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गठिया रोग में क्या खाएं और क्या नहीं? एक्सपर्ट ने बताए जरूरी खानपान और लाइफस्टाइल टिप्स

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अंबाला: बढ़ती उम्र के साथ जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न की समस्या तेजी से बढ़ रही है. खासकर गठिया (आर्थराइटिस) के मरीजों में यह परेशानी आम होती जा रही है. दर्द से तुरंत राहत पाने के लिए कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक पेन किलर दवाइयों का सेवन करने लगते हैं. लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत शरीर के लिए गंभीर नुकसान का कारण बन सकती है. लगातार पेन किलर लेने से किडनी पर बुरा असर पड़ सकता है और अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है.

गठिया रोग के कारण धीरे-धीरे जोड़ों की कार्यक्षमता कम होने लगती है और मरीज को चलने-फिरने, सीढ़ियां चढ़ने और रोजमर्रा के सामान्य काम करने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ता है. ऐसे में लोग दर्द से राहत पाने के लिए दवाइयों का सहारा लेते हैं, लेकिन बिना चिकित्सकीय सलाह के इनका अधिक सेवन भविष्य में नई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है.

पेन किलर दवाओं से नुकसान

इस बारे में लोकल 18 को अधिक जानकारी देते हुए अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में कार्यरत होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रजिता ने बताया कि जोड़ों में दर्द और सूजन की समस्या में पेन किलर दवाओं का अत्यधिक उपयोग खतरनाक साबित हो सकता है. उन्होंने कहा कि इन दवाइयों का लगातार सेवन किडनी पर दुष्प्रभाव डालता है और शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है.

होम्योपैथिक में गठिया रोग का बेहतर इलाज

डॉ. रजिता ने बताया कि होम्योपैथिक पद्धति में गठिया रोग का बेहतर इलाज संभव है. मरीज के शरीर में होने वाले बदलावों और लक्षणों की जांच के बाद कुछ समय में इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को रोज सुबह बिस्तर से उठते समय शरीर में जकड़न महसूस होती है या चलने-फिरने में परेशानी आती है, तो उसे तुरंत जांच करवानी चाहिए. ब्लड टेस्ट के जरिए यूरिक एसिड और गठिया रोग की स्थिति का पता लगाया जा सकता है.

उन्होंने यह भी बताया कि लंबे समय तक खड़े रहने पर पैरों में सूजन और दर्द होना भी गठिया का संकेत हो सकता है. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि समय रहते उपचार शुरू करने से बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है.

गठिया के मरीज इन चीजों से बनाएं दूरी

खानपान को लेकर भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए. उन्होंने कहा कि गठिया रोग से पीड़ित मरीजों को चावल, राजमा, चने और कढ़ी जैसी चीजों का सेवन कम करना चाहिए. इसके अलावा दूध और अधिक प्रोटीन वाली चीजों का उपयोग भी सीमित मात्रा में करना चाहिए. वहीं, हरी सब्जियां और काली मिर्च का सेवन मरीजों के लिए लाभकारी माना गया है.

साथ ही गठिया रोग के मरीजों को अपनी जीवनशैली में बदलाव लाना बेहद जरूरी है. नियमित योग और हल्का व्यायाम शरीर को सक्रिय रखने में मदद करता है. साथ ही नॉनवेज के अत्यधिक सेवन से भी बचना चाहिए.

होम्योपैथिक उपचार

उन्होंने बताया कि होम्योपैथिक उपचार में अर्निका, रस टॉक्स, लेडम पाल और ब्रायोनिया जैसी दवाइयां मरीज की स्थिति के अनुसार दी जाती हैं. उपचार के दौरान मरीज की पुरानी मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक-मानसिक स्थिति को ध्यान में रखा जाता है.

क्या है इलाज

विशेषज्ञों का मानना है कि गठिया के मरीजों को बिना सलाह लंबे समय तक पेन किलर लेने से बचना चाहिए. संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और समय पर सही इलाज के जरिए इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.

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गठिया रोग के कारण धीरे-धीरे जोड़ों की कार्यक्षमता कम होने लगती है और मरीज को चलने-फिरने, सीढ़ियां चढ़ने और रोजमर्रा के सामान्य काम करने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ता है. ऐसे में लोग दर्द से राहत पाने के लिए दवाइयों का सहारा लेते हैं, लेकिन बिना चिकित्सकीय सलाह के इनका अधिक सेवन भविष्य में नई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है.

पेन किलर दवाओं से नुकसान

इस बारे में लोकल 18 को अधिक जानकारी देते हुए अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में कार्यरत होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रजिता ने बताया कि जोड़ों में दर्द और सूजन की समस्या में पेन किलर दवाओं का अत्यधिक उपयोग खतरनाक साबित हो सकता है. उन्होंने कहा कि इन दवाइयों का लगातार सेवन किडनी पर दुष्प्रभाव डालता है और शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है.

होम्योपैथिक में गठिया रोग का बेहतर इलाज

डॉ. रजिता ने बताया कि होम्योपैथिक पद्धति में गठिया रोग का बेहतर इलाज संभव है. मरीज के शरीर में होने वाले बदलावों और लक्षणों की जांच के बाद कुछ समय में इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को रोज सुबह बिस्तर से उठते समय शरीर में जकड़न महसूस होती है या चलने-फिरने में परेशानी आती है, तो उसे तुरंत जांच करवानी चाहिए. ब्लड टेस्ट के जरिए यूरिक एसिड और गठिया रोग की स्थिति का पता लगाया जा सकता है.

उन्होंने यह भी बताया कि लंबे समय तक खड़े रहने पर पैरों में सूजन और दर्द होना भी गठिया का संकेत हो सकता है. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि समय रहते उपचार शुरू करने से बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है.

गठिया के मरीज इन चीजों से बनाएं दूरी

खानपान को लेकर भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए. उन्होंने कहा कि गठिया रोग से पीड़ित मरीजों को चावल, राजमा, चने और कढ़ी जैसी चीजों का सेवन कम करना चाहिए. इसके अलावा दूध और अधिक प्रोटीन वाली चीजों का उपयोग भी सीमित मात्रा में करना चाहिए. वहीं, हरी सब्जियां और काली मिर्च का सेवन मरीजों के लिए लाभकारी माना गया है.

साथ ही गठिया रोग के मरीजों को अपनी जीवनशैली में बदलाव लाना बेहद जरूरी है. नियमित योग और हल्का व्यायाम शरीर को सक्रिय रखने में मदद करता है. साथ ही नॉनवेज के अत्यधिक सेवन से भी बचना चाहिए.

होम्योपैथिक उपचार

उन्होंने बताया कि होम्योपैथिक उपचार में अर्निका, रस टॉक्स, लेडम पाल और ब्रायोनिया जैसी दवाइयां मरीज की स्थिति के अनुसार दी जाती हैं. उपचार के दौरान मरीज की पुरानी मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक-मानसिक स्थिति को ध्यान में रखा जाता है.

क्या है इलाज

विशेषज्ञों का मानना है कि गठिया के मरीजों को बिना सलाह लंबे समय तक पेन किलर लेने से बचना चाहिए. संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और समय पर सही इलाज के जरिए इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.

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