Sunday, 27 Sep 2026 | 05:45 PM

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बिहार-हरियाणा में आंधी-बारिश से 21 की मौत:राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से पर चक्रवात बना; ओडिशा के अगले 6 दिन बारिश की चेतावनी

बिहार-हरियाणा में आंधी-बारिश से 21 की मौत:राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से पर चक्रवात बना; ओडिशा के अगले 6 दिन बारिश की चेतावनी

राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से पर चक्रवात बनने से देश के बड़े हिस्से में मौसम बदल चुका है। दक्षिण-पूर्व उत्तर प्रदेश से लेकर तमिलनाडु तक बादलों का लंबा ट्रफ बना हुआ है, जिससे उत्तर, मध्य और दक्षिण भारत में बारिश की गतिविधियां तेज हो गई हैं। जबकि, पिछले 24 घंटों में बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में तेज हवाएं और भारी बारिश दर्ज की गई है। बिहार में बिजली गिरने और मौसम जनित हादसों में 6 जिलों में 20 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। अगले 48 से 72 घंटे राज्य के लिए बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं। वहीं, हरियाणा में रविवार-सोमवार की रात 30 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चली आंधी में 15 हजार से ज्यादा पेड़ टूट गए। फतेहाबाद के टोहाना में पेड़ गिरने से हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएन) के कर्मचारी आदेश कुमार (29) की मौत हो गई। राजस्थान पर चक्रवात का नया दौर सक्रिय है, जिससे 24 घंटों के दौरान हरियाणा, दिल्ली एनसीआर और मध्य प्रदेश में 30-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और ओलावृष्टि की संभावना है। जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में भी 48 घंटों तक बारिश और बर्फबारी का सिलसिला जारी रह सकता है। दक्षिण भारत में छत्तीसगढ़ से कर्नाटक और तमिलनाडु तक 5 दिनों तक रुक-रुक कर वर्षा और बिजली गिरने के आसार हैं। ओडिशा में अगले छह दिनों के दौरान तेज आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है।

न्यूयॉर्क में सिख टैक्सी ड्राइवर से बदसलूकी का VIDEO:2 युवतियों को लेकर झगड़ा, अश्वेत युवक ने बीच सड़क धक्का दिया, बुजुर्ग 15 फीट दूर जा गिरा

न्यूयॉर्क में सिख टैक्सी ड्राइवर से बदसलूकी का VIDEO:2 युवतियों को लेकर झगड़ा, अश्वेत युवक ने बीच सड़क धक्का दिया, बुजुर्ग 15 फीट दूर जा गिरा

अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में एक सिख टैक्सी ड्राइवर की दो अश्वेत युवकों के साथ बहस और हाथापाई का वीडियो सामने आया है। इस दौरान अश्वेत युवक बुजुर्ग टैक्सी ड्राइवर को धक्का देकर सड़क पर गिरा देता है। बुजुर्ग धक्का लगने से करीब 15 फीट दूर सड़क पर गिरा। युवक बुजुर्ग टैक्सी ड्राइवर पर आरोप लगा रहा था कि उसने उसकी दो महिला दोस्तों को अपनी गाड़ी से टक्कर मारी है। जबकि, बुजुर्ग इन आरोपों से इनकार कर रहा था। उल्टा वह कह रहा था कि ये युवतियां खुद उसकी गाड़ी की ओर आईं। हाथापाई के बाद बुजुर्ग सिख ड्राइवर ने मौके पर पुलिस बुलाई। इसके बाद पुलिस दोनों पक्षों के बीच झगड़ा सुलझाकर वहां से चली जाती है। हालांकि, यह मामला कब का है और इसमें दिख रहा सिख ड्राइवर कौन है, यह जानकारी सामने नहीं आई है। 2 युवतियों की टक्कर के आरोप से विवाद हुआ जानकारी के अनुसार, विवाद तब शुरू हुआ जब एक युवक ने यह आरोप लगाया कि बुजुर्ग सिख टैक्सी ड्राइवर ने सड़क पर 2 युवतियों को अपनी टैक्सी से टक्कर मार दी। इसके बाद वहां से भागने की कोशिश की। वहीं, सिख टैक्सी ड्राइवर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कोई दुर्घटना नहीं हुई। उल्टा युवतियां खुद उसकी गाड़ी के पास आई थीं, जिससे यह स्थिति बनी। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहा है मौके पर मौजूद 2 युवक लगातार बुजुर्ग ड्राइवर को रोक रहे हैं और उसे अपनी गाड़ी तक जाने नहीं दे रहे। बहस इतनी बढ़ गई कि स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक अश्वेत युवक अचानक आक्रामक हो जाता है और बुजुर्ग ड्राइवर को जोर से धक्का दे देता है, जिससे बुजुर्ग सड़क पर गिर जाता है। इस दौरान वीडियो बनाने वाला युवक उसे लगातार अपराधी कहकर संबोधित करता है। पुलिस के आने पर युवकों का व्यवहार बदला कुछ समय बाद मौके पर न्यूयॉर्क पुलिस (NYPD स्कूल सेफ्टी ऑफिसर्स) पहुंचती है। पुलिस के सामने सिख ड्राइवर अपनी बात रखने की कोशिश करता है। जबकि, युवक दावा करता है कि उसके पास पूरी घटना का वीडियो सबूत मौजूद है। पुलिस के पहुंचने के बाद युवक का व्यवहार अचानक बदल जाता है और वह शांत होकर अधिकारियों से बातचीत करता दिखाई देता है। वह युवाओं के लिए सकारात्मक संदेश देने की भी बात करता है। पुलिस अधिकारियों ने मौके पर स्थिति को संभाला और दोनों पक्षों से जानकारी ली। यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में क्या दिख रहा एक बुजुर्ग सिख टैक्सी ड्राइवर (पगड़ी और चेक शर्ट पहने हुए) कुछ युवकों से बहस कर रहा है। वहां मौजूद युवक टैक्सी ड्राइवर पर चिल्ला रहे हैं कि उसने अपनी गाड़ी से लड़कियों को टक्कर मारी है। वे यह भी आरोप लगा रहे हैं कि ड्राइवर बिना रुके मौके से भागने की कोशिश कर रहा था। इसके जवाब में बुजुर्ग ड्राइवर कहता है कि उसने कोई टक्कर नहीं मारी, बल्कि लड़कियां खुद उसकी गाड़ी से टकराई हैं। वह यह भी कहता है कि उसकी टैक्सी में सवारी बैठी हुई है और वह सिर्फ अपना काम कर रहा था। युवक ड्राइवर को वहां से जाने नहीं देते। जब ड्राइवर वहां से जाने की कोशिश करता है, तो एक युवक उसे धक्का देकर गिरा देता है। इसके बाद बुजुर्ग कहता है, तुमने मुझे धक्का क्यों मारा? इसके बाद बुजुर्ग पुलिस को फोन करता है। मौके पर पुलिस पहुंचती है और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी रहता है। ॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… पंजाबियों के लिए न्यूजीलैंड जाना हुआ मुश्किल:42% स्टडी वीजा कैंसिल, एंट्री में दिक्कतें, सबको अंग्रेजी जरूरी, सरप्राइज इंटरव्यू में फेल तो डिपोर्ट न्यूजीलैंड सरकार ने इमिग्रेशन पॉलिसी में बदलाव किए हैं, जिनका असर भारतीयों खासकर पंजाबियों पर दिखने लगा है। एक हफ्ते के भीतर पंजाब के दो लोगों को देश में एंट्री के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जबकि 42 फीसदी स्टूडेंट वीजा रद्द होने की बात सामने आई है। पढ़ें पूरी खबर…

