीईओ सैम आल्टमैन को कंपनी से बाहर किया गया तो खोसला उनके समर्थन में खड़े हुए थे। नई दिल्ली में जन्मे खोसला के पिता सेना में थे। वे चाहते थे कि बेटा भी सेना में जाए। लेकिन विनोद की दिलचस्पी तकनीक में थी। उन्होंने आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की और इसके बाद स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए तथा कार्नेगी मेलोन यूनिवर्सिटी से साइंस में मास्टर्स किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद वे अमेरिका में बस गए। खोसला का भरोसा शुरू से एआई में रहा है। वे बताते हैं कि 2014 में एआई रेडियोलॉजी से उनका पहला एआई निवेश शुरू हुआ। उनके मुताबिक ओपनएआई में निवेश बहुत बड़ा दांव था, जबकि वे आमतौर पर बड़े दांव नहीं लगाते। उनका मानना है कि ऊंचे जोखिम वाली नई टेक्नोलॉजी में निवेश जरूरी है। वे कहते हैं कि एआई से खतरे हो सकते हैं, लेकिन इसके फायदों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। खोसला के मुताबिक अभी अमेरिकी एआई मॉडल्स का दबदबा है, लेकिन देश राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपने मॉडल विकसित कर सकते हैं। चीन अपना मॉडल बनाएगा तो भारत भी अपना मॉडल बना सकता है। उन्हें भरोसा है कि एआई के फायदे धीरे-धीरे बढ़ेंगे। वे भारत के पेमेंट सिस्टम का उदाहरण देते हैं। उनके अनुसार तकनीक की मदद से डॉक्टर और एआई ट्यूटर जैसी सेवाएं कम लागत में अधिक लोगों तक पहुंचाई जा सकती हैं।
अमेरिका में अच्छी कमाई के लिए नामचीन डिग्री जरूरी नहीं:पिछड़े कॉलेजों के ग्रेजुएट भी हार्वर्ड जैसा कमा रहे, सैलरी औसतन 95 लाख सालाना

अमेरिका की फोर्ब्स टॉप-500 कॉलेज रैंकिंग के मुताबिक सालाना 95 लाख रुपए से ज्यादा कमाई के लिए किसी ‘बड़े’ या ‘नामचीन’ कॉलेज की डिग्री जरूरी नहीं है। रैंकिंग में सबसे नीचे वाले कॉलेजों के ग्रेजुएट्स भी डिग्री लेने के 10 साल बाद औसतन 95 लाख रुपए से ज्यादा कमा रहे हैं। फोर्ब्स की लिस्ट में एमआईटी, प्रिंसटन और हार्वर्ड सबसे ऊपर हैं। इन कॉलेजों से पढ़ने वालों की 10 साल बाद कमाई 1.15 करोड़ रुपए से ज्यादा बताई गई है। वहीं, लिस्ट में 500वें नंबर पर ओहायो के ग्रामीण इलाके का निजी मेरिएटा कॉलेज है। यहां से पढ़ने वालों की 10 साल बाद औसत कमाई करीब 1 करोड़ रुपए है। रिपोर्ट के मुताबिक लिस्ट में लगभग हर कॉलेज के ग्रेजुएट्स की औसत कमाई 86 लाख रुपए से ज्यादा है। यानी कम मशहूर कॉलेजों से पढ़ने वालों की कमाई भी काफी अच्छी हो सकती है। कॉलेज चुनने में कमाई को आधार न बनाएं रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉलेज चुनते समय सिर्फ कमाई को आधार नहीं बनाना चाहिए। ऊंची रैंक वाले कॉलेजों में पुराने छात्रों का मजबूत नेटवर्क और कॉलेज के नाम की पहचान जैसे फायदे मिलते हैं। पर ये फायदे 10 साल बाद की कमाई के आंकड़ों में सीधे नहीं दिखते। अमेरिका में बैचलर डिग्री पर औसतन 33 लाख कर्ज एजुकेशन डेटा इनिशिएटिव के मुताबिक पिछले 20 साल में कॉलेज की औसत लागत दोगुने से ज्यादा हो गई है। इसी वजह से अब एक बैचलर डिग्री के लिए औसतन 33 लाख रुपए से ज्यादा का कर्ज लेना पड़ रहा है। डिग्री सफलता की गारंटी नहीं: सीईओ कई बड़े कारोबारी भी मानते हैं कि डिग्री सफलता की पक्की गारंटी नहीं है। मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग ने कहा कि कॉलेज लोगों से जुड़ने और रिश्ते बनाने में मदद करता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या कॉलेज आज की नौकरियों के लिए युवाओं को तैयार कर रहा है?