हिमाचल के 10 जिलों में आंधी-तूफान का अलर्ट:धर्मशाला में 30.6MM बारिश, कल्पा का तापमान 2.6॰C तक लुढ़का; चार जगह 4॰C से नीचे गिरा पारा

हिमाचल के 10 जिलों में आंधी-तूफान का अलर्ट:धर्मशाला में 30.6MM बारिश, कल्पा का तापमान 2.6॰C तक लुढ़का; चार जगह 4॰C से नीचे गिरा पारा

हिमाचल की राजधानी शिमला समेत राज्य के ज्यादातर भागों में सुबह से ही आसमान में बादल छाए हुए हैं। मौसम विभाग (IMD) ने आज किन्नौर और लाहौल स्पीति को छोड़कर अन्य सभी जिलों में आंधी-तूफान के साथ आसमानी बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। कल भी चंबा, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी जिला में यलो अलर्ट जारी किया गया है। 7 से 9 मई तक वेस्टर्न डिस्टरबेंस थोड़ा कमजोर जरूर पड़ेगा, लेकिन इस दौरान अधिक ऊंचे व मध्यम ऊंचाई वाले कुछेक क्षेत्रों में हल्की बारिश जारी रहने के आसार हैं। 10 मई और 11 मई को पूरे प्रदेश में अच्छी बारिश होगी। वहीं, बीते 24 घंटे के दौरान भी अधिकांश भागों में बारिश और शिमला जिला के कई क्षेत्रों में भारी ओलावृष्टि हुई। धर्मशाला में सबसे ज्यादा 30.6 मिमी, कांगड़ा 29.4 मिमी, चौपाल 18.0, शिलारू 15.8, सराहन 15.5, पालमपुर 15.4, रोहड़ू 14.0, मंडी 13.4, जोगेंद्रनगर 9.0, कल्पा 7.2 और बरठी में 5.2 मिमी बारिश हुई। बारिश-ओलावृष्टि के बाद तापमान में भारी गिरावट बारिश-ओलावृष्टि के बाद तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। विशेषकर किन्नौर और लाहौल स्पीति के कई क्षेत्रों में रात का पारा जमाव बिंदू के आसपास पहुंच गया है। किन्नौर के कल्पा का पारा 2.6 डिग्री, लाहौल स्पीति के ताबो का 2.7, कुकुमसैरी 2.9 और केलांग का 4.4 डिग्री सेल्सियस रह गया है। नाहन का न्यूनतम तापमान सामान्य से 8.1 डिग्री नीचे गिरा राज्य के अन्य शहरों का रात का पारा भी सामान्य से नीचे गिरा है। नाहन के तापमान में सामान्य की तुलना में सबसे ज्यादा 8.1 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई और यहां का रात का पारा 14.6 डिग्री तक लुढ़क गया है। शिमला का पारा सामान्य से 3.0 डिग्री नीचे गिरने के बाद 11.0 डिग्री रह गया है। भुंतर का अधिकतम तापमान नॉर्मल से 9.6 डिग्री नीचे लुढ़का इसी तरह, अधिकतम तापमान में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। भुंतर का अधिकतम तापमान सामान्य से 9.6 डिग्री नीचे गिरने के बाद 20.3 डिग्री, मंडी का 6.6 डिग्री गिरने के बाद 26.2 डिग्री, नाहन का 6.5 डिग्री लुढ़कने के बाद 26.8 डिग्री, ऊना का 6.4 डिग्री कम होने के बाद 31.0 डिग्री और शिमला का पारा सामान्य से 4.9 डिग्री नीचे गिरने के बाद 18.8 डिग्री सेल्सियस रह गया है।

भाजपा ने पोलिंग एजेंट भी परीक्षा लेकर बनाए:कुछ पॉकेट्स से निकल भाजपा पूरे प्रदेश में छाई; जनता ने ‘बंगाली अस्मिता’ की जगह ‘डबल इंजन’ चुना

भाजपा ने पोलिंग एजेंट भी परीक्षा लेकर बनाए:कुछ पॉकेट्स से निकल भाजपा पूरे प्रदेश में छाई; जनता ने ‘बंगाली अस्मिता’ की जगह ‘डबल इंजन’ चुना

बंगाल ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के ‘बंगाली अस्मिता’ नैरेटिव के मुकाबले पीएम नरेंद्र मोदी के ‘डबल इंजन’ के वादे को चुना। कमल की आंधी में तृणमूल बिल्कुल तिनकों की तरह ही उड़ गई। भाजपा लंबे समय से संगठन के स्तर पर तैयारी में जुटी थी। पोलिंग एजेंट चुनने के लिए भी मौखिक और लिखित परीक्षाएं तक ली गई थीं। पिछले छह महीने से पार्टी का ध्यान दो लक्ष्यों के साथ जमीनी नेटवर्क पर रहा। पहला, ग्रामीण इलाकों में डर के माहौल का मुकाबला और सुनिश्चित करना कि वोटर पोलिंग बूथ तक पहुंचे। ग्राउंड पर तमाम प्रयासों का नतीजा ये रहा कि भाजपा अपने साथ नए वोटर्स को जोड़ने में सफल रही। पिछले चुनाव में टीएमसी का वोट शेयर 48.5% था, जो इस बार 40.80% रह गया। वहीं, भाजपा 38.4% से बढ़कर 45.85% वोट पर पहुंच गई। इसके पीछे हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण बड़ा कारण है। हालांकि, सिर्फ ध्रुवीकरण ही इकलौती वजह नहीं है। रोजगार की कमी, पलायन, औद्योगिक ठहराव, पंचायत स्तर की दादागिरी और स्थानीय टीएमसी कैडर से नाराजगी निर्णायक रही। पश्चिमी औद्योगिक पट्टी आसनसोल, दुर्गापुर और बैरकपुर जैसे इलाकों में भाजपा ने बंद मिलों, नौकरी, लॉजिस्टिक्स हब और सिंडिकेट राज के खिलाफ अभियान चलाया। हर क्षेत्र में अलग रणनीति, कहीं ध्रुवीकरण तो कहीं रोजगार मुद्दा बंगाल का राजनीतिक भूगोल बदल गया। 2021 में भाजपा उत्तर बंगाल, जंगलमहल और मतुआ बेल्ट में सिमटी थी। इस बार टीएमसी के गढ़ दक्षिण बंगाल में भी भगवा रंग में रंग गए। भाजपा ने हर क्षेत्र की अलग रणनीति बनाई। टीएमसी के गढ़ दक्षिण बंगाल में एंटी इंकंबेंसी, ध्रुवीकरण और गुंडागर्दी का मुद्दा उठाया। प्रेसीडेंसी में सीटें 14 से 27 तक पहुंच गईं। उत्तर बंगाल में चाय-बागान मजदूर और राजबंशी समुदाय साधा। जंगलमहल में आवास-पानी, राष्ट्रपति के अपमान जैसे मुद्दों से टीएमसी को पीछे धकेला। टीएमसी अल्पसंख्यक बेल्ट में टूटी करीब 115 सीटें मुस्लिम बहुल हैं। इनमें से 69 पर टीएमसी जीती। करीब 39 सीटें भाजपा के खाते में गईं। मुस्लिम-सेक्युलर वोट टीएमसी के पक्ष में एकजुट माने जाते रहे हैं। पर, इस बार स्थिति अलग दिखी। मालदा की 12 में से 6 और उत्तर दिनाजपुर की 9 में से 4 भाजपा के खाते में गई। इससे टीएमसी की ‘अभेद्य अल्पसंख्यक बेल्ट’ का भरोसा कमजोर हुआ। मुर्शिदाबाद जैसे कोर मुस्लिम जिलों में टीएमसी का दबदबा अभी बचा है। यहां की 22 सीटों में से टीएमसी 9 और भाजपा 8 सीटें जीती। भाजपा की असली बढ़त चार बड़े इलाकों से आई। जंगलमहल-आदिवासी बेल्ट में 40 में से करीब 36 सीटें निकालकर टीएमसी की 2021 वाली वापसी को पलट दिया। उत्तर 24 परगना में भाजपा 33 में से 18 सीटों पर पहुंची। हुगली में भाजपा ने 18 में से 16 सीटें जीत टीएमसी के दक्षिण बंगाल किले को भी झटका दिया है। नदिया में भाजपा 17 में से 14 सीटों पर विजयी रही। यहां मतुआ-नामशूद्र और सीमावर्ती हिंदू वोट निर्णायक रहे। माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट पर भाजपा के आनंदमय बर्मन ने टीएमसी के शंकर मालाकार को 1,04,265 वोटों से हराया। राज्य में जीत का सबसे बड़ा अंतर है। लोकल नेताओं को तवज्जो, पुराने लोगों को पद देकर मैदान में उतारा भाजपा ने बंगाल में सिर्फ दिल्ली मॉडल नहीं चलाया। पुराने और वरिष्ठ नेताओं को तवज्जो दी। वाजपेयी-आडवाणी के दौर से जुड़े रहे शमिक भट्टाचार्य प्रदेशाध्यक्ष बनाए। सुवेंदु ग्रामीण बंगाल में चेहरा रहे। वहीं, भट्टाचार्य ने कोलकाता और उपनगरीय बंगाल के ‘भद्रलोक’ को जोड़ा। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष दिलीप घोष को सक्रिय किया। राहुल सिन्हा राज्यसभा सांसद बनाए। पीएम मोदी ने एक रैली में घोष से लेकर पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय तक बंगाल के वरिष्ठ नेताओं को मंच पर बुला अभिनंदन किया। ईडी 7 मामलों की जांच कर रही है, इन पर कार्रवाई तेज हो सकती है भ्रष्टाचार संबंधी मामले नई सरकार की प्राथमिकता हो सकते हैं। शिक्षक भर्ती, नगरपालिका भर्ती, राशन घोटाला, कोयला तस्करी, मवेशी तस्करी और संदेशखाली सहित कम से कम सात मामलों की जांच ईडी कर रही है। इन पर कार्रवाई में तेजी आ सकती है। पुरानी फाइलों की पड़ताल भी शुरू हो सकती है। दूसरी तरफ, राज्य सरकार के समक्ष सातवां वेतन आयोग लागू करना, तीन हजार रुपए मासिक नकद सहायता और डीए देने जैसे वादों पर अमल की चुनौती भी रहेगी। ———————————– ये खबर भी पढ़ें… 49 साल में पहली बार देश में लेफ्ट सरकार नहीं:1957 में केरलम में नंबूदरीपाद ने सत्ता दिलवाई; 2026 में केरलम से ही खत्म केरलम विधानसभा चुनाव में पिनराई विजयन की अगुवाई वाले लेफ्ट एलायंस LDF को हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस की अगुवाई वाली UDF ने 140 में से 90 से ज्यादा सीटें जीतकर 10 साल बाद सत्ता में वापसी कर ली है। पूरी खबर पढ़ें…