सलमान के बॉडीगार्ड शेरा के बेटे अबीर करेंगे बॉलीवुड डेब्यू!:फिल्म ‘टार्जन’ में आएंगे नजर, सूरज पंचोली भी होंगे मूवी का हिस्सा

सलमान खान के लंबे समय से बॉडीगार्ड रहे गुरमीत सिंह जॉली उर्फ शेरा के बेटे अबीर सिंह जल्द बॉलीवुड में डेब्यू कर सकते हैं। फिल्मफेयर की रिपोर्ट के मुताबिक, अबीर फिल्म ‘टार्जन’ से एक्टिंग डेब्यू करेंगे। फिल्म में सूरज पंचोली भी नजर आएंगे। अबीर के डेब्यू को लेकर 2022 से रिपोर्ट्स सामने आती रही हैं। उस समय दावा किया गया था कि सलमान खान उनके डेब्यू प्रोजेक्ट की तैयारी में व्यक्तिगत रूप से शामिल हैं। यह फिल्म अभिनेता-फिल्ममेकर सतीश कौशिक के निर्देशन में बनने की बात कही गई थी और जनवरी 2023 में शूटिंग शुरू होने की रिपोर्ट थी। हालांकि, इस प्रोजेक्ट की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई। मार्च 2023 में सतीश कौशिक के निधन के बाद अबीर के डेब्यू को लेकर आगे कोई जानकारी सामने नहीं आई। अब नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अबीर को ‘टार्जन’ मिल गई है। फिल्म के डायरेक्टर, प्रोडक्शन बैनर और बाकी कास्ट की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। जिससे अभी यह नहीं पता चल रहा है कि अबीर सिंह को सलमान खान लॉन्च करेंगे या नहीं। ‘टार्जन’ में सूरज पंचोली भी रिपोर्ट के मुताबिक, ‘टार्जन’ में अबीर के साथ सूरज पंचोली भी होंगे। सूरज ने 2015 में रिलीज हुई रोमांटिक एक्शन फिल्म ‘हीरो’ से बॉलीवुड डेब्यू किया था। इस फिल्म को सलमान खान ने प्रोड्यूस किया था। फिल्म में सुनील शेट्टी की बेटी अथिया शेट्टी ने भी बतौर लीड एक्ट्रेस डेब्यू किया था। ‘हीरो’ के बाद सूरज और अथिया को इंडस्ट्री में पहचान मिली, हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खास प्रदर्शन नहीं कर सकी। अगर ‘टार्जन’ को लेकर सामने आई रिपोर्ट सही है, तो सूरज अब एक और ऐसे नए कलाकार के साथ स्क्रीन शेयर करेंगे, जिसको सलमान खान ने लॉन्च किया था। कई कलाकारों को लॉन्च कर चुके हैं सलमान सलमान खान ने अपनी फिल्मों और प्रोडक्शन हाउस के जरिए कई नए चेहरों को बॉलीवुड में मौका दिया है। सोनाक्षी सिन्हा ने उनके साथ ‘दबंग’ से बॉलीवुड डेब्यू किया था, जबकि जरीन खान को ‘वीर’ में प्रेजेंट किया गया था। डेजी शाह ने ‘जय हो’ से बतौर लीड एक्ट्रेस डेब्यू किया और सई मांजरेकर ने ‘दबंग 3’ से हिंदी फिल्मों में कदम रखा। वहीं, उनके प्रोडक्शन बैनर सलमान खान फिल्म्स (SKF) से सूरज पंचोली और अथिया शेट्टी ने 2015 की फिल्म ‘हीरो’ से बॉलीवुड डेब्यू किया था। इसके बाद 2018 में ‘लवयात्री’ से वारिना हुसैन ने बतौर लीड एक्ट्रेस डेब्यू किया। फिल्म में सलमान के जीजा आयुष शर्मा भी लॉन्च हुए थे। 2019 में सलमान खान प्रोड्यूस्ड ‘नोटबुक’ से जहीर इकबाल और प्रनूतन बहल ने बतौर लीड एक्टर्स डेब्यू किया। 2023 में ‘फर्रे’ से सलमान खान फिल्म्स ने अलीजे अग्निहोत्री को लॉन्च किया। भतीजे की डेब्यू फिल्म में सलमान कैमियो करेंगे अरबाज खान और मलाइका अरोड़ा के बेटे अरहान खान जल्द बॉलीवुड में बतौर लीड हीरो डेब्यू करने वाले हैं। खास बात यह है कि उनके डेब्यू को खास बनाने के लिए सलमान खान फिल्म में कैमियो रोल करते नजर आ सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फिल्म एक एक्शन लव स्टोरी होगी। इसका टाइटल अभी तय नहीं हुआ है। फिल्म का निर्देशन अनिरुद्ध अय्यर करेंगे। उन्होंने इससे पहले आयुष्मान खुराना की फिल्म ‘एन एक्शन हीरो’ डायरेक्ट की थी। फिल्म को अश्विन वर्दे प्रोड्यूस कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, सलमान अपने कैमियो के लिए करीब 10 दिन शूटिंग कर सकते हैं। फिल्म की शूटिंग 2027 की शुरुआत में शुरू होने की उम्मीद है।