भाजपा ने पोलिंग एजेंट भी परीक्षा लेकर बनाए:कुछ पॉकेट्स से निकल भाजपा पूरे प्रदेश में छाई; जनता ने ‘बंगाली अस्मिता’ की जगह ‘डबल इंजन’ चुना

भाजपा ने पोलिंग एजेंट भी परीक्षा लेकर बनाए:कुछ पॉकेट्स से निकल भाजपा पूरे प्रदेश में छाई; जनता ने ‘बंगाली अस्मिता’ की जगह ‘डबल इंजन’ चुना

बंगाल ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के ‘बंगाली अस्मिता’ नैरेटिव के मुकाबले पीएम नरेंद्र मोदी के ‘डबल इंजन’ के वादे को चुना। कमल की आंधी में तृणमूल बिल्कुल तिनकों की तरह ही उड़ गई। भाजपा लंबे समय से संगठन के स्तर पर तैयारी में जुटी थी। पोलिंग एजेंट चुनने के लिए भी मौखिक और लिखित परीक्षाएं तक ली गई थीं। पिछले छह महीने से पार्टी का ध्यान दो लक्ष्यों के साथ जमीनी नेटवर्क पर रहा। पहला, ग्रामीण इलाकों में डर के माहौल का मुकाबला और सुनिश्चित करना कि वोटर पोलिंग बूथ तक पहुंचे। ग्राउंड पर तमाम प्रयासों का नतीजा ये रहा कि भाजपा अपने साथ नए वोटर्स को जोड़ने में सफल रही। पिछले चुनाव में टीएमसी का वोट शेयर 48.5% था, जो इस बार 40.80% रह गया। वहीं, भाजपा 38.4% से बढ़कर 45.85% वोट पर पहुंच गई। इसके पीछे हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण बड़ा कारण है। हालांकि, सिर्फ ध्रुवीकरण ही इकलौती वजह नहीं है। रोजगार की कमी, पलायन, औद्योगिक ठहराव, पंचायत स्तर की दादागिरी और स्थानीय टीएमसी कैडर से नाराजगी निर्णायक रही। पश्चिमी औद्योगिक पट्टी आसनसोल, दुर्गापुर और बैरकपुर जैसे इलाकों में भाजपा ने बंद मिलों, नौकरी, लॉजिस्टिक्स हब और सिंडिकेट राज के खिलाफ अभियान चलाया। हर क्षेत्र में अलग रणनीति, कहीं ध्रुवीकरण तो कहीं रोजगार मुद्दा बंगाल का राजनीतिक भूगोल बदल गया। 2021 में भाजपा उत्तर बंगाल, जंगलमहल और मतुआ बेल्ट में सिमटी थी। इस बार टीएमसी के गढ़ दक्षिण बंगाल में भी भगवा रंग में रंग गए। भाजपा ने हर क्षेत्र की अलग रणनीति बनाई। टीएमसी के गढ़ दक्षिण बंगाल में एंटी इंकंबेंसी, ध्रुवीकरण और गुंडागर्दी का मुद्दा उठाया। प्रेसीडेंसी में सीटें 14 से 27 तक पहुंच गईं। उत्तर बंगाल में चाय-बागान मजदूर और राजबंशी समुदाय साधा। जंगलमहल में आवास-पानी, राष्ट्रपति के अपमान जैसे मुद्दों से टीएमसी को पीछे धकेला। टीएमसी अल्पसंख्यक बेल्ट में टूटी करीब 115 सीटें मुस्लिम बहुल हैं। इनमें से 69 पर टीएमसी जीती। करीब 39 सीटें भाजपा के खाते में गईं। मुस्लिम-सेक्युलर वोट टीएमसी के पक्ष में एकजुट माने जाते रहे हैं। पर, इस बार स्थिति अलग दिखी। मालदा की 12 में से 6 और उत्तर दिनाजपुर की 9 में से 4 भाजपा के खाते में गई। इससे टीएमसी की ‘अभेद्य अल्पसंख्यक बेल्ट’ का भरोसा कमजोर हुआ। मुर्शिदाबाद जैसे कोर मुस्लिम जिलों में टीएमसी का दबदबा अभी बचा है। यहां की 22 सीटों में से टीएमसी 9 और भाजपा 8 सीटें जीती। भाजपा की असली बढ़त चार बड़े इलाकों से आई। जंगलमहल-आदिवासी बेल्ट में 40 में से करीब 36 सीटें निकालकर टीएमसी की 2021 वाली वापसी को पलट दिया। उत्तर 24 परगना में भाजपा 33 में से 18 सीटों पर पहुंची। हुगली में भाजपा ने 18 में से 16 सीटें जीत टीएमसी के दक्षिण बंगाल किले को भी झटका दिया है। नदिया में भाजपा 17 में से 14 सीटों पर विजयी रही। यहां मतुआ-नामशूद्र और सीमावर्ती हिंदू वोट निर्णायक रहे। माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट पर भाजपा के आनंदमय बर्मन ने टीएमसी के शंकर मालाकार को 1,04,265 वोटों से हराया। राज्य में जीत का सबसे बड़ा अंतर है। लोकल नेताओं को तवज्जो, पुराने लोगों को पद देकर मैदान में उतारा भाजपा ने बंगाल में सिर्फ दिल्ली मॉडल नहीं चलाया। पुराने और वरिष्ठ नेताओं को तवज्जो दी। वाजपेयी-आडवाणी के दौर से जुड़े रहे शमिक भट्टाचार्य प्रदेशाध्यक्ष बनाए। सुवेंदु ग्रामीण बंगाल में चेहरा रहे। वहीं, भट्टाचार्य ने कोलकाता और उपनगरीय बंगाल के ‘भद्रलोक’ को जोड़ा। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष दिलीप घोष को सक्रिय किया। राहुल सिन्हा राज्यसभा सांसद बनाए। पीएम मोदी ने एक रैली में घोष से लेकर पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय तक बंगाल के वरिष्ठ नेताओं को मंच पर बुला अभिनंदन किया। ईडी 7 मामलों की जांच कर रही है, इन पर कार्रवाई तेज हो सकती है भ्रष्टाचार संबंधी मामले नई सरकार की प्राथमिकता हो सकते हैं। शिक्षक भर्ती, नगरपालिका भर्ती, राशन घोटाला, कोयला तस्करी, मवेशी तस्करी और संदेशखाली सहित कम से कम सात मामलों की जांच ईडी कर रही है। इन पर कार्रवाई में तेजी आ सकती है। पुरानी फाइलों की पड़ताल भी शुरू हो सकती है। दूसरी तरफ, राज्य सरकार के समक्ष सातवां वेतन आयोग लागू करना, तीन हजार रुपए मासिक नकद सहायता और डीए देने जैसे वादों पर अमल की चुनौती भी रहेगी। ———————————– ये खबर भी पढ़ें… 49 साल में पहली बार देश में लेफ्ट सरकार नहीं:1957 में केरलम में नंबूदरीपाद ने सत्ता दिलवाई; 2026 में केरलम से ही खत्म केरलम विधानसभा चुनाव में पिनराई विजयन की अगुवाई वाले लेफ्ट एलायंस LDF को हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस की अगुवाई वाली UDF ने 140 में से 90 से ज्यादा सीटें जीतकर 10 साल बाद सत्ता में वापसी कर ली है। पूरी खबर पढ़ें…

तेजपत्ता के फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान, गैस से लेकर शुगर तक में मददगार

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Last Updated:May 05, 2026, 00:01 IST Bay Leaves Benefits: तेजपत्ता सिर्फ एक मसाला नहीं है, बल्कि एक औषधि है. खासकर पेट से जुड़ी दिक्कतों के लिए यह बहुत अच्छा माना जाता है. अगर किसी को गैस, अपच या पेट फूलने की समस्या हो, तो तेजपत्ते का काढ़ा या इसे खाने में शामिल करने से राहत मिल सकती है. ख़बरें फटाफट Bay Leaves Benefits: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग छोटी-छोटी परेशानियों के लिए भी तुरंत दवाओं का सहारा लेने लगे हैं, जबकि हमारी रसोई में मौजूद कई प्राकृतिक चीजें ऐसी हैं जो हल्की समस्याओं में असरदार राहत दे सकती हैं. उन्हीं में से एक है तेजपत्ता, जो आमतौर पर खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसके फायदे सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं हैं. सही तरीके और संतुलित मात्रा में इसका उपयोग किया जाए, तो यह शरीर के लिए कई तरह से लाभकारी साबित हो सकता है. तेजपत्ता को पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों में लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसे सिर्फ मसाले के रूप में नहीं, बल्कि एक घरेलू नुस्खे के तौर पर भी अपनाया जाता है. खासतौर पर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में इसका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है. अगर किसी को गैस, अपच, पेट फूलना या भारीपन जैसी समस्याएं होती हैं, तो तेजपत्ते को उबालकर उसका काढ़ा पीना या भोजन में इसका नियमित इस्तेमाल करना फायदेमंद हो सकता है. यह पाचन प्रक्रिया को सक्रिय करने में मदद करता है और पेट को हल्का महसूस कराता है. सिर्फ पेट ही नहीं, सांस से जुड़ी समस्याओं में भी तेजपत्ता उपयोगी माना जाता है. मौसम बदलने पर होने वाली सर्दी, खांसी या गले में खराश जैसी दिक्कतों में यह राहत पहुंचा सकता है. आयुर्वेद में इसे कफ कम करने वाला तत्व माना गया है, जो श्वसन तंत्र को साफ रखने में मदद करता है. कुछ लोग तेजपत्ते को पानी में उबालकर उसकी भाप लेते हैं या काढ़ा बनाकर पीते हैं, जिससे गले और नाक की तकलीफ में आराम मिल सकता है. आधुनिक विज्ञान ने भी तेजपत्ते के कुछ संभावित फायदों को स्वीकार किया है. कई शोधों में यह संकेत मिले हैं कि तेजपत्ता ब्लड शुगर के स्तर को संतुलित रखने में सहायक हो सकता है. इस वजह से इसे डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए एक सपोर्टिव उपाय के रूप में देखा जाता है. हालांकि यह जरूरी है कि इसे किसी भी तरह से दवाओं का विकल्प न समझा जाए, बल्कि डॉक्टर की सलाह के साथ ही इसका सेवन किया जाए. इसके अलावा तेजपत्ता में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण भी पाए जाते हैं, जो शरीर में सूजन को कम करने और जोड़ों के दर्द में राहत देने में मदद कर सकते हैं. हल्के दर्द, सूजन या इंफेक्शन जैसी स्थितियों में कुछ लोग इसे घरेलू उपाय के तौर पर इस्तेमाल करते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

इन 8 फलों में भरपूर विटामिन C, इम्यूनिटी मजबूत करने में बेहद असरदार, गर्मी में जमकर करें सेवन