आतंकी लादेन की हिट लिस्ट में भारत भी था:CIA के खुफिया दस्तावेज में खुलासा; 9/11 से पहले कई देशों पर हमले की तैयारी थी

आतंकी संगठन अल-कायदा का सरगना ओसामा बिन लादेन 9/11 हमले से पहले भारत में भी आतंकी हमला करना चाहता था। अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA की ओर से जारी एक दस्तावेज में इसका खुलासा हुआ है। 28 अगस्त 1998 की इस रिपोर्ट में भारत समेत कई देशों को संभावित हमलों के लिए निशाना बनाए जाने की बात कही गई थी। CIA ने 9/11 हमले की 25वीं बरसी के मौके पर शुक्रवार को बिन लादेन से जुड़े 70 से ज्यादा राष्ट्रपति स्तरीय खुफिया दस्तावेज सार्वजनिक किए। इनमें 100 से ज्यादा पन्नों की सामग्री शामिल है। भारत समेत 8 देशों पर हमले करना चाहता था लादेन CIA की रिपोर्ट में कहा गया था कि बिन लादेन कई देशों में हमले करना चाहता था। इनमें भारत, पाकिस्तान, मिस्र, कुवैत, सऊदी अरब, यमन और युगांडा शामिल थे। नाइजीरिया का भी संभावित देश के तौर पर जिक्र किया गया था। हालांकि CIA के दस्तावेजों में इसकी जानकारी नहीं है कि लादेन भारत के किस शहर, इमारत या संस्थान को निशाना बनाना था, इसका कोई जिक्र नहीं है। हमले की तारीख या किसी खास ऑपरेशन की योजना भी दस्तावेज में नहीं बताई गई है। रिपोर्ट का टाइटल ‘बिन लादेन का आतंकी नेटवर्क अब भी खतरा’ था। दस्तावेज के कुछ हिस्से काले कर दिए गए हैं और इसमें खुफिया जानकारी के स्रोत का खुलासा नहीं किया गया है। 60 देशों में नेटवर्क का इस्तेमाल करने की तैयारी रिपोर्ट में कहा गया था कि बिन लादेन कम से कम 60 देशों में मौजूद लोगों और सहयोगी आतंकी संगठनों के नेटवर्क का इस्तेमाल हमले कराने के लिए कर सकता था। CIA ने आकलन किया था कि अफगानिस्तान में अमेरिकी हमलों के बावजूद बिन लादेन और दूसरे आतंकी नेताओं का संचार नेटवर्क काम कर रहा था। अल-कायदा ने कुछ प्रशिक्षण शिविरों में गतिविधियां दोबारा शुरू कर दी थीं, जबकि कुछ शिविरों को दूसरी जगह ले जाया जा रहा था। अमेरिका और ब्रिटेन पर भी हमले की तैयारी दस्तावेज में कहा गया था कि बिन लादेन अमेरिका और ब्रिटेन के खिलाफ भी नए हमलों की तैयारी कर रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में अल-कायदा के ठिकानों पर अमेरिकी मिसाइल हमलों से कुछ घंटे पहले बिन लादेन की ओर से आगे के हमलों की योजना बनाए जाने की जानकारी थी। 1998 से 2001 तक अमेरिका को मिलती रहीं चेतावनियां CIA की ओर से जारी दस्तावेजों का यह पूरा संग्रह 1998 से 2001 के बीच अमेरिकी राष्ट्रपतियों को दी गई खुफिया जानकारियों से जुड़ा है। इसमें बिल क्लिंटन के कार्यकाल से लेकर जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के राष्ट्रपति बनने के शुरुआती दौर तक की रिपोर्ट शामिल हैं। इन दस्तावेजों से पता चलता है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी 9/11 से पहले कई बार बिन लादेन और अल-कायदा से जुड़े संभावित आतंकी हमलों को लेकर चेतावनी दे चुकी थी। 11 सितंबर 2001 को हुआ था 9/11 हमला 11 सितंबर 2001 को अल-कायदा के 19 आतंकियों ने चार यात्री विमानों का अपहरण किया था। दो विमान न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की ट्विन टावर्स से टकराए। दोनों इमारतें पूरी तरह ढह गईं। तीसरा विमान अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन से टकराया। चौथा विमान पेंसिल्वेनिया के एक खेत में गिर गया। माना जाता है कि इसे व्हाइट हाउस या अमेरिकी संसद की ओर ले जाया जा रहा था, लेकिन यात्रियों ने अपहरणकर्ताओं का विरोध किया था। 9/11 हमले में करीब 3 हजार लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक अभियान शुरू किया और अफगानिस्तान में अल-कायदा के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की।