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Last Updated:May 04, 2026, 23:41 IST Best Vitamin C Fruits in Summer: गर्मियों के मौसम में शरीर को स्वस्थ और इम्यूनिटी को मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. इस दौरान ऐसे फलों का सेवन करना फायदेमंद रहता है, जिनमें विटामिन C भरपूर मात्रा में पाया जाता है. विटामिन C न सिर्फ शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाता है, बल्कि स्किन को भी हेल्दी और ग्लोइंग बनाता है. नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की फाउंडर और डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने ऐसे 8 फलों के बारे में बताया है, जिन्हें गर्मियों में जरूर डाइट में शामिल करना चाहिए. संतरा विटामिन C का सबसे बेहतरीन सोर्स माना जाता है. यह शरीर को ताजगी देता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है. रोजाना संतरा खाने या उसका जूस पीने से कई तरह के संक्रमण का खतरा कम होता है. इससे शरीर में भरपूर एनर्जी भी बनी रहती है. नींबू छोटा सा फल है, लेकिन इसके फायदे बड़े हैं. इसमें विटामिन C के साथ एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं, जो शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं. गर्मियों में नींबू पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है और इम्यूनिटी भी बेहतर होती है. आंवला को विटामिन C का पावरहाउस कहा जाता है. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को तेजी से बढ़ाता है और पाचन को भी सुधारता है. आंवला जूस या मुरब्बा के रूप में भी लिया जा सकता है, जिससे शरीर को कई तरह के पोषक तत्व मिलते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google कीवी ऐसा फ्रूट है, जिसमें विटामिन C के साथ-साथ फाइबर और पोटैशियम भी अच्छी मात्रा में होते हैं. यह शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करता है और स्किन के लिए भी फायदेमंद होता है. नियमित रूप से कीवी खाने से इम्यून सिस्टम मजबूत बना रहता है. पपीता भी विटामिन C का अच्छा सोर्स होता है और यह पाचन के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें मौजूद एंजाइम्स पेट को साफ रखने में मदद करते हैं. गर्मियों में पपीता खाने से शरीर हल्का महसूस करता है और इम्यूनिटी भी बढ़ती है. स्ट्रॉबेरी स्वाद में मीठी और हल्की खट्टी होती है, लेकिन इसमें विटामिन C भरपूर मात्रा में होता है. यह शरीर में एंटीऑक्सीडेंट्स बढ़ाती है और त्वचा को हेल्दी बनाती है. इसे स्नैक या स्मूदी के रूप में भी खाया जा सकता है. अनानास एक स्वादिष्ट फल है, जिसमें विटामिन C के साथ ब्रोमेलिन नामक एंजाइम होता है. यह पाचन सुधारने और सूजन कम करने में मदद करता है. गर्मियों में अनानास खाने से शरीर को ठंडक मिलती है और इम्यूनिटी मजबूत होती है. अमरूद भी विटामिन C से भरपूर फल है, जो सस्ती कीमत में आसानी से मिल जाता है. यह शरीर को संक्रमण से बचाने के साथ-साथ पाचन और त्वचा के लिए भी फायदेमंद होता है. नियमित रूप से अमरूद खाने से शरीर स्वस्थ और मजबूत बना रहता है.

लौकी पुदीने का रायता रेसिपी: गर्मी में शरीर को बर्फ जैसी ठंडक देगा लौकी पुदीने का रायता, खाने का स्वाद भी हो जाएगा दोगुना; नोट करें रेसिपी

तस्वीर का विवरण

लोकी बॉडी को ठंडक मिलती है। पुदीना पेट को ठंडा और पाचन को बेहतर बनाता है। दही प्रोबायोटिक्स होता है, जो पेट के लिए मज़ेदार है। गर्मी में लू और डायहाइड्रेशन से बचाव में मदद मिलती है। छवि: फ्रीपिक सामग्री: 1 कप कद्दू की हुई लौकी, 1 कप ताजा दही, 2-3 रंगीन कटा हुआ पुदीना, 1 हरी मिर्च, 1/2 छोटी चम्मच जीरा पाउडर, स्वादानुसार नमक, एक चुटकी काला नमक, हल्की सी धनिया पत्ती छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: सबसे पहले कद्दू की हुई लौकी को पंखुड़ियां लें। बाद में उनका पानी अच्छी तरह से दिखने लगा और ठंडा होने लगा। अब एक बाउल में दही को अच्छे से फेंट लें। छवि: एआई इसमें कुली हुई लौकी डालें और मिक्स करें। अब इसमें पुदीना, हरी मिर्च, नमक, काला नमक और अन्य जीरा डालें। सब नीवे को अच्छे से पकड़ो। ऊपर से धनिया पत्ती की सजावट करें। छवि: एआई इस रायते को फ़िरोज़ में 15-20 मिनट ठंडा कर लें। ठंडा-ठंडा रायता रोटी, पराठा या पुलाव के साथ सर्व करें। रायते के लिए दही ताज़ा और ठंडा होना चाहिए। छवि: एआई ज्यादा पानी वाला रायता नहीं, बाकी स्वाद कम हो सकता है। पुदीना ताजा ही इस्तेमाल करें। लौकी पुदीना का रायता गर्मी में बिल्कुल सटीक दिखता है। छवि: फ्रीपिक यह स्वादिष्ट भी है, स्वादिष्ट भी है और बनाने में भी बेहद आसान है। एक बार इसे दोबारा बनाएं, तो बार-बार बनाने का मन है। छवि: एआई

‘मुसलमानों ने ममता को चुना, गरीबों ने मुझे जिताया’, भवानीपुर में जीत के बाद बोले शुभेंदु अधिकारी

'मुसलमानों ने ममता को चुना, गरीबों ने मुझे जिताया', भवानीपुर में जीत के बाद बोले शुभेंदु अधिकारी

पश्चिम बंगाल की भवानीपुर सीट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव लड़ी हैं। बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी ने 15,105 सीटों के अंतर से सीएम ममता को हराया। यह दूसरी बार है, जब उन्हें शुभेंदु अधिकारी के हाथों हार का सामना करना पड़ा। अविश्वास प्रस्ताव के साथ ही एक बार फिर यह सीट प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसी सीट से विधायक बनी हुई हैं। चुनाव परिणाम के बाद शुभेंदु ने कहा कि ममता बनर्जी का हराना जरूरी था। ‘मुसलमानों ने ममता को चुना, गरीबों ने मुझे जिताया’ बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल की सीएम और टीएमसी उम्मीदवार ममता बनर्जी के खिलाफ भवानीपुर सीट पर भारी जीत हासिल करने के बाद अपनी जीत का चित्र दिखाया। उन्होंने कहा, ‘ममता बनर्जी को हराना बहुत जरूरी था। यह ममता बनर्जी की राजनीतिक नियुक्ति है। इस बार भी उन्हें 15,000 से ज्यादा की बढ़ोतरी का नुकसान हुआ। कैटरीना ने उन्हें दिल से वोट दिया। वार्ड क्रमांक 77 में वोट देने आये सभी दादी ने ममता को वोट दिया। आस्था, सिखों, जैनों और बौद्धों ने मुझे आशीर्वाद दिया और जिताया। यह ‘यूनिवर्सिटी की जीत है।’ सीपीएम सपोर्टर्स ने मुझे वोट दिया: शुभेंदु अधिकारी उन्होंने कहा, ‘सीपीएम के सभी मजबूत समर्थकों ने मुझे वोट दिया. भवानीपुर में सीपीएम को 13,000 वोट मिले और उन्हें कम से कम 10,000 मिले। मैं वहां के सीपीएम वोटर्स का भी शुक्रिया अदा करता हूं। सभी बंगाली आदिवासियों ने मुझे दिल से वोट दिया। उनके साथ, गुजरातियों, जैनों, मारवाड़ियों, पंथियों और सिख समुदाय ने भी मुझे दिल से वीडियो वोट दिया।’ शुभेंदु अधिकारी ने कहा, ‘केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुझे दो-तीन बार फोन किया. उन्होंने स्पष्ट रूप से भी भवानीपुर को लेकर कुछ चिंता व्यक्त की। मैंने उन्हें कुछ समय पहले बताया था. मैंने किसी और से बात नहीं की है. फ़ोन मुझे इस्तेमाल करने की इज़ाफ़ा नहीं था. मैं अभी उनका सुझाव देने जा रहा हूं। वह इंतज़ार कर रहे हैं. मुझे नंदीग्राम आश्रम भी लेना है।’ देहरादून के गढ़ में बीजेपी ने बनाया सेंध भवानीपुर सीट लंबे समय से मंदिर का गढ़ बनी हुई है। इस चुनाव में ममता बनर्जी की हार को देखें तो यह कुछ-कुछ 2021 विधानसभा चुनाव की तरह है। 2021 विधानसभा चुनाव में भी ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट से हार का सामना करना पड़ा था। यहां से ममता बनर्जी को शुभेंदु अधिकारी ने हराया था. ममता बनर्जी के लिए शुभेंदु के हाथ मिल गए, इस कारण भी बड़ी बात यह थी कि एक समय अधिकारी ममता बनर्जी के खास सहयोगी शामिल थे। फिर, नंदीग्राम आंदोलन हो या सिंगूर में आंदोलन के माध्यम से ममता बनर्जी का समर्थन किया गया, लेकिन समय गुजरा और ममता बनर्जी से शुभेंदु अधिकारी ने अलग रास्ता अपनाया और भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। लगातार दो चुनाव में ममता बनर्जी की हुई हार खास बात ये है कि किकांस्टीन के दो राजनेताओं में शहीद सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को शुभेंदु अधिकारी के हाथों हार का सामना करना पड़ा। 2021 में नंदीग्राम में मिली हार के बाद ममता बनर्जी ने भवानीपुर का रुख किया और यहां के अखाड़े में जीत हासिल कर सत्य की बागडोर संभाली। इस बार के चुनाव में एक बार फिर शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के साथ ही भवानीपुर से अपनी उम्मीदवारी का ऐलान कर दिया. नतीजों से पहले ही बीजेपी नेता लगातार दावा कर रहे थे कि वे भवानीपुर से जीतेंगे और उनका दावा 4 मई की देर शाम को हकीकत में बदल गया। ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजे 2026: बंगाल में बीजेपी को प्रचंड बहुमत, किन रेस पर टीएमसी की जीत, बीजेपी ने दी पटखनी (टैग अनुवाद करने के लिए)ममता बनर्जी(टी)सुवेंदु अधिकारी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम 2026(टी)क्या ममता बनर्जी ने अपनी सीट जीती(टी)ममता बनर्जी किस निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रही हैं(टी)ममता बनर्जी निर्वाचन क्षेत्र परिणाम(टी)भबानीपुर चुनाव परिणाम(टी)भबानीपुर सीट किसने जीती(टी)ममता बनर्जी बनाम सुवेंदु अधिकारी(टी)सुवेंदु(टी)ममता(टी)ममता बनर्जी समाचार(टी)ममता बनर्जी सीट(टी)ममता बनर्जी सीट(टी)भवानीपुर(टी)शुभेंदु अधिकारी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम 2026

बंगाल में 15 साल की ममता सरकार का सूरज अस्त… इन 5 हिस्सों के साथ गंगासागर में डूबा टीएमसी का जहाज

बंगाल में 15 साल की ममता सरकार का सूरज अस्त... इन 5 हिस्सों के साथ गंगासागर में डूबा टीएमसी का जहाज

पश्चिम बंगाल में टीएमसी सरकार को गिराने वाले पांच कारक: ममता बनर्जी की 15 साल की राजनीति बंगाल में छाई हुई है। उनकी किलाबीज ने थरशाही बनाई है। 4 मई 2026 यानी सोमवार को बंगाल समेत देश के अन्य राज्यों से विधानसभा चुनाव के सपने ने अब तस्वीरें साफ कर दी हैं। बंगाल में बीजेपी और बिल्डर के बीच कांटे की टक्कर थी. इस दौरान खुद मोदी, अमित शाह समेत कई पार्टी के बड़े नेता राज्य सरकार में जोरशोर से प्रचार में जुटे थे. बंगाल चुनाव में पिछड़ी धरती की हार के कई फैक्टर रह रहे हैं. इनमें से जो सबसे बड़ा किरदार उभर कर सामने आया है, उसमें आरजीकर इवेंट के बाद महिला सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवाल सबसे अहम है। (ये पांच बड़े फैक्टर ले डूबे टीमस को…) आरजीकर मामला पूरे देश के सामने ममता सरकार को बैकफुट पर लाया गया ममता सरकार पूरे देश के सामने उस समय बैकफुट पर आई, जब आरजीकर मेडिकल कॉलेज की घटना ने सभी को हिलाकर रख दिया। यहां कोलकाता के एक सरकारी अस्पताल में 9 अप्रैल 2024 को एक महिला ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप और हत्या कर दी गई। इस दौरान राज्य में सुरक्षा से लेकर सुरक्षा तक पहुंची महिला एक बड़ा मोर्चा में शामिल हो गई। घटना 9 अगस्त 2024 की रात को हुई थी, और 31 साल की महिला डॉक्टर का शव मिला था। इस मामले में किशोरी से यौन शोषण और हत्या की पुष्टि हुई थी। शहरी अस्पताल में नियुक्त संजय रॉय निकले, जो अस्पताल में पुलिस की सहायता के लिए नियुक्त थे। इस केस की वास्तुकला को देखते हुए कोलकाता उच्च न्यायालय ने चक्के को चकमा दिया। बुज़ुर्ग को सियालदाह कोर्ट ने 18 जनवरी 2025 को दोषी करार दिया। साथ ही कलाकार की सजा सुनाई गई। इस घटना के दौरान ममता सरकार पर आतंकी हमले का भी आरोप लगा। बीजेपी ने इस मुद्दे को उठाया और साथ ही सुपरस्टार की मां को अपनी पार्टी में शामिल करने की अपील की, बीजेपी ने पानीहाटी क्षेत्र से चुनावी दावेदारी बनाई है। चुनाव में नजर आया सर का असर? बंगाल में चुनाव आयोग ने एस मजबूत प्रक्रिया को अंजाम दिया। इस दौरान सूची से कई तालाबों के नाम का विवरण नीचे दिया गया है। इसकी वजह उनका नाम दो जगह दर्ज थे, या वो राज्य के वोटर नहीं थे. साथ ही मरा हुआ लैपटॉप का नाम भी हटा दिया गया. इसका ममता बनर्जी ने विरोध किया. सुप्रीम कोर्ट में डाक बंगले की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। इस दौरान पूरे राज्य से 90 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए। बांग्लादेशी लोग भी बंगाल चुनाव में वापस अपने घर चले गए। बांग्लादेश और भारत सीमा में बड़ी संख्या में भी देखे गए थे. इनके पास अपना दस्तावेज़ दस्तावेज़ीकरण का कोई ठोस दस्तावेज़ नहीं था। बंगाल में हिंदू वोट दिया गयाइस बार बंगाल चुनाव में हिंदू वोटों ने बीजेपी को समर्थन दिया है. जिन्होंने ममता सरकार को इस चुनाव में पटखनी देने में अहम भूमिका निभाई। पिछले कुछ वर्षों में पूर्वी राज्य में हिंदू महिलाओं के साथ अभद्रता की फसल गर्म हो रही थी। बौद्ध धर्म में एक डर का सांता भी राज्य में देखा गया। ममता सरकार में सभी मुसलमानों को रोक नहीं पाई, और भाजपा को हिंदू वोटर्स ने इस बार एकजुटता से वोट दिया। इस बार बीजेपी ने जोर शोर से इक्विटी का भंडार उठाया। ये भी पढ़ें: भवानीपुर चुनाव परिणाम 2026 लाइव: भवानीपुर विधानसभा सीट पर टीएमसी की ममता बनर्जी आगे, जानिए कितने अंकों से बनी बढ़त ममता का नहीं चला मुस्लिम कार्डइस बार के चुनाव में इस्लामिक लोगों की हार का सबसे बड़ा कारण मुस्लिम लोगों का शामिल होना है। यह असम्बद्ध कई बार राज्य में नजर आया। इस दोस्त के बीच भी उनकी छवि को धक्का लगा। इसी दौरान बांग्लादेश का असर भी बांग्लादेश के मन में बैठ गया। बंगाल में हिंदू वोटर्स इस बार साइलेंट रह रहे हैं और आज के नतीजों में कुछ न कुछ सबके सामने है। इसके अलावा बंगाल के मुर्शिदाबाद और मालदा में भी दंगे भड़क उठे। इस दौरान राज्यपाल भी अल्ट्रासाउंड से मिलीं, लेकिन ममता बनर्जी सरकार ने चार कदमों पर कार्रवाई नहीं की. इसी वजह से पूरा हिंदू समाज विरोध प्रदर्शन कर रहा है. राज्य में साबूत और एंटी इंकंबेसी ने पकड़ मजबूत की15 प्राचीन से सत्य पर मान्यता प्राप्त सरकार में बंधकों का प्रमुख स्थान बना हुआ है। यहां राशन घोटाला, भर्ती घोटाले के कई आरोप सरकार पर लगे। राशन कंपनी में 9 हजार से 10 हजार करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। इसके अलावा सचिवालय और भर्ती प्रक्रिया में भारी मात्रा में रिश्वत नौकरी देने के आरोप लगे थे। सभी के जीवित राज्य सरकार के खिलाफ बंगाल में बदलाव का मूड था। ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम 2026 लाइव: रुझानों में बीजेपी को बहुमत, ममता बनर्जी ने मानी हार, कहा- ‘अंतिम समय तक…’ (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल परिणाम(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 परिणाम(टी)कोलकाता (टी)पश्चिम बंगाल में टीएमसी को बड़ी हार(टी)ममता बनर्जी(टी)पश्चिम बंगाल में बीजेपी की मार्जिन जीत(टी)बंगाल में टीएमसी की हार के पांच कारक(टी)ताजा समाचार(टी)अपडेट समाचार(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे(टी)कोलकाता(टी)पश्चिम बंगाल में टीएमसी को भारी नुकसान(टी)ममता बनर्जी(टी)पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत का अंतर(टी)बंगाल में टीएमसी की हार का पांचवां कारण(टी)ताजा खबरें(टी)अपडेटेड खबरें